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Adultery बीवी की पार्टी
#59
राजेश अपने से लगभग १५ साल छोटी औरत को पूरा नंगा देखकर अपना अप खो बैठा और रेनू के उपर टूट पड़ा. अब मैं एक किनारे बैठकर मेरी बीवी और मेरे पडोसी की काम लीला देख रहा था. राजेश सर से पांव तक मेरी बीवी को चूम चाट रहा था और रेनू उत्तेजना से पागल हुई जा रही थी. मुझे ये देख कर अच्छा लग रहा था.

वैसे तो मैंने उसे पहले भी राजेश से चुदते देखा था पर वो काफी दूरी से था और रेनू को पता भी नही था की मैं देख रहा हूँ. पर आज मैं सोच रहा था की मेरे कमरे में होते हुए आज जब राजेश उसे चोदेगा तो उसे कैसा लगेगा.


इधर राजेश और रेनू के रसभरे होंठ मिल गये थे और राजेश रेनू का सर पकड़ कर रेनू के होठों को चूसना शुरू कर दिया था. रेनू की आँखे बंद थीं. उसने जैसे ही राजेश की मूछें अपने मुह पर महसूस की तो उसने आँख खोली और मुझे उनकी तरफ देखते हुए  पाया. वह थोड़ी छटपटाई और मुंह हटाने लगी पर राजेश ने उसका सर कस के पकड़ा था.

वह हिल न पायी और तब मैंने उससे कहा "परेशान मत हो. बस राजेश का पूरा साथ दो" और फिर वो राजेश के किस में उसका साथ देने लगी. मेरी बीबी मेरे पडोसी को लिपट कर किस कर रही थी. रेनू ने जब देखा की वह उसकी जीभ को भी चूसना चाहता था तब रेनू ने राजेश के मुंह में अपनी जीभ को जाने दिया.

राजेश मेरी बीबी को ऐसे किस कर रहा था जैसे वह अब उसे नहीं छोड़ेगा. रेनू साँस नहीं ले पा रही थी. उसने अपना मुंह राजेश के मुंह से हटाया और जोरों से सांस लेने लगी. उसका मुंह राजेश की और था. मैं उस के पीछे लेटा था. उसने एकबार फिर राजेश के होंठ से अपने होंठ मिलाये और अब वह और जोश से राजेश को किस करने लगी. राजेश और मेरी बीबी ऐसे किस कर रहे थे जैसे दो प्रेमी सालों के बाद मिले हों.

रेनू के दोनों हाथ राजेश के सर को अपनी बाँहों में लिए हुए थे. राजेश ने भी मेरी बीबी को कमर से कस के अपनी बाँहों में जकड़ा हुआ था. मेरा लण्ड भी एकदम कड़क हो गया था. मैंने भी रेनू को पीछे से मेरी बाहोँ में जकड़ा और मेरी बीबी की दोनों चुन्चियो को अपने दोनों हाथों में पकड़ कर मसलना शुरू किया.

हम तीनों पलंग पर लेटे हुए थे. मैंने फिर मेंरे कड़े लण्ड को मेरी बीबी की गांड में डालना चाहा. मैं उसे पीछे से धक्का दे रहा था. इस कारण वह राजेश में घुसी जा रही थी.

अब राजेश ने रेनू का हाथ पकड़ कर अपने दोनों पांव के बीच अपने लण्ड पर रख दिया और ऊपर से रेनू के हाथ को जोरों से अपने लण्ड ऊपर दबाने लगा. मेरे पीछे से धक्का देने के कारण रेनू के बहुत कोशिश करने पर भी वह वहां से हाथ जब हटा नहीं पायी तब रेनू ने राजेश के लण्ड को अपने हाथों में पकड़ा. मैंने तब रेनू को पीछे से धक्का मारना बंद किया और मैं पीछे हट गया. अब रेनू चाहती तो अपना हाथ वहां से हटा सकती थी. परंतु मुझे यह दिख रहा था की रेनू ने अपना हाथ वहां से नहीं हटाया बल्कि धीरे धीरे मुठीयाने लगी.

वो आज फिर से राजेश के लण्ड की लंबाई और मोटाई नाप रही थी. मेरी बीवी जब राजेश के लण्ड की पैमाइश कर रही थी तब उसने रेनू के दोनों मम्मो को अपने दोनों हाथों में बड़ी मुश्किल समाते हुए रखा और बोला "रेनू इन चुन्चियो का कोई मुकाबला नहीं. मैंने कभी किसी भी औरत के इतने सुन्दर मम्मे नहीं देखे. मेरी बीव दिव्याके भी नहीं.

मैंने मेरी बीबी की तरफ देखा तो वह शर्म से लाल हो रही थी. उसे समझ नहीं आ रहा था की वह क्या करे. तब मेरी बीबी ने राजेश को अपनी और खींचा और उसके मुंह को अपने चुन्चियो में घुसा दिया. राजेश का मुंह बारी बारी कभी एक मम्मे को तो कभी दूसरे को जोर से चूसने लगा.

जब वह मेरी बीबी की एक चूंची को चूसता था तो दूसरे को जोर से दबाता और खींचता था और अपनी उँगलियों में रेनू की निप्पलों को जैसे चूंटी भर रहा हो ऐसे दबाता था. कई बार तो वह इतना जोर से दबा देता की रेनू के मुंह से टीस सी निकल जाती. तब वह राजेश को धीरे दबाने का इशारा करती.

जैसे ही राजेश रुका तो मुझे मौका मिल गया था. मैंने भी रेनू की सुडौल चुन्चियो को चूसना शुरू किया. फिर तो राजेश कहाँ रुकने वाला था? वह रेनू के दूसरे मम्मे को अपने मुंह में रख कर उसकी निप्पल को काटने लगा. रेनू के हाल का क्या कहना? उसकी जिंदगी में पहली बार उसके चुन्चियो को दो मर्द एक साथ चूस रहे थे.

रेनू इतनी गरम और उत्तेजित हो गयी थी की वह अपने आप को सम्हाल नहीं पा रही थी. अब तक जो मर्यादा का बांध उसके अपने मन में था अब वह टूटने लगा था. अपने चुन्चियो पर राजेश के मुंह के स्पर्श से ही अब वह पागल सी हो रही थी.

मैंने झुक कर प्यार से मेरी प्यारी बीबी के रसीले होठों पर किस किया. तब मेरी शर्मीली खूबसूरत बीबी ने अपनी आँखे खोली और और मेरी आँखों में आँखे डाल कर मुस्कुराई. उसने मेरा सर अपने दोनों हाथों में लेकर मेरे होंठ अपने होंठो पर दबा दिए और मेरे मुंह में अपनी जीभ डाल दी. राजेश ने जब हमारा आपस में प्रेमआलाप देखा तो वह भी मुस्कुराया. अब हम दोनों उसके दोनों और बैठ गए और उसकी चूचियों को चूसने लगे. रेनू ने हम दोनों को बड़े प्यार भरी नजर से देखा और फिर अपनी आँखें बंद करली.

मैं धीरे से उसकी नाभि और उसके पतले पेट का जो उभार था उसको प्यार से सहलाने लगा. मेरी बीबी मेरे स्पर्श से काँप उठी. मैंने मेरे हाथ रेनू की पीठ के नीचे डाल दिए और उसे धीरे से बैठाया. राजेश ने रेनू के दोनों चुन्चियो को ऐसे ताकत से पकड़ रखा था की जैसे वह उन्हें छोड़ना ही नहीं चाहता था. कभी वह उन्हें मसाज करता था तो कभी निप्पलों को अपनी उँगलियों में दबाता तो कभी झुक कर एक को चूसता और दूसरे को जोरों से दबाता.

रेनू अब इतनी कामोत्तेजित हो चुकी थी की  उससे अपने जिस्म को नियत्रण में रखना मुश्किल हो रहा था.

मैं देख रहा था की अब वह अपने कामोन्माद से एकदम बेबस लग रही थी. रेनू तब अपनी कमर और अपनी नीचे के बदन को उछालते हुए बोलने लगी, “मनीष, राजेश जल्दी करो, और चुसो जल्दी आह्ह्ह्ह्ह.. ओह्ह्ह्ह.. और दबाव ओओफ़फ़फ़."

तब मुझे लगा की वह अपनी चरम सीमा पर पहुँच रही थी. मैंने राजेश को इशारा किया और हम दोनों उसके मम्मों को और फुर्ती से दबाने और चूसने लगे.

जल्द ही मेरी बीवी एक दबी हुयी टीस और आह के साथ उस रात पहली बार झड़ गयी. उसकी साँसे तेज चल रहीं थी. थोड़ी देर के बाद उसने अपनी आँखें खोली और हम दोनों की और देखा.

उसके दो पांव के बीच में उसकी चूत  का उभार किसी भी शरीफ आदमी का ईमान खराब कर देने वाला था. उसकी चूत के होठ एकदम साफ़ और सुन्दर गुलाब की पंखुड़ियों की तरह थे और उनमें से जिस तरह रस चू रहा था वो  रेनू के हालात को बयाँ रहा था. राजेश ने आगे बढ़कर फिर से रेनू को अपनी बाहों में ले लिया. 

वह अपने हाथोँ से रेनू के नंगे बदन को सहला रहा था. उसके दोनोँ हाथ रेनू की पीठ में ऊपर नीचे हो रहे थे. कभी वह अपना हाथ रेनू के चूतड़ों के ऊपर रखता और रेनू की गाँड़ को दबाता, तो कभी अपनी उंगली को गांड के बीच की दरार में डालता था. राजेश ने मेरी बीबी को इस हालात में देखने की कल्पना बहुत समय से की थी. और आज एक हफ्ते में दुबारा मेरी बीवी का बदन उसका होने वाला था.

राजेश की दोनों टाँगे मेरी बीवी के ऊपर लिपटी हुयी थीं. मेरी बीबी उसमे जैसे समा गयी थी. राजेश का लण्ड रेनू की चूत पर रगड़ रहा था. ऐसे कड़क लण्ड को सम्हालना राजेश के लिए वास्तव में मुश्किल हो रहा होगा. रेनू और राजेश एक दुसरे के आगोश में किस कर रहे थे. रेनू ने एक हाथ में उसका लण्ड पकड़ रखा था. उसका दुसरा हाथ मेरी और बढ़ा और मेर लण्ड को पकड़ा.

मेरी बीबी तब एक हाथ में मेरा और दूसरे हाथ में राजेश का लण्ड पकड़ कर बड़े प्रेम से सहला रही थी. हम तीनों एक दूसरे को लिपटे हुए थे. रेनू बीच बीच में राजेश के अंडकोष को अपने हाथों से इतमे प्यार से सहलाती थी की मैं जानता था की उस समय राजेश का हाल कैसा हो रहा होगा. रेनू के हाथ में एक जादू था. वह मेरे एंडकोष को ऐसे सहलाती थी की मैं उस आनंद का कोई वर्णन कही कर सकता.

उधर राजेश और मेरी बीबी ऐसे चिपके थे जैसे अलग ही नहीं होंगे. रेनू भी राजेश की बाँहों मैं ऐसे समा गयी थी के पता ही नहीं चलता था के वह गयी कहाँ. राजेश के हाथ रेनू के नंगे पिछवाड़े को सहला रहे थे.
राजेश का हाथ बार बार रेनू के कूल्हों को दबाता रहता था और उसकी उँगलियाँ कूल्हों के बीच वाली दरार में बार बार घुस कर रेनू की गांड के छेद में घुसेड़ता रहता था.

इस से रेनू और उत्तेजित हो कर बोली राजेश जी ये आप  क्या कर रहे हैं? प्लीज मत आहहह.." रेनू की उत्तेजना उसकी धीमी सी कराहटों में मेहसूस हो रही थीं. अब रेनू इतनी गरम और उत्तेजित हो चुकी थी की वह कामोत्तेजना में कराह रही थी. उसने राजेश से अपने आप को अलग कर उसे अपनी टांगो के पास जाने का इशारा किया और उसका मुंह अपनी नाभि पर रखा. राजेश को और क्या चाहिए था. उसे मेरी बीवी का आदेश जो मिला था. उसने रेनू की पतली कमर पर अपना मुंह रख कर वह मेरी बीबी की नाभि को चाटने एवं चूमने लगा.

उसकी जीभ से लार रेनू के पेट पर गिर रही थी, वह उसे चाटकर रेनू के पेट पर अपना मुंह दबाकर उसे इतने प्यार से किस कर रहा था की मेरी बीबी की कामुक कराहटें रुकने का नाम ही नहीं ले रही थीं. अपना मुंह रेनू के पेट, नाभि और नीचे वाले उभार पर इतने प्यार से चूमने से मेरी बीबी की कामाग्नि की आग और तेज़ी से भड़क रही था. मैं मान गया की आज तक मैंने इतने सालों मे अपनी बीबी के बदन को इस तरह नहीं चूमा था.

उसका हाथ अनायास ही मेरी बीबी की चूत पर रुक गया. रेनू की चूत का उभार कितना सेक्सी है वह तो मैं जानता ही था. मुझे यह भी पता था की वहाँ हाथ रखने मात्र से मेरी बीवी कैसे फुदकती है. राजेश के वहां छूते ही रेनू अपने कूल्हों को गद्दे पर रगड़ने लगी और जब राजेश ने उसके छोटे छेद में अपनी उंगली डाली तो रेनू एकदम उछल पड़ी.

वह राजेश की उँगलियों को अपनी चूत के छेद से खेलते देख कर पगला सी गयी थी. राजेश ने जब रेनू की फुद्दी के दोनों होठों को चौड़ा कर के देखा तो कुछ सोच में पड़ गया और फिर बोल उठारेनू तुम्हारा छेद तो मैंने चौड़ा कर दिया था अब फिर से एकदम छोटा हो गया है."

मैं तो जानता था की मेरी बीबी को सेक्स के लिए तैयार करने का इससे बेहतर कोई रास्ता नहीं था. जब रेनू को चुदवाने के लिए तैयार करना होता है तब मैं उसकी चूत में प्यार से अपनी एक उंगली डाल कर धीरे धीरे रगड़ कर उसे चुदवाने के लिए मजबूर कर देता हूँ. मैंने ये बात राजेश को बताई थी जो आज वो अमल में ला रहा था.

राजेश बड़े प्यार से मेरी बीबी की चूत में अपनी उंगली को जगह रगड़ रहा था. रेनू एकदम पागल सी होकर चुदवाने के लिए बेबस हो रही थी. रेनू की बेबसी अब देखते ही बनती थी. राजेश के लगातार क्लाइटोरिस पर उंगली रगड़ते रहने से रेनू कामुकता भरी आवाज में कराहने लगी. जैसे जैसे रेनू की छटपटाहट और कामातुर आवाजें बढती गयी, राजेश अपनी उंगली उतनी ही ज्यादा फुर्ती से और रगड़ने लगा.

मेरी बीबी को अब मेरे वहाँ होने न होने से कोई फर्क नहीं पद रहा था. वो राजेश का हाथ पकड़ कर कहने लगी राजेश जी यह मत करो. मैं पागल हुयी जा रही हूँ. मैं अपने आप को रोक नहीं पा रही. आओ आप जल्दी से मुझ पर चढ़ जाओ और प्लीज मेरी चुदाई करो.

पर राजेश तो रुकने का नाम नहीं ले रहा था. उस रात जैसे उसने ठान ली थी की अब तो वह रेनू को अपनी बना कर ही छोड़ेगा. वह रेनू को इतना उत्तेजित करेगा की रेनू आगे भी सालों तक राजेश से चुदवाने के लिए तड़पती रहे.
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