Posts: 1,817
Threads: 10
Likes Received: 1,003 in 559 posts
Likes Given: 446
Joined: Jun 2021
Reputation:
17
15-08-2026, 10:57 AM
(This post was last modified: 16-08-2026, 10:31 AM by maitripatel. Edited 1 time in total. Edited 1 time in total.)
Kya is kahani ko SAMAPT ghoshit kar deni chahiye?
Ya aapke comments ki pratiksha karu?
•
Posts: 1,817
Threads: 10
Likes Received: 1,003 in 559 posts
Likes Given: 446
Joined: Jun 2021
Reputation:
17
चलिए दोस्तों कहानी को थोडा सा आगे ले जाती हूँ!
Chaliye dosto kahaani ko thoda sa aage le jaati hu.
•
Posts: 1,817
Threads: 10
Likes Received: 1,003 in 559 posts
Likes Given: 446
Joined: Jun 2021
Reputation:
17
बाबाजी ने अपनी मोटी आवाज़ में कहा,
“और रही बात ऋचा की पढ़ाई की, तो तुम इसकी चिंता मत करो मयूरी। कोष में आने वाले पैसों से उसकी आगे की पढ़ाई पूरी हो जाएगी। मैं तुम्हें कहता हूँ, इसे मना मत करना। ऊपर वाले को यही मंजूर है कि तुम्हारी बेटी उच्च शिक्षा प्राप्त करे। इसे एहसान मत समझना। जब भी तुम्हारे पास कुछ पैसे हों, कोष में डाल देना। ऋण उतर जाएगा।”
बाबाजी की बात सुनते ही मयूरी की आँखों में आँसू छलक आए। वह भाव-विभोर होकर आगे बढ़ी और उनके पैरों में झुक गई। बाबाजी ने मुस्कुराते हुए अपना दाहिना हाथ उसके कंधे पर रखा, फिर धीरे-धीरे नीचे सरकाकर उसकी कमर पर टिका दिया। उँगलियाँ उसकी ब्रा की पट्टी को महसूस करते हुए रगड़ने लगीं। मयूरी का मांसल, परिपक्व शरीर उनकी स्पर्श के नीचे थरथरा उठा, लेकिन वह कुछ नहीं बोली। मैत्री की प्रस्तुति।
“ऋचा, बेटा, इधर आ,” मयूरी ने अपनी बेटी को पुकारा,
“बाबाजी के पैर छू। उनके आशीर्वाद से अब तुझे किसी बात की चिंता नहीं करनी है। तू आगे पढ़ सकेगी, सपने पूरे कर सकेगी।”
ऋचा धीरे से आगे आई। अठारह साल की यह नाजुक-सी लड़की अपनी माँ के ठीक उलट थी - दुबली-पतली, कोमल, अभी-अभी खिलने वाली। उसके स्तन अभी-अभी उभरकर छोटे-छोटे उभार लेने लगे थे, कूल्हे हल्के से गोलाई पकड़ रहे थे। वह झुककर बाबाजी के पैर छूती है तो उसके लंबे काले बाल उनके घुटनों पर बिखर गए।
बाबाजी ने पहली बार उसे इस नजर से देखा। उनका हाथ धीरे से उसके सिर पर पड़ा, बालों में उँगलियाँ फिराईं। फिर उनकी नजर उठकर मयूरी के भारी, छलकते उरोजों पर टिक गई। वे दोनों माँ-बेटी को एक साथ देख रहे थे - एक परिपक्व, रस भरा शरीर, दूसरा कोमल और ताज़ा। उनके मन में एक गहरी, अंधेरी लालसा जाग उठी। और वह चक्षु चोदन करने लगे।
“जय बाबा,” दोनों ने कहा और प्रसाद लेकर लौटने लगीं।
जाते-जाते मयूरी ने ऋचा को थोड़ा आगे भेज दिया और वापस लौट आई। उसने धीमी, कंपकंपी वाली आवाज़ में कहा, “बाबाजी… इन्होंने (पति) जो भी आपके सामने हमारे बारे में कहा है, उसके बारे में मैं कल दोपहर को विस्तार से बात करना चाहती हूँ। इसी समय आउंगी।”
बाबाजी की आँखों में चमक आ गई। उन्होंने सिर्फ़ सिर हिलाया।
जैसे ही दोनों चली गईं, बाबाजी के होंठों पर एक विजयी मुस्कान फैल गई।
“पहले पूजा… अब मयूरी… और अगर यह माँ-बेटी दोनों मिल जाएँ तो…” उन्होंने मन ही मन सोचा। लेकिन अभी तो उनके कमरे में पूजा इंतजार कर रही थी। पूरी तरह नंगी। चुदने के लिए तैयार। मैत्री की रचना।
बाबाजी ने दरवाज़ा खोला तो अंदर का दृश्य देखकर उनका लंड धोती के अंदर ही फड़क उठा।
पूजा नहाकर निकली थी। उसकी पीठ उनकी तरफ थी। वह झुकी हुई थी, अपनी जाँघों और पिंडलियों से पानी पोंछ रही थी। नहाने के बाद उसकी चिकनी, गेहुँआन त्वचा पर पानी की बूँदें अभी भी चमक रही थीं। उसकी मोटी, गोल, भरी-भरी गांड इस मुद्रा में और भी उभरकर बाहर निकल आई थी - दो बड़े, निचले, लुभावने गोले। ठीक उसके गुदा द्वार के नीचे उसकी चूत के मोटे, रस से भीगे होंठ ऊपर से नीचे की तरफ़ खुलकर दिख रहे थे। कुछ पानी की बूँदें और कुछ उसकी अपनी उत्तेजना की चिपचिपी बूँदें धीरे-धीरे निकल रही थीं।
बाबाजी की सहनशक्ति टूट गई।
वे झपटे। पीछे से झुककर अपना चेहरा सीधे उसके दोनों जाँघों के बीच धकेल दिया। उनकी गर्म, मोटी जीभ एक ही झटके में पूजा की चूत के भीतर तक घुस गई।
“आह्ह्ह…!” पूजा चौंककर काँप उठी। उसके घुटने थरथरा गए। लेकिन अगले ही पल जब बाबाजी की जीभ उसके रस से लबालब सागर में डुबकियाँ लगाने लगी, तो उसके पूरे शरीर में बिजली दौड़ गई। वह मचल उठी, पीछे हटकर अपनी भारी गांड को और जोर से उनके मुँह पर दबा दिया।
“बाबाजी… उफ्फ्… धीरे…” उसकी आवाज़ में वासना और समर्पण दोनों थे।
बाबाजी ने दोनों हाथों से उसके मोटे नितंबों को फैलाया और पूरी तन्मयता से चूसने-चाटने लगे। उनकी जीभ कभी उसकी चूत के अंदर गहराई तक जाती, कभी क्लिटोरिस को तेज़ी से चाटती। पूजा के मुँह से अनियंत्रित कराहें निकलने लगीं। उसका शरीर पसीने से तर हो रहा था।
कुछ ही देर बाद बाबाजी उठे, अपनी धोती उतारी और अपना मोटा, खड़ा लोडा पूजा की भीगी चूत पर रगड़ने लगे…
************************************************.
जुड़े रहिये दोस्तों।
मैत्री पटेल.
•
Posts: 1,817
Threads: 10
Likes Received: 1,003 in 559 posts
Likes Given: 446
Joined: Jun 2021
Reputation:
17
पूजा की साँसें तेज़ हो चुकी थीं। उसका पूरा शरीर पसीने और उत्तेजना से चमक रहा था। बाबाजी की जीभ की नम और गर्म स्पर्श से उसकी चूत अभी भी सिहर रही थी।
“उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़… बाबाजी… क्या कर रहे हो आप…?” पूजा की आवाज़ काँप रही थी, “बता तो दिया करो… मेरी चूत को ऐसे अचानक हमलों की आदत नहीं है।” प्रस्तुतकर्त मैत्री।
बाबाजी ने नीचे से मुस्कुराते हुए, अपनी दाढ़ी में चमकते उसके रस को चाटते हुए कहा, “अरे पूजा रानी… अब तो इन हमलों की आदत डाल लो। मुझे तो शिकार को अचानक दबोचकर खाने का शौक है। शिकार जब बेखबर हो, तब जो मजा आता है, वो दुगना होता है। देखो न, तुम्हारी चूत से कितनी रसीली चाशनी निकल रही है, मेरी जीभ को तृप्त कर रही है।”
बाबाजी ने अपने पैर आगे फैला लिए और अपने भारी-भरकम शरीर को गीले फर्श पर टिका दिया। उन्होंने दोनों हाथ ऊपर उठाकर पूजा के दो विशाल, भारी कलशों को अपनी मुट्ठियों में कैद कर लिया। उनमें से रिसता हुआ दूधिया अमृत उनके मुँह पर गिर रहा था। वे लालच भरी तृप्ति से उसे पीने लगे।
पूजा ने अपनी कमर हिलाकर पूरा भार बाबाजी के चेहरे पर डाल दिया। अब वह उनकी जीभ और मुँह पर पूरी तरह विराजमान थी- जैसे बाबाजी का मुँह कोई सिंहासन हो। उसकी मोटी, गर्म गांड उनके चेहरे पर दब रही थी।
बाबाजी की जीभ साँप की तरह फन फैलाकर पूजा की शहद भरी डिबिया के अंदर तक घुस रही थी। हर बार जब उनकी जीभ अंदर-बाहर होने लगती, पूजा के मुँह से अनियंत्रित कराह निकल जाती। और जब बाबाजी ने उसके फूले हुए क्लिट को अपने होंठों में कैद करके जोर-जोर से चूसना शुरू किया, तो पूजा पागल हो गई।
“अह्ह्ह्ह्ह्ह… बाबाजी जी… उmmmmm… हाँ… हाँ… आप कितने निपुण हैं काम-क्रिया में… अह्ह्ह्ह… ऐसा एहसास आज तक कभी नहीं हुआ… और जोर से… और जोर से चूसो मुझे… मुझे निगल जाओ बाबाजी… जॆऎए… अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह…”
पूजा अब बोलने की हालत में नहीं रही थी। उसका पूरा शरीर तनकर काँपने लगा। बाबाजी ने उसके क्लिट को नींबू की तरह निचोड़कर उसका अंतिम रस पी लिया। पूजा का शरीर एक तेज़ कम्पन के साथ झड़ गया। उसकी चूत से गरम, पारदर्शी रस की धार बाबाजी के मुँह, दाढ़ी और गले पर बाढ़ की तरह बह निकली। वह शिथिल होकर उनके चेहरे पर ढेर हो गई।
लेकिन बाबाजी अभी रुकने वाले नहीं थे।
उन्होंने पूजा को घुमाकर अपनी छाती की तरफ लाया, अपने शरीर को पूरी तरह फर्श पर बिछा लिया और अपना मोटा, नसों से उभरा हुआ लंड महाराज उसकी अभी भी सिकुड़ रही, रस से लथपथ चूत पर रख दिया। संपादिका फनलवर है।
एक जोरदार, गहरा और बेरहम झटका।
“आआआह्ह्ह्ह्ह…!” पूजा की आँखें उबल पड़ीं। बाबाजी का मोटा लंड एक ही धक्के में आधी लंबाई तक उसके अंदर समा गया। उसकी चूत की दीवारें तनकर फैल गईं। अभी वह अपने पिछले ऑर्गेज्म से उभर भी नहीं पाई थी कि यह नया हमला उसे फिर से उन्माद की दुनिया में ले गया।
पूजा ने झुककर बाबाजी के रस से भीगे होंठों को अपने मुँह में ले लिया। वह उन्हें चूसने लगी - अपने ही मीठे रस का स्वाद लेते हुए। नीचे से बाबाजी ने तेज़-तेज़ धक्के मारने शुरू कर दिए। हर धक्के के साथ पूजा की मोटी गांड थिरक रही थी। उसके भारी स्तन बाबाजी के चेहरे पर पानी के गुब्बारों की तरह टकरा रहे थे।
“अह्ह्ह्ह्ह… ओह्ह्ह्ह पूजा… कितना चिकना और गर्म है तेरा शरीर…” बाबाजी कराहे, “मन करता है अपनी सारी साधना अब तेरे इस दिव्य शरीर को समर्पित करके करूँ… अह्ह्ह्ह… तेरी फुद्दी चूसकर आज मैंने अमृत पी लिया है… और ये चूचियाँ… उफ्फ्… कितनी रसीली हैं…”
इतना कहकर बाबाजी ने पूजा के एक बोबले को दोनों हाथों से दबाया और पूरा मुंह खोलकर उसे चूसने लगे। दाँत हल्के-हल्के गड़ाते हुए, जीभ से चकती हुए।
पूजा अब पूरी तरह पागल हो चुकी थी। वह अपनी कमर हिलाकर बाबाजी के लंड को और गहराई तक ले रही थी। कमरे में चूत और लंड की चप-चप की आवाज़, दोनों की कराहें और मांस-मांस की टकराहट का शोर गूँज रहा था।
******************************................................................
जुड़े रहिये दोस्तों।
कहानी जारी है।
Maitri Patel.
•
Posts: 1,817
Threads: 10
Likes Received: 1,003 in 559 posts
Likes Given: 446
Joined: Jun 2021
Reputation:
17
पूजा बाबाजी की प्रशंसा सुनकर मन ही मन खिल उठी। एक स्त्री के लिए अपने शरीर की इतनी कच्ची और लालच भरी तारीफ पाकर उसके अंदर का नारीत्व संतुष्ट हो रहा था। उसने दोनों हाथों से अपने भारी, दूध से भरे बोब्लो को थोड़ा और ऊपर उठाया और बाबाजी के चेहरे को अपनी छातियों में पूरी तरह दबा दिया - जैसे कोई नवजात शिशु माँ के स्तन से लिपटा हो। और उसे अपना दूध पिला रही हो। प्रस्तुतकर्ता मैत्री है।
“चूसिए बाबाजी… जितना मन करे…” पूजा ने काँपती आवाज़ में कहा।
बाबाजी ने लालच भरी तृप्ति से एक-एक करके दोनों बोब्लो के निपल को मुँह में भरा, दाँतों से हल्का-हल्का काटा, जीभ से चक्ती हुई चूसने लगे। साथ ही नीचे उनकी कमर तेज़ी से ऊपर-नीचे होने लगी। उनके मोटे लंड का मर्दन पूजा की चूत में और भी जोरदार हो गया। कमरे में चमड़ी की चप-चप, पसीने की छप-छप और दोनों की दबी हुई कराहों का मिश्रित संगीत गूँज रहा था।
गाड़ी पूरी चरम सीमा पर दौड़ रही थी।
अंत में बाबाजी ने जोर से कराहते हुए अपना पूरा गाढ़ा, गरम रस पूजा की रसीली चूत की गहराई में उड़ेल दिया। उनकी गोटियाँ सिकुड़कर खाली हो गईं। पूजा भी उनके ऊपर लुढ़क गई, दोनों एक-दूसरे से चिपके पड़े रहे।
कुछ देर बाद बाबाजी ने साँस लेते हुए कहा, “अह्ह्ह्ह पूजा… मजा आ गया। सच में तुम काम की मूरत हो। तुम जितने दिन तक इन सुखों से वंचित रही, मैं उसकी पूरी भरपाई करूँगा। अब से हर रोज़… दुगना, तिगुना मजा दूँगा।” लेखिका फनलव के साथ मैत्री।
पूजा शर्म और आनंद से मुस्कुराई। वह नीचे सरकी और बाबाजी के अभी भी अर्ध-खड़े, अपने ही रस से चिपचिपे लंड को मुँह में ले लिया। उसने पूरी निष्ठा से उसे चूसा, साफ़ किया, जीभ से हर बूँद तक पी ली।
फिर दोनों नंगे ही उठे और बाथरूम में घुस गए। वहाँ गर्म पानी के नीचे एक-दूसरे को साबुन लगाते, चूमते, सहलाते रहे। नहाकर पूजा ने कपड़े पहने, बालों में उँगलियाँ फिराईं और पीछे वाले दरवाज़े से निकलकर तेज़ी से अपने घर की ओर चल दी।
हमेशा की तरह आज भी किसी ने उसे जाते हुए नहीं देखा।
*****
रात के नौ बज चुके थे।
सभी पूजा-पाठ और आश्रम के कामकाज से निवृत्त होकर बाबाजी जैसे ही अपने कक्ष में पहुँचे, पीछे वाले दरवाज़े पर हल्की दस्तक हुई। वे मुस्कुराए, समझ गए की गोपाल ही होगा।
दरवाज़ा खोला तो गोपाल अंदर सरक गया। उसकी सब्ज़ी वाली रेहड़ी बाहर ही खड़ी थी। हाथ में शराब की बोतल और कागज़ के लिफाफे में नमकीन-भुजिया।
दोनों अंदर बैठ गए। गोपाल ने चुपचाप दो गिलास बनाए। पहला, दूसरा, तीसरा… पीते गए।
हमेशा की तरह दो गिलास के बाद गोपाल की ज़बान खुल गई। आज वह पहले से ज़्यादा नशे में और बड़बड़ा रहा था।
“बाबाजी जी… आप कितने सुखी हो। अकेले रहते हो, कोई टोकने वाला नहीं। घर-गृहस्थी के बंधनों से आज़ाद। और देखो मुझे… बीबी तो है, पर उसका सुख नहीं मिलता। साली, कुतिया अपने पास फटकने भी नहीं देती। बोलती है, ‘बेटी बड़ी हो गई है, शराब पीकर मत आया करो, अब ये सब शोभा नहीं देता।“
गोपाल ने एक और घूँट लिया और तीखे स्वर में बोला,
“अरे बाबाजी जी… एक आदमी पूरा दिन मेहनत करके जब घर आता है तो उसे सिर्फ़ दो ही चीज़ों की तमन्ना होती है - एक दारू, दूसरी अपनी बीबी की चूत। पर यहाँ तो साली दोनों के लिए मना कर देती है। अब आप ही बताइए बाबाजी… मैं क्या करूँ?”
बाबाजी चुपचाप सिप लेते रहे। उनकी आँखों में एक गहरी चमक थी। वे गोपाल की हर शिकायत का आनंद ले रहे थे। संपादिका फनलव है।
जब गोपाल थोड़ा रुका तो बाबाजी धीरे से बोले, “मैं समझ सकता हूँ गोपाल… तुम्हें कितनी तकलीफ़ होती होगी जब मयूरी भाभी तुम्हें अपनी चू…”
बाबाजी जी “चूत” शब्द कहते ही रुक गए। उन्होंने जानबूझकर रुककर गोपाल का चेहरा देखा।
गोपाल नशे में झूमते हुए बोला, “हाँ… चूत… बोलिए ना। आजकल तो यह शब्द भी सुनने को नहीं मिलता।”
बाबाजी ने गिलास रखा और थोड़ा आगे झुककर गंभीर स्वर में कहा, “गोपाल… मयूरी अच्छी स्त्री है। लेकिन वो भी औरत है। उसे भी प्यार चाहिए, ध्यान चाहिए, और हाँ… शरीर का सुख भी चाहिए। शायद तुम उसे वो नहीं दे पा रहे हो जिसकी उसे ज़रूरत है।”
गोपाल ने निराश स्वर में पूछा, “तो अब मैं क्या करूँ बाबाजी?”
************************************...
आज के लिए बस यही तक।
अगला एपिसोड आपके कोमेंट्स आने के बाद तुरंत।
तब तक मैत्री पटेल की तरफ से जय भारत।।
•
Posts: 1,817
Threads: 10
Likes Received: 1,003 in 559 posts
Likes Given: 446
Joined: Jun 2021
Reputation:
17
Chaliye dosto upar ke teeno updates ko HINGLISH me padhte hai.
•
Posts: 1,817
Threads: 10
Likes Received: 1,003 in 559 posts
Likes Given: 446
Joined: Jun 2021
Reputation:
17
Babaji ne apni moti awaaz mein kaha,
"Aur rahi baat Richa ki padhai ki, toh tum iski chinta mat karo Mayuri. Kosh mein aane wale paison se uski aage ki padhai poori ho jayegi. Main tumhein kehta hoon, ise mana mat karna. Upar wale ko yahi manzoor hai ki tumhari beti ucch shiksha praapt kare. Ise ehsaan mat samajhna. Jab bhi tumhare paas kuch paise hon, kosh mein daal dena. Rin utar jayega." Produced by Maitri.
Babaji ki baat sunte hi Mayuri ki aankhon mein aansoo chhalak aaye. Woh bhaav-vibhor hokar aage badhi aur unke paeron mein jhuk gayi. Babaji ne muskurate hue apna daahina haath uske kandhe par rakha, phir dheere-dheere neeche sarakaakar uski kamar par tika diya. Ungliyan uski bra ki patti ko mehsoos karte hue ragadne lagi. Mayuri ka maansal, paripakv sharir unke sparsh ke neeche thar-thara utha, lekin woh kuch nahi boli.
"Richa, beta, idhar aa," Mayuri ne apni beti ko pookara,
"Babaji ke pair chhoo. Unke aashirwad se ab tujhe kisi baat ki chinta nahi karni hai. Tu aage padh sakegi, sapne poore kar sakegi."
Richa dheere se aage aayi. Atharah saal ki yeh naazuk-si ladki apni maa ke theek ulat thi - dublipatli, komal, abhi-abhi khilne wali. Uski sutan abhi-abhi ubharkar chhote-chhote ubaar lene lage the, kulle halke-se golai pakad rahe the. Woh jhukkar Babaji ke pair chhooti hai toh uske lambe kaale baal unke ghutnon par bikhhar gaye.
Babaji ne pehli baar use is nazar se dekha. Unka haath dheere se uske sar par pada, baalon mein ungliyan phiraaen. Phir unki nazar uthkar Mayuri ke bhaari, chhalakte urojon par tik gayi. Woh donon maa-beti ko ek saath dekh rahe the - ek paripakv, ras bhara sharir, doosra komal aur taza. Unke man mein ek gehri, andheri laalsa jag uthi. Aur woh chakshu chodan karne lage.
"Jai Baba," donon ne kaha aur prasad lekar lautne lagi. Maitri ki rachana.
Jaate-jaate Mayuri ne Richa ko thoda aage bhej diya aur wapas laut aayi. Usne dheemi, kampkampi wali awaaz mein kaha, "Babaji… Inhonne (pati) jo bhi aapke saamne hamare baare mein kaha hai, uske baare mein main kal dopahar ko vistaar se baat karna chahti hoon. Isi samay aaoongi."
Babaji ki aankhon mein chamak aa gayi. Unhonne sirf sir hilaya.
Jaise hi donon chali gayin, Babaji ke hothon par ek vijayi muskuraan phail gayi.
"Pehle Pooja… ab Mayuri… aur agar yeh maa-beti donon mil jaayein toh…" unhonne man hi man socha. Lekin abhi toh unke kamre mein Pooja intezaar kar rahi thi. Poori tarah nangi. Chudne ke liye taiyaar.
Babaji ne darwaza khola toh andar ka drishya dekhkar unka land dhoti ke andar hi phadak utha.
Pooja nahakar nikli thi. Uski peeth unki taraf thi. Woh jhuki hui thi, apni jaanghon aur pindliyon se paani ponchh rahi thi. Nahane ke baad uski chikni, gehuwan tvacha par paani ki boonden abhi bhi chamak rahi thi. Uski moti, gol, bhari-bhari gaand is mudra mein aur bhi ubharkar baahar nikal aayi thi - do bade, nichele, lubhaavne gole. Theek uske guda dwaar ke neeche uski choot ke mote, ras se bheege hoth upar se neeche ki taraf khulkar dikh rahe the. Kuch paani ki boonden aur kuch uski apni uttejana ki chipchipi boonden dheere-dheere nikal rahi thin. Funlover.
Babaji ki sahanashakti toot gayi.
Whe jhapate. Peechhe se jhukkar apna chehra seedhe uske donon jaanghon ke beech dhakel diya. Unki garm, moti jeeb ek hi jhatke mein Pooja ki choot ke bheetar tak ghus gayi.
"Aahhh…!" Pooja chaukkan kar kaanp uthi. Uske ghutne tharthara gaye. Lekin agle hi pal jab Babaji ki jeeb uske ras se laba-lab saagar mein dubkiyan lagane lagi, toh uske poore sharir mein bijli daud gayi. Woh machal uthi, peechhe hatkar apni bhaari gaand ko aur zor se unke munh par daba diya.
"Babaji… uff… dheere…" uski awaaz mein vaasna aur samarpan donon the.
Babaji ne donon haathon se uske mote nithambon ko phailaaya aur poori tanmayata se choosne-chaatne lage. Unki jeeb kabhi uski choot ke andar gehrai tak jaati, kabhi clitoris ko tezi se chaatti. Pooja ke munh se aniyaantrit karahen nikalne lagi. Usska sharir paseene se tar ho raha tha.
Kuch hi der baad Babaji uthe, apni dhoti utaari aur apna mota, khada loda Pooja ki bheegi choot par ragadne lage…
************************************************.
Jude rahiye dosto.....
Maitri Patel.
•
Posts: 1,817
Threads: 10
Likes Received: 1,003 in 559 posts
Likes Given: 446
Joined: Jun 2021
Reputation:
17
Pooja ki saansein tez ho chuki thin. Usska poora shariar paseene aur uttejana se chamak raha tha. Babaji ki jeebh ki namm aur garm sparsh se usski choot abhi bhi sihar rahi thi. Rachayita Maitri aur Funlover hai.
"Ufffffffff… Babaji… kya kar rahe ho aap…?" Pooja ki awaaz kaamp rahi thi, "Bata toh diya karo… meri choot ko aise achaanak hamlon ki aadat nahi hai."
Babaji ne neeche se muskurate hue, apni daadhi mein chamakte uske ras ko chaate hue kaha, "Are Pooja Rani… ab toh in hamlon ki aadat daal lo. Mujhe toh shikaar ko achaanak dabochkar khaane ka shauk hai. Shikaar jab bekhabar ho, tab jo maza aata hai, woh dugna hota hai. Dekho na, tumhari choot se kitni raseeli chashni nikal rahi hai, meri jeebh ko tript kar rahi hai."
Babaji ne apne pair aage phaila liye aur apne bhaari-bharkam shariar ko giley farsh par tika diya. Unhone dono haath upar uthaakar Pooja ke do vishaal, bhaari kalshon ko apni mutthiyon mein kaid kar liya. Unmein se rista hua dudhiya amrit unke muh par gir raha tha. Woh laalach bhari tripti se use peene lage.
Pooja ne apni kamar hilaakar poora bhaar Babaji ke chehre par daal diya. Ab woh unki jeebh aur muh par poori tarah viraajman thi- jaise Babaji ka muh koi sinhaasan ho. Uski moti, garm gaand unke chehre par dab rahi thi.
Babaji ki jeebh saamp ki tarah phan phailaakar Pooja ki shahad bhari dibiya ke andar tak ghus rahi thi. Har baar jab unki jeebh andar-bahar hone lagti, Pooja ke muh se aniyantrit karaah nikal jaati. Aur jab Babaji ne uske phoole hue clit ko apne hothon mein kaid karke zor-zor se choosna shuru kiya, toh Pooja pagal ho gayi. Sampaadika Funlve hai.
"Ahhhhhhhh… Babaji ji… Ummmmm… haan… haan… aap kitne nipun hain kaam-kriya mein… ahhhhhh… aisa ehsaas aaj tak kabhi nahi hua… aur zor se… aur zor se chooso mujhe… mujhe nigal jaao Babaji… jeaee… ahhhhhhhhh…"
Pooja ab bolne ki haalat mein nahi rahi thi. Usska poora shariar tankar kaampne laga. Babaji ne uske clit ko neemboo ki tarah nichodkar usska antim ras pee liya. Pooja ka shariar ek tez kampan ke saath jhad gaya. Uski choot se garm, paardarshi ras ki dhaar Babaji ke muh, daadhi aur gale par baadh ki tarah bah nikli. Woh shithil hokar unke chehre par dher ho gayi.
Lekin Babaji abhi rukne wale nahi the.
Unhone Pooja ko ghumakar apni chhati ki taraf laaya, apne shariar ko poori tarah farsh par bicha liya aur apna mota, nason se ubhra hua land maharaj uski abhi bhi sikud rahi, ras se lathpath choot par rakh diya.
Ek zordar, gehra aur beraham jhatka.
"Aaaaahhhhh…!" Pooja ki aankhen ubal padi. Babaji ka mota land ek hi dhakke mein aadhi lambaai tak uske andar sama gaya. Uski choot ki deewarein tankar phail gayin. Abhi woh apne pichle orgasm se ubhar bhi nahi paai thi ki ye naya hamla use phir se unmad ki duniya mein le gaya.
Pooja ne jhukkar Babaji ke ras se bhege hothon ko apne muh mein le liya. Woh unhe choosne lagi - apne hi meethe ras ka swaad lete hue. Neeche se Babaji ne tez-tez dhakke maarna shuru kar diye. Har dhakke ke saath Pooja ki moti gaand thirak rahi thi. Uske bhaari stan Babaji ke chehre par paani ke gubaaron ki tarah takra rahe the.
"Ahhhhhh… Ohhhhh Pooja… kitna chikna aur garm hai tera shariar…" Babaji karahe, "Man karta hai apni saari saadhna ab tere is divya shariar ko samarpit karke karoon… ahhhhhh… teri phuddi chooskar aaj maine amrit pee liya hai… aur ye choochiyan… ufff… kitni raseeli hain…"
Itna kahkar Babaji ne Pooja ke ek boble ko dono haathon se dabaya aur poora munh kholkar use choosne lage. Daant halke-halke gadaate hue, jeebh se chakti hue. Patel ki rachana.
Pooja ab poori tarah pagal ho chuki thi. Woh apni kamar hilaakar Babaji ke land ko aur gehraai tak le rahi thi. Kamre mein choot aur land ki chap-chap ki awaaz, dono ki karaahein aur maans-maans ki takrahat ka shor goonj raha tha.
***********************************************************.......................
Jude rahiye dosto aage baaki hai......
Maitri Patel.
•
Posts: 1,817
Threads: 10
Likes Received: 1,003 in 559 posts
Likes Given: 446
Joined: Jun 2021
Reputation:
17
Pooja, Babaaji ki prashansa sunkar dimag ke andar hi khil uthi. Ek stri ke liye apne sharir ki itni kacchi aur laalach bharoli tariyaaf paakar uske andar ka naaritv santusht ho raha tha. Usne dono haathon se apne bhaari, doodh se bhare boobs ko thoda aur upar uthaya aur Babaaji ke chehre ko apne chestiyon mein poori tarah dabaa diya - jaise koi navajaat shishu maa ke sthan se lipat ho aur usse apna doodh pilaa rahi ho. Maitri ki rachna.
"Chusiye Babaaji... jitna man kare..." Pooja ne kaanthi awaaz mein kaha.
Babaaji ne laalach bharool trupti se ek-ek karke dono boobs ke nipples ko muh mein bhara, daanton se halka-halka kaata, jewish se chakti hui chusne lage. Saath hi neeche unki kamar tezi se upar-neeche hone lagi. Unke mote land ka mardan Pooja ki choot mein aur bhi jor-daar ho gaya. Kamre mein chhadri ki chap-chap, paseene ki chhap-chap aur dono ki dabi hui kaahaon ka mishrit sangit gunj raha tha.
Gaadi poori charam seema par daud rahi thi.
Ant mein Babaaji ne zor se kaahate hue apna poora gahara, garam ras Pooja ke rasile choot ki gehraai mein udaal diya. Unki gotiyan sikudkar khaali ho gayin. Pooja bhi unke upar ludak gayi, dono ek-dusre se chipke rahe rahe.
Kuch der baad Babaaji ne saans lete hue kaha, "Ahhhh Pooja... mazaa aa gaya. Sach mein tum kaam ki moet ho. Tum jitne days tak in sukhon se vanchit rahi, uski poori bharpaai karunga. Ab se har roz... dugna, tiguna mazaa dunga."
Pooja sharm aur aanaad se muskuraai. Woh neeche sarakii aur Babaaji ke abhi bhi ardh-khade, apne hi ras se chipchipa land ko muh mein le liya. Usne poori nishtha se use chusa, saaf kiya, jewish se har boond tak pee li.
Phir dono nange hi uth aur baathroom mein ghus gaye. Wahan garam paani ke neeche ek-dusre ko saapon lagaate, chuimte, sahlaate rahe. Nahakar Pooja ne kapde pehne, baalon mein ungliyan phirayi aur peeche wale darwaze se nikalkar tezi se apne ghar ki aur chal diya.
Hamesha ki tarah aaj bhi kisi ne use jaate hue nahi dekha.
*****..........
Raat ke 9 baj chuke the. sampadikaa Funlover hai.
Sabhi Pooja-path aur ashram kaamkaaj se nivrutt ho kar Babaaji jaise hi apne kaks mein pahanche, peeche wale darwaze par halki dastak hui. Woh muskuraaye, samajh gaye ki Gopal hi hoga.
Darwaza khola to Gopal andar serak gaya. Uski sabzi wali reedha bahar hi khadi thi. Haath mein sharaab ki bottle aur kaagaz ke lifafe mein namkeen-bhujiya.
Dono andar baith gaye. Gopal ne chupchap do glass banaye. Pehla, doosra, teesra... peete gaye.
Hamesha ki tarah do glass ke baad Gopal ki zabaan khul gayi. Aaj woh pehle se zyada nashay mein aur badbada raha tha.
"Babaaji ji... aap kitne sukhie ho. Akele rahte ho, koi tokne wala nahi. Ghar-grihastri ke bandhno se azad. Aur dekho mujhe... Beebi toh hai, par uska sukh nahi milta. Saali, kutiya apne paas phatakne bhi nahi deti. Bolti hai, "Beti badi ho gayi hai, sharaab peekar mat aaya karo, ab ye sab shobha nahi deta."
Gopal ne ek aur ghont liya aur tikeek svr mein bola,
"Arre Babaaji ji... ek aadmi pura din mehnat karke jab ghar aata hai toh use sirf do hi cheezon ki tamanna hoti hai - ek daru, doosri apni Beebi ki choot. Par yahan toh saali dono ke liye mana kar deti hai. Ab aap hi bataiye Babaaji... main kya karoon?" Prastutkarta Maitri Patel.
Babaaji chupchaap sip lete rahe. Unki aankhon mein ek gehri chamak thi. Woh Gopal ki har shikayat ka aanand le rahe the.
Jab Gopal thoda ruka toh Babaaji dheere se bole, "Main samajh sakta hoon Gopal... tumhe kitni takleef hoti hoga jab Mayuri bhaabi tumhe apni choot..."
Babaaji ji "choot" shabd khatte hi ruk gaye. Unhone jaanboojhkar rukkar Gopal ka chehra dekha.
Gopal nashay mein jhumte hue bola, "Haan... choot... boliye na. Aajkaal toh yeh shabd bhi sunne ko nahi milta."
Babaaji ne glass rakhaa aur thoda aage jhuka kar gambhir svr mein kaha, "Gopal... Mayuri achi stri hai. Lekin woh bhi aurat hai. Use bhi pyaar chahiye, dhyan chahiye, aur haan... sharir ka sukh bhi chahiye. Shayad tum use woh nahi de pa rahe ho jise isi ki zaroorat hai."
Gopal ne nirasha svr mein poocha, "Toh ab main kya karoon Babaaji?"
*******************************************************************................
Aaj ke liye bas yahi tak dosto.
Agala episode aapke comments ke aane ke baad turant.
Tab tak ke liye Maitri Patel ki aor se JAY BHARAT.
•
Posts: 874
Threads: 3
Likes Received: 732 in 624 posts
Likes Given: 689
Joined: Jan 2019
Reputation:
4
बाबाजी का चरित्र अब पूरी तरह खुल गया है, धर्म के पर्दे के पीछे एक भूखा, चालाक और प्रभुत्वशाली आदमी। मयूरी के साथ की वो धीमी, छुपी हुई छेड़छाड़ बहुत अच्छी तरह से सेट की गई है। मयूरी का चुप रहना और सिर्फ़ थरथरा जाना उसके अंदर की कमज़ोरी और समर्पण को साफ़ दिखाता है।
ऋचा का वर्णन भी बहुत सेंसिटिव और उत्तेजक है, 18 साल की कोमल, अभी खिलती हुई लड़की, माँ के बिल्कुल उलट। बाबाजी की नज़र जब दोनों माँ-बेटी पर एक साथ पड़ती है और मन में वो अंधेरी लालसा जागती है, तो सीन में एक खतरनाक तनाव पैदा हो जाता है।
'पहले पूजा… अब मयूरी… और अगर यह माँ-बेटी दोनों मिल जाएँ तो…' यह लाइन बहुत भारी पड़ती है। मन में खेलने वाला fantasy सीधा पाठक के दिमाग में भी बैठ जाता है।
फिर पूजा वाला सीन… यार, यह तो एकदम जबरदस्त है। नहाने के बाद की वो मुद्रा, झुकी हुई पीठ, मोटी गोल गाँड, पानी की बूँदें, और नीचे से खुली हुई भीगी चूत, यह विवरण इतना जीवंत है कि आँखों के सामने आ जाता है। बाबाजी का अचानक झपटना और जीभ सीधे अंदर घुसेड़ना बहुत रॉ और लालची लगता है। पूजा का पहले चौंकना फिर तुरंत अपनी गाँड उनके मुँह पर दबा देना, यह कंट्रास्ट बहुत अच्छा है।
अंत में धोती उतारकर लंड रगड़ना… पाठक को और भूखा छोड़ देता है।
बाबाजी के मजे ही मजे है, वैसे बहुत मेहनत से आप लिख रही है, सौ तोपों की सलामी आपकी लेखनी को...
Posts: 1,817
Threads: 10
Likes Received: 1,003 in 559 posts
Likes Given: 446
Joined: Jun 2021
Reputation:
17
(22-08-2026, 06:21 PM)rajeev13 Wrote: बाबाजी का चरित्र अब पूरी तरह खुल गया है, धर्म के पर्दे के पीछे एक भूखा, चालाक और प्रभुत्वशाली आदमी। मयूरी के साथ की वो धीमी, छुपी हुई छेड़छाड़ बहुत अच्छी तरह से सेट की गई है। मयूरी का चुप रहना और सिर्फ़ थरथरा जाना उसके अंदर की कमज़ोरी और समर्पण को साफ़ दिखाता है।
ऋचा का वर्णन भी बहुत सेंसिटिव और उत्तेजक है, 18 साल की कोमल, अभी खिलती हुई लड़की, माँ के बिल्कुल उलट। बाबाजी की नज़र जब दोनों माँ-बेटी पर एक साथ पड़ती है और मन में वो अंधेरी लालसा जागती है, तो सीन में एक खतरनाक तनाव पैदा हो जाता है।
'पहले पूजा… अब मयूरी… और अगर यह माँ-बेटी दोनों मिल जाएँ तो…' यह लाइन बहुत भारी पड़ती है। मन में खेलने वाला fantasy सीधा पाठक के दिमाग में भी बैठ जाता है।
फिर पूजा वाला सीन… यार, यह तो एकदम जबरदस्त है। नहाने के बाद की वो मुद्रा, झुकी हुई पीठ, मोटी गोल गाँड, पानी की बूँदें, और नीचे से खुली हुई भीगी चूत, यह विवरण इतना जीवंत है कि आँखों के सामने आ जाता है। बाबाजी का अचानक झपटना और जीभ सीधे अंदर घुसेड़ना बहुत रॉ और लालची लगता है। पूजा का पहले चौंकना फिर तुरंत अपनी गाँड उनके मुँह पर दबा देना, यह कंट्रास्ट बहुत अच्छा है।
अंत में धोती उतारकर लंड रगड़ना… पाठक को और भूखा छोड़ देता है।
बाबाजी के मजे ही मजे है, वैसे बहुत मेहनत से आप लिख रही है, सौ तोपों की सलामी आपकी लेखनी को... 
आपकी इतनी बेबाक और दिल से की गई प्रतिक्रिया के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद।
आपने कहानी के किरदारों की मनोवैज्ञानिक परतों और उस तनाव को जिस तरह महसूस किया, वही मेरे लिए सबसे बड़ी तारीफ़ है।
बाबाजी के किरदार में मैंने जानबूझकर पाखंड, सत्ता की भूख और भीतर छिपे अँधेरे को उभारने की कोशिश की है, ताकि पाठक को सिर्फ़ घटनाएँ नहीं, बल्कि उसके चरित्र का भयावह पक्ष भी महसूस हो। आगे कहानी में यही अँधेरा कई किरदारों के रिश्तों और फैसलों को और जटिल बनाएगा।
आपके शब्दों ने सच में लिखने का उत्साह बढ़ा दिया। इतनी शानदार प्रतिक्रिया के लिए दिल से शुक्रिया
और हाँ, “सौ तोपों की सलामी” वाली तारीफ़ तो याद रहेगी!
•
Posts: 1,817
Threads: 10
Likes Received: 1,003 in 559 posts
Likes Given: 446
Joined: Jun 2021
Reputation:
17
चलिए दोस्तों आगे बढ़ते है .....................
Chaliye dosto kahaani me thoda aage badhte hai.....
•
Posts: 1,817
Threads: 10
Likes Received: 1,003 in 559 posts
Likes Given: 446
Joined: Jun 2021
Reputation:
17
गोपाल शराब के नशे में और भी लाल हो चुका था। उसकी आँखें लाल और भारी हो रही थीं।
“हाँ बाबाजी… साली चूत देने में कितने नखरे करती है। आपने तो देखा ही है उसका जिस्म… कितना भरा-भरा, रस भरा। इतनी बड़ी-बड़ी बोबलें हैं उसकी… उफ्फ्… उन्हें पीने को तरस गया हूँ बाबाजी जी। रात को पास लेट जाती है तो भी मुड़ जाती है। मन करता है जबरदस्ती पकड़कर चोद दूँ… पर डर लगता है कि कहीं आवाज़ न हो जाए। बेटी जो घर में है।” मैत्री रचित कहानी।
गोपाल बक रहा था और बाबाजी चुपचाप सुन रहे थे। उनकी आँखें बंद थीं, लेकिन उनके मन में मयूरी का नग्न, मांसल शरीर घूम रहा था। उनकी धोती के अंदर लंड फिर से फड़कने लगा था - मोटा, भारी और कठोर।
बाबाजी ने धीरे से मुस्कुराते हुए कहा,
“अच्छा सुनो गोपाल… मेरे पास एक आईडिया है। अगर तुम उस पर अमल कर सको, तो तुम्हारी पत्नी फिर से पहले जैसी हो जाएगी - तुम्हारे लिए तरसने लगेगी, तुम्हें प्यार करने लगेगी, और शायद… तुम्हें वो सब देने लगेगी जो तुम चाहते हो।”
गोपाल की आँखें चमक उठीं। नशा एक पल में उड़ गया। वह झुककर बाबाजी के पैरों के पास बैठ गया, हाथ जोड़कर।
“बाबाजी… अगर आप ऐसा चमत्कार कर सकें तो मैं जिन्दगी भर आपका गुलाम बनकर रहूँगा। बताइये… क्या करना होगा? मैं सब कुछ करने को तैयार हूँ।”
बाबाजी मन ही मन विजयी मुस्कान लिए हुए थे। उनका शिकार अब पूरी तरह फँस चुका था। उन्होंने धीरे-धीरे अपनी योजना बतानी शुरू की - चालाकी भरे शब्दों में, धार्मिक आड़ में, और पुरुष की कमजोरी को उत्तेजित करते हुए।
गोपाल सुनता रहा। कभी-कभी उसका सिर हिलाता, कभी “हाँ बाबाजी” कहता। जब गोपाल चला गया तो बाबाजी लेट गए और अपनी किस्मत को सराहते हुए गहरी नींद सो गए।
*******.
अगले दिन दोपहर।
सूरज अपनी चरम सीमा पर था। बाबाजी सुबह के सारे कार्य निपटाकर अपने कमरे में मयूरी का इंतजार कर रहे थे। उन्होंने कोष से कुछ रुपये अलग निकालकर एक लिफाफे में रख लिए थे - हथियार के रूप में।
ठीक 11 बजे मयूरी आई।
उसने साधारण सा हल्का साड़ी पहना था, लेकिन उसका भरा-भरा जिस्म किसी भी कपड़े को चुनौती दे रहा था। भारी छातियाँ, चौड़ी कमर, और मोटी गांड - हर कदम के साथ हिल रही थीं। क्या मादक नजारा था।
बाबाजी ने मुस्कुराते हुए कहा, “अंदर आओ मयूरी… पीछे वाले कमरे में।”
मयूरी बिना किसी संकोच के उनके पीछे चल दी। वह जानती थी कि ऐसी नाजुक बातें खुलेआम नहीं की जा सकतीं। रचयिता मैत्री पटेल है।
कमरे में घुसते ही बाबाजी चोकड़ी मारकर दीवान पर बैठ गए। मयूरी ने हाथ जोड़कर उनके सामने कालीन पर पालथी मार ली। उसकी साड़ी की पल्लू थोड़ी सरक गई थी, जिससे उसकी गहरी ब्लाउज वाली छाती का आधा हिस्सा दिख रहा था।
बाबाजी ने सबसे पहले लिफाफा आगे बढ़ाया।
“ये लो मयूरी… ऋचा की पढ़ाई के लिए। जितना चाहिए, ले लो।”
मयूरी की आँखें नम हो गईं। उसने हाथ जोड़कर पैसे लिए और तुरंत अपने ब्लाउज के अंदर, छातियों के बीच ठूस लिए। बाबाजी की निगाहें उसकी छातियों की गहराई में घुस गईं - वे लालच से भर गई थीं।
“धन्यवाद बाबाजी… आपका ये एहसान मैं कभी नहीं भुला पाऊँगी। मैं वादा करती हूँ, जल्दी ही ये सारे पैसे कोष में वापस डाल दूँगी।”
बाबाजी ने मुस्कुराते हुए कहा,
“कोई जल्दी नहीं है बेटी। मैं तो बस यही चाहता हूँ कि ऋचा की पढ़ाई में कोई बाधा न आए।”
कुछ देर चुप्पी रही।
फिर मयूरी ने हिचकते हुए, धीमी और शर्मीली आवाज़ में पूछा,
“और… बाबाजी… कल आप जो बात कर रहे थे… हमारे बारे में… वो… क्या कह रहे थे?”
बाबाजी मन ही मन मुस्कुराए। लंबे इंतजार के बाद आखिरकार शिकार खुद जाल में कदम रख चुका था।
उन्होंने धीरे से आगे झुककर, गहरी और मीठी आवाज़ में कहा, “मयूरी, गोपाल बहुत परेशान रहता है। वो तुमसे प्यार करता है, लेकिन वो कहता है कि तुम उसे अब पास नहीं आने देतीं। उसकी शिकायत है कि तुम उसकी इच्छाओं को ठुकरा देती हो… खासकर… शारीरिक इच्छाओं को।”
मयूरी का चेहरा शर्म और गुस्से से लाल हो गया। उसने नजरें झुका लीं।
बाबाजी ने नरम स्वर में आगे कहा,
“मैं जानता हूँ… औरत का शरीर भी भूखा रह जाता है तो तकलीफ होती है। गोपाल की कमी है, लेकिन शायद तुम भी कुछ बातें खुलकर नहीं कह पातीं। अगर तुम चाहो… तो मैं तुम्हारी मन की बात सुन सकता हूँ। कोई डर नहीं। यहाँ सिर्फ तुम और मैं हैं… और भगवान।”
बाबाजी की नजरें अब मयूरी की छातियों, कमर और गोद में घूम रही थीं। हवा में उत्तेजना और खतरे की मीठी महक फैलने लगी थी।
----------------------------------------- ***
जुड़े रहिये दोस्तों।
मैत्री पटेल
•
Posts: 1,817
Threads: 10
Likes Received: 1,003 in 559 posts
Likes Given: 446
Joined: Jun 2021
Reputation:
17
बाबाजी ने धीरे से साँस ली और गंभीर, लेकिन मीठा स्वर अपनाया।
“देखो मयूरी… वैसे तो मुझे किसी के गृहस्थ जीवन में दखल देने का कोई अधिकार नहीं है। पर गोपाल को मैं अपने मित्र की तरह मानता हूँ। वो भी मुझे अपना मित्र समझकर अपनी सारी परेशानियाँ बेझिझक कह देता है। कल रात की ही बात ले लो… वो आकर रो रहा था कि तुम उसे अपने जिस्म को हाथ तक लगाने नहीं देतीं। पिछले एक महीने से तो उसने तुम्हारा एक चुम्बन भी नहीं लिया है।” निर्मात्री मैत्री पटेल है।
मयूरी शर्म से गड़ गई। उसका चेहरा, गला और कान तक लाल हो गए। बाबाजी के मुँह से अपनी निजी, अंतरंग बातें सुनकर वह जमीन में समा जाना चाहती थी। उसने नजरें झुका लीं, उँगलियाँ अपनी साड़ी के पल्लू में फँस गईं।
बाबाजी ने आगे कहा, आवाज़ को और नरम करते हुए: “देखो बेटी… चाहे तुम जो भी कहो, वो तुम्हारा पति है। पति-पत्नी के बीच शारीरिक संबंध विवाह को मजबूत रखने में बहुत अहम भूमिका निभाते हैं। हर पुरुष चाहता है कि उसकी पत्नी उसे मानसिक और शारीरिक रूप से पूरा संतोष दे। अगर तुम ये नहीं दोगी तो उसका मन भटक सकता है। बाहर कहीं… किसी और के पास… शारीरिक सुख ढूंढने लगेगा। और ये तुम्हारे पूरे परिवार के लिए हानिकारक साबित हो सकता है।”
मयूरी काफी देर तक चुपचाप सुनती रही। उसके मन में तूफान उठ रहा था। आखिरकार उसकी आवाज़ फटी:
“बाबाजी… आपने सिर्फ उनकी बातें सुनी हैं और मुझे दोषी बना दिया…”
बाबाजी ने कोमल स्वर में कहा, “तो बताओ न मुझे… तुम्हें क्या परेशानी है? क्यों तुम ऐसा बर्ताव करती हो गोपाल के साथ? मयूरी, तुम मुझे भी अपना मित्र समझो। सब कुछ खुलकर बता दो। ये बात हमारे बीच ही रहेगी। इतना तो विश्वास कर ही सकती हो तुम मुझ पर… और यहाँ सिर्फ मैं औत तुम हो और यह उपरवाला।”
कहते हुए बाबाजी आगे झुके और अपना दाहिना हाथ मयूरी के नंगे, मांसल कंधे पर रख दिया। स्पर्श हल्का था, लेकिन भरा हुआ। उन्होंने धीरे-धीरे अपनी उँगलियों से उसके कंधे की नरम, गर्म त्वचा को सहलाना शुरू कर दिया - जैसे भरोसा दिला रहे हों, पर असल में उसकी देह को महसूस कर रहे थे।
मयूरी ने अपना चेहरा ऊपर उठाया। उसकी आँखों में आँसू थे। पलकों पर पानी चमक रहा था। संपादिका फनलवर है।
“बाबाजी जी… जिस दिन से इन्हें शराब पीने की लत लगी है, वो अपने आपे में नहीं रहते। उन्होंने आपको ये तो बता दिया कि मैंने एक महीने से उन्हें अपने पास नहीं आने दिया… लेकिन ये नहीं बताया कि उन्होंने क्या हरकत की थी, जिसकी वजह से मैंने वो सब किया।”
बाबाजी ने सांत्वना भरे स्वर में कहा, “नहीं… मुझे नहीं मालूम। तुम बताओ मुझे पूरी बात।”
मयूरी ने गहरी साँस ली। शर्म से उसका गला रुंध रहा था, फिर भी बोली:
“बाबाजी जी… कहते हुए मुझे बहुत शर्म आ रही है… पर जब बात यहाँ तक आ ही गई है, तो मैं आपसे कुछ नहीं छुपाऊँगी। ऐसा नहीं है कि मेरा मन इन सब चीजों के लिए नहीं करता, बल्कि मैं तो उनसे कहीं ज्यादा तड़पती हूँ। पहले जब वो मेरे साथ प्यार करते थे, तो मैं उन्हें हर प्रकार से खुश करने की कोशिश करती थी। जैसा वो चाहते, वैसा करती। वो कहते थे - ‘अंग्रेजी पिक्चर में जैसे होता है, वैसा करो’…”
बाबाजी ने बीच में ही टोका, आँखों में चमक के साथ:
“अंग्रेजी पिक्चर में… मतलब?”
मयूरी और भी शर्म से सिकुड़ गई। उसकी आवाज़ अब barely सुनाई दे रही थी। उसने नजरें नीचे कर लीं और फुसफुसाकर बोली:
“वो… वो अक्सर… रात को टीवी में अंग्रेजी फिल्में आती हैं न… जिसमें… जिसमें औरत… आदमी का लंड… मुंह में लेकर चूसती हुई दिखाई जाती है।”
वह बोलते-बोलते रुक गई। उसके गालों पर लाली छा गई। साँसें तेज हो गई थीं।
बाबाजी की उँगलियाँ अब भी उसके कंधे पर धीरे-धीरे घूम रही थीं। उन्होंने जानबूझकर स्पर्श को थोड़ा और गहरा किया - गर्दन की तरफ सरकाते हुए। उनकी आवाज़ में एक गहरी, वासना भरी सहानुभूति थी:
“तो… गोपाल तुमसे वो सब करवाना चाहता था?” मैत्री की प्रस्तुति।
मयूरी ने सिर्फ सिर हिलाया।
बाबाजी ने धीरे से पूछा, “और तुम… नहीं करती थीं?”
मयूरी ने काँपती आवाज़ में जवाब दिया, “कभी-कभी करती थी। लेकिन जब वो शराब पीकर आते थे, तो बहुत खतरनाक हो जाते थे। जबरदस्ती… बहुत रूखे और बेरहमी से करते थे… मुझे दर्द होता था। उसी रात उन्होंने मेरे मुँह में… जबरदस्ती… और जब मैंने मना किया तो गुस्सा हो गए। बस उसी दिन से मैंने उन्हें दूर रख लिया है।”
**************************************
Maitri Patel.
•
Posts: 1,817
Threads: 10
Likes Received: 1,003 in 559 posts
Likes Given: 446
Joined: Jun 2021
Reputation:
17
बाबाजी बाहर से तो सांत्वना भरा चेहरा बनाए बैठे थे, लेकिन अंदर से वे मजे ले रहे थे। बाबाजी तो मजे लेने के लिए उससे ये सब पूछ रहा था, वर्ना उस कमीने को सब पता था की रात को केबल वाला ब्लू फिल्म लगाता है , जिसे देखकर वो अपने लंड का पानी कई बार निकाल चुके हैं और गोपाल ने ही उन्हें ये सब बताया था की ब्लू फिल्म देखकर उसने भी कई बार मयूरी से अपना लंड चुसवाया है और फिल्म देखने के बाद ही उसे ये पता चला था की गांड भी मारी जाती है ..वर्ना उसे तो बस यही मालुम था की चूत में ही लंड डाला जाता है ..और जब गोपाल ने ब्लू फिल्म में गांड मारने का सीन देखा था , तब से वो मयूरी के पीछे पड़ा हुआ था की वो भी उससे गांड मरवाए ..पर वो हमेशा मना कर देती थी ..
बाबाजी खुद केबल पर ब्लू फिल्म देख-देखकर कई बार झड़ चुके थे। लेकिन अब मयूरी के मुँह से ये सब सुनकर उनका लंड पूरी तरह खड़ा हो चुका था। मैत्री लिखित कहानी।
मयूरी ने काँपती हुई आवाज़ में आगे कहा:
“पिछले महीने एक रात… जब वो पीकर घर आए तो उन्होंने… उन्होंने ऋचा को अपने कमरे में बुलाया। मैं किचन में थी। काफी देर तक जब ऋचा वापस नहीं आई तो मैं चिंतित होकर कमरे में गई तो नजारा देख के मेरे होश उड़ गए।”
मयूरी की आवाज़ भर्रा गई।
“इन्होंने ऋचा को अपने सीने से चिपका रखा था… और उसे जबरदस्ती चूम रहे थे। उसके गालों पर, गर्दन पर… बाबाजी… वो मेरी बेटी है। सिर्फ़ अठारह साल की।”
बाबाजी के रोंगटे खड़े हो गए - लेकिन अलग वजह से। बाबाजी जी ने जब ये सब सुना तो उनके रोंगटे खड़े हो गए ..इस बारे में तो गोपाल ने आज तक नहीं बताया था .. उसकी माँ को चोदु,साला, हरामी। उनके मन में तुरंत एक विकृत कल्पना घूम गई - गोपाल ने अपनी कमसिन, गुलाब जैसे होंठों वाली बेटी के नाजुक होंठों को कैसे चूसा होगा। उनके लंड ने धोती के अंदर जोर से उछाल मारा।
मयूरी आँसू पोंछते हुए बोली:
“मैंने बड़ी मुश्किल से ऋचा को उनके चंगुल से छुड़ाया। वो बेचारी घबराई हुई, काँप रही थी। भागकर अपने कमरे में चली गई। मैंने उन्हें जी भर कर गालियाँ दीं, लेकिन वो नशे में चूर थे। कोई असर नहीं हुआ। उसी दिन मैंने फैसला कर लिया कि अब तक वो माफी नहीं मांग लेंगे और शराब नहीं छोड़ देंगे, तब तक उनके लिए मेरा जिस्म बंद है।”
मयूरी ने सिर झुकाया, “बाबाजी… एक बार तो मन किया तलाक ले लूँ। पर हम गरीब हैं। तलाक के बाद गुजारा कैसे चलेगा? न अब वो उम्र बची है कि कोई दूसरा जीवनसाथी मिल जाए। इसलिए मन मारकर रोज उनकी शिकायतें सुनती हूँ।” फनलवर द्वारा संपादित।
बाबाजी की आँखों में एक अंधेरी चमक थी। वे मयूरी की पीड़ा का नाटक तो कर रहे थे, लेकिन अंदर ही अंदर ऋचा की कोमल देह और उसके गुलाबी होंठों की कल्पना कर रहे थे।
उन्होंने थोड़ी देर बाद गंभीर स्वर में कहा:
“जो गोपाल ने किया, वो बेहद शर्मनाक और पाप है। लेकिन हो सकता है कि तुम्हारे द्वारा बार-बार दुत्कारे जाने के बाद उसके मन में ऐसे विकृत विचार आए हों। तुम उसे प्यार से समझाओ, शराब छुड़वाने की कोशिश करो। रही बात ऋचा की, तो तुम उसकी चिंता मत करो। मैं गोपाल को भी समझा दूँगा कि अपनी बेटी के बारे में ऐसा सोचना घोर पाप है।”
फिर उन्होंने एक पल रुककर, अपनी योजना को आगे बढ़ाते हुए कहा:
“तुम बस उसकी पढ़ाई की चिंता करो। उसे जितना हो सके पढ़ाओ। अगर चाहो तो उसकी ट्यूशन भी लगवा दो।”
मयूरी ने उदास स्वर में कहा, “पर बाबाजी… अभी इतने पैसे नहीं हैं कि अलग से ट्यूशन लगवा सकूँ।”
बाबाजी की आँखों में विजयी मुस्कान खेल गई। उन्होंने नरम लेकिन दृढ़ स्वर में कहा:
“तुम एक काम करो… ऋचा को रोज दोपहर 2 बजे मेरे पास भेज दो। मैं खुद उसे पढ़ा दूँगा। संस्कृत, अंग्रेजी, गणित - जो भी जरूरत हो। मुफ्त में। आश्रम में ही सब कुछ होगा।”
मयूरी आश्चर्य से उनकी तरफ देखने लगी, “आपके पास… मतलब…?”
बाबाजी ने मुस्कुराते हुए कहा, “हाँ बेटी। मैं खुद उसकी पढ़ाई देख लूँगा। तुम चिंता मत करो। वो मेरे पास सुरक्षित रहेगी।”
मयूरी अभी कुछ बोल पाती, उससे पहले बाबाजी ने अपना हाथ उसके कंधे से सरकाकर उसकी गर्दन पर हल्का-हल्का सहलाते हुए कहा:
“विश्वास रखो मयूरी… मैं तुम्हारे परिवार का भला ही चाहता हूँ।” मैत्री का निर्माण।
कमरे में सन्नाटा छा गया। मयूरी के मन में संशय, कृतज्ञता और डर का मिश्रण था, जबकि बाबाजी के मन में दो शिकार - माँ और बेटी - एक साथ पकड़ने की योजना पक्की हो चुकी थी।
************************************************
यही तक दोस्तों। अगला एपिसोड आपके कोमेंट्स आने के बाद।
तब तक Maitri Patel की तरफ से जय भारत।।
•
Posts: 1,817
Threads: 10
Likes Received: 1,003 in 559 posts
Likes Given: 446
Joined: Jun 2021
Reputation:
17
24-08-2026, 03:05 PM
(This post was last modified: 24-08-2026, 03:06 PM by maitripatel. Edited 1 time in total. Edited 1 time in total.)
Chaliye dosto upar ke teeno updates ko HINGLISH me padhte hai.
•
Posts: 1,817
Threads: 10
Likes Received: 1,003 in 559 posts
Likes Given: 446
Joined: Jun 2021
Reputation:
17
24-08-2026, 03:10 PM
(This post was last modified: 24-08-2026, 03:10 PM by maitripatel. Edited 1 time in total. Edited 1 time in total.)
Gopal sharaab ke nashe mein aur bhi laal ho chuka tha. Uski aankhen laal aur bhaari ho rahi thin.
"Haan Babaji... Saali choot dene mein kitne nakhre karti hai. Aapne to dekha hi hai uska jism... Kitna bhara-bhara, ras bhara. Itni badi-badi boblen hain uski... Uff... Unhe peene ko taras gaya hoon Babaji ji. Raat ko paas let jaati hai to bhi mud jaati hai. Man karta hai zabardasti pakad kar chod doon... Par dar lagta hai ki kahin aawaz na ho jaye. Beti jo ghar mein hai." Maitri likhit kahaani.
Gopal bak raha tha aur Babaji chupchaap sun rahe the. Unki aankhen band thin, lekin unke man mein Mayuri ka nagna, maansal sharir ghoom raha tha. Unki dhoti ke andar land phir se fadakne laga tha - mota, bhaari aur kathor.
Babaji ne dheere se muskurate hue kaha,
"Achha suno Gopal... Mere paas ek idea hai. Agar tum us par amal kar sako, to tumhari patni phir se pehle jaisi ho jayegi - tumhare liye tarasne lagi, tumhe pyaar karne lagi, aur shayad... tumhe woh sab dene lagi jo tum chahte ho."
Gopal ki aankhen chamak uthin. Nasha ek pal mein ud gaya. Woh jhukkar Babaji ke paeron ke paas baith gaya, haath jodkar.
"Babaji... Agar aap aisa chamatkar kar sakein to main zindagi bhar aapka gulaam ban kar rahoonga. Bataaiye... Kya karna hoga? Main sab kuch karne ko taiyar hoon."
Babaji man hi man vijayi muskaan liye hue the. Unka shikaar ab poori tarah phans chuka tha. Unhone dheere-dheere apni yojana batani shuru ki - chalaaki bhare shabdon mein, '. aad mein, aur purush ki kamzori ko uttejit karte hue.
Gopal sunta raha. Kabhi-kabhi uska sir hilata, kabhi "Haan Babaji" kahta. Jab Gopal chala gaya to Babaji lete gaye aur apni kismat ko sarahate hue gehri neend so gaye. Rachayita Maitri Patel hai.
Agle din dopahar.
Sooraj apni charam seema par tha. Babaji subah ke saare kaary nipaṭakar apne kamre mein Mayuri ka intezaar kar rahe the. Unhone kosh se kuch rupaye alag nikaalkar ek lifafe mein rakh liye the - hathiyar ke roop mein.
Theek 11 baje Mayuri aayi.
Usne saadhaaran sa halka sa saadi pehna tha, lekin uska bhara-bhara jism kisi bhi kapde ko chunauti de raha tha. Bhaari chhatiyaan, chaudi kamar, aur moti gaand - har kadam ke saath hil rahi thin. Kya maadak nazaara tha.
Babaji ne muskurate hue kaha, "Andar aao Mayuri... Peechhe waale kamre mein."
Mayuri bina kisi sankoch ke unke peeche chal di. Woh jaanti thi ki aisi naazuk baatein khuleaam nahin ki ja sakti.
Kamre mein ghuste hi Babaji chokdi maar kar deewan par baith gaye. Mayuri ne haath jodkar unke saamne kaaleen par paalathi maar li. Uski saadi ki pallu thodi sarak gayi thi, jisse uski gehri blouse waali chhaati ka aadha hissa dikh raha tha.
Babaji ne sabse pehle lifafa aage badhaya.
"Yeh lo Mayuri... Richa ki padhaai ke liye. Jitna chahiye, le lo."
Mayuri ki aankhen nam ho gayin. Usne haath jodkar paise liye aur turant apne blouse ke andar, chhatiyon ke beech thoos liye. Babaji ki nigaahen uski chhatiyon ki gehraai mein ghus gayin - woh lalach se bhar gayi thin.
"Dhanyavaad Babaji... Aapka yeh ehsaan main kabhi nahi bhula paungi. Main waada karti hoon, jaldi hi yeh saare paise kosh mein waapas daal doongi."
Babaji ne muskurate hue kaha,
"Koi jaldi nahi hai beti. Main to bas yahi chahta hoon ki Richa ki padhaai mein koi baadha na aaye." Sampadikaa Funlover hai.
Kuch der chuppi rahi.
Phir Mayuri ne hichkate hue, dheemi aur sharmili awaaz mein poochha,
"Aur... Babaji... Kal aap jo baat kar rahe the... Hamaare baare mein... Woh... Kya keh rahe the?"
Babaji man hi man muskuraaye. Lambe intezaar ke baad aakhir shikaar khud jaal mein kadam rakh chuka tha.
Unhone dheere se aage jhukkar, gehri aur meethi awaaz mein kaha, "Mayuri, Gopal bahut pareshan rahta hai. Woh tumse pyaar karta hai, lekin woh kehta hai ki tum use ab paas nahi aane deti. Uski shikayat hai ki tum uski ichchhaon ko thukra deti ho... Khaaskar... Shaaririk ichchhaon ko."
Mayuri ka chehra sharm aur gusse se laal ho gaya. Usne nigaahen jhuka leen.
Babaji ne narm swar mein aage kaha, "Main jaanta hoon... Aurat ka sharir bhi bhookha reh jaata hai to takleef hoti hai. Gopal ki kami hai, lekin shayad tum bhi kuch baatein khulkar nahi keh paati. Agar tum chaho... To main tumhari man ki baat sun sakta hoon. Koi dar nahi. Yahan sirf tum aur main hain... Aur Bhagwan."
Babaji ki nigaahen ab Mayuri ki chhatiyon, kamar aur god mein ghoom rahi thin. Hawa mein uttejana aur khatre ki meethi mahak phailne lagi thi.
**********************************************************...................
Stay tuned friends.
Maitri Patel.
•
Posts: 1,817
Threads: 10
Likes Received: 1,003 in 559 posts
Likes Given: 446
Joined: Jun 2021
Reputation:
17
Babaji ne dheere se saans li aur gambhir, lekin mitha swar apnaya.
"Dekho Mayuri… waise toh mujhe kisi ke grihasth jeevan mein dakhal dene ka koi adhikaar nahi hai. Par Gopal ko main apne mitra ki tarah maanta hoon. Woh bhi mujhe apna mitra samajhkar apni saari pareshaniyaan bejhijhak keh deta hai. Kal raat ki hi baat le lo… woh aakar ro raha tha ki tum use apne jism ko haath tak lagane nahi deti. Pichle ek mahine se toh usne tumhara ek chumban bhi nahi liya hai." Maitri rachit kahaani.
Mayuri sharm se gad gayi. Usska chehra, gala aur kaan tak laal ho gaye. Babaji ke munh se apni niji, intimate baatein sunkar woh zameen mein sama jaana chahti thi. Usne nazrein jhuka leen, ungliyan apni saadi ke pallu mein phans gayin.
Babaji ne aage kaha, aawaz ko aur naram karte hue: "Dekho beti… chahe tum jo bhi kaho, woh tumhara pati hai. Pati-patni ke beech physical sambandh vivah ko majboot rakhne mein bahut ahim bhoomika nibhate hain. Har purush chahta hai ki uski patni use manasik aur shaareerik roop se poora santosh de. Agar tum ye nahi dogi toh uska man bhatak sakta hai. Bahar kahin… kisi aur ke paas… shaareerik sukh dhundhne lagega. Aur ye tumhare poore parivar ke liye haanikarak saabit ho sakta hai."
Mayuri kaafi der tak chupchap sunti rahi. Uske man mein toofan uth raha tha. Aakhirkar uski awaaz phati:
"Babaji… aapne sirf unki baatein suni hain aur mujhe doshi bana diya…"
Babaji ne komal swar mein kaha, "Toh batao na mujhe… tumhe kya pareshani hai? Kyun tum aisa bartav karti ho Gopal ke saath? Mayuri, tum mujhe bhi apna mitra samjho. Sab kuch khulkar bata do. Ye baat hamaare beech hi rahegi. Itna toh vishwas kar hi sakti ho tum mujh par… aur yahan sirf main aur tum hoon aur ye uparwala."
Kehte hue Babaji aage jhuke aur apna daahina haath Mayuri ke nange, maansal kandhe par rakh diya. Sparsh halka tha, lekin bhara hua. Unhone dheere-dheere apni ungliyon se uske kandhe ki naram, garm twacha ko sehlana shuru kar diya - jaise bharosa dila rahe hon, par asal mein uski degh ko mehsoos kar rahe the. Nirmaatri Maitri Patel hai.
Mayuri ne apna chehra upar uthaya. Uski aankhon mein aansoo the. Palkon par paani chamak raha tha.
"Babaji ji… jis din se inhe sharab peene ki lat lagi hai, woh apne aape mein nahi rahte. Unhone aapko ye toh bata diya ki maine ek mahine se unhe apne paas nahi aane diya… lekin ye nahi bataya ki unhone kya harkat ki thi, jiski vajah se maine woh sab kiya."
Babaji ne saantwana bhare swar mein kaha, "Nahi… mujhe nahi maloom. Tum batao mujhe poori baat."
Mayuri ne gehra saans li. Sharm se uska gala runda raha, phir bhi boli:
"Babaji ji… kehte hue mujhe bahut sharm aa rahi hai… par jab baat yahan tak aa hi gayi hai, toh main aapse kuch nahi chhupaungi. Aisa nahi hai ki mera man in sab cheezon ke liye nahi karta, balki main toh unse kahin zyada tadpati hoon. Pehle jab woh mere saath pyaar karte the, toh main unhe har prakar se khush karne ki koshish karti thi. Jaisa woh chahte, vaisa karti. Woh kehte the - 'Angrezi picture mein jaise hota hai, vaisa karo'…"
Babaji ne beech mein hi toka, aankhon mein chamak ke saath:
"Angrezi picture mein… matlab?"
Mayuri aur bhi sharm se sikud gayi. Uski awaaz ab barely sunai de rahi thi. Usne nazrein neeche kar leen aur fusfusakar boli:
"Woh… woh aksar… raat ko TV mein angrezi filmein aati hain na… jismein… jismein aurat… aadmi ka lund… munh mein lekar choosti hui dikhai jaati hai."
Woh bolte-bolte ruk gayi. Uske gaalon par laali chaa gayi. Saansain tez ho gayi thin. Maitri ki rachna.
Babaji ki ungliyan ab bhi uske kandhe par dheere-dheere ghoom rahi thin. Unhone jaanbujhkar sparsh ko thoda aur gehra kiya - gardan ki taraf sarkate hue. Unki awaaz mein ek gehri, vasna bhari sahānubhūti thi:
"Toh… Gopal tumse woh sab karwana chahta tha?"
Mayuri ne sirf sir hilaya.
Babaji ne dheere se pucha, "Aur tum… nahi karti thin?"
Mayuri ne kaampti awaaz mein jawab diya, "Kabhi-kabhi karti thi. Lekin jab woh sharab peekar aate the, toh bahut khatarnaak ho jaate the. Zabardasti… bahut rookhe aur berahmi se karte the… mujhe dard hota tha. Usi raat unhone mere munh mein… zabardasti… aur jab maine mana kiya toh gussa ho gaye. Bus usi din se maine unhe door rakh liya hai."
******************************************...............
Jude rahiye dosto.
Maitri Patel.
•
Posts: 1,817
Threads: 10
Likes Received: 1,003 in 559 posts
Likes Given: 446
Joined: Jun 2021
Reputation:
17
Babaji bahar se toh saantwana bhara chehra banaaye baithe the, lekin andar se woh maze le rahe the. Babaji toh maze lene ke liye usse yeh sab poochh raha tha, warna uss kamine ko sab pata tha ki raat ko cable wala blue film lagata hai, jise dekhkar woh apne land ka paani kai baar nikaal chuke hain aur Gopal ne hi unhein yeh sab bataya tha ki blue film dekhkar usne bhi kai baar Mayuri se apna land chuswaya hai aur film dekhne ke baad hi use pata chala tha ki gaand bhi maari jaati hai..warna use toh bas yahi maloom tha ki choot mein hi land daala jaata hai..aur jab Gopal ne blue film mein gaand maarne ka scene dekha tha, tab se woh Mayuri ke peeche pada hua tha ki woh bhi usse gaand marwaye..par woh hamesha mana kar deti thi..
Babaji khud cable par blue film dekh-dekhkar kai baar jhad chuke the. Lekin ab Mayuri ke munh se yeh sab sunkar unka land poori tarah khada ho chuka tha. Sampaadika Funlover hai.
Mayuri ne kaapti hui awaaz mein aage kaha:
"Pichhle mahine ek raat... jab woh pee kar ghar aaye toh unhone... unhone Richa ko apne kamre mein bulaya. Main kitchen mein thi. Kaafi der tak jab Richa wapas nahi aayi toh main chintit hokar kamre mein gayi toh nazara dekh ke mere hosh ud gaye."
Mayuri ki awaaz bharra gayi.
"Inhonne Richa ko apne seene se chipka rakha tha... aur use zabardasti choom rahe the. Uske gaalon par, gardan par... Babaji... woh meri beti hai. Sirf atharah saal ki."
Babaji ke rongte khade ho gaye - lekin alag wajah se. Babaji ji ne jab yeh sab suna toh unke rongte khade ho gaye..iss baare mein toh Gopal ne aaj tak nahi bataya tha.. Uski maa ko chodu, saala, haraami. Unke mann mein turant ek vikrit kalpna ghoom gayi - Gopal ne apni kamsin, gulaab jaison honton wali beti ke naazuk honton ko kaise choosa hoga. Unke land ne dhoti ke andar zor se uchhaal maara.
Mayuri aansoo ponchhte hue boli:
"Maine badi mushkil se Richa ko unke chungul se chhudaya. Woh bechaari ghabrai hui, kaanp rahi thi. Bhaag kar apne kamre mein chali gayi. Maine unhein ji bhar kar gaaliyaan deen, lekin woh nashe mein choor the. Koi asar nahi hua. Ussi din maine faisla kar liya ki ab tak woh maafi nahi maang lenge aur sharaab nahi chhod denge, tab tak unke liye mera jism band hai."
Mayuri ne sir jhukaya, "Babaji... ek baar toh man kiya talaak le loon. Par hum gareeb hain. Talaak ke baad guzara kaise chalega? Na ab woh umar bachi hai ki koi doosra jeevansathi mil jaaye. Isliye man maar kar roz unki shikayatein sunti hoon." Maitri ki prastuti.
Babaji ki aankhon mein ek andheri chamak thi. Woh Mayuri ki peeda ka natak toh kar rahe the, lekin andar hi andar Richa ki komal deha aur uske gulaabi honton ki kalpna kar rahe the.
Unhone thodi der baad gambhir swar mein kaha:
"Jo Gopal ne kiya, woh behad sharmnaak aur paap hai. Lekin ho sakta hai ki tumhare dwaara baar-baar dukhaare jaane ke baad uske mann mein aise vikrit vichar aaye hon. Tum use pyaar se samjhaao, sharaab chhudwaane ki koshish karo. Rahi baat Richa ki, toh tum uski chinta mat karo. Main Gopal ko bhi samjha doonga ki apni beti ke baare mein aisa sochna ghor paap hai."
Phir unhone ek pal rukkar, apni yojana ko aage badhaate hue kaha:
"Tum bas uski padhai ki chinta karo. Use jitna ho sake padhaao. Agar chaaho toh uski tuition bhi lagwa do."
Mayuri ne udaas swar mein kaha, "Par Babaji... abhi itne paise nahi hain ki alag se tuition lagwa sakoon."
Babaji ki aankhon mein vijayi muskaan khel gayi. Unhone naram lekin dridh swar mein kaha:
"Tum ek kaam karo... Richa ko roz dopahar 2 baje mere paas bhej do. Main khud use padha doonga. Sanskrit, English, Ganit - jo bhi zaroorat ho. Muft mein. Aashram mein hi sab kuch hoga." Rachayita Maitri Patel hai.
Mayuri aashcharya se unki taraf dekhne lagi, "Aapke paas... matlab...?"
Babaji ne muskuraate hue kaha, "Haan beti. Main khud uski padhai dekh loonga. Tum chinta mat karo. Woh mere paas surakshit rahegi."
Mayuri abhi kuch bol paati, usse pehle Babaji ne apna haath uske kandhe se sarkakar uski gardan par halka-halka sahlate hue kaha:
"Vishwas rakho Mayuri... main tumhare parivaar ka bhala hi chahta hoon."
Kamre mein sannaata chha gaya. Mayuri ke mann mein sandeh, kritagyata aur dar ka mishran tha, jabki Babaji ke mann mein do shikaar - maa aur beti - ek saath pakadne ki yojana pakki ho chuki thi.
******************************************************............................
Aaj ke liye bas yahi tak dosto. Aglaa episode aapke comments aane ke baad.
Tab tak ke liye Maitri Patel ki taraf se JAY BHARAT.
•
Posts: 1,817
Threads: 10
Likes Received: 1,003 in 559 posts
Likes Given: 446
Joined: Jun 2021
Reputation:
17
चलिए दोस्तों आगे बढ़ते है...............
Chaliye dosto kahaani me aage badhte hai.
•
|