21-02-2019, 10:18 AM
शाम को मैं छत पर टहल रहा था कि भाभी वहां आ गई।
“क्या बात है, आजकल तुम बहुत गुमसुम से रहने लगे हो?”
“नहीं … हां वो … ओह क्या बताऊ मैं…!”
“भैया मेरी कसम है तुझे … जो भी हो, अच्छा या बुरा… कह दो। मन हल्का हो जायेगा।”
“बात यह है कि भाभी … अब कैसे बताऊँ…”
“मैंने कसम दी है ना … चलो अपना मुँह खोलो…” शायद भाभी को मेरी उलझन मालूम थी।
“ओह कैसे कहूँ भाभी,… आप मुझे बहुत अच्छी लगने लगी हैं !”
“तो क्या हुआ … तुम भी देखो ना मुझे कितने अच्छे लगते हो, है ना?” भाभी की नजरें झुक गई।
“पर शायद… मैं आपको प्यार करने लगा हूँ…”
“ऐ … चुप… क्या कहते हो … मैं तुम्हारी भाभी हूँ…” सुनकर भाभी ने मुस्करा कर कहा
“कसम दी थी सो बता दिया … पर मैं क्या करू… मैं जानता हूँ कि तुम मेरी भाभी…”
“भैया, अपने मन की कहूँ… प्यार तो मैं भी तुम्हे करती हूँ” भाभी ने भी झिझकते हुये कहा।
“क्या कहती हो भाभी …”
भाभी ने धीरे से मेरे सीने पर अपना सर रख दिया… मेरी सांसें तेज हो उठी। तभी भाभी मुड़ कर तेजी से भाग कर सीढ़ियाँ उतर गई। मैं भौचक्का सा उन्हें देखता रह गया। यह क्या हो गया ? भाभी भी मुझसे प्यार करती हैं !!! और फिर बड़े भैया ? सभी कुछ गड-मड हो रहा था। मैं छत से नीचे उतर आया। भाभी मुझे देख कर खुशी से बार बार मुस्करा रही थी जैसे उनकी कोई मन की मुराद पूरी हो गई हो। मैं चुपचाप अपने कमरे में चला आया। कुछ ही देर में भाभी भी वहीं पर आ गई। मैं बिस्तर पर लेटा हुआ था, भाभी मेरे पास बैठ कर मेरे बालों को सहलाने लगी।
“क्या बात है, आजकल तुम बहुत गुमसुम से रहने लगे हो?”
“नहीं … हां वो … ओह क्या बताऊ मैं…!”
“भैया मेरी कसम है तुझे … जो भी हो, अच्छा या बुरा… कह दो। मन हल्का हो जायेगा।”
“बात यह है कि भाभी … अब कैसे बताऊँ…”
“मैंने कसम दी है ना … चलो अपना मुँह खोलो…” शायद भाभी को मेरी उलझन मालूम थी।
“ओह कैसे कहूँ भाभी,… आप मुझे बहुत अच्छी लगने लगी हैं !”
“तो क्या हुआ … तुम भी देखो ना मुझे कितने अच्छे लगते हो, है ना?” भाभी की नजरें झुक गई।
“पर शायद… मैं आपको प्यार करने लगा हूँ…”
“ऐ … चुप… क्या कहते हो … मैं तुम्हारी भाभी हूँ…” सुनकर भाभी ने मुस्करा कर कहा
“कसम दी थी सो बता दिया … पर मैं क्या करू… मैं जानता हूँ कि तुम मेरी भाभी…”
“भैया, अपने मन की कहूँ… प्यार तो मैं भी तुम्हे करती हूँ” भाभी ने भी झिझकते हुये कहा।
“क्या कहती हो भाभी …”
भाभी ने धीरे से मेरे सीने पर अपना सर रख दिया… मेरी सांसें तेज हो उठी। तभी भाभी मुड़ कर तेजी से भाग कर सीढ़ियाँ उतर गई। मैं भौचक्का सा उन्हें देखता रह गया। यह क्या हो गया ? भाभी भी मुझसे प्यार करती हैं !!! और फिर बड़े भैया ? सभी कुछ गड-मड हो रहा था। मैं छत से नीचे उतर आया। भाभी मुझे देख कर खुशी से बार बार मुस्करा रही थी जैसे उनकी कोई मन की मुराद पूरी हो गई हो। मैं चुपचाप अपने कमरे में चला आया। कुछ ही देर में भाभी भी वहीं पर आ गई। मैं बिस्तर पर लेटा हुआ था, भाभी मेरे पास बैठ कर मेरे बालों को सहलाने लगी।
जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
भीड़ है क़यामत की फिर भी हम अकेले हैं.
