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Adultery MOM NAUKAR KE SATH SUPER HOT
*(शाम ढल चुकी थी। घर के अंदर का माहौल अब पूरी तरह बदल चुका था। अभी कुछ घंटे पहले यहाँ जो जुनून और शोर था, वह अब एक भारी सन्नाटे में तब्दील हो चुका था। मम्मी ने खुद को संभाल लिया था, बाल संवार लिए थे और साधारण कपड़े पहन लिए थे, लेकिन उनकी आँखों की वह चमक अभी भी पूरी तरह गायब नहीं हुई थी। कल्लू कोने में चुपचाप खड़ा था, जैसे कोई वफादार नौकर हो, लेकिन उसके चेहरे पर अभी भी वही संतुष्टि थी जो उसने दोपहर में हासिल की थी।)*

*(तभी अचानक मुख्य दरवाजे के खुलने की आवाज आई। ताला खुलने की चरचराहट और जूतों की आहट ने कमरे के सन्नाटे को चीर दिया। पापा घर आ चुके थे।)*
*(पापा ने हाथ में ऑफिस का बैग लटकाए हुए कमरे में कदम रखा। उनकी नज़र मम्मी के चेहरे पर पड़ी, जो आज सामान्य दिनों से कहीं ज्यादा खिला-खिला और चमकदार लग रहा था। मम्मी के चेहरे पर एक ऐसी सुकून भरी मुस्कान थी जिसे देखकर कोई भी समझ सकता था कि आज उनका दिन बहुत अच्छा बीता है। पापा ने मुस्कुराते हुए अपनी टाई थोड़ी ढीली की और मम्मी के करीब आकर खड़े हो गए।)*

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"अरे वाह! आज तो बड़े खुश लग रहे हो तुम? क्या बात है? 
*(मम्मी के दिल की धड़कन एक पल के लिए बढ़ गई जब पापा ने उनकी तरफ देखा। उन्हें याद आया कि कुछ देर पहले ही उनका चेहरा कल्लू के वीर्य से लथपथ था, और हालांकि उन्होंने सब साफ कर लिया था, लेकिन वह अहसास अभी भी उनकी त्वचा पर महसूस हो रहा था। उन्होंने अपनी मुस्कान को थोड़ा और गहरा किया, लेकिन इस बार उसमें एक शरारत और रहस्य छिपा था।)*

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*(मम्मी ने धीरे से अपना हाथ पापा के कंधे पर रखा और बड़ी मासूमियत से, मगर आँखों में एक चमक लिए जवाब दिया।)*

"कुछ खास नहीं... बस आज मौसम थोड़ा सुहाना था और घर में शांति थी। शायद इसीलिए मन प्रसन्न है। क्यों, आपको ऐसा क्यों लगा कि मैं खुश हूँ? क्या मेरी खुशी आपके चेहरे पर दिख रही है?"
*(पापा ने मम्मी की बातों में छिपे उस हल्के से रहस्य को भांपने की कोशिश की। उन्होंने मम्मी की कमर में हाथ डाला और उन्हें अपनी ओर खींचते हुए मुस्कुराए। उनकी नजरें मम्मी के चेहरे को गौर से देख रही थीं, जैसे वे उस चमक का असली कारण ढूंढने की कोशिश कर रहे हों।)*

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*(पापा ने धीमी आवाज़ में कहा,)* "तुम्हारी आँखें झूठ नहीं बोल सकतीं। तुम्हारी ये मुस्कान और ये चमक... ये किसी आम खुशी जैसी नहीं लग रही। सच बताओ, क्या बात है? अगर तुमने कुछ नया खरीदा है या कोई सरप्राइज है, तो मुझे भी पता होना चाहिए!"
*(मम्मी ने तुरंत पापा की नज़रों से अपनी नज़रें चुराईं। उन्हें डर था कि कहीं पापा उनकी आँखों में झाँककर उस दोपहर के राज़ को पढ़ न लें। उन्होंने हल्का सा हँसते हुए अपने हाथ पापा के हाथों से छुड़ा लिए और पीछे हट गईं।)*

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*(मम्मी ने बात घुमाते हुए कहा,)* "अरे, आप भी ना... हर बात में इतना गहराई से मत सोचिए। चलिए छोड़िए ये सब, आप थक गए होंगे। मैं अभी आपके लिए गरमा-गरम अदरक वाली चाय बनाती हूँ, आपका सारा तनाव दूर हो जाएगा।"
*(रात का समय था। घर में खाने के बाद की हल्की शांति छाई हुई थी। मम्मी सोफे पर बैठी किताब पढ़ रही थीं और कल्लू पास ही बैठा था, उसकी नज़रें बार-बार मम्मी के चेहरे पर टिक रही थीं। तभी अचानक पापा के फोन की तेज रिंगटोन ने पूरे कमरे के सन्नाटे को तोड़ दिया।)*

*(पापा ने फोन उठाया, कुछ शब्द सुने और फिर उनके चेहरे के भाव एकदम गंभीर हो गए। उन्होंने फोन रखा और उठते हुए काफी परेशान दिखने लगे।)*

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*(पापा ने घबराहट में अपना जैकेट उठाते हुए कहा,)* "अरे यार! ये क्या मुसीबत है? ऑफिस से अभी कॉल आया है, एक अर्जेंट मीटिंग बुलाई गई है। मुझे अभी निकलना पड़ेगा। पता नहीं ये काम कब खत्म होगा, शायद पूरी रात लग जाए!"
*(मम्मी के मन में एक अजीब सी हलचल हुई। एक तरफ तो वो चाहती थीं कि पापा जल्दी वापस आ जाएं, लेकिन दूसरी तरफ, पापा के जाने की खबर सुनकर उनके अंदर एक अनजाना उत्साह जाग उठा। उन्होंने खुद को संभालते हुए चेहरे पर चिंता का भाव लाया ताकि पापा को शक न हो।)*

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*(मम्मी ने उठकर पापा के पास जाते हुए कहा,)* "ओह! इतनी रात को? ये ऑफिस वाले भी ना, बिल्कुल चैन से रहने ही नहीं देते। आप जाइए, वरना लेट हो जाएंगे। मैं और कल्लू यहीं हैं, आप फिक्र मत कीजिए। अपना ध्यान रखिएगा और अगर देर हो जाए तो बता दीजिएगा।"

*(पापा ने हल्का सा मुस्कुराते हुए मम्मी की तरफ देखा, जैसे उनकी फिक्र को महसूस कर रहे हों। उन्होंने अपना बैग कंधे पर टांगा और दरवाज़े की ओर बढ़ गए।)*

**पापा:** "हाँ, मैं ध्यान रखूँगा। तुम भी अपना ख्याल रखना।"

*(पापा घर से बाहर निकल गए। मम्मी ने दरवाज़ा बंद किया और कुंडी लगा दी। अब घर में सिर्फ मम्मी और कल्लू थे। मम्मी ने जैसे ही मुड़कर देखा, उन्होंने पाया कि कल्लू चुपचाप खड़ा उन्हें देख रहा था। मम्मी के चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान आई, लेकिन उनकी आँखों में एक अजीब सी हलचल थी।)*

**मम्मी:** "(धीमी आवाज़ में) चलो, साहब तो चले गए... अब बताओ कल्लू, क्या चाहिए तुम्हें?"
*(मम्मी ने अपनी साड़ी का पल्लू थोड़ा ठीक किया और कल्लू की तरफ बढ़ीं। कमरे में छाई शांति अब भारी होने लगी थी। मम्मी की आँखों में एक अलग ही चमक थी, जो शायद सिर्फ कल्लू के लिए ही थी।)*

**मम्मी:** "(पास आते हुए और धीमी आवाज़ में) क्यों? आज कुछ ज़्यादा ही शांत खड़े हो? जब तक साहब घर पर होते हैं, तब तक तो तुम बहुत बातें करते हो... अब क्या हुआ?"

*(उन्होंने कल्लू के पास आकर रुकते हुए उसके चेहरे को गौर से देखना शुरू किया। उनकी सांसों की गर्माहट अब कल्लू को महसूस होने लगी थी।)*

**मम्मी:** "क्या सोच रहे हो मन ही मन? कुछ कहना चाहते हो या बस ऐसे ही मुझे घूरते रहोगे?"

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*(मम्मी अभी सोफे पर बैठी ही थीं कि कल्लू उनके पास आया और बड़े ही बेबाक अंदाज़ में बोला।)*

**कल्लू:** "मल्किन, रामू भी थोड़ी देर में आने वाला है... फिर हम सब साथ में एन्जॉय करेंगे पूरी रात!"

*(यह सुनते ही मम्मी के चेहरे पर एक मदहोश करने वाली मुस्कान फैल गई। उन्हें पता था कि कल्लू और रामू मिलकर उनके साथ क्या-क्या करते हैं। उन्होंने अपनी साड़ी को थोड़ा ढीला किया और कल्लू की आँखों में आँखें डालकर बोलीं।)*

**मम्मी:** "(गहरी आवाज़ में) अच्छा? तो रामू भी आएगा? तुमने पहले क्यों नहीं बताया?"
*(माहौल में अब एक अलग ही तरह की उत्तेजना घुलने लगी थी। कल्लू की बातों के बाद मम्मी पहले से ही तैयार लग रही थीं। तभी बाहर दरवाजे पर दस्तक हुई और कल्लू दौड़कर दरवाजा खोलने गया।)*

*(दरवाजा खुलते ही रामू अंदर दाखिल हुआ। उसने आते ही कमरे में मौजूद भारीपन को भांप लिया। उसकी नज़र सीधे मम्मी पर पड़ी, जो सोफे पर बहुत ही आरामदायक और खुले अंदाज़ में बैठी थीं।)*

**रामू:** "(मुस्कुराते हुए और कल्लू के कंधे पर हाथ रखते हुए) क्या बात है कल्लू भाई! आज तो बड़ी रौनक दिख रही है यहाँ? मल्किन भी बड़ी खुश लग रही हैं।"
*(रामू की बातों पर मम्मी ने कोई जवाब नहीं दिया, बस उनकी नज़रें रामू के शरीर पर टिकी रहीं। कमरे का तापमान जैसे अचानक बढ़ गया था। कल्लू ने मुस्कुराते हुए रामू को अंदर बुलाया और दरवाज़ा बंद कर दिया।)*

**मम्मी:** "(धीमी और मखमली आवाज़ में) आओ रामू... काफी इंतज़ार कराया तुमने। कल्लू बता रहा था कि तुम आज रात के लिए बहुत एक्साइटेड हो।"

*(मम्मी ने सोफे पर बैठे-बैठे ही अपनी टांगों को थोड़ा फैला लिया, जिससे उनकी साड़ी की सिलवटें और भी कम हो गईं। रामू ने अपनी नज़रें घुमाईं और सीधा मम्मी की ओर बढ़ा। वह जानता था कि आज की रात कितनी लंबी और थकाने वाली होने वाली है।)*

*(कमरे में सन्नाटा छा गया था, बस दोनों के सांस लेने की आवाज़ सुनाई दे रही थी। रामू ने बिना किसी हिचकिचाहट के कदम बढ़ाए और सीधा मम्मी के सामने खड़ा हो गया। उसकी आँखों में एक जंगली चमक थी।)*

*(रामू ने झुककर धीरे से मम्मी के गले पर अपनी गर्म सांसें छोड़ीं, जिससे मम्मी के बदन में एक सिहरन दौड़ गई। इससे पहले कि मम्मी कुछ बोल पातीं, रामू ने उनके चेहरे को अपने हाथों में जकड़ लिया और पूरे जुनून के साथ उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए।)*

**मम्मी:** "(एक दबी हुई आह भरते हुए) उम्मम... रामू..."
*(मम्मी के मुँह से निकली उस हल्की सी आह ने रामू के भीतर की आग को और भड़का दिया। उन्होंने अपनी आँखें कसकर बंद कर लीं और खुद को रामू के स्पर्श के हवाले कर दिया। रामू का किस (kiss) अब और भी गहरा और बेकाबू होता जा रहा था।)*

*(उधर कल्लू कोने में खड़ा होकर यह सब देख रहा था, उसके चेहरे पर एक संतुष्ट मुस्कान थी। वह जानता था कि खेल अब शुरू हुआ है। रामू ने अपना एक हाथ मम्मी की कमर के पीछे ले जाकर उन्हें अपनी तरफ खींच लिया, जिससे उनका बदन उससे पूरी तरह चिपक गया।)*

**रामू:** "(किस करते-करते, धीमी और भारी आवाज़ में) आप आज बहुत खूबसूरत लग रही हैं मल्किन..."
*(जैसे ही रामू ने मम्मी को चूमना शुरू किया, कल्लू अब और दूर नहीं रह सका। वह धीरे से चलकर सोफे के दूसरी तरफ आया और मम्मी के दूसरे कंधे पर अपना हाथ रख दिया। अब मम्मी उन दोनों के बीच में फंसी हुई थीं, और कमरे का माहौल पूरी तरह से कामवासना के वशीभूत हो चुका था।)*

*(रामू उनके होंठों को चूस रहा था, जबकि कल्लू उनकी गर्दन और कान के पास प्यार से फुसफुसा रहा था। मम्मी के शरीर में बिजली जैसी लहरें दौड़ रही थीं। उन्होंने अपनी आँखें खोलकर दोनों को देखा, उनकी आँखों में अब शर्म नहीं बल्कि एक गहरी प्यास थी।)*

**मम्मी:** "(हाँफते हुए और दोनों के कंधों को पकड़ते हुए) उफ्फ... तुम दोनों... आज मुझे चैन से बैठने नहीं दोगे ना?"
*(मम्मी के इन शब्दों ने मानो दोनों लड़कों के संयम का बांध तोड़ दिया। कल्लू ने शरारत भरी मुस्कान के साथ उनकी साड़ी के पल्लू को धीरे से अपने हाथ में लिया और उसे कंधे से नीचे सरकने दिया।)*

**कल्लू:** "(मम्मी के कान के पास फुसफुसाते हुए) चैन तो हम आज बिल्कुल नहीं लेने देंगे मल्किन... आज तो आपको सिर्फ मज़ा ही मिलेगा।"

*(रामू ने इस बीच मम्मी के ब्लाउज के हुक पर हाथ रखा और बड़े ही धीमे लेकिन दृढ़ तरीके से उन्हें खोलने लगा। मम्मी की साँसें तेज़ हो चुकी थीं और उनका पूरा बदन थरथरा रहा था। रामू का एक हाथ उनकी कमर को सहला रहा था, तो कल्लू उनकी गर्दन पर अपनी जीभ फेर रहा था।)*

*(रामू ने ब्लाउज का आखिरी हुक भी खोल दिया, जिससे मम्मी का बदन आज़ाद महसूस करने लगा। रामू ने अपनी नज़रें ऊपर उठाकर मम्मी की आँखों में देखा, जहाँ अब केवल वासना और समर्पण झलक रहा था।)*

**रामू:** "(गहरी आवाज़ में) आपकी ये खूबसूरती... इसे देखने के लिए मैं कब से तरस रहा था।"

*(रामू ने आगे बढ़कर मम्मी के उभारों को अपने हाथों में भर लिया, जबकि कल्लू ने उनकी साड़ी के निचले हिस्से को धीरे से ऊपर उठाना शुरू कर दिया। मम्मी के पैर अब हवा में थे और वो दोनों लड़कों के स्पर्श से पूरी तरह मदहोश हो चुकी थीं।)*
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**मम्मी:** "(अपनी आँखें मूंदते हुए और जोर से हाँफते हुए) आह्ह... रामू... कल्लू... जल्दी करो..."
*(कमरे में अब केवल भारी साँसों और जिस्मों के टकराने की आवाज़ें गूँज रही थीं। रामू ने बिना वक्त गंवाए मम्मी के नग्न उभारों को अपने मुँह में भर लिया। वह बड़ी शिद्दत से उनके स्तनों को चूसने और अपनी जीभ से उन्हें सहलाने लगा, जिससे मम्मी के मुँह से बार-बार आहें निकल रही थीं।)*

*(दूसरी ओर, कल्लू ने अपनी हरकत तेज कर दी थी। उसने मम्मी की साड़ी को पूरी तरह से हटाकर फेंक दिया, जिससे उनका सुडौल बदन पूरी तरह से उजागर हो गया। कल्लू ने बिना देर किए उनके पैरों के बीच जगह बनाई और सीधे उनकी गीली और उत्तेजित योनि (chut) पर अपना चेहरा टिका दिया।)*
*(मम्मी का पूरा शरीर अब चरम सुख की लहरों से कांप रहा था। जैसे ही कल्लू ने उनकी संवेदनशील योनि (chut) को अपनी जीभ से चाटना और चूसना शुरू किया, मम्मी का सिर पीछे की ओर झुक गया और उनके हाथ हवा में लहराने लगे।)*

**मम्मी:** "(चीखते हुए और दर्द-मिश्रित आनंद में) आआह्ह! कल्लू... उफ्फ... वहाँ मत... आह्ह, हाँ... वहीं!"
*(मम्मी की चीखें पूरे कमरे में गूँज रही थीं। कल्लू अब और भी बेताब हो चुका था। उसने अपनी जीभ की गति बढ़ा दी और अपनी उंगलियों से उनकी योनि के बाहरी हिस्सों को सहलाना शुरू कर दिया, जिससे मम्मी का बदन धनुष की तरह तन गया।)*

*(उधर रामू, जो अभी तक उनके स्तनों का लुत्फ़ उठा रहा था, अब नीचे की ओर बढ़ने लगा। उसने अपने हाथों से मम्मी की जांघों को फैलाया ताकि कल्लू को और बेहतर जगह मिल सके। रामू ने अपना चेहरा मम्मी के पेट के पास लाया और उनकी त्वचा को चूमते हुए धीरे-धीरे नीचे की ओर बढ़ने लगा।)*

**मम्मी:** "(बेचैनी और चरम सुख के बीच झूलते हुए) उफ्फ... रामू... कल्लू... मैं..."

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*(मम्मी का नियंत्रण अब पूरी तरह से खत्म हो चुका था। कल्लू की जीभ की तीव्र हलचल और रामू के हाथों का दबाव उन्हें पागल कर रहा था। कल्लू ने अपनी उंगलियां उनकी योनि के अंदर गहराई तक डाल दीं, जिससे मम्मी का बदन बिजली के झटके की तरह कांप उठा।)*

**कल्लू:** "(उनका नाजुक हिस्सा चूसते हुए और ऊपर देखते हुए) मल्किन, आप कितनी गीली हैं... आपका रस कितना मीठा है!"


*(मम्मी के चेहरे पर वासना और आनंद का ऐसा संगम था जिसे देखकर दोनों लड़के और भी उत्तेजित हो गए। कल्लू की उंगलियां उनकी योनि के भीतर अंदर-बाहर होने लगीं, जिससे मम्मी की सिसकियां और तेज हो गईं।)*

**मम्मी:** "(हाथों से बेड की चादर को कसकर पकड़ते हुए) आह्ह! कल्लू... रुकना मत... और जोर से... उफ्फ!"

*(रामू ने अब मम्मी के दोनों पैरों को अपने कंधों पर रख लिया, जिससे उनका निचला हिस्सा कल्लू के लिए और भी आसान हो गया। रामू ने अपनी शर्ट उतार फेंकी और अपनी उत्तेजित लिंग को बाहर निकाला। उसने कल्लू की तरफ देखा और फिर मम्मी की गीली योनि की ओर।)*

*(रामू ने अपनी उत्तेजित और सख्त हो चुकी लिंग को मम्मी के चेहरे के करीब लाया। उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक और अधिकार था। उसने मम्मी की आँखों में झाँकते हुए बहुत ही धीमी और गहरी आवाज़ में पूछा।)*

**रामू:** "मल्किन... क्या आप मेरा लंड चूसेंगी? मुझे देखना है कि आपके होंठ मेरे लिए कितने प्यासे हैं।"

*(मम्मी, जो पहले से ही कल्लू की जीभ के जादू से अर्धविक्षिप्त अवस्था में थीं, रामू की बात सुनकर और भी ज्यादा उत्तेजित हो गईं। उन्होंने अपनी गीली आँखों से रामू के विशाल लिंग को देखा और उनके मुँह में लार आने लगी।)*

**मम्मी:** "(हाँफते हुए और थकी हुई मगर कामुक आवाज़ में) ओह्ह रामू... तुम..."

*(मम्मी की नज़रों में वासना साफ़ झलक रही थी। उन्होंने बिना कुछ कहे, बस एक गहरी सांस ली और धीरे से अपना सिर आगे बढ़ाया। उन्होंने रामू के उस मोटे और गर्म लिंग को अपने होंठों के बीच ले लिया।)*

*(जैसे ही उनके नरम होंठों ने रामू के लिंग के ऊपरी हिस्से को छुआ, रामू के मुँह से एक दबी हुई आह निकली। मम्मी ने अपनी जीभ से उसके सिरे को सहलाया और फिर धीरे-धीरे उसे अपने मुँह के अंदर लेना शुरू किया।)*

**रामू:** "(अपनी आँखें बंद करते हुए और मम्मी के बालों को जकड़ते हुए) आह््ह... मल्किन... आपका मुँह... कितना गरम और मुलायम है... हाँ, ऐसे ही... और गहरा खींचिए!"

[Image: t64aenvlu7gh1.gif]

*(दृश्य अब और भी अधिक कामुक और उन्मादपूर्ण हो गया था। रामू बिस्तर पर सीधा लेट गया और मम्मी ने अपनी देह को उलट लिया। अब मम्मी रामू के ऊपर उल्टी स्थिति में थीं, उनका चेहरा रामू के उत्तेजित लिंग के बिल्कुल करीब था, जबकि रामू का मुख मम्मी की गीली और सुगंधित योनि के ठीक सामने था। यह पूर्णतः '69' की मुद्रा थी।)*

*(रामू ने तुरंत अपनी जीभ से मम्मी की क्लिटोरिस को बार-बार सहलाना शुरू कर दिया, जिससे मम्मी के शरीर में करंट दौड़ गया। दूसरी ओर, मम्मी ने भी हार नहीं मानी; उन्होंने रामू के मोटे और गर्म लिंग को अपने होंठों के बीच दबा लिया और अपनी जीभ से उसके सिरे को चाटना शुरू कर दिया।)*

*(मम्मी के शरीर पर दो तरफा प्रहार हो रहे थे। जहाँ एक तरफ रामू की जीभ उनकी योनि के संवेदनशील हिस्सों को पागल कर रही थी, वहीं दूसरी तरफ कल्लू पूरी तरह से उनके पीछे लग चुका था। कल्लू ने मम्मी के नितंबों को अपने हाथों से फैलाया और अपनी लंबी जीभ से उनके गुदा द्वार (anus) को जोर-जोर से चाटना शुरू कर दिया।)*

*(मम्मी इस समय पूरी तरह से चरम सुख के भंवर में फंसी हुई थीं। उनके शरीर से उत्तेजना के कारण पसीना बह रहा था और वे रह-रहकर चीख रही थीं।)*

**मम्मी:** "(एक साथ दोनों तरफ से मिलने वाले सुख के कारण बेकाबू होकर चिल्लाते हुए) आआआह्ह्ह! रामू... उफ्फ! कल्लू... तुम्हारी जीभ..."
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*(मम्मी की हालत अब काबू से बाहर हो चुकी थी। उनके शरीर में उठने वाली लहरें इतनी तेज थीं कि वे बिस्तर पर खुद को सिकोड़ रही थीं। रामू नीचे से उनकी योनि को अपनी जीभ से बुरी तरह रगड़ रहा था, जैसे वह वहां से सारा रस निचोड़ लेना चाहता हो। वहीं कल्लू भी पीछे से रुकने को तैयार नहीं था; उसने अपनी जीभ को थोड़ा और गहराई से उनके छेद के भीतर डालने की कोशिश की।)*

*(इस त्रिकोणीय यौन क्रिया ने कमरे के माहौल को पूरी तरह से वासना के चरम पर पहुँचा दिया था। रामू ने अचानक अपनी पकड़ मम्मी के कूल्हों पर मजबूत कर ली ताकि वह उन्हें और करीब ला सके।)*

**रामू:** "(गहरी और भारी आवाज में, कामुकता से भरे स्वर में) मल्किन..."

*(मम्मी पहले से ही चरम सुख की दहलीज पर खड़ी थीं, लेकिन कल्लू के इस कदम ने उन्हें पूरी तरह झकझोर दिया। कल्लू ने अपने हाथ से मम्मी के नितंबों को मजबूती से अलग किया और अपने उत्तेजित, सख्त लिंग को उनकी गीली योनि के द्वार पर टिका दिया।)*

*(रामू अभी भी नीचे से उनकी योनि को अपनी जीभ से चाट रहा था, जिससे मम्मी का शरीर लगातार कांप रहा था। इसी दौरान कल्लू ने एक जोरदार झटका दिया और अपना मोटा लिंग मम्मी की तंग योनि के अंदर धंसा दिया।)*

**मम्मी:** "(एक तीखी और गूँजती हुई चीख के साथ) आआआह्ह्ह! कल्लू... नहीं... उफ्फ... इतना बड़ा... आआआह्ह्ह!"[Image: (m=ldpwiqacxtE_Ai)(mh=W3QCCkdjaTSFWF3K)4...2Bg257A%3D]

*(कल्लू ने मम्मी की चीख को अपनी उत्तेजना का ईंधन बना लिया। उसने मम्मी की कमर को अपने हाथों से जकड़ लिया और बिना किसी देरी के, बड़े ही बेरहम और लयबद्ध तरीके से अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया। हर बार जब उसका लिंग मम्मी की योनि की गहराई तक पहुँचता, तो मम्मी का पूरा शरीर धनुष की तरह खिंच जाता।)*

*(नीचे रामू भी शांत नहीं बैठा था। कल्लू के प्रवेश से जो घर्षण पैदा हो रहा था, उसकी वजह से मम्मी की योनि से निकलने वाला रस और भी बढ़ गया था। रामू ने उस अतिरिक्त रसीलेपन का फायदा उठाया और अपनी जीभ को और भी तेजी से, और भी गहराई से मम्मी के क्लिटोरिस पर चलाना शुरू कर दिया।)*

*(कमरे में केवल हाफने की आवाज़ें और मांस के आपस में टकराने की 'चप-चप' सुनाई दे रही थी। कल्लू की गति अब और भी हिंसक और तीव्र हो गई थी। वह मम्मी के शरीर को आगे-पीछे पटक रहा था, जिससे मम्मी का सिर बिस्तर पर बार-बार टकरा रहा था।)*

*(मम्मी का दिमाग पूरी तरह सुन्न हो चुका था। एक तरफ कल्लू का कठोर लिंग उनकी योनि की दीवारों को फाड़ देने की कोशिश कर रहा था, और दूसरी तरफ रामू की जीभ का निरंतर प्रहार उन्हें पागल कर रहा था। मम्मी के मुँह से अब शब्द नहीं बल्कि केवल बेकाबू आहें निकल रही थीं।)*

**मम्मी:** "(कांपती हुई और लड़खड़ाती आवाज में) ह्म्म्म... आआह्ह... कल्लू..."

*(यह दृश्य अब एक पूर्ण कामुक अराजकता में बदल चुका था। कल्लू पीछे से मम्मी की योनि को पूरी ताकत से रौंद रहा था, जिससे मम्मी का शरीर आगे की ओर झुक रहा था। इसी अवस्था में, मम्मी ने अपने चेहरे को नीचे की ओर घुमाया और रामू के खड़े हुए, उत्तेजित लिंग को अपने मुँह में ले लिया।)*

*(अब मम्मी के साथ तीन दिशाओं से प्रहार हो रहे थे: कल्लू का लिंग उनकी योनि के भीतर गहराई तक जा रहा था, रामू की जीभ उनके क्लिटोरिस को पागलों की तरह सहला रही थी, और स्वयं मम्मी रामू के लिंग को अपने गर्म और गीले मुँह में भरकर उसे चूस रही थीं।)*

*(माहौल अब पूरी तरह से कामुक उन्माद और हंसी-मजाक के बीच झूल रहा था। मम्मी और रामू 69 की मुद्रा में थे, जहाँ मम्मी का चेहरा रामू के लिंग के ठीक सामने था और रामू का चेहरा मम्मी की योनि के पास। इसी बीच, कल्लू पीछे से मम्मी की योनि को पूरी ताकत से रौंद रहा था।)*

*(जैसे ही कल्लू ने एक जोरदार झटका देकर अपना मोटा लिंग मम्मी की योनि से बाहर निकाला, रामू ने फुर्ती दिखाते हुए अपना सिर घुमाया और कल्लू के उस पसीने से तरबतर, उत्तेजित लिंग को अपने मुँह में भर लिया। रामू ने बड़ी ही कुशलता से कल्लू के लिंग को चूसना शुरू कर दिया।)*

[Image: 35873471.gif?validfrom=1762923600&validt...GxyAyKM%3D]

*(दृश्य इतना विचित्र और कामुक हो गया था कि कमरे में केवल भारी सांसों और गीली आवाजों का शोर था। मम्मी, जो खुद रामू के लिंग को चूस रही थीं, अचानक यह देखकर अपनी हंसी नहीं रोक पाईं कि कैसे रामू अब कल्लू के लिंग को बड़े चाव से चूस रहा है।)*

**मम्मी:** "(खिलखिलाते हुए और हांफते हुए) हाहाहा... अरे! ये क्या हो रहा है? रामू... तुम तो आज पूरे शिकारी बने हुए हो!"

*(मम्मी की हंसी सुनकर कल्लू का जोश और बढ़ गया। उसने अपनी कमर को जोर से झटका दिया और सीधे मम्मी की योनि के अंदर घुस गया। इस बार कल्लू की गति बहुत ही हिंसक थी।)*

**कल्लू:** "(भारी और गूँजती हुई आवाज में) आअह मालकिन
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*(कमरे का तापमान अब चरम सीमा पर पहुँच चुका था। रामू ने बिस्तर पर लेटकर अपनी टांगें फैला लीं, और मम्मी तुरंत उसके ऊपर 'काउगर्ल' पोजीशन में आकर बैठ गईं। मम्मी अब रामू के लिंग के ऊपर बैठकर लयबद्ध तरीके से ऊपर-नीचे होने लगीं, जबकि रामू नीचे से अपनी कमर के ज़ोरदार धक्कों से मम्मी को ऊपर की ओर उछाल रहा था।)*

*(तभी कल्लू मम्मी के बिल्कुल बगल में आकर बैठ गया। उसकी आँखों में वासना साफ़ झलक रही थी। मम्मी ने अपना एक हाथ रामू के लिंग के संचालन में लगा रखा था और दूसरे हाथ से कल्लू के मोटे, पसीने से तरबतर लिंग को पकड़ लिया। वे बड़े ही मजे से कल्लू के लिंग को ऊपर-नीचे हिलाने लगीं।)*

*(मम्मी के हाथों की गर्मी और रगड़ महसूस करते ही कल्लू के गले से एक गहरी गुर्राहट निकली। वह अपनी आँखें बंद करके मम्मी के हाथों के स्पर्श का आनंद लेने लगा। उधर, रामू भी नीचे से पूरी ताकत लगाकर मम्मी की कमर को थामे हुए था, ताकि हर धक्का गहरा और असरदार हो।)*

*(मम्मी के चेहरे पर एक शरारती मुस्कान तैर रही थी। उन्होंने एक हाथ से कल्लू के लिंग को हिलाना जारी रखा और दूसरे हाथ से रामू के सीने को सहलाते हुए खिलखिलाकर बोलीं।)*

**मम्मी:** "हाहाहा! सच कह रही हूँ तुम दोनों... अगर तुम्हारे साहब घर पे न होते, तो तुम दोनों मुझे ऐसे ही नंगा रखते और रोज़ मेरी ऐसी ही सेवा करते! कितना मज़ा आता ना?"[Image: 5162041.gif?validfrom=1762923600&validto...2BZk0Wk%3D]

*(मम्मी की बात सुनते ही कल्लू के चेहरे पर एक टेढ़ी मुस्कान आ गई। उसने अपनी उंगलियों से मम्मी के बालों को हल्का सा खींचा और उनके कान के पास झुककर धीमी लेकिन भारी आवाज में बोला।)*

**कल्लू:** "मालकिन... अगर साहब घर पर न होते, तो मैं आपको बिस्तर से उठने तक का मौका नहीं देता। सारा दिन बस आपकी इसी तरह सेवा करता रहता।"

*(रामू, जो नीचे से मम्मी की कमर को मजबूती से पकड़े हुए था, कल्लू की बात सुनकर और भी उत्तेजित हो गया। उसने एक लंबा और गहरा धक्का लगाया जिससे मम्मी के शरीर में एक सिहरन दौड़ गई।)*

**रामू:** "(हांफते हुए) सही कहा कल्लू भाई..."

*(कमरे का माहौल अब पूरी तरह से बेकाबू हो चुका था। रामू ने अपनी उत्तेजना को काबू में नहीं रख पाया और उसने मम्मी के उभरे हुए नितंबों (chutar) को अपने दोनों हाथों से कसकर जकड़ लिया। अब वह अपनी पूरी ताकत और जोश के साथ मम्मी की कमर को ऊपर की ओर खींचते हुए ज़ोरदार धक्के मारने लगा।)*

*(मम्मी, जो पहले से ही चरम सुख की दहलीज पर थीं, अब कल्लू के लिंग को अपने मुँह में भरकर उसे पूरी शिद्दत से चूसने लगीं। उनकी जीभ कल्लू के लिंग के ऊपरी हिस्से पर गोल-गोल घूम रही थी और उनके होंठों का दबाव ऐसा था कि कल्लू का पूरा शरीर थरथराने लगा।)*
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*(कल्लू का गला एक अजीब सी दबी हुई चीख से भर गया जब मम्मी की गर्म जुबान और उनके होंठों का दबाव उसके लिंग के अगले हिस्से पर पड़ा। उसका पूरा शरीर अकड़ गया और उसने बेड की चादर को अपनी मुट्ठियों में कसकर जकड़ लिया।)*

**कल्लू:** "(गहरी और लड़खड़ाती हुई आवाज़ में) आह्ह्ह... मालकिन! आप... आप तो मुझे पागल कर देंगी! आपका मुँह... उफ्फ!"

*(मम्मी ने कल्लू की तड़प को भांप लिया और अपनी चूसने की रफ्तार और बढ़ा दी। वे अब अपने सिर को आगे-पीछे झटकते हुए कल्लू के लिंग को गहराई तक अपने गले में उतारने लगीं, जिससे कल्लू के पेट में एक बिजली सी दौड़ गई।)*

*(दूसरी तरफ, रामू का जोश सातवें आसमान पर था। उसने मम्मी के नितंबों को इतनी जोर से दबाया कि उन पर उसकी उंगलियों के निशान पड़ गए। रामू के हर गहरे धक्के के साथ मम्मी के शरीर की गति और बढ़ रही थी। कमरे में केवल मांस के टकराने की आवाज़ और कल्लू की सिसकियों का शोर गूँज रहा था।)*

**रामू:** "(सांस फूलते हुए और चिल्लाते हुए) आहhh... मम्मी! आप कितनी टाइट हैं..."

*(मम्मी ने जैसे ही कल्लू के लिंग को अपने मुँह से बाहर निकाला, उनके होंठों पर लार की एक चमकदार लकीर थी और उनकी साँसें तेज़ी से चल रही थीं। कल्लू की इस प्रस्ताव वाली बात ने पूरे कमरे की हवा बदल दी। उसने अपनी प्यासी निगाहों से मम्मी के चेहरे को देखा और फिर नीचे रामू की ओर इशारा किया।)*

**कल्लू:** "(भारी और कामुक आवाज़ में) मालकिन... एक रिक्वेस्ट है। क्या मैं आपके गांड में भी अपना लिंग डाल सकता हूँ? सोचिए, आपको एक साथ दो लिंगों का मज़ा आएगा... रामू का लिंग आपकी चुत में और मेरा लिंग आपकी गांड में! आप बीच में फंसकर पूरी तरह से हमारे वश में होंगी।"

*(मम्मी की आवाज़ में डर और उत्तेजना का एक मिला-जुला अहसास था। उन्होंने अपनी आँखें बंद कर लीं और खुद को थोड़ा और ढीला छोड़ दिया, मानो उस नए दर्द और आनंद के लिए तैयार हो रही हों।)*

**मम्मी:** "(धीमी और कांपती हुई आवाज़ में) अच्छा ठीक है... लेकिन कल्लू, ध्यान रखना... बहुत धीरे से डालना... पहली बार है ना..."

*(कल्लू ने मम्मी की इस बात पर एक गहरी और शिकारी जैसी मुस्कान दी। उसने अपना लिंग मम्मी के पिछले रास्ते यानी गांड के द्वार पर टिकाया। वह महसूस कर पा रहा था कि मम्मी का पिछला हिस्सा कितना सख्त और संकुचित है। उसने धीरे से अपना अगला हिस्सा अंदर धकेलना शुरू किया।)*

*(जैसे ही कल्लू ने अपना मोटा लिंग मम्मी के संकुचित गांड के छेद पर दबाव डाला, मम्मी के मुँह से एक तीखी चीख निकल गई। वह दर्द और अनजाने रोमांच के बीच झूल रही थीं। कल्लू ने उनकी चेतावनी याद रखी और बहुत ही सावधानी से, इंच दर इंच अपना हिस्सा अंदर ले जाने लगा।)*

*(रामू, जो सामने से मम्मी की चुत में धक्के मार रहा था, कल्लू की इस हरकत को देखकर और भी ज्यादा उत्तेजित हो गया। उसने मम्मी के नितंबों को और भी जोर से पकड़ लिया ताकि कल्लू को अंदर डालने में आसानी हो।)*

**कल्लू:** "(दांत पीसते हुए और भारी सांस लेते हुए) आह्ह्ह... मालकिन, आपका पिछला रास्ता तो पत्थर जैसा सख्त है... पर मैं इसे खोल ही दूंगा। बस थोड़ा सा और..."


*(दर्द की वो शुरुआती लहर अचानक एक अजीब सी सनसनी में बदल गई। मम्मी को एहसास हुआ कि यह दर्द नहीं, बल्कि एक ऐसा चरम सुख है जो उन्होंने पहले कभी महसूस नहीं किया था। उनके चेहरे पर दर्द की शिकन गायब हो गई और उनकी जगह एक मदहोश कर देने वाली हंसी ने ले ली।)*

**मम्मी:** "(खिलखिलाते हुए और बेकाबू होकर) हाहाहा! ओह मेरे भगवान! यह... यह तो कमाल है! मुझे लगा था दर्द होगा, पर यहाँ तो स्वर्ग मिल रहा है! कल्लू... रामू... तुम दोनों ने तो मुझे पागल कर दिया!"[Image: 19429401.gif?validfrom=1762923600&validt...aYOOxHI%3D]

*(मम्मी की इस हंसी और उनकी बातों ने कल्लू और रामू के भीतर की वासना को आग की तरह भड़का दिया। अब वे दोनों रुकने वाले नहीं थे। मम्मी का शरीर अब पूरी तरह से उन दोनों के नियंत्रण में था।)*

*(रामू ने मम्मी के कमर को अपने हाथों में जकड़ लिया और पूरी ताकत से अपनी चुत के अंदर लिंग को अंदर-बाहर करने लगा। वहीं दूसरी ओर, कल्लू ने भी अपनी गति बढ़ा दी। उसका मोटा लिंग मम्मी की गांड के अंदर रगड़ खाते हुए उन्हें अंदर से भर रहा था।)*

**रामू:** "(हाँफते हुए) आह्ह्ह! मालकिन, आपकी हंसी सुनकर मेरा लिंग और भी सख्त हो गया है! अब देखिए असली मज़ा!"

**कल्लू:** "(गहरी और गूँजती हुई आवाज़ में) हाँ मालकिन!"

*(कमरे का माहौल अब पूरी तरह से वासना और पसीने की महक से भर चुका था। मम्मी का शरीर अब दोनों लड़कों के बीच बुरी तरह से झूल रहा था। उनके मुंह से निकलने वाली आवाजें अब केवल हंसी नहीं, बल्कि बेकाबू होने वाली सिसकियां बन चुकी थीं।)*

*(रामू ने अपनी रफ्तार को एकदम चरम पर पहुँचा दिया। उसके हर धक्के के साथ मम्मी का शरीर बेड पर टकरा रहा था। उधर कल्लू ने भी हार नहीं मानी, उसने मम्मी के कूल्हों को अपने पैरों के बीच फंसा लिया ताकि वह और भी गहराई से प्रहार कर सके।)*

**मम्मी:** "(बेचैनी और खुशी के मिश्रण के साथ चिल्लाते हुए) आह्ह्ह! हाँ! ऐसे ही! रामू... कल्लू... रुको मत! मुझे और चाहिए!"
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*(कल्लू ने अपनी सांसों को काबू में करने की कोशिश की, लेकिन मम्मी के शरीर की गर्मी और उनकी मांग ने उसे और भी उत्तेजित कर दिया था। उसने अपनी गति थोड़ी धीमी की, लेकिन पकड़ ढीली नहीं की। उसने अपना चेहरा मम्मी के कान के पास लाया और गहरी, भारी आवाज़ में फुसफुसाया।)*

**कल्लू:** "(एक शरारती मुस्कान के साथ) अरे मालकिन... आप भी क्या बात करती हैं? हमने तो पहले भी कई बार आपकी गांड में अपना ये काला लंड डाल के आपको चोदा है... तो फिर आज पहली बार कैसे हो सकती है? आपको तो याद होना चाहिए कि हम आपकी गांड के कितने पुराने खिलाड़ी हैं!"

*(मम्मी ने कल्लू की बात सुनकर खिलखिलाते हुए अपना सिर पीछे की ओर झुकाया, जिससे उनके बाल बिखर गए और उनके चेहरे पर एक अलग ही चमक आ गई। उन्होंने अपनी आँखें आधी बंद कीं और कल्लू की ओर देखते हुए प्यार भरी डांट लगाई।)*

**मम्मी:** "अरे पागल, मुझे पता है! मैं तो ये कह रही हूँ कि आज इतने दिनों बाद पहली बार मेरी गांड में लंड जा रहा है, इसीलिए बोली कि धीरे से डालना... काफी दिनों बाद ऐसा हो रहा है ना!"

*(मम्मी की ये बात सुनकर कल्लू और रामू दोनों के चेहरे पर एक शरारती मुस्कान आ गई। कल्लू ने मम्मी की इस मासूमियत और उनकी इच्छा को समझते हुए अपना हाथ उनकी कमर पर और मजबूती से टिका दिया।)*

*(कल्लू ने मम्मी की बात सुनी तो उसकी हँसी छूट गई, लेकिन उसकी आँखों में वासना और बढ़ गई। उसने मम्मी की कमर को ज़ोर से जकड़ लिया और अपना लंड उनके अंदर थोड़ा और गहराई तक उतार दिया।)*

**कल्लू:** "(मज़ाकिया लहजे में) अच्छा! तो मालकिन को इतनी याद आ रही थी हमारी? अब जब इतना इंतज़ार कर लिया है, तो अब धीरे-धीरे कैसे होगा? अब तो पूरा आनंद लेना पड़ेगा!"

*(उधर रामू भी चुप नहीं बैठा था। उसने मम्मी के सीने को अपने हाथों में भर लिया और उनके होंठों को चूमते हुए बोला।)*

*(रामू ने मम्मी के सीने को अपनी हथेलियों में जोर से दबाया, जिससे उनका मांस उंगलियों के बीच दब गया। उसने मम्मी की गर्दन पर अपनी गर्म साँसें छोड़ते हुए बहुत ही कामुक स्वर में कहा।)*

**रामू:** "मालकिन, अगर आपने हमें इतना इंतजार कराया है, तो अब हमें भी तो चैन मिलना चाहिए ना? कल्लू सही कह रहा है... अब तो हम आपकी गांड को पूरी तरह से निचोड़ लेंगे!"

*(इतना कहते ही रामू ने मम्मी के होंठों को बड़े ही बेरहमी और भूख के साथ चूमना शुरू कर दिया। मम्मी की एक लंबी आह निकली और उनका शरीर थरथराने लगा। कल्लू ने भी इसी मौके का फायदा उठाया और मम्मी के पिछले हिस्से पर अपनी पकड़ और मजबूत कर ली।)*

*(कल्लू ने रामू और मम्मी के बीच के उस जुनून को देखकर अपनी गति को और तेज़ कर दिया। उसने मम्मी के कूल्हों को अपने हाथों से ऊपर की ओर खींचा ताकि उसका लंड और भी गहराई से उनकी गांड के अंदर समा सके। कमरे में सिर्फ उनके हाफने की आवाज़ें और बिस्तर के चरचराने की आवाज़ गूँज रही थी।)*

**कल्लू:** "(हाँफते हुए और उत्तेजना में चिल्लाकर) आह्ह्ह! मालकिन... आपका ये पिछवाड़ा सच में कमाल का है! इतने दिनों बाद भी इसमें वही गर्माहट और कसावट है... मेरा तो दिमाग घूम रहा है!"

*(तभी मम्मी ने रामू के गले में अपनी बाहें डाल दीं और रोते हुए जैसी आवाज़ निकाली, जिसमें दर्द कम और सुख ज़्यादा महसूस हो रहा था।)*

*(मम्मी ने रामू के गले में अपनी बाहें कस लीं और कल्लू के झटकों के बीच अपनी आँखें खोलकर दोनों लड़कों को एक गहरी, शरारती नज़र से देखा। उनके चेहरे पर पसीना था और सांसें तेज़ चल रही थीं, लेकिन उनकी बातों में एक अजीब सा सवाल और अधिकार था।)*

**मम्मी:** "(हाँफते हुए और शरारत भरे अंदाज़ में) उफ़्फ़... आह्ह्ह... जब तुम्हारे साहब घर पे थे... तो तुम दोनों आपस में भी एन्जॉय किए होगे ना? सच बताना..."

*(कल्लू ने यह सुनते ही एक ठहाका लगाया, जो उसकी भारी और उत्तेजित आवाज़ में गूँज उठा। उसने मम्मी के शरीर के भीतर अपने लंड की गति को और भी बेतहाशा बढ़ा दिया, जैसे वह उनकी इस बात पर और भी ज़्यादा जोश में आ गया हो।)*

**कल्लू:** "(एक शरारती मुस्कान के साथ और हाँफते हुए) हाँ मालकिन! बिल्कुल सही पकड़ा आपने! जब साहब घर पर होते थे, तो हम दोनों अकेले बोर क्यों होते? हम दोनों एक-दूसरे की गांड मारते थे... मज़ा आता था बहुत!"

*(यह सुनकर रामू भी मुस्कुराने लगा और उसने मम्मी के कान के पास झुककर अपनी जीभ फेरते हुए कहा।)*

*(रामू ने मम्मी के कान के निचले हिस्से को अपने दांतों से हल्का सा काट लिया, जिससे मम्मी के शरीर में एक सिहरन दौड़ गई। उसने अपनी उंगलियां मम्मी के बालों में फंसाईं और अपनी आवाज़ को और भी गहरा करते हुए बोला।)*

**रामू:** "बिल्कुल मालकिन! कल्लू का लंड जब मेरी गांड में जाता था, तो कसम से कलेजा मुँह को आ जाता था... पर फिर तुम्हारी याद आती थी, तो हम दोनों मिलकर तुम्हें ही याद करते थे कि कब साहब जाएंगे और कब हम तुम्हारा ये सुहाना शरीर पाएंगे।"

*(मम्मी की इस बात ने कमरे के माहौल को एकदम बदल दिया। उनकी आँखों में एक नई तरह की प्यास और हुक्म देने वाली चमक आ गई। उन्होंने कल्लू के कंधे पर अपना हाथ रखा और उसे इशारा किया, मानो वो उन्हें कोई नया खेल खेलने का आदेश दे रही हों।)*

**मम्मी:** "(अपनी आवाज़ में एक अजीब सा नशा लाते हुए) उफ़्फ़... अच्छा? तो तुम दोनों को एक दूसरे के साथ खेलना पसंद है? ठीक है... कल्लू, अब तुम रामू की गांड मारो... और रामू, तुम मेरी चूत को चाटो! मुझे देखना है कि तुम दोनों मिलकर मुझे कितना सुख दे सकते हो!"

*(मम्मी के आदेश मिलते ही कल्लू और रामू की आँखों में एक जंगलीपन छा गया। कल्लू ने तुरंत मम्मी के शरीर से खुद को अलग किया और बिना एक पल गंवाए रामू की तरफ झपटा। उसने रामू को बिस्तर पर उल्टा लिटाया और उसके कूल्हों को हवा में उठाकर अपनी पोजीशन बना ली। दूसरी तरफ, रामू ने मम्मी के पैरों को फैलाया और पूरी तड़प के साथ उनके गीले अंगों की ओर बढ़ गया।)*

**कल्लू:** "(गुस्से और कामुकता के मिश्रण वाली आवाज़ में) जैसा आप कहें मालकिन! आज तो मैं रामू की ऐसी गांड मारूँगा कि इसे सारा हिसाब याद आ जाएगा! तैयार हो जा छोटे, आज तेरा बाप तुझे चैन नहीं लेने देगा!"
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