14-07-2020, 01:06 PM
फिर राजेश रेनू की गान्ड के दोनो पाटों को पकड़ कर ज़ोर से मसल्ते हुए उसकी लोवर बॅक को चूमने चाटने लगता है. धीरे-धीरे राजेश रेनू की लोवर बॅक को चूमते चाटते रेनू की पीठ तक पहुँच जाता है.. जहाँ रेनू की ब्रा के स्ट्रॅप्स टूटे पड़े थे.. राजेश रेनू की ब्रा की कंडीशन देख कर फिर से मुस्कुराने लगता है.. राजेश रेनू की पीठ को चूमते हुए रेनू की गर्दन को चूमने लगता है जिस से रेनू अपनी गर्दन इधर उधरे करने लगती है.अब राजेश रेनू के बदन से उठ जाता है और रेनू की पेंटी को साइड से दोनो तरफ से पकड़ कर खींचने लगता है.
रेनू इस के लिए तैयार नहीं थी. राजेश के झटके से रेनू की पेंटी का एलास्टिक एक साइड से टूट जाता है और पेंटी घुटनो से थोड़ा सा उपर आकर अटक जाता है. रेनू अपनी पेंटी को पकड़ने के लिए अपना पेट थोड़ा सा उपर उठाती है ताकि वो अपने दोनो हाथ बाहर निकाल सके लेकिन राजेश इस बात का भी फ़ायदा उठा लेता है और रेनू की पेंटी को उसके दूसरे पैर से खींचता है जिस से रेनू की पेंटी का एलास्टिक दोनो पैरों के साइड से टूट जाता है. इसका मतलब ये हुआ कि अब वो पेंटी रेनू के किसी काम कि नही थी क्यूँ की अब वो रेनू की कमर पर रुकने के लायक ही नहीं बची थी.
राजेश कुछ देर तक रेनू के मादर जात नंगे बदन को देखता रहता है और रेनू अपनी आँख बंद करके अपने पैर सिकोड़ने लगती है. लेकिन राजेश रेनू का एक पैर पकड़ कर उसे फिर से सीधा कर देता है. राजेश फिर से रेनू की गुदाज गोरी चिट्टी गान्ड को घूर्ने लगता है. राजेश बहुत ही प्यार से उसकी गान्ड के दोनो पाटों को चूमता है..
राजेश: मुउववाह मुऊुआाहह..
रेनू राजेश के होंटो का स्पर्श अपनी नंगी गान्ड पर पाकर अपनी गांद को टाइट कर लेती है. रेनू के मूह से बहुत ही मादक सिसकारी निकल जाती है. अब राजेश रेनू को अचानक से सामने की तरफ घुमा देता है. उम्र में ज्यादा होने के बावजूद वो फिट था और उसकी ताक़त देखी जा सकती थी कि कैसे उसने एक खिलोने की तरह रेनू को कंधो से पकड़ कर पीठ के बल लिटा दिया. रेनू के हाथ उसके सर की तरफ होने से जैसे ही रेनू अपनी पीठ के बल लेट जाती है. रेनू के ब्रा जिसके हुक बिस्तर पर ज़ोर से गिरने से टूट गये थे अब वो भी रेनू की दूध जैसी मोटी चिकनी चुचियों का साथ छोड़ चुकी थी
राजेश एक-टक रेनू की चुचियों को घूर रहा था. रेनू को इस बात का एहसास होते ही कि उसकी चूंचिया एक गैर मर्द के सामने एक दम नंगी है वो उन्हे अपने हाथों से छिपाने की कोशिश करने लगती है. लेकिन रेनू के छोटे-छोटे हाथ अब रेनू की चूंचियो को पूरी तरह से छिपाने मे असमर्थ थे. राजेश रेनू को इस तरह से देख कर बुरी तरह से बोखला जाता है. राजेश क्या इस वक़्त कोई भी रेनू को इस तरह से देखता तो शायद ही खुद पर काबू कर पाता.
रेनू की आँखों में शर्म और हवस दोनो देखी जा सकती थी. जबकि राजेश की आँखों में बेतहाशा हवस देखी जा सकती थी. तभी राजेश अपनी हवस भरी आँखों से घूरते हुए रेनू से रिक्वेस्ट मे बोलता है..
राजेश: रेनू अपने हाथ हटाओ ना देखो इस मनमोहक दृश्य के लिए मे कब से तड़प रहा था.
रेनू इनकार मे अपनी गर्दन हिला देती है… इस वक़्त रेनू की आँखें बंद थी.
राजेश: रेनू एक बार मेरी तरफ देखो..
रेनू: फिर से ना मे गर्दन हिला देती है..
राजेश बड़े प्यार से रेनू के साइड मे बैठ कर रेनू के चेहरे को अपने दोनो हाथो से पकड़ कर उसके चेहरे के पास जाता है और फुसफुसाते हुए बोलता है..
राजेश: रेनू में जानता हूँ तुम भी मुझे पसंद करती हो. बस में चाहता हूँ कि तुम एक बार मेरी आँखों मे देखो. मैं इस लम्हे को तुम्हारा आशिक़ बनकर जीना चाहता हू.
रेनू इस के लिए तैयार नहीं थी. राजेश के झटके से रेनू की पेंटी का एलास्टिक एक साइड से टूट जाता है और पेंटी घुटनो से थोड़ा सा उपर आकर अटक जाता है. रेनू अपनी पेंटी को पकड़ने के लिए अपना पेट थोड़ा सा उपर उठाती है ताकि वो अपने दोनो हाथ बाहर निकाल सके लेकिन राजेश इस बात का भी फ़ायदा उठा लेता है और रेनू की पेंटी को उसके दूसरे पैर से खींचता है जिस से रेनू की पेंटी का एलास्टिक दोनो पैरों के साइड से टूट जाता है. इसका मतलब ये हुआ कि अब वो पेंटी रेनू के किसी काम कि नही थी क्यूँ की अब वो रेनू की कमर पर रुकने के लायक ही नहीं बची थी.
राजेश कुछ देर तक रेनू के मादर जात नंगे बदन को देखता रहता है और रेनू अपनी आँख बंद करके अपने पैर सिकोड़ने लगती है. लेकिन राजेश रेनू का एक पैर पकड़ कर उसे फिर से सीधा कर देता है. राजेश फिर से रेनू की गुदाज गोरी चिट्टी गान्ड को घूर्ने लगता है. राजेश बहुत ही प्यार से उसकी गान्ड के दोनो पाटों को चूमता है..
राजेश: मुउववाह मुऊुआाहह..
रेनू राजेश के होंटो का स्पर्श अपनी नंगी गान्ड पर पाकर अपनी गांद को टाइट कर लेती है. रेनू के मूह से बहुत ही मादक सिसकारी निकल जाती है. अब राजेश रेनू को अचानक से सामने की तरफ घुमा देता है. उम्र में ज्यादा होने के बावजूद वो फिट था और उसकी ताक़त देखी जा सकती थी कि कैसे उसने एक खिलोने की तरह रेनू को कंधो से पकड़ कर पीठ के बल लिटा दिया. रेनू के हाथ उसके सर की तरफ होने से जैसे ही रेनू अपनी पीठ के बल लेट जाती है. रेनू के ब्रा जिसके हुक बिस्तर पर ज़ोर से गिरने से टूट गये थे अब वो भी रेनू की दूध जैसी मोटी चिकनी चुचियों का साथ छोड़ चुकी थी
राजेश एक-टक रेनू की चुचियों को घूर रहा था. रेनू को इस बात का एहसास होते ही कि उसकी चूंचिया एक गैर मर्द के सामने एक दम नंगी है वो उन्हे अपने हाथों से छिपाने की कोशिश करने लगती है. लेकिन रेनू के छोटे-छोटे हाथ अब रेनू की चूंचियो को पूरी तरह से छिपाने मे असमर्थ थे. राजेश रेनू को इस तरह से देख कर बुरी तरह से बोखला जाता है. राजेश क्या इस वक़्त कोई भी रेनू को इस तरह से देखता तो शायद ही खुद पर काबू कर पाता.
रेनू की आँखों में शर्म और हवस दोनो देखी जा सकती थी. जबकि राजेश की आँखों में बेतहाशा हवस देखी जा सकती थी. तभी राजेश अपनी हवस भरी आँखों से घूरते हुए रेनू से रिक्वेस्ट मे बोलता है..
राजेश: रेनू अपने हाथ हटाओ ना देखो इस मनमोहक दृश्य के लिए मे कब से तड़प रहा था.
रेनू इनकार मे अपनी गर्दन हिला देती है… इस वक़्त रेनू की आँखें बंद थी.
राजेश: रेनू एक बार मेरी तरफ देखो..
रेनू: फिर से ना मे गर्दन हिला देती है..
राजेश बड़े प्यार से रेनू के साइड मे बैठ कर रेनू के चेहरे को अपने दोनो हाथो से पकड़ कर उसके चेहरे के पास जाता है और फुसफुसाते हुए बोलता है..
राजेश: रेनू में जानता हूँ तुम भी मुझे पसंद करती हो. बस में चाहता हूँ कि तुम एक बार मेरी आँखों मे देखो. मैं इस लम्हे को तुम्हारा आशिक़ बनकर जीना चाहता हू.


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