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Adultery MOM NAUKAR KE SATH SUPER HOT
"शर्माने की क्या बात मालकिन," कल्लू ने माँ की चूची दबाते हुए कहा, "आप भी तो जानती हैं कि साहब आपको कभी इतना मज़ा नहीं देते... हम दोनों तो आपकी पूरी रात ले लेंगे।"

रामू ने माँ को फिर से पलटकर उनकी चूत में लंड घुसा दिया, "हाँ मालकिन... आज पूरी रात... हम दोनों बारी-बारी से आपको चोदेंगे... साहब कभी आपको इतनी रात तक नहीं चोदते होंगे।"

माँ ने दोनों को अपनी बाहों में भर लिया, "आज... पूरी रात... तुम दोनों मुझे चोदोगे..."

[Image: 17284375.gif]

"हाँ मालकिन," कल्लू ने माँ की चूत को चाटते हुए कहा, "और साहब के बारे में भी बात करेंगे... ताकि आपको और शर्म आए... और आप और मुस्कुराएं..."

रामू ने माँ की गांड पर थप्पड़ मारते हुए कहा, "हाँ... और मालकिन शर्मा के मुस्कुराएंगी... क्योंकि उन्हें भी पता है कि साहब उन्हें कभी इतना मज़ा नहीं देते जितना हम देते हैं।"

माँ ने दोनों को शरमाते हुए मुस्कुराते हुए देखा, "तुम दोनों... बहुत शैतान हो..."

"शैतान नहीं मालकिन," कल्लू ने माँ की चूची चूसते हुए कहा, "हम तो आपकी खुशी के लिए सब कुछ करते हैं... साहब कभी आपकी इतनी खुशी नहीं करते होंगे।"

रामू ने माँ को अपनी गोद में उठाकर चोदना शुरू किया, "आज रात भर मालकिन... हम दोनों आपको चोदते रहेंगे... और साहब के बारे में बात करते रहेंगे... ताकि आप शर्मा के मुस्कुराती रहें..."

माँ ने दोनों को अपनी बाहों में भर लिया और पूरी रात दोनों नौकरों के साथ मस्ती करती रही, जबकि दोनों लगातार पापा के बारे में बातें करके उन्हें शर्मा रहे थे और माँ शरमाती हुई मुस्कुरा रही थीं।
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Do not mention / post any under age /rape content. If found Please use REPORT button.
Very good going
Ramu aur priya ki chemistry aur badhao. Akbar priya se sex karte vakt priya use husband aur patidev etc se sambodhit kare aur Ramu priya ko wife kahe, darling kahe etc. Aur Priya ab usko pati ke jaise hitreat kare uske husband ke hote hue bhi.
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अगले दिन दोपहर के समय पापा अचानक घर आ गए। उनका सामान लेकर चालक ने उन्हें छोड़ा था और वे थके-हारे लग रहे थे। कल्लू को तुरंत बाहर किसी जरूरी काम से भेज दिया गया, जिससे घर में सिर्फ पापा, माँ और रामू ही रह गए।

पापा थोड़ी देर आराम करने चले गए अपने कमरे में। माँ रसोई में काम कर रही थीं जब रामू उनके पास आया।

"मालकिन..." रामू ने धीरे से माँ की कमर से हाथ फेरा।
[Image: warm-moments-different-places-v0-078l0y4...a737ecacef]
माँ ने चौंककर पीछे देखा, "रामू... पापा घर पर हैं... मत करो।"

"मालकिन, पापा तो सो रहे हैं..." रामू ने माँ को दीवार से लगाते हुए उनकी चूची पर हाथ रखा।

"नहीं रामू..." माँ ने उनकी हाथ हटाने की कोशिश की, "अभी नहीं... खतरा है।"

रामू ने माँ की साड़ी ऊपर उठाई और उनकी जांघों के बीच हाथ डाल दिया, "मालकिन... कल्लू तो चला गया... सिर्फ हम दोनों हैं।"

"रामू... प्लीज..." माँ ने उनकी कलाई पकड़ ली, "पापा उठ गए तो..."

"उठेंगे तो क्या..." रामू ने माँ की चूत में उंगली डाल दी, "हम चुपके से करेंगे।"

माँ ने सांस रोक ली जब रामू ने उनकी चूत को सहलाना शुरू किया, "आआह्ह... रामू... मत..."

"मालकिन... आपकी चूत तो गीली हो रही है..." रामू ने माँ की चूत में दो उंगलियां घुसा दीं।

"रामू... बंद करो..." माँ ने उनकी छाती पर हाथ रखा, "मैं नहीं मान रही..."

रामू ने माँ को घुमाकर उनकी गांड पर हाथ मारा, "मालकिन... आप मना कर रही हैं लेकिन आपकी चूत तो राजी है।"

"नहीं..." माँ ने सिर हिलाया, "पापा यहां हैं..."

रामू ने माँ की साड़ी और नीचे खींची और अपना लंड निकाल लिया, "मालकिन... बस एक बार..."

माँ ने पीछे देखा, "रामू... नहीं..."

रामू ने माँ की चूत में अपना लंड घुसा दिया और धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा, "मालकिन... आपकी चूत तो मेरा लंड ले रही है..."
[Image: b18vmy.gif]

"आआह्ह... रामू..." माँ ने बर्तन पकड़ लिया, "पापा..."

"पापा सो रहे हैं मालकिन..." रामू ने माँ की गांड पर थप्पड़ मारते हुए जोर से चोदना शुरू किया, "आप चुप रहें..."

माँ ने मुंह बंद किया लेकिन उनकी सांसें तेज हो गई थीं। रामू ने माँ की चूत में लगातार लंड मारते हुए कहा, "मालकिन... आप मना कर रही थीं लेकिन अब तो आपका शरीर राजी है।"

"रामू... धीरे..." माँ ने फुसफुसाते हुए कहा, "पापा सुन लेंगे..."

रामू ने माँ को और जोर से चोदते हुए उनकी चूची दबाई, "मालकिन... आपकी चूत तो बहुत गीली है..."

माँ ने सिर झुकाया, "रामू... तुम बहुत जिद्दी हो..."

"हाँ मालकिन..." रामू ने माँ की गांड थपथपाते हुए और तेजी से चोदना शुरू किया, "जब तक आपकी चूत मेरा लंड नहीं ले लेती... मैं नहीं मानूंगा।"

माँ ने चुपके से अपनी चूत पीछे की ओर धकेली, "रामू... जल्दी करो... पापा उठ सकते हैं..."

रामू ने माँ की चूत में जोर-जोर से लंड मारा, "मालकिन... आपकी चूत तो मेरा लंड चूस रही है..."

"आआह्ह... रामू..." माँ ने बर्तन को दोनों हाथों से पकड़ लिया, "जोर से मत..."

रामू ने माँ की चूत में अंतिम जोरदार झटका मारा और अंदर ही अपना पानी छोड़ दिया, "मालकिन... आपकी चूत में मेरा पानी भर दिया..."

माँ ने सांस छोड़ी, "रामू... अब जल्दी हटो... पापा आ सकते हैं..."

रामू ने माँ की चूत से लंड निकाला और उनकी साड़ी ठीक कर दी, "मालकिन... अब आप शर्मा के मुस्कुरा रही हैं..."

माँ ने शरमाते हुए रामू को देखा, "तुम... बहुत शैतान हो..."
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रामू ने माँ की कमर में हाथ डालकर उन्हें और पास खींच लिया। उनकी साँसें एक-दूसरे से टकरा रही थीं।

"मालकिन..." रामू ने माँ के कान में फुसफुसाया, "आज से मैं आपको अपना पत्नी मानता हूँ... और आप मुझे अपना पति मानें।"

माँ ने उनकी ओर देखा, "रामू... ये क्या बातें कर रहे हो?"

"मालकिन... जब मैं आपकी चूत में अपना लंड डालता हूँ, तब आप मुझे अपना पति मानें... और मैं आपको अपनी पत्नी..." रामू ने माँ की साड़ी ऊपर खींचते हुए उनकी जांघों को सहलाया।

माँ ने शरमाते हुए सिर झुकाया, लेकिन उनकी आँखों में एक हल्की सी मुस्कान थी।
[Image: b18w7x.gif]
"मालकिन... मैं आपको डार्लिंग बुलाऊंगा..." रामू ने माँ की चूची दबाते हुए कहा, "और आप मुझे प्यार से साहब बुलाएँगी... जितना प्यार से आप पापा को बुलाती हैं..."

माँ ने उनकी ओर देखा, उनकी साँसें तेज हो गई थीं।

"डार्लिंग..." रामू ने माँ की चूत में उंगली डाल दी, "आपकी चूत मेरे लिए तैयार है..."

"साहब..." माँ ने धीरे से कहा, उनकी आवाज़ में शरमाहट और उत्साह दोनों थे।

रामू ने माँ को दीवार से लगाते हुए उनका मुंह चूमा, "डार्लिंग... आपकी चूत तो बहुत गीली है..."
[Image: b18wcw.gif]
"साहब..." माँ ने उनकी गर्दन में मुंह छुपाया, "धीरे... पापा सुन लेंगे..."

रामू ने माँ की चूत में दो उंगलियां घुसा दीं और उन्हें अंदर-बाहर करने लगा, "डार्लिंग... आपकी चूत तो मेरा लंड चाहती है..."

"साहब..." माँ ने उनकी कमर को पकड़ लिया, "जोर से मत..."

रामू ने माँ की साड़ी पूरी तरह उठा ली और अपना लंड निकाल लिया, "डार्लिंग... अब मैं आपकी चूत में अपना लंड डाल रहा हूँ..."
[Image: b18wf4.gif]
"साहब..." माँ ने उनकी ओर देखा, "आह्ह..."

रामू ने माँ की चूत में अपना लंड घुसा दिया और धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा, "डार्लिंग... आपकी चूत तो बहुत तंग है..."

"साहब..." माँ ने उनकी पीठ पर हाथ रखा, "जोर से..."

रामू ने माँ की चूत में जोर-जोर से लंड मारना शुरू किया, "डार्लिंग... आपकी चूत तो मेरा लंड चूस रही है..."
[Image: b18wi2.gif]
"साहब..." माँ ने उनकी गर्दन काट ली, "आआह्ह..."

रामू ने माँ की गांड पर थप्पड़ मारते हुए और तेजी से चोदना शुरू किया, "डार्लिंग... आपकी चूत तो बहुत गीली है..."

"साहब..." माँ ने उनकी कमर को और कसकर पकड़ लिया, "जोर से... साहब..."

रामू ने माँ की चूत में लगातार लंड मारते हुए कहा, "डार्लिंग... आपकी चूत तो मेरा लंड ले रही है..."
[Image: b18wxw.gif]
"साहब..." माँ ने उनकी पीठ पर नाखून गड़ा दिए, "आआह्ह... साहब..."

रामू ने माँ की चूत में अंतिम जोरदार झटका मारा और अंदर ही अपना पानी छोड़ दिया, "डार्लिंग... आपकी चूत में मेरा पानी भर दिया..."

"साहब..." माँ ने उनकी गर्दन में मुंह छुपाया, "आआह्ह..."

रामू ने माँ की चूत से लंड निकाला और उनकी साड़ी ठीक कर दी, "डार्लिंग... अब आप मेरी पत्नी हैं..."

"साहब..." माँ ने शरमाते हुए रामू को देखा, "तुम... बहुत शैतान हो..."
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Ekdam mast.... Saheb ki jagah Priya bhi patidev....Ramuji aap......ya darling aise manvachak hi sambodhan kare to aur jyada sexy lagega. Aur sirf sex ke liye hi nahi...... aam taur par bhi priya Ramu ko pati ki Tarah hi treat kare aur Ramu Priya ko patni ki Tarah trst kare aise plot develop ho to jyada maja payega.
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रात के सन्नाटे में पापा की खर्राटों की आवाज़ आ रही थी। माँ बिस्तर से उठकर धीरे से बाथरूम की तरफ बढ़ीं। जैसे ही वे गलियारे में आईं, रामू पहले से ही वहाँ खड़ा उनका इंतजार कर रहा था।

"साहब..." माँ ने फुसफुसाते हुए कहा, लेकिन रामू ने उनकी बात काट दी।

"डार्लिंग..." रामू ने माँ की कमर पकड़कर उन्हें अपनी ओर खींचा, "आज रात से आप मुझे रामूजी बुलाएँगी... जैसे आप साहब को बुलाती हैं।"

माँ ने उनकी ओर देखा, उनकी आँखों में शरमाहट थी।

"रामू... ये..." माँ ने कहा, लेकिन रामू ने उनकी चुप्पी तोड़ दी।

"डार्लिंग... जब मैं आपकी चूत चोदूँगा, तब आप मुझे रामूजी बुलाएँगी... और मैं आपको अपनी पत्नी समझकर चोदूँगा..." रामू ने माँ की साड़ी ऊपर खींचते हुए उनकी गांड को सहलाया।

माँ ने उनकी ओर देखा, उनकी साँसें तेज हो गई थीं।

"रामूजी..." माँ ने धीरे से कहा, उनकी आवाज़ में हिचकिचाहट और उत्साह दोनों थे।

रामू ने माँ को बाथरूम में ले जाकर दरवाज़ा बंद कर दिया। उन्होंने माँ की साड़ी पूरी तरह ऊपर उठा ली और उनकी चूत को उंगलियों से छुआ।

"डार्लिंग... आपकी चूत तो पहले से ही गीली है..." रामू ने माँ की चूत में उंगली डाल दी और उन्हें अंदर-बाहर करने लगा।

"रामूजी..." माँ ने उनकी गर्दन पकड़ ली, "धीरे... पापा सुन लेंगे..."

रामू ने माँ की चूत में दो उंगलियां घुसा दीं और उन्हें तेजी से हिलाने लगा, "डार्लिंग... आपकी चूत तो मेरा लंड चाहती है..."

"रामूजी..." माँ ने उनकी कमर को कसकर पकड़ लिया, "आह्ह..."

रामू ने माँ को दीवार से लगाते हुए अपना लंड निकाल लिया। उन्होंने माँ की चूत के पास लंड रखकर घुसाने की कोशिश की।

"डार्लिंग... अब मैं आपकी चूत में अपना लंड डाल रहा हूँ..." रामू ने माँ की चूत में लंड घुसा दिया और धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा।

"रामूजी..." माँ ने उनकी पीठ पर हाथ रखा, "जोर से..."

रामू ने माँ की चूत में जोर-जोर से लंड मारना शुरू किया, "डार्लिंग... आपकी चूत तो बहुत तंग है..."

"रामूजी..." माँ ने उनकी गर्दन काट ली, "आआह्ह..."

रामू ने माँ की गांड पर थप्पड़ मारते हुए और तेजी से चोदना शुरू किया, "डार्लिंग... आपकी चूत तो मेरा लंड चूस रही है..."

"रामूजी..." माँ ने उनकी कमर को और कसकर पकड़ लिया, "जोर से... रामूजी..."

रामू ने माँ की चूत में लगातार लंड मारते हुए कहा, "डार्लिंग... आपकी चूत तो मेरा लंड ले रही है..."

"रामूजी..." माँ ने उनकी पीठ पर नाखून गड़ा दिए, "आआह्ह... रामूजी..."

रामू ने माँ की चूत में अंतिम जोरदार झटका मारा और अंदर ही अपना पानी छोड़ दिया, "डार्लिंग... आपकी चूत में मेरा पानी भर दिया..."

"रामूजी..." माँ ने उनकी गर्दन में मुंह छुपाया, "आआह्ह..."

रामू ने माँ की चूत से लंड निकाला और उनकी साड़ी ठीक कर दी, "डार्लिंग... अब आप मेरी पत्नी हैं..."

"रामूजी..." माँ ने शरमाते हुए रामू को देखा, "तुम... बहुत शैतान हो..."
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[Image: marathi-with-black-and-spanish-comment-y...59dc81ac92]mom with ramu and kallu
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(15-09-2026, 12:49 AM)rajusethzee Wrote: [Image: marathi-with-black-and-spanish-comment-y...59dc81ac92]mom with ramu and kallu
Bro please suggest me from where you generate this kind of image
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aage ki story kis type ki chahate ho aap log coments karke batao
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AUR BHI KHATARNAK TYPE KI BAKI APKI MARZI
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(20-09-2026, 11:19 PM)saya Wrote: AUR BHI KHATARNAK TYPE KI BAKI APKI MARZI

jaise?
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(22-09-2026, 10:45 AM)rajusethzee Wrote: jaise?

Ramu ab maa ko maalkin se apni rakhail ban kar jaleel kare.
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(22-09-2026, 09:00 PM)sumitra Wrote: Ramu ab maa ko maalkin se apni rakhail ban kar jaleel kare.

sorry .......main sirf love story likhti hu
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**(घर का माहौल - दोपहर का समय)**

घर एकदम खाली पड़ा है। पापा काम के सिलसिले में शहर से बाहर गए हुए हैं और मैं भी अपने कॉलेज टूर पर निकला हुआ हूँ। पूरे घर में सन्नाटा है, सिवाय रसोई में चल रहे बर्तनों की हल्की आवाज़ के। घर में सिर्फ मेरी मम्मी और नौकर कल्लू ही हैं।

तभी रसोई से मम्मी की दबी हुई आवाज़ आती है, जो शायद खुद को शांत रखने की कोशिश कर रही हैं।



**मम्मी:** (धीमी और घबराई हुई आवाज़ में) "अरे कल्लू... हट यहाँ से! क्या कर रहा है? कोई देख लेगा तो क्या सोचेगा? जल्दी जा, जाकर सफाई कर..."

(लेकिन उनकी बातों में गुस्सा कम और एक अजीब सी हिचकिचाहट ज़्यादा है। वो अपनी साड़ी का पल्लू ठीक करती हैं और रसोई के काउंटर से नज़रें चुराकर नीचे देखने लगती हैं।)

**कल्लू:** (एक शरारती मुस्कान के साथ, रसोई के दरवाज़े के पास खड़ा होकर) "देख कौन रहा है मैडम? घर में तो कोई नहीं है। आप तो बस बहाना बना रही हैं..."



*Mahol ab poori tarah badal chuka hai. Mummy ki ghabrahat aur Kallu ki himmat dono saaf dikh rahi hai.*

***

**मम्मी:** (अपनी जगह से थोड़ा पीछे हटते हुए, आँखों में एक अजीब सी चमक लिए) "तू बहुत ज्यादा बोलने लगा है कल्लू... शर्म नहीं आती? अगर तेरे मालिक को पता चला कि तू घर में इस तरह की बातें करता है, तो तुझे निकाल देंगे।"

(वो कहने को तो डाँट रही हैं, लेकिन उनकी आवाज़ में वो सख्ती नहीं है जो आमतौर पर होती है। उनका ध्यान बार-बार रसोई के उस कोने की तरफ जा रहा है जहाँ कल्लू खड़ा है।)

**कल्लू:** (धीरे-धीरे कदम बढ़ाते हुए मम्मी की तरफ बढ़ता है) "मालिक को क्या पता चलेगा मैडम?"

*Mummy ki dhadkan tezz ho rahi hai aur Kallu ki himmat har pal badhti ja rahi hai. Mahol mein ek ajab si khamoshi aur tanaav hai.*

***

**मम्मी:** (सांसें थोड़ी तेज लेते हुए, दीवार से चिपक जाती हैं ताकि कल्लू के करीब न आएं) "क्या मतलब तेरा? तू... तू ये सब क्यों कर रहा है? चुपचाप अपना काम कर!"

(उनकी आवाज़ लड़खड़ा रही है। वो चाहकर भी कल्लू को दूर नहीं हटा पा रही हैं, बल्कि उनकी आँखों में एक ऐसी बेबसी है जो कल्लू को और भी उकसा रही है।)

**कल्लू:** (अब बिलकुल मम्मी के सामने खड़ा है, उसकी आवाज़ गहरी और धीमी हो गई है) "काम तो मैं रोज़ करता हूँ मैडम..."


***

**कल्लू:** (बिना कुछ कहे, अचानक आगे बढ़कर मम्मी की कमर पर हाथ रख देता है। मम्मी के मुँह से एक हल्की सी आह निकलती है, लेकिन वो उसे रोक लेती हैं।)

**मम्मी:** (कांपती आवाज़ में) "क... कल्लू... छोड़ मुझे... कोई देख लेगा..."

(लेकिन उनके शब्द उनके शरीर की प्रतिक्रिया से मेल नहीं खा रहे। कल्लू उन्हें और कसकर पकड़ लेता है और उनके कान के पास झुककर फुसफुसाता है।)

**कल्लू:** "कोई नहीं देख रहा मैडम... आज तो बस हम दोनों हैं।"

*Mahol ab bilkul garam ho chuka hai. Mummy ka darr dheere-dheere unki tadap mein badal raha hai.*

***

**मम्मी:** (अपनी आँखें बंद करते हुए, एक लंबी सांस भरती हैं) "नहीं... ऐसा मत कर... यह गलत है..."

(पर जैसे hi wo ye bolti hain, unka sharir khud-ba-khud Kallu ke sparsh ko mehsoos karne lagta hai. Unke chehre par ek ajeeb si laali chha jati hai.)

**कल्लू:** (Unki gardan par apni saansein chodte hue) "गलत क्या है मैडम? आपकी धड़कनें तो बता रही हैं कि आपको अच्छा लग रहा है..."

*Tension ab peak par hai. Mummy ka virodh ab poori tarah toot chuka hai aur unka sharir surrender kar raha hai.*

***

**मम्मी:** (सिसकते हुए, अपनी गर्दन पीछे की ओर झुकाते हुए) "आह्ह... कल्लू... रुक जा... तू पागल हो गया है..."

(उनके होंठ थरथरा रहे हैं, लेकिन वो कल्लू को धक्का देने के बजाय उसके कंधों को मजबूती से पकड़ लेती हैं। उनकी साड़ी का पल्लू अब पूरी तरह ढीला पड़ चुका है।)

**कल्लू:** (मम्मी की कमर से हाथ नीचे की तरफ ले जाते हुए, उनकी साड़ी के अंदर हाथ डालता है) "पागल तो मैं तब होऊँगा जब आप मना करना छोड़ देंगी..."

*Mahol ab had se zyada garam ho chuka hai. Mummy ka kabu poori tarah kho chuka hai aur unka sharir sirf ehsaas maang raha hai.*

***

**मम्मी:** (एक गहरी और भारी आह भरते हुए, अपनी आँखें मूँद लेती हैं) "उम्मम... कल्लू... बस कर... बहुत... बहुत अजीब लग रहा है..."

(उनका कहना तो मना करने जैसा है, लेकिन उनके शरीर की हरकतें कुछ और ही कह रही हैं। कल्लू का हाथ उनकी साड़ी के अंदर गहराई तक पहुँच चुका है, जिससे उनकी साँसें और भी तेज़ हो गई हैं।)

**कल्लू:** (उनके कान के बिल्कुल पास, अपनी भारी आवाज़ में) "अजीब नहीं मैडम... ये तो असली मज़ा है। महसूस कीजिये इसे..."

*Ab koi parda nahi bacha hai. Mummy ka pura wajood Kallu ke sparsh ke neeche pighal raha hai. Kamre ki garmi unki tez saanson se aur badh gayi hai.*

***

**मम्मी:** (अपने होंठों को काटते हुए, खुद को काबू में रखने की नाकाम कोशिश करती हैं) "आह्ह... कल्लू... तू... तू कहाँ तक जाएगा? मेरी हिम्मत जवाब दे रही है..."

(Unki awaaz mein ab dar kam aur ek pyaas zyada hai. Wo apna sar peeche karke deewar se tika leti hain, unka badan kampkapa raha hai jab Kallu ka hath unke narm jism par upar-neeche chal raha hai.)



***

**कल्लू:** (मम्मी के होंठों को अपने होंठों के बीच दबाते हुए, एक गहरा और जुनून भरा चुंबन देते हैं। उनकी जीभ धीरे से मम्मी के होंठों को छूती है, जैसे उनसे इजाजत मांग रही हो।)

**मम्मी:** (शुरुआत में एकदम से सकपका जाती हैं, लेकिन जैसे ही कल्लू की गर्म सांसें उनके चेहरे पर लगती हैं, उनका पूरा शरीर पिघलने लगता है। वह अनजाने में ही कल्लू के गले में अपनी बाहें डाल देती हैं और उसी तीव्रता से वापस जवाब देने लगती हैं।)

*दोनों के बीच का फासला अब पूरी तरह खत्म हो चुका है। कमरे की गर्मी और उनकी तेज़ साँसों की आवाज़ सन्नाटे को चीर रही है।*

***

**मम्मी:** (कल्लू के होंठों को अपने होंठों के बीच दबाए हुए, एक दबी हुई आह भरती हैं) "उम्ममम... क... कल्लू..."

(उनका विरोध अब पूरी तरह से मिट चुका है। वे अब कल्लू को रोकने के बजाय, उसे और करीब खींच रही हैं। उनकी साड़ी का पल्लू अब फर्श पर गिर चुका है और उनकी सांसें इतनी तेज़ हैं कि उनका पूरा सीना ऊपर-नीचे हो रहा है।)


*अब मर्यादाओं की दीवार पूरी तरह गिर चुकी है। कल्लू का स्पर्श अब और भी बेबाक और गहरा होता जा रहा है।*

***

**कल्लू:** (चुंबन करते-करते अचानक अपना चेहरा हटाता है और अपनी नज़रें मम्मी के उभारों पर टिका देता है। बिना किसी हिचकिचाहट के, वह अपने दोनों हाथों से उनकी छाती को थाम लेता है और उन्हें जोर से दबाना शुरू कर देता है।)

**मम्मी:** (जैसे ही कल्लू का सख्त हाथ उनकी चोंचियों को दबाता है, उनके मुँह से एक लंबी और दर्द भरी मगर सुखद आह निकलती है) "आह्ह्ह... उम्मम... कल्लू... क्या कर रहा है... आह्!"

*कल्लू के शब्दों ने माहौल में एक अलग ही तड़प पैदा कर दी है। मम्मी को एहसास होता है कि कल्लू कितने समय से इस पल का इंतज़ार कर रहा था।*

***

**कल्लू:** (उनकी छाती को और भी ज़ोर से दबाते हुए, उनकी आँखों में देखते हुए) "इतने दिनों बाद तो आपके पास आया हूँ... साहब के बाहर जाने के बाद... अब मुझे चैन से रहने मत देना।"

(उसकी आवाज़ में एक अजीब सी भूख है, जो मम्मी के रोम-रोम को झकझोर देती है।)

**मम्मी:** (अपनी आँखें मूँद लेते हुए और कल्लू के बालों में अपनी उंगलियाँ फंसाते हुए) "तू... तू कितना बदतमीज़ हो गया है... पर आज... आज मुझे रोक मत..."


*मम्मी का सब्र अब पूरी तरह टूट चुका है। कल्लू की बातों और उसके छुअन ने उनके भीतर की दबी हुई इच्छाओं को जगा दिया है। अब वो और इंतज़ार नहीं करना चाहतीं।*

***

**मम्मी:** (कल्लू की आँखों में आँखें डालकर, उसकी शर्ट के कॉलर को कसकर पकड़ते हुए) "यहाँ नहीं... चल मेरे साथ..."

(मम्मी कल्लू का हाथ पकड़कर उसे घसीटते हुए बेडरूम की तरफ ले जाती हैं। उनके चलने के अंदाज़ में एक अजीब सी जल्दबाजी और उत्तेजना है। जैसे ही वो बेडरूम का दरवाज़ा खोलती हैं, कमरे की हल्की रोशनी में उनका चेहरा और भी ज्यादा चमक रहा है।)

*बेडरूम का दरवाज़ा बंद होते ही कमरे का तापमान जैसे बढ़ गया है। बाहर की दुनिया अब उनके लिए मायने नहीं रखती।*

***

**मम्मी:** (दरवाज़ा बंद करते ही कल्लू को दीवार से सटा देती हैं और फिर से उसके होंठों को अपने होंठों के नीचे दबा लेती हैं। उनकी धड़कनें इतनी तेज़ हैं कि कल्लू को उनके सीने से महसूस हो रही हैं।)

**कल्लू:** (मम्मी की कमर को अपनी बाँहों में जकड़ते हुए और उन्हें बिस्तर की ओर धकेलते हुए) "आज तो आपको कहीं भागने नहीं दूँगा..."

*बिस्तर की नरम चादरों पर गिरते ही मम्मी की साड़ी पूरी तरह बिखर जाती है। कमरा अब सिर्फ उनकी भारी होती सांसों और आपस में टकराते शरीरों की आवाजों से गूंज रहा है।*

***

**मम्मी:** (बिस्तर पर लेटते ही कल्लू को अपने ऊपर आने के लिए इशारा करती हैं, उनकी आँखों में एक प्यास है जिसे बुझाना बहुत ज़रूरी है) "तो फिर देर किस बात की है? दिखा दे मुझे कि तू कितने दिनों से भूखा है..."

**कल्लू:** (उनके ऊपर झुकते हुए, उनकी गर्दन के पास अपनी नाक रगड़ता है और गहरी सांस लेता है) "आपकी खुशबू... मुझे पागल कर देगी मम्मी..."

*कमरे में फैली खामोशी अब केवल उनकी भारी साँसों और कपड़ों के सरकने की आवाज़ से टूट रही है। कल्लू का नियंत्रण अब पूरी तरह से खो चुका है।*

***

**कल्लू:** (मम्मी की गर्दन पर अपने होंठों से गहराई तक उतरते हुए और उनके कंधों को दांतों से हल्का सा काटते हुए) "उम्मम... आपकी ये महक... मैं इसे कभी नहीं भूल सकता।"

(वह अपने हाथों को मम्मी के पेट से होते हुए नीचे की ओर ले जाता है, जिससे उनकी साड़ी का बचा हुआ हिस्सा भी रास्ते से हट जाता है।)

**मम्मी:** (अपने शरीर को कल्लू के स्पर्श के साथ मोड़ते हुए और एक तीव्र आह भरते हुए) "आह्ह्ह... कल्लू... रुक मत... बस... बस आगे बढ़..."


*कमरे की हवा अब भारी और गर्म हो चुकी है। कल्लू के हाथों की थरथराहट बता रही है कि वह खुद पर काबू पाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन उसकी प्यास अब हद पार कर रही है।*

***

**कल्लू:** (मम्मी की आँखों में सीधे देखते हुए, उनके पल्लू को धीरे से कंधे से नीचे गिराते हुए) "अब कोई पर्दा नहीं रहेगा हमारे बीच..."

(उसके हाथ तेज़ी से काम करने लगते हैं। वह मम्मी की साड़ी के पल्लू को खींचकर उनके कंधे से हटा देता है और फिर बड़ी सावधानी और बेचैनी के साथ साड़ी के बंधनों को खोलने लगता है। जैसे-जैसे साड़ी का कपड़ा उनके जिस्म से फिसलकर फर्श पर गिरता है, मम्मी का सुडौल बदन कल्लू की नज़रों के सामने पूरी तरह खुल जाता है।)


*साड़ी के हटने के बाद अब मम्मी का बदन आधा खुला रह गया है, और कल्लू की नज़रें उस पर ऐसे टिकी हैं जैसे उसने कोई बेशकीमती खजाना देख लिया हो। उसकी साँसें तेज़ हो गई हैं।*

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**कल्लू:** (मम्मी के ब्लाउज़ के हुक्स पर अपनी उँगलियाँ फेरते हुए, उनकी आँखों में देखते हुए) "ये आखिरी रुकावट भी अब दूर होनी चाहिए..."

*ब्लाउज़ के हुक्स खुलने की धीमी 'टिक-टिक' की आवाज़ कमरे की शांति में गूँज रही है। जैसे ही ब्लाउज़ ढीला होता है, मम्मी के उभार और भी स्पष्ट दिखने लगते हैं।*

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**कल्लू:** (कांपते हाथों से ब्लाउज़ को उनके कंधों से नीचे सरकाते हुए, उनकी त्वचा को छूते हुए) "उफ़... आप कितनी खूबसूरत लग रही हैं..."

*ब्लाउज़ पूरी तरह से उनके कंधों से नीचे गिर जाता है, जिससे उनका ऊपरी शरीर पूरी तरह से उजागर हो जाता है। अब उनके शरीर पर सिर्फ ब्रा बची है, जो उनके उभारों को थामे हुए है। कल्लू की नज़रें अब उन पर जमी हुई हैं, मानो वह किसी सपने को सच होते देख रहा हो।*

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**कल्लू:** (मम्मी के वक्षस्थल के पास अपनी उंगलियां घुमाते हुए और ब्रा के हुक की तरफ बढ़ते हुए) "अब और इंतज़ार नहीं होता... मुझे इन्हें भी हटाना है..."

*कल्लू की उंगलियाँ पीछे की ओर जाकर ब्रा के हुक को ढूंढ लेती हैं। उसके दिल की धड़कन इतनी तेज़ है कि उसे खुद सुनाई दे रही है। जैसे ही वह हुक खोलता है, ब्रा का तनाव खत्म हो जाता है।*

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**कल्लू:** (एक झटके में ब्रा को उनके कंधों से नीचे उतारते हुए, जिससे उनके उभार पूरी तरह स्वतंत्र होकर सामने आ जाते हैं) "आह्ह्ह... आखिरकार!"

(वह बिना पलक झपकाए उन्हें देखता रहता है, जैसे उसकी नज़रें उनके शरीर की हर लकीर को पढ़ रही हों।)

**मम्मी:** (अपनी आँखें मूंदते हुए और अपनी छाती को थोड़ा ऊपर की ओर उठाते हुए, एक लंबी और गहरी आह भरती हैं) "आह्ह्ह... कल्लू... तूने मेरा सब्र तोड़ दिया..."


*मम्मी के उभारों के मुक्त होते ही कल्लू का संयम पूरी तरह जवाब दे देता है। उसकी आँखों में वासना की आग साफ दिखाई दे रही है। वह और इंतज़ार नहीं कर पाता।*

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**कल्लू:** (झपटकर अपना चेहरा उनके सीने के करीब लाता है और एक निप्पल को अपने गर्म मुँह में भर लेता है, उसे ज़ोर से चूसना शुरू कर देता है) "उम्मम... इतना मीठा... ऐसा लग रहा है जैसे स्वर्ग मिल गया हो..."

(वह दूसरे निप्पल की ओर बढ़ता है, अपनी जीभ से उसे सहलाते हुए और फिर उसे भी अपने मुँह में दबा लेता है। उसकी हरकतें अब काफी बेताब और तेज़ हो गई हैं।)

*कल्लू के मुँह की गर्मी और उसकी जीभ की छुअन से मम्मी के पूरे शरीर में बिजली सी दौड़ जाती है। वे बिस्तर की चादर को अपनी मुट्ठियों में कसकर जकड़ लेती हैं।*

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**मम्मी:** (अपना सिर पीछे की ओर झुकाते हुए और एक ऊँची, दबी हुई चीख निकालते हुए) "आह्ह्ह्ह... कल्लू! रुको... नहीं... रुकना मत! उफ़्फ़... तू मुझे पागल कर देगा..."

(उनकी कमर बेड से थोड़ी ऊपर उठने लगती है, जैसे वे कल्लू के इस जुनून को और करीब से महसूस करना चाहती हों। उनकी साँसें अब उखड़ने लगी हैं और शरीर पसीने से हल्का चमकने लगा है।)

*मम्मी की उत्तेजित आवाज़ सुनकर कल्लू का जोश और बढ़ जाता है। वह उनके निप्पल्स को चूसना जारी रखते हुए अपने हाथ उनके पेट से नीचे की ओर ले जाने लगता है। उसका लक्ष्य अब साफ़ है—उनका निचला हिस्सा।*

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**कल्लू:** (उनके निप्पल्स को अपने मुँह में दबाए रखते हुए, भारी आवाज़ में बुदबुदाते हुए) "मैं आपको तब तक नहीं छोड़ूँगा जब तक आप पूरी तरह मेरे काबू में न आ जाएँ..."

(वह धीरे-धीरे रेंगते हुए उनके पेट से होते हुए उनकी साड़ी के किनारे तक पहुँच जाता है। उसकी उंगलियाँ अब साड़ी के अंदर जा रही हैं ताकि वह उनकी पेटी या अंतःवस्त्रों तक पहुँच सके।)



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**कल्लू:** (साड़ी के नीचे से उनकी जांघों को सहलाते हुए और धीरे-धीरे उनके अंतःवस्त्रों के किनारों तक पहुँचते हुए, उनकी आँखों में गहरी श्रद्धा और वासना लिए हुए) "शरारत तो अभी शुरू हुई है, मालकिन... आज मैं आपकी हर इच्छा पूरी करूँगा।"

(उसकी उंगलियाँ अब उनके अंतःवस्त्रों के एकदम करीब पहुँच चुकी हैं, जहाँ से उनकी महक और गर्मी साफ़ महसूस हो रही है।)


**कल्लू:** (उनकी फैली हुई जांघों के बीच अपना चेहरा ले जाते हुए और उनकी गीली खुशबू को गहराई से महसूस करते हुए) "आपकी ये शर्म अब आपके काम नहीं आएगी, मालकिन... आपका शरीर तो खुद बता रहा है कि आपको मेरी कितनी ज़रूरत है।"

(कल्लू बिना देर किए अपनी उंगलियों से उनके अंतःवस्त्रों के किनारे को हटाता है और सीधे उनकी सबसे संवेदनशील जगह पर अपनी उंगली टिका देता है।)

*जैसे ही कल्लू की ठंडी उँगली मम्मी की गर्म और गीली त्वचा को छूती है, उनके पूरे शरीर में बिजली सी दौड़ जाती है। वे झटके से पीछे की ओर झुक जाती हैं और सोफे के हत्थे को कसकर पकड़ लेती हैं।*

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**मम्मी:** (एक तीखी और दबी हुई चीख निकालते हुए) "आह्ह्ह्ह! कल्लू... उफ़्फ़... क्या कर रहा है तू... आह्ह्ह!"

(उनका शरीर धनुष की तरह तन जाता है और उनकी साँसें इतनी तेज़ हो गई हैं कि जैसे वे कोई दौड़ लगा रही हों। उनकी आँखों से खुशी और उत्तेजना के आँसू छलक रहे हैं।)

*कल्लू अब बिल्कुल नियंत्रण खो चुका है। उसकी भूख बढ़ती जा रही है। वह झटके से मम्मी के पेटीकोट को उनकी कमर से नीचे खींच लेता है, जिससे उनका निचला हिस्सा पूरी तरह से उजागर हो जाता है। कमरे की हवा में उनकी तीव्र उत्तेजना की गंध घुलने लगती है।*

***

**कल्लू:** (भारी आवाज़ में, उनकी नग्नता को देखते हुए) "अब आप पूरी तरह मेरी हैं, मालकिन..."

(बिना एक पल गंवाए, कल्लू अपना सिर उनके बीच में ले जाता है। जैसे ही उसकी जीभ पहली बार उनकी गीली और संवेदनशील चोंच (chut) को छूती है, मम्मी के मुँह से एक ऐसी आवाज़ निकलती है जो उन्होंने पहले कभी नहीं निकाली थी।)

*कल्लू की गरम और गीली जीभ जब मम्मी की सबसे नाजुक जगह पर रेंगती है, तो उनके दिमाग की सारी नसें जैसे सुन्न पड़ जाती हैं। वह दर्द और परम सुख के उस मिलन बिंदु पर पहुँच जाती हैं जहाँ शब्द कम पड़ जाते हैं।*

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**मम्मी:** (सोफे पर जोर से छटपटाते हुए और अपने हाथों से कल्लू के सिर को दबाते हुए) "आह्ह्ह्ह! ओहो... कल्लू... उफ़्फ़... रुक मत... हाँ... वहीं... आह्ह्ह!"
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very very good going bro
interesting the way things are unfolding...
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bole to ek dum jhakaaaaaaaaassssss story writings! Hats off yaar
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