04-02-2020, 04:21 PM
दीदी ने मुझे गले लगा लिया ओर मेरा हेड चूम लिया. फिर हम सब 2 दिन तक साथ रहे ओर फिर मेरी फॅमिली मुझे दीदी के पास छोड कर वापस अपने घर आ गये. अब चंडीगढ़ में मैं ओर दीदी ही थी. चुकी अभी एग्ज़ॅम्स ओवर हुए थे तो सब कॉलेज्स की हॉलिडेज़ चल रहे थे ओर मैं ओर दीदी दोनों घर पर ही रहते थे.
मेरे पेरेंट्स ने मुझे पड़े लाड़ प्यार से पाला था इस लिए दीदी भी मुझे ऐसे ही रखती थी. वो खुद ही मुझे अपने हाथ से खिलती थी. दीदी मुझे से बहुत प्यार करती थी ओर वैसे भी उन का कोई चाइल्ड नहीं था. एक दिन दीदी घर में झुक कर झाड़ू लगा रही थी ओर उन्होंने अपनी नाइटी पहन रखी थी. दीदी घर में सलवार सूट ही पहनती थी ओर कभी कभी जीन्स ओर टी-शर्ट भी.
मेरे पेरेंट्स ने मुझे पड़े लाड़ प्यार से पाला था इस लिए दीदी भी मुझे ऐसे ही रखती थी. वो खुद ही मुझे अपने हाथ से खिलती थी. दीदी मुझे से बहुत प्यार करती थी ओर वैसे भी उन का कोई चाइल्ड नहीं था. एक दिन दीदी घर में झुक कर झाड़ू लगा रही थी ओर उन्होंने अपनी नाइटी पहन रखी थी. दीदी घर में सलवार सूट ही पहनती थी ओर कभी कभी जीन्स ओर टी-शर्ट भी.
जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
भीड़ है क़यामत की फिर भी हम अकेले हैं.
