06-08-2020, 12:15 PM
![[Image: dnnkcfpvwp-1469486831.jpg]](https://d1u4oo4rb13yy8.cloudfront.net/article/dnnkcfpvwp-1469486831.jpg)
जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
भीड़ है क़यामत की फिर भी हम अकेले हैं.

जिनके उपन्यास पाकिस्तान में ही नहीं भारत में भी ब्लैक में बिका करते थे
|
« Next Oldest | Next Newest »
|