27-12-2019, 06:39 PM
दोनो गार्डेन में आ जाते हैं.
"अच्छा गार्डेन बनाया है पॅलेस वालो ने....शादी के धूम धड़ाके से दूर यहा आराम से बात की जा सकती है"
"आपका शादी में मन नही लगता क्या?"
"अपनी शादी हो तो बात भी हो दूसरो की शादी में क्या मन लगेगा"
"ह्म....बहुत दिल फेंक हो तुम"
"भाई तो चारा डालता हूँ मछली फँस जाए तो ठीक है वरना कही और जुगाड़ लगाता हूँ"
"तो क्या मछली फँस गयी" मोनिका हंस कर बोली.
"वो तो मछली के होंटो को चूम कर ही पता चलेगा" सुरिंदर ने कहते ही अचानक मोनिका को पकड़ कर उसके होंटो को अपने में जाकड़ लिया.
"उम्म्म....च...छोड़ो"
"रसीले होठ हैं तुम्हारे"
"मछली अभी फँसी नही थी"
"मेरा यकीन करो फँस चुकी है" सुरिंदर ने कहा और मोनिका के बूब्स मसल्ने लगा.
"आअहह यू आर डर्टी फ्लर्ट" मोनिका बड़बड़ाई.
"और तुम प्यारी मछली हो" सुरिंदर ने कहा.
"किसी ने देख लिया तो" मोनिका ने कहा.
"सब शादी में मगन हैं...फिर भी सेफ्टी के लिए उस पेड़ के पीछे चलते हैं"
सुरिंदर मोनिका का हाथ पकड़ कर पेड़ के पीछे ले आया.
"ज़्यादा वक्त नही है....ये साड़ी उपर उठाओ और झुक जाओ...मैं पीछे से चूत में डालूँगा"
"देखो मुझे डर लग रहा है....मेरी शादी शुदा ज़िंदागी ना ख़तरे में पड़ जाए"
"चिंता मत करो, ऐसा कुछ नही होगा...उठाओ साड़ी उपर"
"नही मुझ से नही होगा...चलो चलते हैं" मोनिका ने कहा.
सुरिंदर ने अपना लंड बाहर निकाला और उसे मोनिका के हाथ में थमा दिया और बोला, "इसे क्या तड़प्ता छोड़ जाओगी"
मोनिका ने सुन्दर के लंड को अच्छे से हाथ में पकड़ा और बोली, "मैने अपने पति के सिवा किसी से नही किया आज तक"
"तो आज करलो तुम्हे डिफ़्फरेंट लगेगा...हर लंड अलग मज़ा देता है"
"यहा गार्डेन में कोई देख लेगा समझते क्यों नही"
"तभी तो कह रहा हूँ जल्दी साड़ी उपर खींच कर झुक जाओ" सुरिंदर ने कहा और मोनिका को अपना सामने घुमा दिया और खुद ही उसकी साड़ी उपर करने लगा.
"रूको मैं करती हूँ." मोनिका ने साड़ी उपर सरका ली.
"अब झुको तो सही खड़े खड़े नही घुस्सेगा लंड चूत में" सुरिंदर ने मोनिका के कंधे पर दबाव बनाते हुए कहा.
मोनिका झुक गयी. मोनिका के झुकते ही सुरिंदर ने लंड को मोनिका की चूत पर टीका दिया और बोला, "यकीन नही था की तुम इतनी जल्दी पट जाओगी" सुरिंदर ने ज़ोर का धक्का मारा और उसका लंड पूरा अंदर फिसल गया.
"ह्म ये चूत तो खूब चूड़ी हुई है....सच में तेरा पति तो खूब मज़े लेता है....हे..हे..हा..हा"
"आआहह......बाते कम करो" मोनिका बड़बड़ाई.
सुरिंदर ने ज़ोर ज़ोर से मोनिका की चूत में धक्के लगाने शुरू कर दिए.
"पर जो भी हो तेरे पति ने स्मूद रास्ता बना रखा है तुम्हारी चूत में....रोज चोद्ता है क्या वो"
"उउउहह......रोज तो नही पर हर 2-3 दिन में" मोनिका ने हाफ्ते हुए कहा.
"कैसा लग रहा है मेरा लंड, चूत में"
"अच्छा लग रहा है....आअहह जल्दी करो कोई आ जाएगा."
"बस होने वाला है...आअहह...वैसे कोई डिफ़्फरेंसे तो बताओ मुझ मे और तुम्हारे पति में" सुरिंदर ने कहा.
"आअहह तुम धक्के तेज मारते हो....आअहह"
"हे..हे ऐसा है क्या तो ये बताओ दुबारा भी मर्वाओगि क्या धक्के"
"पहले ये धक्के तो रोको आअहह कोई आ गया तो मैं फँस जाउंगी"
"ये लो फिर छोड़ने जा रहा हूँ मैं अपना जूस तुम्हारे अंदर सम्भालो"
अगले ही पल मोनिका को अपनी चूत में हॉट हॉट लिक्विड महसूस हुआ.
4-5 तेज धक्के निकाल कर सुरिंदर रुक गया. तभी मोनिका की नज़र उनकी तरफ आते एक साए पर पड़ी.
"निकालो बाहर जल्दी कोई इधर आ रहा है" मोनिका बोली.
सुरिंदर ने तुरंत लंड मोनिका की चूत से बाहर खींच लिया और अपनी पेण्ट में डाल कर ज़िप बंद कर ली. मोनिका ने भी तुरंत ही अपनी साड़ी नीचे सर्काई और कपड़े अड्जस्ट किए.
"आओ चलें उसकी चिंता मत करो यू ही घूम रहा होगा कोई" सुरिंदर ने कहा.
"मैं तो डर ही गयी थी"
"शूकर मनाओ काम तो पूरा हो गया....धक्के अधूरे रह जाते तो पछताना पड़ता."
"वो तो मैने ही प्रेशर बनाया वरना तो तुम धक्के पे धक्के मारे जा रहे थे." मोनिका हस्ते हुए बोली.
"क्या करूँ तुम्हारी चूत ही ऐसी है मन करता है धक्के मारे चले जाओ." सुरिंदर ने मोनिका की गान्ड पर हाथ फिराते हुए कहा.
"अच्छा...रहने दो ऐसा कुछ ख़ास नही है मेरी....." मोनिका शर्मा कर बोली.
"अच्छा ये बताओ दुबारा धक्के कब मर्वाओगि"
"मेरा कोई अफेर चलाने का मूड नही है समझे"
"क्यों तुम्हे तेज धक्के पसंद नही आए क्या?"
"ऐसी बात नही है पर मैं अपने पति के साथ खुश हूँ"
"तो क्या हुआ....कभी कभी हम भी धक्के मार लेंगे अपना नंबर दे दो"
"सोनिया के पास है मेरा नंबर" मोनिका ने कहा.
"ह्म ठीक है फिर इसका मतलब दुबारा मुलाकात जल्दी होगी अपनी"
"देखेंगे"
"अच्छा गार्डेन बनाया है पॅलेस वालो ने....शादी के धूम धड़ाके से दूर यहा आराम से बात की जा सकती है"
"आपका शादी में मन नही लगता क्या?"
"अपनी शादी हो तो बात भी हो दूसरो की शादी में क्या मन लगेगा"
"ह्म....बहुत दिल फेंक हो तुम"
"भाई तो चारा डालता हूँ मछली फँस जाए तो ठीक है वरना कही और जुगाड़ लगाता हूँ"
"तो क्या मछली फँस गयी" मोनिका हंस कर बोली.
"वो तो मछली के होंटो को चूम कर ही पता चलेगा" सुरिंदर ने कहते ही अचानक मोनिका को पकड़ कर उसके होंटो को अपने में जाकड़ लिया.
"उम्म्म....च...छोड़ो"
"रसीले होठ हैं तुम्हारे"
"मछली अभी फँसी नही थी"
"मेरा यकीन करो फँस चुकी है" सुरिंदर ने कहा और मोनिका के बूब्स मसल्ने लगा.
"आअहह यू आर डर्टी फ्लर्ट" मोनिका बड़बड़ाई.
"और तुम प्यारी मछली हो" सुरिंदर ने कहा.
"किसी ने देख लिया तो" मोनिका ने कहा.
"सब शादी में मगन हैं...फिर भी सेफ्टी के लिए उस पेड़ के पीछे चलते हैं"
सुरिंदर मोनिका का हाथ पकड़ कर पेड़ के पीछे ले आया.
"ज़्यादा वक्त नही है....ये साड़ी उपर उठाओ और झुक जाओ...मैं पीछे से चूत में डालूँगा"
"देखो मुझे डर लग रहा है....मेरी शादी शुदा ज़िंदागी ना ख़तरे में पड़ जाए"
"चिंता मत करो, ऐसा कुछ नही होगा...उठाओ साड़ी उपर"
"नही मुझ से नही होगा...चलो चलते हैं" मोनिका ने कहा.
सुरिंदर ने अपना लंड बाहर निकाला और उसे मोनिका के हाथ में थमा दिया और बोला, "इसे क्या तड़प्ता छोड़ जाओगी"
मोनिका ने सुन्दर के लंड को अच्छे से हाथ में पकड़ा और बोली, "मैने अपने पति के सिवा किसी से नही किया आज तक"
"तो आज करलो तुम्हे डिफ़्फरेंट लगेगा...हर लंड अलग मज़ा देता है"
"यहा गार्डेन में कोई देख लेगा समझते क्यों नही"
"तभी तो कह रहा हूँ जल्दी साड़ी उपर खींच कर झुक जाओ" सुरिंदर ने कहा और मोनिका को अपना सामने घुमा दिया और खुद ही उसकी साड़ी उपर करने लगा.
"रूको मैं करती हूँ." मोनिका ने साड़ी उपर सरका ली.
"अब झुको तो सही खड़े खड़े नही घुस्सेगा लंड चूत में" सुरिंदर ने मोनिका के कंधे पर दबाव बनाते हुए कहा.
मोनिका झुक गयी. मोनिका के झुकते ही सुरिंदर ने लंड को मोनिका की चूत पर टीका दिया और बोला, "यकीन नही था की तुम इतनी जल्दी पट जाओगी" सुरिंदर ने ज़ोर का धक्का मारा और उसका लंड पूरा अंदर फिसल गया.
"ह्म ये चूत तो खूब चूड़ी हुई है....सच में तेरा पति तो खूब मज़े लेता है....हे..हे..हा..हा"
"आआहह......बाते कम करो" मोनिका बड़बड़ाई.
सुरिंदर ने ज़ोर ज़ोर से मोनिका की चूत में धक्के लगाने शुरू कर दिए.
"पर जो भी हो तेरे पति ने स्मूद रास्ता बना रखा है तुम्हारी चूत में....रोज चोद्ता है क्या वो"
"उउउहह......रोज तो नही पर हर 2-3 दिन में" मोनिका ने हाफ्ते हुए कहा.
"कैसा लग रहा है मेरा लंड, चूत में"
"अच्छा लग रहा है....आअहह जल्दी करो कोई आ जाएगा."
"बस होने वाला है...आअहह...वैसे कोई डिफ़्फरेंसे तो बताओ मुझ मे और तुम्हारे पति में" सुरिंदर ने कहा.
"आअहह तुम धक्के तेज मारते हो....आअहह"
"हे..हे ऐसा है क्या तो ये बताओ दुबारा भी मर्वाओगि क्या धक्के"
"पहले ये धक्के तो रोको आअहह कोई आ गया तो मैं फँस जाउंगी"
"ये लो फिर छोड़ने जा रहा हूँ मैं अपना जूस तुम्हारे अंदर सम्भालो"
अगले ही पल मोनिका को अपनी चूत में हॉट हॉट लिक्विड महसूस हुआ.
4-5 तेज धक्के निकाल कर सुरिंदर रुक गया. तभी मोनिका की नज़र उनकी तरफ आते एक साए पर पड़ी.
"निकालो बाहर जल्दी कोई इधर आ रहा है" मोनिका बोली.
सुरिंदर ने तुरंत लंड मोनिका की चूत से बाहर खींच लिया और अपनी पेण्ट में डाल कर ज़िप बंद कर ली. मोनिका ने भी तुरंत ही अपनी साड़ी नीचे सर्काई और कपड़े अड्जस्ट किए.
"आओ चलें उसकी चिंता मत करो यू ही घूम रहा होगा कोई" सुरिंदर ने कहा.
"मैं तो डर ही गयी थी"
"शूकर मनाओ काम तो पूरा हो गया....धक्के अधूरे रह जाते तो पछताना पड़ता."
"वो तो मैने ही प्रेशर बनाया वरना तो तुम धक्के पे धक्के मारे जा रहे थे." मोनिका हस्ते हुए बोली.
"क्या करूँ तुम्हारी चूत ही ऐसी है मन करता है धक्के मारे चले जाओ." सुरिंदर ने मोनिका की गान्ड पर हाथ फिराते हुए कहा.
"अच्छा...रहने दो ऐसा कुछ ख़ास नही है मेरी....." मोनिका शर्मा कर बोली.
"अच्छा ये बताओ दुबारा धक्के कब मर्वाओगि"
"मेरा कोई अफेर चलाने का मूड नही है समझे"
"क्यों तुम्हे तेज धक्के पसंद नही आए क्या?"
"ऐसी बात नही है पर मैं अपने पति के साथ खुश हूँ"
"तो क्या हुआ....कभी कभी हम भी धक्के मार लेंगे अपना नंबर दे दो"
"सोनिया के पास है मेरा नंबर" मोनिका ने कहा.
"ह्म ठीक है फिर इसका मतलब दुबारा मुलाकात जल्दी होगी अपनी"
"देखेंगे"
अचानक दरवाजा खड़कने लगा और मोनिका अपने ख़यालो से बाहर आ गयी.