01-06-2020, 04:16 PM
एक दिन संडे का दिन था, सुबह के 7 बजे होंगे, मैं उठा और सीधे बाथरूम में सूसू करने चला गया लेकिन जल्दबाजी में दरवाजा लॉक करना भूल गया. मैं लंड बाहर निकाल कर सूसू कर ही रहा था कि अचानक गेट खुला और दीदी अन्दर आ गईं. मैं लंड हिलाता हुआ एक ओर हुआ और वो मेरे खड़े लंड को देखते हुए वापस चली गईं. मैं फिर से डर गया कि उनको लगा होगा कि मैंने यह जानबूझ किया है.. और वो फिर से चिल्लाएंगी.
मैं डरते हुए जाकर सो गया.. लेकिन मुझे नींद नहीं आ रही थी और डर भी लग रहा था. यही सब सोचते हुए 10 बज गए और मैं उठ गया.
अब तक सब कुछ नार्मल था. इस घटना को 4-5 दिन ही हुए होंगे कि फिर से एक घटना हो गई.
सुबह का वक़्त था, करीब 6 बजे थे. दीदी अपने कमरे में सोई थीं.. मैं सुसू करने उठा था. इस वक्त घर में बाकी सब भी सोये हुए थे. मैं बाथरूम से निकला, तो देखा कि दीदी के रूम की नाईट लैंप जल रहा था. मैंने ध्यान से देखा कि दीदी के स्तन दिख रहे थे और उनकी पैंटी भी कुछ दिख रही थी. मैं वहीं गेट पर खड़े होकर निहार रहा था कि तभी दीदी ने करवट ली और मुझे देख लिया.
मैं डरते हुए जाकर सो गया.. लेकिन मुझे नींद नहीं आ रही थी और डर भी लग रहा था. यही सब सोचते हुए 10 बज गए और मैं उठ गया.
अब तक सब कुछ नार्मल था. इस घटना को 4-5 दिन ही हुए होंगे कि फिर से एक घटना हो गई.
सुबह का वक़्त था, करीब 6 बजे थे. दीदी अपने कमरे में सोई थीं.. मैं सुसू करने उठा था. इस वक्त घर में बाकी सब भी सोये हुए थे. मैं बाथरूम से निकला, तो देखा कि दीदी के रूम की नाईट लैंप जल रहा था. मैंने ध्यान से देखा कि दीदी के स्तन दिख रहे थे और उनकी पैंटी भी कुछ दिख रही थी. मैं वहीं गेट पर खड़े होकर निहार रहा था कि तभी दीदी ने करवट ली और मुझे देख लिया.
जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
भीड़ है क़यामत की फिर भी हम अकेले हैं.
