04-02-2020, 03:04 PM
“नहीं पापा, पेनकिलर ले लेती हूं. आप और मम्मी डिनर पर चले जाओ. छोटू है न मेरा ध्यान रखने के लिए.” उसने दर्द का नाटक करते हुए कहा.
मम्मी-पापा उसे छोड़कर जाने को तैयार नहीं हो रहे थे, पर उसने अपनी क़सम देकर दोनों को भेजा. वे अनमने से गए. होटल पहुंचकर फोन किया, “बेटा, तबियत कैसी है?”
जवाब में अनन्या-छोटू ज़ोर-ज़ोर से हंसने लगे. वे समझ गए बच्चों ने उन्हें अकेले भेजने के लिए यह नाटक किया. धीरे-धीरे दोनों आपस में खुल गए. दोनों वर्षों बाद अकेले होटल गए थे. शादी के समय की पुरानी यादें ताज़ा हो उठीं.
कुछ दिन बाद सुबह बाथरूम में पापा फोन पर ‘हां-हूं’ कर रहे थे. सामने जैसे कोई महिला ग़ुस्से में बोल रही थी. पापा ने सॉरी कहते हुए जल्दी से फोन रख दिया. जब पापा बाथरूम से बाहर आए, तो अनन्या ने भावुक स्वर में कहा, “थैंक्यू पापा.”
पापा ने अनन्या को प्यार से गले लगाते हुए कहा, “मेरी समझदार बेटी.”
मम्मी-पापा उसे छोड़कर जाने को तैयार नहीं हो रहे थे, पर उसने अपनी क़सम देकर दोनों को भेजा. वे अनमने से गए. होटल पहुंचकर फोन किया, “बेटा, तबियत कैसी है?”
जवाब में अनन्या-छोटू ज़ोर-ज़ोर से हंसने लगे. वे समझ गए बच्चों ने उन्हें अकेले भेजने के लिए यह नाटक किया. धीरे-धीरे दोनों आपस में खुल गए. दोनों वर्षों बाद अकेले होटल गए थे. शादी के समय की पुरानी यादें ताज़ा हो उठीं.
कुछ दिन बाद सुबह बाथरूम में पापा फोन पर ‘हां-हूं’ कर रहे थे. सामने जैसे कोई महिला ग़ुस्से में बोल रही थी. पापा ने सॉरी कहते हुए जल्दी से फोन रख दिया. जब पापा बाथरूम से बाहर आए, तो अनन्या ने भावुक स्वर में कहा, “थैंक्यू पापा.”
पापा ने अनन्या को प्यार से गले लगाते हुए कहा, “मेरी समझदार बेटी.”
जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
भीड़ है क़यामत की फिर भी हम अकेले हैं.
