हमेशा की तरह, मैं अपने पाठकों से सुनना चाहूँगी। सुझाव/आलोचना/राय और वास्तविक प्रतिक्रिया मेरे लेखन को और बेहतर बनाएगी। धन्यवाद।
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Adultery Mother and Son : A taboo affair 3
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हमेशा की तरह, मैं अपने पाठकों से सुनना चाहूँगी। सुझाव/आलोचना/राय और वास्तविक प्रतिक्रिया मेरे लेखन को और बेहतर बनाएगी। धन्यवाद।
.................................…...............................…..एक कहानी दो पहलू* यह कुछ मुख्य पात्र :- 1. पुनम दुबे ( एक मां ) , अनुज ( पुत्र ) , अशोक दुबे ( पिता) 2. शालिनी सिंह ( एक मां ) , शुभम ( पुत्र ) , अरविंद सिंह ( पिता ) कहानी का अन्य भाग :- हेमा चौधरी ( मामी ) , अनिता सिंह ( मौसी ) , अनजान लड़का , ( सहेली ) कुसुम का यार अंकिता सिंह ( शुभम की मौसेरी बहन ) कहानी का भाग:- (१) दो लौडों की प्रेम कहानी (२) दोस्त की मम्मी शालिनी सिंह
19-04-2025, 10:01 PM
(This post was last modified: 04-10-2026, 10:27 PM by Puja3567853. Edited 5 times in total. Edited 5 times in total.)
रांची की एक पूर्व 'होमकमिंग क्वीन' और उसके पति की नौकरी छूटने के बाद, वह अनजाने में एक मसाज पार्लर में नौकरी स्वीकार कर लेती है और गलती से एक वेश्यावृत्ति रैकेट में फंस जाती है।
20-04-2025, 10:20 AM
(This post was last modified: 17-10-2026, 03:31 PM by Puja3567853. Edited 9 times in total. Edited 9 times in total.)
यह कहानी बिल्कुल काल्पनिक है। आप अपने विचार मुझे लिखिएगा। यह जो कहानी है दो अलग-अलग परिवार की है । दोनों परिवार भारत के झारखंड राज्य से है । एक परिवार पंडित घराने से और दुसरा परिवार राजपूत घराने से ।यह कहानी मैं लिख रहा हूँ आपके मनोरंजन के लिए… इसे सिर्फ एक कहानी की तरह ही लीजिये, इसमें कोई सच्चाई नहीं है।
पहला अध्याय...... अनुज दुबे
मेरा नाम अनुज दुबे , पूनम दुबे का लोकप्रिय बेटा । पहले भाग ' मदर सीक्रेट अफेयर ' में जबरदस्त प्यार दिया अब मैं भाग 3 में फिर एकबार मौजूद हुं आपके भरपूर प्यार के लिए। धन्यवाद यह बात करीब 3 साल पहले की है.. मैं कॉलेज में पढ़ता था और छुट्टियों में जमशेदपुर अपने ननिहाल गया हुआ था। मेरे ननिहाल में मेरे नानाजी.. मामाजी और मामी ( हेमा चौधरी ) थे। मैं करीब 20 साल का था.. नई-नई जवानी चढ़ी थी। मेरे ननिहाल में सब मेरे आने पर बहुत खुश हुए। मामाजी की शादी को पांच साल हुए थे। उनको एक बेटा एक साल का था। उन्होंने मामी को घर से भागकर और दूसरे जाति से किये थे। वे किसी फैक्ट्री में अच्छी जॉब करते थे। दो-तीन दिन तो ऐसे ही ठीक-ठाक निकल गए। एक दिन दोपहर को खाना खाकर मैं मामाजी के कमरे में बैठा टीवी देख रहा था, उनका बेटा मेरे पास ही सो रहा था… तभी अपने काम-धाम निपटा कर मामी ज़ी भी आ गईं और मेरे पास बिस्तर पर बैठ कर टीवी देखने लगीं। उन्होंने गर्मी की वजह से नाईटी ही पहन रखी थी। नाईटी के नीचे उन्होंने ब्रा और सलवार पहनी हुई थी। उनके आने से मैं थोड़ा सीधा होकर बैठ गया। तो वो बोलीं- अरे.. आराम से लेट जाओ.. उठ क्यों गए? ‘कोई बात नहीं मामी जी.. मैं ठीक हूँ..’ मैं बोला। ‘तुम ना.. मुझे मामीज़ी मत कहा करो.. हेमा कहा करो..’ वो मुझसे मुस्कुरा कर बोलीं। ‘अरे नहीं.. मामीज़ी हो तो मामीज़ी ही कहूँगा..’ मैं थोड़ा सकपकाया। ‘तो क्या हुआ.. अपनी उम्र में कोई ज़्यादा फ़र्क़ थोड़े ही है.. मैं तुमसे सिर्फ़ 10 साल ही तो बड़ी हूँ।’ मैं कुछ नहीं बोला, बस मुस्कुरा दिया। ‘आज गर्मी बहुत है.. यह कूलर भी ठंडी हवा नहीं दे रहा..’ मामी बोली। ‘हाँ.. ऐसी गर्मी में तो एसी होना चाहिए..’ मैंने कहा। ‘आज ही कहती हूँ तेरे मामा से.. कि एक एसी लगवा दो.. गर्मी से जान निकल जाती है.. एसी हो तो आराम से खुल्लम-खुल्ला हो कर लेट जाओ।’ ‘खुल्लम-खुल्ला.. वो कैसे..?’ मैंने जानबूझ कर पूछा। ‘अरे बस.. बिना कपड़ों के..’ वो शरारत से मुस्कुरा कर बोलीं। ‘और अगर कोई आ जाए तो?’ मैंने मजा लेकर बात आगे बढ़ाई। ‘कौन आएगा.. जो भी आएगा.. घन्टी बजाकर आएगा.. नाईटी पास ही रखी होती है.. झट से पहनो और जाकर देख लो…’ ‘हाँ.. ये ठीक है.. पर आज मेरे आने से आप खुल्लम-खुल्ला हो कर नहीं लेट सकतीं..’ मैंने चुटकी ली। ![]() ![]() ![]() ‘हाँ.. ये तो है.. पर तू तो आराम से लेट जा.. ये कुर्ता-पजामा क्यों पहना है.. घर में भी इतने कपड़े पहनकर ही रहता है।’ वो मुस्कुरा कर बोलीं। पर उनकी इस मुस्कुराहट में शरारत थी। ‘नहीं.. घर में तो बस बनियान में अपने कमरे में रहता हूँ..’ मैंने भी जानबूझ कर झूठ ही कह दिया। ‘तो उतार दे.. आराम से लेट..’ उसने थोड़ी और शरारत से कहा। मेरे मन में आया कि पूछ लूँ कि अगर मैं खुल्लम-खुल्ला होकर लेटूंगा.. तो क्या वो भी खुल्लम-खुल्ला होंगी, पर इतना कहने की हिम्मत नहीं जुटा पाया और चुप ही रहा। टीवी पर प्रोग्राम चल रहा था.. पर मेरा उसमें कोई मन नहीं लग रहा था। अब मेरा ध्यान सिर्फ़ मामी के गोरे-चिट्टे बदन पर था। उनका गोल चेहरा.. भरा हुआ बदन.. मोटे-मोटे दो मम्मे और उससे भी बड़े दो चूतड़.. उनकी नाईटी का गला गहरा था तो उनका बड़ा सा क्लीवेज भी दिख रहा था, जो बार-बार मेरा ध्यान उधर खींच रहा था। मामी को पता था कि मैं कहाँ देख रहा हूँ.. पर वो ऐसे शो कर रही थीं जैसे उनकी छातियाँ घूरने से उनको कोई फ़र्क़ नहीं पड़ रहा हो.. या ये तो आम बात है.. या अब इतने बड़े खरबूज़ों को छुपाऊँ तो कैसे छुपाऊँ। मेरे मन में तूफान उठ रहा था कि आगे बढ़ूँ और मामी के दोनों चुचियों पकड़ कर दबा दूँ.. पर मेरी हिम्मत जवाब दे जाती थी। पहले तो मामीज़ी बैठी थीं.. फिर वो भी लेट गईं और टीवी देखने लगीं। वो मुझसे करीब 2-3 फीट की दूरी पर बाईं करवट लेकर लेटी थीं। हम दोनों के बीच में ' आंसू ' ( मामी का बेटा ) सो रहा था। करवट के बल लेटने से उनका क्लीवेज उनके कंधे तक बन गया.. करीब 5 इंच का क्लीवेज मेरे हाथ की पहुँच में था.. पर मैं उसे छू नहीं सकता था। दो बड़े-बड़े चुचियों.. उफ.. क्या क़यामत की दोपहर थी वो… हम दोनों बीच-बीच में बातें भी कर रहे थे और मामी जी को पूरा पता था कि मेरी नज़रें सिर्फ़ उनके चुचियों पर ही टिकी थीं। मैंने मन ही मन सोचा कि यार अगर मामी का दूध पीने को मिल जाए तो मज़े ले ले कर पियूँ और इसके चुचियों दबा-दबा के चूसूँ। तभी सोते हुए आंसू डर के उठ गया और रोने लगा। मामी ने उसे सीने से लगा लिया और चुप कराने लगीं.. पर वो रोता ही रहा और सीने से लगाने पर मामी के क्लीवेज में मुँह मारने लगा। मेरी किस्मत देखिए.. बिल्कुल मेरे सामने.. मामी ने नाईटी ऊपर उठाई.. ब्रा ऊपर की और अपने बाएं चूची से आंसू को दूध पिलाने लगीं.. मगर मुझे ये समझ नहीं आया कि जब एक ही चूची से दूध पिलाना है तो दोनों बाहर क्यों निकाले। अब मेरी नज़र सिर्फ़ मामी के गोरे और गोल चूची और उसके ऊपर हल्के भूरे निप्पल पर टिकी थी। मामी भी देख रही थीं कि मैं क्या देख रहा हूँ। मेरे मन में बार-बार ये ख्याल आता कि अनुज हिम्मत कर और मामी से पूछ ले ‘मैं भी दूध पीना चाहता हूँ.. पर पूछू कैसे..?’ ![]() ![]() ![]() ![]() ![]() ![]() कभी दिल कर रहा था कि बस पकड़ कर दबा दूँ.. अगर बुरा भी मान गईं तो ज़्यादा से ज़्यादा क्या होगा एकाध चांटा ही तो मार देंगी..पर फिर भी.. हिम्मत नहीं हो रही थी। मामी ने मुझे कई बार देखा.. पर अब मैं भी बेशर्मी से सिर्फ़ उनके चूची को ही घूर रहा था। ‘ओये.. क्या घूर रहा है?’ मामी बोलीं। ‘कुछ नहीं मामीज़ी..’ मैं थोड़ा डरा। ‘क्या चाहता है?’ जैसे उसने ऑफर दी हो। ‘दूध पीना चाहता हूँ..!’ मैं खुद नहीं समझ पाया कि मेरे मुँह से ये शब्द कैसे निकल गए। वो मुस्कुराई और मेरे सर के पीछे हाथ रखा और मेरा सर खींच कर अपने चुचियों के पास ले गई और मैंने बड़े प्यार से उनका निप्पल अपने होंठों में पकड़ लिया और ज़ोर से चूस लिया। मेरा मुँह उनके दूध से भर गया.. कोई स्वाद नहीं था.. पर 20 साल की उम्र में चूची चूसने का मेरा ये पहला अवसर था और इसी चीज़ का मैं मज़ा ले रहा था। अब जब बात खुल ही गई थी, तो मैंने अपने आपको मामी के साथ चिपका लिया.. उनका अमृत-कलश बड़े प्यार से अपने दोनों हाथों में पकड़ कर दबाया और निप्पल मुँह में ले कर चूसने लगा। मैं चूची चूसने और दबाने दोनों के मज़े ले रहा था। मामी मेरे सर में हाथ फेर रही थीं.. उसने अपना बदन ढीला छोड़ रखा था और वो टीवी भी नहीं देख रही थीं। मैंने मौक़ा देखकर एक हाथ उसके कूल्हे पर रखा और धीरे-धीरे हाथ उसकी पीठ पर से उसके ब्रा के हुक पर ले गया और धीरे से दबाकर हुक खोल दिया। मामी ने मेरे सर पर हाथ मारा- शैतान.. ये क्या कर रहा है.. ब्रा क्यों खोली तुमने? ‘अरे मामीज़ी.. थोड़ा टाइट सा लग रहा था.. इसलिए और एक बात बताऊँ.. आज मैंने अपनी ज़िंदगी में पहली बार किसी की ब्रा खोली है.. जब मेरा हाथ आपकी ब्रा के हुक पर गया तो मैं ये अवसर छोड़ना नहीं चाहता था.. इसलिए हुक खोल दिया।’ मामी सिर्फ़ मुस्कुरा दीं और मैं बोला- थोड़ा और पी लूँ? तो उसने कहा- क्यों भूखा है क्या? अभी तो खाना खाया था… मैं बोला- वो तो कब का हज़म हो गया.. अब फिर से भूख लग गई है। ये कह कर मैंने फिर से उसका चूची मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया। मैंने देखा कि आंसू दूध पीकर सो गया है और निप्पल भी उसके मुँह से निकल गया है। मैंने मामी से कहा- मामी ज़ी.. अब आप सीधी होकर लेट जाओ प्लीज़.. मामी ने आंसू को देखी.. वो सो चुका था। मामी सीधी हो गईं.. तो मैंने उसकी ब्रा और नाईटी बिल्कुल ऊपर तक उठा दीं। अब वो पेट से ले कर कंधों तक मेरे सामने नंगी थी। मैंने उसके दोनों चुचियों अपने हाथों में पकड़ लिए और दबा-दबा कर उनसे खेलने लगा.. कभी ये चूची चूसता तो कभी वो.. कभी दबाता तो कभी चाट लेता… मामी चुपचाप मुझे देख रही थीं। मैंने नज़र उठाकर मामी की तरफ देखा, उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं थे.. वो शांत चित्त होकर लेटी हुई थी। मैं उसकी आँखों में और वो मेरी आँखों में देख रही थी। मेरे मन का शैतान पूरी तरह से जाग चुका था.. मैं धीरे से आगे बढ़ा और मामी के होंठों पर हल्के से चूम लिया.. सिर्फ़ ये देखने के लिए कि कहीं वो बुरा तो नहीं मानती। उसने कुछ नहीं कहा तो मैंने दोबारा चूमा। उसके बाद 5-6 बार चूमा और अपने हाथों से उसके चूची दबाता रहा। उसके बाद तो मामी ने मेरा सर पकड़ा और मेरे होंठों से अपने होंठ लगा दिए। मैंने उसका नीचे वाला होंठ मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया। फिर होंठ छोड़ दोनों के मुँह आपस में जुड़ गए। मामी ने अपनी जीभ मेरे मुँह में डाल दी.. मेरे लिए ये मजा भी नया था.. पर मज़ेदार था। मैंने भी साथ दिया.. फिर तो कभी मैं उसकी जीभ चूसता तो कभी वो मेरी जीभ चूसती। अब मैंने आगे बढ़ने की सोची.. मैंने अपना बायाँ हाथ सलवार के ऊपर से ही उसकी चूत पर रख दिया, तो उसने और ज़ोर से मुझे अपने से भींच लिया। मैंने अपना मुँह उसके मुँह से अलग किया और कहा- मामी ज़ी ये नाईटी उतार दो.. ये बीच में फँस रही है। ‘पहले तो तू मुझे ‘मामी ज़ी’ मत बोल, हेमा कह और अगर ब्रा खुद खोल सकता है.. तो नाईटी भी खुद ही उतार ले..’ मैंने बोला- हेमा से लगता है जैसे व्बॉय-फ्रेण्ड और गर्ल-फ्रेंड हों.. पर मैं तो इन्सेस्ट (रिश्तों में चुदाई) का मजा लेना चाहता हूँ। ‘इन्सेस्ट का मजा.. वो क्या होता है?’ उसने पूछा। ‘बाद में बताऊँगा.. पर अभी मुझे आपको मामी जी ही कहने दो..।’ यह कहकर मैंने उसकी नाईटी और ब्रा दोनों उतार दी। आज पहली बार वो मेरे सामने अधनंगी हालत में बैठी थी। मैंने छुप-छुप कर तो कई बार दूध पिलाते हुए उसके चूची देखे थे.. पर आज तो दोनों खुल्लम-खुल्ला मेरे सामने.. मेरे हाथों में थे। मैंने अपना भी कुर्ता-पजामा और बनियान उतार दी। अब मेरे बदन पर सिर्फ़ चड्डी थी.. जिसमें से मेरा पूरी तरह से तना हुआ लण्ड दिख रहा था। मामी ने मेरे लण्ड पर हाथ मार के कहा- इसको क्या हुआ? और वो अश्लील भाव से हँस दी। मैंने कहा- ये गुस्से से अकड़ गया है.. कहता है मुझे कोई प्यार नहीं करता। ये कहकर मैंने मामी को कन्धों से पकड़कर बिस्तर पर लिटा दिया और बिल्कुल उसकी बगल में खुद भी लेट गया। मैंने अपना दाहिना हाथ उसकी गर्दन के नीचे से निकाला.. उसके सर को अपनी तरफ घुमा कर उसके होंठों को अपने होंठों से पकड़ा और चूसने लगा। उसकी मोटी गुदाज़ जाँघ को अपनी जांघों में जकड़ा ताकि मेरा लण्ड उसकी कमर पर घिस सकूँ। अब मैंने अपना हाथ सीधे उसकी सलवार में डाल दिया और अपनी बीच वाली ऊँगली से उसकी चूत का दाना छेड़ने लगा। उसकी चूत पूरी तरह से पानी से भीगी पड़ी थी। उसने भी अपना हाथ मेरी चड्डी में डाल दिया और मज़बूती से मेरा लंड पकड़कर हिलाने लगी। ‘मामीज़ी, मुझे आपकी चूत चाटनी है.. क्या मैं आपकी चूत चाट सकता हूँ..।’ मैंने उससे कहा। ‘छी:.. उसे चाटते थोड़े ही हैं..’ वो बोली। मैं उठा और उठकर उसकी सलवार का नाड़ा खोल दिया और सरका कर उसकी सलवार नीचे उतार दी। एक बेहद गोरी और शेव की हुई साफ़-सुथरी चिकनी चूत देखने को मिली। मैंने 69 में घूमकर अपना लंड उसके मुँह के पास कर दिया और दोनों हाथों से उसकी टाँगें चौड़ी करके अपना मुँह उसकी चूत पर रख दिया। पहले तो उसकी चूत के दाने को जीभ से चाटा… फिर मुँह नीचे ले गया और उसकी चूत में अपना सारा मुँह डाल दिया। मैं यह कोशिश कर रहा था कि अपनी जीभ उसकी चूत में डाल दूँ.. पर जीभ छोटी थी और चूत बहुत गहरी… मैं मामी के ऊपर ही लेट गया और उसकी टाँगें मोड़ दीं.. जिससे उसकी चूत खुल कर सामने आ गई.. अब मैं ऊपर से लेकर नीचे तक उसकी चूत की सारी दरार में अपना मुँह फिरा रहा था और ऊपर से नीचे उसकी गाण्ड तक चाट रहा था। मैंने अपने बाएं हाथ का अंगूठा उसकी चूत में डाल कर आगे-पीछे किया तो मामी तड़प उठी। वो बार-बार कमर उचका रही थी। मैंने अपना अंगूठा कभी उसकी चूत के अन्दर तो कभी उसकी गाण्ड के छेद में करता रहा और जब वो कमर उठाती तो मेरा अंगूठा उसकी गाण्ड में घुस जाता। ऐसे ही करते-करते मैंने अपना पूरा अंगूठा उसकी गाण्ड में पेल दिया। अब उसने भी मेरी चड्डी उतार दी और मेरे लंड को दोनों हाथों से पकड़ लिया। मैं समझ गया था कि वो क्या चाहती है। मैं थोड़ा पीछे हटा तो मेरा लंड बिल्कुल उसके मुँह के ऊपर आ गया और उसने मेरा लंड अपने मुँह में ले लिया। वाह.. मेरे लंड के आस पास.. उसके नर्म होंठों का.. क्या मस्त अहसास था। जब उसने लंड मुँह में लिया तो मैंने थोड़ा सा नीचे को ज़ोर लगाया और मेरे लंड का सुपारा उसके मुँह में खुल गया। उसने मेरा पूरा लंड अपने मुँह की गहराई में समा लिया। अब मैं नीचे उसकी चूत चाट रहा था और दूसरी तरफ उसका मुँह चोद रहा था। कुछ देर ऐसे ही चलता रहा। फिर मामी ऊपर आ गईं और उसने अपनी चूत मेरे मुँह पर रख दी। मैं चाटने लगा और वो मेरे मुँह पर बैठी अपनी कमर हिलाने लगी। वो पूरे मज़े से चूत चटवाने का आनन्द ले रही थी। ‘अनुज .. मेरी गाण्ड चाट..’ वो बोली। मैंने उसकी गाण्ड में भी जीभ फेरी तो वो अपनी कमर मेरे मुँह पर हिलाती रही। उसकी चूत के पानी से मेरा सारा मुँह भीगा हुआ था और उसके चुचियों से टपकते दूध ने मेरे बदन और बिस्तर गीला कर दिया था। वो झुकी और मेरे लंड पे टूट पड़ी। मस्ती से चूसते हुए उसने कई बार मेरे लंड पर काट लिया। ‘अनुज सिर्फ़ चाट मत.. इसको दांतों से काट.. खा..’ जैसे ही मैंने काटा… तो उसको थोड़ा दर्द हुआ.. पर उसने मना नहीं किया, मैं कभी काटता तो कभी चाटता… वो बड़े ज़ोर से अपनी चूत मेरे मुँह पर रगड़ती रही और मेरे लंड को पागलों की तरह चूसती रही। फिर जैसे बिजली गिरी हो.. वो एकदम से तड़प उठी.. उसने इतने ज़ोर से अपनी चूत से मेरा मुँह दबा दिया कि मेरा तो साँस ही बंद हो गया। मेरा पूरा लंड उसके मुँह में था.. उसने बिल्कुल मेरे लंड की जड़ में जाकर ज़ोर से काटा.. मैं तो वहीं खल्लास हो गया.. मेरे लंड से उसके मुँह में पिचकारियाँ छूट गईं। कुछ उसके मुँह के अन्दर चला गया और कुछ बाहर गिर गया। मुझे ऐसे लगा जैसे मेरा मुँह खट्टे-नमकीन पानी से भर गया हो.. उसकी गाण्ड के बोझ से दबा मैं हिल नहीं सकता था.. सो उस पानी को पी गया। काफ़ी देर हम ऐसे ही निढाल होकर लेटे रहे। फिर वो एक तरफ को लुढ़क गई। मैंने उसको देखा एक गोरी-चिट्टी सुंदर पंजाबी लड़की मेरे सामने खल्लास होकर नंगी पड़ी थी। करीब आधा घंटा हम लेटे हुए एक-दूसरे को देखते रहे। फिर मैंने कहा- मामीज़ी, मैं चुदाई करना चाहता हूँ.. ‘और ये जो किया.. वो क्या था?’ ‘नहीं ये तो ठीक है.. पर मैंने आज तक किसी लड़की को नहीं चोदा है, प्लीज़ मेरा उद्घाटन करवा दीजिए। मामी हँसी- तो तूने आज तक कभी नहीं किया ना.. कोई गर्लफ्रेंड नहीं है क्या? ‘नहीं.. बस अब तो आप ही हो.. जो भी हो..’ ‘अच्छा.. पहले ये बता इन्सेस्ट क्या होता है?’ ‘अपने रिश्तों में चुदाई करना.. जैसे माँ.. बाप.. भाई-बहन… बाप-बेटी.. माँ-बेटा.. मामी भांजा.. चाचा-भतीजी.. इसे रिश्तों में चुदाई कहते हैं.. समझ गई हेमा डार्लिंग! ‘ओये होये.. मर जावां गुड़ खा के… चल आजा..’ यह कहकर मामी ने अपनी टाँगें मेरी तरफ कर के खोल दीं, मेरे लंड को अपने हाथ में लेकर सहलाने लगी। मेरा भी शेर एक मिनट में ही खड़ा हो गया। हेमा ने अपनी टाँगें उठाईं और मेरे लंड को अपने चूत के मुँह पर रख लिया। मैंने धीरे से उसे उसकी चूत में उतार दिया.. अब मैं चुदाई करने लगा। मामी ने मुझे अपने ऊपर खींच लिया और मेरे होंठों से अपने होंठ लगा दिए। मुझे नमकीन सा स्वाद आया, ‘आपके होंठ नमकीन हैं..’ ‘और तेरे खट्टे हैं..’ ये कह कर वो हँस दी और बात समझकर मैं भी हँस दिया। आज भी मैं अपनी ज़िंदगी की इस चुदाई अनुभव नहीं भूला हूँ।
14-10-2026, 06:40 PM
(This post was last modified: 17-10-2026, 03:18 PM by Puja3567853. Edited 1 time in total. Edited 1 time in total.)
दुसरा अध्याय.... शुभम सिंह
मेरा नाम शुभम सिंह , शालिनी सिंह का एकलौता बेटा । ( मदर सीक्रेट अफेयर 2 से ) 20 बरस का हूँ। आज मैं आपको जिसके बारे में बताने जा रहा हूं वह मेरी मौसी है अनिता सिंह । मौसी को एक ही संतान है । मेरे मौसाजी राज सिंह की किरयाने की दुकान है , थोड़ा बहुत होलसेल का काम भी था। बात थोड़ी पुरानी है, जब मैं 12वीं क्लास पास कर चुका था, माँ बाप चाहते थे कि मैं और पढ़ूँ तो उन्होंने मुझे शहर मौसी के पास भेजने का विचार किया। असली खुशी तो मुझे इस बात की थी कि शहर में रहूँगा, कॉलेज में पढ़ूँगा और शहर में तो सुना है कि लड़कियाँ भी बहुत जल्दी पट जाती हैं। मैं शहर आ गया और कॉलेज में एड्मिशन भी ले ली, पर 3-4 महीने बीत जाने पर भी कोई भी लड़की नहीं पटी, एक दोस्त तो बन गया पर साली गर्लफ्रेंड कोई नहीं बनी। रोज़ सुबह जब सोकर उठता तो लंड फुल टाइट तना होता, मगर उसको लेने वाली कोई नहीं मिल रही थी, मूठ मारने का ना मुझे शौक था और ना ही आदत, तो लंड भी एकदम मूसल की तरह सीधा और दमदार था, बस इशारा करते ही तन जाता था। ऐसे ही दिन बीतते गए पर कोई बात ना बनी। एक दिन ऐसे ही दोपहर के वक़्त मुझे लेटे लेटे प्यास सी लगी तो मैं उठकर दूसरे कमरे में गया जहाँ मौसी लेटी थी, क्योंकि फ्रिज उनके कमरे में रखा था। मैंने पानी पीते पीते ध्यान दिया, मौसी शायद टीवी देखते देखते सो गई थी, सोते में उनकी साड़ी उनके सीने से हट गई थी जिस कारण उनके भारी चुचियों उनके ब्लाउज़ से बाहर दिख रहे थे। बड़े बड़े दो गोल चुचियों और भरा भरा सा उनका पेट, मेरी तो आँखें फटी की फटी रह गई। फिर मैंने सोचा, बदतमीज़ यह क्या देख रहा है, जिस औरत की तू इतनी इज्ज़त करता है उसका नंगापन देख रहा है? मैं दूसरे कमरे में चला गया और बेड पे लेट गया। थोड़ी देर बाद मुझे भी नींद आ गई। थोड़ी देर बाद मुझे मौसी ने जगाया- उठो शुभम चाय पी लो, आज बहुत सो रहे हो? मैं आँखें मलता हुआ उठा तो देखा- ओ तेरी…लंड ने तो तनकर पायजामे का तम्बू बना दिया था… क्या मौसी ने भी देखा होगा? मुझे बड़ी शर्म आई, पर चलो। मौसी की आदत थी को वो अक्सर दोपहर को सो जाया करती थी। धीरे धीरे मुझे इस बात की आदत सी पड़ने लगी कि जब भी मौसी सो रही होती, मैं किसी ना किसी बहाने से जाकर उसके अंग को निहार आता। कभी मन में विचार आता नहीं ये तो मेरी माँ जैसी है तो कभी मन में बैठा शैतान कहता, माँ जैसी है पर माँ तो नहीं, उसके चुचियों कितने बड़े हैं, कितने गोल और कितने गोरे, अगर उनसे खेलने का मौका मिल जाए तो, या चूसने का, वाह क्या मज़ा आए, पर मैं हमेशा अपने मन पे क़ाबू पा लेता। मगर ये भी हो रहा था कि मैं इसी फिराक में रहता के कब और कैसे मौसी के चुचियों के दर्शन कर सकूँ। कभी कभी रात को जब मौसाजी मौसी के साथ सेक्स करते तो मौसी की सिसकारियाँ और कराहटें मैं भी सुनता, मेरा लंड तन जाता पर क्या करता ? कुछ दिनों बाद ऐसे ही एक दिन मैं अपने बिस्तर पे लेटा था और इंतज़ार कर रहा था कि कब मौसी सो जाए और मैं उसके चुचियों के दर्शन कर सकूँ। जब मैंने थोड़ी देर बाद देखा तो मौसी के हल्के हल्के खर्राटों की आवाज़ मैंने सुनी, मतलब मौसी सो गई थी, मैं उठकर जाने लगा तो मन में से आवाज़ आई ‘रुक जा शुभम, ऐसा मत कर!’ पर दूसरे ही क्षण ये आवाज़ आई ‘ऐसे गोल गोल चुचियों देखने का मौका रोज़ रोज़ नहीं मिलता, चल चलके देखते हैं।’ मैं उठा और सीधा जाके मौसी के बेड पे उनकी बगल में बैठ गया। मौसी के सांस लेने से उनके बड़े बड़े चुचियों ऊपर नीचे हो रहे थे, मैंने देखा के आसमानी रंग के ब्लाउज़ ने नीचे आज मौसी ने ब्रा नहीं पहनी थी तो ब्लाउज़ में से उनके चुचियों भी थोड़ा बाहर उभरे हुए दिख रहे थे। जितना मैं मौसी के चुचियों देख रहा था मेरी हालत उतनी ही खराब होती जा रही थी। फिर न जाने क्या सोचकर मैंने, अपने दोनों हाथ आगे बढ़ाए और बड़े ही धीरे से मौसी के ब्लाउज़ का एक हुक खोल दिया। मैंने देखा मौसी उसी तरह बेफिक्र सो रही थी। मैंने फिर हिम्मत की और दूसरा हुक भी खोल दिया। अब मौसी की छाती थोड़ी और खुलकर दिखने लगी। ऐसे ही करते करते मैंने उनकी ब्लाउज़ के 4 हुक खोल दिये। अब सिर्फ नीचे के 2 हुक बचे थे, अगर मैं ये भी खोल दूँ मौसी ऊपर से पूरी नंगी हो जाएगी मेरे सामने। मगर मन ने मना कर दिया और मैं उठकर फिर अपने कमरे में आ गया। मगर जितनी छातियाँ मैं मौसी की देख आया था, वो दृश्य बार बार मेरी आखों के सामने घूम रहा था। मेरा मन फिर से बेईमान हो गया और मैं फिर जाकर मौसी के पास बैठ गया। मैंने फिर से हिम्मत की और मौसी के ब्लाउज़ का पांचवा हुक भी खोल दिया और फिर उसके बाद छठा हुक भी खोल दिया। अब मौसी मेरे सामने नंगी थी, सिर्फ उनके ब्लाउज़ के दोनों पल्ले हटाने थे। मैंने बड़े आराम से दोनों पल्ले उठाकर साइड पे कर दिये। ‘वाह, सृष्टि की सबसे सुंदर चीज़ मेरे सामने थी।’ आज मैंने अपनी ज़िंदगी में पहली बार किसी स्त्री के चुचियों को बिल्कुल नंगा देखा था और वो भी इतनी करीब से। मैं उन चुचियों को चूसना और सहलाना चाहता था, पर डर लग रहा था के मौसी न जग जाए। खैर मैंने हिम्मत करके मौसी के बाएँ चूची पर अपना काँपता हुआ हाथ रखा। मौसी वैसे ही सो रही थी, थोड़ा आश्वस्त होने पर मैं चूची पर अपने हाथ से पकड़ बनाई। मौसी का निप्पल मेरी हथेली के बीच में लग रहा था। जब मैंने एक दो बार हल्के से दबा के देखा और मौसी नहीं जगी तो मैंने अपने दोनों हाथों में मौसी के दोनों चुचियों पकड़ लिये और दबाये। इस बार मौसी थोड़ी कसमसाई, शायद मैंने थोड़ा ज़्यादा दबा दिया। मगर अब दबाने से बात नहीं बन रही थी, मैं तो चूसना चाहता था। जब मैंने मौसी का निप्पल अपने मुँह में लिया तो मौसी हिल पड़ी और मैं भागकर अपने कमरे में जा के बेड पे लेट गया। डर के मारे मेरी गाँड फटी पड़ी थी, अगर मौसी को पता चल गया, अगर वो गुस्सा कर गई, अगर उन्होंने मौसाजी को और मेरे घर पे बता दिया तो? मैं बहुत घबरा गया और आँखें बंद करके ऐसे लेट गया जैसे सो रहा हूँ। थोड़ी देर बाद मुझे नींद आ गई। फिर जब जागा तो मौसी मेरे लिए चाय बनाकर मुझे जगा रही थी, मैं बहुत शर्मिंदा था और मौसी से नज़र नहीं मिला पा रहा था। मैंने उनके चेहरे की तरफ भी नहीं देखा। अगले दिन दोपहर को देखा कि मौसी तो पंजाबी सूट पहने हुये थी। मतलब अब मैं उनका ब्लाउज़ नहीं खोल सकता था, तो क्या मौसी को सब पता चल गया, मुझे बहुत ग्लानि हुई। अगले 3-4 रोज़ मैंने देखा कि मौसी हमेशा पंजाबी सूट ही पहनती थी और इसी वजह से मैं कुछ नहीं देख पाता था। हाँ कभी कभी उनके झुकने से उनकी चुचियों के बीच की रेखा ज़रूर दिख जाती थी पर मैं उनके साथ उस दिन की वारदात भूल नहीं पा रहा था। रात को मौसा जी ने मौसी के साथ सेक्स किया। दोनों की खुसुर पुसुर और कराहटें मैं सुन रहा था। मेरा भी लण्ड पूरा तना हुआ था, पर मैं क्या कर सकता था। अगले दिन सुबह उठा और तैयार होकर कॉलेज चला गया। ![]() जब दोपहर को वापिस आया तो देखा के मौसी नाइटी पहने घूम रही थी। मैंने चलते फिरते उन्हें ध्यान से देखा तो पाया के नाइटी के अंदर उन्होंने न तो कोई ब्रा पहनी थी और न ही कोई पेटीकोट या सलवार। मतलब नाइटी के नीचे वो बिल्कुल नंगी थी। मेरा मन तो खुशी से भर गया। खाना खाते खाते मैं सोच रहा था के अगर आज मौका मिल गया तो मौसी की नाइटी उठाकर उसकी चूत के भी दर्शन करूंगा। खाना खाकर मैं अपने कमरे में लेट गया और मौसी अपने कमरे में टीवी देखने लगी। करीब सवा तीन बजे मैं पानी पीने के बहाने मौसी के कमरे में गया तो देखा मौसी बिस्तर पे फैली पड़ी थी और खर्राटे मार रही थी। मैं पानी पीकर वही खड़ा हो गया और मौसी को घूरने लगा। मौसी की नाइटी पंखे की हवा से थोड़ी थोड़ी उड़ रही थी। नाइटी के अंदर दोनों चुचियों अगल बगल को बिखरे पड़े थे। मैं चुपचाप से जाकर मौसी के पांव के पास जाकर बैठ गया। मैंने अपना सर झुका कर उनकी नाइटी के अंदर देखने की कोशिश की। नाइटी के अंदर मुझे दो गोरी गोरी और मोटी, गुदाज टांगें दिखीं, टाँगों पे थोड़े से बाल थे पर फिर भी चिकनी लग रही थी। उसके ऊपर दो विशाल जांघें, पर जांघें आपस में जुड़ी पड़ी थी, तो चूत नहीं दिख पा रही थी, मैंने मौसी की टांग के नीचे दबी उनकी नाइटी निकालनी शुरू की, धीरे धीरे जितनी नाइटी मैं निकाल सकता था, मैंने निकाल दी। अब जब मैंने मौसी की नाइटी तम्बू की तरह ऊपर उठाई तो वाह क्या नज़ारा था। दो खूबसूरत मोटी मोटी टांगें, उसके ऊपर ताज़ी शेव की हुई चूत, चूत के ऊपर गोरा गोरा गोल पेट, और पेट के ऊपर दो विशाल छातियाँ। यह मेरी ज़िंदगी का पहला अनुभव था जब मैंने कोई औरत पूरी नंगी देखी थी। मैंने मौसी की नाइटी उनके पेट तक ऊपर उठाकर रख दी क्योंकि इससे ऊपर नाइटी जा नहीं रही थी। मैंने अपना चेहरा पास ले जाकर बड़े करीब से चूत के दर्शन किए। शायद मौसी ने कल ही चूत शेव की होगी, क्योंकि रात मौसी मौसा ने अपना प्रोग्राम जो किया था, चूत के आस पास पाउडर लगा था। मैं इस चूत को चूमना चाहता था पर डर रहा था, फिर भी मैंने हिम्मत करके धीरे से अपने होंठों से चूत की दरार को छुआ। मौसी थोड़ी सी हिली, मतलब चूत को छू नहीं सकता था। मगर अब हिम्मत बढ़ती जा रही थी, मैंने अपना पायजामा खोलकर अपना तना हुआ लंड बाहर निकाला और मौसी के सामने हिला के धीरे से अपने मुँह में फुसफुसाया- उठो अनिता, तुम्हारा यार अपना लंड निकाल के तुम्हारे सिरहाने खड़ा है, इसका अभिवादन करो, अपने मुँह में लेकर इसे प्यार करो, अपनी टांगें फैलाकर इस अपनी चूत में लो, उठो डार्लिंग, उठो। पर मेरी आवाज़ इतनी धीमी थी कि सिर्फ मैं ही सुन सकता था। कितनी देर मैं मौसी की चूत देखकर अपना लंड हिलाता रहा, जोश बढ़ता गया और मैं और ज़ोर से लंड हिलाता गया, पता तब चला जब मैं वहाँ खड़ा खड़ा ही झड़ गया। मेरा जो वीर्य छूटा, उसके छींटे बहुत जगह पर फैल गए, मैंने जल्दी जल्दी सारी जगह से साफ किया, मगर एक बूंद मौसी की चूत के पास उनके पेडू पे गिरी जो बहकर चूत की दरार में समा गई, अब उसे तो मैं साफ नहीं कर सकता था, तो सारी तरफ देखकर के सब साफ हो गया, मैं जाकर अपने कमरे में लेट गया। अब तो यह रोज़ का ही रूटीन हो गया, शायद गर्मी के कारण पर मौसी रोज़ नाइटी पहनती और रोज़ मैं उसकी नंगी देखता और लंड हिलाता और झड़ जाता… मतलब मौसी के चक्कर में मैं मुट्ठल बन रहा था। जिस दिन मौसी किसी वजह से न सोती उस दिन मैं बहुत बेकरार महसूस करता। अब तो मैं मौसी के कमरे में और बाथरूम में भी सुराखकर लिए थे और जब भी मौका मिलता तो मौसी को कपड़े बदलते, नहाते और मौसा से चुदते हुये देखता पर मेरी अपनी इच्छा थी मौसी को चोदने की वो पूरी नहीं हो रही थी। फिर एक दिन भगवान मेरे पे मेहरबान हो गया, जब मैं मौसी की नाइटी ऊपर उठाकर उसकी चूत देखते हुये लण्ड हिला रहा था तो मौसी की नींद खुल गई। मुझे तो यह लगता था कि मौसी बहुत गहरी नींद सोती है, सो मैं भी आराम से पूरा नंगा होकर मौसी के बेड के पास खड़ा होता था, पर आज अचानक मौसी जाग गई, मुझे देखकर बोली- यह क्या कर रहे हो? मुझे काटो तो खून नहीं, मैं जल्दी से अपने कमरे के तरफ दौड़ने लगा गिर गया और मौसी ने उठकर झट से मेरा हाथ पकड़ लिया। मैं नंग धड़ंग वहीं फर्श पे ही बैठ गया- मौसीजी गलती हो गई, प्लीज़ माफ कर दो। मैंने विनती की। ‘पहले यह बता,क्या रहा था?’ : मौसी जी। ‘बस गलती हो गई, मौसी, आगे से नहीं करूंगा।’ मैं गिड़गिड़ाया। ‘कब से चल रहा है ये सब?’ मौसी ने थोड़ा नरमी से पूछा। ‘पिछले 20 दिन से, पर मौसी अब नहीं करूंगा।’ मेरी रोने वाली हालत हो रही थी। ‘चल उठकर ऊपर बैठ और मुझे सब बता!’ मौसी ने मेरा पकड़ा हुआ हाथ खींच के बोली। ‘मौसी पहले कपड़े पहन लूँ?’ मैं फिर विनती की। ‘क्यों जब मेरे कपड़े उठाकर देख रहा था तब, मुझे बिना कपड़ों के देखता है और खुद नंगा शर्म महसूस करता है, चल बैठ…’ मौसी ने थोड़ा रोआब से कहा तो मैं मौसी के पास बेड पे बैठ गया और अपने लंड को अपने हाथ से ढकने के कोशिश कर रहा था। मौसी क्योंकि बेड पे बैठी थी तो उनकी नाइटी अभी भी उनके घुटनों तक उठी हुई थी और घुटनों से नीचे उनके टांगें नंगी दिख रही थी। मगर मैं अब उन्हे नहीं देख रहा था। ‘किसने सिखाया तुम्हें ये सब?’ मौसी ने पूछा। ‘किसी ने नहीं।’ मैंने जवाब दिया। ‘तो, क्या देखते थे?’ ‘जी कुछ नहीं!’ ‘कुछ नहीं तो फिर देखते क्यों थे, अच्छा लगता है?’ मैं चुप रहा। ‘इधर देख और बातकर मुझसे, क्या देखते थे?’ मौसी ने ज़ोर देकर पूछा। ‘जी वो…’ मैंने हकलाते हुए कहा। ‘वो क्या?’ मौसी ने फिर पूछा। मैं फिर चुप रहा। मौसी उठकर खड़ी हुई और बिल्कुल मेरे सामने आकर खड़ी हो गई- देख अगर सच बताएगा तो ठीक है, नहीं तो गाँव में तेरे घर में मम्मी को बता दूँगी, कि तूने क्या बदतमीजी की है।’ मैं और डर गया- प्लीज़ मौसी किसी को मत बताना।’ मैं कहा। ‘ठीक हैं नहीं बताऊँगी, अगर तू यह बताएगा कि तो मेरी नाइटी उठा कर क्या देखता था।’ मैंने मौसी से नज़रें मिलाई और बोला- जी वो, आपकी…’ मेरे मुँह से हल्का सा निकला। ‘मेरी वो क्या?’ यह कहकर मौसी ने मेरा हाथ छोड़ा अपनी नाइटी उठाई और उतार के परे फेंक दी, मेरी ठुड्डी को पकड़ के मेरा मुँह ऊपर उठाया और बोली- ले अब देख और बता क्या कहते हैं इसे? मैं मौसी के इस कारनामे से तो हैरान ही रह गया। मौसी ने मेरे कंधों से पकड़ के मुझे बेड पे गिरा दिया और खुद मेरे ऊपर आ लेटी। ‘अब बता हरामखोर, क्या चाहता है मुझसे?’ मैं क्या कहता। मौसी की चूत मेरे लंड पे छू रही थी और उसके दोनों विशाल चुचियों मेरी छाती से सटे थे। मैं तो जैसे हैरानी और आनंद के समंदर में गोते लगा रहा था। मुझे तो जैसे कुछ समझ ही नहीं आ रहा था। ‘चोदना चाहता है मुझे?’ मौसी ने पूछा, तो मैंने हाँ में सर हिलाया। ‘तो ऐसे हाथ से करके क्या होता है, तू कहता तो सही मुझे!’ ‘मैं क्या कहता?’ ‘यही कि मौसी, तुझे चोदना है।’ ‘मौसी आपको चोदना है।’ अब जब सब बात खुल गई थी तो मैंने भी खुल के बोल दिया। मौसी ने करवट ली अब वो खुद नीचे हो गई और मुझे अपने ऊपर ले लिया- तो चल चोद न, किसने रोका है। अब तो सब कुछ खुल्लम खुल्ला हो गया था, मौसी ने मेरा लंड पकड़ा और अपनी चूत पे रखा, मैंने अंदर डालना चाहा तो अंदर गया नहीं, मुझे तकलीफ हो रही थी। ‘क्या हुआ, डालता क्यों नहीं?’ मौसी ने कहा। ‘मौसी दर्द हो रहा है’ मैंने कहा। ‘दर्द, चल दिखा मुझे’ मौसी ने मेरा लंड पकड़ा और अपने हाथ में लेकर देखा- अरे तेरे तो अभी टांके भी नहीं टूटे हैं। तू तो बिल्कुल कुँवारा है, कच्ची कली!और मौसी हंस पड़ी। मैंने हैरानी से मौसी की तरफ देखा तो वो बोली- डर मत, तेरी सील तोड़नी पड़ेगी। ‘वो कैसे?’ मैंने पूछा। ‘वो मेरा काम है, कल रात को तेरा उदघाटन करना है, यह समझ कल तेरी सुहागरात है।’ ‘कल क्यों?’ ‘कल तेरे मौसा समान लाने बाहर जा रहे हैं, 2 दिन बाद लौटेंगे।’ वो बोली। ‘तो दो दिन अपनी मौज है फिर तो?’ ‘बिल्कुल, खुल्ला खाओ नंगे नहाओ।’ मौसी ने मुझे आँख मार के कहा। मैं मन ही मन बड़ा खुश हुआ कि ‘चलो ये काम तो सेट हुआ।’ ‘तो अब क्या करें?’ मैंने पूछा। ‘अब चुस्का चुस्की करें?’ वो बोली। ‘वो क्या होता है?’ मैंने बेधड़क पूछा। ‘तू मेरी चूत चाटेगा और मैं तेरा लण्ड चूसूंगी, ठीक है?’ मुझे भला क्या ऐतराज हो सकता था। मौसी ने मुझे बेड के बिल्कुल बीच में लेटाया, मेरे सर के नीचे सिरहाना दिया, और खुद मेरी छाती पे बैठ गई, उसकी पीठ मेरी तरफ थी उसकी भरी भरकम विशाल गाँड मेरे मुँह के बिल्कुल ऊपर थी। वो झुकी और और मेरा लंड जो पहले ही तन चुका था, अपने मुँह में ले लिया और खुद थोड़ा पीछे सरककर अपनी चूत मेरे मुँह से सटा दी, बेशक उसकी चूत बिल्कुल साफ थी मगर पानी से भीगी पड़ी थी, मैंने उसकी चूत के होंठों से अपने होंठ लगाए और अपनी जीभ उसकी चूत में फेरी, एक अजब से स्वाद मेरी जीभ पे आया, पर बुरा नहीं था। धीरे धीरे मैं अपनी पूरी जीभ उसकी चूत फिराने लगा, मुझे उसकी चूत का पानी का स्वाद लगने लगा। वो तो खैर कितने सालों से शादी शुदा थी, सो लंड चूसने की माहिर थी, उसके चूसने से मेरा उन्माद बढ़ता गया, मैं उसकी पीठ पे, चूतड़ों पे हाथ फिरा रहा था, कभी उसके चूची दबाता, कभी उसके निप्पल को मसलता। मैं अनाड़ी खिलाड़ी था सो बस 5 मिनट में ही उसके मुँह में झड़ गया, मेरा वीर्य उसके मुँह, मेरी जांघों और आस पास बिस्तर पर बिखर गया। मैं तो ठंडा हो गया पर उसका अभी बाकी था, फिर वो उठी- ले तेरा तो हो गया, अब मेरा भी कर दे! ‘जी मौसी!’ मैंने बड़े आज्ञाकारी ढंग से कहा। वो बेड के किनारे पे लेट गई और मुझे नीचे ज़मीन पर घुटनों के बल बैठाया, अपनी दोनों टाँगें चौड़ी करके मेरा मुँह अपनी चूत से लगाया और अपनी दोनों जांघें मेरे कंधों पर रख दी। मैंने चूत चाटनी शुरू की, वो बोली- शुभम अंदर तक जीभ डाल कर चाट! फिर उंगली लगाकर बताया- यह जो चूत का चना है न इसको भी चाट और अपने होंठो में लेकर चूस! मैं उसके बताए अनुसार चाटने लगा। वो अपने हाथों से मेरा सर सहला रही थी और अपनी दोनों जांघों में मेरे सर को कस के पकड़े थी। मैं अपना सर हिला नहीं पा रहा था, सिर्फ मेरी जीभ उसकी चूत के ऊपर नीचे और अंदर बाहर चल रही थी, उसकी साँसें तेज़ हो चली थी, अपनी कमर उचका रही थी और मुँह से न जाने क्या ‘ऊह, आह, उफ़्फ़ ‘ जैसे शब्द निकाल रही थी। और जब मौसी स्खलित हुई तो उसने इतने ज़ोर से अपनी जांघें भींची के मेरा तो जैसे दम ही घुट गया। उसने एक हाथ से अपना चुची पकड़ रखा था और दूसरे हाथ से मेरा सर अपनी चूत में धकेल रही थी, बदन कमान की तरह अकड़ा हुआ था मगर मैंने चाटना बंद नहीं किया, मौसी की चूत का पानी और मेरा थूक चू कर मेरे गले से नीचे तक बह रहे थे। जब मौसी थोड़ी ठंडी हुई तो उसने अपनी टाँगें ढीली की तो मुझे खुलकर सांस आई। ‘वाह, मज़ा आ गया, तेरे मौसा तो दो मिनट भी नहीं चाटते!’ उसके बाद तो मौसी जैसी मेरी बीवी ही बन गई हो, मौसा के आने तक सारा समय चुहलबाजी चलती रही। मैंने जी भर के मौसी के मोटे मोटे चुचियों दबाये, चूतड़ सहलाए। अब तो बस कल का इंतज़ार था। अगले दिन सुबह मौसा अपना सामान लेने चले गए मैं कॉलेज चला गया, जब दोपहर को आया तो मौसी, नाइटी पहने घूम रही थी, मैंने अंदर दाखिल होते ही उसे बाहों में भर लिया और एक जोरदार चुंबन उसके होंठों पे किया। ‘अरे सब्र करो सैयां, मैं कहीं भागी तो नहीं जा रही!’ ‘अरे पूछो मत मौसी जान निकली जा रही है, रात का इंतज़ार नहीं होता, अभी सील तोड़ दो मेरी, जानेमन!’ मैं कुछ ज़्यादा ही बेतकल्लुफ़ हो रहा था। ‘तोड़ दूँगी, पर रात को, सब्र का फल मीठा होता है, बस हिम्मत रखना, कहीं रो मत पड़ना, लल्ला जी!’ ‘नहीं जानेमन, तुम तो मेरा काट के खा भी जाओ तो भी गम नहीं!’ मैं पूरे जोश से बोला। ‘चलो अभी खाना खा लो!’ ‘मौसी, एक बात कहूँ?’ ‘हूँ…’ ‘बिल्कुल नंगे होकर खाना खाएं?’ ‘क्या, पागल हो क्या?’ ‘प्लीज़ मौसी!’ ‘चल ठीक है।’ वो मान गई। जितनी देर में वो खाना डाल के लाई, मैं बिल्कुल नंगा हो चुका था और लंड तनकर लोहा। मौसी पास आ के जब कपड़े उतारने लगी तो मैं बोला- मौसी, रुको, मैं तुम्हें नंगी करूंगा। मौसी हंस पड़ी। सबसे पहले मैंने मौसी की नाइटी उतारी, फिर ब्रा खोली और उसके बाद नीचे पहनी हुई, पेंटी। दोनों ने नंगे होकर खाना खाया, फिर साथ लेटकर टीवी देखते रहे। मैं मौसी के बदन को सहलाता रहा, जब रहा नहीं गया तो मौसी के ऊपर उल्टा लेट गया- मौसी अब सब्र नहीं होता, और नहीं तो चुसका चुस्की ही कर लेते हैं।’ मैंने कहा तो मौसी मान गई। दोनों कितनी देर एक दूसरे को चूसते रहे, इस बार मुझे भी काफी टाइम लगा। इसके बाद तो मैं रात का इंतज़ार कर रहा था और रात थी कि आ ही नहीं रही थी। खैर रात भी आई, 8 बजे ही खाना खा लिया, फिर हम दोनों एक साथ नहाये, फिर अच्छी तरह से सज धजकर तैयार हुये। मौसी ने ऐसे मेकअप किया जैसे आज उसकी शादी हो। मैंने कहा- क्या प्रोग्राम है? वो बोली- आज हम अपनी शादी की सुहागरात मनाएंगे। उसने अपना बिस्तर बड़े अच्छे से लगाया और बिस्तर पर दुल्हन की तरह बैठ गई। मैं उसके पास गया, बेड पे बैठा और धीरे से उसका घूँघट उठाया। उसकी आँखें बंद थी- वाह कुदरत का क्या शाहकार है, कितनी सुंदर बीवी मिली है मुझे! यह कहकर मैंने उसकी होंठों का चुंबन लिया तो उसने मुझे अपने गले लगा लिया। मैंने भी उसे बेड पे लिटाया और उसके साथ लेट गया। उसने अपनी आँखें नहीं खोली, पर मैं उसके चेहरे और होंठों को चूमता हुआ उसके चुचियों तक जा पहुँचा। ‘वाह तुम्हारे चुचियों तो बहुत भारी हैं!’ ‘जी स्वामी, सब आपके लिए है।’ उसने शर्मा कर कहा। ‘मुझे देखने हैं।’ यह कहकर मैंने उसके ब्लाउज़ के हुक खोलने शुरू किए, एक एक करके सब हुक खुल गए तो नीचे उसने सुर्ख लाल ब्रा पहनी थी। मैंने उसके चुचियों दबाये तो बोली- ऊह स्वामी, मत करो, मुझे कुछ कुछ होता है। उसने नकली स्वांग रचते हुये कहा। ‘घबराओ मत प्रिये, आज जो होना है उसे हो जाने दो!’ यह कह कर मैंने अपनी कमीज़ और पैंट उतारी और उसके ऊपर लेट गया, उसके दोनों चुचियों पकड़कर दबाये और अपनी जीभ से उसके होंठ, चेहरे और ठुड्डी को चाटा तो मौसी की सिसकारियाँ निकाल गई। [/ur![]() ![]() ![]() ![]() ![]() ![]() ![]() ![]() मैं उठा और उसकी साड़ी, ब्लाउज़, ब्रा, पेटीकोट और कच्छी सब उतार दी और उसे बिल्कुल नंगी कर दिया। ‘स्वामी, मुझे शर्म आ रही है।’ उसने नाटक सा किया। ‘शर्माओ मत, ये लो!’ ये कहकर मैंने अपनी बनियान और चड्डी भी उतार दी। ‘उफ़्फ़, कितना बड़ा है आपका वो!’ यह कहकर उसने अपने चेहरे को हाथों से ढक लिया। मैं अपना लंड उसके चेहरे के पास लेकर गया और उसके हाथ चेहरे से हटाकर बोला- इसे चूस के देख मेरी जान! तो उसने बिना किसी हिचकिचाहट के लंड अपने मुँह में लिया और चूसने लगी। मैंने भी उसे सीधा किया और अपना मुँह उसकी टाँगों में घुसेड़ दिया और उसकी चूत चाटने लगा। कुछ देर ऐसे ही चलता रहा, फिर मौसी बोली- स्वामी अब और बर्दाश्त नहीं होता, मेरे अंदर समा जाओ। मैंने कहा- अभी लो जानेमन। मैंने उसकी टाँगें खोली और अपना लंड उसकी चूत पे रखा और अंदर धक्का मारने की कोशिश की, पर दर्द के कारण मैं लड बाहर निकाल लेता। 3-4 बार कभी थूक लगाकर कभी कैसे ट्राई किया पर बात नहीं बनी तो मौसी बोली- स्वामी मैं कोशिश करके देखूँ? मैंने कहा- हाँ तुम देखो, साला जाता ही नहीं। वो उठी और किचन में चली गई, वहाँ से तेल की बोतल उठाकर लाई- आप नीचे लेटो। जब मैं लेट गया तो उसने ढेर सारा तेल मेरे लंड पे लगाया और अपनी चूत के अंदर भी लगाया- अब देखना पिचक से अंदर घुस जाएगा और पता भी नहीं चलेगा। तेल की बोतल साइड पे रख के मौसी मेरे ऊपर आ बैठी, उसने मेरा लंड अपने हाथ में पकड़ा और अपनी चूत को लंड के ऊपर सेट किया, थोड़ा सा लंड अंदर बाहर किया, तो मैंने देखा कि लंड और बड़े आराम से अंदर बाहर हो रहा है। ‘ठीक है?’ मौसी ने पूछा। ‘हाँ मौसी, ठीक है।’ मैंने भी जवाब दिया। ‘तो आगे शुरू करें?’ ‘हाँ’ मैंने पूरे जोश से कहा। बस उसके बाद मौसी ने एक ज़ोर का झटका मारा और मेरा आधे से ज़्यादा लंड उसकी चूत में घुस गया पर मैं दर्द से बिलबिला उठा। ‘आह मौसी, मर गया!’ मेरे मुँह से बस इतना ही निकला। ‘कुछ नहीं होता, बस चुपचाप लेटा रह!’ कहकर मौसी ने फिर झटका मारा। हर झटके के साथ मेरा लंड मौसी की चूत में अंदर जा रहा था और मेरा दर्द बढ़ रहा था, पर मौसी ने मुझे पूरी तरह से अपने क़ाबू में कर रखा था। तेल ने बड़ी भूमिका निभाई और मेरा लंड 2-3 घस्सों में पूरा मौसी की चूत में समा गया। जब सारा अंदर चला गया तो मौसी बोली- देख सारा अंदर चला गया, अब तो दर्द नहीं हो रहा। ‘दर्द तो है मौसी, पर मज़ा भी आ रहा है।’ ‘तो और मज़ा ले!’ ये कहकर मौसी ज़ोर ज़ोर से घस्से मरने लगी और मेरा लण्ड उसकी चूत में अंदर बाहर होने लगा। मुझे लग रहा था जैसे उसकी चूत आज कुछ ज़्यादा ही पानी छोड़ रही है, मैंने मौसी से कहा- मौसी आज कुछ ज़्यादा ही पानी छोड़ रही हो’। ‘अच्छा, चलो देखते हैं।’ यह कहकर मौसी ने मेरा लंड अपनी चूत से बाहर निकाला तो मैं तो देख के हिल गया। मौसी की चूत और मेरा लंड दोनों खून से लथपथ थे, मेरे लंड की सील टूट चुकी थी और उससे खून निकल रहा था। ‘यह क्या कर दिया मौसी, यह तो खून निकाल रहा है।’ ‘तो क्या हुआ, अगर हाथ से सील तोड़ता फिर तो निकलता, डर मत सबके निकलता है, चाहे लड़का हो या लड़की।’ खैर कुछ देर मैं वैसे ही लेटा रहा, मौसी ने मेरे लंड पे बर्फ लगाई, थोड़ी देर बाद जब खून बंद हो गया तो मैं लंड पकड़कर लेट गया, मुझे बहुत दर्द हो रहा था। मौसी रसोई से एक ग्लास गरम दूध ले आई और मुझे पिलाया। दूध पीकर थोड़ा ठीक सा हुआ मैं तो मौसी ने मुझे अपनी बाहों में भर लिया- मेरे राजा, यह तो पहली बार सबके साथ होता है। मगर अब मैं सेक्स के मूड में नहीं था, पर थोड़ी देर की चूमा चाटी के बाद फिर से मूड बन गया। मौसी ने फिर से ढेर साला तेल मेरे लंड पे लगाया, इस बार मैं ऊपर था और जब मैंने डाला तो बड़े आराम से मेरा लंड मौसी की चूत में समा गया। जब सारा अंदर चला गया तो मौसी ने पूछा- अब दर्द हो रहा है क्या? ‘हाँ, थोड़ा सा, पर मज़ा भी आ रहा है।’ धीरे धीरे मैंने अपनी स्पीड बढ़ाई और मौसी नीचे से गांड उठा उठा के मेरा साथ दे रही थी, मुझे ऐसा लग रहा था कि शायद चुदाई करने से मेरे लंड से फिर से खून निकलना शुरू हो गया था पर अब मैं इस थोड़े से दर्द के लिए अपने जीवन का सर्वोत्तम आनन्द नहीं छोड़ सकता था। मैं अपने दर्द की परवाह किए बिना मौसी की चुदाई कर रहा था और मौसी मेरे नीचे लेटी ‘ऊह, आह, ऊफ़्फ़’ और ना जाने क्या क्या बड़बड़ा रही थी। उसकी सिसकारियाँ मेरा रोमांच बढ़ा रही थी… आज तक जो सिसकारियाँ मैं छुपके सुनता था आज वो सिसकारियाँ मेरी वजह से निकल रही थी, सच पूछो तो मन में मैं बहुत खुश था। मुझे महसूस हुआ के मौसी मुझसे ज़्यादा नीचे से ज़ोर लगा रही है, मैंने पूछा- क्या हुआ, बहुत ज़ोर लगा रही हो? ‘बस बोलो मत, मेरा होने वाला है।’ यह कहते कहते मौसी ने अपनी कमर ऊपर उठा ली जैसे चाहती हो कि लंड के साथ मैं भी उसकी चूत में घुस जाऊँ। मैंने भी थोड़ा और ज़ोर लगाया, उसके बाद वो धड़ाम से नीचे गिर गई और अपने हाथ पैर फैला के लेट गई। ‘मज़ा आ गया, उफ़्फ़, बहुत बढ़िया चुदाई करतो हो तुम!’ मौसी ने मेरी पीठ थपथपाई तो मन में अजीब सा हर्ष पैदा हुआ। अब मैं भी झड़ना चाहता था, मैंने पूरी स्पीड से चुदाई शुरू की और 2 मिनट बाद ही मैंने अपने मर्दांगी के रस से मौसी की चूत को भर दिया। अपनी पहली और जोरदार चुदाई से मैं थक गया था और मैं ऐसे ही सो गया। अगली सुबह उठा तो देखा लंड तो सूजा पड़ा था और दर्द भी हो रहा था। खैर दो दिन तक मैंने आराम किया और मौसी ने मेरी बहुत सेवा की, मुझे दवा खिलाई, मेरी खुराक का ख्याल रखा, मेरे लंड की मालिश भी की। तीसरे दिन मैं बिल्कुल ठीक था पर उस दिन मौसा जी के आने का दिन था सो मैं सारा दिन मौसी के इर्द गिर्द घूमता रहा। मेरे सर पे तो फिर से कामसूत्र चढ़ा था। मैं तो नाइटी उठाकर मौसी की चूत तो क्या उसकी गांड भी चाट गया पर वो देने को तैयार ही नहीं हुई। यह अलग बात थी कि जब वो किचन में खड़ी खाना बना रही थी और मैं उसकी नाइटी में घुसा हुआ उसकी गांड के सुराख पर जीभ फेर रहा था और अपने दायें हाथ की दो उंगलियाँ उसकी चूत में डाल रहा था, तो वो पूरी कसमसा रही थी पर चुदवाने के नाम पर हर बार बहाने से बनाती रही। जब शाम हो गई तब जाके बोली- सब्र रख, तेरे मौसाजी आज नहीं आएंगे, वो कल आएंगे। मेरे तो जैसे भाग खुल गए, मैंने पूछा- तो फिर? वो बोली- तो आज फिर मेरी सुहागरात है।
17-10-2026, 03:10 PM
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तीन अध्याय............. पुनम दुबे ( अनुज की मां )
![]() यह कहानी है झारखंड के रहने वाली एक बहुत ही संभ्रांत घर की महिला जिसका नाम है पुनम दुबे । ............................... मैं, पुनम दुबे , उम्र करीब 40 वर्ष, एक अमीर और रसूखदार परिवार की मालकिन हूँ। एक बेटा है । पति का कारोबार है , मगर जितना बड़ा कारोबार होता है, उतनी ही परेशानियाँ भी होती हैं। इन्हीं परेशानियों की वजह से मेरे पति को हाई शूगर हो गई, शूगर का सबसे ज़्यादा असर उनकी आँखों, स्किन और सेक्स पावर पर हुआ। जो आदमी मुझे आधा पौना घंटा रगड़ता था वो इंसान अब इस हालत में था कि मैं जो मर्ज़ी कर लूँ मगर उसके अंग में कोई करार नहीं आता था, ज़िंदा तो है मगर एक मुर्दा के समान था। अब आप सोचेंगे कि एक औरत होकर मेरी भाषा ऐसे कैसी हो गई? तो सुनो, आज की बात नहीं है, करीब 2 साल पहले मैं अपनी किट्टी पार्टी में गई थी, वहाँ पर मेरी एक सहेली जो अपने पति की शुगर की प्रॉबलम के वजह से मेरी तरह ही कामवासना में जल रही थी, उसने मुझे बताया कि अगर ज़्यादा आग लगे तो कामवासना को अपने ही हाथ से ही अपनी वासना को शांत कर लिया कर! अब पिछले 2 साल से मैं यही कर रही हूँ। जब घर पे कोई नहीं होता तो अपने लैपटाप पे अश्लील वीडियो चलाती और कोई भी चीज़ जो मुझे ठीक ठाक लगे लेती और अपने चूत के अंदर डालती और अपनी आग बुझा लेती । किसी को पता भी नहीं चलता, कामुकता भी शांत हो जाती, और बाहर मुँह मारने की भी ज़रूरत नहीं पड़ती । और जब पति को बताती तो उन्होंने भी बुरा नहीं लगता , बल्कि मुझे एक प्लास्टिक का लंड लाकर दे दिया। अब तो हालत यह हो गई कि पतिदेव मेरी चाटते, मैं उनका मरा हुआ लंड चूसती, वो खुद उस नकली लंड को मेरी चूत में पेलते, और जब दोनों शांत हो जाते तो सो जाते। कभी कभी मैं अकेली भी कर लेती, कभी कभी जब मेरा दिल करता तो पति के सामने ही कर लेती… वो भी हंस देते, उन्हें पता था कि मैं जो भी कर रही हूँ उनके सामने ही कर रही हूँ। बेशक मेरी सेक्स की ज़रूरत पूरी हो रही थी, मगर फिर दिल में एक बात बार बार आती कि अगर कोई सच में ऐसा मर्द हो जिसका लंड सच में इस डिल्डो (नकली लंड) जितना तगड़ा हो तो उससे चुदकर क्या मज़ा आए! मगर इसके लिए मुझे बाहर किसी और मर्द से चुदवाना पड़ता और वो मेरी बदनामी का कारण हो सकता था। चलो खैर… शाम को मैं कभी कभार क्लब चले जाती थी , अब जब घर में बेइंतेहा पैसा हो तो पैसा अपने साथ बहुत सी बुरी आदतें भी लाता है। मुझे शराब और सिगरेट की आदत थीं। दिवाली की रात थी, मैं क्लब में थी , मैंने उस दिन खूब दारू पी। करीब ढाई बजे रात तक जब मुझे लगा कि ज़्यादा हो गया है तो मैंने अपने सहेली से बोली घर चलने को । मगर वह तो जुआ खेलने में फंसी थे, वो बोली - तुम जाओ घर, मैं तो अभी और खेलूँगी। मैं क्या करती, क्लब के बाहर आई नशे में और मैं लड़खड़ा रही थी, कार में बैठी और ड्राइवर घर तक ले आया। कार से उतरकर जाने लगी तो लड़खड़ा के गिर पड़ी। ड्राइवर भागा भागा आया और आकार उसने मुझे उठाया- अरे मैम संभाल कर! बेशक उसने मुझे सहारा देकर उठाया, मगर उसके हाथों के छूने से मैं पहचान गई कि साला मौके का फायदा उठा रहा है। वरण संभालने में कोई किसी औरत की छाती पकड़ता है किया। मैंने उसका हाथ आराम से हटा दिया। फिर एक बार सोचा, आज घर में कोई नहीं है, अगर मैं इसे ही अपने बेडरूम में ले जाऊँ तो? फिर सोचा, नहीं नहीं, यह तो पता नहीं किस किस को बताएगा कि मैंने मेंमसाब की चूत चोदी ली है। छोड़ो इसे, मैं खुद को संभालती अपने बेडरूम में आ गई । एसी ऑन किया, बाथरूम में गई, अपने सारे कपड़े उतारे, पहले तो शावर के नीचे बैठे के खूब नहाई, फिर वापिस अपने कमरे में बिना कोई कपड़ा पहने ही आ गई! मगर यह क्या, कमरे की बत्ती क्यों बंद है, मैं तो जलाकर गई थी। जैसे ही मैं बत्ती जलाने लगी, किसी ने मुझे पीछे से धर दबोचा और मुझे पटखनी देकर नीचे कालीन पे ही गिरा दिया। उसने एक हाथ से मेरा मुँह बंद किया और बोला- देखो आंटी अगर चुप रहोगी तो जान बच जाएगी। मैंने उसे इशारे में ' हाँ ' कही। उसने मेरे मुँह से धीरे से अपना हाथ हटा लिया। ‘क्या चाहते हो?’ मैंने थोड़ा अकड़कर पूछी। ‘मैं एक चोर हूँ और तेरे घर में चोरी करने आया हूँ।’ वो बोला। मैंने पलटकर उसकी तरफ देखा, उसके मुँह पे कपड़ा बंधा था। मगर मैंने यह भी महसूस किया था कि जैसे उसने मुझे नीचे गिराने में और मुझे दबा के रखने में अपनी ताक़त दिखाई थी, वाकई वो एक तगड़ा मर्द था। मेरे दिमाग में तभी एक खुराफात ने जन्म ले लिया, मैं बोली- कितने की चोरी करोगे हमारे घर में? वो बोला- जितने की हो सके! मैंने कहा- अगर मैं तुम्हें कुछ पैसे दूँ तो क्या तू मेरे लिए एक काम करेगा? ‘क्या काम’ उसने पूछा। मैंने कहा- पहले छोड़ तो! वो बोला- अगर तुमने शोर मचा दिया तो… मैं ये चक्कू तुम्हारे आर पार कर दूँगा। मैंने कहा- अबे चूतिये, जो ये तू हाथ में लिए फिरता है न, इससे बड़े बड़े से खेली हूँ, मैं, दुबे की लड़की हूँ, इन छोटी मोटी चीजों से नहीं डरती। उसकी पकड़ मुझपर ढीली पड़ गई। मैंने उसे धक्का दे के नीचे गिरा दिया और उठकर कमरे की बत्ती जलाई। ‘ओ तेरे दी, आप तो नंगी हैं?’ कहकर उसने अपना मुँह दूसरी तरफ घुमा लिया।मैंने कहा- न जब पिछले पाँच मिनट से मुझे नीचे दबा कर लेटा था, तब नहीं पता था कि मैं नंगी हूँ? ‘जी, मैंने ख्याल नहीं किया!’ वो बोला। ‘अच्छा, और ये जो तेरी पेंट में उठा हुआ दिख रहा है, वो क्या?’ कहकर मैं ड्रॉअर के पास गई, उसमें से एक सिगरेट का पैकेट और लाइटर निकाला, एक सिगरेट खुद लगाई एक उस को दी और जाकर बेड पे बैठ गई। मैंने उसे पास बुलाया और बेड पर बैठने का इशारा किया। वो आकर बेड के एक किनारे पे बैठ गया और मेरे गुप्तांगों को चोरी चोरी देखने लगा। ‘क्यों, कभी कोई औरत नहीं देखी?’ मैंने एक कश लगाकर उससे पूछा। वो बोला- जी बहुत देखी हैं, मगर आपकी उम्र की पहली बार देखी है। ‘क्यों, क्या खराबी है मेरी उम्र में?’ मैंने कहा। वो कुछ न बोल पाया- आप कुछ काम के बारे में कह रही थी। मैं आलथी पालथी मारकर बैठ गई- देख बात सुन मेरी, ये काम तुम पैसे के लिए करते हो, अगर मैं तुम्हें कुछ पैसे दूँ, तो क्या मेरा कहा काम करोगे? उसने मेरी शेव की हुई चूत की तरफ देखा- काम क्या है? मैंने अपनी पीठ बेड से टिकाई और अपनी दोनों टाँगें चौड़ी करके अपनी उंगली से अपनी चूत की तरफ इशारा करके बोली- इसे चोदना है। ‘इसे…?’ कहकर वो हैरानी से उठ खड़ा हुआ। ‘क्यों, तुमने भी औरत को नहीं चोदी , जो इतना हैरान हो रहा है ?’ मैं बोली ‘मगर आंटी, मैंने आज तक कभी इतनी उम्र की औरत के साथ चुदाई नहीं किया।’ वो बोला। ‘देख सबसे पहले तो मुझे आंटी मत बोल, दूसरी बात, अगर तुम्हें मज़ा और पैसे दोनों मिले तो दिक्कत क्या है यार?’ मैंने कहा। उसने फिर से मेरे नंगे बदन को देखा और बोला- पैसा कितना दोगी? मैंने कहा- तुझे कितना चाहिए? वो बोला- 5 हज़ार। मैंने दराज़ से पैसे निकले और बिना गिने उसकी तरफ फेंक दिये। उसने पैसे उठाए और गिने- ये तो 9 हज़ार हैं। ‘गो टू बाथरूम और नहा कर आओ!’ मैंने उसको हुकुम सुनाया। वो बाथरूम में चला गया। मैंने एक पेग और बना लिया और धीरे धीरे पीने लगी। पेग लेकर मैं बाथरूम के दरवाजे पे गई, दरवाजा खोला, वो अंदर बिल्कुल नंगा नहा रहा था मेरी तरफ उसकी पीठ थी। मैंने उसका काला बदन, चौड़ा सीना, मजबूत जांघें निहारी और वहीं से खड़ी खड़ी मैंने कहा- जब नहा लो तो कपड़े मत पहनना, ऐसे ही बाहर आ जाना। जब वो नहा लिया तो मेरे कहे अनुसार नहा के नंगा ही बाहर आ गया, जब वो बाहर आया तो मैंने उसका लंड भी देखा। मैंने उसे इशारे से अपने पास बुलाया। वो मेरे पास आया, मैंने उसका लंड पकड़ के उसे अपने पास खींच लिया और उसका लंड सीधे अपने मुँह में ले लिया। एक मिनट से भी कम समय में उसका लंड तनकर लोहा हो गया। मैं चाहती थी के उसका लंड मैं चबाकर खा जाऊँ। ‘मेरी चूत चाटेगा?’ मैंने उससे पूछा। वो बोला- हाँ चाट लूँगा, पैसे जो मिले हैं। उसने मेरी कमर के दोनों तरफ अपनी बाहें कसी और खुद बेड पर लेट गया और मुझे अपनी ताकत से घूमाकर मुझे अपने ऊपर लेटा लिया। वाह क्या ताकत थी, उसकी इसी अदा पर मैं निहाल हो गई। वो मेरी चूत चाटने लगा, मुझे बहुत मज़ा आया तो मैंने भी उसका लंड जितना हो सकता था अपने मुँह के अंदर तक लेकर चूसी। दो मिनट की चूसा चासी के बाद उसने मुझे नीचे लेटा दिया और खुद ऊपर आ गया, उसने अपना लंड मेरी चूत पे रखा और एक ही धक्के से आधे से भी ज़्यादा लंड मेरे जिस्म में उतार दिया। मैं दर्द से बिलबिला उठी, मगर उस पर अब कामुकता सवार हो गया था, उसने मेरी दोनों चुचियों अपने सख्त हाथों में पकड़ ली और मसल के रख दी। ऊपर वो मेरी चूचियों मसल रहा था और नीचे से लोहे जैसे अपने लंड से मेरे जिस्म के दो टुकड़े करने में लगा था। हर बार उसका लंड मेरी चूत के आखरी सिरे पे जाकर ज़ोर से लगता और मेरी हल्की से चीख निकल जाती। वो अपना पूरी लंड बाहर निकालकर फिर से अंदर डालता और मेरी चूत के होंठों से लेकर मेरी बच्चेदानी तक उसके सख्त लंड की मार झेल रही थी। मैं तो सिर्फ एक चुदाई चाहती थी, मगर ये तो एक चुदाई से कहीं ज़्यादा थी। ![]() ![]() ![]() ![]() ![]() ![]() मेरी तो जान निकली जा रही थी, वो कभी मेरे होंठ चूसता, कभी मेरे गालों को अपने दाँतो से काटता, मेरे चुचियों पर । सभी जगह उसके दाँतों के निशान पड़ चुके थे। मैं इस ताकतवर संभोग के लिए तैयार नहीं थी, आज मुझे एहसास हो रहा था कि मैं सच में बूढ़ी हो गई हूँ। एक नौजवान औरत ही इस तरह के ताकतवर संभोग को झेल सकती है, मैं नहीं। शायद इसी लिए, मैं 3-4 मिनट की जोरदार चुदाई में ही झड़ गई। मगर मेरे झड़ने से उसको कोई फर्क नहीं पड़ रहा था, वो उसी जोश और जुनून से मुझे चोद रहा था। मैं तो बेहाल होकर नीचे पड़ी थी। करीब सात मिनट उसने मुझे और चोदा और फिर अपनी पूरी ताकत झोंककर वो मेरी चूत में स्खलित हुआ। उसके वीर्य की धारें मुझे मेरी चूत के अंदर मेरी बच्चेदानी पर पड़ती ऐसे लगी जैसे कोई पिचकारी से पानी की धार मार रहा है। उस नौजवान मर्द की एक चुदाई ने ही मेरे बदन को तोड़कर रख दिया। वो मेरी बगल में लेट गया।मैं उठी और मैंने उसके लंड को हाथ में पकड़ा, उसमें अब भी बहुत करार था।मैंने उसे अपनी जीभ से चाटा और मुँह में लेकर चूसा, उसके वीर्य को उसके लंड से चाट चाट कर खा गई। ‘क्यों आंटी, मज़ा आया?’ वो बोला। ‘सच कहूँ, तूने तो मेरी माँ चोद के रख दी, बहुत ताकत है रे तुझमें।’ मैंने उसके सीने पे हाथ फिरते हुये कहा। ‘और चुदेगी?’ उसने मेरे निप्पल को अपनी उँगलियों से मसलते हुये पूछा। ‘नहीं, मेरी तो एक बार में ही तसल्ली करवा दी तूने, नाम क्या है तेरा?’ मैंने पूछा। ' अजय ' यह मेरा फोन नंबर है, फिर कभी ज़रूरत पड़ी तो फोन करना, पर एक बात कहूँ, मुझे भी तेरी लेकर बड़ा मज़ा आया, इस उम्र में भी तू बड़ी हॉट है।’ कहकर वो उठा और कपड़े पहनने लगा। ‘अब क्या करेगा’ मैंने उससे पूछा। ‘तुझे तो लूट लिया, अब देखता हूँ किसी और घर में कुछ और मिलता है क्या रोटी भी तो खानी है, केवल चुदाई से ही तो पेट नहीं भरता !’ कहकर वो चला गया और मैं बेड पर लेटी सोच रही थी, क्या वो मुझे लूट के गया या मैंने अपने ज़िंदगी का मज़ा लूट लिया। उसने मेरे घर में चोरी की या मैंने अपनी बोरिंग ज़िंदगी से अपनी खुशी की अपनी संतुष्टि की कुछ घड़ियाँ चुरा ली, जो भी हुआ, बहुत ही बढ़िया हुआ। अभी नींद नहीं आ रही थी, मैंने अपना लैपटाप उठाया और फिर एक अश्लील वीडियो देख ली और अश्लील कहानी पढ़ने लगी, तभी मुझे ख्याल आया क्यों न अपनी कहानी भी मैं xossipy पे छपवाऊँ। तो मैंने जो कहानी सबसे पहले खोली वो थी mother and son : a taboo affair 3 बस उसके लेखक puja3567853 को ई मेल करके पूछी कि क्या वो मेरी कहानी छपवा देगी।
17-10-2026, 03:15 PM
(This post was last modified: 17-10-2026, 03:19 PM by Puja3567853. Edited 1 time in total. Edited 1 time in total.)
चौथा अध्याय.....… शालिनी सिंह ( शुभम की मां )
![]() आपके लिए पेश है, झारखंड की शालिनी सिंह । मैं शालिनी सिंह , मैं 39 साल की हूँ, बात पिछले 2 साल पहले की है, एक शाम मार्केट से वापिस आई तो शाम का खाना खाकर । अपने बेड पे लेटी हुई थी, करीब साढ़े सात बजे मेरी एक महिला सहेली कुसुम का फोन आया । कुसुम बोली - शालिनी , मुझे तेरी एक मदद चाहिए । मैंने थोड़ा हैरान होते हुये पूछी - कैसी मदद चाहिए ? कुसुम ने कहा: मेरा एक बॉयफ्रैंड अभी मुझसे मिलना चाहता इस लिए मैं उसे तेरे घर पर बुलाना चाहती हुं। मैंने कहा : तेरे घर पर किया प्रोब्लम है ? कुसुम ने कहा : तू तो जानती है ना मेरे घर मेरे ससुर और बच्चे हैं। मगर तेरा घर तो बिल्कुल खाली हैं तेरा पति और बेटा बाहर में रहते हैं इस लिए तेरे घर पर बुलाना चाहती हुं। मैंने कहा : जब ऐसी प्रोब्लम है तो तु उसे इतनी रात घर पर क्यों बुला रही है। कुसुम ने कहा : तुझे तो पता है ना मेरे पति को नौकरी पर गये हुऐ छः महीने बीत चुका है इस लिए पिछले छः महीने से चूत को लंड की जरूरत है इसलिए बुला रही हुं। मैंने कहा : अच्छी ठीक है, बुला ले । वैसे भी वह तो तेरी लेगा , मेरी तो नहीं। कुसुम ने कहा : अगर तू बोलेगी तो तेरे लिए उसे राज़ी करवा लुंगी। मैंने कहा- अरे तू पागल हो गई है क्या, ऐसे कैसे किसी से भी सेक्स कर लूँगी मैं? कुसुम ने कहा : देख यार वो यहाँ आएगा, मुझे तेरे सामने तेरे ही बेड पे सेक्स करेगा, देखकर तेरा भी मन मचलेगा, तो क्यों न दोनों सहेलियाँ, एक साथ एंजॉय करें, मैं उधर तू इधर! मैं कुछ सोचने लगी तभी कुसुम फिर बोली- देख दिल तो तेरा भी कर रहा है, अगर लड़का पसंद न आया, तो मत करना अगर पसंद आ गया तो कर लेना, किसको पता चलने वाला है और हमारे सिवा और कौन देख रहा है, क्यों क्या बोलती है?’ मैं थोड़ी देर सोचने के बाद उसे हां कर दिया और बोली - ठीक है, अगर लड़का ठीक ठाक हुआ तो देख लेंगे। कुसुम ने अपने बॉय फ्रेंड को फोन किया और मेरे घर बुलाया। करीब आधे घंटे बाद, दरवाजे पे दस्तक हुई, मैंने उठकर दरवाजा खोली तभी एक लड़का अंदर आया , करीब 6 फीट लंबा, गोरा चिट्टा, देखने में भी सुंदर था और स्पोर्ट्समैन लग रहा था। उसने टी शर्ट और बरमूडा पहने हुये थे। उसके अंदर आते ही कुसुम ने गले लगा लिया और उस लड़के ने भी कुसुम के होंठों पे ज़ोर से किस किया। थोड़ी देर किस करने के बाद दोनों अलग-अलग हुए लड़का कुर्सी पे बैठ गया। थोड़ी देर कुसुम और उसका यार आपस में बातें करते । मैं चुपचाप उस दोनों से थोड़ी दूर कुर्सी पे बैठ गई और मैं अपने फोन चला रही थी ,पर मेरा दिल बहुत तेज़ी से धड़क रहा था। तभी कुसुम ने मुझे कहा - अरे शालिनी , वहाँ बैठी क्या कर रही है, इधर आ! मैं थोड़ा कशमकश में उलझी उठकर कुसुम के पास गई और एक साइड पे बैठ गई, तो कुसुम ने मेरा इंट्रोड्यूस अपने यार गौरव से करवायी। गौरव ने मेरे साथ हाथ मिलाया,गौरव का हाथ बहुत सख्त और मजबूत था, उससे हाथ मिलाते हुये मेरे दिल के तार झनझना उठे। हाथ मिलाने के बाद उस लड़के ने मुझे एक गिफ्ट सा दिया- यह आपके लिए! मैंने थैंक्स कहकर ले लिया और खोलकर देखा उसमे मेरी ही पसंद के चोकलेट्स थे, शायद कुसुम ने मेरी पसंद बता दी होगी। हम दोनों में अभी कोई बात नहीं हुई थी, मगर कुसुम और गौरव का प्रोग्राम बन चुका था सो गौरव बोला- देखो कुसुम हम यहाँ बातें करने नहीं आए हैं, इस लिए हमारा बेड कहां है , मुझे एंजॉय करना है और अगर आपको भी एंजॉय करना है तो बेड पे आ जाओ। मैं कुसुम की तरफ देखी वो कुर्सी छोड़ के उठ खड़ी हुई और बेडरूम में जाकर बेड़ को तैयार करने लगी । इधर गौरव मेरे पास आया और बोला- आपके पास कौन सा फोन है? मैंने उसे अपना फोन दिखाया। ‘ओह गुड!’ इसमें कौन-कौन से वीडियो हैं ? : गौरव ने कहा मैं उसे अपने फोन पे डाऊनलोड किए हुये वीडियो दिखने लगी। ‘वटसऐप पे वीडियोज़ तो आती होंगी?’ फिर गौरव ने पूछा। ‘नहीं नहीं आती हैं।’ मैंने कहा। इससे मतलब साफ था कि वो मुझे सेक्सी वीडियोज़ दिखाकर गरम करना चाह रहा था, जबकि गरम तो मैं पहले से ही थी, बस शर्म का लिहाफ ओढ़े लेटी थी। मैंने कुछ नहीं कहा, मगर फिर भी उसने ने अपने मोबाइल पे एक सेक्सी वीडियो खोलकर मुझे देखने को दी। मैंने उसका मोबाइल अपने हाथ में पकड़ा और वीडियो देखने लगी, जबकि मन में मैं सोच रही थी ‘यार ये क्या दिखा रहा है, तू सीधा ही आकर पकड़ ले मुझे , मैं कौन सा मना करने वाली हुं ! वीडियो में क्या था, एक अंग्रेज़ लड़की को एक अंग्रेज़ लड़का चोद रहा था। जब 2 मिनट की वीडियो मैं देख चुकी तो गौरव ने पूछा- शालिनी , क्या मैं भी तुम्हारे साथ आकर बैठ के ये वीडियो देख सकता हूँ। मतलब साफ था वो मुझे बेड पे ले जाना चाहता था, । मैंने उसे ' हां ' कहा। फिर हम दोनों बेड पर पहुंचे । वहां कुसुम पहले से मौजूद थी । वो मेरे बिल्कुल पास आकर साथ में सटकर बैठ गया। कोई बढ़िया सा पर्फ्यूम लगाकर आया था, उसका मोबाइल मेरे ही हाथ में था, वो मोबाइल पे अलग अलग वीडियो चलाकर दिखा रहा था, कभी कोई कभी कोई, इसी दौरान उसने अपना हाथ मेरे पीछे से घूमाकर मेरे कंधे के पास रख लिया। एक तरह से मैं उसकी आगोश में आ गई थी, अब जब दोनों मोबाइल पर एक के बाद एक ब्लू फिल्में देख रहे थे, तो मेरा भी ज़्यादा नखरे करने का कोई मतलब नहीं बनता था, मैंने भी उसे इशारा देने के लिए उसके कंधे पर ही अपना सर टिका लिया, सर टिकाते ही उसने मुझे अपनी दोनों बाहों में ऐसे घेर लिया जैसे मैं उसकी गर्ल फ्रेंड हूँ, खैर मुझे भी इस बात का कोई बुरा नहीं लगा। जब 2-3 वीडियोज़ हमने देख ली तो गौरव ने पूछा- शालिनी , क्या मैं तुम्हें किस कर सकता हूँ? मैं कुछ न बोली, तो उसने खुद ही मेरी ठोड़ी पकड़ी और मेरा चेहरा ऊपर को उठाया और मेरे होंठों पे एक हल्का सा चुम्बन लिया, मैंने कोई विरोध नहीं किया और उसे आराम से चूम लेने दिया। मगर उसने एक चुंबन लेकर ही बस नहीं की, एक के बाद दो,तीन बार मेरे होंठों को चूमा और उसके बाद मेरे होंठों को अपने होंठों में ही लेकर चूसने लगा। मुझे भी बहुत अच्छा लगा, मैं उसी की तरफ घूम गई और उसे अपनी बाहों में भर लिया, वो भी आगे को सरक गया और मुझे सीधा लेटा कर ऑल्मोस्ट मेरे ऊपर ही चढ़ गया। मेरे होंठ चूमते चूमते उसने मेरे चुचियों पे हाथ रखा और बड़े आराम से धीरे धीरे दबाया, पहले एक और फिर दूसरा। मैं उसे किसिंग में सहयोग देती रही, मज़ा तो मुझे भी आ रहा था, चाहे ये बहुत अजीब लग रहा था कि जिस इंसान को मैं 15 मिनट पहले जानते भी नहीं थी, वो इस वक़्त मेरे बदन से खेल रहा था। मेरी तरफ से सहयोग देखकर उसने मेरी टी शर्ट के अंदर हाथ डाला पहले मेरी पीठ को सहलाया और फिर हाथ आगे बढ़ा के मेरे चुचियों पे ले आया। रात को सोते वक़्त मैं ब्रा पेंटी कभी नहीं पहनती सो नीचे से तो नंगी ही थी। दोनों चुचियों को दबा दबा के मसलने के बाद वो बिल्कुल मेरे ऊपर आ गया, अपने पाँव से उसने मेरे दोनों पाँव अलग किए, अपनी टाँगों से मेरी दोनों टाँगें खोली और खुद को मेरे बीच में एडजस्ट कर लिया। उसके कड़क लंड को मैं अपनी चूत पे लगा हुआ महसूस कर रही थी। मेरी टी शर्ट उठाकर उसने मेरे दोनों चुचियों बाहर निकाल लिए। ‘वाउ, ब्यूटीहुल…’ उसने कहा, फिर मेरे दोनों चुचियों को अपने हाथों में पकड़कर दबाया और फिर बारी बारी से उन्हें चूसा। न सिर्फ निप्पलों को चूसा बल्कि सारे के सारे चुचियों को अपनी जीभ से ऐसे चाटा जैसे उन पर शहद लगा हो। चुचियों चाटने के बाद वो पेट पर आ गया। पेट और कमर के आस पास उसने खूब चूमा। लगता था कि वह कबड्डी का भी अच्छा खिलाड़ी था, हर दांव पेच से अच्छी तरह वाकिफ था , कि लड़की को कैसे तड़पाते हैं। फिर मेरी लोअर उतारने लगा तो मैंने उसका हाथ पकड़ लिया। ‘क्या हुआ?’ उसने पूछा। ‘अभी नहीं!’ मैंने कहा। वो रुक गया, पर उसने अपनी टी शर्ट बरमूडा उतार दिया, नीचे से उसने फ्रेंची पहनी थी, छोटी सी चड्डी उसका लंड संभालने के लिए नाकाफी थी, इसीलिए उसका तना हुआ आधा लंड तो ऊपर से ही चड्डी से बाहर निकला पड़ा था। मैंने देखा तो हंस पड़ी-अगर इससे बाहर ही रखना है तो पहनने का क्या फायदा?’ मैंने कहा तो उसने चड्डी भी उतार के फेंक दी। 6 फुट का जवान, और 7 इंच के करीब उसका लंबा मोटा और काला लंड पूरी तरह से अकड़ा हुआ ऊपर को मुँह उठाए। आस पास कोई बाल नहीं, शायद आजकल में ही शेव की हो। हाँ सीने और पेट पर बाल थे, उसे नंगा देखा तो मैं देखती रह गई। उसने आगे बढ़कर मेरा लोअर उतारा, इस बार मैंने कोई विरोध नहीं किया। लोअर के नीचे तो मैं नंगी ही थी, मेरी गोरी चिकनी वीट से बाल की सफाई कर चुकी चूत को देखा तो बोला- वाह, कितनी प्यारी, कितनी मासूम सी पुस्सी है तुम्हारी, जी करता है खा जाऊँ इसे! मैं कुछ नहीं बोली, उसने मेरी टाँगें खोली और नीचे आकर अपना मुँह मेरी चूत से लगा दिया। जब उसने अपनी खुरदुरी सी जीभ मेरी चूत के अंदर फेरी तो मेरे तो रोंगटे खड़े हो गए, मैं कसमसा उठी, कभी इस तरफ को पलटी मारूँ कभी उस तरफ को मगर उसने अपना मुँह मेरी चूत से नहीं हटाया। आखिर मैं भी कब तक तड़पती मैंने भी हाथ बढ़ाकर उसका लंड पकड़ लिया उसने मेरी चूत छोड़ी, मेरी दोनों टाँगे खींच कर मुझे नीचे को खिसकाया और मेरी बगल में उल्टा होकर लेट गया उसने फिर से मेरी टाँगे खोलकर अपना मुँह मेरी चूत से लगा दिया और मेरी चूत चाटने लगा, तो मैंने भी उसका लंड अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी। थोड़ी देर ऐसे ही चाटने के बाद उसने मुझे अपनी बाहों के ज़ोर से घूमा कर ऊपर कर लिया। अब वो मेरे नीचे था और मैं ऊपर ! मेरी चूत से लेकर गाँड तक वो सब कुछ चाट गया। ज़िंदगी में पहली बार किसी ने गान्ड को चाटा था, एक सिरे से दूसरे सिरे तक वो अपनी जीभ से चाट रहा था। मैंने भी उसका लंड और आँड वगैरह सब कुछ अपनी मुँह में लेकर चूस गई। सच में साले ने बहुत मज़ा दिया। जब चूसा चासी काफी हो गई, तो गौरव ने पूछा- अब आगे बढ़ें? मैं भी हाँ कह दी। उसने मुझे बेड के बीचों बीच लेटाया और खुद भी मेरे ऊपर आ गया। मैंने खुद अपनी टाँगे खोलकर उसके लंड का स्वागत किया। मेरे ऊपर लेट कर उसने अपनी बाहें मेरे नीचे से निकाल कर मुझे अपनी आगोश में कैद कर लिया, फिर मेरे होंठों को चूसते हुये उसने अपना लंड मेरी चूत पे रगड़ना चालू किया। सच में लंड की रगड़ से मेरी चूत में बहुत मज़ा आ रहा था और ऐसे ही रगड़ते रगड़ते अचानक उसने अपना लंड मेरी चूत के अंदर घुसा दिया। चूत तो पहले सी गीली थी, सो एक बार में ही उसके लंड का टोपा अंदर घुस गया, मैं थोड़ा सा हिली- क्या हुआ, ठीक है? गौरव ने पूछा। मैंने कहा- हाँ ठीक है। तो गौरव ने मेरी आँखों में देखते हुये बाकी का लंड भी मेरी चूत में घुसा दिया। जब उसका पूरा लंड मेरी चूत में घुस गया तो उसने बड़े ही आहिस्ता से अपना लंड आगे पीछे चलाना शुरू किया। सेक्स तो मैंने बहुत की थी , वो भी बहुत अच्छा था, मगर इसके सेक्स करने का अंदाज़ कुछ जुदा था, हर स्ट्रोक के साथ जैसे वो मेरे चेहरे के भाव पढ़ने की कोशिश करता कि कहीं मुझे कोई तकलीफ तो नहीं हो रही, वैसे भी उसने अपनी स्पीड स्लो ही रखी मगर निरंतरता बरकरार थी। मोटा होने की वजह से उसका लंड मेरी चूत की सभी दीवारों से रगड़ के चल रहा था और मेरी चूत के कोने कोने की खुजली शांत हो रही थी। करीब 5 मिनट उसने बड़े आराम से किया, मगर अब मेरा होने की कगार पर था, सो मैंने कहा-अब धीरे धीरे नहीं, ज़ोर ज़ोर से करो, एकदम तेज़! मैंने तो कह दिया, मगर उसके बाद उसने जो अपनी ताकत जो जोश दिखाया मेरे तो होश ही उड़ गए, मेरे तो जिस्म के अंजर पंजर हिल गए। क्या ज़ोर था साले में! अगले एक मिनट में ही मेरा तो पानी छुट गया, मैं नीचे तड़प रही हूँ, स्खलित हो रही हूँ, फिर उसने इस बात की परवाह नहीं की। बस वह चोदा चोदा जा रहा था , बस पूछो ही मत! कभी मेरे चुचियों को काट खाता, कभी मुँह में जीभ डालता, कभी गालों को मुँह में लेकर चूसता, बस समझो कि खा गया मुझे । और अगले 15 मिनट उसने मेरे साथ ऐसे ही ज़बरदस्त चुदाई की। उसकी एक चुदाई में मैं 2 बार डिस्चार्ज हो गई। चूत तो ऐसे हो गई थी जैसे किसी ने सैंड पेपर लेकर रगड़ दी हो, अंदर तक छिली पड़ी थी। जब उसका डिस्चार्ज होने वाला था, तब उसने कहा, शालिनी मेरा होने वाला है, कहा करूँ? ‘कहाँ मतलब, बाहर करो, प्रेग्नेंट नहीं होना मुझे!’ मैंने कहा। ‘मुँह में लोगी?’ उसने पूछा। मुझे तो डर लगा कि यह मेरा मुँह फाड़ देगा, मैंने कहा- नहीं बस बाहर कर दो। उसके बाद का जो आखरी धक्के उसने मारे, वो तो ऐसे थे, जैसे वो अपना लंड मेरी चूत में डालकर मेरे मुँह से बाहर निकाल देना चाहता हो, मेरी तो आँखों से भी पानी आ गया। और फिर उसने चोदते चोदते एकदम से अपना लंड बाहर निकाला और उसके लंड से वीर्य की पिचकारियाँ निकल पड़ी, मेरा पेट, छाती, मुँह सब गंदा कर दिया उसने। कितना माल छोड़ा उसके लौड़े ने । मैं तो सारी की सारी गंदी हो गई। और वो भी जब निढाल हुआ तो बेड से ही नीचे गिर गया और वहीं पे लेट गया। तभी कमरे में कुसुम आई । वो हमदोनों को बिल्कुल नंगे देखकर शर्म गई , मगर मैं इस हालत में ही नहीं थी कि उठकर अपने कपड़े पहनती, या खुद को ढकती। ‘वाह, गौरव क्या शानदार चुदाई की तूने तो!’ कुसुम बोली। गौरव ने नीचे लेटे लेटे कहा- अब तुम्हारी बारी है । कुसुम चुप रही, शायद उसके दिल में खुशी थी, कुसुम थोड़ी देर बाद बोली - गौरव तुमने ने तो शालिनी की माँ चोद दी, अब ऐसा कर तू मेरी भी माँ चोद दे। कुसुम ने उसको एक हल्का सा घूंसा मारा प्यार में, गौरव नीचे लेटे लेटे बोला- थोड़ा रुक जा, सांस लेने दे, फिर देखना, तेरे सारे खानदान को न चोद डालूँ तो कहना। कुसुम ने मुझसे पूछा- शालिनी तू ठीक है? मैंने साइड पे पड़ी चादर उठाई और उसे ओढ़कर करवट लेकर लेट गई- हाँ मैं ठीक हूँ, थक गई हूँ, अब सोना चाहती हूँ। उसके बाद लेटे लेटे मुझे कब नींद आ गई, पता ही नहीं चला। अगले दिन सुबह 10 बजे के करीब आँख खुली, देखा तो कुसुम बेड पे बिल्कुल नंगी लेटी सो रही थी। मैंने उठकर अपने कपड़े पहने और कुसुम को भी जगाया। फिर मैं चाय बनाने केलिए किचन में चली गई। चाय पीते पीते कुसुम ने बताया- रात साढ़े 3 बजे गौरव गया , तुम तो सो गई, तुम्हारे बाद, गौरव ने एक बार मेरे साथ सेक्स किया। सच में गौरव में जान बहुत है ।
18-10-2026, 03:15 PM
अब आगे....... दो लौड़ा की प्रेम कहानी
मैं शुभम सिंह , एक शाम को कमरे में बैठा था फोन आया मैंने कहा : ' हैलो..... कौन ' उधर से आवाज़ आई- कैसा है भोंसड़ी के? मुझे बड़ी हैरानी हुई कि इतनी बदतमीजी से कौन बोल रहा है, मैंने कहा- कौन बदतमीज़ है? वो बोला- साले मादरचोद, जब आकर तेरी गाँड में लंड पेलूंगा तो पहचानेगा तू मुझे! ‘अबे अनुज , तू साले कमीने कहाँ है तू?” मैंने पूछा तो वो बोला- धनबाद में हूँ , अगले हफ्ते रांची आ रहा हूँ, मिलना मुझसे! खैर उसके बाद काफी देर तक हम दोनों बातें करते रहे। फोन रखने के बाद मेरे दिमाग में एक एक करके वो सब पुरानी यादें घूम गई, जो शायद अपने घर परिवार के चक्कर में मैं भूल चुका था। बात तब की है जब मैं हाई कॉलेज में आया, हमारी क्लास में एक नया लड़का आया, उसका नाम अनुज दुबे था। पहले दिन ही वो मेरे साथ आकर बैठा, हमारी दोस्ती भी हुई। उसके पिताजी बिजनेस करते थे और मेरे इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियर थे , तो हम दोनों की कुछ ही दिन में बड़ी गहरी दोस्ती हो गई। पढ़ाई लिखाई में हम दोनों ही होशियार थे, हम दोनों रांची से ही थे , हम दोनों के घर भी ज़्यादा दूर नहीं थे, इस लिए अक्सर शाम को एक साथ ही पढ़ते थे, कभी मैं उसके घर कभी वो मेरे घर। ऐसे ही एक दिन हम शाम को छत पे बैठे पढ़ रहे थे तो अनुज ने मुझे एक किताब दिखाई, उसमें कई तरह की तस्वीरें थी, जिसमें मर्द औरत आपस में सेक्स कर रहे थे। मैंने ऐसी तस्वीरें पहली बार देखी थी, सो मेरी तो लुल्ली मेरी पैंट में ही अकड़ गई, उसका भी यही हाल था। अनुज ने अपनी पेंट की ज़िप खोली और अपनी लुल्ली बाहर निकाल ली, ‘तू भी निकाल…’ वो बोला। मुझे थोड़ा अजीब लगा, मगर मैंने भी अपनी लुल्ली बाहर निकाली। दोनों के छोटे छोटे लंड एकदम से ऊपर को मुँह उठाए तने पड़े थे। ‘देख इसको ऐसे कर…’ उसने अपने लंड के ऊपर की चमड़ी को आगे पीछे करके दिखाया। मैंने भी वैसा किया तो मुझे मज़ा आया, हम दोनों साथ साथ कितनी देर तक वैसे ही करते रहे। जितना हम अपनी अपनी लुल्ली से खेल रहे थे उतना ही मज़ा आ रहा था। उस दिन मैंने अपनी ज़िंदगी में पहली बार हस्तमैथुन किया। हम दोनों तब तक करते रहे जब हम दोनों को एक अजीब सा एहसास न हो गया, जिसमें मुझे लगा जैसे मेरे तो जिस्म से जान ही निकल जाएगी। खैर हमारा यह तजुरबा बढ़िया रहा और अगले हफ्ते हमने फिर से वैसे किया। फिर तो हफ्ते में दो तीन बार और उसके बाद तो रोज़ का काम हो गया। हम दोनों एक दूसरे के सामने बैठकर ज़ोर ज़ोर से अपनी अपनी लंड को फेंटते। फिर एक दिन जोश जोश में मेरी लंड की चमड़ी इतनी ज़ोर से पीछे को खींच गई कि उसके ऊपर की चमड़ी छिल गई और उसमें से खून बहने लगा। मैं डर गया मगर अनुज ने मुझे बर्फ लाकर दी जिसे मैंने अपनी लंड पर लगाया और खून बंद हो गया। अनुज बोला - ले आज तेरी सील टूट गई, अब तू बच्चा नहीं रहा, मर्द बन गया है, अब तो अगर तुझसे कोई लौंडिया पट जाए तो तू उसे चोद भी सकता है। दो एक दिन के दर्द के बाद गाड़ी फिर पटरी पर आ गई। मगर एक चीज़ का फर्क पड़ गया, पहले सिर्फ गुदगुदा एहसास होता था, मगर अब हस्तमैथुन के बाद लंड से गाढ़ा सफ़ेद वीर्य भी निकलने लगा, जिसके छूटने पर बड़ा आनन्द आता था। वक़्त बीतता गया और हमारी मुट्ठबाजी भी चलती रही। अपनी पसंद की हर औरत और लड़की को अपने ख़यालों में हम चोद चुके थे। यहाँ तक के एक दूसरे की माँ को भी याद करके और यह बात हम दोनों एक दूसरे को बता देते थे कि आज तेरी माँ या उसकी माॅं के ना से मुट्ठ मारी है। ऐसे ही एक दिन अनुज बोला- यार अपने हाथ से अपनी मुट्ठ मारने में कोई मज़ा नहीं आता, मज़ा तो तब है जब बंदा लेटा रहे और कोई और उसकी मुट्ठ मारे! ‘तो?’ मैंने पूछा- अब तेरी मुट्ठ मरने के लिए किसे लाया जाए? ‘क्यों न हम एक दूसरे की मुट्ठ मार दिया करें, दोनों को मज़ा आएगा।’ उसने विचार सुझाया। ‘आइडिया बुरा नहीं है, ट्राई करके देखें?’ मैंने कहा तो हम दोनों ने अपनी अपनी पेंट खोली और अगल बगल बैठकर एक दूसरे के लंड पकड़कर सहलाने लगे, मज़ा तो आया, मगर वो वाला नहीं आ रहा था। वो हम दोनों बेड पे एक दूसरे की उलट दिशा में लेट गए और दोनों ने एक दूसरे के लंड को पकड़ा और फेंटना शुरू किया, वाकयी यह तो बढ़िया रहा और दूसरे के हाथ से मुट्ठ मरवाने का तो मज़ा ही कुछ और था। ऐसे ही एक दिन जब हम दोनों लेटे एक दूसरे के लंड सहला रहे थे, तब अनुज ने मेरा लंड अपने मुँह में ले लिया! वाओ… क्या नज़ारा था मुझे सच में लंड चुसवाने का तो मज़ा ही कुछ और मिल रहा था। अनुज ने मेरा लंड चूसते चूसते मेरे सर के पीछे हाथ रखा और मेरा सर आगे को धकेला, मतलब अनुज चाहता था कि अगर वो मेरा लंड चूस रहा है तो मुझे भी उसका लंड चूसना पड़ेगा। मुझे भी कोई ऐतराज नहीं था, मैंने भी अनुज का लंड अपने मुँह में लिया और वैसे ही चूसने लगा। हम दोनों को कामुकता का वो नशा सवार हुआ कि हम दोनों अपनी अपनी कमर चलाकर एक दूसरे का मुँह ही चोदने लगे। पहले अनुज झड़ा और मेरे मुँह में ही उसने अपना पानी छुड़वाया। उसके बाद उसने मेरा लंड चूस चूस के मेरा पानी निकलवाया। अब हस्तमैथुन के साथ चुस्का-चुस्की का काम भी चल पड़ा और इसी दौरान एक दिन हमने एक ब्लू फिल्म देखी जिसमें दो लड़के आपस में सेक्स कर रहे थे। हमने देखा कि बारी बारी दोनों ने एक दूसरे की गाँड मारी। मैंने अनुज से कहा- ये भी ट्राई करके देखें! वो बोला- चल, करते हैं। मगर समस्या यह कि पहले गाँड कौन मरवाएगा, सो फैसला यह किया गया कि क्योंकि लंड हैं मोटे और गाँड के छेद हैं छोटे सो, पहले थोड़ा थोड़ा डाल कर देखा जाएगा, जिसके दर्द कम होगा, वही पहले पूरा लंड लेगा। ![]() तो कपड़े उतार के हम दोनों बेड पे लेट गए, दोनों ने एक दूसरे के लंड अपने अपने मुँह में लेकर चूसना शुरू किए। उसके बाद दोनों ने अपनी अपनी एक एक उंगली पे सरसों का तेल लगाया और एक दूसरे की गाँड में घुसेड़ने की कोशिश करने लगे। उँगलियाँ जब आराम से चली गई और अंगूठे डालकर देखे गए, जब अंगूठे भी घुस गए तो दो दो उँगलियाँ एक साथ डाली गई, ये कुछ तकलीफ़देह था। मगर जब कामुकता दिमाग में चढ़ा हो तो दर्द में भी मज़ा आता है। मेरी दोनों उंगलिया अनुज के गाँड में अंदर तक घुसी पड़ी थी और अनुज अपने हाथ की दो उँगलियों से मेरी गाँड को चोद रहा था। फिर मैंने अनुज से कहा- अनुज , ये तमाशा बहुत हुआ, चल ऐसा कर तू ही ऊपर आ जा। मैं घोड़ी के पोज़ में अपने घुटने मोड़कर खड़ा हो गया। अनुज ने अपने लंड पे ढेर सारा तेल लगाया और लाकर मेरी गाँड पे रखा। ‘ले मादरचोद, आज तू चुदने जा रहा है, अपनी गाँड खोलकर अपने यार का लंड ले, मादरचोद, साले…’ कहते हुए उसने थोड़ा सा ज़ोर लगाया, मुझे दर्द तो हुआ, मगर तेल की चिकनाहट की वजह से उसके लंड का टोपा मेरी गाँड में घुस गया। ‘अरे घुस गया रे घुस गया, मादरचोद, मार दिया तूने तो, बहुत दर्द हो रहा है।” मैंने दर्द से तड़पते हुये कहा- थोड़ा रुक, फिर और डालना। अनुज थोड़ी देर तक मेरे बदन को सहलाता रहा और फिर अपने लंड पे और तेल लगाकर अंदर को ठेलता रहा और आधे से ज़्यादा लंड उसने मेरी गाँड में घुसेड़ दिया। इतना बहुत था चुदाई के लिए। उसके बाद शुरू हुई असली परीक्षा। बेशक अनुज को मज़ा आ रहा था मगर मुझे दर्द हो रहा था। आज मुझे एहसास हुआ था कि औरत को पहली बार चुदवाते हुये कितना दर्द होता होगा। इतना दर्द तो तब नहीं होता जब इंसान को कब्ज़ हो रखी हो। मगर एक टाईट सुराख में चोदने का अनुज भरपूर मज़ा ले रहा था। खैर, 3-4 मिनट की चुदाई के बाद अनुज ने मेरी गाँड के अंदर ही अपना माल छुड़वा दिया। अब गाँड मरवाने के बाद मेरी हालत पतली हो रखी थी सो अनुज को चोदने का प्लान नैक्सट मीटिंग पे रखा गया। चौथे दिन मैं ऊपर था और अनुज नीचे, सच में चुदाई का तो मज़ा आ गया! अब तो यह अक्सर होने लगा। चोदते वक़्त हम दोनों एक दूसरे को बहुत गलियाँ देते, एक दूसरे की माँ तक चोदने की बातें कहते। ‘ शुभम , आज तेरे घर गया था, साले तेरी मम्मी के चुचियों देखी, साली की गाँड बहुत मस्त है मादरचोद, एक बार दिलवा दे उसकी, सच कहता हूँ, ऐसे ही चोदूँगा उसे, एक बार दिलवा दे यार… तेरी मम्मी को चोदना चाहता हूँ।’ जब मैं अनुज को चोदता तो मैं भी ऐसे ही अनाप शनाप बोलता- अनुज तेरी मम्मी की जवानी बहुत कातिल है रे, उसके चूची देखे, तू तो उसी घर में रहता है, मादरचोद, रोज़ देखता होगा, उसको नहीं छोड़ूंगा, एक दिन पटाकर ज़रूर चोदूँगा, तू बुरा तो नहीं मानेगा अगर मैं अपना लंड तेरी मम्मी की चूत में डालकर उसको पेल दूँ, उसके छोटे छोटे कच्चे आम के जैसे चुची चूस लूँ, सोच के देख कि तू सामने खड़ा है और मेरे नीचे तेरी जगह तेरी मम्मी लेटी दर्द से तड़प रही है, मेरा लंड उसकी चूत में घुसा है और उसकी क चूत से खून टपक रहा है, बोल चोदने देगा अपनी मम्मी को? ऐसी ही न जाने क्या क्या बकवास करते मगर जब पानी निकल जाता और एक दूसरे के घर जाते तो एक दूसरे की मम्मी को आँख उठा कर भी न देखते। और हमारा लौंडा प्रेम ऐसे ही आगे बढ़ता रहा। हम दोनों ने कभी किसी से इस बारे में बात नहीं की, मगर फिर भी न जाने कैसे मैथ्स वाले सर को इसका पता चल गया और उन्होंने ने जाबबूझ कर मैथ्स में हमारी सपली लगा दी, और दोबारा पेपर में पास होने के लिए शर्त रखी के हम दोनों को उनसे भी करना पड़ेगा। खैर मरते क्या न करते, इम्तिहान थे तो हम गए मैथ्स वाले सर के पास… उस हरमजादे ने भी हम दोनों को एक ही दिन एक साथ बिना तेल लगाए चोदा। सच कहता हूँ, साली तीन दिन गाँड दुखती रही। कॉलेज में हमारी प्रेम कहानी वैसे ही चलती रही। मगर हमने कॉलेज में किसी और से दोस्ती नहीं की, हाँ एक दो लड़कियों से दोस्ती ज़रूर की क्योंकि औरत से संभोग का सुख भी तो देखना था। हम चारों एक साथ फिल्म देखने और घूमने जाते, एक दूसरे के सामने ही अपनी अपनी गर्लफ्रेंड को किस करना, उनके चुचियों दबाने हम दोनों की आम बात थी। सिनेमा में तो अक्सर हम अपने अपने लंड निकालकर उनके हाथ में पकड़ाते, उनकी कमीज़ में हाथ डाल के रखते, हमारी इच्छा तो ये थी कि दोनों लड़कियों को साईड बाई साईड एक ही बेड पर चारों एकदम नंगे होकर चोदते। मगर वो नहीं मानी तो अपनी अपनी गर्लफ्रेंड को हमने साथ साथ दो अलग अलग कमरों में एक ही दिन और एक ही वक़्त पे एक साथ चोदा। मगर गाँड में जो करारापन होता है वो गीली भीगी सी चूत में नहीं मिला। उसके बाद तो हमने उनको सिर्फ चुची दबाने और चुम्मा चाटी तक ही रखा और असल वजह यह थी कि कोई हम पे लौंडे होने का शक न करे। असल मज़ा तो हमे एक दूसरे से ही आता था, हम दोनों तो शादी करके साथ रहना चाहते थे, मगर यह सम्भव नहीं था। अनुज के मामा धनबाद में रहते थे, उन्होंने उसे वहाँ बुला लिया, जब हम जुदा हुए तो बहुत रोये। मगर उसके बाद ज़िंदगी अपनी रफ्तार पे दौड़ पड़ी। मैंने भी रांची में रहकर अपनी पढ़ाई पूरी किया। धीरे धीरे मैं यह सब कुछ भूल गया और अपनी ज़िंदगी में मसरूफ़ हो गया। आज जब अनुज का फोन आया तो मैं सोचने लगा कि अब अगर आकर उसने कहा कि चल एक बार फिर से वही जवानी का खेल खेलते हैं, तो क्या मैं वो सब कर पाऊँगा ?
18-10-2026, 09:22 PM
bahut hi,mast aur majedaar update
padhke bahut maja aya. eisa hi likhte raho yaar
20-10-2026, 05:06 PM
अब आगे..... दोस्त की मम्मी शालिनी सिंह
मैं अनुज दुबे , बात उन दिनों की है जब मैं हाई कॉलेज में था। तभी मेरी मुलाकात मेरे हाई कॉलेज में पढ़ने वाले शुभम सिंह से हुई, वो मेरी ही क्लास में पढ़ता था। मुझे पता चला कि वो मेरे ही घर के पास, लगभग एक किलोमीटर की दूरी पर रहता है । धीरे-धीरे हमारी दोस्ती बढ़ती गई और बढ़ती दोस्ती के साथ हम-दोनों का एक दूसरे का लौड़ा मुठयाना , लंड चूसाई और एक दूसरे का गांड़ पेलाई को भी कायम रहा । जब मैं हाई कॉलेज पास हुआ तो आगे की पढ़ाई पुरी करने के लिए मुझे रांची से धनबाद आना पड़ा। जिससे हम दोनों के बीच दूरी आ गई। दो साल बाद....... मैं अपने पढ़ाई पुरी करके वापस अपने घर रांची लौट आया । एक दिन अचानक मेरी मुलाकात शुभम से मेरे घर के पास हुई । मैंने उसे अपने घर ले आया। हम-दोनों के बीच थोड़ी देर बातचीत हुई । इस दौरान उसने मुझे अपने घर आने को निमंत्रण दिया फिर वह चला गया। एक दिन उसने पर्सनली मुझे फोन करके अपने घर पर बुलाया ( वैसे भी वह बहुत दिनों से अपने घर पर बुला रहा था। ) एक दिन मैं उसके घर पहुँचे तो दरवाजे पर लगे रिंगबेल बजाया , थोड़ी देर बाद दरवाजा आंटी जी ( शुभम की मम्मी शालिनी ) ने खोला। जैसे ही गेट खुला वैसे ही मेरा मुँह खुला का खुला रह गया। क्या सौंदर्य था उसका.. मैं उसे शब्दों में बयान ही नहीं कर सकता।( क्योंकि मैंने उन्हें दो साल पहले देखा था और अब दो साल बाद देख रहा हूं। ) तभी शुभम वहां पहुंचा और उनसे बोला- मम्मी.. यह अनुज है । तो उसकी मम्मी ने हमें अन्दर आने को बोला। तब जाकर मुझे होश आया कि मैं अपने दोस्त के साथ हूँ और अपने सुनहरे सपनों से बाहर आते हुए मैंने बड़ी हड़बड़ाहट के साथ उनको ‘ नमस्ते आंटी जी ’ बोला और अन्दर जाकर सोफे पर बैठ कर शुभम से बात करने लगा। तभी अचानक मेरी नज़र उसके घर में एक सुंदर लड़की पर पड़ी । ( जहां तक मुझे मालूम था कि शुभम अपने माता-पिता का एकलौता संतान है ) । जब मैंने शुभम से उस लड़की के बारे पुछा तो शुभम ने कहा " यह मेरी मौसी की बेटी अंकिता सिंह है जो बारहवीं क्लास में पढ़ रही है "। फिर शुभम ने अपने परिवार के बाकी लोगों के बारे में बताया । तभी उसकी मम्मी मेरे और शुभम के लिए चाय लाई और मेरी तरफ कप बढ़ाने के लिए जैसे ही झुकी कि अचानक उसका पल्लू नीचे गिर गया, जिससे उसके 40 नाप के मखमली चुचियों और उसकी दरार मेरी आँखों के सामने आ गए और मैं उन्हें देखता ही रह गया। मेरा मन तो किया कि इन्हें पकड़कर अभी इसका सारा रस चूस कर गुठली बना दूँ। लेकिन मेरी इच्छा दबी रह गई क्योंकि शुभम मेरा साथ में था और हम-दोनों काफी अच्छे दोस्त थे। ![]() शुभम की मम्मी दिखने में बहुत ही आकर्षक और जवान हुस्न की मल्लिका थी। उसकी उम्र उस समय लगभग 39 या 40 होगी, लेकिन वो अपने आपको इतना संवार कर रखे हुए थी कि लगता ही नहीं था कि वो एक बच्चे की माँ भी है। उसके लम्बे काले बाल उसके नितम्बों तक आते थे और उसके नितम्ब इतने अच्छे आकार में थे कि अच्छे-अच्छों का लौड़ा खड़ा कर दे, फिर मैं क्या था? फिर उन्होंने पल्लू सही करते हुए मेरी ओर कप लेने का इशारा किया तो मैंने जैसे ही हाथ आगे बढ़ाया, उनका हाथ मेरे हाथ से टकरा गया। हाय… क्या मुलायम हाथ थे। उनके स्पर्श मात्र से मेरे बदन में एक बिजली सी दौड़ गई और अचानक मेरा लौड़ा तनाव में आने लगा। खैर.. जैसे-तैसे मैंने खुद पर संयम किया लेकिन उसकी मम्मी ने मेरे खड़े लण्ड को देख लिया और एक मुस्कान छोड़कर वहाँ से चली गई। फिर मेरी और शुभम की बातचीत सामान्य तरीके से होने लगी। कुछ मिनट बाद हमने चाय खत्म की और मैं उसके घर से सीधे अपने घर की ओर चल दिया। घर पहुँचते ही मैंने अपने बाथरूम में उसकी मम्मी के नाम की मुट्ठ मारी, तब जाकर मेरे लण्ड को कुछ आराम मिला। शाम हो गई थी लेकिन मेरी आँखों के सामने से शुभम की मम्मी के चेहरे हटने का नाम ही नहीं ले रहे थे। जैसे-तैसे रात हुई, मेरी मम्मी ने मुझे बुलाया और कहा- क्या बात है.. आज कुछ बोल क्यों नहीं रहे हो? तो मैंने उन्हें बोला- आज तबियत कुछ ठीक नहीं लग रही है। इस पर उन्होंने मुझे एक दवाई दी और खाना खिलाकर सोने के लिए बोला, तो मैं चुपचाप आकर अपने कमरे में लेट गया, तब शायद रात 10:30 बजे थे। कमरे में लेटते ही मुझे फिर से उनके चेहरे परेशान करने लगे और मेरा हाथ कब मेरे लोअर में चला गया मुझे पता ही न चला अगले दिन जब मैं सोकर उठा तो देखा मेरा लोअर फिर से गीला था। शायद रात को मेरे सपनों में उसकी मम्मी फिर से आ गई होंगी। फिर मैं सीधे बाथरूम गया और नहा-धोकर सीधा मम्मी के पास गया और उनसे नाश्ता देने के बोला क्योंकि एक जरूरी काम के लिए मुझे अपने पुराने कॉलेज जाना था। फिर मैं नाश्ता करके पुराने कॉलेज पहुँच गया । कॉलेज पहुंचने के थोड़ी देर बाद मेरे मोबाइल की घंटी बजी , मैंने मोबाइल निकाला और देखा तो शुभम का कॉल था , मैंने कॉल रिसीव किया। तो शुभम बोला ( मोबाइल पर ) - तुझे मम्मी ने रात के खाने पर आज बुलाया है। तो मुझे मन ही मन बहुत ही खुशी हुई । थोड़ी देर बात करने के बाद शुभम ने फ़ोन डिस्कनेक्ट कर दिया फिर मैं कॉलेज का काम खत्म करके घर वापस लौटा और शाम होने का इंतजार करने लगा। शाम को मैं तैयार होकर जाने से पहले मम्मी से बोला- " आज रात का खाना मैं अपने दोस्त शुभम के यहाँ से ही खाकर आऊँगा, आप मेरे लिए इन्तजार मत करना " और फिर चला गया। जैसे ही मैंने उसके घर के दरवाजे की घन्टी बजाई, अन्दर से एक बहुत ही मीठी आवाज़ आई- दरवाज़ा खुला है आप आ जाइए.. मैं समझ गया कि यह जरूर अंकिता ही होगी। जैसे ही मैं अन्दर गया, देखा सामने वाकयी अंकिता ही खड़ी थी। आज वो बहुत ही सुन्दर लग रही थी, उसने स्लीवलेस टॉप और मिनी स्कर्ट पहन रखी थी, जो उसकी सुंदरता में चार चाँद लगा रहे थे। इस टॉप में उसको चुचियों का उभार साफ़ दिख रहा था। मैं तो उसके चुचियों ही देखता रहा और अभी मन ही मन उन्हें चचोर कर चूस ही रहा था कि तभी उसने मेरी हरकत पकड़ ली और मुझसे बोली- तुम गेट पर ही खड़े रहोगे या अन्दर भी आओगे? मैं सच मैं बहुत झेंप गया था और बहुत बुरा भी लगा कि मुझे अपने दोस्त की मौसेरी बहन को ऐसे नहीं देखना चाहिए था। फिर मैं आगे बढ़ा उसने मुझे सोफे पर बैठने का बोला तो मैंने उससे पूछा- शुभम और आंटी जी कहाँ है? तो उसने बताया- मौसी अपने कमरे में तैयार हो रही हैं और शुभम भईया केक लेने गए हैं। तो मैंने उससे बहुत ही आश्चर्य के साथ पूछा- केक लेने? वो किस लिए? तो अंकिता बोली- आज मौसी का जन्मदिन है और इसलिए आपको भी निमंत्रित किया गया है। मैंने उससे पूछा- सच बताओ.. ![]() ![]() वो बोली- सच में.. मैं सच ही बोल रही हूँ। फिर मुझे शुभम पर बहुत गुस्सा आया कि उसने मुझे नहीं बोला कि आज आंटी का जन्मदिन है.. नहीं तो मैं खाली हाथ न आता। मैंने अंकिता से बोला- मैं अभी थोड़ी देर में आता हूँ। तो वो बोली- तुम कहाँ जा रहे हो? भाई अभी आता ही होगा, केक काटने में पहले ही इतनी देर हो चुकी है और देर हो जाएगी। मैंने उससे बोला- मैं तुम्हारी मौसी के लिए कुछ गिफ्ट लेने जा रहा हूँ.. मुझे नहीं पता था कि आज उनका जन्मदिन है। नहीं तो मैं साथ लेकर ही आता। ( तब तक शुभम की मम्मी कमरे में आ चुकी थी ) हमारी बातों को सुनकर आंटी हँसी और मुझसे कहने लगी- मैंने ही शुभम को मना किया था कि तुम्हें कुछ न बताए और रही गिफ्ट की तो मैं तुमसे कभी भी मांग लूँगी.. वादा करो जब मैं मांगूगी तो तुम मुझे गिफ्ट दोगे…! तब मैं शांत हो गया , लेकिन मैं ऐसे खड़ा था, जैसे मैंने कुछ सुना ही न हो और ऐसा हो भी क्यों न… क्योंकि आज तो आंटी ऐसी लग रही थी जैसी अंकिता की खुबसूरती और भरी - पुरी जवानी , वो भी मुझे फीकी लग रही थी। आज आंटी ने काले रंग की नेट वाली साड़ी पहन रखी थी, उनके चुचियों बहुत ही सख्त और उभरे हुए लग रहे थे। उन्होंने चेहरे पर हल्का सा मेक-अप भी कर रखा था। वो आज पूरी कामसूत्र की देवी लग रही थी। मैं उसकी सुंदरता के ख़यालों में इतना खो गया कि मुझे होश ही न रहा कि मैं एक लड़की के सामने उसकी मौसी को कामवासना की नज़र से चोदने की इच्छा जता रहा हूँ। तभी आंटी ने मेरे हाथ को पकड़ते हुए बोला- क्या हुआ अनुज ? तुम कहाँ खो गए…? तब मैंने हड़बड़ाहट से बोला- हाँ.. आंटी मैं ठीक हूँ। शायद वो सब कुछ जानते हुए भी मुझसे सुनना चाह रही थी तो मैंने उनके जिस्म की तरफ देखते हुए कहा- आंटी आज तो आप बहुत ही हॉट लग रही हो.. इससे पहले मैंने कभी इतनी सुन्दर लेडी नहीं देखी। उन्होंने मुस्कराकर ‘धन्यवाद’ दिया और सोफे पर मेरे पास ही आकर बैठ गईं और अंकिता से बोली- अनुज को लाकर कोल्डड्रिंक दो… अभी शुभम भी आता ही होगा.. फिर सब मिलकर पार्टी करेंगे। अंकिता रसोई की ओर जाने लगी.. तभी आंटी ने मेरे जीन्स में बने तम्बू की ओर इशारा करते हुए कहा- काफी बड़े हो गए हो..। तो मैंने अपने लंड को दबाकर ठीक करते हुए ‘सॉरी’ बोला तो उन्होंने बोला- इस उम्र में सबके साथ ऐसा ही होता है.. खैर तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है क्या? तो मैंने उन्हें ‘न’ बोल दिया और मैंने उनके गाल पर एक हल्का सा चुम्बन कर दिया। जिससे वो सोफे पर पीछे की ओर झुक गईं क्योंकि उन्हें इसकी उम्मीद ही नहीं थी। इतने में आंटी आई और बोली- मैं अपने बच्चों से बस प्यार ही मांगती हूँ और कुछ भी नहीं। मैंने तुरंत उनको ‘सॉरी’ बोला और कहा - " मैं संयम नहीं कर पाया " । तभी अंकिता कमरे में मुस्कान बिखेरते हुए आ गई, शायद उसने देख लिया था। आंटी ने बात को संभालते हुए मुझे भी एक चुम्बन किया और बोली- लो मैंने तुम्हारा गिफ्ट स्वीकार कर लिया.. बस तुम तो मेरे बेटे जैसे ही हो और मेरा शुभम भी मेरे जन्मदिन पर मुझे किस कर के ही विश करता हैं और अब तुमने भी कर लिया.. अब ठीक है न.. मैंने भी उनकी हाँ में हाँ मिला दी, जिससे कि अंकिता को शक न हो। हम ठंडा पी ही रहे थे तभी शुभम भी केक और होटल से खाना लेकर आ गया था। फिर शुभम ने बताया- ट्रैफिक की वजह से जरा देर हो गई। मैंने बोला- चलता है यार.. ले ठंडा पी.. फिर हम लोग केक काटेंगे। तो शुभम ने ठंडा पीते हुए मुझसे पूछा- तुझे आए हुए कितनी देर गई? मैंने बोल दिया- शायद एक घंटा.. तभी पीछे से अंकिता बोली- नहीं , आप यहां साढ़े छह बजे ही आ गए थे और अभी 8 बजे हैं। इस पर मैंने बोला- अच्छा.. तुम्हें बहुत ध्यान है मेरा और हम सब हंस दिए। फिर शुभम को मैंने बोला- यार आज आंटी का जन्मदिन था तुम्हें मुझे बताना चाहिए था.. मैं खाली हाथ आया, मुझे बहुत बुरा लगा। इस पर शुभम बोला- मम्मी ने ही मना किया था। फिर आंटी ने केक काटा और हम सबको खिलाया। तभी मेरे दिमाग में एक खुराफात सूझी , फिर मैं अपनी इच्छा को प्रकट करते हुए आंटी से बोला- आंटी जी.. क्यों न इस पल को और हसीन बनाया जाए..! तो इस पर उन्होंने मुस्करा कर हामी भरी। फिर क्या था… मैं झट से उठा और सामने टेबल पर रखे केक से क्रीम उठा कर आंटी जी के चेहरे पर मल दी ( मेरे इस हरकत से मेरा लण्ड जींस के अन्दर अकड़ सा गया था ) और मेरे ऐसा करते ही शुभम और अंकिता ने भी ऐसा ही किया। फिर आंटी ने भी सबको केक लगाया और हम सब खूब हँसे.. फिर थोड़ी देर मस्ती करने के बाद सभी ने अपने - अपने चेहरों की क्रीम साफ़ की। चेहरे पर से क्रीम साफ करने के बाद आंटी और अंकिता खाना डाइनिंग-टेबल पर लगाने के लिए कमरे से बाहर चली गई , जो कि दूसरे कमरे में था डाइनिंग-टेबल। आज मैं बहुत ही खुश महसूस कर रहा था कि जल्द ही चोदने की इच्छा पूरी होगी। कमरे में मैं और शुभम आपस में बात कर रहे थे.. तभी आंटी आईं और बोलीं- खाना लग गया है.. जल्दी से चलकर खा लो.. मुझे तो बहुत जोरों की भूख लगी है। तभी मैंने देखा कि आंटी के चेहरे और गले में अभी भी हल्का केक लगा है। शायद वो अच्छे से साफ नहीं कर पाई होगी। मैंने अपनी इच्छा प्रकट करते हुए आंटी से बोला- आंटी .. आपने तो अभी अपना चेहरा साफ़ ही नहीं किया। तो वो बोलीं- अरे मैं तो खाना निकालने के चक्कर में भूल ही गई थी.. चलो बढ़िया ही है.. अब तूने ही ये गेम शुरू किया था तो ख़त्म भी तू ही कर… मैंने आश्चर्य भरी निगाहों से देखते हुए उनसे पूछा- मैं क्या कर सकता हूँ? तो वो बोलीं- तूने ही पहले क्रीम लगाई थी.. तो साफ़ भी तू ही करेगा। तब मैंने शुभम की प्रतिक्रिया जानने के लिए उसकी ओर देखा तो वो बोला- उठ न.. मम्मी का कहना मान.. वो भी तो तेरी मम्मी समान हैं। तो मैंने मन में बोला- ये मम्मी नहीं माल समान है। फिर आंटी ने बोला- अब सोचता ही रहेगा या साफ़ भी करेगा.. मैंने भी बोला- जैसी आपकी इच्छा.. ( मुझे तो बस इसी मौके की तलाश थी जिसकी वजह से आज मुझे उनके गालों को रगड़ने का मौका मिल रहा था। ) फिर मैं और आंटी वाशरूम की ओर चल दिए चलते-चलते आंटी शुभम से बोलीं- जा अंकिता की मदद कर दे.. शुभम ‘हाँ.. मम्मी ’ कहकर दूसरे कमरे में ( जहाँ खाने का प्रोग्राम था ) वहाँ चला गया। आंटी और मैं जैसे ही वाशरूम पहुँचे.. वैसे आंटी ने मुझसे बोला- बेटा दरवाजे बंद कर ले.. । मैंने दरवाजे को बंद कर लिया, फिर आंटी ने साड़ी जैसे ही उतारनी चालू की, मैंने पूछा- ये आप क्यों कर रही हैं? तो उन्होंने बोला- ये भीग कर ख़राब हो जाएगी.. फिर उन्होंने साड़ी उतार कर एक तरफ हैंगर पर टांग दी और बोली- जल्दी काम पर लग जा.. मुझे लगता वह बोली रही हो " जल्दी से मुझे चोद दे…' फिर मैं उनके पास जैसे-जैसे बढ़ता गया वैसे-वैसे मेरी साँसें भी बढ़ती जा रही थीं। क्योंकि आज पहली बार मैंने किसी को इस अवस्था में देखा था और मेरा लौड़ा भी जींस के अन्दर टेंट बनाने लगा था। वो भी क्या लग रही थी.. मैं तो बस देखता ही रह गया, फिर मैं उनसे बोला- आप मेरे आगे आ जाएं.. ताकि मैं अच्छे से आप का चेहरा साफ़ कर सकूँ और आप भी खुद को सामने आईने में देखकर संतुष्ट हो सकें। मेरा इतना कहते ही वो मुस्कुराते हुए मेरे सामने आकर खड़ी हो गई.. फिर आंटी बोली- पहले थोड़ा क्रीम को हल्के हाथ से रगड़ दे फिर धो देना.. मैंने बोला- जैसी आपकी इच्छा.. आप आँख बंद कर लो.. नहीं तो केक की क्रीम लग सकती है। वो बोली- ठीक है.. फिर मैंने पीछे से उनको हल्के हाथों से रगड़ना चालू किया.. तभी मेरी नज़र उनके उठे हुए चुचियों पर पड़ी जो कि अभी भी ब्लाउज के अंदर कसाव लिए हुए खूब मस्त लग रही थी। मेरा तो मन कर रहा था, अभी इनको निकाल कर इनका रस चूस लूँ.. पर मैं कोई रिस्क नहीं लेना चाह रहा था और मेरे हल्के हाथों के स्पर्श से शायद आंटी भी मदहोश हो गई थीं। उनकी छाती से साफ़ पता चल रहा था क्योंकि उनकी साँसे धीरे-धीरे तेज़ हो चली थीं। तभी मैंने उनको छेड़ते हुए बोला- आंटी लगता है… आप काफी मजा ले रही हो.. तो वो बोली- हाँ.. तुम्हारे हाथों में तो गजब का जादू है.. मुझे बहुत अच्छा लग रहा है.. मन करता है इन्हें चूम लूँ। तो मैंने बोला- आप को रोका किसने है.. फिर उन्होंने मेरे हाथों पर एक चुम्बन कर लिया। मैंने बोला- अब मुझे भी फ़ीस चाहिए। तो बोली- कैसी फ़ीस? मैंने बोला- आपको रगड़न देने की.. वो बोली- वो क्या है? मैंने भी झट से बोल दिया- आपके गुलाबी गालों पर एक चुम्बन.. बस फिर उन्होंने मेरी ओर गाल करते हुए बोला- इसमें कौन सी बड़ी बात है.. ले कर ले.. चुम्बन.. मैं उन्हें चुम्बन करके झूम उठा, फिर उन्होंने बोला- चल अब मुँह धो दे। तो मैंने उनकी छाती की ओर इशारा करते हुए बोला- अभी यहाँ आप सफाई कर लेंगी या मैं ही कर दूँ? तो बोली- तू ही कर दे.. मैं और सटकर खड़ा हो गया जिससे मेरे लंड की चुभन उनकी नाभि के छेद पर होने लगी और मैं धीरे-धीरे साफ़ करते-करते मदहोश होने लगा। शायद आंटी भी मदहोश हो गई थीं क्योंकि उनकी आँखें बंद थीं। मैंने बोला- ब्लाउज और उतार दो.. नहीं तो गीला हो जाएगा.. तो बोली- हम्म्म.. तेरी बात तो सही है.. तू ही उतार दे.. तो मैंने उतार दिया… क्या गजब के चुचियों थी मैं तो बता ही नहीं सकता और उस पर काली ब्रा.. हय.. क्या कहने.. बहुत ही खूबसूरत लग रहे थे। आंटी ने देख लिया कि मेरा ध्यान उनके चुचियों पर है और वो भी यही चाहती थीं कि मैं उनको दबाऊँ.. उनका रस पी लूँ.. तो उन्होंने बोला- इसे भी उतार दे.. अभी कल ही ली है.. ख़राब हो जाएगी। मेरी तो जैसे इच्छा ही पूरी हो गई हो। मैंने झट से उनकी ब्रा भी उतार दी और उनके चुचियों को अपनी हथेलियों में भर लिया और मसक-मसक कर धीरे-धीरे मसाज देने लगा। आंटी अपनी चूचियाँ मसलवाने में इतनी मस्त हो गईं कि उनके मुँह से सिसकारी निकलने लगी.. जो मुझे और मदहोश करने के लिए काफी थी। फिर मैंने भी उनके चुचियों को तेज़ रगड़ना चालू कर दिया और वो भी आँखें बंद करके मेरे लंड पर अपनी नाभि रगड़ने लगीं। अब वो कहने लगीं- अनुज , आज तो तूने मुझे पागल कर दिया.. इतना मजा मुझे पहले कभी नहीं आया. जिससे मुझे बहुत मजा आ रहा था और हाथों से उनके चुचियों को भी रगड़ रहा था। आंटी तो इतना मस्त हो गई कि पूछो नहीं.. ‘आअह अहह वाह… अह्ह… ओह..’ की आवाज़ करने लगीं। अब उन्होंने बोला- ओह्ह.. मेरी चुची मुँह में लेकर चूस… वे अपना एक निप्पल मेरी तरफ बढ़ा कर बोली- ले.. इन्हें भी चूस कर हल्का कर दे.. बहुत दिनों से शुभम के पापा ने हल्का नहीं किया.. क्योंकि वो तो अक्सर बाहर ही रहते हैं। फिर मैंने उनके चुची को चूसना चालू कर दिया और दूसरे को दूसरे हाथ से रगड़ने लगा। मैंने उनके चुचियों के निप्पलों को जोर-जोर से काटने और चूसने लगा.. जिससे आंटी की सीत्कार बढ़ गई.. वो शायद झड़ रही थी। फिर वो ‘आआ.. आआआ.. ह्ह्ह्हा.. आआ… ईईईई…’ करती हुई शांत हो गई.. जैसे उनमें जान ही न बची हो। फिर अचानक उन्होंने मेरे लंड को जींस के ऊपर से पकड़ा, जो कि नाभि पर रगड़ खा-खा कर तना हुआ खड़ा था। उनके स्पर्श से मेरे मुँह से भी एक हल्की ‘आअह’ निकल गई। उन्होंने बोला- मुझे दिखा.. मैं भी तो देखूँ इसमें दम है भी या नहीं? तो मैंने भी बोल दिया- एक मौका तो दो.. फिर उन्होंने मेरी जींस को मेरी ‘वी-शेप’ अंडरवियर के साथ एक ही झटके में नीचे कर दी और मेरा लंड भी उन्हें सलामी देने लगा। उनकी मुस्कान साफ़ कह रही थी कि उनको मेरा ‘सामान’ पसंद आ गया था। वो अपने हाथों से मुठियाने लगी और मैं उनके चूचियों की घुंडियों को फिर से मसलने लगा और उनसे पूछ भी लिया- आपको मेरी बन्दूक कैसी लगी? वो बोली- क्यों इसकी बेइज्जती कर रहा है..ये बन्दूक नहीं तोप है.. तेरे दोस्त का पापा की तो सिर्फ पांच इंच का ही है.. यह तो उनसे काफी बड़ा और मोटा है। मेरा तो मन कर रहा है.. इसे खा जाऊँ.. तो मैंने बोला- खा लो.. रोका किसने है? आंटी घुटनों के बल बैठकर मेरे लौड़े के सुपाड़े को मुँह में लेकर आइसक्रीम की तरह चूसने लगी। यह पहला अनुभव था मेरा.. जो कि मैंने उन्हें बताया। तो वो बहुत ही खुश हो गईं और बोलने लगीं- मैं तुम्हें सब सिखा दूँगी और मजे भी दूँगी.. मेरे राजा.. वो फिर से मेरे लौड़े को जोर-जोर से चूसने लगी, जिससे मुझे बहुत ही मज़ा आ रहा था और मेरे मुँह से ‘आआह्ह्ह्ह हाआअ’ की सी आवाज़ निकलने लगी। मुझे लगा कि मैं झड़ने वाला हूँ तो मैंने उन्हें बोला- मेरा निकलने वाला है.. आप मुँह हटा लो। तो वो बोली- मुझे चखना है और देखना है कि इसमें कैसा स्वाद है? तभी मेरे मुँह से एक जोर की ‘आह’ निकली और मेरा माल आंटी के मुँह में ही झड़ गया.. जिसे आंटी ने बड़े चाव के साथ पी लिया और मेरे लंड को चाट-चाट कर साफ़ भी कर दिया। तभी दरवाज़े पर किसी ने नॉक किया तो आंटी होश में आई और बोली - कौन? तो बाहर से अंकिता की आवाज़ आई- मैं हूँ.. कितनी देर लगा दी आपने.. जल्दी आओ.. खाना ठंडा हो रहा है। फिर आंटी बोली- बस हो गया.. अभी आई। फिर आंटी ने जल्दी से वहीं टंगी नाइटी पहन ली और मैंने भी अपने कपड़े ठीक किए और आंटी को दिखाकर बोला- आंटी मैं ठीक तो लग रहा हूँ न? तो आंटी रुठते हुए स्वर में बोली- आज से तू मझे अकेले शालिनी ही बुलाएगा.. नहीं तो मैं तुमसे बात नहीं करूँगी। तो मैंने भी ‘हाँ’ कह दिया और एकबार फिर से उन्हें बाँहों में भरने और एक चुम्बन के लिए आगे बढ़ा तभी आंटी ने मेरे गाल पर एक जोरदार तमाचा मारा। जिससे मैं पुरी तरह होश में आ गया। फिर हम दोनों कमरे में पहुँचे, जहाँ खाने की टेबल थी.. वहाँ शुभम और अंकिता काफी देर से हम लोगों का इन्तजार कर रहे थे। शुभम - आप कर क्या रही थीं.. इतनी देर लगा दी? तो उन्होंने बात बनाते हुए बोला- मेरे को उलटी होने लगी थी… तो काफी देर लग गई.. जिससे मुझे चक्कर आने लगा था तो थोड़ी देर वहीं बैठ गई। मेरी साड़ी भी इसी चक्कर में भीग गई.. तभी तो चेंज करके आई हूँ.. तो शुभम बोला- अरे आपको कोई तकलीफ तो नहीं हो रही है.. नहीं तो डॉक्टर के पास चलें? वो बोली- नहीं.. अब ठीक है। तो मैंने उन्हें देखा तो उन्होंने मुस्कुराते हुए बोला- थैंक गॉड.. वहाँ मेरे साथ अनुज था.. नहीं तो ये न पकड़ता तो मैं गिर ही जाती। फिर शुभम ने भी अपनी मम्मी के लिए मुझे धन्यवाद दिया.. लेकिन अंकिता मुझे जासूस वाली नज़रों से देख रही थी । शायद अंकिता ने हमारी चोरी पकड़ ली थी इसलिए मुझे घुरते हुए अपने मौसी से बोली- आज तो आपको लगता है हममें से किसी की नज़र लग गई. फिर हम सबने मिलकर खाना खाया और तभी मेरी नज़र घड़ी पर पड़ी तो मेरे चेहरे पर भी 12 बज गए.. मुझे पता ही न चला कि कब रात के 12 बज गए। फिर मैंने घर जाने की इजाजत ली, तो शालिनी आंटी ने मुझे ‘थैंक्स’ बोला और मैंने उन्हें बोला- आज पार्टी में बहुत मज़ा आया। तो शुभम भी बोला- हाँ.. आज वाकयी बहुत दिनों बाद ऐसी पार्टी हुई। फिर सबको ‘बॉय’ बोला और घर की ओर चल दिया। पर मेरा दिल बिल्कुल भी नहीं था कि मैं अपने घर जाऊँ.. लेकिन क्या करता.. जाना तो था ही। जैसे-तैसे मैं अपने घर की ओर चल दिया लेकिन अभी भी मेरी आँखों से शालिनी के गुलाबी चुचियों और उस पर चैरी की तरह निप्पल हटने का नाम ही नहीं ले रहे थे। खैर जैसे-तैसे मैं अपने घर पहुँचा.. घन्टी बजाई तो मेरे पापा ने गेट खोला और मुझे डाँटते हुए बोले- आ गए नवाब.. वक्त देखा.. 12:30 हो रहा है.. कहाँ रहे इतनी देर? तो मैंने मम्मी की ओर देखते हुए उनसे बोला- क्या आपने बताया नहीं? तो पापा बोले- इतनी देर कौन सा डिनर चलता है? तो मैंने आंटी के ‘बर्थडे पार्टी’ वाली बात बता दी.. तब जाकर पापा शान्त और सामान्य हुए और मेरे भी जान में जान आई। मैं सच बोलूँ तो मेरी मेरे पिता से बहुत फटती है। फिर मैं अपने कमरे में गया और कपड़े बदलने लगा। और जैसे ही मैंने अपने आप को मिरर पर देखा.. तो मेरे सामने फिर से शालिनी के चुचियों की याद आने लगी .. जिसके कारण पता ही नहीं लगा.. कब मेरा सुस्त लौड़ा फिर से ऊँचाइयों को छूने लगा फिर मैंने अपने आप पर कंट्रोल किया और सो गया। अगली दिन मम्मी के फ़ोन की घंटी बजने से मेरी नींद खुली । तब तक शायद दिन का एक बजा चुका था मैं उठकर बाथरूम चला गया। जब मैं बाथरूम में अपने चेहरे को मिरर पर देखा तो मैं बहुत ही आत्मग्लानि महसूस करने लगा और सोचने लगा कि मैं अपने दोस्त के साथ गलत कर रहा हूँ जो कि गलत ही नहीं अनैतिक भी है। फिर मैंने जान-बूझकर उसके घर जाना छोड़ दिया ताकि कुछ गलत न हो। शुभम और मैं अब अक्सर मल्टीप्लेक्स में मिलते या मेरे घर पर और वो अक्सर मुझसे बोलता रहता कि मम्मी ने बुलाया है घर चल.. पर मैं बहाना बना देता ! फिर एक दिन शालिनी आंटी मुझे मार्केट में मिलीं। उन्होंने मुझे डाँटते हुए लहजे में बोली - क्या मैं तुम्हें इतनी बुरी लगी.. जो उस दिन के बाद नहीं आया? तो मैंने बोला- आंटी ऐसा नहीं है। वो फिर बोली- फिर कैसा है? तो मैंने उन्हें बोला- आंटी आप मेरे दोस्त की मम्मी है और वो उस दिन गलत हो गया। इस पर वो गुस्सा करते हुए बोली- पहले तो तू मुझे शालिनी बोल और रही उस दिन की बात.. तो यह तूने तब नहीं सोचा जब तुम मेरे चुचियों चूस रहा था तब यह ख़याल नहीं आया.. जब अपना लौड़ा मेरे मुँह में देकर बोल रहा था .. शालिनी आज तो बहुत ही मज़ा आ रहा है.. क्यों बोल? मेरे पास इन सब बातों का कोई जवाब न था.. तो मैं क्या कहता फिर करीब एक मिनट बाद शालिनी आंटी रोते हुए बोली- पहली बार मुझे कोई इतना सुख दिया मैं बता नहीं सकती और फिर उसने मुझे धोखा दे दिया.. और मैं चुपचाप सुनता रहा । फिर मैंने मन में सोचा कि भूखी औरत सिर्फ ‘लंड-लंड’ चिल्लाती है..जैसे शालिनी चिल्ला रही है और अगर मैंने ये मौका खो दिया तो शालिनी के साथ-साथ अंकिता भी हाथ से निकल जाएगी। यह सोचते-सोचते मैंने तुरंत शालिनी से ‘सॉरी’ बोला और उससे कहा- मैं तो बस ये देख रहा था.. जो तड़प तुम्हारे लिए मेरे अन्दर है.. क्या वो तुम्हारे अन्दर भी है या मैं केवल तुम्हारी प्यास बुझाने का जरिया बनकर रह जाऊँगा। इस पर उसने बिना देर किए ‘आई लव यू’ बोल दी और बोली- आज से मेरा सब कुछ तुम्हारा ही है.. फिर मैंने मज़ाक में बोला- बस एक अहसान करना.. बच्चे का बाप न बना देना। तो वो हँसने लगी, फिर वो बोली- अब ये बोलो.. घर कब आओगे? तब मैंने बोला- अब मैं तभी आऊँगा.. जब घर पर शुभम नहीं होगा। फिर मैं अपने घर की ओर चल पड़ा।
20-10-2026, 05:15 PM
अब.......
फिर क्या था.. मैं भी शालिनी को चोदने की इच्छा रखते हुए बेसब्री के साथ उस दिन का इंतज़ार करने लगा। इसी इन्तजार में धीरे-धीरे दो हफ्ता बीत गया। इस बीच मेरी और शालिनी की लगभग रोज मोबाइल पर बात होने लगी। फिर एक सुबह शालिनी ने मोबाइल से मुझसे सुचना दी शुभम बैंक का एग्जाम देने के लिए अगले दिन दूसरे शहर जा रहा हैं। खैर.. जैसे-तैसे शाम हुई और मेरे मन उलझन में फंसता चला गया.. यह सोचकर कि अब कल क्या होगा.. मेरी इच्छा कल पूरी हो भी पाएगी या नहीं? यही सोचते-सोचते कब रात हुई.. पता भी न चला। मैं शालिनी के ख्यालों में इस कदर खो जाऊँगा.. मुझे यकीन ही न था। फिर मैंने रात खाना खाया और सीधे अपने कमरे में जाकर आने वाले कल का बेसब्री के साथ इंतज़ार करते-करते कब आँख लग गई.. पता ही न चला। फिर मैं सुबह उठकर अच्छे से तैयार होकर ढेर सारे अरमानों को समेटे हुए शालिनी के घर की ओर चल दिया। जब मैं उनके घर पहुँच गया.. तब मेरे फोन पर शुभम का कॉल आ या । फिर मैंने दरवाजे की घन्टी बजाई… तो थोड़ी देर बाद आंटी आई और उसने दरवाजा खोला। जैसे ही दरवाजा खुला.. मेरा तो हाल बहुत ही खराब हो गया। वो आज इतनी गजब की लग रही थी जो कि मैंने सपने में भी नहीं सोचा था। ![]() ![]() ![]() बिल्कुल किसी अप्सरा की तरह उसने आज काले रंग का अनारकली सूट पहन रखा था.. बालों को खोलकर हेयरपिन से बाँधा हुआ था..जो कि उसकी सुंदरता को चार चाँद लगाने के लिए काफी थे। शायद आंटी काफी फैशनेबुल थीं.. बाकायदा मेकअप वगैरह सब कर रखा था। उन्हें देखकर लग ही नहीं रहा था कि 39 वर्ष की हैं और एक बच्चे की माँ है। मैं तो उनको 10 मिनट तक आँखें फाड़े देखता ही रहा। फिर उन्होंने मेरे हाथ को पकड़ते हुए.. मुझसे बोला- कहाँ खो गए? तो मैं अपने आपको सम्हाल.. नहीं पाया मेरी हालत ऐसी हो गई.. जैसे मैं अभी नींद से जागा हूँ… मेरा बैलेंस बिगड़ गया और मेरा नया फ़ोन जो कि मेरी बर्थ-डे पर मेरे पापा ने गिफ्ट किया था… अचानक गिर गया.. जिससे उसका डिस्प्ले ख़राब हो गया,फिर उन्होंने मुझे अपने कमरे में जाने को बोला और खुद चाय बनाने के लिए रसोई की तरफ चल दी। जब मैं कमरे में पहुंचा , जहाँ मैंने देखा काफी अच्छा और बड़ा सा डबल-बेड पड़ा था.. उस पर डनलप का गद्दा और अच्छी सी कॉटन की चादर बिछी हुई थी.. काफी अच्छा कमरा था। फिर बिस्तर के बगल वाली टेबल पर बड़ा सा शीशा लगा था.. टेबल पर जैतून के तेल की बोतल देखकर मैं समझ गया कि आज तेरी इच्छा जरूर पूरी होगी। फिर मैं उनके बिस्तर पर बैठकर गहरी सोच में चला गया.. थोड़ी देर बाद शालिनी आई और मुझे चाय देकर मेरे बगल में ही सटकर बैठ गई.. जिससे उसके बदन की मादक महक मुझे तड़पाने लगी। उसके बदन की गर्मी से मेरा मन विचलित हो गया.. जिससे मेरा लंड कब खड़ा हुआ.. मुझे पता ही न चला।फिर मैंने उसके चेहरे की ओर देखा तो वो हँसते हुए मुझे घूरे जा रही थी। तो मैंने बोला- तड़पा तो चुकी हो.. अब क्या मारने का इरादा है? इस पर वो मेरे मुँह पर ऊँगली रखते हुए बोली- ऐसा अब मत बोलना.. क्योंकि जिससे प्यार होता है.. उसे कभी मारा नहीं जा सकता। इतना कहकर वो अपने मुलायम मखमली होंठों को मेरे होंठों पर रखकर चूसने लगी। मैं और वो दोनों कम से कम 10 मिनट तक एक-दूसरे को यूं ही चूमते रहे। फिर मैंने उससे अलग होते हुए कहा- आज नहीं.. कहीं अंकिता आ गया तो गड़बड़ हो जाएगी। तो शालिनी ने किलकारी मारकर हँसना चालू कर दिया। मैंने पूछा- इसमें हंसने कि किया बात है ? तो वो बोली- आज और कल तुम चिल्लाओगे तो भी कोई नहीं आने वाला , रही बात अंकिता की तो मैं उसे संभाला लुंगी। फिर मुझसे लिपट कर मेरे होंठों पर अपने होंठों को रखकर चूमने लगी। क्या मस्त फीलिंग आ रही थी.. मैं बता ही नहीं सकता.. मैं तो जन्नत की सैर पर था। फिर मैं भी उसके पंखुड़ियों के समान कोमल होंठों को धीरे-धीरे चूसने लगा हम एक-दूसरे को चूसने में इतना खो गए कि हमें होश ही न रहा। करीब 20 मिनट की चुसाई के बाद मैंने उनके शरीर पर होंठों को चूसते हुए हाथ चलाने चालू किए.. जिससे वो और बहकने लगी और मेरे होंठों को चूसते-चूसते काटने लगी। फिर उसने एकदम से मुझे अलग किया और बोली- तुम मुझे बहुत पसंद हो.. आज हर तरह से मुझे अपना बना लो और मुझे जिंदगी का असली मज़ा दे दो… मैं इस मज़े के लिए बहुत दिनों से तड़प रही हूँ.. अब मुझे अपना बना लो..। उसने अपनी कुर्ती को उतार दिया और मुझसे बोली- तुम भी अपने कपड़े उतार दो.. आज हम बिना कपड़ों के ही रहेंगे। फिर उसने अपनी सलवार भी उतार दी और तब तक मैं भी अपने सारे कपड़े उतार चुका था। अब मैं और शालिनी सिर्फ अंडरगार्मेंट्स में थे। ( मैं उसके बदन का दीवाना तो पहले से ही था, पर आज जब उसे इस अवस्था में देखा तो देखता ही रह गया। ) क्या गजब का माल लग रही थी वो..उसका शरीर किसी मखमली गद्दे की तरह मुलायम लग रहा था और उसकी आँखें बहुत ही मादक लग रही थीं.. जिसे देखकर कोई भी उसका दीवाना हो जाता। फिर आंटी मेरे पास आई और मेरे गालों को प्यार से चूमते हुए कहने लगी- यह हकीकत है.. मेरे हीरो ख्वाबों से बाहर आओ.. फिर हम दोनों एक-दूसरे को फिर से चूमने लगे। यह मेरा पहला मौका था जब मैंने किसी महिला को इतनी करीब से देखा था.. मेरे तो समझ के बाहर था कि मैं क्या करूँ। फिर मैं और वो एक-दूसरे को चुम्बन करते-करते बिस्तर की तरफ चले गए और मैं उसको बिस्तर पर आहिस्ते से लिटाकर उसके बगल में लेट गया। अब उसकी आँखों में चुदाई का नशा साफ़ दिखने लगा था। मैंने धीरे से उसके बालों की लटों को सुलझाते हुए उसके सर को सहलाना चालू किया और उसके होंठों का रसपान करने लगा.. जिससे उसके शरीर में सिहरन पैदा हो गई.. मानो कामदेव ने हज़ारों काम के तीरों से उसके शरीर को छलनी कर दिया हो। इधर मेरा भी लौड़ा एकदम हथौड़ा बन चुका था जो कि उनकी जांघ पर रगड़ मार रहा था। मैंने धीरे से उसको इशारे में ब्रा खोलने को बोला..तो वो समझ गई और सीधे लेटकर अपनी पीठ उचका ली ताकि मैं आसानी से ब्रा का हुक खोल सकूँ। फिर मैंने उसकी ब्रा का हुक खोलकर उसके शरीर से उस काले रंग की ब्रा को अलग कर दिया और उसके उठे हुए मस्त चूचियां जो बहुत ही मदमस्त करने वाले थे.. उनको हाथों में लेकर दबाने लगा.. मसलने लगा.. चुचियों पर मेरे हाथों का दबाव पड़ते ही उसकी मादक आवाज़ निकल गई। ‘आआअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह.. थोड़ा धीरे करो.. मैं कहीं भागी थोड़ी न जा रही हूँ..’ मैंने आराम से उसके चुचियों को रगड़ना और मसलना चालू किया..जिससे उसके मुँह से अजीब सी आवाजें निकलने लगीं- आआअह्हह्हह.... ऊऊह्ह्हुउउउउउउहु......ऊऊओह्हह.. बहुत अच्छा लग रहा है.. अनुज ऐसे ही रगड़ डाल इन्हें.. आज तक ऐसा अनुभव कभी नहीं मिला है.. हाय.. जरा इनको मुँह से भी चूसो न.. शुभम के बाद से इसे किसी ने भी मुँह में ही नहीं लिया है.. मैंने यह सुनते हो उनके निप्पल को एक-एक करके मुँह से चूसना शुरू कर दिया। क्या मखमली एहसास था.. कभी-कभी उनके चुचियों के निप्पलों को चूसते-चूसते काट भी लेता.. जिससे शालिनी के मुँह से ‘आअह’ निकल जाती और मुझे आनन्द आता। मैंने इसी तरह उनको तड़पाना चालू कर दिया.. फिर वो भी मुझे बेतहाशा चूमने लगी। मैंने और उन्होंने एक बार फिर से एक-दूसरे को लॉलीपॉप की तरह चूसने की प्रक्रिया दोहराई। फिर मैं टेबल पर रखे जैतून के तेल की शीशी को लिया और उन्हें पेट के बल लेटने को बोला और उनकी पीठ पर ऊपर से नीचे की ओर तेल की बूँदें गिराईं। उनकी कमर तक और फिर अपनी हथेलियों में भी थोड़ा सा तेल लगा कर उनकी पीठ पर मालिश करना चालू किया। धीरे-धीरे मालिश करने से महिलाऐं काफी मस्त हो जाती हैं और इससे चुदाई की आग भी बढ़ जाती है। यह आप चाहे कभी अज़मा कर देख लेना। उसको मालिश में इतना मज़ा आ रहा था कि पूछो ही मत.. वो किसी मादा अज़गर की तरह बस आँखें बंद किए हुए.. मेरे कामुक स्पर्श का आनन्द ले रही थी। फिर उसकी पीठ को चूमते हुए उसके कान में धीरे से बोला- जरा घूम जाओ.. पीछे हो गया। तब जाकर उन्होंने आँख खोली और मेरे गालों में पप्पी जड़ते हुए बोली- आज तक मैं ऐसे प्यार के लिए तड़प रही थी.. जो मुझे तुमसे मिल रहा है.. आई लव यू अनुज.. यह कहकर वो पीठ के बल लेट गई.. फिर मैंने उनके चुचियों पर तेल डाला और थोड़ा सा नाभि के पास और थोड़ा हथेलियों में लेकर उनके चुचियों की हलके हाथों से मालिश शुरू कर दी..जिससे उसके मुँह से एक सिसकारी निकली- आआआहह.... आह....आआअहह.. शायद वो मेरी मालिश से इतना कामुक हो गई थी कि वो झड़ने लगी..जिसका एहसास उनके हाथ व पैरों की अकड़ी नसों और पैन्टी के अगले हिस्से को देखकर लगाया जा सकता था.. लेकिन मैंने उन्हें यह एहसास नहीं होने दिया क्योंकि मैं उनके अन्दर की आग और भड़काना चाहता था ताकि वो खुद चिल्ला-चिल्ला कर भिखारी की तरह मुझसे लंड मांगें। जब उसके शरीर की ऐंठन थोड़ी कम हुई तो उसने मेरे हाथों को पकड़कर चूम लिया और बुदबुदाते हुए कहने लगी- अनुज , तुम्हारे हाथों में तो जादू है.. किसी को एक बार प्यार से छू लो तो वो तुम्हारी दीवानी हो जाए। तो मैंने उन्हें चूमते हुए बोला- मेरी जान.. अभी तो बस तुम्हारा दीवाना बनने का दिल है.. तुम मुझे पहले दिन से ही बहुत पसंद थीं। मैं इस घड़ी के लिए कब से बेकरार था। यह कहते हुए मैं उसकी जांघ की तरफ गया और थोड़ा सा तेल लेकर उसकी जांघों में मलने लगा.. जिससे उसका जोश दुगना हो गया और वो बिन पानी की मछली की तरह तड़पने लगी। ‘अहा.. अम्मह… उम्माह… बस्स्स आहह..आहह.. ऐसे ही करते रहो.. अच्छा लग रहा है।’ फिर मैंने उसकी पैन्टी को बगल से पकड़ कर नीचे खींच दिया और उसकी फूली हुई चिकनी फ़ुद्दी को देखकर मन ही मन झूम उठा। क्या क़यामत ढा रही थी.. एक भी बाल न था जो कि शायद आज ही मेरे लिए उसने साफ़ किए थे। मैंने आव देखा न ताव और झट से उसके चिकने भाग को चूम लिया जिससे शालिनी किलकारी मार कर हँसने लगी। मैंने बोला- हँसो मत.. ऐसे हसीन पल को मैं हाथ से नहीं जाने दे सकता था इसलिए खुद को रोक नहीं पाया। मैंने थोड़ा सा हाथों में तेल लिया और उसकी चूत की मालिश चालू कर दी.. जिससे पहले ही काफी तेल निकल चुका था। धीरे धीरे मैं उसकी आग भड़काने के लिए उसके चूत के दाने को मसलने लगा.. जिसके परिणाम स्वरूप उसने आँखें बंद करके बुदबुदाना चालू कर दिया.. जो काफी मादक था और माहौल को रंगीन कर रहा था। ‘आआआईईस्स्सस्स.. और जोर से आअह्हह हाँ.. ऐसे ही आआआह्ह्ह्ह बहुत अच्छा लग रहा है..’ वो एकदम से अकड़कर फिर से झड़ गई उसके कामरस से मेरी ऊँगलियाँ भी भीग गई थीं जो मैंने उसकी पैन्टी से साफ़ कीं और फिर उसकी चूत को भी अच्छे से पौंछकर साफ किया। फिर वो जब शांत लेटी थी तो मैं ऊपर की ओर जाकर फिर से उसके चुचियों को चूसने लगा जिससे थोड़ी देर बाद वो भी साथ देने लगी.. पर अब मेरी ‘आअह्ह्ह्ह’ निकलने की बारी थी जो कि मुझे मालूम ही न था। फिर धीरे से उन्होंने अपना हाथ बढ़ाकर मेरी वी-शेप चड्ढी को थोड़ा उठाकर किनारे से मेरे लंड को बाहर निकाल लिया। मेरा लौड़ा पहले से ही सांप की तरह फन काढ़े खड़ा था। उसको देखते ही उनके चेहरे की ख़ुशी दुगनी हो गई और बड़े प्यार के साथ वो मेरे लंड को मुठियाने लगी.. जिससे मुझे और उन्हें अब दुगना मजा आने लगा था। फिर हम 69 की अवस्था में आ गए और वो मेरे लंड को छोटे बच्चों की तरह लॉलीपॉप समझकर चूसने लगी और जीभ से रगड़ने लगी। जिससे मुझे बहुत अच्छा लगने लगा और मैं भी उनकी चूत को आइसक्रीम की तरह चूसने चाटने लगा। जिससे दोनों चरमोत्कर्ष पर पहुँच गए और सारे कमरे में एक प्रकार का संगीत सा बजने लगा। ‘आआह्ह्ह ह्ह्ह अह्ह्ह…’ देखते ही देखते दोनों शांत हो गए.. शालिनी को तो होश ही न था क्योंकि वो तीन बार झड़ चुकी थी.. जबकि मैं अभी एक ही बार झड़ा था। बहुत से लोग समझते हैं कि लड़कियाँ देर से झड़ती हैं.. उनके लिए यह सन्देश है.. वो देर से नहीं झड़ती हैं.. अगर वो किसी के साथ आत्मबंधन में बंधकर सेक्स करती हैं, तो उन्हें चरमोत्कर्ष में पहुँचने में समय नहीं लगता है। मैं उनके बगल में जाकर लेट गया और उन्हें अपनी बाँहों में भर कर प्यार करने लगा। जिससे वो भी अपने आप को रोक न पाई और मुझे चूमते हुए बोलने लगी- अनुज आई लव यू.. आई लव यू.. आई लव यू.. मैंने इतना मज़ा पहले कभी भी न लिया था.. इस खेल में, पर तुम तो पूरे खिलाड़ी निकले.. कहाँ थे अभी तक… वो पागलों की तरह मुझे चूमने और काटने लगी। फिर से चुम्बनों का दौर शुरू हो चला था जिससे हम दोनों ही मज़े से एक-दूसरे का सहयोग कर रहे थे ।अब मैंने भी समय को ध्यान में रखते हुए देर करना ठीक न समझा क्योंकि मुझे अपने घर से निकले तीन घंटे से ऊपर हो गए थे। मेरे मन में यह चिंता सता रही थी कि मम्मी फ़ोन कर रही होंगी तो मोबाइल स्विच ऑफ बता रहा होगा पता नहीं वो कैसा महसूस कर रही होंगी और मैं भी उन्हें फोन नहीं कर सकता था.. आंटी के घर से भी नहीं और मेरा तो मोबाइल पहले ही टूट चुका था..तो मैंने कामसूत्र को आगे बढ़ाने के लिए उन्हें चुम्बन करते हुए उनके चुचियों को भी मसलना चालू किया और धीरे-धीरे उनका और मेरा जोश दुगना होता चला गया। पता नहीं कब हम दोनों के हाथ एक-दूसरे के जननांगों को रगड़ने लगे..जिससे एक बार फिर से ‘आह्ह ऊऊओह्ह ह्ह…’ का संगीत कमरे में गूंजने लगा। मेरा लौड़ा अपने पूर्ण आकार में आ चुका था और उसकी चूत से भी प्रेम रस बहने लगा था। तभी मैंने देर न करते हुए उनके ऊपर आ गया और उनके चुचियों को रगड़ते और चुम्बन करते हुए अपने लंड को उनकी चूत पर रगड़ने लगा..जिससे आंटी का जोश और बढ़ गया। अब वो जोर-जोर से अपनी कमर हिलाते हुए मेरे लौड़े पर अपनी चूत रगड़ने लगी और अब वो किसी भिखारिन की तरह गिड़गिड़ाने लगी- अनुज अब और न तड़पा… डाल दे अन्दर.. और मुझे अपना बना ले.. उसके कामरस से मेरा लौड़ा पूरी तरह भीग चुका था। फिर मैंने उसकी टांगों को उठाकर अपने कन्धों पर रख लीं, जिससे उसकी चूत का मुहाना ऊपर को उठ गया। फिर अपने लौड़े से उसकी चूत पर दो बार थाप मारी.. जिससे उसके पूरे जिस्म में एक अजीब सी सिहरन दौड़ गई। एक जोर से ‘आअह्ह्ह्ह्ह’ निकालते हुए वो मुझसे बोली- और कितना तड़पाएगा अपनी शालिनी आंटी को.. डाल दे जल्दी से अन्दर.. फिर मैंने उसकी चूत के मुहाने पर लौड़े को सैट करके हल्का सा धक्का दिया.. तो लंड ऊपर की तरफ फिसल गया। शायद अधिक चिकनाई के कारण या फिर वो काफी दिन बाद चुद रही थी इसलिए.. फिर मैंने उसके चुचियों को पकड़ते हुए बोला- शालिनी जरा मेरी मदद तो करो। तो उसने मेरे लौड़े को फिर से अपनी चूत पर सैट किया और अपने हाथों से चूत के छेद पर दबाव देने लगी। अब मैंने भी वक़्त की नजाकत को समझते हुए एक जोरदार धक्का दिया जिससे मेरा लौड़ा उसकी चूत की गहराई में करीब 2 इंच अन्दर जाकर सैट हो गया। इस धक्के के साथ ही शालिनी के मुँह से एक दर्द भरी आवाज़ निकल पड़ी- आअह्ह्ह्ह्ह्ह... श्ह्ह्ह्ह...ह्ह्हह्ह… उसके चेहरे पर दर्द के भाव स्पष्ट दिखाई दे रहे थे.. तो मैंने उसके पैरों को कन्धों से उतारकर फैला दिए और झुककर उसे चुम्बन करते हुए पूछने लगा- क्या हुआ आंटी.. तुम कहो तो मैं निकाल लेता हूँ.. हम फिर कभी कर लेंगे.. तो शालिनी ने धीरे से अपनी आँखों को खोलते हुए प्यार भरी आवाज़ रुआंसे भाव लेकर मुझसे बोली- काश तुम्हारे जैसा मेरा पति होता.. जो मुझे इतना प्यार देता.. मेरी इज्जत करता.. मेरे दर्द को अपना दर्द समझता.. पर आजकल ऐसा नसीब वाले को ही मिलता है। फिर मैंने अपनी बात दोहराई- चुदाई हम बाद में कर सकते हैं.. अभी तुमको दर्द हो रहा है.. मुझे क्या मालूम कि इस दर्द के बाद ही असली मज़ा आता है.. तो वह हँसते हुए बोला- अरे मेरे भोले राजा.. जब काफी दिनों बाद या पहली बार कोई लड़की या औरत लौड़ा अपनी चूत में लेती है.. तो उसे दर्द ही होता है.. फिर थोड़ी देर बाद यही दर्द मीठे मज़े में बदल जाता है और जिसकी चूत का पहली बार उदघाटन होता है.. उसको तो खून भी निकलता है.. किसी को ज्यादा या किसी को कम और एक बात और कभी कभी किसी के नहीं भी बहता है.. पर दर्द खून बहाने वाली लड़कियों की तरह ही होता है। मैं बहुत खुश हुआ क्योंकि मैं इस मामले में अनाड़ी जो था कि ‘एक्सपीरिएंस होल्डर’ के साथ चुदाई करने पर चलो कुछ तो ज्ञान प्राप्त हुआ.. मैं उनके चुचियों को फिर से चूसने और रगड़ने लगा.. जिससे शालिनी को फिर से आनन्द मिलने लगा। ‘आअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह आआआअह्ह्ह्ह्ह…’फिर वो कामुक आवाज़ करते हुए अपनी कमर ऊपर को उठाने लगी और बोलने लगी- चल अब दूसरी पारी भी खेल डाल.. डाल दे अपने लौड़े को अन्दर तक.. तो मैंने भी अपने दिमाग और संयम का प्रयोग करते हुए लौड़े को धीरे-धीरे आगे-पीछे करने लगा और बीच-बीच में थोड़ा अन्दर दबाव देकर लौड़े को अन्दर कर देता। इस तरह मान लो कि जैसे बोरिंग की मशीन काम करती हैं। उसी मशीन की तरह मैंने उनकी चूत की बोरिंग करते हुए अपने लौड़े को कब उनकी चूत की जड़ तक पहुँचा दिया.. उनको एक बार भी दर्द का अहसास न हुआ और अब तो वो मस्तियां कर कमर चलाने लगी। जब मैंने यह महसूस किया कि अब मेरा लौड़ा शालिनी की चूत में अपनी जगह बना चुका है तो मैंने भी गति बढ़ा दी.. मेरे गति बढ़ाते ही वो मेरी पीठ पर हाथ रगड़ने लगी- आअह्ह... आआअह्हह्ह.... उउउह्ह्ह.... और जोर से श्ह्ह्ह्हीईईई.. बस ऐसे ही.. करते रहो जान.. बहुत दिनों से ये चूत प्यासी है.. आज बुझा दो इसकी सारी प्यास.. और वो मेरे चेहरे पर चुम्बनों की बरसात करने लगी.. जिससे मेरा भी जोश बढ़ने लगा। वो मेरी पीठ पर नाख़ून रगड़ रही थी.. जिसका पता मुझे बाद में चला।उस समय मैं इतने आनन्द में था कि मुझे खुद अपना होश भी नहीं था। बस मैं हर हाल में उसे और खुद को चरम की ओर ले जाने में लगा हुआ था। अब उसने अपने पैरों को मेरी कमर पर कसकर नीचे से गांड उठा-उठा कर ठुकाई करवाना चालू दी थी। शायद वो फिर से झड़ने वाली थी। ‘हाआंणन्न् हाआआआआआ हाआआआआ अनुज ऐसे ही.. और तेज़ मेरा होने वाला है.. बस ऐसे ही करते रहो..’ वो सिसयाते हुए शांत हो गई और अपने पैरों को फिर से मेरी कमर से हटाकर फैला दिया और आँखें बंद करके निढाल सी हो गई। शायद इतने दिनों बाद इतना झड़ी थी.. जिसकी वजह से वो काफी रिलैक्स फील कर रही थी। मैंने फिर उसके चुचियों को जैसे ही छुआ तो उसने ऑंखें खोलीं और मेरी ओर प्यार भरी निगाहों देखते हुए कहने लगी- आई लव यू अनुज.. तुम न होते तो आज मैं इतना ख़ुशी कभी भी न प्राप्त कर पाती.. तो मैंने बोला- अब मुझे भी ख़ुशी दे दो.. मेरा भी होने के करीब है। वो एक बार फिर से अपनी टांगों को उठाकर मेरा सहयोग देने लगी जिससे मेरा चरमोत्कर्ष बढ़ने लगा और मैंने अपनी रफ्तार बढ़ाकर उनकी ठुकाई चालू कर दी। उनके चूतरस से रस टपक कर उनकी जांघों के नीचे तक बह रहा था जिससे ‘फच्च-फच्च’ की आवाजें आने लगी और देखते ही देखते शालिनी भी आनन्द के सागर में गोते लगाने लगी और दोनों ही बिना किसी की परवाह किए आनन्द के साथ सम्भोग का सुखद अनुभव लेते हुए मुँह से आवाज़ करने लगे- आआआआह्ह्ह्ह.....अह्ह्ह्ह्ह.... इइइइइइस्स्स्स्स्स्स्स..... इस्स्स्स्स्स्स्स.... आआअह.... आआअह… इसी के साथ मेरा और शालिनी के प्रेम-सागर का संगम होने लगा। मैं अपने वीर्य के निकलने के साथ ही साथ अपना शरीर ढीला करके शालिनी की बाँहों में चिपक गया।आज मुझे भी पहली बार बहुत आनन्द मिला था जो मुट्ठ मारने से लाख गुना बेहतर था। मेरी और उसकी साँसें काफी तीव्र गति से चल रही थीं जिसे सामान्य होने में लगभग दस मिनट लगे। फिर मैंने उसकी बंद आँखों में एक-एक करके चुम्मी ली और उसे प्यार करते हुए ‘आई लव यू’ बोला, जो शालिनी को बहुत ही अच्छा लगा।उसने मुझे फिर से अपनी बाँहों में जकड़ लिया और मुझ पर चुम्मों की बरसात करते हुए ‘आई लव यू.. आई लव यू.. आई लव यू.. बोलने लगी। वो मुझसे चिपकते हुए कहने लगी- आज तक इतना मज़ा मुझे कभी नहीं आया.. जो कि मुझे सिर्फ और सिर्फ तुमसे ही मिला है.. मैंने अपने जीवन में सिर्फ दो ही के साथ सेक्स किया है.. एक मेरा पति और एक तुम.. तो मैंने उनसे बोला- अब इतना बोल ही चुकी हो तो रेटिंग भी दे दो। उसने बोला- यार तेरा तो 10 में 10 है.. क्योंकि सम्भोग के दौरान पहली बार में दो बार झड़ी और उसके पहले 3 बार झड़ चुकी थी.. तुम में जरूर कोई जादू है और एक मेरा पति है जो सिर्फ ठुकाई से ही शुरू कर देता है.. मुझे अच्छा लग रहा है या नहीं.. इससे उसको कोई लेना-देना नहीं होता.. कभी-कभी तो मुझे कुछ भी नहीं हो पाता बल्कि मेरी चूत में जलन होने लगती है.. पर तेरे साथ तो आज सच में मज़ा आ गया.. अब वादा करो मुझे यूं ही हमेशा अपना बनाकर रखोगे। तो मैंने उनके माथे को चूमते हुए ‘हाँ’ बोल दिया । फिर मैं उठा और उसकी पैन्टी से अपने लंड को अच्छी तरह से पौंछ कर साफ़ किया। फिर उसकी चूत की भी सफाई की.. जो कि हम दोनों के कामरस से सराबोर थी। फिर मैं उठा और अपने कपड़ों को पहनने लगा तो आंटी मुझसे बहुत ही विनम्रता के साथ देखते हुए बोलीं- प्लीज़ आज यहीं रुक जाओ न.. मैंने बोला- मैं अपने घर में क्या बोलूँगा.. इतनी देर से मैं कहाँ था? और अब मैं कहाँ रहूँगा रात भर.. आप तो इतनी बड़ी और एक बच्चे की माँ हो.. आप मेरी मज़बूरी को समझ सकती हो.. मैं खुद तुम्हें छोड़कर जाना नहीं चाहता.. पर क्या करूँ.. मेरे आगे भी मज़बूरी है प्लीज़.. इसे समझो आप कोई लड़की नहीं हो.. एक माँ भी हो.. आप एक माँ-बाप की फीलिंग समझ सकती हो। तो वो अचानक उठकर बिस्तर से जैसे ही उतरी तो उसके पैरों में इतनी ताकत नहीं बची थी कि वे आराम से खड़ी हो सकें। तो सीधे ही मेरे सीने पर आकर रुक गईं.. मैंने भी उसे संभालते हुए अपनी बाँहों में जकड़ लिया और उसके होंठों पर होंठ रखकर उसके होंठों का रसपान करने लगा। उसकी आँखों में एक अजीब सी कशिश थी… आज पहली बार मैंने किसी की आँखों में अपने लिए इतना प्यार और समर्पण देखा था। उसकी आँखों में आंसू भर आए थे.. जो बस गिरना बाकी थे। शालिनी का इतना प्यार देखकर मैंने फिर से उसे अपनी बाँहों में लेकर चूमना शुरू कर दिया। थोड़ी देर चुमने के बाद शालिनी मुझे रोककर बोली- अभी तो पूरी रात पड़ी है.. जी भर के प्यार कर लेना.. अभी जाओ जल्दी.. ( क्या करूँ यार मुझे जाना पड़ा.. पर उसे छोड़ने का मेरा तो मन ही नहीं कर रहा था। ) मैं उसके घर से निकल कर मॉल रोड गया और नोकिया सेंटर पहुंच कर मैंने अपना वाला हैंडसेट भी रिपेयरिंग सेंटर में रिपेयरिंग होने दें दिया फिर मैं अपने घर कि ओर चल दिया। मैं जैसे ही घर पहुँचा तो मम्मी ने सवालों की झड़ी लगा दी- कहाँ थे.. क्या कर थे? मैं खामोशी से सुन रहा था.. थोड़ी देर बाद जब वे शांत हुईं तो प्यार से बोलीं- तूने कुछ बताया नहीं? तो मैंने उन्हें बोला- मम्मी.. अब मैं कॉलेज का नहीं.. यूनिवर्सिटी का छात्र हूँ और मैं अपने दोस्तों के साथ मूवी देखने गया था.. इस वजह से देर हो गई.. आप प्लीज़ ये पापा को मत बोलना खैर.. जैसे-जैसे समय बीतता गया.. मेरे दिल की भी धड़कनें बढ़ती ही जा रही थी और मेरा लौड़ा भी पैन्ट में टेन्ट बने खड़ा था फिर मैंने अपने लौड़े को अपने कंट्रोल में ले लिया। फिर मैं बाथरूम में चला गया फ्रेश होने तभी मम्मी की फोन की रिंग बजी.. मम्मी ने फ़ोन उठाया और किसी से हंस हंसकर बातचीत कर रही थी। ......................................…................. अभी करीब रात के सवा आठ बजे होंगे। मैंने शुभम के घर की घण्टी बजाई।
22-10-2026, 01:10 PM
अब......
मेरे घण्टी बजाते ही दरवाज़ा खुला.. मुझे ऐसा लगा जैसे शालिनी आंटी घंटों से मेरे आने का इंतज़ार कर रही हो।दरवाज़ा खुलते ही मेरी नजर आंटी पर पड़ी जो कि बला की खूबसूरत लग रही थी। मैंने आज उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक महसूस की.. जो कि शायद उसकी वर्षों बाद यौन-लालसा की तृप्ति का सन्देश दे रही थी। फिर मैंने घर के अन्दर प्रवेश किया और दरवाज़ा बंद करके उसको अपनी बाँहों में कैद कर लिया और वो भी मेरे बाँहों में कुछ इस तरह सिमटी की जैसे हम वर्षों के बिछड़े हों। फिर कुछ देर इसी तरह खड़े रहने के बाद मैंने उसकी आँखों में झांकते हुए उसकी ढेर सारी तारीफ़ की.. जिससे उसको चरमानन्द प्राप्त हुआ और खुश होकर प्यार से मुझे चुम्बन करते हुए अनुज ‘आई लव यू’ बोलने लगी। मुझे भी कुछ समझ न आ रहा था कि ये सब सच है या मात्र एक कल्पना… क्योंकि लड़कियों के बारे में तो सोचना अलग बात होती है, पर जब आपको एक एक्सपीरिएंस्ड औरत गर्ल-फ्रेंड के रूप में मिल जाए और वो भी शालिनी जैसी.. तो जिन्दगी ही बदल जाए। वो मुझे इस तरह खोया हुआ देखकर बोली- कहाँ खो जाते हो जान..तो मैंने बोला- तुम हो ही इतनी सुन्दर.. समझ ही नहीं आता कि तुझे प्यार करूँ या तुम्हारे रूप को ही देखता रहूँ। तो इस पर वो बोली- तुम्हें पूरी छूट है.. कुछ भी करो.. बस मुझे अब छोड़ के न जाना.. वर्ना मैं मर जाऊँगी.. तुम्हें एक पल के लिए भी अपने से दूर नहीं देख सकती । उसके दिल में शायद मेरे लिए अपने पति से भी ज्यादा प्यार जाग चुका था। ![]() ![]() तो मैंने बोला- शालिनी ये सब तो ठीक है.. पर जब मेरे माँ-बाप मेरी शादी कर देंगे तब? तो वो कहने लगी- मैं भी तो शादीशुदा हूँ.. कोई बात नहीं.. बस अपने दिल से मुझे कभी अलग मत करना.. तुम जो चाहोगे वो मैं दूंगी और जो चाहोगे मैं वैसा ही करुँगी। तो मैंने उसे फिर से अपनी बाँहों में भर लिया और उसके गालों और आँखों को चूमने लगा। उसकी ख़ुशी की झलक उसके चेहरे पर साफ़ दिखाई दे रही थी। फिर मैंने उसके चूतड़ों को मसलना प्रारम्भ कर दिया.. जिससे उसकी ‘आह’ निकलने लगी। मैंने जैसे ही उसके चुचियों को आजाद करने के लिए उसकी कुर्ती उठाई तो वो बोली- जरा सब्र भी करो.. आज तो पूरी रात अपनी है.. जैसे चाहो वैसे प्यार कर लेना.. जरा देख लेने दो अंकिता सोई गई किया। तो मैंने पूछा- अंकिता अभी तक जाग रही है किया ? उन्होंने बोला- शायद हां / नहीं भी , क्योंकि मैंने उसके खाने में नींद कि दवा मिला दीं थीं। तो मैंने कहा- आपको कैसे पता.. वह सो चुकी होगी ? तो वो बोली- मैं देखकर आती हुं। फिर मैं बोला- चलो बढ़िया है.. जल्दी लाओ.. आपने तो मेरे लौड़े में लगी आग को हवा दे दी हो । फिर आंटी जल्दी से चेक करके मेरे पास आ गई और बोली अंकिता सो चुकी है । मैं उस समय टीवी देख रहा था.. फिर मैंने आंटी से बोला- मेरी एक आदत और है.. अगर आपको बुरा न लगे तो मेरे लिए एक कप चाय बना दीजिएगा। तो शालिनी मुस्कुराते हुए अपनी भौंहें तानकर बोली- अरे ये क्या.. मैं भला.. बुरा क्यों मानूंगी.. मुझे तो अपने नवाब का कहना मानना ही पड़ेगा। तो मैंने बोला- मैं कोई नवाब नहीं हूँ। आंटी बोली- तो क्या हुआ.. शौक तो नवाबों वाले हैं। फिर वो रसोई गई और मेरे लिए चाय ले आई और मुझे चाय का कप पकड़ाते हुए हँसने लगी। मैंने कारण पूछा- अब क्या हुआ? तो बोली- और कोई हुक्म..? मैंने बोला- यार प्लीज़.. मेरा मजाक मत उड़ाओ नहीं तो मैं नाराज हो जाऊँगा। वो बोली- अरे ऐसा मत करना.. भला अपनी दासी से कोई नाराज़ होता है.. नहीं न.. बल्कि हुक्म देता है। मैंने बोला- अच्छा अगर यही बात है.. तो क्या मेरी इच्छा पूरी करोगी? तो बोली- मैं तो तुम्हारी हर इच्छा पूरी करने के लिए तैयार हूँ। मैंने बोला- मेरे मन में बहुत दिन से था कि जब मेरी शादी हो जाएगी तो अपनी बीवी को रात भर निर्वस्त्र रखूँगा.. क्या आप मेरे लिए अपने सारे कपड़े उतार सकती हैं। वो बोली- बस.. इत्ती सी बात.. अनुज मैं तुम्हारे लिए कुछ भी कर सकती हूँ.. मैं तुम्हें बहुत प्यार करती हूँ। यह कहते हुए शालिनी ने एक-एक करके सारे कपड़े निकाल दिए। उसके जोश और मादकता से भरे शरीर को देखकर मेरे लौडे़ पहलवान में भी जान आने लगी और धीरे-धीरे लौड़े के अकड़ने से मेरे लोअर के अन्दर टेंट सा बन गया.. जिसे शालिनी ने देख लिया और मुस्कराते हुए बोली- मेरा असली राजकुमार तो ये है.. जो मुझे देखते ही नमस्कार करने लगता है और एक तुम हो जो हमेशा मेरे राजाबाबू को दबाते और मुझसे छिपाते रहते हो। मैंने बोला- अरे ऐसा नहीं है.. आओ मेरे पास आकर बैठो। वो मुस्कुराते हुए मेरे बगल में बैठ गई तो मैंने उसके गाल पर चुम्बन दिया और अपनी गोद में लिटा लिया। हम दोनों की प्यार भरी बातें होने लगी जिससे हम दोनों को काफी अच्छा महसूस हो रहा था.. ऐसा मन कर रहा था कि जैसे बस इसी घड़ी समय रुक जाए और ये पल ऐसे ही बने रहें। मैं कभी उसके बालों से खेलता तो कभी उसकी नशीली आँखों में झांकते हुए उसके होंठों में अपनी उँगलियों को घुमाता.. जिससे दोनों को ही मज़ा आ रहा था।मुझे तो मानो जन्नत सी मिल गई थी, क्योंकि ये अहसास मेरा पहला अहसास था। मैं और वो इस खेल में इतना लीन हो गए थे कि मुझे पता ही न चला कि मैंने कब उसके चूतड़ को नग्न कर दिया और उसको भी कोई होश न था कि उसके चुचियों अब कपड़ों की गिरफ्त से आज़ाद हैं। जब मैंने उसके कोमल संतरों और गेंद की तरह सख्त चूतड़ों को मल-मल कर रगड़ना और सहलाना प्रारम्भ किया तो उनके मुख से एक आनन्दमयी सीत्कार “आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह” निकल पड़ी। जिसके कारण मेरा रोम-रोम खिल उठा और मैंने शालिनी के किशमिशी (निप्पलों) को अपने अंगूठों से मसलने लगा। जिससे शालिनी को अहसास हुआ कि उसके गेंदनुमा चुचियों कपड़ों की गिरफ्त से छूटकर मेरे हाथों में समा चुके हैं। उसके मुख की सीत्कार देखते ही देखते बढ़ती चली गई- आआअहह.... श्ह्ह्हह्ह्... ह्ह्ह्ह.. बहुत अच्छा लग रहा है अनुज.. इनको मुँह से चूसो.. चूस लो इनका रस.. निकाल दो इसकी सारी ऐंठन.. मैंने उसी अवस्था में झुककर उनके माथे को चूमा और उनकी आँखों में आनन्द की झलक देखने लगा। एकाएक शालिनी ने अपने हाथों से मेरे सर को झुका कर मेरे होंठों को अपने होंठों से लगाकर रसपान करने लगी। जिसका मैंने भी मुँहतोड़ जवाब देते हुए करीब 15 मिनट तक गहरी चुम्मी ली। जैसे हम जन्मों के प्यासे.. एक-दूसरे के मुँह में पानी ढूँढ़ रहे हों और इस प्रक्रिया के दौरान उसके चुचियों की भी मालिश जारी रखी जिससे शालिनी के अन्दर एक अजीब सा नशा चढ़ता चला गया जो कि उसकी निगाहों से साफ़ पता चल रहा था। फिर धीरे से उसने मेरे होंठों को आज़ाद करते हुए अपने चुचियों को चूसने का इशारा किया तो मैंने भी बिना देर करते हुए ही उसके सर को अपनी गोद से हटाकर कुशन पर रखा और घुटनों के बल जमीन पर बैठकर उसके चुचियों का रस चूसने लगा। क्या मस्त चूचियां थे यार.. पूछो मत। मैं सुबह तो इतना उत्तेजित था कि मैंने इन पर इतना ध्यान ही न दिया था। लेकिन हाँ.. इस वक़्त मैं उसको चूसते हुए एक अज़ब से आनन्द के सागर में गोते लगाने लगा था। उसके चुचियों इतने कोमल कि जैसे मैं किसी स्ट्रॉबेरी को मुँह में लेकर चूस रहा हूँ.. ![]() इस कल्पना को शब्दों में परिणित ही नहीं कर सकता कि क्या मस्त अहसास था उसका.. मैं अपने दूसरे हाथ से उसके निप्पल को मसल रहा था, जिससे शालिनी के मुँह से आनन्दभरी सीत्कार ‘आआअह ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह’ निकल जाती जिससे मैं अपने आप आनन्द में डूब कर उसके चुचियों को और जोर से चूसने और रगड़ने लगता। शालिनी को भी इस खेल में इतना आनन्द आ रहा था जो कि उसके बदन की ऐंठन से साफ़ पता चल रहा था और हो भी क्यों न… जब इतना कामोत्तेजक माहौल होगा.. तो कुछ भी हो सकता था। इधर मेरा ‘लंड’ भी पैन्ट में खड़े-खड़े इठने लगा था.. मैंने भी पारी बदलते हुए उसके चुचियों को हाथों में जकड़ते हुए उसके सलवार के नाड़े की ओर नज़र दौड़ाई तो देखा की सलवार के आगे का हिस्सा गीला हो चुका था। मैंने शालिनी के चेहरे की ओर आश्चर्य भरी निगाहों से देखा तो शालिनी ने पूछा- क्या हुआ मेरे नवाब.. ऐसे क्यों देख रहे हो? तो मैंने उसकी सलवार की ओर देखते हुए उससे पूछा- क्या बात है.. इस समय इतना पानी निकल रहा है.. कि तुम्हारी सलवार के ऊपर से ही साफ़ झलक रहा है। तो वो मुस्कुराते हुए बोली- जब मथानी इतने अच्छे से चलेगी तो मक्खन तो निकलेगा ही.. मैंने बोला- आज सुबह भी तो मथा था.. तब तो ऐसा नहीं हुआ था? तो वो बोली- इस समय पैन्टी नहीं पहनी है और उस समय पैन्टी पहन रखी थी। मैंने बोला- हम्म्म.. क्या बात है शालिनी रानी.. लगता है आज रात का मेरे लिए तुमने पूरा मायाजाल बिछा रखा है। तो वो हँसते हुए अपने हाथों से मेरे सर को पकड़कर अपने होंठों से चुम्बन करते हुए बोलने लगी- अब मैं बस तुम्हारी हूँ.. तुम्हारे लिए कुछ भी करुँगी.. तुमने मेरी बरसों पुरानी इच्छा को पूरा किया है। तभी उनका फोन पर घन्टी बजी.. जो कि शुभम का था। मैंने शालिनी को फोन दे दिया और शालिनी फोन ऑन करके बात करने लगी। उसने मेरे बारे में पूछा तो बोली- वो बाहर कमरे में टीवी देख रहा है.. जबकि तब तक सीन बदल चुका था मैं शालिनी की सलवार उतार कर उसकी मखमली जांघों को सहला रहा था और अपने मुख से उसके गोल और सुडौल चूत का रसपान कर रहा था। फिर मैंने धीरे से उनकी मखमली पाव सी चूत में ऊँगली घुसेड़ दी। यह इतने अचानक से हुआ कि उसके मुँह से ‘आआआआह’ जोर की चीख निकल पड़ी। शायद वो इस आघात के लिए तैयार नहीं थी। उसकी चीख सुनकर शुभम ने कुछ बोला होगा.. जिसके उत्तर में शालिनी ने बोला- अरे वो.. मैं न कल के लिए सब्जी काट रही थी तो चाकू लग गया। तो उसने बोला होगा आराम से काम किया करो तो वो बोली- आराम से तो सिर्फ सोया जा सकता है.. पर कोई काम आराम से नहीं कर सकती.. नहीं तो सारे दिन बस आराम ही करती रहूँगी.. यह बोलकर वो मेरी ओर देखकर हँसने लगी और मैं भी उसकी चूत के दाने को रगड़ने और मसलने लगा.. जिससे उसकी चूत से रस का रिसाव प्रारम्भ हो गया और उसकी आवाज़ में भी कंपकंपी सी आने लगी। थोड़ी देर शालिनी से बात करने के बाद शुभम ने बोला- अनुज से बात कराओ मैं उससे बोल दूँ कि मेरी मम्मी का ध्यान अच्छे से रखे। तो शालिनी ने बहाना बनाया.. पर उस पर कोई प्रभाव न पड़ा। फिर उसने मुझसे बात की और मुझसे बात की कि कब आए और मेरे मम्मी का ख्याल रखना.. उनके चोट भी लग गई है.. वगैरह वगैरह.. मैं शांत से उसकी बातें सुन रहा था और ‘हाँ.. हूँ’ कर रहा था। इतने में शालिनी ने अपना बदला लेने के लिए मेरा लोअर नीचे किया और मेरे लौड़े को अपने मुँह में भर कर जोर-जोर से चूसने लगी। जिससे मेरी आवाज़ में भी कंपकंपी आ गई। तो उसने बोला- ऐसे क्यों बोल रहे हो..? अब तुम्हें क्या हुआ? तो मैंने बोला- एसी की वजह से ठण्ड बढ़ गई है। मैंने बातों को विराम देते हुए फोन कटकर दिया। फिर शालिनी को देखा तो देखता ही रह गया.. वो मेरी ओर बड़ी-बड़ी आँखों से बड़ी ही कामुक निगाहों से देखते हुए मेरे लौड़े को उसकी जड़ तक चूसने के प्रयास में लगी थी। जिससे मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। मैंने उसके सर के पीछे हाथ ले जाकर उसके सर को हाथों में कस लिया और उससे बोला- जान अब जीभ से चाटो.. उसने बिल्कुल ऐसा चाटा.. जैसे कोई छोटा बच्चा आइसक्रीम चाटता है.. जिससे मेरा आनन्द और दुगना हो गया। फिर मैंने उससे बोला- इसको अपने थूक से गीला करो। तो वो आश्चर्य से देखने लगी.. शायद सोच रही होगी कि अब क्या होने वाला है.. शायद आप भी यही सोच रहे होंगे। फिर शालिनी ने नज़रें झुकाईं और मेरे गर्म लोहे की रॉड के समान लौड़े को बिना कुछ कहे ही गीला करने लगी। जब मैंने देखा कि शालिनी ने अब अच्छे से गीला कर दिया है.. तो मैंने उसे अपने सामने सोफे के नीचे बैठाया और उसके चुचियों के बीच अपने लंड को सैट करने लगा। उसको देखकर साफ़ लग रहा था कि इस तरह से उसने कभी नहीं किया है और मेरी भी एक अनचाही इच्छा पूरी होने वाली थी। फिर मैंने उसको बोला- अब अपने चुचियों को दोनों तरफ से दबा कर मेरे लौड़े की चुदाई ऐसे करो.. जैसे मालिश की जाती है। एक बार मैंने उसे बताया और फिर उसको ये कार्य सौंप दिया। वो बड़े अच्छे तरीके के साथ इस कार्य में तल्लीन थी.. जिससे मुझे काफी मज़ा आ रहा था। यह मैंने केवल पोर्न फिल्म में ही देखा था जो कि आज मेरे साथ हकीकत में हो रहा था। मेरे शरीर में एक अजीब सा करंट दौड़ रहा था जैसे हज़ारों चीटिंयाँ मेरे शरीर पर रेंग रही हों। कुछ ही मिनटों के बाद मैंने शालिनी से बोला- अब मेरा होने वाला है.. मुझे कुछ अजीब सी मस्ती हो रही है। तो शालिनी मेरे सख्त लौड़े को पुनः अपने मुलायम होंठों में भरकर चूसने लगी और कुछ ही देर में एक ‘आह्ह्ह्ह्ह्’ के साथ मेरा गर्म लावा उसके मुँह में समा गया जिसे शालिनी बड़े ही चाव से चखते हुए पी गई और आँख मारते हुए बोली- कैसा लगा? तो मैंने उसे अपनी बाँहों में लेकर बोला- सच शालिनी… आज तो तूने मुझे जन्नत की सैर करा दी। फिर वो बोली- ये कहाँ से सीखा था? तो मैंने बोला- पोर्न फिल्म में ऐसे करते हुए देखा था। तब शालिनी आंटी ने मुझसे मुस्कुराते हुए पूछा- तुम कब से ऐसी फिल्म देख रहे हो? तो मैंने सच बताया हाई कॉलेज से ही मैं और शुभम थिएटर में दो-चार ऐसी पोर्न मूवी देख चुके हैं। तो आंटी ने आश्चर्य से पूछा- तो शुभम भी जाता है तेरे साथ? तो मैंने ‘हाँ’ बोला.. फिर उसने पूछा- उसकी कोई गर्ल-फ्रेंड है कि नहीं? तो मैंने बोला - नहीं , वह भी बेचारा मेरी तरह कुंवारापन से जुझ रहा है। तो आंटी बोली- तु उसकी कोई गर्लफ्रेंड क्यूं नहीं बनवा देता है। मैंने आंटी को चीड़ाते हुए बोला- अरे.. जिसकी मम्मी इतनी हॉट और सेक्सी हो उसको गर्लफ्रेंड की किया ज़रूरत है। तो आंटी बोली- " धत् पगले कुछ भी बोलते हो " । फिर आंटी ने पूछी - अच्छा एक बात बताओ.. तेरी कोई गर्लफ्रेंड है? मैंने ‘हाँ’ में सर हिलाया। इस पर शालिनी आंटी रोने लगी और मुझसे रूठ कर दूसरी ओर बैठ गई। मैंने फिर उसके गालों पर चुम्बन करते हुए बोला- यार तुम भी न.. रोने क्यों लगीं? तो आंटी बोली - काश , मैं तेरी गर्लफ्रेंड होती। मैंने बोला- अरे तो क्या हुआ.. माना कि तुम मेरी गर्लफ्रेंड नहीं हो , पर तुमने मुझे उससे ज्यादा दिया है और तुम उससे कहीं ज्यादा खूबसूरत और आनन्द देने वाली लगती हो। यह कहते हुए मैं उसके होंठों का रसपान करने लगा.. जिसमें शालिनी आंटी ने मेरा पूरा साथ दिया। करीब पांच मिनट बाद शालिनी आंटी बोली - तुम परेशान मत होना.. अब मैं तुम्हें तुम्हारी गर्लफ्रेंड से ज्यादा प्यार दुंगी । मैंने बोला - चलो अब इस टॉपिक को चेंज करते हैं। फिर मैंने शालिनी को अपने सीने से चिपका लिया.. जिससे उसकी मस्त उन्नत मुलायम चूचियों की चुभन मेरे सीने में होने लगी.. जिसका अहसास काफी अच्छा था। मैं उसे अपने शब्दों से बयान ही नहीं कर सकता था.. मेरा हाथ उनकी नंगी पीठ पर धीरे-धीरे चलने लगा.. जिससे शालिनी आंटी को मेरे प्यार के एहसास का नशा चढ़ने लगा और उसके शरीर के रोंगटे खड़े हो गए। ऐसा लग रहा था मानो हज़ारों आनन्द की तरंगें उसके शरीर में दौड़ने लगी थीं। यह शायद मेरे प्रति उसके प्यार का असर था या वो भावनात्मक तरीके से मुझसे जुड़ गई थी, जिसकी वजह से ऐसा हो रहा था। फिर मैंने उसके आनन्द को बढ़ाने के लिए उसके गर्दन में अपने होंठों को लगाकर चुम्बन करने लगा और उसके कान पर ‘लव-बाइट’ करने लगा.. जिससे उसकी मदहोशी और बढ़ती ही चली जा रही थी। उसे इस क्रिया में बहुत आनन्द आ रहा था जो कि उसकी बंद आँखें और मुस्कराता चेहरा साफ़-साफ़ बता रहा था। फिर मैंने धीरे से शालिनी आंटी को सोफे पर लिटाया और चुम्बन करते हुए उसके चुचियों को दबाने लगा.. जिससे शालिनी आंटी की कामुक आवाज ‘आआह्ह अह्ह्ह्ह’ निकलनी आरम्भ हो गई और उसे आनन्द आने लगा। अब उसने मुझसे बोला- अब और कितना तड़पाओगे.. चलो कमरे में चलते हैं। फिर मैंने उससे बोला- नहीं.. आज मुझे सोफे पर ही चुदाई करना है। मैंने कई पोर्न फिल्मों में सोफे पर चुदाई देखी है। तो वो बोली- अरे यहाँ जगह कम है। मैंने बोला- वो सब मुझपर छोड़ दो.. पूरी रात बाकी है.. अगर मज़ा न आए तो कहना। ये कहते हुए उसके चुचियों को चूसने और रगड़ने लगा। वो सिसियाने लगी- अह्ह्ह्ह श्ह्ह्ह्ह काटो मत.. दर्द होता है.. आराम से करो.. देखो सुबह की लाल निशान अब भी चुचियों पर पड़े हैं। तो मैंने उसे प्यार से चूसना चालू कर दिया और उसका जोश दुगना होता चला गया। मैं भी उसके निप्पल को बड़े प्यार से चाट रहा था.. जैसे उसमें मुझे मिश्री का स्वाद मिल रहा हो। वो अब चरमसुख के कारण बिन पानी की मछली की तरह तड़पने लगी। अब बस उसकी आग को बस हवा देना बाकी रह गया था… मैंने वक़्त की नज़ाकत को समझते हुए अपना हाथ धीरे से उसकी चूत पर ले गया और अपनी दो ऊँगलियों से उसकी चूत की मालिश करने लगी और बीच-बीच में उसकी चूत के दाने को भी रगड़ देता.. जिससे वो और कसमसा उठती। इस तरह धीरे-धीरे वो चरम पर पहुँचने लगी और अपने हाथों से अपने चुचियों को मसलते हुए बड़बड़ाने लगी- आआह... शह्ह्ह्ह..... शाबाश.. आह्ह्ह्ह्ह मेरी जान.. ऐसे ही और जोर से… शायद वो झड़ने के मुकाम पर पहुँच चुकी थी, तभी मैंने उसे और तड़पाने के लिए उनकी चूत से तुरंत ऊँगली निकालकर उनके मुँह में डाल दी। जिसे उन्होंने चाट-चाट कर साफ कर दिया। ‘अनुज प्लीज़ मत तड़पाओ.. अब आ भी जाओ.. मुझे तुम्हारे लौड़े की जरूरत है।’ तो मैंने उनके मुँह पर चुम्बन किया और उन्हें कुछ इस तरह होने को बोला कि वो सोफे की टेक को पकड़कर घोड़ी बन जाएं.. ताकि मैं जमीन पर खड़ा रहकर उनको पीछे से चोद सकूँ। ठीक वैसा ही जैसा मैंने फिल्मों में देखा था। शालिनी आंटी ने वैसे ही किया फिर मैंने शालिनी के गोल चूतड़ों को पकड़कर उसकी पीठ पर चुम्बन लिया और उसके चूतड़ों पर दाब देकर थोड़ा खुद को ठीक से सैट किया ताकि आराम से चुदाई की जा सके। फिर मैंने उसकी चूत में दो ऊँगलियां घुसेड़ दीं और पीछे से ही उँगलियों को आगे-पीछे करने लगा.. जिससे शालिनी आंटी को भी आनन्द आने लगा और वह बहुत ही मधुर आवाज़ में सिसियाने लगी- आआअह.... ऊऊओह्ह्ह्ह्ह..... उउम्म... आआअह.... अनुज.. आई लव यू.. आई लव यू..’ कहते हुए झड़ गई, जिससे मेरी ऊँगलियां उसके कामरस से तर-बतर हो गईं.. पर मैं उसकी चूत के दाने को अभी भी धीरे-धीरे मसलता ही रहा और उसकी पीठ पर चुम्बन करते हुए उसे एक बार फिर से लंड खाने के लिए मज़बूर कर दिया। ...... इस तरह जैसे ही मैंने दुबारा शालिनी की तड़प बढ़ाई तो शालिनी से रहा नहीं गया और ऊँचे स्वर में मुझसे बोली- जान और न तड़पाओ अब.. बुझा दो मेरी प्यास को.. तो मैंने भी देर न करते हुए थोड़ा सा उसे अपने ठोकने के मुताबिक़ ठीक किया और अपने लौड़े को हाथ से पकड़कर उसकी चूत के ऊपर ही ऊपर घिसने लगा.. ताकि उसके कामरस से मेरे लंड में थोड़ी चिकनाई आ जाए.. अब शालिनी आंटी और बेहाल हो गई और गिड़गिड़ाते स्वर में मुझसे जल्दी चोदने की याचना करने लगी। जिसके बाद मैंने उसके सुन्दर कोमल चूतड़ों पर एक चांटा जड़ दिया और उससे बोला- बस अभी शुरू करता हूँ। मेरे द्वारा उसके चूतड़ों पर चांटा मारने से उसका चूतड़ लाल पड़ गया था और उसके मुख से एक दर्द भरी ‘आह्ह्ह... ह्ह्ह’ सिसकारी निकल गई जो कि काफी आनन्दभरी थी। मुझे उसकी इस ‘आह’ पर बहुत आनन्द आया था.. इसीलिए मैंने बिना सोचे-समझे.. उसके दोनों चूतड़ों पर एक बार फिर से चांटे मारे.. जिससे उसकी फिर से मस्त ‘आआआअह’ निकल गई। वो बोलने लगी- प्लीज़ अब और न तरसाओ.. जल्दी से पेल दो.. फिर मैंने अपने लौड़े को धीरे से उसकी चूत के छेद पर सैट किया और उसके चूतड़ को नीचे की ओर दबाकर अपने लंड को उसकी चूत में धकेला जिससे शालिनी के मुख से एक सिसकारी ‘श्ह्ह्ह्ह्ह्ह’ निकल गई और मेरा लौड़ा लगभग आधा.. शालिनी की चूत में सरकता हुआ चला गया और मैंने फिर से अपने लौड़े को थोड़ा बाहर निकालकर फिर थोड़ा तेज़ अन्दर को धकेल दिया.. जिसे शालिनी बर्दास्त न कर पाई और फिर से उसके मुख से एक चीख निकल गई। ‘आआअह्हा.... आआआ... हाआआआ.. श्ह्ह्ह्ह ’ मैंने इस बार बिना रुके शालिनी आंटी की चुदाई चालू रखी। मुझे बहुत आनन्द आ रहा था मैंने पोर्न फिल्म देखते वक़्त भी सोचा था कि जीवन में इस तरह एक बार जरूर चोदूँगा.. पर मेरी इच्छा इतनी जल्द पूरी हो जाएगी, इसकी कल्पना न की थी। अब मैं धीरे-धीरे शालिनी आंटी की चूत में अपना लंड आगे-पीछे करने लगा.. जिससे आंटी को भी थोड़ी देर में आनन्द आने लगा और वो भी प्रतिक्रिया में अपनी गांड पीछे दबा-दबा कर सिसियाते चुदवाने लगी ‘अह्ह्हह्ह्ह्ह उउउह्ह्ह्ह्ह् श्ह्ह्ह्ह’ सच में मुझे बहुत अच्छा लग रहा था मैंने आनन्द को और बढ़ाने के लिए उसके चूतड़ों पर फिर से चांटे मारे.. जिससे शालिनी कराह उठती ‘आआआह..... दर्द होता है जान..’ इस मरमरी अदा से उसने अपनी गर्दन घुमाकर मेरी ओर देखा था कि मैं तो उसका दीवाना हो गया और मैंने अपने हाथों को उसके चुचियों पर रख दिया और उन्हें धीरे-धीरे सहलाते हुए दबाने लगा और कभी-कभी उसके निप्पलों को अपने अंगूठों से दबा देता.. जिससे आंटी का कामजोश दुगना हो जाता और वो तेज़-तेज़ से चुदवाने लगती। फिर शालिनी को मैंने उतारा और अब मैं सोफे पर बैठ गया और उसे मैंने अपने ऊपर बैठने को बोला। वो समझ गई और मेरी ओर पीठ करके मेरे लंड को हाथ से अपनी चूत पर सैट करके धीरे से पूरा लंड निगल गई.. जैसे कोई अजगर अपने शिकार को निगल जाता है। फिर मैंने उसके चुचियों को रगड़ना और मसलना चालू किया.. जिससे वो अपने आप का काबू खो बैठी और तेज़-तेज़ से चुदाई करने लगी। मुझे इतना आनन्द आ रहा था कि पता ही न चला कि हम दोनों का रस कब एक-दूसरे की कैद से आज़ाद होकर मिलन की ओर चल दिया। उसकी और मेरी.. हम दोनों की साँसें इतनी तेज़ चल रही थीं कि दोनों की साँसों को थमने में 10 मिनट लग गए और फिर हम दोनों एक-दूसरे को चुम्बन करने लगे। फिर उसने मेरी ओर बहुत ही प्यार भरी नज़रों से देखते हुए एक संतुष्टि भरी मुस्कान फेंकी.. तो मैंने भी उसकी इस अदा का जवाब उसकी आँखों को चूमकर दिया और पूछा- तुम्हें कैसा लगा? तो वो बोली- सच अनुज … आज तक मुझे ऐसी फीलिंग कभी नहीं हुई.. तुमने तो सच में मुझे बहुत आनन्द दे दिया.. मैं आज बहुत खुश हूँ.. आई लव यू अनुज। वो ये सब बोलते हुए मेरे लौड़े को सहलाने लगी जो कि उस वक़्त ऐसा लग रहा था जैसे कोई घोड़ा लम्बी दौड़ लगाकर सुस्ता रहा हो और मैं भी उसके शरीर में अपनी ऊँगलियां दौड़ा रहा था.. जिससे दोनों को अच्छा लग रहा था। मैंने आंटी से बोला- अच्छा मेरे इस खेल में तो तुम मज़ा ले चुकी और तुमने मेरी बात मानकर मेरी इच्छा भी पूरी की है.. तो अब मेरा भी फ़र्ज़ बनता है कि तुम जो कहो मैं वो करूँ। तो शालिनी आंटी बोली- यार मुझे क्या पता था इसमें उससे कहीं ज्यादा मज़ा आएगा.. पर तुम अगर जानना चाहते हो कि मेरी इच्छा क्या थी.. तो तुम मेरे साथ मेरे कमरे में चलो.. इतना कहकर आंटी उठी और मेरा हाथ थाम कर साथ चलने का इशारा किया.. तो मैं भी खड़ा हो गया और मैंने अपना बायाँ हाथ उसकी पीठ की तरफ से कन्धों के नीचे ले जाकर उसके बाएं चूंचियां को पकड़ लिया। उसने मेरी इस हरकत पर प्यार से अपने दायें हाथ से मेरे गाल पर एक हलकी थाप देकर बोली- बहुत बदमाश हो गए हो.. कोई मौका नहीं छोड़ते.. तो मैंने धीरे से बोला- तुम हो ही इतनी मस्त.. कि मेरी जगह कोई भी होता तो यही करता.. यह कहते हुए एक बार फिर से मैंने उसके होंठों को अपने होंठों में भर कर जोरदार तरीके से चूसा.. जिससे उसके होंठ लाल हो गए। होंठ छूटते ही आंटी बोली- सच अनुज तुम्हारी यही अदा मुझे तुम्हारा दीवाना बनने में मजबूर कर देती है.. खूब अच्छे से रगड़ लेते हो.. लगता नहीं है कि तुम इस खेल में नए हो। तब तक हम दोनों कमरे में आ चुके थे.. फिर आंटी और मैं दोनों वाशरूम गए.. वहाँ उसने गीजर ऑन किया। अभी तक मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि आंटी चाहती क्या है.. तो मैंने उससे पूछा- गीजर क्यों ऑन किया? तो बोली- आज मुझे भी अपनी एक इच्छा पूरी करनी है। तो मैंने आश्चर्य से उससे पूछा- कैसी इच्छा?
22-10-2026, 06:45 PM
22-10-2026, 06:57 PM
अब.…...
तो बोली- बहुत सालों पहले मेरी सहेली ने मुझे बताया था कि उसका पति उसे बाथटब में जब चोदता है.. तो उसे बहुत अच्छा लगता है.. उसने मुझे कई बार ट्राई करने के लिए भी बोला.. पर मेरे पति ऐसे हैं कि उन्होंने आज तक मेरी ये इच्छा कभी पूरी नहीं की और जब भी मैं ज्यादा कहती तो लड़ाई हो जाती थी… तो मैंने भी कहना छोड़ दिया था.. पर क्या अब तुम मेरी इस इच्छा को पूरा कर सकते हो…? मैं अनुभव लेना चाहती हूँ कि पानी के अन्दर चुदाई करने में कैसा आनन्द आता है.. क्योंकि ये मैंने सिर्फ अभी तक अपनी सहेली से ही सुना है। आज मैं तुम्हारे साथ ये करना चाहती हूँ.. क्या तुम करोगे? तो मैंने भी देर न करते हुए उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और उसे प्यार से चूमने लगा। शालिनी भी मेरा पूरा साथ दे रही थी करीब 10 मिनट तक हमने एक-दूसरे को जम कर चूसा। फिर आंटी बोली- रुको यार पानी देख लूँ.. अब तक गर्म हो गया होगा.. ठीक वैसा ही हुआ.. पानी अच्छा-खासा गर्म हो चुका था.. फिर उसने बाथटब में पानी मिक्स किया और मेरी तरफ आकर उसने मुझे पहले जाने का इशारा किया। तो मैं भी उस टब में जाकर बैठ गया फिर शालिनी ने थोड़ा सा शावर जैल.. टब में डाला और आकर मेरी ओर मुँह करके मेरी बाँहों में आकर मुझे प्यार चूमने-चाटने लगी। ![]() यार कितना मज़ा आ रहा था.. मैं उस अनुभव को शब्दों में पिरोने में नाकाम सा हूँ.. समझ ही नहीं आ रहा है कि मैं उसके बारे में किस शब्द का इस्तेमाल करूँ। उसकी इस हरकत से मेरे तन-बदन में एक बार फिर से सुरसुरी सी दौड़ गई और मेरे हाथ अपने आप उसकी पीठ पर चलने लगे। मैं हल्के हाथों से उसकी पीठ को सहलाते हुए उसके चूतड़ों तक हाथ ले जाने लगा. जिससे शालिनी को भी अच्छा लगने लगा और अब वो मुझे बहुत तेज गति के साथ चूमने-चाटने लगी थी। उसकी तेज़ चलती साँसें.. उसके कामुक होने का साफ़ संकेत देने लगी थीं और मेरा लौड़ा भी अकड़कर उसके नाभि में चुभने लगा था। उसके नाभि के कोमल अहसास से ऐसा लग रहा था जैसे कुछ देर और ऐसे ही चलता रहा तो मेरा लौड़ा अपने-आप अपना पानी छोड़ देगा। फिर धीरे से मैंने उसके कन्धों को पकड़ा और अपने नीचे करके उसके ऊपर आ गया और उसके होंठों को चूसते-चूसते उसके चुचियों को रगड़ने लगा.. जिससे आंटी भी कसमसाने लगी और उसे तड़पते हुए देखकर पता नहीं क्यों मुझे और आनन्द आने लगता था। मैंने उससे थोड़ा ऊपर की ओर उठने को बोला.. ताकि मैं आराम से उसकी चूचियों का रस चूस सकूँ। तो शालिनी ने अपना ऊपरी हिस्सा थोड़ा एडजस्ट किया और मैंने तुरंत लपककर उसकी एक चूची को मुँह में भर लिया और दूसरे चूची को हाथों से मलने लगा। जिससे शालिनी के ऊपर एक बार फिर से मस्ती छाने लगी और तेज़ स्वर से सिसकारी ‘सस्श्ह्ह्ह्ह्ह्ह.. आआआह्ह्ह्ह.. ऊऊऊह’ लेते हुए बोलने लगी- अनुज सच में.. मैं आज बहुत खुश हूँ.. मुझे बहुत अच्छा लग रहा है.. आई लव यू.. आई लव यू.. आई लव यू.. साथ ही उसने मेरे लौड़े को भी अपने हाथों में भर लिया और उसे सहलाते हुए कहने लगी- प्लीज़ अब और न तड़पा.. मुझे देखो मेरा राजाबाबू भी अंगड़ाइयाँ ले रहा है.. अन्दर जाने के लिए.. तो मैंने भी देर न करते हुए अपने लौड़े को उसकी चूत में सैट किया.. पर सही से कुछ हो नहीं पा रहा था.. जिसे शालिनी ने भांप लिया और अपने हाथ से मेरे लौड़े को पकड़ कर अपनी चूत पर लगाया और जब तक वो उसकी चूत के अन्दर चला नहीं गया तब तक वो वैसे ही पकड़े रही। सच में काफी अच्छा अनुभव था। ![]() ![]() ![]() ![]() ![]() फिर मैंने भी धीरे-धीरे से उसे चोदना चालू किया.. जिससे थोड़ी देर बाद शालिनी आंटी की आँखें भारी हो गईं और उसके मुख से ‘आआह्ह्ह... म्म्म्म.… आआह्ह्ह्ह... अह्ह्ह्ह..’ की आवाजें निकलने लगीं.. अब मेरा भी जोश दुगना हो गया और मैं भी उसे बहुत सधे हुए तरीके से तेज़-तेज़ धक्के देकर चोदने लगा जिससे पूरे बाथरूम में पानी के कारण ‘फच फच्च’ का संगीत गूंजने लगा। फिर थोड़ी देर बाद उसे मैंने अपने ऊपर ले लिया और उसके होंठों को चूसते हुए अपने लौड़े उसकी चूत पर टिकाया और हल्का सा अन्दर को दाब दी..पर पानी की वजह से लौड़ा फिसल गया.. शायद ये शावर जैल का कमाल था.. उसने फिर से अपने हाथों से लौड़ा पकड़ा और एक ही झटके में मेरे ऊपर बैठ गई.. जिससे मुझे ऐसा लग रहा था जैसे ठन्ड में रज़ाई का काम होता है.. ठीक वैसे ही उसकी चूत मेरे लौड़े पर अपनी गर्मी बरसा रही थी। यह काफी आनन्ददायक आसन था और मैं जोश में भरकर उसके निप्पलों को नोंचने और रगड़ने लगा.. जिससे उसकी दर्द भरी मादक ‘आआआह’ निकलने लगी। थोड़ी देर में ही मैंने महसूस किया मेरे लौड़े पर उसकी चूत ने बारिश कर दी और देखते ही देखते वो आँखें बंद करके मेरी बाँहों में सिकुड़ गई.. जैसे उसमें दम ही न बची हो। अब वो मुझे अपनी बाँहों में जकड़कर मेरे सीने पर चुम्बन करने लगी..पर मेरी बरसात होनी अभी बाकी थी.. तो मैंने धीरे से उसके चूतड़ों को थोड़ा सा ऊपर उठाया ताकि मैं अपने सामान को नीचे से ही आराम से उसकी चूत में पेल सकूँ.. शालिनी भी बहुत खुश थी उसने बिना देर लगाए.. वैसा ही किया तो मैंने धीरे-धीरे कमर उठा-उठा कर उसकी ठुकाई चालू कर दी.. जिससे उसकी चूत फिर से पनियाने लगी और मेरा सामान एक बार फिर से आनन्द रस के सागर में गोते लगाने लगा। शालिनी के मुँह से भी चुदासी लौन्डिया जैसी आवाज़ निकलने लगी। ‘आअह्ह्ह्ह आआह बहुत अच्छा लग रहा है जान.. आई लव यू ऐसे ही करते रहो.. दे दो मुझे अपना सब कुछ.. आआआहह आआअह म्मम्म..’ मैं भी बुदबुदाते हुए बोलने लगा- हाँ जान.. तुम्हारा ही है ये.. तुम बस मज़े लो.. और ऐसे ही देखते ही देखते हम दोनों की एक तेज ‘अह्ह्ह’ के साथ-साथ शालिनी के चूत और मेरे सामान का पानी छूटने लगा और हम दोनों इतना थक गए कि उठने की हिम्मत ही न बची थी। कुछ देर शालिनी मेरी बाँहों में जकड़ी हुई ऐसे लेटी रही.. जैसे कि उसमें जान ही न बची हो। फिर मैंने धीरे से उसे उठाया और दोनों ने शावर लिया और एक-दूसरे के अंगों को पोंछकर कमरे में आ गए। मुझे और शालिनी दोनों को ही काफी थकान आ गई थी तो मैंने आंटी को लिटाया और उससे चाय के लिए पूछा तो उसने ‘हाँ’ बोला। कुछ भी बोलो पर मुझे चाय पीने का बहाना चाहिए रहता है बस.. फिर मैं रसोई में गया और उसके और अपने लिए एक अच्छी सी अदरक वाली चाय बना ली और हम दोनों ने साथ-साथ चाय की चुस्कियों का आनन्द लिया। कुछ देर में हम दोनों की थकान मिट गई और उस रात हमने कई बार चुदाई की. ऐसा लग रहा था जैसे हमारी सुहागरात हो.. हम दोनों की जांघें दर्द से भर गई थीं तो मैंने और उसने एक-एक दर्द निवारक गोली खाई और एक-दूसरे को बाँहों में लेकर प्यार करते हुए कब नींद की आगोश में चले गए पता ही न चला। फिर करीब सुबह 4:10 बजे के आसपास मेरी आँख खुली तो मैंने अपने बगल में शालिनी को भी सोते हुए पाया.. शायद वो भी थक गई थी। वो मेरे करीब कुछ इस तरह से सो रही थी कि उसकी नग्न पीठ मेरी ओर थी और उसके चिकने चूतड़ मेरे पेट से चिपके हुए थे.. मैंने उसे हल्के से आवाज़ लगाई- उठो शालिनी.. उठो बहुत देर हो गई है.. पर इस सबका जब असर नहीं हुआ तो मैं उसके चूची को मसलकर उसके गालों पर चुम्बन करने लगा.. जिससे वो थोड़ा होश में आई और बोली- सोने दो प्लीज़.. मुझे अभी नहीं उठना.. परेशान मत करो प्लीज़.. मैंने बोला- अरे 4 बजे रहे हैं.. उठो। तो बोली- हाय रे.. सच्ची 4 बजे गया। मैंने उसको घड़ी दिखाई और बोला- खुद देख लो… तो बोली- यार आज इतनी अच्छी नींद आई कि मेरा अभी भी उठने का मन नहीं हो रहा है.. पर अब उठना भी पड़ेगा.. चलो तुम फ्रेश हो जाओ.. मैं बस पांच मिनट में उठती हूँ। मैंने उसके गाल पर एक चुम्बन किया और बाथरूम चला गया। करीब तीस मिनट बाद जब बाहर निकला तो देखा शालिनी फिर से सो रही थी। उसके चूची दबी होने के कारण ऐसी लग रही थी जैसे केक के ऊपर किसी ने चैरी रख दी हो। मैं उसके नशीले बदन को देखकर इतना कामुक हो गया कि मेरे दिमाग में ही उसकी चुदाई होने लगी और मेरा हाथ अपने आप ही मेरे लौड़े पर चला गया था। देखते ही देखते मेरा लौड़ा फिर से खड़ा हो गया। मैंने भी देर न करते हुए उसके ऊपर जाकर उसके होंठों की चुसाई चालू कर दी, जिससे उसकी नींद टूट गई और वो मेरा साथ देने लगी। फिर करीब पांच मिनट बाद वो बोली- चलो अब मैं उठती हूँ.. तुम्हारे लिए नाश्ता वगैरह भी बनाना है। पर मेरा ध्यान तो उसकी चुदाई करने में लगा हुआ था। मैं उसकी बात को अनसुना करते हुए लगातार उसके चुचियों को दबा रहा था और बीच-बीच में उसके निप्पलों को मसल भी देता.. जिससे शालिनी एक आनन्दमयी सिसकारी “स्स्स्स्स्शह” के साथ कसमसा उठती। मैं उसकी गर्दन और गालों पर चुम्बन भी कर रहा था, जिसे शालिनी भी एन्जॉय करने लगी थी। फिर मैं थोड़ा नीचे की ओर बढ़ा और उसके चूची को मुँह में भर कर बारी-बारी से चूसने लगा.. जिससे शालिनी ने अपने हाथों को मेरे सर पर रखकर अपने चूची पर दबाने लगी। ‘आआह्ह्ह उउम्म्म श्ह्ह्ह्ह्ह्ह…’ की आवाज़ के साथ बोलने लगी- मेरी जान.. खा जाओ इन्हें.. बहुत अच्छा लग रहा है.. हाँ.. ऐसे ही बस चूस लो इनका सारा रस… मेरा लंड उसकी जाँघों पर ऐसे रगड़ खा रहा था.. जैसे कोई अपना सर दीवार पर पटक रहा हो। फिर मैंने धीरे से उसकी चूत में अपनी दो ऊँगलियाँ घुसेड़ कर उसे अपनी उँगलियों से चोदने लगा.. जिससे शालिनी बुरी तरह सिसिया उठी। ‘श्ह्ह्ह… अह्ह्ह.. ऊऊओह्ह्ह.. उउम्म्म…’ वो तड़पने लगी.. पर मैं भी अब सब कुछ समझ गया था कि किसी को कैसे मज़ा दिया जा सकता है। तो मैं उसके निप्पलों को कभी चूसता तो कभी उसके होंठों को चूसता.. जिससे शालिनी की कामवासना बढ़ती ही चली गई और मुझसे बार-बार लौड़े को चूत के अन्दर डालने के लिए बोलने लगी। वो मेरी इस क्रिया से इतना आनन्द में हो चुकी थी कि वो खुद ही अपनी कमर उठा-उठा कर मेरी उँगलियों को अपनी चूत में निगलते हुए- अह्हह्ह उउउउम.. बहुत दिनों बाद ऐसा सुख मिल रहा है सुबह 4 बजे को ....आह्ह्ह्ह्ह... अनुज आई लव यू ऐसे ही बस मुझे अपना प्यार देते रहना आआह... उउउम्म्म… वो कामुक होकर बुदबुदाते हुए अकड़ने लगी और अगले ही पल उसकी चूत का गर्म लावा मेरी उँगलियों पर बरसने लगा। तब भी मैंने अपनी उँगलियाँ नहीं निकालीं.. जब वह शांत हुई तो मैंने अपनी उँगलियों को निकालकर देखा जो कि उसके कामरस से सराबोर थी। तभी मेरे दिमाग में न जाने कहाँ से एक फिल्म का सीन आ गया.. जिसमें लड़का लड़की की चूत रस से सनी उँगलियों को उसके गांड़ की छेद में डालकर आगे-पीछे करते हुए उसके चुचियों को चूसता है.. तो मैंने भी सोचा क्यों न अपनी इस इच्छा को भी पूरा कर लूँ और देखूँ क्या सच में कोई इस तरह से भी मज़ा ले सकता है। तो मैंने भी उसके चूची चूसते हुए उसकी चूत रस से सनी हुई उँगलियों में से एक ऊँगली उसकी गांड के छेद पर रखी ही थी कि शालिनी ने आँखें खोलकर अपने हाथों से मेरी ऊँगली पकड़कर अपनी चूत पर लगा दी। शायद उसने सोचा होगा मेरा हाथ धोखे से उधर गया है.. अब उसे कैसे मालूम होता कि मेरी इच्छा कुछ और ही है। मैंने फिर से अपनी ऊँगली उसके चूत से हटा कर.. उसकी गांड के छेद पर रख दी और उसकी गांड के गोल छेद पर ऊँगली कुछ इस तरह से चला रहा था.. जैसे कोई गम लगाया जाता है। इस बार शालिनी चुप्पी तोड़ती हुई बोली- अरे अनुज ये क्या कर रहे हो.. वो गलत छेद है। तो मैंने उससे बोला- नहीं.. तुम्हें लगता होगा.. मुझे नहीं, मैंने फिल्मों में भी ऐसे करते हुए देखा है। तो वो डरती हुई मुझसे बोली- नहीं.. मैंने ऐसा पहले कभी नहीं किया.. पर सुना है बहुत दर्द होता है प्लीज़.. ऐसा मत करो। तो मैंने उसे समझाया और बोला- मैं तुम्हें दर्द नहीं दूंगा.. पर हाँ.. थोड़ा बहुत तो तुम मेरे लिए बर्दास्त तो कर ही सकती हो.. अगर तुम्हें ज्यादा तकलीफ हुई तो मैं अपना हाथ हटा लूँगा.. जब तक तुम नहीं चाहोगी.. तब तक ऐसा कुछ भी नहीं करूँगा, जिससे तुम्हें तकलीफ हो। पर शालिनी का ‘नानुकुर’ बंद नहीं हुई, तो मैं उठ गया और उससे रुठते हुए बोला- देख लिया तुम्हारा प्यार.. बस मुँह से ही बोलती हो जो कहोगे वो करुँगी.. वगैरह.. वगैरह.. सब झूठ बोलती थीं। इतना सुनकर वो मेरे पास आई और मेरे होंठों में अपने होंठों को रख कर मेरा मुँह बंद करके… मुझे अपने आगोश में ले लिया.. पर मेरा विरोध देखकर उसने प्यार भरी नज़रों से देखते हुए बोली- अनुज बस इत्ती सी बात पर नाराज़ हो गए… तुम्हारे लिए तो मेरी जान भी हाज़िर है.. पर मैं डर रही हूँ ऐसा करने से.. मैंने पहले कभी नहीं किया और तुम्हारा इतना बड़ा है.. अन्दर कैसे जाएगा.. मुझे बहुत तकलीफ होगी, प्लीज़ यार.. मेरी बात समझने की कोशिश करो। तो मैंने भी मन में सोचा कि चल यार गांड तो मारनी ही है.. अब ज्यादा नहीं.. बस इसे किसी तरह तैयार करना है। तो मैंने भी बात बनाते हुए बोला- अच्छा ये बोलो.. मैंने कब आपसे बोला कि मैं अपना लौड़ा डालना चाहता हूँ.. पर हाँ.. जब तुम कहोगी तभी ऐसा होगा.. मैं तो बस मज़े के लिए अपनी ऊँगली डाल रहा था.. आपने तो बतंगड़ बना दिया… मेरे इस तरह ‘आप आप’ कहने पर आंटी बोली- प्लीज़ तुम मुझे शालिनी या तुम कहकर ही बोला करो.. मुझे ये अच्छा नहीं लगता कि तुम मुझसे ‘आप आप’ करो.. मैं अब तुम्हारी हूँ तुमने मुझे बहुत हसीन पल और सुख दिए हैं.. जिसे मैं कभी भुला नहीं सकती हूँ। तो मैंने भी नहले पर दहला मारते हुए उससे बोला- तो अब तुम्हारा क्या इरादा है? वो कुछ नहीं बोली और मेरी बाँहों में समाकर मुझे चुम्बन करने लगी मेरे गालों और छाती पर चुम्बनों की बौछार करते हुए बोली- जैसी तुम्हारी इच्छा… मैं उसे लेकर फिर से बिस्तर पर उसी तरह से लेटकर प्यार करने लगा.. जैसे पहले कर रहा था। पर अब उँगलियों की चिकनाई सूख चुकी थी तो मैंने अपनी दो उँगलियों को उसके मुँह में डाल दी और उसके चुचियों को मुँह में भर कर फिर से चूसने लगा। शालिनी ने मेरी उँगलियों को किसी लॉलीपॉप की तरह चूस-चूस कर गीला करके बोली- अब कर लो अपनी इच्छा पूरी… मैंने उसकी ये बात सुनकर उसे ‘आई लव यू’ बोला और पहले उसे हर्ट करने के लिए माफ़ी भी मांगी..पर उसने जवाब में बोला- नहीं यार.. होता है कोई बात नहीं.. मुझे बुरा नहीं लगा। फिर मैंने भी देर न करते हुए उसकी गांड के छेद पर उसके थूक से सनी ऊँगली को चलाने लगा.. जिससे उसे भी अच्छा लग रहा था। थोड़ी देर बाद मैंने फिर से उसे ऊँगलियां चुसवाईं और अबकी बार मैंने एक ऊँगली गांड के अन्दर डालने लगा। उसकी गांड बहुत ही तंग और संकरी थी.. जिससे वो थोड़ा ‘आआआह’ के साथ ऊपर को उचक गई और मेरे दांतों से भी उसके गुलाबी टिप्पे रगड़ गए। वो दर्द से भर उठी ‘अह्ह्हह्ह आउच’ के साथ बोली- अन्दर क्यों डाल रहे थे.. लगती है न.. तो मैंने बोला- थोड़ा साथ दो.. मज़ा आ जाएगा। फिर से उसके चूची को अपने मुँह की गिरफ्त में लेकर चूसने लगा और अपनी ऊँगली को उसकी गांड की दरार में फंसाकर अन्दर की ओर दवाब देने लगा। इस बार शालिनी ने भी साथ देते हुए अपने छेद को थोड़ा सा खोल दिया, जिससे मेरी ऊँगली आराम से उसकी गांड में आने-जाने लगी.. पर सच यार उसके चेहरे के भावों से लग रहा था कि उसे असहनीय दर्द हो रहा है। पर मैंने भी ठान रखा था.. होगा तो देखा जाएगा। फिर उसे प्यार से चूमने-चाटने लगा और देखते ही देखते उसकी गांड ने मेरी ऊँगली को एडजस्ट कर लिया। जिससे अब मेरी ऊँगली आराम से अन्दर-बाहर होने लगी और शालिनी भी मज़े से सिसियाने ‘श्ह्ह्ह्ह’ लगी थी। मैंने फिर से उसके मुँह से ऊँगलियों को गीला करने के लिए डाला और उसने भी बिना देर किए ऐसा ही किया। फिर मैंने अपनी एक ऊँगली उसकी गांड में डाली तो वो बिना विरोध के आराम से चली गई तो मैंने उसका छेद फ़ैलाने के लिए फिर से ऊँगली बाहर निकाली और अबकी बार दो ऊँगलियां उसकी गांड में डालने लगा तो शालिनी फिर से दर्द भरी “आआअह आउच” और कराह के साथ बोली- अनुज.. दो नहीं, एक से कर.. मुझे दर्द हो रहा है। तो मैंने बोला- अभी थोड़ी देर पहले तो एक से भी हो रहा था.. पर तुम परेशान मत हो.. मैं आराम से करूँगा। मैं फिर से धीरे-धीरे उसकी गांड की गहराई में अपनी दो उँगलियों से बोरिंग करने लगा और उसके निप्पलों को चूसने-चाटने लगा, जिससे शालिनी की चूत से कामरस की धार बहने लगी। देखते ही देखते उसकी दर्द भरी ‘आआआआह’ मादक सिसकियों में परिवर्तित हो गई। ‘श्ह्ह्ह्ह आह्ह्ह्ह ऊऊम’ शालिनी अपनी कमर ऊपर-नीचे करने लगी और अपने चुचियों खुद सहलाने लगी। अब वो कंपकंपाती हुई आवाज़ में मुझसे लंड चूत में डालने के लिए बोलने लगी, पर मैंने उससे कहा- मेरा एक कहना मानोगी। आंटी बोली- एक नहीं.. सब मानूंगी.. पर पहले इस चूत की आग शांत तो कर दे बस। मैंने बोला- पक्का.. तो शालिनी बोली- अब क्या लिख के दूँ.. प्रोमिस.. मैं नहीं पलटूंगी.. पर जल्दी कर.. अब मुझसे और नहीं रहा जाता। तो मैंने भी बिना देर किए हुए उसके ऊपर आ गया और उसकी टांगों को फैलाकर उसकी चूत पर अपना लौड़ा सैट करके थोड़ा सा अन्दर दबा दिया ताकि निकले न और फिर अपनी कोहनी को उसके कंधों के अगल-बगल रखकर उसके होंठों को चूसते हुए उसे चोदने लगा। अब शालिनी को बहुत अच्छा लग रहा था.. वो भी अपनी कमर को जवाब में हिलाते हुए चुदाई का भरपूर आनन्द ले रही थी। जब मैं उसकी चूत में थोड़ा तेज-तेज से लौड़े को अन्दर करता.. तो उसके मुँह से मादक ‘गूं-गू’ की आवाज़ आने लगती.. क्योंकि उसके होंठ मेरे होंठों की गिरफ्त में थे। अब शालिनी अपने दोनों चुचियों को खुद ही अपने हाथों से रगड़ने लगी.. जिससे उसका जोश बढ़ गया और वो जोर-जोर से कमर हिलाते-हिलाते शांत हो गई। उसकी चूत इतना अधिक पनिया गई थी कि मेरा लौड़ा फिसल कर बाहर निकल गया। मैंने फिर से अपने लौड़े को अन्दर डाला और अब हाथों से उसके चुचियों को भींचते हुए उसकी चुदाई चालू कर दी.. जिससे वो एक बार फिर से जोश में आ गई। अब कुछ देर की शंटिंग के बाद मेरा भी होने वाला था तो मैंने उसे तेज रफ़्तार से चोदना चालू कर दिया। मेरी हर ठोकर पर उसके मुँह से मादक आवाज़ आने लगी। ‘अह्ह्ह अह्ह्ह्ह उम्म्म्म ऊऊओह’ मैं बस कुछ ही देर में उसकी चूत में स्खलित होने लगा..मेरे गर्म लावे की गर्मी से चूत ने भी फिर से कामरस की बौछार कर दी, मैं उसके ऊपर झुककर उसके गले को चूमने लगा और निढाल होकर उसके ऊपर ही लेट गया। थोड़ी देर बाद जब फिर से घड़ी पर निगाह गई तो देखा सुबह के पांच बज चुके थे। शालिनी को मैंने जैसे ही समय बताया तो वो होश में आकर हड़बड़ा कर उठते हुए बोली- यार तुम्हारे साथ तो पता ही न चला.. कल रात तुम कब आए और इतनी देर मैंने तुम्हारे साथ एक ही बिस्तर पर गुजार दिए… पता नहीं दूध वाला रात को आया होगा और घंटी बजा कर चला भी गया होगा.. इस तरह की बातों को बोलकर वो परेशान होने लगी.. तो मैंने बोला- मैं हूँ न.. परेशान मत हो । मैंने उसके चुचियों दबाते हुए बोला- वैसे भी मुझे ये दूध बहुत पसंद है। तो वो भी चुटकी लेते हुए बोली- ये बस दबाए, रगड़े और चूसे जा सकते हैं इनसे मैं अपने जानू को चाय नहीं दे सकती। तो मैंने ताली बजाई और बोला- ये बात.. समझदार हो काफी। फिर मैंने उसे याद दिलाया- अभी कुछ देर पहले कुछ बोला था तुमने.. याद है या भूल गईं? तो बोली- बता न.. कहना क्या चाहते हो? तब मैंने कहा- अभी कुछ देर पहले मैंने बोला था कि मेरा एक कहना मानोगी.. तो तुम बोली थीं कि एक नहीं सब मानूंगी.. पर पहले इस चूत की आग शांत कर दे। तो शालिनी बोली- अरे यार तुम बोलो तो सही.. क्या कहना चाहते थे? तो मैंने उससे उसकी गांड मारने की इच्छा बता दी। वो आंटी बोली- अनुज मुझे बहुत दर्द होगा.. सुना है, पहली बार के बाद चलने में भी तकलीफ होती है.. पर तुझे इसी से खुशी मिलेगी तो मैं तैयार हूँ.. मैं तुझे अब खोना नहीं चाहती.. तू जो चाहे वो कर.. उसके इस समर्पण भाव को देखकर मैं पिघल गया और उसे अपनी बाँहों में चिपका लिया। उसके बदन की गर्मी बहुत अच्छी लग रही थी। तभी शालिनी के फ़ोन पर घंटी बजी जो कि मेरी मम्मी ( पुनम दुबे ) की थी। आंटी ने मोबाइल मुझे दे दिया मैंने फ़ोन रिसीव किया और स्पीकर ऑन करके बात करने लगा इधर आंटी नाइटी पहनने लगी। उधर से मम्मी ( पुनम दुबे ) बोली - क्या अनुज जितनी बार तुम्हारा फ़ोन लगाया मैंने उतनी पर फ़ोन ऑफ जा रहा था.. मैं तो बहुत परेशान हो गई थी और शालिनी आंटी के फोन पर भी कॉल लगाया मैंने मगर कोई जवाब नहीं दे रहा था। कहां हो तुम और कब तक घर आओगे ? दो मिनट के लिए मैं बहुत घबरा गया था । फिर खुद को संभालते हुए समझदारी के साथ काम लिया और बोला- अरे फोन तो साइलेंट पर लगा हुआ था अभी बस केवल लाइट जल रही थी.. तो मैंने उठाया.. तब पता चला कि तुम्हारा फोन आया है और मेरी फोन का बैटरी खत्म होने की वजह से ऑफ हो गया था और सुबह 7 बजे तक घर वापस आ जाउंगा। फिर इधर-उधर की बात के साथ फोन काट दिया। तब मैंने शालिनी आंटी से बोला- तो मैं अब घर होकर आता हूँ नहीं तो सब गड़बड़ हो सकती है और मैं भी कपड़े पहनने लगा और जाते-जाते आंटी से पूछा- हाँ.. तो आज गांड मारने दोगी न? तो आंटी बोली- बस शाम तक वेट करो और घर होकर जल्दी से आओ शाम तक मैं तुम्हारा इन्तजार करुँगी। फिर मैं वहाँ से अपने घर की ओर चल दिया और करीब 30 मिनट में घर पहुँचा.. दरवाज़ा बंद होने के कारण घंटी बजाई.. तो मेरी मम्मी ने दरवाज़ा खोला और मुझे देखते ही बड़बड़ाने लगीं- तुम्हारा कोई फ़र्ज़ नहीं बनता कि एक बार घर पर बात कर लूँ और अपना फोन भी ऑफ किए थे? तो मैंने उनको समझाया- मम्मी ऐसा नहीं है…आपको तो मेरे गेम खेलने की आदत आप जानती ही हो.. तो फोन शाम में ही ऑफ हो गया था और चार्जर घर पर ही है.. इसी वजह से.. आप से बात नहीं कर पाया। खैर.. आप बोलो.. कोई काम हो तो मैं कर देता हूँ.. फिर मुझे शाम को वहाँ जल्दी निकलना है.. सब्जी भी लेकर जानी है… उनके यहाँ ख़त्म हो गई है.. वरना उनको खाना पकाने में देरी हो जाएगी.. इतना सब बहाना बनाने के बाद मम्मी कुछ शान्त हुईं.. और बोलीं- अरे कोई काम नहीं है , मैंने बस तेरे हाल लेने के लिए फोन किया था। तेरा शाम से ही फोन ऑफ जा रहा था और शालिनी जी का मेरे पास नम्बर भी नहीं था और शुभम से भी तेरे कोई हाल-चाल नहीं मिले थे. तो मुझे चिंता हो रही थी कि क्या बात हो गई. बस और कुछ नहीं था.खैर कोई बात नहीं. वैसे कल तुम्हारा दोस्त कितने बजे तक आ जाएगा? तो मैंने उन्हें बताया कल सुबह 8 बजे तक.. फिर मम्मी कुछ नहीं बोलीं। .....…............... शाम को घर से निकले से पहले मैंने कुछ पार्टीवियर कपड़े लैपटॉप के बैग में रखे.. साथ ही चार्जर भी डाला और मम्मी से बोला- अच्छा मम्मी.. मैं अब चलता हूँ। तो उन्होंने बोला- कल सुबह समय से आ जाना और अगर देर हो.. तो फ़ोन कर देना। फिर मैं ‘ओके’ बोलकर अपने घर से मार्केट की ओर चला गया वहां से अपने मोबाइल जो डिस्प्ले बदलने दिया था वह ठीक हो चुका था उसे लेकर पैसे दिए और फिर शालिनी आंटी के घर की ओर चल दिया। जब मैं उनके घर की ओर जा रहा था तो मेरे दिमाग में शालिनी आंटी के चिकने गोल चूतड़ नाच रहे थे कि कैसे आज मैं उसकी गांड बजाऊँगा और यूँ ही ख्यालों में खोया हुए कब मैं उनके घर पहुँचा.. पता ही न चला। फिर मैंने घंटी बजाई तो थोड़ी देर बाद आंटी ने दरवाज़ा खोला और मुझे देखते हुए बड़े आश्चर्य से बोली- अरे अनुज इतनी जल्दी आ गऐ । तो मैंने तुरंत बैग सोफे पर पटका और उसे बाँहों में भर कर प्यार करते हुए उसके चूची दबाकर कहा- यार तेरी गांड ने मुझे इतना दीवाना बना रखा है कि मेरा मन कहीं लग ही न रहा था। तो उसने मेरे गालों पर चुटकी ली और इंग्लिश में शैतानी भरे लहजे से बोली-यू आर स्वीट एंड सॉर.. तू बड़ा हरामखोर है.. तो मैंने भी उसके भोंपू कस कर दबा कर जवाब दिया- सीखा तो तुझी से ही है।” फिर वो एक शरारत भरी मुस्कान के साथ बोली- देख अभी मैं तेरे लिए चाय लाती हूँ और तब तक तू फ्रेश हो जा.. जब तक तू चाय पियेगा.. मैं तैयार होकर आ जाऊँगी.. फिर हम तीनों किसी अच्छे से होटल में डिनर करने चलेंगे। तो मैंने भी उससे मुस्कुरा कर बोला- आज तुम मुझे बिना कहे ही चाय पिला रही हो… क्या बात है जो इतना ख्याल है मेरा.. तो शालिनी बोली- अरे कुछ नहीं.. जब तू मेरा इतना ख़याल रखता है.. तो मेरा भी फर्ज बनता है। इतना कह कर वो रसोई में चली गई और मैं वाशरूम चला गया। मैंने चेहरा वगैरह साफ किया और अपना बैग खोल कर कपड़े निकाले। तब तक आंटी चाय ले आई और मेरे कपड़े देख कर बोली- ओहो… क्या बात है अनुज किसी और को भी नीचे गिराने का इरादा है। तो मैंने बोला- ऐसा नहीं.. वो तो मैं इसलिए लाया था क्योंकि पहली बार किसी के साथ मैं डिनर पर जा रहा हूँ.. तो इस पल को और अच्छा करने के लिए मैंने ऐसा किया है। तो बोली- वैसे जो पहने हो.. वो भी ठीक हैं.. पर जब लाए हो.. तो बदल लो… अब तो मुझे भी तेरी तरह सजना पड़ेगा.. ताकि मैं तेरे इस पल को और हसीन कर दूँ। अब तुम चाय की चुस्कियों का आनन्द लो और मैं चली तैयार होने.. तो मैंने झट से एक हाथ से चाय का मग पकड़ा और दूसरे हाथ से उनके चूची मसके.. तो बोली- अरे छोड़ो.. अभी रात भी अपनी ही है.. नहीं तो जाने में देर हो जाएगी। मैंने बोला- चुस्कियों का मज़ा जो तेरे चुचियों देते हैं वो दम चाय में कहाँ..और एक बार उसके मस्त चूचियां को फिर से दबा दिया। तो शालिनी बोली- अच्छा.. अब जाने भी दो.. रात को जी भर के चुस्कियां ले ले कर पी लेना.. पर अभी तुम सिर्फ चाय पियो। इतना कहकर वो चली गई और मैंने भी चाय ख़त्म की। मैं अपने कपड़े पहनने लगा और तैयार हो गया और वहीं सोफे पर बैठकर शालिनी का इन्तजार करने लगा तभी मेरी नजर घड़ी पर पड़ी .. तो शाम के 6 बज चुके थे पर अंकिता अभी तक घर नहीं आई थी थोड़ी देर बाद अंकिता भी कॉलेज से घर वापस आ गई । और अपने कमरे में चली गई। करीब पांच मिनट बाद आंटी भी कमरे से बाहर आ गई और मुझसे बोली- तुमको इतनी बार बोला मुझे आंटी-वांटी नहीं.. शालिनी बोला करो.. पर तुम्हें समझ नहीं आता क्या? पर उनकी इस बात का मेरे ऊपर कोई असर नहीं पड़ा कि वो क्या कह रही है क्योंकि मैं उसे देखता ही रह गया था। आज वो किसी मॉडल से कम नहीं दिख रही थी.. क्या बला की खूबसूरत लग रही थी उसने अपने बालों को पोनी-टेल की तरह बांध रखा था और नेट वाला अनारकली साड़ी पहनी हुई थी..आँखों में काजल और मस्कारा वगैरह लगाकर मेकअप कर रखी था..आज वो वाकयी बहुत सुन्दर सी किसी परी की तरह दिख रही थी। उसके होंठों पर जो सुर्ख लाल रंग की लिपस्टिक थी.. वो भी शाइन मार रही थी। मैं तो उसके रूप-सौंदर्य में इतना खो गया था कि मुझे कुछ भी सुनाई नहीं दे रहा था और सिर्फ वही दिखाई भी दे रही थी। यार क्या गजब का माल लग रही थी.. देख कर लग ही नहीं रहा था कि ये शुभम की मम्मी है या उसकी बड़ी बहन है । उसके कपड़ों से काफी अच्छी सुगंध आ रही थी.. जो की किसी इम्पोर्टेड सेंट की लग रही थी। मैंने उससे पूछा- कौन सी कंपनी का कमाल है.. जो इतना मादक महक दे रही है? तो उसने बताया- अभी पिछली बार मेरे पति लाए थे। ‘अरे मैंने कंपनी पूछी है…’ तो आंटी बोली- ‘मैरिगिल्ड ’ का है। तो मैंने भी मुस्कुरा कर बोला- फिर तो फिट है । वैसे आज इतना सज-धज के चलोगी तो पक्का दो-चार की जान तो ले ही लोगी। तो बोली- मुझे तो बस अपने इस आशिक से मतलब है और मैंने तुम्हारी ख़ुशी के लिए ये सब किया है ताकि तुम्हारी पहली डेट को हसीन बना सकूँ।
31-10-2026, 11:19 AM
अब...
तो आंटी ने मुझे कार की चाभी दी और बोली- मुझे तो चलानी आती नहीं.. अगर तुम्हें आती हो तो चलो.. नहीं तो फिर हम बाइक से ही चलते हैं। तो मैंने आंटी से चाभी ली और बोला- मैं बहुत अच्छे से चला लेता हूँ.. तभी आंटी ने कुछ मुस्कुरा कर बोली- तुम बिस्तर पर तो अच्छा चलाते हो.. अब रोड पर भी देखती हूं । फिर उन्होंने एक आँख मारी और मैं और आंटी चल दिए। जब हम दोनों कमरे से बाहर निकले तो अंकिता ने हमें दोनों को टोकते हुए बोली - आप दोनों कहीं बाहर जा रहे हो किया। तभी शालिनी आंटी बोली - बहुत दिनों से कहीं बाहर नहीं निकली हुं तो आज मन किया कहीं बाहर जाने को , अगर तुझे भी चलना है तो चल सकती है। अंकिता बोली - अच्छा ठीक है आप दोनों जाओ , मैं नहीं जाऊंगी क्योंकि आज कॉलेज में कुछ ज्यादा भागदौड़ की वजह से मैं थक गई हूं इस लिए घर पर रह कर आराम करूंगी। फिर अंकिता अपने कमरे में चली गई। हम दोनों अपार्टमेंट के नीचे आये और कार में सवार होकर , मैंने गाड़ी स्टार्ट की और चल दिया.. कुछ दूर पहुँचते ही आंटी मुझसे बोली- वैसे हम डिनर पर कहाँ चल रहे हैं? तो मैंने बोला- जहाँ आप सही समझो। आंटी बोली- अब तेरी पहली डेट को कुछ स्पेशल तरीके से बनानी है.. तो कुछ स्पेशल करते हैं। एक काम करो लैंडमार्क होटल चलते हैं। तो मैंने बोला- इतना मेरा बजट नहीं है.. किसी सस्ते और अच्छे होटल में चलते हैं। तो वो मेरे गालों पर प्यार भरी पप्पी देकर बोली- यार तू कितना भोला है.. मैं इसी कारण तुझ पर मरने लगी हूँ.. पर अभी मैं जैसा बोलती हूँ.. वैसा ही करो, नहीं तो मुझे बुरा लगेगा। तो मैंने बोला- पर मेरी एक शर्त है। शालिनी आंटी बोली- कैसी? मैंने बोला- जो भी बिल होगा उसे मैं ही दूँगा.. शालिनी आंटी बोली - ये क्या.. मैं तुमसे प्यार करती हूँ.. ऐसा नहीं कर सकती.. मेरा सब कुछ तुम्हारा ही है। मैंने भी बोला- वो सब ठीक है.. पर मेरी इच्छा है कि मैं भी अपनी गर्ल-फ्रेण्ड को पहली डेट पर अपने पैसों पर ले जाऊँ। मेरे मुँह से गर्ल-फ्रेण्ड शब्द अपने लिए सुनकर उसकी आँखों में खुशी के आंसू आ गए.. जिसे मैंने भांप लिया और बोला- देखो अब रोने न लगना.. नहीं तो चेहरा अच्छा न लगेगा और मेकअप भी ख़राब हो जाएगा। मेरी इस प्रतिक्रिया पर उसने मेरे गालों पर एक चुम्मी जड़ दी और मेरा हाथ जो कि गेयर पर था उसके ऊपर अपना हाथ रखकर मुझसे प्यार भरी बातें करने लगी। बातों ही बातों में कब उसने अपना हाथ उठा कर मेरी जांघ पर रख कर सहलाना चालू कर दिया.. मुझे पता ही न चला। ये सब कुछ मेरे साथ इतने रोमांटिक तरीके से मेरे साथ पहली बार हो रहा था। मुझे तब होश आया जब उनके हाथ ने मेरी जींस के ऊपर से ही मेरे लौड़े पर दाब देना चालू किया। यार क्या एहसास था.. बस यही लग रहा था कि ये समय यहीं रूक जाए.. खैर.. हम तब तक लैंडमार्क होटल के पास पहुँच गए तो मैंने उन्हें ठीक से बैठने के लिए बोला और होटल के एंट्री-गेट पर उन्हें उतार कर गाड़ी पार्किंग में लगाने चला गया। वहाँ मुझे मेरे पापा के दोस्त अपनी फैमिली के साथ मिले तो मैं तो उनको देखकर डर ही गया था.. पर ‘थैंक गॉड’ कि वो वहाँ से जा रहे थे। किसी की बर्थ-डे पार्टी में आए थे.. उन्होंने मुझसे बात की, तो मैंने बोला- अरे मैं यहाँ बाजार में आया था बाहर पार्किंग फुल थी तो मेरे दोस्त ने बोला अन्दर ही पार्क कर दो.. उसकी ये नई कार है। इसलिए तो वो बोले- ठीक किया.. अच्छा मैं चलता हूँ। वो इतना कहकर जब चले गए.. तब जाकर जान में जान आई। फिर जब मैं एंट्री-गेट पर पहुँचा तो शालिनी बोली- क्यों क्या हुआ.. बड़ा समय लगा दिया तुमने? तो मैंने उसे पूरा वाकिया बता दिया.. जो उधर हुआ था। तो शालिनी बोली- चलो बढ़िया हुआ..अब हम चलते हैं। फिर हम लोग अन्दर गए और लिफ्ट से फ़ूड कोर्ट वाली फ्लोर पर पहुँच गए। वहाँ पर हम लोगों ने एक कपल सीट ली.. वैसे तो वीकेंड पर सीट मिलना कठिन रहता है.. पर उस दिन कोई ख़ास भीड़ नहीं थी। फिर वेटर आया और मेनू देकर चला गया तो मैंने शालिनी से बोला- जो तुम्हें पसंद हो.. वो मंगवा लो। आज तुम्हारे मन का ही खाऊँगा। तो शालिनी ने वेटर को बुलाया और उसे आर्डर दिया और आर्डर में पनीर टिक्का मंगवाया। .....…... हम लोग एक-दूसरे के हाथों को सहलाते हुए एक-दूसरे से बात कर रहे थे कि तभी वेटर पनीर टिक्का और कोल्ड ड्रिंक देकर चला गया.. जिसे हम लोगों ने खाया और एक-दूसरे को अपने हाथों से भी खिलाया। तब तक हमारा खाना भी आ चुका था, फिर हम लोगों ने खाना खाया और मैं वाशरूम चला गया। इसी बीच शालिनी आंटी ने मुझे सरप्राइज़ देने के लिए और मेरे इस दिन को यादगार बनाने के लिए वेटर को बुलाया और उसे शैम्पेन और कुछ स्नैक्स का आर्डर दिया और साथ ही यह भी बोला कि जैसे ही मैं अन्दर आऊँ.. वैसे ही ‘ये शाम मस्तानी.. मदहोश किए जाए..’ वाला गाना बजा देना। इधर अब मुझे क्या पता कि शालिनी आंटी ने मेरे लिए क्या कर रखा है.. तो मैं जैसे ही अन्दर पहुँचा तो गाना चालू हो गया और रेस्टोरेंट की रोशनी बिल्कुल मद्धिम हो गई.. जो कि काफी रोमांटिक माहौल सा बना रही थी। मेरी ख़ुशी का कोई ठिकाना ही न रहा और मैंने जाते ही शालिनी को ‘आई लव यू वेरी मच’ बोलकर चूम लिया। जिससे वहाँ मौजूद सभी लोग क्लैपिंग करने लगे… उनको ये लग रहा था कि हम अपनी एनिवर्सरी सेलिब्रेट करने आए हैं.. और लगता भी क्यों नहीं.. आज शालिनी कमसिन जो लग रही थी। उसने अपना फिगर काफी व्यवस्थित कर रखा था और साथ ही पार्लर वगैरह हर महीने जाती थी जिसकी वजह से उसे देखकर उसकी उम्र का पता लगाना काफी कठिन था। वो बहुत ही आकर्षक शरीर की महिला थी.. फिर मैंने और उसने ‘चीयर्स’ के साथ शैम्पेन का एक-एक पैग पिया.. इसके पहले न ही कभी मैंने वाइन पी थी और न ही उसने.. खैर.. एक गिलास से कोई फर्क तो न पड़ा.. पर एक अजीब सा करेंट दोनों के शरीर में दौड़ गया। खाना खाने के बाद शालिनी ने बिल पे किया और शालिनी ने वेटर को टिप भी दी। फिर हम दोनों लिफ्ट से नीचे आए और मैं उसे वहीं एंट्री-गेट पर छोड़कर कार लेने चला गया.. पर जब कार लेकर वापस आया तो शालिनी वहाँ नहीं थी। मेरे दिमाग में तरह-तरह के सवाल आ रहे थे जिसकी वजह से मैं बहुत ही घबरा गया जिससे मेरा शरीर पसीने से भींग गया । मैंने चारों ओर नज़र दौड़ाई.. पर मुझे आंटी नजर नहीं आई। मैंने उसका फ़ोन मिलाया जो कि नहीं उठा.. तीन-चार बार मिलाने के बाद भी जब फोन नहीं उठा.. तो मैं बहुत परेशान हो गया और सोचने लगा कि अब क्या करूँ.. कहाँ देखूँ..? मेरी कुछ समझ में नहीं आ रहा था.. मैं सोच में पड़ गया.. कहीं आंटी को नशा तो नहीं चढ़ गया.. कहीं उसका कोई फायदा न उठा ले.. तमाम तरह के विचार मन को सताने लगे। फिर मैंने गाड़ी को रोड़ साइड पार्क किया और होटल के अन्दर चला गया। वहाँ एक रिसेप्शनिस्ट बैठी हुई थी तो मैंने उससे घबराते हुए पूछा- अभी क्या कोई लेडी अन्दर आई है? तो वो मेरी घबराहट को देखकर हँसते हुए बोली- अरे सर आप थोड़ा रिलैक्स हो जाइए.. लगता है मैडम से आप कुछ ज्यादा ही प्यार करते हैं। यह कहते हुए उसने अपनी सीट पर रखे पानी के गिलास को मुझे दिया। पानी पीकर मैं भी थोड़ा नार्मल हुआ और उससे पूछा- वैसे वो है कहाँ? तो वो बोली- मेम ने लगता है पहली बार पी थी.. जिसकी वजह से उनको उलटी और चक्कर आ रहे थे.. तो वो वाशरूम में हैं… तो मैं भी उसकी हालत को समझते हुए वाशरूम जाने लगा ताकि उसकी कुछ मदद कर सकूँ.. पर मैं जैसे ही उधर की ओर बढ़ा तो उस लड़की ने बोला- सर वो कॉमन वाशरूम नहीं है आप लेडीज़ वाशरूम में नहीं जा सकते। तो मैंने चिंता जताते हुए उससे पूछा- जब उसकी ऐसी हालत है तो उसे मदद की जरूरत होगी। रिसेप्शनिस्ट बोली- आपको फ़िक्र करने की कोई जरुरत नहीं है.. मैडम के साथ लेडीज सर्वेंट भी उनकी हेल्प के लिए गई है। तब जाकर मुझे कुछ राहत की सांस मिली.. तब तक शालिनी वहाँ आ चुकी थी। उसको देखते ही रिसेप्सनिस्ट लड़की ने बोला- मेम आप बहुत लकी हो जो आपको इतना चाहने वाला कोई मिला। अब उसे क्या पता कि दाल में कितना नमक है.. खैर.. वो शालिनी को बोली- आपके अचानक अन्दर आ जाने पर सर बहुत परेशान से हो गए थे.. उनकी हालत तो देखने वाली थी.. लगता है आपको कुछ ज्यादा ही प्यार करते हैं। तो शालिनी मुस्कुरा कर मेरे पास आई और मेरे हाथ पकड़कर बोली- तुम इतनी जल्दी क्यों परेशान हो जाते हो? तो मैंने बोला- तुम बिना बताए अचानक यहाँ आ गईं और मुझे नहीं दिखीं.. तो मेरा परेशान होना तो लाजिमी है। उसने मुझसे ‘सॉरी’ बोलते हुए कहा- मेरी कंडीशन ही ऐसी हो गई थी कि मैं क्या करती? मेरी कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूँ? फिर मैंने बोला- चलो कोई बात नहीं.. अब तुम ठीक हो न? तो आंटी ‘हाँ’ में सर हिलाया.. फिर हम दोनों बाहर आए और गेटमैन से गाड़ी मंगवाई और घर की ओर चल दिए। रास्ते में मैंने उससे पूछा- शालिनी जब तुम शैम्पेन बर्दास्त नहीं कर सकती थीं तो पीने की क्या जरुरत थी? तो शालिनी बोली- मैं तो बस तुम्हारे खुशी के लिए ऐसा कर रही थी.. जो आजकल की लड़कियाँ करती हैं। मैंने भी उसके इस प्यार का जवाब शालिनी ‘आई लव यू.. वेरी मच’ बोलकर दिया। जिस पर आंटी के चेहरे की ख़ुशी दुगनी हो गई और आँखों में एक अजीब सी चमक साफ़ दिखने लगी। शायद वो अपने तन-मन से मुझे बहुत चाहने लगी थी.. उसने भी अपना एक हाथ मेरी जांघ पर रख दिया और बोली- अनुज सच में.. तुम भी मुझसे प्यार तो करते हो न.. मैंने भी ‘हाँ’ में जवाब दिया.. तो बोली- अनुज मैं तुम्हें वो सारी खुशियाँ दूँगी जिसके तुम हकदार हो.. तुम जैसा चाहोगे मैं वैसा ही करुँगी.. पर मेरे लिए अपने दिल में हमेशा यूँ ही जगह बनाए रखना.. वरना मेरा क्या होगा। यह कहते हुए वो अपने हाथों को मेरी जाँघों में फिराने लगी। जिससे मेरा जोश बढ़ने लगा.. मुझे उसका इस तरह से छूना बहुत ही आनन्ददायक लग रहा था। मैं भी उसके स्पर्श का मज़ा लेते हुए उससे रोमांटिक बातें करने लगा और घर जाने के लिए मैंने लम्बा वाला रास्ता पकड़ लिया ताकि इस रोमांटिक समय को और ज्यादा देर तक एन्जॉय किया जा सके। मेरे लम्बे रास्ते की ओर गाड़ी घुमाते ही शालिनी मुस्कुराकर मुझसे बोली- क्या बात है.. तुमने लम्बा रास्ता क्यों पकड़ लिया? तो मैंने उसे बताया- तुम्हारे साथ इस पल को और लम्बा बनाना चाहता था.. बस इसीलिए। फिर शालिनी मेरी ओर थोड़ा खिसक आई और मेरे लौड़े को जींस के ऊपर से ही रगड़ने मसलने लगी। उसकी इस हरकत से मेरे कल्लू नवाब को एक पल बीतते ही होश आ गया और वो अन्दर ही अन्दर अकड़ने लगा.. मानो जिद कर रहा हो कि बस अब मुझे आज़ाद कर दो। शालिनी ने जब मेरे लंड का कड़कपन अपनी हथेलियों में महसूस किया.. तो उसने मेरी जींस की ज़िप खोल दी और अन्दर हाथ घुसेड़ कर लंड को मुट्ठी में भरते हुए निकालने लगी.. पर इतनी आसानी से वो कहाँ निकलने वाला था। इस वक़्त वो अपने पूरे होश ओ हवाश में खड़ा हो चुका था। वो उस वक़्त इतना सख्त हो चुका था कि मेरी वी-शेप की चड्डी में नहीं मुड़ पा रहा था। शालिनी ने कई बार उसे दबा कर एक बगल से निकालने का प्रयास किया.. पर जब वो न निकाल पाई तो कहने लगी- अनुज क्या बात है.. आज यह मेरा हिरो लगता है मुझसे नाराज हो गया है.. देखो कितनी देर से मैं इसे देखने के लिए तड़प रही हूँ.. पर यह है कि निकल ही नहीं रहा है। तो मैंने भी मज़ाक में बोल दिया- अरे ये तुम्हारा अनुज है न.. वो इसे निकाल देगा.. पर तुम्हें इसे मनाना खुद ही पड़ेगा। तो आंटी मुस्कुराते हुए बोली- अरे फिर देर कैसी.. एक बार निकाल दो.. फिर देखो.. इसे मैं कैसे प्यार से मनाती हूँ। तो मैंने भी गाड़ी एक बगल में ली और जींस का बटन खोलकर नीचे सरका दी और अपनी चड्डी को साइड से पकड़ कर अपने सरियानुमा लौड़े को हवा में लहरा दिया। वो एकदम ऐसा अकड़ा हुआ किसी झंडे की तरह खड़ा था जिसे शालिनी आंटी देखकर अपनी मुस्कान न रोक सकी। वो मेरे लौड़े को हाथ में लेकर उसे प्यार से सहलाने लगी और बोली- अरे वाह.. तू तो हर समय तैयार रहता है.. मुझसे नाराज हो गया था क्या? जो मेरे निकालने पर नहीं निकल रहा था। मैं फिर से गाड़ी चलाने लगा.. पर अब रफ़्तार धीमी थी.. ताकि कोई दिक्कत न हो। उधर आंटी लगातार मेरे लौड़े को प्यार किए जा रही थी जो कि मेरे अन्दर की कामुकता को बढ़ने के लिए काफी था। मैंने बोला- ये आज ऐसे नहीं मानेगा.. आंटी बोली - फिर कैसे? मैंने बोला- अरे इसे प्यार करो.. चूमो-चाटो.. तब शायद कोई बात बन जाए। मैंने भी शालिनी आंटी का दायां चूची दबा दिया.. जिसके लिए वो तैयार नहीं थी। मेरे इस हमले से उसके मुँह से एक दर्द भरी ‘आह्ह्ह्ह्ह्’ निकल गई और उसने भी जवाब में मेरे लौड़े को कसकर दबा दिया.. जिससे मेरे भी मुख से एक ‘आआअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह’ निकल गई। फिर उसने अपने होंठों से मेरे गाल पर चुम्बन किया और मेरे लौड़े के टोपे पर अपने होंठों को टिकाकर उसे चूसने लगी। उसकी इतनी मादक चुसाई से मेरे शरीर में कम्पन होने लगा.. मुझसे अब गाड़ी चलाना मुश्किल हो रहा था.. तो मैंने वहीं एक तरफ गाड़ी खड़ी कर दी और एसी ऑन रखा.. हेड-लाइट बंद कर दी.. ताकि कोई समझ न सके कि क्या हो रहा है और रात के समय वैसे भी भीड़ कम ही रहती है और जो होती भी है वो सिर्फ गाड़ी वालों की होती है.. तो कोई डरने वाली बात भी न थी। फिर मैंने सीट थोड़ा पीछे को मोड़ दिया ताकि शालिनी और मैं आराम से मज़े ले सकें। फिर आंटी ने अपनी जुबान और होंठों से मेरे टोपे को थूक से नहलाते हुए दूसरे हाथ से मुठियाने लगी। मुझे इतना आनन्द आ रहा था कि मैं बता ही नहीं सकता.. ऐसा लग रहा था, जैसे मैं किसी जन्नत में सैर कर रहा हूँ। फिर उसने धीरे-धीरे मेरे टोपे पर अपनी जुबान चलाई.. जैसे कोई बिल्ली दूध पी रही हो..उसकी यह हरकत इतनी कामुक थी कि मैंने भी उसके भौंपुओं को हाथ में थाम कर बजाने लगा। उसकी भी चूत पनिया गई थी और वो आंटी से बोली- प्लीज़ अनुज मुझे यहीं चोद दो.. अब और नहीं रहा जाता मुझसे.. प्लीज़ बुझा दो मेरी आग..पर इस तरह खुले में मैंने चुदाई करने से मना कर दिया। खैर वो मेरे समझाने पर मान भी गई थी। फिर वो मेरे लौड़े को मुठियाते हुए इतने प्यार से चाट रही थी कि मुझे लगा कि अब मैं और ज्यादा देर टिकने वाला नहीं हूँ। तो मैंने उससे बोला- जान.. बस अब और दूरी नहीं बची है.. मंजिल आने में.. थोड़ा तेज़ चलो। तो वो मेरे इशारे को समझ गई और मेरे लौड़े को जहाँ तक उससे हो सका उतना मुँह के अन्दर तक ले जाकर अन्दर-बाहर करने लगी और अपने कोमल होंठों से मेरे लौड़े पर अपनी पकड़ मजबूत करने लगी.. जैसे मानो आज सारा रस चूस लेगी। उसकी इस क्रिया से मेरे मुख से ‘सीइइइ.. आआह्ह’ की मादक सिसकारियाँ फूटने लगीं। इतना आनन्द आ रहा था कि मानो मेरा लौड़ा उसके मुख में नहीं बल्कि उसकी चूत में हो.. मैंने भी उसके सर को हाथों से सहलाना चालू कर दिया। वो इतनी रफ़्तार से मुँह ऊपर-नीचे कर रही थी कि उसके मुँह से सिर्फ ‘गूंग्गगुगुगुं’ की ध्वनि आ रही थी जो कि मेरी उत्तेजना को बढ़ाने के लिए काफी था। फिर मैंने उसके सर को कसकर हाथों से पकड़ लिया और अपनी कमर को उठा-उठा कर उसके मुँह में लौड़ा ठूँसने लगा.. जिससे शालिनी की आँखें बाहर की ओर आने लगीं और देखते ही देखते मैंने अपना सारा माल उसके गले के नीचे उतार दिया। माल निकल जाने के बाद मुझे कुछ होश आया तो मैंने अपनी पकड़ ढीली की.. तो शालिनी ने झट से मुँह हटाया और बोली- ऐसे भला कोई करता है.. मुझे तो ऐसा लग रहा था कि थोड़ी देर और ऐसे ही चला तो मेरी जान ही निकल दोगे तुम.. । मैंने उसके गालों को चूमा और कहा- अपनी जान को भला मैं कैसे मार सकता हूँ शालिनी डार्लिंग.. थैंक्स। आंटी बोली- अच्छा मेरी हालत खराब करके ‘थैंक्स’? तो मैंने बोला- इसके लिए नहीं.. वो तो उसके लिए बोला जो तुमने आज मेरे लिए किया.. तो शालिनी आंटी बोली- जानू ये तो कुछ भी नहीं है.. आज तो मैं तुम्हारे लिए वो करने वाली हूँ जो आज तक मैंने कभी न किसी के साथ किया और न ही इस बारे में कभी सोची थी.. पर अनुज मैं अब वो तुम्हारे लिए करुँगी। तो मैंने उसे बाँहों में भर लिया और उसकी गर्दन में चुम्बन करते हुए उसे ‘आई लव यू आई.. लव यू’ बोलने लगा। जिससे शालिनी का दर्द भरा चेहरा फिर से खिलखिलाने लगा और फिर उसने अपनी पर्स से रुमाल निकाल कर मेरे लौड़े अच्छे से पोंछ कर साफ़ किया। फिर मुझे आँख मारते हुए कहने लगी- जानू अब जल्दी से घर चलो.. मुझे भी अब कुछ चाहिए.. तुम्हारा तो हो गया.. पर मेरे अन्दर की चीटियाँ अभी भी जिन्दा रेंग रही हैं। तो मैंने उसके चुचियों मसलकर कहा- अरे आज रात तेरी सारी चींटियों को रौंद-रौंद कर ख़त्म कर दूँगा.. बस तू घर चल.. फिर देख। फिर मैंने उतर कर अपनी जींस वगैरह सही से बंद की और घर की ओर चल दिए। करीब दस मिनट में हम अपार्टमेंट पहुँच गए.. वहाँ मैंने गार्ड को गाड़ी पार्क करने के लिए चाभी दी और शालिनी से बोला- आप चलो.. मैं चाभी लेकर आता हूँ। गार्ड ने कुछ ही देर में गाड़ी पार्क की और चाभी दे कर मुझसे बोला- साहब जी देर बहुत लगा दी आने में? तो मैंने बोला- हाँ.. वो आंटी के किसी रिश्तेदार के यहाँ पार्टी थी तो इसीलिए। मैंने उससे चाभी ली और कमरे की तरफ चल दिया अन्दर जाते ही पहले मेन गेट को लॉक किया और आंटी को आवाज़ दी- आंटी कहाँ हो आप ? तो बोली- मैं रसोई में हूँ। तो मैंने बोला- अब वहाँ क्या कर रही हो आप ? आंटी बोली- अरे तेरे साथ-साथ मुझे भी अब चाय का चस्का लग गया है और सर भी भारी-भारी सा लग रहा है.. तो मैंने सोचा चाय पी ली जाए। मैंने भी बोला- चलो अब इस घर में भी मेरी आदतों को ध्यान में रखने वाला कोई हो गया है। मैं मन ही मन खुश हो गया.. फिर मैंने सोफे पर रखे बैग से अपना लोअर निकाला और सारे कपड़े उतार कर सिर्फ टी-शर्ट और लोअर में आ गया। अब मेरे बदन पर मात्र तीन ही कपड़े थे लोअर.. हाफ टी-शर्ट और वी-शेप की चड्डी.. फिर मैंने उससे पूछा- कार की चाभी कहाँ रखनी है? तो आंटी बोली- अरे टीवी के नीचे वाली रैक में डाल दो। जब मैं टीबी वाले कमरे की तरफ जा रहा था तो मैंने उस दौरान अंकिता के कमरे में झांक कर देखा वह सो रही थी। फिर मैंने चाभी रखी और टीवी ऑन करके टीवी देखने बैठ गया। तभी मेरी मम्मी का फोन आ गया.. मैंने रिसीव किया तो बोलीं- खाना वगैरह खा लिया? तो मैंने बोला- हाँ मम्मी.. बस अभी ही खाया है.. वैसे इतनी रात को क्यों फोन किया? तो बोलीं- बस ऐसे ही तेरे हाल लेने के लिए। मैंने बोला- मम्मी इतनी फिक्र मत किया करो.. मैं यहाँ बिल्कुल अपने घर की तरह से ही रह रहा हूँ। इतने में शालिनी आंटी आ गई और चाय देते हुए बोली- अरे शुभम से बात हो रही है क्या? तो मैं बोला- नहीं मेरी मम्मी से.. शालिनी आंटी ने बोली - अरे मुझे भी बात करवाओ.. तो मैंने उनको फोन दिया और अब बस आंटी की ही आवाज़ सुन रहा था। वो बोल रही थी- अरे भाभी जी, आप बिल्कुल चिंता न करें.. इसे भी घर ही समझें.. पर एक बात बताइए.. क्या ये चाय बहुत पीता है? फिर शांत हो गई.. अब मम्मी ने जो भी बोला हो.. फिर आंटी बोली- अरे कोई नहीं जी.. इसी बहाने मैं भी पी लेती हूँ। वो झूट ही बोल गई.. मुझे भी चाय पीने का शौक है.. इसलिए पूछा। फिर आंटी कहने लगी- वैसे भी कल से अनुज को मिस करूँगी.. उधर से मम्मी ने कुछ कहा होगा। ‘अच्छा भाभी जी ( शालिनी आंटी को ) अब हम फोन रखते हैं।’ फिर आंटी ने फोन जैसे ही काटा तो मैंने उसे बाँहों में भरकर किस करते हुए बोलने लगा- झूठी.. मम्मी से झूठ क्यों बोली.. मुझे भी चाय पसंद है? तो आंटी बोली- अरे तो उनसे क्या कहती.. अपने राजाबाबू से सीखी हूँ.. यह कहते हुए आंटी ने आँख मारकर लिपलॉक करके मेरे होंठों को जी भरकर चूसने लगी और मैं भी उसके चुचियों को कपड़ों के ऊपर से मसलने लगा.. जिससे उसकी ‘आह्ह्ह्हह्ह’ निकलने लगी और साँसे भी गति पकड़ने लगीं। वो मुझसे बोली- जान श्ह्ह्ह्ह इतनी तेज़ से न भींचा करो.. दु:खता है.. फिर वो मुझसे अलग हुई तो मैंने लपककर उसके हाथों को पकड़ा.. तो आंटी बोली- रुको.. पहले कपड़े बदल लूँ और शुभम से भी बात कर लूँ.. फिर हम अपनी लीला में मन को रमायेंगे। तो मैंने भी उसके बालों के क्लचर को खोल दिया और उसके सर को पकड़कर गर्दन पर चुम्बन करने लगा। जिससे शालिनी आंटी का पारा चढ़ने लगा और वो ‘श्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह.. बस.. बस्स्स्स्स.. आआह.. रुको भी..यार एक तो पहले ही आग लगी हुई है.. तुम और हवा दे रहे हो.. कपड़े चेंज कर लेने दो.. नहीं तो अगर ख़राब हुए तो अंकिता को बहुत जवाब देने पड़ेंगे..’ तो मैंने बोला- ये उसके कपड़े हैं? आंटी बोली- नहीं.. पर मुझे इस तरह की ड्रेस वही दिलाती है.. प्लीज़ अब जाने दो.. बस 5 मिनट और मैं यूँ गई और आई.. तब तक तुम शुभम से बात करों , मैं बस अभी आई.. यह कहते हुए मेरे गालों पर चुम्मा देते हुए चली गई। मैं मन ही मन बहुत खुश था कि आज मेरी एक अनचाही इच्छा भी पूरी होने वाली है। तभी फिर मैंने ख्यालों से बाहर आते हुए शुभम को कॉल लगाया ।शुभम ने फोन उठाया और मेरे बोलने के पहले ही.. वो फ़ोन उठाते ही बोलने लगा - मम्मा आई मिस यू सो मच.. लव यू अभी मैं आपकी ही याद करके फोन मिलाने जा रहा था.. फिर जब वो शांत हुई तो कुछ देर मैं भी नहीं बोला.. तो वो हैलो.. हैलो.. करने लगी। तो मैंने ‘उम्म्महह उम्म्ह्ह्ह्ह्ह’ करके हल्का सा खांसा.. तो वो समझ गया कि उसने क्या किया.. तो शुभम बोला - अरे सॉरी.. मैंने सोचा मम्मी हैं। हम्म..’ ‘और तुम भी कुछ नहीं बोले..’ तो मैंने बोला- अरे तुमने तो मौका ही नहीं दिया.. वर्ना मैं भी कुछ बोल देता। तो शुभम बोला - अरे सॉरी मैं तो भूल ही गया था कि घर पर तुम भी हो.. थोड़ी देर में आंटी भी आ गई । फिर मैंने शुभम से ट्रेन की डिटेल पूछी और ‘हैप्पी जर्नी’ बोलकर शालिनी आंटी को फोन दे दिया। फिर शुभम , आंटी से बात करने लगी । और इधर मेरे दिल में आंटी की गांड़ के छेद ने हलचल सी मचा रखी थी.. चड्डी के अन्दर ही मेरे लौड़े ने उसकी गांड़ की छेद को महसूस करके फड़फड़ाने लगा था.. जिसे आंटी बहुत गौर से देखकर मुस्कुरा रही थी.। फिर आंटी बोली - अच्छा जब ट्रेन में बैठ जाना.. तो फोन करना ओके.. आंटी ने फोन काट दिया और मेरे पास आकर मेरे सामान को पकड़ते हुए मेरे होंठों को चूसने लगी। जैसे उसे मेरे होंठों में शहद का रस मिल रहा हो.. फिर मैं भी उसके होंठों को उसी तरह चूसते हुए अपनी बाँहों में दबोच लिया .. इस समय उसने क्रीम कलर का बहुत ही हल्का और मुलायम सा गाउन पहन रखा था। उसकी पीठ पर सहलाते समय ऐसा लग रहा था जैसे कि उसने कुछ पहना ही न हो। उसको मैं अपनी बाँहों में कसकर जकड़कर जोर-जोर से उसके होंठों का रस चूसने लगा। उसकी कठोर चूचियाँ मेरे सीने से रगड़कर साफ़ बयान कर रही थी कि आज वो भी परिंदों की तरह आज़ाद हैं.. इसी मसली-मसला के बीच एक बार फिर से फ़ोन की घंटी बजी। आंटी ने शुभम की कॉल देखकर तुरंत ही फोन रिसीव किया। शायद वो लोग ट्रेन में बैठ चुके थे। यही बताने के लिए फोन किया था.. पर उसके फ़ोन पर बात करते समय मैं उसके पीछे खड़ा होकर उसकी जुल्फों को एक तरफ करके.. उसकी गर्दन पर चाटते हुए चूमे जा रहा था.. जिससे आंटी की आवाज़ में कंपकंपी और आँखें बंद होने लगी थीं। तभी आंटी अचानक बोली- अरे क्या हो गया..? तो मैं भी रुक गया कि पता नहीं क्या हो गया.. उधर शुभम क्या बोल रहा था मुझे नहीं मालूम.. पर तभी आंटी बोली- मना करती हूँ.. ज्यादा उलटी-सीधी चीज़ न खाया करो.. लेकिन तुम मानते कहाँ हो.. ये कह कर उसने फोन काट दिया और मेरे पूछने पर आंटी ने बताया- शुभम को उलटी आने लगी है.. शुभम ने चाउमिन खाई थी.. जो कि शायद उसे सूट नहीं की.. मैंने पूछा- अब कैसी है? तो आंटी बोली- अभी वो ट्रेन में वाशरूम गया है। फिर मैंने आंटी से बोला- अरे कोई बात नहीं.. कभी-कभी हो जाता है.. कोई बड़ी बात नहीं.. इसी बहाने उसका पेट भी साफ़ हो जायेगा । ये कहते हुए मैंने उसके गले में हाथ डाला और कमरे की ओर चल दिया। शालिनी मेरी पीठ सहलाते हुए बोली- क्या बात है.. आज बड़े मूड में लग रहे हो? तो मैंने उसकी गांड दबाते हुए बोला- अरे आज मेरी ये इच्छा जो पूरी होने जा रही है.. तो शालिनी आंटी बोली- अरे तेरी इस ख़ुशी के आगे ये तो कुछ भी नहीं है.. मैं तो अब तुम्हें इतना चाहने लगी हूँ कि मैं तेरे लिए कुछ भी कर सकती हूँ.. अनुज आई लव यू सो मच.. फिर मैंने उसके पीछे खड़े होकर उसकी गर्दन आगे की ओर झुकाई और उसकी रेशमी जुल्फों को उसके कंधों के एक तरफ करके आगे की ओर कर दिया और फिर उसके पीछे से ही खड़े होकर गर्दन पर चुम्बन करते हुए अपने हाथों को उसके बाजुओं के अगल-बगल से ले जाकर.. उसके चुचियों को सहलाते हुए रगड़ने लगा। मेरी इस हरकत से शालिनी के अन्दर अजीब से नशे की लहर दौड़ गई और वो अपनी आँखें बंद करके अपने होंठों को दातों से चबाते हुए मदहोशी में सिसियाते हुए लड़खड़ाती आवाज़ में बोलने लगी- श्ह्ह्ह ह्ह अह्ह्ह अह्ह्ह्ह उम्म्म्म्म.. अनुज आई लव यू.. ....... मैं लगातार यूँ ही उसकी चूचियों को रगड़ते हुए उसके नुकीले निप्पल को मसले जा रहा था और जिससे उसकी आवाजों में मादकता के साथ-साथ कम्पन भी बढ़ने लगी थी। उसी अवस्था में उसने अपना हाथ पीछे की ओर ले जाकर मेरे तने हुए लौड़े पर रख दिया और उस सहलाते हुए अपने सर को थोड़ा बाएं मोड़ कर मेरे माथे पर चुम्बन जड़ दी । उसकी इस क्रिया के जवाब में मैंने अपने होंठों को उसके होंठों पर लगा दिया और एक बार पुनः एक-दूसरे को चुम्बन करने लगे। इतना आनन्द आ रहा था दोस्तो.. जिसकी कल्पना करना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है। उसके मुख से लगातार ‘उम्म्म फच उम्म्म्म्’ के नशीले स्वर निकल रहे थे और शालिनी अपने हाथों से मेरे लौड़े को सहलाते हुए अपनी गांड के छेद पर दबाकर रगड़ रही थी.. जिससे ऐसी अनुभूति हो रही थी कि मानो मेरे लौड़े से कह रही हो- जान आज तेरा यही घर है.. कर ले जी भर के अपनी इच्छा पूरी.. मैं तैयार हूँ.. तेरी इस दर्द भरी ठुकाई के लिए मैं तैयार हूं। फिर मैंने उसके बदन की सुलगती आग को महसूस करते हुए उसके चुचियों को सहलाते हुए अपने हाथों को उसके आगे किए और रसीले चुचियों को ऊपर-नीचे सहलाते हुए उसके बदन से खेलने लगा। साथ ही मैं उसके कानों के बीच में चुम्बन करते हुए कान के निचले हिस्से को भी दांतों से रगड़ने लगा.. जिससे शालिनी के बदन में सिहरन दौड़ने लगी। वो अपना काबू खोकर मेरे लौड़े को सख्ती के साथ भींचने लगी.. जिससे मेरा भी जोश बढ़ गया और मैं उसकी गर्दन में अपने होंठों को गड़ाकर चूसने लगा। मेरे इस वार को शायद शालिनी बर्दास्त न कर सकी और अपनी चूत की सब्र का बांध तोड़ते हुए, ‘अह्ह्ह आआह्ह्ह शह्ह्ह..’ की आवाज़ के साथ अपनी गांड को मेरे लौड़े पर दबाते हुए अपनी पीठ को मेरे सीने से चिपकाकर अपनी गर्दन दाएं-बाएं करने लगी। दोस्तों इस अद्भुत आनन्द की घड़ी में मैंने महसूस किया जैसे मैं बिना पंख के ही आसमान में सबसे तेज़ उड़ रहा हूँ। मुझे भी होश न रहा और मैं बिना लोअर उतारे ही उसकी गांड मैं लण्ड रगड़ते हुए झड़ गया। ![]() ![]() ![]() ![]() जब मुझे मेरे ही वीर्य की गर्म बूंदों का अहसास मेरी जाँघों पर हुआ.. तो मुझे होश आया और तब मुझे अहसास हुआ कि कोई इतना भी बहक सकता है। और ऐसा हो भी क्यों न.. जब शालिनी जैसी कामुकता की देवी साथ हो। मैं भी झड़ने के बाद कुछ देर बाद तक उसके कंधे पर सर रखकर उसके अपने होंठों से सटे गाल पर चुम्बन करते हुए उसके चुचियों को प्यार से मसले जा रहा था और मेरे मुख से ‘उम्म्म्म चप्प-चप्प’ के साथ बस यही शब्द निकल रहे थे, ‘ शालिनी आई लव यू.. आई लव यू सो मच..’ जिससे शालिनी के बदन की आग फिर से दहकने लगी और वो भी अपने होंठों को मेरे होंठों में देकर कहते हुए बोलने लगी, ‘आई लव यू टू.. आई लव यू टू.. जान मेरा सब कुछ तुम्हारा ही तो है.. ले लो अपनी जानू की जिंदगी का रस.. आज तो मज़ा आ गया.. ऐसी घड़ी आज के पहले मेरे जीवन में कभी न आई..’ ये कहते हुए आंटी ने अपना हाथ फिर से पीछे ले जाकर मेरे लौड़े पर रख दिया। वो हाथ रखते ही बोली- अरे ये क्या आज तुम भी भावनाओं के सागर में बह गए क्या..? ![]()
31-10-2026, 11:23 AM
तो मैंने बोला- अरे तुम हो ही मज़ेदार और सेक्सी.. जो किसी का भी लौड़ा बस देखकर ही बहा दो..
तो शालिनी किलकारी मारकर हँसते हुए बोली- जानू आई लव यू.. बस मैं तुम्हारी इसी अदा पर ही तो फ़िदा हूँ.. तुम साथ में जीने का कोई भी मौका नहीं गंवाते हो। यह कहते हुए वो मेरी ओर घूमी और अपने होंठों को मेरे होंठों से गड़ा कर मेरी पीठ पर अपने हाथों को चींटी की तरह धीरे-धीरे चलाते हुए मेरी टी-शर्ट के निचले सिरे पर पहुँच गई। वो पीछे से अपने हाथों को मेरे शर्ट के अन्दर डालते हुए उसे ऊपर धीरे-धीरे उठाने लगी। मैं अपनी आँखों को बंद किए हुए उसे चूमने-चाटने में इतना मदहोश था कि मुझे तब होश आया जब उसने मेरी टी-शर्ट को निकालने में थोड़ी ताकत का प्रयोग किया। ये सोचकर आज मैं बहुत हैरान था कि क्या ऐसा भी होता है कि इंसान इतना खो जाता है कि उसे होश ही नहीं रहता है कि उसके साथ क्या हो रहा है। फिर टी-शर्ट निकालने में मैंने उसका सहयोग करते हुए अपने दोनों हाथों को ऊपर उठा लिया। ![]() पर आज शालिनी अपनी जवानी के नशे में मुझे खा जाने के मूड में थी। अब आप लोग सोच रहे होंगे ऐसा क्या किया शालिनी ने.. तो बता दूँ उस वक़्त वो मेरे होंठों को तो चूस नहीं सकती थी.. पर मेरी नंगी छाती जो कि अब उसके हवाले थी.. उसे वो प्यार से अपनी जुबान से चाटते हुए चूमने लगी थी। और मेरी टी-शर्ट के उतरते ही आंटी ने मुझे अपनी बाँहों में जकड़ लिया और मेरे बदन की गर्माहट अपने शरीर में महसूस कराने लगी। अब वो दाईं ओर अपना मुँह करके बंद आँखों से अपने सर को मेरे कंधे पर टिका कर.. राहत भरी सांस भरने लगी.. जैसे मेरे बदन की गर्माहट उसकी दुखती रगों को सेक रही हो। मैंने भी उसकी पीठ को धीरे-धीरे प्यार से सहलाना शुरू किया और बोला- थक गई हो तो आराम कर लो। मेरे इतना बोलते ही शालिनी ने अपनी आँखें खोल दीं और प्यार भरी निगाहों से देखते हुए बोली- जान आई लव यू सो मच.. मुझे तुम्हारी बाँहों में बहुत सुख मिलता है.. मेरा बस चले तो मैं इन्हीं बाँहों में अपना सारा जीवन बिता दूँ। फिर शालिनी ने बारी-बारी से मेरे माथे को चूमा.. दोनों आँखों को चुम्मी ली.. फिर मेरे गालों के दोनों ओर चूमकर अपने होंठों से पुनः मेरे होंठों का करीब एक मिनट तक रसपान करती रही। वो यूँ ही चूमते हुए धीरे-धीरे नीचे को बढ़ने लगी। इस काम-क्रीड़ा को आज पुनः स्मरण करके मैं खुद बहुत अधिक उत्तेजित हो गया हूँ और आज आपसे माफ़ी चाहता हूँ की मुझे मेरे प्यार की वादियों में कुछ पल बिताने की मोहलत दे दीजिए. ![]() फिर वो मेरी गर्दन को अपने जीभ की नोक से सहलाने लगी.. जिससे मुझे असीम आनन्द प्राप्त हो रहा था। फिर वो धीरे-धीरे नीचे की ओर बढ़ते हुए मेरी छाती को चूमने लगी और मेरे निप्पलों को जीभ से छेड़ने लगी.. जिससे बदन में अजीब सा करेंट दौड़ गया और वो मेरे बदन के कम्पन को महसूस करते हुए पूछने लगी- अनुज कैसा लग रहा है? तो मैंने कहा- बहुत ही हॉट फीलिंग आ रही है.. मज़ा आ गया। फिर वो धीरे-धीरे मेरे निप्पलों को जीभ की नोक से छेड़ते हुए अपने हाथों को मेरे लोअर तक ले गई और चाटते हुए नीचे को बैठने लगी। फिर जैसे ही उसने मेरी नाभि के पास चुम्बन लिया तो मेरे बदन में एक अज़ीब सी सिहरन हुई। तो उसने मुस्कान भरे चेहरे से मेरी ओर देखा.. और शरारती अंदाज़ में आँख मारते हुए बोली- क्यों मज़ा आया न? तो मैंने बोला- यार सच में.. इतना तो मैंने कभी सोचा ही नहीं था। फिर देखते ही देखते उसने मेरा लोअर मेरे पैरों से आज़ाद कर दिया और मेरी जांघों को रगड़ने लगी। तो मैंने उसका सर पकड़ लिया और बोला- मेरी जान.. क्या इरादा है..? तो बोली- इरादा तो नेक है.. बस अंजाम देना है। फिर जैसे ही उसकी नज़र मेरी चड्डी के अन्दर खड़े लौड़े पर पड़ी तो उसकी आँखों की चमक दुगनी हो गई। उसने आव न देखा ताव.. मेरे लौड़े को चड्डी के ऊपर से ही अपने मुँह में भरकर दाँतों को गड़ाने लगी और वो साथ ही साथ मेरी जांघों को हाथों से सहला रही थी। उसकी इस प्रतिक्रिया पर मेरे मुँह से दर्द भरी मादक ‘आह्ह्ह ह्ह्ह्ह’ निकालने लगी। मैंने उसके सर को मजबूती से पकड़कर अपने लौड़े पर दाब दिया.. जो आनन्द मुझे मिल रहा था उसे सिर्फ महसूस किया जा सकता है क्योंकि शब्दों में बयान किया तो उस आनन्द की तौहीन होगी। फिर उसने मेरी चड्डी को अपने दाँतों से पकड़कर नीचे सरकाया जैसे ही मेरा लंड गिरफ्त से बाहर आया। तो मानो कह रहा हो- " तुस्सी ग्रेट हो तोहफा कबूल करो " । फिर उसने चड्डी को मेरे जिस्म से अलग कर दिया। अब मैं उसके सामने पूर्ण निर्वस्त्र खड़ा था और वो उसी गाउन में नीचे झुकी बैठी थी.. जिससे उसके अनार साफ झलक रहे थे। फिर उसने मेरे लौड़े को मुँह में भर लिया और लॉलीपॉप की तरह उसे चूसने लगी.. जिससे मेरा आनन्द दुगना हो गया और मेरे मुँह से मादक भरी आवाज निकले लगी - श्ह्ह्ह.. ह्ह्ह आआआअह्ह्ह.. श्ह्ह्ह.. ह्हह्ह , और मैंने आनन्द भरे सागर में गोते लगाते हुए उसके सर को अपने हाथों से कस लिया। इसके पहले वो कुछ समझ पाती.. मैंने उसके सर को दबाकर अपने लौड़े को जड़ तक उसके मुँह में घुसेड़कर उसके मुँह को जबरदस्त अपनी कमर को उचका-उचका चोदने लगा। मेरे इस प्रकार चोदने से शालिनी आंटी की हालत ख़राब हो गई। उसके मुँह के भावों से उसकी पीड़ा स्पष्ट झलक रही थी.. उसके होंठों के सिरों से उसकी लार तार-तार होकर बहने लगी। इतना आनन्दमयी पल था.. जिसको बता पाना कठिन है.. उसकी आँखों की पुतलियों में लाल डोरे गहराते चले जा रहे थे और उसके मुख से बहुत ही उत्तेजित कर देने वाली दर्द भरी सीत्कार ‘आआआह्ह्ह.. ह्ह्ह..आआआउउउ.. उउउम्म्म्म्म.. गुगुउउउ’ की आवाजें बड़े वेग के साथ रुंधे हुए (रोते हुए) स्वर में निकली जा रही थीं। मैं बिना उसकी इस दशा की परवाह किए.. बस उसके मुंह को चोदे जा रहा था.. और जब कभी उसके दांत मेरे लौड़े पर रगड़ जाते.. तो मैं उसके गाल पर तमाचा जड़ देता.. जैसा कि मैंने फिल्मों में देखा था। जब मुझे यह अहसास हुआ कि अब मैं खुद को और देर नहीं रोक पाऊँगा.. तो मैंने उसके सर को पकड़ा और तेज़ स्वर में ‘आह्ह आआअह्ह्ह्ह आआह जानू.. बस ऐसे ही करती रहो.. थोड़ा और सहो.. मेरा होने वाला है बस..’ और देखते ही देखते मेरे वीर्य निकालने के साथ-साथ मेरी पकड़ ढीली हो गई। और फिर शालिनी आंटी ने तुरंत ही मेरे लौड़े से मुँह हटा लिया और खांसने लगी और सीधा वाशरूम चली गई। मेरे इस तरह करने से उसे बहुत पीड़ा हुई थी और उसका मुँह भी दर्द से भर गया था, जिसे उसने बाद में बयान किया। और सच कहूँ तो मुझे भी बाद में अच्छा नहीं लगा.. पर अब तो सब कुछ हो ही चुका था.. इसलिए पछताने से क्या फायदा.. पर कुछ भी हो ये तरीका था बड़े कमाल का.. आज के पहले मुझे लौड़ा चुसाई में इतना आनन्द नहीं मिला था। फिर मैंने पास रखी बोतल उठाई और पानी के कुछ ही घूट गटके थे कि आंटी आई और दर्द भरी आवाज़ में बोली- अनुज आज तूने तो मेरे मुँह का ऐसा हाल कर दिया कि बोलने में भी दुखता है.. आआआह.. पता नहीं तुम्हें क्या हो गया था.. इसके पहले तुमने कभी ऐसा नहीं किया.. तुम्हें मेरी हालत देखकर भी तरस नहीं आया.. बल्कि चांटों को जड़कर मेरे गाल लाल करके.. दर्द को और बढ़ा दिया। तो मैंने आंटी से माफ़ी मांगी और बोला- शालिनी मुझे माफ़ कर दे.. मैं इतना ज्यादा कामभाव में चला गया था कि मुझे खुद का भी होश न था.. पर अब ऐसा दुबारा नहीं होगा। मेरी आवाज़ की दर्द भरी कशिश को महसूस करके शालिनी मेरे सीने से लग गई और बोली- अरे ये क्या.. माफ़ी मांग कर मुझे न शर्मिंदा करो.. होता है.. कभी-कभी ज्यादा जोश में इंसान बहक जाता है.. कोई बात नहीं मेरे सोना.. मेरे राजाबाबू.. आई लव यू.. आई लव यू.. यह कहते हुए वो मेरे होंठों को चूसने लगी और अभी मेरे लौड़े में भी पीड़ा हो रही थी जो कि मेरे जंग में लड़ने की और घायल होने की दास्तान दर्द के रूप में बयान कर रही थी। एक अज़ीब सा मीठा दर्द महसूस हो रहा था.. ऐसा लग रहा था कि अब जैसे इसमें जान ही न बची हो। फिर मैंने शालिनी को जब ये बताया कि तुम्हारे दाँतों की चुभन से मेरा सामान बहुत दुःख रहा है.. ऐसा लग रहा है.. जैसे कि इसमें जान ही न बची हो.. अब मैं कैसे तुम्हारी गांड मार कर अपनी इच्छा पूरी कर पाउँगा और कल के बाद पता नहीं ये अवसर कब मिले.. मुझे लगता नहीं कि अब मैं कुछ और कर सकता हूँ.. ये तो बहुत ही दुःख रहा है। तो आंटी ने मेरे लौड़े को हाथ से छुआ जो कि सिकुड़ा हुआ.. किसी सहमे से कछुए की तरह लग रहा था। शालिनी मुस्कुराई और मुझे छेड़ते हुए बोली- और बनो सुपर हीरो.. अब बन गए न जीरो.. देखा जोश में होश खोने का परिणाम.. और मुझे छेड़ते हुए मेरी मजे लेने लगी.. पर मेरी तो दर्द के मारे लंका लगी हुई थी.. तो मैंने झुंझला कर उससे बोला- अब उड़ा लो मेरा मज़ाक.. तुम भी याद रखना.. मुझे इतना दर्द हो रहा है और साथ-साथ अपनी इच्छा न पूरी हो पाने का कष्ट भी है.. और तुम हो कि मज़ाक उड़ा रही हो.. वैसे भी कल शुभम आ जायेंगे.. तो पता नहीं कब ऐसा मौका मिले… तुमने तो इतनी तेज़ी से दाँतों को गड़ाया.. जिससे मेरी तो जान निकल रही है। मैं बोल कर दर्द से बेहाल चेहरा लिए वहीं बिस्तर पर आँख बंद करके लेट गया। मेरे दर्द को आंटी सीरियसली लेते हुए मेरे पास आई और मेरे माथे को चूमते हुए मेरे मुरझाए हुए लौड़े पर हाथ फेरते हुए बोली- तुम इतनी जल्दी क्यों परेशान हो जाते हो? तो मैंने बोला- तुम्हें खुराफात सूझ रही है और मेरी जान निकाल रही है। शालिनी मुस्कुराते हुए प्यार से बोली- अनुज तेरी ये जान है न.. इसमें जान डालने के लिए.. तुम अब परेशान मत हो.. अभी देखना मैं कैसे इसे मतवाला बनाकर एक बार फिर से झूमने पर मज़बूर कर दूंगी। और मैं कुछ बोल पाता कि उसके पहले ही उसने अपने होंठों से मेरे होंठ सिल दिए। ..........
31-10-2026, 11:31 AM
हम कुछ देर यूँ ही एक-दूसरे को चूमते रहे..
फिर आंटी के दिमाग में पता नहीं क्या सूझा वो उठकर गई और फ्रिज से बर्फ के टुकड़े ले आई। यार सच कहूँ तो मेरी समझ में कुछ भी नहीं आ रहा था कि ये सब क्या करने वाली है। फिर उसने मेरे लंड को पकड़कर उसकी अच्छे से सिकाई की.. यार दर्द तो चला गया पर बर्फ का अधिक प्रयोग हो जाने से वो सुन्न सा पड़ गया था। मुझे ऐसा लग रहा था कि मेरे मतवाले लंड को किसी ने मार दिया हो और अन्दर ही अन्दर बहुत डर सा गया था कि अब क्या होगा.. अगर इसमें तनाव आना ख़त्म हो गया.. तो क्या होगा? मेरे चेहरे के चिंता के भावों को पढ़कर शालिनी बोली- अरे अनुज क्या हुआ.. तुम इतना उलझन में क्यों लग रहे हो? तो मैंने बोला- मेरा दर्द तो ठीक हो गया.. पर मुझे अब ये डर है कि इसमें जान भी बची है कि नहीं? तो शालिनी मुस्कुरा दी और हँसते हुए बोली- तुमने कभी सुना है.. ‘अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मारना..’ अब तुमने मेरे मुँह में जबरदस्ती सब कुछ किया.. तो तुम भुगत रहे हो.. पर अब जो मैं तुम्हारे दर्द को दूर करने के लिए कर रही हूँ.. उससे शायद मैं खुद ही अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारने जा रही हूँ। मैं उसकी बातों को सुनकर आश्चर्य में पड़ गया कि आखिर शालिनी के कहने का मतलब क्या है.. सब कुछ मेरी समझ के बाहर था। तो मैंने उससे बोला- साफ़-साफ़ बोलो.. कहना क्या चाहती हो? आंटी बोली- अरे जान.. तुम्हें नहीं मालूम.. अगर बर्फ से सिकाई अच्छे से की जाए.. जब तक की लंड की गर्मी न शांत हो जाए और उसके बाद जो सेक्स करने का समय होता है.. वो बढ़ जाता है और अब तुम परेशान न हो.. परेशान तो मुझे होना चाहिए कि पता नहीं आज मेरा क्या होने वाला है.. और अब मुझे पता है कि इसमें कैसे तनाव आएगा.. पर मेरी एक शर्त है। तो मैं बोला- क्या? तो शालिनी आंटी बोली- पहले बोलो कि मान जाओगे.. मैंने भी बोला- ठीक है.. मान जाऊँगा। तो शालिनी आंटी बोली- एक तो आज तक पीछे छेद में मैंने किसी के साथ सेक्स नहीं किया है.. तो तुम फिर से मेरे मुँह की तरह वहाँ जबरदस्ती कुछ नहीं करोगे और पहले मेरी चूत की खुजली मिटाओगे.. तुम्हें नहीं मालूम ये साली छिनाल.. बहुत देर से कुलबुला रही है.. तो मेरे दिमाग में भी एक हरकत सूझी कि बस एक बार किसी तरह शालिनी मेरा ‘लंड ’ खड़ा कर दे.. तो इसको भी बर्फ का मज़ा चखाता हूँ। मैंने उससे बोला- ठीक है.. मुझे मंजूर है.. तो वो बर्फ ट्रे लेकर जाने लगी और बोली- अभी आई। तो मैंने बोला- अरे ये ट्रे मुझे दे दो.. तब तक मैं इससे अपनी सिकाई करता हूँ। वो मुझे ट्रे देकर चली गई। अब आखिर उसे कैसे पता चलता कि उसके साथ अब क्या होने वाला है। फिर कुछ ही देर में वो मक्खन का डिब्बा लेकर आ गई और बोली- जानू.. अब तैयार हो जाओ.. देखो मैं कैसे अपने राजाबाबू को अपने इशारे पर ठुमके लगवाती हूँ। तो मैंने हल्की सी मुस्कान देकर अपनी सहमति जता दी। अब बारी उसकी थी तो उसने अपने गाउन की डोरी खोली और उसे अपने बदन से लटका रहने दिया और फिर वो एक हलकी पट्टीनुमा चड्डी को दिखाते हुए ही मेरे पास आ गई और मेरे सीने से चिपक कर गर्मी देने लगी और मेरे होंठों को चूसते हुए मेरे बदन पर हाथों को फेरने लगी.. जिससे मेरे बदन में प्रेम की लहर दौड़ने लगी। उसकी इस क्रिया में मैंने सहयोग देते हुए और कस कर अपनी बाँहों में कस लिया.. फिर उसके होंठों को चूसना प्रारम्भ कर दिया। देखते ही देखते हम लोग आनन्द के सागर में डुबकी लगाने लगे और फिर शालिनी ने अचानक से अपना हाथ मेरे लौड़े पर रखकर देखा.. जो कि अभी भी वैसा ही था। तो वो अपने होंठों को मेरे होंठों से हटाकर बोली- लगता है इसको स्पेशल ट्रीटमेंट देना होगा। मैं बोला- कुछ भी कर यार.. पर जल्दी कर। तो शालिनी उठी और मुझे पलंग के कोने पर बैठने को बोला.. तो मैं जल्दी से उठा और बैठ गया। मेरे इस उतावलेपन को देखकर आंटी हँसते हुए बोली- अरे अनुज.. अब होश में रहना.. नहीं तो यूँ ही रात निकल जाएगी.. फिर बाद में कुछ भी न कहना। मैं बोला- यार वो एक बार हो गया… अब ऐसे कभी नहीं करूँगा.. पर दर्द तो जरूर दूँगा.. जब तुझे दर्द में सिसियाते हुए देखता हूँ और तेरी दर्द भरी चीखें मेरे कानों में जाती हैं.. तो मेरा जोश और बढ़ जाता है.. पर अब दर्द देने वाली जगह पर ही दर्द दूँगा। तो वो हँसते हुए बोली- बड़ा मर्द बनने का शौक है तुझे.. चल देखती हूँ कि तू कितना दर्द देता है.. मुझे भी तेरे दर्द देने वाली जगह पर दर्द देने में एक अजीब से प्यार की अनुभूति होती है.. जो कि मुझे तेरा दीवाना बनाए हुए है। यह कहते हुए उसने मक्खन निकाला और मेरे लौड़े पर मलने लगी। फिर ऊपरी सतह पर लगाने के बाद उसने थोड़ा मक्खन और निकाला और मेरे लौड़े की खाल को खींचकर सुपाड़े पर हल्के-हल्के नर्म उँगलियों का स्पर्श देते हुए मलने लगी। मैंने ध्यान से देखा तो सुपाड़े का रंग गुलाबी न होकर कुछ कुछ बैंगनी सा हो गया था.. तो मैं चिंता में पड़कर सोचने लगा कि ये गुलाबी से बैंगनी कैसे हो गया? तो मेरे दिमाग में आया या तो यह चोट के कारण है.. या फिर बर्फ की ठंडक का कमाल है? खैर.. अब सब कुछ मैंने शालिनी पर छोड़ दिया था। फिर उसने सहलाते हुए मेरे लौड़े को फिर से अपने मुख में ढेर सारा थूक भर कर ले लिया और अपने होंठों से मेरे लौड़े पर पकड़ मजबूत बना दी.. जिससे मुझे मेरे सामान पर गर्मी का अहसास होने लगा। फिर कुछ देर यूँ ही रखने के बाद शालिनी बिना होंठों को खोले अन्दर ही अन्दर मेरे लौड़े के सुपाड़े को चूसने लगी.. जैसे कोई हाजमोला की गोली चूस रही हो। उसकी इस चुसाई से मेरे लौड़े में जगी नई तरंगें मुझे महसूस होने लगीं और समय के गुजरने के साथ साथ मेरा लौड़े ने फिर से शालिनी के मुँह की गर्मी पाकर हिलोरे मारने शुरू कर दिए.. जिसे शालिनी ने भी महसूस किया और मुझसे हँसते हुए बोली- अब होश मत खोना.. बस थोड़ा समय और दो.. देखो कैसे अभी इसे लोहे सा सख्त करती हूँ। वो फिर से मेरे लौड़े को मुँह में भरकर चूसने लगी और चूसते हुए उसने मेरे दोनों हाथ पकड़ कर अपनी दोनों चूचियों पर रख दिए। मैंने उसके इस इशारे को समझ कर धीरे-धीरे उसके चूची मसलने लगा और कुछ ही देर में मैंने महसूस किया कि मेरे लौड़े का हाल पहले ही जैसा और सख्त हो चुका था। तो मैंने शालिनी के मुँह से अपने लौड़े को निकला जो कि उसके थूक और मक्खन से सना होने के कारण काफी चमकदार और सुन्दर महसूस हो रहा था.. जैसे उस पर पॉलिश की गई हो। अब सुपाड़ा भी अपने रंग में वापसी कर चुका था.. जो कि शायद बर्फ की ठंडक के कारण नीला सा हो गया था। फिर धीरे से मैंने शालिनी के माथे को चूमा और उसे ‘थैंक्स’ बोला.. तो शालिनी आंटी बोली- अरे इसमें थैंक्स की क्या बात है.. ये तो सब चलता है.. और किसी का भी ‘आइटम’ इतनी जल्दी खराब नहीं होता.. तभी भगवान ने इसमें हड्डियां नहीं दीं.. ये कह कर वो हँसने लगी। तो मैंने शालिनी के कन्धों को पकड़ा और उसे उठाकर बिस्तर पर लिटा दिया और उसके दोनों हाथों को सर के नीचे ले जाकर उसे चूमते हुए.. उसके चुचियों को भींचने लगा। जबकि शालिनी अभी तक इससे अनजान होते हुए बंद आँखों से मेरे होंठों का रस चूस रही थी.. उसे क्या पता की आज मैं उसे कौन सा दर्द देने वाला हूँ और फिर मैंने उसके हाथों पर थोड़ा पकड़ मजबूत की.. तो शालिनी बोली- अरे हाथों को इतना न कसो.. दर्द होता है। तो मैंने बोला- जानेमन.. अभी तो बहुत बोल रही थीं कि दर्द में मज़ा आता है.. अब क्या हुआ.. अब तू देखती जा.. तेरे साथ क्या होने वाला है। तो मारे आश्चर्य के उसकी दोनों आँखें बाहर निकल आईं और बहुत सहमे हुए तरीके से बोली- अब कैसा दर्द देने वाले हो.. मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा है। तो मैंने बोला- समझ जाओगी.. बस आँखें बंद करो और ऐसे ही लेटी रहो.. अब क्योंकि मैं उसके ऊपर था.. तो मैंने उसके ऊपर अपने शरीर का भार डाल दिया और डोरी को पहले आहिस्ते से पलंग की रैक को खींचने वाले छल्ले में बाँध दिया जिसमें कि पहले से ही लॉक लगा हुआ था। जिसका शालिनी को बिल्कुल भी अहसास न था कि क्या हो रहा.. बल्कि वो भूखी शेरनी की तरह वासना की आग से तड़पती हुई मेरी गर्दन और छाती को चूसने और चाटने में लगी हुई थी। फिर मैंने धीरे से अपने पैरों को सिकोड़ लिया और उसकी छाती पर ही बैठ गया ताकि वो कुछ भी न कर सके। वो जब तक कुछ समझ पाती.. मैंने उसके हाथों में रस्सी का फन्दा सा बनाकर मज़बूती से कस दिया और उसके ऊपर से हटकर उसके होंठों को चूसने लगा.. जिससे शालिनी जो बोलना चाह रही थी.. वो बोल ही न सकी। मैं इसी तरह निरंतर उसके होंठों को चूसते हुए उसके चुचियों को रगड़े जा रहा था जिसमें शालिनी का अंग-अंग उमंग में भरकर नाचने लगा था। तो मैंने सोचा.. अब मौका सही है.. अब ये कुछ मना नहीं करेगी। मैंने उसके होंठों को आज़ाद करके जैसे ही उठा और बर्फ की ट्रे हाथों में पकड़ी.. वो तुरंत ही चीखकर बोली- अरे ऊ.. अब क्या करने वाले हो.. मुझे बहुत डर लग रहा है.. प्लीज़ पहले रस्सी खोलो.. आज हो क्या गया है तुम्हें..? पर उसे क्या पता कि आज मैं उसे दर्द ही दर्द देने वाला हूँ। फिर मैंने शालिनी के बगल में लेटते हुए उसके दूसरे ओर ट्रे रख दी। शालिनी आंटी मुझे लगातार हाथ खोलने को बोले जा रही थी.. पर मैं उसकी बातों को अनसुना करते हुए उसके होंठों को चूसते हुए एक बर्फ के टुकड़े को लेकर उसकी गर्दन से लेकर उसकी नाभि तक धीरे-धीरे चला कर उसके बदन की गर्मी को ठंडा करने लगा। शालिनी को भी अजीब सा लग रहा था.. उसने नहीं सोचा था कि ऐसा भी कुछ होगा। उसे एक आनन्द के साथ-साथ सर्दी का भी एहसास होने लगा था। जब मैंने उसकी चूचियों पर बर्फ रखी तो क्या बताऊँ यार.. उसके चूची इतने गर्म और सख्त हो चुके थे कि उसकी गर्माहट पाकर बर्फ तीव्रता के साथ घुल गई और शालिनी का तनबदन तड़पने लगा , ‘अह्ह्ह ह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह..’ से सिसियाते हुए शालिनी बोली- अनुज बस कर.. अब और न तड़पा.. दे दे मुझे अपना प्यार.. मैं बोला- आज तुझे सब दूँगा.. पर थोड़ा तड़पाने के बाद.. फिर मैंने उसकी कुछ भी बिना सुने उसके चुचियों को बर्फ से सेंकने लगा। कभी एक उसका एक दूद्धू मुँह में रहता और दूसरे को बर्फ से सेंकता.. तो कभी दूसरे को मुँह में भरता और पहले वाले को बर्फ से सेंकता.. और उधर शालिनी की मादक आवाजें मुझे पागल सा बनाने के लिए काफी थीं। वो अब कमर उठाकर ‘आआआ… अह्हहह्ह श्ह्ह्ह्ह्हह उउउ..म्म्म्म्म.. अनुज बसकर.. तूने तो पूरे बदन में आज चीटियाँ दौड़ा दीं..अब मान भी जा.. पर मैंने उसकी एक न सुनी और बर्फ के टुकड़े को जैसे ही उसकी गर्दन से लगाता या कमर पर लगाता.. तो वो एक जोर की ‘आआअह्ह्ह्ह’ के साथ चिहुंक उठती। फिर मैंने शालिनी की चड्डी एक ही झटके में हाथों से पकड़ कर उतार दी और जैसे ही मैंने फिर से बर्फ का टुकड़ा दोबारा से उठाया.. तो वो आँखें बाहर निकालते हुए बोली- अनुज.. अब बहुत हो गया.. मारेगा क्या मुझे? तो मैं बोला- तुम बस मज़े लो.. बाक़ी का मैं लूँगा.. और अब मना करने के लिए मुँह खोला तो तुम्हारा मुँह भी बंद कर दूँगा। अब शालिनी चुप हो गई फिर मैंने उसकी जाँघों पर.. धीरे-धीरे बर्फ रगड़ते हुए उसकी चूत के दाने पर मुँह लगाकर उसे चूसना चालू किया.. जिससे शालिनी के मुँह से दर्द के साथ मीठी.. और कानों को मधुर लगने वाली सीत्कार ‘श्ह्ह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह..’ निकलने लगी और मैं उसके चेहरे की ओर देखने लगा। जब कुछ देर उसने मेरी जुबान का एहसास अपनी चूत पर नहीं पाया तो उसने आँखें खोलीं और मेरी ओर देखते हुए लज़्ज़ा भरे स्वर में बोली- अब क्या हुआ.. रुक क्यों गए.. करो न.. मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। तो मैंने कटीली मुस्कान दी और आँख मारते हुए बोला- तुम बस मज़ा लो.. अब फिर बर्फ के टुकड़े को उसकी चूत के भीतर सरका दिया जो कि कुछ घुल सा गया था.. बर्फ का टुकड़ा लगभग आधा इंच का रहा होगा.. जिसे शालिनी की लपलपाती चूत आराम से निगल गई। पर शालिनी की चूत में बर्फ ने ऐसी खलबली मचाई कि वो जोर-जोर से ‘आअह्हह.. उम्म्म स्स्स्स्स्श्ह्ह’ के साथ अपनी कमर बिस्तर पर पटकने लगी। सबसे ताज्जुब वाली बात तो यह थी कि उसकी चूत में इतनी गर्मी थी कि जल्द बर्फ का दम घुट गया और रिस कर बाहर बह गई.. पर इतनी देर में बर्फ ने शालिनी की चूत में जलन को बढ़ा दिया था। मैं अभी देख ही रहा था कि शालिनी आंटी बोली- चल अब और न सता.. डाल दे अन्दर.. और मिटा दे चूत की गर्मी.. तो मैं बोला- पहले इसकी गर्मी बर्फ से शांत करता हूँ.. फिर मैं कुछ करूँगा। वो बोली- अनुज इसकी गर्मी तो इससे और बढ़ती ही जा रही है.. अगर कोई शांत कर सकता है तो वो तेरा छोटा लंड बाबू है। तो मैंने बोला- चलो ये भी देखते हैं.. मैंने फिर से दूसरा टुकड़ा उठाया जो कि करीब दो इंच लम्बा और ट्रे के गोल खांचे के हिसाब से मोटा था.. वो समूचा टुकड़ा मैंने आंटी की चूत में घुसेड़ दिया और उसके चूत के दाने को रगड़ते हुए उसे चूसने लगा। यार सच बता रहा हूँ जरा भी देर न लगी.. देखते ही देखते शालिनी की चूत उसे भी डकार गई। अबकी बार उसकी चूत में से बर्फ और चूत दोनों का मिला हुआ पानी झड़ने लगा.. जिसे मैंने उसकी चड्डी से साफ़ किया। अब शालिनी आंटी बोली- अनुज अब अन्दर डाल दे.. मुझे बर्दाश्त नहीं होता। तो मैंने भी सोचा वैसे भी समय बर्बाद करने से क्या फायदा.. चल अब काम पर लग ही जाते हैं। वैसे भी अभी गांड भी मारनी है गांड मारने का ख़याल आते ही मेरा ध्यान उसके छेद पर गया जो कि काफी कसा हुआ था। मैं सोच में पड़ गया कि मेरा लौड़ा आखिर इतने छोटे और कैसे छेद को कैसे भेदेगा। इतने में ही मेरे दिमाग में एक और खुराफात ने जन्म लिया और वो यह था कि शालिनी की गांड का छेद बर्फ से बढ़ाया जाए.. क्योंकि उसमें किसी भी तरह का कोई रिस्क भी नहीं था.. अन्दर रह भी गई तो घुल कर निकल जाएगी.. पर शालिनी तैयार होगी भी या नहीं इसी उलझन में था। इतने में शालिनी खुद ही बोल पड़ी- अब क्या हुआ जान.. क्या सोचने लगे? तो मैंने उससे बोला- मुझे तो पीछे करना था.. पर तुमने पहले आगे की शर्त रखी है.. पर मैं ये सोच रहा हूँ.. अगर आगे करते हुए तुम्हारी गांड में अगर बर्फ ही डालता रहूँ तो उसका छेद आसानी से फ़ैल सकता है। वो आंटी बोली- यार तेरे दिमाग में इतने वाइल्ड और रफ आईडिया आते कहाँ से हैं? तो मैं हँसते हुए बोला- चलो बन जाओ घोड़ी.. अब मैं तेरी सवारी भी करूँगा और तेरी गांड भी चौड़ी करूँगा। तो वो बोली- पहले हाथ तो खोल दे.. अब मेरे हाथों में भी दर्द सा हो रहा है। मैंने उसके हाथों की रस्सी खोली और रस्सी खुलते ही उसने मेरे सीने से चिपक कर मेरे होंठों को चूसा और मेरा लंड सहलाती हुई मेरी गर्दन पर अपनी गर्म साँसों का एहसास कराते हुए मेरे लौड़े तक पहुँच गई। फिर से उसे मुँह में लेकर कुछ देर चूसा और फिर बिस्तर से उतार कर बिस्तर का कोना पकड़ कर घोड़ी की तरह झुक गई। मैंने भी मक्खन लेकर अच्छे से उसकी गांड के छेद में भर दिया और अपनी ऊँगली उसकी गांड में घुसेड़ कर अच्छे से मक्खन अन्दर तक लगा दिया.. जिससे आराम से ऊँगली अन्दर-बाहर होने लगी। फिर मैंने एक बर्फ का टुकड़ा लिया और उसकी गांड में घुसड़ने के लिए छेद पर दबाने लगा.. पर इससे शालिनी को तकलीफ होने लगी.. अब मेरा आईडिया मुझे फेल होता नज़र आ रहा था.. तो मैंने सोचा क्यों न कुछ और किया जाए। फिर मैंने अपने लंड को पीछे से ही आंटी की चूत में डाल दिया और उसे धीरे-धीरे पीछे से लंड को गहराई तक पेलते हुए चोदने लगा.. जिससे मेरा लंड उसकी बच्चेदानी से टकरा जाता और शालिनी के मुँह से ‘आआआह स्स्स्स्स्स्स्श’ की सीत्कार फूट पड़ती। मैं लौड़ा पेलना के साथ ही साथ उसके चूची को ऐसे दाब रहा था.. जैसे कोई हॉर्न बजा रहा हूँ। जब मैंने देखा कि शालिनी पूरी तरह मदहोश हो चुकी थी तो मैंने फिर से ऊँगली उसके गांड के छेद में डाल दी.. जो कि आराम से अन्दर-बाहर हो रही थी। इसी तरह दो ऊँगलियाँ एक साथ डालीं.. वो भी जब आराम से आने जाने लगीं.. तो मैंने फिर से उसकी गांड में बर्फ का टुकड़ा डाला.. पर इस बार उसकी गांड अपने आप ही खुल बंद हो रही थी और बर्फ का ठंडा स्पर्श पाते ही शालिनी का रोम-रोम रोमांचित हो उठा। उसकी सीत्कार ‘आआह्ह्ह स्स्स्श्ह्ह्ह ष्ह्ह उउउम’ उसके अन्दर हो रहे आनन्द मंथन को साफ़ ब्यान कर रही थी। उसकी गांड की गर्मी पाकर बर्फ जब घुलने सी लगी तो उसकी ठंडी बूँदें उसकी चूत तक जा रही थीं.. जिससे शालिनी को अद्भुत आनन्द मिल रहा था, वो मस्तानी चुदक्कड़ सी सिसिया रही थी, ‘बस ऐसे ही.. अह्ह्हह्ह उउउउम.. और तेज़ करो अनुज.. मुझे बहुत अच्छा लग रहा है.. आआआअह... वो अपनी चूत से गर्म रस-धार छोड़ने लगी.. जिससे मुझे भी बहुत अच्छा लग रहा था। एक तो बाहर बर्फ का ठंडा पानी जो कि लौड़े पर गिर रहा था और अन्दर शालिनी के जलते हुए बदन का जलता हुआ गर्म काम-रस.. मुझसे भी अब रहा नहीं जा रहा था। जैसे रेस का घोड़ा अपनी मंजिल तक पहुँचने के लिए पूरी ताकत लगा देता है.. वैसे ही मैं पूरी ताकत और रफ़्तार के साथ उसकी चूत में अपना लौड़ा पेलने लगा। जिससे शालिनी लौड़े की हर ठोकर पर ‘आआअह… अह्ह्ह् उउम्म्म ष्ह्ह स्स्स्श्ह्ह्ह’ के साथ जवाब देते-देते चोटें झेलने लगी। उसकी आवाज़ों ने मुझे इतना मदहोश कर दिया था कि मैंने फिर से अपने होश को खो दिया और जो बर्फ का टुकड़ा उसकी गांड के छेद पर टिका रखा था, उसे किसी बटन की तरह उसकी गांड में पूरी ताकत से अंगूठे से दबा दिया.. जिससे एक ही बार में उसकी गांड में बर्फ का टुकड़ा चला गया। अब शालिनी गहरी पीड़ा भरी आवाज़ के साथ चिल्लाने लगी- आआह्ह्ह म्मा.. माँ मार.. डाला.. उसकी तो जैसे जान ही निकल गई हो.. पर अब क्या हो सकता था उसे तो निकाला भी नहीं जा सकता था और उसकी आँखों के सामने अंधेरा सा छा गया जो कि मुझे बाद में पता चला। खैर.. अब तो मेरा काम हो ही चुका था.. और शालिनी उसी तरह अपनी टाँगें फैलाए बिस्तर पर सर रखकर झुकी-झुकी ही दर्द पर काबू पाते हुए ‘आआअह... आआआह... उउउम्म्म्म्म’ कराहने लगी। उसके अनुभव के अनुसार उसे उस वक़्त चूत चुदाई का आनन्द और गांड में बर्फ का दर्द दोनों का मिला-जुला अहसास हो रहा था। खैर मैंने उसी तरह शालिनी की ठुकाई करते हुए उसकी चूत में ही अपना वीर्य उगल दिया.. जिससे शालिनी को अपनी चूत में तो राहत सी मिल गई किन्तु उसकी गांड में अब खुजली बढ़ चुकी थी। उसकी गांड की गर्मी का साफ़ पता चल रहा था क्योंकि बर्फ का टुकड़ा लगभग एक मिनट में ही पिघल कर आधा रह गया था। तो मैंने भी वक़्त की नज़ाकत को समझते हुए सोचा.. अभी लोहा गर्म है बेटा.. मार ले हथौड़ा.. नहीं तो चूक जाएगा। मैंने तुरंत ही झुककर उसकी पीठ सहलाते हुए उसे चुम्बन भी करना चालू कर दिया और बर्फ के पिघलने से शालिनी का दर्द भी कम सा हो गया था। उसके शरीर में रोमांच की तरंगें फिर से उमड़ने लगी थीं.. तो मैंने फिर से उसे यूँ ही प्यार देते हुए जहाँ तक ऊँगलियां जा सकती थीं.. से बचे हुए बर्फ के टुकड़े को और अन्दर करने लगा। फिर मैं अपनी दोनों ऊँगलियां अन्दर-बाहर करते हुए आश्चर्य में था कि पहले जो आराम से नहीं हो रहा था.. पर वो अब आराम से हो रहा था। तो मैंने फिर से एक बर्फ का टुकड़ा लिया और उसकी गांड में दबा दिया जो कि अन्दर नहीं जा पा रहा था और शालिनी फिर से ‘आआअह’ कराह उठी। मैंने बर्फ के टुकड़े को मक्खन में सान कर फिर से उसकी गांड में झटके से दबा दिया.. तो इस बार फिर से बर्फ का टुकड़ा गांड में आराम से चला गया और ख़ास बात यह थी कि अबकी बार शालिनी को भी दर्द न हुआ। जैसा कि उसने बाद में बताया था कि पहली बार जब अन्दर घुसा था तो उसे ऐसा लगा जैसे उसे चक्कर सा आ रहा है.. उसकी आँखें भी बंद हो चुकी थीं और काफी देर तक उसकी आँखों में अधेरा छाया रहा था.. जैसे किसी ने उसकी जान ही ले ली हो। उसे सुनाई तो दे रहा था.. पर कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था। खैर मैंने यूँ ही बर्फ के टुकड़े डाल डाल कर शालिनी की गांड को अच्छे से फैला दिया था। जब बर्फ का टुकड़ा आराम से अन्दर-बाहर होने लगा.. तो मैंने भी देर न करते हुए शालिनी को चूमा और उसे उठाकर.. फिर से उसके होंठों का रसपान किया और उसके चुचियों को रगड़-रगड़ कर मसलते हुए उसकी चुदाई की आग को हवा देने लगा। मेरा लौड़ा भी पूरे शवाब में आकर लहराते हुए उसके पेट पर उम्मीदवारी की दस्तक देने लगा.. जिसे शालिनी ने बड़े प्यार से पकड़ा और उसे चूमते हुए शालिनी बोली- बहुत जालिम हो गए हो.. अब अपनी गुड़िया को दर्द दिए बिना भी नहीं मानते। वो कुछ इस तरह से बोल रही थी कि उसके शब्द थे तो मेरे लिए.. पर वो मेरे लौड़े के लिए लग रहे थे। मैंने भी अपने लौड़े को लहराते हुए उससे बोला- जान बस आखिरी इच्छा और पूरी कर दे.. फिर जब तू कहेगी तेरी हर तमन्ना खुशी से पूरी कर दूँगा। तो वो उसे मुँह में भरकर कुछ देर चूसने के बाद बोली- ले अब मार ले बाजी.. लेकिन प्यार से.. ..…......... तो मैंने झट से उसे घुमाया और सर नीचे बिस्तर पर छुआने को बोला.. उसने ठीक वैसा ही किया, जिससे उसकी गांड ऊपर को उठकर मेरे सामने ऐसे आई जैसे शालिनी बोल रही हो- गॉड तुस्सी ग्रेट हो तोहफा कबूल करो.. मैंने भी फिर से मक्खन लिया और अच्छे से अपने लौड़े पर मल लिया.. फिर थोड़ा और लिया और उसकी गांड के छेद के चारों ओर मलते हुए उँगलियों से गहराई में भरने लगा। फिर मैंने अच्छे से ऊँगलियाँ अन्दर-बाहर कीं.. जब दो ऊँगलियाँ आराम से आने-जाने लगीं.. तो मैंने शालिनी आंटी से बोला- अब तुम्हारे सब्र के इम्तिहान की घड़ी आ चुकी है.. अपनी कुंवारी गाण्ड के उद्घाटन के लिए तैयार हो जाओ और मेरे लिए दर्द सहन करना। तो शालिनी ने दबी आवाज़ में मुँह भींचते हुए ‘हम्म’ बोला और सहमी हुई आँखें बंद किए हुए सर को बिस्तर पर टिका लिया। फिर मैंने धीरे से अपने लौड़े को पकड़ कर उसके छेद पर दबाव बनाया लेकिन लंड अन्दर करने में नाकाम रहा। तो मैंने आंटी से मदद मांगी। उसने सर टिकाए हुए अपने दोनों हाथों को पीछे लाकर अपनी गांड के छेद को फैला लिया। मैंने फिर से प्रयास किया.. इस बार कुछ सफलता मिली ही थी कि आंटी टोपे के हल्का सा अन्दर जाते ही आगे को उचक गई.. जिससे फिर से मेरा लौड़ा बाहर आ गया। तो मैंने शालिनी से तीखे शब्दों में बोला- क्या यार.. ऐसे थोड़ी न करते हैं.. तो शालिनी सहमी हुई बोली- यार डर लग रहा है.. मैं कैसे झेलूँगी? मैंने उसके चूतड़ों पर हाथों से चटाका लगाते हुए बोला- जैसे आगे झेलती है.. और उसकी कमर को सख्ती से पकड़ कर फिर से लौड़ा टिकाया। तो वो फिर से उचकने लगी इसी तरह जब तीन-चार बार हो गया तो मैंने फिर से बर्फ का एक टुकड़ा लिया और उसकी गांड के छेद में जबरदस्त तरीके से चिड़चिड़ाहट के साथ दाब दिया.. जिससे शालिनी को बहुत दर्द हुआ और वो पैर सिकोड़ कर लेट सी गई.. पर बर्फ का टुकड़ा तो अन्दर अब फंस चुका था। तो मैंने उससे बोला- अब देख.. जो दर्द होना था.. वो हो चुका.. अब बर्दास्त करके चुपचाप उसी तरह से हो जाओ.. वर्ना फिर से यही करूँगा। वो बोली- ठीक है.. पर आराम से करना.. वो फिर उसी तरह से गांड उठाकर लेट गई.. फिर मैंने उसी बर्फ के टुकड़े के सहारे अपने लौड़े को धीरे-धीरे उसकी गांड में दबाव देते हुए डालने लगा और कमाल की बात यह थी कि उसकी गांड भी आराम से पूरा लौड़ा खा गई और अब मेरे सामान की गर्मी और शालिनी की गांड की गर्मी पाकर बर्फ अपना दम तोड़ चुकी थी। उसकी गांड का कसाव मेरे लौड़े पर साफ़ पता चल रहा था। फिर मैंने उसकी कमर को मजबूती से पकड़ कर अपने लंड को बाहर की ओर खींचा.. तो शालिनी के मुख से दर्द भरी घुटी सी ‘अह्ह…ह्ह’ निकल गई। पर मुझे ऐसा लग रहा था जैसे तरबूज़ के अन्दर चाकू डाल कर निकाला जाता है। फिर मैं फिर से धीरे-धीरे उसकी गांड़ में लंड अन्दर-बाहर करने लगा जिसमे मुझे भी उसकी गांड़ के कसाव के कारण अपने लौड़े पर रगड़ महसूस हो रही थी। शालिनी का तो पूछो ही नहीं.. उसका दर्द से बुरा हाल हो गया था.. पर मेरे कारण वो अपने असहनीय दर्द को बर्दास्त किए हुए आँखों से आँसू बहाते हुए लेटी रही। फिर मैंने अपने लंड को टोपे से कुछ भाग अन्दर रखते हुए बाकी का बाहर निकाला और उसमें थोड़ा सा मक्खन लगाया और फिर से अन्दर डाला। इस तरह यह प्रक्रिया 5 से 6 बार दोहराई तो मैंने महसूस किया कि अब चिकनाई के कारण लौड़ा आराम से अन्दर-बाहर आ-जा रहा था। फिर मैंने आंटी की ओर देखा.. तो अब उसे भी राहत मिल चुकी थी। जो कि उसके चेहरे से समझ आ रही थी। मैंने इसी तरह चुदाई करते हुए अपने लौड़े को बाहर निकाला और इस बार जब पूरा निकाल कर अन्दर डाला.. तो लौड़ा ‘सट’ की आवाज करता हुआ आराम से अन्दर चला गया.. जैसे कि उसका अब यही अड्डा हो। इस बार शालिनी को भी तकलीफ न हुई। मैं शालिनी आंटी से कुछ बोलता कि इसके पहले ही आंटी बोली- क्यों अब हो गई न इच्छा पूरी? तो मैंने बोला- अभी काम आधा हुआ है। वो आंटी बोली- चलो फिर पूरा कर लो.. तो मैंने फिर से उसकी गांड से लौड़ा निकाला और तेज़ी के साथ लौड़े को फिर से अन्दर पेल दिया जो कि उसकी जड़ तक एक ही बार में पहुँच गया। जिससे आंटी के मुख से दर्द भरी सीत्कार, ‘अह्ह्ह ह्ह.. आआआह मार डाला स्स्स्स्श्ह्ह्ह्ह’ फूट पड़ी और आँखों के सामने अँधेरा सा छा गया। और मैं उस पर रहम खाते हुए कुछ देर यूँ ही रुका रहा और आगे को झुककर मैंने उसकी पीठ को चूमते हुए उसकी चूत में ऊँगली डालकर अन्दर-बाहर करने लगा। इसके कुछ देर बाद ही आंटी सामान्य होते हुए चूत में उँगलियों का मज़ा लेते सीत्कार करने लगी। अब मैंने भी इसी तरह उसकी चूत में ऊँगली देते हुए उसकी गांड में लंड अन्दर-बाहर करने लगा फिर कुछ ही समय बाद चूत की खुजली मिटाने के चक्कर में शालिनी खुद ही कमर चलाते हुए तेज़ी से आगे-पीछे होने लगी और उसके स्वर अब दर्द से आनन्द में परिवर्तित हो चुके थे। मैंने वक़्त की नज़ाकत को समझते हुए अपनी भी गति बढ़ा दी और अब मेरा पूरा ‘सामान’ बिना किसी रुकावट के.. उसको दर्द दिए बिना ही आराम से अन्दर-बाहर होने लगा। जिससे मुझे भी एक असीम आनन्द की प्राप्ति होने लगी थी.. जिसको शब्दों में परिभाषित नहीं किया जा सकता है। देखते ही देखते शालिनी की चूत रस से मेरी ऊँगलियां ऐसे भीगने लगीं जैसे किसी ने अन्दर पानी की टोंटी चालू कर दी हो। पूरे कमरे उसकी सीत्कारें गूंज रही थी- आआआअह्ह्ह..उउम्म्म्म.. स्स्स्स..ज्ज्ज्जाअण.. आआअह.. आआइ जान बहुत मज़ा आ रहा है.. मुझे नहीं मालूम था कि इतना मज़ा भी आएगा.. शुरू में तो तूने फाड़ ही दी थी.. पर अब अच्छा लग रहा है.. तुम बस अन्दर-बाहर करते रहो.. लूट लो इसके कुंवारेपन का मज़ा.. तो मैं भी बेधड़क हो उसकी गांड में बिना रुके ऐसे लंड ठूँसने लगा.. जैसे ओखली में मूसल चल रहा हो। उसकी चीखने की आवाजें, ‘उउउम्म्म आआअह्ह्ह् श्ह्ह्ह्ह् अह्ह्हह आह आआह’ मेरे कानों में पड़ कर मेरा जोश बढ़ाने लगीं। जिससे मेरी रफ़्तार और तेज़ हो गई और मैं अपनी मंजिल के करीब पहुँच गया। अति-उत्तेजना मैंने अपने लौड़े को ऐसे ठेल दिया जैसे कोई दलदल में खूटा गाड़ दिया हो। इस कठोर चोट के बाद मैंने अपना सारा रस उसकी गाण्ड के अंतिम पड़ाव में छोड़ने लगा और तब तक ऐसे ही लगा रहा.. जब तक उसकी पूरी नली खाली न हो गई। फिर मैंने उसकी गांड को मुट्ठी में भरकर कसके भींचा और रगड़ा.. जिससे काफी मज़ा आ रहा था। और आए भी क्यों न.. शालिनी की गांड किसी स्पंज के गद्दे से काम न थी। फिर इस क्रीड़ा के बाद मैं आगे को झुका और उसकी पीठ का चुम्बन लेते हुए.. उसकी बराबरी में जाकर लेट गया। अब उसका सर नीचे था और गांड ऊपर को उठी थी.. तो मैं उसके गालों पर चुम्बन करते हुए उसकी चूचियों को छेड़ने लगा.. पर वो वैसे ही रही। मैंने पूछा- क्या हुआ.. सीधी हो जाओ.. अब तो हो चुका जो होना था। तो शालिनी अपना सर मेरी ओर घुमाते हुए बोली- अनुज तूने कचूमर निकाल दिया। उस समय तो जोश में मैंने भी रफ़्तार बढ़ा दी थी.. पर अब जरा भी हिला नहीं जा रहा है। तो मैंने उसे सहारा देते हुए आहिस्ते से लिटाया और मेरे लिटाते ही शालिनी की गांड मेरे लावे के साथ-साथ खून भी उलट रही थी जो कि उसके अंदरुनी भाग के छिल जाने से हो रहा था। मैंने शालिनी के चेहरे की ओर देखा जो कि इस बात से अनजान थी। उसकी आँखें बंद और चेहरे पर ओस की बूंदों के समान पसीने की बूँदें चमक रही थीं और मुँह से दर्द भरी आवाज लगातार ‘आआआअह अह्ह्हह श्ह्ह्ह्ह’ निकाले जा रही थी। मैं उसकी इस हालत तरस खाते हुए वाशरूम गया और सोख्ता पैड और गुनगुना पानी लाकर उसकी गांड और चूत की सफाई की.. जिससे शालिनी ने मेरे प्यार के आगोश में आकर मुझे अपने दोनों हाथ खोलकर अपनी बाँहों में लेने का इशारा किया। तो मैं भी अपने आपको उसके हवाले करते हुए उसकी बाँहों में चला गया। उसने मुझे बहुत ही आत्मीयता के साथ प्यार किया और बोली- तुम मेरा इतना ख़याल रखते हो.. मुझे बहुत अच्छा लगता है.. आज से मेरा सब कुछ तुम्हारा अनुज.. आई लव यू.. आई लव यू.. सो मच.. मुझे बस इसी तरह प्यार देते रहना। |
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