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Adultery जेठ जी के अहसान
#89
आज दोपहर को दीपक अमेरिका से वापस आ रहे थे ! सुबह जल्दी उठकर मैंने घर का सारा काम निबटाया ! भैया के वीर्य से लथपथ चादर और कपडे धुलने के लिए मशीन में लगा दिया ! रात की चुदाई से अभी तक बदन दुःख रहा था ! मैं सोच सोच कर दुखी हुई जा रही थी ,कि अब दीपक के घर में रहते भैया से कैसे चुद पाउंगी, और फिर भैया को गावं भी तो वापस जाना था ! कैसे सामना करुँगी मैं दीपक का , दो दो मर्द एक साथ एक ही घर में एक ही औरत के साथ कैसे निभा पाएंगे ! मुझे शर्म भी बहुत आ रही थी क्योंकि भैया ने दीपक की याद मुझे भुला सी दी थी ! मैं भैया के साथ चुदाई में इतना खो जाती थी कि दीपक का जब जिक्र होता था , तभी याद आते थे ! मैं रात में किसके साथ सोउंगी , इसकी उलझन सब से ज्यादा हो रही थी ! भैया के लिए चाय लेकर मैं उनको जगाने आ गई , भैया ने चाय टेबल पर रखकर मुझे बिस्तर पर खींच लिया !पहले तो जम कर चुम्मी ली और चूचियाँ दबाई , और फिर मुझे अपनी गोद में बिठाकर चाय पीने लगे ! मुंह में चाय की आखिरी चुस्की भरकर,भैया ने मेरे मुंह में डाल दी,और मुझे बेतहाशा चूमने लगे ! शायद उनको भी लग रहा था कि अब कुछ पता नहीं कब हो चुदाई ! भैया ने जब होंठ अलग किये तो मैंने पूछा कि अब क्या होगा ? अब हम कैसे चुदाई कर पाएंगे ? मैं आपके बगैर नहीं रह सकती , मेरी आँखें डबडबा गई ! भैया ने मेरे आंसू चूम लिए और बोले ," देखो मेरी जान , अलग तो मैं भी नहीं रह सकता ,हमें दीपक के आदेश का इंतज़ार करना पड़ेगा ! वैसे भी दीपक ने हमें जुदा होने के लिए थोड़े ही न मिलाया है !" मैं जेठ जी के आगोश में खो गई ! जेठ जी चुदाई को उतावले हो रहे थे , पर मैंने हाथ मुंह धोने को कह दिया और वापस काम में जुट गई !मेरी ब्रा जेठ जी उतार चुके थे , सिर्फ पैन्टी में मैं घर के काम निबटा रही थी ! जेठ जी ने बाथरूम से आवाज़ दी ,और तौलिया लाने को कहा ! बाथरूम का दरवाज़ा खुला था , मैं अंदर तौलिया देने चली गई , जेठ जी नंगे होकर पूरा लण्ड खड़ा कर के नहा रहे थे , मुझे पकड़ के अपनी बाँहों में खींच लिया ! मेरे कुछ बोलने से पहले ही जेठ जी ने अपने हाथ मेरे बदन पे फिसलने शुरू कर दिए ! शावर का पानी हम पर बरस रहा था ,और जेठ जी का लण्ड पुरे जोश के साथ मेरे पेट से रगड़ खा रहा था ! मेरी चूचियों को वो जोर जोर से मसल रहे थे , मानो अपने उँगलियों के दाग छुड़ा रहे हों ! होंठ से होंठ ऐसे चिपक गए थे कि जैसे अब अलग होंगे ही नहीं! मैं भी पूरी मस्ती में आ गई थी , जेठ जी का साथ दिल खोल के दे रही थी !जेठ जी ने मुझे अब बेशर्म कर दिया था , बातों के साथ साथ अब मेरी हरकतें भी सेक्सी हो गई थी ! जेठ जी का लण्ड तो मैं पकड़ के ही रखती थी ! इन बारह दिनों में ज्यादातर समय तो जेठ जी का लण्ड मेरी चूत में ही रहा था , जब बाहर भी होता था, तो मैं उनसे चिपकी ही होती थी!
जेठ जी अब बहुत बेताब लग रहे थे , मुझे दीवार की तरफ घुमा के थोड़ा झुकाया , और लण्ड को चूत में सरका दिया, अंदर से तो चूत गीली ही थी , पानी से भीगा लण्ड लसफसाते हुए अंदर चूत दीवार को रगड़ते हुए छलाँगें मारने लगा ! मैं दीवार पर हाथ रखकर अपने आप को सम्हालने कि कोशिश कर रही थी ! जेठ जी ने एक हाथ से मेरी कमर सम्हाल राखी थी और दूसरे हाथ से चूचियों को मसल रहे थे ! ऊपर से शावर का पानी गिर रहा था ,और चूत से रस टपक रहा था और बाथरूम के फर्श को चिकना कर रहा था ! भैया पूरे जोश के साथ चोद रहे थे , लगता था कि आज अगले एक हफ्ते की कसर निकाल लेंगे !भैया ने करीब आधे घंटे तक मुझे उलट पलट के जम के चोदा ! चुदाई का तूफान अब थमता सा दिख रहा था , भैया ने मुझे अपनी बाँहों में जकड लिया और रस की पिचकारी से मेरी चूत की दीवारों की पुताई करने लगे ! हम दोनों ही दो मिनट तक ऐसे ही साँसों पर काबू करते रहे ,फिर अच्छी तरह से चूत और लण्ड की सफाई कर के बाथरूम से बाहर आ गए ! मैंने बैडरूम में आकर भैया के हाथों ब्रा, पैन्टी, पेटीकोट और साडी पहनी ,और हल्का मेकअप भी कर लिया ! भैया भी अब पजामा कुर्ता में तैयार हो गए थे ! बैडरूम और घर को पूरा ठीक ठाक करने के बाद जैसे ही हम ड्राइंग रूम में आकर बैठे , हमारी कॉल बेल बज उठी.
जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
भीड़ है क़यामत की फिर भी  हम अकेले हैं.



thanks
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RE: जेठ जी के अहसान - by neerathemall - 11-05-2020, 04:22 PM



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