25-01-2019, 11:03 AM
मोहित मेरी बात सुनकर खामोश हो गया और अपनी आँखें बंद करके सोने का नाटक करने लगा। मैंने जल्दी से अपनी कमीज उतारकर ब्रा को उतार दिया और अपनी कमीज को वापस पहन लिया। मैंने अपनी कमीज में से अपनी चूचियों को आधे से ज्यादा बाहर कर दिया और नीचे वाले बर्थ पर सीधा होकर लेट गई।
प्रवीण कुछ ही देर में बाथरूम से बाहर निकला और अपनी बर्थ की तरफ जाने लगा। प्रवीण जैसे ही मेरे करीब पहुँचा, मैं उसका ध्यान अपनी तरफ करने के लिए जोर से खर्राटे मारने लगी। प्रवीण ने मेरे करीब से गुजरते हुए खर्राटों की वजह से मेरी तरफ देखा। मेरी तरफ देखते हुए प्रवीण की आँखें फटी की फटी रह गई। प्रवीण मेरी आधी से ज्यादा गोरी नंगी चूचियों को देखकर बौखला गया और इधर-उधर देखने लगा।
मोहित और करुणा को सोता हुआ देखकर प्रवीण की हिम्मत कुछ बढ़ी और वो वहीं खड़ा होकर मेरी नंगी चूचियों को देखकर मजे लेने लगा। अचानक उसने अपना हाथ बढ़ाकर मेरे को थोड़ा सा झंझोड़ा। मैं वैसे ही आँखें बंद किए सोने का नाटक करने लगी। प्रवीण मुझे गहरी नींद में समझकर अपना हाथ आगे बढ़ाकर मेरी एक चूची पर हाथ रख दिया।
प्रवीण का हाथ अपनी नंगी चूची पर महसूस करते ही मेरा अंग-अंग सिहर उठा।
प्रवीण थोड़ी देर तक मेरी चूची पर अपना हाथ रखे हुए था और फिर उसने अपने हाथ को हरकत में लाते हुए मेरी चूची पर फिराने लगा। कुछ देर तक एक चूची पर हाथ फिराने के बाद उसने अपना हाथ मेरी दूसरी चूची पर रख दिया और उसे सहलाने लगा।
प्रवीण की हरकतों से मेरी चूत गीली हो चुकी थी, और मेरा अंग-अंग टूट रहा था। दिल तो कर रहा था की अभी अपना हाथ बढ़ाकर उसके अंडरवेर में छुपे लण्ड पर रख लूं। मगर मैं ऐसा नहीं कर सकती थी, क्योंकी ऐसा करने से सारा काम बिगड़ सकता था।
प्रवीण ने अपने दोनों हाथ बढ़ाकर मेरी कमीज में से मेरी चूचियों को बाहर निकाल लिया। प्रवीण मेरी चूचियों के गुलाबी निपल देखकर उत्तेजना के मारे काँपने लगा, और अपने हाथों की उंगलियों से मेरी चूचियों के गुलाबी निपलों को मसलने लगा।
मोहित भी अपनी आँखें खोलकर कभी हमें तो कभी राधा को देख रहा था। राधा अपनी चूत में अपनी दो उंगलियां डालकर आगे-पीछे कर रही थी। प्रवीण का लण्ड तो बहुत बढ़िया था, मगर उसे इश्तेमाल करना नहीं आता था, जिसके कारण राधा हमेशा अपनी उंगलियों से अपनी चूत को शांत करने की कोशिश करती थी और अंदर ही अंदर जलती रहती थी। मैं कभी-कभी अपनी आँखों को थोड़ा सा खोलकर उसे देख रही थी। मगर वो तो मेरी चूचियों से खेलने में मसरूफ था।
प्रवीण सिर्फ अंडरवेर में था। वो नीचे झुकते हुए मेरी गुलाबी चूची पर अपनी जीभ फिराने लगा, और अपने अंडरवेर को थोड़ा नीचे करते हुए अपने हाथों से अपने लण्ड को सहलाने लगा। उसका लण्ड इतने नजदीक से देखकर मेरी हालत बिगड़ने लगी।
मोहित इतनी देर से हमें देखकर बहुत गरम हो चुका था, वो अपनी शर्ट और पैंट उतार चुका था। राधा की उंगलियां बहुत जोर से अपनी चूत में अंदर-बाहर हो रही थी। मोहित ने मोके का फायदा उठाते हुए अपना अंडरवेर उतारा और नंगा ही बर्थ से उस तरफ कूदते हुए राधा के सामने खड़ा हो गया।
राधा अपनी मंजिल के बिल्कुल करीब थी। वो अपनी आँखें बंद किए सिसकते हुए अपनी चूत में उंगलियां अंदरबाहर कर रही थी। मोहित राधा को ऊपर से नीचे तक गौर से देखते हुए अपने लण्ड को सहलाने लगा। मोहित को राधा का सांवला जिम, उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां, उसके भरे हुए नितम्ब और उसके काले बालों में छुपी हुए काली चूत बहुत अच्छी लग रही थी।
आअहहह...” करते हुए राधा और हाँफते हुए झड़ने लगी।
थोड़ी देर बाद राधा ने जैसे ही आँखें खोली अपने सामने एक अंजान मर्द को नंगा खड़ा देखकर उसके मुँह से चीख निकलने ही वाली थी की मोहित ने अपना हाथ उसके मुँह पर रख दिया और उसका मुँह अपने हाथ से। दबा दिया। राधा के मुँह से निकली हुए चीख मोहित के हाथों में दब गई। मोहित ने उसके मुँह पर अपना हाथ रखे हुए ही उसे इशारे से चुप रहने के लिए कहा।
प्रवीण कुछ ही देर में बाथरूम से बाहर निकला और अपनी बर्थ की तरफ जाने लगा। प्रवीण जैसे ही मेरे करीब पहुँचा, मैं उसका ध्यान अपनी तरफ करने के लिए जोर से खर्राटे मारने लगी। प्रवीण ने मेरे करीब से गुजरते हुए खर्राटों की वजह से मेरी तरफ देखा। मेरी तरफ देखते हुए प्रवीण की आँखें फटी की फटी रह गई। प्रवीण मेरी आधी से ज्यादा गोरी नंगी चूचियों को देखकर बौखला गया और इधर-उधर देखने लगा।
मोहित और करुणा को सोता हुआ देखकर प्रवीण की हिम्मत कुछ बढ़ी और वो वहीं खड़ा होकर मेरी नंगी चूचियों को देखकर मजे लेने लगा। अचानक उसने अपना हाथ बढ़ाकर मेरे को थोड़ा सा झंझोड़ा। मैं वैसे ही आँखें बंद किए सोने का नाटक करने लगी। प्रवीण मुझे गहरी नींद में समझकर अपना हाथ आगे बढ़ाकर मेरी एक चूची पर हाथ रख दिया।
प्रवीण का हाथ अपनी नंगी चूची पर महसूस करते ही मेरा अंग-अंग सिहर उठा।
प्रवीण थोड़ी देर तक मेरी चूची पर अपना हाथ रखे हुए था और फिर उसने अपने हाथ को हरकत में लाते हुए मेरी चूची पर फिराने लगा। कुछ देर तक एक चूची पर हाथ फिराने के बाद उसने अपना हाथ मेरी दूसरी चूची पर रख दिया और उसे सहलाने लगा।
प्रवीण की हरकतों से मेरी चूत गीली हो चुकी थी, और मेरा अंग-अंग टूट रहा था। दिल तो कर रहा था की अभी अपना हाथ बढ़ाकर उसके अंडरवेर में छुपे लण्ड पर रख लूं। मगर मैं ऐसा नहीं कर सकती थी, क्योंकी ऐसा करने से सारा काम बिगड़ सकता था।
प्रवीण ने अपने दोनों हाथ बढ़ाकर मेरी कमीज में से मेरी चूचियों को बाहर निकाल लिया। प्रवीण मेरी चूचियों के गुलाबी निपल देखकर उत्तेजना के मारे काँपने लगा, और अपने हाथों की उंगलियों से मेरी चूचियों के गुलाबी निपलों को मसलने लगा।
मोहित भी अपनी आँखें खोलकर कभी हमें तो कभी राधा को देख रहा था। राधा अपनी चूत में अपनी दो उंगलियां डालकर आगे-पीछे कर रही थी। प्रवीण का लण्ड तो बहुत बढ़िया था, मगर उसे इश्तेमाल करना नहीं आता था, जिसके कारण राधा हमेशा अपनी उंगलियों से अपनी चूत को शांत करने की कोशिश करती थी और अंदर ही अंदर जलती रहती थी। मैं कभी-कभी अपनी आँखों को थोड़ा सा खोलकर उसे देख रही थी। मगर वो तो मेरी चूचियों से खेलने में मसरूफ था।
प्रवीण सिर्फ अंडरवेर में था। वो नीचे झुकते हुए मेरी गुलाबी चूची पर अपनी जीभ फिराने लगा, और अपने अंडरवेर को थोड़ा नीचे करते हुए अपने हाथों से अपने लण्ड को सहलाने लगा। उसका लण्ड इतने नजदीक से देखकर मेरी हालत बिगड़ने लगी।
मोहित इतनी देर से हमें देखकर बहुत गरम हो चुका था, वो अपनी शर्ट और पैंट उतार चुका था। राधा की उंगलियां बहुत जोर से अपनी चूत में अंदर-बाहर हो रही थी। मोहित ने मोके का फायदा उठाते हुए अपना अंडरवेर उतारा और नंगा ही बर्थ से उस तरफ कूदते हुए राधा के सामने खड़ा हो गया।
राधा अपनी मंजिल के बिल्कुल करीब थी। वो अपनी आँखें बंद किए सिसकते हुए अपनी चूत में उंगलियां अंदरबाहर कर रही थी। मोहित राधा को ऊपर से नीचे तक गौर से देखते हुए अपने लण्ड को सहलाने लगा। मोहित को राधा का सांवला जिम, उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां, उसके भरे हुए नितम्ब और उसके काले बालों में छुपी हुए काली चूत बहुत अच्छी लग रही थी।
आअहहह...” करते हुए राधा और हाँफते हुए झड़ने लगी।
थोड़ी देर बाद राधा ने जैसे ही आँखें खोली अपने सामने एक अंजान मर्द को नंगा खड़ा देखकर उसके मुँह से चीख निकलने ही वाली थी की मोहित ने अपना हाथ उसके मुँह पर रख दिया और उसका मुँह अपने हाथ से। दबा दिया। राधा के मुँह से निकली हुए चीख मोहित के हाथों में दब गई। मोहित ने उसके मुँह पर अपना हाथ रखे हुए ही उसे इशारे से चुप रहने के लिए कहा।