Today, 08:56 AM
jabardast shandar update keep writing 10/10
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Fantasy Mummy aur Uncle. Part 2 in hindi font
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Today, 08:56 AM
jabardast shandar update keep writing 10/10
11 hours ago
update 38
अंकल मुस्कुरा कर मेरी मम्मी की ओर ही देख रहे थे। उन्हें अपनी ओर इस तरह देखते देख मेरी मम्मी शर्मा कर कहने लगीं। ऐसी क्या देख रहे हैं। तो वो मुस्कुराते हुए कहने लगे। तुम्हें वर्षा इस समय तुम बहुत ही खूबसूरत लग रही हो। कोई मर्द किसी औरत के हुस्न की इस तरह तारीफ करे उससे कितनी खुशी होती है। खासकर उसका यार उसकी खूबसूरती की तारीफ करे तो इतनी खुशी ये तो सिर्फ वही औरत बता सकती है। अपनी खुशी को मेरी मम्मी छुपाती अंकल से कहने लगीं। योगेश जी आपको अभी मैं खूबसूरत लग रही हूँ। रात में नहीं लगी। तो अंकल मेरी मम्मी का हाथ पकड़ कर मेरी मम्मी का हाथ अपने खड़े लंड पर रख। डार्लिंग मुझसे इससे पूछो। रात से कैसे एकदम खड़ा है। तो मेरी मम्मी शर्मा कर अपना हाथ छुड़ा कर बोलीं। बस बस अब आप नहा लीजिए। मैं बाहर जाती हूँ किचन में। बाहर वो लड़की हमारा वेट कर रही है। एक बार तो दरवाजा खटखटा कर बुलाने भी आ गई है। और जैसे ही जाने के लिए मुड़ीं तभी अंकल जी ने मेरी मम्मी का हाथ पकड़ लिया। और कहने लगे। इतनी भी क्या जल्दी है मेरी जान। और मेरी मम्मी का हाथ पकड़ कर अपनी ओर खींचा। और अपने दोनों हाथ मेरी मम्मी की कमर में डाल कर मेरी मम्मी को अपनी बाँहों में भर लिया। मेरी मम्मी अपने यार योगेश अंकल की छाती से लगी हुई थीं। मेरी मम्मी को बाँहों में लिए अंकल ने मेरी मम्मी के माथे से मेरी मम्मी की रेशमी झुलफों को हटा कर प्यार से मेरी मम्मी के गालों को सहलाते। अपने होठों को मेरी मम्मी के चिकने गालों पर फिराते बोले। वर्षा डार्लिंग तुम एक नशा हो। मेरी जान क्यों तड़पा रही हो। आओ ना। और अंकल ने अपने होठ मेरी मम्मी की गर्दन पर लगा दिए। और उसे जोर जोर से चूमने लगे। और अपने दोनों हाथों को मेरी मम्मी की साड़ी के अंदर हाथ डाल कर मेरी मम्मी की दोनों चुचियों को दबाने लगे। पता नहीं क्यों अंकल के इस तरह मेरी मम्मी की चुचियाँ दबाने पर मेरी मम्मी अपने आप को बहुत असहज महसूस कर रही थीं। और बोलीं। बाहर वो लड़की है। प्लीज छोड़िए। अंकल: वो लड़की तो रात में भी बाहर थी। अब नखरे क्यों। मम्मी: रात में तो आपके साथ ये सब करते मुझे इसलिए ज्यादा फील नहीं हो रहा था कि रात में एक हमारी सुहागरात की रात थी। और हर लड़की की मान में सुहागरात की एक अलग ही एक्साइटमेंट होती है। वो तो सुहागरात के कारण मैंने आपका खुलकर साथ दिया। वो लड़की भी जानती है सुहागरात में तो सब होता है। लेकिन अब दिन है इसलिए जाने दीजिए। नहीं तो कहेगी मैडम दिन में भी। अंकल: हाँ तो बोल देना दिन में भी करवाती हूँ। मम्मी: आप भी अब चलिए। दिन में सब नहीं करना। वो कहेगी मैडम दिन में तो आराम करो। इसलिए मैं उसका सामना नहीं कर पाऊँगी। अंकल: नहीं वर्षा एक राउंड। मम्मी: नहीं योगेश जी। वो रात थी इसलिए मैंने आपका खुलकर साथ दिया। और देना भी चाहिए। लेकिन अब दिन में भी करवाऊँगी तो कहेगी मैडम। इसलिए मैं उसके इस घर में होते हुए दिन में कुछ नहीं। और मुझे दिन में प्लीज शर्म आएगी। अगर उसने मेरी दिन में चीखें सुन लीं तो। अंकल: उसने तो पूरी रात सुनी होगी। मम्मी: रात में हर औरत चुदती है। लेकिन दिन में कपड़े अभी उतारते। अंकल: वो जानती। मैंने उसके सामने तुझे मंगलसूत्र पहनाया। माँग में सिंदूर डाला। मम्मी: वो ये भी जानती होगी मैं आपकी वाइफ नहीं हूँ। अंकल: हाँ उसे पता है तुम मेरी लवर हो। वाइफ नहीं। मम्मी: इसलिए दिन में नहीं। अब चलिए। अंकल: उसे पता है तो क्यों डरती हो। जो रात में होता है वो दिन में भी होता है। इसलिए तुम्हारी चुचियाँ मेरी हैं दिन रात। मम्मी: आप नहीं मानोगे। ठीक है। जब उसके सामने आपने मेरी माँग में सिंदूर डाला है तो कर लीजिए। आपका हक है मेरी चुचियों पर। तो मैं कैसे आपको रोक सकती हूँ। अपनी चुचियों से खेलिए खेलिए। पर पहले नाश्ता कर लो। अंकल: पहले तुम्हारी चुचियों का नाश्ता करूँगा। और अंकल मेरी मम्मी की चुचियों को दबाते हुए काफी एक्साइटेड हो गए थे। और मेरी मम्मी की साड़ी का पल्लू पकड़ कर मेरी मम्मी की चुचियों के ऊपर से हटा दिया। मेरी मम्मी के टाइट ब्लाउज में मेरी मम्मी की चुचियों का शेप। और मेरी मम्मी के निप्पल जो एकदम किसी अंगूर के दाने की तरह खड़े थे। साफ नजर आ रहे थे। अपने यार योगेश जी को भले ही रात में उन्होंने मेरी मम्मी की इन चुचियों को जी भर कर मसला था। चूसा था। लेकिन दिन के उजाले में उनको अपनी चुचियों को इस तरह घूरते देख मेरी मम्मी ने शर्म से अपने हाथों से अपनी चुचियों को ढक लिया। अंकल ने मेरी मम्मी के हाथ मेरी मम्मी की चुचियों से हटा कर मेरी मम्मी के ब्लाउज के बटन खोलने लगे। और जैसे ही वो मेरी मम्मी के ब्लाउज के बटन खोलने लगे मेरी मम्मी ने उनको रोका। और कहा। योगेश जी नहीं… अभी बाहर जाना है। बाहर वो लड़की हमारा इंतजार कर रही है। पर अंकल थे माने नहीं। और कहने लगे। वर्षा… इट्स ओके… टाइम है… उसने बुलाया तो नहीं अभी तक… और वैसे भी उसको पता है… सुहागरात हुई है… देर रात को सोए होंगे थके होंगे तो टाइम तो लगेगा… और उन्होंने मेरी मम्मी की साड़ी का पल्लू पूरी तरह से हटा कर नीचे गिरा दिया। और फिर से मेरी मम्मी के ब्लाउज के हुक खोलने लगे। अंकल को इस तरह मेरी मम्मी से प्यार करते देख मेरी मम्मी अंकल से कहने लगीं। आप कितने सेक्सी और हॉट मर्द हो। और कितने रोमांटिक हो। आपके अंदर किसी भी लड़की को अपने वश में करने की कला आती है। फिर अंकल ने मम्मी के मुँह से अपनी तरफ सुनकर मम्मी को अपनी बाँहों में भर लिया। और मेरी मम्मी के गाल जो एकदम से शर्म से गुलाबी हो गए उनको चूमने लगे। अब तो मेरी मम्मी अंकल का साथ देने के लिए मजबूर हो गईं। अंदर से इतनी गरम जो हो गई थीं। अंकल पर अपने नजरों की बिजलियाँ गिराते कहा। क्या। मम्मी: क्या योगेश जी। आप बड़े वो ही। कैसे मुझे फिर से राजी कर लिया। हटाइए ना। बाहर जाने दीजिए ना। पूरा बदन दर्द कर रहा है। तो अंकल मेरी मम्मी के होठों को चूमते हुए बोले। अंकल: मेरी जान ये नौकर किस लिए। तुम कहो तो दबा दूँ तुम्हारा ये बदन। मम्मी: शर्म आ रही है। हटाइए ना तो। तो अंकल ने मेरी मम्मी के होठों पर अपने होठ रख दिए। और मेरी मम्मी के होठों को चूसने लगे। मेरी मम्मी के होठों पर लगी लिपस्टिक को अंकल ने चूस चूस कर एकदम से साफ कर दिया था। अंकल: वर्षा कितनी नरम हो। कितनी नमकीन हो। तुम्हारी लिपस्टिक का ये स्वाद कितना बढ़िया है। मम्मी ने भी अपनी बाँहें अपने यार योगेश जी के गले में डाल। अपने मुँह को इधर उधर घुमा कर अंकल को ये सिग्नल देने की कोशिश कर रही थीं कि मैं (मेरी मम्मी) अब पूरी तरह से उनका साथ देने को तैयार हूँ। अंकल मेरी मम्मी के पीछे खड़े। मेरी मम्मी को अपनी बाँहों में भरे हुए अपने चिपकाए हुए थे। आखिर अंकल ने मेरी मम्मी के ब्लाउज के सारे हुक खोल कर उसे निकाल दिया। और ब्लाउज उतारने के बाद उन्होंने अपना हाथ पीछे ले जा कर मेरी मम्मी की ब्रा का हुक भी खोल दिया। और एक झटके से ब्रा को मेरी मम्मी के बदन से उतार कर फेंक दिया। अब मेरी मम्मी ऊपर से पूरी नंगी थीं। मेरी मम्मी की नंगी चुचियों को देखते ही अंकल जी ने अपने हाथ मेरी मम्मी की चुची पर रख। और अपने होठ को मेरी मम्मी के कान के नीचे रख कर चाटने लगे। उनके इस तरह करने से मेरी मम्मी तो एकदम पागल सी हो गईं। जब उन्होंने मेरी मम्मी के कान अपने होठों में दबा कर चूसने लगे। और फिर जब उन्होंने मेरी मम्मी की गर्दन पर लव बाइट्स करनी शुरू की तो मस्ती में मेरी मम्मी आहें भरने लगीं। मेरी मम्मी को इस तरह प्यार करते हुए अंकल ने मेरी मम्मी के कान में धीरे से कहा। अंकल: वर्षा मेरी जान तू बहुत नमकीन है। बहुत ही हॉट और सेक्सी हो। आई लव यू। उस समय मेरी मम्मी भी गरम हो रही थीं। बस मेरी मम्मी के मुँह से इतना ही निकला। जी। अब तो मेरी मम्मी को अंकल का लंड जो कि एकदम से खड़ा था। मेरी मम्मी को उनकी गाँड पर साफ महसूस हो रहा था। अंकल के इस तरह करने पर मेरी मम्मी अब पूरी तरह से गरम हो उठी थीं। तो मेरी मम्मी भी अपनी गाँड को हिला रही थीं। ताकि अंकल का लंड मेरी मम्मी की गाँड पर ठीक से एडजस्ट हो जाए। फिर अंकल ने अपना हाथ नीचे ले जा कर मेरी मम्मी की साड़ी की खींच कर मेरी मम्मी की साड़ी की गांठ खोल दी। और मेरी मम्मी की साड़ी खुल कर मेरी मम्मी के पैरों में आ गई। तो अंकल ने मेरी मम्मी के होठों को चूमते नीचे अपने हाथ से मेरी मम्मी का पेटीकोट का नाड़ा ढूँढने लगे। और उनके हाथ मेरी मम्मी के पेटीकोट के नाड़े पर आ गया। अब अंकल ने मेरी मम्मी को किस करते हुए एक झटके में ही मेरी मम्मी के पेटीकोट के नाड़े को खींच कर खोलने लगे। तो मेरी मम्मी ने अंकल से कहा। योगेश जी इसको मत खोलिए ना। वो लड़की फिर आ जाएगी। इसको (पेटीकोट) को ऊपर उठा कर कर लीजिए। एक तरह से अपना पेटीकोट ऊपर उठा कर करने का कह कर मेरी मम्मी ने अंकल को खुद को चोदने की परमिशन तो दे दी थी। अंकल: डार्लिंग ऊपर उठा कर लेने में वो मजा नहीं आएगा। तुम्हारे जैसे हसीन खूबसूरत लवर को अगर पूरी तरह से नंगी करके लेने में जो मजा है वो उठा कर लेने में कहाँ। अंकल की बात सुन मेरी मम्मी। मम्मी: नहीं रहने दो। और 3 बजने वाले। वाले घर भी जाना है। अंकुश क्या सोचेगा। मुझे सुबह ही चले जाना था। लेकिन सुबह नहीं गई। अब जाना होगा। अंकल: तुम उसकी चिंता मत करो। मैंने उससे बोला है। जब तक कि तेरी दादी और नामर्द बाप वापस न आए। तेरी मम्मी मेरे पास रहेगी। और उसने भी कहा है। आप मम्मी को नंगी रखना घर पे। मैं भी नहीं आऊँगा आपके घर। नहीं तो मम्मी को शर्म आएगी। और मम्मी को कपड़े पहनने पड़ेंगे। और अंकल की बातें सुनकर मम्मी चुप हो गईं। और अंकल ने मेरी मम्मी का पेटीकोट का नाड़ा खींच कर खोल दिया। और जैसे ही उन्होंने मेरी मम्मी के पेटीकोट का नाड़ा खींचा। मेरी मम्मी का पेटीकोट सरक कर नीचे जमीन पर गिर गया। कुछ देर अंकल मेरी मम्मी की पैंटी के ऊपर से मेरी मम्मी की चूत को सहलाते रहे थे। और फिर उन्होंने अपना हाथ मेरी मम्मी की पैंटी में डाल कर उसको नीचे खिसका कर उतार दिया। अब मेरी मम्मी की नंगी गाँड पर मेरे अंकल का लंड लगा हुआ था। जिससे मेरी मम्मी भी गरम हो गई थीं। मेरी मम्मी की चूत से पानी निकल रहा था। अंकल ने पीछे से मेरी मम्मी की चुचियों को दोनों हाथों में पकड़ लिया। और प्यार से मसलने लगे। और वो जब मेरी मम्मी की चुची के निप्पल्स को अपनी उँगलियों को भर कर मसलने लगे तो मेरी मम्मी के मुँह से सिसकारियाँ फूटने लगीं। आह... आह... योगेश जी धीरे मसालो। अंकल ने मेरी मम्मी को दीवार के सहारे और दबा दिया। और मेरी मम्मी की गाँड पर उनका लंड सटा हुआ था। और मेरी मम्मी की दोनों चुचियाँ अंकल के हाथों में थीं। अंकल मेरी मम्मी के पीछे खड़े। बस अपनी उँगली और अंगूठे से मेरी मम्मी के निप्पल्स को बेदर्दी से मसलने में लगे थे। अंकल के द्वारा मेरी मम्मी अपनी चुचियाँ इस तरह बेदर्दी से मसलने से भी गरम हो उठी थीं। मेरी मम्मी तो जोश में एकदम पागल सी हो रही थीं। जिससे मेरी मम्मी की चूत लगातार पानी छोड़े जा रही थी। 10 मिनट इसी तरह अंकल मेरी मम्मी को दीवार के सहारे खड़ी मेरी मम्मी की चुचियों को मसलने के बाद। अंकल मेरी मम्मी को पकड़ कर बेड के पास ले गए। और बेड पर बैठने को कहा। तो मेरी मम्मी अंकल के कहने पर बेड पर बैठ गईं। अब तो मेरी मम्मी भी जोश से अपने आप को काबू में नहीं रख पा रही थीं। और अपने यार से बोलीं। मम्मी: योगेश जी प्लीज जल्दी कुछ करो ना। नहीं तो मैं पागल हो जाऊँगी।
11 hours ago
fabulous update
7 hours ago
update 39
अंकल मेरी मम्मी के ऊपर से हट गए और बेड से नीचे उतर कर खड़े हो गए। और मेरी मम्मी की गाँड को बेड के किनारे पर रख दिया। और मेरी मम्मी की टाँगों के बीच आ कर खड़े हो गए। मेरी मम्मी बेड पर नंगी आधी लेटी हुई थीं। और मेरी मम्मी की टाँगें जमीन पर थीं। मेरी मम्मी की टाँगों के बीच होने पर अंकल ने मेरी मम्मी की टाँगों को हाथों से पकड़ कर और फैला दिया। अब उनका लंड किसी तोपची की तरह ठीक मेरी मम्मी की चूत के सामने था। और जोर जोर झटका मार मार रहा था। मेरी मम्मी की आँखों के सामने लहरा रहा था। अंकल ने मेरी मम्मी की टाँगों को पकड़ा हुआ था। तो वो मेरी मम्मी से बोले। डार्लिंग इसको अपने हाथ से पकड़ कर लगाओ ना। तो अब मेरी मम्मी ने बिना कोई जवाब दिए उनका लंड पकड़ लिया। मेरी मम्मी को अब उनका लंड पकड़ कर अपनी चूत पर लगाने में कोई शर्म नहीं आ रही थी। क्योंकि रात को सुहागरात हो चुकी थी। और मेरी मम्मी ने उनके लंड को पकड़ कर अपनी चूत पर लगा रही थीं। अपने यार के लंड का टोपा अपनी चूत पर लगाते ही मेरी मम्मी के तो सारे बदन में आग सी लग गई। जिससे मेरी मम्मी का बदन काँपने लगा। मेरी मम्मी के बदन में झुरझुरी सी लेने लगी। अब मेरी मम्मी के यार योगेश अंकल का लंड जो ठीक मेरी मम्मी की चूत के ऊपर था। और अंकल ने एक धक्का मारा। और उनका आधा लंड मेरी मम्मी की चूत फाड़ता हुआ दनदनाता हुआ मेरी मम्मी की चूत के अंदर घुस गया। मेरी मम्मी तो दर्द से चिल्ला उठीं। उई... आह... मम्मी... मर... जाऊँगी... मैं... आह... सहन... नहीं... हो... रहा... आह... योगेश जी... धीरे रुक जाइए रुक जाओ ना प्लीज... नहीं ले पाऊँगी। पर वो कहाँ रुकने वाले थे। वो मेरी मम्मी के ऊपर झुक गए। और मेरी मम्मी के रसीले गुलाबी होठों को अपने मुँह में ले लिया। और बोले। अंकल: क्या यार तुम भी नहीं ले पाऊँगी। रात को कितनी बार तो लिया है। देखा नहीं कितने आराम से चला गया था। और पिछले 6 महीनों से भी तो ले रही हो। मम्मी: आप एक बार में पूरा अंदर घुसा डालते हो। आराम से प्यार से धीरे धीरे डालो ना। मैं कोई आपको मना थोड़ी ही कर रही अंदर न डालने के लिए। और रही बात पिछले 6 महीनों से लेने की तो पिछले 6 महीनों से ले रही हूँ। लेकिन कल आपने मेरी चूत सील पैक करवा दी थी ऑपरेशन से। इसलिए दर्द होता है एक बार में डालने से। अंकल: वर्षा अभी कहाँ पूरा अंदर डाला है। पूरा तो अब अंदर डालूँगा। और फिर से एक और जोरदार धक्का मारा। उनका ये धक्का इतना जोरदार था कि मेरी मम्मी की तो चीख निकलते निकलते रह गई। क्योंकि उन्होंने मेरी मम्मी के होठों को अपने होठों से दबा रखा था। मेरी मम्मी नीचे लेटी दर्द से कराह उठीं तो अंकल रुक गए। अंकल का पूरा लंड जड़ तक मेरी मम्मी की चूत में घुस चुका था। जड़ तक घुस चुका था। मेरी मम्मी को ऐसा मालूम हुआ कि अब वो मेरी मम्मी की चूत में लंड डाले अपनी कमर को रगड़ने लगे। जिससे उनकी बिना झाँट वाली चमड़ी मेरी मम्मी की चूत के आस पास रगड़ने से मेरी मम्मी को गुदगुदी सी होने लगी। और 2-3 मिनट तक मेरी मम्मी के ऊपर लेटे रहने के बाद अंकल ने धीरे धीरे लंड को मेरी मम्मी की चूत के अंदर बाहर करना शुरू कर दिया। मेरी मम्मी अभी भी दर्द से कराह रही थीं। जिससे वो फिर रुक गए। और मेरी मम्मी के होठों को चूसने लगे। अचानक अंकल ने एक और जोरदार धक्का मेरी मम्मी की चूत पर दिया। उनका लंड सनसनाता हुआ मेरी मम्मी की चूत में और ज्यादा अंदर तक घुस गया। अंकल की बिना झाँट वाली चमड़ी मेरी मम्मी को अपनी जाँघों पर घिसती हुई महसूस हो रही थी। झटका इतना जोरदार था कि मेरी मम्मी चिल्लाने लगीं। निकाल लीजिए आह... मर गई। मैं नहीं ले पाऊँगी। तो अंकल बोले। अंकल: मेरी रानी, मेरी जान ये तो तुमने रात को भी लिया था। और तुम अब भी इतना चिल्ला रही हो। और अंकल मेरी मम्मी की चूत में अपने लंड को अंदर बाहर करने लगे। मेरी मम्मी उनके नीचे लेटी आह... आह... कर रही थीं। बिजली की तरह अंकल का लंड मेरी मम्मी की चूत में अंदर बाहर होने लगा। जैसे ही मेरी मम्मी के मुँह से चीख कुछ कम होती वो एक धक्का जोर से लगा देते। और मेरी मम्मी फिर से चीख पड़ती थीं। कुछ देर तक अंकल जी इसी तरह मेरी मम्मी को चोदते रहे। मेरी मम्मी को भी अब मजा आने लगा था। तो मेरी मम्मी ने अपनी बाँहें उनके गले में डाल कर उन्हें अपने से कस लिया। मेरी मम्मी अंकल के नीचे लेटी आह आह कर रही थीं। बिजली की तरह अंकल का लंड मेरी मम्मी की चूत में गचा गच अंदर बाहर होने लगा। जैसे ही मेरी मम्मी के मुँह से चीख कुछ कम होती मेरे अंकल एक धक्का जोर से मेरी मम्मी की चूत पर लगा देते। और मेरी मम्मी फिर से चीख पड़ती थीं। कुछ देर तक अंकल जी इसी तरह मेरी मम्मी को चोदते रहे। धीरे धीरे अंकल का पूरा लंड मेरी मम्मी की चूत की गहराई तक जगह बना चुका था। और तेजी के साथ अंदर बाहर हो रहा था। 8-10 मिनट के बाद मेरी मम्मी को भी मजा आने लगा। और मेरी मम्मी ने अपने पैर अंकल की कमर पर कैंची की तरह कस दिए। और मेरी मम्मी अपनी गाँड उठा उठा कर अंकल का साथ देने लगीं। अंकल जैसे ही अपनी कमर उठा कर अपना लंड मेरी मम्मी की चूत से बाहर खींचते। मेरी मम्मी उतनी ही तेजी से नीचे से अपने चूतड़ों को उठा कर उनका लंड अपनी चूत में ले लेतीं। मेरी मम्मी और अंकल की कमर अब एक रिदम के साथ साथ चल रही थी। मेरी मम्मी को इस तरह सहयोग करते देख अंकल खुश होते हुए बोले। अंकल: शाबाश मेरी वर्षा रानी। अब तो तुझे चुदवाने में दर्द नहीं हो रहा है। ऐसे ही नीचे से अपनी गाँड उछाल उछाल मेरा लंड अपनी चूत में लो। और दड़दड़ धक्के मारने लगे। और वो लगभग 15-20 मिनट तक मेरी मम्मी को चोदते रहे। मेरी मम्मी तो उनके नीचे लेटी सिसकते हुए। मम्मी: आह... योगेश जी जी ऐसे ही आह... पूरा अंदर तक डाल कर ऐसे ही और तेज आह... कितना अंदर तक जा रहा है। उई माँ आह... योगेश जी जी और तेज रुकिए नहीं नहीं ऐसे ही बस मैं गई। इस दौरान मेरी मम्मी की चूत 2 बार अपना पानी छोड़ चुकी थी। और अंकल थे कि रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे। उनका लंड तो झड़ने का नाम ही नहीं ले रहा था। फिर वो मेरी मम्मी के ऊपर से हट गए। और मेरी मम्मी को घोड़ी की तरह बन जाने को कहा। यानी कि मेरी मम्मी को डॉगी स्टाइल में हो जाने के लिए कहा। मेरी मम्मी: क्या योगेश जी अभी ऐसे ही कर लीजिए। वो रात को कर लेना। अभी इतना टाइम नहीं। कोई भी किसी भी वक्त आ सकता है। एक तरह से मेरी मम्मी ने अपने यार को रात को खुद को घोड़ी बना कर चोदने के लिए ग्रीन सिग्नल दे दिया था। शायद मम्मी को बाहर खड़ी लड़की का डर था। उससे शर्म थी। लेकिन मम्मी रात को भी चुदी। उस लड़की ने ही मम्मी को सजाया था। इसलिए मम्मी को भी अब उस लड़की की घर में मौजूदगी में भी अंकल के साथ हमबिस्तर होने में कोई प्रॉब्लम नहीं थी। क्योंकि एक मर्द एक औरत के साथ ये सब करता है। और उस लड़की को भी पता है मम्मी अंकल के अफेयर के बारे में। उसे ये भी पता है वो दोनों पति पत्नी नहीं हैं। फिर भी उस लड़की ने मम्मी को सजाया था अंकल के लिए। और अंकल भी कहाँ मानने वाले थे मम्मी के ये कहने के। बस भी रात को घोड़ी बना लेना। और मम्मी भी जान चुकी थीं अंकल को रात का इंतजार नहीं होगा। वो उन्हें अभी घोड़ी बनाकर ही चोदेंगे। अंकल: जान मेरी वर्षा जान मान जाओ। अब मुझसे रहा नहीं जाएगा रात तक। और तुम तो जानती हो मुझे कितना मजा आता है तुम्हें घोड़ी बनाकर चोदने में। और तुम्हें भी तो बहुत मजा आता है घोड़ी बनकर अपनी चूत चुदवाने में। अंकल की बातें सुनकर मेरी मम्मी मुस्कुराते हुए अंकल के सामने अपने हाथों को आगे करके घुटनों के बल हो कर घोड़ी बन गईं। जबकि मैं जानता हूँ मेरे पापा ने कभी भी चुदाई के दौरान इस पोजीशन का इस्तेमाल नहीं किया होगा। जबकि मेरे अंकल चुदाई के दौरान अलग अलग पोजीशन के इस्तेमाल करते मम्मी के साथ में। अब अंकल मेरी मम्मी के पीछे आए। मेरी मम्मी के चूतड़ों को पकड़ कर अपने लंड को पीछे से मेरी मम्मी की चूत पर लगा कर एक ही धक्के में अपना लंड मेरी मम्मी की चूत में पूरा पहुँचा दिया। और पीछे से मेरी मम्मी की कमर पकड़ कर अपना लंड मेरी मम्मी की चूत के अंदर बाहर करने लगे। अब मेरी मम्मी भी अपनी गाँड को पीछे की ओर पुश करके अपने यार की ताल से ताल मिलाने की कोशिश कर रही थीं। मेरी मम्मी के इस तरह झुकने के कारण मेरी मम्मी की चुचियाँ नीचे लटक कर हवा में झूल रही थीं। कि अंकल अपने हाथों को जो मेरी मम्मी की कमर पर थे आगे बढ़ा मेरी मम्मी की चुचियों को पकड़ लिया। अंकल मेरी मम्मी की चुचियों को पकड़ कर ऐसे मेरी मम्मी की चूत पर धक्के लगा रहे। मानो कोई घुड़सवार किसी घोड़ी पर चढ़ा हो। और उसने अपने हाथ में उस घोड़ी की लगाम पकड़ी हुई हो। अंकल ने मेरी मम्मी की चूत पर अपने धक्कों की स्पीड बहुत बढ़ा दी थी। अंकल तो उस समय किसी रेल की तरह अपना लंड मेरी मम्मी की चूत में पेल रहे थे। जब अंकल की जाँघें मेरी मम्मी के चूतड़ों से टकरातीं। उस समय थप थप का एक बहुत ही मधुर संगीत कमरे में गूँज रहा था। आह... आह... मेरी जान... आह... मेरा निकलने वाला है। और 10-15 धक्कों के बाद अंकल के लंड ने मेरी मम्मी की चूत में पिचकारी छोड़ दी। मेरी मम्मी की पूरी चूत फिर से अंकल के वीर्य से भर गई। मेरी मम्मी और अंकल दोनों के बदन एकदम पसीने से भीग चुके थे। तभी उनके बेडरूम के दरवाजे पर फिर से दस्तक हुई। अंकल ने मेरी मम्मी के होठों को चूमा। तो मेरी मम्मी ने भी पहली बार किस के टाइम अपने यार के होठों को चूमा (सुहागरात के बाद)। और अपनी बाँहें अपने यार के गले में डाल दीं। और उनके होठों को चूमने लगीं। उस समय मेरी मम्मी और अंकल दोनों में से कोई भी एक दूसरे के होठों को छोड़ना नहीं चाहता था। पर वो जानते थे अभी वो लड़की घर में ही। और वो बाहर उनका इंतजार कर रही है। दरवाजे पर दस्तक होने पर मेरी मम्मी शर्म से बोलीं। मम्मी: मैंने कहा था ना योगेश जी। वो लड़की क्या सोचेगी। और जल्दी से वहाँ पड़े अपने कपड़े उठा कर पहनने लगीं। मेरी मम्मी जल्दी से अपनी साड़ी पहनने लगीं। मेरी मम्मी को साड़ी पहनते अंकल मेरी मम्मी को ही देख रहे थे। अपने यार को इस तरह अपनी ओर देखते मेरी मम्मी बोलीं। आप भी पहन लीजिए ना जल्दी से। वो लड़की बाहर बुला रही है। और जल्दी से अपनी साड़ी का पल्लू ठीक करते हुए अपने बालों को संवारने लगीं। तब तक अंकल जी तैयार हो चुके थे।
7 hours ago
update 40
मेरी मम्मी अंकल दोनों तैयार हो चुकी थीं कपड़े पहनकर। तभी फिर से गेट बजा। तो मम्मी ने गेट खोला। तो सामने वो ही लड़की खड़ी थी। और अंदर आ गई। और अंकल से बोली। सर कुछ गेस्ट आए हैं आपसे मिलने। तो अंकल ने कहा। तुम उन्हें बैठाओ। चाय पिलाओ। और मैं कुछ ही देर में आता हूँ। फिर वो लड़की वापस चली गई। और अंकल ने मम्मी से कहा। वर्षा मेरे कुछ दोस्त आए हैं। प्लीज मेरी हेल्प करोगी। मम्मी: कैसी हेल्प। अंकल: मैंने उनसे झूठ बोला था कि मेरी वाइफ आई हुई है। मम्मी: लेकिन आपका तो डिवोर्स हो गया। तो वापस कैसे आएगी। अंकल: मेरे दोस्तों को नहीं पता मेरा डिवोर्स हो गया है। मैंने सबकी से कह रखा है मेरी वाइफ दूसरे शहर में जॉब करती है। मम्मी: लेकिन वो तो आपकी वाइफ को जानते होंगे। अंकल: नहीं। मेरे दोस्त मेरी वाइफ से पहले कभी नहीं मिले। और ना ही उन्होंने मेरी वाइफ की फोटो देखी है। बस तुम्हें उनके सामने मेरी वाइफ बनकर चलना होगा। मम्मी: समझ गई। तो चलिए। और ले चलिए मुझे अपनी वाइफ बनाकर अपने दोस्त से मिलवाने। फिर अंकल मेरी मम्मी के करीब आए। और मेरी मम्मी को अपनी बाँहों में ले कर मेरी मम्मी की आँखों में देखते हुए कहने लगे। वर्षा अब हम दोनों पति पत्नी ही। इस बेडरूम के अंदर तुम भले ही मुझे योगेश जी कहती हो। पर प्लीज बाहर तुम मुझे मेरे सब दोस्तों और उनकी पत्नियों के सामने मुझे योगेश जी नहीं कहना। क्योंकि मैं नहीं चाहता कि सब पीछे से मेरा या तुम्हारा मजाक उड़ाए। सिर्फ योगेश बोलना। तो मेरी मम्मी ने धीरे से कहा। जी योगेश जी। मैं ध्यान रखूँगी। अंकल: और एक बात वर्षा। अब हम लोगों की नजर में पति पत्नी ही। मेरे दोस्त भी तुम्हें मेरी पत्नी के रूप में जानते हैं। और वो भी मेरी ही उम्र के हैं। और तुमसे करीब 15 से 20 साल बड़े होंगे। सो प्लीज उनको भी अब से अंकल नहीं कहना। क्योंकि उनको अब अगर अंकल कहोगी तो उनको भी अच्छा नहीं लगेगा। और प्यार से मेरी मम्मी के चेहरे को घुमा कर बोले। रखोगी ना इस बात का ध्यान। बोलो अपने यार की इज्जत का खयाल रखोगी ना। मम्मी: धीरे से जी। अंकल: अपने से चिपकाते मेरी मम्मी को। तो फिर बाहर चलें मिसेज योगेश। तो मेरी मम्मी शर्मा कर जी। अंकल मेरी मम्मी की कमर में हाथ डाले बाहर आ गए। और अंकल मेरी मम्मी को अपने सब दोस्तों से मिलवा रहे थे। अंकल: डार्लिंग इनसे मिलो। ये पीके साहब हैं। मेरे बहुत ही अच्छे दोस्त। अपने यार की बात सुन कर मेरी मम्मी ने उनको नमस्ते करते कहा। नमस्ते, भाई साहब। फिर वो भी मम्मी को नमस्ते भाभी जी बोले। मैंने देखा नमस्ते करते पीके अंकल मेरी मम्मी की तरफ मुस्कुरा रहे थे। फिर अंकल की ओर देख कर। यार भाभी को देख कर मुझे तेरी किस्मत पर रश्क हो रहा है। कि कितनी सुंदर बीवी मिली है। इतनी सुंदर बीवी मिलते ही हम दोस्तों को भूल गया। सुबह से अब रूम से निकला है। लगता है अभी से अपनी लगाम भाभी जी के हाथ में थमा दी। अंकल: हाँ यार। अब तो हमारे लगाम सरकार के हाथों में हैं। हम तो सरकार के नौकर हैं। और मेरी मम्मी की ओर देख कर। क्यों मेमसाहिब। मेरी मम्मी अपने यार की बगल में खड़ी शर्मा रही थीं। कि तभी मिसेज पीके मेरी मम्मी के पास आईं। और मम्मी को पकड़ कर दूसरी ओर ले गईं। जहाँ पहले से 2 लेडीज खड़ी थीं। वो भी अंकल के फ्रेंड्स की पत्नियाँ थीं। मेरी मम्मी वहाँ खड़ी थीं। कि वहाँ खड़ी मिसेज पीके मेरी मम्मी का हाथ पकड़ कर पूछने लगीं। वर्षा रात को भाई साहब ने ज्यादा तंग तो नहीं किया। मिसेज गुप्ता: अरे बहन क्या बात कर रही। बेचारी की हालत नहीं देख रही। कि कैसे रात भर भाई साहब ने मसला था। वो ये सब मेरी मम्मी के बदन पर अंकल जी के हर जगह होठों के निशान देख कर मेरी मम्मी से हंसी मजाक कर रही थीं। जबकि मेरी मम्मी वहाँ खड़ी अपनी नजरें झुकाए अपनी साड़ी से उन लव बाइट्स को छुपाने की कोशिश कर रही थीं। लेकिन वो सब बेकार था। वो सब तरह तरह की सेक्सी बातों से मेरी मम्मी से हंसी मजाक करती रहीं। और मेरी मम्मी शर्म से नजरें झुकाए पानी पानी हो रही थीं। कुछ देर ऐसा ही चलता। तो वो चलने तो लगे। तो अंकल मेरी मम्मी के पास आए। और मम्मी से बोले। वर्षा मैं इनको बाहर तक छोड़ कर आता हूँ। कोई कुछ बोलता इससे पहले ही मिसेज गुप्ता अंकल से बोलीं। सीखिए अपने दोस्त से। सब काम अपनी बीवी से पूछ कर करते हैं। और एक आप ही। गुप्ता अंकल: जान। ये जोरू का गुलाम है। मैं नहीं। और वहाँ सब जोर जोर से हँसने लगे। और मेरी मम्मी वहाँ खड़ी शर्म से अपना मुँह नीचे किए पानी पानी हो रही थीं। अंकल जी अपने सब दोस्तों को छोड़ कर आए। और मेरी मम्मी को आते ही पीछे से अपनी बाँहों में भर लिया। मेरी मम्मी: योगेश जी प्लीज अभी नहीं। बहुत थकी हुई हूँ। अंकल: डार्लिंग तुम भी काफी थकी हुई हो। तुम भी थोड़ा आराम कर लो। मेरी मम्मी: और आप योगेश जी। अंकल: मैं थोड़ा मेरे ऑफिस में कुछ काम है। वो करके आता हूँ। अगर मेरी मालकिन आदेश दे तो। मम्मी: मम्मी ने अपनी गर्दन हाँ में हिला दी। और जैसे ही अंकल ऑफिस के लिए निकलने लगे मेरी मम्मी ने उनको रोका। तो अंकल मेरी मम्मी के पास आए। और मेरी मम्मी को फिर से अपनी बाँहों में भर कर मेरी मम्मी के गालों पर अपने होठों को फिराते बोले। डार्लिंग आप तो खादिम। आपकी नहीं सुनेगा तो फिर किसकी सुनेगा। इसको क्या अपनी नौकरी से जवाब नहीं मिल जाएगा। अपने यार योगेश जी के इस अंदाज पर मेरी मम्मी मुस्कुराए बिना न रहीं। और बोलीं। क्या योगेश जी आप भी ना। फिर अपने यार से। आप बाजार से आते टाइम वो कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स ले आएंगे क्या आप। मेरी मम्मी के कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स ले कर आने पर वो मेरी मम्मी से पूछने लगे। वर्षा उसकी जरूरत है क्या। हमारे बीच रात को सब कुछ हो तो गया था। मेरी मम्मी: प्लीज योगेश जी। रात को जो हुआ इसके लिए ही तो। अंकल: क्या वर्षा। तुम चाहती नहीं कि हमारा भी बच्चा हो। हमारे प्यार की निशानी हो। मम्मी: शर्मा पड़ीं। और धीरे से बोलीं। ऐसी बात नहीं है योगेश जी। मैं भी चाहती हूँ हमारे प्यार की निशानी आए। लेकिन मेरे पति ने मुझे कई सालों से छुआ तक नहीं। फिर उसे क्या जवाब दूँगी। और मेरी बुढ़िया सास को मैंने अंकुश के जन्म के बाद बोला था। मम्मी जी आपके बेटे ने नसबंदी करा ली है। तो उसे क्या कहूँगी ये बच्चा कैसे। अंकल: ठीक है वर्षा। पर ये बताओ। मैं तुम्हें पिछले 6 महीनों से लगातार चोद रहा हूँ। तब तुम क्या आई पिल लेती थी। मम्मी: हाँ। पर अभी वो खत्म हो गई है। इसलिए। अंकल: ठीक है। मैं ला दूँगा। लेकिन अब तुम आई पिल कम यूज करना। मम्मी: ठीक है। मैं आई पिल नहीं लूँगी। आप कंडोम ले आना। और आप कंडोम लगाकर करना। अंकल: मैं कंडोम ले आऊँगा। अब मैं तुम्हें कंडोम लगाकर चोदूँगा। लेकिन आज रात को कंडोम तुमको अपने हाथों से ही कंडोम मेरे लंड पे चढ़ाना होगा। मम्मी: अंकल की बात सुनकर शर्मा गईं। और नीचे सिर करके मुस्कुराने लगीं। फिर धीरे से बोलीं। मैं नहीं चढ़ाऊँगी। आप खुद चढ़ाना कंडोम को। और अंकल की बाँहों से निकल कर शरारत से अंकल को अंगूठा दिखा कर चिढ़ाने लगीं। तो अंकल जाते हुए बोले। अगर तुम नहीं चढ़ाओगी तो मैं भी नहीं चढ़ाऊँगा। ऐसे ही बिना कंडोम के डालूँगा। तो मम्मी ने मुस्कुरा कर आँखों के इशारे से बताया कि आप ले तो आइए। आपका अपने अंदर लिया है तो फिर उस पर चढ़ा भी दूँगी। और फिर वो बाहर निकल गए। और मम्मी बेडरूम में जाने लगीं। तो दो लड़कियाँ मम्मी के पीछे पीछे जाने लगीं। (ये क्या। कल तो एक ही लड़की थी। ये दूसरी कब आई मुझे भी नहीं पता।) और फिर मम्मी ने पूछा पहली लड़की से। ये कौन है। तो लड़की 1: मैम ये मेरी फ्रेंड है। और ये भी जॉब करती है मेरी तरह। और ये अभी एक घंटे पहले ही आई थी। मम्मी: ओके। पर उसका नाम क्या है। लड़की 1: मैं यहाँ लड़की 2 लिख रहा हूँ। और फिर दोनों लड़कियाँ मम्मी के पीछे पीछे रूम में चली गईं। और रूम में जाते ही लड़की 1 (एल1) मम्मी से कहने लगी। मैम मैं सर का बेडरूम ठीक कर देती हूँ। एल1 की बात सुनते ही साथ में खड़ी एल2 बोली। हाय री ते। क्या बोल रही है तू। ये सिर्फ सर का बेडरूम थोड़ी है। ये तो अब मैम का भी बेडरूम है। अब ये सर मैम दोनों का ही है। क्यों मैम। मैं ठीक कह रही हूँ ना। मेरी मम्मी वहाँ खड़ी मुँह नीचे किए हुए थीं। शर्म के कारण। क्योंकि वो जानती थीं कि ये दोनों लड़कियाँ जानती हैं कि मैं उनकी बीवी नहीं हूँ। और एक बच्चे की माँ भी हूँ। और मेरा योगेश जी के साथ अफेयर है। इसलिए मम्मी को शर्म आ रही थी। एल1: अरे हाँ रे। देखा था कैसे सर भी मैम के आगे कैसे हाथ जोड़े खड़े थे। मेरी मम्मी खड़ी उनकी बातें सुन रही थीं। तो बनावटी गुस्से से बोलीं। चल जाओ यहाँ से। मैं खुद ठीक कर लूँगी। एल2: जी मैम। आप कितना काम करेंगी। रात भर से काम ही तो कर रही हैं। देख रही हैं अपने आप को कितना थक गई हैं। एल1: बिस्तर की ओर इशारा करते हुए। वो तो बिस्तर की हालत देख कर ही पता चल रहा है। रात को मैम जी कितना काम किया है। बिस्तर की हालत ही कुछ ऐसी थी। पूरे बिस्तर पर मसले हुए फूल। मेरी मम्मी की टूटी हुई चूड़ियों के साथ साथ मेरी मम्मी की टूटी झुलफें जगह जगह। मेरी मम्मी की चूत के रस के धब्बों के साथ अंकल के वीर्य के धब्बे जो अब सूख चुके। और कहीं कहीं खून के निशान देख कर कोई भी आसानी से बता सकता था कि यहाँ रात भर कितनी जबरदस्त पलंग तोड़ चुदाई हुई थी। लड़की मेरी मम्मी की ओर देख कर शरारत से बोली। हाय दैया मैम। लगता है मालिक ने रात भर सोने नहीं दिया होगा। आपका अंग अंग मरोड़ कर रख दिया होगा। आप कहें तो मैं दबा दूँ। आराम मिलेगा। एल2: क्या रे तू भी ना। जब सर ने रात भर मैम से काम करवाया है। मैम थकी भी उनके कारण ही। मैम हमसे क्यों दबवाएँगी। ये तो सर से ही दबवाएँगी। अब तो सोच ले कहीं ऐसे न हो मैम सारा काम सर से ही करवाने लगें। और हमारी छुट्टी हो जाए। मैम हमारी छुट्टी तो नहीं हो जाएगी। और दोनों मुस्कुराने लगीं। तो मेरी मम्मी मुस्कुराते शर्म से प्यार से हाथ उठा कर। मार खाएगी तू। भाग यहाँ से। मैं कर लूँगी। (दोस्तों मैं ये सब चुपकर देख रहा था। क्योंकि अंकल ने मुझे छुपने की व्यवस्था पहले ही कर दी थी। मैं उनको देख रहा था। लेकिन वो मुझे नहीं।) एल1: मैम ये हमें कर लेने दीजिए। मैं तो कहती हूँ आप आराम ही कर लीजिए। सर किसी भी वक्त आ सकते हैं। फिर आपको काम ही करना है। मेरी मम्मी जानती थीं वो उन्हें क्या काम करना है बोल रही थीं। वैसे सच भी था। मेरी मम्मी भी जानती थीं अंकल किसी भी वक्त आ सकते हैं। और आते ही मेरी मम्मी को ले कर बिस्तर पर चढ़ जाएँगे। और फिर से मेरी मम्मी का बाजा बजाना शुरू कर देंगे। दोनों लड़कियाँ मुस्कुराती बाहर चली गईं। मेरी मम्मी: धीमी आवाज में बोलीं। ये दोनों लड़कियाँ सच ही बोल रही हैं। मुझे अब आराम ही कर लेना चाहिए। क्योंकि मेरा अंग अंग दुख रहा है। रात भर योगेश जी ने मुझे इतनी बुरी तरह से निचोड़ा जो था। फिर मेरी मम्मी मुस्कुरातीं। और खुद रूम ठीक करने लगीं। पता नहीं मेरी मम्मी को क्या सूझा। उन्होंने बिस्तर की चादर और वहाँ पड़ी हर चीज को अपनी सुहागरात की याद के तौर पर संभाल कर रख लिया। इस बात को मम्मी और मैं भी जानता था। अंकल का मन ऑफिस में नहीं लगता है मम्मी के बिना। और अंकल कभी भी घर आ सकते हैं। इसलिए मेरी मम्मी जल्दी से अपने आप को संवारने लगीं। और फिर मम्मी तैयार होकर अंकल का इंतजार करने लगीं। और अचानक मम्मी ने फोन उठाया। और अंकल को फोन किया। लेकिन अंकल ने कॉल नहीं उठाया। मम्मी धीमी आवाज में अपने आप से। शायद ऑफिस में बिजी होंगे। इसलिए मेरा फोन नहीं उठाया। और मम्मी ने जैसे ही फोन रखा। अंकल रूम के गेट पे आते दिखाई दिए। (क्योंकि मैं भी हॉल में नहीं देख रहा था। मैं सिर्फ मम्मी को ही रूम में देख रहा था। अंकल कब आए मुझे भी नहीं पता।) मेरी मम्मी अंकल की आँखों में आँखें मिलते ही मुस्कुरा पड़ीं। और मम्मी बोलीं। आ गए योगेश जी। मैं आपको ही फोन कर रही थी। अंकल: मैडम आपने इस गुलाम को याद किया। गुलाम मैडम की सेवा में हाजिर है। अपने यार के इस जवाब पर मेरी मम्मी मुस्कुरा पड़ीं। और बोलीं। बातें बातें बनाना तो कोई आप से सीखे। मेरे पिया मेरे साजन मेरे हमदर्द मेरे जीवन साथी। और मैंने आप से कुछ लाने को कहा था। आप वो लेकर आए हैं क्या। अंकल: ये क्या। मेरे पिया साजन हमदर्द इतने सारे नाम। और क्या लाना था। आपने क्या मँगवाया था। मेरी मम्मी: मैं जानती थी आप भूल जाएँगे। अंकल: जान बताओ तो सही क्या लाना था। मेरी मम्मी: जानती हूँ योगेश जी। आप जान बूझकर मेरे मुँह से सुनना चाहते हैं। अंकल: डार्लिंग तो सुना दो। मेरी मम्मी: मैंने आपको आई पिल और कंडोम लाने को बोला था। और मम्मी इतना बोलकर चुप हो गईं। अंकल ने अपना बैग खोला। और बैग से एक पैकेट निकाल कर मेरी मम्मी के हाथ में थमा दिया। और अपनी बाँहें मेरी मम्मी के गले में डाल। मेरी मम्मी के करीब अपने चेहरे से मेरी मम्मी का चेहरा जोड़ कर। अब मेरी मम्मी के होठों से उनके होठों के करीब ला कर बोले। महारानी की शान में ये गुलाम इतनी गुस्ताखी कर सकता है। मुझे क्या अपनी नौकरी से हाथ धोना है क्या। मेमसाहिब आपका नौकर हमेशा आपके हुक्म का गुलाम रहेगा। वैसे मेमसाहिब इस नौकर की नौकरी पक्की है या अभी टेम्पररी है। मेरी मम्मी अंकल की बाँहों से निकल कर शर्माते मुस्कुराते। क्या योगेश जी। हटाइए ना।
7 hours ago
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फिर मम्मी ने वो पैकेट खोला। तो उस पैकेट में कंडोम के 3-4 फ्लेवर (चॉकलेट, स्ट्रॉबेरी) के काफी सारे पैकेट थे। उन कंडोम के पैकेट को देख मेरी मम्मी मुस्कुराते हुए अपने यार योगेश से कहती हैं। मेरी मम्मी: ये क्या इतने सारे। मुझे तो ऐसा लग रहा है कहीं आपने इसका ही तो बिजनेस तो शुरू नहीं कर दिया। अंकल: इनका बिजनेस तो शुरू नहीं किया मेरी जान। रोज 8-10 यूज करेंगे तो ये 1 महीने भी नहीं चलेगा। क्यों डार्लिंग। 8-10 तो रात में यूज कर लेंगे ना। या फिर बिना इसके ही काम चलाना पड़ेगा। तो 8-10 कंडोम एक रात में यूज करने का मतलब समझकर मम्मी शर्मा गईं। और मुस्कुराते हुए बोलीं। मेरी मम्मी: धत्त आप भी क्या बोलते हो। एक रात में 8-10 बार मेरी चुदाई करोगे तो क्या मुझे मार ही डालोगे। और मैं कोई 1 महीना आपके घर नहीं रुकूँगी। 5 दिन में मेरी बुढ़ी सास और पति आ जाएँगे तो मुझे जाना होगा। अंकुश भी कुछ नहीं कर पाएगा। वो तो उसने मुझे अभी आपके घर भेज दिया है। नहीं तो मैं आपके घर एक रात भी नहीं रुक पाती। और मैं कल सुबह वापस अपने घर जाऊँगी। मुझे शर्म आती है। मैं यहाँ आपसे चुदती हूँ। और वहाँ घर में मेरा लाल अंकुश अकेला है। कितना बलिदान दे रहा है। मुझे आपके पास चुदने भेज दिया। और खुद घर पे अकेला है। अंकल: हाँ जान। तूने सही कहा। वो अकेला है। उसे यहीं बुला लेगा हूँ। मम्मी: नहीं रहने दो। मुझे शर्म आएगी उसके सामने। फिर पूरी रात अपने हाथ से हिलाते रहना। मैं तो उसके साथ ही रहूँगी। मेरे बेटे के साथ। अंकल: ठीक है। नहीं बुला रहा। पर कल दिन में उसे बुला लेंगे। फिर उसे वापस भेज दूँगा। मम्मी: हाँ। आप उसे दिन में बुला लेना। मुझे बहुत याद आ रही है। कल से देखा भी नहीं उसे। अंकल: तो फोन पे बात कर ले। मम्मी: हाँ। उसे फोन करती हूँ। और मम्मी ने वो पैकेट टेबल पे रखा। और अपने हाथ में अपना मोबाइल उठाया। वो मुझे ही कॉल करने वाली थीं। इसलिए मैं चुपके से सीढ़ियों से ऊपर छत पे आया। और इन दोनों लड़कियों ने भी मुझे नहीं देखा था। जब मैं छत पे पहुँचा ही था कि मम्मी का कॉल आया। मैं: हेलो मम्मी। मम्मी: कैसा है मेरे लाल। मैं: मैं ठीक हूँ मम्मी। और आप कैसी हैं। मम्मी: बेटा क्या तुझे मेरी याद नहीं आती है बेटा। जो तूने योगेश जी घर मुझे छोड़ दिया। मैं: मम्मी आप ऐसे क्यों बोल रही हो। मुझे आपकी बहुत याद आती है। पर अंकल ने कहा था वो आपके साथ 5 दिन रहना चाहते हैं। इसलिए मैंने अंकल से वादा किया था। मैं 5 दिन अकेला रहूँगा। और 5 दिन आप अंकल के घर रहना। मम्मी: बेटा तू मुझे एक गैर मर्द के घर क्यों छोड़ रहा है। यहाँ मेरे साथ। मैं: मम्मी अंकल ने प्रॉमिस किया वो आपके साथ जबरदस्ती नहीं करेंगे। जो भी आपकी मर्जी से होगा। जब तक आप अंकल का प्रपोजल एक्सेप्ट नहीं करोगी। अंकल आपके साथ कुछ नहीं करेंगे। अंकल ने वादा किया है। क्या अंकल ने आपके साथ। मम्मी: नहीं नहीं बेटा। अभी तक तो कुछ नहीं करने दिया मैंने योगेश को। पर उसने रात को मेरे साथ बार बार मुझे बहकाने की कोशिश की। पर मैंने अपने आप पे कंट्रोल किया। और उसे कुछ नहीं करने दिया। पर बेटा इन 5 दिनों में कुछ हो जाएगा तो मैं किसी को मुँह दिखाने के लायक नहीं रहूँगी। मैं: मम्मी आप टेंशन न लो। जो भी होगा आपकी परमिशन से होगा। और रही बात किसी को कुछ पता नहीं चलेगा। मम्मी मैंने आपसे कई बार कहा है। अंकल को एक औरत की और आपको एक मर्द की जरूरत है। क्योंकि पापा आपसे प्यार नहीं करते हैं। इसलिए आप अंकल का प्यार एक्सेप्ट कर लो। मम्मी: बेटा किसने कहा तेरे पापा मुझसे प्यार नहीं करते हैं। वो मुझसे बहुत प्यार करते हैं। मैं: खाओ मम्मी मेरी कसम। पापा आपको एक पति का प्यार देते हैं। मम्मी: बेटा मैं तेरी कसम नहीं खा सकती। मैं: क्योंकि पापा आपसे प्यार नहीं करते हैं। इसलिए बताइए मम्मी। क्या पापा ने पिछले 1 साल में आपको प्यार किया है। मम्मी: चुप रहीं। मैं: बोलो मम्मी। अब चुप क्यों हो। मम्मी: मैं कुछ नहीं जानती। लेकिन योगेश के साथ मैं कभी नहीं करूँगी। जो तू चाहता है। मैं: मम्मी मैं सिर्फ इतना चाहता हूँ। आप अंकल का प्रपोजल एक्सेप्ट कर लो। और अंकल को एक औरत का। आपको एक मर्द का प्यार मिले। मम्मी: इंपॉसिबल बेटा। और तू मुझे लेने आ जा। योगेश मुझे आने नहीं दे रहा है। मैं: मम्मी अंकल से मैंने प्रॉमिस किया है। आप 5 दिन। जब तक पापा दादी नहीं आ जाते हैं। तब तक आप अंकल के घर रहोगी। मम्मी: बेटा वो मुझे पूरी रात सेड्यूस करने की कोशिश करता रहा है। मैं अब अपने आप को नहीं रोक पाऊँगी। इसलिए तू मुझे लेने आ जा। मैं: अच्छा है ना मम्मी। आपकी प्यार मिले। उससे अच्छी बात क्या हो सकती है। मम्मी: तुझे शर्म नहीं आती है। जो अपनी मम्मी को एक गैर मर्द के साथ नंगी सुलाना चाहता है। मैं: नहीं मम्मी। अंकल बहुत अच्छे हैं। वो आपके साथ जबरदस्ती नहीं करेंगे। और जो भी करेंगे आपकी परमिशन से करेंगे। और आपकी परमिशन से आपको बहुत प्यार करेंगे। और मेरी माफ करना। मैं जो कहने जा रहा हूँ। मम्मी: क्या बोल। मैं: मम्मी खाने से ज्यादा जरूरी सेक्स भी है। मम्मी: चुप। ये क्या बोल रहा है। मम्मी से ऐसे बोला जाता है। मैं: माफ करना मम्मी। पर सच यही है। पापा आपको प्यार नहीं करते हैं। और आपको प्यार की जरूरत है। पापा 58 के हैं। और इस उम्र में आदमी किसी औरत को प्यार नहीं कर सकता है। और आप पापा से 25 साल छोटी हो। आप अभी 33 की हो। इस उम्र में आपको प्यार की सख्त जरूरत है। मम्मी: चुप। बहुत सुन लिया। अब कुछ नहीं सुनूँगी। मैं: सॉरी मम्मी। मम्मी: मैं अभी आ रही हूँ। मैं नहीं रुक सकती। और 5 दिन। मैं: मम्मी आपको मेरी कसम है। आप आईं तो। मम्मी: बेटा कसम क्यों देता है। मैं तेरे बिना नहीं रह सकती हूँ। मैं: क्या आप अब भी आओगी। मैंने आपकी कसम दे दी है। मम्मी: तू जानता है मैं तेरी कसम को मानती हूँ। इसलिए नहीं आऊँगी। लेकिन तू तो आ जा मुझसे मिलने। मेरे लाल। तेरी बहुत याद आ रही है। मैं: ओके मम्मी। मैं आ रहा हूँ। लेकिन अंकल कहाँ हैं। मम्मी: वो हॉल में हैं। और मैं रूम में हूँ। और हाँ योगेश ने दो लड़की बुला रखी हैं। मैं: अनजान बनते हुए। किस लिए मम्मी। मम्मी: पता नहीं। शायद घर का काम करने के लिए। मैं: ओके मम्मी। मैं अभी आता हूँ। बाय मम्मी। मम्मी: ओके बेटा। बाय। फिर मम्मी ने फोन रखा। लेकिन मम्मी कट नहीं कर पाईं। क्योंकि मम्मी कॉल कट कर पातीं उससे पहले अंकल ने मम्मी को कुछ किया। क्योंकि मुझे नहीं पता। सिर्फ आवाज सुनाई दी। मम्मी: उई... छोड़िए। अंकुश आने वाला है। अंकल: क्या वर्षा। पूरी रात मेरा लंड लिया। और बेटे के सामने सतीसावित्री। मम्मी: वो मेरा बेटा है। उसके सामने तो सतीसावित्री बनना ही पड़ेगा। और मैं माँ हूँ। और एक माँ बेटे के बीच शर्म का मर्यादा का पर्दा होना चाहिए। अंकल: सही कहा तूने। तो क्या रात को जो हमने सुहागरात का वीडियो बनाया था। उसे दे दे। देख लेगा अपनी मम्मी की सुहागरात अंकल के साथ। (ये क्या। ये तो मेरे लिए सरप्राइज है। अंकल ने वीडियो के बारे में मुझे कुछ नहीं बताया था कि वो मम्मी का वीडियो बनाएँगे। और मम्मी अंकल की बातों से लग रहा था कि मम्मी को पता था कि उनकी सुहागरात का वीडियो बन रहा है।) मम्मी: हाँ दे देना। उसी के लिए तो आपने बनाया था। पर उसे पता नहीं चलना चाहिए कि मैं जानती हूँ। आपने उसे दिखाने के लिए वीडियो बनाया है। अंकल: वर्षा मैंने सुहागरात के पहले ही तेरे से परमिशन ले ली थी वीडियो बनाने की। मम्मी: हाँ। मैंने कब कहा परमिशन नहीं ली। अंकल: तो वर्षा। जब तेरा बेटा तेरा इतना ख्याल रखता है। तो उसे भी देखने दे। उसकी मम्मी की सुहागरात। मम्मी: एक बेटा माँ की चुदाई देखे। ये सही नहीं है। पर मैंने आपसे वादा किया था। दिखा देना मेरी चुदाई सुहागरात में मेरे बेटे को। पर कैमरा के द्वारा लाइव नहीं। अंकल: मैंने कब दिखाई उसे लाइव चुदाई सुहागरात। मम्मी: पर वीडियो में भी तो लाइव होगी। अंकल: वर्षा तुमने प्रॉमिस किया था। तुम उसे वीडियो दिखाने की मना नहीं करोगी। मम्मी: ठीक है। उसे दे देना। पर ये बताओ। क्या अंकुश ने आपसे कहा था कि वो मेरी चुदाई देखना चाहता है। अंकल: नहीं वर्षा। उसने कभी नहीं कहा। बल्कि एक बार मैंने उससे कहा था। तू चुदाई देख लेना छिपकर। तो उसने कहा था। नहीं अंकल। एक बेटे को अपनी माँ की चुदाई नहीं देखना चाहिए। मुझे खुशी है आप मम्मी की चुदाई करके मम्मी को सुख दे रहे हो। लेकिन मैं मम्मी की चुदाई कभी नहीं देखूँगा। मम्मी: जब उसने आप से कहा था कि वो मेरी चुदाई नहीं देखेगा। तो फिर आप उसे वीडियो क्यों दे रहे हो सुहागरात का। अंकल: वर्षा मैं तो उसका टेस्ट ले रहा हूँ। क्या वो देखेगा या नहीं। मम्मी: हाँ। अंकल: लेकिन वर्षा ये पेन ड्राइव में वीडियो है। और ये पेन ड्राइव तुम अंकुश को देना। मम्मी: क्या। नेवर। वो मेरा बेटा है। मैं कैसे उसे दूँगी। क्या कहूँगी। मेरी सुहागरात का वीडियो। नहीं नहीं। मैं नहीं दे सकती। अंकल: सुनो तो सही वर्षा। मम्मी: मुझे कुछ नहीं सुनना। मैं माँ हूँ उसकी। अंकल: चुप एकदम। चुप। पहले पूरा सुनो। मम्मी: बोलो। अंकल: तुम उससे यही कहना। जो तुमने उससे कहा था। योगेश ने मुझे सेड्यूस करने की कोशिश की थी बेटा। उसकी ये रिकॉर्डिंग है। बेटा देख कैसे मुझे योगेश ने सेड्यूस करने की कोशिश की। पर मैंने अपने आप को बहकने नहीं दिया। अब तू मुझे घर ले चल। वो मना करेगा। फिर तुम उससे कहना। पहले एक बार रिकॉर्डिंग देख ले। फिर फैसला करना। वो रिकॉर्डिंग देखने की मना करेगा। लेकिन तुम भी उसे कसम देना। अपनी। जैसे वो तुम्हें देता है। और फिर भी वो मना करेगा तो तुम उसे जबरदस्ती ये पेन ड्राइव दे देना। और जाकर अपने लैपटॉप में देख लेगा। मम्मी: आप भी क्या कह रहे हो। जैसे वो मुझे कसम देकर। मम्मी आपको मेरी कसम है। आपको अंकल के साथ पूरी रात कंप्यूटर सीखना। और पूरी रात मुझे आपसे चुदवाया है। उसी तरह मैं भी उसे कसम दूँ। बेटा तुझे मेरी कसम है। मेरी चुदाई देख। अंकल: नहीं। तुझे कसम देनी है। बेटा ये रिकॉर्डिंग देख। कैसे मैंने अपने आप को बचाया है। मम्मी: लेकिन वो रिकॉर्डिंग देखेगा तो मैं कैसे उससे नजरें मिलाऊँगी। और मैं उसे क्यों अपनी चुदाई दिखाऊँ। और आपने ही कहा था। उसने खुद कहा है वो मेरी चुदाई नहीं देखेगा। तो फिर उसे क्यों चुदाई दिखाऊँ। अंकल: वो तेरा कितना ख्याल रखता है। यदि वो तेरी एक बार चुदाई देख लेगा तो क्या फर्क पड़ेगा। क्या तू उसे अपनी चुदाई भी नहीं दिखा सकती। मम्मी: वो मुझसे बहुत प्यार करता है। और वो नहीं देखना चाहता है। तो फिर उसे क्यों दिखाऊँ। फिर मैं उससे कैसे नजरें मिला पाऊँगी। और माँ बेटे के बीच का पर्दा हट जाएगा। अंकल: नहीं हटेगा वर्षा। पहली बात तो वो रिकॉर्डिंग नहीं देखेगा। और जब तू उसे तेरी कसम देगी तब देखेगा। और मैं चाहता हूँ तू उसे कसम से। और वो तेरी चुदाई देखे। ताकि उसे पता चल सके। मैं उसकी माँ को सही ढंग से प्यार कर रहा हूँ या नहीं। कम से कम उसे पता तो चले। उसकी माँ का यार उसकी माँ की जवानी को संतुष्ट कर रहा है या नहीं। और मैं जानता हूँ वो रिकॉर्डिंग देखने के बाद भी यही कहेगा। उसने रिकॉर्डिंग नहीं देखी। क्योंकि मैं उसे जानता हूँ। और फिर जब वो ये कहेगा उसने रिकॉर्डिंग नहीं देखी। तो माँ बेटे के बीच का पर्दा बना रहेगा। मम्मी: कैसे बना रहेगा। जब वो रिकॉर्डिंग देख लेगा। और झूठ भी बोल देगा उसने रिकॉर्डिंग नहीं देखी। पर मुझे तो पता चल जाएगा उसने रिकॉर्डिंग देख ली। अंकल: कैसे पता चलेगा। मम्मी: उसके लैपटॉप में हिस्ट्री चेक कर लूँगी। तो पता चल जाएगा। और पर्दा हट जाएगा। अंकल: नहीं हटेगा। मम्मी: कैसे। अंकल: जैसे उसे पता है तू मुझसे 6 महीनों से लगातार चुद रही है। फिर भी तू यही कहती है। अभी तक कुछ नहीं हुआ है। और पर्दा डाला है। जबकि वो जानता है तू रोज मेरा लंड लेती है। मम्मी: आप सही कह रहे हैं। एक काम करते हैं। पेन ड्राइव को आप लैपटॉप में कॉपी कर दो। और उसे लैपटॉप दे देंगे। फिर जब वो वापस लैपटॉप देगा तो हिस्ट्री चेक कर लेंगे। तो पता चल जाएगा। अंकल: यानी तू कन्फर्म करना चाहती है। तेरे बेटे ने तेरी सुहागरात देखी या नहीं। मम्मी: हाँ। और पर्दा भी डाला रहेगा। अंकल: ठीक है। उसे कॉल करता हूँ। और समझाता हूँ। तू चुप रहना। मैं उससे बोल दूँगा। तू रूम में है। और मैं हॉल में। फिर मैंने कॉल कट कर दी। क्योंकि मेरा मोबाइल बिजी आया। फिर अंकल का कॉल आया। मैं: हेलो अंकल। अंकल: बेटा सब सुन लिया। मैं: क्या अंकल। अंकल: डर मत बेटा। तेरी मम्मी मेरे साथ नहीं है। मैं उससे दूर आकर बात कर रहा हूँ। और तेरी मम्मी ने जानबूझकर कॉल कट नहीं किया था। ताकि तू हमारी बातें सुने। और सब कुछ वैसा ही चलता रहे। तेरी मम्मी का नाटक चालू रहे। तेरी मम्मी ने तुझे सब जानबूझकर सुनाया हमारा प्लान। मैं: क्या। मम्मी ने जानबूझकर कॉल कट नहीं किया। और अभी मम्मी आपके पास हैं। अंकल: नहीं। वो दूर है। उसने कानों में ईयरफोन लगा रखे हैं। मैं: अंकल मैं आ रहा हूँ। और फिर 5 मिनट के बाद मैं अंकल के घर गया। सीढ़ियों से। मुझे दोनों लड़कियाँ मिलीं। मैंने कहा। मेरी मम्मी कहाँ हैं। तो उन्होंने रूम की ओर इशारा किया। और हँसती हुई एक अलग में दोनों चली गईं। और मैं अंकल के बेडरूम में गया। जहाँ मम्मी खड़ी थीं। और अंकल बैठे थे। मम्मी ने साड़ी पहनी थी। जो है। मैं मम्मी को इस साड़ी में देखता ही रह गया। मम्मी के बूब्स साफ साफ पता चल रहे थे। मम्मी: आ गया मेरे लाल। और मुझे अपने गले से लगा लिया। फिर मैंने कहा। मम्मी आपके पास ये साड़ी कहाँ से आई। मम्मी: बेटा ये साड़ी योगेश जी लाए हैं। देख बेटा। इस साड़ी को मेरे ब्लाउज कितना छोटा लिया है। ये देख। और इसमें मेरा पूरा बदन दिख रहा है। मैं: मम्मी अच्छा तो है। मम्मी: क्या बेटा। तू भी। बेटा इस ब्लाउज में मुझे बहुत शर्म आ रही है। और ये मुझे चेंज नहीं करने दे रहे हैं। और तू भी। और ये ब्लाउज ब्रा से भी छोटा है। मैं: मम्मी आप बहुत अच्छी लग रही हैं। आप उसे ही पहनो। मम्मी: बेटा मुझे घर ले चल। मैं: नहीं मम्मी। मैंने अंकल से प्रॉमिस किया है। जब तक पापा दादी वापस नहीं आते हैं। तब तक आप अंकल के घर में ही रहोगी। मम्मी: नहीं बेटा। तू नहीं जानता। ये मेरे साथ। मैं: मम्मी अंकल ने प्रॉमिस किया है। वो जो भी करेंगे आपकी परमिशन से करेंगे। अंकल: हाँ वर्षा। जो भी करूँगा तेरी परमिशन से ही करूँगा। मम्मी: नहीं बेटा। ये देख। और एक लैपटॉप बेड पे रखा। उसे मुझे दिया। और बोलीं। बेटा इस लैपटॉप में कल रात की पूरी रिकॉर्डिंग है। देख कैसे उन्होंने मुझे सेड्यूस करने की कोशिश की। पर मैंने अपने आप को बचा लिया। तू खुद देख। मैं: इट इज रॉन्ग मम्मी। ये गलत है मम्मी। मैं रिकॉर्डिंग नहीं देखूँगा। ये आपकी और अंकल की प्राइवेसी है। मैं आपकी प्राइवेसी नहीं देखूँगा। मम्मी: एक बार देख। मैं: नेवर मम्मी। कभी नहीं देखूँगा। एक बेटा माँ की प्राइवेसी देखे। ये पाप है। मैं कभी नहीं देखूँगा। उससे पहले मैं अंधा हो जाऊँगा। मम्मी: बेटा तू मुझसे प्यार करता है। मैं: बहुत मम्मी। मम्मी: तो तुझे मेरी कसम है। एक बार उसे देख। मैं: मैं नहीं देखूँगा मम्मी। और आप कसम वापस ले लो। मम्मी: मैंने हमेशा तेरी कसम मानी है। आज तू भी मेरी कसम मान। और ये रिकॉर्डिंग देख ले। मैं: मम्मी प्लीज। मम्मी: बेटा यदि तूने मेरी बात नहीं मानी तो मैं खाना नहीं खाऊँगी। मैं: प्लीज मम्मी। आप खाना खा लेना। मैं रिकॉर्डिंग देखता हूँ। मम्मी: यहाँ नहीं। घर ले जाकर देख ले। मैं: ओके मम्मी। फिर मैं लैपटॉप लेकर घर आ गया। और मैंने रिकॉर्डिंग्स देखीं। हालाँकि मैंने लाइव भी देखी थी। तो रिकॉर्डिंग देख कर क्या मिलता। वही तो था। फिर मैं शाम को वापस गया। तो मम्मी अंकल सोफे पे बैठे थे। मैंने जाकर टेबल पे लैपटॉप रखा। और मम्मी के बगल में बैठ गया। मम्मी अपना सिर नीचे रखकर बैठी थीं। मैं: मम्मी मुझे माफ कर दो। मैंने आपकी रिकॉर्डिंग नहीं देखी। प्लीज मम्मी। मुझे माफ कर दो। मम्मी: मम्मी ने अपना सिर ऊपर उठाया। और बोलीं। क्या नहीं देखी। मैं: नहीं देखी मम्मी। मम्मी: बेटा देख तो ले। मैं: नहीं मम्मी। मुझे नहीं देखना। मम्मी: ओके बेटा। मत देख। और मम्मी ने लैपटॉप ऑन किया। और कुछ देखने लगीं। शायद वो हिस्ट्री चेक कर रही थीं। फिर मुस्कुराते हुए बोलीं। नहीं देखी बेटा। मैं: नहीं देखी मम्मी। फिर मम्मी अंकल की तरफ मुस्कुराने लगीं। और बोलीं। देखा मेरे बेटे को। उसने रिकॉर्डिंग नहीं देखी। क्या कहा था आपने। तेरा बेटा देखेगा। लेकिन मेरे बेटे ने मेरी प्राइवेसी नहीं देखी। उसे उसकी मम्मी पर विश्वास है। मैं: हाँ मम्मी। मुझे आप पर पूरा भरोसा है। मैं कभी आपकी प्राइवेसी नहीं देखूँगा। मम्मी: पर बेटा मैंने तुझे कसम दी। तूने कसम को नहीं माना। मैं: मम्मी आपने मुझे कसम दी थी कि रिकॉर्डिंग देखना। अब मम्मी सवाल ये है कि रिकॉर्डिंग पूरी रात की हो या 1 सेकंड की। मैंने आपकी कसम को पूरा किया। और 1 सेकंड के लिए रिकॉर्डिंग चालू की। और बंद कर दी। इससे आपकी कसम भी पूरी हो गई। और मेरी इच्छा भी। मम्मी: कैसी इच्छा बेटे। मैं: मम्मी मैं कभी आपकी प्राइवेसी को नहीं देखूँगा। एक बेटे के लिए उसकी माँ की प्राइवेसी नहीं देखना चाहिए। मम्मी: बेटा मैं तो तुझे ये दिखाना चाहती हूँ। कि उन्होंने कैसे मुझे सेड्यूस करने की कोशिश की। पर मैंने कैसे अपने आप को बचाया। मैं: मम्मी मुझे आप पर पूरा भरोसा है। आपने जो भी कहोगी मैं उसे मानूँगा। मम्मी: पर तू खुद देख तो ले। मैं: मम्मी मैंने एक सेकंड की देखकर आपकी कसम पूरी कर दी। मम्मी: बेटा एक सेकंड में कुछ नहीं पता चलता। मैं: मम्मी मैंने कहा ना। मुझे आप पर पूरा भरोसा है। आप हमेशा सच बोलती हो। और मैं आपका बेटा कैसे आपकी प्राइवेसी देख सकता हूँ। मम्मी: लेकिन बेटा मैं तो हमेशा तेरे सामने कपड़े चेंज करती हूँ। यहाँ तक कि अपनी पैंटी भी। मैं: मम्मी वो आप मेरी मम्मी हो। इसलिए मैं आपको बिना कपड़ों के भी देख सकता हूँ। ये माँ बेटे का रिश्ता है। लेकिन जब माँ एक पत्नी या पत्नी धर्म निभा रही हो। तो बेटे को नहीं देखना चाहिए। वो पाप है। मम्मी: बेटा मैं उनकी पत्नी नहीं हूँ। और ना ही। मैं: मम्मी मैं जानता हूँ। लेकिन वो आपकी प्राइवेसी है। मम्मी: तो क्या तू कभी नहीं देखेगा। यदि मैं योगेश जी आगे आत्मसमर्पण कर दूँ। तब भी नहीं। मैं: नहीं देखूँगा मम्मी। ये आप दोनों की प्राइवेसी होगी। और मेरे लिए देखना पाप होगा। मम्मी: बेटा फिर किसी और ने देख लिया तो। मैं: मम्मी मैं किसी को नहीं देखने दूँगा। मम्मी: कैसे। मैं: रूम के बाहर रहकर पहरेदारी करूँगा। मम्मी: अच्छा बेटे। मम्मी को एक मर्द के साथ रूम में भेजकर मम्मी की पहरेदारी करेगा। लेकिन देखेगा नहीं। मैं: हाँ मम्मी। मम्मी: लेकिन मैं कभी योगेश जी आगे आत्मसमर्पण नहीं करूँगी। अंकल: लेकिन मैं एक दिन तुम्हें पकड़ रहूँगा। मम्मी: नेवर। मैं: मम्मी जिद मत करो। मम्मी: ठीक है बेटा। अब खाना खाते हैं। फिर मैंने मम्मी अंकल और उन दोनों लड़कियों ने साथ में खाना लगाया। और खाना खाते समय मैं देख रहा था। मम्मी अंकल को कुछ मैसेज व्हाट्सएप कर रही थीं। फिर अंकल ने वही व्हाट्सएप मम्मी के मुझे भेज दिए। मैंने देखा। मम्मी ने लिखा था। देखा मेरे बेटे को। उसने मेरी सुहागरात पूरी देख भी ली। और कहता है मम्मी एक सेकंड की देखी। देखो माँ बेटे का पर्दा अभी भी सलामत है। अंकल: हाँ वर्षा। फिर खाना खाकर मैं वापस अपने घर आने लगा। और सीढ़ियों के रास्ते में जहाँ अंधेरा था। वहाँ छुप गया। फिर मम्मी ने उन दोनों लड़कियों से कहा। आप दोनों रूम में जाइए। मुझे योगेश जी से बात करनी है। और वो दोनों लड़कियाँ वहाँ से रूम में चली गईं। मम्मी: देखा योगेश जी। अंकल: हाँ। तू कैसे कह सकती है उसने तेरी सुहागरात की रिकॉर्डिंग देखी है। मम्मी: मैंने हिस्ट्री चेक की है। और जब उसे लैपटॉप दिया था तब बैटरी 100% चार्ज थी। लेकिन जब वो वापस लाया 10% ही बची है। इसका मतलब उसने फुल नाइट रिकॉर्डिंग देखी है। अंकल: चलो अच्छा है। अब क्या तुझे बुरा लग रहा है। मम्मी: नहीं लग रहा है। लेकिन थोड़ी शर्म आती है कि मेरा बेटा मेरी सुहागरात देखे। अंकल: वर्षा लेकिन माँ बेटे के बीच का पर्दा नहीं गिरा। मम्मी: हाँ। अंकल: उसे फोन करूँ। पूछूँ क्या उसने देखी या नहीं। मम्मी: फोन लगाकर कन्फर्म कर लो। फिर अंकल ने मुझे कॉल लगाने लगे। मैंने तुरंत बेल म्यूट की। और फिर कॉल आया। मैं धीमी आवाज में। मैं: जी अंकल। अंकल: बेटा सच बताना। रिकॉर्डिंग देखकर लंड खड़ा हुआ या नहीं। मैं: अंकल क्या कह रहे हो। वो मेरी माँ है। एक बेटे का लंड माँ को देखकर खड़ा हो जाए तो उस लंड को काट देना चाहिए। जिस दिन मेरा लंड मेरी माँ को देखकर खड़ा हो जाएगा। उस दिन मैं अपना लंड काट दूँगा। अंकल: नहीं बेटा। ऐसा नहीं बोलते हैं। ये नॉर्मल है। एक औरत को देखकर। मैं: नहीं अंकल। वो मेरी माँ है। अंकल: इट्स ओके बेटा। ये बता। तूने रिकॉर्डिंग देखी या नहीं। मैं: अंकल मम्मी ने कसम दी। इसलिए मजबूरी में देखी। लेकिन पूरी नहीं। यदि मम्मी कसम नहीं देतीं तो मैं कभी नहीं देखता। अंकल: बेटा ये बता। कैसा लगा। मैं: मम्मी की खुशी में ही मेरी खुशी है। मैंने देखा। आपने मम्मी को प्यार किया। जिससे मम्मी को बहुत खुशी मिली। मैं चाहता हूँ आप सारी जिंदगी मम्मी को ऐसे ही प्यार करना। और मम्मी को खुश रखना। अंकल: बेटा तेरी मम्मी को मैं हमेशा अपने लंड से चोदूँगा। मैं: थैंक्यू अंकल। अंकल: बेटा तुझे रिकॉर्डिंग में क्या सबसे अच्छा लगा। मैं: अंकल वो मेरी माँ है। और मैंने मजबूरी में रिकॉर्डिंग देखने का पाप किया है। भगवान मुझे कभी माफ नहीं करेंगे। पर मम्मी की कसम भी पूरी करनी थी। इसलिए देखी। अंकल आपने मम्मी को प्यार किया। मुझे सब अच्छा लगा। आप बस मम्मी को हमेशा प्यार करना ऐसे ही। और अंकल बस इतना ही कहूँगा। मैं मम्मी की रिकॉर्डिंग देखी। उसके लिए भगवान मुझे कभी माफ नहीं करेंगे। अंकल: बेटा गिल्टी फील मत करो। तुमने सिर्फ तुम्हारी माँ के आदेश का पालन किया है। और कोई पाप नहीं किया। और तुम ही कहते हो माँ का आदेश का पालन हमेशा करना चाहिए। तो फिर गिल्टी फील क्यों कर रहे हो। क्या मैं वर्षा को बोलूँ। मैं: नहीं अंकल। मम्मी को कुछ मत बोलना। सिर्फ मम्मी से इतना कहना। मैंने कुछ भी नहीं देखा। नहीं तो मम्मी अपने आप में गिल्टी फील होंगी। और वो मुझसे बात करने में शर्म महसूस करेंगी। अंकल: बेटा मैं उससे बोल दूँगा। तूने कुछ नहीं देखा। और वो तो खुद बोल रही थीं। अंकुश ने कुछ नहीं देखा। मैं: जी अंकल। आप भी यही कहना। ताकि हम माँ बेटे के बीच मर्यादा हमेशा बनी रहे। अंकल: ओके। बाय। अब मुझे फिर से पूरी रात तेरी मम्मी को प्यार करना है। ओके बाय। मैं: बाय अंकल। और कॉल कट हुआ। फिर अंकल ने मम्मी से कहा। सुन लिया वर्षा। मम्मी: मैं बहुत खुशनसीब हूँ। जो मुझे अंकुश जैसा बेटा मिला। कितना प्यार करता है मुझसे। और मेरी वीडियो भी उसने मेरे कसम देने पर देखी। नहीं तो मेरी सेक्स नहीं देखता। और सबसे बड़ी बात। उसके मन में मेरे लिए कुछ गलत ख्याल नहीं है। मुझे नंगी देखने के बाद भी। अंकल: सही कहा वर्षा। अब चलें रूम में। मम्मी: अभी बहुत काम है। और खाने के बाद वहाँ पड़े बर्तन समेटने लगीं। तो अंकल बोले। अंकल: डार्लिंग आज खाने में बहुत मजा आया है। अब जल्दी से कुछ मीठा खिला दो। और मम्मी की आँखों में देखकर मुस्कुराने लगे।
6 hours ago
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मेरी मम्मी जानती थीं कि अंकल किस मीठे की बात कर रहे हैं। लेकिन मेरी मम्मी अनजान बनते हुए बोलीं। मेरी मम्मी: जी योगेश। अभी लाती हूँ। गुलाब जामुन गरम करके। अंकल: डार्लिंग तुम्हें कुछ गरम करने की क्या जरूरत है। तुम तो खुद ही बहुत हॉट। हाथ में पकड़ लोगी तो वो ऐसे ही ऐसे ही गरम हो जाएगा। और मुस्कुराते अपने हाथ को पैंट में खड़े अपने लंड पर फिराने लगे। मेरी मम्मी शर्माते मुस्कुराते वहाँ से जाने लगीं। तो अंकल ने मेरी मम्मी का हाथ पकड़ लिया। और बोले। कहाँ जा रही हो। मेरी मम्मी: योगेश जी। आप ही तो बोल रहे मीठे का। वो लेने जा रही हूँ। अंकल: डार्लिंग तुम खुद ऊपर से ले कर नीचे तक शहद की तरह मीठी हो। तुम बस अपने होठों से लगी अपनी लिपस्टिक का स्वाद चखा दो। मेरी मम्मी अपने यार के इस रोमांटिक अंदाज पर मुस्कुराते हुए ना में गर्दन हिलाने लगीं। तो अंकल बोले। अंकल: डार्लिंग मुँह तो मीठा करवा दो। अंकल के इतना बोलते ही मेरी मम्मी बोलीं। मेरी मम्मी: अच्छा योगेश जी। अभी मैं आपको अपनी लिपस्टिक ला कर देती हूँ। फिर जितना आपका दिल करे खा कर मुँह मीठा करते रहना। अंकल: मेरी मम्मी की कलाई पकड़े। मेरी मम्मी को खींच लिए। तो मेरी मम्मी उनकी गोद में जा गिरीं। अंकल मेरी मम्मी को बाँहों में कसते बोले। किसी का कत्ल करना तो तुम जैसे हसीनाओं से सीखे। अंकल की इस बात पर मेरी मम्मी ने मुस्कुराते अपनी आँखें झपका कर बोलीं। मेरी मम्मी: किसी भी लड़की को अपने वश में करना तो कोई आप से सीखे। मुझे नहीं पता था कि योगेश जी आप ऐसे मुँह मीठा करते हैं। एक तरह उनकी गोद में बैठी मेरी मम्मी खुद भी चाहने लगी थीं कि अंकल उन्हें चूमें। अंकल: डार्लिंग करवा दो मुँह मीठा। अब मेरी मम्मी अपने यार योगेश जी जो कि दुनिया समाज के सामने उनके पति नहीं थे। लेकिन वो हिन्दू मम्मी ने अपना जिस्म सॉफ्ट दिया था। पिछले 6 महीनों से उनसे चुद रही थीं। और जवानी के मजे ले रही थीं। जो कि मेरी मम्मी को मेरा नामर्द बाप नहीं दे रहा था। अब अंकल को ही वो अपना पति परमेश्वर स्वामी मानती थीं। अब अंकल को मेरी मम्मी के होठों का रस चूसने का अधिकार भी था। क्योंकि मम्मी ने भले ही अंकल से शादी नहीं की थी। पर कल बिना शादी के ही सुहागरात मनाई थी। वो भी पूरी रात अपनी चूत में उनका लंड घुसवाकर। मेरी मम्मी अब अंकल के लंड के बिना जिंदा नहीं रह सकती थीं। मेरी मम्मी ने मुस्कुराते हुए अपनी बाँहें अंकल के गले में डाल कर। अंकल के गालों को प्यार से चूमने लगीं। और अंकल के गालों को चूमते चूमते मेरी मम्मी अपने होठों को अपने यार योगेश जी के होठों पर ले आईं। और वो दोनों एक दूसरे के होठों को चूसने लगे। उस समय घर में मेरी मम्मी और अंकल के अलावा और दो लड़कियाँ भी थीं। पर वो दूसरे रूम में थीं। इसलिए अंकल मेरी मम्मी दोनों ही सही हॉल में बैठे। एक दूसरे के होठों को चूम रहे थे। और चूस भी रहे थे। मेरी मम्मी और अंकल एक दूसरे के होठों को चूस रहे थे। और दोनों ही एक दूसरे का पूरा पूरा साथ दे रहे थे। अंकल के होठ जहाँ मेरी मम्मी के नाजुक रस भरे होठों को चूम रहे थे। वहीं उनके हाथ मेरी मम्मी के संगमरमर फूल जैसे नाजुक मखमली बदन पर रेंग रहे थे। और मेरी मम्मी के बदन पर हाथ फेरते फेरते बड़बड़ा रहे थे। वर्षा कितना रस भरा हुआ है तुम में। कितनी मीठी हो मेरी जान। और अपने हाथ को नीचे मेरी मम्मी की साड़ी की गांठ पर ले आए। और उन्होंने मेरी मम्मी की साड़ी की गांठ को खींच दिया। जो खुल कर मेरी मम्मी के बदन से लिपटी थी। अंकल उठे। और मेरी मम्मी की साड़ी को मेरी मम्मी के बदन से निकालने लगे। तो मेरी मम्मी ने भी अपनी साड़ी निकालने में अंकल की मदद करने लगीं। अब मेरी मम्मी की साड़ी नीचे जमीन पर पड़ी थी। अंकल ने मेरी मम्मी को फिर से अपने बदन से चिपका लिया। और मेरी मम्मी के बालों से खेलते हुए मेरी मम्मी के बाल खोल दिए। कभी उनके होठ मेरी मम्मी के होठों पर। कभी मेरी मम्मी के गालों। और कभी मेरी मम्मी की गर्दन पर पड़ रहे थे। मेरी मम्मी भी अंकल की इस हरकत पर बहुत ज्यादा गरम हो रही थीं। मेरी मम्मी ने अपनी बाँहें अपने यार के गले में कस कर कसमसाते हुए बोलीं। योगेश जी आह... क्या कर रहे हैं। क्या खा जाएँगे क्या। अंकल: वर्षा तू है ही ऐसी चीज। कोई भी अगर तुम्हें चखे हमेशा हमेशा के लिए तुम्हारा दीवाना हो जाए। सच डार्लिंग तुम आग हो। आग मेरी जान वर्षा। मेरे अंकुश की मम्मी। तभी अंकल ने अपना एक हाथ मेरी मम्मी के टाइट ब्लाउज में कैद चुची पर रख दिया। और उसे जोर से दबाया। वैसे अब मेरी मम्मी थोड़ा कम्फर्ट महसूस कर रही थीं। क्योंकि दोनों लड़कियाँ रूम में थीं। और दोनों लड़कियों से मम्मी ने दिन में थोड़ा हंसी मजाक भी किया था। इसलिए मम्मी इन दोनों लड़कियों से थोड़ा खुल भी गई थीं। इसलिए मेरी मम्मी हॉल में अंकल के साथ रोमांस कर रही थीं। ये जानते हुए भी वो दोनों लड़कियाँ कभी भी रूम से निकल कर बाहर आ सकती हैं। और बेखौफ होकर अंकल का साथ दे रही थीं। अंकल मेरी मम्मी की चुचियों को जोर जोर से दबाने लगे। तो मेरी मम्मी के मुँह से सिसकारियाँ आह... आह... योगेश जी प्लीज योगेश जी धीरे से दबाएं। पर वो कहाँ मेरी मम्मी की सुनने वाले थे। वो तो मेरी मम्मी की चुचियों को दबाते मेरी मम्मी की गर्दन को चूम रहे थे। मेरी मम्मी को चूमते और मेरी मम्मी के बदन को सहलाते मेरे अंकल मेरी मम्मी की आँखों में देख कर मेरी मम्मी से बोले। वर्षा डार्लिंग... आई लव यू। अपने यार के इस सेक्सी अंदाज ने मेरी मम्मी को आई लव यू कहने पर मेरी मम्मी अंकल की आँखों में देख एक बड़ी अदा से मुस्कुराने लगीं। और फिर मम्मी अपने गले में पड़ी सोने की चेन से खेलने लगीं। तो अंकल फिर मेरी मम्मी के मुलायम गालों को सहलाते मेरी मम्मी से पूछने लगे। जान कुछ जवाब तो दो। तो फिर मेरी मम्मी ने भी इठलाते हुए कहा। क्या जवाब दूँ। तब अंकल बोले। वर्षा प्लीज मुझे छोड़ के मत जाना। अंकल की इस बात पर मेरी मम्मी इमोशनल हो गईं। और बोलीं। मम्मी: मेरा नामर्द पति ने मुझसे शादी तो की। पर मुझे सुख नहीं दिया। 20 सालों में उसने मुझे 20 बार भी नहीं चोदा। अंकल: मैं उस नामर्द की तरह नहीं हूँ। मैं उसकी तरह गैर जिम्मेदार नहीं हूँ। तुम्हें कभी चुदाई के लिए नहीं तड़पाने दूँगा। हमेशा मेरा लंड तैयार रहेगा तुम्हारी चूत के लिए। मम्मी: भले ही मैंने आपसे शादी नहीं की। पर पत्नी होने का हर फर्ज पूरा करूँगी। आपको कभी पत्नी की कमी महसूस नहीं होने दूँगी। मेरी चूत। मेरा जिस्म। मेरे बोब्स। मेरे शरीर का हर एक अंग सिर्फ आपके लिए है। अंकल मेरी मम्मी की बात सुन कर काफी खुश हुए। कि मेरी मम्मी को गले लगा लिया। और मेरी मम्मी की चुचियों पर अपना सिर रख दिया। उनका वजन ज्यादा था। जिससे मेरी मम्मी सोफे पर ही ढेर हो गईं। और अंकल मेरी मम्मी के ऊपर लेट गए। अंकल का लंड मेरी मम्मी के पेटीकोट के ऊपर से मेरी मम्मी की चूत पर लग रहा था। और अंकल मेरी मम्मी के ऊपर लेटे मेरी मम्मी के होठों को चूम रहे थे। अंकल: डार्लिंग सच में इतनी मीठी हो। लगता है कुछ ही दिनों में मुझे डायबिटीज न हो जाए। और फिर से अंकल ने अपने होठों को मेरी मम्मी के होठों से चिपका लिया। और मेरी मम्मी की चुचियों को साथ ही दबा रहे थे। मेरी मम्मी भी गरम हो रही थीं। और मेरी मम्मी ने अपनी बाँहों का हार अंकल के गले में डाल दिया। और उन्हें अपनी बाँहों में जोर से कसने लगीं। मेरी मम्मी नीचे दबाने से मेरी मम्मी की चुचियाँ ब्लाउज में से बाहर निकलने को थीं। जिससे देख कर अंकल और भी उत्तेजित हो रहे थे। अंकल मेरी मम्मी की चुचियों को देख कर बोले। वर्षा देखो ना। तुम्हारे आम भी कैसे बाहर आने को बेताब हैं। कैसे इनको कैद में रखती हो। कैसे तड़प रहे हैं आजाद होने को। और उन्होंने अपने होठ मेरी मम्मी के क्लीवेज पर रख कर चूमने लगे। जिससे मेरी मम्मी के क्लीवेज अंकल के चूमने से गीली हो गई थी। वो मेरी मम्मी के ऊपर लेटे फिर से मेरी मम्मी से पूछने लगे। जो कुछ ये था। अंकल: डू यू लव मी डार्लिंग। मम्मी कुछ जवाब देतीं उससे पहले मैंने मम्मी को कॉल कर दी। क्योंकि मैं जानता था मम्मी कॉल कट नहीं करती हैं बात होने के बाद। क्योंकि मम्मी किसी का भी कॉल कट नहीं करती हैं। वो सोचती हैं सामने वाला खुद कट कर देगा। मम्मी: हाँ बोल बेटा। कैसे कॉल किया। मैं: सॉरी मम्मी। मैं अपने दोस्त की कॉल कर रहा था। गलती से आपको लग गया। मम्मी: कोई बात नहीं बेटे। और मम्मी ने मोबाइल साइड में रख दिया बिना कट किए ही। मैं जानता था। फिर अंकल बोले: जवाब दो वर्षा। मैंने पूछा जिसका। मम्मी: येस लव यू योगेश जी। अंकल: डू यू मैरि विद मी। मेरी मम्मी: शर्मा कर। योगेश जी... ये कैसा सवाल है। अंकल: डू यू मैरि विद मी। तुमसे सिर्फ जानना था। मेरी मम्मी: मेरी मम्मी के पास कोई जवाब नहीं था। पर मेरी मम्मी इतना बोलीं। योगेश जी मैं आपसे शादी का नहीं बता सकती। पर बस यही चाहती हूँ। हम हमेशा साथ रहें। मेरी मम्मी का जवाब सुन कर अंकल मेरी मम्मी से बोले। अंकल: वर्षा बताओ ना डार्लिंग। तुम्हें मेरी कसम। मम्मी चुप थीं। पर धीरे से मुस्कुरा रही थीं। अंकल: अच्छा ये बताओ। जब मैं तुम्हें प्यार करता हूँ तो तुम्हें मजा आता है। बताओ ना। तुम्हें मेरी कसम। अंकल के इस सवाल पर मम्मी ने शर्म से बस अपना सिर हिला दिया। कि तभी फोन की रिंग बजने लगती है। और अंकल रिंग को इग्नोर करते हुए मेरी मम्मी के ब्लाउज के ऊपर से ही मेरी मम्मी की चुची चूसने लगे। मेरी मम्मी के निप्पल भी खड़े हो चुके थे। एक तो मेरी मम्मी के ब्लाउज का कपड़ा पतला था। ऊपर से अंकल के थूक से गीला होने की वजह से मेरी मम्मी की चुची साफ दिखने लगी। कि तभी फोन की रिंग दोबारा बजने लगी। तो अंकल गाली देते हुए। मादरचोद पता नहीं क्यों बार तंग कर रहा है साला। और इस बार अंकल ने मेरी मम्मी को छोड़ कर फोन उठा लिया। जैसे ही अंकल ने मेरी मम्मी को अपनी बाँहों से आजाद किया। मेरी मम्मी झट से एकदम खड़ी हो गईं। और अपने बाल बाँधने लगीं। और वहीं जमीन पर पड़ी अपनी साड़ी को और अपने मोबाइल को उठा कर बेडरूम की ओर भागने लगीं। दोस्तों मम्मी का मोबाइल अभी भी चालू है। मेरी मम्मी मान ही मान अपने यार को इस तरह प्यार करने पर खुश थीं। और बेडरूम की ओर जाते समय मेरी मम्मी (धीमी आवाज में जो मुझे मोबाइल से सुनाई दे रही थी क्योंकि मोबाइल चालू था) बोल रही थीं। मैं जानती हूँ योगेश जी आप मेरी गाँड को जरूर निहार रहे होंगे। क्योंकि मैं ये बात अच्छे से जानती हूँ कि मेरी ये लचकती कमर और तराजू की तरह बड़ी उभरी गाँड हमेशा से ही मर्दों की नजरों में रहती है। और इस जन्नत के किले को फतेह करने का ख्वाब ना जाने कितने मर्दों ने देखा है योगेश जी। पर इस किले पर एक दिन आप ही फतेह प्राप्त करोगे। मेरी ये गाँड सिर्फ आपके लिए है योगेश जी। मेरे उस नामर्द पति ने तो मेरी चूत भी ढंग से नहीं खोली। 20 सालों में 20 बार भी मेरी चूत पे सवारी नहीं कर पाया। सिर्फ आप ही हो जिसने मेरी चूत फाड़ी। और गाँड भी एक दिन आपको ही दूँगी। मेरी इस जन्नत के किले जैसी गाँड पे सिर्फ आपका ही लंड चढ़ाई करके फतेह प्राप्त करेगा। और मेरी गाँड का कचूमर बना देगा। मैं जानती हूँ योगेश जी। इस समय आप फोन पे नहीं बल्कि मेरी ऊपर नीचे होती गाँड को देख कर उत्तेजित हो रहे होंगे। यही बोलकर मेरी मम्मी अपनी गाँड को एक खास तरीके से उछालने लगीं। और मेरी मम्मी ने पीछे मुड़ कर देखा। और अपने यार को और उकसाने के लिए अपना अंगूठा दिखा कर चिढ़ाती हुईं। अपना अंगूठा इस तरह दिखाने पर मेरी मम्मी की चुची का उभार तो उस समय और भी ज्यादा जानलेवा बन गया था। जिससे अंकल ने झट से फोन को काट दिया। और मेरी मम्मी की ओर भागने लगे। इससे पहले कि वो मेरी मम्मी को पकड़ते। मेरी मम्मी भाग कर बेडरूम की ओर भागने लगीं। पर उन्होंने मेरी मम्मी को बेडरूम में पहुँचने से पहले ही पकड़ लिया। मेरी मम्मी उनकी बाँहों में मुस्कुराते इठलाते हुए बोलीं। हाय योगेश जी। ये आप क्या कर रहे हैं। छोड़िए ना। पर वो कहाँ अब मेरी मम्मी को छोड़ने वाले थे। मेरी मम्मी शर्माते दीवार की तरफ मुँह किए खड़ी शर्मा रही थीं। उन्होंने पीछे से मेरी मम्मी को पकड़ कर मेरी मम्मी के कान को अपने होठों में दबा लिया। और मेरी मम्मी को पकड़ कर पलट दिया। और मेरी मम्मी को अपने से चिपका लिया। मेरी मम्मी की दोनों चुचियों को मुट्ठी में भर कर गुब्बारों की तरह दबाने लगे। मेरी मम्मी और अंकल दोनों की गरम साँसें एक दूसरे की साँसों से टकराने लगीं। और मेरी मम्मी अंकल की आँखों में देख कहने लगीं। छोड़िए ना योगेश जी। अंकल: डार्लिंग ये हाथ मैंने छोड़ने के लिए नहीं पकड़ा है। वैसे वहाँ सोफे पर प्यार करने में मजा भी नहीं आ रहा था। चलो ना डार्लिंग बेड पर। वहाँ प्यार करते हैं। मेरी मम्मी: योगेश जी आपका मन नहीं भरता मुझे प्यार करने में। देखिए ना दोपहर में ही तो क्या है। अब कल करेंगे। अंकल: मेरी मम्मी के गालों और होठों और मेरी मम्मी की गर्दन को चूमते। डार्लिंग कल तो करेंगे ही। लेकिन अभी देखो मुझसे रहा नहीं जा रहा। प्लीज अब मत रोको मेरी जान। आओ ना मेरी जान बेड पर चलते हैं। और मेरी मम्मी को अपनी गोद में उठा कर बेड पर लिटा दिया। अंकल मेरी मम्मी के ऊपर चढ़े। अपने होठ मेरी मम्मी की नाभि पर रख दिए। और मेरी मम्मी की नाभि को अपने होठों में कस कर चूसने लगे। जिससे उनके होठों की छाप मेरी मम्मी के बदन पर छूट रही थी। मेरी मम्मी मस्ती में। मम्मी: ऊच... योगेश जी। आपने क्या किया। अब साड़ी पहनूँगी तो सबको दिख जाएगा। क्योंकि मेरी मम्मी की नाभि के ऊपर अंकल के होठों के निशान पड़ चुके थे। मम्मी: कल रात को भी आपने कितनी जोर से सारे बदन पर काटा था। कैसे लाल निशान पड़ गए थे। पता है आपके दोस्तों की पत्नियाँ मुझे देख कर हँस रही थीं। मुझे बार बार एक दूसरे से बोल रही थीं। लगता है भाई साहब रात को बुरी तरह से मसला है। पता है मुझे कितनी शर्म आ रही थी मिसेज गुप्ता के सामने। अंकल: तो पता पड़ना चाहिए। कि हम पति पत्नी हैं। और ये हमारा प्यार है। हमको किसका डर। मैंने तुम्हें पहले ही कहा था। मैंने उनसे बोला है मेरी वाइफ आई है। मैंने तुमको उनसे अपनी वाइफ के रूप में मिलवाया था। मेरी मम्मी: धत्त... आप भी ना। मैं आपकी तरह बेशर्म नहीं हूँ। और मुस्कुराने लगीं। तभी अंकल और और नीचे झुक कर मेरी मम्मी की कमर को चूमने लगे। उनके हाथ मेरी मम्मी के चूतड़ों से खेल रहे थे। और उनके होठ मेरी मम्मी की नाभि पर अपना कारनामा दिखा रहे थे। कि उन्होंने अपनी जीभ निकाल कर मेरी मम्मी की नाभि में घुसा। तो मेरी मम्मी तो पागल हो उठीं। और उनको कस कस दबोच लिया। और कराहने लगीं। आह... योगेश जी। बस कीजिए। पर वो थे कि रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। कुछ देर बाद वो खड़े हुए। और मेरी मम्मी के पेटीकोट का नाड़ा खोलने लगे। तो मम्मी ने कहा। योगेश जी क्या कोई आ जाएगा। और बेडरूम की ओर देखने लगीं। जिससे अंकल भी समझ गए। और मेरी मम्मी को अपनी बाँहों में उठा लिया। और बेडरूम की ओर चल पड़े। (कोई सोच भी नहीं सकता था। जिनका जवान बेटा 19 का है। और उसकी मम्मी एक गैर मर्द के साथ मजे कर रही हैं। ये जानते हुए भी उसके बेटे को सब पता है। वो यहाँ चुदने आती हैं। और एक बेटा खुद अपनी जवान 33 साल की मम्मी को मस्ती करवा रहा है। एक गैर मर्द 47 साल के आदमी के साथ। अपने 58 साल के पिता को धोखा दे रहा है।) और बेडरूम में आ कर मेरी मम्मी को बिस्तर पर गिरा दिया। मेरी मम्मी बिस्तर पर लेटी उनको देख कर मुस्कुरा रही थीं। मानो उनको और जोश दिला रही थीं। वो बिस्तर के पास खड़े अपने कपड़े उतारने लगे। पहले उन्होंने अपनी टी शर्ट के साथ बनियान। और बाद में अपना पैंट भी उतार दिया। अब वो ब्रीफ में मेरी मम्मी के सामने खड़े थे। और उनका लंड ऐसा लग रहा था मानो अभी उसको फाड़ कर बाहर आ जाएगा। मेरी मम्मी उनके खड़े लंड को देख कर गरम हो रही थीं। और अपने होठ काटने लगीं। और अपने यार की आँखों में देख कर मुस्कुराते हुए बोलीं। योगेश जी। आपका हर समय खड़ा ही रहता है। अंकल: अपने लंड को सहलाते। डार्लिंग ये तो तुम्हारे हुस्न का नतीजा है। वैसे भी जिसकी तुम्हारे जैसे खूबसूरत गर्लफ्रेंड हो तो उसका तो खड़ा रहेगा ही ना। और वो भी बिना देर किए मेरी मम्मी के साथ मेरी मम्मी के बगल में आ कर लेट गए। मेरी मम्मी की बगल में लेटे ही अंकल ने मेरी मम्मी को अपनी बाँहों में कस लिया। और मेरी मम्मी के ब्लाउज के हुक खोलने लगे। और मेरी मम्मी का ब्लाउज खोल कर मेरी मम्मी की चुचियों को ब्रा के ऊपर से दबाने लगे। मेरी मम्मी अंकल की आँखों में देख कर मुस्कुराईं। तो अंकल मेरी मम्मी की चुचियों को दबाते हुए बोले। वर्षा... कितने बड़े हैं ये तुम्हारे आम। और कितने रसीले हैं। और इतना बोलते ही अपने होठ मेरी मम्मी की चुचियों के ऊपर रख कर चूमने लगे। और साथ ही अपने हाथ को मेरी मम्मी की पीठ पर ले गए। और मेरी मम्मी की ब्रा का हुक खोल दिया। मेरी मम्मी की ब्रा खुलते ही वो मेरी मम्मी की ब्रा को मेरी मम्मी के बाजुओं से बाहर निकालने लगे। तो मेरी मम्मी ने भी अपने हाथ उठा कर अपनी ब्रा निकालने में अंकल की मदद की। अब मेरी मम्मी की ब्रा उनके हाथ में थी। जो उन्होंने नीचे जमीन पर फेंक दिया। और मेरी मम्मी की एक चुची को अपने हाथ में पकड़ कर दबाने लगे। और दूसरी को अपने मुँह में भर कर चूसने लगे। मेरी मम्मी को भी इतना मजा आ रहा था कि मेरी मम्मी उनके बालों में अपनी उँगलियाँ चलाने लगीं। अंकल थे जो अपनी जीभ निकाल कर मेरी मम्मी के निप्पल के कभी चारों ओर घुमाते। और कभी मेरी मम्मी के निप्पल्स को अपनी जीभ से छेड़ते। और कभी मेरी मम्मी के निप्पल्स को अपने होठों में दबा कर चूसते। और कभी उसे जोर से होठों से खींचते। मेरी मम्मी तो जैसे पागल सी हो रही थीं। मानो मेरी मम्मी को कंट्रोल ही नहीं हो रहा था। एक समय था जब अंकल ने मेरी मम्मी को प्रपोज किया था। तो मम्मी ने उसे ठुकरा दिया। और बोली थीं। मैं अपने पति के अलावा किसी की और तरफ देखूँगी भी नहीं। और पिछले 6 महीनों से मेरी मम्मी उन्हीं अंकल के साथ चुद रही हैं। मेरी मम्मी अंकल को रोकने की बजाय खुद उनको अपने आगोश में ले रही हैं। और खुद अंकल का साथ दे रही हैं। अंकल कुछ देर मेरी मम्मी की चुचियों को चूसने के बाद अंकल नीचे मेरी मम्मी की कमर पर आए। और फिर मेरे अंकल जी ने मेरी मम्मी की कमर पे अपनी जीभ से चाटने लगे। तो मेरी मम्मी तो मानो पागल ही हो गई थीं। अंकल नीचे होते गए। और उन्होंने अपनी जीभ को मेरी मम्मी की चिकनी गोरी मस्त जाँघों पर रखा। और मेरी मम्मी की चिकनी जाँघों को चाटने लगे। और मेरी मम्मी के मुँह से आह आह निकल रही थी। और फिर अंकल अपनी जीभ को नीचे ले जाते हुए मेरी मम्मी के पैर को अपने मुँह में लेकर चूसने लगे। मेरी मम्मी तो मानो दूसरी दुनिया में ही खो सी गई थीं।
6 hours ago
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मेरी मम्मी बहुत गरम हो गई थीं। और ये खड़ी हुईं। और अपने यार के ऊपर आ गईं। और ऊपर आते ही मेरी मम्मी अपने यार के पूरे बदन को चूमने लगीं। और उनकी बॉडी को चूमते मेरी मम्मी के होठ अंकल के निप्पल पर आ गए। तो मम्मी ने उनके निप्पल को अपने होठों में दबा कर चूसने लगीं। मेरी मम्मी के इस तरह उनके निप्पल को चूसने से अब अंकल के मुँह से सिसकियाँ निकलने लगीं। और उन्होंने मेरी मम्मी को फिर से अपने ऊपर से उठा कर नीचे लिटा दिया। और मेरी मम्मी अंकल के सामने सिर्फ अपनी पैंटी पहने लेटी थीं। अंकल ने झट से अपनी उँगलियाँ मेरी मम्मी की पैंटी में फँसाईं। और मेरी मम्मी की पैंटी को खींच कर मेरी मम्मी की टाँगों से बाहर निकाल दिया। और मेरी मम्मी बिल्कुल नंगी हो गईं। नंगी होते ही मेरी मम्मी ने अपनी चूत अपने हाथों से ढक ली। और शर्मा कर अपने यार को कनखियों से देखने लगीं। तो अंकल मेरी मम्मी की टाँगों को चौड़ी करके मेरी मम्मी की टाँगों के बीच में बैठ गए। और मेरी मम्मी की चूत पर अपना मुँह लगा दिया। मेरी मम्मी को अपने यार की गरम साँसें अपनी चूत पर महसूस होते ही मेरी मम्मी के अंदर की आग और भी तेज भड़कने लगी। पहले अंकल ने मेरी जवान मम्मी और अपनी जवान रखैल वर्षा की चूत को खूब सूँघा। मेरी मम्मी की चूत से निकलती सौंधी सौंधी खुशबू अंकल की नाक में भर गई। वो बड़े चाव से मेरी मम्मी की चूत को सूँघने लगे। थोड़ी देर के बाद मेरे अंकल ने अपनी जीभ निकाल कर मेरी मम्मी की चूत को चाटना शुरू कर दिया। और जैसे ही अंकल जी की जीभ मेरी मम्मी की मस्त चिकनी साफ चूत में घुसी। तो मेरी मम्मी जो कि पलंग पर लेटी थीं। मेरी मम्मी ने अपने पैरों को पूरा फैला दिया। और खुद ही अपनी चूत अपने यार योगेश अंकल से चटवाने लगीं। थोड़ी देर तक मेरी मम्मी की चूत को चाटने के बाद मेरे अंकल ने अपनी जीभ मेरी मम्मी की चूत के अंदर डाल दी। और अपनी जीभ को घुमा घुमा कर मेरी मम्मी की चूत को चूसने लगे। अपनी चूत चटाई से मेरी मम्मी भी बहुत गरम हो गईं। और मेरी मम्मी ने अपने हाथों से अंकल का सिर पर अपना हाथ रख कर फिराने लगीं। और अंकल मेरी मम्मी की चूत को ऐसे चाट रहे थे जैसे मेरी मम्मी की चूत पर कोई रसमलाई लगी हुई हो। और मेरी मम्मी उनके सिर पर प्यार से सहलाती अपनी चूत की रसमलाई चटवा रही थीं। और मेरी मम्मी के मुँह से सी सी की आवाजें भी निकलने लगीं। आह... योगेश जी रुक जाइए। मैं झड़ जाऊँगी। आह... अंदर मत घुसाइए। उई माँ योगेश जी आह... अब मेरी मम्मी नीचे से अपनी गाँड उठा उठा कर अपने यार को अपनी चूत चटवा रही थीं। मेरी मम्मी से अब बर्दाश्त नहीं हो रहा था। तो मेरी मम्मी बोलीं। योगेश जी आओ ना। ओह प्लीज योगेश जी आओ ना। अब देर मत करो। अब मुझे चोदो ना। अब और कितनी देर चाटेंगे आप। प्लीज योगेश जी अब बर्दाश्त नहीं हो रहा। आह... मर जाऊँगी। प्लीज आओ ना। आह... मेरी मम्मी अपनी चूत की खुजली से पागल हुए जा रही थीं। मुझे पता था कि अगर अंकल कुछ देर और मेरी मम्मी की चूत ऐसे ही चाटते रहें तो मेरी मम्मी जरूर उनके मुँह पर ही झड़ जाएँगी। और हुआ भी यही। मम्मी ने भी कहा। बस योगेश जी अब और नहीं। अगर आप ऐसे ही मेरी चूत चाटते रहोगे तो मैं आपके मुँह पर ही झड़ जाऊँगी। और मेरी मम्मी के इतना कहते ही अंकल उठे। तो मेरी मम्मी की नजर उनके अंडरवियर में खड़े उनके लंड पर गई। वो मेरी मम्मी को देख कर मुस्कुरा रहे थे। तो मेरी मम्मी ने अंकल को आँखों से इशारे से कहा। ये देखिए आपका कैसा खड़ा है। तो मेरे अंकल मुस्कुराते अपने लंड को अंडरवियर के ऊपर से सहलाते हुए मेरी मम्मी की आँखों में देखते। मेरी मम्मी को उन्होंने इशारे से मेरी मम्मी को अपना लंड अंडरवियर से बाहर निकालने के लिए कहा। मेरी मम्मी ने शर्म से ना में गर्दन हिला दी। तो फिर अंकल मेरी मम्मी के पास आए। और मेरी मम्मी के सामने बोले। वर्षा निकालो ना। तो इस बार मेरी मम्मी धीरे से उनका अंडरवियर नीचे खिसकाना चाहती थीं। लेकिन उनका लंड खड़े होने के कारण वो नीचे खिसक ही नहीं रहा था। तो मम्मी ने पहले लंड अंडरवियर के ऊपर से ही सहलाया। और थोड़ी देर बाद। मम्मी ने एक बार अपनी उँगलियाँ अंकल के अंडरवियर में फँसाईं। और उसको थोड़ा खींचा। और अपना हाथ उनके अंडरवियर के अंदर डाल कर पकड़ कर बाहर निकाला। अब उनका फनफनाता उनका मस्त कड़क लंड मेरी मम्मी की आँखों के सामने था। जिसको देख कर तो मेरी मम्मी की चूत और भी पानी छोड़ने लगी। मेरे अंकल नीचे झुके। और उन्होंने अपना लंड मेरी मम्मी की चूत पर रख कर धक्का मारने लगे। तो मेरी जवान सेक्सी गोरी मम्मी ने अंकल को रोक कर कहा। रुकिए योगेश जी। अंकल: क्या हुआ वर्षा। मेरी मम्मी: योगेश जी इस पर वो चढ़ा लीजिए। अंकल: यार अब रहने दो ना। रात को ऐसे ही किया था। और सुबह भी। अब उसकी क्या जरूरत है। मेरी मम्मी: योगेश जी पिछले 6 महीनों से मैं आई पिल ले रही थी। लेकिन वो अब खत्म हो गई थी। तो मैंने आज दिन में आपको लाने को बोला था। तो आप ले आए थे कंडोम के साथ। पर आपने कहा था आई पिल मत लिया करो। तो मैं आज आई पिल नहीं लूँगी। और बच्चा होने से रोकने के लिए या तो आई पिल या कंडोम लेना होगा। नहीं तो मैं प्रेग्नेंट हो गई तो मेरा नामर्द पति और सास मुझे घर से निकाल देंगे। और कल रात को भी मेरे पास एक टैबलेट थी। तो मैंने ले ली थी। लेकिन अब कंडोम लगा लीजिए। अंकल: और यदि कभी मेरी बिना कंडोम के करने की इच्छा हुई तो। मम्मी: आप बिना कंडोम के करना। और मैं आई पिल ले लूँगी। अंकल: वर्षा ठीक है। पर अब वो इस समय कहाँ है। अगली बार जब करेंगे तो पहले ही साथ में रखेंगे। ओके। मम्मी: मैं जानती थी आप रुकेंगे नहीं। इसलिए मैंने उसको पहले से ही वो क्यूपबोर्ड में रखा है। अंकल: कौन सी क्यूपबोर्ड। मम्मी: बेड के साथ लगी क्यूपबोर्ड की ओर इशारा करके। ये इस क्यूपबोर्ड में। अंकल ने बेड के साथ लगी क्यूपबोर्ड से एक कंडोम निकाला। और मेरी मम्मी की ओर बढ़ा कर बोले। लो। मम्मी: अंकल की आँखों में देखकर। मैं इसका क्या करूँ। आप लगाइए। अंकल: यार अब इसको तुम ही लगाओ। कहा था कि इसको तुम ही लगाओगी। मम्मी: मुस्कुरा कर। क्या आप भी ना योगेश जी। लगा लीजिए ना। अंकल मुस्कुराकर मेरी मम्मी की आँखों में देखते हुए मेरी मम्मी के हाथों में देते हुए बोले। यार अब इसको तुम ही लगाओगी। मेरी मम्मी ने अंकल के हाथ से कंडोम ले कर मुस्कुरा कर उस कंडोम के पैकेट को फाड़ते हुए कहा। आप भी बड़े जिद्दी हैं। और कंडोम को अपने यार के लंड पर चढ़ाने लगीं। अब अंकल का लंड मेरी मम्मी की चूत का फिर से कब्जा करने को एकदम से तैयार था।
6 hours ago
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मेरी मम्मी की चूत बहुत बहुत ही गीली हो चुकी थी। और अंकल के लंड पर कंडोम चढ़ा होने से वो भी चिकना था। और मेरी मम्मी ने अपने यार योगेश अंकल का लंड पकड़ कर अपनी चूत पर लगाया। वैसे ही अंकल ने एक जोरदार धक्का मारा। और उनका लंड मेरी मम्मी की चूत को चीरता मेरी मम्मी की नाजुक चूत के अंदर घुस गया। मेरी मम्मी के मुँह से हल्की सी आह निकली। और मेरी मम्मी ने अपने हाथों को अपने यार की कमर में बाँध कर कसते हुए अपने बदन पर कस लिया। आह... योगेश जी कितना अंदर तक जाता है आपका। उई माँ। मम्मी: योगेश जी मुझे तो लगता है आपका इतना बड़ा मैं ले नहीं सकूँगी। अंकल मेरी मम्मी के ऊपर चढ़े अपनी कमर को हिला रहे थे। अंकल अपनी कमर हिला कर झटके के साथ धक्का मारते हुए मेरी मम्मी से बोले। अंकल: वर्षा मेरी जान। मेरी मम्मी भी मस्ती से नीचे से अपनी गाँड उठा उठा कर अपने यार का लंड अपनी चूत में ले रही थीं। जिससे अंकल ने अपना लंड मेरी मम्मी की चूत के अंदर बाहर करना जारी रखा। मेरी मम्मी अपने यार के लंड से अपनी चूत चुदवा कर बेहाल हो रही थीं। और बड़बड़ा रही थीं। मेरी मम्मी: आह... योगेश जी जोर से। हाँ योगेश जी जोर जोर से धक्का लगाइए। और जोर से चोदिए अपनी रखैल की चूत को। मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। ओह और जोर से चोदो मुझे। आह... योगेश जी और जोर से करो। आह... और अंदर जोर से। ओह डियर ओह उफ आह आह उई आह उम्मा आह ओह। और नीचे से मेरी मम्मी अपनी गाँड उछाल रही थीं। अंकल जैसे ही अपना लंड मेरी मम्मी की चूत के बाहर निकालते। मेरी मम्मी नीचे से अपनी गाँड उछाल कर उनका लंड फिर से अपनी चूत में ले लेतीं। थोड़ी देर तक जोर जोर धक्कों से अपनी जवान रखैल की चूत चोदने के बाद अंकल ने अपने धक्कों की रफ्तार अचानक धीमी कर दी। और मेरी मम्मी की चुचियों को फिर से अपने हाथों में पकड़ कर मेरी मम्मी से पूछा। अंकल: वर्षा कैसा लग रहा है अपने इस यार का लंड अपनी चूत में पिलवा कर। तब मेरी मम्मी भी अपनी कमर उठा उठा कर चूत में लंड की चोट लेती हुई बोलीं। मेरी मम्मी: आपसे चूत चुदवा कर मैं और मेरी चूत दोनों का हाल ही बेहाल हो गया है। आप चूत चोदने में बहुत एक्सपर्ट हैं। बड़ा मजा आ रहा है मुझे डियर। ओह आप बहुत अच्छी तरह चोदते हैं। आह उह। ओफ योगेश जी आप बहुत ही एक्सपर्ट हैं। और आपको औरतों की चूत चोद कर औरतों को सुख देना बहुत अच्छे तरह से आता है। मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। ही चोदो मुझे। आप बहुत अच्छे हो। बस यूँ ही चुदाई करो मेरी। ओह खूब चोदो मुझे। तभी अंकल ने अपने धक्कों की रफ्तार बढ़ा दी। अब अंकल का लंड मेरी मम्मी की चूत में गचा गच अंदर बाहर आ जा रहा था। अंकल मेरी मम्मी की चूत में लंड पेलते बड़बड़ा रहे थे। ले मेरे जान आह... मैं आ रहा हूँ। और धक्का धक्के मेरी मम्मी की चूत में अपना लंड पेल रहे थे। मेरी मम्मी की चूत में लंड पेलते उनकी आँखें मस्ती में बंद थीं। और उनके मुँह से बस यही आह... वर्षा मेरी जान मेरी रानी आह... और इतना बोलते ही उनके लंड से एक पिचकारी निकली। और मेरी मम्मी की चूत अंकल के लंड के वीर्य से फिर से भर जाती। लेकिन कंडोम पहना हुआ था। और इस दौरान अंकल के चोदने से मम्मी 2 बार झड़ गई थीं। अंकल कुछ देर मेरी मम्मी के ऊपर लेटे रहने के बाद वो मेरी मम्मी से अलग हुए। अंकल और मेरी मम्मी दोनों के बदन इस समय पसीने से लथपथ थे। मेरी मम्मी कुछ देर उनके साथ इसी तरह लेटने के बाद उठीं। तो अंकल ने मेरी मम्मी को इशारा किया। मेरी मम्मी मुस्कुराते हुए आगे बढ़ीं। और उनके लंड पर चढ़े कंडोम को उतारने लगीं। जब मेरी मम्मी ने उनके लंड पर चढ़े कंडोम को उतार कर देखा तो मेरी मम्मी हैरान हो गईं। और बोलीं। आपका देखो कितना निकला है। और कल रात को तो मैंने आई पिल भी नहीं ली थी। तो पता नहीं आपने पूरी रात में मेरी चूत में कितना वीर्य भरा होगा। कहीं मैं प्रेग्नेंट तो नहीं हो जाऊँगी। अंकल: वर्षा इतना क्यों डर रही हो। मम्मी: डरूँ नहीं तो क्या करूँ। देखो आपका कितना निकला है एक बार में ही। अंकल: वर्षा ये सब तुम्हारे हुस्न का कमाल है। मम्मी: लेकिन पिछले 6 महीनों में तो इतना नहीं निकला। अंकल: लेकिन कल से तेरे साथ सुहागरात मनाई है। तब से कुछ ज्यादा ही एनर्जी मिली है तेरे बदन से। मम्मी अपनी तारीफ सुनकर मन में बड़ी खुश होती हैं। जो उनकी मुस्कान से पता चलता है। मम्मी: कहीं मैं प्रेग्नेंट हो गई तो। अंकल: अच्छी बात है। अंकुश को एक भाई बहन मिल जाएगी। मम्मी: नहीं बाबा नहीं। मेरा नामर्द पति बोलेगा। मैंने तुझे चोदा नहीं तो तू कैसे प्रेग्नेंट हुई। वो मुझे घर से निकाल देगा। अंकल: तो अंकुश से बोल दूँगा। वो क्या चाहता है। मम्मी: उसका क्या है। वो तो कह देगा। प्रेग्नेंट कर दो मम्मी को। अंकल: ठीक है मेरी जान। अब तू ही बता क्या करूँ। मम्मी: मेरा अबॉर्शन करवा देना। अंकल: हाँ करवा दूँगा। और मेरी मम्मी को पकड़ कर अपने बदन से चिपका लिया। और प्यार से मेरी मम्मी के बालों में अपनी उँगलियाँ चलाने लगे। मम्मी: अब सोते हैं। अंकल: नहीं। अभी तो पूरी रात चोदना है। सोने के लिए दिन। और चुदाई के लिए रात। मम्मी: आप भी। और फिर दोनों फिर से तैयार हो गए चुदाई के लिए। लेकिन मुझे नींद आ रही थी। तो मैंने टाइम देखा। रात के 12 बज गए थे। तो मैं चुपचाप से अपने घर आकर सो गया। और नेक्स्ट डे शाम को 6 pm पे अंकल के घर गया। तो हॉल में कोई नहीं था। मैं अंकल के रूम की विंडो पे गया। तो वहाँ दोनों चुदाई कर रहे थे। और एक घंटा बाद दोनों शांत हुए। फिर मम्मी ने अंकल से कहा। मम्मी: अब छोड़िए। मुझे रात के लिए खाना भी बनाना है। अंकल: डार्लिंग आज रात कहीं बाहर डिनर करने चलें। मम्मी: जैसे आपकी इच्छा योगेश जी। अंकल: तो फिर ठीक है। आज हम बाहर ही डिनर करेंगे। और हाँ का डिनर तुम्हारी तरफ से। मम्मी ने भी मुस्कुराते हुए जी। अंकल: डार्लिंग फिर किसी अच्छे से रेस्टोरेंट में एक टेबल तो बुक करवा दो। फिर कहीं ऐसा न हो हम डिनर के लिए। और हमें जगह ही न मिले। मम्मी: बताइए कहाँ चलना है। अंकल: डार्लिंग आज तो हम वहीं चलेंगे जहाँ तुम ले जाओगी। आज हम आपके हुक्म के गुलाम हैं। मम्मी: अंकुश को भी साथ ले चलते हैं। अंकल: नहीं उसे नहीं। नहीं तो तुम एन्जॉय नहीं करोगी उसके सामने। मम्मी: वो मेरा बेटा है। मैं उसे साथ लेकर चलूँगी। और एन्जॉय करने के लिए रूम है। और ये मत भूलिए। मैं आज आपके नीचे उसी की वजह से लेटी हूँ। नहीं तो आपको हाथ भी नहीं लगाने देती। मम्मी का पारा देखकर अंकल कुछ नहीं बोले। चुप रहे। मम्मी ने मोबाइल उठाया। अंकल: किसे कॉल कर रही हो। मम्मी: मेरे लाल को। मेरे कलेजे के टुकड़े को। जो घर में अकेला है। और उसने मुझे चुदने के लिए आपके पास छोड़ रखा है। उसे कॉल कर रही हूँ मैं। तो मैं वहाँ से हटा। क्योंकि मम्मी का कॉल आने वाला था। कॉल आया। मैं: मम्मी कैसी हो। मम्मी: मैं ठीक हूँ बेटा। तू कैसा है। मैं: मैं भी ठीक हूँ मम्मी। मम्मी: मैं जानती हूँ तू ठीक नहीं है। तू झूठ बोल रहा है। मुझे यहाँ भेज दिया। और खुद अकेला है। बेटा मैंने तुझे ये बताने के लिए कॉल किया है। तू जल्दी से रेडी हो जा। रेस्टोरेंट चलेंगे। मैं: नहीं मम्मी। सॉरी। मैं आज दोस्त की बर्थडे पार्टी में जा रहा हूँ। मम्मी: बेटा ठीक है। फिर मैं रेस्टोरेंट नहीं जाऊँगी। मैं: मम्मी प्लीज आप जाइए। आपको मेरी कसम। मम्मी: तू हर बात पे कसम क्यों देता है। मैं: मम्मी मैं जानता हूँ आप नहीं जाएँगी। इसलिए कसम दी। मम्मी: ठीक है। अब तूने कसम दी है तो जाऊँगी योगेश जी के साथ। फिर कॉल कट हो गया। मम्मी: देखा। उसने मुझे कसम देकर खुद आपके साथ भेज रहा है। और वो खुद नहीं जा रहा है। मैं जानती हूँ वो किसी दोस्त की बर्थडे पार्टी में नहीं जा रहा है। उसने झूठ बोला है। फिर मम्मी ने अंकल के मोबाइल से नंबर ले कर शहर के एक बहुत ही बढ़िया रेस्टोरेंट में टेबल बुक करने के फोन किया। मेरी मम्मी: हेलो। देखिए मुझे आपके रेस्टोरेंट में एक टेबल बुक करनी है। रिसेप्शनिस्ट: जी मैडम। बोलिए किसके नाम से। मेरी मम्मी: जी मिस्टर योगेश जी के नाम से। रिसेप्शनिस्ट: जी मैडम। बाय द वे आप कौन बोल रही हैं। मेरी मम्मी: पहली बार अपने यार के सामने किसी को मम्मी को उनकी रखैल कहने में शर्म महसूस हो रही थी। क्योंकि वो ये तो नहीं कह सकतीं कि मैं उनकी रखैल हूँ। इसलिए मम्मी ने कुछ सोचा। फिर मेरी मम्मी ने शर्माते हुए कहा। जी मैं उनकी मिसेज बोल रही हूँ। और जब मेरी मम्मी ये बोल रही थीं कि मैं उनकी मिसेज बोल रही हूँ। मम्मी ने अपने यार की ओर देखा। तो मुस्कुरा रहे थे। क्योंकि मम्मी उनकी वाइफ नहीं थीं। फिर भी उन्होंने अपने आप को वाइफ बोला। लेकिन बोलना भी जरूरी था। ते तो नहीं बोलतीं मैं रखैल हूँ। रिसेप्शनिस्ट: तो फिर अगर आप बुरा न मानें तो एक बात पूछ सकता हूँ। मम्मी: जी पूछिए। रिसेप्शनिस्ट: मैडम कोई स्पेशल ऑकेजन है क्या। अगर है तो हम अपने कस्टमर के लिए बढ़िया अरेंजमेंट करते हैं। अब मेरी मम्मी उस रिसेप्शनिस्ट की बात का क्या जवाब देतीं। आखिर मम्मी को झूठ ही कहना ही पड़ा। जी हमारी न्यूली मैरिज हुई है। और हम आज इस टाइम बाहर डिनर पर जा रहे हैं। रिसेप्शनिस्ट: कंग्रेचुलेशन मैम। आपका हमारे रेस्टोरेंट में स्वागत है। हम आपके इस डिनर को यादगार बनाने की पूरी कोशिश करेंगे। मेरी मम्मी अंकल के ऊपर से उठीं। और उठ कर अपने कपड़े पहनने लगीं। लेकिन मम्मी से पहले ही अंकल ने कपड़े पहन लिए। मम्मी अंकल को देखती रहीं। फिर मम्मी ने सबसे पहले अपनी ब्रा उठाई। और पहनने लगीं। ब्रा के बाद मम्मी ने पैंटी उठाई। मम्मी फिर मम्मी ने पेटीकोट पहना। फिर ब्लाउज। और लास्ट में साड़ी पहनने लगीं। तो अंकल ने रोक दिया। बोले। नहीं। घर में कौन देख रहा है। तो मम्मी ने साड़ी नहीं पहनी। फिर मम्मी शाम का बड़ी बेसब्री से इंतजार करने लगीं। क्योंकि आज पहली बार मेरी मम्मी अपने यार के साथ उनकी बीवी का रोल प्ले करते हुए उनकी बीवी की हैसियत से घर से बाहर डिनर पर जा रही थीं। लेकिन। मम्मी को कुछ डर लगा। तो मम्मी ने अंकल से कहा। कहीं किसी ने देख लिया तो। अंकल: तुम बहुत डरती हो। कोई नहीं देखेगा। बोल देंगे अंकुश साथ गया था। फिर शाम को मम्मी बाथरूम में गईं। और फिर अंकल भी। मैंने नहीं देखा। लेकिन जब दोनों बाहर आए तो दोनों एकदम न्यूड थे। मम्मी ने कहा। मैं क्या पहनूँ। तो अंकल ने कहा। ये ग्रीन साड़ी तुम पर अच्छी लगेगी। फिर दोनों ने एक दूसरे को कपड़े पहनाए। मम्मी तो आज कयामत ढा रही थीं। फिर दोनों साथ में डिनर के लिए घर से निकलने लगे। तो मैं पहले से ही गाड़ी में जाकर बैठ गया। क्योंकि मैंने अंकल से पहले ही बात कर ली थी। मैं चुपके से उनके साथ जाऊँगा। और... सच कहूँ उनकी जोड़ी एकदम परफेक्ट लग रही थी। रेस्टोरेंट पहुँचे। लेकिन मम्मी के बूब्स को अंकल ड्राइव करते समय बार बार प्रेस कर रहे थे। लेकिन मम्मी को नहीं पता था मैं पीछे वाली सीट पे बैठा हुआ हूँ। क्योंकि गाड़ी में पर्दे लगे थे।
3 hours ago
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गाड़ी से उतरकर मम्मी अंकल रेस्टोरेंट में गए। और फिर उनके पीछे पीछे मैं भी गया। मैंने अपने फेस पे मास्क लगा लिया ताकि मम्मी मुझे पहचान न सकें। मैं चुपके से उनको देख रहा था। रेस्टोरेंट में मम्मी अंकल के लिए एक खास ही टेबल बुक की हुई थी। ये स्पेशली न्यूली वेडिंग कपल्स के लिए एक प्राइवेट केबिन। जिसमें वेटर बिना परमिशन के अंदर नहीं आ सकता था। सच कहूँ तो आज पहली बार मम्मी का अंकल के साथ बाहर खाने पे आने पर मम्मी को ये एहसास हो रहा था जैसे कि वो किसी दूसरी दुनिया में आ गई हों। बिल्कुल महारानी की तरह। ऐसा मम्मी के चेहरे से लग रहा था। सच में बहुत ही रोमांटिक माहौल था रेस्टोरेंट में। उस केबिन में मेरी मम्मी और अंकल अकेले थे। रोमांटिक माहौल का असर मेरी मम्मी पर भी होने लगा था। मम्मी ने मेन्यू कार्ड उठा कर अपने यार की ओर बढ़ा कर कहा। लीजिए आप क्या लेंगे। अंकल: डार्लिंग मुझे तो सिर्फ तुम्हारी ही लेनी है। अंकल की बात मेरी मम्मी समझ गईं कि वो उनकी चूत लेने की बात कर रहे हैं। मेरी मम्मी ने मुस्कुराते हुए कहा। क्या योगेश जी आप भी ना। मैं इस समय खाने की बात कर रही हूँ। अंकल: सरकार हम तो आपके गुलाम हैं। हम तो आपके साथ आए हैं। आज तो आप जो खिलाओगी वही हम खा लेंगे। मेरी मम्मी समझ गईं कि अंकल जी कुछ नहीं कहेंगे। और वो इसी तरह रोमांटिक होते रहेंगे। तो मम्मी ने खाने का ऑर्डर दिया। तो कुछ ही देर में वेटर खाना लगा कर चला गया। एक बात थी अंकल से रिलेशनशिप में मेरी मम्मी बहुत खिलती जा रही थीं। पहले वो मुरझाई हुई रहती थीं। अब मेरी मम्मी के यौवन में रात दिन निखार आ रहा था। पहले मम्मी 33 की उम्र में 50 की लगती थीं। लेकिन जब से अंकल के लंड से चुदने लगी हैं 33 की उम्र में 25 की लगती हैं। कोई नहीं कह सकता है वो मेरी मम्मी हैं। और मुझसे 14 साल बड़ी हैं। कोई भी देखेगा यही कहेगा मेरी बड़ी बहन हैं। और मुझसे सिर्फ 5 साल बड़ी हैं। और अंकल मम्मी से बहुत प्यार करते हैं। मम्मी अंकल का प्यार पाकर बहुत खुश हैं। मम्मी और अंकल के प्यार को कैसे 6 महीने बीत गए पता ही नहीं चला। मेरी मम्मी दिन पे दिन अंकल के प्यार में खिंचती जा रही थीं। अंकल ने हमेशा मेरी मम्मी का ख्याल रखा। मैंने अंकल से एक बार कहा मम्मी को प्रेग्नेंट कर दो। तो अंकल ने खुद कहा। नहीं बेटा। उससे तेरी मम्मी को प्रॉब्लम हो जाएगी। कितनी फिकर करते हैं मेरी मम्मी की। मेरी मम्मी की हर छोटी सी छोटी खुशी का ख्याल रखते हैं। तो मैंने भी सोचा इन दोनों को एन्जॉय करने दो। तो मैं वहाँ से वापस चला आया बिना रोमांस देखे। और घर आकर सो गया। और फिर अगले दिन मैं उनके घर गया। तो देखा मम्मी अंकल दोनों नहीं हैं। फिर मैंने अंकल को कॉल किया। तो अंकल ने कहा। बेटा बाहर मार्केट आया था तेरी मम्मी को लेकर। अभी कुछ देर में घर पहुँच जाऊँगा। कुछ काम था। मैं: जी अंकल। मम्मी से मिलना था। अंकल: बेटा कल दिन में मिल लेना। अभी घर पहुँच कर तेरी मम्मी को चोदना है। मैं: ओके अंकल। फिर कॉल डिस्कनेक्ट हुआ। तो मैं वहीं छुप गया। थोड़ी देर बाद घर का गेट खुला। मम्मी अंकल दोनों आए। और दोनों जैसे ही घर आए मम्मी रूम में आते ही अंकल से बोलीं। मम्मी: योगेश जी आज बहुत थक गई हूँ। तो अंकल मेरी मम्मी के पीछे से मेरी मम्मी को अपनी बाँहों में भरते हुए बोले। सरकार इस गुलाम को हुक्म दीजिए। अगर तुम कहो तो पैर दबा दूँ। मम्मी: बस बस। बातें बनाना कोई आप से सीखे। किसी को अपने वश में कैसे किया जाता है ये आप अच्छे से जानते हैं। अंकल: क्या डियर। तुम्हें लगता है मैं बातें बना रहा हूँ। सरकार सच में हम आपके गुलाम। आप चाहो तो कोरे कागज पर लिखवा लो। और अंकल मेरी मम्मी के पीछे खड़े मेरी मम्मी को अपनी बाँहों में कस लिया। और मेरी मम्मी की गर्दन पर किस करने लगे। वो अच्छे से जानते हैं इस तरह से मेरी मम्मी बहुत जल्दी से गरम हो जाती हैं। और खुद ही उनका साथ देने को मजबूर हो जाती हैं। मेरी मम्मी की साँसें भारी होने लगीं। तो मेरी मम्मी ने कहा। मम्मी: योगेश जी छोड़िए ना। चेंज तो करने दीजिए। अंकल: यार चेंज करके क्या करोगी। अभी कुछ देर में उसको भी तो उतारना ही पड़ेगा। मेरी मम्मी: फिर भी योगेश जी। ये साड़ी तो नई। खराब हो जाएगी। मैं दूसरी पहन लेती हूँ। अंकल: ठीक। पर जान आज तुम वो नाइटी पहनो ना। मेरी मम्मी मुस्कुराने लगीं। शायद मम्मी समझ गई होंगी अंकल कौन सी नाइटी की बात कर रहे हैं। क्योंकि मम्मी के चेहरे से पता चल रहा है। लेकिन फिर भी मम्मी अनजान बनते हुए बोलीं। मम्मी: कौन सी नाइटी मेरे राजा। अंकल: वही व्हाइट वाली। मम्मी: शर्मा कर। धत्त। मुझे शर्म आती है। वो नाइटी ही सिर्फ एक नेट की है। जिसको पहन कर बदन का हर हिस्सा साफ दिखाई देता है। अंकल: यार अब हम में शर्म क्या काम। प्लीज एक बार पहन कर दिखाओ ना। मम्मी: शर्म से अपनी आँखें नीचे किए ना में अपना सिर हिलाने लगीं। अंकल: जान तुम्हें मेरी कसम। तो मेरी मम्मी इनकार नहीं कर सकीं। तो अलमारी से वो नाइटी निकाल कर बाथरूम की ओर जाने लगीं। तो अंकल बोले। अंकल: कहाँ जा रही हो। मम्मी: बाथरूम में चेंज करके आती हूँ। अंकल: यहीं कर लो। यहाँ दूसरा कौन है। मम्मी: मैं इतनी भी बेशर्म नहीं हूँ। और मेरी मम्मी मुस्कुराने लगीं। अंकल: डार्लिंग नहीं तो मैं बना दूँगा। और अंकल के साथ मम्मी भी हँसने लगीं। और साथ ही वो नाइटी ले कर बाथरूम में घुस गईं। फिर मैं भी अंकल की बाथरूम की विंडो पे गया। और स्टूल पे चढ़ कर अंदर देखने लगा। मम्मी ने अपने बदन से साड़ी पेटीकोट ब्लाउज उतारा। और फिर मुस्कुराते हुए ब्रा पैंटी भी उतार दी। और वो नाइटी पहनने लगीं। और खुद ही देख कर शर्म से पानी पानी हो गईं। क्योंकि वो नाइटी पहन कर ऐसा लग रहा था कि मानो कुछ पहना ही न हो। सब कुछ साफ साफ दिख रहा था। मेरी साँसें यहीं सोच कर कि अब मेरी मम्मी बाहर कैसे अपने यार के सामने जाएँगी। क्योंकि मम्मी ने आज से पहले उनके सामने इस तरह की ड्रेस नहीं पहनी थी। और अंकल मेरी मम्मी को इस नाइटी में देख कर उनकी क्या हालत होगी ये मैं अच्छे से जानता था। क्योंकि जब भी अंकल को मौका मिलता है वो मेरी मम्मी को अपने से चिपका लेते हैं। और आज मेरी मम्मी को इस नाइटी में देखकर उनका जोश तो पता नहीं आज क्या हाल करेंगे मेरी मम्मी का। उस बात का अंदाजा हालाँकि मम्मी को हो रहा था। क्योंकि वो मंद मंद मुस्कुरा रही थीं। वैसे तो मेरी मम्मी पिछले 6 महीनों में अनगिनत बार नंगी हुई हैं अंकल के सामने। पर आज इस नाइटी में बात ही कुछ अलग है। क्योंकि मम्मी शर्मा भी रही थीं। एक औरत कितना भी चुदवा ले लेकिन औरत की शर्म कभी नहीं जाती है। यही तो संस्कार है एक औरत के। उसका सबसे बड़ा गहना शर्म ही होती है। चुदते समय एक वेश्या। और चुदने से पहले और चुदने के बाद शर्माकर संस्कारी सतीसावित्री बनना औरत की आदत होती है। फिर मम्मी ने शर्माते हुए बाथरूम का गेट खोला। तो मैं तुरंत रूम की विंडो पे गया। मैंने देखा मम्मी शर्माते हुए बाथरूम से निकल रही हैं। अंकल मम्मी को देखकर अपनी आँखें झपकाना भूल जाते हैं। जैसे उन्होंने मम्मी को पहली बार देखा हो। मम्मी अंकल को इस तरह अपने बदन को घूरते देख कर। मम्मी: योगेश जी ऐसा क्या देख रहे हैं। मुझे शर्म आती है। अंकल जो मेरी मम्मी के इस रूप को देख कर उनके मुँह से तो जैसे शब्द ही नहीं निकल रहे थे। बोले। वर्षा सच कहूँ ऐसा लग रहा है जैसे कोई स्वर्ग की अप्सरा धरती पर बिजलियाँ गिराने आई हो। मेरी मम्मी ने शर्म से अपना मुँह घुमा लिया। और बोलीं। क्या आप भी ना योगेश जी। मुझे शर्म आती है। लाइट तो बंद कर दीजिए। लेकिन अंकल उठे। और मेरी मम्मी को पीछे से उठा कर बेड पर ले गए। और फिर कब मेरी मम्मी के बदन से नाइटी उतर गई मुझे पता ही नहीं चला। और फिर मेरी मम्मी और अंकल के दोनों के दो बदन से एक बदन हो गए। सारी रात चुदाई के कितने राउंड चले मुझे भी नहीं पता चला। मैं लगातार देख रहा था। सुबह के 5 बज गए। मुझे नींद आ रही थी। दोस्तों मैं यहाँ चुदाई नहीं लिख रहा हूँ। मेरी मम्मी अपने यार के प्यार में उड़ती चली जा रही थीं। मेरी मम्मी के तन के साथ अब मेरी मम्मी का मन भी उनको अपने पति के रूप में स्वीकारने लगा था। मेरी मम्मी तो उनकी मर्दानगी की कायल उनकी दीवानी होती जा रही थीं। हालाँकि मम्मी अंकल की शादी नहीं हुई थी। फिर भी अंकल पति धर्म निभा रहे थे। उनकी चुदाई करके। जो मेरा नामर्द बाप नहीं कर पाता है।
3 hours ago
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मम्मी और अंकल की हर रात रंगीन हो रही थी। पापा दादी को गए 4 दिन हो गए थे। अब उनका वापस आने का टाइम भी हो रहा था। वो एक दो दिन में आने वाले थे। मम्मी पिछले 4 दिन से अंकल के ही घर में थीं। अंकल मम्मी को बिस्तर पे आते ही नंगी कर देते थे। और मेरी मम्मी के संगमरमर बदन को अपने बदन से चिपका लेते थे। एक बार अंकल मम्मी को नंगी करते थे तो पूरी रात भर नंगी रखकर चोदते थे। और नंगी ही मम्मी को अपने बदन से चिपकाकर सुलाते थे। और घर के अंदर मम्मी को नंगी ही रखते थे। बस बाहर शॉपिंग के लिए लेकर जाते तब मम्मी के बदन पे कपड़े होते थे। मैं मम्मी की पूरी रात भर से चुदाई देख रहा था। सुबह 5 से ज्यादा हो गया था। दोनों थक कर लेटे हुए थे एक दूसरे से चिपक कर। और मम्मी लेटे हुए ही अंकल का लंड सहला रही थीं। और अंकल के पेट पे भी हाथ फेर रही थीं। मम्मी की साड़ी ब्लाउज पेटीकोट पैंटी ब्रा जमीन पर पड़े थे। और अंकल के कपड़े भी। मेरी मम्मी और अंकल नंगे एक दूसरे से लिपटे। टाँगों में टाँगें फँसाए सो रहे थे। कि तभी डोरबेल की आवाज सुनाई दी। मैंने टाइम देखा तो 6 am हो गया था। उस समय शायद मम्मी को भी नींद आ रही थी। लेकिन फिर भी मम्मी अंकल का लंड सहला रही थीं। और अंकल सो तो नहीं रहे थे। लेकिन शायद थकान की वजह से लेटे हुए थे। मम्मी ने अंकल से कहा। मम्मी: योगेश जी बाहर दूध वाला होगा। आप जा कर दूध ले लीजिए। तो अंकल लेटे हुए ही। अंकल मेरी मम्मी की गोरी चिकनी कड़क चुचियों को अपने हाथों में दबाकर फिर अपने मुँह में लेकर चूसते हुए बोले। अंकल: मेरी जान मेरे पास तो दूध ही है। इससे बढ़िया दूध और कहाँ मिलेगा। मेरी मम्मी अंकल से अलग होते बोलीं। मम्मी: आप भी। जब देखो आपको बस यही काम रहता है। और मुस्कुराते बेड से उठीं। और अपने कपड़े ढूँढते बोलीं। कितनी बार कहा है कपड़े पहन कर सोने दीजिए। लेकिन नहीं। नंगी ही सुलाएँगे साथ में। अब सुबह उठ कर इतने कपड़े पहनो। तब तक वो बाहर खड़ा चिल्ला चिल्ला कर पूरा मोहल्ला खड़ा कर देगा। मेरी मम्मी वहाँ पड़ी अपना ब्लाउज और पेटीकोट उठा कर पहन लिया। और बाहर दूध लेने चली गईं। और मम्मी ब्लाउज पेटीकोट में थीं। इसलिए मम्मी ने गेट को थोड़ा सा खोला। और बर्तन बाहर कर दिया। और खुद गेट के पीछे हो गईं। ताकि दूध वाला मम्मी को न देख सके। दूध वाला: आप कौन हो इस घर में। मैंने कभी किसी औरत को नहीं देखा। क्योंकि मम्मी ने सिर्फ हाथ बाहर निकाला था। और मम्मी के हाथों में चूड़ियाँ थीं। मम्मी चुप रहीं। दूध वाला: बताइए आप कौन। यहाँ तो योगेश भाई साहब अकेले रहते हैं। मम्मी: मैं उनकी रिलेटिव हूँ। दूध वाला: तो आप ऐसे छुप क्यों रही हैं गेट के पीछे। मम्मी: आप दूध दीजिए जल्दी। दूध वाला: वो मैं दे रहा हूँ। पर आप छुप क्यों रही हैं। मम्मी: वो मैं अभी नाइटी में हूँ। इसलिए। और आप दूध दीजिए जल्दी। दूध वाला दूध दे देता है। तो मम्मी तुरंत बर्तन को अंदर ले लेती हैं। और गेट को बंद कर देती हैं। और दूध लेकर किचन में रख आती हैं। और फिर वापस बेडरूम में आ गईं। और अपने बालों को बाँधते हुए सो रहे अंकल की ओर देखा। जो अभी भी नींद में थे। उनका लंड मुरझाया हुआ था। तो उसको देख कर मेरी मम्मी के होठों पर एक स्माइल आ गई। और मुस्कुराते बेड की ओर चलतीं। अपने हाथ को उनके लंड को अपने कोमल हाथ में ले कर सहलाती बोलीं। देखो अब कैसे आराम से सो रहा है। और रात भर कैसे मेरा बाजा बजाता है। मेरी मम्मी का हाथ लगाते ही अंकल का लंड जो अभी तक उनकी टाँगों के बीच आराम फरमा रहा। एकदम फुंकार मारता उठ खड़ा हुआ। मेरी मम्मी अभी भी अंकल के लंड महाराज से खेल रही थीं। पूरी रात चुदने के बाद भी आज मम्मी की प्यास नहीं बुझी थी। ऐसा लग रहा था। अंकल मेरी मम्मी को बाँहों से पकड़कर अपने ऊपर खींच लेते हैं। और मम्मी को बाँहों में भर लेते हैं। मेरी मम्मी: क्या योगेश जी। सुबह सुबह आप फिर से शुरू हो गए। लगता है आप पागल हो गए हैं। अंकल: डार्लिंग तुम्हारे प्यार ने मुझे पागल बना दिया है। आओ ना। प्यार करने दो ना। मेरी मम्मी: क्या योगेश जी। पूरी रात भर आप प्यार करते रहे। दिल नहीं भरा क्या। अंकल: रात भर मेरी जान। अगर मेरा बस चले तो रात क्या जिंदगी भर तुम्हें प्यार करता रहूँ। एक पल के लिए तुझे अपने से दूर होने न दूँ। मेरी मम्मी: मुस्कुरा कर। छोड़िए ना। अब जो करना है रात में कीजिएगा। अंकल: यार प्यार करने के लिए रात क्या दिन क्या। और मेरी मम्मी के ब्लाउज के हुक खोलने लगे। तो मेरी मम्मी बोलीं। हाय आप तो शुरू हो गए। छोड़िए। बाहर का दरवाजा खुला है। और वो लड़की आती होगी जो आपने 3 दिन पहले बुलाई थी। और मेरी मम्मी अंकल की बाँहों से निकल कर दूर जा खड़ी हुईं। तो अंकल मेरी मम्मी के सामने अपने खड़े लंड को सहलाते। यार क्यों इतना जुल्म कर रही हो। तो जवाब में मेरी मम्मी उनकी ओर देख मुस्कुराते उनको अंगूठा दिखाती बोलीं। जब से मैंने इसको देखा है ये तो हमेशा ही खड़ा रहता है। अब इसको समझा दीजिए। अब इसको कुछ मिलने वाला नहीं। जो कुछ भी मिलेगा वो रात को ही। समझे जनाब। अंकल: जो हुक्म रानी साहिबा। हमारी क्या मजाल जो रानी साहिबा के हुक्म की अवहेलना करे। और फिर से सोने लगे। तो मेरी मम्मी भी मुस्कुराती बेडरूम में बिखरे कपड़े समेटने लगीं। और वहाँ एक साइड में यूज्ड कंडोम जिनमें अंकल का वीर्य भरा हुआ था। उसको उठा कर बाहर फेंक दिया। अंकल तब तक फिर से सो चुके थे। और मेरी मम्मी अपने कपड़े ले कर बाथरूम में फ्रेश होने के लिए चली गईं। मेरी मम्मी नहा कर बाथरूम से बाहर आईं। उस समय मेरी मम्मी के बदन पर सिर्फ ब्लैक कलर की ब्रा और ब्लैक कलर की मैचिंग पैंटी थी। ब्रा में मेरी मम्मी की चुचियाँ आधी से ज्यादा बाहर निकली हुई थीं। मेरी मम्मी अपनी चुचियों को ब्रा के कप में अच्छे से एडजस्ट करती हुई आईने के सामने खड़ी हो कर खुद को निहारने लगीं। सच में अंकल के साथ रिलेशनशिप में मेरी मम्मी की चुचियाँ 6 महीनों में काफी बड़ी हो गई थीं। और फिर आईने में देख कर मुस्कुरातीं। आईने के सामने खड़ी अपनी चुचियों को अपने हाथ से मसलती बोलीं। बढ़ेंगे नहीं क्या। सारी रात इन से खेलते रहते हैं। और चूसते रहते हैं। और आईने में खुद की बॉडी को निहारने लगीं। तो मेरी मम्मी का हाथ उनके ही चूतड़ों पर चला गया। वो भी पहले के मुकाबले में काफी बढ़ गए थे। मेरी मम्मी अपने बदन को निहार ही रही थीं। कि तभी अंकल जो बेड पर लेटे हुए थे। उठ कर मेरी मम्मी के पीछे आ खड़े हुए। उनको अपने पीछे खड़ा देख मेरी मम्मी अपनी हरकतों पर शर्मा गईं। और मुँह छुपाते बोलीं। क्या योगेश जी। आपको शर्म नहीं। जो चोरी चोरी ऐसे किसी के पीछे आ कर खड़े हो गए। तो जवाब में अंकल पीछे से मेरी मम्मी की कमर में हाथ डाल कर मेरी मम्मी को अपने से चिपका कर अपने होठों को मेरी मम्मी की नंगी गर्दन पर रख कर चूमने लगे। अपने यार के इस तरह प्यार करने पर कोई भी औरत मदहोश हो सकती है। मेरी मम्मी का भी वही हाल था। मस्ती में मेरी मम्मी की आँखें भी बंद होने लगीं। मेरी मम्मी: ये क्या कर रहे हैं योगेश जी। छोड़िए ना। अंकल: यार सच में तुम बहुत खूबसूरत हो। तुम्हें छोड़ने का नहीं बल्कि प्यार करने का मन करता है। और मेरी मम्मी की गर्दन मेरी मम्मी के गालों को चूमते अपने एक हाथ को मेरी मम्मी की ब्रा में घुसाने की कोशिश करने लगे। मम्मी: नहीं योगेश जी। अंकल: जान चुप रहो। और मम्मी को अपने आगे कर लिया। और अब मम्मी अंकल आमने सामने थे। और अंकल अपने हाथ मम्मी के पीछे ले जाकर मम्मी की ब्रा का हुक खोलने लगे। मेरी मम्मी: प्लीज योगेश जी। आपको पता है ना। आपके इस तरह करने से मैं अपने आप पर कंट्रोल नहीं रख सकती। अंकल: यार तो कौन कमबख्त कहता है कंट्रोल करने को। हम कुछ गलत थोड़े ही कर रहे हैं। हम पति पत्नी नहीं हैं। लेकिन तुम्हारे बेटे ने ही कहा है पति पत्नी की तरह रहो। और मेरी मम्मी को खूब चोदो। और अपने दोनों हाथ पीछे ले जाकर मम्मी की ब्रा का हुक खोल दिया। और एक हाथ मम्मी की पीठ पर फेरते रहे। और दूसरे हाथ से मेरी मम्मी की जाँघों को सहलाने लगे। तो मम्मी बोलीं। बेटे ने ये कहा है मेरी मम्मी की प्यास उनकी ही परमिशन से बुझाना। ना कि जबरदस्ती करना। अंकल: तो मैं क्या जबरदस्ती कर रहा हूँ। मैं तो तुम्हारी ही परमिशन से तुम्हें प्यार कर रहा हूँ। मम्मी: मैंने कब दी परमिशन। अंकल: तुम्हारी परमिशन तो मुझे तुमने ब्रा पैंटी में मेरे सामने आते ही मिल गई। मम्मी: अब रहने दीजिए। नहीं तो तुम्हारे इस तरह करने से मैं कंट्रोल नहीं कर पाऊँगी। और तुम्हारा साथ देने लगूँगी। अंकल: तो दो साथ मेरा। मम्मी: योगेश जी छोड़िए ना। चाय बना कर लाती हूँ। वो लड़की भी आने वाली है। और फिर से अंकल की बाँहों से निकलने लगीं। तो अंकल जोर से मेरी मम्मी के गालों को काट खाया। तो दर्द से चीख पड़ीं। और मेरी मम्मी अंकल की बाँहों से निकल कर दूर खड़ी अपने गालों को सहलाने लगीं। और उनकी ओर देख कर। क्या योगेश जी। सारी रात आप मुझे खाते रहते हैं। तब भी क्या का मन नहीं भरता। और फिर मम्मी ने अंकल के सामने ही अपनी ब्रा का हुक अपने हाथ पीछे ले जाकर लगाया। और अपना ब्लाउज पेटीकोट पहना। और फिर साड़ी पहनने लगीं। मेरी मम्मी अपनी साड़ी पहन कर चाय बनाने के जाने लगीं। तो अंकल ने मेरी मम्मी का हाथ पकड़ लिया। और मेरी मम्मी से पूछने लगे। वर्षा तुमने बताया नहीं कि तुम मुझसे प्यार करती हो या नहीं। अंकल ने जिस अंदाज से मेरी मम्मी से ये पूछा। तो मेरी मम्मी को भी उन पर इतना प्यार आया कि मेरी मम्मी ने अपने दोनों बाँहों का हार उनके गले में दिया। और अपना चेहरा उनके चेहरे के पास ले जा कर उनकी आँखों में आँखें डाल कर बोलीं। बता दूँ कि कितना प्यार करती हूँ मैं आप से। तो अभी आप इतना जान लें कि मैं आपको कभी छोड़ कर नहीं जाऊँगी। अंकल: अच्छा। लेकिन यार ये तो बताओ। डू यू लव मी। अंकल के इस सवाल पर मेरी मम्मी मुस्कुराते बोलीं। योगेश जी अभी आपको इस सवाल के जवाब के इंतजार करना पड़ेगा। और फिर उनसे दूर खड़ी हो कर मुस्कुराने लगीं। अंकल ने फिर से मेरी मम्मी का हाथ पकड़ कर अपनी बाँहों में खींच लिया। और अपने दोनों हाथ मेरी मम्मी की कमर में डाल कर मेरी मम्मी को अपने से चिपका कर मेरी मम्मी की आँखों में देखने लगे। और बोले। वर्षा यार अब तो तुम कम से कम मुझे योगेश जी मत कहा करो। कितने दिन हो गए हैं चुदाई करते हुए। और तुम अभी भी योगेश जी कहती हो। मम्मी: तो क्या कहूँ। अंकल: अंकुश के पापा। मम्मी: क्यों। आप अंकुश के पापा थोड़े हो। अंकल: पापा नहीं हूँ तो क्या। पापा का फर्ज निभा रहा हूँ। उसकी मम्मी की प्यासी चूत को चोदकर। मम्मी: अंकल की आँखों में देखते ही मुस्कुरा कर मम्मी ने उनसे कहा। कोशिश करूँगी। और अब मैं जाऊँ। अंकल: यार तुमने मेरे सवाल का जवाब नहीं दिया। मम्मी: कौन सा सवाल। अंकल: प्यार। मम्मी: मेरी मम्मी अपनी बाँहें फिर से अंकल के गले में डाल कर। बस कुछ देर और। आज आपको आपके सारे सवालों का जवाब मिल जाएगा। अंकल: खुशी से। तो मुझे उस पल का बड़ी बेसब्री से इंतजार रहेगा। अच्छा पहले एक पप्पी दो। मम्मी: अंकल की आँखों में आँखें डाल कर मुस्कुराते हुए कहा। सारी रात करके भी आपका दिल नहीं भरा। तो अंकल बोले। अंकल: मेरी जान तुम चीज ही ऐसी हो। मम्मी: इतना प्यार करते हैं आप मुझे योगेश जी। अंकल: अपनी जान से भी ज्यादा। मम्मी: मैं जानती हूँ। जब तक मैं आपको पप्पी नहीं दूँगी। आप मुझे छोड़ने वाले नहीं हैं। आप बड़े जिद्दी हो। अंकल: तो दो ना। मम्मी: मम्मी अंकल की आँखों में आँखें डाले। अंकल की साँसें मेरी मम्मी की साँसों से टकरा रही थीं। मेरी मम्मी प्यार से उनके गालों को सहलाते हुए। अदा से बोलीं। अब मेरा शोना मेरी पप्पी लिए बिना मानेगा नहीं ना। और अपने होठों को अंकल के होठों पर रख कर उनको चूमने लगीं। तो अंकल कहाँ रुकने वाले थे। उन्होंने अपने होठ मेरी मम्मी के होठों पर रख दिए। और चूमने लगे। और फिर अपने होठ धीरे नीचे की ओर मेरी मम्मी के चुचों पर ले गए। जो दिन पर दिन बड़े होते जा रहे थे। और मेरी मम्मी की चुचियों को चूमने लगे। मेरी मम्मी की साँसें भी गरम होने लगीं। मम्मी ने भी उनको अपनी बाँहों में कस लिया। और उनके बालों में उँगलियाँ फिराने लगीं। और मेरी मम्मी को अंकल के हाथ नीचे की ओर मेरी मम्मी की टाँगों के बीच मेरी मम्मी की चूत को टटोलने लगे। कि तभी दरवाजे पर बेल बजी। दरवाजे पर बेल सुनाई देते ही मम्मी अंकल से अलग हुईं। और मुस्कुराते अपने यार को चिढ़ाती बोलीं। मम्मी: कहाँ था। अभी आपको दूध नहीं मिलेगा। चाय पी लीजिए। लेकिन आप पर हमेशा मेरा दूध पीने का भूत सवार रहता है। वो ही लड़की होगी। जाइए जा कर दरवाजा खोल दीजिए। तब तक मैं चाय बना कर लाती हूँ। और फिर से मुँह कर उनकी ओर देख कर मुस्कुराते बोलीं। और हाँ कुछ पहन कर जाइएगा। कहीं ऐसा न हो बेचारी देख कर ही डर जाए। अंकल: क्या तुम भी डरती हो। मम्मी: मैं क्यों डरूँगी। मुझे तो अब प्यार करता है। अब जाइए जा कर दरवाजा खोलिए। अंकल: यार तुम ही खोल दो ना। बहुत थका हुआ हूँ। बड़ी नींद आ रही है। मम्मी: रात रात भर जनाब शरारत करते रहते हैं। तो अब तो नींद आएगी ही। कितना बोलती हूँ बस कीजिए। लेकिन नहीं। जनाब के सिर पर रोमांस सवार रहता है। आज से आप ज्यादा थके नहीं। इसलिए आज से आपको पूरी रात नहीं। और अदा से ना में मुस्कुराते सिर हिलाने लगीं। मेरी मम्मी की बात सुन कर अंकल। अंकल: यार क्यों इतना जुल्म कर रही हो। कहो तो मैं तुम्हारे पैर पड़ जाऊँ। लेकिन ऐसा जुल्म मत करना इस गुलाम पर। मैं अभी जा कर दरवाजा खोल देता हूँ रानी साहिबा। मम्मी: बीवियों वाले अंदाज में इशारे से। जाइए ना। खोल दीजिए ना। तब तक मैं ये रूम ठीक कर दूँ। तो अंकल वहीं जमीन पर पड़ा अंडरवियर ही उठा कर पहन कर दरवाजा खोलने चले गए। मम्मी अभी अपनी साड़ी ठीक कर ही रही थीं। तो मैंने सोचा अब कुछ नहीं होगा उस लड़की के सामने। और मैं चुपके से अपने घर आ गया। और घर आकर पापा को कॉल किया। तो पापा ने कहा एक वीक के बाद आएँगे। तो मैंने भी अंकल को कॉल करके बता दिया। फिर एक घंटे बाद अंकल का कॉल आया। और बोले। बेटा मेरा और तेरी मम्मी का प्लान है। हम एक वीक कहीं बाहर घूमने जाएँगे। जब तक तेरा बाप न आ जाए। पर तेरी मम्मी तेरी परमिशन चाहती है। वो नखरे करेगी। तू उसे जाने को बोल देना। उसी का प्लान है। पर वो तुझसे कह नहीं सकती। फिर शाम को मम्मी ने मुझे बुलाया फोन करके। जब मैं अंकल के घर गया। तो मम्मी बेड पे लेटी थीं हेलो कलर के सलवार सूट में। गुलाबी। फिर मुझे देखकर खड़ी हुईं। और मुझे गले लगाकर बोलीं। बेटा 4 दिन हो गए हैं। मुझे घर ले चल। मैंने इन 4 दिनों में कैसे बचाया है अपने आप को। नहीं तो मैं... और चुप हो गईं। मैं: मम्मी। आप भी। आपसे कितनी बार कहा है मैंने। आप अंकल का प्रपोजल एक्सेप्ट कर लो। मम्मी: मैंने तुझसे कितनी बार कहा है। नहीं करूँगी। मैं: ओके मम्मी। पर पापा एक वीक के बाद आएँगे। मम्मी: नाटक करते हुए। क्या। अंकल: गुड न्यूज। मैं तेरी मम्मी को अपने फार्महाउस ले जाऊँगा। वहाँ घुमाने। और कंप्यूटर भी सिखा दूँगा। मम्मी: नो। मैं नहीं जाऊँगी। वहाँ आप मुझे कंप्यूटर नहीं बल्कि मेरे साथ जबरदस्ती करोगे। मैं: मम्मी अंकल ने आज तक क्या आपके साथ कुछ गलत किया है। वो जो भी करेंगे आपकी परमिशन से ही करेंगे। मम्मी: बेटा मैं उन्हें परमिशन कभी नहीं दूँगी। मैं: तो मम्मी आप चली जाइए अंकल के साथ। मम्मी: नो बेटा। मैं: मम्मी आपकी मेरी कसम। मम्मी: कसम क्यों देता है बेटा। ठीक है। चली जाऊँगी। मैं: और एक वीक बाद पापा आएँगे। तब तक आप अंकल के साथ रहिएगा। और कंप्यूटर सीखना। और ना ही आप मुझे कॉल करोगी। मम्मी: क्यों बेटा। मैं: मम्मी एक वीक तक आप कॉल नहीं करोगी। जरूरत पड़ने पे मैं ही कॉल करूँगा। मम्मी: ओके बेटा। फिर मैं अपने घर आ गया। और एक वीक के बाद अंकल और मम्मी घर आए अंकल के ही घर। फिर मम्मी अकेली मेरे घर आ गईं। और अंकल की शिकायत करने लगीं। बोलीं। उन्होंने मेरे जबरदस्ती करने की कोशिश की। पर मैंने उन्हें कुछ नहीं करने दिया। और बोलीं। बेटा ये मेरा मोबाइल तू अपने पास रख। मैं सोने जा रही हूँ। और बोलीं। तुझे मेरे मोबाइल में गेम खेलना हो तो खेल लेना। और पासवर्ड बता दिया। मैं: नहीं मम्मी। मेरे मोबाइल में भी गेम है। मम्मी: बेटा मेरे मोबाइल को देख लिया कर। और रूम में चली गईं। फिर मैंने मम्मी का मोबाइल चेक किया। तो उसमें जो फोटो थीं। कई सारी। जिनमें अंकल ने मम्मी को गाड़ी में लंड चुसवाया।
1 hour ago
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मैं मम्मी के मोबाइल में पिक देख रहा था। मम्मी गाड़ी में अंकल का लंड चूस रही थीं सफेद सूट में। तभी अचानक अंकल आ गए। और बोले। बेटा मम्मी के मोबाइल में मम्मी की चुदाई पिक देख रहे हो। मैं: नहीं अंकल। सिर्फ आपका लंड चूसने की पिक है। और आपको कैसे पता मैं मम्मी के मोबाइल में क्या देख रहा हूँ। अंकल: बेटा तेरी मम्मी ने खुद चुदाई की वीडियो बनवाई है। और कई पिक भी। ताकि वो तुझे दिखा सके। उसने मुझसे कहा था। मेरी चुदाई की वीडियो बनाओ। और अंकुश को दिखाना। आज उसी की वजह से मुझे ये सुख मिल रहा है। वो तुझसे डायरेक्ट ये तो नहीं बोल सकती कि मेरी चुदाई की वीडियो देख। पिक देख। इसलिए तुझे गेम खेलने के बहाने से मोबाइल देकर गई होगी। मैं: हाँ अंकल। आपको कैसे पता। अंकल: उसने मुझे पहले ही बता दिया था। मैं: ओह अंकल। पर अंकल इस मम्मी की चुदाई की पिक नहीं है। अंकल: बेटा है। उसी में मैंने एक फोल्डर बनाया है। उसी ने बनाया है। योगेश अंकल और अंकुश की वर्षा मम्मी की चुदाई। मैंने फिर मोबाइल में फोल्डर देखा। तो उसमें मम्मी की चुदाई के कई वीडियो पिक थीं। मैं: अंकल वाउ। पर मम्मी ये कुछ नहीं किया का नाटक क्यों करती हैं। अंकल: बेटा वो एक माँ है। और कोई माँ अपने बेटे की नजरों में नहीं गिरना चाहती है। मैं: जी अंकल। अंकल: वर्षा कहाँ है। मैं: रूम में सोने गई है। अंकल: सोने नहीं गई है। बल्कि चुदने के लिए रेडी होगी रूम में। मैं: आपको कैसे पता। अंकल: उसी ने कहा था। आप घर आ जाना थोड़ी देर बाद। मैं जा रही हूँ। और पूरे दिन मेरी चूत फाड़ना। क्योंकि कल मेरा पति आ जाएगा। इसलिए आप घर आ जाना। और पूरे दिन मेरी चूत फाड़ना। और अंकुश को किसी बहाने से बाहर भेज देना। मैं: ओके अंकल। आप जाइए। लेकिन मैं आज घर पे रहूँगा। अंकल उठे। और मम्मी के रूम में गए। और थोड़ी देर बाद वापस आए। और बोले। बेटा तेरी मम्मी जिद कर रही है तुझे घर से बाहर भेजने की। मैं: क्या अंकल। एक तरफ तो मम्मी वीडियो बनवाकर मुझे दिखवा रही है। और बाहर भेज रहे हो। अंकल: बेटा वो तुझे वीडियो अनजान बनकर दिखा रही है। लेकिन तू यहाँ रहेगा तो उसकी आवाज चुदने की आएगी। तो उसे शर्म आएगी। मैं: ओके अंकल। और मैं मम्मी के रूम में गया अंकल के साथ। मम्मी बेड पे बैठी थीं एक गाउन में। मैं: मम्मी मुझे दोस्त के घर जाना है। रात को 9 बजे तक आऊँगा। और आते समय मार्केट से खाना भी पैक करा लाऊँगा। और आप अंकल से कंप्यूटर सीखिए। मम्मी: ओके बेटा। और मैं घर से निकल गया। और रात को 9 बजे मैंने अंकल को कॉल किया। अंकल ने कॉल रिसीव नहीं किया। फिर अंकल ने मैसेज किया। आधे घंटे बाद आना। और फिर मैं आधे घंटे बाद घर पहुँचा। और डुप्लीकेट की से गेट खोला। तो हॉल में कोई नहीं था। फिर मैं मम्मी के रूम के गेट पर पहुँचा। तो गेट खुला था। लेकिन पर्दा लगा था। मम्मी की उई माँ ओह फक मी की आवाज आ रही थी। मैं समझ गया अभी चुदाई चालू है। मैं फिर किचन गया। और खाना रखकर वापस हॉल में गया। और ईयरफोन लगाकर गाने सुनने लगा। थोड़ी देर बाद मम्मी अंकल दोनों आए। मम्मी ने गाउन पहना था। मम्मी के बाल बिखरे थे। पूरा चेहरा का मेकअप भी हट गया था। माँग में जो सिंदूर था वो पसीने से बहकर नीचे गालों पर आ रहा था। और माथे पे बिंदिया भी नहीं थी। और मम्मी अपना सिर नीचे लटकाए हुए सोफे पे बैठ गईं। और अंकल ने लोअर बनियान पहन रखी थी। मम्मी के चेहरे पर डर साफ दिख रहा था। अंकल: बेटा कब आया। मैं: अंकल अभी एक मिनट पहले आते ही सीधा किचन में गया। खाना रखकर ईयरफोन लगाकर गाने सुनने ही बैठा। आप दोनों आ गए। और आपने मम्मी को कंप्यूटर सिखा दिया। अंकल: बेचारी डरी हुई। देख कैसे इसका चेहरा मुरझाया हुआ। मैं: क्यों मम्मी। अंकल: बेटा इस डर की वजह से। कोई क्या सोचेगा। एक मर्द के साथ घर में अकेली है। मैं: मम्मी आप भी। और मम्मी के पास जाकर मम्मी का चेहरा अपने हाथों में लेकर। मम्मी किसको कुछ नहीं पता। और वैसे आप तो कंप्यूटर सीखने रही थीं। मम्मी: बेटा सच बता। तू कितनी देर पहले आया था। तुझे मेरी कसम। मैं: जस्ट आया था। और किचन में खाना रखकर बाहर आया कि आप दोनों भी रूम से आ गए। मम्मी: क्या तू मेरे रूम में। गेट खुला था तो क्या तूने अंदर आए। चुप हो गईं। मैं: नहीं मम्मी। मैं आपके रूम की तरफ नहीं गया। क्यों आप ऐसे क्यों पूछ रही हो। मम्मी: कुछ नहीं बेटा। बस ऐसे ही। और मुझे एक बार मेरे सिर पे चूमा। और किचन में चली गईं। फिर हम तीनों ने साथ में खाना खाया। अंकल: बेटा कल तेरे पापा आ जाएँगे। तो मैं सोच रहा था वर्षा को आज रात अपने घर ले जाकर कंप्यूटर सिखा देता। मम्मी: नहीं। मैं नहीं जाऊँगी। पिछले कई दिनों से आपके साथ थी। आज मैं अपने बेटे के साथ रहूँगी। मैं: मम्मी आप जाइए। मम्मी: चिल्लाकर। चुप। अंकल: हाँ बेटा। वर्षा सही कह रही हैं। और फिर अंकल अपने घर चले गए। फिर मैं मम्मी रात को साथ में सोने गए। तो मम्मी ने कहा। बेटा मेरे मोबाइल में कुछ वायरस है। ऐसा लगता है। तू उसे सही कर देना। और मैं सोती हूँ। और फिर मम्मी मेरे साथ बेड पे सो गईं मुझसे चिपक कर। मैं भी मम्मी से चिपक कर सो गया। नेक्स्ट डे मैं स्टडी कर रहा था हॉल में। आज पापा आने वाले थे रात तक। थोड़ी देर में अंकल भी आ जाते हैं छत के रास्ते से। मम्मी उस समय सलवार कमीज में थीं। लेकिन वो भी काफी स्किन टाइट थी। जिससे उनके शरीर के हर एक उभार साफ साफ दिखायी दे रहा था। अंकल तो आते ही तड़ने लगे मम्मी को। मम्मी अंकल को इशारे कर रही थीं मेरी ओर देखकर। जैसे मना कर रही हों। अंकुश बेटा है। अंकल ने मुझसे कहा। बेटा तेरी मम्मी से बोल साड़ी पहन कर आए। फिर मैंने मम्मी से कहा। मम्मी साड़ी पहन लो ना। मम्मी: क्यों बेटा। मैं: प्लीज मम्मी। मम्मी: ओके। फिर थोड़ी देर बाद मम्मी साड़ी पहन कर आतीं। और आकर मेरे पास बैठ गईं। मुझे लगा मैं हूँ यहाँ। सो मम्मी खुल के बातें नहीं कर पा रहे होंगे। सो मैं मम्मी को बोल दिया। मैं अंदर रूम में जा रहा हूँ स्टडी करने। और रूम में चला गया। फिर मैं अपने रूम से उनकी बातें सुनने लगा। क्योंकि मम्मी मेरे सामने शर्माती हैं। अंकल: वर्षा आज तो तुम बहुत सुंदर लग रही हो। ऐसा लग रहा है जैसे अभी तुमको खा जाऊँ। मम्मी: मम्मी बस स्माइल कर रही थीं। फिर शर्मा के कहने लगीं। आप भी ना योगेश जी। झूठ की तारीफ करना कोई आप से सीखे बस। क्या मैं पहले सुंदर नहीं थी। और पिछले 6 महीनों से मुझे खा ही तो रहे हो। अंकल: सच वर्षा। इस टाइट सूट में तुम एकदम कड़क माल लग रही हो। मम्मी: स्माइल कर दीं। अच्छा जी। फिर अचानक अंकल ने मम्मी को कस के पकड़ लिया। उनका एक हाथ मम्मी के बैकलेस पीठ पर रगड़ रहा था। और दूसरा हाथ मम्मी की आस तक चला गया था। उनके होठ मम्मी की नेक को छू रहे थे। मम्मी भी अब मूड में आने लगी थीं। नेक से गाल तक। और गाल से लिप्स तक अब किसेस होने लग गई थीं। और लास्ट में उनके लिप्स एक दूसरे से मिल ही गए। अंकल जिस जोश से मम्मी को चूम रहे थे। उससे साफ पता चल रहा था कि मम्मी ने उन्हें कितना ज्यादा तड़पाया था उस टाइट सूट में। उनके लिप्स और टंग एक दूसरे से मिल रहे थे। मम्मी अब उम्मम ऐसी आवाजें निकालने लग गई थीं। अंकल ने अब मम्मी को हॉल में सोफे से उठा कर अपनी बाँहों में उठा लिया। और उनको उठाके बेडरूम तक लेके गए। और उनको उसने जोर से बेड पे पटक दिया। उनकी इतनी स्ट्रॉन्ग बॉडी थी कि वो मम्मी को आसानी से कंट्रोल कर रहे थे। ये आप लोगों को पहले भी बता चुका हूँ। मम्मी अंकल के आगे एक बच्ची लगती हैं। अंकल ने एक झटके से मम्मी का पल्लू हटाया। और साड़ी को निकाल कर फेंक दिया। उनके ब्लाउज को अंकल ने खोलने की ट्राई करी। पर वो अटक गया था। इसलिए अंकल ने उसे सीधा फाड़ दिया। और जोर से साइड में फेंक दिया। मम्मी ने ब्रा नहीं पहनी थी। इसलिए मम्मी के बड़े बड़े बूब्स अंकल के सामने आ गए थे। अंकल तो जैसे पागल हो गए थे। वो उनको जोर जोर से मसलते हुए किस करने लग गए। दर्द के मारे मम्मी सिसकारियाँ लेते जा रही थीं। और वो बोलीं। आह उफ योगेश जी क्या कर रहे हो। धीरे से करो ना। अब मम्मी सिर्फ पेटीकोट में थीं। अंकल ने उसे ऊपर उठाया। और मम्मी की सुंदर क्लीन शेव्ड चूत को वो मसलने लग गए। मम्मी की आह निकल गई। क्योंकि नीचे अंकल ने एक उँगली अंदर डाल दी थी। अंकल: वर्षा डार्लिंग इतने बेशकीमती खजाने को क्यों छुपा के रखा था। मैंने कल रात को तुमसे मेरे घर चलने को कहा। तो क्यों मना किया तुमने। आज तो मैं तुमको इतना चोदूँगा कि तुम्हारी चीखें पूरी कॉलोनी में सुनाई देंगी। मम्मी: अच्छा जी। इतना गुस्सा। पिछले 6 महीनों से चुदवा रही हूँ। वो क्या। पिछली कई रातों से आपके साथ थी। बेटे से 10 दिन बाद मिली। तो इतना गुस्सा क्यों। क्या एक रात बेटे के साथ माँ बनकर नहीं सो सकती। अंकल ने झट से अपना टी-शर्ट और पैंट निकाली। उनके अंडरपैंट्स में तंबू बना हुआ था। मम्मी को मजा आ रहा था। अंकल ने जैसे ही अपना अंडरपैंट्स निकाला। तो उनका 8 इंच का खड़ा हुआ लंड बाहर आ गया। मम्मी तो बिना कुछ बोले बस आँखें फाड़ कर उसे देख रही थीं। अंकल: ऐसे क्यों देख रही हो। क्या पिछले 6 महीनों से नहीं देखा। मम्मी: देखा है। पर आज इसको इतना गुस्सा क्यों आ रहा है। अंकल: कल रात को तूने इसे खुश करने से मना कर दिया था। इसलिए फिर। अंकल ने मम्मी को खींच कर नीचे बिठाया। और मम्मी कुछ बोलें इससे पहले ही उन्होंने अपना लंड मम्मी के मुँह में डाल दिया। मम्मी भी मजे से उसको चूस रही थीं। कुछ देर के बाद अंकल अब कंट्रोल नहीं कर पा रहे थे। उन्होंने मम्मी को बेड पे लिटाया। और खुद उनके ऊपर चढ़ गए। उनका बड़ा लंड मम्मी की चूत को टच कर रहा था। उससे मम्मी और तड़प रही थीं। मम्मी: योगेश जी मुझसे कंट्रोल नहीं होगा। और वेट। जल्दी से अंदर डालो अपना प्लीज। अंकल ने मम्मी पर अपना पूरा कंट्रोल ले लिया था। उनको पता था मम्मी अब उनके जाल में फँस चुकी हैं। और उसको अपनी गुलाम कैसे बनाना है। अंकल जानबूझकर और देर कर रहे थे। ताकि मम्मी उनके सामने गिड़गिड़ाएँ। और ज्यादा भीख माँगें। और ऐसा ही हुआ। आखिर अंकल ने अपना लंड जैसे ही अंदर डाला। मम्मी की एक सेकंड के लिए साँस रुक गई। उनकी चूत काफी टाइट थी। क्योंकि रात को मम्मी ने अपनी चूत पे एक क्रीम लगाई थी जिससे चूत टाइट हो जाए। और अंकल का लंड काफी बड़ा था। जब टाइट चूत में बड़ा लंड जाएगा तो ऐसा ही होगा। मम्मी: आह... योगेश। उई माँ। प्लीज धीरे से। अंकल ने मम्मी को अनसुना कर के और ताकत से लंड अंदर डाला। तो मम्मी बेड पर ही छटपटाने लग गईं। अंकल ने मम्मी को कस के पकड़ रखा था। तो मम्मी हिल भी नहीं पा रही थीं। इतने स्ट्रॉन्ग हाथों में मेरी नाजुक कली जैसी मम्मी को रोंगते हुए देख कर मुझे काफी अच्छा लग रहा था। मम्मी की चीखें और भी तेज होती जा रही थीं। पर अंकल को इससे कोई फर्क नहीं पड़ रहा था। मम्मी अंकल के सामने अब रोने की हालत में आ गई थीं। उनकी आँख से आँसू आ रहे थे। पर अंकल के सामने उनकी एक नहीं चल रही थी। कुछ देर बाद उनका दर्द कम हुआ। तो अब मम्मी को भी मजा आने लग गया था। इतने में मम्मी का फोन बजता है। और उस पर पापा का कॉल होता है। मम्मी उठाने ही वाली थीं। कि अंकल ने उनके हाथ से फोन छीन लिया। और दूर फेंक दिया। ये सब मैं विंडो से देख रहा था। उनका अच्छे से सेक्स चल रहा था। कि तभी घर की बेल बजती है। और मम्मी एकदम से चौंक जाती हैं। पर अंकल उनको हिलने भी नहीं देते। उनको लगा जो होगा चला जाएगा। मम्मी: छोड़िए। कोई है। बेल बज रही है। अंकल: तू चुद। अंकुश देख लेगा। जो होगा वो उसे बाहर से भेज देगा। मम्मी: हो सकता है मेरा नामर्द पति आया हो। अंकल: वो रात को आएगा। अंकुश ने बोला है। मम्मी: उसका भरोसा नहीं है। वो अभी भी आ सकता है। अंकल: चुप। वो अभी नहीं आएगा। तू मेरे लंड को शांत कर। और अंकल मम्मी को चोदने लगे। लेकिन 5 मिनट बाद सीधा डोर ओपन होता है। और पापा अंदर आ जाते हैं। क्योंकि पापा के पास भी घर की एक की होती है। पापा को देख के मेरे पसीने छूटने लगते हैं। पापा ने मम्मी को आवाज लगाई। और वो बोले। वर्षा कहाँ हो तुम। उनकी आवाज सुनते ही मम्मी शॉक में रुक जाती हैं। और अंकल भी रुक जाते हैं। उनको तो पता ही नहीं चला कि कब पापा घर में आ गए हैं। मम्मी अब रोने लगीं। और बोलीं। मम्मी: अब हम पकड़े जाएँगे। और उनको अब सब पता चल जाएगा। अंकल ने जल्दी से उनके कपड़े बेड के नीचे सरका दिए। लेकिन मम्मी के कपड़े पड़े थे जो दिख रहे थे। लेकिन अंकल के बेड के नीचे थे जो नहीं दिख रहे थे। और मम्मी को उठा के बाथरूम में घुस गए। लेकिन गेट खुला ही छोड़ दिया। मम्मी रोए जा रही थीं। पापा मम्मी को मुझे आवाज लगाए हैं। तो मैं भी हॉल में आता हूँ। तब तक पापा मम्मी यानी उनके रूम में घुसने लगते हैं। क्योंकि अंकल मम्मी ने गेट बंद नहीं किया था। तो मैं देखता हूँ पापा उनके रूम में घुस रहे हैं। तो मैं भी पापा के पास पहुँचकर। लेकिन जब तक पापा उनके रूम में घुस गए। और मैं भी। मैं: पापा कब आए। पापा: अभी जस्ट। तेरी मम्मी कहाँ हैं। बाथरूम के अंदर से मम्मी की रोने की थोड़ी आवाज आ रही थी। तो अंकल ने मम्मी के मुँह को अपने हाथ से पकड़ लिया। मैं: पापा मम्मी पड़ोस में आंटी के घर गई हैं। पापा: ये आवाज कैसी है। मैं: कैसी आवाज पापा। पापा: बेटा ऐसा लग रहा है जैसे तेरी मम्मी बाथरूम में हैं। उसी की रोने जैसी आवाज मुझे लगी। मैं: नहीं पापा। मम्मी तो मेरे सामने पड़ोस वाली आंटी के घर गई हैं। पापा: नहीं बेटा। बाथरूम चेक करता हूँ। मैं: रुकिए पापा। मैं देखता हूँ। फिर मैंने बाथरूम के गेट पे गया। तो अंदर अंकल मम्मी नंगे थे। मम्मी की चूत में अंकल का लंड फँसा था। मम्मी की पीठ मेरी तरफ थी। मैं: पापा बाथरूम खाली है। फिर पापा ने मम्मी को फोन किया। तो उनका फोन बेडरूम में ही बजने लग गया। ये सब अंकल और मम्मी बाथरूम के अंदर से सुन रहे थे। वो दोनों एकदम नंगे। और अंकल के खड़े लंड के साथ बाथरूम में थे। पापा: देख बेटा। तेरी मम्मी का फोन यहीं बेड पे बज रहा है। मैं: हाँ पापा। मम्मी मोबाइल ले जाना भूल गईं। इस मौके का फायदा उठाते अंकल ने पीछे से मम्मी की चूत में लंड डाल दिया। मम्मी की चीख निकल ही जाती। इतने में अंकल ने और जोर से उनका मुँह बंद कर दिया। और धीरे धीरे वो लंड को अंदर बाहर करते जा रहे थे। बेडरूम में खड़े पापा ने इमेजिन भी नहीं किया होगा कि उनकी घरेलू सेक्सी पत्नी उनके सामने ही बाथरूम में किसी दूसरे आदमी का लंड लेने में बिजी हैं। पापा ने देखा मम्मी के कपड़े नीचे पड़े हैं। लेकिन अंकल के कपड़े पापा को नहीं दिखे। क्योंकि अंकल ने अपने कपड़े बेड के नीचे कर दिए थे। पापा: देख बेटा। तेरी मम्मी के कपड़े नीचे पड़े हैं। तू मुझे बाथरूम में देखने दे। मैं: रुकिए पापा। वहीं रहिए पापा। मैंने देख लिया। मम्मी बाथरूम में नहीं हैं। और कपड़े तो आंटी के घर गईं तो चेंज करके गई थीं। शायद इन कपड़ों को अलमारी में रखना भूल गई होंगी। पापा: ठीक है बेटा। मैं रख देता हूँ। मैं: नहीं पापा। मैं रख दूँगा। आप हॉल में चलिए। पापा: नहीं बेटा। बाथरूम में ड्रेस होकर आऊँगा। मैं: नहीं पापा। आप दूसरे बाथरूम में जाइए। पापा: क्यों। मैं: प्लीज पापा। पापा: ओके। फिर पापा हॉल में आ गए। लेकिन मैं मम्मी के कपड़े उठाने लगा। कि अंकल ने एक शॉट लगाया मम्मी की चूत में पीछे से। जो मैंने देखा। लेकिन मम्मी की पीठ मेरी तरफ थी। इसलिए मैं उनका चेहरा नहीं देख पा रहा था। अंकल के शॉट से मम्मी की चीख निकली। जो मुझे स्पष्ट सुनाई दी। फिर मैं भी मम्मी के कपड़ों को उठाकर बेड पे रख आया। और हॉल में आते समय मैंने बेडरूम का डोर बंद किया। ताकि मम्मी की आवाजें पापा तक न पहुँचे। और बाहर आकर हॉल में पापा के पास बैठ गया। और पापा बोले। मैं फ्रेश होकर आता हूँ। तो पापा मेरे बाथरूम में चले गए। और मैं मम्मी की बाथरूम की विंडो पे चला गया। और बाथरूम में देखने लगा। अंकल ने अब जोर से धक्के लगाने चालू किए। और मम्मी की अब थोड़ी आवाजें भी आने लगीं। मम्मी तो इस दौरान 2 बार झड़ चुकी थीं। अंकल ने अब स्पीड बढ़ाया। और मम्मी को और जोर से धक्के मारने लग गए। अंकल मम्मी के बूब्स दबाए जा रहे थे। और उनके मोटे चूतड़ पर वो थप्पड़ मारते जा रहे थे। अब काफी टाइम हो गया था। करीब आधे घंटे से भी ज्यादा। अब अंकल ने जोर से एक धक्का लगाया। और अपना पानी मम्मी के चूत के एकदम डीप तक अंदर डाल दिया। मम्मी ने जैसे ही अंकल का गरम पानी अपने अंदर महसूस किया। तो वो बोलीं। अपने अंदर क्यों निकाला। अंकल: वर्षा तुझे तो मैं अपने बच्चे की माँ बनाने वाला हूँ। ये बस उसकी ही तैयारी है। मम्मी: बड़े आए माँ बनाने वाले। अभी पकड़े जाते। वो तो अंकुश ने बचा लिए। अंकल: हाँ। आज तो उसी ने बचाए। मम्मी: अब मैं अंकुश से कैसे नजरें मिलाऊँगी। आज उसने मुझे आपसे चुदते हुए देखा है। अंकल: नहीं। जाने। नहीं देखा। मम्मी: वो बाथरूम चेक करने आया तो था। अंकल: उसने कुछ नहीं देखा। पर उसे पता तो है तू मुझसे चुदती है। मम्मी: उसका सामना कैसे करूँगी। अंकल: तू ऐसे बिहेव करना जैसे कुछ नहीं हुआ है। नहीं तो अंकुश को बुरा लगेगा। तू उदास रहोगी तो। मम्मी: हाँ। अंकल: अब जल्दी से मेरे लंड को पानी से शाइन दे। और तेरी चूत को भी धो ले। मम्मी: आपके लंड को मैं पानी से नहीं बल्कि अपने मुँह में लाके साफ करूँगी। और फिर। फिर मम्मी ने अंकल के लंड को अपने मुँह में लेकर चूसकर साफ किया। और फिर अपनी चूत को बिना साफ किए ही दोनों बाहर रूम में आए। और अंकल ने अपने कपड़े पहने। और मम्मी ने भी जो कपड़े मैंने बेड पे रखे थे जमीन से उठाकर उनको पहनने लगीं। पहले बिना पैंटी के पेटीकोट। फिर अपना फटा ब्लाउज को देखकर बोलीं। आपने फाड़ दिया। अंकल: दूसरा पहन ले। तो मम्मी ने अलमारी से दूसरा ब्लाउज निकाला। और पहना। फिर साड़ी। मम्मी: अब बाहर चलें। अंकल: बाहर तेरा नामर्द पति होगा। मम्मी: अंकुश को मैसेज करो। फिर अंकल मुझे मैसेज भेजने लगे। तो मैं वहाँ से हटकर हॉल में सोफे पे आ गया। जहाँ पापा लैपटॉप में अपना काम कर रहे थे। पापा बाथरूम से कब आए मुझे नहीं पता। फिर कुछ देर बाद अंकल ने व्हाट्सएप पे मैसेज भेजा। तेरे नामर्द बाप को भेज। मुझे रूम से निकलना है। फिर मैंने पापा से कहा। पापा मुझे आइसक्रीम खानी है। प्लीज ले आइए। पापा: बेटा तू ले आ। मैं: प्लीज पापा ले आइए। पापा: लाता हूँ। और घर से बाहर निकल गए। पापा के जाते ही अंकल मम्मी बाहर आए। मम्मी चुप थीं। मैं: अंकल आप टेंशन लेने की जरूरत नहीं है। जब पापा रूम में गए थे तो मैं समझ गया था आप मम्मी बाथरूम में गए होंगे। क्योंकि मैंने आप दोनों को नहीं देखा। पर समझ गया था आप दोनों बाथरूम में छिप गए। लैपटॉप लेकर। क्योंकि लैपटॉप बाहर रहता तो पापा को कुछ शक हो जाता। फिर अंकल चले गए। ये फिर मम्मी ने मुझे अपने पास बुलाया। मम्मी सोफे पे बैठी थीं। मम्मी: बेटा। मैं: मम्मी आप टेंशन न लें। आपने कुछ गलत नहीं किया। आप तो कंप्यूटर सीख रही थीं। मैंने झूठ जानबूझकर बोला ताकि मम्मी की टेंशन खत्म हो जाए। हालाँकि मम्मी को पता चल चुका था मैं झूठ बोल रहा हूँ। उनकी चुदाई देखकर भी अनजान बन रहा हूँ। फिर मम्मी ने कहा। बेटा कब तक बचाएगा मम्मी को। मैं: मम्मी हमेशा आपके साथ हूँ। मम्मी: जानती हूँ। तभी तो आज बच गईं। मैं: मम्मी आप आराम से कंप्यूटर सीखिए। और अंकल के प्यार को एक्सेप्ट कर लो। मम्मी: नेवर। कभी नहीं करूँगी। मैं अपने बदन पर किसी को भी हाथ नहीं लगाने दूँगी। मैं: ओके मम्मी। फिर पापा आइसक्रीम लाए। हमने आइसक्रीम खाई। और रात को खाने के बाद।
1 hour ago
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रात को खाने के बाद मैंने पापा से कहा। पापा आज मम्मी मेरे साथ रूम में सो जाएँगी। मम्मी मेरी तरफ देखने लगीं। पापा: क्यों बेटा। मैं: पापा वो क्या। मम्मी पिछले 10 दिनों से मेरे साथ सो रही हैं। इसलिए आदत हो गई। पापा: ओके बेटा। और मम्मी से बोले। वर्षा तू अंकुश के साथ सो जाना। और पापा खाना खा कर अपने रूम में चले गए। मम्मी: बेटा मुझे अपने रूम में क्यों सुला रहा है। मैं: मम्मी ताकि आप कंप्यूटर सीख जाओ। मम्मी: बेटा इसका मतलब तू योगेश जी को बुला रहा है। मैं: हाँ मम्मी। मम्मी: नहीं बेटा। मुझे कंप्यूटर नहीं सीखना। और तेरे पापा घर में हैं। इसलिए नहीं। मैं: मम्मी मैं हूँ ना। आप क्यों टेंशन ले रही हो। मम्मी: नहीं बेटा। दिन में सीख लिया कंप्यूटर। अब मुझे भी सोना है। मैं: मम्मी सो जाना। एक दो घंटे कंप्यूटर सीख लेना। फिर सो जाना। मम्मी: नहीं बेटा। मैं: मम्मी प्लीज। मैंने अंकल को बोल दिया आने को। मम्मी: नहीं बेटा। और मैं कंप्यूटर सीखूँगी तो तेरी नींद भी डिस्टर्ब होगी। और रात को तेरे पापा ने आकर तेरा रूम चेक किया तो योगेश साथ में मिलेगा। तो मैं फँस जाऊँगी। मैं: मम्मी अंकल को छुपा देंगे। मम्मी: बेटा वो मुझे कंप्यूटर सिखाएँगे तो टू की लाइट चालू रहेगी। तो तुझे भी नींद नहीं आएगी। मैं: मम्मी आप भूल रही हो। मेरे रूम के अंदर एक छोटा रूम भी है। मैं उसमें सो जाऊँगा। आप बाहर वाले रूम में कंप्यूटर सीखना अंकल से। मम्मी: नहीं बेटा। मैं अकेली रहूँगी योगेश के साथ बाहर वाले रूम में। तो वो मुझे छेड़ेंगे। मैं: मम्मी अंकल कुछ नहीं करेंगे आपकी परमिशन के बिना। और आप अंकल का प्रपोजल एक्सेप्ट कर लो। मम्मी: नेवर बेटा। मैं तेरे पापा के अलावा और किसी मर्द के साथ अपने बदन को। मैं: मम्मी आप भी। पापा आपको प्यार नहीं करते हैं। मम्मी: बेटा वो मुझे बहुत प्यार करते हैं। मैं: मैं मम्मी का हाथ अपने सिर पे रखवाकर बोला। खाओ मम्मी मेरी कसम। पापा आपको प्यार करते हैं। मम्मी ने अपना हाथ मेरे सिर से हटाया। और बोलीं। तो इसका मतलब मैं किसी गैर मर्द के नीचे सो जाऊँ। और वेश्या बन जाऊँ। मैं: नहीं मम्मी। अंकल आपकी बहुत प्यार करते हैं। वो आपको सम्मान देंगे। मम्मी: पति के अलावा किसी दूसरे मर्द के साथ रहना वेश्या होता है। मैं: नहीं मम्मी। अंकल आपको पत्नी का दर्जा देंगे। मम्मी: नहीं बेटा। मैं समाज की नजरों में तेरे पापा की बीवी हूँ। मैं: मम्मी जिद छोड़ो। अंकल के प्यार को एक्सेप्ट कर लो। मम्मी: नेवर। मैं: ठीक है मम्मी। पर कंप्यूटर सीखो। मम्मी: बेटा तू अंदर वाले रूम में सोएगा। और वो मुझे बाहर वाले रूम में अकेले में छेड़ेंगे। मैं: मम्मी अंकल ने मुझसे वादा किया है। वो आपकी परमिशन के बिना कुछ नहीं करेंगे। मम्मी: मानती हूँ। वो चाहते तो पिछले 6 महीनों में मेरे साथ वो सब कुछ कर लेते। लेकिन उन्होंने नहीं किया। वो मुझसे भी यही कहते हैं। जो भी करूँगा वर्षा तेरी परमिशन से ही करूँगा। लेकिन बेटा वो मुझे सेड्यूस करने की कोशिश करते हैं। मैं: मम्मी कैसे। मम्मी: नालायक। शर्म नहीं आती मम्मी से पूछते हुए। मैं: प्लीज मम्मी बताइए। मम्मी: वो मुझे कंधे पर हाथ रखते हैं। और। मैं: और कहाँ मम्मी। मम्मी: नहीं बताऊँगी। मैं: बताइए मम्मी। मम्मी: मैंने तुझे लैपटॉप में दी थी रिकॉर्डिंग। देख लेता। क्यों नहीं देखी। मैं: मम्मी वो आपकी प्राइवेसी थी। मैं आपकी प्राइवेसी नहीं देखूँगा। मम्मी: प्राइवेसी नहीं देखेगा। लेकिन पूछेगा। पूछते हुए शर्म नहीं आती। और रिकॉर्डिंग देखने में शर्म आती है। मैं: मम्मी बताओ। मम्मी: बोला ना। नहीं बताऊँगी। रिकॉर्डिंग देख ले। मैं: मम्मी आप मेरी मम्मी हो। मैं आपकी रिकॉर्डिंग नहीं देखूँगा। मम्मी: बेटा रिकॉर्डिंग देख ले। उसमें हमने कुछ नहीं किया है। उन्होंने मेरे कपड़े नहीं उतारे। जो तुझे शर्म आ रही है। मैं: नहीं मम्मी। मैं आपको अंकल के साथ की रिकॉर्डिंग नहीं देखूँगा। भले ही आप दोनों ने कुछ नहीं किया। मम्मी: अच्छा बच्चू। तुझे मेरी रिकॉर्डिंग जिसमें मैंने कपड़े नहीं उतारे। उसे देखने में शर्म आ रही है। और मम्मी को उनके साथ नंगी करवाकर सुलाने में शर्म नहीं आएगी। जब वो मुझे नंगी करके मेरे ऊपर। मैं: मम्मी आपको प्यार की जरूरत है। मम्मी: जब प्यार की जरूरत है तो रिकॉर्डिंग देख ले। मैं: मम्मी देख लूँगा बाद में। पहले आप अंकल से कंप्यूटर सीख लो। मम्मी: मैं जानती हूँ तू बहुत जिद्दी है। एक दिन तू मुझे नंगी करवा कर ही रहेगा। मैं: मम्मी अंकल आपको प्यार करेंगे। मम्मी: बेटा अब मैं रूम में जाकर तेरा रूम ठीक करती हूँ। और मम्मी रूम में चली गईं। फिर मैं पापा के रूम में गया। पापा सो रहे थे। शायद थकान के कारण। फिर मैंने पापा के रूम का गेट बाहर से कुंडी लगा दी। फिर अंकल को कॉल करके बुलाया। अंकल रेडी थे। वो सिर्फ 2 मिनट में छत से सीढ़ियों से आ गए। और आते ही पूछा। वर्षा कहाँ है। मैंने कहा। मम्मी मेरे रूम में हैं। और अंकल सीधा मेरे रूम में चले गए। फिर थोड़ी देर बाद करीब 10 मिनट तक दोनों बाहर नहीं आए। तो मैं मेरे रूम के गेट पे गया। जहाँ गेट खुला था। लेकिन पर्दा लगा था। मैंने थोड़ा सा पर्दा साइड किया। और अंदर देखने लगा। अंदर सीन ऐसा था। मेरी मम्मी अपने होठों से अंकल के होठों को चूस रही थीं। या कहूँ दोनों एक दूसरे के होठों को चूस रहे थे। दोनों एक दूसरे के होठों को बड़े ही जोरों से चूस रहे थे। फिर थोड़ी देर बाद मम्मी ने अंकल के होठों को छोड़ा। और अंकल की आँखों में आँखें डालकर बोलीं। मम्मी: अब दोबारा ऐसा मत बोलना। नहीं तो मैं मर जाऊँगी। (पता नहीं अंकल ने क्या बोला था। क्योंकि मैं 10 मिनट के बाद देखने लगा था।) मेरी मम्मी की बात सुनकर अंकल मेरी मम्मी का चेहरा अपने हाथों में लिया। और अपनी आँखों को मेरी मम्मी की आँखों में डालते बोले। इतना प्यार करती हो। तो मेरी मम्मी ने हाँ में गर्दन हिला दी। और जैसे अंकल ने अपने होठों को मेरी मम्मी के होठों की ओर बढ़ाया। मेरी मम्मी ने भी अपने होठों को उनके होठों पर रख कर चूमने लगीं। मेरी मम्मी और अंकल दोनों के होठ एक दूसरे के होठों का रस चूस रहे थे। जबकि हाथ एक दूसरे के बदन को सहला रहे थे। अचानक मम्मी ने अपने होठों को फिर से हटा लिया। तो अंकल ने। अंकल: अब क्या हुआ। मम्मी: बाहर अंकुश बैठा है। अंकल: उससे क्या करना। उसी की वजह से उसी ने तो हमारा मिलन करवाया है। मम्मी: अरे मैं उससे नहीं। उसके नामर्द बाप से डर रही हूँ। गेट खुला है। और वो आ गया तो। अंकल: उस मादरचोद की गाँड फाड़ दूँगा। और तुझे उसी के सामने चोदूँगा। मम्मी: बीवियों की तरह बोलीं। अब आप मार खाएँगे। और फिर हम दोनों हँसने लगे। अंकल: क्यों। बुरा लगा। तेरे नामर्द पति की गाँड फाड़ने का बोला तो। मम्मी: नहीं। अच्छा लगा। फाड़ देना। पर उसके सामने मुझे मत चोदना। अंकल: अब तू सिर्फ मेरी है। मम्मी: हाँ। अब सिर्फ आपकी हूँ। और जिंदगी भर आपकी रहूँगी। आपकी रखैल। आपकी वेश्या। वर्षा वेश्या। अंकल: अब और सब्र नहीं हो रहा है। जल्दी कर। मम्मी: रुको। पहले अंकुश को अंदर वाले रूम में भेजते हैं। अंकल: क्या। अंकुश अंदर वाले में सोएगा। मम्मी: हाँ। अंकल: नहीं। हम अंदर सोते हैं। अगर रात में तेरा बाप जाग गया तो अंकुश इस रूम में रहेगा। तो वो संभाल लेगा। मम्मी: आप सही कह रहे। पर एक प्रॉब्लम है। अंकल: क्या। मम्मी: अंदर वाले में बाथरूम नहीं। सिर्फ इसी रूम में है। और अंदर वाले रूम का गेट भी इसी रूम से है। अंकल: मैं समझ गया। तू रात भर नंगी रहेगी। तो नंगी बाथरूम जाने के लिए तुझे इस रूम में आना पड़ेगा। मम्मी: हाँ। और इस रूम में अंकुश रहेगा। पता नहीं वो उस समय सोता रहेगा या जागकर मोबाइल में गेम खेलेगा। अंकल: जब तुझे बाथरूम जाना होगा। मैं अंकुश को बोल दूँगा। वो सोने का नाटक कर लेगा। और तू नंगी बाथरूम आ जाना। और वैसे भी तू तेरे बेटे के सामने नंगी रह लेती है। मम्मी: हाँ। बेटे के सामने नंगी रह लेती हूँ। लेकिन इस बात पर शर्म आएगी। मैं एक मर्द से चुदवाकर बेटे के सामने बाथरूम जाऊँगी। अंकल: उससे बोल दूँगा। तेरे से कह रहा हूँ। मम्मी: वो सोने का नाटक करेगा। पर मुझे तो पता रहेगा वो जाग रहा है। अंकल: देख। सच्चाई तुझे भी पता है। तेरा बेटा तेरी चुदाई के बारे में जानता है। और उसे भी पता है उसी ने चुदाई करवाई है। ये तू भी जानती है। बस एक शर्म का पर्दा है। वो बना रहेगा। वो आँखें बंद कर लेगा। और तू बाथरूम हो आना। मम्मी: ठीक है। फिर अंकल मुझे आवाज देते हैं। अंकल: अंकुश बेटा अंदर आओ। तो मैं अंदर जाता हूँ। जहाँ बेड पे मम्मी अंकल बैठे थे। मैं: जी अंकल। अंकल: बेटा अब तुम सो जाओ उसी रूम में। मैं तुम्हारी मम्मी को अंदर वाले रूम में कंप्यूटर सिखाऊँगा। मैं: नहीं अंकल। अंदर वाले में सो जाऊँगा। मम्मी: बेटा रात को अचानक तेरे पापा आ गए तो हम अंदर वाले में रहेंगे। तो तू बाहर वाले में रहेगा। तो तू तेरे पापा को संभाल लेगा। मैं: ओके मम्मी। फिर अंकल ने मुझसे कहा। बेटा ये लैपटॉप अंदर रूम में रखकर आ। तो मैं लैपटॉप को अंदर वाले रूम में रख आया। जो मेरे रूम के अंदर एक छोटा रूम है। जिसका रास्ता इसी रूम से जाता है। और अंदर एक डबल बेड भी है। फिर वापस आया। तो अंकल मम्मी से बोले। चलो वर्षा। मम्मी: नहीं। आज नहीं सीखना मुझे। डर है कहीं उसके पापा। मैं: अंकल आप मम्मी का हाथ पकड़ कर ले जाइए। मम्मी डरती रहेंगी। मैं हूँ ना तो। अंकल ने मेरे सामने मम्मी का हाथ पकड़ा। और रूम में ले गए। मम्मी पीछे मुड़कर मुझे देख रही थीं। और फिर अंदर रूम में जाते ही अंकल ने पर्दा लगा दिया। लेकिन गेट खुला था। (दोस्तों आपको बता दूँ। अंदर रूम में कोई विंडो नहीं है। तो मैंने दो दिन पहले ही ये प्लान बनाया था। और अंदर वाले रूम में कैमरे लगवा दिए। विद स्पीकर। जो किसी को नहीं मालूम मेरे अलावा। तो पर्दे लगते ही मैं मोबाइल में देखने लगा। ईयरफोन लगाकर। ताकि उनकी आवाज भी मुझे साफ साफ सुनाई दे।) अंकल बेडरूम में जाते ही अपना हाथ मेरी मम्मी की कमर में डाल दिया। और मेरी मम्मी को खींच कर अपनी बाँहों में भर लिया। और फिर अपने होठों को मेरी मम्मी के होठों पर रख के किस करने लगे। वो मेरी मम्मी के होठों को ऐसे चूस रहे थे जैसे उसका रस ही चूस जाना चाहते हों। अंकल ने अपना ऊपर वाला होठ मेरी मम्मी के दोनों होठों के बीच रखा। और मेरी मम्मी उनके ऊपर होठों को अपने होठों में दबा कर चूसने लगीं। और अंकल मेरी मम्मी के नीचे वाले होठ को अपने होठों में दबा कर चूसने लगे। और उनके हाथ मेरी मम्मी की पीठ के नीचे होते होते साड़ी के ऊपर से मेरी मम्मी के चूतड़ों को सहलाने लगे। और कभी मेरी मम्मी के चूतड़ों को अपने हाथों में दबा देते। और कभी प्यार से थप्पड़ मार देते। मेरी मम्मी आह... करतीं। डर भी रही थीं। क्योंकि उनका बेटा यानी मैं बाहर था कुछ ही दूरी पर। और रूम का गेट भी खुला था। हालाँकि मैं सब जानता हूँ। ये मम्मी भी जानती हैं। पर माँ बेटे के बीच जो पर्दा होता है शर्म का। वो बना रहे। चुदाई चुदाई। चूत बनी है चुदने के लिए। और लंड बना है चूत फाड़ने के लिए। चूत लंड की गुलाम होती है। और लंड चूत का मालिक। मम्मी: ये सही नहीं है। मुझे डर लग रहा है। अंकुश क्या सोचेगा हमारे बारे में। अंकल: तेरे बहुत नखरे हैं। जिसने मुझे तेरी चूत दिलवाई। तू उसी से डरने का नाटक कर रही है। और उसी के सामने मैं तुझे हाथ पकड़ के अंदर लाया। और उसी ने बोला। मम्मी का हाथ पकड़कर ले जाओ। और उसी ने मुझे तेरी चूत चोदने का अधिकार दिया है। और तू कह रही है मुझे डर लग रहा है। क्या तू मुझसे चुदना नहीं चाहती है। मम्मी: मैंने आपको कब मना किया है। और आपका मुझ पर पूरा हक है। मेरे बेटे ने ही आपको मुझे चोदने का हक दिया है। पर मैं तो ये कह रही थी। गेट खुला है। वो कहीं अंदर न जाए। अंकल: वो अंदर नहीं आएगा। उसे पता है अंदर उसकी मम्मी मेरे लंड से चुदेगी पूरी रात भर। मम्मी: मैं जानती हूँ। उसे पता है मैं आपसे पूरी रात चुदूँगी। लेकिन कहीं वो गाना सुनता हुआ गलती से अंदर आ गया तो। अंकल: तो दरवाजा बंद करूँ। मम्मी: वो क्या सोचेगा। मेरी मम्मी को चुदवाने की कितनी जल्दी है। रहने दीजिए। अंकल: तो फिर शुरू करें। मम्मी: नहीं। इसकी कोई जरूरत नहीं है। आज हम कुछ नहीं करेंगे। और मम्मी ने अंकल का हाथ पकड़ कर अपनी कमर पर रख मुस्कुराते हुए बोलीं। बस ऐसे ही सो जाते हैं। एक दूसरे की बाँहों में बाँहें डाले। अंकल: नहीं यार। ऐसे नहीं। (गुस्से में) मैं वो बाहर बैठा है तो क्या हुआ। हम कुछ गलत थोड़े ही कर रहे हैं। उसी ने तो बोला है तेरी चुदाई के लिए। मम्मी: फिर भी योगेश जी। वो मेरा बेटा है। एक मर्यादा होती है माँ बेटे के बीच की। मैं वो नहीं तोड़ सकती हूँ। हमने कंप्यूटर सीखने की एक पर्दा है। उसे बना रहने दो। अंकल: तो क्या करूँ। गेट बंद कर दूँ। मम्मी: नहीं। गेट बंद करने से कुछ नहीं होगा। असल में मैं अपने बेटे की नहीं बल्कि मेरे पति की चिंता है। वो सोया या नहीं। पहले उसे सोने दो। फिर। अंकल: तो मुझे कैसे पता चलेगा तेरा पति सोया या नहीं। मम्मी: देखो। वो अभी व्हाट्सएप पर ऑनलाइन है। मम्मी ने अपने व्हाट्सएप दिखाया। अंकल: गुस्से में। क्या उस मादरचोद को यहाँ बुला कर अपने लंड पे बैठा लूँ। वर्षा यार तुम क्या मुझ पर इतना जुल्म क्यों कर रही हो। मेरी कौन सी गलती की सजा तुम मुझे दे रही हो। कितना प्यार भरा था उनके दिल में मेरी मम्मी के लिए। कितनी तड़प थी। पता नहीं मेरी मम्मी को उनको तड़पने में और मजा आने लगा। तो सेक्सी तरीके से उनकी आँखों में देखते अदा से अपने बालों को पीछे करते बोलीं। योगेश जी। अगर आप उससे अपने लंड पर बैठा लोगे तो मैं कहाँ बैठूँगी। अंकल: मेरी मम्मी की इस अदा पर मेरी मम्मी को अपने से चिपकाते। मेरी जान। अब तो इस पर तुम्हारा ही नाम लिखा है। अब तो तुम ही इस पर बैठोगी। तो आओ ना। बेड पर चलें। मम्मी: पर योगेश जी। हम इतना रिस्क क्यों ले रहे हैं। पर अंकल कहाँ मानने वाले थे। अंकल: वर्षा यार। अगर मैं उस मादरचोद को रूम में बंद करवा दूँ तो। मम्मी: अच्छा। फिर देखूँगी। लेकिन मुझे पता है कि आप उस नामर्द को कमरे में बंद नहीं करवा पाओगे। अंकल: क्यों नहीं बंद करा पाऊँगा। मम्मी: क्यों मैं थी कह रही हूँ ना। मैं आप नहीं कर पाएँगे ना मेरे नामर्द पति को रूम में बंद। अंकल: रुक। अभी करवाता हूँ तेरे नामर्द पति को रूम में बंद। फिर अंकल ने मुझे जोर से आवाज दी। बोले। बेटा जाकर तेरे बाप को रूम में बंद कर दे। ताकि वो बाहर न निकले। मैं: अंकल। मैंने आपके आने से पहले ही पापा को रूम में बंद कर दिया था। बाहर से कुंडी लगा दी थी। अंकल: ओके बेटा। अंकल मम्मी से। देखा। मैंने कहा था। तेरा बेटा असली पहरेदार है तेरी चुदाई का। मम्मी: पता है। मुझे अपने उसे मेरी चुदाई का पहरेदार बना दिया है। अब इस गेट को भी बंद कर दो। नहीं तो वो ही पहरेदारी करता हुआ अंदर आ जाए। और अपनी मम्मी की चूत में लंड घुसता हुआ देख ले। अंकल उठे। और गेट के पास आए। और बोले। बेटा मैं गेट बंद कर दूँ। ताकि तेरी मम्मी को अच्छे से कंप्यूटर सिखा दूँ। मैं: हाँ अंकल। कर दीजिए। फिर मम्मी ने मुझे आवाज दी। मैं अंदर गया गेट बंद होने से पहले। मम्मी: बेटा गेट खुला रहने दो। मैं: नहीं मम्मी। अंकल को गेट बंद करने दीजिए। अंकल: हाँ बेटा। तेरी मम्मी को कंप्यूटर सीखने में असली मजा गेट बंद होने के बाद ही आएगा। और मुस्कुराने लगे। मैं देख रहा था। मेरी मम्मी बड़े ध्यान से अंकल की बात को सुन रही थीं। कि वो कैसे उनके ही बेटे के सामने मजे की बात कर रहे थे। फिर अंकल ने मम्मी को आँख मार कर मेरे सामने अपने लंड को दबाने लगे। जिसे मम्मी और मैं देख रहे थे। अंकल: बेटा तू जा। मुझे अब कंप्यूटर सिखाने दे। फिर मेरी मम्मी भी अंकल को लंड सहलाते देख उनकी तरफ देख कर मुस्कुराते हुए बेड से उठीं। और मिरर के सामने खड़ी हो कर अपने आप को संवारने लगीं। मैं भी वहीं था उनके दोनों के साथ छोटे रूम में। जिसमें बेड मिरर एसी भी था। सब था। लेकिन बाथरूम नहीं था। मम्मी मेरे और अंकल के सामने ही मिरर के पास गईं। और मिरर के सामने खड़ी अपने बालों को संवार रही थीं। फिर मम्मी ने कहा। बेटा अब तू जा। और जाकर सो जा। फिर मैं जैसे ही बाहर निकला। अंदर वाले रूम से अंकल ने तुरंत गेट बंद कर दिया। और मैं मोबाइल में देख रहा था। गेट बंद करके अंकल सीधा मम्मी के पास गए। जो मिरर में अपने बाल संवार रही थीं। और मम्मी को अंकल पीछे से आते दिखायी दिए। तो मम्मी की अंकल से आँख मिलते ही मेरी मम्मी मुस्कुरा पड़ीं। तो बदले में वो मेरी मम्मी के पीछे आ कर अपना हाथ मेरी मम्मी की कमर में डाल कर मेरी मम्मी को अपने से चिपका कर अपने से कस लिया। और पीछे से आईने में मेरी मम्मी को देखने लगे। मम्मी: योगेश जी। मैं तो आपको बहुत भोला समझती हूँ। लेकिन आप तो। अंकल: मम्मी क्या जानूँ। मम्मी: बड़े चालाक निकले। कैसे मेरे बेटे को अपने लंड दिखाकर बोल दिया। जा बेटा। मजा आएगा तेरी मम्मी को। अंकल: मेरी मम्मी के कंधे और मेरी मम्मी के गालों को चूमते हुए बोले। यार ये सब तुम्हारे हुस्न का जादू है। अंकल के इस तरह कंधे गालों और कान की लोब को चूसने से मेरी मम्मी भी गरम होने लगी थीं। मेरी मम्मी की भी साँसें तेज चलने लगी थीं। कि मेरी मम्मी ने घूम कर अपनी बाँहें अपने यार के गले में डाल दीं। और अपने होठों को अंकल के होठों पर रख कर चूमने लगीं। मेरी मम्मी के इस तरह होठ चूमने पर अंकल कहाँ ये मौका छोड़ने वाले थे। और उन्होंने मेरी मम्मी के होठों को अपने होठों के बीच कैद कर लिया। और मेरी मम्मी के होठों का रस पीने लगे। मेरी मम्मी की साड़ी का पल्लू कब का मेरी मम्मी के बदन का साथ छोड़ चुका था। अंकल खड़े खड़े मेरी मम्मी को चूमते अपना हाथ मेरी मम्मी के ब्लाउज के ऊपर रख कर मेरी मम्मी के ब्लाउज के हुक खोलने की कोशिश करने लगे। तो मेरी मम्मी भी मुस्कुराती उनसे अलग हुईं। और बोलीं। आप बेड पर चलिए। मैं आती हूँ। तो अंकल बोले। अंकल: यार अब क्या है। आओ ना। देखो ये शाम से तुम्हारे लिए तड़प रहा है। मेरा नहीं तो कम से कम इस बेचारे का ही ख्याल कर लो। अंकल की बात सुन मेरी मम्मी के चेहरे पर स्माइल आ गई। और मेरी मम्मी मुस्कुराते हुए अपने हाथ को बढ़ा कर पजामे में खड़े उनके लंड पर ले जा कर उसको सहलाते बोलीं। मम्मी: योगेश जी। आपका हमेशा ही खड़ा रहता है। आज दिन में ही किया था। अब कोई बात नहीं। आप बेड पर चलिए। वहाँ आ कर इसको भी देखती हूँ। इस बार अंकल बिना कुछ कहे बेड पर चले गए। मेरी मम्मी वहीं आईने के सामने खड़ी अपने होठों पर लिपस्टिक लगाने लगीं। (दोस्तों वो रूम छोटा जरूर है। लेकिन वहाँ सब सामान है मम्मी का। क्योंकि पहले मम्मी मेरे साथ सोती थीं कई बार। लेकिन पिछले 6 महीनों से उस रूम में नहीं सोती हैं। क्योंकि अंकल का लंड मिल गया है।) अंकल: यार अब क्या कर रही हो। आओ ना। देखो कब से तड़प रहा हूँ। मम्मी: बस आ रही हूँ योगेश जी। लिपस्टिक लगा रही हूँ। आप ही तो कहते हैं आपको मेरी लिपस्टिक का स्वाद अच्छा लगता है। अंकल: यार मुझे लिपस्टिक नहीं बल्कि तुम्हारे होठों का स्वाद अच्छा लगता है। तुम जो भी लिपस्टिक लगाती हो। वही खाने में स्वादिष्ट बन जाती है। और अंकल उठ कर मेरी मम्मी के पीछे आए। और मेरी मम्मी को अपनी बाँहों में उठा लिया। मेरी मम्मी अपनी बाँहें अंकल के गले में डाल कर। क्या कर रहे हैं योगेश जी। गिर जाऊँगी। अंकल: अपनी जान को मैं गिरने दूँगा क्या। क्या इतना भी भरोसा नहीं अपने इस नौकर की ताकत पर। तो बदले में मेरी मम्मी मुस्कुरा पड़ीं। और अंकल ने मेरी मम्मी को ला कर बेड पर लिटा दिया। मेरी मम्मी जानती थीं कि उनके साथ आगे क्या होने वाला है। तो मेरी मम्मी ने शर्म से अपना मुँह साइड में कर लिया। तो अंकल आ कर मेरी मम्मी की बगल में लेट गए। और प्यार से अपने हाथ से मेरी मम्मी के गाल पर रख कर बोले। वर्षा देखो ना इधर। और मेरी मम्मी का मुँह अपनी तरफ करके जैसे ही अपने होठों को मेरी मम्मी के होठों की ओर बढ़ाने लगे। तो मेरी मम्मी ने शर्म से अपने हाथ को उनके होठों पर रख कर। योगेश जी मेरा बेटा बाहर रूम में है। मुझे शर्म आती है। अंकल: यार अब शर्म कैसी। अब तो दरवाजा भी बंद है। और खुद उसी ने बोला है। पूरी रात जमकर मेरी मम्मी को चोदना। और फिर अंकल ने मेरी मम्मी को अपनी बाँहों में भर लिया। और मेरी मम्मी के होठों को चूसने लगे। तो मेरी मम्मी इस बार अंकल को रोक नहीं सकीं। और उनका साथ देने लगीं। अंकल: सच में वर्षा। कितना रस भरा है तुम्हारे इन गुलाबी होठों में। दिल करता है बस इन गुलाबी होठों का अमृत ऐसे ही पीता रहूँ। मम्मी: सच कहूँ योगेश जी। अंकल: हाँ बोलो। मम्मी: आज मुझे इस समय मेरे बदन में एक अलग ही एक्साइटमेंट होने लगी है। बाहर मेरा बेटा बैठा है। और अंदर आप उसकी जवान मम्मी के साथ बिस्तर पर रंगरलियाँ मना रहे हो। अंकल: हाँ वर्षा। मैं उसकी मम्मी के साथ रंगरलियाँ मना रहा हूँ। और उसी की परमिशन से। खुद उसी ने कहा है। मैं मेरी मम्मी की चुदाई की पहरेदारी करूँगा। आप पूरी रात जमकर मेरी मम्मी को चोदना। और उनकी चीखें मेरे कानों तक आनी चाहिए पूरी रात। और फिर से अंकल मेरी मम्मी के होठों गालों को चूमने लगे।
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update 48
अंकल मेरी मम्मी के होठों गालों को चूम रहे थे। और उन्होंने अपना हाथ नीचे मेरी मम्मी की चुचियों की ओर बढ़ा कर मेरी मम्मी की चुचियों पर से मेरी मम्मी की साड़ी के पल्लू को हटा दिया। अब मेरी मम्मी के ब्लाउज में कैद चुचियाँ जो किसी पहाड़ की तरह खड़ी थीं। वो अंकल के सामने बेपर्दा हो गईं। मेरी मम्मी की चुचियाँ वैसे ही अंकल को बहुत पसंद थीं। और मेरी मम्मी की चुचियों को इस हाल में इतने करीब से देख कर अंकल अपना मुँह मेरी मम्मी के ब्लाउज से बाहर निकल रही आधी चुचियों पर रख कर उनको चूमने लगे। तो मेरी मम्मी को इतनी गुदगुदी होने लगी। तो मेरी मम्मी बोलीं। मम्मी: योगेश जी प्लीज ऐसा मत कीजिए। गुदगुदी होती है। आह... मेरी साँसें तेज तेज चलने लगीं। जिससे मेरी चुचियाँ बड़ी तेजी से ऊपर नीचे होने लगी थीं। मेरी मम्मी की चुचियों के इस तरह के नजारे देखने के बाद अंकल अपना आपा खो गए। और मेरी मम्मी की क्लीवेज पर अपने होठ रख कर चूमने चाटने लगे। और साथ ही अपना एक हाथ नीचे ले कर मेरी मम्मी के पेट से होते हुए मेरी मम्मी की साड़ी की गांठ पर ले गए। और मेरी मम्मी की साड़ी की गांठ को खींच कर बाहर निकाल दिया। मेरी मम्मी की साड़ी खुल गई। तो अंकल मेरी मम्मी की साड़ी को मेरी मम्मी के बदन से निकालने की कोशिश करने लगे। तो मेरी मम्मी ने भी अपने नाजुक बदन को थोड़ा ऊपर की ओर उठा लिया। ताकि अंकल को मेरी मम्मी के बदन से साड़ी निकालने में आसानी हो। और अंकल मेरी मम्मी की साड़ी को निकाल कर मेरी मम्मी के बदन से अलग कर दी। और उसको वहीं जमीन पर हमेशा की तरह फेंकने लगे। तो मेरी मम्मी ने उनको रोका। और कहा। मम्मी: योगेश जी ये क्या कर रहे। आप ना इधर उधर फेंक देते हो। अगर वो कहीं अंदर आ गया तो कहाँ इसको ढूँढती फिरूँगी। अंकल: यार तुम डरती बहुत हो। गेट लगा हुआ है। और उसी ने बोला जमकर चोदना मम्मी को। फिर भी डर रही हो। ये लो तुम्हारी साड़ी। तो मेरी मम्मी ने अंकल से अपनी साड़ी ली। और बेड के साइड पर ही रख दी। मेरी मम्मी बिस्तर पर अपनी चुचियाँ उठाए लेटी थीं। और अंकल मेरी मम्मी पर चढ़े। मेरी मम्मी को प्यार से चूम चाट रहे थे। मेरी मम्मी से अब कंट्रोल करना मुश्किल हो रहा था। मेरी मम्मी के मुँह से सिसकियाँ निकलने लगी थीं। मेरी मम्मी का भी अब दिल करने लगा था कि अंकल अब जल्द से जल्द उनकी चुदाई करें। मेरी मम्मी: योगेश जी अब करिए। नहीं कहीं ऐसा न हो वो आ जाए। और सब बीच में ही रह जाए। अंकल: अंकुश नहीं आएगा। उसको पता है तुम चुद रही हो। मम्मी: मैं अंकुश की बात नहीं कर रही हूँ। अंकल: तो फिर कौन मादरचोद आएगा। मम्मी: वही मादरचोद जिसकी बीवी के ऊपर आप चढ़े हो। मेरा नामर्द पति। अंकल: उसे अंकुश रोक लेगा। वैसे भी अंकुश ने उसके रूम की कुंडी लगा दी है। मम्मी: आप उसके रूम की कुंडी खुलवा दो। नहीं तो उसे शक हो जाएगा। अंकल: कुंडी खुलवा दी तो कहीं वो यहाँ न आ जाए। मम्मी: आप कुंडी खुलवा दो। वो आएगा तो पहले बाहर वाले रूम में अंकुश से मिलेगा। और अंकुश उसको रोक लेगा। अंकल: ठीक है। अंकुश को बोलता हूँ। फिर अंकल मम्मी के ऊपर से उठे। और बाहर गेट खोलकर आए। मम्मी वैसे ही लेटी रहीं। और अंकल मेरे पास आकर बोले। बेटा तेरे नामर्द बाप के रूम की कुंडी खोल आ। मैं: क्यों अंकल। अंकल: बेटा उसे शक हो जाएगा। कुंडी लगी रहेगी तो। मैं: अंकल कुंडी खोल दी। वो कहीं रात को यहाँ आ गए तो। अंकल: उसे तू संभाल लेना। तू बाहर वाले रूम में है। और हम अंदर वाले में। पहले वो इस रूम में आएगा। फिर अंदर वाले में। अब सब कुछ तुझे ही संभालना होगा। मैं: ओके अंकल। अंदर से मम्मी की आवाज आती है। मम्मी: अंकुश बेटा। मैं: जी मम्मी। मम्मी: बेटा ध्यान रखना। तेरी मम्मी तेरे कहने से कंप्यूटर सीख रही है। कहीं तेरे पापा को। मैं: मम्मी आप मुझ पर भरोसा रखो। और मैं जाकर पापा के रूम की कुंडी खोल आया बाहर से। फिर अंकल को मैंने बोला। तो अंकल अंदर गए। लेकिन इस बार उन्होंने गेट को पूरा खुला छोड़ दिया। सिर्फ पर्दा लगा था। मम्मी वैसे ही लेटी थीं। अंकल वापस जाकर मम्मी के ऊपर लेटे। तो मम्मी। मम्मी: गेट बंद करो। अंकल: नहीं। वो समझदार है। वो नहीं आएगा। मम्मी: प्लीज। मुझे शर्म आएगी। अंकल: नहीं। पर्दा लगा है। और मम्मी को वापस से चूमने लगे। अंकल: वर्षा कितनी नमकीन हो तुम। और अंकल के होठ मेरी मम्मी के गालों को। और हाथ मेरी मम्मी की चुचियों को मसल रहे थे। मम्मी: योगेश जी। इन से खेलते ही रहेंगे। या इनको चूसोगे भी। पता है दिन में आपने चोदा। तब तो मेरा नामर्द पति आ गया था। तो मजा अधूरा रह गया था। तब से मैं तड़प रही हूँ। और मैंने आपको फोन भी किया। तो आपने कहा रात को आऊँगा। तब से ही आपके इंतजार में तड़प रही हैं मेरी चुचियाँ। और पता है आपके इंतजार में तड़प तड़प कर बड़ी हो गई हैं। और आपको आए एक घंटा होने वाला है। और आपने एक बार भी उनको नहीं चूसा है। अंकल: हाँ मेरी जान। और। फिर अंकल मेरी मम्मी के ब्लाउज के हुक को खोलने लगे। मेरी मम्मी उनको हुक खोलते देख मुस्कुराने लगीं। और उन्होंने मेरी मम्मी के ब्लाउज के सारे हुक खोल दिए। तो मेरी मम्मी का ब्लाउज आगे से दो हिस्सों में बँट गया। तो मेरी मम्मी ने भी अपने ब्लाउज को हिस्सों में पकड़ कर साइड में कर दिया। ब्रा में कैद मेरी मम्मी की चुचियाँ किसी कैद किए कबूतरों की तरह फड़फड़ाने लगी थीं। और बाहर आने को मचलने लगीं। और जब अंकल मेरी मम्मी के ब्लाउज को मेरी मम्मी के हाथों से बाहर निकालने लगे। तो मम्मी ने कहा। मम्मी: योगेश जी ऐसे ही रहने दीजिए। लेकिन अंकल तो मेरी मम्मी को नंगी करने पर आमादा थे। उन्होंने अपने हाथ से मेरी मम्मी के ब्लाउज को निकाल कर वहीं मेरी मम्मी की साड़ी के पास रख दिया। अंकल को और तड़पने के लिए मेरी मम्मी ने अपने हाथों को अपनी चुचियों पर रख लिया। और बोलीं। मम्मी: ऐसे क्या देख रहे हैं। क्या आज पहली बार इनको देख रहे हैं। तो अंकल ने मेरी मम्मी को अपनी बाँहों में भर लिया। और ब्रा के ऊपर से ही मेरी मम्मी की चुचियों को मसलने लगे। मेरी मम्मी भी मदहोश होने लगी थीं। और मेरी मम्मी मुँह से आह... आह... करने लगी थीं। मेरी मम्मी जानती थीं कि अंकल अब किसी भी वक्त उनके (मेरी मम्मी के) इन संतरों को ब्रा की कैद से आजाद कर देंगे। (चूत को चोदना लंड का फर्ज है। लेकिन चूत की परमिशन से। जबरदस्ती नहीं। चुदाई जरूरी है। लेकिन किसी को भी चोदो उसकी परमिशन से। लेकिन जबरदस्ती नहीं करना चाहिए। दोस्तों ये नेचुरल है। चूत चुदने के लिए। और लंड चोदने के लिए होता है। तो दोस्तों जब हमारी बहन या पत्नी या भाभी या मम्मी या चाची या वो किसी और से अपने पति के अलावा किसी और से चुदना चाहे तो उसे चुदने दीजिए। रोकिए मत। लेकिन कंडोम लगाकर। क्योंकि कोई इंफेक्शन न हो। इसलिए कंडोम जरूरी है। और चुदाई भी।) अंकल मेरी मम्मी की ब्रा के हुक को खोलने लगे। तो मेरी मम्मी ने कहा। योगेश जी अब इसको तो मत खोलिए। ऐसे ही बाहर निकाल लीजिए ना। तो अंकल ने मेरी मम्मी की ब्रा का हुक खोलते ही मेरी मम्मी की ब्रा को भी खींच कर मेरी मम्मी के बदन से अलग कर दिया। अंकल कितनी बार मेरी मम्मी की चुचियों को इस हालत में देख चुके। चूस चुके थे। लेकिन पता नहीं आज मेरी मम्मी को क्या हुआ। मेरी मम्मी ने उनके इस तरह अपनी चुचियों को देखने के साथ ही अपनी चुचियों को अपने हाथों से ढक लिया। अंकल: यार ये क्या कर रही हो। क्यों इन पर जुल्म कर रही हो। देखने दो ना। और अपने हाथों को मेरी मम्मी के हाथों के ऊपर रख कर मेरी मम्मी के हाथों को हटा दिया। अब मेरी मम्मी ऊपर से पूरी नंगी थीं। और तानी चुचियाँ अंकल की आँखों के सामने थीं। मेरी मम्मी: मम्मी अंकल की आँखों में देख कर मुस्कुरा कर। ऐसे क्या देख रहे हैं। क्या आज पहली बार देख रहे हैं। अंकल: जान कितनी खूबसूरत और मस्त हैं तुम्हारे ये रसीले आम। क्या तुम इसी लिए अपने इन आमों को मुझसे छुपा कर रखती हो। मम्मी: योगेश जी आप से नहीं बल्कि दुनिया से। आपको इनके मालिक हैं। इनको चूसने का हक सिर्फ और सिर्फ आपको ही है। और पिछले 6 महीनों से आपको ही चूसवा रही हूँ। मेरी मम्मी की बात सुन कर अंकल ने अपना एक हाथ बढ़ा कर मेरी मम्मी की तानी हुई चुची पर रख दिया। और उसको मसलने लगे। हाय तेरी चुचियाँ कितनी टाइट हैं। तुम्हारी कितनी रसीली चुचियाँ हैं। कितना रस भरा हुआ है इन दोनों चुचियों में। और मेरी मम्मी की दोनों चुचियों को अपने दोनों हाथों में पकड़ कर नींबू की तरह मसलने लगे। मेरी मम्मी भी अपना कंट्रोल खोने लगी थीं। मम्मी: योगेश जी इनको चूसिए ना। जब आप चूसते हैं तो कितना मजा आता है। और अपनी एक चुची को पकड़ कर अपने यार के मुँह की ओर ठेलने लगीं। तो अंकल ने अपना मुँह मेरी मम्मी की चुची पर रख दिया। वो मेरी मम्मी की एक चुची को चूसने लगे। और दूसरी चुची को अपने हाथ से मसलने लगे। मम्मी: सिसकते हुए। योगेश जी कितना मजा आता है। जब आप मेरे इन दूध को चूसते हैं। हाय आज शाम से आपने इनको एक बार भी प्यार नहीं किया। मैंने आपकी फोन भी की थी। आप नहीं आए। दिन में उस मादरचोद नपुंसक नामर्द ने मजा अधूरा छुड़वा दिया था। अंकल: मेरी रानी। ये मैं ही जानता हूँ कि कैसे मैंने शाम से ही तुम्हारे इन दुधेरों आमों का रस चखने के लिए अपने आप को रोका है। मैं नहीं चाहता था तुम्हारे ऊपर वो नामर्द शक करे। इसलिए नहीं आया था। और दिन में उसी नामर्द की वजह से मजा अधूरा रह गया था। मम्मी: योगेश जी। अब तो कोई नहीं रोक रहा इनको चूसने में। तो जी भर इन आमों का रस चूसिए। योगेश जी वैसे ही चूसिए जैसे रोज चूसते हैं। पूरा मुँह में भर कर खींचिए। और अंकल मेरी मम्मी की पूरी चुची को जितना मुँह में हो सकता भरते। और खींचते। सच उस समय मेरी मम्मी के मुँह से इतनी सिसकियाँ निकलतीं। मैं बता नहीं सकता। ये तो मैं जानता हूँ। मेरी मम्मी ने मेरे बाहर वाले रूम में होने की वजह से कंट्रोल किया। क्योंकि गेट खुला था। सिर्फ पर्दा लगा था। नहीं तो मेरी मम्मी अपनी आहें आह की आवाजों से पूरा कमरा सिर पर उठा लेतीं। मम्मी: योगेश जी दोनों को एक साथ चूसिए ना। मैं दबाती हूँ। और मेरी मम्मी ने अपनी चुचियों को कस कर दबा लिया। और अंकल मेरी मम्मी के दोनों निप्पल को एक साथ अपनी जीभ से छेड़ते। मेरी मम्मी की चूत नीचे समुंदर बहा रही थी। मेरी मम्मी से रहा नहीं गया। तो मम्मी ने कहा। मम्मी: योगेश जी अब और मत तड़पाइए। आ जाएगी ना। बस और बर्दाश्त नहीं होता। तो अंकल अपने हाथ को नीचे की ओर ले गए। और मेरी मम्मी के पेटीकोट के नाड़े को पकड़ कर उसको खींचने लगे। मेरी मम्मी ने उनका हाथ पकड़ लिया। और बोलीं। योगेश जी ये क्या कर रहे। इससे क्यों खोल रहे हो। अंकल: यार क्या हुआ। अगर इससे नहीं खोलूँगा तो फिर कैसे होगा। मेरी मम्मी: करने के लिए इसको खोलने की क्या जरूरत है। आप इसको मत खोलिए। कहीं वो आ गया तो। आप तो करना ही है। तो मेरे पेटीकोट को उठा कर जल्दी से कर लीजिए। अंकल: जान तुम तो जानती हो। ऐसे मजा नहीं आता। जब तक तुम्हें पूरी नंगी करके न लूँ। तो कहाँ मजा आएगा। यार मजा तो नंगी करके ही लेने में आता है। जब मेरा पूरा बदन तुम्हारे बदन से टकराता है। और अंकुश है। वो सब संभाल लेगा। मम्मी: मैं जानती हूँ। आप मुझे नंगी किए बिना नहीं मानेंगे। अंकल: हाँ जान। अब हाथ हटाओ। तो मम्मी। मम्मी: हटाती हूँ। और मेरी मम्मी ने अपना हाथ हटाते हुए मुस्कुरा कर कहा। आपको पूरा मजा चाहिए। जरा भी कोऑपरेट नहीं करते आप तो। मेरी मम्मी का हाथ हटते ही अंकल ने मेरी मम्मी के पेटीकोट का नाड़ा खींचने लगे। पर वो नहीं खुल रहा था। तो वो थोड़ा झुंझला कर बोले। अरे यार इतनी टाइट क्यों बाँधती हो। तो मेरी मम्मी ने भी कहा। मैं कहाँ नाड़ा इतना टाइट बाँधती हूँ। आप भी तो रोज खोलते हैं। पता नहीं आज थोड़ा कस कर बाँध गया। अंकल: क्या अंकुश को बुलाऊँ। मम्मी: उसे क्यों बुला रहे हो। अंकल: तुम्हारे पेटीकोट का नाड़ा खोलने के लिए। मम्मी: वो पूछेगा क्यों खुलवा रहे हो मेरी मम्मी का पेटीकोट का नाड़ा। तो क्या बोलोगे। अंकल: यही कि तेरी मम्मी चुदवाने के लिए तड़प रही है। और नाड़ा नहीं खुल रहा है। मम्मी: आपकी इतनी हिम्मत। जरा बुलाकर दिखाओ। मैं भी तो देखूँ आप कैसे बुलाते हो। अंकल: मुझे जोर से आवाज दी। अंकुश बेटा। मम्मी: नहीं रुकिए। मैं: जी अंकल। बाहर वाले रूम से। क्या हुआ अंकल। मम्मी: कुछ नहीं बेटा। ये तो वैसे ही बोल रहे हैं। और मम्मी अपने कान पकड़ के सॉरी बोलने लगीं। तो अंकल। अंकल: कुछ नहीं बेटा। मैं ये पूछ रहा था। तू कब तक सोएगा। मैं: अंकल बस सोने ही वाला हूँ। मम्मी: अब सो जा बेटा। मैं: ओके मम्मी। फिर मम्मी धीमी आवाज में। क्या मरवाओगे मुझे। अंकल: तूने ही तो कहा अंकुश को बुलाने के लिए। मम्मी: आप पिटोगे। अंकल: पिट लेना। पर पहले तेरी चूत फाड़ने दे। और अंकल मेरी मम्मी के पेटीकोट का नाड़ा जोर से खींचने लगे। तो मम्मी: योगेश जी रुकिए। आप तो इसको तोड़ ही देंगे। पता नहीं रात में कैसे फिर इस पेटीकोट में मैं नाड़ा डालती रहूँगी। और मेरी मम्मी ने खुद अपना पेटीकोट खोलने में अंकल की मदद की। और पेटीकोट का नाड़ा खुल गया। अंकल मेरी मम्मी के पेटीकोट को मेरी मम्मी की टाँगों से बाहर निकालने लगे। मेरी मम्मी का पेटीकोट नीचे मेरी मम्मी के चूतड़ों में फँसा हुआ था। तो अंकल ने कहा। वर्षा अब तेरी गाँड को उठा। मुझे उसे बाहर निकालना है। मम्मी: तो मैंने कब मना किया है। निकाल दो। अंकल: तेरे चूतड़ के नीचे दबा है। अब थोड़ी गाँड ऊपर उठा। फिर मम्मी ने अपने चूतड़ धीरे धीरे ऊपर उठाए। तो अंकल ने मेरी मम्मी का पेटीकोट मेरी मम्मी के टाँगों से निकाल कर नीचे जमीन पर फेंकने लगे। तो मेरी मम्मी बोलीं। मम्मी: मैंने आप से कहा है। इधर उधर मत फेंकिए। कहीं वो आ गया तो मैं ढूँढती फिरूँगी। अंकल: तू किससे डर रही है। मम्मी: उस नामर्द से। अंकल: बाहर अंकुश बैठा है। डरने की जरूरत नहीं है। और अंकल अपने कपड़े उतारने लगे। और नंगे हो गए। और मेरी मम्मी के साथ ही आकर लेट गए। और मेरी मम्मी के होठों को चूमते अपने हाथ को नीचे मेरी मम्मी की पैंटी के ऊपर मेरी मम्मी की चूत पर रख दिया। मेरी मम्मी की पैंटी उस समय मेरी मम्मी की चूत के रस से एकदम गीली हो चुकी थी। और अंकल अपने हाथ से मेरी मम्मी की चूत को सहलाते बोले। अंकल: वर्षा क्या बात। आज बहुत पानी छोड़ रही है तेरी चूत। मम्मी: योगेश जी आप ऐसे ही मेरे पूरे बदन को छेड़ोगे तो क्या पानी नहीं छोड़ूँगी। पता है आज दिन में वो नामर्द आ गया। तो इसकी प्यास नहीं बुझ पाई थी। और तभी से ये तड़प रही है। पिछले 10 दिनों से ये लगातार आपके लंड से चुद रही है। और आपसे दूर नहीं रही है। और 10 दिन आज ही ऐसा दिन आया है। जब ये आपसे 6 घंटे से भी ज्यादा दूर रही है। पिछले 10 दिन मेरी चूत आपके लंड से चिपकी हुई है। सोते समय भी आपके लंड को अपने अंदर तो नहीं। लेकिन बाहर से चिपक कर सोती है। लेकिन आज 6 घंटे आपसे दूर रही है। अंकल: 6 घंटों में इसका ये हाल हो गया। तो अब तो तेरा नामर्द पति वापस आ गया है। तो अब कैसे रहेगी मेरे लंड के बिना। मम्मी: आप अंकुश से कहना। और इसी रूम में आप मुझे दिन रात चोदना। अंकुश मुझे इस रूम में बुला लेगा। और आपको छिपा देगा। आप अंकुश से बात करना। अब मेरी चूत आपके लंड के बिना नहीं रह पाएगी। अंकल: ऐसी बात है मेरी जान। लो मैं अभी अपनी रानी को प्यार करता। और नीचे मेरी मम्मी की जाँघों पर झुक कर मेरी मम्मी की जाँघों को चाटने लगे। तो मम्मी: योगेश जी ये क्या कर रहे हैं। अब ऐसे क्यों चाट रहे हैं। जल्दी से अपना मेरे अंदर डाल दीजिए ना। अंकल: यार तुम्हें पता है कि मुझे तुम्हारी चूत चाटने में कितना मजा मिलता है। जानती हो ना। जब मैं तुम्हारा रस पीता हूँ ना। कितनी एनर्जी मिलती है मुझे। मेरी जान ये तुम्हारा जो रस है। एनर्जी टॉनिक है मेरे लिए। इससे पी कर तो मेरे अंदर एक नया जोश भर जाता है। जब से मेरी जान तुम्हारे इस अमृत को पीना शुरू किया है ना। अपने आप को एकदम तंदुरुस्त महसूस करने लगा हूँ। अपने यार की इस बात पर मेरी मम्मी अंकल की तरफ देख कर मुस्कुरा कर। मम्मी: अगर ऐसी बात है योगेश जी। तो फिर मैं आपको ये एनर्जी टॉनिक पीने से नहीं रोकूँगी। अंकल मेरी मम्मी की चिकनी जाँघों को चाटने लगे। और फिर अपने होठों को ठीक मेरी मम्मी की गीली पैंटी के ऊपर मेरी मम्मी की चूत पर रख कर मेरी मम्मी की चूत को पैंटी के साथ ही चूसने लगे। मम्मी: योगेश जी इसको उतार कर चाटिए ना अच्छे से। अंकल: मेरी जान अपनी रानी का इतना कीमती रस जो इस पर चड्डी पर ही क्या। मैं उसे ऐसे ही वेस्ट कर दूँ। मैं तो रानी की चूत से निकले अमृत की एक एक बूँद को अपने होठों में लेकर पी जाऊँगा। अंकल मेरी मम्मी की पैंटी पर मेरी मम्मी की चूत के रस को अच्छी तरह से चूस कर। अंकल ने अपनी उँगलियाँ मेरी मम्मी की पैंटी में फँसाईं। और मेरी मम्मी की पैंटी को नीचे खिसकाने लगे। तो फिर से मेरी मम्मी के चूतड़ों की वजह से पैंटी नहीं उतर रही थी। तो अंकल ने मेरी मम्मी को अपने चूतड़ ऊपर उठाने का इशारा किया। तो मेरी मम्मी ने भी अपनी गर्दन हाँ में हिला कर इशारा किया। और अपने चूतड़ों को ऊपर उठा लिया। तो अंकल ने मेरी मम्मी की पैंटी मेरी मम्मी की टाँगों से बाहर निकाल दी। अब मेरी मम्मी एकदम नंगी अंकल के सामने लेटी थीं। तो मेरी मम्मी ने अंकल से कहा। मम्मी: योगेश जी जल्दी कीजिए ना। डाल दीजिए ना। अब मुझसे कंट्रोल नहीं हो रहा। अंकल: यार तुम्हें क्या लगता है। तुम ही कंट्रोल नहीं कर पा रही हो। क्या मैं कंट्रोल कर पाऊँगा। और मेरी मम्मी का हाथ पकड़ कर अपने खड़े लंड पर रख कर मेरी मम्मी से बोले। देखो ये बेचारा शाम से कैसे तड़प रहा है। शाम से ही भूखा है तुम्हारी चूत का। तेरी चूत से ही इसकी भूख मिटेगी। आज दिन में तुम्हारे नामर्द पति ने आकर तुम्हारी चूत की चुदाई ढंग से नहीं होने दी। और तभी से ये भूखा है। मेरी मम्मी: अंकल की इस बात पर हँसते हुए धीरे से उनके लंड को सहलाती बोलीं। मेरे रहते ये भूखा रहे। ये कभी नहीं होगा। अभी इसकी भूख को शांत कर दूँगी मैं। और रही दिन की बात तो उस मादरचोद नपुंसक ने दिन में घर आकर अच्छा नहीं किया। कल उस मादरचोद को मैं खाने में पेट खराब करने वाली दवा मिला दूँगी। जिससे उस मादरचोद का पेट खराब हो जाएगा। अंकल: ऐसा मत करना। नहीं तो वो नामर्द पूरे दिन घर पर ही रहेगा। मम्मी: तो क्या करूँ उस नामर्द का। आप ही बताओ। अंकल: उसे कुछ नहीं करो। उस नामर्द को बाद में देखेंगे। अभी तो इस लंड का इलाज करो। मम्मी: लंड को सहलाती हुई। योगेश जी अब और मत तड़पाइए। डाल दीजिए ना मेरे अंदर। और बिस्तर पर लेट कर मेरी मम्मी ने अपनी दोनों टाँगों को पूरा फैला दिया। तो अंकल मेरी मम्मी की टाँगों के बीच आ गए। और अपने लंड को मेरी मम्मी की चूत के ऊपर टिकाने लगे। तो मेरी मम्मी ने उन्हें रोका। मम्मी: ये क्या कर रहे हैं योगेश जी। पहले इस पर वो तो चढ़ा लीजिए। अंकल: यार आज कंडोम के बिना ही करते हैं ना। मम्मी: नहीं नहीं। बिना उसके अभी नहीं। जानते हैं ना आपका कितना निकलता है। और मुझे पता है। एक बार ही आपने अपना माल मेरे अंदर गिराया। तो अगले ही दिन मैं बड़ा पेट ले कर घूमती रहूँगी। अंकल: जान। तो क्या तुम नहीं चाहती कि हमारा भी कोई बच्चा हो। मम्मी: क्या योगेश जी। मैंने ऐसा तो नहीं कहा। पर अभी आप इस पर वो कंडोम चढ़ा लीजिए। अंकल: यार अब वो कहाँ पड़ा है। मम्मी: वो मेरे रूम की ड्रॉअर में पड़ा है। कल ही उसे वहाँ से उठा कर रखूँगी। क्योंकि उस नामर्द ने अगर देख लिया तो समझ जाएगा कि इस घर में इसकी क्या जरूरत है। कौन इसको इस्तेमाल करता है। क्योंकि वो तो इस्तेमाल करता ही नहीं। वो इस्तेमाल करेगा भी कैसे। वो तो नामर्द नपुंसक है। उसने तो पिछले 19 साल से मेरी चूत में लंड घुसाया ही नहीं है। अंकल: जान तू कितनी समझदार है। और तू चिंता मत कर। उस नामर्द ने पिछले 19 सालों से लंड नहीं घुसाया तेरी चूत में। तो क्या। मैं तो घुसा रहा हूँ पिछले 6 महीनों से। पर अब बात ये है। इस रूम में तो वो नामर्द सो रहा है। मैं तो कंडोम लेने उस रूम में नहीं जा सकता हूँ। अब तू ही उस रूम में जाकर निकाल कर ला। और मेरे इस लंड पर चढ़ा दे। मम्मी: योगेश जी आप भी ना। आप बिना सोचे समझे ही बोल देते हैं। मैं उस रूम में कैसे जाऊँगी। अंकल: क्यों नहीं जा सकती। वो तेरा रूम है। मम्मी: अभी भी नहीं समझे। मैं क्यों नहीं जा सकती। अंकल: नहीं समझा। अब तू ही बता। मम्मी: मैं इस समय नंगी हूँ। और नंगी कैसे जाऊँगी। मुझे कपड़े पहनने पड़ेंगे। और वो आप मुझे पहनने नहीं देंगे। तो मैं नंगी कैसे जाऊँगी। और इस रूम से निकलूँगी तो अंकुश बाहर वाले रूम में है। वो मुझे नंगी देख लेगा। अंकल: तो क्या हुआ। तूने बताया था तू उसके सामने नंगी भी रह लेती है। वो तेरा बेटा है। मम्मी: हाँ। मैं उसके सामने नंगी रह लेती हूँ। पर इस समय मैं आपके साथ इस रूम में हूँ। और मैं इस रूम से नंगी निकलूँगी तो मुझे शर्म आएगी। माँ बेटे के बीच शर्म भी जरूरी है। भले ही उसे पता है मैं आपसे चुदने के लिए नंगी हुई हूँ। पर वो मेरा बेटा है। और फिर मैं उस मेरे वाले रूम में जाऊँगी। तो वो नामर्द मुझे नंगी देखेगा। तो बखेड़ा खड़ा कर देगा। अंकल: तू सही कह रही है। मैं अंकुश को बोलता हूँ। वो ला देगा। मम्मी: नहीं नहीं। उसे मत बोलिए। मुझे शर्म आती है। अंकल: तू चुप रह। मैं बोलता हूँ फिर। मम्मी: उसे फोन से बोलिए। मुझे शर्म आएगी। अंकल: तो बाहर जाकर बोलूँ। मम्मी: नहीं। व्हाट्सएप पे मैसेज कर दो। फिर अंकल ने मुझे व्हाट्सएप पे मैसेज किया। मैसेज: अंकुश बेटा तेरी मम्मी की ड्रॉअर में कंडोम रखे हैं। तू जाकर कंडोम ले आ। मैं: अंकल कितने कंडोम लाने हैं। अंकल: आज तू जितनी बार अपनी मम्मी को चुदवाना चाहे। इतने ही कंडोम ले आ। मैं: अंकल मैं तो चाहता हूँ आप मेरी मम्मी को अनगिनत बार प्यार करो। पर मम्मी आपसे कितनी बार चाहती हैं। मैं उतने ही ले आऊँगा। अंकल ने मम्मी की तरफ देखा। तो मम्मी ने अंकल से मोबाइल लिए। और खुद ही मैसेज टाइप करने लगीं। मैसेज: बेटा तेरी मम्मी ने कहा है। आज मैं इतनी बार चुदूँगी जितनी बार अंकुश चाहेगा। इसलिए तू कंडोम ले आ। ये मैसेज मेरी मम्मी ने ही टाइप किया था। जो मैं कैमरा की मदद से देख रहा था। फिर मैं मम्मी पापा के रूम में गया। वहाँ देखा पापा लैपटॉप पर कुछ काम कर रहे थे। पापा: बेटा कैसे आया। मैं: (अब मैं पापा को कैसे बताता कि कंडोम लेने आया हूँ। आपकी बीवी ने मँगवाए हैं योगेश अंकल से चुदवाने के लिए।) मैं पापा वो मम्मी का गाउन लेने आया हूँ। ड्रॉअर में रखा है। पापा: ले जा। और तेरी मम्मी से बोलना। मुझे सुबह 10 बजे से पहले न उठाए। क्योंकि कल मैं ऑफिस देर से जाऊँगा। मैं: ओके पापा। फिर मैंने मम्मी की ड्रॉअर खोली। और एक गाउन उठाया। क्योंकि गाउन उठाना जरूरी था। नहीं तो पापा को क्या बताता। और मम्मी ने बहुत सारे कंडोम रख रखे साड़ी के नीचे। मैंने उसमें से कुछ कंडोम उठाने लगा। फिर मैंने सोचा सारे ही ले चलता हूँ। जितने यूज करने होंगे कर लेंगे। और मैंने सारे कंडोम को गाउन के अंदर रखा। और अपने रूम में चला आया। और पर्दे के नीचे से मैंने अंदर वाले रूम में 6 कंडोम डाल दिए पर्दे के अंदर नीचे से हाथ से। फिर मैंने अंकल को मैसेज किया। मैसेज: अंकल मैं कंडोम ले आया हूँ। और साथ में मम्मी का गाउन भी लाया हूँ। वो पापा जाग रहे थे। उन्होंने पूछा तो मैंने गाउन का बहाना बना दिया। और पूरे कंडोम ले आया हूँ। और गाउन और पूरे कंडोम मेरे बेड पर रखे हैं। और मैंने 6 कंडोम पर्दे के नीचे से रूम में डाल दिए हैं। और पापा ने कहा है। कल सुबह 10 बजे उठेंगे। उससे पहले उन्हें नहीं उठाना है। और कल पापा देर से ऑफिस जाएँगे। इसलिए पापा ने बोला है। कोई उनके रूम में 10 बजे से पहले न जाए। मैसेज की बेल दोनों ने सुनी। तो अंकल ने मैसेज पढ़ा। और मुस्कुराने लगे। अंकल को मुस्कुराते देख मम्मी ने मोबाइल लिए। और पढ़ने लगीं। फिर मम्मी भी मुस्कुराते हुए उठीं। और बेड से उतरकर पर्दे के पास आती हैं। और 6 कंडोम उठा लेती हैं। और वापस बेड पर जाती हैं। और अंकल से बोलती हैं। मम्मी: मेरा बेटा ने 6 कंडोम दिए। आप उसकी मम्मी को 6 बार चोदना पूरी रात में। अंकल: जो हुक्म महारानी। अब जल्दी से कंडोम को मेरे लंड पर चढ़ाओ। तो मम्मी ने एक कंडोम के रैपर को फाड़ा। और कंडोम निकाल कर अंकल के लंड चढ़ाने लगीं। लेकिन मम्मी ने अचानक पहले अंकल के लंड को किस किया। और जीभ से चाटने लगीं। और फिर लंड पर चढ़ाया। और बोलीं। कल सुबह 10 बजे तक मैं आपको इन कंडोम को यूज करवाऊँ। पूरे 6 हैं। अंकल: 6 तो यहाँ हैं। बाकी बाहर वाले में अंकुश के बेड पे तेरे गाउन के साथ रखे हैं। मम्मी: तो शुरुआत कीजिए। सुबह 10 बजे तक। अभी 10 बजे हैं रात के। और पूरे 12 घंटे हैं। अंकल: बीच में ये तो नहीं कहेगी। थक गई हूँ। अब सो जाते हैं। मम्मी: पता नहीं। कह भी सकती हूँ। पर ये तो आप पर डिपेंड करेगा। आप मुझे सोने देंगे या नहीं। ये कह कर मेरी मम्मी अंकल के सामने अपनी टाँगें चौड़ी करके लेट गईं। इस बार अंकल ने एक तकिया उठाया। और उसे मेरी मम्मी के चूतड़ों के नीचे रख दिया। जिससे कि मेरी मम्मी की पोजीशन ठीक हो जाए। मेरी मम्मी की चूत थोड़ी ऊपर उठ गई। मेरी मम्मी: ये क्या कर रहे हैं योगेश जी। इससे क्यों नीचे लगा रहे हैं। अंकल: यार इस पोजीशन में लंड और भी अंदर तक जाएगा। मेरी मम्मी: क्या योगेश जी। और कितना अंदर तक घुसाएँगे आप। अपना लंड मेरे अंदर। आगे ही कितना अंदर तक तो जाता है। अंकल: मेरी रानी। जितना अंदर तक जाता है। उतना मजा भी तो देता है। अंकल की इस बात पर मेरी मम्मी मुस्कुरा पड़ीं। फिर अंकल ने अपनी उँगली चाटी। और उसमें थूक लगा के मेरी मम्मी की चूत में रगड़ा। मेरी मम्मी भी अपने चूड़ियों से भरे हाथों से अपने यार के लंड को सहला रही थीं। फिर अंकल धीरे धीरे नीचे आए। और मेरी मम्मी ने उनके लंड को पकड़े रखा। और मेरी मम्मी ने अपनी चूत के छेद पर अंकल का लंड लगा दिया। वैसे अब मेरी मम्मी और अंकल दोनों को अब इस बात की चिंता नहीं थी कि मेरा नामर्द बाप कभी भी अंदर आ सकता है। क्योंकि उनकी पहरेदारी के लिए मैं बाहर बैठा था। अंकल जो कि मेरी मम्मी की टाँगों के बीच थे। और मेरी मम्मी ने उनका लंड पकड़ कर अपनी चूत पर लगाया हुआ था। तो उन्होंने मेरी मम्मी की टाँगों को पकड़ कर एक जोरदार धक्का मारा। तो उनका लंड सीधा दनदनाता मेरी मम्मी की चूत के अंदर तक घुस गया। तो मेरी मम्मी ने कहा। मम्मी: हल्के से चीखते हुए। उई माँ ओह... क्या योगेश जी। आप एक बार में ही घुसा डालते हो। अंकल: यार अब तुम भी तो एक बार में पूरा ले तो लेती हो। मम्मी: क्या आप भी ना। रोज लेती हूँ। तो क्या अभी नहीं ले पाऊँगी क्या। लेकिन आप कम से कम धीरे धीरे ही अंदर घुसाइए कीजिए। लेकिन नहीं। आपको तो एक ही धक्के में पूरा अंदर घुसाने में मजा आता है। वैसे योगेश जी आज मुझे आपका लंड कुछ ज्यादा मोटा लग रहा है। अंकल: वो मेरी जान। शाम से बेचैन था तुम्हारे लिए। इसलिए लग रहा होगा। और अंकल अपने लंड को 3-4 इंच बाहर की ओर खींचा। और फिर एक ही झटके में जड़ तक मेरी मम्मी की चूत में घुसा दिया। मेरी मम्मी के मुँह से हल्की सी चीख निकली। जिसे मेरी मम्मी ने अपने होठों में दबा लिया। अंकल के इस धक्के पर मेरी मम्मी बेड पर लगभग 3-4 इंच आगे खिसक गईं। मेरी मम्मी: उफ... अरे थोड़ा धीरे धक्का... माँ... र...ई...ए... बड़ा मोटा है आपका। धीरे प्यार से करिए ना। मैं कहीं भागी तो नहीं जा रही हूँ। अंकल: हम्मम यार। तुम जानती हो कि तुम जब सामने होती हो तो मुझसे कंट्रोल नहीं होता। और नीचे झुके। और मेरी मम्मी के होठों पर अपने होठ रख कर चूमने लगे।
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update 49
अब मेरी मम्मी की चूत ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया। जिससे अंकल का लंड अब आसानी से मेरी मम्मी की चूत में जड़ तक बिना किसी रुकावट के आ जा रहा था। और अंकल मेरी मम्मी के ऊपर चढ़े। मेरी मम्मी के दोनों पैरों को और फैला दिया। और लंड को फिर बाहर निकाल कर हल्के से स्मूथली मेरी मम्मी की चूत के अंदर एक रिदम के साथ डालने लगे। अंकल ने एक रिदम के साथ मेरी मम्मी की चूत के ऊपर धक्के मारना शुरू कर दिए। और धीरे धीरे मेरी मम्मी को चोदने लगे। मेरी मम्मी को भी अब अच्छा लगने लगा था। मेरी मम्मी ने अपनी बाँहें अंकल के गले में डाल कर उन्हें अपनी बाँहों में कस लिया। जबकि मेरी मम्मी के मुँह से सिसकियाँ बराबर निकल रही थीं। उधर पापा मम्मी के रूम में पापा अकेले थे। जो कि लैपटॉप में काम कर रहे थे ऑफिस का। उनको क्या पता उनकी बीवी उनके बेटे के रूम में अपने यार से चुदाई करवा रही है। वो भी अपने बेटे की ही मदद से। बेटे के रूम के अंदर उन्होंने एक रूम बनवाया। उसी में उनकी बीवी उसके यार से चुदाई करवा रही है। खुद उनका बेटा उनकी पत्नी को पड़ोसी से चुदवा रहा है। और उनकी बीवी नंगी होकर अपनी रंगें खोलकर अपने यार के लंड से चुद रही है। लेकिन इन सब से मेरे नामर्द पापा अनजान थे। क्योंकि उन्हें लग रहा होगा उनकी बीवी उनके बेटे के साथ सो रही है। माँ बेटे सो रहे हैं। लेकिन पापा को महसूस हुआ होगा या वो बाहर हॉल में आए होंगे। तो उन्हें लगा होगा मैं जाग रहा हूँ। हो सकता है मेरे रूम की लाइट जल रही थी। इसलिए उन्हें लगा होगा मैं जाग रहा हूँ। और रात के 11 बजने वाले थे। तो पापा ने मेरे रूम का गेट खटखटाया। तो गेट के खटखट से अंदर रूम में मेरी मम्मी और अंकल की कामवासना में विघ्न हुआ। और मेरी मम्मी और अंकल दोनों की हालत टाइट हो गई। क्योंकि वो जानते थे कि ये मेरे पापा ने ही खटखटाया है। तो निश्चित रूप से मम्मी या मुझे जवाब देना जरूरी था। लेकिन मम्मी की तो डर से हवा टाइट थी। बेचारी वो तो कुछ बोल नहीं सकती थीं। और ना ही गेट खोल सकती थीं। क्योंकि वो तो नंगी अपने यार के लंड के नीचे थीं। और उन्हें कपड़े पहनने में समय लगता। तो अब बोलने की बारी मेरी थी। तो मैंने ही हिम्मत करके कहा। कौन। पापा: बेटा मैं हूँ। तो मम्मी पापा की आवाज सुनकर और ज्यादा डर गईं। इस समय अंकल मेरी मम्मी के ऊपर चढ़े हुए थे। और उनका मूसल लंड अभी भी मेरी मम्मी की चूत में ही फँसा हुआ था। मेरी मम्मी अपनी गाँड को पीछे खींचती हुई उनके लंड को निकालने की कोशिश करने लगीं। पर अंकल अपने लंड को निकालने नहीं दे रहे थे। और फिर से मेरी मम्मी की चूत के जूस से गीले लंड को एक धक्का मार मेरी मम्मी की चूत के अंदर डाल दिया। मेरी मम्मी ने उन्हें आँखों के इशारे से अपने ऊपर से उठाने का इशारा किया। लेकिन अंकल इशारे से मेरी मम्मी को चुप करा कर मेरी मम्मी के ऊपर ही चढ़े रहे। अंकल मेरी मम्मी के ऊपर चढ़े धीरे धीरे अपनी कमर को चला कर अपना लंड मेरी मम्मी की चूत के अंदर बाहर कर रहे थे। मैं ये लाइव देख रहा था मोबाइल में। और पापा बाहर खड़े थे। पापा की फिर से आवाज आई। बेटा अंकुश। मैं हूँ। तेरा पापा। मैं अब भी कुछ नहीं बोला। तो पापा ने फिर से कहा। बेटा अंकुश जवाब दे। तुम लोग सोने ठीक हो ना। मैं: हाँ। क्यों पापा। पापा: मुझे लगा तुम लोग सोए नहीं। मैं: ऐसा कुछ नहीं है पापा। मम्मी तो कब की सो गईं। पापा: बेटा वर्षा को तो लाइट में नींद नहीं आती है। तो वो कैसे सो गईं। तेरे रूम की तो लाइट जली हुई है। मैं: पापा मम्मी तो सो गईं। शायद वो आज दिन में आंटी के साथ मार्केट गई थीं। इसलिए थकान हो गई होगी। इसलिए लाइट में ही सो गईं। पापा: ठीक है। लेकिन तू क्यों नहीं सोया अभी तक। मैं: पापा मैं स्टडी कर रहा हूँ। पापा: बेटा 11 बजने वाले हैं। अब सो जा। मैं: पापा अभी थोड़ी देर में सोता हूँ। पापा: ओके बेटा। और हाँ सुबह 11 बजे तक उठूँगा। थोड़ी तबियत खराब है। इसलिए। मैं: पापा आपने तो कहा था 10 बजे तक। पापा: बेटा अब बोल रहा हूँ 11 तक। मैं: ओके पापा। फिर पापा चले गए वापस। फिर मैंने वापस मोबाइल में देखने लगा। अंदर अंकल लगातार अपनी कमर चलाकर मेरी नाजुक फूल जैसी मम्मी की चूत में नॉन स्टॉप धक्के मार रहे थे। मेरी मम्मी तो बाहर दरवाजे पर पापा के आने से ही पसीने पसीने हो गई थीं। जबकि अंकल बिना रुके मम्मी को चोदे जा रहे थे। पापा से बात कर रहा था तब भी अंकल मम्मी को चोद रहे थे। जबकि मेरी मम्मी अंकल के नीचे पड़ी डर के मारे एकदम से ठंडी हो गई थीं। मम्मी को उसी पोजीशन में चोदते हुए 40 मिनट से ज्यादा हो गया था। अब तो पापा को गए हुए भी लगभग 30 मिनट से ज्यादा हो गया। तो मम्मी अंकल से बोलीं। चुदाई का मजा भी ले रही थीं। और डर भी। दोनों साथ साथ। और मम्मी को चुदाई का मजा और डर दोनों साथ में मिल रहा था। मेरी मम्मी: योगेश जी जल्दी कर लीजिए ना। आप कहीं वो आ न जाएँ। अंकल: यार कर तो रहा हूँ। तुम भी ना। बस लेटी रहो। नहीं आएगा वो। उसे अंकुश ने वापस भेज दिया है। मम्मी: पता नहीं आज आपका हो ही नहीं रहा। मेरा तो हो चुका है। मेरी मम्मी भी नीचे से अपने चूतड़ों को तेज तेज उठाने लगी थीं। कि ताकि अंकल का जल्दी से निकल जाए। अंकल का चेहरा उस समय काफी टेंस्ड था। जिससे उनका लंड और फूल गया था। जिससे वो और जोर जोर से धक्के मेरी मम्मी की चूत में मार रहे थे। उनका लंड अब मेरी मम्मी की चूत में बड़ी आसानी से अंदर बाहर हो रहा था। मम्मी: योगेश जी अब उसकी आवाज फिर से नहीं आई। लगता है वो नामर्द चला गया है। अंकल: जाएगा क्यों नहीं। उसका बेटा उससे बोल रहा है। पापा आप जाओ। तो जाएगा ही ना। और उसे क्या पता उसका बेटा ही उसकी बीवी को मेरे से चुड़वा रहा है। और उसका बेटा ही उसकी मम्मी की चुदाई की बाहर वाले में पहरेदारी कर रहा है। मेरी मम्मी: मुस्कुराते हुए अंकल की आँखों में देखते हुए। सिर्फ पहरेदारी कर रहा है या कंडोम भी लाकर दे रहा है। और मेरी मम्मी ने अपनी बाँहें अंकल के गले में डाल कर खुद ही उनको चूमने लगीं। अंकल अब अपना पूरा लंड एक ही झटके में मेरी मम्मी की चूत से निकालते। और फिर उसे जड़ तक मेरी मम्मी की चूत में पहुँचा देते। अब तो मेरी मम्मी नीचे से अपने चूतड़ उठा उठा कर अपने यार का साथ देने लगी थीं। मेरी मम्मी: आह... योगेश जी धीरे धीरे। आह... आज आपको क्या हो गया। आपका हो नहीं रहा। उई माँ। बस कीजिए। मेरा 2 बार हो चुका है। आज आपने क्या खाया है। बस कीजिए। आह... और मेरी मम्मी ने अंकल को रुकने को कहा। तो अंकल बोले। अंकल: यार अब क्या हुआ। मेरी मम्मी: मेरी मम्मी मुस्कुरा कर बोलीं। कुछ नहीं। वो आप दूसरी तरह से कीजिए ना। और मुस्कुराने लगीं। तो अंकल मुस्कुराते मेरी मम्मी के ऊपर से उठे। मेरी मम्मी अपने दोनों हाथ आगे करके अंकल के सामने घोड़ी की तरह हो गईं। और अपनी गाँड को थोड़ा सा ऊपर की ओर उठा लिया। मेरी मम्मी के मस्त चूतड़ देख कर अंकल जो मेरी मम्मी के चूतड़ों को प्यार से सहलाने लगे। अंकल: वर्षा तेरे चूतड़ कितने मस्त हैं। आज तो तेरी गाँड। मम्मी: नहीं नहीं। और फिर वापस से लेट गईं। अंकल: क्या हुआ वर्षा। घोड़ी बनो। मम्मी: नहीं। मेरा दिल धकाने लगा कि कहीं आप मेरे पीछे वाले दरवाजे का उद्घाटन आज ही न कर डालें। अंकल: वर्षा क्यों। क्या प्रॉब्लम है। मम्मी: मुझे मेरी गाँड का उद्घाटन करवाने में कोई आपत्ति नहीं। क्योंकि मैं जानती हूँ आज नहीं तो कल मेरे इस छेद का भी आप जरूर इस्तेमाल करेंगे। और आपका मेरे पूरे बदन पर अधिकार है। लेकिन मैं अभी आपसे गाँड नहीं मरवाना चाहती। अंकल: तो कब देगी मुझे अपनी गाँड। मम्मी: प्लीज। मैं खुद आपको अपनी गाँड दूँगी। जब मुझे लगेगा तब। पर प्लीज आप कभी मत बोलना। मैं खुद दे दूँगी। अंकल: ओके। अब घोड़ी बन। तो मेरी मम्मी घोड़ी बन गईं। और बोलीं। अब डालिए। तो अंकल ने भी मेरी मम्मी की कमर को पकड़ कर फिर से मोर्चा संभाल लिया। और अपने लंड को मेरी मम्मी की चूत पर सेट करके धक्के मारने लगे। तो मेरी मम्मी ने कहा। मेरी मम्मी: योगेश जी आराम से करना। अंकल: यार आराम से करने में क्या मजा। और एक धक्का मारा। मेरी मम्मी की चूत के रस से मेरी मम्मी की चूत पहले ही काफी चिकनी हो चुकी थी। सो उनको एक ही धक्के में अपना लंड मेरी मम्मी की चूत में जड़ तक घुसा दिया। और मेरी मम्मी की कमर को पकड़ कर मेरी मम्मी की तबादतोड़ चुदाई फिर से शुरू कर दी। अंकल का लंड मेरी मम्मी की चूत में मेरी मम्मी के अंदर की चिकनाई की वजह से बिना किसी रुकावट के अंदर आ जा रहा था। अंकल ने अपने हाथ जो मेरी मम्मी की कमर पर थे। उनको मेरी मम्मी की कमर से हटा कर मेरी मम्मी के लटक रहे संतरों को अपने हाथों में ऐसे थाम लिया। जैसा कोई घुड़सवार किसी घोड़ी पर चढ़े उसकी लगाम को थाम लेता है। और अंकल मेरी मम्मी की चुचियों को पकड़े जोर से मेरी मम्मी की चूत पर धक्के मारने लगे।
46 minutes ago
update 50
कुछ धक्कों के बाद अंकल मेरी मम्मी के ऊपर निढाल हो गए। उनके लंड ने मेरी मम्मी की चूत में पिचकारियाँ छोड़नी शुरू कर दीं। जो कि कंडोम की वजह से मम्मी की चूत में वीर्य नहीं गिरा। लेकिन कंडोम में भरा हुआ था। और जब मेरी मम्मी की साँसों के साथ उनकी साँसें ठीक हुईं। तो वो मेरी मम्मी के ऊपर से उठ कर एक तरफ लेट गए। और अपने लंड पर चढ़े कंडोम को उतार कर फेंकने लगे। तो मेरी मम्मी ने कहा। क्या योगेश जी। इधर उधर क्यों फेंक रहे हो। मेरा नामर्द पति घर में। अगर उसने देख लिया तो वो क्या कहेगा। मेरा लंड खड़ा होता नहीं है। तो फिर ये कंडोम कौन यूज करता है। खामखाह वो नामर्द बखेड़ा खड़ा कर देगा। अंकल: अपने लंड से कंडोम उतार कर। यार तभी तो बोलता हूँ कि अंदर गिराने दिया करो। फिर इसका झंझट भी नहीं रहेगा। मम्मी: मुस्कुरा कर। बस आपको बहाना चाहिए मेरे अंदर गिराने का। देखिए कितना निकलता है आपका। अगर आपको अंदर गिराने देती ना। तो फिर उसको (मेरे नामर्द पापा को) कुछ बताने की जरूरत ही नहीं होती। मेरा ये फूला हुआ पेट ही सब कुछ बता देता। और अपने पेट पर हाथ फिराने लगीं। अंकल: हाँ तू सही कह रही है। तो अब ये क्या करूँ। मम्मी: टेबल पर रख दीजिए। और फिर अंकल ने टेबल पर यूज्ड कंडोम रख दिया। और फिर मम्मी बोलीं। अब मुझे बाथरूम जाना है। अंकल: ठीक है। चलो। मुझे भी बाथरूम चलना है। मम्मी: लेकिन बाथरूम तो बाहर वाले रूम में है। वहाँ अंकुश बैठा है। अंकल: तो क्या हुआ। मम्मी: ठीक है। कपड़े पहनते हैं। अंकल: नहीं। तुमने यदि कपड़े पहने तो तुम फिर से नहीं करने दोगी। और अभी तो 5 कंडोम बचे हैं। मम्मी: तो क्या अंकुश के सामने नंगी जाऊँ। अंकल: तो क्या हुआ। वैसे भी तूने ही बताया है। तू अंकुश के सामने नंगी रह लेती है। मम्मी: हाँ। नंगी रह लेती हूँ। लेकिन अभी आपके पास से नंगी निकलूँगी तो मुझे शर्म आएगी। उसके सामने जाने से। फिर माँ बेटे का पर्दा हट जाएगा। फिर इसका एक ही संदेश होगा। देख बेटा। मैं योगेश से चुदवा कर आ रही हूँ। फिर माँ बेटे की मर्यादा खत्म हो जाएगी। अंकल: तो अब तू ही बता क्या करूँ। वो तो अभी सोया नहीं होगा। मम्मी: हाँ। मैं जानती हूँ। वो अभी जाग रहा होगा। आप उससे कहिए। वो थोड़ी देर सोने का नाटक करे। तब तक मैं और बाथरूम होकर वापस आ जाएँगे। अंकल: ठीक है। और अंकल पर्दा हटाकर नंगे ही मेरे रूम में आए। जहाँ मैं बेड पर लेटा लाइव देख रहा था। अंकल: क्या कर रहा है मेरे सामने आकर। मैं: मूवी देख रहा था। अंकल: बेटा थोड़ी देर के लिए अपनी आँखें बंद कर ले। जा। तेरी मम्मी को बाथरूम जाना है। मैं: ओके अंकल। फिर अंकल वापस रूम में गए। और मैं आँखें बंद करके लेट गया। लेकिन लाइव मोबाइल में देख रहा था। अंकल मेरी मम्मी को अपनी गोद में उठाकर मेरे रूम में लाए। और बाथरूम में ले गए। और दोनों ही नंगे थे। फिर मैं लेटा रहा। और थोड़ी देर बाद अंकल वापस मम्मी को ले गए अंदर वाले रूम में। और उन्होंने फिर से चुदाई चालू करने लगे। फिर मैं भी सो गया। क्योंकि रात के 1 बजने वाला था। फिर सुबह 7:30 am पर मेरी नींद खुली। तो मैंने मोबाइल में फिर से देखने लगा। अंदर अंकल मम्मी को दनादन चोद रहे थे। फिर थोड़ी देर बाद करीब 8 बजे दोनों शांत हुए। और मम्मी उठीं। और अपने कपड़े पहनने लगीं। तो अंकल ने मेरी मम्मी को रोक लिया। मम्मी: क्या आप भी। मैं जानती हूँ आप मुझे हमेशा की तरह नंगी सुलाना चाहते हैं। अंकल: हाँ। तो क्या प्रॉब्लम है तुझे नंगी सोने में। मम्मी: वो नामर्द देख न ले। अंकल: बाहर तेरा बेटा पहरेदारी कर रहा है उसकी मम्मी की। मम्मी: आप भी। उस बेचारे को उसकी ही मम्मी की चुदाई की पहरेदारी पर लगा दिया। और मेरा नामर्द पति रूम में अकेला सो रहा होगा। उसको क्या पता उसकी बीवी को उसका ही बेटा गैर मर्द से चुड़वा रहा है। और कंडोम भी लाकर दे गया है। और पहरेदारी कर रहा है। अब आप अंकुश को फोन लगाकर पूछिए। वो सोया या पूरी रात पहरेदारी करता रहा अपनी मम्मी की चुदाई की। फिर अंकल ने मुझे कॉल किया। मैं: जी अंकल। अंकल: सोया या नहीं। मैं: हाँ अंकल। सो गया था। आपकी बेल से उठा। अंकल: और उस तेरे बाप के क्या हाल हैं। मैं: अंकल पापा तो सो रहे होंगे। उन्होंने कहा था वो 11 am को उठेंगे। और मम्मी। अंकल: तेरी मम्मी भी सो गई हैं। (मम्मी जाग रही थीं। पर अंकल ने झूठ बोला।) अभी जस्ट चुदाई खत्म हुई है। और वो सो गईं। साली को मैंने पूरी रात अपने लंड पे उछाला है। और तेरी मम्मी भी वेश्या की तरह पूरी रात मेरे लंड पर उछली हैं। और तूने 6 कंडोम दिए। वो पूरे यूज हो गए हैं। अब मुझे भी सोना है। और 2 घंटे बाद उठकर चला जाऊँगा। और फिर कॉल कट। मम्मी: अब सोते हैं। और फिर दोनों एक दूसरे की बाँहों में अलार्म लगाकर सो गए। और मैं भी पापा के रूम में जाकर आया। पापा खर्राटे लेकर सो रहे थे। फिर मैं 10 बजे का इंतजार करने लगा। और मैं मोबाइल में देख रहा था। 10 बजे की अलार्म बजी। और मम्मी की आँख खुली। तो देखा 10 बज गए हैं। मम्मी जल्दी से उठीं। और अपने कपड़े पहनने लगीं। और फिर अंकल जी उठाने लगीं। जो कि नंगे सो रहे थे। और मम्मी अंकल को उठाकर बोलीं। मैं किचन में जा रही हूँ चाय बनाने। आप कपड़े पहन कर बाहर वाले रूम में अंकुश के पास बैठो। तो अंकल ने मेरी मम्मी की बातों को सुना। और नंगे ही मेरी मम्मी को अपनी बाँहों में खींचने लगे। और मेरी मम्मी को अपने ऊपर खींचकर अपनी बाँहों में भर लिया। और मेरी मम्मी के गालों और गर्दन को चूमने लगे। मम्मी: योगेश जी ये क्या कर रहे हैं। जाने दीजिए ना। बाहर। आपको पता है ना। आप जब ऐसा करते हैं तो मैं कंट्रोल नहीं कर पाती। अंकल: यार तुमसे कह ही कौन रहा है कंट्रोल करने को। वर्षा, माई डार्लिंग आई लव यू। मम्मी: मुस्कुरा कर एक चंचल अदा से देखते हुए। और अंकल की बाँहों से बाहर की ओर निकलते हुए। अपने होठों को जोड़ कर अंकल के गालों पर एक किस देते हुए। अब आप भी जल्दी से बाहर आ जाइए। और फिर अंकल की कमर के नीचे अंकल के खड़े लंड को देखकर। अंकल के खड़े लंड की ओर इशारा करते हुए। और हाँ जरा इसको अच्छे से शांत करके आइएगा बाहर। नहीं तो अंकुश कहेगा। पूरी रात मम्मी को चोदने के बाद भी आपका मन नहीं भरा। अंकल: मेरी जान। अब इसे तो तुम ही शांत कर सकती हो। अब हमारा इस पर कंट्रोल कहाँ। अब तो ये तुम्हारी अमानत है। मम्मी: मुस्कुरा कर। बातें बनाना कोई आप से सीखे। और जल्दी से रूम से बाहर निकल आईं। और जहाँ बाहर वाले रूम में मैं बैठा था। और मेरे पास आकर। गुड मॉर्निंग बेटा। मैं: गुड मॉर्निंग मम्मी। मम्मी: बेटा रात को कितने बजे सोया। मैं: मम्मी रात को 10 बजे सो गया। मम्मी: और उठा कितने बजे। मैं: मम्मी अभी जस्ट कुछ ही देर पहले। मम्मी: मुस्कुराते हुए। क्या बात है। पूरे 12 घंटे सोया। मैं: हाँ मम्मी। और आपने कंप्यूटर सीख लिया। मम्मी: हाँ बेटा। पूरी रात ही कंप्यूटर सीखा। और हँसती हुई अपना सिर नीचे कर लिया। और फिर मेरे सिर पर किस किया। थैंक्स बेटा। आज तेरी वजह से मैं कंप्यूटर सीख पा रही हूँ। और जल्दी से किचन में चली गईं। और थोड़ी देर बाद मम्मी 3 कप चाय लाती हैं। तब तक अंकल भी बाहर निकल आए थे। और अंकल चाय पीकर चले गए। और मम्मी घर के काम में लग गईं। फिर मम्मी किचन में नाश्ता बनाने गईं। पापा भी उठने वाले थे।
35 minutes ago
update 51
नाश्ते के बाद पापा ऑफिस चले गए। फिर घर पर मैं और मम्मी बचे थे। पापा के ऑफिस जाने के बाद मैंने अंकल को भी बुला लिया नाश्ते के लिए। मैं: अंकल नाश्ता कर लीजिए। अंकल: नहीं बेटा। मैं नाश्ता कर चुका हूँ। और वैसे भी आज मेरी तबियत कुछ ठीक नहीं है। मैं: क्या हुआ अंकल आपको। अंकल: बेटा मेरी तबियत की दवा लेने आया हूँ। मैं: अंकल कैसी दवा। अंकल: बेटा वो तेरी मम्मी के पास है। और अंकल मम्मी की तरफ देखने लगे। तो मम्मी ने अपनी आँखें नीचे कर लीं। फिर मैंने मम्मी से कहा। मम्मी मैं आपके रूम में स्टडी करने जा रहा हूँ। तो मम्मी ने अंकल की तरफ मुस्कुराते हुए देखा। और फिर मुझसे बोलीं। बेटा मैं भी चलती हूँ। मुझे सोना है। मैं: नहीं मम्मी। आप मेरे वाले रूम में जाकर कंप्यूटर सीखिए। और मैं आपके रूम में स्टडी करूँगा। मम्मी: बेटा पूरी रात भर कंप्यूटर सीखा है। अब मुझे सोना है। और तेरे पापा भी कभी वापस आ सकते हैं। मैं: मम्मी आप पापा की टेंशन मत लीजिए। और जाकर कंप्यूटर सीखिए। फिर मैं मम्मी के रूम में चला गया। और अंदर से देखने लगा। मम्मी अंकल हॉल में थे। मेरे रूम में जाते ही मेरी मम्मी अंकल की आँखों में आँखें डालकर मुस्कुरा कर बोलीं। योगेश जी। मुझे भी तो पता चले कि आपकी तबियत को क्या हुआ है। अंकल: मेरी मम्मी को पकड़ कर अपनी बाँहों में भरते हुए। इतनी भी भोली नहीं हो मेरी जान। मम्मी: मुझे कैसे पता चलेगा आपको क्या हुआ है। अगर पता होता तो कुछ इलाज नहीं कर देती। और मेरी मम्मी नशीली आँखों से अंकल की आँखों में देख कर अपने होठों पर उँगली फिराने लगीं। ये कहने की कोशिश। आपकी बीमारी की दवा यहाँ ही है। अंकल: मेरी मम्मी के होठों को चूमते। बस मेरी जान। तुम मुझे इन्हीं रसभरे होठों से पिलाती रहो। और अपने होठों को मेरी मम्मी के होठों पर रख कर चूमने लगे। मम्मी: योगेश जी जरा रुकिए। वो मेरा नामर्द पति अभी गया है। कहीं वो वापस न आ जाए। अंकल: अरे पागल हो क्या। प्यार में इंतजार नहीं होता मेरी जान। और जिसकी तुम्हारे जैसी खूबसूरत बीवी हो। वो तो वैसे ही कहाँ रुक सकता है। और वैसे भी वो नामर्द वापस नहीं आएगा। समझदार है। उसे पता है उसकी बीवी को वो तो चोद नहीं सकता। इसलिए किसी और से चुदवाने के लिए अकेले में टाइम देना चाहिए। मम्मी: क्या आप भी योगेश जी। वो जानता है उसकी बीवी उसके अलावा किसी और से नहीं चुद सकती। यदि उसे पता चल गया मैं आपसे चुदती हूँ तो वो पता नहीं मेरा क्या करेगा। अंकल: तू क्यों डरती है इस हिजड़े नामर्द नामर्द से। अंकुश है। वो सब संभाल लेगा। मम्मी: इसलिए तो कहती हूँ कंडोम यूज करा करो। लेकिन आप हो बिना कंडोम के ही घुसा देते हो। कहीं मैं प्रेग्नेंट न हो जाऊँ। अंकल: यही तो मैं चाहता हूँ मेरी जान। मम्मी: तो मम्मी ने शर्म से अपनी नजरें झुका लीं। तो अंकल ने मेरी मम्मी का चेहरा अपने हाथों से उठा कर मेरी मम्मी से पूछने लगे। बोलो अंकुश की मम्मी। तुम नहीं चाहती ये सब। अंकल के इस तरह मेरी मम्मी को अंकुश की यानी मेरी मम्मी बोलने पर मम्मी बोलीं। वो तो मैं हूँ अंकुश की मम्मी। अंकल: तो मैं अंकुश का पापा हूँ। लेकिन इस बार अंकल ने खुद को मेरा पापा बोलने पर मम्मी शर्म से चुप रहीं। तो अंकल मेरी मम्मी से फिर से बोले। अंकल: वर्षा क्या मैं तुम्हारे मुँह से कभी ये सुन पाऊँगा। जब तुम मुझे अपने बच्चे के पापा के नाम से बुलाओगी। मेरी मम्मी अंकल के इस सवाल का क्या जवाब देतीं। बेचारी चुप थीं। क्योंकि वो मेरे पापा नहीं थे। लेकिन इस बार अंकल फिर बोले। बोलो वर्षा। मैं अंकुश का पापा हूँ या नहीं। मम्मी: आप अंकुश के पापा नहीं हो। लेकिन आप एक पिता का फर्ज निभा रहे हो। उसकी मम्मी को चोदकर। अंकल: तो फिर मुझे अंकुश का पापा बोलो। मम्मी: प्लीज योगेश जी। अभी नहीं। अंकल: तो कब वर्षा। मम्मी: जब अंकुश आपको मेरे सामने पापा बोलेगा। तब से। अंकल: यदि अंकुश ने तुम्हारे सामने मुझे पापा बोला। तो मुझे क्या मिलेगा वर्षा जान। मम्मी: यदि अंकुश ने मेरे सामने आपको पापा बोला। तो ये वर्षा तन मन से पूरी तरह से आपकी हो जाएगी। फिर आप जो कहेंगे। मैं इनकार नहीं करूँगी। मेरी मम्मी की बात सुन कर अंकल ने मेरी मम्मी को पीछे से बाँहों में जकड़ लिया। और मेरी मम्मी की गर्दन और मेरी मम्मी के गालों को चूमने लगे। मम्मी: योगेश जी ये मत करें। आप जानते हैं ये मेरी कमजोरी है। आह... आपके ऐसे करने से कंट्रोल नहीं रख पाती। अंकल: जानू ये तुम्हारा कमजोर पॉइंट नहीं है। तुम्हारा कमजोर पॉइंट तो तुम्हारी टाँगों के बीच है। वैसे भी यार अब तुम्हें कंट्रोल करने की क्या जरूरत है। आओ ना यार। सुबह से कितना मूड बन रहा है। मम्मी: मुस्कुरा कर। योगेश जी आप ये बताइए। आपका मूड कब नहीं बना हुआ। अच्छा। आप अंकुश के बेडरूम में चलिए। मैं आती हूँ। क्योंकि मेरे बेडरूम में तो अंकुश है। आप अंकुश के अंदर वाले बेडरूम में चलिए। और हाँ। वो रात के 6 यूज्ड कंडोम टेबल पर रखे हैं। उन्हें जरा बाहर फेंक देना। कहीं ऐसा न हो कि भूल जाएँ। और वो नामर्द देख ले। अंकल: यार फेंक देंगे। उससे अब और भी तो होंगे। वो भी साथ ही फेंक देंगे। अब चलो ना यार। और अंकल ने मेरी मम्मी को अपनी गोद में उठा कर बेडरूम की ओर चलने लगे। कि तभी दरवाजे पर बेल बज उठी। अंकल: गाली निकालते हुए। मादरचोद। इस समय कौन होगा। मम्मी: क्या योगेश जी। आप इतना गुस्सा क्यों कर रहे हैं। जाइए देखिए। दरवाजे पर कौन है जनाब। अंकल ने मेरी मम्मी को अपनी गोद से उतारा। और दरवाजा खोलने के लिए जाने लगे। तो मम्मी बोलीं। मम्मी: मैं जानती हूँ आपका इरादा। अगर कोई हुआ तो आप उसे बाहर से रुखसत कर देंगे। अंकल मम्मी की तरफ आँख दिखाकर दरवाजा खोलने जाने लगे। तो मेरी मम्मी मुस्कुराते हुए अंकल को अंगूठा दिखा कर चिढ़ा रही थीं। अंकल: वर्षा क्यों चिढ़ा रही हो। तुम जानती हो अभी इस समय मुझ पर और मेरे लंड पर क्या बीत रही है। मम्मी: हाँ जानती हूँ। और आपके वापस आने पर ये आपका (अंकल के लंड की तरफ इशारा करते हुए) मुझ पर ही भारी पड़ने वाला है। और अंकल जाने लगे। तो मम्मी को कुछ याद आया। और बोलीं। मम्मी: रुकिए। अंकल: अब क्या हुआ। मम्मी: ये आपका घर नहीं है। इसलिए आप दरवाजा मत खोलिए। कोई क्या सोचेगा आपको देखकर। अंकल: हाँ वर्षा। अब क्या करें। मम्मी: अंकुश को बोलिए। और अंकुश के अंदर वाले रूम में छुप जाइए। अंकल ने मुझे आवाज दी। मैं बाहर आया। तो मम्मी: बेटा देख कौन है। और अंकल अंदर मेरे रूम में छुप गए। मैं गेट खोलने गया। तो गेट खोलते ही पापा सामने खड़े थे। पापा को सामने पा कर एक बार तो मेरी मम्मी भी डर गई थीं। और डर के मारे वहाँ डाइनिंग टेबल से नाश्ते की खाली प्लेट्स उठाने लगीं। मैं: सिचुएशन को संभालते हुए बोला। पापा क्या हुआ। आप वापस कैसे आ गए। नामर्द पापा: मूड नहीं हुआ। तबियत ठीक नहीं लग रही थी। इसलिए वापस आ गया। मैं: तो ठीक है पापा। आप आराम करो अपने बेडरूम में। पापा: ओके बेटा। और जैसे ही पापा अपने बेडरूम में जाने लगे। तो उनकी नजर मेरी मम्मी के नंगे पेट पर पड़ी। पहले तो वो हैरान हुए। पर फिर इस बात को इग्नोर करते हुए बोले। पापा: वर्षा तुम आ रही हो ना बेडरूम में। मम्मी: आप जाओ। मैं थोड़ा घर का काम कर लेती हूँ। मैं: पापा मम्मी को अभी घर का काम करना है। फिर उसके बाद मम्मी मेरे कॉलेज के प्रोजेक्ट में मेरी मदद करेगी। पापा: ओके बेटा। और मम्मी से। वर्षा अंकुश की मदद करना। मम्मी: जी। फिर पापा अपने रूम में चले गए। फिर पापा के रूम में जाते ही मैं मम्मी से बोला। मैं: मम्मी रूम में चलो। मम्मी: नहीं बेटा। तेरे पापा घर में हैं। मैं: मम्मी मैंने पापा से बोल दिया है। आप मेरी मदद करोगी कॉलेज प्रोजेक्ट में। मम्मी: नहीं बेटा। मैं: मम्मी अब चलिए। अंकल वेट कर रहे हैं आपको कंप्यूटर सिखाने के लिए। चलिए। तो फिर मम्मी मेरे साथ मेरे रूम में आईं। जहाँ अंकल मेरे बेड पर बैठे हुए थे। और मुझे देखकर स्माइल देने लगे। मैं: अंकल आप मम्मी को अंदर वाले रूम में कंप्यूटर सिखा दीजिए। मम्मी: बेटा आज रहने दे। मैं: अंकल आप मम्मी को ले जाइए हाथ पकड़ कर। नहीं तो मम्मी आज कंप्यूटर नहीं सीखेंगी। तो अंकल बिना बोले मम्मी का हाथ पकड़ा। और मम्मी का हाथ खींचकर अंदर रूम में ले गए। और मम्मी भी बिना कुछ बोले अंदर वाले रूम में चली गईं। और अंदर रूम में जाते ही अंकल ने पर्दा लगा दिया। लेकिन दरवाजा नहीं लगाया। मम्मी: अरे योगेश जी। आप दरवाजा क्यों बंद नहीं कर रहे हैं। दरवाजा बंद कीजिए। मुझे शर्म आती है। मेरा बेटा बाहर रूम में मेरी आवाज सुनेगा तो। वो क्या समझेगा। आप प्लीज दरवाजा बंद करो। अंकल जी: (मेरी मम्मी को अपने पास खींचते हुए अपनी बाँहों में कसते हुए) हद है यार। एक तो वो बेचारा तुम्हें मेरे लंड से चुदवाने के लिए पहरेदारी कर रहा है। और तुम उसे अपनी चुदाई की आवाजें भी नहीं सुनने दोगी। उसे भी तो पता चले कि उसकी मम्मी की मैं ढंग से चुदाई करता हूँ या नहीं। मम्मी: उसे पता है आप उसकी मम्मी को बहुत ही दमदारी से चोदते हो। पर इस वक्त वो नामर्द भी घर में है। कहीं वो मेरी आवाज न सुन ले। नहीं तो। अंकल: वो नामर्द क्या करेगा। जो पिछले 19 साल से अपनी बीवी की चूत में एक बार भी लंड नहीं घुसा सका। मम्मी: लेकिन वो मेरा पति है। अंकल: पति का फर्ज तो मैं निभा रहा हूँ। और जो चूत में लंड घुसाए वो पति होता है। और तुम्हारी चूत में मेरा लंड मैं घुसाया हूँ। इसलिए मैं तुम्हारा पति हुआ। और तुम मेरी बीवी हुई। मम्मी: नहीं। मैंने शादी उसके साथ की। इसलिए वो मेरा पति। और मैं उसकी पत्नी। और तुम मेरी चुदाई करते हो। ये तो सिर्फ अंकुश को पता है। अंकल: मैं सिर्फ इतना जानता हूँ। तुम सिर्फ मेरी हो। मम्मी: हाँ। सिर्फ आपकी हूँ। अंकल: तुम सिर्फ और सिर्फ मेरी हो। वो मादरचोद बहंकलोदा नामर्द नामर्द हिजड़ा। और वो क्या समझेगा। यार मैं प्यार अपनी अमानत के साथ कर रहा हूँ। या किसी दूसरी औरत के साथ। और इतना कहते ही अंकल ने अपने होठ मेरी मम्मी के होठों पर रख दिए। मम्मी: मेरी मम्मी ने अंकल के होठों से अपने होठों को अलग किया। और थोड़ा गुस्से में बोलीं। क्या बोल रहे थे आप। अब जरा बोलिए। अगर किसी और औरत के साथ थोड़े ही कर रहा हूँ। अगर मैंने किसी और औरत को आपके साथ क्या आपके इर्द गिर्द भी देख लिया ना। तो फिर देखना उसकी जो हालत मैं करूँगी सो करूँगी ही। पर आपकी भी वो हालत करूँगी कि आप भी देखना। आप सिर्फ मेरे। आप सिर्फ वर्षा के हो। अंकल: अंकल मेरी मम्मी की आँखों में देखते ही डर गए। क्योंकि एक औरत के गुस्से से तो मर्द को डर लगता है। क्योंकि औरत के पास चूत होती है। और लंड को चूत चाहिए। इसलिए कई मर्द औरत का पालतू कुत्ता होता है। चूत चाहिए तो डरना ही पड़ता है। ठीक वैसे ही अंकल भी डर गए। और बोले। अंकल: अरे यार। मैं कहाँ। मैं तो वैसे ही बोल रहा था। मम्मी: सब जानती हूँ। आप सब मर्द एक जैसे होते हैं। बड़े मजे कर लिए आपने मुझसे मिलने से पहले। लेकिन अब मेरे अलावा किसी और के साथ नहीं चलेगा। अंकल: सच कह रहा हूँ। 6 महीने पहले तक मैंने कई औरतों को चोदा है। कई लड़कियों को भी चोदा है। लेकिन पिछले 6 महीनों से सिर्फ तुम्हें ही चोद रहा हूँ। जब से तुमने मुझे अपना ये संगमरमर बदन सौंपा है। तब से आज तक मैंने तुम्हारे अलावा किसी और की तरफ देखा तक नहीं। मम्मी: अच्छा। और देखने की हिम्मत भी नहीं करना। अंकल: कान पकड़। जो हुक्म रानी साहिबा। अब और कोई हुक्म इस गुलाम के लिए। अंकल के इस तरह प्यार जताने पर मेरी मम्मी खुद अपने आप को रोक नहीं पाईं। और उनकी आँखों में देखते हुए आँखों से ही इशारे से उनको प्यार करने के लिए कहने लगीं। मेरी मम्मी अपनी बाँहें फिर से अंकल के गले में डाल कर। अब जल्दी से कर लीजिए जो करना है। तो अंकल फिर से अपने होठों को मेरी मम्मी के होठों पर रख दिए। और मेरी मम्मी के होठों को चूमने लगे। जबकि उनका खड़ा लंड मेरी मम्मी को अपनी चूत पे महसूस हो रहा था। अंकल मेरी मम्मी की कमर में अपना हाथ डाले मेरी मम्मी को अपने से चिपका कर मेरी मम्मी के होठों पर लगी लिपस्टिक को चूसने लगे। तो मेरी मम्मी ने भी अपना हाथ नीचे करके उनके खड़े लंड पर रख दिया। और उनके लंड को अपने हाथ से सहलाने लगीं। योगेश जी। आपका ये घोड़ा तो एकदम से तैयार है। कैसे खड़ा है ये। कैसे आजाद होने के छटपटा रहा है। अंकल: मेरी जान। अब इसकी लगाम तो तुम्हारे ही हाथ में है। तुम ही जो इसको कैद से आजाद कर सकती हो। वैसे मेरी जान। नामर्दों के लंड ही खड़े नहीं होते। और मर्दों के हर समय ऐसे ही ऐसे खड़े रहते हैं। जैसे कोई जंग में जाने के लिए योद्धा। मम्मी: जैसे मेरा वो नामर्द पति। उसका पिछले 19 साल से खड़ा ही नहीं हुआ। और एक आप हैं। जिनका हर समय खड़ा रहता है। योगेश जी कितनी एनर्जी है आप में। अंकल: मेरी जान। मेरी एनर्जी का कारण भी तो तुम ही हो। जानती हो ना। जब से मैंने तुम्हारा एनर्जी ड्रिंक पीना शुरू किया है। अंदर से एक अलग ही चुस्ती सी आ गई है। बस यार। तुम इसी तरह मुझे एनर्जी ड्रिंक पिलाती रहना। बोलो पिलाओगी ना। मम्मी: शर्म से। क्या योगेश जी आप भी। आपको क्या। मैंने कभी मना किया है। और अब आप ज्यादा बातें मत करिए। जो करना है जल्दी से कर लीजिए। वो नामर्द घर पर ही है। और अब मेरे अंदर भी आग लग रही है। अंकल: कहाँ। मम्मी: नीचे। जहाँ आपका घोड़ा घुसेगा। अब मैं चाहती हूँ आप मुझे जल्दी से मेरी रानी को चोद डालिए। अंकल: मेरी मम्मी की बात सुन अंकल मेरी मम्मी की साड़ी का पल्लू पकड़ कर मेरी मम्मी की साड़ी खोलने लगे। मेरी मम्मी अपनी साड़ी खोलने में अपने यार की मदद भी कर रही थीं। साथ ही उनको रोकने की कोशिश भी। मम्मी: योगेश जी साड़ी मत खोलिए ना। उठा कर लीजिए ना। लेकिन अंकल कहाँ मेरी मम्मी की बात सुनते थे। मेरी मम्मी की साड़ी निकाल कर उन्होंने फेंक दी। और मेरी मम्मी के पेटीकोट का नाड़ा पकड़ कर मेरी मम्मी का पेटीकोट खोलने लगे। मम्मी: मैं उठा देती हूँ। आप पैंटी नीचे करके कर लीजिए। अंकल: यार कुछ नहीं होगा। तुम जानती हो ना। मुझे मजा तभी आता है जब तुम एकदम नंगी मेरे साथ हो। मम्मी: क्या योगेश जी आप भी ना। रात को करते हैं ना। मैं रोकती हूँ क्या आपको। अंकल ने मेरी मम्मी की कोई भी बात को नहीं सुना। और मेरी मम्मी को ले कर बिस्तर पर लेट गए। और मेरी मम्मी के गालों मेरी मम्मी की गर्दन और मेरी मम्मी के ब्लाउज के ऊपर मेरी मम्मी की क्लीवेज को चूमने लगे। वो जानते थे ये मेरी मम्मी की कमजोरी है। और यही करते उन्होंने मेरी मम्मी के पेटीकोट का नाड़ा खींच कर खोल दिया। मम्मी: आह... योगेश जी बस कीजिए ना। आह... क्यों तड़पा रहे हैं। डाल दीजिए ना अंदर। लेकिन अंकल मेरी मम्मी के ब्लाउज के ऊपर से मेरी मम्मी की चुचियों को मसल रहे थे। मम्मी: धीरे मसलिए। आप जानते हैं कितनी बड़ी हो गई हैं। मेरा बेटा क्या सोचेगा। मेरी चुचियाँ देखकर। मम्मी की चुचियाँ कितनी बड़ी हो गई हैं। पापा तो मम्मी की चुचियाँ चूसते नहीं हैं। तो कैसे हो गईं। अंकल: मेरी मम्मी के ब्लाउज के हुक खोल कर मेरी मम्मी के ब्लाउज को निकाल कर नीचे फेंक दिया। अंकल: मेरी रानी। तेरी ये चुचियाँ नहीं। ये तो रसीले आम हैं। और अंकुश ने खुद बोला है। मेरे पापा मेरी मम्मी की चुचियों को हाथ भी नहीं लगाते हैं। इसलिए आप उन्हें बड़ी कर दो। इसलिए उन्हें बड़ी कर रहा हूँ। और मेरी मम्मी के निप्पल को ब्रा के साथ ही मुँह में भर कर आम की तरह चूसने लगे। मेरी मम्मी की ब्रा अंकल के थूक से पूरी तरह से गीली हो गई। और फिर अंकल ने मेरी मम्मी की दोनों चुचियों को ब्रा से बाहर निकाल दिया। और निप्पल को अपनी जीभ निकाल कर छेड़ने लगे। और फिर मेरी मम्मी की चुची को ऐसे मुँह में भर लिया। जैसे दुशेरी आम का रस चूस रहे हों।
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मम्मी: योगेश जी बस कीजिए ना। अभी इनको चूसना। रात को जी भर कर चूस लीजिए। अब डाल दीजिए ना अंदर। कहीं ऐसा न हो कि वो नामर्द फिर आ जाए। लेकिन अंकल मेरी मम्मी की बातों को सुने बिना ही मेरी मम्मी के एक संतरे को मुँह में भर कर चूस रहे थे। जबकि दूसरे को अपने हाथ में दबा कर मसल रहे थे। मम्मी: योगेश जी अब अगर यही आपको करना है तो मैं जा रही हूँ। आप ये सब रात को जितना आपका दिल करे चूस लीजिए। अंकल: यार करता हूँ। और अंकल मेरी मम्मी की पैंटी को पकड़ कर मेरी मम्मी की टाँगों से बाहर निकाल कर मेरी मम्मी को एकदम नंगी कर दिया। और अपने अंडरवियर को उतार कर अपना लंड बाहर निकाल लिया। और मेरी मम्मी की टाँगों के बीच आने लगे। तो मेरी मम्मी ने कहा। ये क्या। वो तो चढ़ा लीजिए पहले। अंकल ने भी उस समय वक्त की नजाकत को समझते हुए कुछ नहीं बोले। और अपने लंड पर कंडोम चढ़ा कर मेरी मम्मी की टाँगों के बीच आ कर अपने लंड को मेरी मम्मी की चूत पर टिका दिया। और एक ही धक्के में अपना पूरा लंड जड़ तक मेरी मम्मी की चूत में पहुँचा दिया। अंकल के हर धक्के से मेरी मम्मी नीचे से सिसक पड़ती हैं। काफी देर चुदाई के बाद मेरी मम्मी अब झड़ने के काफी करीब थीं। मेरी मम्मी: आह... करतीं। योगेश जी कितना अंदर तक घुसोगे। आह... बड़ा अंदर तक जा रहा है। उई माँ। मेरा निकलने वाला है योगेश जी। और फिर मेरी मम्मी तो जल्दी ही झड़ गईं। लेकिन अंकल अभी भी मेरी मम्मी के ऊपर चढ़े। मेरी मम्मी की चूत के ऊपर धक्कों की बरसात कर रहे थे। मेरी मम्मी जानती थीं कि योगेश जी जब उन्हें घोड़ी बना कर उनको चोदते हैं तो उनका माल जल्दी निकल जाता है। इसलिए मम्मी ने अंकल को रोका। तो अंकल। अंकल: यार अब क्या हुआ। तो मेरी मम्मी ने कहा। मम्मी: योगेश जी अगर मैं इसी तरह नीचे लेटी रही तो आपका निकलेगा नहीं। लीजिए मैं घोड़ी बनती हूँ। और मुस्कुराते हुए अपने हाथों को आगे करके अंकल के सामने घोड़ी बन गईं। और अंकल मेरी मम्मी के पीछे आ कर मेरी मम्मी की कमर को थाम कर मेरी मम्मी को चोदने लगे। उनके धक्कों और मुँह से निकलती सिसकियों से मुझे तो पता लग गया था कि अंकल का लावा किसी भी पल मेरी मम्मी के अंदर अपनी आग उगल सकता है। और करीब 15 से 20 मिनट बाद अंकल का ज्वालामुखी फूट पड़ा। और वो भी झड़ गए। कुछ देर बाद वो मेरी मम्मी पर से उतरे। तो मेरी मम्मी ने उनके लंड से कंडोम उतार कर बेड के पास फेंक दिया। और उनके लंड पर लगे वीर्य को अपनी ही ब्रा से साफ कर दिया। मेरी मम्मी और अंकल दोनों के बदन उस समय पसीने से लथपथ थे। और वो दोनों ही लंबी लंबी साँसें ले रहे थे। कुछ देर ऐसे ही एक दूसरे की बाँहों में लिपटे रहे। जब उन दोनों की साँसें कुछ ठीक हुईं। और मेरी मम्मी अंकल के साथ लेटी थीं। तभी मेरी मम्मी ने अंकल से कहा। मम्मी: योगेश जी मैं तुमसे हर बार जब तुम कहते हो मैं चुदवाती हूँ। लेकिन आप मुझे उसके घर में रहते हुए मत चोदा करो। मुझे डर लगता है। अंकल: डरती क्यों हो। अंकुश के होते हुए। देखो वो बाहर रूम में बैठा हमारी चुदाई की पहरेदारी कर रहा है। फिर भी तू डरती हो उस नामर्द से। मैं जाकर अभी उस नामर्द की गाँड में मेरा लंड डालकर उसकी गाँड फाड़ देता हूँ। मम्मी: मजाक छोड़िए। मुझे उसकी घर में मौजूदगी में डर लगता है। और आप मुझे अंकुश से कहकर अपने घर बुलाया करो। जब नामर्द घर पर हो तब। अंकल: जो हुक्म मेरी सरकार। अच्छा ये बताओ आज रात को कहाँ सोओगी। मम्मी: ( शर्माते हुए) आप भी ना। कैसे सवाल पूछते हो। मैं उस नामर्द की वाइफ हूँ। तो उस नामर्द के साथ ही सोऊँगी। अंकल: नहीं। मेरे साथ ही सोना। कल भी तो सोती थी रात को मेरे साथ। मम्मी: अरे रोज थोड़े ही पॉसिबल है। वो तो कल अंकुश ने उस नामर्द से बोला। आज मम्मी मेरे साथ सोएगी। तो उस नामर्द ने मुझे उसके रूम में सोने भेज दिया। और अंकुश ने मुझे अंदर वाले इस रूम में आपके साथ चुदवाने भेज दिया। लेकिन ऐसा रोज नहीं हो सकता। अंकल: तो मैं क्या करूँ। मम्मी: कुछ नहीं। बस दिन में आपके घर आकर आपके साथ चुदवा लूँगी। और आप सोने दोगे तो आपके साथ सो भी लूँगी। लेकिन सिर्फ दिन में। रात को तो उस नामर्द के साथ ही सोऊँगी। अंकल: ठीक है। ऐसा कर लेना। एक रात मेरे साथ। और एक रात उस नामर्द के साथ। मम्मी: क्या ऐसा होता है। बीवी एक दिन पति के साथ। और दूसरे दिन किसी और के साथ। क्या आपको लगता है वो मुझे आपके साथ सोने देगा। अंकल: हाँ। क्योंकि वो यही जानता है उसकी बीवी उसके बेटे के साथ सोएगी। उसे ये थोड़ी पता है कि तुम मेरे साथ सोओगी। मम्मी: यार मैं ऐसा नहीं कर सकती हूँ। अगर मैं एक रात उसके साथ। और एक रात इस रूम में। तो वो शक करेगा। आखिर क्या चल रहा है। वो फिर जासूसी न कर ले। क्योंकि वो सोचेगा अब अंकुश क्यों उसकी माँ को एक रात अपने रूम में सुला रहा है। वो समझ जाएगा कुछ गड़बड़ है। अंकल: तो फिर। समझता ही तो समझने दीजिए ना। ये गलत थोड़े ही है। हम प्यार करते हैं एक दूसरे से। और वो नामर्द होकर क्या कर लेगा। जब वो 19 साल से अपनी बीवी की चूत में लंड नहीं डाल सका। मम्मी: योगेश जी वो तो ठीक है। 19 साल से इस चूत में उसने एक बार भी लंड नहीं डाला। लेकिन उसने मेरे साथ शादी की है। इसलिए रात को मैं उसके साथ ही सोऊँगी। मेरी मजबूरी है इस नामर्द के साथ सोना। अंकल: नहीं वर्षा। मैं तुम्हें अपनी बीवी मानता हूँ। भले ही हमारी शादी नहीं हुई। और मैं मेरी बीवी किसी पराये मर्द के साथ सोए। मुझे पसंद नहीं है। मम्मी: वो पराय मर्द नहीं है। उससे मेरी शादी हुई है। अंकल: लेकिन उसने पति का फर्ज तो नहीं निभाया। क्या वो तुम्हारी चुदाई करता है। मम्मी: आप भी हिसाब कर रहे हो। वो क्या सोचेगा मेरी बीवी किसी पराये मर्द के साथ सोती है। और कोई भी पति अपनी पत्नी को किसी गैर मर्द के साथ बिस्तर पर सोने की परमिशन नहीं दे सकता है। अंकल: वो तुम्हें किसी पराये मर्द के साथ सोने की नहीं बल्कि अपने बेटे के साथ सोने की परमिशन देगा। उसे क्या पता उसका बेटा ही उसकी माँ को अंदर वाले रूम में भेजकर मुझसे चुडवाएगा अपनी वर्षा मम्मी को। और वो नामर्द भी जानता है। एक बेटा अपनी माँ को अपने साथ सुलाने की हिम्मत कर सकता है अपने पिता से। और एक माँ अपने बेटे के साथ तो सो सकती ही ना। अंकल: बोलो ना मेरे अंकुश की मम्मी। मैं सही कह रहा हूँ। मम्मी: मुस्कुरा कर। आप भी ना योगेश जी। बड़े वो हो। किसी न किसी तरह से अपनी बात मनवा ही लेते हो। वैसे मैं आपको इस से पहले बुद्धू ही समझती थी। अंकल: मेरी जान। ये सब तुम्हारी संगत का ही नतीजा है। मम्मी: ठीक है। लेकिन आज रात को उस बार्स के साथ सोऊँगी। और कल से आप अंकुश से कह देना। वो मुझे आपके साथ सुला देगा। उसके नामर्द बाप से परमिशन लेकर। अंकल: ठीक है। आज रात तुम उसके साथ सो जाओ। लेकिन मैं रात को तुम्हें कॉल करूँगा तुम्हें। अपना फोन वाइब्रेटर पे रखना। मम्मी: क्यों। अंकल: अंकल रात को लंड खड़ा होगा। तो इसको शांत करने के लिए। मम्मी: आप भी। मैं कैसे आऊँगी। अगर मेरे आने के बाद उसकी नींद खुल गई। और मैं उसके साथ बिस्तर पर नहीं मिली। तो क्या होगा जानते हो आप। अंकल: मैं अंकुश को बता दूँगा। वो संभाल लेगा। मम्मी: ठीक है। अंकल: जान एक बात ध्यान रखना। वैसे तो पिछले 19 साल से उसका लंड खड़ा नहीं हुआ है। फिर भी अगर उसने तुम्हें छूने की कोशिश की। तो मुझे बता देना। मैं उस नामर्द की गाँड फाड़ दूँगा। मम्मी: इसकी जरूरत नहीं पड़ेगी। क्योंकि उसकी लुल्ली पिछले 19 साल में खड़ी नहीं हुई। तो अब क्या होगी। और अगर हुई भी। और उस मादरचोद नामर्द नामर्द ने कुछ करने की कोशिश भी की। तो मैं खुद उसकी लुल्ली को काट काट के चूरा बना कर रख दूँगी। क्योंकि मैं अब सिर्फ तुम्हारी हूँ। उस नामर्द की तो नाम की बीवी हूँ। अंकल: शरारत से। जान। और अगर मैंने कुछ करने की कोशिश की तो क्या। मेरा भी। मम्मी: क्या आप भी। अगर आपने कुछ करने की कोशिश की ना। तो आपको अपनी बाँहों में भर लूँगी। और ये कहकर मेरी मम्मी फिर से अंकल से लिपट गईं। अंकल: अरे सो जाओ। पर कोई बहाना बना के पास मत आने देना। तुम सिर्फ मेरी हो। ये बात याद रखना। उस नामर्द से कम से कम 2 फीट की दूरी बनाकर रखना। मम्मी: ठीक है। और मैं आपसे वादा करती हूँ। अगर उसने मुझे हाथ भी लगाया। तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा। अंकल: अच्छा मेरी जान। और रात को साड़ी मत पहन कर सोना। मम्मी: साड़ी क्यों नहीं। अंकल: यार खोलने में दिक्कत होती है। साड़ी के साथ इतना कुछ तो पहनती हो तुम। बस कोई बढ़िया सी नाइटी पहन लेना। और मैं फोन करूँ तो अंकुश के रूम में आ जाना। मम्मी: केवल मैं अकेली ही नहीं पहनती। बल्कि सब औरतें पहनती हैं। और बाय द वे मैं रात में उसके सामने नाइटी क्यों पहनूँ। अंकल: यार उतारने में आसानी होती है ना। मम्मी: क्या योगेश जी आप भी। नाइटी। और उसके सामने। जानते हैं मेरे पास कैसी नाइटी है। जिसमें सब दिखता है। जो आपने दिलवाई है। वो मुझसे पूछेगा। ये नाइटी तेरे पास कैसे आई। अंकल: क्या मजा भी तो तभी आता है जब औरत ऐसे ही अपना बदन दिखाए। और उस मादरचोद नामर्द नामर्द से कह देना। अंकुश के साथ मार्केट गई तो ले आई। मम्मी: अगर आपको मुझे वैसी ही नाइटी में देखने की इच्छा है। तो 1 हफ्ता रुकिए। फिर मैं अंकुश के रूम में आपके पास सोऊँगी। फिर रात भर देखते रहना। अंकल: यार 1 हफ्ता कौन रुकेगा। मुझे तो आज रात ही तुम चाहिए वर्षा। और रही बात अंकुश के रूम में सोने की। तो अंकुश के रूम में तो जब तुम आओगी। तो तुम्हें अपने हाथों से नंगी करके नाइटी पहनाऊँगा। सरकार। इस काम के लिए ये नौकर जो है। मम्मी: मुस्कुरा कर। आप पहनोगे या उतारोगे। और। अंकल: पहले साड़ी पेटीकोट ब्लाउज ब्रा पैंटी उतारूँगा। फिर नाइटी पहनाऊँगा। फिर नाइटी फाड़कर उतारूँगा। और मम्मी अंकल दोनों हँसने लगे। मम्मी: वैसे योगेश जी। आप एक रात बिना किए रुक नहीं सकते। अंकल: यार तुम बताओ। तुम रुक सकती हो। अंकल के इस सवाल पर मेरी मम्मी शर्म से अपना मुँह अंकल की छाती में छुपा लिया। असल में अब मेरी मम्मी को भी इसकी आदत हो गई थी। तभी दरवाजे पर नॉक हुआ। पापा: बेटा अंकुश। तेरी मम्मी क्या कर रही है। पापा की आवाज से अंदर रूम में मम्मी अंकल दोनों डर गए। क्योंकि हमेशा की तरह मम्मी अंकल दोनों नंगे ही थे। दोनों चुप थे। और मैं भी बाहर वाले रूम में चुप था। लेकिन पापा ने फिर से आवाज दी। पापा: अंकुश बेटा। फिर मैंने जवाब देना उचित समझा। मैं: हाँ पापा। मैं प्रोजेक्ट रेडी कर रहा हूँ। और मम्मी मेरी मदद कर रही है। पापा: वर्षा को बाहर भेज। मुझे कुछ काम है। मैं: पापा अभी आप आधा घंटा रुकिए। मम्मी नहीं आ सकती हैं। वो मेरी मदद कर रही हैं। जब तक आप वेट करो बाहर हॉल में। प्लीज पापा। पापा: ओके बेटा। अंकल उठे। और मेरी मम्मी से बोले। अच्छा हुआ वर्षा कि अंकुश ने सब संभाल लिया। मम्मी: मैं तो आप से पहले ही कह रही थी। आपको तो बस एक ही काम। जब भी जरा सा मौका मिला मुझे नंगी कर दिया। और चढ़ गए। बोलती हूँ वो घर पर है। आ जाएगा। अगर करना है तो ऐसे ही कर लो। नहीं। आपको तो मुझे पूरी नंगी किए बिना मजा ही नहीं आता। अंकल: यार अब तुम भाषण मत दो ना। मैं कोई किसी दूसरे की बीवी को नंगी कर रहा। अपनी बीवी को नंगी किया है। और तुम भी डाँट रही हो। मम्मी: ओह। क्या कहा। अपनी बीवी। आप भूल रहे हैं। मैं आपकी नहीं। उसकी बीवी हूँ सबके सामने। और आपकी अकेले में बंद कमरे में। अंकल: अच्छा। अब तुम कपड़े पहनो। मम्मी: अच्छा योगेश जी। मैंने तो आप से पहले ही कहा था कि अभी मत करिए। वो अभी भी घर में ही है। पर आप कहाँ मानते हैं नहीं। आप तो बस अपना लंड निकाल कर मेरे ऊपर चढ़ जाते हैं। आप तो जानते हैं कि मैं आपको रोक नहीं सकती। अंकल: ठीक है जान। अब कपड़े पहनो। और फिर दोनों कपड़े पहनने लगे। मम्मी कपड़े पहन चुकी थीं। लेकिन अंकल नंगे थे। और उन्होंने मम्मी को अपने ऊपर खींच लिया बेड पर। और फिर मम्मी भी अंकल की छाती पर किस करने लगीं। फिर थोड़ी देर अंकल के ऊपर से मम्मी उठीं। और अपनी साड़ी ठीक करते हुए बाहर वाले रूम में आईं। जहाँ मैं बैठा था। और मम्मी ने आते ही मुझसे कहा। बेटा योगेश जी को बाहर निकाल। मैं: मम्मी आप बाहर जाओ। और पापा को रूम में ले जाओ। मैं अंकल को बाहर निकाल दूँगा। फिर मम्मी मेरे रूम से बाहर निकल गईं। और पापा को लेकर उनके रूम में चली गईं। फिर मैंने अंकल को भी निकाल दिया। शाम को मम्मी डिनर बना रही थीं। तभी मुझे अंकल मैसेज आया। मैं आ रहा हूँ। मैं: नहीं। पापा घर हैं। अंकल: बस थोड़ी देर। तू उसे किसी बहाने से बाहर निकाल। और अंकल को मैं रोक नहीं पाया। और अंकल आ गए। लेकिन वो सीढ़ियों में छिपे थे। मैंने अंकल को देख लिया। फिर मैंने पापा से कहा। पापा मेरे रूम का एसी खराब है। आप चेक कर दो। पापा: मैं अभी चेक कर लेता हूँ। मेरे कहने पर पापा मेरे रूम में गए। और एसी को चेक करने लगे। और फिर अंकल मुझे बोलकर। ध्यान रखना। और किचन में घुस आए। उस समय मेरी मम्मी ने लाइट पिंक कलर का ब्लाउज साड़ी पहन रखा था। और ब्लाउज थोड़ा आगे से छोटा था। जिसमें से मेरी मम्मी की ब्रा पूरी तरह से दिख रही थी। और मम्मी ने अपनी साड़ी को कंधे पर इस तरह से डाल रखा था। जिससे उनकी चुचियाँ एक परफेक्ट शेप में दिख रही थीं। अंकल पीछे से आए। और अपनी बाँहें मेरी मम्मी की कमर में डाल कर मेरी मम्मी को अपनी बाँहों में भर लिया। और भूखों की तरह अपने होठ मेरी मम्मी की पीठ पर रगड़ने लगे। और कभी मेरी मम्मी के कानों को अपने होठों में दबा लिया। और मस्त नशीली आवाज में बोले। वर्षा... अब रहा नहीं जा रहा... मम्मी: शिकायत के लहजे में। मिल गई फुर्सत आपको। आ गई मेरी याद। अंकल जी: यार क्या कह रही हो तुम। कोई भूलने की चीज हो। यार तुम मेरी जान हो। वो बस थोड़ा बात को समझो। ये मेरे दिल से पूछो कि तुम्हारे बिना मेरे दिल पर क्या गुजर रही थी। और तुम मुझे ताने दे रही हो। मम्मी: योगेश जी क्या कर रहे हैं... वो आ जाएगा... प्लीज छोड़िए ना। आप जानते हैं जब आप इस तरह से करते हैं तो मुझसे कंट्रोल नहीं होता। आह... अंकल: (आँखें बंद मदहोशी में मेरी मम्मी के गाल और गले को चूमते) यार तुम उसकी चिंता मत करो। अंकुश ने उस मादरचोद नामर्द नामर्द को एसी ठीक करने भेजा है... मम्म... वर्षा। माई लव... आई लव यू... जान...
18 minutes ago
update 53
मेरी मम्मी को अंकल का लंड किसी शेर की दाढ़ की तरह उनके चूतड़ों पर महसूस हो रहा था। मम्मी: योगेश जी वो चुभ रहा है। ये तो अभी से तैयार हो गया है। अंकल: तो फिर जान। इसको शांत कर दो ना। मेरी मम्मी से भी अब सब्र नहीं हुआ। और मेरी मम्मी भी पलट गईं। और अंकल की आँखों में देखने लगीं। तो अंकल ने पहले मेरी मम्मी के लेफ्ट गाल को चूमा। और मेरी मम्मी के दूसरे गालों को अपने होठों में दबा कर चूसा। तो मेरी मम्मी ने शर्म से अपना चेहरा दूसरी ओर कर लिया। तो अंकल ने मेरी मम्मी का चेहरा ऊपर करके अपने होठ मेरी मम्मी की गर्दन पर रख दिए। और उसको चूमने और चाटने लगे। और उनके हाथ मेरी मम्मी की पीठ पर थे। जिससे वो सहला रहे थे। और धीरे अपने हाथ नीचे की ओर ले जाते। मेरी मम्मी के चूतड़ों पर रख कर मेरी मम्मी के चूतड़ों को हाथों में दबा देते। कभी धीरे। और कभी जोर से थप्पड़ मार देते। और फिर अपने हाथ को ऊपर ले जा कर मेरी मम्मी के ब्लाउज के ऊपर से मेरी मम्मी की ब्रा के हुक को खोलने की कोशिश करने लगे। तो मेरी मम्मी ने उनको मेरी मम्मी की ब्रा का हुक खोलने से रोका। मम्मी: ये क्या कर रहे हैं योगेश जी। इसको क्यों खोल रहे हैं। पता ना वो घर में ही है। अंकल: क्या यार। तुम्हें घर में ब्रा पहनना जरूरी है क्या। तुम्हें कितनी बार कहा है कि घर में ब्रा मत पहना करो। मम्मी: मुस्कुरा कर। आपका बस चले ना। तो आप मुझे ब्रा तो क्या। ब्लाउज भी पहनने न दें। ऐसे ही सारा दिन घर में नंगी रखें। पर करूँ। वो भी तो घर में है। अगर मैं ब्रा नहीं पहनती। तो पता है कैसे उछलते हैं। और उसकी नजर इन पर ही तो लगी रहती है। और वो बोलता। तूने ब्रा क्यों नहीं पहनी। मेरा तो खड़ा होता नहीं है। तो फिर तू तेरी चुचियाँ किसे दिखा रही है। अंकल: तो क्या हुआ मेरी जान। तू उस मादरचोद नामर्द नामर्द से कह देना। मैं योगेश के लिए ब्रा नहीं पहनती हूँ। वो क्या कर लेगा। और लगता है ये कमबख्त ब्रा बहुत टाइट हो गई है क्या। मम्मी: होगी ही ना टाइट। 6 महीने पहले खरीदी थी ये ब्रा। 6 महीने पहले कितनी छोटी थी मेरी चुचियाँ। आराम से आ जाती थीं मेरी ब्रा में। लेकिन इन 6 महीनों में आपने उनको दबा दबाकर इनको बड़ा कर दिया है। अब ये ब्रा टाइट हो गई है। और आपको तो मौका मिलना चाहिए। बस लग जाते हैं इन से खेलने। आप भी दिन भर इनको कितना खींचते हैं। कितना चूसते हैं। बढ़ गया मेरा साइज। 6 महीने पहले जहाँ मेरा साइज 32 था। अब मुझे लग रहा है जिस तरह से आप इसकी खींचते और चूसते हैं। कुछ दिन में 36 हो जाएगा। अंकल: होता है अक्सर प्यार में मेरी जान। वैसे जान। इसमें मेरा कोई कसूर नहीं। कसूर तुम्हारी इस मस्त जवानी का ही। देखते ही मचल जाता है। तुम अभी 33 की हो। और देखने में लगती हो 23 की। कोई नहीं कह सकता कि तुम एक 19 साल के लड़के की मम्मी हो। तुम अंकुश की बहन लगती हो। और अंकल का इतना कहना ही था कि मम्मी और अंकल दोनों साथ में हँसने लगे। अंकल मेरी मम्मी के पीछे खड़े थे। उन्होंने अपने हाथ मेरी मम्मी के चूतड़ों पर रख दिए। और मेरी मम्मी के चूतड़ों को हाथों में भर कर ऐसे दबाने लगे। मानो मेरी मम्मी के चूतड़ कोई एक स्पंज बॉल हो। मेरी मम्मी फिर से गरम होने लगीं। तो उन्होंने मेरी मम्मी को चिपका लिया। और मेरी मम्मी को चूमने लगे। और उनका लंड मेरी मम्मी और अंकल दोनों के बीच सैंडविच बना हुआ था। और उनका लंड पर प्रीक्यूम की बूंदों से गीला हो गया। और वो मेरी मम्मी की साड़ी पर उनका प्रीक्यूम लग गया था। मेरी मम्मी ने उनके होठों को चूमना बंद कर दिया। तो वो मेरी मम्मी से बोले। जान। अब तुम्हें क्या हुआ। मम्मी: (मेरी मम्मी ने अपने होठों को अपने हाथ से साफ किया। क्योंकि अंकल के मेरी मम्मी के होठों को चूमने से मेरी मम्मी के होठों की लिपस्टिक खराब हो गई थी।) बस भी कीजिए। मेरी सारी लिपस्टिक खराब हो गई। वो आ जाएगा। अंकल: सिर्फ 6 महीने हुए हैं हमारे रिलेशनशिप को। और तुम्हें इतना टेंशन हो रहा है। ऐसे थोड़ी ही हमारी न्यू लाइफ चलेगी। पिछले 19 सालों से तुम भी तड़प रही हो। और वो लाइफ एन्जॉय कर रहे हैं। तो तुम उस मादरचोद नामर्द नामर्द से डर रही हो। और तुम हर वक्त टेंशन में रहती हो। वो देख लेगा। अरे क्या देख लेगा वो मादरचोद नामर्द नामर्द। जो खुद अपनी बीवी की चूत में 19 सालों से एक बार भी अपनी लुल्ली को नहीं घुसा पाया। और तुम हिजड़े से टेंशन लेती हो। मम्मी: तो मैं क्या करूँ। क्या आपको नहीं होती टेंशन। मुझे क्या ऐसे डर डर कर प्यार करना अच्छा लगता है। मेरा दिल नहीं करता क्या। मैं खुल कर आप से प्यार करूँ। आप ही बताओ। जब वो यहाँ नहीं था। तो मैं कभी आपको रोकती थी। कभी किसी बात के लिए आपको मना किया था। पर मैं नहीं चाहती उससे अभी हमारे रिश्ते के बारे में अभी कुछ पता चले। क्योंकि मुझे मेरी टेंशन नहीं है। कोई मेरे बारे में क्या सोचेगा। पर अंकुश की है। उससे उसके दोस्त पड़ोसी रिश्तेदार क्या कहेंगे। तेरी माँ एक वेश्या है। तेरे ही पड़ोसी की रखैल है। मैं नहीं चाहती हूँ कि मेरा बेटा समाज में मोहल्ले में कॉलेज में अपना सिर नीचा रखे। क्या आपको अंकुश के बारे में कुछ नहीं लगता। यदि आपको नहीं लगता कि अंकुश को सिर नीचा होगा। वैसे अगर आप चाहें तो मैं अभी जाकर उसको हमारे बारे में बता दूँ। फिर आपका जो दिल करे कीजिए। आपकी कसम। मैं मना नहीं करूँगी। अंकल: मैं भी अंकुश को अपना बेटा मानता हूँ। मैं भी चाहता हूँ उसका सिर हमेशा ऊँचा रहे। इसलिए तो चुप चुप के करता हूँ। नहीं तो मैं तुझे उसी मादरचोद नामर्द नामर्द के सामने चोदता। लेकिन अब कुछ तो करना पड़ेगा। जिससे हमारा मजा चालू रहे। और अंकुश का सिर भी ऊँचा रहे। कोई उसे अपमानित न करे। वर्षा। अच्छा सुनो। तुम आई-पिल्स ले रही हो क्या। मेरी मम्मी अंकल दोनों अभी भी एक दूसरे से चिपके हुए थे। अंकल की बात सुन कर मेरी मम्मी ने शर्माते अपना चेहरा उनकी छाती में छुपा लिया। और बोलीं। कभी कभी ले लेती हूँ। जब कभी आपको ज्यादा जोश चढ़ा होता है। और आप अंदर बरसा देते हो। अंकल: यार कहाँ तुम्हारे अंदर गिराता हूँ तुम। बिना चढ़ाए करने देती हो क्या। देखो। तुम आई-पिल्स लेना बंद कर दो। पता है इससे साइड इफेक्ट होता है। मम्मी: क्यों। आपका क्या पता। कभी मुझे ज्यादा गरम करके बिना कंडोम चढ़ाए अंदर गिरा देते। और कुछ हो गया तो। अंकल: तो क्या हुआ। आज नहीं तो कुछ टाइम के बाद तो अंदर गिराना ही होगा। क्या तुम मेरे बच्चे की माँ बनाना नहीं चाहती। अंकल के मुँह से अपने बच्चे की माँ बनाने की बात सुन मेरी मम्मी के गाल लाल हो उठे। और मेरी मम्मी ने शर्मा अपना मुँह उनकी छाती में छुपा कर प्यार से उनकी छाती में मुक्का मारते बोलीं। धत्त। अंकल: क्या धत्त। मम्मी: उसका तो खड़ा हो नहीं होता। और मैं प्रेग्नेंट हो गई। तो वो मुझे बदनाम कर देगा। अंकल: हम उसका इलाज करवाएँगे। जिससे उसका खड़ा होगा। फिर तू उससे सिर्फ एक बार चुदवा लेना। और आई पिल ले लेना। और फिर उसे नामर्द बनाने की मेडिसिन दे देंगे। और फिर मेरे लंड से चुदवाकर प्रेग्नेंट हो जाना। और उसको लगेगा तुमको उसी ने प्रेग्नेंट किया है। सिर्फ एक बार उसका लंड खड़ा होगा। और फिर तुम्हारी और मेरी एक बेटी होगी। प्यारी सी। बिल्कुल तुम्हारी तरह। हमारे प्यार की निशानी। मम्मी: नहीं बेटा। अंकल: अंदर गिराने दो। तभी तो बेटा होगा। मम्मी: (प्यार से अपने यार की आँखों में देखती हुई) आपको बस मेरे अंदर गिराने का मौका चाहिए। पहले आप उस मादरचोद नामर्द नामर्द का लंड की प्रॉब्लम सॉल्व करो। फिर आपकी जितनी इच्छा हो मेरे अंदर बरसाना। रोकूँगी नहीं। लेकिन अंकुश चाहेगा तभी। कि उसे कोई भाई या बहन चाहिए या नहीं। अंकल: अच्छा यार। वो कल वाले यूज्ड कंडोम कहाँ फेंके तुमने। जो मैंने तुम्हें दिए थे। मम्मी: कौन से। अंकल: अरे वही कंडोम जो कल रात को यूज किए थे। 6 कंडोम। और एक आज दिन में यूज किया। पूरे 7 कंडोम। मम्मी: अरे वो तो मैंने अंकुश के रूम में। उनके कितना वीर्य भरा हुआ था उनमें। मेरा तो पूरा हाथ भी भर गया था। अंकल: यार वही पूछ रहा हूँ। कि वो यूज्ड कंडोम कहाँ हैं। फेंक दिए या वहीं पड़े हैं। मम्मी: ओह। वो तो वहीं पड़े हैं अंकुश के अंदर वाले रूम में। और हाँ। मैं तो उसके बाद मैं भूल गई उसको वहाँ से हटाना। अंकल: अरे यार। क्या करती हो। कंडोम फेंकने के लिए कहा था ना मैंने तुमने। अब वो मादरचोद नामर्द नामर्द वहाँ एसी ठीक करने गया है। और कुछ गड़बड़ हो गया तो। अगर उसने वो यूज्ड वीर्य से भरे कंडोम देख लिए। तो यही सोचेगा कि कि मैंने और तुम्हें ही इससे यूज किया है। क्योंकि उसका तो लंड खड़ा होता नहीं है। और उसका शक मुझ पर ही जाएगा। क्योंकि मैं ही तेरे घर में आ जाता हूँ। ये बात वो जानता है कि मेरी अंकुश से दोस्ती है। या कहते हुए अंकल ने एक झटके में मेरी मम्मी को अपने से अलग किया। मेरी मम्मी की आँखों से आँसू आने लगे। आज पहली बार था कि अंकल ने मेरी मम्मी को इस प्रकार डाँटा था। मेरी मम्मी ने रोनी सूरत बनाते कहा। आपको पता है कितनी टेंशन है मुझको। और आपकी जब आपको मौका मिलता है चढ़ा लेते हो। और फिर इधर उधर फेंक देते हो। इसमें मेरा क्या गलती। आप मुझे डाँटने लगे। सारी रात आप करते रहते हैं। और सुबह वो घर में था। कहाँ फेंकती। और उसके बाद आप घर का कुछ भी काम कहाँ करने देते हो। वो घर से गया नहीं। आप मुझे उठा कर बेडरूम में ले गए। और चढ़ गए मेरे ऊपर। अब भी आपको मौका मिलता ना। अभी मुझे उठा कर रूम में ले जाते। और नंगी करके मेरे ऊपर चढ़े होते। शायद अंकल जी को भी अपनी गलती का एहसास हो गया। तो वो बोले। अच्छा बाबा। माफ कर दो। सारी गलती मेरी ही। तो मेरी मम्मी ने रूठ कर अपना मुँह दूसरी ओर कर लिया। तो अंकल मेरी मम्मी को पीछे से बाँहों में भरते बोले। जान। कहा ना। गलती हो गई। अब माफ कर दो ना। कहो तो तुम्हारे पाँव पड़ जाऊँ। और जैसे ही वो नीचे झुक कर मेरी मम्मी के पैर पकड़ने लगे। तो मेरी मम्मी ने कहा। ये आप क्या कर रहे। तो अंकल ने मेरी मम्मी को गले से लगा लिया। और बोले। जान। माफ कर दो मुझे। तुम पर गुस्सा नहीं करना चाहिए था। वो क्या ही। पता नहीं मुझे क्या हो गया। जानती हो ना। तुम्हारे नामर्द पति का कितना टेंशन है। और मेरी मम्मी के गालों को चूमने लगे। तो मेरी मम्मी ने कहा। अब हटाइए ना। ज्यादा प्यार दिखाने की जरूरत नहीं। तो अंकल ने मेरी मम्मी के सामने अपने दोनों कान पकड़ कर बोले। सरकार। अब तो इस गुलाम को माफ कर दो। अंकल की इस हरकत पर मेरी मम्मी मुस्कुरा पड़ीं। और अंकल ने मेरी मम्मी को गले लगा कर। और चुम्मी देकर बोले। अंकुश से बोलता हूँ। वो रूम में जाकर कंडोम हटा दे। और उस नामर्द को कोई शक न हो। फिर अंकल ने किचन से ही मुझे कॉल किया। मैं: हेलो अंकल। अंकल: बेटा तेरे रूम में तेरा बाप गया है। मैं: हाँ अंकल। वो एसी ठीक करने गए हैं। अंकल: बेटा कल के 7 कंडोम तेरे अंदर वाले रूम में हैं। वो तेरा बाप न देख ले। तू जाकर उन्हें हटा दे। मैं: ओके। मैं ले जाता हूँ। फिर कॉल कट हुआ। मैं रूम में गया। और जाकर देखा। पापा बाहर रूम में मेरे एसी की सफाई कर रहे थे। और कंडोम अंदर वाले रूम में थे। मैं: पापा कितना टाइम लगेगा। पापा: होने वाला है बेटा। सफाई कर रहा हूँ। फिर मैं अंदर वाले रूम में गया। जहाँ कंडोम 7 पूरे थे। मैंने कंडोम को उठाया। और बेड के नीचे डाल दिया। ताकि किसी को शक न हो। और मैं उन्हें बाहर लाता। तो पापा देख लेते। इसलिए बेड के नीचे डाल दिए। उनमें अंकल का अनमोल वीर्य रस भरा हुआ था। जब मैं बेड के नीचे कंडोम डाल कर उठा। तो मैंने देखा। मम्मी भी रूम में आ गई थीं। और उन्होंने मुझे बेड के नीचे कंडोम डालते देख लिया था। शायद वो डर के मारे आई होंगी। मैं: मम्मी आप यहाँ। मम्मी: वो बेटा। मैं वो। मम्मी बोल नहीं पा रही थीं। शर्म की वजह से। क्योंकि मैंने कंडोम बेड के नीचे डाले थे। और एक माँ अपने बेटे को ऐसे करते देखेगी। तो शर्म आएगी ही। मैं: मम्मी लगता है आप मुझे चाय के लिए बुलाने आई हो। मम्मी: हाँ बेटा। चल। चाय पी ले। और मम्मी ने फिर ऐसे शो किया। जैसे उन्होंने कुछ नहीं देखा। मम्मी भी चाय के लिए बोल पड़ीं। जबकि अभी खाना का टाइम था। क्योंकि मैंने चाय बोला। तो मम्मी भी हड़बड़ाते हुए चाय बोल पड़ीं। जबकि वो खाना का भूल गईं। मैं: हाँ मम्मी। चलो। और मैं मम्मी के साथ अंदर वाले रूम से निकला। बाहर वाले रूम में। जहाँ पापा एसी की सफाई कर रहे थे। फिर हम दोनों बाहर वाले रूम से भी निकल कर हॉल में आए। और मैं सोफे पे बैठा। और मम्मी किचन में चली गईं। जहाँ अंकल थे पहले से मौजूद। और मैं भी किचन देखने लगा थोड़ी दूरी से चुपके से। अंकल: (स्माइलिंग) वर्षा। कंडोम मिला। मम्मी: (डाँटते हुए) मिल गया अंकुश को। और उसने बेड के नीचे छिपा दिए। बहुत वीर्य भरा था उनमें। अंकुश को हाथ गीला हो गया आपके वीर्य रस से। अंकल: तुझे कैसे पता। क्या अंकुश ने तुझे बताया। मम्मी: नहीं। लेकिन जब वो आपके वीर्य से भरे कंडोम बेड के नीचे छुपा रहा था। तो मैं देख रही थी। फिर मैंने उसके सामने ऐसे दिखावा किया। जैसे मैंने कुछ नहीं देखा। अंकल: बोल देती। मैं देख रही हूँ। मम्मी: चुप करो। बेशर्म। वो मेरा बेटा है। वो हमारी इतनी मदद कर रहा है। ये क्या काम है। अब आप जाइए। मुझे काम करना है। आज मैं आपकी वजह से फँस जाती। आपका क्या है। आप तो मर्द हो। सब गलती हम औरतों की ही मानी जाती है। चूत भी हमारी फटती है। और बदनामी भी हमारी होती है। और दर्द भी हमें होता है। मम्मी गुस्से में बोल रही थीं। तो अंकल ने मेरी मम्मी को अपनी बाँहों में भर लिया। और बोले। अंकल: नहीं ऐसे नहीं। पहले बोलो मुझे माफ कर दिया। अगर तुम कहो तो मुर्गा बन जाऊँ। प्लीज यार। अब मान भी जाओ। सॉरी। अब मुझे माफ खाना लगा दो। और अपना दूध पिला दो। और अंकल ने इतना कहते ही मेरी मम्मी की चुचियों को पकड़ कर प्यार से सहला दिया। मम्मी: धत्त। जाइए अब आप यहाँ से। और रही बात दूध की। वो अब नहीं। वो अब सीधा रात को ही मिलेगा। और पापा रूम से ही आवाज देते हुए। बेटा तेरी मम्मी को बोल। खाना टेबल पर लगा दे। मैं आ रहा हूँ। तो मैंने भी मम्मी को इसकी जानकारी देना सही समझा। क्योंकि आ एकदम आ जाते। और अंकल मम्मी को साथ में देख लेते। तो प्रॉब्लम हो जाती। मैं: मम्मी पापा आ रहे हैं। खाना टेबल पर लगा दो। बाहर से ही जोर से आवाज दी। ताकि मम्मी अंकल समझ जाएँ कि मैंने उन्हें पापा के आने की इन्फॉर्मेशन दे दी है। मम्मी: हाँ बेटा। लगा रही हूँ। बस 5 मिनट। मैं: समझ गया। मम्मी ये कहना चाह रही थीं। बेटा तेरे पापा को 5 मिनट और रोक। रूम में। रूम से बाहर मत आने दे। मम्मी: (अंकल से) देखा मेरे बेटे को। उसने पहले ही इन्फॉर्मेशन दे दी। अब अंकल को किचन से बाहर निकाल दो मम्मी। अंकल: अरे। वो क्या। तेरा अकेला का बेटा है। मेरा भी तो बेटा है। मम्मी: कुछ भी बोलते रहते हैं आप। शर्माते हुए। अंकल: क्यों मेरी रानी। कुछ गलत कहा। अब वो मेरा भी तो बेटा ही हुआ। क्योंकि मैं उसकी मम्मी को चोद कर उसकी मम्मी को खुश कर रहा हूँ। जो मम्मी को चोदता है। वही बाप होता है। इसलिए मैं अंकुश का बाप भी बन गया हूँ। उसकी वर्षा मम्मी को चोद कर। अब जान। मैं चलता हूँ। और अंकल ने मेरी मम्मी के चूतड़ों पर हाथ मार बोले। जान। जरा जल्दी आना अंकुश के रूम में। तुम्हारी याद में कहीं तड़पता न रहूँ। जवाब में मेरी मम्मी भी मुस्कुरा पड़ीं। और बोलीं। आपको शिकायत का मौका नहीं दूँगी। और अंकल किचन से बाहर आए। और मुझे बाय करते हुए चले गए। फिर मैं किचन में गया। तो मम्मी ने कहा। बेटा जाकर खाना टेबल पर लगा दे। मैं: जी मम्मी। और टेबल पर खाना लगाया। फिर मैंने पापा मम्मी ने खाना खाया। और पापा अपने रूम में चले गए। और फिर मैंने अंकल को मैसेज किया। तो अंकल भी आ गए। मम्मी अंकल को देख मुझसे बोलीं। मम्मी: बेटा तूने इन्हें क्यों बुलाया। मैं: मम्मी कंप्यूटर सिखाने के लिए। मम्मी: बेटा आज मैं कंप्यूटर नहीं सीखूँगी। क्योंकि मैं आज तेरे पापा के साथ उनके रूम में सोऊँगी। मैं: मम्मी आप आ जाना। पापा के सोने के बाद। मम्मी: नहीं बेटा। उनकी नींद खुल गई तो क्या होगा। मैं: मैं हूँ ना मम्मी। आप टेंशन मत लेना। मैं सब संभाल लूँगा। आप सिर्फ कंप्यूटर सीखना। मम्मी: ओके बेटा। और फिर मम्मी पापा के रूम में चली गईं। और अंकल मेरे अंदर वाले रूम में चले गए। फिर मैं मम्मी पापा की विंडो पे गया। तो देखा। पापा बेड पे लेटे हुए थे। और मम्मी रूम में गईं। तो मम्मी को देख रहे थे। मम्मी ने एक बहुत ही सेक्सी सी पिंक कलर की नाइटी निकाली अलमारी से। और बाथरूम में चली गईं। और उसे चेंज करके बाथरूम से बाहर आईं। पापा के पास आकर बेड पर लेट गईं। और पापा भी फिर मम्मी की तरफ हो गए। और अपना एक हाथ मेरी मम्मी की कमर पर रख दिया। मम्मी: क्या है। पापा: क्या तुम मुझसे नाराज हो। मम्मी: नहीं। क्यों। पापा: फिर तुम कपड़े पहन कर क्यों सोती हो। मम्मी: मैं पहले नंगी सोती थी। तो भी आप कुछ नहीं करते थे। 19 साल से आपने कुछ किया नहीं। तो मैं अब नाइटी पहन कर सोती हूँ। क्या कुछ करोगे आज। पापा: नहीं वर्षा। मम्मी: कभी तो कर लो। 19 साल से तड़प रही हूँ। पापा: वर्षा। नहीं। इससे हमारा शरीर कमजोर होता है। लाइफ में सेक्स लिमिटेड होना चाहिए। मम्मी: आपने तो 19 साल से। पापा: वर्षा। मैंने कहा ना। लिमिटेड सेक्स की क्या जरूरत है। अब हमारे बेटा है। अब क्या करेंगे। मम्मी: लेकिन मेरी चूत का। पापा: तेरी चूत को बोल दे। अब लंड नहीं मिलेगा। और हाँ। और यदि तूने किसी और का लंड के बारे में सोचा। तो मेरी चूत को काट दूँगा। अब तू लंड के सपने देखना बंद कर दे। फिर पापा दूसरी तरफ मुँह कर के सो गया। मैं उन दोनों को विंडो से देख रहा था। कि तभी अंकल मेरे पीछे आए। और मेरे कंधे पे हाथ रखा। और बोले। क्या देख रहे हो बेटा। मैं: मैंने पलट कर देखा। अंकल ओनली अंडरवियर में थे। मैं बोला। अंकल देख रहा हूँ। मेरा नामर्द बाप मेरी मम्मी को कैसे डाँटता है। मादरचोद नामर्द नामर्द खुद खर्राटे लेकर सो गया। लेकिन मेरी मम्मी को आपसे दूर रख रहा है। अंकल: तो बुला ले बेटा तेरी मम्मी को। मेरा लंड खड़ा है। मैं: अंकल आप मम्मी को बुला लेना। मैं रूम में जाकर सोने का नाटक करता हूँ। नहीं तो मम्मी को बहुत शर्म आएगी। मेरे सामने आपके साथ अंदर वाले रूम में जाने में। क्योंकि आप ओनली अंडरवियर में ही। अंकल: बेटा इतना तो चलने दे। इसमें कोई शर्म नहीं है। फिर अंकल ने मेरे सामने ही मम्मी को कॉल किया। लेकिन मम्मी ने कॉल रिसीव नहीं किया। क्योंकि मम्मी सो रही थीं। और मोबाइल वाइब्रेशन पर था। फिर अंकल ने दोबारा इसी प्रकार 5 वी बार कॉल पर मम्मी की वाइब्रेशन से नींद खुली। और उन्होंने कॉल उठाया। अभी रात के 11 बजे थे। मम्मी ने पापा की तरफ देखा। पापा घोड़े बेचकर खर्राटे लेकर सो रहे थे। फिर मम्मी ने मोबाइल को कान पे लगाया। मम्मी: धीमी आवाज में। हेलो। अंकल: आओ ना यार। मम्मी: वो मेरी थोड़ी आँख लग गई थी। अभी आती हूँ। अंकल: आओ जल्दी। मम्मी: ज्यादा देर नहीं रुकूँगी। इसको पता न चल जाए। इसलिए सिर्फ 2 मिनट। अंकल: जल्दी आओ। सब्र नहीं हो रहा है। मम्मी: मुस्कुराकर। एक दिन भी सब्र नहीं होता आपसे। कैसे तड़प रहे हैं। फिर मम्मी ने अंकल की ओर देखा। वो गहरी नींद में सोए हुए थे। फिर मम्मी रूम से बाहर आने लगीं। तो मैंने अंकल से कहा। अंकल मैं रूम में जाता हूँ। और मैं रूम में आ गया। और रूम से ही बाहर देखने लगा। फिर अंकल मम्मी का इंतजार कर रहे थे। मम्मी रूम से निकलीं। और मम्मी ने पापा के रूम की बाहर से कुंडी लगा दी। मम्मी ने अंकल को रूम के बाहर ही खड़ा देखा। मम्मी: क्या। आप रूम के बाहर ही मेरा वेट कर रहे हो। हो अंडरवियर में खड़े हो। क्या इतना भी सब्र नहीं हो रहा है आपसे। जो कपड़े उतारकर आ गए। अब अंकुश के सामने मैं कैसे आपके साथ जाऊँगी। आप तो अंडरवियर में ही। मुझे शर्म आएगी। अंकल: कोई शर्म नहीं आएगी मेरी बुलबुल। और उन्होंने अपने हाथ मेरी मम्मी की कमर में डालकर मेरी मम्मी को अपने से चिपका लिया। और मेरी मम्मी के होठों को चूमने लगे। और बोलने लगे। यार तुम नहीं जानती। तुम्हारे बिना एक पल के लिए रहना कितना मुश्किल है। ये एक एक पल मैंने कैसे गुजारा है। ये मैं ही जानता हूँ। अंकल का अपने प्रति ये प्यार से दीवानी देख मेरी मम्मी खुद भी अपने आप को रोक नहीं पाईं। और मेरी मम्मी ने भी अपनी बाँहें अंकल के बदन पर कस दीं। और अंकल की आँखों में अपनी आँखें डाल कर एक नशीली अदा से बोलीं। क्या मैं रह सकती हूँ आपके बिना। आपने कैसे आदत डाल दी है। अब तो उसके बिना नींद ही कहाँ आती है। अंकल: अब सब्र नहीं होता है जान। मम्मी: कितने बेशर्म हैं आप भी। आप से जरा भी सब्र नहीं होता। देखिए ना। कितने फोन कर दिए। अगर उससे पता लग जाता तो। अंकल: यार मुझसे सब्र नहीं होता। तो क्या तुम से सब्र होता है। और रही बात उसको पता लगने की। अगर लग जाता तो लग जाता। और वो मेरी मम्मी के ऊपर वाले होठ को अपने होठ में दबा कर चूस रहे थे। मैं किसी दूसरे की जीएफ को थोड़े ही प्यार कर रहा हूँ। अपनी जीएफ को कर रहा हूँ। और अंकल फिर से मेरी मम्मी के होठों को चूसने लगे। जबकि उनके हाथ मेरी मम्मी के पीछे नाइटी के ऊपर से मेरी मम्मी की गाँड पर थे। मम्मी: मैं उसकी जीएफ नहीं। लेकिन उसकी बीवी हूँ। अंकल: उस नामर्द की बीवी। लेकिन सिर्फ नाम की। मम्मी: अंकल की बाँहों में कसमसाते हुए। आह... योगेश जी। अब और बर्दाश्त नहीं होता। चलिए ना बेडरूम में। क्या यहीं खड़े खड़े करने का इरादा है। अंकल भी बिना कुछ कहे मेरी मम्मी के होठों को चूसने में लगे थे। मेरी मम्मी का थूक निकल कर अंकल के मुँह में जा रहा था। और वो मेरी मम्मी की जीभ को अपने होठ में दबा कर चूस रहे थे। नीचे से उनका लंड अंडरवियर में तंबू की तरह खड़ा मेरी मम्मी के बदन में चुभ रहा था। फिर अंकल ने अपना हाथ मेरी मम्मी की चुची पर रख कर उसे दबाने लगे। और मम्मी से बोले। यार तुम्हें कहा था। नीचे ब्रा मत पहनना। मम्मी: अगर नहीं पहनती ना। पता है कितने जोर जोर से हिलते हैं। कितने बड़े हो गए। मैं सिर्फ आपकी हूँ। और आपकी रखैल हो कर इनको पराये मर्द के सामने खुला छोड़ दूँ। अंकल: वो पराय मर्द थोड़ी है। वो तो तेरा नामर्द पति है। मम्मी: मैं उसे पिछले 6 महीने तक पति मानती थी। लेकिन जब से आपका लंड मुझे अंकुश ने दिलवाया है। तब से मैं आपकी रखैल हूँ। उसकी बीवी नहीं। अब वो मेरे लिए पराय मर्द है। और मेरे बदन पे उसका नहीं। सिर्फ आपका अधिकार है। और पता नहीं वो मेरे उछलते दूधों को देखकर क्या सोचता होगा। अंकल: हाँ। तू सिर्फ मेरी है वर्षा। और पीछे से अपना हाथ मेरी मम्मी की ब्रा के हुक पर रख कर खोलते समय बोले। वो मादरचोद नामर्द नामर्द सोचेगा क्या मेरी जान। कि उसकी बीवी ने अपने यार को दिखाने के लिए ही इनको खुला छोड़ा है। तो क्योंकि वो नामर्द तो इनका दूध निकाल कर पी नहीं सकता। इसलिए उसकी बीवी अपने यार को पिलाएगी। मम्मी: प्यार से उनकी छाती में मुक्के मारती बोलीं। आप भी ना। कुछ भी बोलते हैं। फिर अंकल ने मेरी मम्मी को चूमते चूमते मेरी मम्मी को दीवार के सहारे खड़ा कर दिया। मम्मी: मम्म... योगेश जी... आह... फिर अंकल ने मेरी मम्मी की नाइटी की डोरी को खींच कर खोल दिया। और मेरी मम्मी की चुचियाँ उनकी आँखों के सामने नंगी हो गईं।
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अब मेरी मम्मी को डर भी लग रहा था। पर एक अलग ही तरह की एक्साइटमेंट भी हो रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे कोई मासूक अपने आशिक से घर से चोरी रात की तनहाई में मिलने आती है। और वो दोनों मौका मिलते ही एक दूसरे की बाँहों में खो जाते हैं। हालाँकि 6 महीने पहले तक मेरी मम्मी को कभी कोई इस तरह का मौका नहीं मिला था। क्योंकि मेरी मम्मी बहुत संस्कारी पतिव्रता औरत थीं। लेकिन अब अंकल की रखैल हैं। और मेरी मम्मी ने पापा के अलावा किसी और मर्द की तरफ देखा भी नहीं था। छूना तो बहुत दूर की बात है। लेकिन पापा के बाद अब सिर्फ अंकल की तरफ ही देखती हैं। और अंकल के लंड पे उछलती हैं। अंकल मेरी मम्मी की नंगी चुचियों को देखते ही अपने होश खो बैठे। और अपना चेहरा मेरी मम्मी की चुचियों के पास ले आए। और मेरी मम्मी के निप्पल को चूम लिया। जैसे ही अंकल की गरम साँसों ने मेरी मम्मी के निप्पल को छुआ। मेरी मम्मी को ऐसा लगा जैसे मेरी मम्मी के अंदर किसी ने बिजली के तार को छेड़ दिया हो। जैसे किसी ने जलती हुई आग में घी डाल दिया हो। मेरी मम्मी के अंदर की आग और भी तेजी से धड़कने लगी। क्योंकि मुझे मम्मी के आह की आवाजों से पता चल रहा था। मम्मी: आह... योगेश जी प्लीज। मुझसे सब्र नहीं हो रहा। लेकिन अंकल थे। उस समय मेरी मम्मी की बात को बिना सुने। उन्होंने मेरी मम्मी की दोनों चुचियों को अपने हाथों में पकड़ा। और मेरी मम्मी की चुची को मुँह में भर कर मेरी मम्मी की चुची को चूसने लगे। अंकल मेरी मम्मी की एक चुची को किसी आम की तरह मुँह में भर कर चूस रहे थे। जबकि दूसरी चुची को अपने हाथ में पकड़ कर मसल रहे थे। मेरी मम्मी ने भी मस्ती में अपने यार के इर्द-गिर्द अपनी बाँहें कस लीं। और उन्हें अपनी चुचियों पर दबा लिया। मेरी मम्मी की चूत बड़ी तेजी से पानी छोड़ने लगी थी। मेरी मम्मी से अब कंट्रोल करना लगभग मुश्किल ही नहीं नामुमकिन था। मेरी मम्मी ने अंकल से बदहवास की हालत में कहा। मम्मी: योगेश जी क्यों तड़पा रहे। अब डाल भी दीजिए ना। आप अच्छी तरह जानते हैं। मुझे सहन नहीं कर पाना। मेरे अंदर डाल दीजिए। फिर आपका जो दिल करे करते रहिए। प्लीज। लेकिन अंकल वो कहाँ मेरी मम्मी की बात सुन रहे थे। वो बस अपनी ही धुन में लगे हुए थे। मम्मी: योगेश जी क्या कर रहे हैं। अब डाल दीजिए ना अंदर। अब सब्र नहीं हो रहा। बड़ी खुजली हो रही है। आपको तो मेरी चुचियाँ मिल जाती हैं। बस उसी में खो जाते हैं। एक बार मेरा पानी निकाल दीजिए। फिर आप रात भर इनको चूसते रहिए। चाहे मुँह में रख कर सो जाना। लेकिन प्लीज डाल दीजिए। अंकल: यार बोला ना। पहले मुझे एनर्जी ड्रिंक तो पी लेने दो। अंकल जी के मुँह से एनर्जी ड्रिंक पीने की बात सुन मेरी मम्मी मुस्कुरा पड़ीं। और अपनी दोनों टाँगों को खोल कर उनको नीचे की ओर धकेलती बोलीं। लीजिए। आप भी ना। टाइम और जगह नहीं देखते। आपको तो घर में मजा चाहिए। अगर ऐसा ही और मजा लेना होता है ना। तो ये सब अंकुश के बेडरूम में करते हैं ना। कि खुले में सबके सामने। लीजिए। अब जल्दी से चाट लीजिए। अब अंकल का चेहरा मेरी मम्मी की चूत के बिल्कुल सामने था। मेरी मम्मी को अपनी चूत पर अंकल की गरम साँसें और भी तेजी से पानी छोड़ने लगीं। और खुद उनके सिर को पकड़ कर अपनी चूत पर दबाती बोलीं। मम्मी: लीजिए। पी लीजिए एनर्जी ड्रिंक। पता नहीं आपको यहाँ कौन सा एनर्जी ड्रिंक मिलता है। अंकल अपनी होठों को मेरी मम्मी की चूत के गुलाबी होठों से मिला दिया। जैसे ही अंकल के होठ मेरी मम्मी की चूत के होठों से मिले। मेरी मम्मी के मुख से एक जबरदस्त सिसकी निकल गई। आह... नो... मम्म...। मस्ती में मेरी मम्मी की आँखें बंद हो गईं। और मेरी मम्मी किसी जल बिन मछली की तरह अपना सिर इधर उधर झटकने लगीं। वो तो बस मेरी मम्मी की चूत पर अपनी नाक गड़ाए गरम साँसें ले और छोड़ रहे थे। और कभी मेरी मम्मी की चूत के होठों को अपने होठों में दबा कर चूसने लगते। और अपनी जीभ को जितना हो सकता था मेरी मम्मी की चूत के अंदर तक घुसा कर मेरी मम्मी की चूत को अपनी जीभ से ही चोदने लगे। तो मेरी मम्मी ने भी मस्ती में अपनी टाँगें और खोल कर अपना हाथ उनके बालों में फिराती अपनी कमर को धीरे से चलाने लगीं। और कभी उनका सिर पकड़ कर खुद ही अपनी चूत पर दबाने लगीं। कि तभी अंकल मेरी मम्मी की एक टाँग को ऊपर उठा दिया। जिससे कि मेरी मम्मी की चूत पूरी तरह से खुल गई। जिससे वो बड़े प्यार से चाटने लगे। और कभी मेरी मम्मी की चूत के होठों को अपने दाँतों से काट लेते। जिससे मेरी मम्मी की चूत के होठ बिल्कुल लाल हो गए। और मेरी मम्मी मस्ती में अपने दोनों हाथों से अपनी चुचियों को मसलने लगीं। उनके इस तरह चाटने से मेरी मम्मी जोर जोर से झड़ने लगीं। जिससे वो ऐसे चाट रहे थे कि जैसे वो कोई अमृत हो। मेरी मम्मी के मुख से लगातार सिसकियाँ निकल रही थीं। मेरी मम्मी की चूत का रस चाटने के बाद अंकल जी उठे। और मेरी मम्मी की आँखों में देख कर मेरी मम्मी को फिर से चूमने लगे। मेरी मम्मी की चूत का रस पीने के बाद तो अंकल में जोश और बढ़ गया था। अब तो वो मेरी मम्मी को सता रहे थे। तड़पा रहे थे। अब मेरी मम्मी ने भी उनको तड़पाने का सोचा। मम्मी: मैं जाती हूँ योगेश जी। बहुत देर हो गई है। अब तो आपने एनर्जी ड्रिंक पी लिया ना। आ गई ना आपके अंदर एनर्जी। अब जाइए। जा कर सो जाइए। अंकल: ऐसे थोड़ी ही होता है वर्षा डार्लिंग। मम्मी: पर... वो उठ जाएगा। मेरी मम्मी का इशारा मेरे नामर्द बाप की ओर था। अंकल: वर्षा तुम मेरी बीवी हो... राइट... मेरा हक है तुमपे... और अगर वो आ जाएगा भी तो हम कुछ गलत नहीं कर रहे। सब पति पत्नी यही करते हैं। हम भी तो वही कर रहे हैं जो सब पति पत्नी करते हैं। मम्मी: हम्म। लेकिन मैं आपकी बीवी नहीं हूँ। आपकी रखैल हूँ। बीवी तो मैं उसी नामर्द की हूँ। पर अंकुश ने मुझे आपसे चुड़वाकर आपकी रखैल बना दिया है। पर उसे तो नहीं पता मैं आपकी रखैल हूँ। वो तो यही समझता है उसके अलावा किसी और से नहीं चुदी हूँ। मैं सिर्फ उसी की हूँ। और जब उसे पता चलेगा आपकी रखैल बन गई हूँ। तो वो नामर्द मेरी बदनामी कर देगा। और साथ में अंकुश की भी। अब आप ही बताइए योगेश जी। क्या आप चाहते हैं मैं समाज में अपना सिर नीचे करके रहूँ। अंकल: नहीं। लेकिन मैं उस मादरचोद को भी हिजड़ा साबित करवा दूँगा। अब खुश। मम्मी: हाँ। मैं खुश हूँ आपसे। और आपके नग्ग राज लंड से। अंकल: तो फिर अब चुदवाने से क्यों मना कर रही है। और वैसे भी सेक्स गलत नहीं है। चुदाई भी बहुत जरूरी है। ये नेचुरल है। मम्मी: मैंने कब इनकार किया है। और कहा है कि हम गलत कर रहे हैं। अंकल: तो फिर देखो ना। कैसे ये अभी भी खड़ा है। और उन्होंने मेरी मम्मी का हाथ पकड़ कर अपने खड़े लंड पर रख दिया। मेरी मम्मी उनके लंड को अपने हाथ से सहलाती मुस्कुरा कर बोलीं। मम्मी: आपका ये लंड तो हर टाइम ही खड़ा रहता है। जब से मैंने उसे देखा है 6 महीने पहले। तब से ये हमेशा खड़ा ही रहता है। और मुझे पिछले 6 महीनों से चोद रहा है। लेकिन चोदने के बाद भी आपका ये लंड बैठता भी नहीं है। चोदने के बाद भी खड़ा ही रहता है। मैंने इसे तो कभी बैठे देखा नहीं। हर समय ये जोश में उछलता ही रहता है। और उनके लंड को सहलाने लगीं। और मेरी मम्मी उनसे बोलीं। लाइए। मैं आज इसको अपने हाथ से शांत कर देती हूँ। और जल्दी अपना हाथ चला कर अंकल के लंड को आगे पीछे करते हुए उनकी मुठ मारने लगीं। तो अंकल मेरी मम्मी को बाँहों में भरते हुए बोले। मेरी जान। जिसकी बीवी तुम जैसी सुंदर और सेक्सी हो। उस मर्द का लंड कैसे बैठ सकता है। मेरी रानी। इसको अपने हाथ से नहीं। अगर करना ही है तो अपने इन गुलाबी होठों में ले कर शांत कर दो। और मेरी मम्मी के होठों पर अपनी उँगली फिराने लगे। मेरी मम्मी से अपना लंड चुसवाने की बात पर मेरी मम्मी शर्म से। मम्मी: क्या आप भी ना योगेश जी। मैं मुँह में नहीं लूँगी। और मैं आपकी बीवी नहीं। रखैल हूँ। अंकल: मेरी रानी। हमारी शादी नहीं हुई तो क्या। मैंने तो तुम्हें दिल से अपनी बीवी मान लिया है। फिर इसको जरा से अपनी टाँगों के बीच ले कर इसको शांत कर दो। मेरी मम्मी: लंड को हाथ से हिलाती बोलीं। मैं अपने हाथ से आपका पानी निकाल तो रही हूँ। मेरी मम्मी की बात पर अंकल मेरी मम्मी की आँखों में देख कर बोले। अंकल: नहीं मेरी जान। अगर निकालना ही है तो अपने इन रसीले होठों से निकाल दो। ये सीधा सीधा वो मेरी मम्मी को अपना लंड चूसने को बोल रहे थे। पर मेरी मम्मी ने कहा। मम्मी: नहीं जी। तो। और वहीं हॉल में रखे सोफे पर लेट गईं। फिर अंकल मेरी मम्मी की टाँगों के बीच आ गए। और मेरी मम्मी की टाँगों को पूरा खोल दिया। और अपने खड़े लंड को पकड़ कर मेरी मम्मी की चूत पर टिका दिया। और मेरी मम्मी की दोनों टाँगों को ऊपर उठा दिया। मेरी मम्मी अपने यार के नीचे टाँगें खोली करके लेटीं। और जैसे ही अंकल ने अपने लंड को मेरी मम्मी की चूत में डालने लगे। तो मेरी मम्मी ने उनको रोक दिया। और कहा। मम्मी: योगेश जी पहले इस पर वो चढ़ा तो लीजिए। अंकल: यार अब कंडोम कहाँ से लाऊँगा। ऐसे ही करने दो ना। मम्मी: नहीं। करना ही है। वो ले कर आइए। फिर अंकल ने कहा। लाता हूँ। और अंकल मेरे रूम में आए। और मुझे कंडोम माँगा। और कंडोम लेकर चले गए। और उसको फाड़ कर अपने लंड पर चढ़ा लिया। और जाकर फिर से पोजीशन सेट की। मम्मी: ये क्या किया आपने। अंकुश से कंडोम लेकर आए हो। उसकी मम्मी को ही चोदने के लिए। अंकल: हाँ। मैं उसको बोलकर आया हूँ। तेरी मम्मी चुदने के लिए कंडोम का बोला है। और तू आराम से सो जा। मैं तेरी मम्मी को पूरी रात चोदूँगा। मम्मी: मुस्कुरा कर। आप भी बड़े शरारती हैं। आपको किसी न किसी मेरे अंदर गिराने की सोचते हो। मैंने कहा है। एक बार मेरे पति का प्रॉब्लम सॉल्व हो जाए। फिर आपका जितना दिल करे मेरे अंदर बरसाना। मैं मना नहीं करूँगी। अंकल: कैसी प्रॉब्लम। मम्मी: उसका लंड खड़ा होने लग जाए। अंकल: उसका लंड खड़ा होने लगेगा। तो तुम मुझसे चुदवाने बंद कर दोगी। मम्मी: नहीं। उसका लंड खड़ा होने लगेगा। तो मैं उससे महीने में सिर्फ एक बार चुदूँगी। और आपसे रोज। फिर मैं आपके लंड से प्रेग्नेंट हो भी गई। तो वो मादरचोद नामर्द नामर्द समझेगा मैं उसी के लंड से प्रेग्नेंट हुई हूँ। अंकल: सच वर्षा। तुम हमारा बच्चा करोगी। मम्मी: क्या योगेश जी आप भी ना। जब आप मेरे अंदर अपना गिराएँगे। तो क्या मेरा पेट नहीं फूलेगा। और रही बात बच्चे की। तो मैं प्रेग्नेंट हो जाऊँगी। उसके बाद अंकुश कहेगा। मैं बच्चे को जन्म दूँ तो ही दूँगी। अदरवाइज मैं अबॉर्शन करवा लूँगी। और ये क्या आप बातें ही करते रहेंगे। कहीं वो आ न जाए। जल्दी कीजिए। तो अंकल ने अपना लंड मेरी मम्मी की चूत के गुलाबी होठों में फँसा दिया। तो मेरी मम्मी के मुँह से हल्की सी आह... निकली। अंकल: क्या हुआ वर्षा। मम्मी: अरे कुछ नहीं... वो थोड़ा सा दर्द हुआ... अंकल: डालूँ क्या। मम्मी: हाँ... आप बिना मेरी चूत में डाले मानोगे क्या। पर जरा धीरे से डालना। कहीं एक बार में ही पूरा घुसा मत देना। आपको एक ही बार में पूरा मेरे अंदर घुसाने की आदत है। अंकल ने अपना लंड मेरी मम्मी की चूत पर रगड़ने लगे। जिससे मेरी मम्मी की चूत और भी पानी छोड़ने लगी। मम्मी: योगेश जी ये क्या कर रहे। अब अंदर डाल भी दीजिए ना। बाहर क्यों रगड़ रहे हैं। गुदगुदी होती है। अंकल: यार तुम्हारी चूत की चिकनाई से इसको थोड़ा चिकना कर रहा। ताकि आराम से चला जाए। और तुम्हें दर्द भी न हो। मम्मी: अपनी बाँहें उनके गले में डाल कर। इतनी ही चिंता है आपको मेरे दर्द की। अब डाल भी दीजिए ना। मैंने देखा कि मेरी मम्मी के चूत के पानी से अंकल का लंड भी चिकना हो गया। जिससे उनका लंड मेरी मम्मी की चूत के छेद से फिसलता जा रहा था। अब मेरी मम्मी भी बहुत गरम हो रही थीं। और बोलीं। मम्मी: अब ये क्या कर रहे हो। क्यों तड़पा रहे हो। आप चिकना हो तो गया है। डाल भी दो ना मेरे अंदर। अंकल: अरे... यार छेद कहाँ है। मम्मी: (छेद सुनके शर्माते हुए) क्या आप भी... रोज न जाने कितने बार डालते हो। जैसे पता ही न हो। थोड़ा नीचे ही... आह... हाँ... अंकल: यार तो फिर तुम ही पकड़ कर इसे अपने छेद पर लगा दो ना। मम्मी: आप भी योगेश जी। आपको इससे मुझे पकड़ाने के कोई न कोई बहाना चाहिए। और मेरी मम्मी ने अंकल का लंड पकड़ा। और बोलीं। पहले आप रूम की कुंडी लगा दीजिए। नहीं तो वो मादरचोद नामर्द नामर्द हिजड़ा बाहर आकर देख लेगा। अंकल: मैंने पहले ही लगा दी है। तूने नहीं लगाई। पर मैंने तेरे बिना कहे ही लगा दी। अब जल्दी से सेट कर अपनी चूत के छेद पर मेरा लंड। और मेरी मम्मी ने अंकल का लंड पकड़ कर अपनी चूत पर लगा दिया। और बोलीं। अब धीरे से घुसाना। मेरी मम्मी की चूत की गरमी पा कर अंकल ने हल्का सा धक्का मारा। और उनका लंड थोड़ा सा मेरी मम्मी की चूत में घुस गया। मम्मी: आह... उफ्फ... योगेश जी। गया थोड़ा सा... रुको रुको। अंकल एक पल के लिए रुके। और फिर एक दमदार धक्का मार कर उन्होंने अपना लंड पूरा मेरी मम्मी की चूत में घुसेड़ दिया। मेरी मम्मी की दोनों टाँगों को अपने हाथों से थामे मेरी मम्मी से बोले। गया ना अंदर... जान... मेरी मम्मी तो मस्त हो गईं। और नशीली आँखों से अंकल की आँखों में देख कर बोलीं। तो क्या बिना मेरे अंदर किए मानोगे। फिर तो अंकल एक रिदम के साथ अपनी कमर चलाने लगे। और मेरी मम्मी भी नीचे से अपनी कमर चला रही थीं। वो अपना पूरा लंड मेरी मम्मी की चूत से बाहर निकालते। और फिर जड़ तक घुसा देते। जिससे मेरी मम्मी के मुँह से हल्की सी आह... निकल जाती। अब तो उनके धक्कों की स्पीड भी बढ़ने लगी। मेरी मम्मी अंकल दोनों के मुख से आह... आह... आह... निकल रही थी। मस्ती में मेरी मम्मी ने अपनी दोनों बाँहें अंकल के गले में डाल कर उन्हें अपनी बाँहों में कस लिया। मेरी मम्मी उनके बालों में अपनी उँगलियाँ फिराती बोलीं। आह... योगेश जी कितना अंदर तक घुसाते हैं आप। आह... धीरे... दर्द होता है। उई माँ... सुनिए ना प्लीज। मेरी मम्मी की दोनों टाँगें पूरी तरह से खुली हुई थीं। और अंकल मेरी मम्मी की चूत पर धक्के पर धक्का मार रहे थे। उनका लंड गचा गच मेरी मम्मी की चूत में आ जा रहा था। और जैसे ही मेरी मम्मी झड़ने के करीब हुईं। मेरी मम्मी ने अंकल को अपनी तरफ जोर से बाँहों में जकड़ लिया। और जोर जोर से झड़ने लगीं। और अपनी दोनों टाँगों को उनकी कमर में लपेट लिया। तो अंकल ने मेरी मम्मी को उलटा लिया। अब वो नीचे। और मेरी मम्मी उनके ऊपर उनके लंड पर बैठी थीं। |
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