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Fantasy Mummy aur Uncle. Part 2 in hindi font
#21
**अपडेट 19**

मम्मी के स्तन अब अंकल की छाती पर रगड़ने लगते हैं। मम्मी के इस बर्ताव से अंकल से भी अब रहा नहीं जाता।
अंकल भी अब मम्मी को नहीं रोकते।
मम्मी और अंकल के शरीर के टकराने की आवाज थप-थप-थप.... कमरे में गूँज रही है।

मम्मी झड़ने को वाली होती हैं तो अंकल मम्मी की हवस को और बढ़ा देते हैं। मम्मी अंकल के ऊपर पूरी तरह गिर अपनी गाँड उठा-उठा कर अंकल को चोदती हैं।

मम्मी की आँखें बंद हो जाती हैं।
और इस महान चुदाई का आनंद लेती हैं अपनी आँखें बंद करके। तभी मम्मी का शरीर अकड़ने लगता है, वहीं अंकल भी मम्मी को कमर से पकड़कर जकड़ लेते हैं, तभी मम्मी की चुत झड़ना शुरू हो जाती है।

चुत झड़ते ही मम्मी की बेचैनी जैसे शांत हो जाती है। मम्मी वहीं अंकल के ऊपर ढेर हो जाती हैं।
अंकल मम्मी को बेड पर लिटा देते हैं क्योंकि अब अंकल को भी झड़ना था। अंकल मम्मी की चुत में झटके मारने लगते हैं।

मम्मी अंकल को चुत में झड़ने से मना करती हैं पर अंकल मम्मी की एक नहीं सुनते और मम्मी की चुत को पेलते रहते हैं।
कुछ ही पलों में अंकल भी मम्मी की चुत में अपना माल डालकर मम्मी के पास लेट जाते हैं।

मम्मी को अब अहसास होता है कि उसने अपनी हवस की आग में आज अपना व्रत तोड़ दिया जिसमें पूरा दिन बिना खाए रहते हैं। उस व्रत को अंकल से अपनी चुदाई करवाकर तोड़ दिया।

मम्मी की आँखों से आँसू छलक जाते हैं पर उनके शरीर में इतनी हिम्मत नहीं है कि वे वहाँ से उठ सकें।

मम्मी रोते हुए – “योगेश जी अब तो चले जाओ।”
अंकल – “चला जाऊँगा ना मेरी जान, इतनी चुदाई की है तूने थोड़ा तो आराम करने दे।”
अंकल मम्मी को हग करके फिर से चूमने की कोशिश करते हैं पर मम्मी अंकल का हाथ हटा देती हैं और कहती हैं “एक दिन चुदाई नहीं करते तो कौन सा फर्क पड़ जाता। आपकी मैं हमेशा आपसे चुदती हूँ पर आज मेरा व्रत टूटा। मैंने आपसे कहा आज मत चोदिए फिर भी आपने मेरी चुदाई की और मेरा व्रत टूट गया।”

मम्मी की बातों को सुनकर और मम्मी को रोता देख अंकल भी अब ज्यादा जोर-जबरदस्ती नहीं करते।

मम्मी वेट करती हैं कि अंकल अब चले जाएँ। मम्मी एक बेडशीट से खुद को ढक लेती हैं क्योंकि अंकल के सामने वे नंगी नहीं रहना चाहतीं।

पर अंकल अपने आप को ढकने की कोई कोशिश नहीं करते।

मम्मी की आँखों से आँसू आने लगते हैं जिन्हें देख अंकल समझ जाते हैं कि उन्हें बुरा लगने लगा है जो भी हुआ। आज उनका व्रत टूटा।

अंकल अब मम्मी को सपोर्ट करते हुए बोलते हैं और मम्मी की चादर में खुद भी घुस जाते हैं और मम्मी को हग कर लेते हैं। अंकल अपने बर्ताव में थोड़ी नरमी लाते हैं।

अंकल – “क्या हुआ वर्षा, रो क्यों रही हो आप?”
मम्मी कुछ नहीं कहतीं बस सुबकती रहती हैं।
अंकल – “वर्षा आप बताओगी नहीं तो मुझे पता कैसे चलेगा।” (अंकल थोड़ा और करीब आते हैं जिससे उनका लंड मम्मी की गाँड के साइड में प्रेस होने लगता है।)

मम्मी – “तुम सब जानते हो योगेश। आज जो भी हुआ सही नहीं हुआ, आज मेरा व्रत टूटा।”

अंकल : “वर्षा अपनी प्यास बुझाना गलत नहीं है। आपने जो किया वो अपने बदन की आग को शांत करने के लिए किया। और कौन कहता है व्रत में सेक्स नहीं करते। ये तो जीवन का एक अहम हिस्सा है। सेक्स के बिना तो बच्चे भी नहीं होते तो ये संसार आगे कैसे बढ़ता। और जो भी किया हम दोनों ने किया है, मैंने अकेले कुछ नहीं किया।”

मम्मी – “मैंने नहीं योगेश जी, तुमने मेरे साथ जबरदस्ती की।”
अंकल – “मैं मानता हूँ कि मैंने थोड़ी जोर-जबरदस्ती की पर क्या आप भी ये नहीं चाहती थीं? जरा पूछो अपने आप से वर्षा कि क्या सब मैंने ही किया।”
मम्मी चुप हो जाती हैं।

अंकल – “चुप मत रहो वर्षा। अपने मन में झाँकिए। क्या आपको सेक्स की जरूरत नहीं थी जो शाम को 5 बजे आप मेरे घर अकेली आई थीं। आप जानती हैं जब भी मैं आपको अकेली देखता हूँ तो मैं आपकी चुदाई करता हूँ, फिर भी आप मेरे घर आईं और मुझसे लिपट गई थीं और आपने मुझे किस किया। फिर मैंने आपकी चुत चाटी थी। और किसने कहा पति-पत्नी व्रत में सेक्स नहीं करते। माना कि मैं आपका पति नहीं पर आपके बेटे ने मुझे अपना पिता माना है। आप भी मुझे पति का दर्जा देती हैं क्योंकि आपका बेटा भी जानता है उसका बाप नामर्द है इसलिए तो उसने आपकी चुदाई में मेरी मदद की थी। और आग तो आपके अंदर भी बहुत है। और व्रत में पाप नहीं किया जाता है लेकिन पुण्य तो करते हैं। और किसी प्यासे की प्यास बुझाना पाप नहीं बल्कि पुण्य है। मैंने आपकी चुत की, आपने मेरे लंड की और आपके बेटे ने मुझे बुलाकर हम दोनों की प्यास बुझाने में मदद की है।
और आप और मैं कोई फर्क नहीं है। आप भी प्यासी, मैं भी प्यासा।”

मम्मी लगातार रोती हैं – “लेकिन एक दिन में क्या फर्क पड़ता।”

अंकल – “आप और मैं दोनों बदन की आग के आगे मजबूर हैं। बस फर्क इतना है कि मैं अपने आप को रोकता नहीं हूँ और आपने अपने आप को व्रत की मर्यादा की बेड़ियों में बाँधा हुआ है। जो मैंने आपसे जबरदस्ती करके तुड़वा दी।”

मम्मी खुद भी मानने लगती हैं कि अंकल सब सही कह रहे हैं। वे कुछ कहती तो नहीं पर सोच में डूब जाती हैं जिसका फायदा उठाकर अंकल मम्मी के ऊपर आ जाते हैं जिससे वे फिर एक बार मम्मी की आँखों में देख सकें।

अंकल अपना लंड मम्मी की जाँघों में दबाकर लेट जाते हैं और मम्मी का मुँह अपनी ओर कर मम्मी को अपनी बातों में लगाने लगते हैं।
मम्मी – “योगेश जी प्लीज अब हट जाओ।”
अंकल – “अब मैं कुछ नहीं करूँगा वर्षा, डरिए मत। बस बात कीजिए मुझसे।”

मम्मी – “अब क्या बचा है बात करने को।”
अंकल – “अच्छा ये बताइए क्या आपको आज मजा नहीं आया अपनी आग बुझाकर।”

मम्मी कुछ नहीं कहतीं तो अंकल मम्मी के चेहरे के ओर करीब आ जाते हैं। अब मम्मी के स्तन अंकल की सीने में धँस जाते हैं।

मम्मी – “योगेश जी प्लीज अब नहीं, समझो ना।”
अंकल – “तो मेरी बातों का जवाब तो दो ना आप।”
मम्मी – “हाँ आया था।”
अंकल : “क्या? पूरा बोलो।”
मम्मी : “मजा आया था।”
अंकल : “किसमें मजा आया था? पूरा बोलो, चुदाई में मजा आया था?”
मम्मी : “आप भी कितनी बार बुलवाओगे।”
अंकल : “एक बार और बोल दो – आपके लंड से मेरी चुत चुदाई में मजा आया था।”
मम्मी : “शर्माकर, प्लीज योगेश जी।”
अंकल : “प्लीज वर्षा, एक बार।”
मम्मी : “हाँ मजा आया था आपके लंड से चुद-चुदवाकर बहुत मजा आया था।”
अंकल : “फिर अब रोइए मत वर्षा। यही आपकी जरूरत है और अपनी जरूरत पूरी करना कोई गलत बात नहीं। जिस तरह आज आपने मेरा लंड लिया है उससे पता चलता है कि आप कितना तड़प रही थीं मेरे लंड के लिए क्योंकि कल मैंने आपको पूरा दिन चोदा था फिर भी आपकी आग ठंडी नहीं हुई। वर्षा तुम बहुत गर्म हो, तुम्हें 24 घंटे लंड की जरूरत है। तुम नंगी अच्छी लगती हो, तुम्हें 24 घंटे चुदाई चाहिए।”
मम्मी : “आप भी अब तो आपका मन भर गया ना? अब जाइए और कल दिल खोलकर चोद लेना मेरी चुत।”

अंकल अपना लंड और अंदर को प्रेस कर देते हैं जो अब मम्मी की चुत से टच होने लगता है। अंकल मम्मी की आँखों में देखते हैं।
अंकल – “आपको लगता है मेरा मन भर गया है? आप कोई एक बार में मन भरने वाली चीज नहीं हो वर्षा। मेरा लंड तो अभी भी बेताब है आपके लिए। और मैं जानता हूँ आप भी तड़प रही हो फिर से इसे लेने को।”
मम्मी – “नहीं ऐसा कुछ नहीं है योगेश जी।”
अंकल – “माँ या तो आप झूठ कह रही हैं या आपको भी नहीं पता कि आप कितनी प्यासी हैं।”

ये कहकर अंकल अपना हाथ नीचे ले जाकर मम्मी की चुत पर ले जाते हैं और उस पर अपनी उँगली रगड़कर वापस मम्मी को दिखाते हैं।
अंकल – “देखो वर्षा, आपकी चुत तो कुछ और कह रही है।”

अंकल की उँगली पूरी तरह से मम्मी की चुत से गीली हो जाती है। मम्मी भी शर्म से अपना चेहरा दूसरी ओर कर लेती हैं।

अंकल – “मेरी तरफ देखो वर्षा, इसमें कोई शर्म की बात नहीं है। आप में और मुझमें कोई ज्यादा फर्क नहीं है वर्षा। मैं भी आपकी तरह अपने बदन की आग के आगे मजबूर हूँ बस मैंने अपने आप को व्रत की मर्यादाओं में नहीं जकड़ा हुआ।”
मम्मी को भी अंकल की बातें सच लगने लगती हैं कि वे अपनी प्यास के आगे बेबस हैं और ऊपर से अंकल का लंड मम्मी की चुत पर दस्तक दे रहा था।
अंकल – “वर्षा आपको सबसे ज्यादा पसंद क्या आता है?”
मम्मी – “पता नहीं योगेश जी।”
अंकल – “मैं जानता हूँ आप झूठ बोल रही हैं। आपको मेरा लंड पसंद है। आपने कई बार कहा है आप मेरे लंड के बिना नहीं रह सकतीं।”

ये कहकर अंकल नीचे की ओर चादर में घुसने लगते हैं। मम्मी मानो जैसे जम गई हों, वे अंकल को रोकने की कोशिश भी नहीं करतीं।

अंकल अपना मुँह सीधा मम्मी की चुत पर लगाकर उसे चाटना शुरू कर देते हैं जिससे मम्मी मचलने लगती हैं और अपने हाथों से बेडशीट को पकड़ लेती हैं।

मम्मी – “ओह्ह योगेश जी प्लीज। आआह आआहा आआ योगेशhhhh जीईईई शhhhh”

अंकल मम्मी की एक नहीं सुनते और अपना काम जारी रखते हैं।
तभी मम्मी अपनी चादर उठाकर देखती हैं तो अंकल मम्मी की चुत चाटना छोड़ मम्मी को हँसकर देखते हैं। और फिर से मम्मी की चुत चाटने लग जाते हैं।

अंकल अब मम्मी के साइड में आकर लेट जाते हैं और मम्मी के होठों की ओर अपने होठ बढ़ा देते हैं। जैसे ही मम्मी अपने होठ अंकल की ओर ले जाती हैं अंकल पीछे हट जाते हैं।
मम्मी जानती हैं कि अंकल उन्हें तड़पा रहे हैं, वे अंकल की ओर एकटक देखती रह जाती हैं। मम्मी की साँसें काफी तेज चल रही हैं जिसकी वजह से मम्मी के स्तन भी काफी ऊपर-नीचे हो रहे हैं। अंकल मम्मी को अपने लंड की ओर इशारा करते हैं।
अंकल – “वर्षा अब तो इसे भी मुँह में ले लीजिए ना एक बार। फिर से ले लो।”

मम्मी : “योगेश जी मैं ये सब फिर से नहीं कर सकती। एक बार मैं बहक गई थी तो मैंने उसे अपने मुँह में भी किया और अपनी चुत में भी लिया। और प्लीज तुम अब चले जाओ ना।”

अंकल – “बट इसमें आपको दिक्कत क्या है? जैसे आपको अपनी चुत चटवाने में मजा आता है वैसे ही मुझे भी इसे चुसाने में। प्लीज एक बार ट्राई तो करिए।”
मम्मी : “आप तो ऐसे कह रहे हैं जैसे मैं आपके लंड को चुसती नहीं। पिछले 6 महीनों में अनगिनत बार चुसा है और इसका रस पिया है और हमेशा अपनी चुत में लिया। और आज मेरा व्रत है इसलिए मना कर रही हूँ। फिर भी व्रत होने के बावजूद मैंने उसे अपने मुँह में लिया, चुसा और जीभ से चाटा भी और अपनी चुत में भी लिया। और आप कह रहे हैं आपकी अपनी चुत चटवाने में मजा आता है वैसे ही मुझे लंड चुसवाने में। क्या मैं आपके लंड से प्यार नहीं करती हूँ? क्या बताइए मैंने हमेशा आपका लंड चुसा और हर बार रस पिया और आपने भी हमेशा मेरी चुत चाटी, रस पिया तो इसमें आप आज ये बातें क्यों कर रहे हो? आप मेरी मजबूरी समझिए। आज मेरा फास्ट है प्लीज।”

फिर अंकल मम्मी को एक खिलौने की तरह उठाकर अपने ऊपर 69 के पोज़ में बैठा लेते हैं।

अंकल : “क्या एक बार और नहीं कर सकतीं वर्षा जी? यदि फिर से मुँह में नहीं लेना चाहती हो तो मत लो लेकिन उसे ऊपर से चाट तो सकती ही। प्लीज ऐसे ऊपर से चटाइए मेरे लंड को।”

मम्मी अंकल के लंड को चाटना शुरू नहीं करतीं पर अंकल मम्मी की चुत पर जीभ फेरना स्टार्ट कर देते हैं। मम्मी भी विरोध नहीं कर पातीं और अंकल को अपनी चुत सौंप देती हैं।

अंकल जैसे ही फील करते हैं कि मम्मी अब हवस में डूब गई हैं वे मम्मी की चुत को चाटना बंद कर देते हैं।

मम्मी अपनी चुत अंकल के मुँह पर टिकाकर उसे रगड़ने की कोशिश करती हैं, अंकल भी मम्मी की चुत चाटते हुए मम्मी को आगे की ओर धकेल देते हैं।

मम्मी जानती हैं कि अंकल ऐसा क्यों कर रहे हैं। अब मम्मी को रहा नहीं जाता और मम्मी अंकल के लंड की ओर झुक जाती हैं। अंकल के लंड से काफी तेज गंध आ रही होगी शायद क्योंकि मैं खिड़की से देख रहा था तभी तो मम्मी ने अंकल के लंड को आँखें बंद करके सूँघा और मुस्कान के साथ “आह्ह क्या खुशबू है योगेश जी आपके लंड की”। तभी अंकल मम्मी की चुत पर एक-दो बार जीभ फेरकर फिर रुक जाते हैं।
अंकल : “वर्षा तुम्हें हमेशा मेरे लंड से खुशबू आती है तो आज नखरे क्यों कर रही थी मादरचोद रंडी साली वेश्या तेरी चुत में आग लगा दूँगा।”
मम्मी को गुस्सा तो आता है पर वे अंकल के लंड को साइड से चाटना शुरू कर ही देती हैं।

अंकल और मम्मी दोनों कुछ देर तक ऐसे ही एक-दूसरे को चाटते रहते हैं पर अंकल मम्मी को झड़ने नहीं देते।
अंकल अब मम्मी को बेड पर पलट देते हैं।
अंकल – “अब बोलो वर्षा, अब भी आप चाहती हो कि मैं चला जाऊँ?”

मम्मी कुछ नहीं कहतीं सिर्फ लंबी-लंबी साँसें लेती रहती हैं।
अंकल – “आप असलियत में ऐसी ही हो वर्षा। मैं आपको एक चांस देता हूँ। अगर आप चाहती हो कि मैं आगे कुछ न करूँ तो आप जा सकती हो।”

अंकल की ये बातें मम्मी को अंदर ही अंदर कचोटने लगती हैं। मम्मी न चाहते हुए भी बेड से उठकर वॉशरूम की ओर जाने लगती हैं।
अंकल ने ऐसा नहीं सोचा था। मम्मी बाथरूम में चली जाती हैं पर अब वे अपने होश में ही नहीं थीं और बाथरूम का गेट बंद करती हैं लेकिन पूरा नहीं। और अपने तन को शांत करने के लिए मम्मी शावर ऑन कर उसके नीचे खड़ी हो जाती हैं। मैं भी तुरंत बाथरूम की खिड़की पर चला जाता हूँ। बाथरूम में थोड़ी सी ऊँचाई पर खिड़की थी जो एयरजस्ट फैन के लिए है। मैं वहाँ से देखने लगा। मम्मी नंगी ही शावर ले रही हैं खड़ी होकर। मम्मी की आँखों में आँसू भी छलक रहे हैं कि वे ये सब कैसे होने दे रही हैं।
मम्मी धीमी आवाज में – “ये मुझे क्या हो गया है। आज मेरा फास्ट टूटा और मैं ये सब कैसे होने दे रही हूँ। मैंने सोचा था आज योगेश जी से दूर रहूँगी लेकिन आज मैंने वो सब कर लिया जो व्रत में नहीं करते।”
ये मुझे साफ सुनाई दे रहा था। मम्मी रोते हुए बोल रही थीं। मैं मम्मी से मुश्किल से 2 फीट की दूरी पर था लेकिन मम्मी मुझे नहीं देख सकती थीं।

वहीं अंकल भी मम्मी को आज किसी भी तरह बख्शने के मूड में नहीं हैं।
फिर अंकल भी बाथरूम की ओर चल देते हैं और बाथरूम का गेट जो थोड़ा खुला था उसे अंकल पूरा खोल देते हैं। और बाथरूम का गेट खुलते ही मम्मी अंकल की ओर देखती हैं और मम्मी अंकल को अंदर आने से मना करती हैं “प्लीज आप अंदर मत आइए आप बाहर जाइए” पर अंकल बिना कुछ बोले बाथरूम के अंदर घुस जाते हैं और मम्मी को दीवार से लगा देते हैं और नीचे बैठ मम्मी की चुत पर फिर से अपना मुँह लगा देते हैं।

अंकल अपना एक हाथ मम्मी के स्तनों पर रखकर उसे दबाने लगते हैं। मम्मी के हाथ भी अपने स्तनों पर आ जाते हैं। मम्मी अंकल को अपनी चुत चाटते हुए देख सिसकियाँ भरने लगती हैं। अंकल भी मम्मी की चुत चाटते हुए मम्मी की चुत में अपनी उँगलियाँ डाल देते हैं और मम्मी की चुत को उँगलियों से चोदना शुरू कर देते हैं।

मम्मी – “आआह योगेशजीईईई तुमने तो मुझे छोड़ने का वादा किया था।”
अंकल – “मैं जानता हूँ तुझे क्या चाहिए मेरी जान। तू चाहे कितना ही नाटक कर ले।”

मम्मी – “आह योगेशजीईईई आह्ह आह। प्लीज आआह।”
अंकल अब मम्मी के बदन को चूमते हुए खड़े हो जाते हैं और मम्मी का हाथ अपने लंड पर रखकर मम्मी के होठों को चूसने लगते हैं। मम्मी के लिए इतना इशारा बहुत था। वे अंकल का लंड हिलाना शुरू कर देती हैं और अपना मुँह अंकल के लिए खोल देती हैं।

मम्मी अंकल का लंड हिलाते हुए अपनी चुत से रगड़ने लगती हैं जिससे अंकल भी काफी उत्तेजित हो जाते हैं।
अंकल मम्मी का मुँह दीवार की ओर घुमा देते हैं और पीछे से मम्मी को हग कर मम्मी की चुत पर अपना हाथ फेरने लगते हैं।

अंकल का लंड मम्मी और अंकल के शरीर के बीच दब जाता है। मम्मी अब पागल सी होने लगती हैं। अंकल मम्मी की चुत सहलाते हुए मम्मी के कानों में कहते हैं –
अंकल – “मेरी जान अब फिर से तैयार हो जा मेरा लंड लेने के लिए।”
इतना कहकर अंकल मम्मी की एक टाँग ऊपर उठाने लगते हैं। मम्मी भी अंकल के इशारे से अपनी टाँग उठा लेती हैं। मम्मी का दिल जोर से धड़कने लगता है क्योंकि वे जानती हैं कि अब अंकल क्या करने वाले हैं। मम्मी के लिए ये अहसास एकदम नया सा है क्योंकि अंकल ने मम्मी को कभी इस तरह बाथरूम में नहीं चोदा था।

अंकल अपना लंड मम्मी की चुत में डालकर धीरे-धीरे मम्मी को चोदना शुरू कर देते हैं।

मम्मी – “आह अह अह योगेश जी प्लीज थोड़ा धीरे करो।”
अंकल – “क्यों मेरी जान मजा आ रहा है ना।”
मम्मी – “आआहा आआहहह”

मम्मी की आहें सुन अंकल मम्मी को वॉशरूम के ग्लास से सटा देते हैं और मम्मी की चुत को अच्छे से चोदने लगते हैं। मम्मी भी अब अंकल के लंड के साथ चुदने को पूरी तरह तैयार हो चुकी थीं। वे भी अंकल का भरपूर साथ देती हैं।

लगभग एक आधे घंटे तक अंकल मम्मी को उसी पोजीशन में चोदते हैं। मम्मी दो बार डिस्चार्ज हो गई थीं लेकिन अंकल अभी तक नहीं हुए थे। फिर थोड़ी देर बाद
अंकल और मम्मी दोनों झड़ने वाले होते हैं तो अंकल भी अपनी गति बढ़ा देते हैं।

मम्मी के स्तन शीशे से दब जाते हैं और अंकल का लंड मम्मी की चुत की गहराइयों में खो जाता है।
मम्मी अपने दोनों हाथ शीशे पर सपोर्ट के लिए रख लेती हैं और अंकल का साथ देती हैं।

आआह योगेशजीईईई आआह की आवाज गूँजने लगती है।

अंकल – “मेरा झड़ने वाला है मेरी जान।”
ये कह अंकल मम्मी के स्तन पकड़ अपना लंड मम्मी की चुत में झड़ने लगते हैं। ठीक उसी समय मम्मी भी अपना सारा रस अंकल के लंड पर छोड़ देती हैं।

अंकल का लंड मम्मी की चुत में झटके लेने लगता है और दोनों इसी पोजीशन में कुछ देर खड़े रहते हैं।
चुत झड़ने के बाद मम्मी अपने होश में आती हैं। और अंकल के आगे हाथ जोड़कर अंकल से जाने को कहती हैं।
अंकल मम्मी को अपनी बाहों में उठाकर रूम में बेडरूम में ले आते हैं और अंकल मम्मी को बेड पर लिटा देते हैं और मम्मी के पास लेटने लगते हैं।

मम्मी – “योगेश जी अब जाओ प्लीज। कुछ देर में उजाला भी हो जाएगा। आप सामने घड़ी में देखो 5 बज गए हैं। आपकी आए हुए पूरे 8 घंटे ही गए हैं।”

(मैंने भी मोबाइल में देखा। अरे बाप रे मैं 8 घंटे से दोनों की चुदाई देख रहा था। मुझे टाइम का पता नहीं चला। अंकल रात को 8 बजे के बाद 9 बजे से पहले आए थे।)
अंकल – “तो क्या हुआ मेरी जान। पता चलने दो सबको, मैं किसी से नहीं डरता। और वैसे भी तुम्हारे बेटे को पता है मैं इस समय तुम्हें चोद रहा हूँ। मैंने आने से पहले उससे मैसेज कर दिया था और वही देखेगा घर में। और कौन देखेगा? तुम्हारा पति और सास घर में नहीं हैं।”

मम्मी – “समझो ना, मेरे बारे में तो सोचो। मैं अब आराम करना चाहती हूँ। आप जाओ।”
अंकल : “नहीं जान आज तुझे पूरे दिन चोदूँगा क्योंकि तेरा पति रात को आएगा और सास तो अंकुश के दोस्त के घर पे है।”
मम्मी : “थोड़ी देर बाद अंकुश उठ जाएगा और मुझे आपके साथ रूम में देखेगा तो मुझे शर्म आएगी उसके सामने। मैं जानती हूँ उसे पता है आप मेरी चुदाई कर रहे हो पर वह बेटा है मेरा और माँ-बेटे के बीच शर्म का पर्दा होना चाहिए।”
अंकल : अंकल मम्मी के होठों को चूमकर बोलते हैं –
अंकल : “मैं उसे कॉल करता हूँ। बोल दूँगा उठकर अपने रूम में ही तैयार होकर कॉलेज चला जाएगा और नाश्ता कैंटीन में कर लेगा। मम्मी के रूम में नहीं आएगा।”
मम्मी : “नहीं उसे कुछ मत बोलो। मुझे शर्म आएगी।”
अंकल तू चुप, मैं अंकुश को कॉल करता हूँ। अंकल मुझे कॉल करने वाले थे तो मैं खिड़की से दूर हट गया और अपने रूम में आ गया और इतने में ही अंकल का कॉल आया।
मैं : “हैलो अंकल कैसे कॉल किया?”
अंकल : “बेटा कैसा क्या कर रहा है?”
मैं : “सो रहा था। आपका कॉल आया तो रिसीव किया। बोलिए।”
अंकल : “बेटा मैं तेरी मम्मी को रात 9 बजे से चोद रहा हूँ और आज पूरे दिन चोदना चाहता हूँ इसलिए तेरी मदद चाहिए।”
मैं : “जी अंकल और मम्मी कहाँ हैं?”
अंकल : “वो बाथरूम में गई हैं।”
अंकल ने झूठ बोला। मम्मी उनके पास में थीं। मुझे मम्मी की धीमी-धीमी आवाज आ रही थी।
अंकल : “वो बाथरूम में है और मैं चाहता हूँ तू चुपचाप तेरे रूम से ही रेडी होकर चाय-नाश्ता कैंटीन में कर लेना और कॉलेज चले जाना और तेरी मम्मी के रूम में मत आना। उसे शर्म आएगी। उसने कहा कि तुझे बोलूँ तू रूम की तरफ न आए क्योंकि यहाँ तेरी मम्मी नंगी होकर पूरे दिन मुझसे चुदवाएगी। और हाँ कॉलेज से आने के बाद उससे ये बोलना – मम्मी मेरी नींद लेट खुली थी तो आपसे मिले बिना और बिना नाश्ते के ही कॉलेज गया ताकि उसे तेरे सामने शर्म न आए।
और सुन जब तू कॉलेज से आएगा तो मैं तुझे घर पे ही मिलूँगा क्योंकि आज पूरे दिन मैं तेरे घर पे ही रहूँगा इसलिए मुझे देखकर बोलना अंकल कब आए। मैं बोल दूँगा अभी आया कुछ देर पहले। और कॉलेज का बैग रखकर घर से निकल जाना। मम्मी से बोलना मम्मी मुझे दोस्त के घर जाना है। और मैं तेरी माँ को पूरा दिन नंगी रखूँगा। केवल दोपहर 3 बजे को तू कॉलेज से आएगा तब ही तेरी मम्मी को कपड़े पहनने दूँगा और मैं भी पहनूँगा। और तू 3:20 बजे को वापस घर से निकल जाना। तेरे जाते ही उसको नंगी कर दूँगा। फिर रात को तेरे पापा को 9 बजे से पहले मत आने देना। और ठीक है फोन रखता हूँ।” मुझे मम्मी के हँसने की आवाज आ रही थी। अंकल ने बिना फोन कट किए ही रख दिया।
मम्मी : हँसती हुई – “क्या आप भी उसी से बोल रहे थे तू तेरी मम्मी को चुदने का मौका दे और घर से भाग जा।” हँसती हुई बोल रही थीं।
अंकल : “अब तो दूसरा दिन चालू हो गया। आज तो तेरा व्रत नहीं है। व्रत वाला दिन तो निकल गया। अब तो आजा मेरे लंड पे।”
मम्मी : “तो उछालो मुझे पूरे दिन अपने लंड पे।”
और फिर उन्होंने कॉल कट नहीं किया। मैंने ही कर दिया। फिर मैं 3 घंटे सोया और सुबह 9 बजे कॉलेज चला गया और मम्मी के रूम की तरफ भी नहीं गया। और 3 pm को वापस आया तो घर की घंटी बजाई।

तो मम्मी ने गेट खोला और गेट खोलकर तुरंत पीछे मुड़ गईं। शायद वे मुझसे बात नहीं करना चाहती थीं। शायद वे शर्म के कारण मेरी तरफ नहीं देखना चाहती थीं। ये मम्मी ने साड़ी पहनी थी। वो इस प्रकार है –

मम्मी की होट साड़ी किसी का भी लंड खड़ा कर सकती है। शायद ये साड़ी मम्मी ने अंकल के लिए पहनी होगी।
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Do not mention / post any under age /rape content. If found Please use REPORT button.
#22
**अपडेट 20**

फिर मम्मी अंदर चली गईं। मैं भी मम्मी को देखता हुआ पीछे-पीछे चला गया और मम्मी सीधा किचन में गईं। मैं हॉल में गया जहाँ अंकल पहले से बैठे थे। फिर अंकल मुझे देखकर आँख मार दिए। ना ही मैंने कुछ कहा ना ही अंकल ने।

फिर मैं रूम में गया क्योंकि अंकल ने मुझे 20 मिनट का टाइम दिया था और ड्रेस चेंज करके मैं बाहर आया तो मम्मी खाने की थाली लेकर खड़ी थीं। बोलीं “खाना खा ले।” मैंने देखा खाना होटल का था। शायद अंकल ने ऑर्डर पर मँगवाया होगा। मैं मम्मी की तरफ देखे बिना खाना खाने लगा। मम्मी मेरे सामने बैठकर मुझे ही देख रही थीं और चुप थीं। खाना खाने के बाद मैंने कहा “मम्मी मुझे दोस्त के घर जाना है। रात को आऊँगा पापा के साथ 9 बजे।” और जाने लगा तो मम्मी ने बिना कुछ कहे मुझे अपने सीने से लगा लिया और सीने में दबाते रही और थोड़ी देर बाद मुझे किस कर दिया और बोलीं “आई लव यू बेटा।”

मैं : “आई लव यू मम्मी।” और मैंने अंकल के बारे में भी कुछ नहीं पूछा अंकल कब आए क्योंकि मैं उन्हें शर्मिंदा नहीं करना चाहता था।

फिर मैं जाने लगा तो मम्मी ने कहा “बेटा तू दोस्त के यहाँ पढ़ाई करना।” और मुझे फिर से अपने सीने से लगा लिया।

और फिर मेरे गालों पे, सिर पे कुछ करने लगीं। बहुत सारी चीजें करने के बाद बोलीं “अब जा बेटे और पापा से पूछ लेना वे कितने बजे आएंगे।”

मैं : “मम्मी पापा मेरे से पहले नहीं आएंगे। मैं उनसे बोल दूँगा आते मुझे फेयर के घर से साथ लाने को और मैं आपको कॉल करके बता दूँ चलने से पहले।” ताकि… मेरा मतलब…

मम्मी : मम्मी ने अपना सिर झुका लिया।

मैं : मम्मी की शर्म को समझते हुए बोला “मेरा मतलब आप हमारे लिए चाय तैयार रखो। हम आते ही चाय पी लें।”

फिर रात को मैंने पापा को एक घंटा लेट कर दिया और मम्मी को बोल दिया मैसेज पर हम 10 बजे आ जाएंगे। कॉल नहीं किया क्योंकि कॉल उठाने में उन्हें शर्म आती, चुदते समय की आवाज आती इसलिए।

फिर 10 बजे पापा और मैं आए तो मम्मी ने एक नॉर्मल साड़ी पहनी थी लेकिन दिन में तो सेक्सी साड़ी पहनी थी शायद अंकल के लिए।

फिर क्या रात को खाना मैं पैक करा लाया था पापा से लगाकर क्योंकि मैं जानता था मम्मी बेचारी थक गई होंगी और मैं जानता था मम्मी को आराम की सख्त जरूरत है इसलिए मैंने पापा से कहा “पापा जी मम्मी मेरे रूम में सोएँगी।” मम्मी भी समझ गई थीं मैं उन्हें आराम दिलाने के लिए अपने साथ सुला रहा हूँ और मम्मी आते ही मेरे साथ सो गईं। अभी टाइम 11 pm हुआ था। नेक्स्ट डे मम्मी 9 बजे उठीं जब तक पापा ऑफिस चले गए थे। मैंने पापा को बोल दिया था मम्मी की तबियत खराब है तो पापा ने कुछ नहीं कहा। मैं कॉलेज जा रहा था तो मम्मी ने कहा “बेटा मैं उठने में लेट हो गई। मैं अभी तेरा टिiffin बनाती हूँ।”

मैंने कहा “नहीं मम्मी आप आराम करो। मैं कैंटीन में खा लूँगा और आप आराम कीजिए। अंकल बता रहे थे कल पूरे दिन आपने कंप्यूटर सीखा था।” तो मेरे ऐसे कहते ही मम्मी ने अपने दोनों हाथों से अपने चेहरे को ढक लिया और शर्माने लगीं।

मैं : “मम्मी इसमें शर्माने की क्या बात है। आपने कंप्यूटर ही तो सीखा है। इसमें क्या गलत। इसलिए आपको आराम की जरूरत है। जब आपकी थकान दूर हो जाए तो आप फिर से कंप्यूटर सीखने के लिए अंकल को बुला लेना। और घर पे आप अकेली हो तो…” मम्मी ने कहा अपने हाथ हटाकर “चुप नालायक मुझे नहीं सीखना कंप्यूटर। अब तू कॉलेज जा।” और फिर मैं मम्मी के गले लग गया तो मम्मी ने मुझे गले लगाकर किस किया और मैं कॉलेज चला गया। दोपहर में 3 बजे कॉलेज से जब वापस आया तो पहले अंकल के घर गया तो उन्होंने बताया था वे आज भी हमारे घर गए थे 11 बजे और 2 बजे वापस आए थे। उन्होंने 3 घंटों तक मम्मी को दो बार चोदा था लेकिन तेरी मम्मी ने तुझे बताने का मना किया था फिर भी मैंने तुझे बता दिया। अब तू जाकर तेरी मम्मी से यह मत कहना अंकल आपको कंप्यूटर सिखाकर गए हैं। फिर मैं अंकल के घर से वापस निकला और मेन रोड से घर आया तो मम्मी ने गेट खोला। मम्मी खुश लग रही थीं क्योंकि उनकी चुदाई जो हुई थी।

मैं : “मम्मी आप अब कैसी हो?”

मम्मी : “बेटा मैं ठीक हूँ। चल खाना खाने है।”

फिर मैंने मम्मी के साथ खाना खाया और फिर मैंने मम्मी से कहा “मम्मी आज आप सुबह से अकेली हो तो आप बोर हो रही होंगी इसलिए आप अंकल के घर चली जाओ कंप्यूटर सीखने।”

मम्मी : “नहीं बेटा आज नहीं।” और मुस्कुराने लगीं। मैं जानता था उनकी चुदाई हो चुकी है अब जरूरत नहीं है। फिर रात को पापा-दादी आ गए।
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#23
**अपडेट 21**

दोस्तो आज के अपडेट में चुदाई नहीं है, सिर्फ नॉर्मल ही आना-जाना है।
मैं जानता हूँ आपको आज का अपडेट पसंद नहीं आएगा। सॉरी दोस्तो माफ करना।

फिर शाम को दादी भी आ गई थीं और अगले दिन पापा ऑफिस चले गए लेकिन दादी के डर की वजह से मम्मी अंकल से नहीं मिल रही थीं। इसी तरह 5 दिन निकल गए। 5 दिन मैंने सोचा अंकल-मम्मी को मिलाना जरूरी है इसलिए मैं दादी को अपने दोस्त के घर ले गया पापा के ऑफिस जाने के बाद और मम्मी को बोला “मम्मी आप अंकल को बुला लेना।” लेकिन मम्मी ने मना कर दिया।

जब मैं दोस्त के घर दादी को छोड़कर 9 am पर वापस आया तो अंकल-मम्मी अकेली थीं। मैंने मम्मी से कहा “मम्मी आप अंकल को बुलाओ कंप्यूटर सीखने के लिए।”

मम्मी : “नहीं मुझे अब नहीं सीखना कंप्यूटर-फुंप्यूटर।”

फिर मैंने सोचा ऐसे तो काम नहीं चलेगा। मैं ही अंकल को बोलता हूँ। फिर मैंने अंकल को बोल दिया।

और अपने रूम में आ गया। थोड़ी देर बाद अंकल का फोन आया “मैं आ रहा हूँ पीछे वाले गेट से।” और फिर थोड़ी देर बाद पीछे वाले गेट की घंटी बजी। मैं रूम से निकल ही रहा था कि मैंने देखा मम्मी गेट खोलने जा रही हैं और फिर मैं भी मम्मी के साथ आ गया और मम्मी ने गेट खोला।

मम्मी अंकल को देखकर –

मम्मी : “आप .............”

अंकल : “जी अंकुश ने बुलाया था।”

मम्मी ने मेरी तरफ देखा। मैंने कहा “हाँ मम्मी मैंने बुलाया अंकल।” और फिर ...............

मम्मी पलटीं और अपनी गाँड हिलाते हुए वापस जाने लगीं... मम्मी की गाँड इतनी सेक्सी हरकतें कर रही थी कि अंकल को अट्रैक्शन हो रहा था....
....... अंकल ने दरवाजा बंद किया और मेरी तरफ आँख मारकर मम्मी के पीछे मम्मी की गाँड को घूरते हुए हॉल में आ गए। मैं भी आ गया और सोफे पे बैठ गया और मम्मी किचन चली गईं।

फिर थोड़ी देर बाद अंकल बिना मुझसे कहे भी जा रहे थे किचन में और अंकल भी किचन में जाने लगे।
मम्मी किचन में काम कर रही थीं।

मैं भी सोचा मैं भी देखूँ।

......... तभी अंकल किचन के तरफ बढ़े ...... जब वे किचन के डोर पे पहुँचे तो अंकल ने और मैंने साथ में देखा मम्मी किचन में अपना काम कर रही हैं।
अंकल की नजर मम्मी की गाँड पर गई जो साड़ी में गजब लग रही थी.... मम्मी की गाँड मस्त गोल-मटोल और बाहर निकली हुई थी। अंकल के पैर वहीं जम गए और उनकी निगाहें मम्मी की गाँड से हट नहीं रही थीं..........

तभी मम्मी रैक के तरफ बढ़ीं... मम्मी की गाँड चलते वक्त मस्त हरकत कर रही थी ....... मम्मी रैक के ऊपर से कुछ निकालने के लिए कूदने लगीं........ तभी अंकल ने और मैंने ध्यान से देखा तो वो आटे का डिब्बा था.........

हमने देखा मम्मी के हाथ से आटे का डिब्बा गिरा जिससे सारा आटा मम्मी के ऊपर गिर गया था....
..... मम्मी साड़ी पर से आटा साफ करने लगीं......... ये सब मम्मी हल्की सी झुककर कर रही थीं.......... जिससे मम्मी की गाँड मस्त बाहर निकली हुई थी... मम्मी की साड़ी मम्मी की गाँड से पूरी चिपक गई थी... ....... जिससे मम्मी की गाँड के कटाव साफ दिख रहे थे..........

मम्मी की लाजवाब गाँड देखकर अंकल का मन डोल गया था।

मैंने भी मम्मी को आज तक अपनी मम्मी को इतनी गंदी नजर से नहीं देखा था। मुझे अपने आप पर ग्लानि आने लगी। मैं ये क्या पाप कर गया अपनी मम्मी पे गलत नजर। छि-छि मैं जाने लगा तो अंकल बोले “देख मैं क्या करता हूँ।” और मैंने देखा अंकल का लंड में हलचल हो रही थी जो पैंट के ऊपर से दिख रही थी।

.तभी मम्मी अपना पल्लू अपनी जिस्म से हटाते हुए हमारी तरफ मुड़ीं...... और अपने ब्लाउज और साड़ी से आटा साफ करने लगीं..
लेकिन हम दरवाजे के साइड हो गए इसलिए मम्मी हमें नहीं देख पाईं। अंकल और मैं मम्मी को ध्यान से देख रहे थे।
मम्मी के बूब्स ब्लाउज में कैद थे जो काफी बड़े-बड़े थे। मम्मी का पेट बहुत गोरा और सेक्सी था जो मस्त चमक रहा था........ और मम्मी की नाभि मस्त गहरी और बेहद सेक्सी थी। ......... मम्मी को इस हाल में देखकर अंकल का लंड खड़ा हो गया था। अंकल बोले “अंकुश देख क्या हाल हो रहा है मेरे लंड का। अब मैं किचन में जाऊँ।”

मैं : “हाँ जाइए अंकल, मम्मी को प्यार कीजिए।”

........

अंकल ने कहा “अब तू दरवाजे की साइड से देखना।” और अंकल किचन में गए और जाकर मम्मी को पीछे से अपनी बाहों में भर लिया जिससे अंकल का लंड सीधा मम्मी की गाँड की दरार में साड़ी के ऊपर से घुस गया। मम्मी की एक मधुर सी सिसकारी निकल गई......... और अंकल ने मम्मी को उठाते हुए घुमाया... .... जिससे अंकल का लंड ने मम्मी की गाँड अधिक फील किया... मम्मी मुस्कुराते हुए बोलीं..........

मम्मी : “आहा!.... क्या कर रहे हो। अंकुश आ जाएगा .....”

अंकल : “आने दो वर्षा। तुम्हारे मजे तुम्हारे लाडले के सामने ही लूट लूँगा..........”

अंकल अपना लंड मम्मी की गाँड पे मसल रहे थे ...... और साथ ही मम्मी के गले को चूम रहे थे ...... मम्मी आहें भर रही थीं.........

मम्मी : “प्लीज अभी आप जाओ और अंकुश को किसी काम से भेज देना फिर जमकर कर लेना पर अभी जाओ।”

अंकल : “नहीं मुझे अभी करना है।”

मम्मी : मम्मी ने अंकल को धक्के देकर बाहर निकालने लगीं। बोलीं “बाद में करना।” फिर अंकल बाहर आ गए मेरे पास।

फिर थोड़ी देर बाद मम्मी भी किचन से वापस हॉल में आईं तो अंकल की नजर मम्मी की गाँड पे गई। मम्मी की गाँड मस्त हरकत कर रही थी.... मम्मी की गाँड जिस तरह स्विंग कर रही थी अंकल की नजर नहीं हट रही थी......... जब तक मम्मी किचन में वापस गईं नहीं तब तक अंकल मम्मी की हिलती हुई गाँड को देखते रहे..........

कुछ देर तक मैं-अंकल बातें करते रहे। फिर थोड़ी देर बाद मम्मी नाश्ता बनाकर किचन से लाईं।
अभी 10:30 am हुआ था।
फिर मम्मी ने डाइनिंग टेबल पे नाश्ता लगाया।
मैं और अंकल नाश्ता करने डाइनिंग टेबल पे बैठे थे। मम्मी नाश्ता परोस रही थीं तभी अंकल की नजर मम्मी के ब्लाउज में गई। मम्मी के बूब्स के क्लीवेज अंकल को साफ दिख रहे थे........ जो बहुत गोरे और मिल्की थे.. और मुझे भी दिख रहे थे लेकिन मेरे लिए वो मेरी माँ हैं .......

अंकल बहुत धीमी आवाज में मम्मी से बोले “वाह वर्षा क्या बूब्स हैं तेरे कितने बड़े और मिल्की हैं। अब उनका मिल्क पिला दे।”

मम्मी भी धीमी आवाज में “अंकुश को बाहर भेज दो।” फिर मम्मी मेरे से बोलीं .........

मम्मी : “बेटा तुम्हें और पोहा दूँ........”

मैं : “नहीं मम्मी बस हो गया.........”

मम्मी : “क्यों तुम्हारी तबियत तो ठीक है इतना कम नाश्ता खाया..........”

मैं : “अरे मम्मी मेरी तबियत ठीक है बस भूख कम लगी थी...”

फिर मैंने अपना नाश्ता खत्म किया तो मम्मी ने अंकल से कान में कुछ कहा जो मैंने नहीं सुना। फिर अंकल बोले “बेटा।”

अंकल : “बेटा पिछले 5 दिन से मैंने तेरी मम्मी को कंप्यूटर नहीं सिखाया। तू लगे तो आज सिखा दूँ।”

मैं : “जी अंकल सिखा दीजिए।”

मम्मी : “बेटा मुझे नहीं सीखना।”

मैं : “मम्मी आप कंप्यूटर सिखाओ और मुझे कुछ काम है तो मैं दोस्त के घर जा रहा हूँ। शाम को 4 बजे तक आऊँगा और आते समय खाना होटल से पैक करा लाऊँगा।”

मम्मी : “बेटा क्या जरूरत है मैं बना लूँगी।”

मैं : “है नहीं मम्मी आप कंप्यूटर सिखाओ। मैं खाना होटल से 4 बजे को लेकर आऊँगा। उससे पहले नहीं।”

मम्मी : “ठीक है।” फिर मैं अंकल और मम्मी के गले लगाकर बाय बोलकर घर से निकल गया। अभी 11 am हुए थे।

फिर शाम को 4 बजे मैं घर पहुँचा तो अंकल को फोन किया तो बोले “तेरे पास डुप्लीकेट की से गेट खोलकर आजा।” और मैं गेट खोलकर किचन में गया और खाना रखा ही था कि अंकल भी किचन में गए और मैंने मम्मी का पूछा तो बोले “नंगी थी तो साड़ी पहन रही है।”

मैं : “अंकल 5 घंटों में कितनी बार किया?”

अंकल : “3 बार चोदा वर्षा को। अभी भी नंगी थी। बोली आप चलो मैं साड़ी पहनकर आ रही हूँ और सुबह वाली साड़ी फट गई थी तो दूसरी साड़ी पहनकर आएगी। कुछ पूछना मत।”

फिर अंकल किचन से निकलकर गए और हॉल में बैठ गए। थोड़ी देर बाद मम्मी आ गईं किचन में। बोलीं “तू हॉल में जा मैं खाना लाती हूँ।” और

मैंने बोला “मम्मी पापा का फोन आया था। बताया था आज रात को वे 11 बजे तक आएंगे।”

मम्मी : “क्यों.............”

मैं : “शायद उन्हें कोई काम है.............”

मम्मी : “अच्छा.............”

फिर अंकल भी वापस किचन में आ गए।
मम्मी अपने काम में लगी हुई थीं और मैं देख रहा था अंकल वहीं खड़े होकर मम्मी की गाँड को घूर रहे थे .............. मम्मी की हर एक हरकत के साथ मम्मी की गाँड की मूवमेंट्स देखने लायक थीं....
..... मम्मी की गाँड मस्त सी हरकतें करते हुए हिल रही थी..... क्योंकि मम्मी खाने को प्लेट में लगा रही थीं या कहूँ जो पैकिंग में खाना आया था उसे खोल रही थीं।
क्योंकि खाना होटल से आया था।
....

मैं : देख रहा था मम्मी काम में और अंकल मम्मी को देखने में खोए हुए थे। फिर मैंने दोनों को देखकर बोला

मैं : “मम्मी पापा खाना खाकर आएंगे रात को 11 बजे।”

...............

मम्मी : “अच्छा तो फिर आज हम दोनों को ही साथ में खाना खाना है... रात को।”

मैं : “मम्मी लेकिन अभी तो हम तीनों को साथ में खाना खाना है आपको, मुझे, अंकल को।”

..........

अंकल : “हाँ वर्षा वैसे भी मुझे बहुत भूख लगी है जिसे आप ही शांत कर सकती हो.............”

मम्मी अंकल की बात पर मेरी तरफ देखकर मुस्कुराते हुए बोलीं...............

मम्मी : “आप 2 मिनट बाहर बैठो योगेश जी मैं खाना लगाती हूँ..............”

फिर मैं-अंकल बाहर डाइनिंग टेबल पे जाकर बैठ गए और उसके बाद अंकल बोले “बेटा।”

अंकल : “बेटा तेरी मम्मी कितनी मस्त माल है। कोई ये नहीं कह सकता ये एक बेटे की माँ है और 33 की उम्र में भी 23 की कुँवारी लड़की लगती है। क्या मस्त गाँड है, क्या मस्त बूब्स हैं इसके। जब तेरी मम्मी चलती है तो क्या मस्त नजारा होता है। कैसे अपनी पतली कमर को हिला-हिलाकर चलती, अपनी मखमली गाँड को हिला-हिलाकर चलती है। बेटा तेरी मम्मी का चलने का तरीका और तेरी मम्मी की मुलायम गाँड की सेक्सी मूवमेंट तो किसी को भी पागल कर सकती है।
बेटा तेरी मम्मी साड़ी को नाभि से कितनी नीचे बाँधती है जिससे उसकी नाभि, गोरी चिकनी कमर और पेट का सुंदर नजारा नामर्द का भी लंड खड़ा कर देगा लेकिन तेरे बाप का खड़ा नहीं होता।”

मैं : “हाँ अंकल आप सही कह रहे हो। मेरी मम्मी सिर्फ आपके लिए बनी है। वो तो गलती से मम्मी-पापा को मिल गईं लेकिन अब मम्मी सिर्फ आपकी हैं।”

फिर थोड़ी देर में मम्मी किचन से
खाना लेकर आती हैं। अंकल मम्मी की मदक चाल को ही देख रहे थे। अंकल की नजर मम्मी की चिकनी और यमी नाभि पर थी..

मम्मी ने उन तीनों के लिए खाना लगाया.. अंकल-मम्मी-मैं तीनों साथ में खाना खाने लगे........... जब भी मम्मी अंकल को खाना परोसतीं अंकल एक नजर मम्मी के बड़े-बड़े बूब्स को जरूर देखते ............

अंकल को मम्मी के ब्लाउज के अंदर से मम्मी के बड़े बूब्स की झलक देखने मिल रही थी। मम्मी के बूब्स मस्त रसीले आमों जैसे थे....
..........

हम तीनों ने साथ में खाना खाया फिर मम्मी सारे बर्तन समेट के किचन में ले गईं और मैं-अंकल टीवी देखने लगे .......... कुछ देर बाद मम्मी सारा काम निपटाके आईं और साथ में चाय लाईं और हमारे साथ टीवी देखने लगीं.........
.....

अंकल : “वॉव वर्षा आप सच में बहुत ही यमी चाय बनाती हो..............”

मम्मी : “थैंक यू योगेश जी..............”

मैं : “हाहा मम्मी बहुत टेस्टी चाय बनाई आपने।”

मम्मी : “ठीक है मैं अपने बेटे को ऐसी चाय रोज पिलाऊँगी .............”

मैं : “मैं खुशनसीब हूँ कि आप मेरी मम्मी हो...........”

मम्मी मुस्कुराने लगीं....... मम्मी मुस्कुराते हुए बेहद खूबसूरत लग रही थीं...... अंकल का लंड उनके पैंट में खड़ा हो रहा था। मुझे लग रहा था उनके पैंट को देखकर उनका लंड पूरी हरकत में आ गया था। मम्मी भी उनके पैंट को ध्यान से देख रही थीं और मुस्कुराने लगीं।

तभी मैंने देखा अंकल मम्मी के पीछे आए और उन्होंने मेरे सामने ही मम्मी की गाँड को पीछे से साड़ी के ऊपर से हाथ फेर दिया।

लेकिन मैंने अपनी निगाहें जानबूझकर दूसरी तरफ कर लीं ताकि मम्मी को शर्मिंदा न होना पड़े। फिर मम्मी समझ तो गई थीं अंकल से कंट्रोल नहीं हो रहा है इसलिए उन्होंने मुझे भगाने के लिए बोलीं

मम्मी : “बेटा अब मैं रूम में जाती हूँ और आराम करूँगी।”

मैं : “मम्मी मुझे आज अपने दोस्त के साथ मूवी देखने जाना है और मैं रात को पापा के साथ वापस आ जाऊँगा। और हाँ मैं खाना होटल से खाकर आऊँगा और पापा भी। और आप अपने लिए ऑर्डर देकर खाना मँगवा लेना।”

मम्मी : “ठीक है बेटा...............”

फिर मैं 5 बजे को घर से निकला और 11 pm को पापा के साथ घर पहुँचने वाला था तो मैंने अंकल को मैसेज किया। अंकल ने कहा “10 मिनट बाद आना।” तो फिर मैंने किसी तरह पापा को और रोके रखा और फिर 11:30 pm को घर पहुँचे तो देखा मम्मी ने गेट खोला। उन्होंने एक गाउन पहना था और वे गेट खोलकर साइड रूम में चली गईं और मैं अपने रूम में आकर अंकल को कॉल किया तो अंकल ने कहा “बेटा आज तो तेरी मम्मी को सुबह 11 से 4 और 5 से 11 बजे तक मस्त चोदा। 11 घंटे चुदी तेरी मम्मी। बेचारी थक गई है।”

मैंने कहा “हाँ अंकल जब उन्होंने गेट खोला था तभी पता चल रहा था।” फिर मैं भी सो गया लेकिन मैंने आज मम्मी की चुदाई नहीं देखी थी।
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#24
**अपडेट 22**

अगले दिन पापा सुबह ऑफिस निकल गए और मैं घर पे ही था और मम्मी रूम से नहाकर बाहर आईं और मेरे साथ बैठ गईं।

मम्मी : “बेटा क्या तू आज कॉलेज नहीं जाएगा?”

मैं : “मम्मी आज नहीं, कल जाऊँगा।”

मम्मी : “ओके।”

मैं : “मम्मी आज आप कंप्यूटर सीखने अंकल के घर चली जाना।”

मम्मी : “नहीं।”

और इतने में ही अंकल हमारे घर आ गए और उन्होंने घंटी बजाई तो मैं जाकर पीछे वाला गेट खोला और अंकल अंदर आकर सोफे पे बैठ गए।

और अंकल अंदर आए ही मम्मी को आँख मार देते हैं। मम्मी सिर्फ मुस्कुरा देती हैं।
अंकल मम्मी को ही देख रहे थे।
अंकल एकटक मम्मी को ही घूरते जा रहे हैं। मम्मी के बूब्स बहुत बड़े हैं। अंकल कपड़ों के ऊपर से ही मम्मी के बूब्स को घूरते जा रहे थे। अंकल का लंड उनके पैंट में ही मचलने लगा था। इस बात का पता मम्मी और मुझे दोनों को लग चुका था।

मम्मी उठकर जाने लगती हैं तो अंकल –

अंकल : “बैठो वर्षा कहाँ जा रही हो?”

मम्मी : “जी मैं आपके लिए चाय बनाकर लाती हूँ।”

अंकल : “अभी तो आया हूँ। आराम से बना लाना। कुछ देर बैठिए ना।”

मैं : “अंकल आप मम्मी को आज भी कंप्यूटर सिखाना।”

अंकल : “हाँ बेटा मैं उसी काम के लिए आया हूँ। मैं तो खुद चाहता हूँ तेरी मम्मी को रूम में ले जाकर कंप्यूटर सिखाऊँ।” और अंकल हँसने लगते हैं।

अंकल के रूम में ले जाने वाली बात पे और हँसने पे मम्मी थोड़ा झेंप जाती हैं पर वे पहले भी पिछले 6 महीनों में खूब चुदीं और इस घर में भी लेकिन आज अंकल ने उनके सामने मुझसे रूम में ले जाने वाली बात बोली तो उनको मेरे सामने शर्म आ गई क्योंकि मैं उनका बेटा हूँ और माँ-बेटे के बीच शर्म का पर्दा होता है। हालाँकि मम्मी को पता है मैं उनकी चुदाई के बारे में जानता हूँ फिर भी शर्म तो औरत का गहना है। फिर मैं मम्मी से कहता हूँ “मम्मी बैठ जाइए बाद में बना लाना।” और मम्मी बैठ जाती हैं।

अंकल बोले “बेटा उनको चाय बना लाने दे।” फिर मम्मी मुस्कुराते हुए किचन में जाती हैं और मैं-अंकल चुदाई की बातें करते हैं और थोड़ी देर में मम्मी चाय लाती हैं और हम तीनों चाय पीने लगते हैं।

अंकल से वेट नहीं किया जाता। वे जल्दी से मम्मी को रूम में ले जाना चाहते हैं। मम्मी भी अंकल के साथ टाइम स्पेंड करना चाहती हैं पर मेरे सामने कुछ कह नहीं पातीं।

मैं – “अंकल कुछ लोगे और?”

अंकल – “नहीं बस अब मैं अंदर जाता हूँ तेरी मम्मी को कंप्यूटर सिखाने।”

मैं – “हाँ हाँ क्यों नहीं चले जाओ।” और मम्मी और अंकल की तरफ देखकर मुस्कुरा देता हूँ।

मम्मी : “नहीं नहीं मुझे नहीं सीखना कंप्यूटर। आप जाइए योगेश जी।”

मैं : “मम्मी जाइए और कंप्यूटर सिखाओ।”

मम्मी : “मैं नहीं जा रही।”

मैं : “अंकल मम्मी ऐसे नहीं जाएँगी। आप मम्मी का हाथ पकड़ के ले जाइए।”

मम्मी : “मैंने कहा ना मुझे नहीं सीखना।”

मैं : “मम्मी जब मैं छोटा था तो आप मेरा हाथ पकड़ के जबरदस्ती कॉलेज ले जाती थीं। आज अंकल भी वैसा ही करेंगे।”

मम्मी : “नहीं नहीं बेटा तू तो समझ।”

मैं : “अंकल आप मम्मी का हाथ पकड़ के ले जाइए और कंप्यूटर सिखाइए। मम्मी छोटे बच्चों की तरह जिद कर रही हैं।” फिर

अंकल मम्मी का हाथ पकड़ते हैं और मम्मी सोफे पे से उठ जाती हैं और अंकल मम्मी का हाथ पकड़ के अंदर रूम में ले जाते हैं। रूम में जाते ही अंदर से अंकल रूम को लॉक कर देते हैं और मम्मी को बाहों में जकड़ लेते हैं।
मैं खिड़की से देख रहा था।

अंकल का लंड सीधा मम्मी की चुत के संपर्क में आता है।
अंकल – “तुम नहीं जानती वर्षा पूरी रात तुम्हें कितना मिस किया मैंने।”

मम्मी – “वो तो मुझे पता चल रहा है।” (हँसते हुए) “तभी तो आप मेरे बेटे के सामने मेरा हाथ पकड़ के लाए। थोड़ी तो शर्म करते। वो बेटा है मेरा। आप मुझे बेशरम बना दोगे। वो क्या सोचेगा मम्मी कितनी बेशरम है। और इसे देखो पैंट में कैसे मचल रहा है।”

अंकल समझ जाते हैं कि वे ऐसा उनके खड़े लंड की वजह से कह रही हैं। अंकल अपने होठों को मम्मी के होठों से सटा देते हैं।

और मम्मी के होठों पर एक जबरदस्त चुम्मा देते हैं।
मम्मी भी झट से अपने होठ खोल देती हैं। उनकी चुत पहले से ही गीली पड़ी है।
अंकल अपना पैंट से लंड निकालकर अपना लंड झट से मम्मी के हाथ में पकड़ा देते हैं और मम्मी के होठों को चूसना चालू रखते हैं।
अंकल मम्मी को थोड़ा नीचे बैठाकर कार्पेट पर लेट जाते हैं। मम्मी खुद ही अंकल की टी-शर्ट उतारकर उनकी आँखों में देखती हैं।

और मम्मी अंकल के होठों पर अपने होठ रखकर अंकल के मुँह में अपनी जीभ डाल देती हैं।
अभी तक दोनों के बदन पे कपड़े थे लेकिन मुझे दोस्त का कॉल आया है और मैं दोस्त से बात करने दूर आ जाता हूँ और कोई 30 मिनट के बाद वापस जाता हूँ खिड़की पे तो मम्मी पूरी नंगी हो चुकी थीं और अंकल भी नंगे हो चुके थे। दोनों के बदन पे एक भी कपड़ा नहीं था। अंकल मम्मी की चुत चाट रहे थे और मम्मी अंकल का लंड चूस रही थीं 69 पोजीशन में। फिर अंकल-मम्मी सीधे होकर चुमा-चाटी करते हैं फिर

दोनों एक-दूसरे के बदन से खेल रहे हैं और मैं ये सब खिड़की से देख रहा हूँ।
मम्मी बार-बार अंकल का लंड पकड़कर मसल रही हैं। वे अंकल के कान में लंड चुत में डालने के लिए कहती हैं। अंकल ने भी अब ज्यादा वेट नहीं कर पाते और अपना लंड मम्मी की चुत पर रख देते हैं।

अंकल मम्मी की चुत पर अपना लंड रखकर उसे टीज करने लगते हैं। मम्मी की तड़प और बढ़ने लगती है। इसमें अंकल को और मजा आने लगता है। वहीं बाहर मैं भी सब कुछ अपनी आँखों से देख रहा था।

अंकल मम्मी को डॉगी पोज़ में लाकर मम्मी की चुत में आखिर अपना लंड डाल ही देते हैं जिससे मम्मी को थोड़ी राहत सी फील होती है। अब अंकल मम्मी की चुत में हल्के-हल्के धक्के लगाना शुरू करते हैं।

मम्मी भी अंकल का साथ देने लगती हैं। लगातार 15 मिनट धक्के लगाने के बाद अचानक अंकल के मोबाइल पे किसी का कॉल आया। अंकल कॉल रिसीव करते हैं और बोलते हैं “मैं बस अभी आया।” और कॉल कट कर देते हैं।

मम्मी – “क्या हुआ? किसकी कॉल थी?”

अंकल – “यार कुछ अर्जेंट काम है मुझे जाना होगा बट हाफ आवर में आ जाऊँगा।”

मम्मी – “यार कुछ टाइम और रुक जाओ।” (मम्मी इस समय झड़ना चाहती थीं, वे नहीं चाहती थीं कि अंकल अभी कहीं भी जाएँ।)

अंकल – “यार समझ बस गया और आया। तू थोड़ा वेट कर।”

मम्मी मायूस मन से वेट करने के लिए राजी हो जाती हैं। साथ ही अंकल भी कुछ खुश नहीं लगते।
फिर अंकल कपड़े पहनते हैं और मम्मी अंकल को देखती रहती हैं।
फिर अंकल बाहर आते हैं। मुझे बोलते हैं “बेटा अभी आधे घंटे में आया। अर्जेंट वर्क है और तेरी मम्मी रूम में नंगी है। अभी अंदर मत जाना।” और अंकल चले गए।

अंकल के जाने के बाद मैं खिड़की से देखता हूँ मम्मी कपड़े पहनने लगती हैं। शायद उन्हें लगा होगा अंकल के जाने के बाद मैं रूम में न चला जाऊँ और मम्मी उन्हीं कपड़ों को पहनने लगीं जिनको पहनकर मम्मी अंकल के साथ रूम में गई थीं। और कपड़े पहनने के बाद फिर मैं डोर बजाता हूँ तो मम्मी थोड़ा असहज महसूस करती हैं और मम्मी बोलती हैं “बेटा आजा अंदर।” और मैं अंदर जाता हूँ।

मम्मी की हालत देखकर कोई भी कह सकता है अंदर क्या चल रहा था पर फिर भी मम्मी ऐसा शो करती हैं जैसे कुछ हुआ ही नहीं।
और बोलती हैं “बेटा तुझे मेरे रूम में आने के लिए कब से डोर खटखटाने की जरूरत पड़ने लगी? मैं तेरी माँ हूँ और एक बेटा माँ के कमरे में भी कभी भी किसी भी समय जा सकता है। माँ-बेटे के बीच परमिशन की जरूरत नहीं होती है।
और तूने परमिशन क्यों माँगी? कहीं तुझे ऐसा तो नहीं लग रहा कि मैं योगेश जी के साथ कुछ गलत कर रही थी?”

मैं : “नहीं नहीं मम्मी ऐसा नहीं है। मैंने तो वैसे ही गेट खटखटा दिया था। सॉरी मम्मी।”

मम्मी : “इट्स ओके बेटा लेकिन दोबारा परमिशन लेने की जरूरत नहीं है और जब दिल करे मेरे रूम में आ जाना।”

मैं : “ओके मम्मी और अंकल कहाँ गए?”

मम्मी : “वे किसी अर्जेंट काम से गए हैं।” और फिर मम्मी ने मेरे सामने ही अपने कपड़े वापस उतारे।
(मम्मी अक्सर मेरे सामने ही कपड़े चेंज कर लेती हैं। बचपन से ही कभी भी कपड़े चेंज करते समय मम्मी ने मुझे रूम से बाहर नहीं भेजा। जब वे नहाकर आती हैं और मैं रूम में रहता हूँ तो वे केवल पेटीकोट में ही आ जातीं ऊपर से नंगी बिना ब्रा-ब्लाउज के। वे मुझे अपने दूध हमेशा दिखाती हैं और जब मैं बाहर जाने लगता हूँ तो कहती हैं “बेटा मैं माँ हूँ तेरी। मैंने तुझे अपने इन दोनों बूब्स को तुझे पिलाया। पहले तू इन्हें देखता था अब तू इन्हें देखकर बाहर क्यों जाता है।” इसलिए मम्मी कभी-कभी तो मेरे सामने पैंटी में भी रह लेती हैं। वे मुझे आज भी बच्चा ही मानती हैं और कहती हैं “जब तेरी शादी के बाद बच्चे हो जाएँगे तब भी तू मेरा बच्चा ही रहेगा।” और पैंटी में ही मेरे सामने बाथरूम से बाहर आती हैं या पेटीकोट में।)

फिर मम्मी ने मेरे सामने ही कपड़े उतारे।

पहले साड़ी फिर ब्लाउज फिर पेटीकोट फिर ब्रा। अब मम्मी केवल पैंटी में थीं। फिर मम्मी ने कहा “बेटा मेरा गाउन निकालना अलमारी से।” मैं मम्मी की अलमारी का गेट खोलकर मम्मी के कई गाउन देखे। उनमें से एक गाउन उठाया और मम्मी को लाकर दिया।

मुझे नहीं पता था कि ये गाउन छोटा है। जो
मैंने जब मम्मी को गाउन दिया तो मम्मी हँसने लगीं।

मैं : “क्या हुआ मम्मी?”

मम्मी : “बेटा ये गाउन तो छोटा है।”

मैं : “सॉरी मम्मी पता नहीं था। मैं दूसरा लाता हूँ।”

मम्मी : “रहने दे आज उसे ही पहन लेती हूँ। आखिर मेरे बेटे ने दिया है पहनने को।”

मैं : “रहने दो मम्मी दूसरा पहन लो।”

मम्मी : “नहीं इसी को पहनूँगी। आखिर तूने सिलेक्ट किया है।”

फिर मैंने कहा “मम्मी आप ब्रा नहीं पहनोगी?” तो मम्मी ने कहा “नहीं बेटा तू कहता है तो पहन लेती हूँ।” फिर मम्मी ने ब्रा पहन ली। अब मम्मी ब्रा-पैंटी में थीं। फिर मम्मी ने गाउन को पहना जो कि घुटनों के ऊपर ही रह गया।
और मम्मी के घुटनों पे मैंने ध्यान दिया तो लाल हो रहे थे। शायद मम्मी फर्श पे घोड़ी बनी थीं इसलिए और वे स्पष्ट दिख रहे थे क्योंकि गाउन तो घुटनों से ऊपर था।

फिर मैं-मम्मी रूम में ही बेड पे बैठ जाते हैं और बातें करते हैं कि तभी अंकल वापस आ जाते हैं। अंकल को देख मम्मी के चेहरे पे गुस्सा आ जाता है जो साफ दिखाई देता है क्योंकि अंकल मम्मी को प्यासी छोड़ गए थे। और अंकल आकर बेड पे बैठ जाते हैं और मुझे बाहर जाने का इशारा करते हैं।
मैं बाहर जाने लगता हूँ।

मम्मी : “बेटा बाहर क्यों जा रहा है?”

मैं : “मम्मी आप कंप्यूटर सिखाओ। मैं बाहर हॉल में टीवी देखता हूँ।”

मम्मी : “नहीं यहीं बैठ।”

मैं कुछ नहीं बोलता और मम्मी के आदेश का पालन भी नहीं करता हूँ और मम्मी को जवाब दिए बिना बाहर हॉल में आ जाता हूँ और सोफे पे बैठने की बजाय खिड़की पे जाता हूँ। अब रूम में सिर्फ मम्मी-अंकल थे।

अंकल भी समझ रहे थे मम्मी गुस्से में हैं। मम्मी चुप थीं।
मम्मी के गुस्से को देखते हुए अंकल कोई जल्दबाजी नहीं करना चाहते थे। अंकल की नजर मम्मी के घुटनों पर पड़ती है जो कि गाउन से बाहर थे और लाल थे। अंकल को याद आता है वे मम्मी को घोड़ी बनाकर प्यासी छोड़ गए थे। फिर अंकल मम्मी के थोड़ा पास जाकर बैठ जाते हैं लेकिन मम्मी गुस्से में थीं और चुप थीं।

अंकल : “क्या हुआ वर्षा आप गुस्से में लग रही हो और थकी हुई भी।”

मम्मी : “नहीं मुझे नींद आ रही है।” दरअसल मम्मी प्यासी रहने के कारण गुस्से में थीं। वे अंकल को यह जताना चाह रही थीं मेरी चुत चाहिए तो मुझे मनाओ लेकिन अंकल को देख मम्मी की प्यास फिर से बढ़ जाती है।

अंकल : “तो फिर मैं चलता हूँ आप सो जाओ।”

मम्मी : “नहीं नहीं बैठो।”

अंकल : “वर्षा तुम्हारे घुटने तो एकदम लाल हो गए हैं। लगता है ज्यादा रगड़ लग गई।”

मम्मी : आँख दिखाकर “हाँ।”

अंकल : “मैं मालिश कर दूँ?”

मम्मी : “नहीं रहने दो। ये बताओ आप जिस काम से गए थे वो हो गया क्या?”

अंकल : “हाँ हो गया। अब मालिश कर दूँ?”

मम्मी : “नहीं रहने दो। कोई जरूरत नहीं है।”

अंकल : “क्यों नाराज हो?”

मम्मी : “पता नहीं।”

अंकल : “तो मेरी जान नाराज है और पता नहीं।”

मम्मी : कोई जवाब नहीं देतीं।

अंकल : “कर दूँ मालिश? सही हो जाएगी तेरे घुटने।”

मम्मी : “परेशान मत होइए। अपने आप ठीक हो जाएगा।”

अंकल : “अरे परेशानी की क्या बात है। तू मेरी जान है। मेरी मालिश करना ही मेरा काम है।” और अंकल तेल की शीशी उठाने के लिए खड़े होते हैं तो अंकल का लंड मम्मी के फेस के एकदम सामने आ जाता है। शायद अंकल जानबूझकर लाए थे क्योंकि वे जानते हैं मम्मी को लंड पसंद है। शायद मम्मी को मनाने के लिए। मम्मी भी समझ जाती हैं अंकल ने मम्मी को मनाने के लिए किए हैं। हालाँकि अंकल ने पैंट पहना था लेकिन लंड का पता मम्मी को चल ही गया लेकिन मम्मी कुछ नहीं कहतीं। अंकल भी जानबूझकर
मम्मी के करीब हो रहे थे ताकि उनका पैंट के अंदर से लंड मम्मी के मुँह के पास जाए और मम्मी मान जाएँ। मम्मी को लंड की खुशबू आती है। फिर अंकल तेल की बोतल लेते हैं और हाथ में तेल लेकर मम्मी के पैरों के पास बैठ जाते हैं।

मम्मी की गोरी मखमली लेग्स देखकर अंकल का लंड और कड़क हो जाता है।
अंकल अपने हाथों को मम्मी के घुटनों पर रखकर हल्का सा मसलते हैं। अंकल के हाथ लगते ही मम्मी के शरीर में एक अजीब सी लहर दौड़ जाती है। मम्मी की प्यास और ज्यादा भड़कने लगती है।
मम्मी की आँखें बंद होने लगती हैं...

अंकल मम्मी की प्यास को बढ़ता देख मन ही मन खुश हो रहे हैं। वे जानते हैं कि ये लंड के बिना नहीं रह सकतीं इसलिए ये जल्दी मान जाएँगी क्योंकि अभी मम्मी की चुत प्यासी है और वे थोड़ी देर पहले मम्मी को तड़पता छोड़ गए थे इसलिए मम्मी खुद को ज्यादा देर नहीं संभाल पाएंगी और खुद अपने जिस्म को अपने आप ही अंकल के हवाले कर देंगी।

अंकल – “क्या हुआ वर्षा? ज्यादा पेन हो रहा है क्या?”

मम्मी – “नहीं अब थोड़ा बेटर फील कर रही हूँ।”

अंकल – “फिर तुम आँखें बंद क्यों करके लेट गईं? ऐसा लग रहा है जैसे काफी पेन में हो।”

मम्मी – “वो बस थोड़ा थकान फील हो रही है इसलिए।” (वे अपनी प्यास छुपाने की कोशिश करती हैं।)

अंकल – “तुम परेशान मत हो। मैं तुम्हारी सारी थकान दूर कर दूँगा। ऐसा कहते हैं मैं मसाज करने में बहुत अच्छा हूँ। मैं जानता हूँ तुम मुझसे नाराज हो। मैं तुम्हें प्यासी छोड़ गया था।”

मम्मी : अपनी आँखें अंकल को दिखाने लगीं लेकिन कुछ बोलीं नहीं।

अंकल : “वर्षा मैं जानता हूँ। प्लीज मान जाओ। अर्जेंट वर्क था।” और अंकल अपने हाथों को थोड़ा मम्मी की घुटनों से ऊपर बढ़ा देते हैं।

अंकल – “वर्षा तुम्हारे पैर तो बहुत ही मुलायम हैं। तुम कुछ स्पेशल लगाती हो क्या अपनी बॉडी पर?”

मम्मी – “नहीं ऐसा तो कुछ नहीं लगाती।” (मम्मी की आवाज काफी धीमी और लड़खड़ाती हुई आती है।)

अंकल – (अपने हाथों को थोड़ा और आगे बढ़ाते हैं) “वर्षा एक बात कहूँ तुमसे।”

मम्मी – “हम्म्म।”

अंकल – “मैंने ऐसी मुलायम और सेक्सी लेग्स तुम्हारे अलावा किसी की नहीं देखीं।”

(अंकल के सख्त हाथ मम्मी को मदहोश करने लगते हैं। मम्मी की साँसें इतनी तेज हो जाती हैं कि अंकल भी सुन सकते हैं उसे। अंकल मम्मी की गाउन मम्मी के पेट पर कर देते हैं।

अब अंकल के हाथ मम्मी की जाँघों से खेलने लगते हैं। उनकी उँगलियाँ बार-बार मम्मी की पैंटी की लाइन के आस-पास टच होने लगती हैं। मम्मी भी ये सब जानती हैं पर कुछ बोल नहीं पातीं।)

मम्मी का शरीर अकड़ने लगता है। रह-रह कर वे मोन करने लगती हैं।

तभी अंकल मम्मी को पलटने की कोशिश करते हैं। मम्मी भी अंकल के हाथ के इशारे पर ही उल्टा घूम जाती हैं।

अंकल – “वर्षा अभी तो मुझे यहाँ काफी टाइम रुकना है ना।”

मम्मी – “हाँ कुछ टाइम तो है।”

अंकल – “तुम कहो तो मैं तुम्हारी बॉडी पर मसाज कर दूँ। तुम्हारी सारी थकान दूर हो जाएगी।”

(मम्मी कुछ कह नहीं पातीं। अंकल अपने हाथ मम्मी की जाँघ में एकदम ऊपर तक ले जाते हैं। मम्मी का शरीर काँप उठता है।)

अंकल – मम्मी की जाँघों को हल्का मसल कर फिर मम्मी से पूछते हैं – “बोलो वर्षा कहो तो थोड़ा मसाज कर दूँ तुम्हें?”

मम्मी कुछ ज्यादा नहीं कह पातीं सिवाय हल्की सी हामी भर देती हैं।
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#25
**अपडेट 23**

मम्मी के हाँ करते ही अंकल मम्मी की लेग्स पर बैठ जाते हैं। मम्मी ने भी ये एक्सपेक्ट नहीं किया था।
अंकल अपने आप को मम्मी की टाँगों पर इस तरह एडजस्ट करते हैं कि वे जरा सा भी झुकें तो उनका लंड मम्मी की गाँड पर फील होगा।

अंकल का लंड पहले ही एकदम तना हुआ है, ऊपर से मम्मी की नरम गाँड का अहसास उसे और भी उकसा रहा है।
पर मम्मी की हालत हर पल और बिगड़ती जा रही है। अब मम्मी भी अंकल से नाराजगी खत्म होती जा रही थी।

अंकल अपने हाथों को मम्मी की कमर पे चलाने लगते हैं और बिना मम्मी की परमिशन के मम्मी के गाउन को ऊपर की ओर खिसकाने लगते हैं।
मम्मी थोड़ा रेसिस्ट करती हैं पर अंकल मम्मी को समझाते हैं कि अगर गाउन नहीं उतरेगा तो ऑयल से खराब हो जाएगा।

मम्मी अपने हाथों को ऊपर करके गाउन को उतारने देती हैं।
जब-जब अंकल मम्मी की कमर से कंधे की ओर अपने हाथों को ले जाते हैं वे अपने लंड को मम्मी की गाँड की दरार में और ज्यादा रगड़ने लगते हैं। मम्मी की चुत भी पूरी गीली हो चुकी है। वे भी अंकल का साथ देने लगती हैं और अपनी गाँड उठा-उठा कर अंकल के लंड की रगड़ को फील करने लगती हैं।
मम्मी की मोनिंग अब पहले से काफी तेज हो जाती है। अंकल पूरी तरह मम्मी के ऊपर झुक जाते हैं और कहते हैं –

अंकल – “क्या हुआ वर्षा? ज्यादा दर्द हो रहा है क्या? अगर कहो तो मसाज न करूँ।”

मम्मी : “नहीं दर्द नहीं हो रहा अब।”

अंकल (अपना लंड मम्मी की गाँड क्रैक में पूरी तरह गड़ा देते हैं) – “वो तुम सिसकियाँ ऐसे ले रही हो कि मुझे लगा शायद पेन हो रहा हो।”

अंकल इसके बाद मम्मी की ब्रा का हुक खोल देते हैं और मम्मी के क्यूट, ब्यूटीफुल, गोरे-गोरे बूब्स को फ्री कर देते हैं।

मम्मी भी सिर्फ “योगेश जी” कहकर चुप हो जाती हैं और अंकल के सख्त हाथों से अपनी मसाज के मजे लेती हैं।

अब अंकल अपने हाथों को मम्मी की गाँड पर फेरने लगते हैं। मम्मी के शरीर पर सिर्फ उनकी पैंटी ही बची है। वे नाराजगी के कारण अंकल से चुदना तो नहीं चाहतीं पर उनके जिस्म की आग इतनी भड़क चुकी है कि वे अंकल को मना भी नहीं कर पातीं।

मम्मी की मोन अब पूरे कमरे में गूँज रही है। वे चाहती हैं कि अब अंकल उन्हें चोद दें पर अंकल को मम्मी को तड़पाने में बहुत मजा आता है। अंकल का मानना था कि हर औरत में एक रांड छुपी होती है और वो तभी बाहर आती है जब उसे सेक्स की तड़प फील कराई जाए।

मम्मी अंकल से खुलकर कह नहीं पातीं कि उन्हें चुदना है पर अब मम्मी से भी रहा भी नहीं जाता और वे अपने हाथों को अपनी पैंटी पर ले आती हैं।

ये देखते ही अंकल अंदर ही अंदर खुश हो जाते हैं और मम्मी के हाथों को उनकी चुत से हटा देते हैं।
अंकल – “ये क्या कर रही हो वर्षा?”

मम्मी – “योगेश जी प्लीज मेरे हाथ छोड़ दो।”

अंकल नहीं सुनते और मम्मी की चुत पर पीछे से हाथ ले जाकर मम्मी को थोड़ा ऊपर उठाते हैं। मम्मी एक कुतिया की तरह पोज़ में आ जाती हैं। तभी अंकल अपने हाथों से मम्मी की चुत से खेलने लगते हैं।

मम्मी का शरीर काँपने लगता है। अंकल मम्मी की चुत पर एक किस कर देते हैं।

मम्मी – कराहती हुई आवाज में – “ये क्या कर रहे हो योगेश जी?”

अंकल – “अब ये मत कहना कि आपने कभी मेरी चुत को चाटा नहीं।”

मम्मी चुप रहीं और अंकल ने मम्मी की पैंटी को नीचे खिसका दिया।

अब मम्मी पूरी नंगी पड़ी हैं और अंकल मम्मी की गाँड से कंधे की तरफ अपने हाथ को लाते हैं।

मम्मी बस आहें भरती रह जाती हैं। अंकल मम्मी के शरीर पर झुक जाते हैं और मम्मी के कानों में फिर से पूछते हैं –
“बताओ वर्षा क्या आज मुझसे अपनी गुलाबी सुंदर चुत को चटवाओगी या नहीं?”

अंकल के मुँह से ऐसे शब्द सुनकर मम्मी को अजीब लगता है पर वे कुछ नहीं कहतीं।
अंकल मम्मी को कहते हैं कि “वर्षा तुम्हारी खामोशी में ही तुम्हारा जवाब छुपा है।” और मम्मी को किस करते हुए ही नीचे आते हैं।

अंकल मम्मी की कमर पर किस करते हुए मम्मी की गाँड तक आ जाते हैं। अंकल अपनी टंग मम्मी के शरीर पर एक साँप की तरह फेर रहे थे।

अंकल अपना एक हाथ मम्मी की चुत पर रखकर मम्मी को थोड़ा ऊपर उठाते हैं जिससे मम्मी की गाँड थोड़ा ऊपर उठ जाती है। अंकल झट से अपनी टी-शर्ट उतार फेंकते हैं और मम्मी को कुतिया की तरह पोजीशन में देखकर अपनी टंग मम्मी की चुत पर फेरने लगते हैं।

हालाँकि मम्मी ने ऐसा अहसास पिछले 6 महीनों में अनगिनत बार महसूस किया है। मम्मी एक जल बिन मछली की तरह तड़प उठती हैं। मम्मी की मोन करने की आवाज पूरे कमरे में गूँजने लगती है।
मम्मी की आवाजें सुनकर अंकल भी समझ जाते हैं कि वे किसी भी समय झड़ जाएँगी।

अंकल बार-बार अपनी जीभ मम्मी की चुत से हटा लेते हैं जिससे मम्मी की तड़प और बढ़ जाती है। मम्मी रह-रह कर अंकल का नाम लेती हैं – “योगेश जी... योगेश जी...”

अंकल : “क्या हुआ वर्षा?”

मम्मी – “कुछ नहीं बट...”

अंकल – “लेकिन क्या वर्षा?”

अंकल सब जानते हैं कि मम्मी क्या चाहती हैं पर मम्मी नखरे कर रही थीं क्योंकि औरतों की आदत होती है मर्दी को बाखरे दिखाने की। भले ही चुत में आग लगी हो लेकिन नखरे नहीं छोड़तीं साली रंडियाँ। लेकिन अंकल ने भी सोच लिया था वे मम्मी के मुँह से ही सब कहलवाना है।

मम्मी – “योगेश जी प्लीज।” (और इतना कहकर वे फिर चुप हो जाती हैं।)

अंकल मम्मी को अचानक कमर के बल लिटा देते हैं और मम्मी की आँखों में आँखें डालकर कहते हैं –
अंकल – “वर्षा चुदाई का असली मजा सती-सावित्री नहीं रांड बनकर चुदने में है।”

इतना कहकर अंकल फिर से अपना मुँह मम्मी की चुत पर लगा देते हैं।

मम्मी भी अब रह नहीं पातीं और अपनी चुत को अंकल के मुँह पर रगड़ने लगती हैं।
अंकल – “कैसा लग रहा है मेरी जान?”

मम्मी – “आआह, बस रुकना मत कुछ देर प्लीज।”

अंकल – “सेक्स में सिर्फ मजे लेने ही नहीं होते, देने भी पड़ते हैं।”

मम्मी – “मैं सब करूँगी बस रुको मत अब।”

अंकल – “सब करोगी?”

मम्मी – “हाँ प्लीज रुकना मत।”

अंकल – अपना मुँह हटाकर मम्मी के ऊपर आ जाते हैं और मम्मी से कहते हैं कि “सोच लो वर्षा मेरी रांड बनना पड़ेगा तुम्हें।”

मम्मी को इस बात का अंदाजा नहीं था पर वे अब सिर्फ झड़ना चाहती हैं और अपनी आँखें झुका लेती हैं।
अंकल मम्मी के साइड में लेट जाते हैं और मम्मी से कहते हैं कि “मेरा लंड तुम्हारा है पर इसे खुश करना अब तुम्हारे हाथ में है। अगर चुदना है तो ये नाराजगी का नाटक करना बंद करो और अपनी प्यास बुझा लो।”

अंकल को लेटा हुआ देख मम्मी के पास कोई चारा नहीं बचता। वे अंकल से कहती हैं “मैं आपसे इसलिए नाराज थी आप मुझे प्यासी छोड़कर चले गए थे।”

अंकल : “अर्जेंट काम था।”

मम्मी : “सॉरी क्या मुझे इतना भी हक नहीं है मैं आपसे नाराज न हो सकूँ?”

अंकल : “है लेकिन मैं तुझे बहुत देर से मना रहा था पर तू...”

मम्मी : “सॉरी अब नाराज नहीं हूँ।” और इतना कहकर अंकल के ऊपर आ जाती हैं।
अंकल के लंड का उभार देखकर मम्मी मुस्कुराते हुए बोलती हैं “लगता है मेरे नाराज होने से ये भी काफी बड़ा हो गया है। लगता है आज तो मेरी फाड़ ही देगा।”

अंकल मम्मी को इशारा करते हैं और मम्मी अंकल का इशारा समझ जाती हैं। वे अंकल का अंडरवियर हटाना शुरू करती हैं।

मम्मी अंकल के नागराज को ध्यान से देखती रहती हैं क्योंकि अंकल का लंड अभी पूरा खड़ा भी नहीं है। मम्मी हैरान रह जाती हैं।
अंकल – “सोच क्या रही हो मेरी जान?”

ये कहकर वे मम्मी का मुँह अपने लंड की तरफ खींचते हैं।

मम्मी भी एक गुलाम की तरह अंकल के लंड पर अपनी टंग फेरने लगती हैं।
जल्द ही मम्मी लंड को अपने मुँह में डाल लेती हैं पर इतना लंबा और मोटा लंड पूरी तरह नहीं ले पातीं। ऐसा क्यों ये तो नहीं पता क्योंकि मम्मी पिछले 6 महीनों से ले रही थीं पर आज क्यों ये नहीं पता।

अंकल का लंड अब अपने विकराल रूप में आ जाता है। वे मम्मी को कई बार लंड पूरा लेने के लिए कहते हैं पर मम्मी हिम्मत नहीं हो पाती या मम्मी जानबूझकर नहीं ले रही थीं।
अंकल ये देख मम्मी के सामने खड़े हो जाते हैं। आज वे मम्मी को पूरी तरह मसल देना चाहते हैं। वे मम्मी के मुँह में लंड अंदर फोर्स करते हैं जिससे मम्मी छटपटाने लगती हैं।
पर अंकल एक नहीं सुनते।

मम्मी की साँसें उखड़ने लगती हैं।
मुझे दूर से देखने पे आज अंकल का लंड कुछ ज्यादा ही बड़ा लग रहा था क्योंकि मम्मी रोज अंकल का लंड पूरा मुँह में ले लेती हैं लेकिन आज क्यों नहीं। इसका कारण मुझे बाद में पता चला। अंकल ने कोई जेल लगाया था जिससे अंकल का लंड ज्यादा मोटा और लंबा हो गया।

मम्मी – “योगेश जी मुझसे नहीं हो पाएगा। ये बहुत बड़ा है, मेरे गले में लग रहा है।”

अंकल मम्मी को हल्का सा रेस्ट देकर बिना कुछ कहे फिर से अपना लंड मम्मी के मुँह में पूरा डाल देते हैं और इस बार काफी देर तक डाले रखते हैं।

अंकल मम्मी के साथ ऐसा कई बार करते हैं। कुछ ही देर में मम्मी को लंड पूरा लेने की आदत सी हो जाती है।

अब मम्मी अंकल के हाथों के हल्के से इशारे से लंड खुद ही मुँह में लेने लगती हैं।
अंकल मम्मी का नाम पुकारते हैं तो मम्मी नजरें ऊपर उठ जाती हैं।
अंकल ऊपर हँसकर मम्मी को देखते हैं।

अंकल – “मुझे नहीं पता था तू इतनी जल्दी मान जाएगी। जब मैं रूम में आया तो ऐसा लग रहा था तू आज मुझसे नहीं मानेगी लेकिन तू तो मान गई और तेरी नाराजगी भी दूर हो गई। और मेरी रांड चूस मेरा लौड़ा मादरचोद रंडी चूस रांड चूस रांड मेरा लौड़ा।”

अंकल से बार-बार अपने लिए रांड सुनकर मम्मी को बुरा तो लगता है पर मम्मी को अपने बदन की आग को बुझाने के सिवा कुछ और नहीं दिखता।

अंकल भी मम्मी का मुँह चोदने की स्पीड बढ़ा देते हैं।

मम्मी एक तरफ लंड चूस रही हैं वहीं दूसरी ओर अपनी चुत सहला रही हैं।
अंकल – “बहुत आग लगी है ना वर्षा?”

मम्मी – “हाँ लगी है आग। यही सुनना चाहते हो ना?”

अंकल हँसते हैं और मम्मी को बेड पर लिटा देते हैं।
अंकल – “ये बात हुई ना मेरी रांड। अब देख तेरी आग ऐसी बुझाऊँगा कि तू पूरे दिन ढंग से नहीं चल पाएगी।”
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#26
**अपडेट 24**

अंकल मम्मी के ऊपर झुक जाते हैं। मम्मी अंकल का बड़ा लंड देखकर एक ओर डर भी रही हैं वहीं दूसरी ओर मम्मी से रहा भी नहीं जा रहा।

मम्मी : “आज आपने कौन सी टैबलेट ली जिससे ये और भी बड़ा हो गया है? प्लीज बताइए।”

अंकल : “हाँ ली है। आज तेरी चुत को फाड़ना है इसलिए थोड़ा बड़ा और मोटा हो गया है।”

फिर अंकल मम्मी के पेट पर किस करते हुए ऊपर बढ़ने लगते हैं।

अंकल मम्मी की निप्पल्स के चारों ओर अपनी जीभ से सर्कल बनाने लगते हैं।

और मम्मी के बूब्स को अपने हाथों में भरकर बार-बार मसलने लगते हैं।

मम्मी भी अंकल के बालों में अपने हाथ डालकर अंकल को अपने बूब्स चूसाने लगती हैं। मम्मी बार-बार एक्साइटेड होकर अंकल के बालों को खींचने लगती हैं।
अंकल मम्मी की नेक पर किस करने लगते हैं। और पूरी तरह मम्मी पर लेट जाते हैं। अंकल का लंड मम्मी की जाँघों में तो कभी मम्मी की चुत पर रगड़ने लगते हैं।
मम्मी भी अपनी चुत इधर-उधर हिलाकर अंकल के लंड से उनका मेल कराने की कोशिश करने लगती हैं।

अंकल अपना लंड मम्मी की चुत पर प्रेस करते हुए मम्मी के होठों के पास अपने होठ लाते हैं। हालाँकि मम्मी को अंकल से थोड़ी नाराजगी हो गई थी क्योंकि वे उनको तड़पता छोड़ गए थे लेकिन हवस की आग में इतना आगे बढ़ चुकी हैं कि अंकल के लिए अपने होठ खोल देती हैं और अपनी टंग अंकल को सौंप देती हैं।

दोनों एक-दूसरे को होठों का रस निचोड़ने लगते हैं।

मम्मी अंकल का नाम लेकर बार-बार मोन कर रही हैं।
अंकल भी लगातार मम्मी की चुत पर अपना लंड रगड़ रहे हैं पर अंदर नहीं डालते।

मम्मी – “योगेशजीईईई।”

अंकल – “क्या हुआ मेरी रांड?”

मम्मी – “प्लीज अब डाल दो ना अंदर।”

अंकल – “तू तैयार है ना मेरा लंड लेने के लिए?”

मम्मी – “हाँ प्लीज अब डालो अंदर। अपनी रांड को और मत तड़पाओ अब।”

अंकल मम्मी पर अपना काबू पाकर खुश हो जाते हैं और अपना लंड मम्मी की चुत पर लगाकर अंदर की ओर प्रेस करने लगते हैं।

अंकल का लंड अभी अंदर गया भी नहीं था कि वे दर्द से कराह उठती हैं और पीछे की ओर हटने लगती हैं।
अंकल मम्मी के कंधे पर हाथ रखकर मम्मी को हटने नहीं देते।
अंकल – “क्या हुआ वर्षा?”

मम्मी – “तुम्हारा लंड तो आज कुछ ज्यादा ही बड़ा और मोटा हो गया है। मुझे नहीं लगता मैं ले पाऊँगी।”

अंकल – “वर्षा मैंने तुमसे 6 महीने पहले कहा था ना जब तुमने कहा था बहुत बड़ा है तो मैंने कहा था ऐसा कोई लंड नहीं बना जो चुत में फिट न हो मेरी जान। डर क्यों रही हो? असली मर्द से चुदना है तो थोड़ा दर्द तो झेलना ही पड़ेगा। तो तुमने ले लिया था और 6 महीनों से ले रही हो।
तो आज डर क्यों रही हो? आज मैंने लंड को बड़ा करने की एक टैबलेट ले ली थी पर तुम डरो मत। जैसे 6 महीने पहले लिया वैसे ही आज भी ले लोगी।”

ये कहकर अंकल अपना लंड मम्मी की चुत में पूरा उतार देते हैं।
मम्मी छटपटा उठती हैं। मम्मी को लगता है कि उनकी साँसें उखड़ जाएँगी।

अंकल कुछ देर अपना लंड ऐसे ही मम्मी की चुत में रखते हैं। मम्मी भी दर्द से तड़पती रहती हैं पर कुछ ही देर में उनका दर्द कम होने लगता है।
अंकल भी मम्मी के बदन पर जगह-जगह अपनी टंग फेरते रहते हैं।
धीरे-धीरे मम्मी की सिसकियाँ मोनिंग में बदलने लगती हैं। वे अंकल को अपनी बाहों में भर लेती हैं।

अब अंकल भी अपना लंड धीरे-धीरे मम्मी की चुत में आगे-पीछे करने लगते हैं।
कुछ ही देर में मम्मी फिर से चरमसुख की प्राप्ति के लिए तड़पने लगती हैं।
आह-आह और शरीर के आपस में टकराने की आवाज कमरे में गूँजने लगती है।

अंकल मम्मी की आँखों में देखते हुए मम्मी की चुदाई और तेज कर देते हैं। मम्मी भी हर झटके के साथ “आह योगेशhhhh जीईईई” चिल्लाती हुई चुदाई का आनंद ले रही हैं।

मम्मी अब झड़ने के करीब हैं। मम्मी की मोनिंग और बढ़ जाती है। अंकल मम्मी की आवाज कम करने के लिए मम्मी के मुँह में अपनी उँगलियाँ डाल देते हैं।

मम्मी अपनी आँखें बंद कर लेती हैं। उनका शरीर अकड़ने लगता है।
ये देख अंकल अपनी स्पीड और बढ़ा देते हैं। कुछ ही पलों में मम्मी अपनी चुत का सारा रस अंकल के लंड पर छोड़ने लगती हैं।

मम्मी की चुत झड़ने के बाद उनके शरीर की आग को कुछ शांति मिलती है, पर अंकल अभी भी एक सांड की तरह उनकी चुत मारने में मग्न हैं।

अंकल मम्मी को हर पोज़ में चोदने लगते हैं।

जहाँ अंकल ने स्टार्ट प्यार भरी की थी वहीं अब वे काफी रफ चुदाई कर रहे थे लेकिन इस सब से मम्मी को भी कोई परेशानी नहीं थी क्योंकि मम्मी की आदत थी चुदने की।

हालाँकि मम्मी का शरीर पूरी तरह से टूट चुका था। जगह-जगह उनके शरीर पर निशान उनकी चुदाई की दास्तान बयां कर रहे थे। पर ये कोई नई बात नहीं थी। ऐसा पिछले 6 महीनों से हो रहा था। ऐसा मजा वे पिछले 6 महीनों से ले रही थीं।

अंकल भी अब झड़ने वाले थे।

अंकल : “वर्षा मेरी रांड आज तेरी चुत अपने माल से भरने वाला हूँ मैं।”

मम्मी – (कराहती हुई आवाज में) – “नहीं... आई पिल्स खत्म हो गई हैं। प्लीज अंदर मत निकालो।”

अंकल – “तो तू ही बता कहाँ निकालूँ फिर?”

मम्मी – “बाहर कहीं भी, बट अंदर चुत में नहीं।”

अंकल इसी का इंतजार भी कर रहे थे।

वे उठकर अपना लंड मम्मी के मुँह के पास ले आते हैं जो पहले से ही मम्मी के पानी से भीगा पड़ा है।

मम्मी लंड को मुँह में लेने से अब हिचकने लगती हैं पर अंकल मम्मी के बालों में हाथ डालकर मम्मी के मुँह को अपने लंड पर दबाते हैं।

मम्मी को भी मुँह खोलना ही पड़ता है क्योंकि मम्मी ने ही चुत को छोड़ कहीं भी करने के लिए हामी भरी थी।

थोड़ी देर मम्मी के मुँह की चुदाई करने के बाद अंकल भी झड़ने वाले हैं। अंकल का शरीर भी अकड़ने लगता है।

अंकल अपना कम मम्मी के मुँह में ही निकालने के लिए तैयार हो जाते हैं पर मम्मी अपना मुँह पीछे खींचने की कोशिश करती हैं।

अंकल मम्मी के मुँह को कसकर पकड़ लेते हैं और अपना सारा माल मम्मी के मुँह में शूट करने लगते हैं।

डिस्चार्ज होने के बाद अंकल वहीं नंगे ही मम्मी के साथ लेट जाते हैं।

और थोड़ी देर बाद अंकल मम्मी से कहते हैं “फिर से करें?”

मम्मी : “पहले अंकुश को घर से बाहर भेजो फिर पूरे दिन कर लेना।”

फिर अंकल ने मुझे कॉल किया।

तो मैं सोफे पे आकर अंकल का कॉल रिसीव किया।

अंकल : “बेटा क्या तू घर से बाहर जा सकता है?”

मैं : “क्यों अंकल?”

अंकल : “बेटा आज तेरी मम्मी को पूरे दिन चोदना चाहता हूँ लेकिन वे तेरी वजह से शर्मा रही हैं। तू चला जा।”

मैं : “अंकल चला जाता हूँ और अंकल आज पापा नहीं आएंगे। आप मम्मी को बता देना।”

अंकल : “क्या?”

मैं : “पापा ने मैसेज किया था और मैं जाता हूँ। रात को 10 बजे वापस आ जाऊँगा।”

अंकल : “आज तेरा नामर्द बाप नहीं आएगा इसलिए तू कल आना। आज दोस्त के घर रुक जाना। मैं आज रात में भी तेरी मम्मी की चुत फाड़ूँगा।”

मैं : “ओके अंकल। वैसे मम्मी कहाँ हैं?”

अंकल : “वे बाथरूम में हैं।” मुझे मम्मी की धीमी आवाज आ रही थी। वे हँस रही थीं।

फिर मैंने कॉल कट किया और दोस्त के घर चला जाता हूँ।

फिर अगले दिन सुबह 9 बजे वापस आता हूँ और घर की डुप्लीकेट की से गेट खोलकर अंदर आता हूँ तो मम्मी के रूम में खिड़की से देखता हूँ अंकल-मम्मी रूम में नंगे सो रहे होते हैं चिपककर। फिर मैं अंकल को कॉल करता हूँ तो अंकल रिसीव कर लेते हैं। मैं बोलता हूँ “बाहर आओ।”

फिर अंकल रूम का गेट खोलते हैं।

मैं गेट पे ही खड़ा मिलता हूँ और अंकल नंगे ही गेट खोलते हैं और मुझे सामने खड़े देख मुस्कुराते हैं और पीछे मुड़कर मम्मी की ओर इशारा करते हैं। अंदर मम्मी नंगी सो रही थीं।

मैं : “मम्मी कब सोईं?”

अंकल : “सुबह 6 बजे।”

मैं : “क्या? कितनी बार चोदा?”

अंकल : “काउंटिंग नहीं की पर 10 बार तो चोदा रंडी को।”

फिर मैं भी अंकल के साथ बेड पे आता हूँ। मम्मी बेसुध होकर सो रही थीं। नंगी ही। मम्मी के शरीर पे कई निशान बन गए थे। जिन्हें देख मैंने अंकल से इशारा किया।

अंकल : “ये सब मैंने किया है ...”

फिर अंकल कहते हैं “बेटा तू 2 घंटे के लिए फिर से चला जा नहीं तो वर्षा को तेरे सामने शर्म आएगी।” फिर मैं मम्मी को नंगी उसी हाल में छोड़कर वापस घर से निकल गया।

फिर 11 बजे आया तो घर पे अंकल हॉल में बैठे थे और मम्मी नजर नहीं आईं तो मैं मम्मी के बारे में पूछने ही वाला था कि अचानक से मम्मी पूजा घर से निकलीं और उनके हाथ में आरती का दीपक था जैसा इस फोटो में है। सेम मम्मी ने पीले कलर की साड़ी पहनी थी। गले में मंगलसूत्र, बाल खुले हुए आधे बाल दूध पे आधे बाल पीछे, हाथों में कंगन, माँग में सिंदूर।

मम्मी आरती का दीपक लेकर निकलीं। पहले बोलीं “बेटा आ गया मेरे लाल। रात को क्यों नहीं आया? मैं तेरा पूरी रात इंतजार करती रही।”

मैं : “मम्मी वो दोस्त के घर रुक गया। सॉरी।”

मम्मी : “एक फोन तो कर देता।”

मैं : “सॉरी मम्मी और अंकल कब आए?”

अंकल कुछ बोलते उससे पहले मम्मी बोलीं –

मम्मी : “जस्ट थोड़ी देर पहले आए।”

मम्मी ने झूठ बोला।

मैं : “मम्मी आज रात को आपने अंकल से कंप्यूटर सिखा?”

मम्मी : “नहीं बेटा।”

फिर मम्मी ने अंकल को आरती दी फिर मुझे। उसके बाद मम्मी मुझे गले लगा लेती हैं।

फिर पूरे दिन ऐसे ही निकला। रात को पापा आ गए।
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#27
**अपडेट 25**

दो दिन ऐसे ही निकल गए। दो दिन बाद अंकल ने मुझसे कहा “बेटा मैं तेरी मम्मी के साथ सुहागरात मनाना चाहता हूँ।”

मैं : “वो तो आप पिछले 6 महीनों से मना रहे हो।”

अंकल : “नहीं बेटा मैं उसे दुल्हन की तरह सजाकर उसके साथ जैसे पहली रात होती है ठीक वैसे ही करना चाहता हूँ।”

मैं : “आप मम्मी से बात करो।”

अंकल : “वो मान जाएगी लेकिन मादरचोद तेरा नामर्द बाप और तेरी दादी घर में रहेंगे तो पॉसिबल नहीं है।”

मैं : “अंकल पापा दो दिन बाद ऑफिस के काम से आउट ऑफ सिटी जा रहे हैं 5 दिन के लिए।”

अंकल : “बेटा मैं इन 5 दिनों में ही करूँगा और तू तेरी दादी को दोस्त के घर भिजवा देना।”

मैं : “नहीं अंकल पापा दादी को भी लेकर जा रहे हैं उनकी आँखों का ऑपरेशन कराने।”

अंकल : “थैंक्स बेटा।”

फिर अंकल ने मम्मी को दिन में घर बुलाया तो मम्मी दादी से बोलीं “मम्मी जी मैं छत पे जा रही हूँ।” और बहाने से अंकल के घर चली गईं जहाँ उनके बीच बातें हुईं।

अंकल : “वर्षा मैं तेरे साथ सुहागरात मनाना चाहता हूँ।”

मम्मी : “वो तो आप पिछले 6 महीनों से मना रहे हो।”

अंकल : “नहीं एक दुल्हन की तरह मनाना है।”

मम्मी : “लेकिन होगा कैसे? मेरे पति और सास...”

अंकल : “अंकुश ने कहा तेरा नामर्द पति और सास 5 दिनों के लिए बाहर जाएँगे दो दिन बाद।”

मम्मी : “मुझे नहीं पता। ठीक है फिर तो पॉसिबल हो जाएगा।”

अंकल : “मैं चाहता हूँ तू एक दुल्हन की तरह सजे और मेहंदी और चुत के बाल...”

मम्मी : “मैं कर लूँगी।”

अंकल : “नहीं चुत के बाल मैं साफ करूँगा।”

मम्मी : “कर देना।”

अंकल : “लेकिन सामान अंकुश लाएगा।”

मम्मी : “क्या? आपका दिमाग तो ठीक है? मुझे शर्म आएगी।”

अंकल : “तो ठीक है सुहागरात कैंसल।”

मम्मी : “नो ठीक है। आप अंकुश से भिजवा देना।”

अंकल : “और शादी का जोड़ा लेना है।”

मम्मी : “वो मेरे पास है मेरी शादी का।”

अंकल : “नहीं वो पुराना हो गया है और उस नामर्द ने उसे खरीदा था। मैं चाहता हूँ तुम न्यू पहनो।
और कल तुम मेरे साथ मार्केट चलना और न्यू जोड़ा का ऑर्डर कर देंगे। पसंद कर लेना खुद।”

मम्मी : “लेकिन मैं कल घर से कैसे निकलूँगी?”

अंकल : “बोल देना अंकुश के कॉलेज जा रही हो।”

मम्मी : “ठीक है।”

अंकल : “दो दिन बाद मैं तुम्हें बीवी की तरह चोदूँगा सुहाग सेज पे।”

अंकल की बातें सुनकर मम्मी शर्म से पानी-पानी हुईं। निगाहें झुकाए खड़ी थीं।
फिर अंकल मम्मी के आगे आकर झुके और बोले “तो कल मैडम सुबह 11 बजे इस कॉलोनी के बाहर आपका गुलाम आपकी सेवा में हाजिर हो जाएगा।”

और फिर अंकल के मोबाइल पे किसी का कॉल आया तो रिसीव करते हुए बालकनी में चले गए। अंदर मम्मी थीं। ये सब मैं देख रहा था।
अंकल के जाने के बाद मम्मी कुछ सोच रही थीं। ये तो मुझे नहीं पता।
शायद सोचते-सोचते मम्मी की टाँगों के बीच एक्साइटमेंट होने लगी। मम्मी की चुत से पानी बहने लगा। मम्मी अपने हाथ को अपनी सलवार के ऊपर से ही अपनी चुत को सहलाने लगीं। मैं भी ध्यान से देख रहा था। फिर मम्मी ने अपनी सलवार का नाड़ा खोलकर नीचे गिरा दिया और मम्मी ने अपना हाथ अपनी पैंटी में अपनी चुत पर चलाने लगा और अपनी चुत को अपनी उँगलियों से छेदने लगीं।
मम्मी साँसें भी भारी होने लगीं और उनके मुँह से “आआआआआआहhhhhhhhhhhhhhhhhhhh आआआआआआहhhhhhh” निकल रही थीं और वे अपनी चुत में अपनी उँगली गचा-गच अंदर-बाहर करने लगीं। उनकी चुत भी उस समय पानी का समुंदर बहा रही थी। मम्मी की उँगलियाँ और चुत पर बड़ी झाँटें उनकी चुत के रस से एकदम भीग चुकी थीं और जब मम्मी थोड़ा नॉर्मल हुईं तो अपने आप को इस हालत में देख खुद ही शर्मा गईं। फिर मैंने देखा अंकल भी मम्मी को देख रहे थे। फिर अंकल मम्मी के पास आए और मम्मी को उन्होंने उठा लिया और रूम में ले गए। खिड़की पे गया तो खिड़की बंद था। फिर मैं घर वापस आ गया और एक घंटे बाद मम्मी वापस आईं।

अगले दिन मैंने कॉलेज जाते समय दादी के सामने मम्मी से कहा –

मैं : “मम्मी आप 11 बजे कॉलेज आ जाना।”

मम्मी : चौंकते हुए क्योंकि मम्मी समझ गईं ये अंकल की योजना है।

दादी : “क्यों बेटा?”

मैं : “मम्मी या पापा को कॉलेज बुलाया है।”

दादी : “ठीक है 11 बजे उसे भेज दूँगी।”

फिर मम्मी मुस्कुराते हुए अपना काम करने लगीं और मैं कॉलेज चला गया।

आए शाम को 6 बजे वापस आया और अंकल से मिलने उनके घर गया कॉलेज से डायरेक्ट। और अंकल ने कहा “बहुत मजा आया आज तो मैंने तेरी मम्मी को शॉपिंग कराई और तू खुद देखना दो दिन बाद।”

मैं : “अंकल कल दादी-पापा जा रहे हैं तो आप कल ही सुहागरात मना लीजिए।”

अंकल : “ठीक है बेटा तेरी मम्मी से बात करूँगा अभी।”

फिर मैं घर आया तो दादी और मम्मी से मिला। मम्मी बहुत खुश लग रही थीं।

मम्मी : “बेटा तूने झूठ क्यों बोला कॉलेज में बुलाया है? पता है जब मैं तेरे कॉलेज जा रही थी तो योगेश जी मिल गए। फिर वे मुझे अपने घर ले गए कंप्यूटर सिखाने। मैंने उनसे कहा मुझे अंकुश के कॉलेज जाना है तो उन्होंने कहा ये अंकुश की प्लानिंग है कॉलेज नहीं जाना कंप्यूटर सीखने के लिए।”

मैं : “हाँ मम्मी सही कहा अंकल ने।”

फिर मम्मी किचन में अपना काम करने लगीं।
फिर रात को पापा नहीं आए। आज मम्मी अकेली सोई थीं और दादी मेरे साथ। फिर सुबह 6 बजे मेरी नींद खुली। मम्मी सो रही थीं सिर्फ पैंटी में।
मैंने मम्मी को उठाया तो उन्होंने कहा उन्हें थोड़ी देर और सोना है। मैंने कुछ नहीं कहा। मम्मी मेरे सामने पैंटी में रह लेती हैं इसलिए इस पर कोई शर्म नहीं थी। मम्मी पैंटी में थीं।

फिर मैंने देखा मम्मी का मोबाइल उनके पास रखा था। मैंने मम्मी का मोबाइल उठाया और दूसरे रूम में आ गया और
मैंने देखा उसमें आंटी की कॉल थी जिसे मम्मी अंकल के बारे में पता था। वही आंटी जिनकी बेटी की शादी में हम गए थे।

मम्मी : “दीदी कल मैं योगेश जी घर गई तो उन्होंने मुझसे सुहागरात की डिमांड रखी। बोले मैं तेरे साथ वैसे ही सुहागरात मनाना चाहता हूँ जैसे पहली रात में होती है।”

आंटी : “तो मना ले।”

मम्मी : “हाँ आज वे मुझे शॉपिंग ले गए थे।”

आंटी : “बहुत बढ़िया। पूरा बता क्या हुआ।”

मम्मी : “दीदी जब मैं
सुबह में उठकर तैयार हो गई क्योंकि मुझे पता था आज मुझे योगेश जी के साथ शॉपिंग पे जाना है और 11 बजे मैं बुढ़िया से बहाना बनाकर मैं कॉलेज जा रही अंकुश के और घर से निकल गई और कॉलोनी के बाहर योगेश जी ने मुझे पिक किया। हम दोनों एक बड़े से साड़ियों के शोरूम में चले गए। वहाँ सेल्समैन मुझे साड़ियाँ खोल-खोल कर दिखा रहा था और मैं बार-बार योगेश जी से पूछ रही थी ‘योगेश जी ये कैसी है?’
फिर योगेश जी कहा ‘ये साड़ी अच्छी है वर्षा तुम पर बहुत अच्छी लगेगी’ और मेरी सब साड़ियाँ योगेश जी ने अपनी पसंद की लीं और जब सुहागरात का जोड़ा लेने की बात आई तो योगेश जी मुझसे पूछने लगे ‘वर्षा सुहागरात में साड़ी पहनोगी या फिर लहंगा-चोली?’ वैसे मैं बड़ी इच्छा थी कि मैं अपनी सुहागरात में लहंगा-चोली पहनूँ मेरे पति के साथ तो सब इतना जल्दी हो गया था कि मेरे सब अरमान मेरे दिल में ही रह गए थे लेकिन अब मुझे फिर से दुल्हन बनाने का मौका मिला था और अब मेरे यार योगेश जी ने मुझसे पूछा तो मैंने धीरे से कह दिया ‘जी लहंगा-चोली’ और फिर योगेश जी ने एक लहंगा-चोली उठाकर मुझे दिखाते हुए कहा,

‘वर्षा ये देखो ये कैसा है। तुम पर बहुत अच्छा लगेगा।’ योगेश जी की बात का क्या जवाब देती बस इतना ही कहा ‘जी अच्छा है’ और अपनी आँखें नीचे कर लीं। योगेश जी मेरे लिए ढेर सारी शॉपिंग की। मेरे लिए कीमती ज्वेलरी, मेकअप का सामान लिया। मेरी साड़ियों के सारे ब्लाउज सिलने के लिए दे दिए थे और मैंने अपने योगेश जी के कहने पर अपने सारे ब्लाउज डिजाइनर और स्लीवलेस के बनवा लिए थे। पता नहीं अब मैं इस सुहागरात के लिए काफी एक्साइटेड हो रही थी। मेरे दिल में मेरे सोए हुए अरमान जाग उठे थे और मैं भी गरम जोशी से अपने योगेश जी के साथ अपनी सुहागरात की तैयारी में लग गई थी। मैं जानती थी कि अगर मेरे योगेश जी इतना सब कुछ कर रहे हैं तो जरूर उनके दिल में कुछ और भी होगा पर मैं भी देखना चाहती थी कि वे मेरे हुस्न के जाल से कैसे मेरे गुलाम बनेंगे। मैंने भी उन पर अपने हुस्न की बिजलियाँ गिराने का फैसला कर लिया था। मैं मेनका से कम नहीं हूँ।

वो सुहागरात को जब मैं उनके पास इतने करीब उनके बेड पर उनके साथ हूँगी तो मुझे जरूर नंगी करेंगे और जब मेरे योगेश जी सुहागरात को मेरे बदन से मेरा लहंगा-चोली उतारेंगे तो हर मर्द की उनकी इच्छा होगी कि उनकी खूबसूरत बीवी सेक्सी ब्रा और पैंटी में उनकी बाहों में हो। यही सब सोचकर मैंने सुहागरात के लिए बहुत ही सेक्सी रेड कलर की ब्रा और बहुत ही हॉट उसी कलर यानी रेड कलर का थॉन्ग लिया। थॉन्ग क्या था सिर्फ आगे एक छोटा सा कपड़ा था और पीछे सिर्फ एक रस्सी। मैं जानती थी ये मुझ पर बहुत सूट करेगा और मुझे ये देखकर तो मेरे योगेश जी किसी भूखे शेर की तरह मुझ पर टूट पड़ेंगे। मेरे लिए ब्रा और थॉन्ग कुछ ऐसे थे इस पिक की तरह।

फिर हम शॉपिंग से आते हैं और घर आकर मैं अपने रूम में गई और नंगी हो गई और सोचने लगी
मेरे जैसी सुंदर सेक्सी औरत किसी मर्द के बगल में लेटी हो तो उसका खड़ा नहीं हो और वे मुझे बिना चोदे छोड़ दें। मैं कैसे उनको रोक सकती हूँ।

और यही सोचते मैं मुस्कुराते अपनी सेक्सी ट्रांसपेरेंट नाइटी उठाई और पहन ली। उस नाइटी में सच में बहुत ही हॉट लग रही थी।

और मुझे यकीन था कि अगर इस नाइटी में मुझे मेरे योगेश जी कहीं देख लें तो उनका लौड़ा रॉकेट की तरह खड़ा होकर उनकी पैंट को फाड़कर बाहर आ धमकेगा।

मुझे नींद नहीं आ रही थी तो मैं बिस्तर से खड़ी हो गई।

मैं इस नाइटी में दीदी बाहर निकलना चाहती थी पर बुढ़िया घर में थी। फिर मैंने सोचा अब तो काफी रात हो गई है बुढ़िया सो गई होगी और मैं बालकनी में चली गई।
वैसे तो बाहर बहुत ठंडी हवा चल रही थी पर आज मुझे ये ठंड परेशान नहीं कर रही थी। ठंडी हवा में मेरे रेशमी बाल लहरा रहे थे जिसको मैं बार-बार अपने हाथों से ठीक करके योगेश जी के बारे में सोचने लगी। कि क्या मैं इतनी खूबसूरत हूँ कि योगेश जी का मन मुझ पर डोल गया। मैं उनके बारे में सोचने लगी कि कैसे मेरे योगेश जी जब मैं उनके सामने बैठी थी तो कैसे मेरी चुचियों को घूर रहे थे बिना पलक झपकाए। एकटक बस देखे ही जा रहे थे मेरी चुचियों को। पिछले 6 महीनों में जैसे उन्होंने कभी मुझे चोदा न हो और ना ही मेरी चुचियों का रस पिया हो और तो और उन्होंने बताया था मुझसे पहले वे कई लड़कियों की सील खोल चुके हैं और उनके बूब्स को निचोड़ चुके हैं और कई औरतों को प्रेग्नेंट भी कर चुके हैं।
यही सोचते-सोचते मेरा हाथ अपनी छातियों पे चला गया। और मैंने अपनी बाईं चुची को नाइटी के ऊपर से हल्का सा दबाया.....

आआहsssssss... मेरे मुँह से हल्की सी आआआआआआआआहhhhhhhhhhhhhhh निकल गई थी। पता नहीं मुझे क्या हुआ मैंने अपनी नाइटी की गाँठ को धीरे से खोल दिया और अपनी नाइटी को एक तरफ से सरकाकर अपनी एक चुची को बाहर निकाल लिया। और खुद ही अपनी चुचियों को निहारने लगी और मन में सोचने लगी कितने गोरे हैं मेरे बूब्स। एक टाइट और सुडौल और उस पर गुलाबी रंग के निप्पल किसी भी मर्द का ईमान इनको देखकर डोल जाए। मैं अपनी चुची के निप्पल को पकड़कर हाथ से सहलाने और मसलने लगी और अपने योगेश जी के बारे में सोचने लगी कि तभी मेरी आँखों के सामने अपने योगेश जी का मर्दाना जिस्म घूमने लगा। मैंने अपना ध्यान उस ओर हटाने की बहुत कोशिश की पर कामयाब नहीं हो रही थी। मैंने अपने आप ही शर्माते ही जैसे अपने होठों पर उँगली रखी। पता नहीं मुझे क्या हुआ मैं अपनी उँगली को मुँह में लेकर चूसने लगी। अपनी उँगली को चूसते उस समय मुझे ऐसा महसूस होने लगा कि मैं अपनी उँगली नहीं बल्कि अपने योगेश जी का लंड चूस रही हूँ और मेरी नजर मेरे बेड के पास रखी योगेश जी की पिक पर गई तो मुझे लगा कि मानो मेरे सामने ही खड़े मेरी चुचियों को देख रहे हैं। उनकी पिक को देख उनसे बातें करने लगी, और बड़ी ही सेक्सी अंदाज में उनकी पिक को देखकर बोली ‘ऐसे क्या देख रहे हैं जी.. जैसे कभी देखा ही न हो.. जैसे पिछले 6 महीनों से मुझे देखा न हो। इन 6 महीनों में मुझे इतना कुचला है आपने अपने लंड से मेरी चुत को और अपने हाथों से मेरे बूब्स को। अब क्यों बड़े घूर-घूर के देख रहे थे ना दिन में। नजर भी नहीं हटा पा रहे थे। कितने बेशरम हो आप। अब देखिए ना।
मैंने मना किया है ना देखने के लिए। अब आपकी ही हूँ। जैसे आपका दिल करे देखें और देखना ही क्या आपका दिल करे तो इनसे खेलिए। लेकिन अकेले में सबके सामने नहीं। अगर आपका देखने का इतना ही मन है तो लीजिए मैं खुद ही दिखा देती हूँ आज..’ और अपनी ब्रा की डोरी को जो आगे बीच में बंधी थी उसको खींच दिया।

और डोरी को पकड़कर मुस्कुराते हुए उनकी पिक को देखने लगी। और अपनी ब्रा को अपनी चुचियों से हटा दिया। ‘कैसा लगा ये नजारा.. मजा आया ना!’.. मैं अपने योगेश जी की पिक के सामने मुस्कुराती अदा से घूमकर उनको अपनी जवानी दिखा रही थी।

मैं बहुत ही ज्यादा गरम हो गई थी। मुझे लग रहा था कि मैं उनकी पिक से नहीं बल्कि उनसे बात कर रही हूँ और उनकी पिक की ओर देखकर मैं बोली, ‘क्या इसको देखते ही रहेंगे? आपका दिल नहीं इनको प्यार करने को? आइए ना जी भरकर इनको प्यार कीजिए आआआआआआआहhhhhhhhhhhhhhh आइए ना क्यों तड़पा रहे हैं।’
फिर मैं उनकी पिक से बोली ‘सिर्फ इनको ही देखना चाहते हैं या फिर और भी देखना चाहोगे!.. तो वो भी दिखा देती हूँ..’ और फिर मैंने अपनी पूरी नाइटी खोल दी और अपनी दोनों चुचियों को पकड़कर योगेश जी की पिक के पास करते बोली, ‘देखो.. जी भरके देख लो इन्हें.. यही देखना चाहते थे ना आप.. तो दिखा दिया मैंने आपको.. अब खुश..? नटखट।
वैसे एक बात कहूँ आप तो उनको पिछले 6 महीनों से देख रहे हो तो फिर आप शॉपिंग मॉल में सेल्स गर्ल के सामने क्यों घूर रहे थे?
अच्छा मैं समझ गई आप मेरे साथ सुहागरात मनाने के लिए। जब सुहागरात होती है तो पहली बार ही देखा जाता है। सुहागरात से पहले तो घूरा ही जाता है। तो अब देखो दिल खोलकर मेरे राजा योगेश जी।

अब खुश? या फिर और कुछ देखना चाहते तो बता दो फिर मत कहना कि मैंने दिखाया नहीं।’ और फिर खुद ही बोली ‘बड़े शैतान हो। वो भी देखना चाहते हैं तो मेरी टाँगों के बीच ही।’ और खुद ही उनकी पिक के सामने अपनी दोनों टाँगों को खोल दिया तो अपनी कमर को गोल-गोल चलाने लगी और बोली ‘लीजिए देख लिए मेरे इस खजाने को भी।’
मैं खुद ही योगेश जी मान की बात करने लगी थी और अपनी चुत पर पैंटी के ऊपर से ही हाथ फेरते बोली ‘हाय क्या कह रहे हैं इसको भी हटा दूँ? उई माँ नहीं नहीं मैं इसको नहीं उतार सकती। मुझे शर्म आती है। आप ही उतार दीजिए ना। मैं भी देखती हूँ कब तक इसको नहीं उतारते। एक बार ऐसे सामने आ गई ना तो देखना फिर आप मुझे पहनने भी नहीं देंगे।
मैं; लीजिए आज मैं खुद ही उतार देती हूँ।’ और मैंने खुद ही अपनी पैंटी उतारकर फेंक दी और अपनी नंगी चुत को अपने हाथ से सहलाने लगी। मैं इतनी गरम हो गई थी कि अपनी उँगली को अपनी चुत में गचा-गच अंदर-बाहर करते हुए बड़बड़ाने लगी थी।

आआआहhhhhhhhhhhhhhhh योगेश जी ऐसे ही ऐसे ही पूरा अंदर तक डालिए आआआहhhhhhhhhhhhhhhhhhhh आहhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

मेरे दिलो-दिमाग पर उस समय अपने योगेश जी की मर्दानगी ही छा रही थी जिस से मेरी उँगलियाँ तेजी से अंदर-बाहर हो रही थीं और अपनी उँगलियाँ अपनी चुत में अंदर-बाहर करते कब मेरी चुत ने पानी छोड़ दिया मुझे पता ही नहीं चला। खैर जो भी था मैं अब उसके लिए भी तैयार थी क्योंकि मैं जानती थी कि योगेश जी भले ही मुझे पिछले 6 महीनों से लगातार चोद रहे हैं लेकिन कल वे मेरे साथ सुहागरात मनाएँगे और इस सुहागरात में पहली बार चोदा जाता है। सब कुछ पहली बार होता है इसलिए मैंने सोच लिया था अभी तक योगेश जी ने मुझे नहीं चोदा है। जो भी होगा पहली बार होगा।

अब मम्मी चुप हुई थीं तो आंटी बोलीं –

आंटी : “वर्षा चली। अच्छा हुआ तू बेशरम बन गई और तूने मुझसे क्या कहा था उस दिन दीदी पहली बार...”

मम्मी : “सॉरी दीदी। पता नहीं मैं डर गई थी इसलिए झूठ बोला। हमारे बीच पिछले 6 महीनों से चल रहा है।”

आंटी : “ठीक है मैं कल शाम को 3 बजे आ जाऊँगी तेरे मेहंदी लगाने।”

मम्मी : “नहीं दीदी आप मत आना बल्कि किसी लड़की को भेज देना।”

आंटी : “देखती हूँ।”

फिर दोनों की बातें बंद हो गईं।

फिर 8 am बजे पापा आए और आते ही जल्दी करने लगे और दादी को लेकर 9 बजे निकल गए। अब घर पे मैं-मम्मी थे।
मैंने पापा-दादी के जाने के बाद मम्मी को एक पैकेट दिया जिसे मैं अंकल के कहने पे खरीद के लाया था।

मम्मी : “क्या है इसमें?”

मैं : “मम्मी नहीं पता। आप खोलकर देखो। अंकल ने दिया है। बोले बेटा मम्मी को दे देना।”

मम्मी : मम्मी ने मेरे सामने खोला तो उसमें एक शेविंग किट थी सब कुछ और वीट थी।

मम्मी चिल्लाते हुए –

मम्मी : “बेटा देख योगेश जी की हिम्मत! उन्होंने बेशरमी की हद पार दी है और क्या भेजा?”

मैं : “मम्मी इसमें क्या गलत है? मम्मी मैं जानता हूँ जैसे जेंट्स यूज करते हैं वैसे ही लेडीज भी करती हैं।”

मम्मी : “बेटा तू सही कह रहा है लेकिन वे एक गैर मर्द होकर किसी शादीशुदा को ऐसे भेज रहे हैं और आज उनका मैसेज भी आया था। वे बहुत गलत कमेंट्स करते हैं मुझे।”

मैं : “मम्मी मैंने आपसे कितनी बार कहा है आप अंकल का प्रपोजल एक्सेप्ट कर लो। अंकल आपसे बहुत प्यार करते हैं।”

मम्मी : “मैंने भी तुझसे कई बार कहा है मैं उनके साथ हमबिस्तर नहीं हो सकती हूँ और तू कैसे बेटा है जो अपनी मम्मी को किसी और के साथ सुलाना चाहता है?”

मैं : “मम्मी मैं जानता हूँ पापा आपको बिल्कुल भी प्यार नहीं करते हैं और आपको भी एक मर्द की जरूरत है और अंकल आपको बहुत प्यार करेंगे।”

मम्मी : “चुप।”

मैं : “मम्मी प्लीज आपको मेरी कसम आप ये सब रख लो।”

मम्मी : “अब तूने कसम से दी इसलिए रख रही हूँ।”

मैं : “मम्मी आप उनको यूज करना।”

मम्मी : “बेटा मेरे पास है और तू तो कुछ शर्म कर। क्या माँ से ऐसे बात करते हैं?”

मैं : “सॉरी मम्मी पर आपने कहा था आप मुझसे दोस्ती की है।”

मम्मी : “हाँ बेटा ठीक है पर यूज नहीं करूँगी। मेरे पास ऑलरेडी है।”

मैं : “प्लीज यूज कर लेना।”

मम्मी : मुस्कुराते हुए मेरी तरफ देखकर “ठीक है कर लूँगी।” और बहुत ज्यादा शर्माने लगीं।

मैं : “मम्मी आप शर्मा क्यों रही हो?”

मम्मी : “बेटा शर्म तो आएगी जब एक बेटा मम्मी से इस तरह की बातें करेगा और किसी गैर मर्द के द्वारा भेजे गए।” और इतना बोलकर बोलीं “अब इन सबको रूम में रख आ।” और मैं सामान मम्मी के बेड पे रख आया और तभी मम्मी के सेल पे कॉल आया तो मम्मी बोलीं “देख उस योगेश का ही फोन। बेशरम कॉल कर रहा है।” तो मम्मी कॉल रिसीव करतीं उससे पहले ही मैं वहाँ से अपने रूम में आ गया और फिर थोड़ी देर बाद मम्मी ने मुझे आवाज देकर बुलाया और मैं गया तो मम्मी बोलीं “वे बोल रहे थे वे आ रहे हैं मुझे कंप्यूटर सिखाने। तू उनसे बोल वे न आएँ।”

मैं : “क्यों मम्मी क्यों न बोलूँ? ये तो अच्छी बात है वे आपको कंप्यूटर सिखाने आ रहे हैं और मम्मी क्या आपने अंकल को बता दिया पापा-दादी चले गए इस बारे में?”

मम्मी : “बेटा वो गलती से मुँह से निकल गया और तू जाकर मेरे मोबाइल को चार्ज पे लगा दे।” और मैं मम्मी के मोबाइल को लेकर अपने रूम में आ गया और अंकल-मम्मी की रिकॉर्डिंग सुनने लगा।

मम्मी : “हैलो जी।”

अंकल : “साथ में कौन है?”

मम्मी : “अकेली हूँ।”

अंकल : “क्या तेरी सास और नामर्द?”

मम्मी : “दोनों चले गए।”

अंकल : “अंकुश कहाँ है?”

मम्मी : “जब आपका कॉल आया तो वे अपने रूम में चले गए ताकि मैं आपसे बात कर सकूँ।”

अंकल : “ओह्ह कैसी है मेरी रांड?”

मम्मी : “अच्छी है आपकी रांड।”

अंकल : “और तेरी चुत?”

मम्मी : “मेरी चुत को आपके लंड की याद आ रही है।”

अंकल : “आज रात को फाड़ूँगा।”

मम्मी : “फाड़ लेना जितना मन करे इन 5 दिनों में।”

अंकल : “अंकुश ने सेविंग्स किट दी?”

मम्मी : “हाँ दी पर मैंने नखरे किए।”

अंकल : “रांड तू बहुत नखरे करती है।”

मम्मी : “क्या करूँ बेटा हीरा। आप भी उससे क्यों भिजवाई?”

अंकल : “यही तो बात है रांड। उसे भी पता चलना चाहिए। आज तेरी चुत की झाँटें साफ करूँगा।”

मम्मी : “वो तो आप उसे वैसे भी बता देते हो।”

अंकल : “हाँ तो आ जाऊँ तेरी झाँटें साफ करने?”

मम्मी : “आ जाओ लेकिन उसे घर से बाहर भेज देना।”

अंकल : “नहीं भेजूँगा।”

मम्मी : “प्लीज मुझे शर्म आएगी।”

अंकल : “मैं उससे बोल दूँगा रूम में जाकर स्टडी करे।”

मम्मी : “नहीं उसे बाहर भेज देना।”

अंकल : “नहीं मैं 20 मिनट में आ रहा हूँ।” और कॉल कट हो गया। फिर मैंने मम्मी का मोबाइल चार्ज पे लगाया और रूम में ही रहा और रूम से देख रहा था मम्मी सोफे पे बैठकर मुस्कुरा रही थीं।

फिर कुछ ही देर में घर के पीछे वाली घंटी बजी तो मम्मी उठीं और अपनी कमर मटकाती हुई गेट खोलने गईं। गेट खोला तो सामने अंकल थे और अंकल से लिपट गईं और दोनों एक-दूसरे को किस करने लगे। थोड़ी देर बाद मम्मी को होश आया तो अंकल से अलग हुईं और “अंकुश रूम में है” और फिर पीछे वाला गेट बंद करके दोनों सोफे पे बैठ गए और बातें करने लगे तो मैं भी रूम से निकला और अंकल से मिला।

अंकल : “बेटा कैसे हो?”

मैं : “ठीक हूँ अंकल। आप कैसे हैं?”

अंकल : “बेटा मैं भी ठीक हूँ। वो कल तुमने बताया था ना तुम्हारी दादी और पापा बाहर गए तो सोचा आकर वर्षा को कंप्यूटर सिखा दूँ इसलिए आ गया।”

मैं : “जी अंकल अच्छा। क्या आप मम्मी को कंप्यूटर सिखा दो?”

मम्मी : “नहीं मुझसे नहीं सीखना। अभी बहुत काम है किचन का। खाना बनाना है।”

मैं : “मम्मी खाना मैं ऑर्डर कर दूँगा।”

मम्मी : “फिर भी बेटा बहुत काम है।”

अंकल : “वर्षा देखो वो कितना ख्याल रखता है उसकी मम्मी का और तुम हो कि...”

मम्मी : “लेकिन...”

मैं : “मम्मी आप जाइए।”

मम्मी : “मैं नहीं जा रही हूँ।”

मैं : “अंकल आप मम्मी को ले जाइए हाथ पकड़कर।”

फिर
अंकल ने मेरे सामने ही धीमी आवाज में मम्मी से कुछ कहा।

अंकल : “बाल साफ करना है।”

तो मम्मी शर्माने लगीं और अपना सिर अपने घुटनों में घुसा लिया। शायद मम्मी ने सोचा मैंने सुन लिया।
फिर मैंने अनजान बनते हुए पूछा “अंकल आपने क्या कहा? मम्मी शर्मा रही हैं।”

अंकल : “तूने नहीं सुना क्या?”

मैं : “अंकल आपने इतना धीमा बोला तो सुन नहीं पाया।”
फिर मम्मी एकदम से अपना सिर ऊपर उठाकर बोलीं “क्या तूने नहीं सुना?”

मैं : “नहीं मम्मी।”

मम्मी : “बोल रहे थे कंप्यूटर सीखने चलो।”

मैं : “तो मम्मी इसमें शर्माने की क्या बात? जाइए।”

फिर अंकल ने मेरे सामने ही मम्मी का हाथ पकड़ा और रूम में खींचकर ले गए।
मम्मी : “नहीं नहीं छोड़िए मेरा हाथ” कहती हुई अंकल के साथ रूम में चली गईं।
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#28
**अपडेट 26**

फिर अंकल ने मम्मी को घुमाकर गजरा मम्मी के बालों में लगा दिया और मम्मी की साड़ी को पकड़ा और खींचने लगे और मम्मी की साड़ी उतार दी और अब मम्मी ब्लाउज-पेटीकोट में थीं।

फिर अंकल ने मम्मी को किस करने लगे और दोनों कुछ करने लगे। फिर अंकल ने मम्मी के ब्लाउज के हुक खोले और फिर ब्रा और इसी तरह मम्मी का पेटीकोट और पैंटी और मम्मी से पूछा “किट कहाँ है?” मम्मी ने कहा “सामने बेड पे रखी है।” और अंकल ने किट उठाई और मम्मी को भी गोद में उठाया और बाथरूम में ले गए। फिर मैं भी बाथरूम की खिड़की पे गया।

तो देखा मम्मी अंकल की गोद में थीं और मम्मी हँस रही थीं “प्लीज नीचे उतारो।” और अंकल ने मम्मी को नीचे उतारा तो मम्मी ने कहा “बाहर जाओ।”

अंकल : “तेरी चुत के बाल साफ करने हैं।”

मम्मी : “मैं खुद कर लूँगी।”

अंकल : “नहीं मैं करूँगा।” और अंकल ने मम्मी से कहा “नीचे लेट।” और
मम्मी नीचे फर्श पे लेट गईं।

फिर मम्मी कहने लगीं “आप बाहर जाओ। अंकुश से मुझे शर्म आएगी। आप बाहर जाओ।”

अंकल : “नहीं चुपचाप लेटी रह।” और अंकल ने पहले मम्मी की चुत पे क्रीम लगाई और हाथ से मालिश करने लगे।
और थोड़ी देर बाद अंकल ने मम्मी की चुत पे फोम लगाया और रेजर से बाल साफ करने लगे।

मम्मी : “धीरे प्लीज। बाल खिंच रहे हैं।”

अंकल : “धीरे ही रेजर चला रहा हूँ मेरी रानी।”

और धीरे-धीरे अंकल ने मम्मी की चुत के बाल साफ कर दिए और मम्मी की चुत एकदम चिकनी हो गई।

फिर अंकल ने कहा “तेरे आर्म्स के बाल भी साफ कर दूँ?”

मम्मी : “नहीं मैं कर लूँगी।”

अंकल : “नहीं मैं करूँगा।” और फिर मम्मी ने अपने हाथ ऊपर किए जिससे मम्मी की कंख खुल गईं और अंकल ने कंख के बाल भी साफ कर दिए। फिर मम्मी ने कहा “मैं आपके भी साफ कर दूँ?”

अंकल : “नहीं मैं तेरे बेटे से करवाऊँगा अपने बाल साफ।”

मम्मी : “नहीं उससे मत करवाइए। वो मेरा बेटा है।”

अंकल : “उसी से करवाऊँगा ताकि मेरे बाल तेरी चुत पे न चुभें।”

मम्मी : “प्लीज मैं कर देती हूँ।”

अंकल : “नहीं और तू चुत पे क्रीम लगा लेना जिससे तेरी चुत एकदम कुँवारी बन जाए।”

मम्मी : “हाँ लगा लूँगी।”

अंकल : “और अंकुश से तू ही बोलना वो मेरे लंड के बाल साफ करे।”

मम्मी : “नो मैं नहीं बोलूँगी प्लीज।”

अंकल : “ठीक है।” और फिर अंकल ने कहा “चलो बाहर जाता हूँ। तू नहाकर बाहर आ जाना और मैं तेरे लिए एक ड्रेस भेज रहा हूँ अंकुश से। तू उसी को पहनना।”

मम्मी : “कौन सी वाली?”

अंकल : “वो रेड वाली कल की थी।”

मम्मी : “नहीं वो बहुत छोटी है। उसे पहनने में मुझे शर्म आएगी अंकुश के सामने।”

अंकल : “चुप मादरचोद रंडी।” और अंकल बाहर आ गए और मैं भी अंकल के पास हॉल में सोफे पे आकर बैठा।

अंकल : “चल तुझे एक ड्रेस देता हूँ। आज वर्षा को वो ही पहनाना।”

मैं : “अंकल क्या आप मम्मी को नहीं देखोगे उस ड्रेस में?”

अंकल : “हाँ बेटा। एक काम कर तू जाकर ले आ मेरे बेड पे रखी है।” और मैं अंकल के घर गया और दो पैकेट जो बेड पे रखे थे ले आया।

अंकल ने कहा “तू तो दोनों उठा लाया। कोई बात नहीं।” और अंकल ने मुझे एक पैकेट दिया और एक अपने पास रख लिया और बोले “जाकर उसे तेरी मम्मी को दे और उससे तू ही कहेगा तो वो पहन लेगी नहीं तो वो नहीं पहनेगी। ये तेरा ही काम है।”

और मैं मम्मी के रूम में गया तो मम्मी बाथरूम से नहाकर निकल रही थीं और मम्मी ने एक टॉवल लपेट रखा था।

मम्मी मुझे देखकर स्माइल करने लगीं।

मैं : “मम्मी आप नहाई क्यों?”

मम्मी : “बेटा वो मन किया तो नहा ली।”

और बोलीं –

मम्मी : “बेटा ये क्या लाया है?”

मैं : “मम्मी आपके लिए एक ड्रेस लाया हूँ। आप प्लीज इसे पहन लेना।”

मम्मी : “बेटा ये ड्रेस तू लाया है या योगेश जी भिजवाई हैं?”

मैं : “मम्मी वो अंकल ही लाए हैं पर प्लीज मम्मी आप उसे पहन लेना।”

मम्मी : “नहीं बेटा वो आजकल कुछ ज्यादा ही लिमिट क्रॉस करने लगे हैं। उन्होंने आज भी मेरे साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की। बेटा मैं ये ड्रेस नहीं पहनूँगी।”

मैं : “प्लीज मम्मी एक बार देख तो लो।”

मम्मी ने पैकेट लिया और खोलकर ड्रेस निकाली तो चिल्लाने लगीं “बेटा देख ये कैसी ड्रेस है!”

मैं : “मम्मी प्लीज इसे पहन लो।”

मम्मी : “नहीं बेटा ये बहुत छोटी है।”

मैं : “प्लीज मम्मी एक बार पहन के अंकल को दिखा दो।”

मम्मी : “बेटा तू समझता क्यों नहीं? क्यों बार-बार ऐसी जिद करता है? क्यों तू मुझे एक गैर मर्द के साथ नाजायज संबंध के लिए बोलता है?”

मैं : “मम्मी अंकल कुछ नहीं करेंगे।”

मम्मी : “बेटा वो एक मर्द हैं और मैं इस छोटी सी ड्रेस में जाऊँगी तो उनकी नीयत मेरे प्रति खराब हो जाएगी और मैं ये नहीं चाहती। मैं उसे नहीं पहनूँगी।”

मैं : “मम्मी मैं बाहर जा रहा हूँ। आपको मेरी कसम है आप उसे ही पहनकर आना।”

और मम्मी पीछे से आवाज देने लगीं “बेटा रुक! कसम मत दे।” और मैं बाहर आ गया और अंकल से बोला “मम्मी आएंगी तो देखना।” फिर 10 मिनट के बाद मम्मी रूम से निकलीं।

और गुस्से में मेरे और अंकल के पास आकर मुझसे बोलीं “बेटा कसम मत दिया कर। देख तूने मुझे कितनी छोटी ड्रेस पहनाई है। अब तो देख लिया तूने इस ड्रेस में।”

मैं : “मम्मी आप इस ड्रेस में बहुत सुंदर लग रही हो।”

मम्मी : “नहीं बेटा मुझे बहुत शर्म आ रही है। अब मैं इस ड्रेस में ज्यादा देर नहीं रह सकती।”

मैं : “मम्मी प्लीज बैठ जाइए।”

मम्मी : “बेटा ये ड्रेस इतनी छोटी है इसमें बैठ पाना मुश्किल है। मैं चेंज करके आती हूँ।”

अंकल बीच में बोले –

अंकल : “ठीक है वर्षा ये लो उसे पहन लेना।” अंकल ने मम्मी को दूसरा पैकेट दिया लेकिन मम्मी –

मम्मी : “नहीं मैं दूसरी ड्रेस पहन लूँगी। मेरे पास है।”

मैं : “मम्मी ले लो। अंकल लाए हैं।”

मम्मी ने मुझे देखते हुए अंकल से दूसरा पैकेट लिया और रूम में चली गईं और 10 मिनट के बाद निकलीं।

मम्मी ने इस वक्त एक रेड कलर की साड़ी और ब्लैक ब्लाउज पहन रखा था। मम्मी ने मॉडर्न साड़ी ही पहनी थी जिसमें मेरी मम्मी की स्किन काफी नजर आ रही थी।

मम्मी चलती हुई हमारे पास आईं मुस्कुराते हुए और बोलीं “अब तो मैंने ये पहन ली।”

अंकल : “वॉव वर्षा वेरी क्यूट एंड ब्यूटीफुल। आप इस साड़ी में बहुत ही सुंदर लग रही हो। सॉरी सॉरी ये साड़ी आप पर बहुत ही सुंदर लग रही हो। क्यों बेटा?”

मैं : “हाँ अंकल मम्मी पे ये साड़ी बहुत ही सुंदर लग रही है।”

मम्मी : “ज्यादा तारीफ मत करो।”

मैं : “मम्मी जो सच है वही बोला।”

मम्मी : “अब बैकवॉश बंद कर तेरी।”

अंकल : “वर्षा उस बेचारे को डाँट रही हो? उसने तो सच बोला है।”

मम्मी : “योगेश जी आप भी...”

मैं : “मम्मी आप कंप्यूटर सीखोगी नहीं आज? अब तो 5 दिन तक दादी-पापा भी नहीं हैं।”

मम्मी : “मुझे नहीं सीखना।”

अंकल : “लेकिन मैं तो सिखाऊँगा और वो भी अपने घर ले जाकर।”

मम्मी : “मैं नहीं जा रही आपके घर।”

मैं : “क्या प्रॉब्लम है मम्मी और आप 5 दिन अंकल के घर ही रहना और कंप्यूटर सीखना।”

मम्मी : “बेटा मैं तुझसे कहा कई बार ये मेरे साथ जबरदस्ती करने की कोशिश करते हैं।”

मैं : “हाँ मम्मी और अंकल ने भी कहा है वो आपसे प्यार करते हैं।”

अंकल : “हाँ वर्षा मैं तुमसे प्यार करता हूँ।”

मम्मी : “मैं आप दोनों को समझा-समझा कर थक चुकी हूँ।”

अंकल : “वर्षा मैं तुम्हारे साथ कभी जबरदस्ती नहीं करूँगा। जिस दिन तुम खुद मेरे प्यार को एक्सेप्ट करोगी उसी दिन का इंतजार करूँगा।”

मम्मी : “वो दिन कभी नहीं आएगा।” और हँसने लगीं।

मैं : “मम्मी वो दिन जल्द ही आएगा।”

मम्मी : “नहीं आएगा।”

मैं : “आएगा।”

अंकल : “लड़ो मत माँ-बेटा। अब मैं चलता हूँ।”

मैं : “अंकल बैठिए ना थोड़ी देर और। अंकल कल आपसे शर्ट से पसीने की गंध आ रही थी।”

अंकल : “बेटा वो अनवांटेड बाल बढ़ गए हैं कंख में।”

मैं : “तो अंकल आप साफ क्यों नहीं करते?”

अंकल : “बेटा सलून की दुकान पे कल जाऊँगा तो साफ करा लूँगा।”

मैं : “आप खुद क्यों नहीं करते?”

अंकल : “बेटा मैंने कभी किए नहीं।”

मैं : “अंकल मैं कर देता हूँ।”

अंकल ने मम्मी की तरफ देखा।

मम्मी : “बेटा ये गंदा काम तू मत कर।”

मैं : “मम्मी इसमें क्या गलत है? मैं तो अंकल की हेल्प कर रहा हूँ और कंख के बाल साफ करना कोई गलत नहीं है।”

मम्मी : “ठीक है।”

मैं : “मम्मी पापा की शेविंग किट किधर है?”

मम्मी : “बेटा बाथरूम में है।”

मैं : “अंकल आप बैठिए मैं यहीं लाता हूँ।”

मम्मी : “नहीं बेटा उन्हें बाथरूम में ही ले जा। नहीं तो यहाँ हॉल में बाल हो जाएँगे।”

तो अंकल मम्मी को स्माइल देते हुए उठे और मैं-अंकल मम्मी के बाथरूम में आते हैं और फिर अंकल ने कहा “बेटा रिकॉर्डिंग स्टार्ट कर। तेरी मम्मी को सिखाऊँगा।” और मैंने कैमरे से वीडियो बनाना चालू किया अंकल के मोबाइल से और फिर मैंने ही अंकल के लंड के बाल साफ किए और कंख के भी। फिर आधे घंटे बाद अंकल और मैं बाथरूम से निकलने लगे तो अंकल ने मम्मी को वीडियो सेंड कर दिया। फिर मैं-अंकल जब बेडरूम से बाहर हॉल में आए तो मम्मी वीडियो देख रही थीं और हँस रही थीं।

मैं : “मम्मी क्या देख रही हो?”

अंकल : “बेटा मैंने तेरी मम्मी को एक मूवी सेंड की है। वो देख रही हैं।” मैं समझा अंकल ने मैंने उनके लंड के बाल साफ किए इसका वीडियो है।

मम्मी : “बेटा वो एक कॉमेडी वीडियो है जिसको देखकर हँसी आ गई।”

मैं : “मम्मी मुझे भी दिखाई।”

मम्मी : “नहीं नहीं बेटा ये सिर्फ मैं देखूँगी।” और फिर अंकल ने कहा “बेटा जरा मुझे वर्षा से अकेले में 2 मिनट बात करनी है। तू रूम में जा।”

मम्मी : “क्या बात करनी है? अंकुश के सामने ही करो।”

लेकिन मैं रूम में चला गया। मम्मी ने मुझे रोका लेकिन मैं नहीं रुका और मेरे रूम में जाते ही अंकल ने मम्मी को अपने गले से लगा लिया और दोनों किस करने लगे।

मम्मी : “आप भी क्या करते हो? उसे रूम में क्यों भेजा? मुझे शर्म आती है।”

अंकल : “जब तू शर्माती है तो तेरी शर्म को देखकर मुझे मजा आता है।
और हाँ आज ब्यूटी पार्लर जाना है।”

मम्मी : “हाँ पहले मैंने मेहंदी वाली को बोला है। उसके बाद शाम को ब्यूटी पार्लर जाऊँगी लेकिन आप ही अंकुश से कहना वो मुझे ले जाएँ।”

अंकल : “मैं बोल दूँगा और हाँ आज मैंने रूम को सजा दिया है। आज से 5 दिन तू मेरे ही घर में रहेगी।”

मम्मी : “हाँ और आप अंकुश...”

अंकल : “मैं सब संभाल लूँगा।” और फिर किस करके अंकल चले गए और मम्मी ने आवाज देकर मुझे बुलाया। मैं जब हॉल में आया तो मम्मी ने कहा “बेटा तू तो समझदार है फिर भी ऐसी जिद क्यों करता है?”

मैं : “मम्मी अंकल आपसे बहुत प्यार करते हैं इसलिए वो आपको उस ड्रेस में देखना चाहते थे इसलिए।”

मैं : “मम्मी अंकल बहुत अच्छे हैं। आप प्लीज अंकल के प्यार को एक्सेप्ट कर लो।”

मम्मी : “मैं नहीं करूँगी और तू ऐसी जिद मत किया कर।”

मैं : “मम्मी आप आज मेहंदी लगाओगी?”

मम्मी : “क्यों? आज क्या स्पेशल है?”

मैं : “मम्मी वैसे ही आप लगा लो मेहंदी।”

मम्मी : “नहीं।”

मैं : “प्लीज लगा लो।”

मम्मी : “लेकिन लगाएगा कौन?”

मैं : “ब्यूटी पार्लर वाली लगा देगी और आपको अच्छे से मेकअप भी कर देगी।”

मम्मी : “नहीं फालतू खर्च नहीं करते।”

मैं : “मम्मी आप रेडी हो जाओ। मैं कॉल करता हूँ ब्यूटी पार्लर वाली को।” और मैंने कॉल कर दिया।

मम्मी ने कहा “क्या जरूरत थी?”

और फिर आधे घंटे बाद एक लड़की आई और मैंने उसे मम्मी को मेहंदी लगाने को बोला और वो मम्मी को मेहंदी लगाने के लिए रूम में ले गई और साथ में भी रूम में गया। मैंने उस लड़की से पहले ही बोल दिया मम्मी के बूब्स पे भी लगानी है। इस लड़की ने मम्मी से कपड़े उतारने को कहा तो मम्मी ने कहा “क्यों? मेहंदी तो हाथों में लगेगी तो कपड़े क्यों उतारूँ?”

गर्ल : “मैम आपके बेटे ने कहा है।”

मैं : “मम्मी प्लीज आप एक दुल्हन की तरह लगवाओ।”

मम्मी : “नहीं तू बहुत जिद करने लगा है।”

मैं : “मम्मी आप लगवाइए और मैं बाहर जा रहा हूँ।” और मैंने उस लड़की के कान में कहा “मम्मी के साथ पापा का नाम योगेश लिखना।”

क्योंकि मैं उस लड़की को नहीं बताना चाहता था कि योगेश मेरे पापा नहीं हैं।
और रूम से निकल आया।

लड़की : “लगता है आज आपकी एनिवर्सरी है।”

मम्मी : “नहीं पर मेरे हसबैंड चाहते हैं।”

लड़की : “तो आप आपके बेटे के सामने तो मना कर रही थीं।”

मम्मी : “वो बेटा है मेरा इसलिए।
और आप मेरे पूरे बदन को सजा दो। आज मुझे दुल्हन बना दो और मेरे बदन पे मेरे हसबैंड योगेश का नाम लिखना मेरे बूब्स पे और मेरी चुत पे।”

लड़की : “आज मैं आपको दुल्हन ही बनाऊँगी।”

और फिर मैं अंकल के घर गया तो अंकल ने पूरे घर को अच्छे से डेकोरेशन करवा रहे थे।

मैंने कहा “क्या अंकल?”

अंकल : “आज मैं तेरी मम्मी के साथ इस घर में सुहागरात मनाऊँगा और ले जोड़ा उसे आज पहनकर वर्षा को भेजना।”

और फिर मैं पूरे 4 घंटे के बाद घर वापस आया तो मैंने मम्मी का गेट बजाया तो मम्मी ने गेट खोला। मम्मी के मेहंदी लग चुकी थी और वो लड़की भी वहाँ थी।

मैंने मम्मी को वो जोड़ा दिया तो मम्मी –

मम्मी : “ये क्या है?”

मैं : “लड़की से मैम मुझे मम्मी से बात करनी है। आप प्लीज 5 मिनट हॉल में जाइए।”

और लड़की हॉल में चली गई।

मैं : “मम्मी ये अंकल ने दिया है। आप उसे पहन लीजिए।”

मम्मी : मम्मी ने मुझे एक चाटा मारा और बोलीं “नालायक बेशरम! तू मुझे इस जोड़े को पहनाकर एक गैर मर्द के साथ सुलाना चाहता है?”

मैं : “मम्मी अंकल आपसे बहुत प्यार करते हैं और वो आपको इस जोड़े में देखना चाहते हैं और वो आपके साथ कोई जबरदस्ती नहीं करेंगे। जो भी आपकी मर्जी से।”

मम्मी : “चुप। मैं उसे नहीं पहनूँगी।”

मैं : “मम्मी आपको मेरी कसम है आप मेरा मरहुआ मुँह देखोगी यदि आपने उसे नहीं पहना और आप आज रात को इसे पहनकर अंकल के घर जाओगी और अंकल ने वादा किया है वो आपके साथ कुछ गलत नहीं करेंगे और जो भी होगा आपकी मर्जी से होगा।”

मम्मी : “बेटा तू ही तो मेरा सहारा है मेरे लाल। मुझे कसम क्यों देता है और बेटा मैं उनके पास गई तो मैं बहक जाऊँगी और वो मुझे नंगी करके...”

मैं : “मम्मी अंकल ने कहा आप बहक जाओगी तो भी वो आपके साथ कुछ नहीं करेंगे जब तक मैं परमिशन नहीं दूँगा।”

मम्मी : “बेटा मैं जानती हूँ तू उन्हें परमिशन जरूर देगा।”

मैं : “नहीं मम्मी और अंकल आज आपके साथ कुछ नहीं करेंगे। सिर्फ वो आपको दुल्हन के रूप में देखना चाहते हैं। प्लीज मम्मी।”

मम्मी : “तूने कसम ही दे दी इसलिए माननी पड़ेगी।” और मम्मी ने उस लड़की को रूम में बुलाया और मैं बाहर आ गया और एक घंटे बाद करीबन 7 pm को वो लड़की रूम से निकली और ओके कहा और फिर मैंने उसे 5000 रुपये दिए और वो चली गई।

फिर मैं रूम में गया तो देखा मम्मी एकदम दुल्हन लग रही हैं।

मैं : “मम्मी वॉव वेरी ब्यूटीफुल क्यूट मम्मी।”

मम्मी : “बेटा ये सब गलत है। यदि मैं आज योगेश जी के पास गई तो मैं...”

मैं : “मम्मी कुछ नहीं होगा। प्लीज मम्मी वो सिर्फ आपको दुल्हन के रूप में देखना चाहते हैं।”

मैं : “मम्मी आपने ये जोड़ा क्यों नहीं पहना?”

मम्मी : “बेटा क्या मैं इस साड़ी में अच्छी नहीं लग रही हूँ?”

मैं : “मम्मी आप इस साड़ी में बहुत सुंदर लग रही हो लेकिन अंकल जो लहंगा लाए...”

मम्मी : “इसे उनके ही घर पे पहन लूँगी यदि वो जिद करेंगे तो।”

मैं : “ओके मम्मी और चलिए मैं आपको लेकर चलता हूँ।”

मम्मी : “रहने दे तू यहीं रुक। क्या करने जाएगा मेरे साथ?”

मैं : “मम्मी आपको छोड़ने।”

मम्मी : “मैं खुद चली जाऊँगी और वहाँ जाकर क्या देखेगा योगेश जी मुझे कैसे नंगी करेंगे ये देखेगा क्या?”

मैं : “मम्मी आप गलत समझ रही हो।”

मम्मी : “तो क्या समझूँ बेटा जब तू मुझे दुल्हन की तरह सजाकर एक गैर मर्द के पास भेज रहा है तो मुझे क्या पूरी रात आरती उतारेगा?”

मैं : “नहीं मम्मी।”

मम्मी : “तो तू ही सोच क्या करेगा पूरी रात? मुझे नंगी ही तो करेगा और तू भी तो यही चाहता है। पिछले 6 महीनों से तू कितनी बार कह चुका है अंकल का प्यार एक्सेप्ट कर लो और आज तो तू मुझे दुल्हन बनाकर भेज रहा है तो क्या वो मुझे नंगी नहीं करेगा?”

मैं : “मम्मी मैं आपके साथ रहूँगा। कुछ नहीं होने दूँगा।”

मम्मी : “बेटा जब तू साथ होगा तो मुझे और जलील होना पड़ेगा इसलिए तू यहीं रुक।”

मैं : “मम्मी अंकल कुछ नहीं करेंगे।”

मम्मी : “चुप। मैं जा रही हूँ।”
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#29
Meri shaadi shuda bahan. Is stories ko update kyu nahi a rahi hai bohot achi stories hai I like this thered please continue that stories
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#30
**अपडेट 27**

मम्मी : “तो क्या समझूँ बेटा जब तू मुझे दुल्हन की तरह सजाकर एक गैर मर्द के पास भेज रहा है तो मुझे क्या पूरी रात आरती उतारेगा?”

मैं : “नहीं मम्मी।”

मम्मी : “तो तू ही सोच क्या करेगा पूरी रात? मुझे नंगी ही तो करेगा और तू भी तो यही चाहता है। पिछले 6 महीनों से तू कितनी बार कह चुका है अंकल का प्यार एक्सेप्ट कर लो और आज तो तू मुझे दुल्हन बनाकर भेज रहा है तो क्या वो मुझे नंगी नहीं करेगा?”

मैं : “मम्मी मैं आपके साथ रहूँगा। कुछ नहीं होने दूँगा।”

मम्मी : “बेटा जब तू साथ होगा तो मुझे और जलील होना पड़ेगा इसलिए तू यहीं रुक।”

मैं : “मम्मी अंकल कुछ नहीं करेंगे।”

मम्मी : “चुप। मैं जा रही हूँ।”

मैं : “मम्मी प्लीज आप एक बार ये जोड़ा पहन लो। अंकल कुछ नहीं करेंगे।”

मम्मी : “बेटा मैं जानती हूँ तू बहुत जिद्दी है और आज तू मुझे योगेश जी के साथ हमबिस्तर करवा के ही रहेगा और मैं पिछले 6 महीनों से अपने बदन को योगेश जी से बचाती आ रही हूँ लेकिन आज नहीं बचा पाऊँगी क्योंकि तू खुद नहीं चाहता मैं योगेश जी से बच जाऊँ।”

मैं : “मम्मी अंकल कुछ नहीं करेंगे। वो सिर्फ आपकी दुल्हन के रूप में देखेंगे।”

मम्मी : “क्या बेटा? ऐसा हो सकता है जब एक अकेली औरत साथ में पूरी रात रहे और एक मर्द उसे कुछ न करे?”

मैं : “प्लीज मम्मी।”

मम्मी : “मैं इसे योगेश जी घर जाकर पहन लूँगी और उसे मैं यहाँ से पहन कर जाऊँगी तो कोई देख लेगा तो क्या सोचेगा इसलिए अभी मैं जाती हूँ पीछे वाले गेट से।”

मैं : “मम्मी मैं चलूँ?”

मम्मी : “क्या अपनी मम्मी को नंगी देखने जाएगा कैसे योगेश जी मुझे नंगी करेंगे और पूरी रात मेरे साथ क्या-क्या करेंगे?”

मैं चुप रहा तो मम्मी बोलीं –

मम्मी : “अब चुप क्यों हो गया?”

मैं : “सॉरी मम्मी।”

मम्मी : “अब सॉरी बोलने से कुछ नहीं होगा। अब मैं जा रही हूँ और तरीका सोचूँ जिससे मैं योगेश जी के हमबिस्तर होने से बच जाऊँ।”

मैं : “मम्मी मैं साथ चलता हूँ। मैं कुछ नहीं होने दूँगा। अंकल सिर्फ आपकी दुल्हन के रूप में देखेंगे और मैं आपको वापस ले आऊँगा।”

मम्मी : “बेटा वो योगेश जी वो मुझे वापस नहीं आने देंगे। अब तो मुझे ही अपने बदन को नंगा होने से बचाना होगा।”

मैं : “मम्मी आप क्या करोगी?”

मम्मी : “वो मैं खुद सोचूँगी। अब जा रही हूँ।”

मैं : “मम्मी मैं आपको छोड़ आता हूँ नहीं तो कोई आपको अकेली जाते हुए देखेगा तो...”

मम्मी : “हाँ तू छोड़ आ।”

और फिर मैं मम्मी को पीछे वाले गेट से लेकर अंकल के घर गया। अंकल का पीछे वाला गेट की एक्स्ट्रा की से गेट खोला और मैं-मम्मी अंदर गए। मैंने देखा अंकल हॉल में नहीं थे। शायद रूम में होंगे।

तो मम्मी ने कहा “अब तू जा।”

मैं : “मम्मी अंकल से मिल लेता हूँ।”

मम्मी : “अब तू जा।” चिल्लाकर।

मैं : “मम्मी मैं जाता हूँ।” और मैं सीढ़ियों से आया। सही कहूँ तो आने का नाटक किया क्योंकि मैं सीढ़ियों पे चढ़ा तो मम्मी को लगा मैं जा रहा हूँ और सीढ़ियों में रुक गया और मम्मी रूम में चली गईं जहाँ अंकल थे और मैं सीढ़ियों से उतरकर अंकल के रूम की खिड़की पे गया तो देखा मम्मी जाकर अंकल से गले लग गईं और अंकल एक दूल्हे की तरह सजे हुए थे और दोनों एक-दूसरे को किस करने लगे।

अंकल : “क्या तुमने जोड़ा क्यों नहीं पहना?”

मम्मी : “अभी पहनती हूँ मेरे राजा।”

अंकल : “नहीं मैंने एक लड़की को बुलाया। वो तुझे पहना देगी।”

मम्मी : “क्या? कहाँ है मुझे तो नजर नहीं आ रही है।”

अंकल : “अभी बुलाया हूँ।” और अंकल ने आवाज दी “बाहर आओ।” तो एक लड़की बाथरूम से निकली।

अंकल : “तुम इसे लहंगा पहनाओ।”

लड़की : “येस सर।” और अंकल रूम से निकल गए। शायद हॉल में आ गए।

फिर उस लड़की ने मम्मी को नंगी किया और ब्रा-पैंटी पहनाई और लहंगा-चोली। मम्मी एकदम 22 साल की नई-नवेली दुल्हन लग रही थीं।

और अचानक से किसी ने मेरे कंधे पे हाथ रखा तो मैंने पीछे मुड़कर देखा अंकल थे।

अंकल : “बेटा पूरी रात कैसे देखेगा?”

मैं : “यहीं छुपकर देखूँगा।”

अंकल : “मैं आज तेरी मम्मी के साथ इस रूम में नहीं बल्कि उस दूसरे रूम में सुहागरात मनाऊँगा।
और हाँ तेरे लिए मैंने खिड़की खोल रखी है।”

और मम्मी हॉल में आने लगीं तो अंकल बोले “मैं चलता हूँ।” और अंकल सोफे पे जाकर बैठ गए और मैं वहाँ छुपकर देख रहा था और कुछ ही पलों में चलती हुई मम्मी हॉल में आ गईं।

अंकल तो मेरी मम्मी का ये रूप देख मंत्रमुग्ध हो गए थे। वैसे अंकल तो क्या कोई भी मम्मी को इस रूप में कोई भी देख लेता उसका भी यही हाल होता। मम्मी के गोरे बदन में लाल रंग की चोली जो एकदम फिट थी मानो कि उससे मम्मी के बदन पर रखकर ही सिला हो और मेरी मम्मी की चोली सिर्फ मेरी मम्मी की चुची के नीचे तक थी।
और मम्मी ने अपना लहंगा नाभि से 4 इंच नीचे से शुरू किया था। कमर से लेकर मम्मी के चूतड़ तक और फिर थाईज के मिडिल तक एकदम टाइट फिट, और उसके बाद घेरा जो जमीन को छू रही थी। मेरी मम्मी की चोली का गला थोड़ा सा गहरा था पर ज्यादा नहीं।
मैं मन में एक्साइटमेंट में सब देख रहा था।

सच में मम्मी उस समय किसी अप्सरा से कम नहीं लगी थीं। सर पर पल्लू, चेहरे पर शर्म की लाली धीरे-धीरे चलते आ रही थीं कि मम्मी से हल्के से नजर उठाकर अंकल को देखा जो उस समय सिर्फ मम्मी को ही बिना पलक झपकाए देख रहे थे। अंकल की आँखों से आँखें मिलते ही मम्मी ने शर्माते-मुस्कुराते अपना मुँह दूसरी ओर घुमा लिया।

फिर वो लड़की दो वरमाला लाई और उस लड़की ने वरमाला मम्मी और अंकल को दी।
मम्मी वरमाला हाथ में पकड़े हुए निगाहें झुकाए अंकल की तरफ देखने लगीं और अंकल के सामने मम्मी ने अपने हाथों को धीरे से ऊपर उठाया और अंकल के गले में वरमाला डाल दी तो वहाँ खड़ी उस लड़की ने जोर-जोर से तालियाँ बजाईं और फिर अंकल ने भी मम्मी के गले में वरमाला डाल दी।

वरमाला के बाद अंकल मम्मी को मंगलसूत्र पहनाने लगे तो मम्मी –

मम्मी : “इसे क्यों पहना रहे हो? मेरे गले में तो किसी और का मंगलसूत्र पहले से ही है।”

अंकल : “तो आज उसे उतार दो।”

मम्मी : “लेकिन मैंने आपसे पहले ही कहा था मैं आपसे शादी नहीं करूँगी सिर्फ आपके साथ संबंध बनाऊँगी।”

अंकल : “मैं कब शादी कर रहा हूँ? ये तो सिर्फ एंजॉय के लिए मंगलसूत्र पहना रहा हूँ और माँग में सिंदूर।”

मम्मी : “नहीं ये सही नहीं है।”

अंकल : “वर्षा सिर्फ ये नाटक है माँग में सिंदूर और मंगलसूत्र का।”

मम्मी : “ठीक है। पहले वाला भी नहीं उतारूँगी।”

अंकल : “ओके।” और फिर अंकल ने मम्मी के गले में मंगलसूत्र पहनाया और मंगलसूत्र मम्मी के गले में पहनाने के बाद जैसे ही अंकल ने मम्मी की माँग में सिंदूर भरा। अंकल के मम्मी की माँग में सिंदूर भरते ही मम्मी बोलीं “ये सही नहीं है।”

अंकल : “सिर्फ एंजॉय के लिए।”

फिर अंकल मम्मी का हाथ पकड़कर रूम में ले जाने लगे और उस लड़की से बोले “तुम दूसरे रूम में रेस्ट करो।” और मम्मी का हाथ पकड़के रूम में ले जाने लगे और

बेडरूम के दरवाजे तक पहुँचते ही मेरी मम्मी की साँसें किसी ट्रेन की तरह चलने लगीं।
जैसे-जैसे बेडरूम का दरवाजा नजदीक आ रहा था मम्मी के पूरे बदन में हलचल सी होने लगी।

जैसे ही अंकल जी ने बेडरूम का दरवाजा खोला फूलों की खुशबू ने इन दोनों का स्वागत किया। मम्मी ने धीरे से नजर उठाकर देखा पूरा कमरा गुलाब के फूलों से सजा हुआ था और जैसे ही मेरी मम्मी की नजर वहाँ पड़े बेड पर पड़ी मानो शर्म से अपनी आँखें नीचे कर लीं।

वहाँ एक आलीशान बेड था जो फूलों से सजा हुआ था। उसके फूलों से दिल बना हुआ था और उसमें मेरी मम्मी का नाम लिखा हुआ था और साथ ही वहाँ उस बेड के ऊपर लिखा हुआ था “हैप्पी सुहागरात”।

बेडरूम और बेड की हालत देखकर ही कोई बता सकता है अंकल ने कितनी जबरदस्त तैयारी की है।

अंकल ने मेरी मम्मी की कमर में हाथ डाले मम्मी को सुहाग सेज की ओर चल रहे थे कि तभी अंकल मम्मी के आगे आए और मम्मी के सामने झुककर बोले “वर्षा मेरी रानी साहिबा।
आपको दास की छोटी सी कोशिश कैसी लगी रानी साहिबा? कहीं इस दास से आपकी शान में कुछ गलती तो नहीं हो गई। वैसे महारानी साहिबा दास को उम्मीद है आपको अच्छा लगा होगा।” अंकल के इस तरह पूछने पर मम्मी का शर्म से बुरा हाल था। मम्मी धीरे से बोलीं “योगेश जी ये आप क्या कह रहे हैं?” तो अंकल जी मुस्कुराते बोले “सही कह रहा हूँ। अब से तुम इस घर की ही नहीं बल्कि मेरे दिल की भी महारानी हो और मैं तुम्हारा नौकर।”

अंकल का ये अंदाज देख मम्मी के चेहरे पर एक अलग ही मुस्कान आ गई।

मम्मी : धीरे से “इन सब की क्या जरूरत थी?”

अंकल : “वर्षा ये तो कुछ भी नहीं है। मैं आज की रात को यादगार बनाना चाहता हूँ।”

फिर अंकल ने मम्मी से कहा “इस बेड पे आज रात तुम्हारे साथ सुहागरात मनाऊँगा।”

मम्मी : “आप प्लीज 2 मिनट बाद आइएगा। प्लीज 2 मिनट के लिए बाहर जाइए।” और अंकल बाहर आ गए और मम्मी ने वहाँ पे रखे गुलाब के फूल बेड पे डाल दिए और उनके पंखुड़ियों को बिखेर दिया और फिर मम्मी ने अंकल को आवाज दी और अंकल अंदर आए तो अंकल ने देखा बेड पे गुलाब के फूल की पंखुड़ियों से सजा दिया है और

बिखरे हुए थे और उन गुलाबों के फूलों में मम्मी घूँघट निकालकर बैठीं अपने राजकुमार का इंतजार कर रही थीं।

वैसे तो मम्मी और अंकल दोनों का आपस में मन से मन और तन से तन का मिलन हो चुका था पिछले 6 महीनों में अनगिनत बार पर आज अंकल मम्मी के गले में मंगलसूत्र और माँग में सिंदूर डालकर सुहागरात मनाने वाले थे।
अंकल धीरे-धीरे बेड की ओर बढ़ने लगे।
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#31
**अपडेट 28**

अंकल जैसे ही बेड पर आकर बैठे मम्मी घूँघट में ही बेड से उठीं और अंकल के पैर छूने लगीं। मम्मी को अपने पैर छूते देख अंकल बोले “वर्षा ये क्या कर रही हो?”

मम्मी : “जी अपनी दासी को अपना धर्म निभाने से मत रोकिए। अब आपके चरणों में ही मेरा स्वर्ग है।” मम्मी हमेशा से अपने पति के प्रति समर्पण रही हैं। मम्मी हमेशा पापा के पैर छूती हैं लेकिन पापा मम्मी को लंड का सुख नहीं देते फिर भी और अब तो मम्मी को अंकल का लंड मिलता है इसलिए आज मम्मी ने अंकल के पैर छूने लगीं।

अंकल : “नहीं वर्षा।”

मम्मी : “मैं हमेशा से अपने पति के पैर छूती आई हूँ उस मर्द के जबकि वे मुझे सुख नहीं देते हैं और आप तो मुझे सुख देते हो इसलिए मैं अब आपके भी पैर छूँगी हमेशा।” मम्मी की बात सुन अंकल कुछ नहीं बोले और अंकल ने अपने पैर में पड़ी मम्मी को “खुश रहो” का आशीर्वाद दिया और मम्मी को कंधे से पकड़कर उठाकर अपने पास बिठा लिया।

मम्मी अभी भी घूँघट में सिमटी बैठी थीं। अब अंकल ने मम्मी का घूँघट उठाया तो मम्मी ने शर्म से अपनी आँखें झुका लीं और अपने चेहरे को शर्म से घुमाने लगीं तो अंकल किसी फिल्मी हीरो की तरह मम्मी की ठुड्डी पर हाथ रखकर उसको ऊपर उठाते बोले “वर्षा जब मेरा डिवोर्स हुआ था तो मैंने सोचा भी नहीं था मुझे इतनी सुंदर सेक्सी और मुझसे 14 साल छोटी एक 33 साल की औरत के रूप में तुम मिलोगी।”

अंकल की बात सुनकर मम्मी ने मुस्कुराते हुए अपनी आँखें झुका लीं।

और धीरे से बोलीं “आप भी ना।”

अंकल : “वर्षा तुम्हारे जैसी औरत को पाकर मैं अपने आप को बड़ा खुशकिस्मत समझता हूँ।” अंकल के मुँह से ये सुनकर मम्मी अपना सर अंकल के कंधे पर रखती बोलीं “खुशकिस्मत तो मैं जो मुझ बदकिस्मत को आप जैसा प्यार करने वाला मर्द मिला। आपको पाकर तो मैं धन्य हो गई। मेरी शादी को 20 साल हो गए लेकिन कभी सुख नहीं मिला। मेरे नामर्द पति ने इन 20 सालों में मुझे 20 बार भी नहीं प्यार किया। जब मेरी शादी हुई तो शुरू में 10 बार ही प्यार किया फिर अंकुश के जन्म के बाद से तो उन्होंने मुझे मुश्किल से 19 बार भी नहीं प्यार किया और कभी किया तो 2 मिनट भी नहीं टिका।
मैं तो यही सोचती थी मेरे जीवन में सुख है ही नहीं लेकिन भगवान ने आपको भेज दिया।”

अंकल : “ये सब तेरे बेटे की हेल्प से हुआ है।”

मम्मी : “हाँ ये सब उसी ने किया।”

अंकल : “वर्षा आज की रात सिर्फ बातें ही करोगी या फिर कुछ प्यार भी करना है? वैसे आज बड़ी कमाल की लग रही हो।” तो धीरे चेहरा उठाकर अंकल को देखकर शर्माती मुस्कुराने लगीं तो अंकल मम्मी की आँखों में आँखें डालकर अपने होठों पर उँगली रखकर मम्मी को चुम्मी देने का इशारा करने लगे तो मम्मी शर्म से ना में सर हिलाने लगीं पर अंकल के बार-बार इशारा करने पर मम्मी शर्माते हुए अपनी बाहें अंकल के गले में डाल अपने होठों को अंकल के होठों की ओर बढ़ा दिया तो अंकल ने भी मम्मी के रस भरे होठों को अपने होठों में भर चूसते बिस्तर पर मम्मी के ऊपर लेटने लगे।

दोनों प्रेमी एक-दूसरे की बाहों में बाहें डाले एक-दूसरे के होठों का स्वाद ले रहे थे।

मम्मी भी दुल्हन के जैसे सजी खुद को नई-नवेली दुल्हन के जैसे ही महसूस कर रही थीं। अंकल मम्मी के ऊपर लेटे मम्मी के गाल चूम रहे थे तो मम्मी शर्म से अपना मुँह अंकल के चेहरे से हटा लिया था पर अंकल तो मम्मी के सेब जैसे गालों को चूम रहे थे। मम्मी अंकल के इस तरह गालों को चूमने पर मम्मी नीचे जोर-जोर से साँस लेने लगीं।

और बेड की चादर को अपने दोनों हाथों को फैलाकर खींचने लगीं। अंकल थोड़े से मम्मी के ऊपर से उठे तो मम्मी झट से अंकल के नीचे से निकलकर

वहीं बेड लंबी-लंबी साँसें लेने लगीं। अंकल मम्मी के पीछे मम्मी की गोरी पीठ चूमने लगे।

अंकल : “क्या हुआ मेरी वर्षा रानी?”

मम्मी : “मुझे शर्म आती है।”

अंकल : “पिछले 6 महीनों से तुम्हारी शर्म गई नहीं। आज पूरी तरह उतार दूँगा तुम्हारी शर्म।” और अंकल ने मम्मी को पकड़कर फिर से बेड पर सीधा लिटा दिया और खुद मम्मी के ऊपर आकर पागलों की तरह मम्मी के होठों-गालों को चूमने लगे। मम्मी को अंकल के साथ आज ये सब करते बड़ी शर्म आ रही थी।

अंकल मम्मी के होठों को अपने होठों में दबाए चूसते-चूसते

मम्मी को अपनी बाहों में लिए घुटनों के बल खड़े होने लगे जिससे मम्मी भी किसी बेल की तरह अंकल से लिपटी उनके साथ खड़ी होने लगीं। उन दोनों के होठ एक-दूसरे के होठों से चिपके हुए थे। अगर अंकल के होठ काले और मम्मी के होठ गुलाबी न होते उन दोनों के होठों के बीच ये बताना मुश्किल था कि किसका होठ कौन सा था। दोनों अपने मुँह को खोले एक-दूसरे के मुँह का रस चूस रहे थे। अंकल के हाथ मम्मी के होठों को चूसते-चूसते

हाथ मम्मी के बदन को सहला रहे थे। मम्मी भी अंकल का भरपूर साथ देते अपने कोमल हाथ से अंकल के चेहरे को सहलाकर बता रही थीं कि चूस लो अपनी जान के होठों का

रस। बहुत प्यासी हूँ। अंकल ने मम्मी को फिर से बेड पर लिटाया और खुद मम्मी के ऊपर लेटकर मम्मी के कान-गर्दन चूमने लगे।

वैसे तो अंकल अपना माल मम्मी के अंदर छोड़ें कोई उन्हें रोक नहीं सकता था और
फिर भी वे मम्मी के ऊपर लेटे मम्मी की रजामंदी जानने के लिए बोले “वर्षा आज की रात जितनी आग लगी हुई लगती है आज की रात 5-6 कंडोम से काम नहीं चलेगा बल्कि आज की रात कल से डबल कंडोम का इस्तेमाल करना पड़ेगा।” कंडोम के इस्तेमाल की बात सुनकर मम्मी अपने ऊपर लेटे अंकल का चेहरा अपने हाथों में पकड़कर अपनी नशीली आँखें

अंकल की आँखों में डालकर बोलीं “आज की रात ही क्यों? मैं तो कहती हूँ अब आपको कंडोम का इस्तेमाल करने की जरूरत ही क्या है। अब अपनी दासी के रोम-रोम में अपना प्यार भर दीजिए। अब मैं आई पिल लिया करूँगी।”

बोलिए जानू भरने ना अपनी अपनी दासी के रोम-रोम में अपना प्यार। और खुद अंकल को अपने ऊपर झुकाकर उनके होठों को चूमकर शर्म से बेड पर अपना मुँह घुमा लिया।

अंकल : “शर्मा क्यों रही हो जान?”

मम्मी : “प्लीज मुझे शर्म आती है।”

अंकल : “तो फिर ऐसे काम नहीं चलेगा।” और अंकल उठ गए तो मम्मी अंकल को ऐसे उठते देख संकोच से देखने लगीं।

वे चलते-चलते अपनी अलमारी के पास रुक गए और उन्होंने अपनी अलमारी खोली और उसमें कुछ बॉक्स निकाले। मम्मी तो बस उनको ही देख रही थीं। वे बॉक्स लेकर मम्मी के पास आए और मम्मी के सामने बेड पर उन्होंने उन बॉक्स को खोल दिया। उनमें बहुत ही कीमती नौलखा हार था और साथ कुछ पुराने डिजाइन की बहुत कीमती हीरों के हार थे। मम्मी तो बस चुपचाप उनको ही देख रही थीं कि तभी अंकल जी उनमें से एक बहुत ही कीमती हीरों के हार को निकाला और मेरी मम्मी की ओर बढ़ाकर बोले “वर्षा ये हमारा खानदानी हार है। मेरी माँ ने इसे अपनी बहू को दिया था लेकिन मेरी वाइफ से डिवोर्स के बाद से ये हार अलमारी में रखा है लेकिन ये तुम्हारी अमानत है।” और मम्मी को देकर बोले “कैसा लगा वर्षा ये तोहफा?” तो मम्मी धीरे से कहाँ “जी बहुत ही सुंदर और बहुत ही कीमती।”

फिर अंकल ने मेरी मम्मी की कमर में हाथ डाले वहाँ ले गए थे जहाँ पहले से एक केक मँगवा रखा था। अंकल जी मम्मी के पीछे आकर खड़े हो गए और पीछे से अपने हाथों को निकालकर मम्मी के हाथों को पकड़ लिया और मम्मी से बोले “डार्लिंग आओ मिलकर अपनी सुहागरात को सेलिब्रेट करें।” फिर अंकल ने मम्मी का हाथ पकड़ा और केक काटा।
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#32
**अपडेट 30**

अंकल मेरी मम्मी के ऊपर चढ़े।
एक हाथ से मेरी मम्मी की चुची को मेरी मम्मी की चोली के अंदर हाथ डालकर दबाने लगे।
उनके होठ मेरी मम्मी के गुलाबी गालों पर थे।
वे कई बार काट भी रहे थे।

मस्ती के कारण मेरी मम्मी को तो आँखें ही नहीं खुल रही थीं।
अंकल मेरी मम्मी के गालों को चूमते एक हाथ से मेरी मम्मी की चुची दबा रहे थे।

तभी मैंने नोटिस किया कि वे अपने दूसरे हाथ को नीचे की ओर बढ़ा रहे थे।
अंकल का दूसरा हाथ मेरी मम्मी की नाभि से होता हुआ अब मेरी मम्मी के लहंगे की डोरी के ऊपर तक था।
अंकल अपने हाथ को मेरी मम्मी के लहंगे के अंदर डालने की कोशिश कर रहे थे।

लेकिन मेरी मम्मी ने अपने लहंगे की डोरी इतनी कसकर बाँधी थी कि अंकल का हाथ मेरी मम्मी के लहंगे के अंदर नहीं जा रहा था।

अंकल की हालत देखकर और मम्मी खुद भी गरम थीं तो मम्मी ने अपनी साँस जोर से छोड़ी।
जिससे मेरी मम्मी के लहंगे की डोरी ढीली हो गई।
और अंकल का पूरा हाथ अब मेरे मम्मी के लहंगे के अंदर चला गया।

अब अंकल का पूरा हाथ मेरी मम्मी के लहंगे के अंदर वहाँ पर था जहाँ मेरी मम्मी की पैंटी थी।
मेरी मम्मी के उस खजाने पर जिससे मैंने 19 साल पहले जन्म लिया था।
लेकिन पिछले 6 महीनों से उस खजाने पर अंकल का कब्जा था।
या तू कहूँ मैंने ही अंकल को वो खजाना दिलाया था।

मैंने मम्मी को चुदवाने में अंकल की मदद की थी।
और कई बार कंप्यूटर के बहाने से मम्मी को चुदवाया था पिछले 6 महीनों में।
लेकिन आज सुहागरात है।
और सुहागरात में सब कुछ पहली बार होता है।

उन्होंने अपना हाथ मेरी मम्मी की चुत पर रख दिया।
जिससे वे पैंटी के ऊपर से ही सहलाने लगे।
शर्म के मारे मम्मी ने अपनी दोनों टाँगें बंद कर लीं।

अंकल एक हाथ मेरी मम्मी की चोली में मेरी मम्मी की चुची पर और दूसरा हाथ मेरी मम्मी के लहंगे में मेरी मम्मी की चुत पर था।
तो उन्होंने मेरी मम्मी के कान में कहा –
“वर्षा लगता है मुझे अपने हाथ निकालने के लिए तुम्हारी चोली और लहंगा खोलना पड़ेगा।
अगर तुम इजाजत दो तो क्या तुम्हारी चोली और लहंगा खोल सकता हूँ?”

मेरी मम्मी के मुँह से कोई शब्द नहीं निकल रहा था।
जिससे अंकल जी ने मेरी मम्मी की सहमति समझकर मेरी मम्मी की चोली का पहला हुक खोल दिया।
और फिर दूसरा हुक।

जैसे-जैसे मेरी मम्मी की चोली के हुक खुल रहे थे वैसे-वैसे मेरी मम्मी की चोली की कसावट ढीली होती जा रही थी।
अंकल जी मेरी मम्मी की चोली के हुक खोलने में व्यस्त थे।

इससे पहले कि वे मेरी मम्मी की चोली का आखिरी हुक खोलते मेरी मम्मी ने उनका हाथ पकड़कर धीरे कहा –
“योगेश जी बस...”

पर उस समय अंकल जी कहाँ मानने वाले थे।
उन्होंने कहा –
“...बस वर्षा.. थोड़ा सा.. प्लीज... आज हमारी सुहागरात है और इसलिए आज ऐसे करेंगे जैसे पहली बार कर रहे हैं।
क्योंकि सुहागरात में सब कुछ पहली बार होता है.. प्लीज...”

और उन्होंने मेरी मम्मी की चोली का आखिरी हुक भी खोल दिया।

अब अंकल और मेरी मम्मी की नंगी पीठ के बीच में अगर कुछ बचा था तो वो था मेरी मम्मी की ब्रा का आखिरी हुक।
मैं और मम्मी जानते थे कि अब अंकल मम्मी की ब्रा का हुक खोलने में ज्यादा देर नहीं लगाएँगे।

मम्मी शर्म से अंकल से लिपट गई थीं।
तो अंकल मम्मी से थोड़ा अलग हुए।
और मम्मी की चोली को धीरे से मम्मी के कंधे पर से थामा और नीचे की ओर सरकाने लगे।
फिर अपने होठों को मेरी मम्मी के नंगे कंधों पर रखकर चूमने लगे।

मम्मी मस्ती में ही अंकल की बाहों में आआहhhhhhhh आहhhhhhhhhhh करने लगीं।
तो अंकल ने धीरे से मेरी मम्मी की चोली मेरी मम्मी की बाहों से निकाल दी।
और उसको एक तरफ जमीन की ओर उछाल दिया।

मेरी मम्मी की टाइट कड़कदार चुचियाँ जो रेड ब्रा में कैद थीं पूरी तरह से अंकल की आँखों के सामने थीं।
और ब्रा से निकलने को मचल रही थीं।

मेरी मम्मी की चुचियों को देखकर अंकल तो एकदम पागल से हो गए।
तो मेरी मम्मी ने शर्म से अपनी चुचियों को अपने हाथों से ढकते कहा –
“योगेश जी लाइट तो बंद कर दीजिए। मुझे शर्म आ रही है।”

अंकल : “तू तो ऐसे शर्मा रही है जैसे पिछले 6 महीनों से तू मुझसे नहीं बल्कि किसी और से चुदी है।”

मम्मी : “आप ही ने तो कहा है सुहागरात में सब पहली बार होता है इसलिए मैं सब कुछ पहली बार ही कर रही हूँ।”

अंकल : “तो तू आज कुँवारी लड़की बनकर चुदना चाहती है?”

मम्मी ने कुछ नहीं कहा लेकिन अपनी गर्दन हाँ में हिला दी।

“प्लीज मुझे शर्म आ रही है अपनी सुहागरात में। प्लीज लाइट बंद कर दो।”

अंकल : “तो तुझे मेरे साथ जवानी का खेल नहीं खेलना?”

मम्मी : “मुझे आपके साथ जवानी का खेल खेलना है जैसे सुहागरात में होता है वैसे ही आज मैं आपसे पहला मिलन करूँगी कुँवारी लड़की की तरह।
और कुँवारी लड़की को शर्म आती है पहली बार और पहली बार में शर्म तो आनी ही चाहिए इसलिए लाइट बंद कर दो।”

लेकिन अंकल ने भी कहा –
“जब तू एक कुँवारी लड़की की तरह आज जवानी का खेल खेलेगी तो लाइट चालू रहने दे।
पिछले 6 महीनों से तुझे चोद रहा हूँ फिर भी आज तो तुझे एक कुँवारी लड़की की तरह चोदूँगा इसलिए लाइट चालू रहेगी।”

और अंकल ने कहा –
“आज मैं सुहागरात में तेरी जवानी का पूरा मजा लूँगा।”

लेकिन मम्मी जिद करती रहीं।
और अंकल भी कहाँ सुनने वाले थे।
आज वे मेरी मम्मी की जवानी का पूरा मजा लेना चाहते थे।
हालाँकि वे पिछले 6 महीनों से ले रहे पर आज कुछ नया।

और अंकल ने मेरी मम्मी के हाथों को मेरी मम्मी की चुचियों से हटाया।

और बोले –
“आआहhh वर्षा... तुम्हें भगवान ने सिर्फ मेरे लिए बनाया है.. तुम मेरी हो मेरी जान हो मेरी महबूबा हो मेरी डार्लिंग हो मेरी लैला हो।
इतना खूबसूरत बदन ये मस्त जवानी शायद मेरे किस्मत में लिखा था।
और आज तुम्हें अपनी बाहों में पाकर मुझे अपने किस्मत पर नाज होने लगा है कि इतना खूबसूरत और सुगंधित फूल मेरे पहलू में पड़ा है।
और शायद भगवान को भी तुम्हें मुझे देने में दुख नहीं हुआ होगा।”

इतना कहते ही अंकल जी ने आज सुहागरात में पहली बार मेरी मम्मी की चुची को ब्रा के ऊपर से दबाया।

मेरी मम्मी के बदन पर अब ब्रा और घाघरा था।
और मेरी मम्मी शर्म से आँखें बंद करके बेड पर लेटी हुई थीं।

मम्मी ने हिम्मत करके लड़खड़ाती आवाज में कहा –
“योगेश जी आपने कहा था कि मैं तुम्हारी इच्छा के बिना कुछ नहीं करूँगा और पूरा कंट्रोल करूँगा।”

तो अंकल बोले –
“हाँ वर्षा मुझे यकीन है हम अपने आप पर कंट्रोल करेंगे। बस तू थोड़ा सा ही।
मैं समझता हूँ मेरे साथ तुम भी अपने आप पर कंट्रोल कर लोगे।
इस थोड़े से प्यार से कुछ नहीं होगा।
और मैंने लगा था तुम्हारे बेटे के सामने ताकि उसे लगे तू चुदने नहीं बल्कि सती-सावित्री बन सको।”

मम्मी फिर और कुछ बोल न सकीं।
अंकल मम्मी के ऊपर चढ़ आए।
और मेरी मम्मी की दोनों चुचियों को ब्रा के ऊपर से पकड़ मम्मी को चूम रहे थे।

अंकल का लंड अब ठीक मेरी मम्मी के घाघरे के ऊपर से मेरी मम्मी की चुत को टच कर रहा था।
और मम्मी अंकल के मोटे लंबे लंड को अच्छे से अपनी चुत पर महसूस कर रही थीं।

मम्मी से भी कंट्रोल करना मुश्किल था।
अंकल ने मेरी मम्मी की चुची मसलते धीरे-धीरे मेरी मम्मी की चुत पर धक्के मार रहे थे।
अंकल जी के नीचे लेटी मेरी मम्मी अलग ही दुनिया में थीं।

अंकल ने मम्मी को गुमसुम देखा तो बोले –

अंकल : “वर्षा क्या हुआ? कहाँ खो गईं?”

मम्मी : “कुछ नहीं।”

अंकल : “कुछ तो है। क्या तुझे अच्छा नहीं लग रहा है?”

मम्मी : “अच्छा लग रहा है।”

अंकल : “तो सच बता क्या सोच रही है?”

मम्मी : “सोच रही हूँ मैं 33 साल की हो गई और शादी को 20 साल हो गए हैं।
पर जो सुख आपने मुझे दिया वो मैं कभी नहीं भूल सकती।
उस नामर्द ने मेरी जिंदगी बर्बाद कर दी 20 साल।

पहले भले ही मुझे मेरे पहले पति उस नामर्द ने पूरी तरह नंगी किया था मेरे बदन को सहलाया रौंदा था।
पर आज जो मजा मुझे आपके हाथों से नंगी होने और आपसे अपना बदन सहलाने में मिल रहा वैसा मजा मुझे पहले कभी नहीं मिला था।”

अंकल : “क्या पिछले 6 महीनों से भी नहीं?”

मम्मी : “हाँ पिछले 6 महीनों से तो मिल रहा है आपसे।
लेकिन उस नामर्द ने तो नहीं दिया।
और वैसे भी आज मेरी दूसरी सुहागरात है।
20 साल पहले उस नामर्द के साथ और 20 साल बाद आज आपके साथ।”

अंकल : “क्या आज के दिन तेरी सुहागरात थी?”

मम्मी : “नहीं लेकिन लेकिन 20 साल होने वाले हैं।”

अंकल : “अब भूल जा। अब मजे ले।”

और फिर से अंकल ने मम्मी को मसलने लगे।
फिर से मम्मी गरम हो गईं।

अब मम्मी अपनी साँसें कंट्रोल करने की बहुत कोशिश कर रही थीं।
मेरी मम्मी के नाजुक बदन के ऊपर अंकल जो कि शरीर में बहुत ही हट्टे-कट्टे थे लेटे हुए थे।

कभी मेरी मम्मी के होठों को किस और कभी मेरी मम्मी की चुचियों को ब्रा के ऊपर से चूम रहे थे।
मस्ती में मेरी मम्मी की चुची को ब्रा के ऊपर से चूमते बोले –

“वर्षा मेरी जान मुझे 6 महीने पहले यकीन नहीं था तुम मेरी हो जाओगी।
और जब तुमने 6 महीने पहले मेरा प्रपोजल ठुकरा दिया था और गुस्सा हो गई थीं तो मैं तुम्हारे गुस्से को देख डर गया था।
मैंने सोच लिया था मैं तुम्हें कभी नहीं पा सकूँगा।
लेकिन तुम्हारे बेटे ने मुझे तुम्हें दिला दिया।
यदि तुम्हारा बेटा मेरा साथ नहीं देता तो आज तुम मेरी नहीं हो पातीं।
मुझे अब भी यकीन नहीं हो रहा कि तुम मेरी हो गईं मेरी बुलबुल।
मुझे अपनी किस्मत पर आज बड़ा नाज है।”

और मेरी मम्मी की ब्रा के ऊपर से अपने मुँह से मेरे मम्मी के निप्पल को पकड़कर धीरे से काट लिया।

जैसे ही अंकल ने मम्मी के निप्पल को काटा मेरी मम्मी के मुँह से बस यही निकला –
“आआहhhhhh योगेशhhhh जीईईईईई धीरे दर्द होता है।”

कुछ देर ऐसे ही ब्रा के ऊपर से मेरी मम्मी की चुची चूसने के बाद अंकल ने मेरी मम्मी को उल्टा लिटाया।
अब मेरी मम्मी पीठ बल लेटी थीं।
मेरी मम्मी की नंगी पीठ अंकल जी के सामने थी।

इससे पहले मम्मी कुछ समझ पातीं अंकल फिर से मेरी मम्मी के ऊपर चढ़ गए।
और मेरी मम्मी की नंगी पीठ को चाटने लगे।

अंकल का लंड अब मेरी मम्मी की उभरी हुई गाँड को टच कर रहा था।
अंकल शरीर में इतने बड़े हैं कि मेरी मम्मी बिल्कुल उनके नीचे छुप ही गईं।
और अंकल का बिल्कुल लोहे की रॉड जैसे लंड मेरी मम्मी की गाँड पर ऐसा हमला कर रहा था कि वो किसी भी पल मेरी मम्मी का लहंगा फाड़कर मेरी मम्मी की गाँड पर अपना कब्जा कर लेगा।
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#33
**अपडेट 30**

अंकल मेरी मम्मी के ऊपर चढ़े। एक हाथ से मेरी मम्मी की चुची को मेरी मम्मी की चोली के अंदर हाथ डालकर दबाने लगे और उनके होठ मेरी मम्मी के गुलाबी गालों पर थे जिससे वे कई बार काट भी रहे थे। मस्ती के कारण मेरी मम्मी को तो आँखें ही नहीं खुल रही थीं। अंकल मेरी मम्मी के गालों को चूमते एक हाथ से मेरी मम्मी की चुची दबा रहे थे तभी मैंने नोटिस किया कि वे अपने दूसरे हाथ को नीचे की ओर बढ़ा रहे थे। अंकल का दूसरा हाथ मेरी मम्मी की नाभि से होता हुआ अब मेरी मम्मी के लहंगे की डोरी के ऊपर तक था और अंकल अपने हाथ को मेरी मम्मी के लहंगे के अंदर डालने की कोशिश कर रहे थे लेकिन मेरी मम्मी ने अपने लहंगे की डोरी इतनी कसकर बाँधी थी कि अंकल का हाथ मेरी मम्मी के लहंगे के अंदर नहीं जा रहा था। अंकल की हालत देखकर और मम्मी खुद भी गरम थीं तो मम्मी ने अपनी साँस जोर से छोड़ी जिससे मेरी मम्मी के लहंगे की डोरी ढीली हो गई और अंकल का पूरा हाथ अब मेरे मम्मी के लहंगे के अंदर चला गया। अब अंकल का पूरा हाथ मेरी मम्मी के लहंगे के अंदर वहाँ पर था जहाँ मेरी मम्मी की पैंटी थी। मेरी मम्मी के उस खजाने पर जिससे मैंने 19 साल पहले जन्म लिया था लेकिन पिछले 6 महीनों से उस खजाने पर अंकल का कब्जा था या तू कहूँ मैंने ही अंकल को वो खजाना दिलाया था। मैंने मम्मी को चुदवाने में अंकल की मदद की थी और कई बार कंप्यूटर के बहाने से मम्मी को चुदवाया था पिछले 6 महीनों में लेकिन आज सुहागरात है और सुहागरात में सब कुछ पहली बार होता है।

उन्होंने अपना हाथ मेरी मम्मी की चुत पर रख दिया जिससे वे पैंटी के ऊपर से ही सहलाने लगे। शर्म के मारे मम्मी ने अपनी दोनों टाँगें बंद कर लीं। अंकल एक हाथ मेरी मम्मी की चोली में मेरी मम्मी की चुची पर और दूसरा हाथ मेरी मम्मी के लहंगे में मेरी मम्मी की चुत पर था तो उन्होंने मेरी मम्मी के कान में कहा “वर्षा लगता है मुझे अपने हाथ निकालने के लिए तुम्हारी चोली और लहंगा खोलना पड़ेगा। अगर तुम इजाजत दो तो क्या तुम्हारी चोली और लहंगा खोल सकता हूँ?” मेरी मम्मी के मुँह से कोई शब्द नहीं निकल रहा था जिससे अंकल जी ने मेरी मम्मी की सहमति समझकर मेरी मम्मी की चोली का पहला हुक खोल दिया और फिर दूसरा हुक.. जैसे-जैसे मेरी मम्मी की चोली के हुक खुल रहे थे वैसे-वैसे मेरी मम्मी की चोली की कसावट ढीली होती जा रही थी। अंकल जी मेरी मम्मी की चोली के हुक खोलने में व्यस्त थे। इससे पहले कि वे मेरी मम्मी की चोली का आखिरी हुक खोलते मेरी मम्मी ने उनका हाथ पकड़कर धीरे कहा “योगेश जी बस...” पर उस समय अंकल जी कहाँ मानने वाले थे। उन्होंने कहा “...बस वर्षा.. थोड़ा सा.. प्लीज... आज हमारी सुहागरात है और इसलिए आज ऐसे करेंगे जैसे पहली बार कर रहे हैं क्योंकि सुहागरात में सब कुछ पहली बार होता है.. प्लीज...” और उन्होंने मेरी मम्मी की चोली का आखिरी हुक भी खोल दिया। अब अंकल और मेरी मम्मी की नंगी पीठ के बीच में अगर कुछ बचा था तो वो था मेरी मम्मी की ब्रा का आखिरी हुक। मैं और मम्मी जानते थे कि अब अंकल मम्मी की ब्रा का हुक खोलने में ज्यादा देर नहीं लगाएँगे।
मम्मी शर्म से अंकल से लिपट गई थीं तो अंकल मम्मी से थोड़ा अलग हुए और मम्मी की चोली को धीरे से मम्मी के कंधे पर से थामा और नीचे की ओर सरकाने लगे और फिर अपने होठों को मेरी मम्मी के नंगे कंधों पर रखकर चूमने लगे।

मम्मी मस्ती में ही अंकल की बाहों में आआहhhhhhhh आहhhhhhhhhhh करने लगीं तो अंकल ने धीरे से मेरी मम्मी की चोली मेरी मम्मी की बाहों से निकाल दी और उसको एक तरफ जमीन की ओर उछाल दिया। मेरी मम्मी की टाइट कड़कदार चुचियाँ जो रेड ब्रा में कैद थीं पूरी तरह से अंकल की आँखों के सामने थीं और ब्रा से निकलने को मचल रही थीं। मेरी मम्मी की चुचियों को देखकर अंकल तो एकदम पागल से हो गए तो मेरी मम्मी ने शर्म से अपनी चुचियों को अपने हाथों से ढकते कहा “योगेश जी लाइट तो बंद कर दीजिए। मुझे शर्म आ रही है।”

अंकल : “तू तो ऐसे शर्मा रही है जैसे पिछले 6 महीनों से तू मुझसे नहीं बल्कि किसी और से चुदी है।”

मम्मी : “आप ही ने तो कहा है सुहागरात में सब पहली बार होता है इसलिए मैं सब कुछ पहली बार ही कर रही हूँ।”

अंकल : “तो तू आज कुँवारी लड़की बनकर चुदना चाहती है?”

मम्मी : मम्मी ने कुछ नहीं कहा लेकिन अपनी गर्दन हाँ में हिला दी।

“प्लीज मुझे शर्म आ रही है अपनी सुहागरात में। प्लीज लाइट बंद कर दो।”

अंकल : “तो तुझे मेरे साथ जवानी का खेल नहीं खेलना?”

मम्मी : “मुझे आपके साथ जवानी का खेल खेलना है जैसे सुहागरात में होता है वैसे ही आज मैं आपसे पहला मिलन करूँगी कुँवारी लड़की की तरह। और कुँवारी लड़की को शर्म आती है पहली बार और पहली बार में शर्म तो आनी ही चाहिए इसलिए लाइट बंद कर दो।”

लेकिन अंकल ने भी कहा “जब तू एक कुँवारी लड़की की तरह आज जवानी का खेल खेलेगी तो लाइट चालू रहने दे। पिछले 6 महीनों से तुझे चोद रहा हूँ फिर भी आज तो तुझे एक कुँवारी लड़की की तरह चोदूँगा इसलिए लाइट चालू रहेगी।” और अंकल ने कहा “आज मैं सुहागरात में तेरी जवानी का पूरा मजा लूँगा।”

लेकिन मम्मी जिद करती रहीं।
और अंकल भी कहाँ सुनने वाले थे। आज वे मेरी मम्मी की जवानी का पूरा मजा लेना चाहते थे। हालाँकि वे पिछले 6 महीनों से ले रहे पर आज कुछ नया।
और अंकल ने मेरी मम्मी के हाथों को मेरी मम्मी की चुचियों से हटाया।

और बोले “आआहhh वर्षा... तुम्हें भगवान ने सिर्फ मेरे लिए बनाया है.. तुम मेरी हो मेरी जान हो मेरी महबूबा हो मेरी डार्लिंग हो मेरी लैला हो। इतना खूबसूरत बदन ये मस्त जवानी शायद मेरे किस्मत में लिखा था और आज तुम्हें अपनी बाहों में पाकर मुझे अपने किस्मत पर नाज होने लगा है कि इतना खूबसूरत और सुगंधित फूल मेरे पहलू में पड़ा है। और शायद भगवान को भी तुम्हें मुझे देने में दुख नहीं हुआ होगा।” इतना कहते ही अंकल जी ने आज सुहागरात में पहली बार मेरी मम्मी की चुची को ब्रा के ऊपर से दबाया।

मेरी मम्मी के बदन पर अब ब्रा और घाघरा था और मेरी मम्मी शर्म से आँखें बंद करके बेड पर लेटी हुई थीं। मम्मी ने हिम्मत करके लड़खड़ाती आवाज में कहा “योगेश जी आपने कहा था कि मैं तुम्हारी इच्छा के बिना कुछ नहीं करूँगा और पूरा कंट्रोल करूँगा।” तो अंकल बोले “हाँ वर्षा मुझे यकीन है हम अपने आप पर कंट्रोल करेंगे। बस तू थोड़ा सा ही। मैं समझता हूँ मेरे साथ तुम भी अपने आप पर कंट्रोल कर लोगे। इस थोड़े से प्यार से कुछ नहीं होगा और मैंने लगा था तुम्हारे बेटे के सामने ताकि उसे लगे तू चुदने नहीं बल्कि सती-सावित्री बन सको।”

मम्मी फिर और कुछ बोल न सकीं। अंकल मम्मी के ऊपर चढ़ आए और मेरी मम्मी की दोनों चुचियों को ब्रा के ऊपर से पकड़ मम्मी को चूम रहे थे। अंकल का लंड अब ठीक मेरी मम्मी के घाघरे के ऊपर से मेरी मम्मी की चुत को टच कर रहा था और मम्मी अंकल के मोटे लंबे लंड को अच्छे से अपनी चुत पर महसूस कर रही थीं।

मम्मी से भी कंट्रोल करना मुश्किल था।
अंकल ने मेरी मम्मी की चुची मसलते धीरे-धीरे मेरी मम्मी की चुत पर धक्के मार रहे थे। अंकल जी के नीचे लेटी मेरी मम्मी अलग ही दुनिया में थीं।
अंकल ने मम्मी को गुमसुम देखा तो बोले –

अंकल : “वर्षा क्या हुआ? कहाँ खो गईं?”

मम्मी : “कुछ नहीं।”

अंकल : “कुछ तो है। क्या तुझे अच्छा नहीं लग रहा है?”

मम्मी : “अच्छा लग रहा है।”

अंकल : “तो सच बता क्या सोच रही है?”

मम्मी : “सोच रही हूँ मैं 33 साल की हो गई और शादी को 20 साल हो गए हैं पर जो सुख आपने मुझे दिया वो मैं कभी नहीं भूल सकती। उस नामर्द ने मेरी जिंदगी बर्बाद कर दी 20 साल।
पहले भले ही मुझे मेरे पहले पति उस नामर्द ने पूरी तरह नंगी किया था मेरे बदन को सहलाया रौंदा था पर आज जो मजा मुझे आपके हाथों से नंगी होने और आपसे अपना बदन सहलाने में मिल रहा वैसा मजा मुझे पहले कभी नहीं मिला था।”

अंकल : “क्या पिछले 6 महीनों से भी नहीं?”

मम्मी : “हाँ पिछले 6 महीनों से तो मिल रहा है आपसे लेकिन उस नामर्द ने तो नहीं दिया और वैसे भी आज मेरी दूसरी सुहागरात है। 20 साल पहले उस नामर्द के साथ और 20 साल बाद आज आपके साथ।”

अंकल : “क्या आज के दिन तेरी सुहागरात थी?”

मम्मी : “नहीं लेकिन लेकिन 20 साल होने वाले हैं।”

अंकल : “अब भूल जा। अब मजे ले।” और फिर से अंकल ने मम्मी को मसलने लगे और फिर से मम्मी गरम हो गईं और अब मम्मी
अपनी साँसें कंट्रोल करने की बहुत कोशिश कर रही थीं। मेरी मम्मी के नाजुक बदन के ऊपर अंकल जो कि शरीर में बहुत ही हट्टे-कट्टे थे लेटे हुए थे। कभी मेरी मम्मी के होठों को किस और कभी मेरी मम्मी की चुचियों को ब्रा के ऊपर से चूम रहे थे। मस्ती में मेरी मम्मी की चुची को ब्रा के ऊपर से चूमते बोले “वर्षा मेरी जान मुझे 6 महीने पहले यकीन नहीं था तुम मेरी हो जाओगी और जब तुमने 6 महीने पहले मेरा प्रपोजल ठुकरा दिया था और गुस्सा हो गई थीं तो मैं तुम्हारे गुस्से को देख डर गया था। मैंने सोच लिया था मैं तुम्हें कभी नहीं पा सकूँगा लेकिन तुम्हारे बेटे ने मुझे तुम्हें दिला दिया। यदि तुम्हारा बेटा मेरा साथ नहीं देता तो आज तुम मेरी नहीं हो पातीं। मुझे अब भी यकीन नहीं हो रहा कि तुम मेरी हो गईं मेरी बुलबुल। मुझे अपनी किस्मत पर आज बड़ा नाज है।” और मेरी मम्मी की ब्रा के ऊपर से अपने मुँह से मेरे मम्मी के निप्पल को पकड़कर धीरे से काट लिया.. जैसे ही अंकल ने मम्मी के निप्पल को काटा मेरी मम्मी के मुँह से बस यही निकला ..“आआहhhhhh” योगेशhhhh जीईईईईई धीरे दर्द होता है।” कुछ देर ऐसे ही ब्रा के ऊपर से मेरी मम्मी की चुची चूसने के बाद अंकल ने मेरी मम्मी को उल्टा लिटाया। अब मेरी मम्मी पीठ बल लेटी थीं। मेरी मम्मी की नंगी पीठ अंकल जी के सामने थी। इससे पहले मम्मी कुछ समझ पातीं अंकल फिर से मेरी मम्मी के ऊपर चढ़ गए और मेरी मम्मी की नंगी पीठ को चाटने लगे। अंकल का लंड अब मेरी मम्मी की उभरी हुई गाँड को टच कर रहा था। अंकल शरीर में इतने बड़े हैं कि मेरी मम्मी बिल्कुल उनके नीचे छुप ही गईं और अंकल का बिल्कुल लोहे की रॉड जैसे लंड मेरी मम्मी की गाँड पर ऐसा हमला कर रहा था कि वो किसी भी पल मेरी मम्मी का लहंगा फाड़कर मेरी मम्मी की गाँड पर अपना कब्जा कर लेगा।
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#34
**अपडेट 31**

मेरी मम्मी ने अपने आप से बहुत कोशिश की कि अपने आप पर कंट्रोल रखूँ।
लेकिन मम्मी भी तो एक जवान औरत थीं।
मम्मी के भी कुछ अरमान थे।

और जब अंकल जी जैसे मर्द ने मेरी मम्मी के बदन से खेलकर मेरी मम्मी के अंदर के अरमान को जगाया तो मम्मी भी तड़प सी उठी थीं।

मम्मी ने अपने आप को रोकने के लिए अपने हाथों को फैलाकर बेड की चादर को अपनी मुट्ठी में भरकर खींचने लगीं।
जबकि अंकल मेरी मम्मी के ऊपर चढ़े मेरी मम्मी की पीठ को चाटते अपने लंड मेरी मम्मी की मस्त गद्देदार गाँड पर रगड़ते रहते थे।

मस्ती के कारण मेरी मम्मी भी सातवें आसमान में थीं।

मम्मी को पता ही नहीं चला कब अंकल जी उठे और उन्होंने अपना कुर्ता और बनियान उतार दिया।
और आधे नंगे ही मेरी मम्मी के ऊपर लेट गए।

मम्मी को अंकल के आधे नंगे होने का एहसास तब होता है जब मम्मी को अपनी पीठ पर उनके छाती के घने बालों का स्पर्श हुआ।
मर्द के बालों की रगड़ अपनी पीठ पर मम्मी को एक अलग ही मजा दे रही थी।

अंकल जी मेरी मम्मी के ऊपर चढ़े मेरी फूल जैसी नाजुक कोमल मुलायम मम्मी को कसकर पकड़कर और मेरी मम्मी की पीठ पे कभी मेरी मम्मी की गर्दन.. कान.. को चाटने लगे चूसने लगे।

मेरी मम्मी के मुँह से सिर्फ “आह”... “उफ्फ” निकल रही थी।

अब तक अंकल का मेरी मम्मी के साथ इतना कुछ करने से मेरी मम्मी समझ गई थीं कि अंकल इस खेल में कितने बड़े खिलाड़ी हैं।
हालाँकि पिछले 6 महीनों से पता है पर आज तो अंकल कुछ ज्यादा ही बड़े खिलाड़ी लग रहे हैं।

और मेरी मम्मी इतना शर्मा रही हैं भी कैसे वो मेरी मम्मी की शर्म-हया को हटा रहे।
मुझे खुद भी पता नहीं चल पाया था।

पर इतना जरूर था कि मम्मी को अब अपने योगेश जी के साथ ये सब करने में जीवन का असली आनंद मिल रहा था।

तभी अंकल जी ने अपना हाथ मेरी मम्मी की पीठ पर मेरी मम्मी की ब्रा के हुक पर रखा।
कि मेरी मम्मी सिहर उठीं।

और जैसे वो अपना हाथ मेरी मम्मी की ब्रा के हुक पर रखकर उससे खोलने की कोशिश करने लगे।
और एक ही झटके के साथ मेरी मम्मी की ब्रा का हुक खोल दिया।

और मेरी मम्मी की ब्रा मेरी मम्मी के कंधों पर ढीली हो गई।
मेरी मम्मी उल्टी लेटी थीं नहीं तो मेरी मम्मी की ब्रा भी मेरी मम्मी के बदन के साथ कब की छोड़ देती।

मेरी मम्मी की ब्रा का हुक खुलते ही मेरी मम्मी की तो शर्म के मारे जान ही निकल गई थी।
और मेरी मम्मी ने अपना मुँह चादर में छुपा लिया।

पर मेरे योगेश अंकल ने मेरी मम्मी को पकड़कर सीधा किया।
पर मेरी मम्मी शर्म के मारे सीधी नहीं हुईं।

तो वो मेरी मम्मी का हाथ पकड़कर जोर से मेरी मम्मी को सीधा करने लगे।
मेरी मम्मी हिरणी जैसी कहाँ उनके जैसे सांड का मुकाबला कर पातीं।

सो उन्होंने मेरी मम्मी को बिल्कुल सीधा कर दिया।
अब मेरी मम्मी पीठ के बल लेटी थीं।

और मेरी मम्मी की एकदम नंगी चुचियाँ योगेश अंकल के सामने थीं।
मेरी मम्मी की एकदम टाइट चुचियाँ जिन पर पिंक कलर के निप्पल जो इस समय एकदम कड़क होकर खड़े थे।

मेरी मम्मी ने धीरे से आँखें खोलीं तो अंकल को अपनी नंगी चुचियों को इस तरह देखते शर्म से फिर अपनी आँखें बंद कर लीं।
और जल्दी से मम्मी ने अपने हाथों को अपनी दोनों चुचियों पर रखकर उनको ढक दिया।

और मर्द को उस समय रोकना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन था।
सो योगेश अंकल ने मेरी मम्मी के हाथ पकड़े और मेरी मम्मी के हाथों को मेरी मम्मी की चुचियों से हटा दिया।

इससे पहले मेरी मम्मी कुछ समझ पातीं अंकल ने अपने दोनों हाथ बढ़ाकर मेरी मम्मी के बदन पर जो मेरी मम्मी की ब्रा खुली थी उसको पकड़कर धीरे से खींचकर निकाल दिया।

और हाथ लगाकर मेरी मम्मी की चुचियों को पकड़ लिया और उससे जोर से दबा दिया।
वे बार-बार मेरी मम्मी की चुचियों को दबाते और मेरी मम्मी के निप्पल को जोर से मसल दिया।

अंकल तो मेरी मम्मी की चुचियों को जोर-जोर से मसलने लगे।
मस्ती के कारण मेरी मम्मी तो सातवें आसमान पर थीं।

मेरी मम्मी के मुँह से मस्ती से सिसकियाँ निकलने लगीं –
“हाय... आह... मर गई प्लीज धीरे... जी होली मर जाऊँगी...”

पर मेरे अंकल उस समय कहाँ रुकने वाले थे।
उन पर तो जैसे मेरी मम्मी की किसी बात का असर ही नहीं था।

मेरी मम्मी मस्ती में बड़बड़ा रही थीं कि उन्होंने अगले ही पल अपना मुँह बढ़ाकर मेरी मम्मी की चुची पर रख दिया।
और मेरी मम्मी के निप्पल को अपने होठों के बीच दबा लिया।

मेरी मम्मी तो जैसे पागल ही हो गईं।
अंकल कभी मेरी मम्मी के निप्पल को अपने होठों में दबाकर खींच देते।
कभी मेरी मम्मी की पूरी चुची को जैसे कोई आम चूसता है उसी तरह मेरी मम्मी की पूरी की पूरी चुची अपने मुँह में भरकर आम की तरह चूसने लगते।
और कभी-कभी तो मेरी मम्मी की चुची पर हल्के से अपने दाँतों से काट भी देते।

अंकल के इस तरह मेरी मम्मी की चुचियों को चूसने पर मेरी मम्मी तो मानो जन्नत में उड़ने लगी थीं।
अंकल कभी मेरी मम्मी के निप्पल को अपने दाँतों से काटते।
और कभी अपनी जीभ से छेदते।
और कभी मेरी मम्मी की चुची को जितना हो सकता अपने मुँह में भरकर ऐसे चूसते मानो मेरी मम्मी की चुची नहीं कोई दूसरी आम हो पर मेरी मम्मी की चुची से आम की तरह ही मीठा रस निकल रहा हो।

वैसे असली मर्दों को औरतों की चुचियों को चूसने में आम से ज्यादा मजा आता है। इसमें कोई शक नहीं है (मेरे नामर्द बाप को छोड़कर)।

मस्ती से तो मेरी मम्मी पागल हो गई थीं।
पर मेरा दिल तो कर रहा था कि अंदर जाकर मम्मी से कहूँ आप अपनी बाहें अंकल के गले में डाल दो और अंकल को अपने सीने से चिपका लो।
और मम्मी की चुचियाँ अपने हाथों से पकड़ अंकल से खूब चूसवाओ।

पर शर्म के मारे ऐसे नहीं कर पा रहा था।
क्योंकि मैं अंदर जाता तो माँ-बेटे के बीच का पर्दा हट जाता।
मुझे डर लगने लगा था यदि अंकल इसी तरह मेरी मम्मी की चुचियाँ चूसते रहे तो मम्मी कहीं शर्म न छोड़ दें।
और बेशरमों की तरह खुद उन्हें अपनी बाहों में भरकर उनको खुद अपनी चुचियों का रस न पिलाने लगें।

मुझे यकीन भी था अगर अंकल कुछ देर और इसी तरह मेरी मम्मी की चुचियों का रस चूसते रहे तो मेरी मम्मी किसी भी पल शर्म की दीवार को तोड़ देगी।

और मेरा शक सही निकला।
क्योंकि मम्मी ने अपनी दोनों बाहें फैला बिस्तर की चादर को कसकर पकड़ लिया।

अब मस्ती के कारण मेरी मम्मी का कंट्रोल करना बहुत ही मुश्किल हो गया।
मेरी मम्मी की साँसें तेज-तेज चलने लगी थीं।
मेरी मम्मी के मुँह से “आह... आह...”

मेरी मम्मी बिस्तर पर लेटी अपने होठों को काटने लगीं।
अपने मुँह को इधर-उधर झटक रही थीं।
जबकि अंकल मेरी मम्मी की चुचियों को बड़े प्यार से चूस रहे थे।

अंकल के चूसने से मेरी मम्मी की चुचियाँ एकदम से लाल हो चुकी थीं।
मेरी मम्मी के मुँह से बस मेरी मम्मी की सिसकियों के साथ –
“आह योगेश जी... बस कीजिए... रुक जाइए... और नहीं प्लीज दर्द हो रहा है।”

लेकिन अंकल मेरी मम्मी की चुचियों को छोड़ने की बजाय और भी जोर-जोर से चूसने लगे।
वे मेरी मम्मी की एक चुची को चूसते और दूसरी को अपने हाथ में पकड़कर उससे खेलने लगते।
वे बारी-बारी से मेरी मम्मी की दोनों चुचियों को चूसते।

अब मेरी मम्मी भी पागल हो उठी थीं।
आखिर मेरी मम्मी भी एक औरत ही थीं।
कब तक अपने यार योगेश जी के इस तरह मेरी मम्मी की चुचियों को चूसने पर अपने आप को कंट्रोल कर पातीं।

मेरी मम्मी की टाँगों के बीच मेरी मम्मी की चुत लगातार पानी छोड़ रही थी।
कि तभी अंकल मेरी मम्मी की दोनों चुचियाँ एक साथ मुँह में भरकर चूसने लगे।

मुझे ऐसा लगा जैसे मम्मी मन में बोल रही होंगी –
“योगेश जी अब रुक जाइए। बस एक बार पहले मुझे चोद दीजिए। फिर जितना आपका दिल करे मेरी चुचियों को चूस लीजिए।”

पर मैं जानता था मेरी मम्मी शर्म के कारण ऐसे बोल नहीं सकती थीं।

मेरी मम्मी की चुचियों को इस तरह चूसकर मेरी मम्मी को इस हद तक गरम करने पर मैं समझ गया था कि अंकल मम्मी के मुँह से कहलवाना चाहते हैं “मुझे चोदो”।
लेकिन मम्मी अपने आप पर पूरा कंट्रोल करके रखी थीं।

अब इस खेल में मेरी मम्मी को आज पूरा मजा मिलने वाला था जो 20 साल पहले मेरे नामर्द बाप के साथ हुई सुहागरात में नहीं मिला था।

अब मम्मी को भी भरपूर मजा आ रहा था।
और अंकल की तरफ से ऐसा कुछ न होते देखकर मेरी मम्मी खुद ही नीचे से अपनी चुची उछालकर उनको इशारा करने लगीं कि अब मेरी चुत उनका लंड माँग रही है।

मेरी मम्मी तो मस्ती में नीचे से गाँड उठाकर –
“हाय योगेश जी चूसो मेरी चुची... धीरे से काटो मेरी चुची।”

और अपनी बाहों को अंकल जी के गले में डाल दिया।

मेरी मम्मी मस्ती में आँखें बंद किए –
“आह योगेश जी प्यार से... धीरे से काटिए नहीं बस धीरे से मुँह में भर खींचिए... ऐसे ही।”

मेरे अंकल जी मेरी मम्मी की चुचियों का रस चूसते –
“आह वर्षा कितना रस भरा है इनमें। दिल करता है तुम्हारे इन दूसरी आमों का मीठा रस पीता ही रहूँ।”

मम्मी ने जैसे ही अपनी आँखें खोलीं मेरी मम्मी की आँखें अंकल की आँखों से जा मिलीं।
और अंकल की आँखों से आँख मिलते ही मेरी मम्मी ने शर्म से अपनी आँखें झुका लीं।
पर अंकल अपने होठों को मेरी मम्मी की चुचियों से नहीं हटाया।

मेरे अंकल मेरी मम्मी की चुचियों के साथ ऐसे चिपके हुए थे जैसे शहद के साथ कोई मधुमक्खी हो।
और मेरी मम्मी की चुचियों को चूसते बोले –
“वर्षा मेरी डार्लिंग आई लव यू।”

अब मेरी मम्मी भी अंकल के साथ सुहागरात में पति-पत्नी के संबंध बनाने के लिए आगे बढ़ रही थीं।
हालाँकि पिछले 6 महीनों से लगातार मम्मी चुद रही हैं अंकल से।
लेकिन आज तो सुहागरात मनाने जा रही हैं।

और अंकल ने कहा है सुहागरात में सब पहली बार होता है।
और मम्मी भी ये जानती होंगी आज अंकल के साथ उनकी सुहागरात यादगार बनने वाली है।

क्योंकि जिस तरह का मजा उन्होंने मेरी मम्मी को अभी तक दिया शायद वैसा मजा मेरे नामर्द बाप तो कभी दे ही नहीं सकते।
इसलिए 20 साल पहले तो नाम की सुहागरात हुई थी।
असली सुहागरात तो 20 साल बाद आज हो रही है मम्मी की योगेश अंकल के साथ।
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#35
**अपडेट 32**

अंकल के द्वारा मेरी मम्मी की चुचियाँ चूसे जाने पर मेरी मम्मी तो मानो सातवें आसमान में थीं।
कमरे में तो बस मेरी मम्मी की मस्ती भरी कराहने की ही आवाजें और मेरी मम्मी की चूड़ियों के खनकने की आवाजें ही आ रही थीं।

मेरी मम्मी ने भी अपने हाथों को अंकल के बालों पर कस लिया।
मेरी मम्मी की चुचियों पर अंकल के काटने से लाल-लाल निशान मेरी मम्मी की चुचियों पर पड़ गए थे।
मेरी मम्मी की चुचियों पर अंकल ने लव बाइट के निशान बना दिए थे।

इस समय मम्मी-अंकल दोनों काम क्रिया में एकदम से खोए हुए एक-दूसरे से लिपटे हुए थे।
कि तभी अंकल उठे और मैंने देखा कि वे नीचे की ओर चले गए।
और मेरी मम्मी के पैर को पकड़कर मेरी मम्मी के पंजों को चाट रहे थे।
मेरी मम्मी के पैरों की उनकी उँगलियों को चाट रहे थे।
और कभी मेरी मम्मी के पैरों की उँगलियों को अपने मुँह में भरकर चूस रहे थे।

मेरी मम्मी वैसे ही पड़ी रहीं तो अंकल धीरे-धीरे ऊपर की ओर बढ़ रहे थे।
मेरी मम्मी के लहंगे के ऊपर से ही मेरी मम्मी को चूम रहे थे।

बस अब उनका मुँह मेरी मम्मी की चुत के ऊपर से कुछ ही दूरी पर था।
और तभी मेरी मम्मी को झटके का एहसास हुआ।
क्योंकि अंकल ने अपना मुँह मेरी मम्मी की चुत के ऊपर लगा दिया था।

अंकल के होठों और मेरी मम्मी की चुत के होठों के बीच सिर्फ मेरी मम्मी के लहंगे की दीवार थी।
पर ये भी मदहोश करने वाला एहसास था।
मेरी मम्मी पागलों की तरह छटपटाने लगी थीं।

तभी अंकल जी ऊपर की तरफ बढ़े और मेरी मम्मी के नंगे पेट पर अपने गरम होठ रख दिए।
अब पेट को चूमना तो एक बात थी।
पर पेट को चाटना... उफ आपको क्या बताऊँ कि मेरी मम्मी उस समय कैसा फील कर रही थीं।

मेरी मम्मी के पेट को चाटते अंकल फिर नीचे आए।
और फिर मेरी मम्मी के पैरों को चाटते और धीरे-धीरे... उन्होंने मेरी मम्मी के पैरों को चूमते हुए... घुटने तक आ गए।
साथ ही मेरी मम्मी का लहंगा भी ऊपर की ओर खिसकते जा रहे थे।

अंकल मेरी मम्मी की नंगी गोरी मेरी मम्मी की पिंडलियों को चूस रहे थे।
और लिटरली ऐसे चूस रहे थे कि जैसे वो कोई आइसक्रीम हो या लॉलीपॉप हो।
धीरे-धीरे वे मेरी मम्मी के घुटनों तक पहुँच गए थे।

मेरी मम्मी की तो हालत ही खराब होने लगी थी।
अगर अंकल थोड़ा और ऊपर की ओर आएँ तो यही सोचकर मेरी मम्मी को शर्म आने लगी।
तो मेरी मम्मी भी उनको और आगे बढ़ने से रोककर बोलीं –
“बस कीजिए योगेश जी।”

वैसे मेरी मम्मी का अंकल को यह कहना दिल से नहीं बल्कि ऊपर से ही कह रही थीं।
जबकि दिल से मेरी मम्मी यही चाहती थीं कि अंकल आगे बढ़ें।

और दोस्तों मुझे इस बात की पूरी उम्मीद भी थी कि अब अंकल रुकने वाले नहीं थे।
और तू कहूँ मम्मी को भी उम्मीद थी अब अंकल रुकने वाले नहीं हैं।
इसलिए मम्मी ने अंकल से रुकने का नाटक किया था ये बोलकर “बस कीजिए योगेश जी”।

मैं सोच रहा था कि अंकल किसी भी वक्त मेरी मम्मी के लहंगे को और ऊपर खिसका देंगे या फिर उलट देंगे।
तो मेरी मम्मी का सबसे कीमती खजाना उनकी आँखों के सामने बेपर्दा हो जाएगा।
और मेरी मम्मी के उस खजाने को देखकर वे कैसे अपने आप को उस खजाने को लूटने से रोक पाते।
वे तो मेरी मम्मी की तिजोरी में अपनी चाबी लगाकर आज मेरी मम्मी की तिजोरी को खोल देंगे।

(लेकिन वे तो पिछले 6 महीनों से लगातार खोल रहे हैं पर आज की बात अलग है।
क्योंकि अंकल ने मम्मी की चुत का ऑपरेशन करवाया था जिससे मम्मी की चुत एकदम सील पैक हो जाए।
ये बात मुझे अंकल ने भी नहीं बताई।
लेकिन मुझे मम्मी के पर्स में हॉस्पिटल का स्लिप मिली।
फिर मैंने हॉस्पिटल से इन्क्वायरी की तो पता चला मम्मी की चुत एकदम सील पैक 20 साल की लड़की की तरह हो गई है।
जिसे आज अंकल कुचलेंगे अपने लंड से।)

वैसे अब मेरी मम्मी की टाँगों के बीच जो तिजोरी थी वो उनकी ही चाबी से खुल सकती थी।
अंकल ने मेरी मम्मी का लहंगा पकड़ा तो मुझे लगा कि वे मेरी मम्मी का लहंगा उलटने वाले हैं।
लेकिन मेरी सोच के विपरीत अंकल ने अपना सर मेरी मम्मी के लहंगे के अंदर घुसा दिया था।
और अंकल ने मेरी मम्मी की टाँगें जितनी खोल सकते थे खोल दीं।
और अपना सर पूरा मेरी मम्मी के लहंगे के अंदर घुसा दिया था।

इस स्थिति में वे खाली मेरी मम्मी की चिकनी मक्खन जैसी जाँघों के अंदरूनी हिस्से को ही चाट पा रहे थे।
और हल्के-हल्के से काट रहे थे।
क्योंकि मुझे दिख तो नहीं रहा था लेकिन मम्मी की दर्द की आवाज आती है “ओओ... ओह” जिससे पता चलता है अंकल ने काटा होगा।

अब मेरी मम्मी की जाँघें थीं भी तो एकदम चिकनी मक्खन के जैसे और एकदम गोरी।
अंकल के द्वारा मम्मी को अपनी जाँघें चाटने में जो सेंसेशन मेरी मम्मी को हुई थी उसका जवाब नहीं था।
क्योंकि इसकी खुशी मम्मी के चेहरे से पता चल रही थी।
ये मम्मी का पहला अनुभव नहीं था लेकिन सुहागरात में तो पहला ही अनुभव था।
इसलिए मेरी मम्मी इतना रोमांचित फील कर रही थीं।

अंकल मेरी मम्मी की जाँघों के हर हिस्से को चाट रहे थे और चूस रहे थे।
और कभी मेरी मम्मी की चिकनी जाँघों को मुँह में भरकर खींच देते हल्के से काट देते।
और फिर अंकल धीरे-धीरे मेरी मम्मी की जाँघों के अंदरूनी भाग तक पहुँच गए जहाँ मेरी मम्मी की पैंटी की बाउंड्री लाइन शुरू हो रही थी।

और वहाँ पर अपने होठों से काटना चालू कर दिया था।
अब वे जाँघों के जोड़ पर जाकर किस कर रहे थे।
और ये वो जगह थी जहाँ से मेरी मम्मी की कच्छी की बाउंड्री स्टार्ट होती है।
क्योंकि मैं अनुमान लगा रहा था क्योंकि बाहर से देखने पे ऐसा लग रहा था जैसे मेरी मम्मी के लहंगे के अंदर कोई तकिया छुपा रखा हो।

और पहले तो अंकल ने अपनी जीभ निकालकर साइड से मेरी मम्मी की कच्छी में डालने की कोशिश की।
मेरी मम्मी को उस समय बड़ी शर्म आ रही थी कि अंकल जी का मुँह मेरी मम्मी के लहंगे में ही।
वे मेरी मम्मी की गीली चड्डी को देखकर बोले –
“वर्षा तेरी पैंटी तो पूरी गीली है।” (ये मुझे सुनाई दी अंकल की आवाज)

फिर अंकल ने अपने होठों को मेरी मम्मी की कच्छी के ऊपर से मेरी मम्मी की चुत पर रख दिया।
और पहली बार मेरी मम्मी के मुँह से एक भयंकर सिसकी निकल गई।

अब मुझे ऐसा लग रहा था कि अंकल मेरी मम्मी की गीली पैंटी के ऊपर अपने होठों को रखकर चलाने लगे।
अंकल के होठों और गरम साँसों को मम्मी अपनी चुत के ऊपर पाकर तो मेरी मम्मी की चुत और भी तेजी से पानी छोड़ने लगी थी।
जिससे कि मेरी मम्मी की चुत के रस से मेरी मम्मी की पैंटी पानी से बुरी तरह से गीली हो उठी थी।

अंकल बोले –
“वर्षा ये तो और ज्यादा पानी छोड़ रही है। देख कैसे तेरी चुत से झरना बह रहा है।”

तो मम्मी शर्मा गईं।
और अंकल ने मेरी मम्मी की पैंटी के ऊपर अपने होठ टिकाकर मेरी मम्मी की चुत के रस को चूस रहे थे।

मेरी मम्मी की चुत पूरी तरह मेरी मम्मी की पैंटी से ढकी हुई थी।
और अंकल जी को कहीं से भी मेरी मम्मी की नंगी चुत का एहसास नहीं हो रहा।

मेरे अंकल मेरी मम्मी की गीली पैंटी को अपने मुँह में दबाए उसमें से मेरी मम्मी के रस को चूस रहे थे।
मानो वो मेरी मम्मी की चुत के रस को बल्कि कोई अमृत को चूस रहे हों पी रहे हों।

तभी अंकल ने किसी तरह अपना एक हाथ मेरी मम्मी की पैंटी के अंदर डाला।
और मेरी मम्मी की चुत में से मेरी मम्मी की पैंटी को साइड किया।
और जैसे ही उन्होंने मेरी मम्मी की नंगी चुत पर अपने होठ रखकर किस किया मेरी मम्मी फड़फड़ा उठी थीं।

ये सब मैं अनुमान लगा रहा था क्योंकि मुझे कुछ दिख नहीं रहा था।

मम्मी दीवार पे टंगी घड़ी की तरफ देख रही थीं।
मैं समझ गया था मम्मी सोच रही हैं टाइम बहुत हो गया है।
लेकिन अंकल ने अभी तक उनको पूरी नंगी नहीं किया।
पर वे जानती हैं कि आज अंकल उनके साथ सुहागरात जरूर मनाएँगे।
इसलिए तो उन्होंने खुद अपनी सुहागरात के लिए मम्मी की चुत को शेव करके चिकना किया हुआ था।

अंकल तो मेरी मम्मी की चिकनी चुत को चूम रहे थे और चाट रहे थे।

अंकल जैसे-जैसे मेरी मम्मी की चुत चाट रहे थे मेरी मम्मी के बदन में जोरों से गुदगुदी होने लगी।
उत्तेजना के मारे मेरी मम्मी का बुरा हाल था।
और क्या मजा आ रहा था कि मम्मी बड़बड़ा रही थीं –
“प्लीज योगेश जी इसे छोड़ दो... उसे प्लीज छोड़ दो...”

पर उनका मुँह तो मेरी मम्मी की चुत पर लगा हुआ था।
और मेरी मम्मी की कमर न चाहते हुए भी हिल रही थी।

मेरी मम्मी के हाथ खुद-ब-खुद अंकल के सिर पर फिर रहे थे।
अभी भी उनका सिर मेरी मम्मी के लहंगे के अंदर घुसा हुआ था।
और मेरी मम्मी का लहंगा मेरी मम्मी के घुटनों तक था।

मेरी मम्मी को परम सुख की अनुभूति हो रही थी।
मेरी मम्मी धीरे-धीरे अपने पड़ाव तक पहुँच रही थीं।
और जैसे-जैसे मेरी मम्मी झड़ने के करीब थीं वैसे-वैसे मेरी मम्मी की सिसकारियाँ ऐसे बढ़ रही थीं।

मेरी मम्मी खुद अपने हाथ से उनका सिर अपनी चुत पर दबाए नीचे से अपनी कमर को उछाल रही थीं।

मेरी मम्मी की सिसकारियाँ इतनी जोर-जोर से निकल रही थीं मानो बाहर के लोगों को लगे मेरी मम्मी अपनी सिसकारियाँ सुना रही हैं कि अंदर कमरे में मेरी मम्मी के साथ क्या हो रहा है।

और अंकल मेरी मम्मी की चुत इस तरह चाट रहे हैं।
और तभी मम्मी को ऐसा फील हुआ कि जैसे मेरे अंदर से कुछ गरम सा लावा बाहर निकल रहा है।

ऐसा एहसास तो मेरी मम्मी को पहले भी पिछले 6 महीनों से हो रहा है।
लेकिन सुहागरात में पहली बार।
जब मम्मी अपने चरम पर थीं तो मम्मी के मुँह से ऐसी भयंकर सिसकारी निकल रही थी कि उसको यहाँ शब्दों में बयान नहीं कर सकता हूँ।
उफ्फ...

ऐसा लग रहा था कि मम्मी के जीवन में आज पहली बार किसी ने इतने जबरदस्त तरीके से मम्मी की चुत को चाटा हो।
और मम्मी को चुत चटवाने में इतना मजा आया कि उन्हें आज पता चला हो चुत चुदवाने से ज्यादा तो चटवाने में मजे हैं।

और पता नहीं कैसे मेरी मम्मी अपनी शर्म को छोड़कर अंकल का सिर अपनी चुत पर दबाए अपने चूतड़ों को जोर-जोर हिला रही हैं।

आप लोगों ने जिन्होंने सेक्स का अनुभव किया होगा उन्हें पता होगा कि जब औरत अपने चरम पर पहुँचती है तो वो कितनी भयंकर हो जाती है।

लेकिन अंकल अभी भी मेरी मम्मी की चुत को चाटने में लगे हुए थे।
और अब मुझे ऐसा एहसास हो रहा था कि मेरी मम्मी की जान ही बाहर न निकल जाए।
और मुझे ऐसा एहसास हो रहा था कि जैसे मेरी मम्मी जन्नत में हैं।

मेरी मम्मी अब खुद ही नीचे से अपनी गाँड उठा-उठा कर अपने यार योगेश अंकल को अपनी चुत चटा रही थीं।
और सिर पकड़कर खुद ही अपनी चुत पर दबा रही थीं।

मुझे गजब की फीलिंग थी।
अब मेरी मम्मी के हाथ-पाँव में जान नहीं बची थी।
और अंकल अभी भी मेरी मम्मी की चुत पर चिपके हुए थे।
और मेरी मम्मी को अभी भी हल्का-हल्का मजा आ रहा था।

अंकल अभी भी जिस तरह मेरी मम्मी की चुत से चिपके हुए थे मुझे ऐसा फील हो रहा था कि उन्होंने कभी चुत देखी ही नहीं हो।
वे भूल गए थे वो किस चुत पे लगे हुए।
वो पिछले 6 महीनों से उन्हीं की है।
वे अभी भी एक पालतू कुत्ते की तरह मेरी मम्मी की चुत को चाटने में लगे हुए थे।

और मेरी मम्मी लंबी-लंबी साँसें ले रही थीं।

(और हो भी क्यों न। आज मेरी मम्मी अपनी 20 साल पहले सिर्फ नाम की सुहागरात मनाई थी।
और अब 20 साल बाद असली सुहागरात मना रही हैं 33 साल की उम्र में।
एक कुँवारी लड़की की तरह अपनी चुत का ऑपरेशन करवाकर एकदम टाइट सील पैक चुत को अंकल के लंड से कुचलवाकर।
आज अपनी जवानी को मजा ले रही हैं।
और बिल्कुल 18 साल की लड़की लग रही हैं मेरी मम्मी।
कोई नहीं कह सकता वो एक 19 साल के बेटे की मम्मी और 33 की हैं।
वो 18 साल की कच्ची कुँवारी लड़की लग रही थीं।
आज मम्मी शादी के बाद असली सुहागरात मना रही हैं एक गैर मर्द के साथ।
वो भी उसके बेटे की मदद से।)

अंकल अपनी जीभ को मेरी मम्मी की चुत के हर एक कोने तक पहुँचाना जैसे उनका मकसद रहा हो।
और जब औरत को ऑर्गेज्म होता है और उसके बाद भी कोई उसकी चुत से चिपका रहे तो एक मध्यम आनंद की अनुभूति होती है जो उस समय मेरी मम्मी को महसूस हो रही थी।

ऐसा मजा मेरी मम्मी को सुहागरात में पहली बार मिला था।
और अंकल की दीवानी सी हो गई थीं।

कुछ देर बाद अंकल मेरी मम्मी के लहंगे से बाहर निकले।
मम्मी ने जैसे उनका चेहरा देखा तो मेरी मम्मी को एक हल्की सी हँसी आ गई।
क्योंकि उनके आधे से ज्यादा मुँह पर मेरी मम्मी का रस फैला हुआ था।
और थोड़ा बहुत उनके मुँह से नीचे टपक रहा था।

अंकल अपने होठों पर अपनी जीभ फेरते तो मेरी मम्मी शर्म से उनको रोकने लगीं।
तो अंकल बोले –
“नहीं वर्षा ये तो बड़ा ही टेस्टी है। जानती हो इसको पीने से मेरे अंदर कितनी एनर्जी का संचार हुआ।
इसको पीकर तो मैं अपने आप को कितना तंदुरुस्त और जवान महसूस करने लगा हूँ।”

जब अंकल और मम्मी दोनों की आँखें मिलीं तो वे दोनों ही मुस्कुरा दिए।
वे धीरे-धीरे मेरी मम्मी की तरफ बढ़े और अचानक मेरी मम्मी के होठ पर किस कर दिया।
मेरी मम्मी को बड़ा अजीब सा महसूस हुआ।

अंकल मेरी मम्मी के बगल में लेटे मेरी मम्मी को चूम रहे थे।

अंकल मम्मी को चूम रहे थे।
और धीरे-धीरे से अपने हाथ को मेरी मम्मी के पेट पर ले जाकर मेरी मम्मी की नाभि में एक-दो बार उँगली डाल रहे थे।
फिर उन्होंने अपने एक पैर से मेरी मम्मी के दोनों पैरों को दबाते हुए।
और अपनी उँगली मेरी मम्मी के लहंगे के नाड़े में फँसाई।
और मेरी मम्मी के लहंगे के नाड़े का सिरा ढूँढने लगे।

और जैसे ही उनके हाथ में मेरी मम्मी के लहंगे का सिरा आया तो उन्होंने फटाक से मेरी मम्मी के लहंगे का नाड़ा खींच दिया।
मेरी मम्मी का लहंगा खुला हुआ मेरी मम्मी के बदन पर पड़ा हुआ था।

कि तभी योगेश अंकल नीचे आए और मेरी मम्मी के लहंगे को मेरी मम्मी के पैरों से निकालने लगे।
लहंगा मेरी मम्मी के नीचे दबा हुआ था जिससे वो मेरी मम्मी के पैरों से निकल नहीं रहा था।

तो अंकल एक शरारती स्माइल के साथ मेरी मम्मी की ओर देखने लगे।
और मेरी मम्मी ने शर्माकर अपनी गाँड थोड़ी सी ऊपर उठा दी।
और तभी अंकल ने झट से मेरी मम्मी का लहंगा खींचकर मेरी मम्मी के पैरों से निकाल दिया।

मेरी मम्मी के लहंगे को अंकल मेरी मम्मी के सामने अपने हाथों में पकड़े थे।
और मेरी मम्मी नीचे लेटी शर्माती उनको देख रही थीं।
और उन्होंने मेरी मम्मी की आँखों में देखकर मेरी मम्मी के लहंगे को चूमते हुए नीचे फेंक दिया।

जो लहंगा अभी कुछ क्षण पहले मेरी मम्मी की कमर के साथ लिपटा था अब वो लहंगा जमीन पर पड़ा था।

मेरी मम्मी के लहंगे को मेरी मम्मी के बदन से निकालने के बाद अंकल मेरी मम्मी के ऊपर से उठ खड़े हुए।
और मेरी मम्मी की ओर एक शरारती मुस्कान के साथ मेरी मम्मी की आँखों में देखते और मुस्कुराते हुए मेरी मम्मी की आँखों के सामने ही।
अपना पायजामा के नाड़े को खींचकर खोलने लगे।

अंकल के सीने में घने काले बाल... जाँघों पे घने काले बाल...
और लंड एकदम तना हुआ था जैसे कि अभी उनका अंडरवियर फाड़कर बाहर आने को बेताब हो।

मेरी मम्मी की तो नजर ये सब देखकर शर्मा गई।
लेकिन मन में एक राहत की बात थी मेरी मम्मी के लिए कि अंकल जी का लंड बहुत ही दमदार था।
क्योंकि मम्मी उसे पिछले 6 महीनों से ले रही थीं।
मम्मी को इस बात की तसल्ली थी कि अंकल अपने इस लंड से मेरी दमदार चुदाई करेंगे।
उन्हें तड़पाने नहीं पड़ेगा जैसे 20 साल पहले सुहागरात में तड़पी थीं।

पिछले 20 साल से रातों को अपने हाथों की उँगलियों से अपनी चुत की आग को ठंडा करती आ रही थीं।
पिछले 6 महीनों तक मम्मी ने 19 साल तक उँगलियों का ही सहारा लिया था।
लेकिन पिछले 6 महीनों से उन्हें अंकल का दमदार लंड मिल रहा था।

अंकल का लंड एकदम कड़क बिल्कुल कुतुब मीनार की तरह खड़ा था।

सच में कोई लड़की अपने पति का ऐसे लंड देखकर खुशी से पागल हो सकती है।
और मम्मी भी किसी लड़की से कम नहीं।
वो आज भी एक लड़की ही हैं।
वो तो उनकी कम उम्र में 20 साल पहले शादी कर दी थी।
नहीं तो आजकल तो 33 साल की लड़कियाँ ही होती हैं।
आजकल तो 33 साल की लड़कियों की शादी होती है।
पर मम्मी की शादी 20 साल पहले हो गई थी।
लेकिन मम्मी अब अपनी असली सुहागरात 33 साल की उम्र में मना रही थीं।

और मम्मी को एक खुशी इस बात की भी थी कि अंकल का लंड मम्मी के लिए ही है।
और उनके बेटे ने ही योगेश के लंड पे उसकी मम्मी का नाम लिखवाया है “वर्षा”।
और मम्मी की चुत पे भी अंकल का नाम लिखा था “योगेश”।

अंकल का लंड मेरी मम्मी के लिए अपना सिर उठाकर खड़ा था।
हाय राम अंडरवियर में से अंकल जी का मस्त घोड़े जैसे लंड देखते ही मेरी मम्मी की हालत खराब होने लगी थी।

क्योंकि मम्मी अंकल के लंड को जानती थीं।
और आज उनकी चुत एक कुँवारी कन्या की तरह थी।
एकदम सील पैक।
ऑपरेशन से मम्मी को ऐसा लग रहा था अंकल का लंड का गुस्सा मेरी चुत की क्या हालत करेगा।
बेचारी सील पैक चुत का क्या हाल होगा।

मम्मी के बदन को यदि अंकल की जगह कोई और होता तो मम्मी के बदन को मेरी मम्मी की चिकनी जाँघ देखकर उस पर ही अपना माल छोड़ देता।
लेकिन मैं अंकल को जानता था और मम्मी भी।
इसलिए मम्मी की आँखों में डर भी दिख रहा था।
क्या आज अंकल का सांड जैसा लंड उनकी फूल जैसी सील पैक चुत की क्या हालत करेगा।

मुझे तो लग रहा था मम्मी की सील पैक चुत अंकल का लंड नहीं खेल पाएगी।
और एक तरफ ये भी पता था मम्मी की चुत पिछले 6 महीनों से लंड ले रही है।
लेकिन आज चुत सील पैक थी।

शायद मम्मी भी यही सोच रही थीं क्या अब उनके इस मूसल लंड को झेल पाऊँगी.. बिस्तर पर उनका साथ अच्छे से दे भी पाऊँगी या नहीं।
फिर मम्मी शर्म से दूसरी तरफ देखने लगीं।

तो अंकल आकर बेड पर मेरी मम्मी के साथ लेट गए।
अब मेरी मम्मी और अंकल बेड पर सिर्फ अंडरवियर में ही लेटे थे।

बिस्तर का तो हाल तो बेहाल था.. चादर पूरी खिंची हुई थी.. फूल बिखरे हुए.. कुछ जमीन पे..
ये सब देख के कोई भी बोल सकता है.. कि किसी “मर्द और औरत की बीच यहाँ अभी जबरदस्त चुदाई हुई है”।
जबकि सच्चाई यह कि चुदाई हुई नहीं सिर्फ चुसाई हुई जिसमें ये हाल।

अंकल मेरी मम्मी के बगल में लेटकर मेरी मम्मी को अपनी बाहों में भरकर चूमने लगे।
अब वे दोनों के नंगे बदन एक-दूसरे से चिपके हुए थे।

मेरी मम्मी अपने चिकने बदन से अपने यार योगेश जी के सख्त बदन पर घने बालों की रगड़ मेरी मम्मी के बदन में एक अलग की उमंग दिल में उठ रही थी।
मेरी मम्मी की साँसों की गति और भी तेज हो गई थी।

अंकल ने अपना चेहरा मेरी मम्मी के चेहरे पर झुकाया।
और अपने होठों को मेरी मम्मी के होठों की ओर बढ़ाने लगे।
तो मेरी मम्मी ने उत्सुकता से अपने होठों को उनके होठों की ओर बढ़ा दिया।

मेरी मम्मी को इस कदर गरम देखकर तो अंकल मेरी मम्मी के होठों को अपने होठों में दबाकर फिर से उनका रस चूसने लगे।
मेरी मम्मी और अंकल के होठों से होठ, छातियों से छातियाँ, मेरी मम्मी की चुत के ऊपर उनका लंड, पैरों से पैर रगड़ रहे थे।

मम्मी-अंकल दोनों के बदन एक-दूसरे के साथ ऐसे चिपके जैसे कि दो बदन न होकर एक ही हों।
मेरी मम्मी की चुचियाँ योगेश अंकल जी की चौड़ी छाती में दबी हुई थीं।

उनका एक हाथ मेरी मम्मी के गोल-मटोल चूतड़ पर था जिस पर वे प्यार से थप्पड़ मार रहे थे।
और अपने दूसरे हाथ को मेरी मम्मी के हाथ पर रखा।
और मेरी मम्मी का हाथ थामकर उसको अपने अंडरवियर में खड़े लंड पर रखकर उसको थमा दिया।

मम्मी अपने हाथों में मर्द के लंड के एहसास से ही मेरी मम्मी उत्तेजित होने लगीं।
कुछ देर तक अंकल ऐसे ही अपने लंड के इर्द-गिर्द मेरी मम्मी के हाथ को थामे रहे।
और फिर मेरी मम्मी के हाथ से ही अपने लंड को सहलाने लगे।

कुछ देर अंकल मेरी मम्मी के हाथ को पकड़कर अपना लंड सहलाते रहे।
और जब उन्होंने देखा मेरी मम्मी खुद ही उनका लंड सहला रही हैं तो उन्होंने मेरी मम्मी का हाथ छोड़ दिया।

अब मेरी मम्मी को भी अंकल का लंड सहलाने में मजा आ रहा था।
क्योंकि इस उम्र 47 साल में भी अंकल का लंड एक लोहे की रॉड की तरह था जो पिछले 6 महीनों से मम्मी को सुख दे रहा था।
अंकल का लंड एकदम असली मर्द का लंड मेरे नामर्द बाप की तरह नहीं।

मेरी मम्मी अपना हाथ अच्छी तरह से अंकल के लंड पर घुमाकर उनके लंड की लंबाई और मोटाई का जायजा लेने लगीं।
हालाँकि मम्मी को इसकी बाप पता थी फिर भी वे मेरे नामर्द बाप से तुलना कर रही थीं।
क्योंकि आज सुहागरात है और ये उनकी दूसरी सुहागरात है।

पहली सुहागरात मेरे नामर्द बाप के साथ 20 साल पहले जिसकी लंड की माप लंबाई 2 इंच मोटाई आधा इंच जो कि एक बच्चे की लिल्ली होती है।
और अंकल की माप 9 इंच लंबा और 4 इंच मोटा।
यदि कहूँ तो अंकल के लंड के मुकाबले पापा का लंड ना के बराबर है।

और जिस भी औरत को पता हो कि उसके पति का लंड इतना जबरदस्त है वो कितनी खुश होती ये आप अच्छी तरह से जानते हैं।

अंकल तो मेरी मम्मी को अंडरवियर के ऊपर से ही अपने लंड के आकार का एहसास करा रहे थे कि उनका लंड कितना कड़क और दमदार है इस उम्र में भी।
क्योंकि वे 47 के मम्मी 33 की।
वे जानते हैं सब कुछ पहले से हो रहा है।
पर उन्होंने मम्मी को कहा था सुहागरात में सब कुछ पहली बार होता है।
इसलिए मम्मी भी अनजान बनते हुए सब कुछ पहली बार कर रही थीं।

मेरी मम्मी को तो उसी समय ये फील हो गया था कि आज इस लंड से उनकी कितनी जबरदस्त ठुकाई होने वाली है।
और होगी भी।
क्योंकि अंकल का लंड सुहागरात मनाने के लिए पिछले 2 दिन से शांत बैठा था।
आज अपना सारा गुस्सा मेरी मम्मी पर निकालने वाला था।
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#36
**अपडेट 33**

मेरी मम्मी को चूमते अंकल ने अपना एक हाथ मेरी मम्मी की पैंटी में डाल दिया। तो मेरी मम्मी ने भी मस्ती में अपनी टाँगों को पूरी तरह से खोल दिया ताकि वे आज अच्छी तरह से मेरी मम्मी की चुत को सहला सकें उसका मजा ले सकें।

अंकल उस समय कहाँ उस मौके को अपने हाथ से जाने देने वाले थे। उन्होंने मेरी मम्मी की कामरस से गीली चुत में अपनी उँगली को डालकर अंदर-बाहर करने लगे।

मेरे नामर्द बाप के बाद अंकल दूसरे मर्द थे जिन्होंने मेरी मम्मी को छुआ। पिछले 6 महीनों से मम्मी पे अंकल का कब्जा था और 19 साल तक मेरे नामर्द बाप। और तू कहूँ कानूनी तौर पर तो आज भी मेरी मम्मी पे उस नामर्द का ही अधिकार है। पर उस नामर्द मादरचोद ने कभी मेरी मम्मी को मसला नहीं और मसलेगा भी कैसे उसके लंड में दम भी नहीं थी और पता नहीं मैं कैसे पैदा हो गया उसकी लिल्ली से।

मेरी मम्मी एक अप्सरा हैं और उनके लिए ही एक ही मर्द है वो हैं अंकल योगेश अंकल। मेरी मम्मी को पहला मर्द नामर्द मिला और दूसरा असली मर्द योगेश अंकल जिनका हाथ मेरी मम्मी की चुत पर घूम रहा था।

मेरी मम्मी मस्ती में आकर खुद ही अंकल के होठों को अपने होठों में दबोच लिया। मस्ती में मेरी मम्मी को अब इस बात का भी एहसास नहीं था कि सुहागरात में एक औरत हमेशा शर्माती है, शर्म ही औरत का गहना होता है, औरत पहल नहीं करती है, सिर्फ मर्द ही पहल करता है, औरत कठपुतली होती है, औरत मर्द की इच्छा पूरी करती है और अपनी इच्छा पे कंट्रोल करती है।

लेकिन मुझे लग रहा था कि अंकल की इन्हीं हरकतों की वजह से मेरी मम्मी उनसे पहले ही अपने ऊपर अपना कंट्रोल न खो दें और खुद ही उन्हें एक औरत की शर्म का जो पर्दा होता है उस पर्दे की दीवार को न तोड़ दें।

मुझे अब यकीन हो गया था मम्मी उस शर्म के पर्दे की दीवार को तोड़ने के लिए मजबूर हो चुकी हैं। लेकिन ये भी जानता था मम्मी कंट्रोल कर लेगीं।

कुछ देर ऐसे ही मेरी मम्मी की चुत के साथ खेलने पर अंकल मेरी मम्मी को अपनी बाहों में फिर से भर लिया और मेरी मम्मी की आँखों में आँखें डालकर देखने लगे। तो मेरी मम्मी को उनके इस तरह देखने पर बहुत ही शर्म महसूस हो रही थी। मेरी मम्मी का पूरा बदन पसीने से गीला हो गया था। मेरी मम्मी के बाल बिखरकर मेरी मम्मी के चेहरे पर आ चुके थे।

तो अंकल मेरी मम्मी के चेहरे पर झुके अपनी उँगली से मेरी मम्मी के चेहरे से मेरी मम्मी के बालों को हटाने लगे। तो मेरी मम्मी के पूरे बदन में एक मीठा सा एहसास होने लगा। तो मेरी मम्मी ने धीरे से कहा –
“योगेश जी क्या कर रहे हैं?”

अंकल : “बस अपनी वर्षा रानी को प्यार कर रहा हूँ।”

अंकल के बदन से पसीने की बूँदें मेरी मम्मी के ऊपर गिर रही थीं। कि अंकल मेरी मम्मी पर झुकते बोले –
“वर्षा कितनी सुंदर और हसीन हो तुम।”

और अपने होठों को मेरी मम्मी की गर्दन पर रखकर कामुक तरीके से मेरी मम्मी को चूमने लगे। तो मस्ती में मेरी मम्मी भी सिसकने लगीं। किसी भी औरत को कोई मर्द ऐसे गर्दन पर अपने गरम होठ रखकर चूमने लगे तो उसका उत्तेजित होना स्वाभाविक है। मेरी मम्मी अपनी बाहें अंकल के गले में लपेटे –
“आह योगेश जी ये क्या कर रहे हैं...”

अंकल : “क्यों वर्षा तुम्हें अच्छा नहीं लग रहा?”

मेरी मम्मी : “ऐसी बात नहीं योगेश जी। बस पता नहीं मुझे क्या हो रहा है।”

मेरी मम्मी इतना बोली ही थीं कि अंकल ने फिर से मेरी मम्मी के होठों को अपने होठों में भरकर चूसने लगे।

फिर अंकल मेरी मम्मी के ऊपर से उठे और नीचे मेरी मम्मी की टाँगों के पास आ गए और मेरी मम्मी का एक पैर उठा लिया। मम्मी के पैर को अपने हाथ में पकड़े मेरे योगेश अंकल ने मेरी मम्मी के पैर के अंगूठे को चूमने लगे और उसको अपने मुँह में भर-भर कर चूसने लगे।

अंकल ने मेरी मम्मी के पैर के अंगूठे और मेरी मम्मी के पैर की उँगलियों को चूसते बोले –
“वर्षा तुम्हारे पैर कितने सुंदर और मुलायम हैं।”

मेरी मम्मी की हालत तो उस समय जल बिन मछली की तरह हो रही थी। अंकल के द्वारा इस तरह मेरी मम्मी के पैरों की उँगलियों को चूसना मेरी मम्मी के अंदर की काम ज्वाला को भड़का रहा था। अंकल मेरी मम्मी के पैरों की उँगलियों को चूसते ऊपर की ओर बढ़ने लगे। उनकी जीभ मेरी मम्मी की पिंडलियों से होते मेरी मम्मी के घुटनों तक आ चुकी थी और अंकल मेरी मम्मी के घुटनों को चूमते ऊपर मेरी मम्मी की चिकनी जाँघों पर अपने होठों की कलाकारी दिखाने लगे।

और वे जैसे ही मेरी मम्मी की जाँघों को अपने होठों में दबाकर काटते मेरी मम्मी मस्ती में मेरी मम्मी ने अपने हाथों से चादर को अपनी मुट्ठी में भींच लिया। मेरी मम्मी की चुत तो और तेजी से पानी छोड़ने लगी। मेरी मम्मी की पैंटी मेरी मम्मी की चुत के पानी से एकदम गीली हो गई थी।

कि तभी मेरी मम्मी के ऊपर से उठे। मेरी मम्मी तो शर्म से लेटी अपनी आँखें भी नहीं खोल पा रही थीं। कि तभी मेरी मम्मी को अंकल का हाथ अपनी पैंटी के इलास्टिक पर महसूस हुआ और वे अपने हाथ को मेरी मम्मी की पैंटी के इलास्टिक में डालने की कोशिश कर रहे थे।

मेरी मम्मी समझ गईं कि अंकल मेरी मम्मी के बदन से आखिरी कपड़ा मेरी मम्मी की पैंटी भी अलग करके उन्हें एकदम नंगी कर देना चाहते हैं और हुआ भी ऐसा ही। अंकल ने जब अपनी उँगलियाँ मेरी मम्मी की पैंटी के इलास्टिक में फँसाकर उसको नीचे खिसकाने लगे तो मेरी मम्मी ने अपना हाथ बढ़ाकर अपना हाथ अंकल के हाथ पर रख उनको रोकने के लिए आँख से इशारा करने लगीं –
“प्लीज योगेश जी ये नहीं... प्लीज इसे मत उतारिए।”

पर अंकल कहाँ मानने वाले थे क्योंकि औरतों का असली खजाना तो उनकी पैंटी के अंदर ही तो होता है और हर मर्द औरत उस खजाने को लूटने के लिए बेकरार रहता है। ठीक वैसे ही मेरी मम्मी का असली खजाना मेरी मम्मी की पैंटी के अंदर ही था और अंकल ने फिर से अपना हाथ मेरी मम्मी की पैंटी के अंदर डाल दिया।

उफ्फ... मेरी मम्मी के मुँह से तो बस ये “आह...” निकल गई। और अंकल मेरी मम्मी की पैंटी को नीचे की ओर खिसका मेरी मम्मी की टाँगों से बाहर निकालने की कोशिश करने लगे। पैंटी मेरी मम्मी के चूतड़ों के नीचे दबी हुई थी।

पता नहीं मेरी मम्मी को क्या हुआ। मेरी मम्मी ने अपने चूतड़ों को थोड़ा सा ऊपर हवा में उठा लिया ताकि वे मेरी मम्मी की पैंटी को आसानी से निकाल सकें और अंकल ने मेरी मम्मी की पैंटी को मेरी मम्मी की टाँगों से निकाल दिया।

और अंकल ने आज सुबह ही मेरी मम्मी के चुत के बालों को एकदम साफ करके मेरी मम्मी की चुत को एकदम साफ-सुथरे मैदान की तरह से चिकना किया हुआ था। एक तो मेरी मम्मी की एकदम चिकनी चुत और उस पर मेरी मम्मी की चुत से निकले पानी से एकदम चमक रही थी। मेरी मम्मी की चिकनी चुत को देखकर अंकल की आँखों में अलग ही चमक आ गई।

अंकल मेरी मम्मी की टाँगों के बीच बैठे थे। अंकल ने पागलों की तरह अपने हाथ मेरी मम्मी की चुत की ओर बढ़ाकर मेरी मम्मी की चुत पे रख दिया और मेरी मम्मी की चुत को सहलाने लगे।
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#37
**अपडेट 34**

मेरी मम्मी की चुत को सहलाते-सहलाते अंकल अपनी उँगली मेरी मम्मी की चुत में डालने की कोशिश करने लगे।तो गलती से या जानबूझकर अंकल की उँगली मेरी मम्मी के दूसरे छेद में घुस गई।
तो मम्मी झट से अंकल जी से बोलीं –

मम्मी : “उई... योगेश जी... वो वाला नहीं...”

मेरी मम्मी का इतना कहना ही था कि मेरे अंकल के चेहरे पर एक शरारत आ गई। और मम्मी से कहने लगे – “वर्षा अगर इस छेद में नहीं तो फिर किस छेद में डालूँ? चलो तुम ही जिस छेद में डालना है वहाँ रख दो।”

मेरी मम्मी तो अंकल की बात का अर्थ समझकर शर्मा गईं। अंकल ने मेरी मम्मी की गाँड से उँगली निकालकर मेरी मम्मी की चुत में इस बार अपनी एक उँगली घुसा दी।
उफ्फ...
योगेश अंकल : “वर्षा जी कितनी टाइट हो गई है ऑपरेशन से तुम्हारी चुत। एकदम कुँवारी लड़की की तरह।”
और अपनी मोटी उँगली को मेरी मम्मी की चुत में पूरा डाल दिया। जैसे ही अंकल ने अपनी मोटी उँगली मेरी मम्मी की चुत में डाली मेरी मम्मी के मुँह से हल्की चीख निकल गई।

अंकल कुछ देर तक मेरी मम्मी की चुत में अपनी उँगली अंदर-बाहर करते रहे।
और फिर अपनी उँगली को मेरी मम्मी की चुत से बाहर निकाल लिया।
और अपनी गीली उँगली को देखने लगे जिस पर मेरी मम्मी की चुत का रस लगा हुआ था।

मेरी मम्मी ने तो शर्म से अपना मुँह तकिए में छुपा लिया। तो अंकल मेरी मम्मी के सामने ही अपनी उँगली को जिस पर मेरी मम्मी की चुत का रस लगा हुआ था उस उँगली को सूँघने लगे।
और फिर अपने मुँह में उँगली डालके चाटने लगे।

अपने यार को इस तरह करते देख मेरी मम्मी ने शर्माकर अपना मुँह दूसरी ओर कर लिया।

अंकल : “हाय मेरी जान तुम्हारा जूस तो कितना टेस्टी है।”

मेरी मम्मी का अब खुद पर से ही कंट्रोल खोने लगा था। मुझे ऐसा लगने लगा कि शायद अंकल चाहते हैं कि मम्मी खुद पहल करें। इसलिए अंकल आगे नहीं बढ़ रहे थे और मम्मी को तड़पा रहे थे।

जबकि मेरी मम्मी अब बेचैन थीं और चाहती थीं कि अंकल अब जल्द से जल्द अपना लंड उनकी चुत में घुसाकर मेरी मम्मी को चोदें।
पर शर्म के मारे मेरी मम्मी ऐसा कुछ बोल नहीं पा रही थीं।

मेरी मम्मी : “योगेश जी प्लीज कंट्रोल...” बस इतना ही बोल पाई थीं कि अंकल बोले –

अंकल : “हाँ मेरी वर्षा रानी मैं जानता हूँ तुम कंट्रोल कर रही हो और तुम आगे नहीं बढ़ोगी।”

जबकि मम्मी तो ये कहना चाहती थीं –
“मैं कंट्रोल नहीं कर पा रही हूँ क्योंकि इस समय मेरी चुत में जबरदस्त आग लगी हुई है और वो आग सिर्फ आपके ही लंड से बुझेगी।”

मम्मी : “नहीं योगेश जी अब कंट्रोल...”

फिर से अंकल बीच में बोल पड़े –

अंकल : “क्या वर्षा तुम कंट्रोल कर रही हो?”

मम्मी : अंकल की आँखों में देख मुस्कुराते हुए धीरे से – “अब कंट्रोल नहीं होगा।”

और मम्मी ने धीरे से शर्माकर अपनी ओर से अंकल को ग्रीन सिग्नल दे दिया कि वे आगे बढ़ें और मैं चुदवाने को तैयार हूँ। मेरी चुदाई करो अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा है। ये मम्मी ने बिना बोले ही अंकल को बता दिया केवल आँखों में देखकर शर्माकर।

मम्मी का इस तरह ग्रीन सिग्नल देने से अंकल भी मम्मी की आँखों में देखते हुए मुस्कुराने लगे।
और मेरी मम्मी के ऊपर से खड़े हुए।

तो मेरी मम्मी उनकी ओर देखने लगीं।
चौड़ा सीना और अंडरवियर में बना तंबू।
मेरी मम्मी की तो नजर वहीं टिकी हुई थी।
क्योंकि आज उनकी सुहागरात थी और मर्द सामने था।

फिर अंकल ने अपनी उँगलियाँ अपने अंडरवियर में फँसा लीं। और वे अपने अंडरवियर को नीचे खिसकाने लगे।

मेरी मम्मी की आँखें तो बस वहीं जमी हुई थीं।
वे अंकल के लंड को पिछले 6 महीनों से ले रही थीं।
फिर आज वे देखने के लिए उतावली हो रही थीं जैसे उन्होंने कभी देखा न हो। आज पहली बार देखने वाली हों। और वैसे भी आज उनकी सुहागरात थी तो सुहागरात में तो पहली बार ही देखते हैं।

जैसे-जैसे अंकल अपना अंडरवियर नीचे खिसकाते जा रहे थे वैसे-वैसे मेरी मम्मी के दिल की धड़कन भी तेज होती जा रही थी।
मेरी मम्मी का हाथ खुद अपनी चुचियों पर चला गया था।
और मम्मी अंकल को देखती बेशरमों की तरह खुद ही अपनी चुचियों को सहला रही थीं।

और जैसे ही अंकल ने अपना अंडरवियर नीचे खिसकाया उनका अजगर के जैसे लंड फनफनाता ऐसे बाहर निकला जैसे बरसों बाद किसी की कैद से आजाद हुआ हो।

सच कहूँ तो मेरी मम्मी की आँखें अंकल का लंड देखकर फटी की फटी रह गईं।
जबकि मम्मी पिछले 6 महीनों से ले रही थीं।
फिर भी आज तो ऐसे देख रही थीं जैसे पहली बार देखा हो।

आपकी मैं पहले ही बता चुका हूँ अंकल का लंड का साइज 9+ इंच लंबा और 4 इंच मोटा।
और अंकल का लंड मम्मी की आँखों के सामने 90 डिग्री के एंगल पर किसी लोहे की रॉड की तरह खड़ा था।

मेरी मम्मी की आँखों के सामने था।
और मेरी मम्मी को देखके ऐसा लग रहा था जैसे वे आज पहली बार अंकल के लंड को इतना भयंकर रूप में देख रही थीं।
और अंकल के लंड को देखकर मेरी मम्मी का मुँह खुला का खुला ही रह गया था।

मुझे भी आश्चर्य हुआ मम्मी को क्या हुआ।
मम्मी तो पिछले 6 महीनों से ले रही थीं फिर भी ऐसे शॉक्ड क्यों हो गईं।

और मम्मी ने अपने मुँह के नीचे ठुड्डी पे हाथ रखकर कुछ सोचने लगीं।
शायद वे अंकल के लंड को लेकर ही सोच रही थीं।
पर इसमें सोचने वाली भी कोई बात नहीं थी क्योंकि उनके लिए अंकल का लंड न्यू नहीं था।
पर सुहागरात में न्यू होता है।

और हाँ इतना जरूर कहूँगा यदि मम्मी की जगह कोई और लड़की या कहूँ कोई औरत भी होती जो रोज लंड खाती हो तो वो डर ही जाती जैसे उसने कोई बहुत बड़ा अजूबा देख लिया हो।
उसे तो अपनी आँखों पे विश्वास ही नहीं होता कि क्या किसी मर्द का इतना बड़ा होता है।
अगर होता है तो कोई औरत इतना बड़ा अपने अंदर कैसे ले सकती है। ये तो मेरे अंदर आगे से जाकर पीछे से निकल जाएगा।
वो मन ही मन में ये सोचकर मैं इतना बड़ा नहीं ले पाऊँगी।

लेकिन एक मर्द का लंड की ताकत ही औरत की खुशी होती है।
औरत की लंड देखकर जितना डर लगता है उससे ज्यादा खुशी भी होती है।

कोई भी लड़की या औरत अगर किसी मर्द का लंड देखकर उसकी लंबाई और उस लंड के कड़कपन देखकर उसके लंड पर सम्मोहित हो जाए तो ये उस मर्द के लिए कितने गर्व की बात है।

मेरी मम्मी के इस तरह लालची नजरों से अपने लंड को देखने पर अंकल एकदम खुश हो गए कि मेरी मम्मी एक जवान औरत या कहूँ एक लड़की 33 साल की जो 21 साल की लगती है कैसे उनके लंड को देखकर खुश हो रही हैं।
और अपनी उम्र से 14 साल बड़े 47 साल के आदमी की मर्दानगी पर मोहित हैं।
और खुश होकर उनसे पिछले 6 महीनों से चुद रही हैं।

(ये अंकल के लिए गर्व की बात है क्योंकि अंकल 47 के मम्मी 33 की।)

और अंकल मेरी मम्मी के सामने ही अपने दमदार लंड पे हाथ फेरते अपने लंड को पकड़कर आगे-पीछे करते हैं।
मेरी मम्मी की आँखों में देखकर मुस्कुराने लगे।
मेरी मम्मी का तो अब शर्म से बुरा हाल था।

अब ये तो पक्का हो गया था कि अब मेरी मम्मी की तड़प खत्म होने वाली है जो कि मम्मी कई घंटों से तड़प रही थीं और अंकल उनको तड़पा रहे थे।
और अब जल्द ही मेरी मम्मी और अंकल का मन से साथ-साथ तन का मिलन होने वाला है।

मेरी मम्मी ने 32 साल की उम्र में शादी।
19 साल और 6 महीने बाद असली आज से 6 महीने पहले पहली बार अपनी लाइफ में किसी संपूर्ण मर्द का लंड देखा था।
उससे पहले तो 19 साल और 6 महीने तक सिर्फ मेरे नामर्द बाप की लिल्ली देखी थी जो कि अंकल के लंड के आगे ना के बराबर थी।

और अंकल का लंड एक काले नाग की तरह फुंकार रहा था।
और हवा में लहराता हुआ मेरी मम्मी को सलामी दे रहा था।

अंकल के लंड को देखकर मुझे ऐसा प्रतीत हो रहा था कि जैसे कोई पागल सांड किसी लहलहाते खेतों के बाहर खड़ा उसे उजाड़ने की तैयारी कर रहा हो।
उसी तरह अंकल ये मूसल लंड मेरी मम्मी की चुत रूपी खेत को पूरी तरह से उजाड़ने की तैयारी कर रहे थे। क्योंकि आज मेरी मम्मी की चुत सील पैक थी ऑपरेशन के वजह से।

और तभी अंकल मेरी मम्मी की दोनों टाँगों को पूरी तरह से खोलकर मेरी मम्मी की दोनों टाँगों के बीच में आ गए।
और मेरी मम्मी की खुली टाँगों के बीच बैठ गए।
और अपना मुँह नीचे लाते हुए अपनी नाक मेरी मम्मी की चुत के करीब ले जाकर मेरी मम्मी की चुत की खुशबू को सूँघने लगे।

और अपने होठों को मेरी मम्मी की चुत के होठों पर रख दिए।
और मेरी मम्मी की चुत के गुलाबी होठों को चूमने लगे।
अंकल के होठ मेरी मम्मी की नंगी चुत पर पाकर मेरी मम्मी तो मस्ती में उड़ने लगीं।

योगेश अंकल मेरी मम्मी की चुत के होठों को कभी अपने होठों में दबाकर चूस रहे थे।
और कभी मेरी मम्मी की चुत के होठों को अपने दाँतों से काट रहे थे।

तभी अंकल ने ऐसी हरकत की न चाहते हुए भी मेरी मम्मी का हाथ उनके सिर पर चला गया।
उन्होंने अपनी जीभ निकालकर मेरी मम्मी की चुत के अंदर डाल दी।

और मेरी मम्मी की चुत में अपनी जीभ को नोकिली बनाकर चाटने लगे।
और अपनी जीभ से ही मेरी मम्मी की चुत को चोदने लगे।

अंकल मेरी मम्मी की चुत को ऐसे चाट रहे थे मानो कोई बच्चा आइसक्रीम चाट रहा हो।
वैसे ही वे मेरी मम्मी की चुत चाट रहे थे।
जबकि उनके हाथ मेरी मम्मी की चुचियाँ मसल रहे थे।

मस्ती में मेरी मम्मी –
“आह योगेश जी बस कीजिए मैं मर जाऊँगी प्लीज...”

मस्ती में आकर मेरी मम्मी ने अपनी दोनों टाँगें उनके इर्द-गिर्द कस लीं।
और उनका सिर अपनी जाँघों के बीच कस लिया।
और खुद ही उनका सिर पकड़कर अपनी चुत पर दबाने लगीं।

मेरी मम्मी के मुँह से मस्ती भरी सिसकारियाँ निकल रही थीं –
“हाय योगेश जी... ये क्या कर रहे हैं... मर गई मैं... हाय योगेश जी प्लीज... मर जाऊँगी मैं...”

पता नहीं उस समय मेरी मम्मी की चुत कितना पानी छोड़ रही थी।
मेरी मम्मी नीचे से अपने चूतड़ों को उठाकर खुद अंकल को अपनी चुत चटवा रही थीं।
और अंकल थे मेरी मम्मी की चुत पर ही अपना मुँह लगाए मेरी मम्मी की चुत से निकले जूस को पी रहे थे।

अंकल मेरी मम्मी के बगल में लेट गए और मेरी मम्मी के होठों को चूमने लगे।
जबकि उनके हाथ मेरी मम्मी की टाँगों के बीच मेरी मम्मी की चुत पर था।

मेरे योगेश अंकल मेरी मम्मी की चुत से निकले रस को चाटकर खड़े हुए।
और मेरी मम्मी की टाँगों के बीच आकर मेरी मम्मी की दोनों टाँगों को पूरी तरह से खोल दिया।

अंकल ने मेरी मम्मी की दोनों टाँगों को पकड़ मेरी मम्मी की टाँगों के बीच थे।
उनका एकदम खड़ा लंड ठीक मेरी मम्मी की चुत के सामने था।
जिसे अंकल पकड़कर मेरी मम्मी की चुत के ऊपर रख दिया।
और अपना मस्त मूसल लंड मेरी मम्मी की चुत पर रखकर रगड़ने लगे।

बस अंकल के एक धक्के के साथ ही मेरी मम्मी और अंकल की पवित्र सुहागरात कंप्लीट होने वाली थी।
मेरी मम्मी अपनी चुत पर अपने यार और मेरे योगेश अंकल का लंड पड़ते ही मम्मी को ऐसा महसूस हो रहा था कि जैसे किसी ने उनकी चुत के ऊपर कोई आग का गोला रख दिया हो।

और मुझे भी ऐसा ही लग रहा था क्योंकि उनके लंड से मेरी मम्मी की चुत का छेद की लाइन सिकुड़ना बंद हो गई थी।

अब पहली बार मुझे इस बात का डर लगने लगा कि मेरी मम्मी की सील पैक चुत जो कि एक बहुत ही छोटा सा छेद है या कहूँ एक बहुत ही छोटी सी लाइन थी उसमें अंकल का विशाल सांड जैसा लंड कैसे घुसेगा।

पहले तो मम्मी का छेद थोड़ा बड़ा होता था लेकिन आज तो एक बहुत ही पतली सी लाइन थी चुत की।
ऐसा लग रहा था कोई 21 साल की लड़की की चुत हो।
और एक 47 साल का सांड का लंड मेरी मम्मी कैसे ले पाएगी अपनी बहुत ही नाजुक फूल जैसी चुत में।

ये तो मेरी मम्मी की चुत को फाड़कर तार-तार कर देगा।
मैं ये सोच ही रहा था कि मैंने देखा अचानक मम्मी सिहर उठीं “उई...”।
और अंकल ने अपना लंड मेरी मम्मी की चुत पे रखकर धीरे से एक धक्का मारा।

ये दूसरा लंड था जिसने मेरी चुत के होठों को छुआ था पिछले 6 महीने से।
लेकिन जो पहला लंड जो मेरी मम्मी ने अपनी चुत में लिया था वो मेरे नामर्द बाप का था जिससे मेरी मम्मी चुदी न चुदी बराबर थी।
असली चुदाई तो उनकी अंकल के ही लंड से 6 महीने पहले शुरू हुई थी।

और 20 साल पहले सुहागरात में तो मम्मी को पता ही नहीं चला सुहागरात हुई भी या नहीं हुई।
लेकिन 20 साल बाद आज जो सुहागरात हो रही है इसमें तो अंकल के लंड ने मेरी मम्मी की चुत को जैसे ही छुआ वो मेरी मम्मी की चुत के अंदर गए बिना ही मेरी मम्मी की दिल की गहराई में बस गया था।

अंकल का लंड इतना बड़ा था मेरी मम्मी की चुत के लिए लग रहा था मम्मी की फाड़ के रख देगा।
और मम्मी एक महीने तक बिस्तर से उठ नहीं पाएंगी।

और जैसे ही अंकल जी ने अपना लंड मेरी मम्मी की चुत पर रखकर हल्का सा धक्का मारा वो स्लिप होकर नीचे की ओर चला गया।
तो अंकल ने उससे फिर से पकड़कर मेरी मम्मी की चुत के ऊपर टिका दिया।
और फिर से एक धक्का मारा।
पर लंड मोटा होने की वजह से फिर स्लिप होकर नीचे की ओर चला गया।

तो अंकल ने मेरी मम्मी से बोले –
“वर्षा तुम पकड़कर लगाओ ना।”

तो मेरी मम्मी इतनी गरम थीं कि उनके कहने पर मेरी मम्मी ने उनका लंड पकड़ा।
ये पहली बार नहीं था कि मम्मी ने अंकल का नंगा लंड अपने हाथ में पकड़ा था।
वे पिछले 6 महीनों से पकड़ रही हैं।

और मैं पूरे यकीन से कह सकता हूँ आज यदि मम्मी की जगह कोई और लड़की अंकल का लंड को अपने हाथों में पकड़ती तो उसे ऐसा लगता जैसे उसने कोई गरम लोहे की पाइप पकड़ ली हो।
पर मम्मी को तो आदत है।
और अंकल का लंड तो मम्मी के हाथों में भी पूरा नहीं आ रहा था।
और पिछले 6 महीनों से भी कभी पूरा लंड मम्मी के हाथों में नहीं आया फिर भी लेती हैं हाथ, मुँह, चुत में।

मम्मी इतनी शर्मा रही थीं कि मुझे विश्वास ही नहीं हो रहा था।
जो मम्मी पिछले 6 महीनों से अंकल की रखैल बनी हुई हैं और आज उन्हीं अंकल के साथ शादी रही हैं।

शर्म के मारे मम्मी की तो हिम्मत ही नहीं हो रही थी कि वे अंकल का लंड पकड़के अपनी चुत पे लगाएँ।
मम्मी तो बस अंकल का लंड पकड़कर लेटी थीं।

अंकल : “क्या हुआ वर्षा? लगाओ ना इसे अपनी चुत पे।”

मम्मी : धीरे से शर्म की वजह से – “बहुत मोटा लंबा है।”

अंकल : “वर्षा पिछले 6 महीनों से ले रही हो फिर भी...”

मम्मी : धीरे से – “आज नहीं। मेरी चुत सील पैक है।”

अंकल : “सील पैक में ही तो मजा आएगा।”

मेरी मम्मी : “नहीं योगेश जी नहीं ले पाऊँगी मैं। ये मर जाऊँगी मैं।”

अंकल : “कुछ नहीं होगा डार्लिंग। ये बताओ क्या आज तक कोई लड़की किसी का लंड लेने से मरी है? बस एक बार थोड़ा सा दर्द होगा फिर तो मजा ही मजा है।”

मम्मी : “लेकिन मेरी सील पैक चुत है। ऑपरेशन के बाद अभी तक लंड नहीं गया।”

अंकल : “जब लड़की पहली बार चुदती है तो उसका पहली बार ही होता है। और जब तुम 20 साल पहले पहली चुदी तब...”

मम्मी : “वो नामर्द था और आप मर्द।”

अंकल : “ठीक है पर हर लड़की की सील पैक होती है और कोई न कोई मर्द पहली बार उसे चोदता है। उसका भी मेरा जैसा ही होता है। फिर तो वो नहीं मरती तो तुम क्यों डर रही हो? मजे लो वर्षा।”

मम्मी : “ठीक है आप सही कह रहे हैं। जब लड़की पहली बार चुत में लंड लेती है तो दर्द होता ही है और कोई मरती भी नहीं है। एक न एक दिन सील पैक वाली लड़की को भी दर्द सहना ही होगा। और आपने मेरी चुत को ऑपरेशन करवाकर इसलिए सील पैक करवाया ताकि आप मुझे दर्द दे सको और मेरी चुत का कचूमर बना सको और मेरी चुत से खून निकालकर इस चादर को लाल कर सको। मेरी आँखों से आँसू निकलें और मैं कई दिनों तक चल ही न पाऊँ।”

अंकल : “हाँ वर्षा। अब लगाओ अपनी चुत पे मेरा लंड।”

और फिर मम्मी ने अपनी चुत के छेद पे अंकल का लंड पकड़के लगाया।
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#38
update 35  

मेरी मम्मी ने अंकल का लंड अपनी चूत पर लगा कर उसे पकड़े रखा ताकि जब अंकल धक्का मार कर अपना लंड मेरी मम्मी की चूत में घुसाने लगे तो कहीं फिर से उनका लंड स्लिप हो कर खिसक न जाए।  

मेरी मम्मी अपने यार योगेश अंकल के नीचे लेटी। अपने होठों को अपने मुँह में कस कर दबा लिया ताकि जब उनका यार योगेश अंकल अपना बाँस जैसा लंड मेरी मम्मी की चूत में घुसाए तो मेरी मम्मी की चीख कहीं बाहर न निकल जाए।  

अंकल अपना लंड मेरी मम्मी की चूत के ऊपर लगा। अंकल ने एक धक्का मारा। उनका लंड का मोटा सुपाड़ा मेरी मम्मी की टाइट सील पैक चूत को चीरता हुआ अंदर तक जा कर रुक गया।  

अंकल जी का डेढ़ इंच से लंबा और बाँस सा मोटा सुपाड़ा मेरी मम्मी की लचीली गुफा जैसी चूत को फैलाता रुका। जैसे मेरी मम्मी और अंकल के बीच एक संपर्क सा पूरा हो गया था। अंकल के लंड का सुपारा ही मेरी मम्मी की चूत में समाए हुए गदर मचा रहा था। दर्द के मारे मेरी मम्मी मुँह से चीख ही निकल गई।  

अगर कोई घर में होता तो मेरी मम्मी की चीख सुन लेता। मुझे ऐसा प्रतीत हो रहा था कि जैसे किसी ने मेरी मम्मी की चूत में कोई कीला ठोक दिया हो।  

इससे पहले कि वो अपने लौड़े को मेरी मम्मी की चूत के ओर अंदर करते, मेरी मम्मी चिल्लाती हुई उनसे बोली।  
आह.... प्लीज...... योगेश..... जी........ रुक जाइए...…..... मर गई..... मि प्लीज इसे बाहर निकाल लीजिए। आप ने एक बार ही पूरे का पूरा अंदर तक घुस दिया।  

अंकल: वर्षा कहाँ पूरा अंदर घुसा ही। अभी तो सिर्फ टोपा ही गया ही। तुम्हारी चूत कितनी टाइट हो गई है ऑपरेशन से।  

जैसे ही अंकल ने मम्मी से कहा कि उनके लंड का सुपाड़ा ही मेरी मम्मी की चूत के अंदर गया है, तो मेरी मम्मी हैरानी से सोचने लगी। क्या अभी सिर्फ सुपाड़ा ही मेरी चूत में गया ही तो दर्द से मेरा ये हाल ही। और जब पूरा लंड झड़ तक अंदर जाएगा तब मेरा क्या हाल होगा।  

यही सोचकर मेरी मम्मी अंकल को आगे बढ़ने से रोकना चाहती थी। पर उस समय अंकल कहाँ रुकने वाले थे।  

अंकल मेरी मम्मी की आँखों में आँखें डाल कर बोले। रानी ये तो स्वर्ग का द्वार ही जो मैंने खोल दिया ही। अब देखा तुझे कितना मज़ा मिलता ही।  

और वो नीचे झुके। अपने होठों को मेरी मम्मी के होठों पर रख कर चूमने लगे।  

मेरी मम्मी का दर्द के मारे बुरा हाल था। मेरी मम्मी चीख भी नहीं सकती थी क्योंकि अंकल ने अपने होठों से मेरी मम्मी के होठों को दबा कर मेरी मम्मी का मुँह पूरी तरह से बंद कर रखा था। जिससे कि मेरी मम्मी चिल्ला भी नहीं सकती थी।  

अंकल मेरी मम्मी की चूत में अपने लंड डाले। मेरी मम्मी के होठों को चूस रहे थे। अपने हाथों से मेरी मम्मी की चुचियों को दबा रहे थे और धीरे धीरे अपनी कमर भी चला रहे थे। जिस कारण मेरी मम्मी को कुछ राहत मिल रही थी।  

मेरी मम्मी को कुछ राहत मिलती देख कर अंकल एक और ज़ोरदार धक्का मेरी मम्मी की चूत पर मारा।  

मुझे तो लगा कि मेरी मम्मी तो जैसे मर ही गई और मेरी मम्मी की साँसें बाहर निकल गई हों। क्योंकि अंकल का ये धक्का इतना ज़ोरदार था कि उनका लंड पूरी तरह मेरी मम्मी की चूत को चीरता हुआ लोहे की पाइप की जैसा सख्त और मेरी कलाई के जितना मोटा लंड मेरी मम्मी की चूत में लगभग ६ इंच तक अंदर तक घुस गया।  

यही वो हद थी जहाँ तक शायद हर मर्द का जाता है। लेकिन मेरे नामर्द बाप का तो कभी गया भी नहीं होगा। हर मर्द का इतना ही जाता होगा। लेकिन अंकल का तो नॉर्मल मर्दों से भी बड़ा था।  

यानी कि हर औरत इतना तो लेती है। लेकिन मेरी मम्मी को तो इससे भी आगे का सफर करना था। मेरी मम्मी को अपनी चूत में अंकल के लंड को लेकर प्यार करना था और ये ही स्पेशल सुहागरात होगी।  

उनका लंड मेरी मम्मी की चूत में कुछ ऐसा फँसा था कि जैसे किसी ने एक टाइट बोतल को किसी कॉर्क से बंद कर दिया हो।  

दर्द के मारे मेरी मम्मी अपने सिर को झटके दे दे कर इधर उधर कर रही थी और अंकल को अपने ऊपर से पीछे को धकेल रही थी। पर मेरी मम्मी अंकल को अपने ऊपर से पीछे हटाने में कामयाब नहीं हो पा रही थी।  

होती भी कैसे। कहाँ मेरी मम्मी हीरानी के जिस्म जैसी पतली सी और अंकल भैंसे के जैसे हट्टे कट्टे। उन्हें मेरी मम्मी के इस दर्द की क्या परवाह।  

आप तो जानते ही कि अगर कोई लड़की किसी मर्द के लंड के नीचे आ जाए तो वो मर्द उसे कैसे छोड़ सकता है। और कल की बात तो ये कि मेरी मम्मी तो चंचल हीरानी से भी ज्यादा ब्यूटीफुल सेक्सी क्यूट नाज़ुक कली थी।  

अंकल मेरी मम्मी के ऊपर अपना लंड मेरी मम्मी की चूत में फँसाए। मेरी मम्मी के ऊपर लेट गए और मेरी मम्मी के होठों को चूसने लगे।  

दर्द के मारे मेरी मम्मी अपने पैरों को अंकल के ऊपर पटकने लगी। मेरी मम्मी के आँखों से दर्द के कारण आँसू रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे।  

मेरी मम्मी की दोनों टाँगें अंकल के कब्जे में थी और मेरी मम्मी के रसीले गुलाबी होठों पर अंकल के होठों का कब्जा था।  

अंकल ये बात अच्छी तरह से जानते थे कि मेरी मम्मी का ये दर्द कुछ देर के लिए ही। और अगर उन्होंने इस समय मेरी मम्मी के दर्द की परवाह की और मेरी मम्मी को छोड़ दिया तो कहीं मेरी मम्मी उनको दोबारा न चढ़ने दे। क्योंकि एक बार चूत चुदने से बच गई तो दोबारा फिर से गरम करना पड़ेगा।  

अंकल धीरे धीरे अपनी कमर को चला कर अपना लंड मेरी मम्मी की चूत के अंदर बाहर कर रहे थे। कि तभी उन्होंने एक और तेज़ शॉट मेरी मम्मी की चूत पर लगा दिया। और अंकल का अपना मूसल लंड मेरी मम्मी की चूत को चीरता हुआ अंदर तक घुस गया।  

मेरी मम्मी की चूत की झिल्ली टूट चुकी थी जो पहले से टूटी थी। लेकिन ऑपरेशंस के कारण फिर से नई बनी थी। वो भी टूट गई क्योंकि उसी झिल्ली के लिए तो ऑपरेशन करवाया था अंकल ने मेरी मम्मी की चूत का।  

और अंकल का फौलादी लंड मेरी मम्मी के अंदर इतनी गहराई तक समा चुका था जहाँ मेरी मम्मी की बच्चेदानी थी। मेरी मम्मी की आँखों से आँसू की धारा बह रही थी। मुझे अब ऐसा लगने लगा था कि आज ही मेरी मम्मी का कौमार्य भंग हुआ ही। मेरी मम्मी की नाथ आज ही टूटी ही।  

(२० साल पहले तो न तो मेरे नामर्द बाप ने मेरी मम्मी का कौमार्य भंग किया था और न ही मेरी मम्मी की नाथ तोड़ी थी। उस मादरचोद ने मेरी मम्मी की चूत में लुल्ली भी पूरी क्या १ इंच भी नहीं घुसाई होगी। पर मैं कैसे पैदा हुआ ये भी मुझे नहीं पता।  

पर वो तो ६ महीने पहले अंकल ने मेरी मम्मी का कौमार्य भी भंग किया था और नाथ भी तोड़ी थी मेरी मम्मी की। और आज भी ऑपरेशन से बनाया गया कौमार्य भी आज अंकल ने फिर से भंग कर दिया और नाथ भी तोड़ दी।  

अंकल ने सही कहूँ तो अंकल न होते तो मेरी मम्मी सारी जिंदगी कुँवारी रहती। शरीर से भले ही दुनिया के सामने वो मेरे पापा की पत्नी है।)  

मेरी मम्मी तो बिल्कुल बेहोशी की हालत में पड़ी थी और अंकल के नीचे लेटी चीख रही ही चिल्ला रही थी। प्लीज योगेश जी, इसे निकाल लीजिए। मैं नहीं ले सकती इतना बड़ा। मर जाऊँगी।  

उस समय मेरी मम्मी दर्द से इतना तड़प रही थी कि कभी अपने हाथों को अंकल के गले में डाल कर कस रही थी ताकि वो हिल न सके। और कभी अपनी बाँहों को फैला कर बेड की चादर को अपनी मुट्ठियों में भर कर खींच रही थी।  

मेरी मम्मी की बात सुनते ही अंकल ने कहा। मेरी जान क्या कह रही हो तुम कि तुम नहीं ले सकती। बल्कि ये कहो कि तुम ने पूरा का पूरा लंड ले लिया।  

मेरी मम्मी को अंकल की बात पर विश्वास ही नहीं हुआ कि उन्होंने कैसे उनका इतना लंबा और मोटा लंड अपनी इस टाइट सील पैक चूत में ले सकती हूँ। ये जानने के लिए क्या वो सच बोल रहे हैं।  

मेरी मम्मी ने अपना हाथ नीचे की ओर ले गई और अपने हाथ लगा चेक किया। तो मेरी मम्मी को अपने आप पर ही विश्वास नहीं हुआ कि कैसे मेरी मम्मी की छोटी सी चूत उनका इतना बड़ा लौंडा अपने अंदर निगल गई।  

दोस्तों आपको बता दूँ। मम्मी पिछले ६ महीनों से अंकल का पूरा लंड ले रही है। लेकिन आज उनकी चूत सील पैक हुई है ऑपरेशन से। इसलिए विश्वास नहीं हो रहा था मम्मी को।  

अंकल मेरी मम्मी की चूत में अपना लंड डाल कर पड़े थे और मेरी मम्मी को अपनी बाँहों में भर कर मेरी मम्मी के निप्पल को चूस रहे थे। अंकल के द्वारा मेरी मम्मी की चुची चूसे जाने पर मेरी मम्मी को कुछ शांति मिली।  

मेरी मम्मी के चेहरे पर दर्द कम होता देख कर अंकल ने प्यार से मेरी मम्मी के बालों में अपना हाथ फेरते हुए मेरी मम्मी के गालों को चूमते हुए बोले। बस मेरी जान, वर्षा हो गया।  

…अब और इतना कहते हुए अंकल ने अपना मोटा लंड धीरे से मेरी मम्मी की चूत से बाहर निकाला।  

जैसे ही अंकल ने अपना लंड मेरी मम्मी की चूत से बाहर निकाला, उस समय मेरी मम्मी की चूत से फटक की आवाज़ हुई कि जैसे किसी ने बंद बोतल से कॉर्क निकाला हो।  

इससे पहले मेरी मम्मी कुछ समझ पाती, अंकल ने एक ज़ोरदार झटके से अपना लंड फिर से पूरा मेरी मम्मी की चूत में डाल दिया।  

मेरी मम्मी अपने यार योगेश अंकल के नीचे लेटी तड़प रही थी और उनसे छूटने की हर कोशिश कर रही थी। लेकिन कोई भी शेर अपने हाथ आए शिकार को कैसे जाने दे सकता ही। अंकल उस समय किसी शेर की तरह मेरी मम्मी को अपने कब्जे में किए मेरी मम्मी के ऊपर चढ़े हुए थे।  

मम्मी: आह… योगेश जी ….प्लीज… बहुत… दर्द….. ओह गुड।  

मेरी मम्मी की छोटी सी गाँड काँप रही थी। अंकल थे वो अब धीरे से अपने लंड को मेरी मम्मी की चूत से बाहर निकालते ...और फिर से एक झटके में पूरा मेरी मम्मी की चूत के अंदर डाल देते।  

अंकल द्वारा मेरी मम्मी की चूत पर धक्कों के कारण मेरी मम्मी का दर्द थोड़ा कम हो गया था। ... वो फिर से धक्का मारने लगे।  

अब तो अंकल एक रिदम के साथ मेरी मम्मी की चूत पर धक्के मार लंड मेरी मम्मी की चूत में अंदर बाहर करने लगे। और उन्होंने रेगुलरली मेरी मम्मी की चूत पर धक्के मारने लगे।  

पूरे कमरे में पुच्छ्छ.. पुच्छ्छ आवाज़ गूँज रही थी।  

मेरी मम्मी की दर्द भरी चीखें कब मस्ती भरी चीखों में बदल गई, मुझे पता ही नहीं चला। और मेरी मम्मी अब मस्ती से सिसकने लगी।  

मेरी मम्मी के मुँह से तो बस ..आह... आह.. आह.. हाय मर गई धीरे आह योगेश जी बस मैं गई आह।  

और बस कमरे में मेरी मम्मी की चूड़ियों के खनकने की और मेरी मम्मी की सिसकियों की आवाज़ के मेरी मम्मी और अंकल के धक्कों से बेड के हिलने की आवाज़ चर चर की गूँज रही थी। मेरी मम्मी के हाथ भी अंकल के पीछे उनके चूतड़ पर चले गए थे।  

और मेरी मम्मी अपने हाथ अंकल की गाँड पर रख कर उनको अपने अंदर और कस रही थी।  

मेरी मम्मी को मस्ती में देख कर तो अंकल भी अब ज़ोर से मेरी मम्मी की चूत पर धक्के मारने लगे।  

मेरी मम्मी की चूत भी अब पानी छोड़ रही थी जिससे लंड मेरी मम्मी की चूत में जाने से आसानी हो रही थी। और मेरी मम्मी की चूत के रस की चिकनाई से अंकल का लंड आसानी से मेरी मम्मी की चूत के अंदर बाहर हो रहा था।  

अंकल का लंड अब किसी बिना रुकावट के गचा गच मेरी मम्मी की चूत के अंदर बाहर आ जा रहा था।  

अंकल जो मेरी मम्मी के ऊपर चढ़े मेरी मम्मी की चूत पर तबड़तोड़ धक्के मार रहे थे। सच में अब तो रूम में मेरी मम्मी की पलंगतोड़ दमदार चुदाई हो रही थी। आज मेरी मम्मी को उनकी दूसरी सुहागरात में पहली बार ऐसी पलंगतोड़ दमदार चुदाई का आनंद मिल रहा था।  

सच में जब अंकल अपना मूसल लंड निकाल कर जड़ कर मेरी मम्मी की चूत में ठेलते, उनका लंड मेरी मम्मी की बच्चेदानी से टकराते। मेरी मम्मी को इतना मज़ा मिलता मैं बता नहीं सकता। ये तो सिर्फ मम्मी ही बता सकती है।  

लेकिन मेरी मम्मी के चेहरे से पता चल रहा था उन्हें अद्भुत स्वर्ग का आनंद मिल रहा है। मुझे ऐसा लग रहा था कि मानो मेरी मम्मी किसी मस्त घोड़े पर बैठी जन्नत की सैर कर रही है।  

और अंकल ऊपर से मेरी मम्मी की चुचियों को चूस रहे थे। अपने दाँतों से काट रहे थे।  

जैसे ही वो मेरी मम्मी की चुचियों को काटते, मेरी मम्मी एक मीठे दर्द से चिल्ला कर बोली। उई माँ। योगेश जी। मर गई धीरे करिया। आपका बड़ा लंबा और मोटा ही आह आह।  

और मेरी मम्मी ने अपनी दोनों टाँगें अंकल की कमर में फँसा दी। और मेरी मम्मी ने अपने हाथ उनके गले में डाल उनको अपने में समाने के लिए खुद ही उतावली हो रही थी।  

मेरी मम्मी और अंकल दोनों के बदन एक दूसरे से चिपके हुए थे। अब मेरी मम्मी अंकल के धक्कों के साथ नीचे से अपनी गाँड उठा उठा कर अंकल के धक्कों का जवाब दे रही थी।  

मेरी मम्मी की चूत में अंकल अपना लंड अंदर बाहर करते मेरी मम्मी से पूछने लगे। वर्षा मज़ा आ रहा ही।  

उस समय तो मस्ती में मेरी मम्मी इतना ज्यादा डूब चुकी थी। बिना कोई शर्म के बोली। जी योगेश जी बहुत।  

अंकल: डार्लिंग अभी तो और मज़ा करवाऊँगा आगे तुम्हें।  

पता नहीं मेरी मम्मी के मुँह से निकल गया।  
मम्मी: योगेश जी मैं भी मज़ा करना चाहती हूँ।  

और अंकल मेरी मम्मी की बात पे मेरी मम्मी को फुल स्पीड से अपने लंड से मेरी मम्मी की चूत के अंदर बाहर करने लगे।  

मेरी मम्मी उनके नीचे लेटी आह…..आह…आई... करके झड़ने लगी।  

मेरी मम्मी की चूत के पानी के साथ अंकल का लंड मेरी मम्मी की चूत के अंदर बाहर करता फुच फुच की आवाज़ कर रहा था। पूरे कमरे में चुदाई का माहौल गरम हो चुका था।  

फुच्च.. फुच्च्त……. थप्प…. थप्प… थप्प.. आह… ऊम्म.. हम्म. . योगेश जी……आह….आह.. ऊफ्… ओह… ओह…. फुच्च.. फुच्च…..….  

अब तो अंकल अपने धक्कों की रफ्तार को तेज़ करते हुए ऐसे ज़ोर से चिल्ला रहे थे जैसे कोई शेर चिल्ला रहा हो। अंकल के धक्कों की रफ्तार देख कर यही लग रहा था कि मानो कि झड़ने के बहुत ही करीब हो और वो जल्द से जल्द अपना जूस मेरी मम्मी की चूत में निकालना चाहते हो।  

मेरी मम्मी का यार योगेश अंकल का लौंडा मेरी मम्मी की बच्चेदानी तक टकरा रहा जिससे कि मेरी मम्मी को बड़ा आनंद महसूस हो रहा था।  

तभी अंकल के लंड ने झटके से पिचकारी छोड़ी और जितना वीर्य उनके अंदर भरा हुआ था वो सारे का सारे मेरी मम्मी की कोख में भर कर झड़ने लगे।  

अंकल का वीर्य जब मेरी मम्मी के पेट के अंदर गया तो मेरी मम्मी को ऐसा लगा होगा कि जैसे किसी ने मेरी मम्मी के अंदर नाल खुला छोड़ दिया हो।  

मेरी मम्मी की चूत तो अंकल के वीर्य से एकदम भरी हुई थी कि तभी मेरी मम्मी की चूत ने भी तीसरी बार उनके साथ ही पानी छोड़ दिया। मेरी मम्मी की चूत से आज से पहले कभी इतना पानी नहीं आया था। शायद पिछले ६ महीनों में भी नहीं।  

मेरी मम्मी अपने चूतड़ों को पूरा ऊपर उठाए अपनी जाँघों को पूरी तरह से फैलाए उनके वीर्य की हर बूँद को अपने अंदर ले रही थी। ताकि अपने यार योगेश अंकल के कीमती वीर्य की एक भी बूँद मेरी मम्मी की चूत से बाहर नहीं चले।  

वैसे चलने का सवाल भी पैदा नहीं हो रहा था क्योंकि अंकल का मोटा लंड मेरी मम्मी की चूत में ऐसा घुसा हुआ था जैसे किसी बोतल में कॉर्क को ठूँस कर उस बोतल को बंद कर दिया हो। अंकल का मस्त लंड अब भी मेरी मम्मी की चूत में घुसा मेरी मम्मी की बच्चेदानी से चिपका हुआ था।  

मेरी मम्मी और उनके यार योगेश अंकल का रिश्ता ऐसा लग रहा था जैसे पति पत्नी हो। पर ऐसा नहीं था। वो सिर्फ सुहागरात मना रहे थे लेकिन शादी नहीं की थी। इसलिए पति पत्नी नहीं थे। लेकिन लग रहा था मम्मी अंकल का रिश्ता अब पति पत्नी के रिश्ते में बदल चुका हो।  

अंकल पसीने से लथपथ मेरी मम्मी के ऊपर ही ऐसे ढेर हो गए मानो कितना थक गए हो। वैसे उन्होंने मेहनत भी कितनी की थी। मेरी मम्मी जैसी नाज़ुक कली को कितनी बुरी तरह से मसल कर। मेरी मम्मी जो आज ऑपरेशन करवाकर अपनी चूत को सील पैक करवाकर एक नाज़ुक कच्ची कली और कुँवारी लड़की बनी थी उसे एक कली से फूल बना दिया था।  

अंकल ने मेरी मम्मी को अपनी बाँहों में कस लिया। मेरी मम्मी के चेहरे पर तो एक असीम आनंद का भाव था। और जैसे ही मेरी मम्मी की नज़र अंकल से मिली तो मेरी मम्मी ने शर्म के मारे अपना मुँह उनकी छाती में ही छुपा लिया।  

अंकल मेरी मम्मी के ऊपर कुछ देर तक ऐसे ही पड़े रहे मेरी मम्मी की चूत में अपना लंड डाले। और जब उनके लंड ने मेरी मम्मी की चूत में अपना पानी गिरना बंद हुआ तो उन्होंने उसे मेरी मम्मी की चूत से खींच कर बाहर निकाल लिया और मेरी मम्मी की ओर एक साइड पर लेट गए।  

जैसे ही मेरी मम्मी की नज़र उनके लंड पर गई तो मेरी मम्मी ये देख कर हैरान रह गई कि अंकल का लंड मेरी मम्मी के खून और पानी से भरा हुआ था। मेरी मम्मी और अंकल दोनों की साँसें बड़ी तेज़ी से चल रही थीं।  

अंकल ने मेरी मम्मी को फिर से अपनी बाँहों में समेट लिया और मेरी मम्मी के गालों को चूमते हुए बोले।  

अंकल: वर्षा आज मैं बड़ा खुश हूँ। आज तुमने जो मज़ा मुझे दिया है वो मुझे मेरी बीवी के साथ भी सुहागरात में नहीं मिला। वैसे तो तुम मुझे पिछले ६ महीनों से मज़े दे रही हो पर सुहागरात में पहली बार मिला है।  

वर्षा मैंने पहली सुहागरात मेरी वाइफ के साथ और दूसरी तुम्हारे साथ सुहागरात मनाई है। सच तो ये है मेरी बीवी ने सुहागरात में तो क्या सुहागरात के बाद भी मैं उसके साथ २५ साल रहा हूँ। लेकिन उसने ऐसा आनंद २५ सालों में नहीं दिया था।  

मुझे तो अपनी किस्मत पर ही यकीन ही नहीं हो रहा कि तुम्हारी जैसी लड़की मेरी एक लड़के की माँ होते हुए भी तुम मेरे साथ हो गई। और तूने मेरे प्यार को एक्सेप्ट कर लिया। और तुम्हारी जवानी का रस चखने का मुझे सौभाग्य प्राप्त हुआ।  

मैंने तो सोचा था कि डिवोर्स के बाद किसी औरत की ओर देखूँगा भी नहीं। पर तुम ने मेनका बन कर मेरी तपस्या भंग कर दी। कसम से जब से तुम्हें देखा तुम्हें पाने के लिए दिन रात तड़पा हूँ।  

और फिर मेरी मम्मी को अपनी बाँहों में कसते हुए मेरी मम्मी की आँखों में देख कर बोले। वर्षा तुमको कैसा लगा।  

मेरी मम्मी शर्म से कुछ न बोली। तो उन्होंने फिर पूछा। बताओ ना वर्षा मेरा प्यार करना तुमको कैसा लगा।  

तो जवाब मेरी मम्मी मुस्कुरा पड़ी और शर्म से अपना मुँह दूसरी ओर कर लिया। और धीरे से बोली। कितनी ज़ोर से करते हो आप। मुझे तो ऐसे निचोड़ डाला जैसे कोई नींबू को निचोड़ते हो। और आपका निकलता भी तो कितना ही। मेरा तो लगता है पेट ही भर गया।  

वैसे एक बात थी। जब आपने मुझे ६ महीने पहले चोदा था मैं तब से आपकी मर्दानगी पे दीवानी होकर मर चुकी हूँ।  

अंकल मेरी मम्मी की बात नींबू की तरह निचोड़ने की सुन कर मेरी मम्मी की चुचियों को अपने हाथ में भर कर मेरी मम्मी की आँखों में आँखें डाल कर बोले। मेरी जान तुम्हारे ये नींबू नहीं बल्कि ये तो रसीले आम ही। पता ही कितना रस भरा भरा पड़ा है इनमें।  

और वर्षा तुम कह रही हो मेरा इतना निकला ही तो ये तो मैं तुम्हारे अंदर पिछले ६ महीनों से डाल रहा हूँ और नींबू की तरह पिछले ६ महीनों से निचोड़ रहा हूँ। और रही बात सुहागरात की तो सुहागरात में बीवी ने मज़ा नहीं दिया और उसके बाद तुम्हारी जैसी कोई मिली नहीं।  

मेरी मम्मी अंकल की बात सुन कर मुस्कुराते हुए उनकी आँखों में देख कर बोली।  
मम्मी: क्या अब भी नहीं मिली।  

अंकल: मेरी मम्मी को चूमते हुए बोले। मिल तो गई हो। तभी तो पिछले ६ महीनों से खाली कर रहा हूँ तुम्हारी चूत में और जिंदगी भर रोज़ खाली करूँगा।  

अंकुश बेटा भी साथ है। वो खाली मरवाएगा। वो ही तुम्हें लाएगा कंप्यूटर सिखाने के बहाने से मेरे पास और तुम्हारी चूत भरवाकर वापस भी ले जाएगा।  

मम्मी: नहीं नहीं योगेश जी उसको नहीं। प्लीज मुझे शर्म आती है। जब वो कहता है मम्मी अंकल से कंप्यूटर सीखने चलो तो मुझे लगता है वो कह रहा हो। चूत चुदवाने चलो मम्मी।  

वो मेरा बेटा है और माँ बेटे के बीच शर्म का पर्दा होना चाहिए। इसलिए मैं खुद आ जाया करूँगी मिलने मिलने पे पर उसके सामने नहीं आऊँगी। प्लीज।  

अंकल: क्यों वर्षा उसे तो पता है। तुम यानी उसकी मम्मी वर्षा उसके इन ले योगेश से यानी तुम मुझसे चुदती हो तो फिर शर्म कैसी।  

मम्मी: प्लीज योगेश जी वो मेरा बेटा है और माँ बेटे के बीच शर्म ज़रूरी है। प्लीज आप समझा करो।  

और मम्मी अंकल की चौड़ी छाती पर अपना सिर रख लेटी। उनकी छाती के बालों में अपनी उँगली घुमा रही थी।  

कि अंकल मेरी मम्मी का हाथ पकड़ कर नीचे की ओर अपने लंड पर रख दिया। तो मेरी मम्मी भी बिना किसी शर्म के उनके लंड को सहलाने लगी।  

मेरी मम्मी की आँखें नीचे की ओर उनके लंड पर ही थी। और अंकल का लंड एक बार मेरी मम्मी के अंदर झड़ने के बाद भी किसी तोपची की तोप की तरह की मैदान में अगले राउंड के लिए तैयार खड़ा था।  

मेरी मम्मी और अंकल इस समय भी दोनों एकदम नंगे लेटे थे। और उस समय ना तो मेरी मम्मी की आँखों में नींद थी और ना ही अंकल की आँखों में।  

मैंने देखा कि सुबह के ४ बज गए हैं। यानी कि एक राउंड में ही ७ घंटे हो गए। अंकल ने फोरप्ले में ही ६ घंटे लगा दिए और १ घंटा चुदाई में।  

मेरी आँखों में नींद आने लगी थी लेकिन मम्मी अंकल की आँखों में नींद नहीं थी।  

मुझे लगता है मम्मी की पहली सुहागरात मुश्किल से आधे घंटे में ही हो गई होगी २० साल पहले। लेकिन दूसरी सुहागरात २० साल बाद आज पूरी रात में भी खत्म नहीं हुई। जबकि अंकल इस ४७ साल की उम्र हो जाने के बाद भी किसी जवान की तरह मैदान में दाँते हुए थे।  

मेरी मम्मी अंकल के लंड को सहला रही थी और उनकी छाती में ही अपना सिर रखे बोली।  

मम्मी: योगेश जी एक बात पूछूँ आप से।  
अंकल: क्यों नहीं डार्लिंग मेरी वर्षा पूछो।  

मम्मी: आपने मेरे साथ सुहागरात क्यों मनाई। आप मुझसे प्यार करते हो क्या। सच में मुझसे प्यार करते हो।  

अंकल: हाँ वर्षा मैं सच में तुमसे प्यार करता हूँ।  

मम्मी: क्या सिर्फ सेक्स के लिए।  

अंकल: नहीं वर्षा मैं तुमसे सेक्स के लिए बल्कि दिल से प्यार करता हूँ और अंकुश को अपना बेटा मानता हूँ।

मम्मी: तो फिर सुहागरात क्यों। मैं तो पिछले ६ महीनों से आपके साथ हमबिस्तर हो रही हूँ।

अंकल: वर्षा अंकुश की दिल से तमन्ना थी मेरी मम्मी की सुहागरात हो। क्योंकि वो जानता है तुम्हारी सुहागरात ना के बराबर हुई होगी तुम्हारे पति के साथ। इसलिए उसी ने कहा था। वो तुमसे बहुत प्यार करता है। इसलिए उसने ही तुम्हारी मेरी दूसरी सुहागरात के लिए कहा था।

और सच कहूँ तो वर्षा जब अंकुश ने कहा सुहागरात के लिए तो तुम मेरे दिलो दिमाग पर इस कदर छा गई बता नहीं सकता। और इसलिए मैंने अंकुश की बात मान ली। कि तुम जैसी हसीन औरत... सॉरी वर्षा तुम औरत नहीं लड़की हो। और तुम जैसी लड़की के साथ सुहागरात मनाना मेरे लिए सौभाग्य की बात है।

तुम्हारी चुदाई पिछले ६ महीनों से कर रहा था लेकिन सुहागरात मनाना गर्व की बात है। इसलिए सुहागरात मना रहा हूँ। और वर्षा तुम जैसी हसीन लड़की मैंने आज तक नहीं देखी। वर्षा तुम बेटे की माँ होने के बाद भी लड़की लगती हो।

पिछले साल मैंने तुम्हें देखा और प्रपोज किया तो तुमने मुझे ठुकरा दिया था। लेकिन जब अंकुश ने खुद कहा मेरी मम्मी की चुदाई करो और पिछले ६ महीनों से वो मुझे तुमसे चुदवा रहा है।

मम्मी: योगेश जी तुम मुझसे सच्चा प्यार करते थे तो तुमने मुझे दोबारा प्रपोज क्यों नहीं किया?

अंकल: जब मैंने तुम्हें प्रपोज किया तो तुमने ठुकरा दिया था। तो मैंने सोचा तुम एक पतिव्रता संस्कारी औरत हो। तुम कभी मेरे प्यार को एक्सेप्ट नहीं करोगी। लेकिन अंकुश ने सब पॉसिबल कर दिया।

मम्मी: यदि मैं पतिव्रता संस्कारी औरत थी तो अब ये सब।

अंकल: सच कहूँ वर्षा।

मम्मी: जी।

अंकल: वर्षा तुम आज भी पतिव्रता संस्कारी औरत हो। वो तो एक दिन अंकुश के साथ तुम्हारे घर गया तो मैं बाथरूम भी गया। तो मैंने वहाँ तुम्हारी ब्रा और पैंटी देख कर... सच में वर्षा तुम्हारी ब्रा पैंटी में कितनी बढ़िया खुशबू आ रही थी। मैं खुद को रोक नहीं पाया। तभी मैंने तुम्हारी ब्रा पैंटी उठाई और उन्हें चाटने लगा।

अंकल की बात सुनकर मम्मी शर्म से प्यार से उनके सीने पर हल्के मुक्के मारते हुए बोली। क्या योगेश जी आप भी ना बड़े बदमाश हो।

अंकल: वो सब तो था ही। ऊपर से उस दिन के बाद एक दिन जब तुम पूरी भीगी हुई। तुम्हारा हर एक अंग सच कहूँ किसी को अपना दीवाना बना दे। मैं ही जानता हूँ मेरी जान उस दिन कैसे मैंने आपको रोका था। आज भी मेरी आँखों में तुम्हारी वही तस्वीर आती है।

देखो मेरी जान अभी मैंने वो बात ही की। देखो ये कैसे उछल-कूद मचाने लगा।

मेरी मम्मी शर्म से अपने यार योगेश जी की छाती में मुँह छुपाए उनके लंड को सहला रही थी और बोली।

मम्मी: अंकुश ने आपकी कैसे हेल्प की बताइए।

अंकल: क्या करेगी जानकर।

मम्मी: कुछ नहीं।

अंकल: उसे डाँटेगी।

मम्मी: नहीं सिर्फ जानना चाहती हूँ।

अंकल: फिर कभी बाद में बताऊँगा।

मम्मी: ओके।

और अंकल के लंड को सहलाती रही।
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#39
update 36

मेरी मम्मी और अंकल अब फिर से अगले राउंड के लिए तैयार हो चुके थे। मेरी मम्मी की चूत से अंकल का वीर्य बह कर बाहर निकल रहा था। बिस्तर पर मेरी मम्मी और अंकल का काम रस जो 5-6 इंच दायरे में बना धब्बा मेरी मम्मी और अंकल के मिलन की दास्तान सुना रहा था।

तभी अंकल उठे और उन्होंने मेरी मम्मी की पैंटी को उठा कर मेरी मम्मी की चूत को साफ किया। और फिर उसी पैंटी से अपने लंड को साफ किया। ये सब करते वो मेरी मम्मी की आँखों में देख रहे थे। जिससे मेरी मम्मी मुस्कुरा रही थी।

मेरी मम्मी बिस्तर में लेटी थी और मेरी मम्मी ने अपनी टाँगों को खोल दिया। क्योंकि शायद मम्मी को लगा होगा कि अंकल फिर से मेरी मम्मी के ऊपर चढ़ने की तैयारी कर रहे हैं। लेकिन अंकल बेड पर लेट गए। मुझे कुछ समझ नहीं आया कि ये क्या हुआ। वो ऐसे क्यों लेट गए।

मैं सोच ही रहा था कि अंकल मेरी मम्मी से बोले। वर्षा आओ अब तुम इस पर बैठो।

मम्मी सोच रही होंगी अब अंकल उनके ऊपर चढ़ेंगे। लेकिन अंकल ने मेरी मम्मी को अपने ऊपर चढ़ाने की बात कर रहे थे। मेरी मम्मी का अपने यार योगेश अंकल के ऊपर चढ़ना एक अलग ही एक्सपीरियंस था।

सुहागरात में वैसे तो वो अंकल के ऊपर हमेशा चढ़ती है। क्योंकि 20 साल पहले वाली सुहागरात में नामर्द बाप मम्मी पर चढ़ा था जो ना के बराबर कर पाया था। और आज दूसरी सुहागरात थी मेरी मम्मी की। जिसमें अंकल ने एक राउंड में ही मम्मी को पूरी रात कर दी। उसे कहते हैं असली सुहागरात। मेरी मम्मी का ये पहला मौका था सुहागरात में कि वो किसी मर्द के ऊपर पहली बार चढ़ने जा रही है।

अंकल बेड पर लेटे थे और उनका लंड सीधा खड़ा था। मेरी मम्मी ने अपनी दोनों टाँगों को उनकी कमर पर लपेट कर उनके लंड को अपने हाथ में पकड़ा। और उस पर बैठने लगी। और उनका पूरा लंड अपनी चूत में ले लिया। और धीरे धीरे अपनी कमर चलने लगी।

तो अंकल ने अपना बदन नीचे से थोड़ा ऊपर उठा लिया। और मेरी मम्मी की लटक रही चुचियों को अपने मुँह में भर कर चूसने लगे।

पता नहीं मेरी मम्मी के दिल में अपने यार के लिए कितना प्यार उमड़ने लगा। वाकई में ही क्या दमदार मर्द थे। मेरी मम्मी तो अपने यार की मर्दानगी की दीवानी होती जा रही थी। क्योंकि इतना टाइम तो अंकल ने कभी नहीं लगाया था। फोरप्ले में ही अंकल ने 6 घंटे लगा दिए थे। अंकल का स्टेमिना बहुत ज्यादा था।

अंकल के स्टेमिना के वजह से ही मम्मी अंकल को चाहती थी और उनसे चुदती थी। और मम्मी ने भी अंकल से एक बार कहा था। मैं तुम्हारे स्टेमिना की वजह से ही तुम्हें दिल से चाहने लगी हूँ। और यूँ ही तुम्हारे साथ जिंदगी के अंत तक तुम्हारे साथ रहूँ। और आखिर तक तुम्हारे ही लंड से चुदती रहूँ।

मेरी मम्मी अब अपने यार योगेश अंकल के लंड पर बैठी। और अंकल मेरी मम्मी की चुचियों को चूसते नीचे से मेरी मम्मी की चूत पर धक्के लगा रहे थे।

उस तरह मेरी मम्मी की चूत में मोटा लंबा लंड और चुची चूसे जाने पर मेरी मम्मी और भी गरम हो उठी। और मेरी मम्मी की कमर भी अब एक रिदम के साथ चलने लगी थी। मुझे अब ऐसा लगने लगा था कि मेरी मम्मी अब झड़ने वाली है। क्योंकि मेरी मम्मी ने अब अपनी कमर को तेज तेज चलाते हुए खुद ही अपने यार योगेश अंकल के लंड पर उछलने लगी।

मेरी मम्मी उस समय किसी शेरनी की तरह बिहेव कर रही थी। अंकल एकदम बेड पर सीधा लेटे। और मेरी मम्मी उनकी छाती पर अपने हाथों को टिका कर तेज तेज अपनी गाँड को उछाल कर उनका लंड अपनी चूत में ले रही थी।

ऐसा करने से मेरी मम्मी की छातियाँ बड़े मस्ताने अंदाज में छलछला रही थीं। ऊपर नीचे उछल रही थीं। और अंकल नीचे लेटे मेरी मम्मी की चुचियों को घूर रहे थे। आखिर अंकल थे तो मर्द। और मेरी मम्मी की चुचियों को इस तरह उछलते देख अपने को रोक नहीं सके। और उन्होंने आगे हाथ बढ़ा कर मेरी मम्मी की चुचियों को अपने हाथ में थाम लिया। और मेरी मम्मी की चुचियों को मसलने लगे।

मेरी मम्मी अब झड़ने के बहुत ही करीब थी। शायद मेरी मम्मी को ऐसा लगने लगा था कि उनकी चूत किसी भी पल पानी छोड़ सकती है। इस कारण मेरी मम्मी ने अपनी गाँड तेजी से हिला रही थी। और खुद ही अपनी एक चुची पकड़ कर अपने यार योगेश अंकल के मुँह में देते बोली। इसको चूसिए योगेश जी।

अब अंकल मेरी मम्मी की चुची को चूसते नीचे से अपने चूतड़ उठा कर मेरी मम्मी को चोद रहे थे। मेरी मम्मी तो जैसे जन्नत में उड़ने लगी। कमरे में अब पुच पुच या फिर मेरी मम्मी की सिसकियों की ही आवाजें गूँज रही थीं।

मेरी मम्मी के मुँह से खुद ही आवाजें निकलने लगीं।
आह... योगेश जी आह... जी आह... धीरे... धीरे... आह...

अब मेरे अंकल भी नीचे से अपनी गाँड उठा कर मेरी मम्मी के धक्के का जवाब दे कर मेरी मम्मी को चोद रहे थे। कि तभी मेरी मम्मी की चूत ने पानी छोड़ दिया। और मेरी मम्मी अपने यार योगेश अंकल के ऊपर ही निढाल हो कर गिर पड़ी।

तभी अंकल ने मेरी मम्मी को बाँहों में लिया। ही पलट कर मेरी मम्मी को अपने नीचे लिटा लिया। और मेरी मम्मी की टाँगें उठा कर मेरी मम्मी की चूत में तेजी से अपने लंड को अंदर बाहर करने लगे। और इसी तरह लगातार मम्मी को चोद रहे थे।

और 30 मिनट के बाद। अब अंकल भी शायद झड़ने के काफी करीब थे। तभी अंकल भी अब मस्ती में बड़बड़ा रहे थे।
आह... मेरी जान... आह... मेरी रानी... आह... क्या चूत है... आह... आज असली मजा आया है... आह... मेरी जान... आह... वर्षा... आह...

मैं भी झड़ने वाला हूँ वर्षा।

और उस समय बेड ऐसे हिल रहा था जैसे कमरे में भूचाल आ गया हो। अंकल इतनी तेज तेज धक्के मेरी मम्मी की चूत पर मार रहे थे। जितनी तेजी से उनका लौडा मेरी मम्मी की चूत से बाहर आता। अंकल उतनी ही तेजी से गचक करते अपने लंड मेरी मम्मी की चूत में घुसाड़ देते।

इसके साथ अंकल के लंड से एक जोरदार पिचकारी फिर से मेरी मम्मी की चूत के अंदर मार दी। जैसे ही अंकल के लंड ने मेरी मम्मी के अंदर अपनी पिचकारी छोड़ी। मेरी मम्मी को ऐसा लगा कि किसी ने मेरी मम्मी की चूत के अंदर गरमा गरम कोई फुव्वारा खुला छोड़ दिया हो।

मेरी मम्मी की चूत में ऐसा लग रहा था जैसे मेरी मम्मी की नाजुक सी छोटी सी चूत फिर से अंकल के वीर्य से भर गई हो। और मेरी मम्मी अंकल फिर से लंबी लंबी साँसें लेते एक दूसरे की बाँहों में लुढ़क गए।

मेरी मम्मी और अंकल कुछ देर ऐसे ही एक दूसरे की बाँहों में लेटे आराम करते रहे। साथ में अंकल मेरी मम्मी के बदन को सहला भी रहे थे।

मैंने देखा 5 बज गए हैं। इस बार दूसरा राउंड एक घंटे में ही कंप्लीट हो गया था। और अंकल मेरी मम्मी को तीसरे राउंड के लिए तैयार कर रहे थे।

मेरी मम्मी भी हैरान हो गई। बोली। आप भी सोने का नाम नहीं ले रहे हो। सुबह के 5 बज गए हैं। अब सोते हैं। कितना करोगे। मैं तो थक गई हूँ। और आप हो कि थकने का नाम ही नहीं ले रहे हो। आज क्या खाया आपने।

अंकल: तेरी चूत का रस। उससे एनर्जी मिली।

और अब अंकल ने मेरी मम्मी को इस राउंड में आगे हाथ बढ़ा कर घोड़ी बनने को कहा। वैसे चुदाई के इस पोज में मर्दों के साथ औरतों को भी बड़ा मजा आता है। तो मेरी मम्मी अब बिना कुछ कहे अंकल के सामने अपने हाथों को आगे बढ़ा कर घोड़ी के जैसे बन गई।

अंकल मेरी मम्मी के पीछे आए। और मेरी मम्मी के नरम चूतड़ों को सहलाते। और कभी प्यार से थप्पड़ मारते। और फिर पीछे से मेरी मम्मी की कमर में हाथ डाल कर मेरी मम्मी को अपने से चिपका लिया।
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update 37

अंकल मेरी मम्मी के पीछे आए। और मेरी मम्मी के नरम चूतड़ों को सहलाते। और कभी प्यार से थप्पड़ मारते। और फिर पीछे से मेरी मम्मी की कमर में हाथ डाल कर मेरी मम्मी को अपने से चिपका लिया और अपने लंड को मेरी मम्मी की चूत पर लगा कर। और दूसरे हाथ से मेरी मम्मी की चुचियों को पकड़ कर एक ही जोरदार धक्का मेरी मम्मी की चूत पर मारा। और उनका लंड दनदनाता हुआ पूरे का पूरा मेरी मम्मी की चूत में चला गया।

अंकल ने मेरी मम्मी की कमर पकड़ कर जोर जोर से मेरी मम्मी की चूत पर धक्के मारने लगे।

मेरी मम्मी की चुचियाँ जो घोड़ी बनाने के कारण नीचे लटक रही थीं। अंकल के धक्कों से वो भी नाचने लगी थीं। तो अंकल ने अपने हाथों को जो मेरी मम्मी की कमर पर थे। उनको मेरी मम्मी की बगल से निकाल कर मेरी मम्मी की लटक रही चुचियों को पकड़ लिया। और मेरी मम्मी की चूत पर धक्के लगाते मेरी मम्मी की चुचियों को दबाने मसलने लगे।

जब वो मेरी मम्मी की चूत पर धक्के मार कर अपना लंड झड़ तक मेरी मम्मी की चूत में घुसाड़ते। उनकी जाँघें मेरी मम्मी के चूतड़ों से टकरातीं। जिससे थप थप की आवाज पूरे रूम में गूँज रही थी।

अंकल का लंड अब गचा गच मेरी मम्मी की चूत के अंदर आ जा रहा था। अंकल धक्के मारते बड़बड़ा रहे थे।
आह... वर्षा... बड़ा मजा आ रहा... आह... मेरी जान कितनी टाइट है तेरी चूत।

मेरी मम्मी भी झड़ने वाली थी। जिससे मेरी मम्मी भी अपनी गाँड को तेजी से चला रही थी। मेरी मम्मी अपनी कमर चलने के साथ साथ जोर जोर से सिसक रही थी। चीख रही थी। क्योंकि मेरी मम्मी जानती थी उनकी चीखें सुन कर अंकल का जोश और भी बढ़ रहा था।

मेरी मम्मी जानती थी कि चुदाई के दौरान औरत की चीखें और सिसकियाँ मर्दों के जोश को बहुत ज्यादा बढ़ा देती हैं। क्योंकि मम्मी को चुदाई का 20 साल का एक्सपीरियंस तो नहीं था। भले ही उनकी शादी को 20 साल हो गए हैं। पर हाँ मेरी मम्मी को चुदाई का 6 महीने का एक्सपीरियंस तो था ही अंकल के साथ।

मेरी मम्मी की सिसकियों को सुन कर अंकल मेरी मम्मी को और तेजी से चोद रहे थे। और करीब 40-50 मिनट के बाद अंकल ने मेरी मम्मी की कमर थाम कर।

और अपने धक्कों की स्पीड और बढ़ा दी। जिससे मेरी मम्मी आह... आह... करती हुई। माँ धीरे योगेश जी करिए जी। दर्द होता है। मर गई।

पर उस समय अंकल किसी शेर की तरह दहाड़ रहे थे। मेरी मम्मी समझ गई थी कि अंकल का फिर से छूटने वाला है। और हुआ भी वही। अंकल 4-5 जोरदार धक्कों के साथ ही।

मेरी मम्मी पर ढेर हो गए। और मेरी मम्मी का भी उसी समय फिर से निकल गया। और अंकल ने मेरी मम्मी को अपनी बाँहों में कस लिया। अंकल के लंड ने एक बार फिर अपना कीमती माल मेरी मम्मी की चूत में भर दिया था।

कुछ देर अंकल मेरी मम्मी के ऊपर ही पड़े। थोड़ी देर बाद अंकल मेरी मम्मी को फिर से छेड़ने लगे। तो मम्मी बोली। घड़ी में टाइम देखिए। 6:30 am हो गया है। सवेरा हो चुका है। और हम अभी तक सोए भी नहीं।

अंकल: जान सो जाएँगे। एक राउंड और।

मम्मी: प्रॉमिस इस राउंड के बाद सो जाएँगे।

अंकल: प्रॉमिस।

फिर मम्मी अंकल दोनों किस करने लगे। और मम्मी अंकल के लंड को सहलाने लगी। पर मुझे नींद आ रही थी तो घर जाने लगा। लेकिन मैंने सोचा पहले उस लड़की को देखूँ जिसे अंकल ने बुलाया था। जिसने मम्मी को रेडी किया। लहंगा पहनाकर।

फिर मैं उस लड़की के रूम के बाहर गया और विंडो से देखा। वो लड़की सो रही थी। फिर मैं अपने घर चला गया और जाकर सो गया।

और फिर दोपहर में 1 pm को मेरी नींद खुली। तो सीधे अंकल के घर गया। तो मैं चुपके से गया। क्योंकि वहाँ पे वो लड़की भी थी। और मुझे उसका डर था। कहीं वो मुझे देख न ले। क्योंकि रात को तो वो सो गई थी। लेकिन अभी दिन है। इसलिए मैं सावधानी से गया।

तो देखा वो लड़की किचन में नाश्ता बना रही थी। फिर मैं अंकल के रूम में गया जहाँ आज सुहागरात हुई थी मम्मी अंकल की। तो गेट अभी भी बंद था। फिर मैं विंडो पे गया। अंकल के बेडरूम में देखा तो दोनों नंगे सो रहे थे।

पता नहीं मम्मी अंकल कितने बजे सोए थे। उनका मिलन रात को 10 बजे स्टार्ट हुआ था। पता नहीं सुबह कितने बजे तक चला। मेरी मम्मी और अंकल एक दूसरे की बाँहों में नंगे सो रहे थे। अब मेरी मम्मी और अंकल की सुहागरात एक यादगार बन चुकी थी। मैं उन दोनों को ही देख रहा था कैसे एक दूसरे की बाँहों में लिपटे सो रहे थे।

फिर तभी वो लड़की अंकल मम्मी के रूम के गेट पे आई। और दरवाजे पे खटखट की। सर मैम नाश्ता तैयार है। आप लोग आ जाइए। दोपहर हो गई है। कितना सोएँगे। और वो लड़की हँसती हुई चली गई।

दरवाजे पे खटखट और उस लड़की की हँसी से मेरी मम्मी की नींद खुली। तो मेरी मम्मी ने देखा अंकल का एक हाथ मेरी मम्मी की चुची पर था। और मेरी मम्मी अंकल की टाँगें एक दूसरे की टाँगों के बीच फँसी हुई थीं। और अंकल का एक हाथ मेरी मम्मी के कुल्हे गाँड के पुट्ठे पर था।

मेरी मम्मी और अंकल दोनों के बदन पर उस समय एक भी कपड़ा नहीं था। और उस समय भी अंकल का लंड मेरी मम्मी की चूत के साथ सटा हुआ था।

मेरी मम्मी ने धीरे से अंकल का हाथ अपनी चुची से हटाया। और उठने लगी। मेरी मम्मी जैसे ही उठने लगी मेरी मम्मी शर्मा गई। क्योंकि मेरी मम्मी की नजर सीधी अंकल के लंड पर चली गई। जो इस वक्त भी कड़क लोहे की रॉड की तरह खड़ा था। जबकि अभी भी वो गहरी नींद में सो रहे थे।

हालाँकि मेरी मम्मी ने पिछले 6 महीनों में अनगिनत बार अंकल का लंड देखा था। पता नहीं क्यों मेरी मम्मी अंकल के लंड को इतने करीब से फिक्स से देख रही थी। और फिर शर्माते हुए मुस्कुराते हुए बिस्तर से उठी। और खड़ी हुई। तो मेरी मम्मी के पूरे बदन में एक मीठा मीठा दर्द था। पर पता नहीं क्यों मेरी मम्मी को पूरा बदन हल्का लग रहा था।

ऐसा मैं इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि मम्मी भी धीमी आवाज में अंकल की ओर देखकर बोली। आज तो मेरा बदन आपने बहुत हल्का कर दिया है। जबकि अंकल सो रहे थे।

फिर मेरी मम्मी नंगी ही अपने कपड़े ढूँढने लगी। तो मेरी मम्मी ने देखा उनकी ब्रा और पैंटी अंकल के नीचे दबी हुई हैं। फिर मम्मी धीरे से बोली। अब क्या करूँ। ब्रा पैंटी तो उनके नीचे है। अगर मैंने ब्रा पैंटी खींचकर योगेश जी के नीचे से निकाली तो योगेश जी जाग जाएँगे। अब क्या करूँ।

मम्मी बोल रही थी जो मुझे सुनाई दे रहा था। अब क्या... अब क्या करूँ। बार बार यही बोल रही थी। फिर अचानक मम्मी मुस्कुराने लगी। और बाथरूम की ओर चल पड़ी। लेकिन मम्मी ठीक से नहीं चल पा रही थी। और लड़खड़ाते हुए जाने लगी। क्योंकि आज उनकी चूत की सील टूटी थी। जो ऑपरेशन से सील पैक हुई थी। वो सील उनकी चूत की अंकल ने अपने दमदार लंड से तोड़ दी। और मेरी मम्मी की चाल बदल दी अंकल के लंड ने।

फिर मम्मी नहाकर बाथरूम से नंगी बाहर आई यानी रूम में।

पता नहीं क्यों नई नवेली दुल्हन को सुहागरात के बाद भी पति के सामने नंगी आने में शर्म आती है। पर मम्मी को शर्म नहीं बल्कि रूम में बाथरूम से नंगी आने में एक अलग ही तरह की एक्साइटमेंट और मजा आ रहा था।

मेरी मम्मी ने अपनी नजर मेरे अंकल यानी उनके यार योगेश जी पर डाली। जो कि अभी भी गहरी नींद में नंगे सो रहे थे। और उनका लंड बिल्कुल कड़क होकर सीधा खड़ा हुआ था। जैसे कि मेरी मम्मी को सलामी दे रहे हों।

जब मेरी मम्मी ने आईने में अपने आप को देखा तो खुद ही शर्मा गई। मेरी मम्मी के बदन पर कई जगह अंकल जी के होठों के काटने के निशान थे। मेरी मम्मी के गालों। मेरी मम्मी की चुचियों। मेरी मम्मी के पेट। और मेरी मम्मी की चिकनी गोरी जाँघों पर अंकल ने अपने प्यार की छाप छोड़ दी।

और सच कहूँ कोई भी औरत अपने बदन पर अपने यार के द्वारा दिए गए निशानों से उसकी दीवानी हो जाती थी। और अब मेरी मम्मी तो अपने यार योगेश जी की मर्दानगी की कायल हो गई थी। जिस तरह से योगेश जी ने मेरी मम्मी को रात भर जिस तरह से मसला और निचोड़ा था। मेरी मम्मी की जगह कोई और लड़की भी होती वो भी ऐसा ही सोचती।

मेरी मम्मी अपने आप को तैयार करते बोलने लगी जो कि मुझे सुनाई दे रहा था। योगेश जी कितने स्ट्रॉन्ग मर्द हैं। इस 47 साल की उम्र में मेरे जैसी 33 साल की लड़की को मसल। पिछले 6 महीनों से लगातार मसल रहे हैं। जो कि मेरे नामर्द पति भी मुझे 20 सालों में एक बार भी ढंग से नहीं मसल पाए।

मुझे जो मजा योगेश जी साथ पिछले 6 महीनों से मिल रहा है वो मेरे नामर्द पति ने 20 सालों में एक बार भी नहीं दिया। मैं 20 साल तड़पी शादी के बाद भी। और ऐसा लगता है आज मेरी दूसरी नहीं पहली सुहागरात हुई है। असली सीख मुझे 6 महीने पहले ही मिली। मुझे जब योगेश जी ने 6 महीने पहले कली से फूल बनाया।

मुझे भी 6 महीने पता चला मर्द का असली प्यार क्या होता है। योगेश जी मेरे पति ने भले ही मुझे माँ बना दिया। पर असली सीख आपने ही दी।

पता नहीं योगेश जी आज मुझे आपकी मौजूदगी में तैयार होने में एक अलग ही आनंद मिल रहा है। मुझे जो आनंद मिल रहा है वो आनंद मुझे 20 सालों में कभी नहीं मिला।

मम्मी ने अलमारी से ब्रा पैंटी निकाली। वो पहनी। फिर ब्लाउज पेटीकोट ब्लैक कलर का पहना। फिर ट्रांसपेरेंट साड़ी निकाली और उसको पहनने लगी। आज मम्मी ब्लैक पहन रही थीं जो मम्मी पर बहुत जचते हैं। ट्रांसपेरेंट साड़ी में मम्मी का पेट पूरा दिखता है।

मम्मी ब्लाउज पेटीकोट पहन चुकी थीं। ब्लाउज ऐसा था जिसमें सिर्फ दूध ढके। कंधे नंगे थे। जैसा फोटो में है।

साड़ी को पहले पेटीकोट में हाथ डालकर पेटीकोट के अंदर डाला। जैसे इस फोटो में है।

फिर मम्मी साड़ी को कमर में लपेटने लगीं। और सभी तरफ से पेटीकोट में घुसा रही थीं।

वो अब साड़ी को पहन लेती हैं... और साड़ी का पल्लू ऐसे लेती हैं जिसमें उसकी नाभि और बूब्स के दर्शन आसानी से होते रहें। वैसे तो साड़ी ट्रांसपेरेंट थी। सबसे बड़ी बात वो साड़ी इतनी टाइट बाँधती हैं जिससे मेरी मम्मी की बॉडी का नाप आँखों से आसानी से लिया जा सके।

और मेरी मम्मी की वो नाभि जिस पर अंकल ने रात को बड़े मस्त तरीके से चाटा था। साफ दिखाई दे रही थी उनके होठों के निशान। और मेरी मम्मी के ब्लाउज भी ऐसा था जो साइड से मेरी मम्मी की चुची के पूरे उभार को दिखा रहा था। मेरी मम्मी उस समय किसी मेच्योर औरत की तरह लग रही थीं।

तैयार होकर मेरी मम्मी बेड के पास आईं। तो अंकल अभी भी सो रहे थे। अंकल अभी भी गहरी नींद में सो रहे थे। मेरी मम्मी बेड के पास खड़ी थोड़ी झुक कर अंकल को जगाने लगीं।

मम्मी: योगेश जी... योगेश जी... योगेश जी उठिए। दोपहर हो गई है। 2 बज गए हैं। उठिए।

अंकल ने जैसे ही करवट बदली तो मेरी मम्मी की नजर अंकल के नीचे पड़ी। मेरी मम्मी की ब्रा पर पड़ी। तो मेरी मम्मी ने उसको उठाने के लिए आगे हाथ बढ़ाया। तो अंकल की आँख खुल गई। तो अंकल ने अपने हाथ मेरी मम्मी की कमर पर बढ़ा कर मेरी मम्मी को खींच लिया। और मेरी मम्मी की नंगी कमर को चूमने लगे।

उम्म... उम्म... उम्म... मेरी जान आई लव यू।

अंकल की इस हरकत पर मेरी मम्मी चौंक गईं। और बोलीं। ये क्या कर रहे हैं योगेश जी। बाहर वो लड़की है। लेकिन अंकल थे वो मान ही नहीं रहे थे। मेरी मम्मी तो बस उस समय एक हाथ से बेड और दूसरे हाथ से अंकल जी के सिर को पकड़े हुए थीं।

मेरे अंकल थे जो लगातार मेरी मम्मी के चिकने पेट को चूम रहे थे। चाट रहे थे। मेरी मम्मी के मुँह से सिसकियाँ भी निकल रही थीं। और साथ ही डर भी था कि कहीं फिर से वो लड़की हमें बुलाने न आए। वैसे तो मेरी मम्मी कोई गलत काम नहीं कर रही थीं। अपने यार के साथ ही प्यार का खेल रही थीं। ये वो लड़की भी जानती थी।

मेरी मम्मी का सारा ध्यान दरवाजे की ओर ही था। और अंकल मेरी मम्मी को अपने से चिपकाए मेरी मम्मी की नाभि को चाट रहे थे।

मुझे लगने लगा कि अगर अंकल कुछ देर और मेरी मम्मी की नाभि को ऐसे ही चूमते रहें तो मेरी मम्मी खुद ही अपना कंट्रोल न खो दें। और मेरी मम्मी ने अंकल को जल्दी से धक्का दिया। और खुद उनसे दूर जा खड़ी हुईं।
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