15-04-2020, 06:05 AM
(This post was last modified: 09-01-2021, 01:19 PM by sinureddy. Edited 2 times in total. Edited 2 times in total.)
सूरज ढल रहा था.. एक बड़ा सा खुला मैदान... घास से भरा.. और शाम की हल्की नारंगी किरनो से चमकती घास.. बीच मे लेटी नेहा बिल्कुल शांति से.. खुली हवा और शांति को महसूस करते हुए..
तभी उसे लगा किसी ने दूर से उसका नाम पुकारा हो..
'नेहा!'
उसने आँखे खोली और सुनने की कोशिश की.. फिर से आवाज़ आई.. 'नेहा..' और घाड़ घाड़ अचानक बादल छा गये..
आवाज़ और नज़दीक आ रही थी और कह रही थी जैसे वहाँ से उठ कर भागने को..
'नेहा उठ!!'
'उठ नेहा!!!' ढप ढप!!
नेहा को जैसे झटका लगा! 'ओह शिट!!' - बाहर रिचा दरवाजे पर दस्तक दिए जा रही थी.. 'हां हां एक मिनिट..'
'उफ़ भगवान! क्या है नेहा.. जान निकाल दी थी तूने पहले ही दिन मे मेरी.. खोल जल्दी'
'रुक रुक'.. वो हड़बड़ा कर बिस्तर से उठी.. ध्यान आया वो पूरी नंगी है और रूमाल वैसे ही ज़मीन पर पड़ा हुआ .. उसने रूमाल उठाया और बिस्तर के नीचे सरका दिया
'मैं नही रुक सकती खोल अभी .. हरामी एक मिनिट भी नही..'
'रुक जा..' अपने कपड़े टटोलने लगी वो
'हरामी अभी खोल' - और ज़ोर से दरवाजा मारने लगी..
हड़बड़ी मे नेहा ने कपड़े छोडे और पास पड़ा चादर उठाया .. शरीर पर लपेटा और उसने दरवाजा खोल दिया..
'साली अकल है या नही.. कितना डर गयी थी मैं..' - तेज़ी से धक्का देकर घुसते हुए रिचा बोली
'अरे सॉरी याअर! बहुत गहरी नींद आ गयी थी..'
'गहरी नींद .. साली इतने दिन से तेरे साथ हूँ.. जब सोना था तब तो कभी सोते देखा नही..'
'अरे नही यार नया घर है ना..' - कहकर अपने कपड़े उठाने मूडी नेहा.
'नया घर.. या नया खुमार! हुम्म??' - शरारती लहजे मे चुटकी लेते हुए रिचा ने सवाल दाग़ा - 'और ये क्या है!!' - कहकर उसे चादर खिच दी झट से..
पूरी नंगी थी नेहा..
'अरे यार! मत कर ना!' पलट कर अपनी चुचिया छुपाते हुए बोली..
'कल तो बड़ी बेफिकर बनी फिर रही थी आज क्या हुआ!'
तभी उसे ख़याल आया.. कपड़े ना ही पहने तो क्या है ..
'तू ना .. चल सुबह सुबह नाटक मत कर' - कहकर अपनी टाँगो को उसने पेंटी मे सरकाया और फिर उसे उठा कर उसके एलास्टिक को अपनी कमर पर छोड़ दिया
'नाटक! तू करती है! वैसे बहेक गयी थी ना रात को तू'
'चुप कर तेरी तरह नही हूँ'
'हां इसलिए तो.. मैं तो बता देती हूँ.. तू छुपाती है' - कहते हुए उसने बिस्तर के नीचे से रूमाल निकाला और हासणे लगी - 'और ये रहा सबूत चोरी का'
'उफ़ छोड़ गंदा है..' - कहकर छीन लिया नेहा ने उससे और शरमाने लगी
'अरे इसमे छुपाना क्या.. तू भी जवान है.. मैं भी जवान हूँ.. तू भी वही फील करती है.. मैं भी करती हूँ.. बताने मे क्या है'
'अरे कुछ नही बस गंदा लगता है'
'क्या गंदा लगता है.. ये रूमाल या ये की तूने मेरे बॉयफ्रेंड से रात भर मन ही मन अपनी ठुकाई कराई है!'
'चुप कर.. मैने कोई ठुकाई नही कराई.. वो भी तेरे BF से'
'फिर रूमाल कैसे गंदा हुआ.. बिना सोचे तो आँखो से आँसू नही बहते .. तेरे नीचे की गंगा बह चली'
'अरे कहा ना कुछ नही .. बस तेरे BF से नही ठुकाइ मैं.. वैसे तूने सही नही किया मुझे दिखा कर'
'अच्छा! सच बता तुझे कल करने के बाद कैसा लगा.. मज़ा आया या नही!'
'आया'
'फिर क्या सही नही किया.. मज़े ले ना अभी तो टाइम है.. बाद मे तो रोटिया ही पेलनी है रसोई मे तुझे'
'ह्म... चल ठीक है अब फ्रेश होने दे मुझे'
'ठीक है डार्लिंग.. चल मैं कुछ बनाती हूँ खाने को.. भूक भी लगी है..'
थोड़ी देर मे फ्रेश होकर मूह हाथ धोकर नेहा बाहर निकली..
'वैसे तूने बताया नही.. कैसी रही पहली रात' - डाइनिंग टेबल सजाती हुई नेहा बोली
'साली बोल तो ऐसी रही है जैसे सुहाग रात वाली पहली रात हो.. घर ही है बस थोड़ा अलग सा था' - नाश्ता हो गया था.. चूल्हा बंद करते हुए रिचा ने कहा
'हां तू तो हर रात बात बात मे सुहाग रात मना ही लेती है बंदर के साथ'
'चुपकर.. मैं सीधी सादी लड़की हूँ.. मेरे पे लांच्छान मत लगा'
'सीधी सादी.. साली हरामी.. नंगे लड़को की तस्वीरे रखती है और पता नही वीडियो भी या शायद वीडियो कॉल भी करती होगी'
'और क्या तेरे जैसे चुप चुप के मन मे थोड़े ना करती' - किचन से प्लेट और नाश्ता लाकर टेबल पर रखती हुई रिचा बोली.
'और नही तो क्या.. अब तेरे पास जैसा है वैसा कोई है नही तो मन ही मन कर लेती हूँ'
'हा हा हा.. ढूँढ ले तू भी.. तेरे पे तो मेरे से ज़्यादा मरेंगे'
'अच्छा एक बात पूछूँ' - नाश्ते का प्लेट रिचा से लेकर कुर्सी पर बैठती हुई बोली..
'हां पूछ'
'तेरे पास उसकी फोटो है वो वाली.. फिर तू कह रही थी वीडियो है.. फिर कॉल करके बाते भी वैसे करते हो! तुम्हे अंदर से बेचैनी से नही लगती .. तुम भी करती हो जैसे मैने किया कल'
'हां सभी करते हैं' - बड़े ही शांत भाव से रिचा ने जवाब दिया.. जैसे किसी ने 2 दूनी सवाल किया हो और 4 जवाब अपने आप चला आए.
'अच्छा!'
'हां .. कभी कभी तो सुंदर के सामने करती हूँ! और वो भी मेरे सामने करता है!' - आँखे मट्काते हुए रिचा बोली
'सामने!'
'हां मतलब वीडियो कॉल'
'और किसी और ने देख लिया तो'
'किसी और ने मतलब? बस हम दोनो तो वीडियो कॉल करते हैं.. वैसे भी देखेगा तो देखे क्या ही हो जाएगा.. कौन सा फोन से बाहर आके मेरी चूत पेल देगा'
'अच्छा.. कैसा लगता है' - जैसे नेहा के सामने कोई एक्सपर्ट बैठा हो और वो उससे सलाह ले रही हो
'ह्म ह्म बड़ी एक्सपीरियेन्स लेना चाह रही है.. देखेगी वीडियो'
'हां दिखा' - नेहा की आँखो मे चमक आ गयी पर छुपाते हुए बोली.
'ये देख तू भी क्या याद रखेगी'
उसने व्हातसपप मे वीडियो ऑन किया.. सामने सुंदर खड़ा था बॉक्सर मे और बॉक्सर से उसका उभरा लॅंड सॉफ दिख रहा था.. उसने धीरे धीरे अपनी बॉक्सर सरकाई और फक्क से लॅंड स्प्रिंग के जैसे झटके से हिलता हुआ बाहर आ गया
फिर उसने बगल के टेबल से नारियल तेल लिया अपने हाथो मे और लॅंड पर पूरा मल दिया.. और धीरे धीरे उसकी चमड़ी को आगे पीछे करने लगा. हिलाते हिलाते उसने अपनी लंड को फोन के कमेरे के बिल्कुल सामने कर दिया ..
तेल की वजह से उसके लॅंड की फूली हुई नसे और भी चमक रही थी और कड़क लोहे जैसा नज़र आ रहा था उसका लॅंड. जैसे ही सुंदर अपनी चमड़ी को पीछे खिचता गुलाबी सा उसका माँस चमकता हुआ बाहर आ जाता और फिर अगले ही पल चमड़ी पूरा निगल जाती उसे..
थोड़ी देर वो ऐसे ही अपनी हथेली सरकाता और फिर रुक जाता.. फिर थोड़ी देर मे तेज़ी से अपनी कमर को आगे पीछे हिलाते हुए रगड़ता और फिर रुक जाता
करीब 3 4 मिनिट तक ऐसा करने के बाद अचानक रुका और लंड के सुपाडे पे पास कस कर हथेली से जकड लिया ..फक से कुछ उसके लॅंड से निकला और कुछ सफेद सा गाढ़ा तरल उसके हाथ से होते हुए नीचे बहने लगा
'उफ़ बड़ा सेक्सी है यार!'
'हां तू नज़र मत लगाना हरामी'
'नही नही यार नज़र नही लगा रही.. सुंदर को देख वैसी कोई फीलिंग आती नही मुझे.. बस ये देख के मज़ा आ रहा है अजीब सा'
'अच्छा.. मतलब तू बस लॅंड की प्यासी है.. ये तो मुझसे भी आगे निकल गयी तू.. तुझे लड़के से नही लॅंड से प्यार है!'
'चुप कर कुछ भी बके जाती है' - फिर उसने प्लेट उठाया किचन की ओर चल दी..
अभी तो अपने घर से निकल कर आई ही थी दोनो सहेलियाँ यहा... और यहा के खुलेपन ने उन्हे पूरी तरह से अपने काबू मे कर लिया था.. अब जवानी की दहलीज़ पर खड़ी दोनो सहेलियो की बेफिक्री और बेबाकपन इस खुली आज़ादी मे क्या रूप लेगी ये तो समय ही बता पाएगा.
तभी उसे लगा किसी ने दूर से उसका नाम पुकारा हो..
'नेहा!'
उसने आँखे खोली और सुनने की कोशिश की.. फिर से आवाज़ आई.. 'नेहा..' और घाड़ घाड़ अचानक बादल छा गये..
आवाज़ और नज़दीक आ रही थी और कह रही थी जैसे वहाँ से उठ कर भागने को..
'नेहा उठ!!'
'उठ नेहा!!!' ढप ढप!!
नेहा को जैसे झटका लगा! 'ओह शिट!!' - बाहर रिचा दरवाजे पर दस्तक दिए जा रही थी.. 'हां हां एक मिनिट..'
'उफ़ भगवान! क्या है नेहा.. जान निकाल दी थी तूने पहले ही दिन मे मेरी.. खोल जल्दी'
'रुक रुक'.. वो हड़बड़ा कर बिस्तर से उठी.. ध्यान आया वो पूरी नंगी है और रूमाल वैसे ही ज़मीन पर पड़ा हुआ .. उसने रूमाल उठाया और बिस्तर के नीचे सरका दिया
'मैं नही रुक सकती खोल अभी .. हरामी एक मिनिट भी नही..'
'रुक जा..' अपने कपड़े टटोलने लगी वो
'हरामी अभी खोल' - और ज़ोर से दरवाजा मारने लगी..
हड़बड़ी मे नेहा ने कपड़े छोडे और पास पड़ा चादर उठाया .. शरीर पर लपेटा और उसने दरवाजा खोल दिया..
'साली अकल है या नही.. कितना डर गयी थी मैं..' - तेज़ी से धक्का देकर घुसते हुए रिचा बोली
'अरे सॉरी याअर! बहुत गहरी नींद आ गयी थी..'
'गहरी नींद .. साली इतने दिन से तेरे साथ हूँ.. जब सोना था तब तो कभी सोते देखा नही..'
'अरे नही यार नया घर है ना..' - कहकर अपने कपड़े उठाने मूडी नेहा.
'नया घर.. या नया खुमार! हुम्म??' - शरारती लहजे मे चुटकी लेते हुए रिचा ने सवाल दाग़ा - 'और ये क्या है!!' - कहकर उसे चादर खिच दी झट से..
पूरी नंगी थी नेहा..
'अरे यार! मत कर ना!' पलट कर अपनी चुचिया छुपाते हुए बोली..
'कल तो बड़ी बेफिकर बनी फिर रही थी आज क्या हुआ!'
तभी उसे ख़याल आया.. कपड़े ना ही पहने तो क्या है ..
'तू ना .. चल सुबह सुबह नाटक मत कर' - कहकर अपनी टाँगो को उसने पेंटी मे सरकाया और फिर उसे उठा कर उसके एलास्टिक को अपनी कमर पर छोड़ दिया
'नाटक! तू करती है! वैसे बहेक गयी थी ना रात को तू'
'चुप कर तेरी तरह नही हूँ'
'हां इसलिए तो.. मैं तो बता देती हूँ.. तू छुपाती है' - कहते हुए उसने बिस्तर के नीचे से रूमाल निकाला और हासणे लगी - 'और ये रहा सबूत चोरी का'
'उफ़ छोड़ गंदा है..' - कहकर छीन लिया नेहा ने उससे और शरमाने लगी
'अरे इसमे छुपाना क्या.. तू भी जवान है.. मैं भी जवान हूँ.. तू भी वही फील करती है.. मैं भी करती हूँ.. बताने मे क्या है'
'अरे कुछ नही बस गंदा लगता है'
'क्या गंदा लगता है.. ये रूमाल या ये की तूने मेरे बॉयफ्रेंड से रात भर मन ही मन अपनी ठुकाई कराई है!'
'चुप कर.. मैने कोई ठुकाई नही कराई.. वो भी तेरे BF से'
'फिर रूमाल कैसे गंदा हुआ.. बिना सोचे तो आँखो से आँसू नही बहते .. तेरे नीचे की गंगा बह चली'
'अरे कहा ना कुछ नही .. बस तेरे BF से नही ठुकाइ मैं.. वैसे तूने सही नही किया मुझे दिखा कर'
'अच्छा! सच बता तुझे कल करने के बाद कैसा लगा.. मज़ा आया या नही!'
'आया'
'फिर क्या सही नही किया.. मज़े ले ना अभी तो टाइम है.. बाद मे तो रोटिया ही पेलनी है रसोई मे तुझे'
'ह्म... चल ठीक है अब फ्रेश होने दे मुझे'
'ठीक है डार्लिंग.. चल मैं कुछ बनाती हूँ खाने को.. भूक भी लगी है..'
थोड़ी देर मे फ्रेश होकर मूह हाथ धोकर नेहा बाहर निकली..
'वैसे तूने बताया नही.. कैसी रही पहली रात' - डाइनिंग टेबल सजाती हुई नेहा बोली
'साली बोल तो ऐसी रही है जैसे सुहाग रात वाली पहली रात हो.. घर ही है बस थोड़ा अलग सा था' - नाश्ता हो गया था.. चूल्हा बंद करते हुए रिचा ने कहा
'हां तू तो हर रात बात बात मे सुहाग रात मना ही लेती है बंदर के साथ'
'चुपकर.. मैं सीधी सादी लड़की हूँ.. मेरे पे लांच्छान मत लगा'
'सीधी सादी.. साली हरामी.. नंगे लड़को की तस्वीरे रखती है और पता नही वीडियो भी या शायद वीडियो कॉल भी करती होगी'
'और क्या तेरे जैसे चुप चुप के मन मे थोड़े ना करती' - किचन से प्लेट और नाश्ता लाकर टेबल पर रखती हुई रिचा बोली.
'और नही तो क्या.. अब तेरे पास जैसा है वैसा कोई है नही तो मन ही मन कर लेती हूँ'
'हा हा हा.. ढूँढ ले तू भी.. तेरे पे तो मेरे से ज़्यादा मरेंगे'
'अच्छा एक बात पूछूँ' - नाश्ते का प्लेट रिचा से लेकर कुर्सी पर बैठती हुई बोली..
'हां पूछ'
'तेरे पास उसकी फोटो है वो वाली.. फिर तू कह रही थी वीडियो है.. फिर कॉल करके बाते भी वैसे करते हो! तुम्हे अंदर से बेचैनी से नही लगती .. तुम भी करती हो जैसे मैने किया कल'
'हां सभी करते हैं' - बड़े ही शांत भाव से रिचा ने जवाब दिया.. जैसे किसी ने 2 दूनी सवाल किया हो और 4 जवाब अपने आप चला आए.
'अच्छा!'
'हां .. कभी कभी तो सुंदर के सामने करती हूँ! और वो भी मेरे सामने करता है!' - आँखे मट्काते हुए रिचा बोली
'सामने!'
'हां मतलब वीडियो कॉल'
'और किसी और ने देख लिया तो'
'किसी और ने मतलब? बस हम दोनो तो वीडियो कॉल करते हैं.. वैसे भी देखेगा तो देखे क्या ही हो जाएगा.. कौन सा फोन से बाहर आके मेरी चूत पेल देगा'
'अच्छा.. कैसा लगता है' - जैसे नेहा के सामने कोई एक्सपर्ट बैठा हो और वो उससे सलाह ले रही हो
'ह्म ह्म बड़ी एक्सपीरियेन्स लेना चाह रही है.. देखेगी वीडियो'
'हां दिखा' - नेहा की आँखो मे चमक आ गयी पर छुपाते हुए बोली.
'ये देख तू भी क्या याद रखेगी'
उसने व्हातसपप मे वीडियो ऑन किया.. सामने सुंदर खड़ा था बॉक्सर मे और बॉक्सर से उसका उभरा लॅंड सॉफ दिख रहा था.. उसने धीरे धीरे अपनी बॉक्सर सरकाई और फक्क से लॅंड स्प्रिंग के जैसे झटके से हिलता हुआ बाहर आ गया
फिर उसने बगल के टेबल से नारियल तेल लिया अपने हाथो मे और लॅंड पर पूरा मल दिया.. और धीरे धीरे उसकी चमड़ी को आगे पीछे करने लगा. हिलाते हिलाते उसने अपनी लंड को फोन के कमेरे के बिल्कुल सामने कर दिया ..
तेल की वजह से उसके लॅंड की फूली हुई नसे और भी चमक रही थी और कड़क लोहे जैसा नज़र आ रहा था उसका लॅंड. जैसे ही सुंदर अपनी चमड़ी को पीछे खिचता गुलाबी सा उसका माँस चमकता हुआ बाहर आ जाता और फिर अगले ही पल चमड़ी पूरा निगल जाती उसे..
थोड़ी देर वो ऐसे ही अपनी हथेली सरकाता और फिर रुक जाता.. फिर थोड़ी देर मे तेज़ी से अपनी कमर को आगे पीछे हिलाते हुए रगड़ता और फिर रुक जाता
करीब 3 4 मिनिट तक ऐसा करने के बाद अचानक रुका और लंड के सुपाडे पे पास कस कर हथेली से जकड लिया ..फक से कुछ उसके लॅंड से निकला और कुछ सफेद सा गाढ़ा तरल उसके हाथ से होते हुए नीचे बहने लगा
'उफ़ बड़ा सेक्सी है यार!'
'हां तू नज़र मत लगाना हरामी'
'नही नही यार नज़र नही लगा रही.. सुंदर को देख वैसी कोई फीलिंग आती नही मुझे.. बस ये देख के मज़ा आ रहा है अजीब सा'
'अच्छा.. मतलब तू बस लॅंड की प्यासी है.. ये तो मुझसे भी आगे निकल गयी तू.. तुझे लड़के से नही लॅंड से प्यार है!'
'चुप कर कुछ भी बके जाती है' - फिर उसने प्लेट उठाया किचन की ओर चल दी..
अभी तो अपने घर से निकल कर आई ही थी दोनो सहेलियाँ यहा... और यहा के खुलेपन ने उन्हे पूरी तरह से अपने काबू मे कर लिया था.. अब जवानी की दहलीज़ पर खड़ी दोनो सहेलियो की बेफिक्री और बेबाकपन इस खुली आज़ादी मे क्या रूप लेगी ये तो समय ही बता पाएगा.