Thread Rating:
  • 0 Vote(s) - 0 Average
  • 1
  • 2
  • 3
  • 4
  • 5

Misc. Erotica स्वीटी नहीं जूली को चोद
#4

अब मुझे लग रहा था वह आएगा। मैं तैयार थी। मगर वह देरी करके मुझे तड़पा रहा था। वह मुझे चूमते हुए नीचे खिसक रहा था। नाभि से नीचे। कूल्हों की हडिडयों के बीच, नर्म मांस पर। वहाँ उसने हौले से दांत गड़ा दिए। मैं पागल हो रही थी। वह और नीचे खिसका। नीचे के बालों की शुरूआत पर।



अरे उधर कहाँ। मैंने रोकना चाहा। मगर विरोध की सभावना कहां थी। सहना मुश्किल हो रहा था। वह उन बालों को चाट रहा था और बीच बीच में उन्हें मुँह में लेकर दांतों से खींच रहा था। फिर उसने पूरे उभार के मांस को ही मुँह फाड़कर भीतर लेते हुए उसमें दांत गड़ा दिये। मेरे मुंह से सिसकारी निकल गई। दर्द और पीड़ा की लहर एक साथ। ओह ओह। अरे यह क्या! मुझे कटाव के शिखर पर उसकी सरकती जीभ का एहसास हुआ। मैंने जांघों को सटाकर उसे रोकना चाहा। मगर वह मेरे विरोध की कमजोरी को जानता था। उसने कुछ जोर नहीं लगाया, सिर्फ ठहर गया। मैंने खुद ही अपनी टांगें फैला दी। वह मेरी फाँक को चाटने लगा। कभी वह उसे चूसता कभी चाटता। कभी जीभ की नोक नुकीली और कडी क़रके कटाव के अंदर घुसाकर ऊपर से नीचे तक जुताई करता। कभी जीभ सांप की तरह सरकती कभी दबा दबा कर अपनी खुरदरी सतह से रगड़ती।

उसके तरकस में तीरों की कमी नहीं थी। पता नहीं किस किस तरह से वह मुझे पागल और उत्तेजित किए जा रहा था। अभी वो जीभ चौड़ी करके पूरे कटाव को ढकते हुए उसमें उतरकर चाट रहा था। मेरे दोनों तरफ के होंठ फैलकर संतरे की फांक की तरह फूल गए थे। वह उन्हें बारी बारी से मुँह में खींचकर चूस रहा था, उन पर अपने दांत गड़ा दिए। दांत का गड़ाव से दर्द और दर्द पर उमड़ती आनंद की लहर में मैं पछाड़ खाने लगी। मेरा रस बह बह कर निकल रहा था और वह उसके चूसते मुँह में उतर रहा था। उसने मेरे कटाव के ऊपर थरथराती नन्हीं कली को हांठों में कस लिया और चूसने लगा। उसे कभी वह दांतों से कभी होंठों से कुचलता। उसने उस कली को भीतर खींचकर चूसा और उसे दाँतो के बीच होठों से मसलने लगा।



आह आह आ: जा जा जा। मैं बांध की तरह फूट पड़ी। अब तक किसी जोर से रोक रखा झरना फूट पड़ा। सदियों से जमी हुई देह मानो धरती की तरह भूकंप में हिचकोले खाने लगी। उसने उंगलियों से खींच कर छेद को दोनों तरफ से फैला दिया और उसमें भीतर मुँह घोप कर चूस चूसकर मेरा रस खींचने लगा।



कुंआरी देह की पहली रस-धार। सूखी धरती पर पहली बारिश सी। वह योनि के भीतर जीभ घुसाकर घुमा घुमाकर चाट रहा था। मानों कहीं उस अनमोल रस की एक बूंद भी नहीं छोड़ना चाहता हो।



मैं अचेत सी हो गई।



कुछ देर बाद जब मुझे होश आया तो मैंने अपने पर उसका वजन महसूस किया। मैंने हाथों से उसे टटोला। वह मुझ पर चढ़ा हुआ था। मेरी हाथों की हरकत से उसे मेरे होश में आने का पता चला। उसने मेरे मुँह पर अपने मुँह रख दिया। एक तीखी गंध मेरे नथुनों में भर गई। उसके होठों पर मेरा लिसलिसा रस लगा था।

जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
भीड़ है क़यामत की फिर भी  हम अकेले हैं.



thanks
Like Reply


Messages In This Thread
स्वीटी नहीं जूली को चोद - by neerathemall - 21-02-2019, 09:42 AM
RE: स्वीटी नहीं जूली को चोद - by neerathemall - 21-02-2019, 09:46 AM
RE: स्वीटी नहीं जूली को चोद - by neerathemall - 21-02-2019, 09:46 AM
RE: स्वीटी नहीं जूली को चोद - by neerathemall - 21-02-2019, 09:46 AM
RE: स्वीटी नहीं जूली को चोद - by neerathemall - 21-02-2019, 09:47 AM
RE: स्वीटी नहीं जूली को चोद - by neerathemall - 21-02-2019, 09:47 AM
RE: स्वीटी नहीं जूली को चोद - by neerathemall - 21-02-2019, 09:48 AM
RE: स्वीटी नहीं जूली को चोद - by neerathemall - 21-02-2019, 09:48 AM
RE: जूली के साथ हसीन लम्हें - by neerathemall - 21-02-2019, 09:51 AM
RE: स्वीटी नहीं जूली को चोद - by neerathemall - 21-02-2019, 09:52 AM
RE: स्वीटी नहीं जूली को चोद - by neerathemall - 21-02-2019, 09:52 AM
RE: स्वीटी नहीं जूली को चोद...जूली या स्वीटी? - by neerathemall - 28-09-2021, 11:30 AM
RE: स्वीटी नहीं जूली को चोद - by neerathemall - 28-09-2021, 11:31 AM
RE: स्वीटी नहीं जूली को चोद - by neerathemall - 28-09-2021, 11:32 AM
RE: स्वीटी नहीं जूली को चोद - by neerathemall - 25-01-2023, 02:25 PM



Users browsing this thread: 1 Guest(s)