06-03-2019, 04:02 AM
हम लोग 2nd फ्लोर पर हमारे रूम के बाहर पहुँच गए . उस रूम बॉय ने दरवाजा खोल दिया और हमारे बैग वो अंदर ले गया . जैसे कोई सेवक किसी महारानी के आगे झुक के , हाथ हिला के उसे अंदर जाने का इशारा करता है वैसे मैंने संगीता दीदी को रूम के अंदर चलने का इशारा किया . मेरा वैसा करना उसे काफी मनोरंजक लगा और वो हँसते हँसते रूम के अंदर चली गयी . उतने में रूम बॉय बाहर आया . मैंने उसके हाथ में पचास रुपये थमा दिए और फिर मैं रूम के अंदर गया . ये लक्जरी रूम बहुत ही सुन्दर था . दरवाजे से अंदर आने के बाद एक पैसेज था और दायें बाजू में बाथरूम था . पैसेज से आगे आने के बाद में रूम था . रूम के बीच में डबलबेड था . एक बाजू में ड्रेसिंग टेबल था . कोने में एक चेयर थी . एयरकंडीशंड होने की वजह से रूम ठंडा लग रहा था . कुल मिला के वो रूम बहुत ही अच्छी तरह से डेकोरेट किया हुआ था . अंदर आने के बाद संगीता दीदी हैरानगी से रूम को निहार रही थी . उसकी आँखों की चमक और चेहरे का खिलापन बता रहा था कि उसे रूम बेहद पसंद आया था .
"कितना खूबसूरत रूम है ये , सागर ! मैं पहली बार ऐसा रूम देख रही हूँ . इस रूम का भाड़ा तो थोड़ा महंगा ही होगा . नहीं ?" ऐसा कहते हुए संगीता दीदी बेड पर बैठ गयी .
"हाँ !. लेकिन मेरी प्यारी दीदी की खुशी से तो ज्यादा नहीं है !." मैंने उसकी नाक को हलके से पकड़ कर शरारती अंदाज में कहा और उसके बाजू में बैठ गया .
"ओहो , रियली ?. तो फिर बता मुझे कि कितना भाड़ा है इस रूम का जो तुम्हारे दीदी की खुशी से कम है ?" उसने भी मेरे ही जैसे शरारती अंदाज़ में कहा .
"ज्यादा नहीं , दीदी . एक दिन का सिर्फ तीन हज़ार रूपया !"
"तीन हज़ार ?" संगीता दीदी तकरीबन चिल्लाकर बोली , "और ये भाड़ा ज्यादा नहीं है ? तुम पागल तो नहीं हो गए हो ? क्या है ये सागर ? इतना महंगा रूम लेने की जरूरत क्या थी ? कोई भी रूम चल जाता ."
"ये देखो , दीदी ! तुम पहली बार इस तरह की रोमांटिक जगह पर आई हो तो यहाँ बिताया हुआ हर पल तुम्हें जिंदगी भर याद रहना चाहिए . और उस के लिए तुम्हें सभी फर्स्ट क्लास चीजों का आनंद लेना चाहिए ऐसा मुझे लगता है और सही मायनों में मेरी लाडली बहन को एकदम कम्फर्टेबल और रिलैक्स फील करना चाहिए ऐसा मुझे लगा इसलिए मैंने इतना महंगा रूम ले लिया ."
"कितना खूबसूरत रूम है ये , सागर ! मैं पहली बार ऐसा रूम देख रही हूँ . इस रूम का भाड़ा तो थोड़ा महंगा ही होगा . नहीं ?" ऐसा कहते हुए संगीता दीदी बेड पर बैठ गयी .
"हाँ !. लेकिन मेरी प्यारी दीदी की खुशी से तो ज्यादा नहीं है !." मैंने उसकी नाक को हलके से पकड़ कर शरारती अंदाज में कहा और उसके बाजू में बैठ गया .
"ओहो , रियली ?. तो फिर बता मुझे कि कितना भाड़ा है इस रूम का जो तुम्हारे दीदी की खुशी से कम है ?" उसने भी मेरे ही जैसे शरारती अंदाज़ में कहा .
"ज्यादा नहीं , दीदी . एक दिन का सिर्फ तीन हज़ार रूपया !"
"तीन हज़ार ?" संगीता दीदी तकरीबन चिल्लाकर बोली , "और ये भाड़ा ज्यादा नहीं है ? तुम पागल तो नहीं हो गए हो ? क्या है ये सागर ? इतना महंगा रूम लेने की जरूरत क्या थी ? कोई भी रूम चल जाता ."
"ये देखो , दीदी ! तुम पहली बार इस तरह की रोमांटिक जगह पर आई हो तो यहाँ बिताया हुआ हर पल तुम्हें जिंदगी भर याद रहना चाहिए . और उस के लिए तुम्हें सभी फर्स्ट क्लास चीजों का आनंद लेना चाहिए ऐसा मुझे लगता है और सही मायनों में मेरी लाडली बहन को एकदम कम्फर्टेबल और रिलैक्स फील करना चाहिए ऐसा मुझे लगा इसलिए मैंने इतना महंगा रूम ले लिया ."
जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
भीड़ है क़यामत की फिर भी हम अकेले हैं.
