08-01-2020, 03:20 PM
अगले दो घंटों तक सुधा की गांड और चूत को रगड़-रगड़ कर निर्ममता से चोदते रहे। सुधा का शरीर अनगिनत रति-विसर्जन से थकने लगा। सुधा का मुंह भी अपनी मलाशय से निकले मोटे लंडों को चूस चूस कर थक गया था। पांच मर्द अपने खड़े मोटे लंड को सहला कर और भी सख्त करनी का प्रयास कर रहे थे। सुनील ने सबको अपनी माँ की आगे की चुदाई के लिए कोई बहुत ही अच्छा सुझाव दिया। सबने उसकी पीठ थपकी। सुधा की उन दस मिनटों में साँसे काबू में होने लगीं। सुधा को पता था कि जब उसका सारा परिवार इकट्ठे हो कर चोदता था तो वो कई बार कामानंद से अभिभूत हो बेहोश हो जाते थी। इस बार सुनील और अनिल दोनों कालीन पर विपरीत दिशा में लेट गए. सुनील ने अपनी जांघें अपने भाई की जांघों पर फैला दी. इस तरह दोनों के लंड बिलकुल करीब थे. सुधा ने मुस्करा कर सिसकी भरी और अपनी चूत को अपने दोनों बेटों के लंड पर टिका कर उनके मोटे लंड को इकट्ठे अपनी यौन-द्वार में फंसा लिया. सुधा के मुंह से जोर की दर्द भरी सिसकारी निकल गयी. उसका सुंदर चेहरा दर्द से पीला पड़ गया था. सुधा के पति ने अपने बेटों के लंड को पकड़ कर सुधा की चूत में फिट करने लगे. सुधा के ससुर और पिता ने उसकी दोनों बाहें संभाल कर उसके शरीर को नीचे दबाने लगे जिस से उसके बेटों के लंड सुधा की चूत में समा जाएँ. सुनील और अनिल अपने नितिम्बो को ऊपर उठा कर अपनी माँ की चूत में दो मोटे लंड को धकेलने में मदद कर रहे थे. सुधा ने अपने होठों को दातों में दबा कर दर्द बर्दाश्त करने का प्रयास करते हुए अपने बेटों के आधे लंड इकट्ठे अपनी चूत में ले लिए. सुनील और अनिल के लंड आधार की तरफ और भी मोटे थे. सुधा का माथा पसीने की बूंदों से भर गया. सुधा के पिता ने सुधा की पीठ के पीछे खड़े हो कर अपनी बेटी की जांघों को अपने मज़बूत हाथों में भर कर उसके पैर कालीन से ऊपर उठा लिए. अब सुधा का पूरा वज़न उसके पिता के हाथों में था. उसकी चूत अपने बेटों के लंड पर स्थिर थी. सुधा के पिता ने अपने समधी और दामाद को संकेत दिया. सुधा के पति ने अपने बेटों के लंड को अपने हाथों से संभल लिया. सुधा के ससुर ने दोनों हाथ अपने बहू के कन्धों पर रख दिए. सुधा के पिता ने अचानक अपनी बेटी का पूरा वज़न अपने हाथों से मुक्त कर दिया, उसी समय सुधा के ससुर अपना पूरा वज़न अपनी बहू के कन्धों पर डाल कर उसे नीचे धकेलने लगे. सुधा के हलक से निकली दर्द भरी चीख से कमरा गूँज उठा. एक भयंकर धक्के में सुधा की चूत में उसके बेटों के लंड जड़ तक अंदर चले गए. सुधा सुबकते हुए अपने छोटे बेटे सुनील के ऊपर गिर पड़ी. सुनील ने अपने माँ को अपनी बाँहों में भर कर उसके मुंह पर अपना मुंह लगा दिया. सब मर्दों ने सुधा को कुछ मिनट दो मोटे लंड को अपनी चूत में समायोजित करने के लिए दिए. सुधा के पति ने सुबकती पत्नी का मुंह अपने मूसल लंड से भर दिया. सुधा के ससुर ने अपना तना हुआ मोटा लंड अपने बहू की गांड में बेदर्दी से जड़ तक अंदर डाल दिया. अगले एक घंटे पांचो मर्दों ने सुधा की बेदर्दी से चुदाई की. सुधा के पति, ससुर और पिता ने बारी बारी से सुधा की गांड की अविरत चुदाई की. सुधा के दोनों बेटे उसकी चूत में अपने मोटे लंड को तीन चार इंच अंदर बहर कर रहे थे. सुधा की दर्द भरी चीखें शीघ्र वासना की सिस्कारियों में बदल गयीं. जब एक मर्द सुधा की गांड में स्खलित हो जाता था तो उसकी जगह दूसरा मर्द ले लेता था. सुधा पहले मर्द का मल-लिप्त लंड चूस कर साफ़ और फिर से सख्त कर देती थी. उसके दोनों बेटे तीन बार अपनी माँ की चूत में स्खलित हो गए थे. उनके लंड एक बार भी शिथिल नहीं हुए. सुधा अनगिनत बार चरमोत्कर्ष के आनंद में डूब चुकी थी. लेकिन उसके लम्बे आनन्द की पराकाष्ठा और अनगिनत रति-विसर्जन ने उसे बिलकुल थका दिया. अंत में सुधा निढाल हो कालीन पर पसर गयी. जैसे ही उसके बेटों के मोटे लंड उसकी चूत से बाहर निकले उसकी चीख निकल गयी. उसके ऊपर जान छिड़कने को तैयार उसके पाँचों कौटुम्बिक अनाचारी प्रेमियों ने अपना आखिर बार का वीर्य स्खलन सुधा के सुंदर मुंह पर किया. सुधा का पूरा मुंह वीर्य से ढक गया. उसके ससुर और बेटों ने अपने लंड के प्रचंड वीर्य के स्फुरण से सुधा के दोनों नथुनों को वीर्य से भर दिया. सुधा थकी-मांदी सिर्फ कुनमुना ही सकी. उसके ससुर ने प्यार से अपनी बहू को अपनी बाँहों में उठा कर बिस्तर पर लिटा दिया. पांचों मर्द, सुधा को कुछ देर आराम करने के लिए अकेला छोड़, आगे की चुदाई की योजना बनाते हुए नीचे मदिरापान के लिए चल पड़े.
हम चारो बहुत गरम हो गये थे। बड़े मामा ने नम्रता चाची को अपनी शक्तिशाली बाँहों में उठा लिया और तेजी से शुभ्ररात्री बोल कर अपने शयनकक्ष की और चल दिए। नम्रता चाची की खिलखिलाने की आवाज़ बहुत देर तक तक गूंजती रही। मेरा तप्ता हुआ शरीर सुरेश चाचा से और भी बुरी तरह से लिपट गया। सुरेश चाचा ने मेरे थिरकते जलते हुए होंठों पर अपने गरम मर्दाने मोटे होंठ लगा दिए। मेरी दोनों गुदाज़ बाहें स्वतः उनकी मोटी मज़बूत गर्दन के इर्द-गिर्द हों गयीं। मेरा मुंह अपने आप से खुल कर सुरेश चाचा की मीठी ज़ुबान का स्वागत करने के लिए तैयार हो गया। सुरेश चाचा ने मुझे अपनी बाँहों में उठा लिया और चुम्बन तोड़े बिना अपने कमरे की तरफ चल दिए। कमरे तक पहुँचते-पहुँचते उनकी ज़ुबान ने मेरे मुंह की पूरी तलाशी ले ली थी। उनका मीठा थूक मेरे मुंह में इकठा हो गया। मैंने लालचीपने से सारा का सारा गर्म मीठा थूक गटक लिया। कमरे में पहुँच कर चाचाजी ने मुझे पलंग पर खड़ा कर दिया और अपने कपड़े उतारने लगे। मैंने भी जल्दी से अपने को निवस्त्र कर दिया। मैं भारी सासों से सुरेश चाचा को अपने कपड़े उतारते हुए एकटक देख रही थी। चाचाजी का भारीभरकम बदन घने बालों से भरा हुआ था। उनके सीने के बालों में काफी बाल सफ़ेद होने लगे थे।
