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मेरी मम्मी अंकल के लंड पर बैठी ही थीं। कि मेरी मम्मी और अंकल दोनों की आँखें एक दूसरे की आँखों से मिलीं। तो मेरी मम्मी ने कहा।
मम्मी: योगेश जी आप भी आज उसी पोजीशन में नहीं कर सकते थे। आपको भी रोज नया नया चाहिए।
अब मेरी मम्मी ठीक अंकल के लंड पर बैठी ऊपर से उछलने लगीं। मेरी मम्मी खुद उछल कर उनका लंड अपनी चूत के अंदर ले रही थीं।
मेरी मम्मी के अंकल के लंड पर उछलने से मेरी मम्मी की चुचियाँ भी एक खास तरीके से झूल रही थीं। और अंकल मेरी मम्मी की चुचियों को थामे नीचे से अपनी गाँड उठा कर अपना लंड मेरी मम्मी की चूत में घुसा रहे थे।
मेरी मम्मी भी अब झड़ने के काफी करीब थीं। सो मेरी मम्मी ने अपना चेहरा नीचे झुकाया। और अपने होठों को उनके होठों पर रख कर चूमते हुए अपनी कमर हिलाने लगीं। मेरी मम्मी ऊपर से उछल रही थीं। और वो नीचे से गचा गच मेरी मम्मी की चूत में अपना लंड पेल रहे थे। कि तभी मेरी मम्मी ने मीठे दर्द के साथ।
मम्मी: आह... योगेश जी आह... मैं झड़ने वाली हूँ। और ये कहकर झड़ने लगीं। और मेरी मम्मी के झड़ते ही अंकल ने मेरी मम्मी को पलट दिया। और मेरी मम्मी के ऊपर चढ़ कर धक्के मारने लगे।
और कुछ ही सेकंड में वो भी झड़ने लगे। जब मेरी मम्मी और अंकल दोनों शांत हुए। तो देखा रात का 1 बज चुका है। फिर अंकल ने मेरी मम्मी की आँखों में देखकर मेरी मम्मी से पूछने लगे। वर्षा।
अंकल: वर्षा क्या तुम मुझसे प्यार करती हो।
उनके जवाब में मेरी मम्मी ने अपना मुँह उनकी चौड़ी छाती में छुपा लिया। और बोलीं।
मम्मी: हाँ। बहुत प्यार करती हूँ। लेकिन अंकुश से ज्यादा नहीं। मैं इस दुनिया में सबसे ज्यादा प्यार अपने कलेजे के टुकड़े मेरे लाल अंकुश से करती हूँ। फिर उसके बाद आपसे करती हूँ।
मेरी मम्मी का इतना ही कहना था। कि तभी अंकल ने मेरी मम्मी की एक चुची को अपने मुँह में डाल कर फिर से चूसने लगे। मेरी मम्मी फिर से तड़पने लगीं। आह...
मम्मी: आह... योगेश जी छोड़िए। और नहीं तो मैं फिर से गरम हो जाऊँगी। और मम्मी ने अंकल से अपने आप को छुड़ाया। और खड़ी हो गईं। और वहीं पास में पड़ी अपनी नाइटी को पहनने लगीं। अंकल मेरी मम्मी को नाइटी पहनते देख बोले।
अंकल: जान ये क्या। क्यों पहन रही हो। अभी तो एक राउंड ही हुआ है। पूरी रात बाकी है।
मम्मी: मुस्कुराते हुए बोलीं। अब बस। और फिर नाइटी पहन कर मेरी मम्मी अंकल के बगल में सोफे पर लेट गईं। सोफा बड़ा था। इस पर दोनों आ गए। लेकिन चिपकर। जैसे ही मेरी मम्मी अंकल के बगल में लेटीं। तो अंकल ने अपना हाथ मेरी मम्मी के पेट पर और नाभि पर घुमाने लगे।
मम्मी: योगेश जी आपको इस बात का कोई सॉल्यूशन निकालना पड़ेगा। कब तक ऐसा चलेगा।
अंकल: किस बात का सॉल्यूशन।
मम्मी: इस बात का। कब तक हम कंडोम इस्तेमाल करेंगे।
अंकल: मैं तो बिना कंडोम के ही। पर तुम ही कहती हो कंडोम यूज करो।
मम्मी: तो क्या करूँ। मैं प्रेग्नेंट हो गई। तो वो मादरचोद नामर्द नामर्द मुझे कहीं का न छोड़ेगा।
अंकल: तो क्या करें।
मम्मी: मैं चाहती हूँ उसका लंड के लिए कोई ऐसी मेडिसिन हो। जिसे देने पर उसका लंड खड़ा हो जाए। और चूत में घुसते ही उसका पानी निकल जाए। और लंड तभी खड़ा हो जब उसे मेडिसिन दी जाए।
अंकल: तो इसका मतलब तू मेरे लंड से बोर हो गई है।
मम्मी: नहीं। मैं आपके लंड को हमेशा अपनी चूत में रखना चाहती हूँ। और बिना कंडोम के चुदाई करवाना चाहती हूँ। इसलिए।
अंकल: तो मैं समझा नहीं।
मम्मी: मैं चाहती हूँ वो मुझे महीने में सिर्फ एक बार मेरी चूत में लंड घुसाए। और घुसाते ही उसका पानी निकल जाए। और मैं तुरंत आई पिल ले लूँगी। और उसे महीने में एक बार टैबलेट दूँगी। जिससे उसका लंड खड़ा हो जाए।
अंकल: तो उससे क्या होगा।
मम्मी: होगा ये कि मैं आपसे रोज बिना कंडोम के चुदूँगी। और मैं प्रेग्नेंट हो गई। तो वो समझेगा मैं उसी से प्रेग्नेंट हुई हूँ।
अंकल: तेरा दिमाग बहुत चलता है वर्षा।
मम्मी: आखिर मम्मी किसकी हूँ।
अंकल: क्या तू मेरे बच्चे को जन्म देगी।
मम्मी: पहले उसका लंड खड़ा हो। फिर अंकुश कहेगा तो दूँगी। नहीं तो नहीं दूँगी।
अंकल: ठीक है।
मम्मी: अब जल्दी से किसी डॉक्टर से मिलो। और मेडिसिन का पता करो।
अंकल: हम्म। हाँ जान। मैं सोच रहा हूँ इसका कोई सॉल्यूशन। पर ये इतना आसान नहीं है। ऐसी कोई मेडिसिन होगी मुझे नहीं लगता। इसलिए तुम थोड़ा सब्र करो।
मम्मी: पर योगेश जी। ऐसे ही तो जवानी का मजा ही नहीं ले पाएँगे। अब देखिए कैसे हमें प्यार कितनी सावधानी से किया है कंडोम के साथ। कहीं मैं प्रेग्नेंट न हो जाऊँ। आप ही बताएँ। क्या ये कोई पाप है सेक्स करना। मैं पिछले 20 साल से तड़प रही हूँ लंड के लिए। और अब 33 की उम्र में मुझे आपका लंड मिला। वो भी अंकुश ने दिलवाया। नहीं तो उस मादरचोद नामर्द नामर्द ने मेरी जिंदगी बर्बाद कर दी थी। एक शादीशुदा होकर भी लंड के लिए तड़पी हूँ। और पति के होते हुए भी मुझे आपके साथ सोना पड़ रहा है।
अंकल: यार मैं समझता हूँ सारी बात।
मम्मी: योगेश जी कुछ कीजिए। पता है उसके साथ उसके बिस्तर पर सोते मुझे कितनी आत्मग्लानि महसूस हो रही थी। एक नामर्द के साथ सोने से अच्छा है पराये मर्द के साथ। आप तो जानते ही हैं कि एक शादीशुदा औरत को कोई गैर मर्द हाथ भी लगा दे। तो इस औरत के लिए कितनी पीड़ाजनक बात है। आप ही बताएँ। पर क्या करूँ। उस मादरचोद नामर्द नामर्द ने मेरी जिंदगी बर्बाद कर दी। इसलिए मुझे आपकी रखैल बनना पड़ा। अब तो उस मादरचोद नामर्द नामर्द की शक्ल से भी मुझे नफरत है। पर क्या करूँ। मुझे आपका वीर्य अपनी चूत में चाहिए बिना कंडोम के। इसलिए कह रही हूँ। महीने में एक बार उस मादरचोद नामर्द नामर्द का लंड खड़ा होना जरूरी है।
अंकल: हम्म। तुम ठीक कहती हो जान। मुझे थोड़ा टाइम दो। मैं सब ठीक कर दूँगा। भरोसा रखो मुझ पर।
और इतना कहते ही अंकल ने मेरी मम्मी को अपनी बाँहों में भर लिया। और मेरी मम्मी को चूमने लगे। तो मेरी मम्मी बोलीं।
मम्मी: अब मुझे चलना चाहिए। वो मादरचोद नामर्द नामर्द कहीं उठ न जाए।
अंकल: वर्षा इसको उठा देना। उनका इशारा वहाँ पड़े यूज्ड कंडोम की ओर था। मेरी मम्मी ने उनके सामने उसे उठाया। और देख कर उनसे बोलीं। हाय राम। आपका कितना निकलता है।
अंकल: क्यों। आज पहली बार निकला क्या। पिछले 6 महीनों में नहीं निकला।
मम्मी: हाँ। पिछले 6 महीनों से ही इतना निकल रहा है। और बोलीं। इसको अंकुश बाहर फेंक देगा। आप अंकुश से बोल देना। उसे भी तो पता चलेगा आप उसकी मम्मी को कितना प्यार करते हो। जब वो आपके वीर्य से भरे कंडोम देखेगा। और मम्मी ने वो कंडोम को सोफे के सामने रखी टेबल पर रख दिया। जिसमें कोई भी हॉल में आने वाला जरूर देखेगा।
अंकल: ठीक है। मैं उसे बोलता हूँ।
मम्मी: मेरे रूम में जाने के बाद बोलना।
अंकल: नहीं। रूम में कहाँ जा रही हो। आज पूरी रात मेरे साथ अंकुश के रूम में सोना।
मम्मी: और उस नामर्द को कौन संभालेगा।
अंकल: अंकुश।
मम्मी: पहले आप देखकर आओ। अंकुश सो रहा है या जाग रहा है।
अंकल: वो जाग रहा है।
मम्मी: मैं उसके सामने आपके साथ नहीं जा सकती हूँ।
अंकल: मैं उससे बोल देता हूँ। वो सोने का नाटक कर लेगा। फिर तुम मेरे साथ उसके अंदर वाले रूम में चलना।
और फिर अंकल अंदर आए। और मुझे सोने का नाटक करने को बोला। और वापस चले गए। मैं आँखें बंद करके लेट गया। और कुछ ही देर में अंकल मम्मी को अपनी गोद में उठाकर लाए। और मेरे रूम में आए। और फिर मम्मी को मेरे ही बेड पे मेरे बगल में डाल दिया। मम्मी नाइटी में थीं। और अंकल फुल न्यूड एकदम नंगे थे।
मम्मी: ये क्या है। शर्म करो। और अंदर वाले रूम में दौड़कर चली गईं। फिर अंकल भी हँसते हुए अंदर चले गए। और पर्दा लगा दिया। लेकिन दरवाजा नहीं लगाया। फिर मैं भी सो गया। अभी 1 से ज्यादा टाइम हो गया था।
फिर सुबह 6 बजे मेरी नींद खुली। तो मैंने देखा अंदर वाले से मेरी मम्मी की आह... ओह... की आवाज आ रही थी। मैं समझ गया अभी तक चुदाई चालू है। और मैं हॉल में गया। वहाँ अंकल की अंडरवियर पड़ी थी। और टेबल पर यूज्ड कंडोम भी था। दोनों को उठाकर लाया।
फिर करीब 7 बजे अंकल रूम से निकले एकदम नंगे। और अंकल ने अपने कपड़े पहने। और मुझे बाय करके अपने घर चले गए। और मैं अंकल को निकाल कर पापा के रूम में गया। पापा सो रहे थे। मैंने उनके रूम की कुंडी भी खोल दी थी। जो कि रात को अंकल ने लगाई थी। फिर मैं वापस अपने रूम में आया। तो मम्मी अभी भी अंदर वाले रूम में थीं। फिर मैंने मोबाइल में कैमरे में देखा। तो मम्मी बेड पर एकदम नंगी लेटी हुई सो रही थीं। क्योंकि पूरी रात चुदी थीं। और 4 कंडोम भी थे यूज्ड। रूम की हालत कैसी होगी ये आप जानते ही होंगे। मैं हॉल में आ गया था।
फिर करीब 8 बजे पापा उठे। और उन्होंने मम्मी के बारे में पूछा। तो मैंने बताया तबियत खराब है। तो पापा मम्मी के पास जाने लगे। तो मैंने कहा। मम्मी को सोने दो। फिर पापा ऑफिस चले गए। फिर मम्मी करीब दो बजे तक सोती रहीं। और फिर अंदर वाले रूम से नाइटी पहन कर निकलीं। और बाहर वाले रूम में मैं बैठा था। मुझे देखकर मम्मी बिना कुछ बोले सीधा किचन में चली गईं। शायद वो बोलती भी तो क्या बोलतीं। सब कुछ जानते हुए भी हम माँ बेटे अनजान बन रहे थे। फिर मम्मी मेरे रूम में खाना लाईं। और हम दोनों ने खाना खाया। एक कंडोम अभी भी मेरे रूम में ही बेड पर रखा था। जो मैंने नहीं फेंका था। मैं उसे हॉल में से उठाकर लाया था। वो मुझे भी दिख रहा था। और मम्मी को भी। पर हम उस पर कोई बात नहीं कर रहे थे। फिर खाना खाने के बाद मम्मी बोलीं। बेटा तेरे रूम की सफाई कर देती हूँ।
मैं: नहीं मम्मी। मैं कर लूँगा। आप आराम करो।
मम्मी: बेटा अंदर वाले रूम की कर देती हूँ।
मैं: नहीं मम्मी। मैं खुद कर लूँगा। आप आराम कीजिए। और मम्मी अपने रूम में चली गईं। फिर मैंने दोनों रूम की सफाई की। अंदर वाले रूम में चादर भी चेंज की। क्योंकि उसपर मम्मी अंकल का प्रेम रस था। और मैंने सभी कंडोम को फेंक दिया। फिर मैं स्टडी करने लगा। और फिर एक घंटे बाद मैं मम्मी के रूम में गया।
मम्मी: बेटा सफाई कर दी।
मैं: हाँ मम्मी। और मैंने अंदर वाले रूम की बेडशीट चेंज कर दी है। और वो वॉशिंग मशीन में डाल दी है।
मम्मी: ओके बेटा। और मम्मी ने मुझसे कहा। बेटा मेरे मोबाइल में गेम खेलेगा।
मैं: नहीं मम्मी।
मम्मी: खेल ले। और मुझे मोबाइल लेकर अपने रूम में आया। और मैंने देखा उसमें लास्ट कॉल अंकल की है। फिर मैं रिकॉर्डिंग सुनने लगा।
मम्मी ने कॉल किया था।
मम्मी: हेलो योगेश जी।
अंकल: बोलो मेरी जान। क्या हुक्म है इस गुलाम के लिए मालिका-ए-हुस्न।
मम्मी: मुस्कुरा कर। क्या जी। आपको हर वक्त रोमांस ही सूझता है। कहीं आपके पास कोई तो नहीं है।
अंकल: अरे नहीं यार। बोलो क्या बात है।
मम्मी: योगेश जी मुझे बहुत डर लग रहा है। मैं आज सुबह उठी नहीं थी। तो ऑफिस चला गया वो मादरचोद नामर्द नामर्द। अब पता नहीं ऑफिस से आने के बाद क्या पूछेगा। मुझे डर है कहीं उसने देखा तो नहीं होगा। हमने हॉल में ही चुदाई की थी रात को।
अंकल: अरे नहीं यार। ऐसा कुछ नहीं। तुम खामखा चिंता कर रही हो। और बताओ क्या कर रही हो।
मम्मी: कुछ नहीं। बस अभी काम से फ्री हुई हूँ।
अंकल: अच्छा। अगर फ्री हो तो सरकार का हुक्म हो तो बंदा आ जाए।
मम्मी: आप भी ना योगेश जी। बस।
अंकल: यार एक पप्पी तो दो ना।
मम्मी: आप भी ना। आपको हर वक्त बस एक ही काम।
अंकल: यार दो ना एक पप्पी।
मम्मी: आप मानोगे नहीं। आपका दिल नहीं भरता क्या। सारी रात तो करते रहते हैं। और मेरी मम्मी ने अपने होठों को गोल कर मुआँ मुआँ करते हुए बस।
अंकल: हाय डार्लिंग। तुम्हारी यही अदा तो जान ले लेती है। देखो इतने में पैंट में खड़ा हो गया।
मम्मी: मुस्कुराते। क्या योगेश जी आप भी ना।
अंकल: सच मेरी जान। अगर विश्वास न हो तो आ कर देख लो कैसे खड़ा है ये।
मम्मी: आपका तो हर वक्त खड़ा ही रहता है। अगर अभी खड़ा है ना तो खड़ा ही रहने दीजिए। अच्छा अब मैं फोन रखती हूँ।
अंकल: यार इतनी जल्दी भी क्या है। सुनो यार। एक उसकी भी पप्पी दो ना।
मेरी मम्मी समझ तो गई थीं कि अंकल मेरी मम्मी से मेरी मम्मी की चूत की पप्पी माँग रहे हैं।
मम्मी: फिर भी अनजान बनते हुए। अब और किसकी दूँ पप्पी।
अंकल: यार इतनी भी नासमझ नहीं हो। उसकी जो तुम्हारी टाँगों के बीच है। एकदम गुलाबी गुलाबी।
मम्मी: योगेश जी आप नहीं सुधरोगे। उसकी पप्पी तो आपको रात को ही मिलेगी। और उसकी पप्पी ऐसे ही मिलती। उसकी पप्पी लेने के लिए खुद पास आना पड़ता है। समझे बच्चू।
अंकल: यार सच में तुम्हें तो मूड बना दिया।
मम्मी: आपका मूड कब नहीं होता।
अंकल: यार ऐसा न करें। कहीं घूमने चलें।
मम्मी: घूमने नहीं। मुझे थोड़ी सी शॉपिंग करनी है।
अंकल: सरकार। हुक्म कीजिए। क्या लेना है आपको।
मम्मी: वो मेरी ब्रा पर पैंटी सब टाइट हो गई।
अंकल: वो टाइट वो कैसे।
मम्मी: आप सारा सारा दिन और रात इनको चूसते और दबाते रहोगे। तो इनका साइज बढ़ेगा नहीं क्या। जानते हैं 6 महीने पहले इनका साइज 32 था। लेकिन पिछले 6 महीनों में आपने इनका साइज बड़ा दिया है। और मुझे लगता है इनका साइज 36 हो गया है। पता है उस मादरचोद नामर्द नामर्द को मेरी इनको देख कर शक होता है कि मेरा साइज अचानक इतना कैसे बढ़ गया। पूछ भी रहा था। वर्षा तुम्हारा साइज कुछ बढ़ नहीं गया।
अंकल: अच्छा यार। मैं कोई बहाना बना कर आता हूँ। और फिर चलिए शॉपिंग। तुम तैयार रहना।
मम्मी: जी।
अंकल: वर्षा वैसे तुमने बताया नहीं। तुमने वो कंडोम फेंके या नहीं।
मम्मी: अंकुश रूम की सफाई कर रहा है। वो फेंक देगा।
अंकल: और बेडशीट। उसपर भी रात को कंडोम से वीर्य फैल गया था।
मम्मी: वो अंकुश को दिख जाएगा। और वो खुद ही चेंज कर देगा।
अंकल: क्या बात है। मजे हम करें। और सफाई अंकुश करे।
मम्मी: वो मेरा बेटा है। वो खुद मुझे काम नहीं करने देता है। वो जानता है आपने पूरी रात मुझे चोदा है। इसलिए उसने खुद मुझसे कहा। वो सफाई करेगा। मैंने कहा मैं कर दूँगी। तो बोला। मम्मी आप आराम करो। और पता है आपने हॉल में जो कंडोम यूज किया था। अंकुश उसे अपने रूम में ले गया था। उसमें आपका रस भरा था। वो मैंने देखा था। पर ना उसने कुछ कहा। ना मैंने कुछ कहा।
अंकल: क्या बात है। बेटा सफाई करे। मम्मी चूत फटवाए।
मम्मी: हूँ... मेरा राजा बेटा है वो।
अंकल: ठीक है। अब तू रेडी हो जा। और अंकुश के साथ आ जाना शॉपिंग के लिए।
मम्मी: नहीं। मैं उसे डिस्टर्ब नहीं करूँगी। उसे स्टडी करने दो। आप आ जाना। हम पीछे वाले गेट से चलेंगे।
फिर कॉल कट हुई।
फिर मैं उठकर मम्मी के रूम में गया। तो मम्मी रूम में कपड़े चेंज कर रही थीं।
मैं: मम्मी कहाँ जा रही हो।
मम्मी: हाँ वो। शॉपिंग के लिए जा रही हूँ।
मैं: मम्मी मैं चलूँ।
मम्मी: बेटा यदि तू चलना चाहे तो चल।
मैं: मम्मी आप अकेली जा रही हो।
मम्मी: क्यों बेटा।
मैं: मम्मी आप अंकल को साथ ले जाओ।
मम्मी: नहीं बेटा। कोई देखेगा तो क्या सोचेगा। और वैसे भी वो मुझे परेशान करते हैं।
मैं: मम्मी अंकल आपको परेशान नहीं करेंगे। और आप किसी और की चिंता मत करो। आप घर के पीछे वाले गेट से चली जाना। मार्केट में जरूरी नहीं कि कोई आपको पहचानेगा।
मम्मी: तू कह रहा है तो चली जाऊँगी योगेश जी के साथ।
मैं: मैं अंकल को बोल दूँगा। फिर मैं अंकल को कॉल किया। और अंकल ने कहा वो कुछ देर में आ जाएँगे।
फिर मैं रूम से बाहर आया। तो मम्मी भी मेरे साथ हॉल में आ गईं।
मैं: मम्मी आप रूम में रहिए।
मम्मी: नहीं बेटा। मैं रूम में रहूँगी तो योगेश जी आते ही मुझे परेशान करेंगे।
मैं: मम्मी अंकल आपसे प्यार करते हैं। और आप अंकल के प्यार को एक्सेप्ट नहीं कर रही हो।
मम्मी: बेटा मैं तुझसे पिछले 6 महीनों से बोल रही हूँ। मैं अपने बदन को योगेश को नहीं सौंपूँगी। और तू है कि मुझे योगेश से नंगी करवाकर योगेश के साथ सुलाना चाहता है।
मैं: मम्मी आपको प्यार की जरूरत है। पापा आपको प्यार नहीं करते हैं।
मम्मी: बेटा।
मैं: मम्मी आप रूम में जाइए।
मम्मी: नहीं। मैं योगेश को अपना जिस्म नहीं सौंप सकती।
फिर तभी अंकल आ गए।
मैंने पीछे वाला गेट खोला। तो अंकल ने मुझे देखा। फिर मुझे रूम में जाने का इशारा किया। और जैसे ही मैं रूम में जाने को पलटा। तो अंकल ने मम्मी को अपनी बाँहों में भर लिया। और चूमने लगे। अंकल ने मेरे रूम में जाने का वेट भी नहीं किया। फिर मैं रूम में चला गया। और अंदर से देखने लगा।
मम्मी: क्या आप भी। अंकुश के सामने। पहले उसे रूम में पहुँच जाने देते। फिर चूम लेते। अब चलो शॉपिंग पर।
अंकल: यार बाद में चलते हैं। अभी कुछ बैठ कर प्यार करते हैं। एक राउंड हो जाए। तो मेरी मम्मी ने कहा।
मम्मी: नहीं जी। वो सब रात को करेंगे। रात को आप एक राउंड ज्यादा कर लीजिएगा। मैं कभी मना करती हूँ क्या।
अंकल: यार अभी राउंड नहीं तो कम से एक चुम्मी तो दो ना।
मम्मी: मुस्कुरा कर। अपने गाल उनके होठों के पास ले जा कर। लीजिए।
अंकल ने मेरी मम्मी के गुलाबी गालों को चूमा। और मेरी मम्मी से बोले।
अंकल: वर्षा नीचे जो तुम्हारी टाँगों के बीच में है। उसकी भी तो चुम्मी लेने दो। तुम फोन पे कह रही थीं। उसकी चुम्मी लेने के लिए पास आने पड़ेगा।
मम्मी: उसकी चुम्मी अभी आपको नहीं मिलेगी। रात को जितनी चाहें ले लेना। अब चलिए ना। और फिर मम्मी ने मुझे आवाज दी। तो मैं हॉल में आया।
मम्मी: बेटा तू भी चल।
मैं: नहीं मम्मी। आप जाइए। मुझे स्टडी करनी है। फिर मम्मी अंकल चले गए। फिर शाम को 7 pm पर वापस आए। और आते ही मम्मी ने शॉपिंग का बैग मेरे रूम में रखा। और किचन में चली गईं। मैंने देखा। ये बहुत ही सेक्सी ब्रा पैंटी हैं। और शेविंग किट भी। फोम रेजर ब्लेड ब्रश क्रीम। यानी मम्मी अपनी चूत की शेविंग करेंगी या करवाएँगी। और उसमें कंडोम भी थे। और आईपिल्स। और वियाग्रा टैबलेट। यानी कि सब कुछ था चुदाई का सामान। और मैंने बैग में स्लीपिंग टैबलेट देखी। यानी मम्मी पापा को सुला देंगी। फिर चुदाई। मम्मी ने मुझे किचन से आवाज दी।
मैं किचन में गया।
मम्मी: बेटा उस बैग को तू छुपा दे। तेरे रूम में। नहीं तो तेरे पापा देख लेंगे। तो सवाल पूछेंगे। तेरे पास पैसे कहाँ से आए।
मैंने कहा। ओके मम्मी। और बैग में से सभी सामान निकालकर अपनी अलमारी में रख दिया। लेकिन मैंने मम्मी को नहीं बताया कि मैंने बैग खाली कर दी। फिर रात को पापा भी आ गए। फिर खाने के टाइम पर मम्मी ने मुझसे कहा। बेटा वो सामान कहाँ है।
मैं: मम्मी मेरी अलमारी में है।
मम्मी: बेटा तूने सामान खोलकर देखा क्या।
मैं: जी मम्मी।
मम्मी: बेटा उसमें तूने क्यों खोला। उसमें मेरा पर्सनल सामान था।
मैं: जानता हूँ मम्मी। उसमें क्या गलत है। उसमें मम्मी आपके कपड़े (मैंने ब्रा पैंटी नहीं बोला)। आपके टैबलेट। और शेविंग किट है। मैं भी यूज करता हूँ शेविंग किट। इसमें गलत किया है मम्मी।
मम्मी: बेटा उसमें और भी बहुत कुछ है।
मैं: हाँ मम्मी। पता है। वो सामान हर कपल यूज करता है।
मम्मी: मुस्कुराते हुए। नालायक। शर्म नहीं आती।
मैं: मम्मी आप भी। अब मैं बच्चा नहीं हूँ।
मम्मी: जानती हूँ। और आज योगेश जी मुझे कंप्यूटर सिखाएँगे तेरे रूम में। पर मैंने मना कर दिया है।
मैं: मम्मी आप सीखना कंप्यूटर। पर मेरे रूम में नहीं। बल्कि अंकल के घर जाकर।
मम्मी: नहीं बेटा। तेरे पापा घर पर हैं।
मैं: मम्मी मैंने आपका बैग देखा। उसमें नींद की टैबलेट है। आप पापा को खाने में मिला दो।
मम्मी: नहीं बेटा।
मैं: मम्मी आपको मेरी कसम है। आप अंकल के घर जाना कंप्यूटर सीखने।
मम्मी: ठीक है। मुझे नींद की टैबलेट लाकर दे।
मैं: जी मम्मी। फिर मैंने मम्मी को नींद की 2 गोली दी।
मम्मी: 2 क्यों। एक ही बहुत है।
मैं: आप दो मिला दो।
मम्मी: ठीक है।
फिर पापा मैंने मम्मी ने साथ में खाना खाया। लेकिन मम्मी ने मुझसे कहा था। बेटा दही मत खाना।
मैं समझ गया। दही में मम्मी ने टैबलेट मिला दी है।
फिर पापा ने खाना खाते ही कहा। बेटा मुझे बहुत तेज नींद आ रही है। और पापा हॉल में ही सोने लगे।
मैंने कहा। पापा रूम में चलो। और पापा रूम में जाते ही सो गए।
फिर मम्मी ने कहा। बेटा मैं किचन साफ करती हूँ।
मैंने कहा। नहीं मम्मी। आप जल्दी जाइए कंप्यूटर सीखने।
मम्मी: मुस्कुराते हुए। बहुत जल्दी है मम्मी को भेजने की।
मैं: हाँ मम्मी। जाइए। नहीं तो मैं अंकल को बुला लूँगा। और वो आपको जबरदस्ती ले जाएँगे।
फिर मम्मी।
मम्मी: जाती हूँ। और मम्मी सीढ़ियों से होते हुए अंकल के घर चली गईं। और मैं भी अपने रूम में जाकर सो गया। और सुबह करीब 6 बजे मम्मी का कॉल आया। बोलीं।
मम्मी: बेटा गेट खोल। सीढ़ियों।
मैंने गेट खोला। सामने मम्मी थीं। लेकिन ये क्या। मम्मी गई थीं साड़ी में। आईं नाइटी में। और मम्मी को देखकर कोई भी कह सकता है कि मम्मी पूरी रात बहुत ही जबरदस्त तरीके से चुदी हैं। ये क्या। मम्मी की चाल भी बदल गई। मम्मी ने मुझसे कहा। बेटा नींद आ रही है। तेरे रूम में सो जाऊँ।
मैं: हाँ मम्मी।
फिर मम्मी मेरे साथ मेरे रूम में आईं। और आते ही नाइटी निकाल दीं। और बेड पर रख दी। मम्मी ने नाइटी के अंदर सिर्फ पैंटी पहनी थी। नाइटी उतारते ही मम्मी के बूब्स नंगे हो गए।
ये क्या। मम्मी के बूब्स तो लाल हो रहे थे। उनमें से खून चमक रहा था। जैसे काटे हों दाँतों से।
मैंने मम्मी से इस बारे में कुछ नहीं पूछा। लेकिन मम्मी देख रही थीं। मैं उनके बदन को देख रहा हूँ। मम्मी के सिर्फ बूब्स ही नहीं। सब कुछ लाल थे। गोरा बदन से लाल बदन। मैंने देखा मम्मी की पीठ पर निशान था। मैं समझ गया। अंकल ने आज मम्मी पर बेल्ट यूज किया है। आज तो मम्मी की चीखें बहुत बोली होंगी दर्द से। लेकिन मम्मी को भी ऐसी चुदाई में मजा आता है। मम्मी ने भी मुझे नहीं बोला। सिर्फ इतना कहा। बेटा एक पेन किलर टैबलेट दे दे।
मैंने कहा। मम्मी।
मैं: मम्मी मेरे पास नहीं है।
मम्मी: कल मार्केट से लाई थी। तेरी अलमारी में होगी। देख।
फिर मैंने अलमारी में देखा। तो उसमें टैबलेट थी। पर मैंने कल देखी नहीं थी। मैंने एक टैबलेट मम्मी को दी। और मम्मी टैबलेट लेकर बेड में ओनली पैंटी में ही लेट गईं। और सो गईं। फिर 8 बजे मम्मी उठीं। और बाथरूम गईं। और मुझसे बोलीं। मेरे रूम से मेरी दूसरी नाइटी और टॉवल ले आ। और।
मैं: क्या मम्मी। ब्रा पैंटी भी लाऊँ।
मम्मी: नहीं बेटा। तेरी अलमारी में रखी। कल लाई थी मार्केट से। वो पहन लूँगी।
फिर मैं मम्मी के रूम में गया। और पापा अभी भी सो रहे थे। फिर मैं मम्मी की टॉवल नाइटी लेकर मम्मी को दी। और मम्मी नहाकर आईं। और ओनली टॉवल में। जो कि उनकी कमर पर था। बूब्स नंगे थे। मम्मी की चूत नजर नहीं आ रही थी।
फिर मम्मी ने मेरे रूम की अलमारी खुद खोली। मुझे खोलने से मना कर दिया। और उसमें से एक सेट ब्रा पैंटी निकाली। पिंक थी दोनों। और बहुत ही छोटी थी। शायद मम्मी ने अंकल के लिए पहनी है।
फिर मम्मी ने पैंटी को मेरे सामने ही अपनी टाँगों में डाला। पहले एक टाँग उठाकर उसमें पैंटी डाली। फिर दूसरी टाँग उठाकर। और मम्मी पैंटी को ऊपर तक लाईं। लेकिन अपनी टॉवल नहीं हटाईं। और ऊपर तक लगा गईं। और टॉवल ने नीचे से ही पैंटी पहन ली। और टॉवल हटा दी। लेकिन मुझे चूत नजर नहीं आई थी।
फिर मम्मी ने अपनी ब्रा पहनी।
मैंने देखा। ब्रा ओनली निप्पल को ही छुपा रहे थे। ब्रा बहुत छोटी थी। सिर्फ ब्रा ही नहीं। पैंटी भी बहुत छोटी थी। वो मम्मी की चूत के बाल नजर आ रहे थे। फिर मम्मी ने अपनी नाइटी को पहन लिया। और मेरे पास आकर किस करके बोलीं। बेटा पूरी रात जागी हूँ। बेटा सिर्फ तेरी खुशी के लिए। और मुस्कुराते हुए किचन में गईं। फिर पापा को चाय पिलाई। और मुझे। फिर पापा ऑफिस जाने की तैयारी करने लगे। तो पापा हॉल में लैपटॉप पर कुछ काम करने लगे। और मम्मी किचन में थीं।
अंकल का मैसेज आया। मैं सीढ़ियों में खड़ा हूँ।
मैं: पापा हॉल में हैं।
अंकल: तू गेट खोलकर मुझे तेरे रूम में छिपा देना।
फिर मैंने पापा से कहा। पापा मुझे कुछ पैसे चाहिए।
पापा: मेरे पर्स रूम में है। जाकर ले आ।
मैं: पापा प्लीज आप ले आइए।
पापा: ठीक है। लाता हूँ। और जैसे ही पापा रूम में गए। मैंने सीढ़ियों का गेट खोला। और अंकल सीधे मेरे रूम में चले गए। और फिर पापा भी वापस हॉल में आ गए पर्स लेकर। लेकिन पापा अंकल को नहीं देख पाए।
पापा: कितने चाहिए।
मैं: 2000।
पापा: ले। और फिर लैपटॉप में काम करने लगे।
अंकल ने फिर मैसेज किया। वर्षा को भेज।
मैं किचन में गया। और मम्मी से बोला। मम्मी अंकल आपसे बात करना चाहते हैं।
मम्मी: बेटा अभी तेरे पापा हैं। बाद में बात करूँगी।
मैं: एक बार कर लो।
मम्मी: नहीं।
मैं जानता था। यदि मैं मम्मी से कहूँगा। मम्मी अंकल रूम में हैं। तो मम्मी मना कर देतीं।
फिर मैंने बहाना ढूँढा।
मैं: मम्मी मेरे रूम में बेडशीट चेंज कर दो।
मम्मी: तेरे पापा के जाने के बाद कर दूँगी।
मैं: मम्मी प्लीज अभी कर दो।
मम्मी: ठीक है। जाती हूँ। लेकिन तूने रूम में योगेश जी को तो नहीं छिपा रखा।
मैं: नहीं मम्मी। रूम में कोई नहीं है।
मम्मी: जाती हूँ। और मम्मी मेरे रूम में गईं। तो मैं भी मम्मी के पीछे पीछे गया। और रूम में जाते ही मम्मी।
मम्मी: बेटा ला बेडशीट।
मैं: मम्मी अंदर वाले रूम में रखी है। आप ले लो।
मम्मी: तू ला दे।
मैं: मम्मी आप ले आओ।
फिर मम्मी जैसे ही पर्दा हटाकर अंदर वाले रूम में गईं। तो वहाँ अंकल थे। और अंकल को देखते ही। आप यहाँ।
अंकल: हाँ जान। और अंकल मम्मी को चूमने लगे।
मम्मी: योगेश जी क्या कर रहे हो। आप यहाँ कैसे आए। अंकुश ने मुझसे झूठ बोला।
अंकल: मैंने ही उससे कहा था। तुझे अंदर भेजने के लिए।
मम्मी: मैं अंकुश को अभी बताती हूँ। मम्मी से झूठ बोला।
अंकल: उस बेचारे को क्यों। उसने तो अच्छा काम किया है।
मम्मी: रुकिए योगेश जी। अभी नहीं। अभी वो मादरचोद नामर्द नामर्द बाहर है। लैपटॉप पर काम कर रहा है। रात को करेंगे।
अंकल: यार अब तो मुझे योगेश जी मत कहा करो।
मम्मी: क्यों। योगेश जी न कहूँ तो क्या कहूँ।
अंकल: यार अच्छा नहीं लगता।
मम्मी: अच्छा। तो फिर आप ही बताएँ। आपको मैं क्या कहूँ।
अंकल: जैसे औरतें अपने पति को बुलाती हैं। अगर तुम चाहो तो मुझे नाम से बुला सकती हो।
मम्मी: अच्छा जी। अब आपको मेरे मुँह से ये सुनना है।
अंकल: हाँ वर्षा। मुझे कुछ भी कहो। पर योगेश जी मत कहो। भले ही योगेश बोलो। पर जी मत लगाओ मेरे नाम के साथ।
मम्मी: अंकल की आँखों में देख कर मुस्कुरा कर। अच्छा। अगर आप चाहते हैं कि मैं आपको योगेश जी नहीं कहूँ। तो पहले आप इस प्रॉब्लम का हल निकालिए। फिर आप जो कहेंगे करूँगी। जो कहेंगे बोलूँगी। मेरी मम्मी के इतना कहने पर अंकल मेरी मम्मी को चूमते बोले।
अंकल: कौन सी प्रॉब्लम।
मम्मी: उस मादरचोद नामर्द नामर्द का लंड सिर्फ एक बार खड़ा हो जाए। ताकि मैं आपका रस बिना कंडोम के अपनी चूत में लेकर आपके वीर्य से अपनी चूत की प्यास बुझा सकूँ। फिर मुझे प्रेग्नेंसी का डर नहीं लगेगा।
अंकल: सच वर्षा।
मम्मी: मेरी मम्मी ने हाँ में अपना सिर हिला दिया।
अंकल: मैं आज ही किसी डॉक्टर से मिलूँगा।
और फिर मम्मी ने अंकल को किस करने लगीं।
और फिर थोड़ी देर किस के बाद मम्मी बोलीं। अब मैं चलती हूँ। वो बाहर है। और मम्मी अंदर वाले रूम से बोलीं। और बाहर वाले में मेरे सामने आईं। और मुझे गाल पे मुस्कुराते हुए एक चांटा मारा।
मम्मी: शर्म नहीं आती है। मम्मी से झूठ बोलने में।
मैं: सॉरी मम्मी।
मम्मी: इट्स ओके बेटा। चल। और फिर मैं मम्मी बाहर आ गए हॉल में। पापा अभी भी काम कर रहे थे।
फिर पापा बोले। बेटा मैं रूम में जा रहा हूँ। आज मैं ऑफिस नहीं जाऊँगा।
फिर क्या। पापा पूरे दिन घर पे रहे। और बेचारे अंकल को अपने घर जाना पड़ा।
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update 56
पूरे दिन पापा घर पे रहे। और अंकल को घर वापस जाना पड़ा अपने खड़े लंड के साथ।
फिर शाम को पड़ोसी आंटी हमारे घर आईं। और उन्होंने बताया। कल उनके घर प्रोग्राम है। तो सभी का निमंत्रण है। कल सभी को हमारे घर आना है।
तो पापा ने कहा। जरूर आएंगे। और मम्मी ने भी। फिर आंटी हमारे घर से चली गईं। और अंकल के घर जाकर अंकल को भी इनविटेशन दिया।
रात को मम्मी ने खाना बनाया। और मुझसे नींद की एक टैबलेट माँगी। तो मैंने कहा। मम्मी अंकल को बुला लूँगा। वो आपको कंप्यूटर सिखा देंगे।
मम्मी: मुस्कुराते हुए। नहीं। आज मैं सोऊँगी। थोड़ी थकान है।
मैं: ओके मम्मी। फिर ये नींद की गोली क्यों।
मम्मी: तेरे पापा के लिए।
मैं: क्यों मम्मी।
मम्मी: वो जल्दी सो जाएँगे। तो मुझे भी नींद आ जाएगी।
मैं: ओके मम्मी। फिर पापा खाना खाकर सो गए। और मम्मी भी उनके साथ रूम में गईं। और मैं अपने रूम में आकर सो गया।
फिर रात को 12 बजे मेरी नींद खुली। पापा मम्मी की विंडो पे गया। तो देखा। पापा सो रहे हैं। लेकिन मम्मी वहाँ नहीं हैं। फिर मैंने देखा। रूम की कुंडी खुली है। फिर मैं समझ गया। शायद मम्मी अंकल के घर गई होंगी।
मैं सीढ़ियों में गया। तो सीढ़ियों की कुंडी लगी हुई थी। इसका मतलब मम्मी बाहर से कुंडी लगाकर गई थीं।
फिर मैंने अंकल को कॉल किया।
अंकल: हेलो बेटा। हाँफते हुए।
मैं: अंकल मम्मी आपके साथ हैं।
अंकल: हाँ बेटे। और कॉल कट कर दिया।
फिर मैं सो गया। और सुबह 8 बजे उठा। तो देखा। मम्मी पापा के साथ रूम में सो रही थीं।
मम्मी कब आईं। मुझे नहीं पता। फिर मैंने अंकल को कॉल किया। तो बोले। सुबह 6 बजे तक मस्ती के साथ चोदा उसको। मजा आ गया।
मैं: क्या आज दिन में पड़ोसी के घर आओगे।
अंकल: हाँ बेटे।
फिर 11 बजे मम्मी ने पापा से कहा। वो हे पड़ोसी में चलना है प्रोग्राम में। तो पापा बोले। तू अंकुश के साथ चली जा। मुझे आज जरूरी वर्क है। फिर मैं मम्मी पड़ोसी आंटी के घर गए।
आज मम्मी ने एक बहुत ही सुंदर सी साड़ी पहनी थी। हालाँकि साड़ी बहुत ज्यादा रिवीलिंग नहीं थी। पर फिर भी मम्मी साड़ी में एकदम सेक्स डॉल लग रही थीं। मम्मी के उभरे हुए बूब्स, भारी हुई गाँड देखकर अंकल का बुरा हाल हुए जा रहा था। क्योंकि अंकल भी आए हुए थे प्रोग्राम में। बहुत सारी लेडीज आई हुई थीं। वहाँ कई जेंट्स भी थे। लेकिन अंकल तो सिर्फ मम्मी को ही घूरे जा रहे थे। मम्मी भी अंकल को स्माइल कर रही थीं।
मम्मी को पता नहीं चलता कि उनके ब्लाउज का हुक पीछे से टूट गया है। दरअसल पिछले 6 महीनों में। जब से मम्मी की अंकल ने चुदाई करना शुरू किया है। तब से मम्मी के बूब्स का साइज पहले से भी ज्यादा बढ़ चुका है। मम्मी ये तो जानती थीं कि ब्लाउज टाइट हो गया है। पर हुक टूट जाएगा। मेरी मम्मी को अंदाजा नहीं था।
प्रोग्राम में आई एक आंटी। जिन्हें मैं नहीं जानता। वो ये नोटिस कर लेती हैं। और मेरी मम्मी के पास जाकर मेरी मम्मी को ये बताती हैं। हालाँकि मेरी मम्मी के ब्लाउज के ऊपर साड़ी का पल्लू आने के कारण। प्रोग्राम में किसी ने अभी तक नोटिस नहीं किया था।
मेरी मम्मी थोड़ा घबरा जाती हैं। कि कहीं प्रोग्राम में आए जेंट्स लोगों ने देखा न हो। मेरी मम्मी के चेहरे पर पसीना आ जाता है।
फिर मम्मी मुझे आवाज देती हैं। और मुझे बाथरूम में लेकर आती हैं। और मुझसे कहती हैं। बेटा मेरे ब्लाउज का हुक टूटा है।
मैं: मम्मी अब क्या होगा।
मम्मी: बेटा मेरे ब्लाउज के हुक को एडजस्ट कर। किसी तरह।
मैं: कोशिश करता हूँ। लेकिन मम्मी के ब्लाउज का हुक टूट जाने से मम्मी का ब्लाउज बंद नहीं हो पाता।
मम्मी: बेटा अब क्या करूँ।
मैं: मम्मी मैं घर से दूसरा ब्लाउज ले आता हूँ।
मम्मी: नहीं बेटा। साड़ी का मैचिंग ब्लाउज तो यही है। दूसरे ब्लाउज पर साड़ी मैच नहीं करेगी।
मैं: तो क्या करूँ।
मम्मी: बेटा तू इस ब्लाउज को टेलर के पास ले जा। और सही करा ला।
मैं: मम्मी आप बिना ब्लाउज के कैसे रहोगी।
मम्मी: बेटा मैं टॉयलेट के अंदर रहूँगी। तू जल्दी ले आ। सही करा कर।
मैं: मम्मी ठीक है। आप दो।
फिर मम्मी ने अपना ब्लाउज उतारा। और मुझे दे दिया।
फिर मैं ब्लाउज को अपने पैंट की जेब में रखा। और बाहर आया। और अंकल के पास गया। और अंकल के कान में बता दिया। और अंकल मुस्कुराने लगे। और मेरे साथ चल दिए। जहाँ से हम टेलर के पास गए। और ब्लाउज का हुक ठीक करवाया। लेकिन अंकल ने टेलर से कहा। इस ब्लाउज का हुक थोड़ा टाइट करना।
टेलर: क्यों साहब। इससे तो ब्लाउज पहनने में परेशानी होगी।
अंकल: ये मेरी वाइफ का ब्लाउज है। मैं खुद उसे अपने हाथों से पहनाऊँगा।
टेलर: हँसते हुए। ओके साहब।
फिर टेलर ने मेरी मम्मी का ब्लाउज का हुक कुछ ज्यादा ही टाइट कर दिया।
फिर अंकल ने टेलर को पैसे दिए। और हम वापस आए। और गाड़ी से उतरे। तो अंकल ने कहा। ब्लाउज मुझे दे। और अपनी पैंट की जेब में अंकल ने मम्मी का ब्लाउज रख लिया। और मैं समझ गया। अंकल खुद अपने हाथों से मेरी मम्मी को ब्लाउज पहनाएँगे। तो मैं अंकल से बोला।
मैं: अंकल क्या आप मम्मी को ब्लाउज पहनाओगे।
अंकल: बेटा तू बाथरूम के बाहर खड़े रहकर ध्यान रखना। मैं तेरी मम्मी के साथ क्या करूँगा। तू खुद देख लेना। फिर हम दोनों बाथरूम के बाहर गए। जहाँ कोई नहीं था। प्रोग्राम में सभी लोग बिजी थे। मैं बाथरूम के बाहर रुक गया। और अंकल मेरी मम्मी का ब्लाउज लेकर अंदर बाथरूम में जाने लगे। जहाँ मेरी मम्मी बिना ब्लाउज के ब्रा में खड़ी थीं। लेकिन मम्मी ने अंदर से बाथरूम का गेट लगा रखा था।
अंकल ने अपनी पैंट की जेब से मेरी मम्मी का ब्लाउज निकाला। और बाथरूम के दरवाजे पे नॉक करते हैं।
मेरी मम्मी को लगता है कि शायद मैं यानी उनका बेटा अंकुश आ गया हूँ। और मेरी मम्मी अंदर से पुकारती हैं।
मम्मी: हाँ। आ जा अंदर। पहले ही काफी लेट हो।
अंकल भी बिना कुछ कहे गेट खोल कर अंदर चले जाते हैं। जहाँ मेरी मम्मी ब्रा और पेटीकोट में खड़ी हैं। मेरी मम्मी के उभरे हुए बूब्स देखकर अंकल के मुँह में पानी आ जाता है। मेरी मम्मी का संगमरमर सा गोरा बदन अंकल पर कहर ढाने लगता है।
अब मेरी मम्मी की गाँड अंकल की तरफ है। अंकल अपने लंड को मसले बिना रह नहीं पाते। और धीमे से बोलते हैं। जिसे मेरी मम्मी और मैं सुन लेते हैं।
अंकल: (धीमी आवाज में) वर्षा। तेरी गाँड देखकर कंट्रोल नहीं हो रहा है। मन कर रहा है तुझे अभी घोड़ी बनाकर यहीं बाथरूम में चोद दूँ।
मम्मी अंकल की आवाज सुनकर पलटती हैं। और अंकल को देखकर वापस पलट जाती हैं। अब मम्मी की पीठ अंकल की तरफ थी। और मम्मी बोलती हैं।
मम्मी: योगेश जी। तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई। इस तरह तुम बाथरूम में आ गए। कहीं किसी ने देख लिया तो।
अंकल: सॉरी वर्षा। तुमने ही कहा था आने के लिए। मैं तो बस आपका ब्लाउज देने आया था।
मम्मी: लेकिन अंकुश कहाँ है।
अंकल: वर्षा। वो बाहर रुक गया। उसे कुछ काम था। तो उसने मुझे दिया है सही करवाने के लिए। और मैं सही करवाकर ले आया।
मम्मी: लाओ दो मुझे। मैं सब जानती हूँ। तुमने ही उससे ब्लाउज लिया होगा। और तुम उसे बाहर छोड़कर आ गए हो।
मेरी मम्मी पीछे मुड़े बिना ही अपना हाथ फैला कर अपना ब्लाउज माँगती हैं।
अंकल ब्लाउज ले कर मेरी मम्मी की ओर बढ़ते हैं। तभी किसी के कदमों की आहट सुनाई देती है। वाशरूम की ओर आने की।
अंकल झट से मम्मी का हाथ पकड़ कर मेरी मम्मी को बाथरूम में गेट के पीछे छुपा लेते हैं। गेट अभी भी खुला भी नहीं था। और ना ही बंद था। सिर्फ थोड़ा सा लगा था। ताकि मैं देख सकूँ। अंकल ने मुझे दिखाने के लिए गेट बंद नहीं किया था। अंकल को पता था। मैं बाहर रहकर पहरेदारी करूँगा। लेकिन मम्मी को नहीं पता था। मैं बाहर हूँ पहरेदारी के लिए।
मम्मी गुस्से में आ जाती हैं। उन्हें बदनामी का डर था। कोई देख लेगा।
मम्मी: ये क्या बदतमीजी है। योगेश जी। आपकी मेरी इज्जत का कोई ख्याल नहीं है। कोई देख लेगा तो क्या होगा। देखो मुझे किसी के आने का अंदाजा हुआ है। कोई देख लेगा। अब क्या होगा।
अंकल: वर्षा सॉरी। बट प्लीज धीरे बोलिए। कुछ नहीं होगा। भरोसा रखो।
मम्मी: कोई आ रहा है। मुझे किसी के कदमों के आने की आवाज आई है। वाशरूम की ओर आने की आवाज आई थी मुझे। अगर कोई आपको और मुझे इस हालत में देखता। तो दोनों की बदनामी हो जाएगी।
ये सब मेरी मम्मी के मुँह से सुनते हुए। अंकल की नजर मेरी मम्मी के बूब्स पर ही टिकी हुई थी। ये बात मेरी मम्मी भी नोटिस कर लेती हैं। पर इस समय वो कुछ कहना नहीं चाहती थीं। शायद इसलिए।
मेरी मम्मी अपने हाथों से अपने बूब्स ढक लेती हैं ब्रा के ऊपर से ही। और अंकल को जाने के लिए कहती हैं। और अंकल से अपना ब्लाउज खींच लेती हैं।
अंकल मेरी मम्मी का ब्लाउज देना नहीं चाहते थे। पर कुछ कर भी नहीं सकते थे। मम्मी के गुस्से को देखकर। क्योंकि जब मम्मी को गुस्सा आता है। तो अंकल भी मम्मी के गुस्से से डर जाते हैं। ये तो सत्य है। चाहे कितना ही पावरफुल मर्द हो। औरत से तो डरता है। क्योंकि चूत चाहिए। तो औरत से डरना ही पड़ता है। चूत के लिए लंड को झुकना ही पड़ता है।
मेरी मम्मी को ऐसे देख अंकल की हालत बहुत खराब हो चुकी थी। वो इस चांस को वेस्ट नहीं करना चाहते थे। तभी मेरी मम्मी थोड़ा गुस्से में अंकल को फिर से जाने को कहती हैं। और अंकल की तरफ अपनी पीठ कर लेती हैं।
मम्मी हिम्मत कर के अंकल से अपना ब्लाउज देने को कहती हैं। तो अंकल मेरी मम्मी के होठों पर अपनी उँगली रख कर मेरी मम्मी के हाथ में ब्लाउज देते हैं। और मम्मी के कान में फिर से फुसफुसा देते हैं।
अंकल: वर्षा मत बोलो। कहीं आपकी आवाज किसी ने सुनी। तो उसे शक न हो जाए। ये लीजिए आपका ब्लाउज।
मम्मी थोड़ा आगे खिसक जाती हैं। और अपना ब्लाउज ले कर उसे पहनने लगती हैं। पर उसका हुक अंकल ने पहले ही ज्यादा टाइट करा दिया था। इसलिए उसे बाँध नहीं पातीं। मम्मी कोशिश करती रहती हैं। पर ब्लाउज का हुक नहीं लगता। ये अंकल की चाल थी। तभी तो अंकल ने टेलर से टाइट करवाया था।
ये देख कर अंकल बिना कुछ कहे मेरी मम्मी के हाथ हुक से हटा कर ब्लाउज बाँधने की कोशिश करते हैं। और इसी बहाने मेरी मम्मी की मखमली कमर को भी छूने का मौका अंकल को मिल जाता है। हालाँकि अंकल मेरी मम्मी की कमर को रोज मसलते हैं। लेकिन आज बाथरूम में। वो भी किसी और के घर में। एक बार फिर अंकल का लंड मेरी मम्मी की गाँड में धस जाता है।
मेरी मम्मी का शरीर एकदम गरम हो जाता है। जो अंकल भी फील कर लेते हैं।
अंकल: वर्षा। आपको फीवर है क्या।
मम्मी: नहीं। लेकिन क्यों।
अंकल: वर्षा। आपका बदन तो भट्ठी की तरह तप रहा है।
मम्मी: जल्दी से हुक लगा दो। और चुप रहो। (थोड़ा गुस्सा होने का नाटक करते हुए)
अंकल: बताओ वर्षा। आपका शरीर भट्ठी की तरह क्यों तप रहा है।
मम्मी: जब आपका लंड मेरी गाँड में धसेगा। तो यही होगा ना। और अब कुछ नहीं करने दूँगी। जो भी करना है रात को जमकर करना। पूरी रात चोदना मेरी चूत पर। अभी नहीं।
मेरी मम्मी शर्म से पानी पानी हो जाती हैं। अब अंकल का लंड मेरी मम्मी की गाँड के कोने कोने को टटोलना शुरू कर देता है। जिससे मेरी मम्मी की चूत भी न चाहते हुए गीली होने लगती है।
मम्मी: जल्दी लगाओ योगेश जी।
अंकल: वर्षा। आपका ब्लाउज तो आ नहीं रहा आपके। शायद आपका साइज बढ़ गया है।
मेरी मम्मी ये बात सुन कर कुछ बोल भी नहीं पातीं। जिससे अंकल की हिम्मत और बढ़ जाती है। वो ब्लाउज के हुक लगाने के बहाने मेरी मम्मी को अपने शरीर पर खींच लेते हैं। तो मम्मी बोलीं।
मम्मी: अभी कुछ मत करो। रात को करना। प्लीज जल्दी से लगा दो।
अंकल: वर्षा। आपकी ब्रा को थोड़ा एडजस्ट कर दूँ। शायद उससे हुक लग जाए।
मम्मी: जो करना है जल्दी करो। और मुझे जाने दो।
अंकल से भी अब रहा नहीं जाता। वो ब्रा एडजस्ट करने के बहाने अपने हाथ आगे की ओर लाकर सीधा मेरी मम्मी की ब्रा में डाल कर मेरी मम्मी के बूब्स पर रख देते हैं।
मेरी मम्मी ने ये बिल्कुल एक्सपेक्ट नहीं किया था। वो अंकल का हाथ झटक देती हैं। और अंकल को पीछे को धक्का दे देती हैं।
मम्मी: मैंने कहा ना योगेश जी। अभी कुछ मत करो। रात को करना। क्या मैं आपसे चुदवाती नहीं हूँ। जो आप मेरे साथ बाथरूम में कर रहे हो। क्या आपको मेरी बदनामी का डर नहीं है।
अंकल कुछ बोलते उससे पहले ही।
आंटी बाथरूम के बाहर आईं। और मुझे देखकर। बेटा तेरी मम्मी कहाँ है।
मैं: बाथरूम में है।
आंटी: क्या तेरी मम्मी का ब्लाउज का हुक ठीक हो गया।
मैं: जी आंटी। मैं मार्केट से करवा लाया। अभी मम्मी बाथरूम में है।
आंटी: ठीक है बेटा। मैं चलती हूँ। और आंटी वापस चली गईं।
अब मम्मी को भी पता चल गया था। मैं बाथरूम के बाहर उनकी और अंकल की पहरेदारी कर रहा हूँ।
मम्मी: क्या आपने अंकुश को बाहर पहरेदारी पर लगा रखा है।
अंकल: हाँ वर्षा। मैं उसे बाहर पहरेदार पर लगाकर आया हूँ। और तुम हो कि मुझे करने ही नहीं दे रही हो। और डर रही हो। क्या मुझे तुम्हारी इज्जत की कोई परवाह नहीं है।
मेरी मम्मी धीमी आवाज में अंकल को डाँट लगा देती हैं।
मम्मी: तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मुझे छूने की।
अंकल भी सोच में पड़ जाता है। कि साली अभी तो मजे ले रही थी। फिर अचानक क्यों भड़क गई।
अंकल: वर्षा। तुमने ही तो कहा था ब्रा एडजस्ट करने के लिए।
मेरी मम्मी: ब्रा एडजस्ट करने को कहा था। ऐसी गंदी हरकत के लिए नहीं।
अंकल: कैसी गंदी हरकत।
मम्मी: मेरे बेटे को हर पहरेदारी पर लगाने की।
अंकल: तुम्हारे बेटे ने खुद कहा। जाकर मेरी मम्मी को ब्लाउज पहना दो। मैं पहरेदारी करूँगा।
मम्मी: ओह। शर्म नहीं आती। झूठ बोलते हुए। मेरे बेटे को बदनाम कर रहे हो।
अंकल: सच वर्षा।
मम्मी: ठीक है। उसने ब्लाउज पहनने को बोला। मेरे बूब्स पकड़ने के लिए नहीं। फिर क्यों पकड़े मेरे बूब्स।
अंकल: सॉरी वर्षा। वो आपका ब्लाउज फिट नहीं हो रहा ऐसे। मुझसे नहीं हो पाएगा। मैं चला जाता हूँ।
मम्मी: कहाँ जा रहे हो अभी। बाहर आपने बोला। अंकुश ने बोला है ब्लाउज पहनाने को। तो कुछ भी कर के मेरा ब्लाउज बंद कर दो। और मेरे बाहर जाने के बाद ही निकलना यहाँ से।
अंकल: वर्षा। ब्लाउज आपका बहुत टाइट है। मुझसे ऐसे बंद नहीं हो पाएगा।
मम्मी: प्लीज कुछ करो। मैं ऐसे कैसे घर जाऊँगी। और अंकुश ने भी आपको बोला है मुझे ब्लाउज पहनाने को। तो अब पहनाओ।
अंकल: वर्षा। एक तरीका है। पर आप करने नहीं दोगी।
मम्मी: बोलो क्या है।
अंकल: तुम यही कहोगी। अभी मत करो। रात को करना।
मम्मी: बोलो। मैं मना नहीं करूँगी। बस मुझे ब्लाउज पहना दो।
अंकल: वर्षा। तुम अपनी ब्रा उतार दो। फिर शायद ब्लाउज फिट हो जाए।
मम्मी: ऐसे कैसे उतार सकती हूँ तुम्हारे सामने।
अंकल: क्यों। पहले नहीं उतारी।
मम्मी: तुम्हारे सामने ब्रा तो क्या। मैं पूरी नंगी होती हूँ। पर अभी ब्रा उतार दूँगी। तो तुम मेरे बूब्स को निचोड़ने लग जाओगे। और मुझे गरम कर दोगे। फिर मेरी चूत तुम्हारे लंड के बिना शांत नहीं होगी। जो मैं नहीं चाहती अभी। क्योंकि यहाँ कोई भी शक कर सकता है।
अंकल: ठीक है। तुम मेरे सामने ब्रा मत उतारो। मैं तुम्हारे नंगे बूब्स देख लूँगा। तो तुम्हारे बूब्स को निचोड़े बिना मुझे चैन नहीं मिलेगा। इसलिए तुम मुझे अपने बूब्स दिखाए बिना अपनी ब्रा उतार दो।
मम्मी: मैं अपनी ब्रा उतारूँगी। तो तुम कैसे नहीं देखोगे। तुम्हें तो वो दिखेंगे ही। और फिर आप मेरे बूब्स निचोड़कर यहीं मेरी चुदाई भी कर दोगे।
अंकल: वर्षा। मुझे दिखाने को कौन कह रहा है। मेरी तरफ कमर कर के उतार दो। और ब्लाउज पहन लो।
मेरी मम्मी को कुछ समझ नहीं आता। वो वापस मुड़ कर खड़ी हो जाती हैं। पर शर्म के कारण ब्रा नहीं उतारतीं।
अंकल मौका भाप जाता है। और बिना कुछ कहे मेरी मम्मी की ब्रा की स्ट्रैप खोल देते हैं।
हालाँकि अंकल मेरी मम्मी के बूब्स नहीं देख पाते। लेकिन मेरी मम्मी के नंगे बूब्स का अहसास ही अंकल को पागल कर देता है। वैसे भी अभी कुछ समय पहले अंकल ने मेरी मम्मी के बूब्स को अपने हाथों में भर लिया था। जिसका अहसास अभी तक उनके मस्तिष्क में तरोताजा था।
मेरी मम्मी कुछ नहीं कह पातीं। अंकल मेरी मम्मी की ब्रा अपने पास ही रख लेते हैं। और ब्लाउज मम्मी को पहनने के लिए देते हैं।
अंकल मेरी मम्मी के करीब आकर।
अंकल: वर्षा। कितनी सुंदर हो आप। मैं कितना खुशनसीब हूँ। जो मुझे तुम जैसी जवान 33 साल की लड़की मिली हो। तुम्हें देखकर कोई नहीं कहेगा। तुम्हारा 33 की उम्र में एक 19 साल का बेटा है। और अंकल अपने हाथ मेरी मम्मी की कमर पर ही रखे रखते हैं। मम्मी भी शर्म से अपनी नजरें नीची रखकर धीमी आवाज में।
मम्मी: मैं भी कितनी खुशनसीब हूँ। जो मुझे चुदवाने के लिए आप जैसा एक दमदार मर्द मिला। वो भी मुझे मेरे बेटे ने ही दिलवाया। अपनी मम्मी को चुदवाने के लिए। उसे मेरी तड़प प्यास नहीं देखी जाती। और मम्मी को चुदवाने के लिए पहरेदारी कर रहा है।
अंकल: हाँ वर्षा। हम दोनों ही खुशनसीब हैं। जो हमारे साथ अंकुश है।
मेरी मम्मी इस सिचुएशन से जल्दी बाहर निकलना चाहती थीं। इसलिए बोलीं।
मम्मी: अब जल्दी करें। बाहर बेचारा अंकुश खड़ा है। और वो जल्दी जल्दी अपना ब्लाउज पहनने लगती हैं। और हुक लगाने की कोशिश करती हैं। इस बार थोड़ी मेहनत कर के भी हुक नहीं लगता। तो अंकल से बोलती हैं। आप लगाओ। मुझसे नहीं लग रहा है।
तो अंकल मम्मी के ब्लाउज का हुक लगा देते हैं। और हुक लग जाता है।
फिर मम्मी अपनी ब्रा माँगती हैं अंकल से। लाओ मेरी ब्रा दो।
अंकल: क्या इसे अंकुश के सामने लेकर जाओगी। तो तुम्हें शर्म नहीं आएगी।
मम्मी: तो फिर मेरी ब्रा का क्या होगा।
अंकल: मेरा लंड खड़ा है। उसे शांत करना भी जरूरी है।
मम्मी: तो आप मेरी ब्रा में अपना वीर्य भरोगे।
अंकल: मैं तेरी ब्रा में मुठ मारूँगा।
मम्मी: मार लो। और मुझे दे देना। घर आकर। मैं जा रही हूँ।
अंकल: अंकुश को दे दूँगा। वो दे देगा।
मम्मी: नहीं। उसे नहीं। मुझे शर्म आएगी। उसके हाथों से लेना।
अंकल: मैं अंकुश को बोल दूँगा। वो तेरे बाथरूम में डाल देगा।
मम्मी: जैसी आपकी मर्जी। और बाहर आने लगती हैं। फिर रुक जाती हैं।
अंकल: जाओ। रुक क्यों गई।
मम्मी: मुझसे शर्म आ रही है। आप अंकुश से कहिए। वो बाहर से चला जाए। मैं उसके सामने नहीं जाना चाहती हूँ।
फिर अंकल ने मुझे बाथरूम से ही कॉल किया। बेटा चला जा। तेरी माँ को शर्म आ रही है। फिर मैं वहाँ से चला आया प्रोग्राम में। और फिर थोड़ी देर बाद प्रोग्राम में मम्मी भी आ गईं। और मुझे देखकर शर्माने लगीं।
मैं मम्मी के पास आ गया।
मैं: मम्मी आप आ गईं। वो आपका ब्लाउज मैंने आंटी को दे दिया था। मैंने मम्मी से झूठ बोला।
मम्मी: हाँ। और उसी आंटी ने पहना भी दिया। और हँसने लगीं।
मैं: मम्मी। मैं कुछ बोल नहीं पा रहा था।
मम्मी: बेटा तू झूठ बोल रहा है। तूने योगेश जी को दिया था। लेकिन योगेश जी मेरे साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की। लेकिन मैंने उन्हें बाथरूम से निकाल दिया। और खुद ब्लाउज पहना। नहीं तो आज वो मुझे नंगी करके पता नहीं क्या करते।
मैं: सॉरी मम्मी। गलती हो गई।
मम्मी: कोई बात नहीं बेटा। चल घर चलते हैं। और हम घर आ गए।
फिर शाम को अंकल ने मुझे बुलाकर मम्मी की ब्रा दी। जिसमें मुठ भरा था। मैंने लाकर मम्मी की बाथरूम में डाल दी। और मम्मी ने मुझे देख लिया। पर कुछ बोली नहीं।
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शाम को पापा ने कहा। वो थोड़ा लेट आएंगे ऑफिस से। मम्मी ने खाना बनाया। और फिर करीब रात को 8 pm पर लाइट अचानक चली गई। मैंने देखा। मोहल्ले में लाइट आ रही है। फिर मम्मी ने कहा। बेटे किसी इलेक्ट्रीशियन को फोन कर।
मैंने कहा।
मैं: मम्मी। मुझे तो किसी इलेक्ट्रीशियन के बारे में जानकारी नहीं है। शायद अंकल को हो। उनसे पूछूँ।
मम्मी: हाँ। शायद योगेश जी को पता हो।
मैं: मम्मी आप अंकल को कॉल कर दो।
मम्मी: तू ही कर दे।
मैं: मम्मी आप करो।
मम्मी: ठीक है। फिर मम्मी अंकल को कॉल करती हैं।
अंकल: वर्षा। कैसे याद किया। कुछ काम था क्या।
मम्मी: वो मेरे घर की लाइट नहीं आ रही है। कुछ प्रॉब्लम है। शायद तुम किसी इलेक्ट्रीशियन को जानते हो। तो उसे भेज दो।
अंकल: वर्षा। लाइट तो आ रही है। शायद आपके ही घर में कहीं कोई दिक्कत होगी। लेकिन वर्षा। इस समय तो कोई भी नहीं आएगा। रात हो चुकी है।
मम्मी: देखो। अगर कोई आ जाए तो। पूरी रात बिना लाइट कैसे रहूँगी।
अंकल: मेरे घर आ जाओ तुम माँ बेटे। और पूरी रात मस्ती करेंगे।
मम्मी: आप भी। मेरे पति का क्या। वो कैसे सोएँगे।
अंकल: ठीक है। मैं ही आता हूँ। और देखता हूँ क्या प्रॉब्लम है।
फिर अंकल आते हैं। मम्मी ने मोबाइल की टॉर्च जला रखी थी। और अंकल मम्मी को सामने देख अंकल अपने होश खो बैठते हैं। आज मम्मी बेहद खूबसूरत ड्रेस में थीं। अंकल ने मेरी मम्मी को इस तरह के कपड़ों में पहले भी कई बार देखा है। लेकिन अंकल जब भी मम्मी को इन कपड़ों में देखते हैं। उनका लंड खड़ा हो जाता है। आज मम्मी ने एक फ्रॉक पहनी थी। जिसमें कंधे नंगे थे। सिर्फ एक डोर थी कंधों पर। मम्मी के दूधों से लेकर चूत तक का हिस्सा ढका था। उस ड्रेस से मम्मी की रंगें नंगी थीं। सिर्फ पैंटी ही ढक पा रही थी। मम्मी ने इतनी सेक्सी ड्रेस क्यों पहनी। मुझे नहीं पता। पर अंकल क्या। किसी बूढ़े का भी लंड खड़ा हो जाए मम्मी को देखकर।
मेरी मम्मी अंकल को एकटक अपनी ओर देखते हुए उनसे पूछ बैठती हैं।
मम्मी: ऐसा क्या देख रहे हो।
अंकल: वो वर्षा। आपको हमेशा जब भी देखता हूँ। हमेशा प्यार करने का दिल करता है। और वर्षा। इस ड्रेस को मैंने तुम्हें जब दिलवाया था मार्केट से। तब सोचा था तुम बहुत खूबसूरत लगोगी इस ड्रेस में। लेकिन जितना सोचा था इस ड्रेस में। उससे कहीं ज्यादा खूबसूरत लग रही हो।
मम्मी: ज्यादा मक्खन मत लगाओ। मुझे पता है मैं कैसी लगती हूँ।
अंकल: सच वर्षा। मैं झूठ नहीं कहता। मैं रियली लकी हूँ। जो मुझे आप जैसी गर्लफ्रेंड मिली।
मम्मी: अपनी स्माइल करते हुए। ये सब छोड़ो। लाइट देखो क्यों नहीं आ रही। और अंकुश भी है यहीं। मैं उनसे थोड़ी दूरी पर था।
अंकल: क्यों। उससे क्या फर्क पड़ता है। वो ही तो हमें मिलवाता है।
मम्मी: पहले लाइट देखो।
अंकल घर में मेन कनेक्शन देखने लगते हैं। तो उन्हें वहाँ थोड़ा वायर जली हुई दिखती है। वो मम्मी को टॉर्च पकड़ के खड़ा रहने के लिए कहते हैं।
तो मैं कहता हूँ। मम्मी मैं पकड़ता हूँ टॉर्च।
मम्मी: नहीं बेटा। तू दूर रह। ये लाइट से दूर रहना चाहिए। मुझे बहुत अच्छा लगा। मम्मी मुझसे कितना प्यार करती हैं।
फिर मम्मी अंकल के पीछे टॉर्च पकड़ के खड़ी हो जाती हैं। पर इससे अंकल को सही से दिखाई नहीं देता। उनके मन में मेरी मम्मी से मजे लेने का एक तरीका सूझता है।
अंकल: वर्षा। ऐसे तो सही से दिख नहीं रहा। कहीं मुझे करंट न लग जाए। आप आगे आ जाइए प्लीज।
मेरी मम्मी अंकल के आगे जाने को नहीं आना चाहती थीं। क्योंकि मम्मी समझ चुकी थीं। अंकल मम्मी से रोमांस करेंगे। पर जाना भी जरूरी था। मम्मी ने मेरी तरफ देखा।
मैंने कहा। मम्मी अंकल सही कह रहे हैं। फिर मम्मी मेरी ओर हाँ में गर्दन हिला कर बोलीं। बेटा दूर रह। मैं टॉर्च बता रही हूँ। और अंकल के आगे खड़ी हो जाती हैं।
अंकल गहरी साँस ले कर मेरी मम्मी के बदन की खुशबू को सूँघते हैं। और वायर को सही करने लगते हैं।
मेरी मम्मी के इतना करीब होने से अंकल का लंड पूरा तन जाता है। मेरी मम्मी को भी इस बात का अहसास था। कि इस तरह उन्हें अंकल के आगे नहीं आना चाहिए था। उनके आगे आने से अंकल का लंड खड़ा होगा। और मैं सामने था। इसलिए मम्मी को भी शर्म आ रही थी। मेरी मम्मी अपने बदन पर अंकल की साँसें फील कर सकती थीं।
अंकल मेरी मम्मी की ऐस (गाँड) पर डिक टच कर के मेरी मम्मी का रिएक्शन चेक करते हैं। डिक टच होते ही मेरी मम्मी अंकल को टोक देती हैं।
मम्मी: योगेश जी। तुमने प्रॉमिस किया था। आप अंकुश के सामने दोबारा ऐसी वैसी हरकत न करने के लिए।
अंकल: वर्षा। जानता हूँ। इसलिए अपने आप को कंट्रोल करने की कोशिश कर रहा हूँ। बट वर्षा। हर चीज मेरे कंट्रोल में नहीं है। वर्षा। तेरे इतना करीब आकर मेरा लंड न चाहते हुए भी खड़ा हो गया है। इसमें मेरी नहीं। आपकी ही गलती है।
मम्मी थोड़ा गुस्सा हो जाती हैं।
मम्मी: मेरी क्या गलती है इसमें।
अंकल: वर्षा। मुझसे मत बुलवायो।
मम्मी: बताओ। मेरी क्या गलती है।
अंकल: वर्षा। आप हैं ही इतनी खूबसूरत। कि मुर्दे का भी खड़ा हो जाए। मुझे माफ करना वर्षा। आप कहें तो मैं कल किसी को ले आता हूँ सही करने के लिए।
मम्मी: आप तो नाराज हो गए। मैं क्या आपको अपना बदन नहीं सौंपती हूँ। क्या आपसे नहीं चुदवाती हूँ पूरी रात। पर मैं यही कहती हूँ। अंकुश के सामने नहीं। वो मेरा बेटा है। माँ बेटे के बीच थोड़ी मर्यादा होनी चाहिए। मैं जानती हूँ। वो मेरी चुदाई की पहरेदारी भी करेगा। और रही बात। आपने कहा आप कल किसी को ले आओगे। तो हम पूरी रात कैसे रहेंगे अँधेरे में। तुम प्लीज इसे सही कर दो।
अंकल: वर्षा। बट थोड़ा मेरी मजबूरी समझ के मुझे माफ कर देना। मैं भी नहीं चाहता कि माँ बेटे की मर्यादा टूटे। पर अंकुश ने ही तुम्हें मेरे लंड से चुड़वाया है। और मैं जब भी तुझे देखता हूँ। मेरा लंड हमेशा खड़ा हो जाता है।
ये कह कर अंकल अपना लंड सीधा मेरी मम्मी के ऐस क्रैक में लगा देते हैं।
मेरी मम्मी को मानो जैसे एक करंट लगा हो।
अंकल वायर को कट कर उसे चेंज करने लगते हैं।
अंकल इसी बहाने मेरी मम्मी की गाँड में अपना लंड रगड़ने लगते हैं। जिससे मेरी मम्मी की चूत भी गीली हो जाती है। मेरी मम्मी की साँसें तेज हो जाती हैं। और अंकल समझ जाते हैं कि मेरी मम्मी गरम हो रही हैं।
अंकल: वर्षा। आपका थैंक्स कहना भूल गया था मैं।
मम्मी: (धीमी आवाज में) वो क्यों।
अंकल: वर्षा। आपने मुझे अपनी ब्रा जो दी थी आज दिन में। और मेरे बारे में किसी को कुछ कहा भी नहीं।
मम्मी: ब्रा दी थी। और आपने उसमें मुठ मारी। मुझे अच्छा नहीं लगा। आपने अंकुश से भिजवाई।
अंकल: इसमें क्या हो गया। उसने कहा था। उसे लगता है जब मैं तुम्हें प्यार करता हूँ।
मम्मी: ठीक है। अब लाइट सही करो।
अंकल: वर्षा। क्या तुम्हारी चूत गरम हुई थी दिन में।
मम्मी: हाँ। आपने मुझे बहुत गरम कर दिया था बाथरूम में।
अंकल: मेरा भी लंड तुम्हारे जिस्म से खड़ा हो गया था।
मम्मी: पर आपने तो मेरी ब्रा में मुठ मारकर ठंडा कर लिया था।
अंकल: इसका मतलब तेरी चूत प्यासी है। और तड़प रही है मेरे लंड के लिए।
मम्मी: मैं सब समझती हूँ। आप मुझे अभी चोदना चाहते हो। पर मैं अभी अपनी चूत नहीं दूँगी। आप लाइट सही करो।
अंकल वो कर ही रहा हूँ। पर ये बताओ। आज रात का क्या प्लान है।
मम्मी अंकल बातें कर रहे थे। और बातों बातों में मेरी मम्मी को पता ही नहीं चलता। कब अंकल ने कनेक्शन सही कर दिया। पर कमरे की लाइट अभी भी स्विच ऑफ ही है।
अंकल: आई लव यू वर्षा। ये कह कर अंकल मेरी मम्मी के शरीर पर झुक जाते हैं। और मेरी मम्मी के गले पर किस कर देते हैं।
मम्मी: आह। योगेश जी। पीछे हट जाओ प्लीज।
अंकल: वर्षा। आपका मन नहीं करता कि मैं हमेशा आपकी प्यास बुझाऊँ।
अंकल अब अपने हाथ मेरी मम्मी के बूब्स की ओर बढ़ा देते हैं।
अंकल के हाथों को अपने बूब्स की ओर बढ़ता देख मेरी मम्मी खुद को संभालने की कोशिश करती हैं। और दूर जाने लगती हैं। पर अंकल मेरी मम्मी को दीवार से लगा देते हैं। और मेरी मम्मी को पीछे से हग कर लेते हैं।
मेरी मम्मी अंकल की पकड़ से छूटने की हल्की कोशिश करती हैं। पर अंकल मेरी मम्मी को दीवार से लगा के मेरी मम्मी के टॉप की चेन पीछे से खोल देते हैं। और वो टॉप ऐसी थी। कंधों पर डोर से बँधी थी। बहुत छोटी टॉप थी।
मम्मी: योगेश जी प्लीज समझो। छोड़ो मुझे।
अंकल: वर्षा। देखो तो मेरी ओर।
अंकल मेरी मम्मी को अपनी तरफ मोड़ने की कोशिश करते हैं।
मेरी मम्मी मना करती हैं। पर अंकल थोड़ा प्रेशर बढ़ा के मेरी मम्मी को अपनी तरफ मोड़ ही लेते हैं। मेरी मम्मी भी ज्यादा विरोध नहीं कर पातीं।
अंकल मेरी मम्मी को सीधा कर अपना हाथ मेरी मम्मी के बूब्स की तरफ लाने लगते हैं। जिसे देख मेरी मम्मी अंकल के हाथ को बीच में ही रोक लेती हैं।
मम्मी: योगेश जी प्लीज। अब मत छेड़ो मुझे। वरना मैं तुम्हें कभी अपने बदन को छूने भी नहीं दूँगी।
अंकल: क्यों वर्षा। आप भी तो गरम हो गई हो। तो क्यों रोक रही हो मुझे।
मम्मी: नहीं। ऐसा कुछ नहीं है। आपकी जो भी करना है। कल दिन में करना। अभी अंकुश खड़ा है पास में। उसके सामने नहीं। और वो मेरा बेटा है। और माँ बेटे के बीच मर्यादा होती है।
अंकल: लेकिन वर्षा। उसी ने तो हम दोनों की चुदाई करवाई है। और पिछले 6 महीनों से वो मुझसे तुमको चुड़वा रहा है। और मैं उसी के कहने पे आपकी प्यास बुझाने के लिए तो यहाँ आया हूँ। और वर्षा। मैं जब भी तुमको देखता हूँ। तो देखो मेरे साथ क्या हो जाता है।
ये कह कर अंकल मेरी मम्मी का हाथ अपने लंड की ओर फोर्स करने लगते हैं।
मेरी मम्मी अपने आप को थोड़ा संभालती हैं। और अंकल को पीछे की ओर पुश कर देती हैं।
मम्मी: योगेश जी। तुम जाते हो या मैं अंकुश को बोलूँ। वो तुम्हें रोकेगा मेरे बदन से खेलने से।
अंकल: वर्षा। मैं उससे बोल देता हूँ। वो रूम में चला जाएगा। फिर तो मजे लेने दोगी अपने बदन से।
मम्मी: नहीं प्लीज। रात को कर लेना। जब मेरा पति आ जाएगा। और सो जाएगा तब।
अंकल: वर्षा। मुझे यकीन नहीं हो रहा है। कि तुम किस तरह अपने आप को कंट्रोल कर पा रही हो।
मम्मी: मैं जानती हूँ मैं कैसे कंट्रोल कर रही हूँ। मैं अंकुश के सामने ये सब अच्छा नहीं लगता है। और मैं आपसे मना नहीं कर रही हूँ। बस रात को मैं तुम्हें बुला लूँगी। पर अभी नहीं।
अंकल मेरी मम्मी को आज ऐसे ही नहीं छोड़ना चाहते। और अंकल फिर से मेरी मम्मी की ओर बढ़ चलते हैं। तभी डोर बेल रिंग होने की आवाज आती है।
मेरी मम्मी और अंकल दोनों शॉक हो जाते हैं। कि रात में 10 बजे कौन आया होगा।
क्योंकि पापा तो कॉल करके आते हैं।
मेरी मम्मी अपने आप को संभालती हैं। और मुझे आवाज देती हैं। अंकुश।
मैं: जी मम्मी।
मम्मी: बेटा देख कौन है।
मैं: देखता हूँ। कि हॉल से तो सामने पापा थे। आज पापा बिना कॉल किए आ गए।
मैं वापस आकर थोड़ी दूर रहता हूँ मम्मी अंकल से। हालाँकि अभी भी घर की लाइट का स्विच ऑफ था। लेकिन मम्मी ने मोबाइल की टॉर्च जला रखी थी।
मैं: मम्मी। पापा आए हैं। और ये सुनकर मेरी मम्मी के होश उड़ जाते हैं। क्योंकि इस समय अंकल मम्मी के साथ में हैं। और पापा देख लेंगे तो क्या होगा। मेरी मम्मी को समझ नहीं आता कि अब क्या करें। मेरी मम्मी का शरीर ठंडा पड़ने लगता है। लेकिन कुछ ही पलों में वो पसीना पसीना हो जाती हैं।
अंकल मेरी मम्मी के पास आ कर मेरी मम्मी को हिलाते हैं।
अंकल: क्या हुआ वर्षा। डर क्यों रही हो। अंकुश साथ में है। डरने की जरूरत नहीं है।
मैं: हाँ मम्मी। आप डरो मत। पापा को मैं संभाल लूँगा।
मम्मी: योगेश जी। तुम जाओ जल्दी यहाँ से।
अंकल: ठीक है। मैं ऊपर सीढ़ियों में जा रहा हूँ। वो जैसे ही फ्रेश होने जाए। मैं आ जाऊँगा।
मम्मी: क्यों।
अंकल: बाद में बताऊँगा। और सीढ़ियों से चले गए।
फिर मैंने घर की लाइट ऑन की। और गेट खोला। पापा आ गए घर में। और फ्रेश होने चले गए।
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फिर मैंने अंकल को कॉल किया। मम्मी बोलीं। क्यों कॉल कर रहा है।
मैं: मम्मी कुछ काम है।
मम्मी: रहने दे।
लेकिन मैं कॉल करता हूँ। और अपने रूम में चला जाता हूँ।
और फिर अंकल सीढ़ियों पर आते हैं। और मम्मी को सीढ़ियों का गेट खोलना पड़ा।
गेट खोलते ही सामने अंकल वापस आ गए। इस बार पापा फ्रेश होने गए थे। और मैं अपने रूम में।
मम्मी ने सोचा। वो हॉल में अकेली है। कोई नहीं देख रहा है। और उन्हें पता है अब रोमांस कर सकती हैं। इसलिए।
मम्मी गेट खोलती हैं। तो अंकल उसे झट से अपनी बाँहों में ले लेते हैं।
अंकल: क्या बात है जान। इतनी देर लगा दी दरवाजा खोलने में।
मम्मी: (हड़बड़ाते हुए) वो वाशरूम में गया। तभी तो खोलूँगी। नहीं तो वो देख लेता। और तुम अभी क्यों आए। मैंने कहा था रात को बुला लूँगी।
अंकल बिना कुछ कहे मम्मी के होठों को चूम लेते हैं।
किस करने के बाद मम्मी अंकल को बोलती हैं। अभी प्लीज आप जाओ। और रात को आना।
अंकल: नहीं। मैं अंकुश के रूम में छुप जाता हूँ।
मम्मी: आप भी। जैसे आप चाहो। पर जल्दी करो। वो ड्रेस होकर आता ही होगा।
और अंकल मेरे रूम में गए। और
मैं: अंकल आप कैसे करोगे।
अंकल: बेटा तू सब संभाल लेना। आज तेरी मम्मी को टेबल के नीचे से प्यार करूँगा।
मैं: समझा नहीं।
अंकल: सब समझ जाएगा। और अंकल जाकर टेबल के नीचे छुप गए। मम्मी ने नहीं देखा। क्योंकि मम्मी किचन में चली गई थीं।
फिर पापा फ्रेश होकर आए। और मम्मी को आवाज दी। वर्षा। खाना लगा दे।
मम्मी: जी। लगाती हूँ।
और मेरी मम्मी टेबल पर खाना लगाती हैं। तो पापा मेरी मम्मी को भी बैठने को कहते हैं।
मम्मी पापा के सामने बैठ जाती हैं। और मैं भी मम्मी के बगल में बैठ जाता हूँ। और फिर खाना खाने लगते हैं। मैं जानता था। अंकल टेबल के नीचे छुपे हैं। मेरी मम्मी के बैठने पर अंकल की नजर सीधा मेरी मम्मी की जाँघों की तरफ जाती है।
मेरी मम्मी की गोरी मखमली जाँघें देख कर अंकल के मन में उसे छूने का मन करता है।
अंकल मेरी मम्मी की जाँघ पर अपना हाथ रख देते हैं।
अंकल के हाथ रखते ही मम्मी शॉक हो जाती हैं। वो अंकल का हाथ अपनी जाँघ से हटाने की कोशिश करती हैं। पर पापा के सामने होने के कारण वो ज्यादा फोर्स नहीं लगा पातीं।
अंकल भी जानते हैं कि मेरी मम्मी कुछ नहीं कह पाएँगी इस समय। मेरी मम्मी के चेहरे के भाव बदलने लगते हैं। वो पहले ही डरी हुई थीं। ऊपर से अंकल की हरकत उसे और डरा देती है।
अंकल अपना हाथ मेरी मम्मी की जाँघों में फेरने लगते हैं। और धीरे धीरे मेरी मम्मी की चूत की तरफ बढ़ा देते हैं।
पापा: क्या हुआ वर्षा। कुछ बोल क्यों नहीं रही।
मम्मी: जी। कुछ नहीं। बस थोड़ी नींद आ रही है।
पापा: सो जाना। पहले खाना खा ले। और अंकुश को भी खाने दे।
मैं: पापा। मम्मी ने शाम को मुझे इतना खिला दिया था। और आज मम्मी ने बहुत काम किया घर में। और पड़ोसी आंटी के प्रोग्राम में भी गई थीं।
हम बातें ही कर रहे थे। कि अंकल ने अब अपना हाथ मेरी मम्मी की पैंटी पर ले जाते हैं।
अंकल मेरी मम्मी की चूत को पैंटी के ऊपर से ही सहलाने लगते हैं। क्योंकि मेरी मम्मी ने बहुत छोटा टॉप पहना था। जो उनकी टाँगों को पूरी नहीं ढक पा रहा था। और मम्मी के बैठने के बाद उनका टॉप उनकी पैंटी तक ही रह गया। मेरी मम्मी की पैंटी उनकी चूत की लाइन में घुस जाती है। मम्मी की चूत गीली होती देख अंकल मन ही मन उस पर हँसने लगते हैं।
यहाँ मेरी मम्मी की डर से हालत खराब है। कि कहीं अंकल की हरकत की वजह से पापा को शक न हो जाए। मम्मी बार बार मेरी तरफ देख रही थीं। शायद वो मुझसे हेल्प माँग रही थीं।
अंकल मेरी मम्मी की टाँगों को थोड़ा फैला देते हैं। और मेरी मम्मी की जाँघों में किस करते हुए मेरी मम्मी की पैंटी को थोड़ा सा साइड कर मेरी मम्मी की चूत के पास अपने होठ लगा देते हैं।
मेरी मम्मी की सिसकी निकल जाती है। उसके लिए ये अहसास एकदम नया सा नहीं था। क्योंकि अंकल हमेशा मेरी मम्मी की चूत चूसते हैं। पर आज पापा सामने बैठे थे। इसलिए पापा के सामने एक गैर मर्द से अपनी चूत चुसवाने का अहसास बिल्कुल एकदम नया है। और पापा के बारे में जानते हो। वो मादरचोद नामर्द नामर्द क्या चूत चूसेगा।
पापा: क्या हुआ वर्षा।
मम्मी: वो... कुछ नहीं। शायद किसी मच्छर ने हाथ पर काट लिया।
पापा: ओह ओके।
अंकल मेरी मम्मी की चूत के आस पास अपनी जीभ से चाटना शुरू कर देते हैं। जिससे मम्मी की चूत से पानी लावा की तरह रिसना शुरू हो जाता है। मेरी मम्मी किसी तरह अपने इमोशंस को कंट्रोल करती हैं।
अब अंकल अपने हाथ मेरी मम्मी की कमर तक लाकर मेरी मम्मी की पैंटी को खींचने लगते हैं। पर मम्मी के बैठा होने की वजह से वो उसे उतार नहीं पाते। ये सब मैं अपना सिर नीचे करके देख रहा था। मैं थोड़ा टेबल से दूर भी हो लिया था। जिससे मैं नीचे आसानी से देख पा रहा था।
अंकल मेरी मम्मी की पैंटी को थोड़ा तेज खींचने लगते हैं। मेरी मम्मी नीचे की तरफ नजर करती हैं। तो अंकल भी ऊपर ही देख रहे हैं। मेरी मम्मी अंकल को हल्का इशारा कर के मना करती हैं। पर अंकल भी मेरी मम्मी को इशारा करते हैं कि उन्हें मेरी मम्मी की पैंटी चाहिए।
लेकिन मम्मी अपनी गाँड नहीं उठा रही थीं।
फिर अंकल ने मेरी तरफ इशारा किया। तो मैं समझ गया। अब मुझे ही कुछ करना है। तो मैं मम्मी को बोलता हूँ। मम्मी आप मुझे एक चपाती रखना।
मम्मी: बेटा ले ले।
मैं: मम्मी आप उठकर दे दो।
मम्मी: नहीं बेटा। ले ले। मम्मी समझ गईं कि मैं उनकी पैंटी उतरवाना चाहता हूँ अंकल से। इसलिए मम्मी बोलीं। ले ले बेटा।
पापा: वर्षा। तुम दे दो उसे।
मम्मी: मम्मी मेरी तरफ इशारा करती हैं। ना में।
मैं: दो मम्मी। फिर मम्मी मजबूरी में मुझे चपाती देने के लिए उठती हैं। तो उनकी गाँड कुर्सी से उठ जाती है। और अब उनकी पैंटी उतारना आसान हो गया अंकल के लिए। और मम्मी भी समझ गई थीं कि अब उनकी पैंटी उतरने वाली है। और हुआ भी ऐसा ही। अंकल ने मम्मी की पैंटी उतार दी उनके कुल्हों से। अब मम्मी की चूत नंगी हो गई थी। और मम्मी की पैंटी उनके दोनों टाँगों के बीच थी। मम्मी मुझे देख रही थीं।
मैं: थैंक्स मम्मी।
मम्मी: मम्मी मुझे गुस्से से देख रही हैं। और कुछ नहीं बोलीं।
पैंटी उतारते ही अंकल इस बार सीधा मेरी मम्मी की चूत पर अपना मुँह रख देते हैं। मेरी मम्मी हवस के नशे में खो जाती हैं। बस अपने इमोशंस शो नहीं करतीं। वो पापा की ओर देख रही थीं। फिर मेरी तरफ देखती हैं।
इतने में पापा भी खाना खत्म कर लेते हैं। और मम्मी से कहते हैं कि वो थोड़ा टॉयलेट जा रहे हैं।
पापा के उठकर अंदर जाते ही अंकल अपनी स्पीड बढ़ा देते हैं। और मेरी मम्मी की चूत नीचे से ऊपर तक चाटने लगते हैं। मेरी मम्मी भी उठना चाहती हैं। पर हवस की आग में वो इतना खो जाती हैं कि उन्हें याद ही नहीं रहता कि ये बेस्ट टाइम है अंकल को बाहर निकालने का। और वो ये भी भूल जाती हैं। उनका बेटा उनके बगल में बैठा है। और मम्मी आह आह करने लगती हैं।
मैं: मम्मी क्या हुआ।
मम्मी: आह ओह। कुछ नहीं बेटा।
मेरी मम्मी की आँखें ऊपर को चढ़ने लगती हैं। वो धीमी आवाज में मोन करते हुए मुझे बोलती हैं।
मम्मी: बेटा तू टॉयलेट के पास जाकर खड़ा हो जा। जब तेरे पापा बाहर आने लगें। मुझे बता देना।
मैं: क्यों मम्मी।
मम्मी: बेटा प्लीज कुछ मत पूछ। जा।
मैं: बताओ मम्मी। क्या बात है।
मम्मी: बेटा योगेश जी टेबल के नीचे हैं। और बेचारे परेशान हो रहे हैं। वो तेरे पापा की वजह से टेबल के नीचे छुपा बैठे हैं।
मैं: क्या मम्मी।
अंकल: हाँ बेटा। मैं टेबल के नीचे हूँ। तू जाकर देख तेरे पापा को।
मैं नीचे झुकने लगा। तो मम्मी।
मम्मी: नहीं बेटा। तू जा। पापा को देख।
मैं: मम्मी अंकल नीचे क्या कर रहे हैं। देखने दो।
मम्मी: बेटा वो चुपचाप बैठे हैं। तू मत देख। मैंने देख लिया है योगेश जी को।
मैं: मैं समझ गया। शायद मम्मी को शर्म आएगी इस हाल में। इसलिए उन्होंने मुझे देखने को मना कर दिया है।
मैं: मम्मी आप टॉयलेट के पास जाइए। मैं अंकल को निकाल दूँगा।
मम्मी: नहीं। बैठी। मैं नहीं उठ सकती।
मैं: क्यों नहीं उठ सकती।
मम्मी: प्लीज बेटा जा।
मैं समझ गया। मम्मी की पैंटी उनकी टाँगों में फँसी है। इसलिए वो उठेंगी तो पहले उन्हें पैंटी सही करनी पड़ेगी। इसलिए मुझे भगा रही हैं।
फिर मैं भी मम्मी की प्रॉब्लम को समझ कर टॉयलेट के पास जाकर खड़ा हो गया।
और मम्मी अंकल को बोलती हैं।
मम्मी: योगेश जी। अब आप बाहर आ जाइए।
लेकिन अंकल नहीं उठे। और मम्मी भी चेयर से उठाने की कोशिश भी नहीं करती हैं। और मेरी तरफ देख रही थीं।
मैं भी मम्मी की तरफ स्माइल करता हूँ। तो मम्मी भी स्माइल करती हैं।
अंकल मम्मी की चूत चाटने में लगे हुए थे। मम्मी अंकल को लगातार अपनी चूत चटाते देख फिर से अंकल को उठाने को बोलती हैं। लेकिन अंकल मम्मी की चूत चाटना नहीं छोड़ते। तो मम्मी अपना सिर नीचे की तरफ करके अपनी नजरें नीचे करती हैं। और अंकल को पूरी तरह से अपनी चूत चाटने में डूबा देख बोलती हैं। प्लीज अब छोड़ दीजिए।
मेरी मम्मी से अब कंट्रोल नहीं होता। उनकी चूत किसी भी समय झड़ने वाली होती है।
अंकल भी यही चाहते थे। आज वो मम्मी को अपनी जीभ से ही झड़ा कर उनकी चूत का रस पीकर ही घर जाएँगे।
तभी बाथरूम में पापा की आवाज आती है। वर्षा।
पापा: वर्षा।
मम्मी का ध्यान पापा की आवाज पर जाता है। और मेरा भी। मम्मी मेरी तरफ देखकर इशारा करती हैं।
मैं: जी पापा। बोलिए।
पापा: अंकुश। तेरी मम्मी को भेज।
फिर मैं मम्मी की तरफ। तो मम्मी उठाने की कोशिश करती हैं। अंकल मम्मी को उठाने से रोकने की कोशिश करते हैं। लेकिन मेरी मम्मी न चाहते हुए भी उठकर खड़ी होती हैं। और अपनी पैंटी को पहनने के लिए अपने हाथों को नीचे ले जाती हैं। पर अंकल मम्मी को अपनी पैंटी नहीं पहनने देते।
मम्मी: क्या कर रहे हो योगेश जी। जाने दो मुझे। नहीं तो उसको सब पता चल जाएगा। और वो तुम्हें छोड़ेगा नहीं। जाओ प्लीज। मुझे पैंटी पहनने दो।
पापा अंदर से फिर पुकारता है। वर्षा। क्या हुआ। मुझे टॉवल चाहिए।
मम्मी: जी। आ रही। बस टेबल से बर्तन उठा रही थी।
अंकल मेरी मम्मी का हाथ नहीं छोड़ते। वर्षा प्लीज मान जाओ ना।
मम्मी: बेटा अंकुश। रूम से पापा की टॉवल लाओ।
मैं: जी मम्मी।
और मैं पलटा ही था। कि मम्मी ने अपनी पैंटी अपनी कमर में चढ़ा ली। और पैंटी पहन ली। फिर मैं टॉवल लाया। और मम्मी को दी।
मम्मी: बेटा ला। मुझे दे। मैं देकर आती हूँ। और योगेश जी को बाहर निकाल।
मैं: जी मम्मी।
फिर मैं अंकल से कहा। अंकल बाहर आ जाओ।
फिर मैं अंकल को अपने कमरे में छुपा दिया।
और फिर पापा मम्मी रूम में चले जाते हैं। फिर एक घंटे बाद मैं मम्मी को बुलाया हूँ कॉल से।
मम्मी: बेटा कैसे बुलाया।
मैं: मम्मी अंकल टेबल के नीचे छुपे थे। आपको कैसे पता चला।
मम्मी: बेटा उन्होंने मेरे पैर को टच किया। तो पता चला।
मैं: मम्मी क्या आज भी अंकल ने आपको परेशान करने की कोशिश की।
मम्मी: नहीं बेटा। आज तो कुछ नहीं किया। पर बेटा मुझे डर था। कहीं तेरे पापा देख न लें।
मैं: मम्मी अंकल आपको बुला रहे हैं कंप्यूटर सिखाने के लिए।
मम्मी: बेटा उनके घर नहीं जाऊँगी कंप्यूटर सिखाने।
मैं: मम्मी अंकल मेरे रूम में हैं। आपको कंप्यूटर सिखाने आए हैं।
मम्मी: क्या। तूने इन्हें बुलाया।
मैं: हाँ मम्मी। मैंने अंकल को बुला लिया।
मम्मी: नहीं बेटा। वापस भेज दे।
मैं: नो मम्मी। आप जाइए रूम में।
मम्मी: तेरे पापा रूम में हैं।
मैं: मम्मी मैं पापा को संभाल लूँगा। प्लीज आप जाइए।
मम्मी: ठीक है। और मम्मी मेरे रूम में चली गईं। और अंकल भी बाथरूम गए हुए थे।
मम्मी रूम में गईं। तो मैं विंडो पे गया।
मम्मी: योगेश जी कहाँ हो।
अंकल: बाथरूम में। और अंकल ने बाथरूम का गेट खोला। तो
अंकल दरवाजे से बाहर निकल ही रहे होते हैं। कि मेरी मम्मी टॉवल ले कर अंकल की ओर भागती हैं।
अंकल: कहाँ थी वर्षा। मैं एक घंटे से तुम्हारा इंतजार कर रहा हूँ अंकुश के रूम में।
मम्मी: सॉरी। वो बस उस मादरचोद नामर्द नामर्द के सोने का वेट कर रही थी।
अंकल पास आते ही मेरी मम्मी को अपनी बाँहों में जकड़ लेते हैं। और मेरी मम्मी को दीवार के साथ लगा के मेरी मम्मी के होठों को चूम लेते हैं।
मेरी मम्मी तो पहले ही हवस की आग में झुलस रही थीं। मेरी मम्मी से रहा नहीं जाता। और वो अंकल के मुँह में अपनी जीभ डाल के अंकल के होठों को चूसने लगती हैं।
मम्मी भी पूरे जोश में अंकल को किस कर रही थीं। अंकल को ज्यादा समय नहीं लगता मम्मी की टॉप उतारने में। लेकिन मम्मी अंकल को रोकती हैं। पर अंकल नहीं माने। और उन्होंने मम्मी के टॉप को नीचे से उठाया। तो मम्मी बोलीं।
मम्मी: पहले दरवाजा तो लगा दो रूम का। अंकुश बाहर हॉल में है। और मेरा पति बेडरूम में है।
अंकल: चुप। अंकुश पहरेदारी पर। और अंकल ने टॉप को मम्मी के कंधे पर लाए। तो मम्मी ने भी अपने हाथ ऊपर करके टॉप उतरवाने में अंकल की मदद की। और अंकल ने टॉप को मेरी मम्मी के बदन से निकाल दिया।
टॉप उतारते ही अंकल देखते हैं कि मेरी मम्मी ने सिर्फ ब्रा पहनी है।
मैं भी चुप कर ये सब देख रहा था।
अंकल: मुझे लगता है जान। मुझसे ज्यादा तुम प्यासी हो।
मम्मी: हम्म... क्यों।
अंकल: तुम्हारी चूत तो पहले ही गीली पड़ी है। और तुमने पैंटी मेरे सामने पहनी थी। जब मैं टेबल के नीचे था। तब तुमने अपनी पैंटी को अपनी टाँगों से उठाया। और पहनी थी।
मम्मी: हाँ। मैंने तुम्हारे सामने पहनी थी। लेकिन जब अंकुश ने मुझे कॉल करके बाहर बुलाया। तो मैं समझ गई। वो मुझे चुदवाने के लिए बुला रहा है। और हुआ भी ऐसा ही। मैं बाहर आई। तो उसने कहा। अंकल आपको मेरे रूम में कंप्यूटर सिखाने के लिए बुला रहे हैं। अब वो ये तो नहीं कह सकता। मम्मी अंकल आपको चोदने के लिए बुला रहे हैं। तो मैं अपनी पैंटी पहले ही उतार आई। ताकि आपकी उतरनी न पड़े। तो अंकल मेरी मम्मी के कहने से खुश हो जाते हैं। तो मेरी मम्मी अंकल को अपनी तरफ खींचती हैं।
अंकल मम्मी बाथरूम के गेट पर खड़े थे। तो अंकल मेरी मम्मी को रूम में रखे बेड पे धकेल देते हैं। और अपना लंड मेरी मम्मी की चूत पर लगा देते हैं।
मम्मी: क्या बात है। आज मेरी ब्रा नहीं उतारोगे।
अंकल: पहले अपने लंड को सीधा तेरी चूत में डालकर चोद लूँ। फिर उसके बाद दूसरे राउंड में तेरे बूब्स को मसलूँगा। और तुझे पूरे बदन को किस भी करूँगा। पर अब कंट्रोल नहीं हो रहा है।
मेरी मम्मी ब्लू ब्रा में थीं।
चूत इतनी गीली होती है कि लंड सीधा मेरी मम्मी की चूत में घुस जाता है। मेरी मम्मी की आह निकल जाती है। पर अंकल अब रुकना नहीं चाहते थे।
अंकल अपने धक्के लगाना चालू रखते हैं।
मम्मी: आह... आह... ओह... मम्मी आह... आह... ओह... मेरी मम्मी की चीखें मुझे बाहर तक सुनाई दे रही थीं। क्योंकि अंकल मम्मी को नॉन स्टॉप चोद रहे थे। एक ही पोजीशन में लगातार 20 मिनट से ज्यादा हो गए थे।
मेरी मम्मी इस समय पापा के बारे में भी भूल चुकी थीं। और चरमसुख की प्राप्ति कर लेना चाहती थीं।
मेरी मम्मी भी अंकल के साथ अपनी चूत हिलाना शुरू कर देती हैं। जिससे अंकल अपने आप को संभाल नहीं पाते। और अंकल का शरीर अकड़ने लगता है।
मेरी मम्मी का ऐसे चुदते देख मैं भी पापा के बारे में भूल जाता हूँ। और चुदाई देखता रहता हूँ।
और फिर थोड़ी देर बाद अंकल एक आह भर के मेरी मम्मी की चूत में झड़ने लगते हैं। पर मम्मी अभी भी अपनी चूत हिला रही थीं। क्योंकि उसे भी अब झड़ना था। पर एंड टाइम पर अंकल झड़ जाते हैं।
मम्मी: योगेश जी...
अंकल: (मेरी मम्मी के ऊपर ढेर हो जाते हैं) क्या हुआ जान। मजा नहीं आया क्या।
मम्मी: योगेश जी प्लीज। थोड़ा और करो।
अंकल थोड़ा हिलता है। पर अब उनका लंड भी ढीला पड़ चुका है।
अंकल: जान। क्या बात है। मैंने तुम्हें लगातार 30 मिनट तक चोदा। पर तुम आज एक बार भी नहीं झड़ीं। और दिन तो तुम मेरे झड़ने से पहले 3 बार झड़ जाती हो।
मम्मी: आज आपने मेरी प्यास बढ़ा दी थी दिन में पड़ोस के घर में बाथरूम में। और अभी टेबल के नीचे। इसलिए मैं बहुत प्यासी हो गई थी।
अंकल: ठीक है। नेक्स्ट राउंड स्टार्ट करें।
मम्मी: नहीं। आप अपनी जीभ से मेरा निकाल दीजिए। और फिर अंकल अपने मुँह से मेरी मम्मी की चूत चुदाई शुरू करते हैं।
और मेरी मम्मी भी झड़ जाती हैं। और फिर अंकल खड़े हो जाते हैं।
अंकल बोलते हैं। नेक्स्ट राउंड।
मम्मी शर्म से पानी पानी हो जाती हैं। भले ही वो थोड़ी देर पहले बेशर्म बनकर अपनी टाँगें खोलकर अंकल से चुदवा रही थीं। और मेरी मम्मी शर्माकर अपने पास में रखी टॉवल को उठा लेती हैं। और अपने बदन पे ढक लेती हैं। और अपनी नजर दूसरी तरफ कर लेती हैं।
अंकल: क्या इतना शर्मा रही हो।
मम्मी: प्लीज। मुझे शर्म आ रही है।
अंकल: अभी थोड़ी देर पहले तो बेशर्म बनकर अपनी चूत चुदवा रही थीं।
मम्मी: आप जाओ यहाँ से। मुझे शर्म आ रही है।
अंकल पास में रखी एक चेयर पे बैठ जाते हैं। और मम्मी से बोलते हैं।
अंकल: आओ वर्षा। मेरी गोद में बैठ जाओ।
मम्मी: चुप रहती हैं। और कुछ नहीं बोलतीं।
अंकल: आओ वर्षा।
फिर मम्मी बेड पर से उठती हैं। और टॉवल को अपने बदन पर लपेट लेती हैं। और चलकर अंकल के पास पहुँचती हैं।
जैसे ही मेरी मम्मी चेयर के पास पहुँचती हैं। जिसपर अंकल बैठे थे। अंकल ने तुरंत ही मेरी मम्मी का हाथ पकड़ कर मेरी मम्मी को अपने पास खींच लिया। और मेरी मम्मी को किस करना शुरू कर देते हैं।
मम्मी: क्या कर रहे हो योगेश जी। हटो यहाँ से।
अंकल मेरी मम्मी की एक नहीं सुनते। और मेरी मम्मी के होठों को चूसना चालू रखते हैं। मेरी मम्मी थोड़ा बहकती हैं। पर उसी समय खुद को संभाल लेती हैं। और अंकल को पीछे हटाती हैं।
अंकल: क्या हुआ वर्षा। हटा क्यों रही हो।
मम्मी: तुम पागल हो क्या। एक बार कर लिया। अब दोबारा नहीं। अंकुश बेचारा बाहर हॉल में बैठा है। और मेरा पति जाग गया तो।
अंकल: मुझे कुछ नहीं पता वर्षा। मुझे बस आज पूरी रात तुम्हारी चुदाई करनी है।
मम्मी: पागल मत बनो। मुझे कोई प्यास नहीं बुझानी। तुम जाओ यहाँ से। मेरा अंकुश बाहर है। मुझे जाने दो। मैं उससे और पहरेदारी नहीं करवा सकती हूँ। वैसे भी आपके लंड ने मेरी चूत की चुदाई कर दी है। और आपका लंड भी ठंडा हो गया है।
अंकल: वर्षा। मान जाओ ना। और इस टॉवल को हटाओ।
मुझसे क्यों छुपा रही हो। मैं तो पिछले 6 महीनों से देख रहा हूँ। क्या मैं तुम्हारे बदन से खेलता नहीं हूँ सही ढंग से। क्या मैं तुम्हारी प्यास नहीं बुझाता हूँ सही ढंग से।
मम्मी: मैं बहुत खुश हूँ आपके साथ। तुम गलत सोच रहे हो। मैं अंकुश से और पहरेदारी नहीं करवा सकती हूँ। इसलिए अब कल दिन में करेंगे। वैसे भी एक राउंड तो हो गया है।
अंकल: ठीक है। मत करो अब चुदाई। पर साथ में सो तो सकते हैं। और अंकुश को बुला लेते हैं। हम तीनों साथ में सोएँगे।
मम्मी: बिल्कुल नहीं। तुम फिर बदतमीजी करोगे।
अंकल: मैंने क्या बदतमीजी की आपके साथ।
मम्मी: अच्छा। तो वो क्या था जो तुमने टेबल के नीचे से किया मेरे साथ। तुम्हें बिल्कुल भी चिंता नहीं थी। मेरे पति देख लेते तो। वो तो अंकुश भी साथ था।
अंकल: बट वर्षा। मजा तो आपको भी आया ना।
मम्मी: नहीं। ऐसा कुछ नहीं है। और ना ही मैं ऐसी बदतमीजी फिर कभी सहन करूँगी।
अंकल: वर्षा। मैं जानता हूँ। मुझे ऐसा नहीं करना था। तुम्हारा पति साथ था। लेकिन अब तो वो रूम में सो रहा है।
मम्मी: अब निकलो प्लीज। इससे पहले कि वो मादरचोद नामर्द नामर्द जाग जाए। और तुम्हें कोई दिक्कत हो।
अंकल: वर्षा प्लीज सॉरी। टेबल के नीचे जो किया। अब माफ कर दो। और एन्जॉय करते हैं।
मम्मी: ठीक है। लेकिन एक शर्त पे। आप अंकुश से कहिए। वो जाकर उसके पापा के रूम में सो जाए। और बाहर से कुंडी लगा देना।
और अंकुश से कहना। जब उसके पापा उठें। और बाहर से कुंडी लगी मिले। तो वो उसके पापा से कहे। मैंने ही मम्मी को दूसरे रूम में सोने भेजा है। और मैं आपके पास सो गया। और मैंने ही मम्मी से कहकर रूम की कुंडी लगवाई है बाहर से। और मेरा मोबाइल भी अंकुश को दे देना। ताकि वो उसे रूम में रखे। और जब उसका बाप मुझे कॉल करे। तो मेरा मोबाइल उसी रूम में बजे। और फिर हमें कोई डिस्टर्ब न हो पूरी रात।
अंकल: ये हुई ना वर्षा बात। ताकि तेरे पति उठ भी जाएँ। तो हमें डिस्टर्ब न हो।
और फिर अंकल मेरे पास आए। और मैं पापा के रूम में मम्मी का मोबाइल लेकर चला गया। और अंकल ने पापा के रूम की कुंडी बाहर से लगा दी। और फिर मैंने अपना मोबाइल में वीडियो चालू किया। लेकिन कुछ नहीं मिला। क्योंकि मेरा अंदर वाले रूम में सीसीटीवी कैमरा है। बाहर वाले में नहीं। और मम्मी अंकल अंदर वाले रूम में नहीं गए।
फिर मैंने अंकल को व्हाट्सएप पे मैसेज भेजा।
मैं: क्या आप दोनों मेरे अंदर वाले रूम में हो।
अंकल: बाहर वाले रूम में चुदाई कर रहा हूँ तेरी मम्मी की।
फिर मैं भी सो गया। और फिर सुबह 8 बजे मम्मी ने आकर मुझे और पापा को उठाया। और चाय पिलाई।
मैंने अंकल से पूछा कॉल पर। कितने बजे गए। तो अंकल ने कहा। लास्ट राउंड 8 बजे तक हुआ। फिर तेरी मम्मी ने मुझे चाय पिलाकर रवाना किया। और फिर तुझे और तेरे बाप को पिलाई।
फिर 9 बजे पापा ऑफिस चले गए। और मम्मी सोने। और फिर ना तो मम्मी से मैंने कुछ पूछा। और ना ही मम्मी ने।
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update 59
दोपहर को मम्मी की नींद खुली तो मम्मी ने कहा
“बेटा, खाना बना देती हूँ।”
मैंने कहा
“मम्मी, मैं मार्केट से ले आता हूँ।”
मम्मी बहुत खुश हुई। फिर हम दोनों साथ में खाना खा बैठे।
मैंने कहा
“मम्मी, आज अंकल जी ने हमें अपने घर बुलाया है।”
मम्मी ने कहा
“क्यों बुलाया?”
मैंने कहा
“मम्मी, अंकल जी केक लाए थे। वो काटेंगे।”
मम्मी ने कहा
“क्या उनका बर्थडे है?”
मैंने कहा
“नहीं मम्मी।”
मम्मी ने कहा
“तो फिर क्यों बुलाया?”
मैंने कहा
“मम्मी, मैंने अंकल जी से प्रॉमिस किया है कि आप और मैं चलेंगे।”
मम्मी ने कहा
“बेटा, मेरा सिर दर्द हो रहा है। मैं नहीं जा पाऊंगी।”
मैंने कहा
“प्लीज मम्मी, आप टैबलेट ले लो। चलिए। मैंने अंकल जी से प्रॉमिस किया है।”
मम्मी ने कहा
“ठीक है। कितने बजे चलना है?”
मैंने कहा
“मम्मी, 5 बजे को।”
मम्मी ने कहा
“बेटा, 4 बजे हो चुके हैं।”
मैंने कहा
“मम्मी, आप टैबलेट ले लो और तैयार हो जाओ।”
मम्मी ने कहा
“ओके बेटा, मैं टैबलेट ले लेती हूँ। तुम ला दो।”
फिर मैंने मम्मी को टैबलेट दी और पानी के साथ मम्मी ने टैबलेट ले ली।
फिर मम्मी बोली
“बेटा, नहाकर आती हूँ।”
मैंने कहा
“ओके मम्मी।”
फिर मम्मी नहाने चली गई। थोड़ी देर बाद मम्मी ने मुझे आवाज दी तो मैं मम्मी के रूम में गया। तो देखा मम्मी बाथरूम से बाहर निकली है और मम्मी ने अपने सुंदर मखमली बदन पर टॉवेल लपेट रखा है।
मैं मम्मी के पास गया तो मैं बोला
“मम्मी, आपने बुलाया?”
मम्मी मेरी तरफ पलटी और बोली
“हां बेटा।”
मम्मी के बदन पर टॉवेल ने मम्मी के स्तनों से मम्मी की चूत तक कवर कर रखा था।
मैंने कहा
“बोलिए मम्मी, क्यों बुलाया?”
मम्मी ने कहा
“बेटा, मेरी पीठ पर क्रिम लगा दे।”
मैंने कहा
“जी मम्मी। लेकिन आप तो टॉवेल…”
मम्मी ने कहा
“बेटा, टॉवेल तो हटा देती हूँ।”
और मम्मी ने अपनी टॉवेल हटा दी। मम्मी के टॉवेल हटाते ही मम्मी एकदम नंगी हो गई।
मैंने मम्मी को नंगी देखकर दूसरी तरफ मुड़ गया तो मम्मी बोली
“बेटा, तुम पीछे क्यों मुड़ा?”
मैंने कहा
“मम्मी, वो आपने…”
मम्मी ने कहा
“बेटा, क्या?”
मैंने कहा
“मम्मी, आपने अंडरगारमेंट्स…”
मम्मी ने कहा
“बेटा, मैं मां हूँ तेरी। इसमें मुझे से क्या शर्माना। मैं तेरे सामने क्या आज पहली बार बिना कपड़ों के खड़ी हूँ। पहले भी तो बिना कपड़ों के खड़ी हुई हूँ और मैंने ही तो तुझे जन्म दिया है और अपना दूध पिलाया है। और तू शर्मा क्यों रहा है?”
मैंने कहा
“मम्मी, प्लीज आप कपड़े पहन लो।”
मम्मी ने कहा
“बेटा, मैं पहन लेती पर अब तो नहीं पहनूंगी। मेरी तरफ देख और मुझे पकड़ कर मेरा मुंह अपनी तरफ करवाया।”
फिर मम्मी ने कहा
“मेरी पीठ पर क्रिम लगा दे।”
फिर मैंने क्रिम उठाई और मम्मी की पीठ पर लगा दी।
और बाहर आने लगा तो मम्मी ने मुझे रोका और बोली
“बेटा, तुम नाराज हैं?”
मैंने कहा
“नहीं मम्मी।”
मम्मी ने कहा
“तो फिर जा क्यों रहा है। बैठ मेरे पास।”
फिर मैं बेड पर बैठ गया और मम्मी ने अलमारी से अपनी ब्रा पैंटी निकाली और मम्मी ने पहले ब्रा पहनी और फिर पैंटी पहनने लगी। तो मम्मी ने देखा मेरी तरफ की मैं लगातार उनकी चूत को देख रहा हूँ।
मम्मी ने कहा
“बेटा, अंकुश।”
मै एकदम ध्यान से निकल कर देखा
मम्मी ने कहा
“बेटा, क्या देख रहा है?”
मैंने कहा
“वो… वो… मम्मी मम्मी।”
मम्मी ने कहा
“बेटा, हकला क्यों रहा है?”
मैंने कहा
“मम्मी, कुछ नहीं।”
मम्मी ने कहा
“बेटा, डर मत। मैं मां हूँ तेरी। मुझे से डरने की जरूरत नहीं है। मैं हमेशा तेरा ही साथ दूंगी। तू मेरे कलेजा का टुकड़ा है। बोल बेटा, डर मत। क्या देख रहा था?”
मैंने कहा
“कुछ नहीं मम्मी।”
मम्मी ने कहा
“बेटा, मैं जानती हूँ तू मुझे ही देख रहा था। बोल बेटा, अपने मन में जो भी बता। बेटा, क्या देख रहा था?”
मैंने कहा
“कुछ नहीं मम्मी।”
मम्मी ने कहा
“अच्छा तो मैं झूठ बोल रही हूँ। सच बता बेटा।”
मैंने कहा
“वो मम्मी, आप नाराज हो जाएंगी।”
मम्मी ने कहा
“नहीं बेटा, मैं कभी तुझसे नाराज नहीं हूँगी।”
मैंने कहा
“वो मम्मी, आप मुझे हर महीने सुबह पर बालों की केयर करवाने भेजती हो।”
मम्मी ने कहा
“हां बेटा।”
मैंने कहा
“क्यों मम्मी हर महीने बालों की केयर करवाना?”
मम्मी ने कहा
“बेटा, हर चीज की एक लिमिट होती है। इसलिए क्योंकि जब बाल बड़े हो जाएं तो उनको कटवाना चाहिए। नहीं तो सिर में पसीना आता है। और बालो की केयर करनी पड़ती है। जैसे मैं अपने बालों की केयर करती हूँ क्योंकि मैं औरत हूँ और औरतों के बाल बड़े होते हैं। लेकिन बेटा केयर नहीं करते तो इंफेक्शन हो सकता है।”
मैंने कहा
“जी मम्मी। लेकिन…”
मम्मी ने कहा
“लेकिन क्या बेटा।”
मम्मी ने कहा
“बोल बेटा, चुप मत रहो।”
मैंने कहा
“मम्मी, आप उस दिन शेविंग का सामान क्यों लाई हो। आपके तो दाढ़ी मूंछ नहीं आती।”
मम्मी ने कहा
“बेटा, वो मेरे प्राइवेट पार्ट्स पर बाल होते हैं। जैसे की ये।”
मम्मी ने अपना सर नीचे किया और इशारे से बताया क्योंकि मम्मी की चूत पर बाल थे छोटे छोटे।
मैंने कहा
“क्या मम्मी, आप खुद शेविंग करती हो?”
मम्मी ने कहा
“नहीं।”
मैंने कहा
“तो आप लाई क्यों?”
मम्मी ने कहा
“बेटा, अब करूंगी।”
मैंने कहा
“लेकिन मम्मी, आपने क्या अभी तक शेविंग नहीं की तो आपके बाल तो बहुत बड़े होने चाहिए।”
मम्मी ने कहा
“बेटा, मैं केची से कट लेती हूँ।”
मैंने कहा
“मम्मी, आपने शेविंग क्यों नहीं की केची से करने के बजाय?”
मम्मी ने कहा
“बेटा, मुझे केची से ही कटना आता है। मैंने कभी रेजर ब्लेड यूज नहीं किया। इसलिए मुझे डर लगता है कहीं कट नहीं लग जाए।”
मैंने कहा
“तो मम्मी, फिर आप पापा को भी बोल सकती थीं। वो तो आपके पति हैं और पति-पत्नी तो…”
मम्मी ने कहा
“हां बेटा, मैंने कई बार पिछले 20 सालों में कई बार बोला। लेकिन उन्होंने मना कर दिया। बोलते हैं क्या मैं तेरे बाप का नौकर हूँ और मुझे मारते पीटते हैं।”
मैंने कहा
“मम्मी, फिर आप क्या विट क्रिम का यूज क्यों नहीं करती हूँ?”
मम्मी ने कहा
“बेटा, मैंने कभी यूज नहीं की।”
मैंने कहा
“मम्मी, मैं आपका बेटा हूँ। यदि आप आदेश दे तो क्या मैं आपके बाल साफ कर दूँ?”
मम्मी ने कहा
“नहीं बेटा, तू मेरा बेटा है। और बेटे से पति वाला काम कराना पाप है।”
मैंने कहा
“मम्मी, नहीं तो आपको इंफेक्शन हो सकता है बालों से।”
मम्मी ने कहा
“बेटा, अब क्या करूँ?”
मैंने कहा
“मम्मी, आप चाहे तो अपनी लेडीज फ्रेंड से।”
मम्मी ने कहा
“नहीं बेटा, वो पूछेंगी तेरा पति से करा लेती तो मैं क्या जवाब दूँगी।”
मैंने कहा
“सही कह रही हो मम्मी।”
मम्मी ने कहा
“बेटा, तू चिंता मत कर।”
मैंने कहा
“मम्मी, आप अंकल जी के प्यार को एक्सेप्ट कर लो। वो आपको बहुत प्यार करेंगे।”
मम्मी ने कहा
“नेवर बेटा।”
मैंने कहा
“मम्मी, फिर आप बाल सैव कैसे करोगी?”
मम्मी ने कहा
“मुझे साफ करने की जरूरत नहीं है। मैं केची से कट लेती हूँ।”
मैंने कहा
“मम्मी, प्लीज आप अपने बाल साफ करो।”
मम्मी ने कहा
“क्यों बेटा।”
मैंने कहा
“मम्मी, मैं चाहता हूँ आपके बाल साफ हो ताकि आपको इंफेक्शन न हो।”
मम्मी ने कहा
“बेटा, मैं साफ करा लूंगी।”
मैंने कहा
“मम्मी, किससे पापा कराएंगे नहीं। आपसे होंगे नहीं।”
मम्मी ने कहा
“तेरे पापा से।”
मैंने कहा
“मम्मी, आपने तो कहा पापा ने मना कर दिया है और वो आपको पिटेंगे।”
मम्मी ने कहा
“बेटे, तेरे पापा ही करा लूंगा। और पापा वो होता है जो मम्मी को प्यार करे। पापा पापा होता है। और उस औरत के बच्चे का पापा ही पापा कहलाता है।”
मैंने कहा
“समझा नहीं मम्मी।”
मम्मी ने कहा
“बेटा, पिता उसे ही कहते हैं जो मम्मी को प्यार करे।”
मैंने कहा
“साफ साफ कहिए। मैं समझा नहीं।”
मम्मी ने कहा
“बेटा, मेरे बाल साफ हो जाएंगे।”
मैंने कहा
“क्या आप करोगी?”
मम्मी ने कहा
“नहीं बेटा, तेरे पापा।”
मैंने कहा
“मम्मी, वो तो नहीं करेंगे।”
मम्मी ने कहा
“बेटा, बोला ना पापा उसे बोलते हैं जो मम्मी को प्यार करे।”
मैंने कहा
“मम्मी, मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा। आप क्या बोल रही हैं। क्या आप अंकल जी का प्यार एक्सेप्ट करोगी?”
मम्मी ने कहा
“नहीं बेटा। लेकिन मेरे बाल साफ हो जाएंगे। अब तू अपने दिमाग पर जोर मत डाल। तेरी समझ में नहीं आएगा।”
फिर मम्मी ने मेरे सामने ही अपनी पैंटी पहनी।
मम्मी मेरे सामने ब्रा पैंटी में खड़ी थी।
फिर मम्मी ने कहा
“बेटा, आज क्या पहनू?”
मैंने कहा
“जो आप चाहे मम्मी पहन लो।”
फिर मम्मी ने अलमारी से एक ब्लैक कलर की साड़ी पेटीकोट ब्लाउज निकाली और पहनने लगी। फिर मम्मी ने अपना मेकअप करने लगी। मैं मम्मी के रूम से बाहर आ गया।
फिर मम्मी अपने रूम से बाहर निकली। ब्लैक कलर की साड़ी में मेरी मम्मी का गोरा बदन ऐसा चमक रहा था जैसे वो अभी-अभी स्वर्ग से उतरी कोई अप्सरा हो।
मम्मी ने कहा
“ठीक है बेटा, चल। लेकिन मैं ज्यादा देर नहीं रुकूंगी। अंकल जी के घर।”
मैंने कहा
“जी मम्मी। बस 10 मिनट में वापस आ जाएंगे।”
और हम अंकल जी के घर के लिए अपने घर के पीछे वाले दरवाजे से निकले और अंकल जी के घर का पीछे वाला गेट खटखटाया। अंकल जी समझ गए कि हम ही आए हैं।
अंकल जी जैसे ही दरवाजा खोलता है अंकल जी की खुशी का ठिकाना नहीं रहता। सामने मेरी मम्मी को देखकर अंकल जी अपने होश खो बैठे और मेरी मम्मी को ही देखते रह गए।
ब्लैक कलर की साड़ी में मेरी मम्मी का गोरा बदन ऐसा चमक रहा था जैसे वो अभी-अभी स्वर्ग से उतरी कोई अप्सरा हो। अंकल जी मेरी मम्मी के सुंदरता में खो चुके थे। अंकल जी को कोई होश नहीं था।
मेरी मम्मी ने कहा
“अब क्या गेट पर ही खड़ा रखना है?”
अंकल जी ने कहा
“ओह सॉरी वर्षा। अपने होश में वापस आए। आप प्लीज अंदर आइए ना। और अंकुश तुम भी आओ।”
जैसे ही मैं और मेरी मम्मी अंदर जाते हैं हमें पूरा रूम सजाया हुआ दिखता है। टेबल पर एक केक और बीयर की बोतल रखी है। मेरी मम्मी को थोड़ा अजीब भी लगता है पर वो अंदर आ कर बैठ जाती है। क्योंकि मम्मी को बीयर पसंद नहीं है।
अंकल जी ने कहा
“वर्षा, क्या लेंगे आप?”
मम्मी ने कहा
“कुछ नहीं। अंकल जी आप तो ऐसे पूछ रहे हैं जैसे हम आपके गेस्ट हैं और पहली बार आए हैं।”
अंकल जी ने कहा
“हां सॉरी मैं तो भूल गया। पर अब आपका सिर दर्द कैसा है मम्मी मैंने मेरी तरफ देखा क्योंकि ये सिरदर्द वाली बात अंकल जी को कैसे पता चली। मैं अपना सर नीचे कर लिया।”
मम्मी ने कहा
“हां पहले से आराम है।”
अंकल जी अंदर गए और मैं मम्मी सोफे पर बैठे थे। अंकल जी एक ट्रे में 2 ग्लास पानी लाए पास आते ही अंकल जी की नजर मेरी मम्मी की क्लिवेज पर अटक जाती है।
मेरी मम्मी के स्तन देख अंकल जी अपने लंड को सख्त होने से रोक नहीं पाते। मेरी मम्मी भी अंकल जी को अपने स्तन घूमते हुए देख कर थोड़ा मुस्कुराते हैं और अपनी साड़ी का पल्लू सही कर लेती हैं। क्योंकि मेरी मम्मी अंकल जी को तड़पाना चाहती है।
मम्मी ने कहा
“योगेश जी, मुझे जल्दी जाना है तो प्लीज थोड़ा जल्दी कर लो।”
अंकल जी ने कहा
“वर्षा, अभी तो आई हो आप। अभी से जाना को कह रही हो। पहले थोड़ा सेलिब्रेट तो कर लो।”
ये कह कर अंकल जी ग्लास में बीयर डालने लगते हैं।
मम्मी ने कहा
“योगेश जी, ये क्या कर रहे हो। मैं शराब नहीं पीती।”
अंकल जी ने कहा
“वर्षा, ये शराब नहीं है बीयर है।”
मम्मी ने कहा
“हां बट मैं ये सब नहीं पीती।”
अंकल जी ने कहा
“वर्षा, आज मना मत करो ना प्लीज।”
मम्मी ने कहा
“सॉरी योगेश जी लेकिन मैं ये नहीं पी सकती। बस।”
अंकल जी ने कहा
“ओके वर्षा, जैसी आपकी मरजी। पर मेरा साथ देने के लिए कोल्ड ड्रिंक तो ले ही सकते हो ना आप।”
मम्मी ने थोड़ा सोचने के बाद कहा
“ठीक है डाल दो।”
अंकल जी ने कहा
“अंकुश बेटा तुम तो बीयर लो हे।”
मैं कुछ बोलता उससे पहले ही मम्मी ने कहा
“नहीं वो बीयर नहीं लेगा। आप उसे भी कोल्ड ड्रिंक्स दो।”
और मुझे टॉयलेट जाना है। मैं आती हूँ। और फिर मम्मी टॉयलेट गई।
फिर अंकल जी मम्मी के जाते ही मम्मी के ग्लास में बीयर डाल देते हैं और मुझे पूछते हैं
अंकल जी: बेटा तुम कोल्ड ड्रिंक या बीयर लेगा। अब बताओ अब तो वर्षा नहीं है।
मैंने कहा
“अंकल जी थोड़ी कोल्ड ड्रिंक थोड़ी बीयर मिक्स।”
अंकल जी ने कहा
“शाबाश बेटा। लेकिन तेरी मम्मी को तो फुल बीयर के नशे में चोदूंगा। ब्लैक साड़ी में तेरी मम्मी का बदन कैसे अप्सरा लग रहा है। आज तो उसे पूरी रात चोदना है मुझे। बेटा आज तू कैसे भी करके इसे पूरी रात के लिए। मैं घर ही रुकवाना।”
मैंने कहा
“लेकिन पापा रात को घर आएंगे।”
अंकल जी ने कहा
“बेटा वो तेरा काम है। वो तू संभालना। लेकिन आज पूरी रात वर्षा मेरे घर रहेगी। अभी 5 बजे है। सुबह 8 बजे तक पूरे 15 घंटे में वर्षा के साथ रहना चाहता हूं।”
मैंने कहा
“ओके अंकल जी एनजॉय करो। पापा को मैं बोल दूंगा। आज तो दोस्त के घर आए हैं। सुबह ही आएंगे।”
अंकल जी ने कहा
“शाबाश बेटा।”
फिर अंकल जी ने मम्मी के ग्लास में एक टैबलेट डाली।
मैंने कहा
“अंकल जी ये टैबलेट क्या है।”
अंकल जी ने कहा
“बेटा ये वियाग्रा है। इससे नशा बढ़ेगा। आज पूरी रात चोदना है। तेरी मम्मी को साली ने आते ही लंड खड़ा कर दिया।”
मैंने कहा
“अंकल जी आपको वियाग्रा मम्मी के सामने ही मिलानी थी।”
अंकल जी ने कहा
“वो आज थोड़ी नाराज है। वो आज मुझे से नहीं चुदना चाहती है। इसलिए मैं उसे वियाग्रा से गरम करूंगा। फिर वो मुझे से चुद जाएगी। रात को थोड़ी नाराज हो गई थी वो।”
मैंने कहा
“जी अंकल जी मम्मी सिर्फ आपकी है। आपको जो करना है करो।”
फिर मम्मी टॉयलेट से आ गई। और आने के बाद हल्की हल्की सिप ले कर ड्रिंक पीने लगती है। जिसे देख अंकल जी मन ही मन खुश हो जाते हैं।
मम्मी पहले ही एक टैबलेट खा कर आई थी सिर दर्द की और अब दूसरी टैबलेट वियाग्रा की भी अंकल जी ने धोखे से उसे खिला दी। ना चाहते हुए भी मेरी मम्मी का शरीर गरम होने लगता है।
अंकल जी मुझे दूसरी तरफ मुंह कराने का इशारा करते हैं। मैं समझ गया मेरे सामने मम्मी कुछ नहीं करेगी। इसलिए मैं उठा मम्मी के बगल से।
मम्मी ने कहा
“कहां जा रहा है बेटा।”
मैंने कहा
“मम्मी वो मैं अंकल जी के लैपटॉप में मूवी देखता हूँ।”
और पास में रखे दूसरे सोफे पर अंकल जी का लैपटॉप लेकर बैठ गया और ईरफोन लगा लिए और एक मूवी स्टार्ट कर दी।
मैं इस तरह बैठा था मम्मी की तरफ। मेरी पीठ थी। मम्मी को लगेगा मैं उन्हें नहीं देख रहा हूँ। और मेरे कानों में ईरफोन थे। लेकिन मैं भी मम्मी को देख नहीं सकता था। बल्कि मम्मी मुझे देख सकती है। मैं मम्मी के आगे आ गया। लेकिन मैं जहां बैठा था वहां एक बड़ा मिरर है जिससे मैं पीछे का मतलब मम्मी अंकल जी को देख रहा था।
मम्मी आरम से बीयर पी रही थी। चुसते चुसते अचानक अंकल जी ने मेरी मम्मी के स्तनों के थोड़ा ऊपर मेरी मम्मी की साड़ी का पल्लू नीचे कर के अपना हाथ रख देते हैं।
मम्मी ने कहा
“ये क्या कर रहे हो योगेश जी। अंकुश सामने बैठा है।”
अंकल जी ने कहा
“वर्षा शायद कुछ लगा है आपके। और अंकुश ने तो ईरफोन लगा रखे हैं। और वो मूवी देखने में व्यस्त है। उसे कुछ नहीं दिख रहा है और सुनाई भी नहीं दे रहा है।”
(मेरी मम्मी भी नीचे नजर कर के देखती है।)
मम्मी ने कहा
“ये तो तिल है। क्या आप उसे पहली बार देख रहे हो। क्या पिछले 6 महीनों से नहीं देखा।”
अंकल जी ने कहा
“वर्षा और कहां कहां है आपके तिल। वैसे एक तिल और देखा था मैंने।”
मम्मी ने कहा
“जानती हूँ आप क्या तिल की बात कर रहे हो। आप तिल देखने के बहाने मुझे नंगी करोगे। आज मैं आपको कुछ नहीं करने दूंगी। और अब आप तिल बिल को छोड़ो। आज कुछ नहीं दूंगी आपको। और अब केक काटो और मुझे जाने दो। वैसे आज आपका बर्थडे भी नहीं फिर केक क्यों काट रहे हो।”
अंकल जी ने कहा
“केक तो एक बहाना मेरी जान से मिलने का। बस आपको देखने की इच्छा ही थी। तो केक ले आया।”
मम्मी ने कहा
“क्या पिछले 6 महीनों से नहीं देख रहे हो सब देख रहे हो और कर भी रहे हो।”
अंकल जी ने कहा
“ठीक है काटो केक और आज पूरी रात यहीं रुकना है।”
और अंकल जी केक लाए और टेबल पर रखा और मम्मी को बोले काटो।
मम्मी ने कहा
“मैं क्यों काटूँ। आप काटिए।”
और मम्मी को आवाज देने लगी।
मम्मी ने कहा
“अंकुश बेटा।”
मैंने साफ सुन रहा था। मैंने कानों में ऐसे ही ईरफोन लगा रखे थे। लेकिन आवाज तो आ रही थी। मैं तो सिर्फ उन दोनों की बातें सुन रहा था। जब मम्मी ने आवाज दी तो मैं कुछ नहीं बोला। जानबूझकर ताकि मम्मी को लगे मैं कुछ भी नहीं सुन रहा हूँ।
अंकल जी ने कहा
“वो नहीं सुनेगा ईरफोन की वजह से। आओ वर्षा हम दोनों केक काटते हैं।”
और फिर अंकल जी मेरी मम्मी के पास बैठ जाते हैं और मेरी मम्मी का हाथ पकड़ा और केक काटा। अंकल जी मेरी मम्मी को केक खिलाने लगते हैं।
मम्मी ने कहा
“आप केक लाए हो इसलिए पहले आप केक खाओ।”
अंकल जी ने कहा
“वर्षा तो खिला तो मुझे अपने हाथों से केक।”
मम्मी ने मुस्कुराते हुए कहा
“हां खिलाती हूँ। लो खाओ।”
और मम्मी केक का एक टुकड़ा उठाती है और अंकल जी के मुंह में डालती है तो अंकल जी मेरी मम्मी की उंगली भी लिक करते हैं जिससे मेरी मम्मी के शरीर में एक अलग सा करंट दौड़ जाता है। मम्मी ने कहा
“मेरी उंगली क्यों चाट रहे हो।”
अंकल जी ने कहा
“तुम्हारी उंगली बहुत मीठी है। स्वादिष्ट है। इसलिए।”
और फिर अंकल जी केक का एक टुकड़ा मम्मी को खिलाते हैं जो मम्मी के होठों पर लग जाता है तो
मम्मी अपने होठों को रुमाल से साफ करने लगती है तो अंकल जी मम्मी को रोकते हैं और बोलते हैं
अंकल जी: नहीं अपने होठों को रुमाल से साफ नहीं करते।
मम्मी ने कहा
“तो किससे साफ करते हैं।”
अंकल जी ने कहा
“बताता हूँ।”
और अंकल जी अपना मुंह मेरी मम्मी के होठों के पास लाते हैं और अंकल जी अपने होठों को मेरी मम्मी के होठों से लगाकर मेरी मम्मी के होठों को चूसने लगते हैं। मम्मी थोड़ा विरोध करती है और बोलती है
“अंकुश के सामने नहीं।”
अंकल जी ने कहा
“अंकुश को कुछ नहीं दिख रहा है।”
और अंकल जी फिर से मेरी मम्मी के होठों को चूसने लगते हैं। और फिर मम्मी भी अंकल जी के लिए अपने होठों को अंकल जी के होठों से चुसवाने के लिए अपना मुंह खोल देती है और अंकल जी मेरी मम्मी के होठों का रस पान कराने लगते हैं।
मेरी मम्मी मुंह खोलने के बाद भी मना करती है। एक तरफ मम्मी अपना मुंह खोलकर अपने होठों को चूसवा भी रही थी और बार बार नखरे भी कर रही थी अंकुश देख लेगा।
फिर अंकल जी मेरी मम्मी को वहीं सोफे पर लिटाकर मेरी मम्मी की साड़ी का पल्लू गिरा देते हैं और मेरी मम्मी के पेट पर किस की बौछार करते हैं।
मेरी मम्मी मना करने लगती है। पर वो जानती है कि अगर अभी अंकल जी को नहीं रोका तो बहुत देर हो जाएगी। और मेरी मम्मी को मेरा भी देखने का डर था कहीं मैं पीछे मुड़ कर न देख लूं। हालांकि मम्मी जानती है मैं उन्हें यहां चुदवाने लाया हूं।
पर मां हमेशा बेटे के सामने कभी अपने पति के साथ भी शर्माती है। पर यहां तो अंकल जी के साथ रंगरेलियां मना रही है तो मम्मी को शर्म आएगी ही। इसलिए वो अंकल जी को अपने ऊपर से धकेलती है।
मम्मी ने कहा
“अंकल जी मेरी तबीयत ठीक नहीं है। मुझे जाना है।”
अंकल जी ने कहा
“वर्षा अचानक क्या हुआ। कुछ देर और रुको ना।”
मम्मी ने कहा
“मेरे सर में दर्द है अंकल जी।”
अंकल जी ने कहा
“वर्षा कुछ देर आराम कर लो फिर चले जाना। मेरी इतनी बात मान लो प्लीज।”
मेरी मम्मी को कुछ समझ नहीं आता। उनके शरीर की आग बहुत भड़क चुकी है क्योंकि अंकल जी ने वियाग्रा दी थी। जिसे वो शांत करना चाहती है। पर मेरी मम्मी मेरे सामने वो कुछ नहीं कर सकती।
मम्मी ने कहा
“अंकल जी प्लीज रूम में चलते हैं। यहां अंकुश है। मुझे शर्म आ रही है।”
अंकल जी ने कहा
“ठीक है चलो वर्षा।”
और फिर मेरी मम्मी उठ कर अंदर रूम में चली जाती है और बेड पर लेट जाती है। और लेने भर से उसे आराम कहां मिलने वाला था। क्योंकि वियाग्रा तो अपना असर दिखाएगी ही। जब तक चुदाई नहीं होगी मम्मी को आराम नहीं मिलेगा। मैं और अंकल जी दोनों ही बाहर से मेरी मम्मी को अपने पैरों को आपस में रगड़ रही है और वो साड़ी के ऊपर से ही अपनी चूत को रगड़ रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे मम्मी का मन कर रहा है कि अभी अपनी चूत में उंगली डाल ले। मैं अंकल जी से बोला
मैं: अंकल जी आप जाकर मेरी मम्मी की प्यास बुझा दो। मुझे मम्मी की तड़प बेचैन नहीं दिख रही है।
अंकल जी ने कहा
“ये वियाग्रा का असर है बेटा।”
और मैं अंकल जी दोनों ही बाहर विंडो से मम्मी की बेचैन तड़प को बाहर से देख रहे थे और अंकल जी मंद मंद मुस्कुरा रहे थे।
अंकल जी ने कहा
“बेटा आज तेरी मम्मी को पूरी रात रगड़ रगड़ के चोदूंगा। सुबह ये ढंग से चल भी नहीं पाएगी।”
मैंने कहा
“अंकल जी आप जैसा चाहो वेवा करो। मम्मी को पूरी रात चोदो। मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है। मैंने 6 महीने पहले ही मम्मी को आपके हवाले कर दिया है। अब मम्मी सिर्फ आपकी है।”
अंकल जी ने कहा
“बेटा अब मैं रूम में जाता हूँ और तेरी मम्मी को चोदूँगा।”
और अंकल जी रूम में गए और बेड के पास जाकर मेरी मम्मी को जो बेड पर लेटी थी मेरी मम्मी की टांगों को चूमना शुरू कर देते हैं।
मेरी मम्मी के मुंह से सिसकियां निकलने लगती हैं। पर वो अब भी अंकल जी को मना करती है।
अंकल जी जानते हैं कि मेरी मम्मी अब नखरे कर रही है जो मेरी मम्मी की पुरानी आदत है। और वो बोलते हैं
अंकल जी: वर्षा तुम्हारी नखरे करने की आदत नहीं गई। चुदवाती भी हो और नखरे भी करती हो। मुझे नहीं चुदवाना।
अंकल जी मेरी मम्मी के पीछे मेरी मम्मी की गांड पर अपना लंड लगाते हैं और मेरी मम्मी का मुंह पकड़ के मेरी मम्मी को अपनी ओर टर्न करने की कोशिश करते हैं।
अंकल जी ने कहा
“वर्षा इधर देखो ना मेरी ओर।”
मम्मी ने कहा
“नहीं अंकल जी तुम प्लीज जाओ।”
अंकल जी मेरी मम्मी की एक नहीं सुनते और मेरी मम्मी को अपनी ओर घुमा के मेरी मम्मी के होठों को चुमने की कोशिश करते हैं।
मेरी मम्मी एक और बार कोशिश करती है और अंकल जी को अपने ऊपर से हटा के जाने लगती है। पर अंकल जी मेरी मम्मी की साड़ी का पल्लु पकड़ लेते हैं जिससे मेरी मम्मी बेड के पास ही रुक जाती है।
अंकल जी फिर एक बार मेरी मम्मी की ओर कदम बढ़ा देते हैं और मेरी मम्मी भी पीछे हटने लगती है। मेरी मम्मी दीवार के सहारे खड़ी हो जाती है।
अंकल जी मेरी मम्मी के कंधे पर अपना एक हाथ रखते हैं और दूसरे से मेरी मम्मी के पेट को मसल देते हैं।
अंकल जी ने कहा
“वर्षा क्यों आप खुद भी तड़प रही हो और मुझे भी तड़पा रही हो। आपकी प्यास में अच्छी तरह से जानता हूँ। पिछले 6 महीनों से जानता हूँ आप चुदवाने के तड़पती हो और मुझे चुदवाती हो। लेकिन चुदवाने से पहले नखरे करती हो। और तुम्हारी इस नखरे करने की आदत पर मैं तुम पर फिदा हूँ। मुझे तुम्हारा ये नखरे बहुत पसंद है वर्षा। अब आ जाओ और मत तड़पाओ।”
मम्मी ने कहा
“श्श आह योगेश जी मुझे जाने दो। मेरी आज तबीयत ठीक नहीं है। रात को आप आज मेरा घर और फिर कर लेना।”
अंकल जी ने कहा
“नहीं वर्षा मैं जानता हूँ तू नखरे कर रही हो। तुम्हारी चूत में आग लगी हुई है। जिसे अभी ही शांत करना जरूरी है। नहीं तो तुम बीमार हो जाएगी। और अंकुश ने मुझे तेरी चूत की आग को ठंडा करने की जिम्मेदारी दी है। मुझे से आपको तड़पता देख रहा नहीं जाता वर्षा। आज मैं आपकी प्यास शांत कर के ही तुम्हें तुम्हारे घर भेजूँगा।”
और अंकल जी इतना कह कर मेरी मम्मी को फिर से बेड पर धकेल देते हैं और मेरी मम्मी के पास बैठ कर अपनी टीशर्ट उतार फेंकते हैं। मेरी मम्मी अंकल जी को लगातार मना कर रही है। पर अंकल जी जानते हैं ये अंकुश की वजह से शर्मा रही है।
अंकल जी ने कहा
“वर्षा तुम अंकुश की वजह से शर्मा रही हो।”
मम्मी ने कहा
“मुझे अच्छा नहीं लगता वो बाहर बैठा है। वो मेरा बेटा है।”
अंकल जी ने कहा
“उसे मैंने बोल दिया है वो अंदर नहीं आएगा।”
और अंकल जी मेरी मम्मी के पेटीकोट को ऊपर करके पेटीकोट में अपना हाथ डालने लगते हैं।
मेरी मम्मी अंकल जी का हाथ रोकती है। पर अंकल जी को अपना हाथ मेरी मम्मी की पैंटी तक लेने में कोई ज्यादा समय नहीं लगता। मेरी मम्मी की पैंटी पूरी तरह भीगी हुई है। जिसे देख अंकल जी के चेहरे पर हंसी आ जाती है। अंकल जी की चूत पर हाथ फेरने से मेरी मम्मी का विरोध भी सिर्फ नाम मात्र का ही रह जाता है।
अंकल जी अपना हाथ मेरी मम्मी की चूत पर ही फेरते रहते हैं और मेरी मम्मी के ऊपर आ जाते हैं।
अंकल जी ने कहा
“वर्षा क्यों बहाना कर रही हो। आपकी चूत में तो सैलाब आया हुआ है।”
ये कह कर अंकल जी मेरी मम्मी की पैंटी में अपना हाथ डाल के मेरी मम्मी की चूत को सहलाने लगते हैं।
“देखना चाहती हो आप कितनी प्यासी हो।”
अंकल जी अपने उंगलियों को रोक मेरी मम्मी के होठों के पास अपने होठ लाते हैं। अंकल जी के रुकने से मेरी मम्मी की आंख खुल अंकल जी को देखती है। अंकल जी को इतना पास पाकर मेरी मम्मी अंकल जी को ना रुकने को कहना चाहती है पर शर्म की वजह से कुछ कहती नहीं। क्योंकि मेरी मम्मी कभी कभी तो एकदम वेश्या बन जाती है और कभी कभी एक संस्कारी और शर्माती है। जब कि अंकल जी से उनगनात बार चुदवा चुकी है।
अंकल जी अपने होठ मेरी मम्मी के ओर करीब ले आते हैं जिसे देख मेरी मम्मी भी अपना मुंह ऊपर को उठा के अंकल जी के होठों को चूमने की कोशिश करती है। पर अंकल जी झट से पीछे हो जाते हैं।
एक दो बार अंकल जी ऐसे ही मेरी मम्मी को तड़पाते हैं जिससे मेरी मम्मी की झुनझलाहत और बढ़ जाती है। फिर अचानक अंकल जी मेरी मम्मी के करीब आते हैं। पर इस बार वो पीछे नहीं हटते और मेरी मम्मी के रस से भरे होठों को जंगली जानवर की तरह चूसने लगते हैं।
मेरी मम्मी भी अपना मुंह खोल अंकल जी को पूरो सपोर्ट कराने लगती है।
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update 60
अंकल मेरी मम्मी के शरीर के साथ खेल कर मेरी मम्मी की प्यास बढ़ाने लगते हैं। अंकल के हाथ कभी मेरी मम्मी की चूत पर तो कभी मेरी मम्मी के बूब्स को दबाने लगते हैं। मेरी मम्मी भी राह रह कर अंकल को मना तो करती है, पर अंकल का पूरा साथ भी देती है।
अंकल अब मेरी मम्मी के पास बैठकर मेरी मम्मी के बूब्स के ऊपर से हाथ फेरते हुए नीचे की ओर लाने लगते हैं।
मेरी मम्मी बेहोश होकर बिस्तर पर आहें भरने लगती हैं। अंकल के छूने का अहसास मेरी मम्मी को पागल बना रहा है। ऐसी फीलिंग मेरी मम्मी को पहले भी अंकल ने करवाई थी, पर आज कुछ ज्यादा हो रही है।
अंकल अपना हाथ मेरी मम्मी के पेट पर फेरते हुए मेरी मम्मी के पेटीकोट के नादे पर बार-बार फेरते हैं, जिससे मेरी मम्मी का शरीर कांप उठता है। मेरी मम्मी जानती हैं कि अंकल क्या करने वाले हैं। मेरी मम्मी के बोलती हैं, “अब रुक जाओ योगेश जी, बर्दाशत नहीं हो रहा है।”
अंकल : क्या बर्दाशत नहीं हो रहा है मेरी बुलबुल वर्षा?
मम्मी : मम्मी कोई जवाब नहीं देती, बस वो सिवाय मून करने के और कुछ नहीं कर पाती।
अंकल : बोलो वर्षा, कुछ तो बोलो।
मम्मी : मम्मी धीरे से बोलती हैं, “प्ल्ज अब बस करो।”
अंकल : वर्षा, क्या सच में आप चाहती हो कि मैं आपको चोद दू?
मम्मी : हां योगेश जी। बहुत हो गया ये सब।
अंकल : बहुत कहा वर्षा? अभी तो अपने मुझे अपनी चूत का रस भी नहीं पिलाया है।
मम्मी : पिला तो दिया था रात को, अब और बर्दाशत नहीं हो रहा है अब मुझे।
अंकल : अब मुझे क्या वर्षा? मैं समझा नहीं।
मम्मी : प्लीज योगेश जी।
अंकल : बोलो वर्षा।
मम्मी : प्लीज मुझे छोड़ दो, नहीं तो मैं मर जाऊंगी।
अंकल : वर्षा, छोड़ दू या चोद दू?
मम्मी : चोद दो।
अंकल : क्या?
मम्मी : मेरी चूत।
अंकल : किससे?
मम्मी : प्ल्ज।
अंकल : बोलना पड़ेगा वर्षा।
मम्मी : आपके लंड से।
अंकल : हां चोदूंगा, लेकिन पहले मुझे अपनी चूत का रस पिलाओ।
मम्मी : ऑयलो, लेकिन जल्दी करो, अब मुझसे बर्दाशत नहीं हो रहा है।
अंकल : थोड़ा वेट करो वर्षा, पहले मुझे मेरा काम करने दो।
मम्मी : अब कौन सा काम?
अंकल : पहले तुम्हें नंगी करूंगा।
अंकल : चुप रहो, मैं कर रहा हूं। अब चुप रहो।
ये कहते हुए अंकल मेरी मम्मी का पेटीकोट थोड़ा नीचे सरकाते हैं और मेरी मम्मी की चूत के पास अपनी जीभ से चाटते हुए ऊपर को बढ़ने लगते हैं।
मेरी मम्मी की मून करने की आवाज अब काफी तेज हो चुकी है। मम्मी ने ब्लैक ब्लाउज पहना था और ब्लैक पेटीकोट।
मम्मी : प्ल्ज अब बस करो ना।
अंकल : वर्षा मेरी जान, अभी तो तेरी चूत में अपनी जीभ उतार कर तेरी चूत का रस पीऊंगा, फिर तेरी चूत चुदाई करूंगा और तेरे बूब्स नीचोड़ूंगा। वर्षा, मैं बहुत लकी हूं जो मुझे तेरे जैसी गरम माल मिली। तू मुझसे 15 साल छोटी है, मैं 48 का, तू 33 की तेरी जैसी जवान औरत को पकड़ मैं बहुत लकी हूं। और एक वो नमर्द है जो तेरे साथ पिछले 20 साल से है, लेकिन तुझे देखकर भी उसका लंड खड़ा नहीं होता। तेरे जैसी गरम माल उस नमर्द को भगवान ने इसलिए दिया है कि तुम हमारे लंड की आग के साथ अपनी प्यास को शांत करे। वो सिर्फ तेरा नाम का पति है। असली पति का फर्ज तो मैं निभा रहा हूं।
और फिर अंकल खड़े होते हैं और अपने सारे कपड़े उतारकर दूर फेंक देते हैं। मेरी मम्मी अंकल के खड़े लंड को ध्यान से देखती रहती हैं, फिर अंकल की तरफ मुस्कुराते हुए स्मिल देती हैं और फिर शर्माते हुए अपने दोनों हाथों से अपना चेहरा छुपा लेती हैं।
अंकल : हाथों से चेहरा क्यों छुपा रही है? क्या लंड पहली बार देख रही है जो तुझे शर्म आ रही है? क्या पिछले 6 महीनों से जब मेरा लंड तू अपनी चूत में लेकर मेरे लंड पर उछालती है तब तुझे शर्म नहीं आती?
मम्मी : ये कैसे बात कर रहे हो योगेश जी, आप मुझसे।
अंकल : कुछ गलत नहीं कहा है जान।
ये कहते हुए अंकल मेरी मम्मी के ब्लाउज के हुक खोलने लगते हैं और सारे हुक खोलने के बाद मेरी मम्मी का ब्लाउज उतारने लगते हैं। ब्लाउज नहीं उतर पाता क्योंकि ब्लाउज मेरी मम्मी के नीचे दबा था। अंकल मेरी मम्मी को उठाने का इशारा करते हैं तो मेरी मम्मी उठकर बैठ जाती हैं। फिर अंकल ब्लाउज को उतारने लगते हैं तो मेरी मम्मी भी अंकल की मदद के लिए अपने हाथ पीछे ले जाती हैं और अंकल आसानी से ब्लाउज को उतारकर दूर फेंक देते हैं।
मम्मी : अपने क्यों फेंका?
अंकल : कुछ नहीं बोले। और फिर मम्मी को वापस मेरी मम्मी के बूब्स पर हाथ रखकर पीछे की ओर दक्का देते हैं जिससे मेरी मम्मी वापस लेट जाती हैं। लेकिन अंकल ने अभी भी मेरी मम्मी की ब्रा नहीं उतारी थी। फिर अंकल मेरी मम्मी के लेटते ही मम्मी के नीचे की ओर आते हैं और मेरी मम्मी की कमर पर पेटीकोट के नादे को पकड़ते हैं और नादे को खींचते हैं जिससे नादा खुल जाता है और पेटीकोट को उतारने लगते हैं। लेकिन इस बार भी ब्लाउज की तरह पेटीकोट उतारना संभव नहीं था क्योंकि पेटीकोट मेरी मम्मी के गांड के नीचे दबा था। तो अंकल ने मेरी मम्मी की तरफ देखा तो मेरी मम्मी समझ गई कि अंकल उनसे अपनी गांड ऊपर उठाने के लिए बोलना चाहते हैं। तो मम्मी भी अंकल की तरफ सिल करती हैं और “हां” मैं गाड़न हिलाकर अपनी गांड को ऊपर उठाती हैं लेटे हुए। फिर अंकल मेरी मम्मी का पेटीकोट को नीचे की ओर खींचने लगते हैं और अंकल मेरी मम्मी के पेटीकोट को खींचते हुए मेरी मम्मी के घुटनों तक लाते हैं और मम्मी को अपनी गांड नीचे टिलाने का इशारा करते हैं तो मेरी मम्मी अपनी गांड नीचे टिका लेती हैं। फिर अंकल मेरी मम्मी के दोनों टांगों को ऊपर उठाते हैं और फिर मेरी मम्मी के ब्लैक पेटीकोट को निकाल देते हैं। मेरी मम्मी की टांग से अब मेरी मम्मी सिर्फ ब्रा पैंटी में अंकल के सामने चुदाने के लिए बिस्तर पर लेटी हैं। मेरी मम्मी ब्रा पैंटी में स्वर्ग की अप्सरा लग रही हैं, लेकिन मेरी मम्मी के शरीर से ब्रा पैंटी भी बहुत जल्द उतर जाएंगी। ये उतारने के बाद ही मेरी मम्मी की जवानी की प्यास अंकल अपने खड़े लंड से बुझाएंगे और मेरी मम्मी के मखमली शांगमरमर मुलायम शरीर को मसलेंगे अपने कठोर हाथों से।
और फिर अंकल मेरी मम्मी को देखते रहते हैं तो मेरी मम्मी भी अंकल को मुस्कुराते हुए देखती हैं, फिर अपनी पैंटी की तरफ उंगली करते हैं।
अंकल : क्या इसे भी उतारू?
मम्मी : हां प्ल्ज इसे भी उतार दो और मेरी आग बुझा दो प्लीज योगेश जी।
तो फिर अंकल अपने हाथों को अपनी पीठ पर ले जाते हैं और अपने दोनों हाथों पीठ पर आपस में पकड़ लेते हैं और मेरी मम्मी की चूत पैंटी पर अपना मुंह रखते हैं और मेरी मम्मी की चूत को पैंटी के ऊपर से ही किस करते हैं और मुंह में भर लेते हैं।
जिससे मेरी मम्मी के मुंह आह्ह्ह की सिसकारी निकल जाती है।
मम्मी : प्ल्ज जल्दी उतारिये और चोदिये मेरी चूत।
अंकल : हां बाबी कर रहा हूं। और फिर अंकल अपना मुंह खोलकर अपने दांतों से मेरी मम्मी को कमर पेरी मेरी मम्मी की पैंटी को अपने दांतों से पकड़ते हैं और अपने दांतों से मेरी मम्मी की पैं티 को खींचते हुए नीचे लाने की कोशिश करते हैं, लेकिन उतर नहीं पाते हैं क्योंकि पेटीकोट की तरह मेरी मम्मी की पैंटी भी गांड के नीचे दबी थी।
फिर अंकल अपने दोनों हाथों को अपनी पीठ से हटाते हैं और एक हाथ से मेरी मम्मी के राइट बूब्स को जोर से मसलते हैं और एक हाथ से मेरी मम्मी के पेट को मसलते हैं अपनी मुट्ठी में लेकर। फिर मेरी मम्मी की तरफ देखते हैं तो मम्मी समझ जाती हैं और अपनी गांड को ऊपर उठाती हैं। फिर अंकल एक हाथ से मम्मी के राइट बूब्स को मसलते हुए और एक हाथ से मेरी मम्मी के पेट को मसलते हुए अपने दांतों से मेरी मम्मी की पैंटी को खींचने लगते हैं, जिससे मेरी मम्मी की पैंटी धीरे धीरे मेरी मम्मी के घुटनों तक जाती है। और मेरी मम्मी अपनी गांड वापस से बिस्तर पर टिका देती हैं और अपनी टांगों को उठा लेती हैं। फिर अंकल मेरी मम्मी की पैंटी को अपने दांतों से ही मेरी मम्मी की टांग से निकाल देते हैं और मेरी मम्मी की पैंटी को सूंघ लेते हैं। और मेरी मम्मी सिर्फ ब्रा में थी।
अंकल : क्या खुशबू है वर्षा, तेरी पैंटी में तेरी चूत की?
मम्मी : अब बस कीजिए और जल्दी से चोदिए मेरी चूत।
आज मेरी मम्मी ने सब कुछ ब्लैक पहना था — साड़ी, पेटीकोट, ब्लाउज, ब्रा, पैंटी। सब कुछ ब्लैक मेरी मम्मी के गोरे मखमली शांगमरमर मुलायम शरीर पर ब्लैक बहुत जाचता है।
अब अंकल मेरी मम्मी की टांगों को ऊपर उठाते हैं और मम्मी के पैरों के तलवों को जीभ से चाटने लगते हैं जिससे मेरी मम्मी को गुदगुदी होने लगी।
मम्मी : योगेश जी, नहीं, गुदगुदी हो रही है, मेरी चूत चोदिए।
लेकिन अंकल कुछ नहीं बोले और मेरी मम्मी के पैरों की उंगलियों को मुंह में लेकर चूसने लगे — पहले एक पैर की, फिर दूसरे पैर की उंगलियों को चूसा। फिर अपनी जीभ से मेरी मम्मी के दोनों पैरों को चाटते हुए ऊपर आने लगे — एड़ियों से लेकर घुटनों, फिर जांघों को चाटते हुए मेरी मम्मी की चूत तक पहुंचे। और मेरी मम्मी की चूत के गुलाबी होंठों को अपनी जीभ से चाटते लगे। और मेरी मम्मी की चूत में अपनी जीभ घुसाने लगे और फिर अंदर जीभ घुसाकर मेरी मम्मी को चूत को अपनी जीभ से चोदने लगे। और मेरी मम्मी अपना सर इधर-उधर पटकने लगी और बोली, “गुदगुदी हो रही है, अब रहने दीजिए।” लेकिन 5 मिनट तक मेरी मम्मी की चूत को अपनी जीभ से चोदने के बाद अंकल ऊपर बड़ें और मेरी मम्मी की पेट को अपनी जीभ से चाटते हुए मेरी मम्मी की नंगी में अपनी जीभ घुसा दी। तो मम्मी एकदम ऊपर उठी और अपनी हाथों से अंकल के सिर को पकड़ा, लेकिन अंकल ने मेरी मम्मी को वापस ले दिया और मेरी मम्मी की नंगी में अपनी जीभ से चाता और फिर और ऊपर बड़ें और मेरी मम्मी के बूब्स को ब्रा के ऊपर से ही अपने मुंह में भर कर बारी-बारी से चूसने लगे। तो मम्मी
मम्मी : पहले ब्रा उतारो।
तो अंकल ने मेरी मम्मी के बूब्स को चूसना छोड़ा और अपनी की तरफ देखा।
मम्मी : मम्मी ने मुस्कुराते हुए अपनी गर्दन हां मैं हिलाई।
फिर अंकल ने मेरी मम्मी के नीचे अपने हाथ ले गए — मम्मी लेटे हुई थी — और अंकल मेरी मम्मी के शरीर के ऊपर थे लेटे हुए। अंकल ने अपने हाथों को मेरी मम्मी की पीठ के नीचे ले गए तो मेरी मम्मी थोड़ा ऊपर को उठी, जिससे अंकल को मेरी मम्मी की ब्रा के हुक खोलने में आसानी हो गई।
तभी मेरे मोबाइल पर पापा का कॉल आया।
मैं : हेलो पापा।
पापा : बेटा, एक फाइल अर्जेंट है, लेकर मेरे ऑफिस आ जा।
तो मैंने मम्मी को व्हाट्सएप पर मैसेज कर दिया। मैं पापा के ऑफिस के जा रहा हूं।
फिर मैं घर जाकर पापा की फाइल लेकर पापा के ऑफिस गया और पापा को फाइल दी और वापस आने लगा तो पापा बोले, “बेटा, साथ में चलेंगे।”
फिर मैंने मम्मी के व्हाट्सएप पर मैसेज किया, “मैं पापा के साथ आऊंगा।”
फिर करीब 9 बजे मम्मी का मैसेज आया — “बेटा, मैं घर आ गई।”
फिर मैंने मम्मी को रिप्लाई दिया, “मैं पापा आ रहे हैं।”
और फिर मैं पापा घर पहुंचे।
और अगले दिन।
अगले दिन सनडे था। पापा घर पर ही थे। मम्मी रोज की तरह किचन में खाना बना रही थी। कि तभी मम्मी के मोबाइल पर रिंग बजी। जब मैंने देखा तो अंकल का फोन था। मैंने जैसे ही फोन रिसीव किया —
अंकल : और जन्मन कैसी हो?
मैं : अंकल, मैं हूं।
अंकल : अहा तू है क्या बेटा? मम्मी का फोन तू क्यों रखा है? जा मम्मी को दे।
मैं : मम्मी काम कर रही हैं और पापा भी आज घर पर ही है, हॉल में ही बैठे हैं।
अंकल : अहा, एक काम कर तू अपने पापा को बाहर भेज, मैं आ रहा हूं।
मैं : पापा अभी ही सो के उठे हैं, क्या बोल कर भेजू?
अंकल : वो सब मैं नहीं जानता हूं। और हां, फोन लाइन पर ही रख। जैसे ही वो बाहर जाए, मम्मी को फोन दे देना।
मैं : ओके अंकल।
बहुत हॉल में पापा पेपर पढ़ रहे थे और मम्मी बस किचन से हॉल में आ रही थी।
मैं : पापा।
पापा : हां बेटा।
मैं : पापा, वो मेरा प्रोजेक्ट का कल लास्ट डेट है, आप प्लीज ये सामान ले आओ ना, मैं लिस्ट व्हाट्सएप कर देता हूं आपको।
पापा : तू खुद चला जा ना।
मैं : नहीं जा सकता, मुझे लिखना है, बहुत अभी प्लीज।
पापा : ठीक है, लाता हूं।
मम्मी मुझे ही घूर रही थी क्योंकि मम्मी को पता था कि मेरा कोई प्रोजेक्ट चलू नहीं है।
पापा के जाते ही मम्मी कुछ बोलने वाली थी कि मैंने मम्मी को फोन दे दिया, बोला “आपका फोन है।” और फिर मैं अपने रूम में चला जाता हूं।
मुझे सिर्फ मम्मी की आवाज सुनाई दे रही थी।
मम्मी : नहीं, आज नहीं।
मम्मी : अरे समझिये ना, वो घर में ही है।
मम्मी : अरे अंकश से क्या काम है आपको, नहीं, मैं सब समझती हूं आपका काम।
मम्मी : मुझे डर लग रहा है, आज नहीं।
मम्मी : अहा, ठीक है, लेकिन आप देख लेना सब।
मम्मी : बेटा, तेरे अंकल कुछ बात करेंगे तेरे से, ये ले।
हां, मम्मी आया।
मैं : क्या हुआ अंकल?
अंकल : सुन, मैं अभी 5 मिनट में आ रहा हूं। आज दिन भर तेरी मां को रगड़ कर चोदूंगा। तू अपने बाप को संभाल लेना।
मैं : ठीक है अंकल, आप आ जाइये।
मम्मी : क्या बोला योगेश जी ने?
मैं : मम्मी, वो अभी आ रहे हैं आपको कंप्यूटर सिखाने और उनको कुछ जरूरी बात भी करनी है आपसे।
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