Thread Rating:
  • 0 Vote(s) - 0 Average
  • 1
  • 2
  • 3
  • 4
  • 5
Fantasy Mummy aur Uncle. Part 2 in hindi font
#1
credit goes to original writer desi chut
[+] 1 user Likes Rahulraj306's post
Like Reply
Do not mention / post any under age /rape content. If found Please use REPORT button.
#2
... .......
Like Reply
#3
मुझे नींद आ रही थी तो मैं आकर सो गया। मेरी नींद सुबह सात बजे खुली क्योंकि मैंने सुबह सात बजे का अलार्म लगाया था। मैंने सोचा मम्मी और अंकल को जाकर देखूँ कि क्या कर रहे हैं। जब मैं ऊपर गया तो मम्मी अपने कमरे में थीं। कमरे के बाहर आंटी नज़र आईं। आंटी मुझे देखकर हड़बड़ाते हुए बोलीं, “बेटा, मैं तेरी मम्मी को ढूँढ रही हूँ, कहाँ हैं?” मेरे जवाब देने से पहले ही वे नीचे चली गईं। मैं समझ चुका था कि आंटी ने ज़रूर अंकल और मम्मी को देख लिया है।

फिर मैं खिड़की पर गया तो देखा दोनों एकदम नंगे एक-दूसरे से चिपके हुए सो रहे हैं। मैं एकदम डर गया—अब क्या होगा? आंटी ने मम्मी और अंकल को देख लिया है।

फिर मैं वापस नीचे आंटी के पास गया। आंटी बोलीं, “बेटा, तेरी मम्मी कहाँ हैं? मिली क्या?”

मैं बोला, “नहीं आंटी।”

आंटी: “बेटा, क्या तुझसे कुछ पूछ सकती हूँ?”

मैं: “जी आंटी, पूछिए।”

आंटी: “तू अपनी मम्मी से कितना प्यार करता है?”

मैं: “बहुत प्यार करता हूँ आंटी। उनके लिए मैं अपनी जान भी दे सकता हूँ।”

आंटी: “शाबाश बेटा। और तुझे पता है योगेश जी इस समय कहाँ हैं?”

मैं: “नहीं आंटी।”

आंटी: “बेटा, मुझे लगता है तुझे पता है, पर तू झूठ बोल रहा है।”

मैं: “नहीं पता आंटी, और मुझे जानना भी नहीं है।”

आंटी: “बेटा, तेरी मम्मी ऊपर कमरे में सो रही हैं।”

मैं: “मुझे मालूम नहीं है। आप कह रही हैं तो ज़रूर ऊपर कमरे में सो रही होंगी।”

आंटी: “बेटा, क्या तू ऊपर जाकर देखेगा नहीं अपनी मम्मी को?”

मैं: “नहीं आंटी, उनकी नींद डिस्टर्ब होगी।”

आंटी: “बेटा, अगर मैं कहूँ कि तेरी मम्मी के साथ ऊपर कोई और भी सो रहा है, तो पूछेगा नहीं कौन?”

मैं: “जी नहीं आंटी।”

आंटी: “बेटा, अगर मैं कहूँ कि कोई मर्द तेरी मम्मी के साथ सो रहा है तो?”

मैं: “नहीं आंटी। सोने में क्या? शादी वाले घर में कोई किसी के साथ भी सो सकता है। उससे क्या फ़र्क पड़ता है?”

आंटी: “बेटा, मैं कहूँ कि तेरी मम्मी किसी मर्द की बाँहों में नंगी सो रही हैं?”

मैं: “नहीं आंटी, ऐसा नहीं हो सकता।”

आंटी: “यदि मैं साबित कर दूँ तो?”

मैं: “आंटी, साबित करने की ज़रूरत नहीं है। मुझे मम्मी पर भरोसा है। वे ऐसा नहीं करेंगी। वे एडल्ट हैं, समझदार हैं। वे जो भी करेंगी, अच्छा ही करेंगी।”

आंटी: “मैं सच कह रही हूँ।”

मैं: “आंटी, आप कह रही हैं तो मैं मान लेता हूँ।”

आंटी: “तो अब तू क्या करेगा?”

मैं: “कुछ नहीं।”

आंटी: “तेरी मम्मी ने इतना गलत किया और तू चुप रहेगा?”

मैं: “आंटी, इसमें कुछ गलत नहीं। वे समझदार हैं। उनकी ज़िंदगी है। उन्होंने जो किया, सोच-समझकर ही किया होगा।”

आंटी: “उसने तेरे पापा को धोखा दिया है।”

मैं: “नहीं आंटी। उनकी ज़िंदगी है। उनको भी जीने का अधिकार है। इसमें कोई धोखा नहीं।”

आंटी: “क्या तू कहना चाहता है कि तेरे पापा नामर्द हैं?”

मैं: “नहीं आंटी। मेरे पापा एक अच्छे पति और पिता हैं। मम्मी ने पापा को धोखा नहीं दिया। मम्मी-पापा एक-दूसरे को बहुत प्यार करते हैं। हो सकता है उनको किसी और का साथ अच्छा लगा हो, तो इसमें क्या गलत है?”

आंटी: “क्या तू अपने पापा को नहीं बोलेगा?”

मैं: “नहीं आंटी। इससे पापा-मम्मी में टेंशन होगी। मैं किसी को कुछ नहीं बोलूँगा—ना पापा को, ना मम्मी को। मम्मी को मेरे सामने शर्मिंदा होना पड़ेगा। मम्मी की ज़िंदगी, मम्मी अपने हिसाब से जिएँ। मैं कुछ नहीं बोलूँगा।”

आंटी: “सब जानते हुए चुप रहेगा?”

मैं: “आंटी, वे मेरी मम्मी हैं। उनकी खुशी में ही मेरी खुशी है। और पापा-मम्मी हमेशा साथ रहें, मैं यही चाहता हूँ। मम्मी अगर किसी और के साथ एन्जॉय करें तो मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं।”

आंटी: “बेटा, तुझे पता है वो आदमी कौन है?”

मैं: “नहीं आंटी। मुझे नहीं पता और जानना भी नहीं है।”

आंटी: “एक बार उसका नाम जान ले, तुझे भी तो पता लगे वो कौन है।”

मैं: “नहीं आंटी। मैं तो बस इतना चाहता हूँ कि मेरी मम्मी हमेशा खुश रहें और वो इंसान भी खुश रहे जो मम्मी को प्यार करे, मम्मी को खुशी दे।”

आंटी: “बेटा, क्या तेरे पापा तेरी मम्मी को…?”

मैं: “नहीं आंटी। पापा भी मम्मी को बहुत प्यार करते हैं। आपने कहा मम्मी किसी के साथ रूम में हैं, इसका मतलब पापा ज़्यादातर आउट ऑफ़ सिटी रहते हैं, इसलिए मम्मी किसी और के साथ…”

आंटी: “इसीलिए कहती हूँ, एक बार उसका नाम सुन ले जो तेरी मम्मी के साथ है।”

मैं: “नहीं आंटी। मुझे नहीं जानना। मैं तो बस इतना चाहता हूँ कि मेरी मम्मी को वो इंसान हमेशा खुश रखे।”

आंटी: “वो कोई और नहीं, योगेश है।”

मैं: “चाहे योगेश अंकल हों या कोई और, मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं।”

आंटी: “बेटा, क्या तुझे पहले से पता है?”

मैं: “नहीं आंटी। आपने बताया तो पता चला।”

आंटी: “शाबाश बेटा। वर्षा बहुत खुशनसीब है जो उसे तेरा जैसा बेटा मिला।”

मैं: “आंटी, आप मम्मी को ये मत बताना कि आपने मुझसे उनके बारे में कुछ बोला है।”

आंटी: “मैंने कुछ नहीं बोला। मैं भी भूल गई और तू भी भूल जा। अब मैं तेरी मम्मी को बुलाने जा रही हूँ, कहीं कोई देख न ले।”

मैं: “जी आंटी।”

आंटी: “बेटा, ऐसा कुछ भी नहीं है। मैं तो तेरी परीक्षा ले रही थी कि तू वर्षा से कितना प्यार करता है। तेरी मम्मी किसी भी मर्द के साथ नहीं, बल्कि अकेली सो रही हैं। मैंने झूठ बोला सब।”

मैं: “अगर आंटी, आपने जो बोला वो सच भी होता तो मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं होती। मैं बस मम्मी की खुशी चाहता हूँ।”

आंटी: “अब मैं ऊपर जाती हूँ उसे बुलाने। तू यहीं रुक।”

और आंटी ऊपर जाने लगीं। पीछे से मैं भी चुपके से जाने लगा।

आंटी मम्मी को जोर-जोर से आवाज़ देती हुईं—“वर्षा… अरे वर्षा… कहाँ हो…”

आंटी आवाज़ देती हुई ऊपर पहुँच गईं और उसी कमरे के बाहर खड़ी हो गईं जहाँ अंकल-मम्मी एक-दूसरे की बाँहों में लेटे हुए थे। कमरा बंद देखकर आंटी ने दरवाज़ा खटखटाया।

पहले तो कोई नहीं आया, लेकिन करीब दस मिनट बाद मम्मी ने ही दरवाज़ा खोला। मम्मी की हालत देखने लायक हो गई थी।

मम्मी ने बाल पीछे बाँध दिए थे। उनकी साड़ी थोड़ी बिखरी हुई लग रही थी और ब्लाउज़ थोड़ा कंधे पर खिसका हुआ था। चूचियाँ ब्रा न होने के कारण बड़ी दिख रही थीं। मम्मी की बिंदी गायब थी। उनकी लिपस्टिक भी निकल गई थी। गहने उतारे हुए थे। मम्मी बहुत ही मदक लग रही थीं।

कोई भी बता सकता था कि क्या हुआ है।

आंटी मम्मी का ऐसा रूप देख मुस्कुराने लगीं और अंदर देखने लगीं। अंदर बिस्तर बिखरा हुआ था और अंकल का पैंट नीचे गिरा हुआ दिख रहा था। मम्मी के बालों में लगा हुआ गजरा भी बिस्तर पर बिखरा हुआ दिख रहा था।

लेकिन अंकल कहीं दिखाई नहीं दे रहे थे। शायद वे बाथरूम में चले गए होंगे। मम्मी डरी हुई लग रही थीं।

आंटी को पहले से ही पता था कि क्या हुआ है, लेकिन वे कुछ नहीं बोलीं।

आंटी: “वर्षा, तो तू यहाँ सो गई?”

मम्मी: “हाँ…”

आंटी: “नहा ली क्या? अभी नहाने वाली हो?”

मम्मी: “नहीं, अभी नहीं। अब नहाने वाली हूँ।”

आंटी: “ठीक है। नहाकर नीचे आ जाना। मैं चाय-नाश्ता बनाती हूँ।”

मम्मी: “ठीक है, मैं अभी आती हूँ।”

आंटी: “वैसे योगेश जी कहाँ हैं? तुमने देखा क्या उन्हें?”

मम्मी इस सवाल से एकदम डर गईं। बाथरूम की तरफ़ देखकर फिर आंटी की तरफ़ देखने लगीं।

मम्मी: “न-नहीं तो… होंगे बाहर, यहीं कहीं।”

आंटी ने जो समझना था वो समझ लिया।

आंटी: “ठीक है। आओ जल्दी। अभी तुम्हें घर भी जाना है।”

मम्मी: “हाँ।”

आंटी अंदर बिस्तर की तरफ़ देखते हुए बोलीं, “ठीक है, मैं जाती हूँ। तुम तैयार होकर आ जाना।” मम्मी ने गेट बंद कर लिया और आंटी मुस्कुराते हुए आने लगीं। मैं दौड़कर जल्दी से नीचे आ गया। थोड़ी देर बाद आंटी भी आ गईं, हँसती हुईं।

मैंने पूछा, “आंटी, आप हँस क्यों रही हो?”

आंटी: “कुछ नहीं बेटा।” और किचन में चली गईं।

फिर मैं वापस ऊपर आया तो देखा अंकल कमरे से अकेले बाहर निकले। मुझे देखकर बोले, “मज़ा आ गया आज। पूरी रात तेरी माँ की चुत फाड़ी।” मैंने पूछा, “मम्मी कैसी हैं?” तो बोले, “अभी थोड़ी देर में आएगी, देख लेना।” और बोले, “मैं नहाने जा रहा हूँ, तू भी नहा ले।” मैंने अंकल को आंटी वाली बात नहीं बताई और मैं नहाने चला गया। थोड़ी देर बाद नहाकर हॉल में आकर बैठ गया।

मम्मी भी नीचे आ गईं। उनके बाल गीले थे और चेहरा पूरा खिला हुआ दिख रहा था।

मम्मी ने आते ही मुझसे पूछा, “बेटा, चाय लाऊँ तुम्हारे लिए?”

मैं: “हाँ मम्मी, लाओ।”

मेरे हाँ कहते ही मम्मी किचन में चली गईं जहाँ आंटी हमारे लिए नाश्ता और चाय बना रही थीं। मैं हॉल में था जहाँ से किचन ठीक बगल में था। किचन की बातें आराम से सुन सकता था। एक तरह से ओपन किचन था।

आंटी: “आ गई तुम। नींद तो अच्छे से आई ना तुम्हें?”

मम्मी: “हाँ, बिल्कुल। बहुत अच्छे से आई।”

आंटी: “कोई परेशानी तो नहीं हुई ना?”

मम्मी: “नहीं-नहीं, परेशानी कैसे?”

तभी अंकल भी नहाकर हॉल में आ गए। आते ही उन्होंने मुझे देखकर स्माइल की।

अंकल: “क्यों अंकित बेटा, कैसे हो? चाय ली कि नहीं अभी?”

मैं: “नहीं, अभी लेने वाला हूँ।”

आंटी को पता लग जाता है कि अंकल भी बाहर आ गए हैं।

आंटी: “चलो, तुम दोनों पे बैठो। मैं ये चाय और नाश्ता योगेश जी और अंकित के लिए लेकर आती हूँ।”

मम्मी: “अरे मुझे दे दीजिए, मैं लेकर जाती हूँ।”

आंटी: “अरे नहीं, तुम तो मेहमान हो। तुम क्यों लेके जा रही हो?”

मम्मी: “अरे क्या आप भी दीदी। मैं लेके जाती हूँ ना। क्यों मेहमान बना रही हो मुझे? मैं आपके घर की जैसी हूँ।”

आंटी मुस्कुराने लगती हैं।

आंटी: “ठीक है, ले जाओ।”

मम्मी चाय लेकर आ जाती हैं। जब मम्मी ने अंकल को चाय दी तो अंकल मम्मी को देखकर मन ही मन हँस रहे थे और मम्मी भी अंकल को तिरछी नज़रों से देखकर स्माइल कर रही थीं।

इसके बाद जब हमारे घर जाने का समय हुआ तो आंटी बोलीं, “वर्षा, रूम में चलते हैं।” और आंटी मम्मी को अपने रूम में ले गईं। अब हॉल में सिर्फ़ मैं और अंकल थे। मैंने अंकल से कहा, “अंकल आप बैठो, उनकी बातें सुनता हूँ।” और मैं आंटी के रूम की खिड़की पर गया जहाँ पर्दा लगा हुआ था। खिड़की बिस्तर के ठीक बगल में थी। आंटी-मम्मी मुझसे बस दो-तीन फ़ीट की दूरी पर थीं। मैं उनकी बातें साफ़-साफ़ सुन रहा था, पर वे मुझे नहीं देख पा रही थीं कि मैं पर्दे के पीछे से उनकी बातें सुन रहा हूँ।

आंटी और मम्मी अपने रूम में बातें कर रहे थे। पहले तो आंटी ने फ़ालतू की बातें कीं जो मैं यहाँ नहीं लिख रहा हूँ। फिर मम्मी ने जाने के लिए बोला।

मम्मी: “ठीक है तो अब मैं चलती हूँ। बहुत देर न हो घर जाने के लिए।”

आंटी: “वैसे योगेश और तुमने कल सब अच्छे इंतज़ाम किए।”

मम्मी एकदम से डर गईं। “क्या? कैसा इंतज़ाम?”

आंटी: “शादी का… और किसका?”

मम्मी: “ओह, शादी का… हाँ… कुछ नहीं, ये तो मेरा फ़र्ज़ था।”

आंटी: “वैसे योगेश को मैं अपना भाई मानती हूँ। अगर मेरी भाभी होतीं तो वे भी ऐसे ही करतीं।”

आंटी कुछ निकलवाना चाह रही थीं मम्मी से।

मम्मी: “हाँ, वो भी है।”

आंटी: “तुमने उसकी कमी पूरी कर दी।”

ये कहते हुए आंटी ने मम्मी के चेहरे को उठाया और उनकी तरफ़ देखकर मुस्कुराने लगीं।

मम्मी: “नहीं, ऐसी कोई बात नहीं है।”

मम्मी शर्माने लगी थीं।

आंटी: “फिर कैसे बात है? हाँ।”

मम्मी कुछ नहीं बोलीं, सिर्फ़ गर्दन नीचे झुका ली थी। मम्मी नर्वस हो गई थीं और नीचे बिस्तर पर अपना हाथ घुमा रही थीं।

आंटी: “वैसे तुम दोनों की भी एक-सी समस्या है। उसकी बीवी नहीं है और तुम्हारा पति तो ज़्यादातर आउट ऑफ़ सिटी रहते हैं। दोनों की परेशानी एक ही है।”

मम्मी: “हाँ, वो तो है।”

आंटी: “एक औरत होने के नाते भी बहुत ज़रूरी होता है किसी का साथ होना।”

आंटी धीरे-धीरे पॉइंट पर आ रही थीं।

मम्मी: “हाँ।”

आंटी: “वैसे एक बात पूछूँ? बुरा तो नहीं मानोगी?”

मम्मी: “नहीं, पूछिए ना।”

आंटी: “ये सब कब से चल रहा है?”

मम्मी डर गईं। “क्या सब? किस बारे में बात कर रही हैं आप?”

आंटी: “तुम्हारे और योगेश के बारे में।”

मम्मी को अब पसीना आने लगा। “मतलब… मैं समझी नहीं।”

आंटी: “अच्छा वर्षा… सॉरी, भाभी जी। मैं अब तुम्हें भाभी जी ही कहूँगी।” और आंटी हँसने लगीं।

मम्मी शर्म के मारे कुछ बोल नहीं पा रही थीं।

आंटी: “वैसे शक तो मुझे शादी में ही हो गया था। लेकिन सुबह जब उसका पैंट तुम्हारे बिस्तर पर और तुम्हारी हालत देखी तो यक़ीन हो गया।” और आंटी ज़ोर से हँसने लगीं। मम्मी भी मन ही मन मुस्कुरा रही थीं।

आंटी: “अरे कुछ तो बोलो भाभी जी। भैया ने ज़्यादा तंग तो नहीं किया?”

मम्मी: “आप भी ना…” और मम्मी जाने लगीं।

आंटी: “अरे-अरे रुको वर्षा।”

मम्मी रुक गईं। आंटी ने मम्मी को अपनी तरफ़ किया और गले लगा लिया।

आंटी: “मैं बहुत खुश हूँ तुम्हारे लिए वर्षा। मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है। मैं तुम्हारे साथ ही हूँ।” और आंटी ने मम्मी के माथे को चूम लिया।

आंटी: “कल शादी मेरी बेटी की, लेकिन सुहागरात भाभी की हो गई। हा हा हा।”

आंटी: “अब बैठो यहाँ पे।”

मम्मी और आंटी बैठ गईं।

आंटी: “अब बताओ मुझे, कब से चल रही है ये लव स्टोरी सब?”

मम्मी: “कल से ही।” (मम्मी ने झूठ बोला, शायद इसलिए क्योंकि आंटी ने उन्हें पहली बार अंकल के साथ देखा था।)

आंटी: “क्या? कल ही? अरे वाह! कल तो दो-दो अच्छे कामों की शुरुआत हो गई।”

आंटी: “अब तुम मेरे घर की मेंबर बन ही चुकी हो। तो एक बात बताती हूँ—जब भी मन करे यहाँ आ जाना। वो बताने की ज़रूरत भी नहीं है क्योंकि मेरे घर पे कोई नहीं होता। मेरे पति बाहर रहते हैं और बेटी उसके ससुराल चली गई। अब मैं अकेली हूँ और यहाँ तुम्हें और योगेश को प्राइवेसी मिलेगी। क्यों वर्षा भाभी? सही कहा ना मैंने? अब तो तुम मेरी भाभी बन गई हो क्योंकि योगेश मुझसे राखी बंधवाता है।”

दोनों हँसने लगते हैं।

अब आंटी अंकल को बुलाती हैं।

आंटी: “योगेश… अंदर आओ!” आवाज़ देकर।

अंकल मुझे देखकर रूम में चले गए और जाते हुए मुझे आँख मार गए।

आंटी: “ये गलत बात है योगेश। अगर ऐसा कुछ था तो मुझे बता देते। मैं कोई ना कहने वाली थी क्या?”

अंकल को समझने में देर नहीं लगती कि आंटी को सब पता चल गया है। वे मम्मी की तरफ़ देखकर मुस्कुराने लगे।

आंटी: “अब जाओ योगेश, वर्षा को छोड़कर आओ घर। और हाँ, जब भी भाभी से मिलने का दिल करे बता देना। मैं वर्षा भाभी को बुला लूँगी।”

फिर मम्मी, अंकल, आंटी हँसने लगे। फिर मैं बाहर साइड पे आकर बैठ गया। थोड़ी देर बाद तीनों बाहर आए और फिर आंटी मुझे बोलीं, “बेटा, तू थोड़ी देर मेरे साथ ऊपर चल।”

मैं आंटी के साथ ऊपर आया तो—

आंटी: “बेटा, तुझे क्या लगता है इन दिनों में कुछ है?”

मैं: “नहीं आंटी, मुझे नहीं पता। पर इतना कहूँगा—मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है अगर दोनों के बीच कुछ हो तो।”

आंटी: “बेटा, मुझे लगता है तेरी मम्मी कुछ नहीं है। तेरे पापा आउट ऑफ़ सिटी रहते हैं…”

मैं: “आंटी, मुझे कुछ नहीं जानना। और मम्मी जो करेंगी, मैं हमेशा मम्मी का साथ दूँगा।”

फिर आंटी कुछ नहीं बोलीं और मैं आंटी के साथ नीचे आ गया।

और अंकल मुझे और मम्मी को घर छोड़ देते हैं। घर आते वक्त कार में अंकल और मम्मी आगे बैठे थे। वे ज़्यादा बातें नहीं कर रहे थे, लेकिन जब भी मौक़ा मिलता अंकल मम्मी के पेट को, जाँघों को छू रहे थे। मुझे ये देख मज़ा आ रहा था—एक ग़ैर मर्द मम्मी को चोद चुका है और अभी मेरी मौजूदगी में ही उनसे छेड़छाड़ कर रहा है।
Like Reply
#4
जब हम घर आए तो अंकल भी हमारे साथ घर आ गए थे। मम्मी ने उन्हें घर में बुलाया।

मैं आपको बता दूँ, पापा ऑफिस जा चुके थे और दादी मेरे दोस्त के घर गई थीं भजन-कीर्तन में।

अंकल बोले, “अब मैं चलता हूँ। बहुत टाइम हो गया है।”

मम्मी: “अरे, चाय तो पीके जाइए।”

मैं: “हाँ अंकल, चाय तो पीकर जाइए। और मम्मी को कंप्यूटर भी सिखाना है। पिछले दस दिनों से नहीं सिखाया आपने।”

अंकल: “हाँ बेटा, सही कहा तूने। पर तेरी मम्मी तो मना करती है पिछले दस दिनों से।”

मम्मी: “क्या करूँ? तेरी दादी मेरे ऊपर शक करती है और तेरे पापा तो पिछले बारह दिनों से घर में ही थे। आज ऑफिस गए हैं।”

मैं: “मम्मी, मैं आज ही कुछ करता हूँ।”

फिर अंकल बोले, “हाँ वर्षा जी।” और फिर अंकल मम्मी की ओर आँख मारते हैं।

मम्मी: “ठीक है।”

और अंकल चले जाते हैं। मैं सोने के लिए अपने रूम में जाता हूँ। मम्मी भी बहुत थक चुकी थीं और वे भी अपने रूम में चली जाती हैं।

शाम को मम्मी ने खाने के लिए बुलाया। आज मम्मी को देखा तो बहुत मस्त लग रही थीं। आज उन्होंने गाउन पहना था जिसमें उनकी चूतड़ों की गोलाई और आधी नंगी बाँहें बहुत सेक्सी लग रही थीं। उनकी चूचियाँ तो चलते हुए ऊपर-नीचे हो रही थीं।

मैं खाना खाने बैठ गया और पापा का पूछा तो मम्मी ने कहा, “आज वे ऑफिस में ही रुकेंगे। उनका फोन आया था।” और बोलीं, “कल तू अपने दोस्त के घर से तेरी दादी को ले आना।”

फिर हम मम्मी के साथ खाना खाने लगे। खाने के बाद मैंने मम्मी से कहा, “मम्मी, आज घर पे पापा-दादी नहीं हैं। अंकल को बुला लूँ?”

मम्मी मुस्कुराते हुए बोलीं, “क्यों बुला रहा है?”

मैं: “मेरी प्यारी मम्मी, वे आपको कंप्यूटर सिखा देंगे।”

मम्मी: “नहीं बेटा। मैंने तुझसे कितनी बार कहा है, मुझे कंप्यूटर नहीं सीखना। और तुझे मैंने बताया भी है कि योगेश जी अकेले में मुझे छेड़ते हैं। वे मुझे पापा चाहते हैं। ये ठीक नहीं है बेटा। इसलिए मैं उनसे दूर रहना चाहती हूँ।”

मैं: “मम्मी, मैं जानता हूँ। पर इसमें कुछ गलत नहीं। मैं आपसे कई बार कह चुका हूँ—आपको भी एक मर्द की ज़रूरत है और अंकल को भी एक औरत की। पापा तो आपसे प्यार करते ही नहीं हैं। और उसमें कुछ गलत नहीं है। मैं आपके साथ हूँ।”

मम्मी: “बेटा, ये गलत है। इसमें किसी को पता चल गया तो मैं मुँह दिखाने लायक नहीं रहूँगी। तू समझता क्यों नहीं है?”

मैं: “आप हमेशा एक ही बात क्यों बोलती हो? मैं आपसे कहा है—मैं पहरेदारी करूँगा। किसी को पता नहीं चलेगा। मैं आपके साथ हूँ।”

मम्मी चिल्लाते हुए: “नेवर!”

मैं: “ठीक है मम्मी। लेकिन आप कंप्यूटर तो सीख सकती हो। ये बहुत काम आएगा।”

मम्मी: “ठीक है, मैं सीख लूँगी।”

मैं: “मम्मी, आप कहें तो बुला दूँ अंकल को?”

मम्मी: “बुला ले।”

मैंने अंकल को कॉल किया तो अंकल बोले, “उसे यहीं भेज दे।”

मैं: “ओके अंकल।”

मम्मी: “क्या कहा?”

मैं: “मम्मी, अंकल ने कहा आप उनके घर चली जाओ और वहीं सीख लेना।”

मम्मी: “नहीं, मैं नहीं जा रही। नहीं तो वे मेरा…”

मैं: “कुछ नहीं करेंगे। आप चली जाओ।”

मम्मी: “ठीक है, चली जाऊँगी। लेकिन कुछ नहीं करने दूँगी।”

मैं: “ओके मम्मी। अब आप जाओ।”

मम्मी: “चली जाऊँगी तो रूम में जा और सो जा।”

और मैं मम्मी को गुड नाइट बोल के रूम में चला गया। उसके बाद मम्मी ने खाना खाया और बर्तन रख के फिर रूम में चली गईं।

फिर मैं मम्मी के रूम की खिड़की पर गया तो अंदर देखा—मम्मी अंकल से फोन पर बात कर रही हैं और हँस भी रही थीं। फिर थोड़ी देर बाद मम्मी लेट गईं और पेट के बल बात करने लगीं। और थोड़ी देर बात करने के बाद वे मोबाइल में शायद चैट करने लगी थीं। फिर मोबाइल से कुछ पिक लेने के बाद उसको भेजा। इस तरह से अब दस-साढ़े दस बज गए थे। फिर मम्मी अचानक बिस्तर से उठीं और बाहर आने लगीं तो मैं जल्दी से अपने रूम में आ गया और सोने का नाटक करने लगा। मम्मी भी आईं। मुझे सोता देख मेरे सिर पे चुम्मा दिया और बोलीं, “बेटा, तू मुझे कितना प्यार करता है जो मुझे योगेश से मिलवाने के लिए उसके घर भेज रहा है।” और मम्मी चली गईं।

फिर मैं मम्मी के रूम से निकलने के बाद उठा तो देखा मम्मी बाहर से मेरे रूम की कुंडी लगा गई हैं।

फिर मैंने अंकल को कॉल किया।

अंकल: “बोल बेटे, कैसे कॉल किया?”

मैं: “मम्मी आई क्या अंकल?”

अंकल: “हाँ बेटा, तेरी मम्मी आ गई है। और उसने बताया वो तुझे तेरे रूम में बंद करके आई है।” और मुझे मम्मी के हँसने की आवाज़ आई।

मैं: “अंकल, मम्मी कहाँ हैं? अंकल, यहीं हैं मेरे पास। ले, बात कर।”

और मम्मी ने फोन ले लिया।

मम्मी: “बेटा, अब तू सो जा। मैं कंप्यूटर सीखने तेरे कहने पे आई हूँ। और कंप्यूटर सीखकर एक घंटे में वापस आ जाऊँगी।”

मैं: “नहीं मम्मी। अभी तो ग्यारह बजे हैं। आप सुबह तक कंप्यूटर सीखिए। पूरे आठ घंटे। सुबह सात बजे से पहले मत आना।”

मम्मी: “अरे बाप रे! क्या तू पूरी रात मुझे मरवाएगा? मैं तो मर जाऊँगी पूरी रात में।”

मैं: “ये क्या बोल रही हो मम्मी? आप कंप्यूटर सीख जाइए।”

मम्मी: “ठीक है मेरे लाल। अब तू सो जा।” और अचानक से “उईईईईई… माँआआआआ…” की आवाज़ आई।

मैं: “क्या हुआ मम्मी?”

मम्मी: “छोड़ो मुझे… छोड़ो मुझे…”

मैं: “क्या हुआ मम्मी?”

मम्मी: “बेटा, कुछ नहीं। वो एक चींटी ने काट ली।”

मैं: “क्या? मम्मी, आप भी एक चींटी से डर गईं?”

मम्मी: “बेटा, तू नहीं समझेगा। इसलिए कह रही हूँ—एक घंटे में आ जाऊँगी।”

मैं: “नो मम्मी। आपकी मेरी कसम। सुबह सात बजे से पहले नहीं आना।”

मम्मी: “ठीक है बेटा।” फिर अंकल ने मोबाइल ले लिया।

अंकल: “बेटा, तू सो जा।”

और फिर से “उईईईईई… माँआआआआ… आआआ…”

मैं: “क्या हुआ अंकल?”

अंकल: “बेटा, तू सो जा। ये तेरी मम्मी की आवाज़ है।”

मैं: “मम्मी को फोन दो।”

मम्मी: “अब तू फोन रख। मुझे कंप्यूटर सीखने दे।” और मम्मी ने मोबाइल बिना कट किए ही रख दिया।

मम्मी अंकल से बोलीं, “नालायक… मुझे चुदने के लिए खुद आपके पास भेजा और कुछ रहा है कैसे आवाज़ है… इतना भी नहीं समझ रहा है। जब मम्मी के दूध आप दबाओगे तो मम्मी के मुँह से आवाज़ तो आएगी ना?”

अंकल: “हाँ मेरी चमकछल्लो। अब तो उसने कह दिया पूरी रात मम्मी को चोदो।”

मम्मी: “हाँ तो चोदिए ना उसकी मम्मी को। अपने दमदार पावरफुल लंड से मेरे राजा… फाड़िए उस चुत को।”

और फिर उनका सेशन शुरू हो गया। लेकिन अचानक ही मेरा मोबाइल स्विच ऑफ हो गया बैटरी लो के कारण। फिर मुझे सोना पड़ा।

फिर सुबह सात बजे मेरी नींद खुली तो मैंने देखा कि मेरे मोबाइल पे व्हाट्सऐप मैसेज है अंकल का।

अंकल ने लिखा था: “बेटा, मैंने आकर तेरी रूम की कुंडी खोल दी है और मैं तेरी मम्मी की चुत फाड़ रहा हूँ। और मैं उसे भर-भर के चोदूँगा। मैं आज उसकी पूरी बारह घंटे चुदाई करूँगा—रात को ग्यारह से सुबह ग्यारह तक। इसलिए तू कॉलेज चला जाना और गेट को लॉक कर जाना।”

लेकिन मैंने मम्मी को कॉल लगाया तो मम्मी ने कॉल रिसीव किया।

मम्मी: “हाँआआआ… बेेेेताआआ… बोल…”

मैं: “आप मम्मी कब आओगी?”

मम्मी: “बेटा, योगेश जी आने नहीं दे रहे।” और फिर अंकल ने फोन मम्मी से लेकर बोले, “बेटा, तू कॉल रख। मैं तेरी मम्मी को कंप्यूटर सिखा रहा हूँ।” और अंकल ने बिना कट किया फोन साइड में रखा।

मम्मी: “उईईईईई… माँआआआआ… और जोोर्र्र्र्र… आस्सेेेे… ओओओओओ… माँआआआआ… फक्क्क्क… मीीीी… आआआह्ह्ह्ह… और तेेेेज़… फाड़ दो… मेरे राजा… अपनी वर्षा रांडी की चुत फाड़ दो…”

मैं समझ गया उनका सेशन चालू है और मैंने ही कॉल कट कर दिया और कॉलेज चला गया। शाम को चार बजे कॉलेज से वापस आया तो मम्मी अभी भी नहीं आई थीं। फिर मैं अंकल के घर गया तो देखा दोनों रूम में एकदम नंगे चिपके कर सो रहे थे। तो मैं वापस आ गया और टीवी देखने लगा। फिर शाम को सात बजे मम्मी वापस आईं। मम्मी नहाकर तैयार होकर आई थीं।

मम्मी: “बेटा सॉरी… मम्मी से कोई जवाब नहीं लग रहा था।”

मैं: “कोई बात नहीं मम्मी। मैं जानता हूँ अंकल ने आपको आने नहीं दिया होगा। वे आपको कंप्यूटर सिखाने लग गए होंगे।”

मम्मी नीचे सिर करके बैठी रहीं और कुछ नहीं बोलीं। फिर मैं किचन में जाकर दो कप चाय बनाकर लाया और मम्मी को चाय दी। मम्मी ने मुस्कुराते हुए चाय ली और बोलीं, “बेटा, आज रात का खाना तेरे पापा से बोल दे। वे पैक करा लाएँगे।”

मैंने पापा को बोल दिया और फिर आठ बजे पापा दादी को ले आए और साथ में खाना भी लाए। और फिर मैं दादी के साथ सो गया।

अगले दिन पापा ऑफिस चले गए तो अंकल ने मुझे कॉल किया, “आज कैसे भी तू तेरी मम्मी को घर से बाहर ले आ।”

फिर मैंने मम्मी से कहा, “मम्मी, आज आपको मेरे कॉलेज आना है।” तो दादी बीच में बोलीं, “क्यों बेटा?”

मैं: “दादी, आज कॉलेज में पेरेंट्स मीटिंग है। आप मम्मी को ग्यारह बजे घर से भेज देना। और आज मैं मम्मी को लेकर मेरे दोस्त के घर भी जाऊँगा। वहाँ से हम दोनों साथ में रात को आठ बजे वापस आएँगे। आप प्लीज़ फोन मत करना।”

दादी: “भेज दूँगी।” और दादी ने मम्मी से कहा, “वर्षा, तू ग्यारह बजे कॉलेज चली जाना।”

मैंने मम्मी के पास जाकर कहा, “आज कॉलेज नहीं। अंकल के घर कंप्यूटर सिखाने जाना है। रात को आठ बजे तक पूरे नौ घंटे कंप्यूटर सिखाना।”

मम्मी: “नालायक! तू पिटेगा मेरे हाथों से। मैं नहीं जाऊँगी।”

मैं: “मम्मी, आपको मेरी कसम है।”

फिर मैं कॉलेज गया और अंकल से कॉल करके बोला, “आप मम्मी को घुमाने ले जाना ग्यारह बजे।” अंकल ने कहा, “तू आएगा?”

मैं: “नहीं, मैं नहीं आऊँगा। आप दोनों फुल एन्जॉय करना।”

फिर मैं कॉलेज नहीं गया। कॉलेज के बाहर बैठा रहा। ग्यारह बजे अंकल का मैसेज आया, “मैं आज तेरी मम्मी को XXX रेस्टोरेंट में लाया हूँ।”

मैंने सोचा क्यों न चलकर देखा जाए और मैं XXX रेस्टोरेंट चला गया।

वहाँ से घर ज़्यादा दूर नहीं था। घूमते-घूमते देखा तो रेस्टोरेंट के लाउंज में मम्मी और अंकल बैठे थे। मम्मी ने आज बहुत दिनों के बाद एक टाइट लेगिंग और एक शॉर्ट कुर्ता जो स्ट्रैप वाला था वो पहना था। दुपट्टे को कंधे पर रखा था एक तरफ़ और उनकी 36डी चूचियाँ एकदम टाइट थीं।

मैंने सोचा चलो कम से कम मम्मी बाहर तो निकालीं क्योंकि वे कभी भी दादी के डर से बाहर नहीं आती थीं। लेकिन मैं उनके पास नहीं गया क्योंकि मम्मी मेरे सामने एन्जॉय नहीं कर पातीं।

फिर अंकल ने मम्मी का हाथ पकड़ा और दोनों लोग वहाँ से उठ गए। मैं उनकी नज़र में न आऊँ इसलिए दूर रहता था। फिर मम्मी और अंकल एक शॉप में गए जो अंडरगारमेंट्स की दुकान थी। वहाँ पर मम्मी ने शायद कुछ लिया। फिर दोनों बाहर आए। अंकल ने मुझे देख लिया लेकिन मम्मी ने नहीं देखा तो अंकल ने मुझे मैसेज किया, “घर पहुँच रे। मैं तेरी माँ को वहीं ला रहा हूँ चोदने के लिए। लाइव देखना ही तो हमसे पहले मेरे घर पहुँच जा।” और अंकल-मम्मी गाड़ी में बैठ गए और निकल गए।

फिर मैं तुरंत अपनी स्कूटी से वहाँ से निकला और शॉर्टकट से अंकल के घर पहुँचा। पीछे के रास्ते से और स्कूटी को पेड़ों की साइड में छुपा दिया और डुप्लीकेट चाबी से गेट खोलकर अंदर चला गया। और घर की छत पे चला गया। फिर देखा कि गाड़ी से पीछे के रास्ते से मम्मी-अंकल आए और मम्मी-अंकल उतरे। दोनों अंदर आए। फिर मम्मी ने दरवाज़ा बंद किया। दोनों अंदर गए।

फिर मैं आराम से नीचे उतरा और धीरे से देखा तो ड्रॉइंग रूम में कोई नहीं था, मतलब मम्मी और अंकल रूम में थे। मैं थोड़ी देर रुका रहा। फिर बीस मिनट बाद रूम के पास गया और सोच रहा था कि दरवाज़ा न खुले। फिर खिड़की खुली थी और उसमें झाँका तो मम्मी का दुपट्टा बिस्तर पर पड़ा था। और अंकल बैठे थे, मम्मी नज़र नहीं आ रही थीं। फिर देखा तो मम्मी आईं। और क्या लग रही थीं। शायद मम्मी अंकल के रूम के अटैच्ड बाथरूम में थीं। उन्होंने एक शॉर्ट ड्रेस पहनी थी जो केवल जाँघ से थोड़ा नीचे थी, और ऊपर से केवल एक धागे से बंधी थी। उसमें मम्मी एक हाई क्लास रांडी लग रही थीं। एकदम डार्क मेकअप किया था और बाल खुले हुए थे। शायद ये उन्होंने अभी थोड़ी देर पहले शॉप से खरीदी थी जिसको खरीदकर वे आए हैं।

मम्मी ने टेबल पे रखा दूध का गिलास उठाया और जाकर अंकल की गोद में बैठ गईं। शायद बीस मिनट में मम्मी किचन से दूध ले आई होंगी। अंकल ने मम्मी की कमर में हाथ डाल दिया।

मम्मी अंकल को अपने हाथों से दूध पिलाने लगीं। आधा गिलास पीने के बाद अंकल ने दूध मम्मी को दे दिया। आधा गिलास मम्मी ने पी लिया और फिर मम्मी ने अंकल को हल्का सा धक्का देकर बिस्तर पर सुला दिया।

अंकल: “ओहो! मेरी जान।”

मम्मी ने स्माइल करते हुए और कातिल नज़रों से अंकल को देखते हुए अपने बाल खुले कर दिए। अंकल ने अपना शर्ट और बनियान निकाल दिए। फिर मम्मी अंकल के ऊपर लेट गईं।

अंकल ने मम्मी की कमर में हाथ डालते हुए मम्मी को अपनी बाँहों में भर लिया।

अंकल: “ओह वर्षा! तुम तो मुझे पागल कर दोगी।”

मम्मी नशीली आँखों से अंकल को देखने लगीं और अंकल के फेस पर उँगली फेरते हुए अंकल के होठों पर अपने रसीले होठ रख दिए। उफ्फ्फ… अंकल मम्मी के होठों का रसपान करने लगे।

दोनों बड़े ही प्यार से एक-दूसरे को किस कर रहे थे। अंकल ने मम्मी की पीठ और कमर पर हाथ घुमाते हुए मम्मी की बड़ी गाँड को शॉर्ट्स के ऊपर से ही मसलने लगे। फिर अंकल ने मम्मी को नीचे कर दिया और मम्मी को चूमने लगे।

अंकल मम्मी की गर्दन पर जीभ घुमा रहे थे और मम्मी के नाइटी के बटन खोलने लगे। अंकल ने मम्मी के नाइटी को खोल दिया और उसको नीचे करने लगे।

मम्मी की जाँघें व्हाइट पैंटी में बहुत सेक्सी लग रही थीं। अंकल ने नाइटी को मम्मी की टाँगों से बाहर निकाल दिया। अब मम्मी सिर्फ़ पैंटी में ही थीं। अंकल ने भी अपना पैंट निकाल दिया और अब अंकल भी सिर्फ़ अंडरवियर में ही रह गए थे। अंकल ने मम्मी की ब्रा से बूब्स को बाहर निकाल दिया और मम्मी के बड़े-बड़े बूब्स को अपने हाथों से मसलने लगे और एक बूब को मुँह में डालकर चूसने लगे। मम्मी अंकल का मोबाइल उठाकर देखने लगीं।

अंकल: “तुम भी देखती हो, या नहीं?”

मम्मी: “हट बेशरम।”

अंकल: “हाय! तुम्हारी ये अदा मुझे बहुत पसंद है।”

अंकल मम्मी के बूब्स को चूस रहे थे और अपना हाथ मम्मी के जिस्म पर फेर रहे थे। अंकल मम्मी को फिर से अपनी बाँहों में लेकर चूमने लगे। मम्मी भी अंकल के साथ फुल मज़ा ले रही थीं। अंकल ने मम्मी को उल्टा मुँह के बल लिटा दिया और खुद मम्मी के ऊपर लेटकर मम्मी की ब्रा खोल दी और मम्मी की नंगी पीठ को चूमने लगे।

मम्मी: “आआआह्ह्ह…”

अंकल का मूसल लंड मम्मी की गाँड में चुभ रहा था। अंकल मम्मी की नंगी पीठ को जीभ से चाट रहे थे। और मम्मी अंकल के चुंबन से पागल हो रही थीं। अंकल चूमते हुए नीचे की तरफ़ आए और मम्मी की लचकदार कमर को चाटने लगे और अपने हाथों से मम्मी की फूली हुई गाँड को दबाने लगे।

मम्मी के मुँह से मीठी-मीठी आहें निकल रही थीं। अंकल मम्मी की गाँड को पैंटी के ऊपर से चूमते हुए नीचे आए और मम्मी के पैरों को चूमने लगे और अपनी जीभ से चाटने लगे। अंकल अपनी जुबान से मम्मी की जुबान चूस रहे थे। मम्मी भी अपनी जीभ अंकल से चूसवा रही थीं।

फिर अंकल ने मम्मी को सीधा कर दिया। मम्मी ने अपनी ब्रा निकाल दी। अंकल मम्मी को बाँहों में भरकर चूमने लगे और मम्मी ने भी अपने हाथ अंकल के गले में हार बनाकर डाले और अंकल को अपने जिस्म से चिपका लिया।

अंकल ने मम्मी के फेस को जीभ से चाट-चाट कर गीला कर दिया था। मम्मी के मुँह से लंबी-लंबी सिसकारियाँ निकलने लगी थीं।

अंकल: “आआह्ह्ह… वर्षा… उम्म…”

अंकल की चेस्ट में मम्मी के बूब्स दब चुके थे। अंकल मम्मी के हाथ ऊपर करके मम्मी की आर्मपिट्स को अपनी जीभ से चाटने लगे।

मम्मी: “ओओओउईउऊऊ…”

अंकल का लंड मम्मी की चुत पर ठोकर मार रहा था। अंकल मम्मी के होठों का रसपान करते हुए नीचे आए और मम्मी के निप्पल को बारी-बारी मुँह में डालकर चूसने लगे। बूब्स को हल्के-हल्के मालिश करने लगे, मसलने लगे। मेरी मम्मी के मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं। अंकल मम्मी के बूब्स को ज़ोर-ज़ोर से दबा रहे थे।

मम्मी: “आआह्ह्ह…”

मम्मी के सिर पर हाथ घुमा रही थीं। फिर अंकल मम्मी के पेट और नाभि को चूमने लगे। वे अपनी जीभ मम्मी की गहरी नाभि में डालकर चाट रहे थे और मम्मी की पैंटी के अंदर हाथ डाल रहे थे। मेरी मम्मी मछली की तरह तड़पने लगी थीं। अंकल मम्मी की कमर को चूमते हुए नीचे आए और मम्मी की जाँघों को चूमने लगे। जाँघों के बाद वे मम्मी के घुटनों को चूमने लगे।

फिर अंकल ने मम्मी की पैंटी नीचे की और मम्मी के पैरों से बाहर निकाल दी। अब मम्मी की चुत के बाल दिखने लग गए थे। बालों में से मम्मी की चुत भी दिखने लगी थी।

मम्मी माँदरजात नंगी हो चुकी थीं। अंकल ने मम्मी के दोनों पैरों को चौड़ा किया, जिससे मम्मी की चुत खुल गई। अंकल मम्मी की चुत पर हाथ रखकर उसको उँगली से सहलाने लगे। अंकल के हाथ लगते ही मम्मी के मुँह से तेज़ सिसकारी निकली।

अंकल: “वर्षा, क्या चुत है तेरी… वाह!”

फिर अंकल अपनी उँगली मम्मी की चुत में डालकर उसको अंदर-बाहर करने लगे।

मम्मी: “आआह्ह्ह…”

अंकल: “उफ्फ्फ…”

अब अंकल मम्मी की चुत को मुँह लगाकर चूमने लगे थे।

मम्मी (हँसती हुई): “छी!”

अंकल ने मम्मी के पैरों को चौड़ा करके मम्मी की चुत पर अपना मुँह रखा और चाटने लगे।

मम्मी: “हाय… आआह्ह्ह… हुह…”

अंकल: “उफ्फ्फ… वर्षा, बहुत नमकीन पानी है तुम्हारी चुत का।”

मम्मी हँसती हुई अंकल को देख रही थीं। मम्मी की चुत से पानी निकल रहा था जिसे अंकल अपनी जीभ से चाट रहे थे।

मम्मी: “आआआह्ह्हआआ… बस भी कीजिए अब।”

फिर अंकल मम्मी के ऊपर लेट गए और मम्मी ने स्माइल करते हुए अंकल को देखा।

मम्मी: “छी गंदे…”

अंकल भी हँसते हुए मम्मी को चूमने लगे। वे मम्मी के होठों को चूसने लग गए और मम्मी के गालों को हल्के-हल्के अपने दाँतों से काटने लगे। काटने से मम्मी के गालों पर अंकल के दाँतों के निशान छप गए।

फिर मम्मी ने अंकल को नीचे कर दिया और खुद अंकल के ऊपर लेट गईं। मम्मी ने अंकल के फेस पर चुंबन की बरसात कर दी और अब मम्मी अंकल के फेस को अपनी जीभ से चाट रही थीं।

फिर मम्मी अंकल की चेस्ट पर हाथ घुमाती हुईं अंकल की कमर और अंकल के अंडरवियर पर हाथ घुमाने लगीं। अब मम्मी अंकल की जाल में पूरी तरह फँस चुकी थीं।

मम्मी को देखकर विश्वास नहीं होता कि मम्मी ऐसा भी कर सकती हैं। मम्मी आज हवस में पूरी तरह पागल हो गई थीं।

मम्मी अंकल की चेस्ट को चूमती हुईं नीचे आईं और अंकल के अंडरवियर को नीचे करके निकालने लगीं। अंकल का मोटा लंबा तगड़ा लंड मम्मी को सलामी दे रहा था।

मम्मी अंकल के लंड को देखकर शर्माने लगीं। फिर मम्मी ने अंकल के लंड को अपने हाथ में ले लिया। अंकल का लंड मम्मी के हाथों में आते ही झटके मारने लगा। फिर मम्मी अंकल के लंड की मुठ मारने लगीं।

अंकल ने मम्मी को लंड मुँह में लेने का इशारा किया, लेकिन मम्मी मना करने लगीं।
Like Reply
#5
*Update 3*

अंकल ने मम्मी को लंड मुँह में लेने का इशारा किया, लेकिन मम्मी मना करने लगीं।

अंकल: “लो ना…”

मम्मी ने शर्माते हुए अपना मुँह नीचे किया और अंकल के लंड के टोपे को अपने मुँह में डाल लिया। मम्मी टोपे को आइसक्रीम की तरह चाटने लगीं। फिर मम्मी धीरे-धीरे पूरा लंड अपने मुँह में डालकर अंकल के लंड को चूसने लगीं। मम्मी धीरे-धीरे अंकल के मोटे काले लंड को अपनी जुबान से चाटने लगीं। मम्मी अब अंकल के लंड पर अपने लाल मखमली होठ घुमाने लगीं और उनका लंड अपने गले में उतरने लगा।

मम्मी के मुँह से गल्प-गल्प जैसी आवाज़ें आ रही थीं और उनकी बड़ी-बड़ी चूचियाँ अंकल की जाँघों को टकरा रही थीं।

मम्मी लंड के अंडकोश को अपने हाथ में लेकर मसल रही थीं। फिर मम्मी ने लंड चूसना बंद कर दिया। अंकल ने मम्मी को अपनी बाँहों में भर लिया। और अब दोनों माँदरजात नंगे ही एक-दूसरे की बाँहों में समा रहे थे।

अंकल का फौलादी लंड मम्मी की चुत में चुभ रहा था। अंकल उठकर बैठ गए और मम्मी की गाँड के नीचे दो तकिए लगा दिए। तकिए से मम्मी की गाँड थोड़ी ऊपर हो गई।

अंकल ने मम्मी के दोनों पैरों को चौड़ा करके खुद दोनों पैरों के बीच में आ गए। फिर अंकल ने अपना लंड मम्मी की चुत पर रख दिया।

मम्मी: “कंडोम तो लगा लो।”

अंकल: “नहीं, कंडोम में मज़ा नहीं आता।”

मम्मी: “मज़े के चक्कर में कहीं मुसीबत ही खड़ी न हो जाए।”

अंकल: “आई-पिल ले लेना।”

मम्मी: “आई-पिल खत्म हो गई।”

अंकल: “अंकित से बोल दूँगा, वो ला देगा।”

मम्मी: “पहले अंकित से उसकी मम्मी की चुदाई की पहरेदारी करवाते हो, अब आई-पिल मँगवाओगे। वाह वाह, क्या बात है!”

फिर अंकल ने मम्मी की चुत पर अपना लंड रगड़ने लगे।

मम्मी के मुँह से आहें निकलने लगीं। फिर अंकल ने मम्मी की चुत पर थूक दिया और उस थूक को अपने लंड से मम्मी की चुत पर मलने लगे। फिर अंकल ने थोड़ा ज़ोर देकर अपने लंड का टोपा मम्मी की चुत में डाल दिया।

मम्मी: “आआआह्ह्ह्ह्ह्ह…”

अंकल ने दूसरा धक्का दिया और आधा लंड मम्मी की चुत में डाल दिया। मम्मी को बहुत दर्द होने लगा। फिर अंकल ने ज़ोर देकर पूरा लंड मम्मी की चुत में डाल दिया और मम्मी के ऊपर लेटकर मम्मी को बाँहों में भर लिया। मम्मी ने भी तड़पते हुए अंकल को अपनी बाँहों में भर लिया।

अंकल: “आआह्ह्ह… वर्षा, बहुत टाइट चुत है तुम्हारी।”

मम्मी अंकल की बात सुनकर शर्मा गईं। फिर अंकल ने अपनी गाँड आगे-पीछे करके धक्के मारने लगे।

मम्मी: “आआआ… आआह्ह्ह…”

अंकल धक्के मारकर मम्मी को चोदने लगे। अब अंकल का लंड मम्मी की चुत के अंदर-बाहर हो रहा था। थोड़ी देर में मम्मी की चुत से पानी आने लगा। अंकल ने अपना लंड बाहर निकाला और उसको एक कपड़े से साफ किया और फिर मम्मी की चुत को भी साफ किया।

अंकल ने फिर से अपना लंड मम्मी की चुत के अंदर डाल दिया। मम्मी को तो बहुत मीठा-मीठा दर्द हो रहा था। अंकल मम्मी की कमर को पकड़कर मम्मी को चोदने लगे और मम्मी अपनी गाँड उछाल-उछाल कर अंकल का लंड अंदर ले रही थीं।

धक्कों से मम्मी के बूब्स भी ज़ोर-ज़ोर से हिल रहे थे। अंकल मम्मी के बूब्स को दबाते हुए धक्के मार रहे थे। मम्मी अपने तकिए को पकड़कर लंबी-लंबी आहें भरने लगी थीं। फिर अंकल ने मम्मी के हाथों को पकड़ लिया और मम्मी को बैठा दिया।

मम्मी ने अपनी दोनों टाँगें अंकल की कमर के अगल-बगल में लपेट लीं। दोनों बैठे-बैठे एक-दूसरे की बाँहों में लिपट रहे थे। अंकल बैठे-बैठे मम्मी को चोदने लगे और मम्मी के होठों पर किस करने लगे। मम्मी भी अंकल को किस कर रही थीं।

अंकल मम्मी के कंधों को चूमते हुए मम्मी की पीठ पर हाथ घुमाने लगे। मम्मी भी अंकल की पीठ पर अपने हाथ घुमा रही थीं। अंकल ने मम्मी के मुँह को अपने दोनों हाथों में ले लिया और मम्मी की आँखों में आँखें डालकर मम्मी को सेक्सी नज़रों से देखने लगे। मम्मी भी कातिल स्माइल करती हुईं अंकल को देखने लगीं।

अंकल: “ओह्ह… वर्षा… उम्म्ह्ह… मेरी जान, बहुत सुकून मिल रहा है मुझे तेरी बाँहों में।”

मम्मी अंकल के होठों में अपने होठ डालकर चूसने लगीं।

मम्मी: “बहुत बदमाश हो आप।”

अंकल: “अरे मेरी जान, तुझसे बदमाशी नहीं करूँगा तो किससे करूँगा।”

मम्मी अंकल की बात पर मुस्कुराने लगीं। अंकल मम्मी के बूब्स को मसल रहे थे और मम्मी को चोद रहे थे।

मम्मी अंकल की जाँघों पर बैठी-बैठी अपनी गाँड उछाल रही थीं। अंकल का लंड मम्मी की चुत में पूरा अंदर जा चुका था।

फिर अंकल ने मम्मी की कमर में हाथ डालकर लपेट लिए और मम्मी को टाइट पकड़कर मम्मी को घुमा लिया। फिर अंकल खुद नीचे लेट गए और मम्मी को अपने लंड के ऊपर बैठा दिया। अंकल का लंड मम्मी की चुत के अंदर था और मम्मी अंकल की जाँघों पर बैठी थीं।

अंकल: “वर्षा, आज तुझे मैं अपनी लंड की सवारी करवाता हूँ।”

मम्मी ने स्माइल करती हुईं अंकल का लंड बाहर निकाला। अंकल का लंड मम्मी की चुत के पानी से पूरा गीला हो चुका था। फिर मम्मी ने कपड़े से अंकल के लंड को साफ किया और फिर अपनी नाज़ुक गुलाबी चुत को भी साफ किया।

फिर मम्मी अंकल की जाँघों पर बैठ गईं और अंकल के लंड को पकड़कर अपनी चुत पर सेट किया। मम्मी ने अपनी गाँड को नीचे किया और लंड अपनी चुत में डाल लिया। अंकल मम्मी को अपनी बाँहों में भरकर मम्मी से लिपट गए।

मम्मी अपनी मोटी गाँड ऊपर-नीचे करने लगीं और अंकल का लंड अपनी चुत में लेने लगीं। अंकल मम्मी को चूमते हुए मम्मी की नंगी पीठ, कमर और मोटी गाँड दबा रहे थे और मम्मी की फूल जैसी गाँड को मसल रहे थे।

अंकल: “ओओह्ह… वर्षा, कितनी मोटी गाँड है तेरी… उम्म्म…”

मम्मी अपनी गाँड उछाल-उछाल कर अंकल का लंड अपनी चुत में ले रही थीं।

मम्मी “आआह्ह्ह्ह… आआह्ह्ह…” करने लगीं।

अंकल मम्मी की गाँड पर हल्के-हल्के थप्पड़ मारने लगे, जिससे आवाज़ होने लगी। फिर मम्मी अंकल के ऊपर से हट गईं।

अंकल ने उठकर कपड़े से अपना लंड साफ किया और फिर मम्मी की चुत साफ की। अंकल ने मम्मी को पलंग पर ही घोड़ी बना दिया। मम्मी मुँह के बल घोड़ी बन गईं और अंकल मम्मी की गाँड के पीछे घुटनों के बल खड़े हो गए…

मम्मी की मोटी गाँड को अंकल का लंड सलामी देने लगा। अंकल मम्मी की गाँड पर हाथ घुमाते हुए उनकी गाँड को दबाने लगे। मैं समझ गया था कि अंकल अब मम्मी की गाँड मारने वाले हैं। अब अंकल मम्मी की गाँड में उँगली करने लगे थे…
Like Reply
#6
Update 4

मम्मी: “आआह्ह्ह… क्या कर रहे हो? पीछे नहीं।”

अंकल: “क्यों मेरी जान, डर लग रहा है क्या?”

मम्मी: “हाँ, बहुत दर्द होगा। मत करो प्लीज़। मैंने आपसे पहले भी कई बार कहा है—मेरी गाँड मत मारना। चुत को जमकर चोद लिया करो।”

मम्मी अपनी गाँड सीधी करके सीधी लेट गईं। लेकिन अंकल नहीं माने। वे मम्मी को फिर से उल्टा करने लगे।

मम्मी हँसती हुई मना करने लगीं और अंकल भी हँसते हुए मम्मी को उल्टा करने लगे। दोनों बहुत मस्ती कर रहे थे।

मम्मी: “आआह्ह… नहींईईईई…”

अंकल: “प्लीज़ वर्षा, कुछ दर्द नहीं होगा।”

मम्मी: “नहीं, मत करो।”

अंकल: “वर्षा, मान भी जाओ यार। अच्छा, धीरे-धीरे करूँगा बस।”

मम्मी ने अंकल को स्माइल करते हुए आँखें दिखाईं।

अंकल: “प्लीज़।”

मम्मी: “नहीं। आप मेरी चुत को गाँड समझकर मार लो।”

अंकल: “ठीक है वर्षा। घोड़ी बन जा। मैं तेरी चुत को गाँड समझकर मारूँगा। पर मुझे चुत में मज़ा आना चाहिए और तेरी चीखें भी सुननी हैं।”

मम्मी: “ओके राजा। आप मेरी चुत को ही गाँड समझकर फाड़ दो।”

फिर अंकल ने मम्मी को उल्टा करके दोनों हाथों से मम्मी की मुलायम गाँड को मसलने लगे। मम्मी की गाँड बहुत गोरी और चिकनी थी।

अंकल ने अपनी नाक मम्मी की गाँड के छेद पर घिसना शुरू कर दिया। मम्मी को इससे बहुत मज़ा आने लगा।

मम्मी: “उम्म्म… उफ्फ्फ…”

की आवाज़ें करने लगीं।

मम्मी: “नहीं प्लीज़… मत मारो मेरी गाँड।”

अंकल: “नहीं मारूँगा तेरी गाँड। पर इसकी खुशबू का आनंद तो लेने दे।”

अंकल ने अब अपनी जुबान मम्मी की गाँड के छेद में डाल दी।

मम्मी: “आआह्ह्ह… आआह्ह्ह… उफ्फ्… क्या कर रहे हो योगेश जी… आआह्ह्ह… बहुत मज़ा आ रहा है…”

मम्मी को गुदगुदी हो रही थी और मम्मी गाँड को इधर-उधर हिला रही थीं। अंकल भी पूरा मन लगाकर मम्मी की गाँड चाट रहे थे और मम्मी की गाँड को रेडी कर रहे थे।

अब अंकल ने मम्मी की गाँड पर लंड सेट कर दिया और फिर मम्मी की गाँड पर थूक कर अपने लंड से थूक को गाँड पर मलने लगे।

तो मम्मी ने कहा, “नहीं… नहीं…”

तो अंकल बोले, “ठीक है, नहीं मार रहा। लेकिन चुत तो फाड़ने दे।” फिर अंकल ने मम्मी की चुत को और अपने लंड को कपड़े से साफ कर दिया और फिर अपना लंड को पीछे से गाँड से हटाकर चुत पर सेट कर दिया।

फिर अंकल बहुत ज़ोर का धक्का देकर लंड मम्मी की चुत के अंदर डालने लगे।

मम्मी: “आआआ… नहींईईईई…”

अंकल के लंड का टोपा मम्मी की चुत में चला गया। चुत सूखी होने के कारण उसमें लंड टाइट हो रहा था, इसलिए अंकल को बहुत मेहनत करनी पड़ी और मम्मी को भी बहुत दर्द होने लगा। मम्मी ने अंकल को बाहर निकालने के लिए बोला, लेकिन अंकल हँस रहे थे।

अब अंकल ज़ोर देकर लंड मम्मी की चुत में डालने लगे। अंकल का लंड मम्मी की चुत को चीरता हुआ अंदर जाने लगा।

मम्मी: “आआआह्ह्ह्ह… योगेश जी… आआआ… आआ… मेेेेे… राजाआआआ… जीीीी…”

अंकल: “उउउउफ्फ्फ… वर्षा।”

अंकल ने थोड़ा लंड बाहर खींचकर फिर से एक धक्का मारा और पूरा लंड मम्मी की चुत में डाल दिया। मम्मी दर्द के मारे चीख रही थीं।

मम्मी को बहुत दर्द हो रहा था। अंकल ने फिर अपना लंड बाहर निकाला और फिर एक ज़ोरदार धक्का मम्मी की चुत में मारा।

मम्मी: “आआआ… उउउईईई…”

अंकल का लंड मम्मी की चुत में भर चुका था। अंकल मम्मी की कमर पकड़कर धीरे-धीरे धक्के मारने लगे और मम्मी की चुत मारने लगे। अंकल लंड आगे-पीछे करके चुत मारे जा रहे थे और मम्मी “उह्ह्ह… आआह्ह्ह…” करने लगीं।

अंकल: “आआआह्ह्ह्ह… वर्षा, बहुत मज़ा आ रहा है।” अंकल मम्मी की गाँड पर चाँटे मारने लगे। मम्मी अपने हाथ से अंकल को चाँटे मारने से रोकने लगीं। अंकल घपा-घप मम्मी की चुत में लंड डाल रहे थे।

फिर थोड़ी देर चुत मारने के बाद अंकल ने अपना लंड मम्मी की चुत से बाहर निकाल लिया। मम्मी “आआह्ह्ह… आआह्ह्ह…” करती हुई मुँह के बल लेट गईं।

मम्मी की चुत में गोल होल हो चुका था। अंकल कपड़े से मम्मी की चुत को साफ करने लगे और फिर अपने लंड को साफ किया। फिर मम्मी सीधी लेट गईं और अपनी दोनों टाँगें अंकल के सामने चौड़ी कर दीं।

मम्मी: “आआह्ह… योगेश जी… आआह्ह्ह…”

अंकल: “क्यों मेरी जान, मज़ा आया ना?”

मम्मी: “हम्म… आआह्ह्ह… उफ्फ्फ…”

मम्मी को थोड़ा दर्द हो रहा था, लेकिन मज़ा भी आया।

अंकल ने फिर से अपने लंड का टोपा मम्मी की चुत पर रखा और चुत पर थूक कर लंड से चुत पर मलने लगे और फिर धक्का देकर अपना लंड चुत में डाल दिए।

फिर अंकल अपनी गाँड आगे-पीछे करके मम्मी को चोदने लगे। मम्मी अंकल की चेस्ट पर हाथ घुमाती हुईं आवाज़ें करने लगीं। अंकल ने मम्मी के दोनों हाथों में अपने हाथ जकड़ लिए और मम्मी को चोदने लगे।

मम्मी नशे की धुन में सिसकारियाँ ले रही थीं। मम्मी ने अंकल को अपनी बाँहों में भर लिया। दो नंगे जिस्म एक होकर एक-दूसरे की प्यास बुझा रहे थे। मम्मी कभी अंकल की पीठ पर हाथ घुमातीं, तो कभी पीठ पर नाखून लगा देतीं।

अंकल मम्मी के रसीले होठों को चूसते हुए मम्मी को चोद रहे थे। अंकल कभी मम्मी के बूब्स को मसलते, तो कभी बूब्स को मुँह में डालकर चूसते।

अंकल: “आआह्ह… वर्षा, मज़ा आ रहा है।”

मम्मी: “उउउह्ह्ह… हाँह्ह्ह…”

अंकल: “उउउह्ह्ह्ह… मेरी जान… आआह्ह्ह्ह… वर्षा, यदि तेरा बेटा इसी रूम में होता तो उससे कहता—मैं देख… अंकित बेटा देख… देख कैसे चोद रहा हूँ तेरी मम्मी को।”

मम्मी के फेस पर हल्की मुस्कान आ गई थी।

अंकल: “आआआह्ह्ह्ह… बहुत मज़ेदार औरत है तेरी मम्मी तो।”

मम्मी: “वो तो आप कहते ही होंगे उससे—मैं तेरी मम्मी को मस्त चोदता हूँ। जब वो मुझे आपसे चुदवा सकता है तो फिर आपसे ज़रूर पूछता भी होगा—कैसे चोदते हो मेरी मम्मी को।”

अंकल: “तू मस्त रांड है मेरी। पर उसने आज तक नहीं पूछा कैसे चोदते हो। पर इतना ज़रूर पूछता है—क्या मेरी माँ की इच्छा पूरी हुई?”

मम्मी: “ओओह्ह्ह… इतना प्यार करता है मेरा बेटा मुझसे।”

अंकल: “हाँ, वो तुझसे बहुत प्यार करता है। वो तेरी चुदाई मेरे लंड से करवाने के लिए कुछ भी कर सकता है।” और फिर अंकल मम्मी को गंदे-गंदे कमेंट्स करके चोदे जा रहे थे।

मम्मी भी अपनी गाँड उछाल-उछाल कर अंकल का साथ दे रही थीं। मम्मी की चुत से बहुत पानी निकल रहा था, जिससे अंकल का लंड गीला हो चुका था।

लंड गीला होने की वजह से फच-फच की आवाज़ें आने लगी थीं। अंकल अब लंबे-लंबे कड़क शॉट मारने लगे थे। मम्मी के बूब्स ऊपर-नीचे होकर हिलने लगे थे और अंकल मम्मी को ज़ालिम दरिंदे की तरह चोद रहे थे।

मम्मी: “आआह्ह… आआह्ह… उफ्फ्…”

अंकल: “आआआह्ह्ह्ह… वर्षा…”

फिर अचानक अंकल रुक गए और मम्मी को अपनी बाँहों में भर लिया और फिर ज़बरदस्त दो-तीन धक्के मारे। ऐसा लग रहा था जैसे अंकल खल्लास हो गए हों और अपने लंड का वीर्य मम्मी की चुत के अंदर छोड़ने लगे हों।

मम्मी भी लंबी साँसें भरती हुईं अंकल से लिपट गई थीं। फिर अंकल मम्मी के ऊपर ही लेट गए और तब तक नहीं उठे जब तक अपने लंड के पानी की एक-एक बूँद मम्मी की चुत में चली न जाए।

दोनों बिल्कुल ठंडे होकर पड़े थे। फिर अंकल मम्मी की चुत से लंड निकालकर मम्मी के बगल में लेट गए। अंकल का लंड वीर्य और पानी से चमक रहा था। मम्मी की चुत के अंदर पिंक शेप गोल हो चुकी थी और उसमें से अंकल का काफी सारा वीर्य निकल रहा था।

फिर मम्मी कपड़े से अपनी चुत साफ करने लगीं। चुत से अंकल का सफेद वीर्य बाहर आ रहा था और मम्मी उसी को साफ करने लगीं। मम्मी की चुत का भोंसड़ा बन चुका था।

फिर मम्मी ने अंकल के लंड को साफ किया। अंकल उठकर बाथरूम में चले गए और फिर वापस आकर पलंग पर लेट गए। मम्मी गंदे कपड़े को लेकर बाथरूम में चली गईं और नंगी ही वापस आईं। वापस आकर मम्मी अंकल के ऊपर लेट गईं। अंकल ने मम्मी को अपनी बाँहों में ले लिया।

अंकल: “मज़ा आया?”

मम्मी: “हम्म… और आपको?”

अंकल: “बहुत। तुमने तो मुझे खुश कर दिया है। मेरा जी तो चाहता है कि तुम उस नामर्द को छोड़कर मेरे पास आ जाओ।”

मम्मी (हँसती हुई): “नहीं।”

अंकल: “क्यों, मेरे साथ रहना नहीं चाहोगी?”

मम्मी: “चाहती हूँ, लेकिन अब इस उम्र में नहीं।”

अंकल: “अंकित को भी एक बाप का प्यार दूँगा।”

ये कहकर अंकल हँसने लगे और मम्मी भी हँसने लगीं।

अब अंकल और मम्मी दोनों संतुष्ट होकर बिस्तर पर लेटे हुए बातें कर रहे थे। शाम के पाँच बज चुके थे।

मम्मी ने कहा, “अब मुझे जाना चाहिए। अंकित को बुला लेती हूँ।”

अंकल: “नहीं। उसने कहा था आठ बजे तक मम्मी को चोदना। अभी तो पाँच बजे हैं। तीन घंटे बाकी हैं। तुझे तीन घंटे और चोदूँगा। वो खुद आठ बजे तुझे लेने आ जाएगा। उसे कॉल करने की ज़रूरत नहीं है।”

मम्मी: “कॉल तो करूँगी। और उसने कहा है तो चोदिए आप मुझे पूरे आठ बजे तक।”

अंकल: “कर लेना।”

फिर मैं वहाँ से चुपचाप निकल आया और बाहर से अपनी स्कूटी निकालकर पार्क में आ गया क्योंकि मैंने दादी को बोल दिया था कि मैं मम्मी को लेकर आठ बजे आऊँगा। अभी तो पाँच बजे थे, तीन घंटे बाकी थे।

फिर मैं एक पार्क में चला गया क्योंकि आठ बजे से पहले और मम्मी के बिना घर जाता तो दादी बोलतीं—“इतना जल्दी कैसे आया और तेरी मम्मी कहाँ रह गई?” इसलिए मैं घर नहीं गया। अभी तो पाँच बजे थे। फिर मैं तीन घंटे पार्क में बैठा रहा और रात को आठ बजे मम्मी का कॉल आया।

मम्मी: “बेटा, मैं तेरे कहने से योगेश जी घर आ गई थी। तू योगेश जी घर आ जा और मैं तेरे साथ ही घर चलूँगी। नहीं तो तेरी दादी मुझे मार डालेगी।”

मैं: “ओके मम्मी। मैं अभी आता हूँ। तीस मिनट में।”

मम्मी: “हाँ बेटा, आ जाना। और बेटे, पीछे वाले गेट से आना।”

मैं: “जी मम्मी।”

फिर मैं अंकल के घर गया तो पीछे के रास्ते से और मम्मी को कॉल किया।

मैं: “मम्मी, मैं बाहर खड़ा हूँ।”

मम्मी: “बेटा, अंदर आ जा। गेट लॉक नहीं है।”

फिर मैं गेट को खोलकर अंदर गया।
Like Reply
#7
Update 5

तो देखा कि अंकल सोफे पर बैठे थे। मम्मी उन्हें चाय दे रही थीं। मम्मी के हाथ में चाय की ट्रे थी जिसमें तीन कप चाय थीं। मम्मी चाय बनाकर लाई थीं। अंकल ने बनियान पहनी थी और तौलिया लपेटा था। अंकल ने पैंट-शर्ट नहीं पहने थे। लेकिन मम्मी ने सुबह वाली ड्रेस ही पहनी थी जो वे मेरे घर से पहनकर आई थीं—एक टाइट लेगिंग और एक शॉर्ट कुर्ता जो स्ट्रैप वाला था। दुपट्टे को कंधे पर रखा था एक तरफ़ और उनकी 36डी चूचियाँ एकदम टाइट थीं।

मम्मी-अंकल मुझे देखकर मुस्कुराकर बोले, “आओ अंकित बेटा, बैठो।” फिर मैं अंकल के सामने वाले सोफे पर जाकर बैठ गया। अंकल बड़े सोफे पर बैठे थे और मैं सिंगल सोफे पर बैठ गया। फिर मम्मी ने मुझे भी चाय दी।

मम्मी: “बेटा, कैसा है तू?”

मैं: “मैं ठीक हूँ मम्मी। लेकिन आप ठीक नहीं लग रही हो।”

मम्मी ने समझ गईं लेकिन कुछ नहीं बोलीं।

अंकल: “बेटा, तेरी मम्मी थक गई हैं बेचारी। सुबह ग्यारह बजे से मेरे साथ थीं।” और फिर अंकल ने ये कहते हुए मम्मी का हाथ पकड़के अपने बगल में बैठा लिया।

मम्मी शर्म के मारे मरी जा रही थीं। उनसे कोई जवाब नहीं बन रहा था। और अंकल ने उन्हें अपने बगल में मेरे सामने बैठा लिया तो बेचारी और ज़्यादा शर्मिंदा हो रही थीं। मैंने उनके डर को दूर करने के लिए कहा—

मैं: “जी अंकल। आपने सुबह से उन्हें कंप्यूटर सिखाया, इसलिए वे सुबह से आपके साथ थीं। कंप्यूटर सीखने से थकान तो होगी ना?”

तो मम्मी ने नज़रें उठाकर मुझे देखा। मैं अपने सोफे से उठकर मम्मी के बगल में गया। अब मम्मी बीच में थीं। मैंने टेबल पे से चाय उठाकर मम्मी को दी और बोला, “मम्मी, आप क्यों शर्मा रही हो? आप ये सोचकर शर्मा रही हो ना कि आप अंकल के साथ अकेली थीं? इसमें क्या गलत है? आप कंप्यूटर सीखने आई हो।”

तो मम्मी ने भी मेरे सामने देखते हुए मेरे हाथों से चाय ली और बोलीं—

मम्मी: “बेटा, बस तू हमेशा मेरे साथ रहना।”

मैं: “मैं आपके साथ हूँ।” और फिर हम मम्मी-अंकल चाय पीने लगे।

फिर मैं बोला, “मम्मी, चलें?” तो मम्मी, “हाँ बेटे, चलते हैं।”

जब मम्मी चलने लगीं तो उनकी चाल बदल चुकी थी। वे लँगड़ा के चल रही थीं।

तो अंकल ने मज़ा लेने के लिए—

अंकल: “वर्षा, तू लँगड़ा के क्यों चल रही है? कोई क्या सोचेगा?”

मम्मी ने मुस्कुराते हुए अंकल की तरफ़ देखकर आँखें दिखाईं।

मैं: “शायद कंप्यूटर टेबल पे लगातार बैठे रहने से मम्मी की टाँग ऐसी हो गई। थोड़ी देर बाद ठीक हो जाएँगी।”

मम्मी: “बेटा, तू सही कह रहा है। अब चलते हैं।”

अंकल: “वर्षा, रात को फिर से आओगी?”

मम्मी: “क्या?”

अंकल: “फिर से कंप्यूटर सिखा दूँगा।”

मम्मी: “नहीं, आज नहीं।”

मैं: “क्यों नहीं मम्मी? आप आ जाना। पापा और दादी के सोने के बाद।”

मम्मी: “नालायक! मैं मर जाऊँगी। सुबह से मैं थक गई। अब मुझे आराम चाहिए।”

मैं: “जैसी आपकी मर्ज़ी मम्मी।”

फिर मैं और मम्मी स्कूटी से घर आए तो पापा पहले से ही आ चुके थे। दादी-पापा हॉल में बैठे थे। मम्मी सीधा किचन में चली गईं और मैं पापा-दादी के पास हॉल में बैठ गया।

रात में डिनर के बाद पापा ने कहा, “मैं पंद्रह दिन घर पे ही रहूँगा। कल से पंद्रह दिन ऑफिस नहीं जाऊँगा। घर से वर्क करूँगा।” तो मम्मी के चेहरे पे उदासी आ गई क्योंकि वे अंकल से नहीं मिल पाएँगी। फिर हम सोने चले गए।

दस दिन मम्मी और अंकल की मुलाकात नहीं हुई थी। वे सिर्फ़ फोन पर ही बातें करते थे।

अंकल भी मुझसे कई बार कहते, “बेटा, कुछ कर। तेरी मम्मी को घर से बाहर ला।” लेकिन मैं कुछ नहीं कर पा रहा था। लेकिन दस दिन बाद अंकल ने मुझसे कहा, “बेटा, एक मौका मिला है। तू साथ देना।”

मैं: “कैसे? मुझे बताइए।”

अंकल: “आज दिन में पता चल जाएगा।”

मैं: “मैं आपका साथ दूँगा।”

फिर दिन में आंटी (जिनकी बेटी की शादी हुई थी) हमारे घर आई हुई थीं। उनकी बेटी घर पे शादी के बाद आने वाली थी तो उन्होंने मम्मी को इनवाइट करने के लिए आई थीं।

उन्होंने पापा से कहा, “आप भाभी जी को हमारे घर भेज देना।” तो पापा ने कह दिया, “चली जाएगी।” फिर वे मम्मी को और मुझे अंकल के घर ले गईं जहाँ अंकल ने मुझे बाहर जाने का इशारा किया। मैं समझ गया और मम्मी से कहा, “मम्मी, मेरे एक दोस्त का कॉल आ रहा है और मैं उससे बात करके आता हूँ।” और रूम में चला गया। अंकल-मम्मी-आंटी हॉल में साइड पे बैठे थे और मैं रूम से देखने लगा।

आंटी ने मम्मी का हाथ पकड़के उठाया और मम्मी को अंकल की गोद में बैठा दिया। तो मम्मी ना-ना करने लगीं लेकिन मम्मी को अंकल की गोद में बैठा ही दिया। मम्मी शर्म के मारे मरी जा रही थीं और फिर अंकल ने भी मम्मी को पकड़ लिया और अपनी गोद में ही बैठाकर रखा।

फिर तीनों हँस-हँस कर बातें करने लगे और मम्मी बार-बार शर्मा रही थीं।

आंटी मज़ाक में मम्मी को “भाभी-भाभी” कह रही थीं।

आंटी: “तो भाभी, आप और भाई को ही सब अरेंजमेंट्स करने हैं जैसे शादी पे किए थे बस। और हाँ, वो भी कर लेना जो उसके बाद किया था। ऊपर रूम में सारी रात।”

और सब हँसने लगे।

और अंकल ने झट से मम्मी के होठों पे अपने होठ रख दिए और किस किया। आंटी जैसे एकदम से हँस पड़ीं। अंकल के इस हरकत पर मम्मी बहुत मुस्कुरा रही थीं।

मम्मी: “प्लीज़ दीदी, चुप हो जाओ।”

फिर मम्मी अंकल की गोद से उठ गईं और बगल में बैठ गईं तो अंकल ने मम्मी के कंधे पे अपना हाथ रख लिया और मम्मी को अपने से चिपका लिया। फिर मैं भी रूम से बाहर आया तो मुझे देखकर मम्मी अंकल से थोड़ी दूर खिसक गईं लेकिन अंकल ने मम्मी के कंधे से हाथ नहीं हटाया।

तो फिर आंटी ने कहा, “बेटा, मम्मी को लेकर ज़रूर आना।” और फिर थोड़ी देर बाद आंटी और मम्मी वापस हमारे घर आ गईं और फिर बातें करने के बाद आंटी चली गईं।

फिर दो दिन बाद हमें फिर से उनके घर जाना था।

दो दिन बाद पापा ने हमें जाने के लिए बोल दिया और मैं-मम्मी आंटी के घर चले गए। और साथ में अंकल नहीं गए। उन्हें कुछ काम था तो बोले, “तुम चलो। मैं ज़रूरी काम करके आता हूँ।”

उस वक्त पहले तो मम्मी ने साड़ी पहनी हुई थी। लेकिन जब हम वहाँ पे पहुँच गए तो आंटी ने उन्हें रूम में बुलाकर एक लहंगा पहनने को दे दिया। फिर मम्मी ने मुझसे कहा, “बेटा, तेरी आंटी लहंगा पहनने को बोल रही है। क्या करूँ?”

मैं: “मम्मी, आप लहंगा पहन लीजिए। ये आप पर अच्छा लगेगा।”

मम्मी: “ओके बेटा।” और फिर मम्मी वापस रूम में चली गईं। मम्मी ने वो पहना।

मम्मी तो उसमें एकदम ही हॉट लग रही थीं। चोली में मम्मी की चूचियाँ आधी नंगी ही दिख रही थीं। उन्होंने लहंगा कमर के नीचे पहना हुआ था। आंटी ने मम्मी को अच्छे से तैयार किया हुआ था। मम्मी का मेकअप भी बहुत ज़्यादा दिख रहा था। बाल जूड़े से बंधे हुए थे। इसलिए मम्मी की नंगी पीठ दिख रही थी। मम्मी का पेट चिकना और मुलायम दिख रहा था। मम्मी की नागिन जैसी कमर तो कहर ढा रही थी।

मम्मी की कमर में बंधा हुआ कमरबंद एक अलग ही सुंदर लग रहा था। मम्मी किसी हीरोइन से कम नहीं लग रही थीं। मम्मी की गहरी नाभि उनकी सुंदरता बढ़ा रही थी। मम्मी ने कुछ गहने भी पहने थे।

मम्मी जब बाहर आईं तब जो कुछ रिश्तेदार आए थे वे उन्हीं को निहार रहे थे।
Like Reply
#8
Update 6

मम्मी जब लहंगा पहनकर फंक्शन में आईं तब सब के सब उनको देखते ही रह गए। अंकल कहीं दिखाई नहीं दे रहे थे। शायद वे बाद में आने वाले थे।

आंटी ने अपनी बेटी के ससुराल वालों की ज़िम्मेदारी मम्मी पर दी थी कि वे उनका ख्याल रखें। इस वजह से मम्मी भी अच्छे से सब देख रही थीं।

उनमें जो उनकी बेटी के ससुर थे, वे बहुत देर से मम्मी पर ही आँखें जमा कर बैठे थे।

मम्मी और आंटी बातें कर रही थीं। तभी वे मम्मी के पीछे एकदम पास आकर खड़े हो गए।

तभी आंटी—

आंटी: “अरे समधी जी, आप आइए… आइए। आप कैसे हैं? सब इंतज़ाम अच्छा तो हुआ है ना?”

उनका नाम मिस्टर गांडू था।
दोस्तों, मैं उनका नाम गलत लिख रहा हूँ।
मैं ससुर को गांडू और उनकी बेटी को गुड़िया दीदी लिखूँगा।

तभी मम्मी एकदम से पीछे मुड़ीं तो मम्मी की चूचियाँ बिल्कुल उनके सामने थीं। वे उनसे नज़रें नहीं हटा पा रहे थे।

गांडू: “अरे समधिन जी, मैं तो एकदम ठीक हूँ। बाकी इंतज़ाम तो बढ़िया दिख रहा है।”

वे मम्मी की चूचियों को ही देख रहे थे।

गांडू अंकल बिल्कुल हट्टे-कट्टे, 6 फ़ीट के थे। उनका रंग साँवला था। उन्होंने पैंट-शर्ट पहना था। उनकी उम्र करीब 48 साल की होगी। पेट थोड़ा बाहर निकला हुआ था।

गांडू: “वैसे ये बहन जी कौन? ये इनको तो मैंने शादी में भी देखा था।”

आंटी मम्मी की मुलाकात उनसे करवा देती हैं।

आंटी: “अरे ये मेरी सहेली हैं वर्षा। मेरी बहन जैसी ही हैं। वर्षा, ये गुड़िया के ससुर गांडू जी हैं।”

मम्मी ने उन्हें नमस्ते कहा।

तभी आंटी वहाँ से चली जाती हैं और मम्मी और गांडू वहीं पे थे।

गांडू: “तो वर्षा, आप समधिन जी की सहेली हैं?”

मम्मी: “हाँ।”

गांडू अंकल: “मुझे लगा कि गुड़िया की सहेली होंगी।”

मम्मी: “अरे नहीं-नहीं, ऐसा नहीं है।”

गांडू: “लेकिन लगती तो आप वैसे ही हैं।”

गांडू मम्मी पर लाइन मार रहे थे।

गांडू: “आप हमेशा की तरह बहुत खूबसूरत दिख रही हैं वर्षा जी।”

मम्मी: “हमेशा की तरह मतलब?”

गांडू अंकल: “मतलब जैसे शादी में दिख रही थीं।”

मम्मी: “ओह… मतलब आप मुझे शादी के दिन भी देख रहे थे?”

गांडू: “अरे, हमारी तो नज़र नहीं हट रही थी आपके ऊपर से।”

मम्मी हँसते हुए—

मम्मी: “आप भी ना…”
और उनके छाती के ऊपर हाथ रख दिया।

गांडू अंकल ने भी मौके का फायदा उठाते हुए मम्मी का हाथ पकड़ लिया।

तभी गांडू अंकल ने मम्मी से कहा—

गांडू अंकल: “क्या आपने गुड़िया के जेवर और कपड़े देखे जो हमने उसे शादी में दिए थे?”

मम्मी: “नहीं… नहीं देखे।”

गांडू: “आइए, चलिए। मैं आपको दिखाता हूँ।”
और गांडू अंकल ने मम्मी की नंगी कमर में हाथ डाला और उनको रूम में ले जाने लगे।

मम्मी भी आराम से उनके साथ जाने लगीं।

योगेश अंकल कुछ देर बाद आए तो वे मम्मी को देख रहे थे लेकिन मम्मी उन्हें दिख नहीं रही थीं। दिखेगी कैसे? अब उनका नेटवर्क किसी और जगह व्यस्त था।

मुझे भी समझ नहीं आ रहा था मम्मी कैसे गांडू से घुल-मिल गईं।

इधर मम्मी और गांडू अंकल गुड़िया के कमरे में चले गए। गुड़िया भी वहाँ पर थी।
Like Reply
#9
Update 7

मम्मी गांडू अंकल के साथ जेवर देखने के लिए गुड़िया के रूम में चली गईं।
वहाँ पे गुड़िया भी थी।

मम्मी: “अरे गुड़िया, कैसी है? शादी के बाद तो बहुत ही निखर गई हो तुम।”

गुड़िया: “क्या आंटी, कुछ भी कह रही हैं आप।”

गुड़िया: “वर्षा आंटी, आप तो मुझसे भी ज़्यादा बहुत खूबसूरत दिख रही हैं आज।”

मम्मी और गुड़िया दोनों एक-दूसरे को तालियाँ देकर मुस्कुराने लगीं।
मम्मी गुड़िया के पास जाकर बैठ गईं।

गांडू अंकल: “अरे गुड़िया, ज़रा अपने जेवर तो दिखाओ वर्षा जी को।”

गुड़िया: “जी, अभी दिखाती हूँ।”

गुड़िया अपने जेवर मम्मी को दिखाने लगीं। मम्मी वो जेवर देख रही थीं। काफ़ी महंगे और अच्छे जेवर उसके ससुराल वालों ने दिए थे।

मम्मी जब जेवर देख रही थीं तब वे बैठी हुई थीं और गांडू अंकल खड़े थे। उनको मम्मी की चूचियाँ आराम से दिख रही थीं। वे उन्हीं का लुत्फ़ उठा रहे थे।

तभी गुड़िया कुछ कहकर बाहर चली जाती है।
मम्मी भी बाहर जाने के लिए खड़ी हो जाती हैं।

मम्मी: “अब हम भी बाहर जाते हैं।”

गांडू: “अरे, आपने अभी देखा ही क्या है… आप आराम से देखिए। आपका ही घर समझिए।”

तभी गांडू अंकल मम्मी के पास चले जाते हैं।

गांडू अंकल: “वैसे आप भी आज बहुत अच्छे जेवर पहनकर आई हैं… बिल्कुल जन्नत की हूर लग रही हैं।”

गांडू अंकल अपने दोनों हाथ मम्मी के कंधों पर रखकर उनकी आँखों में देखकर कहने लगे।
मम्मी शर्म से आँखें नीचे कर दीं। उनकी साँस थोड़ी तेज़ हो गई थी।

मम्मी: “जी, ऐसा कुछ नहीं है।”

गांडू अंकल मम्मी की कमर में हाथ डालकर उनको धीरे से अपने पास खींच लेते हैं। अब मम्मी और उनमें ज़्यादा अंतर नहीं था।
मम्मी बहुत डर गई थीं कि वे ये क्या कर रहे हैं।

गांडू अंकल: “ऐसा कैसे कुछ नहीं है? ये देखिए, आप खुद आईने में देखिए।”

ये कहकर गांडू अंकल ने मम्मी को घुमाकर आईने के सामने खड़ा कर दिया और मम्मी की कमर को पकड़कर उनके पीछे खड़े हो गए।

गांडू अंकल: “ये देखिए वर्षा जी, आप कितनी खूबसूरत लग रही हैं।”

ये कहते हुए गांडू अंकल अपने हाथ मम्मी के पेट पर घुमा रहे थे और अपना लंड मम्मी की चूतड़ों को घिस रहे थे। उनका लंड अब सख्त होने लगा था।

मम्मी को उनका लंड और महसूस होने लगा। उनकी साँसें तेज़ हो रही थीं।
मम्मी ने अपनी आँखें कुछ देर के लिए बंद कर दीं और गांडू अंकल की बाँहों से निकल गईं।

मम्मी: “मुझे लगता है अब हमें चलना चाहिए।”
और मम्मी वहाँ से निकल गईं…

गांडू अंकल ने तो मम्मी को गरम करने का पूरा इंतज़ाम किया हुआ था, लेकिन मम्मी वहाँ से बच निकल गईं… और सीधा मेरे पास आईं।

मम्मी: “बेटा, कुछ बात करनी है।”

मैं: “बोलो मम्मी।”

मम्मी: “बेटा, आज गुड़िया के ससुर ने मुझे सेड्यूस करने की कोशिश की।”

मैं: “क्या? मम्मी, आपने उसे चाँटा क्यों नहीं मारा?”

मम्मी: “बेटा, वो गुड़िया का ससुर है और गुड़िया तेरी बहन जैसी है। मैं उसकी इन्सल्‍ट करती तो गुड़िया की ज़िंदगी में प्रॉब्लम होती। इसलिए मैं बाहर आ गई बेटा।”

मैं: “मम्मी, क्या उन्होंने आपके कपड़े…?”

मम्मी: “नहीं बेटा। उसने मुझे पकड़ा और मैं कुछ देर रूम में रुकती तो वो शायद…”

मैं: “मम्मी, अब आप उसके पास मत जाना। लेकिन योगेश अंकल के साथ…”

मम्मी (हँसती हुई): “नालायक! क्या तू मुझे योगेश के साथ सुलाकर ही रहेगा?”

मैं: “हाँ मम्मी। एक दिन योगेश अंकल और आप दोनों की दोस्ती करवाऊँगा।”

मम्मी: “मुझे ज़रूरत नहीं है। तेरे पापा हैं।”

मैं: “मम्मी, पापा तो ज़्यादातर आउट ऑफ़ सिटी रहते हैं। आपको अंकल की और अंकल को आपकी ज़रूरत है।”
और ये कहकर मैं वहाँ से दूर हो गया।

कुछ देर बाद योगेश अंकल भी आ गए।
योगेश अंकल ने जैसे ही मम्मी को देखा, वे एकदम देखते ही रह गए।
उन्होंने मम्मी को आँखों से ही इशारा करते हुए “बहुत अच्छी लग रही हो” कहा।

मम्मी भी उनको देखकर स्माइल देने लगीं।
लेकिन जब तक फंक्शन था तब मम्मी के दिमाग से गांडू अंकल का ख्याल नहीं गया था।
गांडू अंकल और मम्मी बार-बार एक-दूसरे को शर्म की आँखों से देख रहे थे।

मैं भी थोड़ा इधर-उधर गुड़िया के साथ घूम रहा था। गुड़िया भी काफ़ी हॉट थी। लेकिन मैंने जो अंदर देखा था उससे मेरा भी लंड खड़ा हो गया था। तो मैं भी कभी-कभी गुड़िया की कमर को और चूचियों का हाथ लगाकर मज़े ले रहा था। वो मुझे छोटा भाई ही मानती थी इसलिए उसको कुछ शक नहीं हो रहा था। मैंने बातों-बातों में उसके गाल पर किस भी कर दिया। वो मेरी तरफ़ देखने लगी। तब मुझे डर लगा कि लगता है ये कुछ ज़्यादा हो गया। लेकिन उसने मुस्कुराते हुए रिटर्न में मुझे भी किस कर दिया। उसका लिपस्टिक मेरे गाल पर लग गया। मेरा लंड तो वहीं पर झड़ गया।

जब रात नौ बजे गुड़िया और उनके ससुराल वाले चले गए…

अब रात के दस बज चुके थे।

आंटी ने मुझसे कहा—

आंटी: “बेटा, मैंने तुझसे कहा था वर्षा और योगेश के बारे में।”

मैं: “आंटी, मुझे कुछ नहीं कहना।”

आंटी: “बेटा, मैंने आज ऊपर वाला कमरा अच्छे से सजाया है जैसे सुहागरात में सजाते हैं। इसलिए मैं आज रात को वर्षा और योगेश को उसमें सुला दूँगी। अगर इनमें कुछ है तो सुबह पता चल जाएगा।”

मैं: “आंटी, मुझे कुछ पता नहीं करना है। मैं तो इतना चाहता हूँ मम्मी खुश रहें। आप चाहें तो दोनों को एक साथ सुला दें। मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है। और मुझे ये भी नहीं जानना है दोनों के बीच रात को कुछ होता है या नहीं। मम्मी की ज़िंदगी है, वे उनकी मर्ज़ी से जिएँ। मैं हमेशा मम्मी के साथ हूँ।”

आंटी: “ओके बेटा। मैं आज इन्हें ऊपर वाले रूम में सुलाऊँगी। बस तुझसे इतना कहूँगी—तू उनके बगल वाले रूम में सो जाना। कुछ होगा तो तुझे पता चल जाएगा और नहीं होगा तो मेरा शक दूर हो जाएगा।”

मैं: “नहीं आंटी। मुझे उनके पास वाले रूम में नहीं सोना। एक बेटा अपनी मम्मी की जासूसी करे ये ठीक नहीं।”

आंटी: “बेटा, मैं जासूसी करने का नहीं। मैं तो सिर्फ़ इतना कह रही हूँ—तू अपनी मम्मी से प्यार करता है, ये भी पता कर वे खुश हैं या नहीं। मैं तुझसे ये नहीं कह रही हूँ तू उनको देखना। मैं तो बस इतना कह रही हूँ अगर तू बगल वाले रूम में सोएगा तो तुझे शायद कुछ मालूम हो जाए। और तू वर्षा से प्यार करता है ये पता कर वे खुश हैं या नहीं। और दोनों रूम में एक खिड़की है जो हमेशा खुली रहती है।”

मैं: “नहीं आंटी।”

आंटी: “बेटा, इतना तो कर सकता है तू। कुछ देखना मत, पर तुझे ये तो पता चल जाएगा कि दोनों खुश हैं या नहीं। और वर्षा ने कहा है तू उसे योगेश के घर भेजा है कंप्यूटर सीखने।”

मैं: “हाँ, इसमें क्या गलत है? अंकल मम्मी को कंप्यूटर सिखाते हैं।”

आंटी: “तो ठीक है। मैं उनसे बोल दूँगी वे आज भी कंप्यूटर सीख लेंगे।”

मैं: “जो आपको ठीक लगे।”

फिर उसके बाद मम्मी ने आंटी से घर जाने की बात कही तो—

आंटी ने मेरी तरफ़ देखते हुए: “वर्षा, आज तू यहीं रुक। कल जाना। मैंने तेरे सोने के लिए ऊपर कमरा खाली कर दिया है। तू ऊपर सो जाना और अंकित मेरे पास सोएगा। आखिर वो मेरा भी तो बेटा है।”

मम्मी: “क्या दीदी? मैं अकेली कैसे सोऊँगी?”

आंटी (हँसते हुए): “वैसे ही जैसे शादी वाली रात सोई थी।”

मम्मी ने शर्म से अपना सिर नीचे झुका लिया और कुछ नहीं बोलीं।

अंकल: “दीदी, मैं वर्षा को कंप्यूटर सिखाता हूँ। आप कहें तो क्या मैं आज भी इसे कंप्यूटर सिखा दूँ?”

आंटी: “मुझसे क्यों पूछ रहे हो? अंकित से पूछो। वो इसका बेटा है।”

मम्मी: “नहीं दीदी… नहीं दीदी…”

मैं: “क्यों मम्मी? आप चाहें तो सीख लीजिए। मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं।”

आंटी: “देख, तेरा बेटा भी बोल रहा है। सीख ले आज रात। वैसे भी तो पहले से सीख रही है। चल, मैं तुझे ऊपर रूम में छोड़कर आती हूँ। योगेश, तुम भी आ जाओ। ऊपर रूम में कंप्यूटर भी रखा है।”

फिर आंटी मम्मी का हाथ पकड़के ऊपर ले गईं। मम्मी पीछे से मुझे देख रही थीं और थोड़ी देर में मम्मी-आंटी ऊपर चली गईं।

अंकल मेरे पास आए।

योगेश अंकल: “बेटा, ऊपर रूम रेडी है सुहागरात का।”

मैं: “अंकल, तो जाइए ना और फाड़िए मम्मी की चुत पूरी रात।”

फिर अंकल बोले: “चल ऊपर, मुझे छोड़ने।”

तो मैं और अंकल ऊपर चले गए और रूम के बाहर—

मैं: “अंकल, मैं दूर छिप जाता हूँ। नहीं तो मम्मी को शर्म आएगी।”

अंकल: “हाँ, तू ज़ीने में रुक और दीदी के साथ नीचे चले जाना। फिर बाद में आकर लाइव देखना। मैं खिड़की खोल दूँगा।”

मैं: “नहीं अंकल। मैं आज आंटी के साथ सोऊँगा। मैं नहीं आऊँगा।”

अंकल: “बेटा, आज तू ज़रूर देखना। और मैं तेरे वापस आने के बाद ही रूम में जाऊँगा।”

मैं: “लेकिन नीचे आंटी हैं। मैं उनके सोने के बाद आऊँगा।”

अंकल: “बेटा, वे रोज़ रात को नींद की टैबलेट लेती हैं। वे जल्दी सो जाएँगी। तू आ जाना।”

मैं: “ओके अंकल।”

फिर मैं ज़ीने में आ गया।

अंकल ने दरवाज़ा खटखटाने लगे।
तभी आंटी बाहर आईं और—

आंटी: “हा हा भाई, बहुत जल्दी है आपको अंदर जाने की।”

अंकल: “अरे दीदी, तुमने तो कमाल ही कर दिया। वर्षा बहुत खूबसूरत लग रही थी आज।”

दीदी: “हाँ, जाइए अंदर। आपकी दुल्हन इंतज़ार कर रही है।”

योगेश अंकल एक दो हज़ार का नोट निकालते हैं और आंटी को दे देते हैं। और रूम के अंदर चले जाते हैं।
फिर आंटी नीचे आने लगती हैं तो मैं वहाँ से जल्दी से नीचे आ जाता हूँ और सोफे पर बैठ जाता हूँ।

फिर आंटी भी आ जाती हैं और बोलती हैं—

“क्या तू देखने जाएगा?”

मैं: “नहीं आंटी।
वो मेरी मम्मी हैं। मैं चाहता हूँ वे खुश रहें। यदि उनके बीच कुछ होगा तो वे एन्जॉय करें। मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं। और उनके बीच कोई ऐसा रिलेशन नहीं तो मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं। उनकी ज़िंदगी, वे जानें। अब मुझे नींद आ रही है। मैं सोता हूँ।”

आंटी: “तू चाहे तो मेरे साथ रूम में सो ले।”

मैं: “हाँ आंटी। लेकिन मैं रात को मोबाइल पे मूवी देखता हूँ।”

आंटी: “देख लेना।”
और फिर मैं आंटी के साथ उनके रूम में आ गया।

और आंटी ने टैबलेट ली।

मैं: “ये टैबलेट आप क्यों लेती हो?”

आंटी: “बेटा, मुझे नींद की प्रॉब्लम है। इसलिए टैबलेट लेती हूँ।”
और आंटी सो गईं। थोड़ी देर बाद मैंने आवाज़ लगाकर आंटी को चेक किया लेकिन आंटी नहीं उठीं। फिर मैं जल्दी से ऊपर गया।
Like Reply
#10
Update 8



अंकल अभी भी रूम के बाहर खड़े थे। वे मेरा इंतज़ार कर रहे थे।

मैं: “क्या अंकल, आप अंदर गए क्यों नहीं? मम्मी आपका वेट कर रही होंगी।”

अंकल: “मैंने तुझसे कहा था ना, तेरे आने के बाद रूम में जाऊँगा। और मैंने तेरे लिए खिड़की का बंदोबस्त भी किया है। ये देख।” अंकल ने मुझे विंडो दिखाई और बोले, “एक विंडो ऊपर देख। वो विंडो बाथरूम की थी।”

मैंने कहा, “क्या बाथरूम में भी?”

अंकल बोले, “हाँ।”

फिर अंकल अंदर चले गए और मैं विंडो पर अंदर देखने लगा।

मम्मी अपने बाल बनाते हुए शीशे के सामने बैठी हुई थीं।
और मम्मी ने थोड़ा सा और मेकअप लगाया हुआ था। मैंने देखा कि मम्मी ने लहंगा थोड़ा और नीचे पहना हुआ था। चुत से सिर्फ़ थोड़ा ही ऊपर था। और उनका मंगलसूत्र उनके क्लीवेज पे लटक रहा था।

अंकल मम्मी को पीछे से जाकर पकड़ते हैं और मम्मी की गोरी गर्दन पर अपने होठों से चूमते हैं।

अंकल: “आज तुम गज़ब की हसीन लग रही हो… जल्द ही मैं तुमसे शादी करके दुनिया के सामने तुम्हें अपनी पत्नी बना लूँगा।”

मम्मी: “मैं तो आपको तन-मन-धन से अपना पति मान ही चुकी हूँ। इसलिए आपके साथ अभी यहाँ इस सेज पर हूँ। पर शादी की क्या ज़रूरत है?”

अंकल: “ठीक है।”

फिर अंकल ने मम्मी के होठ चूमना शुरू किया। दोनों एक-दूसरे को बहुत प्यार से चूमे जा रहे थे। एक-दूसरे के मुँह से सलाइवा लीक हो रहा था। मम्मी ने अपना मुँह चौड़ा किया तो अंकल ने अपनी ज़ुबान उनके मुँह में डाल दी। उनकी ज़ुबान अपने पूरे मुँह में घुमा के चूसने लगीं, अंकल भी अपनी ज़ुबान को मम्मी के पूरे मुँह में घुमा रहे थे, जो मम्मी के मुलायम गालों से पता चल रहा था।

उनके प्रगाढ़ चुंबन से ऐसी आवाज़ें निकल रही थीं—स्स्सूउउप्प्प… पुच्छ्छ… स्स्स्प्प्प्प…

अंकल मम्मी को स्मूच करते हुए उनकी चोली की पीछे डोरी खोल दी। और जब चोली हल्की हो गई तो अंकल ने अपने पंजे चोली के अंदर घुसा दिए और मम्मी के 36 के बूब्स मसलने लगे।

कुछ देर तक बूब्स मसलने के बाद अंकल ने मम्मी को बिस्तर पर लिटा दिया और मम्मी के पेट को चूमने लगे और अपनी जुबान मम्मी के चिकने मुलायम पेट पर घुमाने लगे।

मम्मी: “आआह्ह… उफ्फ्… आआह्ह…”
करके आवाज़ें निकाल रही थीं।

और अंकल के बालों में हाथ घुमाने लगीं। अंकल अपने मुँह से मम्मी के पेट पर दबाव बना रहे थे। इस वजह से मम्मी को गुदगुदी महसूस हो रही थी।

अब अंकल ने मम्मी की चोली निकालकर बाजू में रख दी। अब मम्मी के बूब्स नंगे थे। एकदम रसीले और फूले हुए।

पहले तो अंकल ने मम्मी के बूब्स पे जीभ फेरने लगे। बहुत देर तक जीभ से चाटते रहे।

फिर अंकल ने मम्मी की लेफ्ट चूची अपने हाथ में पकड़कर दबाई और निप्पल्स मुँह में भरकर चूसने लगे। और राइट चूची को ज़ोर से मसलने लगे। अंकल मम्मी के निप्पल को दाँतों तले दबाकर काटने लगे। मम्मी की उत्तेजना भरी सिसकारियाँ निकल रही थीं—स्स्स्स… आआह्ह्ह… स्स्स्स… आय्य्यी… उम्म्म…

अंकल ने बूब्स को दबा-दबा कर और दाँतों तले कुचलकर उसपे लाल निशान बना दिए थे। इस प्रक्रिया के बाद तो मम्मी के 36 के बूब्स और भी मोटे और भरावदार हो गए थे। जो मम्मी के हुस्न में चार चाँद लगा रहे थे।

अंकल: “आआह्ह्ह्ह… मज़ा आ गया। मेरी वर्षा रानी, तुम्हारे नाम के साथ तुम्हारी चूचियाँ भी वाकई में रसीली हैं। मज़ा आ गया। अब तो हर रोज़ इसको चूसूँगा। पिछले बारह दिनों से नहीं चूसी थी।”

मम्मी: “आपका यही प्यार करने का अंदाज़ मुझे आपके लिए पागल बना देता है… आप जैसा मर्द पूरी दुनिया में कोई नहीं होगा।”

अंकल: “तुम्हारे जैसी जन्नत की हूर को पाकर मैं भी अपने आप को बड़ा मानता हूँ। तुम्हारे ये मम्मे तो छह महीने पहले जो थे उससे और भी ज़्यादा बड़े और हसीन हो गए हैं।”

मम्मी: “ये आपका ही काम है। छह महीनों में आपने कर दिए हैं।”

अंकल: “तेरे बेटे ने करवाए हैं।”

मम्मी: “हाँ, उस नालायक ने करवाए हैं। और आज भी कितना मासूम बनकर बोल रहा था—‘मम्मी, कंप्यूटर सीख लेना’—ये जानते हुए भी मैं आपसे चुदवाऊँगी।”

फिर अंकल ने मम्मी के लहंगे का नाड़ा खींचकर खोल दिया और लहंगे को पलंग के नीचे फेंक दिया। लहंगे के नीचे मम्मी ने कुछ नहीं पहना था, पूरी नंगी थीं।

उनकी गोरी मांसली जाँघों के बीच गोरी चिकनी चुत के द्वार की हल्की लकीर बड़ी आकर्षक लग रही थी। चुत के पास एक भी बाल नहीं थे। लगता है आज ही साफ की होगी।

मम्मी के शरीर पे एक भी वस्त्र नहीं थे। सिर्फ़ गहने पहने हुए थे जो वे उतारने लगीं।

अंकल ने मना किया कि गहने मत निकालो। ये तुम्हारी सुंदरता को और बढ़ाते हैं। और ये बालों में गजरा भी रहने ही दो। हाथों में चूड़ियाँ, कानों में झुमके, माथे पे टीका, पैरों में पाज़ेब, गले में दोनों बूब्स के दरम्यान लटकता हार—ये सब साज-शृंगार मम्मी के नग्न शरीर को किसी कामदेवी जैसा बना रहा था।

अंकल ने मम्मी को पलंग के किनारे पर इस तरह लिटा दिया कि मम्मी की टाँगें पलंग के नीचे झूल रही थीं। अंकल पलंग के नीचे इस तरह बैठ गए कि उनका मुँह मम्मी की चुत के सामने था।

उसके बाद अंकल पहले मम्मी की चुत को सूँघने लगे। फिर चुत के द्वार पे अपने होठ जोड़कर एक हल्का किस किया, और फिर उसपे हल्के से अपनी उँगली घुमाने लगे।

अंकल: “आआह्ह… बिल्कुल फूल जैसी महक है तुम्हारी प्यारी चुत की। मन करता है इस महक में घंटों खोया रहूँ। बहुत बदकिस्मत था तुम्हारा पति जिसे इतने अनमोल फूल की कद्र नहीं थी। ये मेरे लिए एक अनमोल तोहफा है। इसको मैं हमेशा प्यार से इस्तेमाल करूँगा। वर्षा, इसका तुम मेरे लिए हमेशा जतन करके रखना।”

योगेश अंकल ने मम्मी की गुलाब के फूल की तरह गुलाबी चुत को सहलाते हुए कहा। मम्मी अपनी आँखें बंद किए हुए अंकल की बातों में खो गई थीं।

फिर अंकल ने अपनी प्यासी ज़ुबान को चुत के द्वार में ऊपर-ऊपर फेरने लगे। ज़रा सी ज़ुबान टच होने से मम्मी ऐसे काँपीं कि जैसे उनके पूरे शरीर में करंट लग गया हो।

धीरे-धीरे अंकल अपनी ज़ुबान को चुत के द्वार से अंदर गहराइयों में घुमाने लगे थे।

मम्मी ने अंकल का सर पकड़ रखा था और अपनी उँगलियाँ उनके बालों में घुमा रही थीं। और अंकल अपनी ज़ुबान से मम्मी की चुत की खाई में गोते लगा रहे थे।

कुछ देर में मम्मी की चुत गीली होने लगी थी। मैं ये तो नहीं कह सकता था कि वो गीलापन अंकल के थूक का था या मम्मी का नमकीन पानी का या दोनों मिक्स हो सकते हैं।

उनकी चुत जो पहले से क्लीन शेव थी, उसपे वो पानी के कतरे बड़े आकर्षक लग रहे थे जैसे एक खिले हुए फूल पे शबनम के कतरे खिलते हैं।

अंकल ने चुत को अच्छे से चाट-चाट के और भी खूबसूरत चिकनी बना दी थी। फिर वे उठे और ड्रेसिंग टेबल के ड्रॉअर से मम्मी की लिपस्टिक निकाली और फिर वापस बैठकर चुत के पास कुछ कर रहे थे। बाद में देखा कि उन्होंने लाल लिपस्टिक से चुत के ऊपर दिल वाला निशान बनाया था। यानी जो दिल ड्रॉ किया था उसके सेंटर में चुत थी और दिल के ऊपर क्रॉस निशान बनाके अपना नाम लिखा—“योगेश वर्षा”। फिर चुत को बड़े प्यार से चूमा।

मम्मी ने जब अपनी चुत पे ये सब देखा तो अंकल को कसके गले लगा लिया और अपने होठ उनके होठ से मिलाकर चूमने लगीं।

फिर अंकल ने कहा, “क्या मेरे कपड़े नहीं उतारोगी?”

तो मम्मी ने—

मम्मी: “उतारती हूँ मेरे राजा… मेरे आशिक… मेरे बेटे अंकित के अंकल… उसकी मम्मी वर्षा को कंप्यूटर सिखाने के बहाने चुत फाड़ने वाले योगेश जी…”

अंकल: “आआह… वर्षा, ये हुई ना बात।”

और मम्मी ने अंकल के सारे कपड़े उतार दिए। और लास्ट में अंडरवियर उतारते ही उनका फनफनाता हुआ लंड स्प्रिंग की तरह निकल आया। मम्मी पलंग पे बैठ गईं। अंकल पास में खड़े थे।

मम्मी ने लंड को अपनी हथेली में थामा और सहलाने लगीं। जैसे-जैसे मम्मी के नाज़ुक गोरे हाथ लंड को सहलाते, वो और फूलता चला जाता और बड़ा होता जाता।

मम्मी: “आपने कहा था मेरे से—‘वर्षा, तुम्हारे ये मम्मे तो छह महीने पहले जो थे उससे और भी ज़्यादा बड़े और हसीन हो गए हैं’—तो मैं आपसे कहती हूँ। मैंने छह महीने पहले आपका ये लंड देखा था तो उस हिसाब से अभी भी साइज़ में वैसा ही है। मेरे मम्मे तो आपने बड़े कर दिए लेकिन मैं आपका लंड बड़ा नहीं कर पाती। आज भी आपका लंड वैसा ही घोड़े जैसा है। आपका लंड तो पहले से ही शेर है। मैं तो कुछ नहीं कर पाती।”

अंकल: “तुझे बस इसकी खुशी रखना है। हमेशा अपने मुँह और चुत में लेना है।”

मम्मी: “हाँ, हमेशा इसे अपनी चुत और मुँह में रखूँगी। देखो इसे कैसे मज़बूती के साथ मेरे चेहरे को सलामी दे रहा है।”
Like Reply
#11
Update 9

---

मम्मी ने अपना चेहरा लंड के करीब ले गईं और जहाँ से लंड का टोपा था वहाँ पे किस किया।
मम्मी ने अंकल के 10 इंच बड़े लंड को हाथ में लिया और अपनी ज़ुबान बाहर निकालकर अंकल के लंड के ऊपर के हिस्से को चाट लिया।

अंकल ने मम्मी के बालों के जूड़े से फूलों का गजरा निकाल दिया और अपने एक हाथ पे लपेट लिया और उसे सूँघने लगे। सीन कुछ इस तरह का था कि मम्मी पलंग पे बैठकर अंकल को ब्लोजॉब दे रही थीं और अंकल पलंग के पास खड़े हुए आँखें मूँदे गजरा सूँघ रहे थे।

जितना हो सकता मम्मी अपना मुँह खोलकर अंकल का लंड अपने मुँह में लेतीं, तब भी सिर्फ़ लंड का आधा हिस्सा ही मुँह में जा पाता। लंड अपनी पूर्ण जाग्रत अवस्था में खड़ा था।

अंकल: “अच्छा लग रहा है ना वर्षा, चख के।”

मम्मी: “उम्म्म… यम्म… हम्म… ऐसा लग रहा है जैसे आम ही चूस रही हूँ।”

फिर मम्मी ने अंकल के मोटे गोल अंडों को भी चूसा। तब तो अंकल मज़े के मारे चिल्ला उठे थे—“आआआह्ह्ह्ह… वर्षा मेरी जान… मज़ा आ गया…”

काफ़ी देर तक अच्छी तरह से अंकल का लंड चूसने के बाद मम्मी ने अंकल का लंड अपने मुँह से बाहर निकाला। और फिर अंकल ने मम्मी को खड़ा किया और दोनों खड़े-खड़े एक-दूसरे को स्मूच करने लगे।

फिर अंकल ने मम्मी को उनकी जाँघों से पकड़के उठा लिया और ड्रेसिंग टेबल पर बैठा दिया।

वे लगातार स्मूच किए ही जा रहे थे। और साथ में अंकल ने मम्मी की टाँगें चौड़ी करके बीच में खुद खड़े हो गए, और लगे हुए लंड को चुत के सुराख के बीच में सेट किया।

अंकल: “उउउग्ग्ग्ह्ह्ह… वर्षा, आज एक बार फिर से मैं तुम्हारी चुत में अपना लंड प्रवेश करने जा रहा हूँ। कैसा लग रहा है तुम्हें?”

वर्षा: “आआआआआ…”

मम्मी: “स्स्स्स… मैं बहुत भाग्यशाली हूँ जो मुझे पिछले छह महीनों से आपके जैसा मर्द मिला… आआह्ह… जल्दी करो, मेरी योनि तड़प रही है।”

फिर अंकल ने अपने लंड को ज़रा सा हिलाकर फुल टाइट किया और चुत की लाइन पे लंड को रखकर हल्का सा पुश किया। चिकनाहट की वजह से लंड का आगे का टोपा चुत की बंद लाइन को चीरता हुआ चुत में सरक गया। मम्मी की सेक्सी आह निकली।

फिर अंकल ने अपना लंड वापस से खींचा और दोबारा चुत में पुश किया। इस बार पहले से और ज़्यादा लंड अंदर चला गया था। साथ ही मम्मी ने अंकल को बाँहों से कसके जकड़ लिया और कामुकता भरी आहें भरने लगीं।

अंकल मम्मी के एक-एक अंग को मसलते जा रहे थे और साथ में मम्मी को स्मूच भी किए जा रहे थे।

नीचे से उनका लंड भी मम्मी की चुत में अच्छे से काम कर रहा था। अभी तक उनका आधा लंड ही चुत में जाता और वे वापस खींचके दोबारा डालते और फिर मम्मी की चुत की क्लिटोरिस को मसलते-सहलाते जिसकी वजह से मम्मी की वासना बढ़ने लगती और वे मस्ती में ज़ोर-ज़ोर की सिसकारियाँ निकालतीं। चुत की चिकनाहट बता रही थी कि वे बहुत पानी छोड़ चुकी हैं। फिर एक बार अंकल ने अपना पूरा का पूरा मोटा लंड चुत की गहराइयों में समा दिया।

मम्मी की तो लंबी चीख ही निकल गई—“आआआआह्ह्ह्ह… आय्य्यीईईई… माँ… बाहर निकालो…”

पर अंकल ने मम्मी की नहीं सुनी। उन्होंने ऐसे ही चुत में अपना लंड रहने दिया और मम्मी को सहलाने लगे।

अंकल: “उउग्ग्ग्ह्ह्ह… वर्षा आ… तुम्हारी चुत की गर्मी पहले से काफ़ी बढ़ गई है। मेरे लंड को सुकून मिल गया… आआह्ह्ह… अब मैं हर रोज़ इस चुत का सुख लूँगा।”

मम्मी: “आय्य्य… स्स्स्स… उउह्ह्ह्ह… आपका लंड भी पहले से काफ़ी मोटा हो गया है। पर कोई बात नहीं, मैं बर्दाश्त कर लूँगी।”

अंकल: “रानी, इसी लंड पे मैं तुम्हें जन्नत की सैर करवाऊँगा। अब मज़े लो…”

मम्मी: “वो तो आप पिछले छह महीनों से करवा रहे हो।”

फिर अंकल ने हल्के से अपने कुल्हे हिलाने शुरू किए और लंड को चुत के अंदर घिसने लगे। मम्मी दर्द के साथ-साथ सिसकारियाँ भी निकाल रही थीं।

जब अंकल के धक्कों से मम्मी हिलतीं तो साथ में उनकी पाज़ेब की झंकार भी गूँजती जिसका आवाज़ बड़ा सुहाना लगता।

साथ में मम्मी के नग्न शरीर पे गहने और भी खिल उठे थे। चूड़ियों की खन-खनahat और भी सुर बिखेरती। ऐसा लग रहा था जैसे कामदेवता और कामदेवी का संभोग चल रहा हो। जैसे कामसूत्र के दो खिलाड़ी हों।

अब अंकल ने मम्मी के कुल्हों को मज़बूती के साथ पकड़ लिया और फिर मम्मी को कुछ कान में कहा तो मम्मी ने कहा कि नहीं, कहीं गिर-विर गए तो… अंकल ने कहा, कुछ नहीं होगा, तुम बस वैसे करो जैसा मैंने कहा।

फिर मम्मी ने अंकल की कमर के नीचे अपनी टाँगें मज़बूती के साथ लपेट लीं और अपने हाथों का घेरा बनाकर अंकल की बाँहों में कस लिया।

फिर अंकल ने मम्मी को कुल्हों से थामकर उचक लिया। इस दौरान अंकल का मूसल लंड मम्मी की चुत में ही था और फिर खड़े-खड़े वे मम्मी को कुल्हों से थामकर चोदने लगे।

थाप्प्प्प… थाप्प्प्प… थाप्प्प्प… की चुदाई भरी आवाज़ें कमरे को हिला रही थीं। और साथ ही अंकल मम्मी को अपने लंड पे उछलवाते तब बहुत ज़ोर-ज़ोर से गुर्राते—“उउउग्ग्ग्ह्ह्ह… ओह्ह्ह…” मैं उस बहुत सहम गया था अंकल की ताक़त को देखकर।

अंकल का शरीर पसीने से भीग चुका था पर अंकल बिल्कुल भी नहीं हारे थे। वे मम्मी को अपने मूसल लंड पे बड़ी मज़बूती से उछाल-उछाल कर चोद रहे थे।

मम्मी का सफेद मांसली शरीर गुलाबी पड़ चुका था, और वे हाँफने लगी थीं। उन्होंने अंकल से कहा कि वे अब और इस पोज़ीशन में नहीं चुदवा सकतीं, उन्हें नीचे उतारो।

फिर मम्मी को सीधा सुलाकर वे उनके ऊपर चढ़ गए जैसे नॉर्मल पोज़ीशन में रहकर चोदते हैं वैसे ही चोदने लगे।

मम्मी ने अपनी टाँगें अंकल की जाँघों में घुमा दीं और अपने हाथ उनके की पीठ पर जकड़ लिया। और फिर अंकल ने अपने सख्त लंड से एक बड़ा शॉट लगाकर चुत की गहराई तक उतार दिया और फिर शुरू हो गया चुदाई का तांडव।

धप्प्प… थप्प्प… धप्प्प… थप्प्प… दोनों के शरीर की थाप पूरे कमरे में गूँज रही थी और साथ ही अंकल के कठोर धक्कों के कारण पुराना पलंग भी चर्र-चर्र की आवाज़ें कर रहा था और साथ ही डोल रहा था उनके चुदाई के साथ-साथ।

अंकल ने अपना मुँह मम्मी के मुँह में समा लिया था और मम्मी के गोल-गोल मोटे मम्मे अंकल के बालों भरे मज़बूत सीने में दब गए थे। दोनों एक-दूसरे के साथ जुड़कर ऐसे चुद रहे थे कि बीच से हवा भी न गुज़र सके।

इस दौरान मम्मी की चुत से तकरीबन तीन बार पानी निकल चुका होगा। मम्मी का शरीर हर एक धक्के पर काँप रहा था।

अंकल: “उउउग्ग्ग्ह्ह्ह… वर्षा, तुम अब सिर्फ़ मेरी ही रहोगी। तुम्हारी चुत में अब सिर्फ़ मेरा ही लंड जाएगा… आआह्ह्ह… रसीली चुत की मालकिन मेरी वर्षा…”

मम्मी: “हाँ मेरे राजा, सिर्फ़ तुम्हारा ही लंड जाता है मेरी चुत में… और किसी का नहीं…”

अंकल: “और मेरे अलावा किसी और का जाने भी नहीं दूँगा।”

कहते हुए अंकल ने आखिरी के ज़ोरदार झटके लगाए और फिर शांत होकर मम्मी के ऊपर ही ढेर हो गए। और मम्मी को चूमने लगे।

मम्मी: “य्य्यूम्म्म… योगेश जी… मुझे ऐसा लग रहा है, आपके साथ मेरी हर रात सुहागरात जैसी होती है। पिछले छह महीनों में आपने जो सुख दिया मैंने तो सोचा भी नहीं था।”

अंकल: “उम्म्म… मैंने कहा था ना, स्वर्ग की सैर कराऊँगा तुम्हें। मज़ा आया ना? मैं तुम्हारे साथ वो सब कर सकता हूँ जो सुख मुझे मेरी बीवी से नहीं मिलता है। इसलिए उस रात से ही मैं तुम्हारा दीवाना हो गया था जब छह महीने पहले अंकित ने मुझसे कहा था—‘मेरी मम्मी की चुदाई करो’—और मैंने तुम्हारी चुदाई की तब से…”

फिर उसके बाद पास पड़ी मम्मी की ब्रा से खुद का लंड साफ किया और मम्मी की चुत को भी जो पहले की तरह सिकुड़ गई थी और एक चुंबन दिया मम्मी की चुत को। फिर से चाटने लगे।

मम्मी: “अब सोते हैं।”

अंकल: “नहीं, पूरी रात जागना है। क्या मेरा साथ नहीं दोगी?”

मम्मी: “दूँगी राजा। चोदिए पूरी रात मेरी चुत। अभी तो सिर्फ़ एक बजा है।”
और फिर दोनों शुरू हो गए।

मुझे नींद आ रही थी तो आकर सो गया। और सुबह छह बजे नींद खुली तो ऊपर जाकर देखा तो अंकल मम्मी को चोद रहे थे घोड़ी बनाकर। फिर मैं वापस आ गया और एक घंटे बाद दोबारा गया तो देखा विंडो से…
Like Reply
#12
Update 10

---

जब सुबह छह बजे गया तो देखा दोनों चुदाई कर रहे थे। फिर मैं वापस आ गया। आंटी अभी भी सो रही थीं क्योंकि आंटी नींद की गोली लेती हैं। फिर मैं दोबारा सात बजे गया तो विंडो से देखा कि मम्मी और अंकल एक ही चादर में सोए हुए थे। मम्मी का मुँह अंकल की तरफ़ था और उनकी पीठ विंडो की तरफ़ थी। मम्मी अभी भी नंगी ही थीं। उनकी नंगी पीठ मुझे दिख रही थी और वे अंकल की बाँहों में सोई हुई थीं।

कुछ देर मैं देखता रहता हूँ। अचानक मम्मी का मोबाइल वाइब्रेंट हुआ। शायद उन्होंने अलार्म लगाया होगा। इसलिए शायद थोड़ी पहले ही सोए होंगे, इसलिए अलार्म लगाया होगा क्योंकि एक घंटे पहले तो चुदाई चल रही थी। फिर मम्मी उठ जाती हैं। अंकल वैसे ही सोए हुए थे। मम्मी की हालत बहुत खराब लग रही थी। उनका गजरा नीचे लटक रहा था, बाल बिखर गए थे, होठों की लिपस्टिक बिखर गई थी। चूचियों पे और चूतड़ पर लाल निशान दिख रहे थे।

अंकल ने पूरे मज़े किए थे।

अब मम्मी उठकर बाथरूम में चली जाती हैं और दरवाज़ा बंद कर देती हैं। बाथरूम भी विंडो के सामने ही था। सब कुछ दिख रहा था मुझे। तभी मम्मी ने डोर बंद कर दिया और शावर लेने की आवाज़ आने लगी।

शावर की आवाज़ से अंकल जाग गए और बाथरूम की तरफ़ देखने लगे।

अब अंकल उठकर बाथरूम की तरफ़ चले गए और डोर खटखटाने लगे।

अंकल: “अरे वर्षा मेरी जान, मुझे भी नहाना है। मुझे भी अपने साथ नहलाओ ना।”

मम्मी: “नहीं, अभी आप जाइए। मैं नहाकर आती हूँ।”

अंकल: “अरे कुछ नहीं। बस थोड़ी देर नहाकर चला जाऊँगा। मेरा एक ज़रूरी काम है।”

मम्मी डोर खोलती हैं और अंकल को अंदर आने देती हैं।

फिर मैं भी तुरंत बाथरूम की विंडो पे चला जाता हूँ जो अंकल ने रात को दिखाई थी। वो ऊँचाई पे थी जहाँ पे एक बड़ा स्टूल रखा था। शायद अंकल ने ही रखा होगा मेरे लिए। मैं स्टूल पे चढ़कर अंदर बाथरूम में देखने लगा।

अंकल अंदर आते ही मम्मी को घूरने लगे। मम्मी पूरी भीगी हुई थीं। उनका भरा हुआ जिस्म पानी में और भी सुंदर लग रहा था।

मम्मी ने अपने शरीर पर एक सफेद कपड़ा ढक रखा था जिससे उनकी बड़ी-बड़ी चूचियाँ और भरी हुई जाँघें आराम से दिख रही थीं।

मम्मी थोड़ा मुस्कुरा रही थीं और अपने बदन को ढकने की नाकाम कोशिश कर रही थीं।

लेकिन अंकल चुप थोड़ी ही बैठने वाले थे। वे किसी-न-किसी बहाने मम्मी की चूचियों को और चूतड़ को मसल रहे थे।

मम्मी: “आप अब थोड़ा चुप बैठिए ना…”

अब अंकल ने भी शावर लेना शुरू किया और अपने शरीर पर साबुन मलने लगे। उन्होंने अपना अंडरवियर निकालकर कोने में रख दिया और पूरे नंगे हो गए। और मम्मी की तरफ़ देखकर मुस्कुराकर कहा—

अंकल: “वर्षा, ज़रा मेरी पीठ पर साबुन लगाओ ज़रा…”

मम्मी को थोड़ी शर्म आ रही थी। वे मुस्कुराकर…

मम्मी अंकल के पीछे गईं और साबुन लेकर अंकल की पीठ पे मलने लगीं। मम्मी के हाथों का स्पर्श पाकर अंकल का लंड खड़ा होने लगा।

अंकल ने मम्मी का हाथ पकड़के अपने लंड पे रखा और कहा कि मेरे हथियार पे भी अच्छे से साबुन मल दो।

मम्मी ने पहले अपना हाथ झटक दिया।

मम्मी: “धत्त… आप तो यहाँ भी शुरू हो गए…”

अंकल: “अरे इसका भी ख्याल रखना ज़रूरी है। तुम इसका ख्याल नहीं रखोगी तो कौन रखेगा।”

फिर दोबारा से अंकल ने मम्मी का हाथ पकड़के अपने लंड पे रख दिया और फिर मम्मी भी साबुन लगाकर अंकल का लंड मलने लगीं।

मम्मी के साबुन मले मुलायम हाथों के स्पर्श से अंकल का लंड पूरे नब्बे डिग्री एंगल से तन के खड़ा था।

मम्मी धीरे-धीरे अपने हाथ से लंड को सहला रही थीं। अंकल मज़े लेकर आहें भर रहे थे। फिर अंकल ने मम्मी के बदन से वो कपड़ा निकाल दिया। अब मम्मी भी अंकल की तरह पूरी नंगी हो गई थीं।

मम्मी: “हाय, ये आप क्या कर रहे हो? मैंने आपको पहले ही कहा था ना, अभी कुछ मत करो। हमें नहाकर तैयार होना है।”

अंकल: “वो भी हो लेंगे। पहले इस पल के तो मज़े लेने दो।”

फिर अंकल ने साबुन लिया और मम्मी के मम्मों पे मसलने लगे। चूचियों को उँगलियों से दबाने लगे। मम्मी की सिसकारियाँ निकलने लगीं।

मम्मी ने अंकल को थाम लिया और वे भी अंकल के बदन पे साबुन मलने लगीं। दोनों के बदन साबुन के झाग से सने हुए थे। फिर दोनों एक-दूसरे के होठ चूसने लगे।

अंकल मम्मी की चूचियाँ मसल रहे थे और शावर में ही मम्मी के होठों को चूस रहे थे।

अंकल का लंड मम्मी की चुत के द्वार पे दस्तक दे रहा था और मम्मी के सख्त बूब्स अंकल के सीने पर गोते खा रहे थे। अंकल ने मम्मी की एक टाँग हवा में उठाई और अपने लंड को चुत के द्वार पे सेट किया और एक शॉट लगाकर चुत द्वार को चीरकर अंदर घुसा दिया।

साबुन की चिकनाहट की वजह से आधा लंड बड़ी आसानी से चुत में घुस गया और मम्मी छटपटा गईं। मम्मी चीखने ही वाली थीं पर अंकल ने उनका मुँह अपने मुँह में जकड़ रखा था इसलिए मम्मी की चीख उनके गले में ही अटक गई।

खड़े-खड़े ही अंकल लंड को चुत से अंदर-बाहर घिसने लगे। साथ ही मम्मी के एक-एक अंग मसलते जा रहे थे। मम्मी ने भी उनको अच्छे से जकड़ रखा था और चुदाई का मज़ा ले रही थीं हल्की-हल्की सिसकारियाँ निकालकर।

दोनों बाथरूम में शावर के नीचे पूरे नंगे साबुन के झाग से लिपटे खड़े हुए एक-दूसरे से चुदाई करने में मस्त थे। अब फिर से मेरा लंड टाइट होने लगा था। पर मैं अभी जहाँ खड़ा था वहाँ अपना लंड निकालकर हिला नहीं सकता था।

फिर अंकल ने मम्मी को बाथरूम की दीवार को पकड़ने को कहा तो मम्मी ने वैसा ही किया। अंकल मम्मी के पीछे से खड़े होकर उनके चूतड़ से अंदर चुत में लंड डालकर चोदने लगे।

मम्मी ने दीवार को मज़बूती से पकड़ रखा था और पीछे से अंकल मर्दानगी भरे धक्कों के मज़े ले रही थीं।

अंकल ने मम्मी के दोनों बूब्स को अपने सख्त हाथों में जकड़ लिया था और बड़ी ताक़त से पीछे से चोदे जा रहे थे। फाच… फाच… की आवाज़ दोनों की जाँघों के टकराने से हो रही थी।

फिर काफ़ी देर तक इस तरह चोदने के बाद अंकल ने मम्मी की चुत से लंड निकाला और मम्मी से कहा कि मैं अपना वीर्य अभी तुम्हारी कोख में नहीं भरना चाहता।

मम्मी अपने कुल्हे चौड़े करके नीचे बैठ गईं और अंकल का लंड अपने मुँह में ले लिया और अपने होठों से चूसने लगीं। अंकल भी मम्मी का सर पकड़के हिला रहे थे, और उनकी आँखें मज़े में बंद थीं।

अंकल: “उउउग्ग्ग्ह्ह्ह्ह… आआह्ह्ह… वर्षा… मज़ा आ गया… ऐसी मज़े की सुबह कभी नहीं हुई है… इसलिए मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ… आआह्ह… निकल गया मेरा… उग्ग्ग्ह्ह्ह…”

अंकल ने मम्मी का सर मज़बूती से पकड़ रखा था और झटके मारके अपना सारा लावा मम्मी के मुँह में भर दिया था। मम्मी भी सुरूप-सुरूप करके उनका वीर्य गटकने लगीं। थोड़ा सा उनके मुँह से बाहर भी निकल गया था।

अंकल ने मम्मी को खड़ा किया और अपना मुँह खोलकर मम्मी का मुँह में जकड़ लिया। मम्मी ने भी अपने होठ खोल दिए। ऐसा लग रहा था, अंकल अपने वीर्य को मम्मी के मुँह से चूस रहे थे। दोनों कुछ देर तक ऐसे ही स्मूच करते खड़े रहे।

अंकल: “वाह… मज़ा आ गया।”

मम्मी: “आपका वीर्य मेरे लिए जूस जैसा है, इसलिए पी गई।”

अंकल: “मुझे भी अच्छा लगा, तुम्हारे मुँह से अपना वीर्य चाट कर।”

मम्मी: “चलिए अब बदन धो लें। बहुत देर हो गई।”

अंकल: “आओ साथ में करते हैं।”

फिर अंकल ने पूरी बाल्टी पानी भरा और मम्मी को अपने बदन से सटा लिया। दोनों एक-दूसरे से नंगे ऐसे चिपके खड़े थे जैसे एक-दूसरे से जुड़े हुए हों।

अंकल ने मम्मी के होठ भी अपने मुँह में भर लिए और फिर बाल्टी उठाकर ऊपर से पूरी की पूरी पलट दी। दोनों के ऊपर से पानी बहने लगा और दोनों के शरीर का झाग साफ हो गया।

फिर दोनों अलग हुए और मम्मी ने तौलिया लिया और अंकल का शरीर पोंछने लगीं। अंकल ने भी मम्मी का शरीर पोंछा।

अब दोनों बाहर आ गए और मैं भी स्टूल से उतरकर रूम की विंडो पे आ गया। जब तक अंकल ने सिर्फ़ अंडरवियर पहनी और बिस्तर पर लेट गए और मम्मी को देखने लगे।

मम्मी अंदर कपड़े पहन रही थीं। मैंने कई बार मम्मी को कपड़े बदलते देखा था। लेकिन आज कुछ अलग ही लग रहा था।

मम्मी अंकल के सामने ही पैंटी, ब्रा और ब्लाउज़ पहन रही थीं और अंकल मम्मी के बदन की तारीफ़ कर रहे थे।

मम्मी ने साड़ी पहनी। अब अंकल के पास जाकर उन्हें एक किस कर दिया।

मम्मी: “चलिए, मैं दीदी के पास जाती हूँ। आप बाहर आइए नाश्ते के लिए।”

और मम्मी बाहर आने लगीं।

मम्मी को बाहर आता देख मैं विंडो से हटकर नीचे आंटी के रूम में आ गया। अब 9:30 AM हो चुका था। आंटी अभी भी सो रही थीं। शायद नींद की टैबलेट और कल फंक्शन की थकान की वजह से। फिर मैंने आंटी को उठाया। आंटी ने पूछा, “बेटा, क्या टाइम हुआ?” मैं बोला, “9:30 AM हो गया।” आंटी: “बेटा, मेरी तो नींद ही नहीं खुली। तू कब उठा?” मैं बोला, “आंटी, जस्ट अभी।”

आंटी: “बेटा, तेरी मम्मी और योगेश…?”

मैं: “पता नहीं।”

आंटी हँसते हुए: “मैं देखती हूँ।” और फिर आंटी और मैं हॉल में आए। आंटी बोलीं, “तू बैठ। मैं देखकर आती हूँ।” आंटी ऊपर जाने ही वाली थीं कि मुझे और आंटी को मम्मी सीढ़ियों से उतरती नज़र आईं।

अंकल के साथ की दमदार चुदाई के बाद मम्मी ज़रा अटक-अटक कर चल रही थीं। मम्मी मेरे और आंटी के पास आईं तो आंटी ने धीमी आवाज़ में मम्मी से कहा—

आंटी: “हाय, भाभी जी, लगता है कल रात योगेश भैया ने बड़े मज़े लिए हैं। देखिए ना, बहुत सारे निशान छोड़े हैं आपके बदन पे।” (मम्मी के गले के पास अंकल के काटने के निशान को देखकर कहा)

मम्मी (शर्माते हुए): “अब क्या छिपाऊँ आपसे। योगेश जी का प्यार है ये सब।” मम्मी ने धीमी आवाज़ में बोला लेकिन मैं सुन रहा था। आंटी और मम्मी को लगा होगा मैं सुन रहा हूँ पर उन दोनों को कोई फ़र्क नहीं पड़ा हालाँकि उन्होंने बहुत धीमी आवाज़ में बोला था।

आंटी: “ऊपरवाला आप दोनों का प्यार ऐसे ही बनाए रखे।”
और दोनों हँसने लगीं…

मैं: “क्या हुआ मम्मी? आप दोनों क्यों हँस रही हो?”

आंटी: “बेटा, कह रही हूँ योगेश हमेशा तेरी मम्मी को कंप्यूटर सिखाते रहें।”

मम्मी: “हाँ बेटा, इसीलिए हँसी आ गई। अब तू ही बता क्या कंप्यूटर सारी ज़िंदगी सीखा जाता है क्या?”

मैं: “हाँ मम्मी, कंप्यूटर सारी ज़िंदगी सीखा जाए तो वो भी कम है।”

फिर से दोनों हँसने लगीं।

मम्मी: “ऐसे तो मैं मर जाऊँगी…” और फिर से हँसने लगीं…
Like Reply
#13
Update 11

---

मम्मी बोलीं, “मैं चाय बनाती हूँ।”

आंटी: “हाँ वर्षा, चाय बनाओ और मैं रूम में जाती हूँ।”

आंटी वापस रूम में चली गईं और मम्मी किचन में। फिर मैं भी मम्मी के साथ किचन में गया तो मम्मी मुझे देख रही थीं।

मैं: “मम्मी, क्या आप कुछ कहना चाहती हो?”

मम्मी: “बेटा, तुझे क्या लगता है? आज रात को मैं योगेश जी के साथ थी तो…”

मैं: “मम्मी, आप अंकल के साथ कंप्यूटर सीखने गई थीं, इसलिए उनके रूम में थीं।”

मम्मी: “सच बता। या फिर तुझे ऐसा तो नहीं लग रहा है कि हमारे बीच रात को कुछ…”

मैं: “नहीं मम्मी।”

मम्मी: “और हुआ होता तो?”

मैं: “मम्मी, ये तो अच्छा होता। आप अंकल एक हो जाते। आपको अंकल का प्यार मिलता और अंकल को भी आपका प्यार मिलता।”

मम्मी: “बेटा, तुझे क्या हो गया है जो तू मुझे गैर मर्द की बाँहों में सुलाना चाहता है?”

मैं: “मैं सिर्फ़ इतना चाहता हूँ—आपको प्यार की ज़रूरत है। वो पापा पूरी नहीं करते। पापा आउट ऑफ़ सिटी ज़्यादा रहते हैं और ऑफिस वर्क की वजह से पापा आपको प्यार नहीं कर पाते।”

मम्मी: “चुप बेशरम!”

मैं: “मम्मी, इसलिए मैं चाहता हूँ आपको अंकल से प्यार मिले।”

मम्मी: “लेकिन ये तो धोखा होगा तेरे पापा के साथ।”

मैं: “नहीं होगा मम्मी। मैं आपसे पिछले छह महीनों से कह रहा हूँ—आप अंकल के प्रपोज को एक्सेप्ट कर लीजिए। और जब पापा आपकी ज़रूरत पूरी कर सकते हैं तो आपको अपनी ज़रूरत पूरी करने का अधिकार है। और इसमें कुछ गलत नहीं। आप पापा को डिवोर्स थोड़ी दे रही हैं। आप तो सिर्फ़ अपनी ज़रूरत पूरी करेंगी।”

मम्मी: “लेकिन ये गलत है। इसलिए मैं तेरे पापा के अलावा किसी और के बारे में सोचूँगी भी नहीं। इसलिए मेरा हमेशा ना ही रहेगी।”

मैं: “मम्मी, आप और आंटी हँस क्यों रही थीं?”

मम्मी: “बेटा, वो सोच रही थीं मेरे और योगेश जी के बीच अफेयर है। इसलिए उन्होंने कल रूम को अच्छे से डेकोरेट करवाया था जैसे सुहागरात में होता है। और मैंने भी जानबूझकर लड़खड़ाने का नाटक करती हुई नीचे आई थी तो वे मेरी चाल देखकर समझीं कि रात को मेरे और योगेश जी के बीच कुछ हुआ है। जबकि बेटा, मेरे और योगेश जी के बीच कुछ नहीं हुआ। हालाँकि योगेश जी मेरे साथ ज़बरदस्ती करनी चाह रहे थे लेकिन मैंने उन्हें कुछ नहीं करने दिया। पिछले छह महीनों से वे मेरे साथ ज़बरदस्ती करने की कोशिश करते हैं जब भी तू मुझे उनके साथ अकेली छोड़ता है। लेकिन मैं हर बार उनको कुछ नहीं करने देती।”

मैं: “मम्मी, प्लीज़ एक बार अंकल के प्यार को एक्सेप्ट कर लो।”

मम्मी: “नेवर।”

मैं: “तो फिर आपने आंटी के सामने नाटक क्यों किया?”

मम्मी: “तू नहीं समझेगा। अब बाहर जा और मुझे चाय बनाने दे।”

मैं: “मम्मी, बना लीजिए और ऊपर रूम में अंकल को भी चाय दे आना।”

फिर मम्मी ने चाय बनाई और मैं आंटी को चाय देने रूम में गया। और वापस आकर किचन में मम्मी के साथ ऊपर रूम में जाने लगा तो मम्मी ने कहा, “तू यहीं रुक। मैं योगेश जी को चाय देकर आती हूँ।” मम्मी दो कप चाय लेकर ऊपर रूम में चली गईं। मैं नीचे हॉल में बैठकर चाय पीने लगा।

बहुत देर तक मम्मी-अंकल नीचे नहीं आए तो मैं आंटी के रूम में गया तो देखा वे बाथरूम में हैं। फिर मैं ऊपर गया और देखा रूम का गेट बंद है। विंडो पे गया तो देखा—

अंकल और मम्मी रूम में थे और कुछ बातें कर रहे थे।
मम्मी के कंधों पर अंकल का हाथ था और वे दोनों एकदम चिपके कर बैठे थे।

अंकल: “वर्षा, सच में कल की रात यादगार रहेगी मेरे लिए।”

मम्मी: “रात की बात छोड़िए। आज सुबह-सुबह जो किया उसका क्या?”

अंकल: “अरे, तुम हो ही ऐसी कि थोड़ी देर भी रहा नहीं जाता मुझसे।”
और अंकल ने मम्मी के गाल पर चूम लिया।

मम्मी: “अच्छा, आप भी कुछ कम नहीं हैं।”

अंकल: “फिर आज रुक जाओ ना और मज़ा करेंगे।”

मम्मी: “इतना मज़ा आज के लिए काफ़ी है। और अंकित के पापा-दादी क्या सोचेंगे? मुझे जाना होगा। और आपका मन करे तो अंकित से कह देना। वो मुझे आपके घर ले आएगा। वो तो आपका चमचा है और अपनी मम्मी को चुदवाने की मना नहीं करेगा।”

अंकल: “क्या कहा? चमचा? वो मेरा चमचा नहीं बल्कि मेरा बेटा है। और वो चाहता है उसकी मम्मी हमेशा मेरे बाँहों में मेरे लंड से चुदती रहे। जो काम उसके पापा नहीं करते वो काम वो मुझसे करवाता है।”

मम्मी: “हाँ तो मैं भी यही कह रही हूँ। आपका लंड जब खड़ा हो तो उससे बोल देना। मुझे लेकर आपके घर आ जाएगा।”

और मम्मी वहाँ से उठने लगीं।

तभी अंकल ने मम्मी को रोका।

अंकल: “रुको, मैं तुम्हारे लिए कुछ लाया हूँ।”
और अंकल बिस्तर के नीचे से एक बॉक्स निकालते हैं और वो मम्मी को दे देते हैं।

मम्मी: “ये क्या है…?”

अंकल: “तोहफा है तुम्हारे लिए।”

मम्मी: “अब इसकी क्या ज़रूरत थी।”
मम्मी तोहफा पाकर खुश दिख रही थीं।

अंकल: “अब ज़्यादा नखरे मत करो और खोलो।”

मम्मी बॉक्स खोलती हैं…
उस बॉक्स में एक सैंडल थी। वो भी एक हाई हील्स वाली।

मम्मी: “अरे ये क्या? मैं तो ऐसे सैंडल्स नहीं पहनती।”

अंकल: “क्यों नहीं? ये तुम्हारी सुंदरता को और बढ़ाएँगे। चलो इसे पहनकर दिखाओ।”

मम्मी हँसते हुए पहन लेती हैं और खड़ी हो जाती हैं।
हाई हील्स की वजह से मम्मी लंबी दिख रही थीं और उनके चूतड़ और थोड़े से पीछे की ओर बाहर दिखाई देने लगे।

योगेश अंकल: “वाह मेरी जान, क्या लग रही हो तुम… ज़रा पीछे मुड़ो।”

मम्मी पीछे मुड़ जाती हैं।
तो उनके बड़े गदराए चूतड़ दिखने लगे।

अंकल: “वाह वर्षा, ऐसा नज़ारा तो कभी नहीं देखा।”

मम्मी अपनी तारीफ़ सुनकर शर्माने लगी थीं।

मम्मी: “कुछ भी बोल रहे हैं आप।”

अंकल: “अरे ज़रा चलके दिखाओ मेरी जान।”

मम्मी अब इधर-उधर अंकल के सामने अपनी कमर मटकाते हुए चलने लगती हैं।
चलते हुए मम्मी के चूतड़ एक रिदम में हिल रहे थे।

योगेश अंकल: “वाह मेरी चमकछल्लो… मज़ा आ गया… क्या चूतड़ हैं तुम्हारे।”

अंकल अब बिस्तर से उठकर मम्मी के करीब आते हैं और उनके कमर को पकड़कर मम्मी को घुमा-घुमा कर उनके चूतड़ देखने लगते हैं।
अंकल के ऐसे करने से मम्मी को हँसी आ रही थी।

मम्मी: “अरे ये आप क्या कर रहे हैं… बस कीजिए।”

अब अंकल रुकते हैं और मम्मी की कमर में हाथ डालकर उनको अपनी तरफ़ खींचते हैं और अपने होठों से मम्मी के होठों को चूसने लगते हैं।
मम्मी भी अंकल का साथ देने लगती हैं।
अंकल और मम्मी एक-दूसरे को बड़े ज़ोरों से चूम रहे थे।
अंकल के हाथ पीछे मम्मी के चूतड़ों को साड़ी के ऊपर से ही मसल रहे थे।

कुछ देर मम्मी के होठों का रसपान करने के बाद दोनों रुक गए।

अंकल: “वर्षा, आई लव यू… तुम बहुत खूबसूरत हो… तुझ जैसी औरत मुझे आज तक नहीं मिली।”

मम्मी: “अब बस। हमारे जाने का समय हो गया।”
और मम्मी सैंडल निकाल रही थीं। तो मम्मी एक स्माइल देते हुए वो पहनती हैं।

अंकल: “अरे इसे पहनकर ही जाओ ना। मुझे अच्छा लगेगा।”

मम्मी: “ठीक है। पर आप हमें आज छोड़ने मत आइए।”

अंकल: “क्यों? क्या हुआ?”

मम्मी: “कुछ नहीं। अगर आप बार-बार आए तो मेरे पति और सास को शक हो सकता है।”

अंकल: “अरे किसी को कोई शक नहीं होगा। मैं हूँ ना।”

मम्मी: “नहीं। ज़्यादा दूर थोड़ी है। हम चले जाएँगे।”

अंकल: “पक्का चली जाओगी?”

मम्मी: “हाँ, पक्का।”

अंकल: “ठीक है, चलो।”

फिर दोनों नीचे आने लगते हैं तो मैं दौड़कर नीचे आ जाता हूँ। आंटी अभी भी उनके रूम में थीं। फिर मैं सोफे पे बैठ जाता हूँ। अंकल-मम्मी साथ में नीचे आते हैं और सोफे पे बैठ जाते हैं। और फिर आंटी भी अपने रूम से बाहर आती हैं।

आंटी: “हो गया तुम्हारा? बड़ी जल्दी आ गए।”
और सब हँसने लगते हैं।
हँसते हुए सब मेरी तरफ़ देख रहे थे।

मैं: “मैं कुछ समझा नहीं।”

मम्मी: “बेटा, आंटी कह रही हैं—हो गई तुम्हारी कंप्यूटर क्लास।”

मैं: “हाँ, हो गई आंटी। क्लास तो हमेशा चलेगी।”

मेरी इस बात पे सब फिर से हँसने लगे। और फिर मैं और मम्मी टैक्सी से घर आ जाते हैं। अभी 10 AM हो चुके थे।

दादी ने देरी से आने का पूछा तो मैंने कह दिया आंटी ने रोक लिया। फिर मम्मी ने कहा उन्हें सोना है तो मैंने दादी और पापा को कहा, “पापा, मम्मी की तबीयत खराब है तो उन्हें सोने देना।” तो फिर मम्मी पूरे दिन सोती रहीं।
Like Reply
#14
Update 12
---

दोस्तों, अब मैं अंकित को अंकुश लिखूँगा।

आंटी के घर से आने के बाद मम्मी पूरे दिन सोती रहीं। पापा घर पे ही रहते थे। आंटी के घर से आए हुए तीन दिन हो गए थे तो अंकल ने मुझे अपने घर बुलाकर एक पार्सल दिया और बोले, “इसमें एक ड्रेस है तेरी मम्मी के लिए। इसे तू वर्षा को दे देना। और बेटे, तीन दिन हो गए वर्षा से मिले। जल्द ही कुछ कर।”

मैं: “अंकल, पापा घर से ऑफिस वर्क कर रहे हैं। जिस दिन पापा ऑफिस जाएँगे उस दिन मैं दादी को घर से बाहर ले जाऊँगा और आप मम्मी से मस्ती करना।”

अंकल खुश होकर मुझे सिगरेट पिलाई। फिर मैं घर आकर पार्सल मम्मी को दिया और कहा, “अंकल ने दिया है आपको देने के लिए।”

मम्मी: “क्या है इसमें?”

मैं: “पता नहीं।”

मम्मी: “तूने देखा तो होगा।”

मैं: “नहीं मम्मी। अंकल ने कहा तू देखना मत। और उन्होंने मुझे आपकी कसम दी, इसलिए मैंने नहीं देखा।”

मम्मी मेरी आँखों में देखती हुई बोलीं, “ठीक है… तू जा। मैं देख लूँगी।” उनकी आवाज़ में हल्की सी मिठास थी।

फिर दो दिन बाद पापा ऑफिस गए। सुबह आठ बजे पापा के जाने के बाद मैंने दादी से कहा, “दादी, आज मेरे दोस्त के घर भजन। आप चलोगी?” दादी खुश होकर बोलीं, “हाँ।”

मम्मी चुपचाप सुन रही थीं और मुझे आँख दिखा रही थीं।

दादी: “बेटा, कितने बजे चलेंगे?”

मैं: “दादी, आप जल्दी तैयार हो जाओ। नौ बजे से है।”

फिर दादी रूम में चली गईं तैयार होने। दादी के जाने के बाद मम्मी गुस्से में मेरा हाथ पकड़कर रूम में ले गईं।

मम्मी: “बेटा, क्या है ये सब?”

मैं: “क्या मम्मी? मैं समझा नहीं।”

मम्मी: “मैं जानती हूँ तू सब समझ रहा है। जानबूझकर दादी को ले जा रहा है ताकि मैं घर पे अकेली रहूँ और योगेश जी आ जाएँ।”

मैं उनकी आँखों में देखते हुए बोला, “हाँ मम्मी… आप सही कह रही हैं। ताकि अंकल आपको कंप्यूटर सिखाते रहें।”

मम्मी: “नालायक! तुझे क्या हो गया है? तू मुझे एक गैर मर्द के साथ अकेला छोड़ रहा है। मैंने तुझसे कितनी बार कहा है… वो मेरे साथ यहाँ तक कि एक बार तो उन्होंने मेरे कपड़े भी फाड़ दिए।”

मैं धीरे से बोला, “मम्मी… अंकल ने कुछ किया तो नहीं?”

मम्मी: “जब वो मुझे नंगी कर देते और फिर मेरा मुँह काला कर देते तब क्या?”

मैं उनका हाथ हल्के से पकड़ते हुए बोला, “मम्मी… अंकल जो भी करेंगे, आपकी सहमति से ही करेंगे। आप उनका प्रपोजल स्वीकार कर लो। आपको अंकल के प्यार की ज़रूरत है… और मुझे आपकी खुशी की।”

मम्मी: “नहीं करूँगी। और मैं योगेश जी को घर में आने भी नहीं दूँगी।”

मैं: “मम्मी, आपको मेरी कसम है… आप अंकल को आने दोगी। अंकल आपको कंप्यूटर सिखाने आएँगे। आप कंप्यूटर सीख लेना… और कुछ नहीं। और अगर आपकी इच्छा हो तो…” मैं चुप हो गया।

मम्मी मेरी तरफ़ देखते हुए बोलीं, “कसम देना ज़रूरी था क्या? तू जानता है… मैं तेरे लिए तो कुछ भी कर सकती हूँ। ठीक है… सिर्फ़ कंप्यूटर सीखूँगी। और तू दादी को लेकर जल्दी आ जाना।”

मैं: “नहीं मम्मी। जब अंकल आपको कंप्यूटर सिखा देंगे उसके बाद आप मुझे आने के लिए कॉल कर देना। मैं दादी को लेकर आ जाऊँगा। और हाँ, मैं अंकल को बोल दूँगा वो नौ बजे आ जाएँगे। शाम को छह बजे तक आपको कंप्यूटर सीखना है। ऐसा नहीं होना चाहिए कि आप अंकल को एक घंटे में ही वापस भेज दो।”

मम्मी हँसते हुए बोलीं, “ठीक है मेरे लाल… नहीं भेजूँगी। लेकिन नौ बजे नहीं, ग्यारह बजे का बोलना। क्योंकि मुझे नहाना है और घर के कुछ काम भी करने हैं। ग्यारह से छह बजे तक… सात घंटों में थक जाऊँगी तो फिर रात का खाना कौन बनाएगा?”

मैं मुस्कुराते हुए: “मैं हूँ ना। मार्केट से ले आऊँगा।”

मम्मी: “जब तेरी दादी-पापा पूछेंगे वर्षा को क्या हुआ?”

मैं: “मम्मी, मैं बोल दूँगा आपकी तबीयत खराब है।”

मम्मी मेरा गाल हल्के से सहलाते हुए बोलीं, “ठीक है… अब जा। बुढ़िया को लेकर।”

फिर मैंने अंकल को सब बता दिया—ग्यारह बजे आ जाना।

फिर मैं दादी को लेकर नौ बजे चला गया। दादी को दोस्त के घर छोड़कर वापस आ गया और डुप्लीकेट चाबी से गेट खोलकर घर में छिप गया। मैं साढ़े दस पे वापस आ गया था। अभी अंकल को आने में तीस मिनट बाकी थे। मैंने अंकल को भी नहीं बताया था कि मैं वापस आ गया हूँ।

फिर मैं चुपके देख रहा था। मम्मी नहा चुकी थीं और पापा से फोन पे बात कर रही थीं लाउडस्पीकर पर।

(यहाँ पापा-मम्मी की बातें नहीं लिखूँगा क्योंकि फ़ालतू बातें थीं।)

मम्मी: “…जी ओके।”

इसी तरह फ़ालतू बातें चल रही थीं।

मम्मी (शर्माते हुए): “आप भी ना…”

तभी घर के पीछे वाले गेट की बेल बजी (शायद अंकल छत की बजाय पीछे वाले गेट से आए थे)। मम्मी पापा को होल्ड करने कहती हैं और डोर ओपन करने जाती हैं। अचानक की आवाज़ पापा को सुनाई देती है मम्मी की।

असल में मम्मी ने जैसे ही डोर ओपन किया, सामने अंकल खड़े थे। अंकल ने मम्मी की दाहिनी चूची पकड़के मसल दी कपड़ों के ऊपर से ही। क्योंकि उस समय मम्मी पूरी संस्कारी पतिव्रता औरत की तरह कपड़े पहने थीं।

मम्मी: “ओओउउउच्च्च्छ…” (पीछे हटकर आँख दिखाकर हाथ से इशारा करती हैं—चुप रहो—और फोन दिखाती हैं। अंकल को सोफे पे बैठने का इशारा करती हैं।)

पापा (घबराकर): “क्या हुआ जान? हेलो… हेलो…”

मम्मी: “आह… कुछ नहीं जी। वो डोर ओपन कर रही थी तो पाँव के अंगूठे को डोर लग गया।”

पापा: “ज़्यादा चोट तो नहीं लगी ना वर्षा…?” (थोड़ी फिक्र करके)

मम्मी: “नहीं जी, ज़्यादा नहीं लगी। आप टेंशन न लें। बस अब ठीक है।”

पापा: “थैंक गॉड ज़्यादा कुछ नहीं हुआ। तुमको वैसे कौन आया है?”

मम्मी: “अरे, पेपर वाला बिल देने आया है। मैं बाद में कॉल करती हूँ। वैसे आप कितने बजे तक आओगे?”

पापा: “रात को नौ बजे तक।”

मम्मी: “ऑफिस से निकलोगे तब एक बार कॉल करना। ओके?”

पापा: “ओके, कर लूँगा। क्या कुछ लाना है?”

मम्मी: “हाँ जी, उसी लिए तो कह रही हूँ।”

पापा: “क्या लाना है?”

मम्मी: “मैं तब ही बता दूँगी। ओके… बाय्य्य…”

फिर पापा कॉल कट कर देते हैं।

मम्मी (मुँह बनाकर): “क्या आप भी योगेश जी… आते ही मस्ती शुरू कर देते हैं। अरे देखिए ना, मैं अंकुश के पापा से कॉल पे बात कर रही थी।”

अंकल: “अरे सॉरी वर्षा रानी… मैं तो हर बार की तरह मस्ती करने लगा। अब मुझे क्या पता तू उस गंडू के साथ बात कर रही है। और कितनी बार कहा है—सिर्फ़ योगेश बोला कर। योगेश जी नहीं, मेरी रानी।”

मम्मी (थोड़ा गुस्सा होकर): “योगेश जी… अंकुश के पापा मेरे पति हैं। आप उनको गंडू नहीं बोल सकते। आज के बाद याद रखना, समझे आप?”

अंकल: “गुस्सा क्यों करती हो वर्षा रानी? अब से नहीं कहूँगा। बस अब खुश।”

मम्मी (मुस्कुराकर): “वैसे अंकुश के पापा हैं ही गंडू… हेहेहे… आपने सही नाम रखा है।”

अंकल: “हाहाहा… डरा ही दिया मुझे। वैसे अंकुश ने कॉल किया था ग्यारह बजे आ जाना। और ग्यारह बज रहे हैं। तुम अभी तक रेडी क्यों नहीं हुईं?”

मम्मी: “बस इतनी सी बात। अभी आती हूँ तैयार होकर। वैसे भी आप तो मुझे ऐसे तैयार होने बोल रहे हैं जैसे कि बाहर जाना है। हमें सब निकाल के नंगी ही तो करेंगे ना… हुह्ह…”

अंकल: “हाँ, वो भी सही कह रही हो वर्षा रानी। पर जो मैंने गिफ्ट दिया था वो पहनने वाली थी ना तुम?”

मम्मी: “अच्छा तो मेरे राजा जी मुझे उस ड्रेस में देखना चाहते हैं?”

अंकल: “अरे वर्षा रानी… मैं तो दो दिन से मरा जा रहा हूँ तुमको उस ड्रेस में देखने। लेकिन तुम हो कि मुझे और तुम्हारे इस बाबू (लंड पर हाथ रखकर) पे ज़ुल्म किए जा रही हो।”

मम्मी: “अच्छा ये बात है। आप तो ऐसे कह रहे हो जैसे मैं तो रोज़ लंड ले रही हूँ। पिछले पाँच दिनों से आपके लंड के लिए तड़प रही हूँ। आपने दीदी के घर पे चोदा था, उसके बाद आज चुदूँगी भर-भर के।”
मम्मी अंकल के पास आकर थोड़ा झुककर अंकल के लंड को पैंट के ऊपर से मसल देती हैं।

अंकल के मुँह से “आआआह्ह्ह्ह” की हल्की सिसकारी निकलती है। मम्मी हँसकर बेडरूम की तरफ़ जाने मुड़ती हैं। तभी अंकल मम्मी की मटकती गाँड पर एक चाँटा मार देते हैं और हँस देते हैं।

मम्मी: “आआउउउच्च्च्छ… बदमाश कहीं के!”
बोलकर हँसते हुए बेडरूम में चली जाती हैं।

लगभग दस मिनट बाद…
मम्मी बेडरूम से बाहर आती हैं।
मम्मी रेड कलर की लॉन्ग नाइटी में खड़ी हो जाती हैं। पर अंकल को झटका तब लगता है जब मम्मी कुछ ऐसा कर देती हैं—एकदम से नाइटी को आगे से ओपन कर देती हैं और रेड ब्रा-पैंटी साफ दिखती है।

ये देख अंकल के चेहरे पर खुशी और कामुक भाव आ जाते हैं। अंकल अपने लंड को पैंट के ऊपर से ही मसलने लगते हैं।
मम्मी ये देखकर हँस देती हैं।

मम्मी: “क्या हुआ? इतने उतावले हो रहे हो आप… जैसे कभी इस शरीर को देखा ही नहीं। कितना रगड़ा है आपने इन चूचियों को… आआआह्ह्ह्ह…”
ये बोलके मम्मी खुद की चूचियाँ मसल देती हैं।

अंकल: “अब कितना तड़पाओगी वर्षा रानी? आ जाओ मेरे पास।” (अंकल ये बात लंड मसलते हुए कहते हैं)

मम्मी: “हेहेहे…” (हँसते हुए अंकल की गोद में बैठ जाती हैं) “इतनी उम्र हो गई है फिर भी कितना जोश है।”

अंकल: “वर्षा रानी, तेरा ये सेक्सी बदन देखकर जोश तो दुगना हो जाता है। और किसने कहा मैं बूढ़ा हो गया हूँ? अभी तो सैंतालीस का ही हूँ। हाँ, इतना ज़रूर है तू तैंतीस की है और मुझसे चौदह साल छोटी है।”

मम्मी: “क्या करूँ? कम उम्र में ही मुझसे बीस साल बड़े एक नामर्द से शादी हो गई। और तैंतीस की उम्र में उन्नीस साल के बेटे की मम्मी हूँ। और उस नामर्द का लंड खड़ा ही नहीं होता। कहता है तिरपन का हो गया हूँ।”

अंकल: “उसी उन्नीस साल के बेटे ने अपनी तैंतीस साल की मम्मी को चुदवाने के लिए सैंतालीस साल के मर्द को बुलाया और दादी को लेकर बाहर चला गया है।”
और फिर अंकल मम्मी को कसके गले लगा लेते हैं और मम्मी की पीठ को सहलाने लगते हैं।

मम्मी भी अब थोड़ी गरम होने लगती हैं। मम्मी को अपनी गाँड पे अंकल का मोटा तगड़ा नौ इंच का लंड चुभ रहा है।

अंकल मम्मी के सर के पीछे हाथ ले जाकर मम्मी के चेहरे को अपनी ओर लाते हैं और शुरू हो जाती है एक जानदार किस।
मम्मी भी अपने हाथ अंकल की गर्दन पर हार जैसे लपेट लेती हैं।

मम्मी: “म्म्म्ममुउउउम्म्म…”
अंकल: “म्म्म्ममुउउम्म्म…”

दोनों किस में खो जाते हैं। पाँच मिनट बाद जब दोनों की साँसें भारी होने लगती हैं तो दोनों के लिप अलग हो जाते हैं।

अंकल और मम्मी अब लंबी-लंबी साँसें लेने लगते हैं।
अंकल मम्मी के लिप पर अपने हाथ का अंगूठा घुमाकर—

अंकल: “इस गुलाब की पंखुड़ी में तो कितना नशा भरा हुआ है।”

मम्मी अंकल का अंगूठा अपने मुँह में लेकर चूसने लगती हैं। ये करते हुए मम्मी की नज़र अंकल की नज़रों में ही है।

अंकल: “अब इन कपड़ों का क्या काम वर्षा रानी? उतार दो इन्हें।”

मम्मी झट से अंकल की गोद से उतरकर बेडरूम की तरफ़ जाते-जाते नाइटी उतार देती हैं। फिर ब्रा उतारके अंकल की तरफ़ उछाल देती हैं। और अब वो ऐसा कर देती हैं कि अंकल का खुद पर काबू नहीं रहता।

पर अंकल अपनी जगह सिर्फ़ खड़े हो जाते हैं। वो मम्मी को तड़पाना चाहते हैं।

मम्मी: “आआह… अब आ भी जाओ। क्यों तड़पा रहे हो?”

अंकल सिर्फ़ हँस देते हैं पर वहीं खड़े रहते हैं।
मम्मी को अब बर्दाश्त नहीं हो रहा। वो खुद आगे आकर अंकल को धक्का देकर दीवार से लगा देती हैं और अंकल के कपड़े निकालने लगती हैं।

मम्मी अंकल को पूरा नंगा कर देती हैं और मम्मी अंकल का हाथ पकड़कर खींचती हुई बेडरूम में ले जाती हैं।

मम्मी: “क्यों तड़पा रहे हो जी? मूड नहीं था तो मुझे यूँ गरम क्यों कर दिया?”
Like Reply
#15
.........
Like Reply
#16
Update 13

अंकल: “वर्षा रानी, तू है ही गरम माल। और अब तो और भी गरम हो गई है। जब तू गरम हो जाती है तो तुझे चुदने में और मुझे चोदने में और मज़ा आ जाता है।”

मम्मी: “तो अब देर किस बात की? देखो आपका लंड महाराज कैसे देख रहा है मुझे।”
ये बोलकर मम्मी अंकल का मूसल लंड हाथ में लेकर ऊपर-नीचे (मुठियाने) लगती हैं।

अंकल के मुँह से हल्की आह निकल जाती है। तभी अंकल अपना हाथ मम्मी की चूची पर रखकर ज़ोर से भींच लेते हैं।

मम्मी: “स्स्स्स्स्स्स… आआआह्ह्ह्ह… ऐसे ही ज़ोर-ज़ोर से पीसो मेरी चूचियों को… उस अंकुश के नामर्द गंडू बाप में दम ही नहीं है… मर्द कहता है खुद को… आआआआह्ह्ह्ह्ह… म्म्म्म… स्स्स्स्स… निप्पल मत खींचो… आआआह्ह्ह्ह… नहीं… ना… दर्द होता है…”
ये कहते हुए अंकल का लंड ज़ोर से भींच देती हैं।

अंकल: “आआआह्ह्ह्ह… साली कुतिया… इतने ज़ोर से भींच दिया… आआआह्ह्ह… रुक, अभी बताता हूँ।”

मम्मी: “आआआआह्ह्ह्ह… मज़ा… स्स्स्स… काटो मत… दर्द होता है जी… म्म्म्म… स्स्स्स…”

अंकल ने नीचे झुककर मम्मी की दाहिनी चूची मुँह में ले ली और निप्पल को दाँत से काट लिया। और अब निप्पल को दाँत में रखकर रगड़ रहे हैं।

मम्मी: “स्स्स्स्स्स… आआआआह्ह्ह्ह… योगेश जी… इतनी ज़ोर से काट रहे हो… रुको, अब बताती आपको।”

मम्मी ने इतना बोला कि दोनों अलग हो जाते हैं और ज़ोर-ज़ोर से हँसने लगते हैं।

अंकल: “देखा, मैंने फोन पे कहा था… ऐसे खुलके मज़ा लेंगे आज।”

मम्मी: “सच में आज तो कुछ ज़्यादा ही गरम हो रहे हैं हम दोनों।”

अंकल: “वही तो बोल रहा था मैं। आज तुझको ऐसा मज़ा दूँगा कि तू उस गंडू को भूल जाएगी।”
ये बोलकर मम्मी की पुष्ट हुई गाँड पर एक चाँटा मार देते हैं।

मम्मी: “आआउउउच्च्च्छ… स्स्स्स… आआआह्ह्ह… मज़ा आ गया योगेश जी… और कितना गरम करोगे अपनी इस वर्षा को?”

अंकल: “हाहाहा… मेरी बुलबुल… अभी तो मज़ा शुरू हुआ है। और एक ज़ोर का चाँटा चाहिए क्या मेरी कुतिया को?”

मम्मी: “आज ये आपकी कुतिया कुछ भी सह लेगी। फुल बेशर्म होकर चुदेगी…”
इतना बोलकर मम्मी अंकल को बिस्तर के सामने वाले सोफे पर धक्का देती हैं और खुद ऊपर चढ़कर अंकल के लिप चूसने लगती हैं। और साथ में अंकल का नौ इंच का पावरफुल लंड मुठियाने लगती हैं।

अब पूरी कमान मम्मी ने संभाल ली है और वो अंकल को निचोड़ रही हैं, चूस रही हैं।

आज तो मुझे भी यक़ीन नहीं हो रहा था। आज मम्मी ने पागल कर रखा था… फुल बेशर्म रांडी बनकर।

मम्मी (किस तोड़ते हुए): “अब कैसा लग रहा है मेरे मालिक? अब मैं लग रही हूँ ना आपकी कुतिया?”

बात करते-करते अंकल का लंड मुठिया रही हैं।

अंकल: “हाँ… अब तू लग रही है मेरी कुतिया। ऐसे ही करती रह… म्म्म्म… मज़ा आ रहा है।”

मम्मी: “और भी मज़ा दूँगी मेरे मालिक। आपकी कुतिया हमेशा आपके लंड के लिए रेडी रहती है।”

अंकल: “हाँ मेरी कुतिया… आआआह्ह्ह्ह… आआआह्ह्ह… ऐसे ही करती रह कुतरिया।”

ऐसे ही मम्मी कुछ देर तक अंकल का लंड मुठियाती रहीं।

अंकल: “वर्षा रांड… इसे अपने मुँह में लेकर थोड़ा इसपर अपनी जीभ भी फिराओ ना…”

अब मम्मी उठ जाती हैं और अंकल को सोफे के टॉप पर बैठने कहती हैं। अंकल भी हँसकर बैठ जाते हैं। मम्मी तुरंत साइड पर कुतिया की तरह हो जाती हैं और अंकल के लंड पर किस करती हैं। फिर अपनी जुबान अंकल के लंड के सुपाड़े पर फेरने लगती हैं जो कि अब पूरा लाल हो चुका है।

अंकल: “आआआआह्ह्ह्ह… कुतिया… म्म्म्म… क्या मस्त कर रही है आज तो… म्म्म्म… पूरा मुँह में लेकर चूस… म्म्म्म…”

मम्मी अंकल की ओर नज़र उठाकर देखती हैं और एक कामुक मुस्कान देकर अंकल का लंड मुँह में भर लेती हैं।

मम्मी: “उउउउम्म्म… उउउउउम्म्म… आआआह्ह्ह…”
आवाज़ें निकालते हुए लंड चूस रही हैं जैसे कोई बच्चा लॉलीपॉप चूसता है।

अंकल: “आआह्ह्ह… ऐसे ही मेरी कुतिया… बड़ा मज़ा आ रहा है। तेरे ये नरम ओठ… आआआह… गज़ब का मज़ा दे रहे हैं मेरे लंड को… म्म्म्म… ह्ह्ह्ह…”

मम्मी पूरी लगन से अंकल का लंड चूस रही हैं। करीब पाँच मिनट बाद अंकल मम्मी को सोफे से नीचे उतारके बैठने को कहते हैं। मम्मी तुरंत सोफे से नीचे उतर जाती हैं और बैठ जाती हैं।

अंकल: “अब मैं तुझे मज़ा दूँगा मेरी चामिया।”
इतना कहकर अंकल खड़े हो जाते हैं और मम्मी के मुँह में लंड डालकर मुँह धीरे-धीरे चोदने लगते हैं।

मम्मी अपनी आँखें बंद करके मज़े में डूबने लगती हैं। अंकल हल्के-हल्के धक्के मार रहे हैं।

मम्मी: “म्म्म्ममुउह्ह्ह… म्म्म्ममुउउह्ह्ह…”

अंकल बिना रुके शॉट मार रहे थे। अचानक अंकल अपना नौ इंच का लंड पूरा मम्मी के मुँह में दबा देते हैं।

मम्मी की साँस अटक जाती है। आँखों से पानी आने लगता है। पूरा चेहरा लाल हो जाता है। मम्मी अपने हाथ अंकल की जाँघों पर मारने लगती हैं। तभी अंकल अपने लंड को मम्मी के मुँह से बाहर खींच लेते हैं।

मम्मी: “खूक… खूक… जान निकाल दी पूरी मेरी… खूक… खूक…”

अंकल (हँसते हुए): “मज़ा आ गया मेरी रानी… हाहाहा… क्या तुझे मज़ा नहीं आया?”

मम्मी (अपनी साँसों पर काबू पाते हुए): “क्या खाक मज़ा आया… जान निकल रही थी मेरी और तुम कहते हो मज़ा आया… हुह्ह…”

अंकल: “कोई बात नहीं रानी वर्षा… मेरी जान… अब तेरी चुत का रस पिला दे। चल उठ और सोफे पे लेट जा मेरी वर्षा।”

मम्मी उठकर सोफे पे लेट गईं और अपने पाँव फैलाकर अपनी चुत की ओर इशारा करती हैं।

अंकल: “बिल्कुल मेरी रानी… तुझे चाखने में तो मुझे पूरा मज़ा आता है… हाहाहा।”
इतना बोलकर मम्मी की चुत पर झुक जाते हैं और अपनी ज़ुबान निकालकर चाटने लगते हैं।

मम्मी: “आआआआह्ह्ह्ह… म्म्म्म… ऐसे ही मेरे राजा… चाटो… आआह्ह… आपको पता है चुत कैसे चाटी जाती है… औरत को खुश कैसे करते हैं… दर्द भी… म्म्म्म… आआआ… और मज़ा भी दोनों आता है आपको।”

अंकल बस अपने काम में लगे हुए थे। पहले से रस छोड़ रही मम्मी की चुत को चाट और चूसकर और गीला कर रहे हैं।

मम्मी: “स्स्स्स्स… आआआह्ह्ह्ह… यहाँ पर मत काटो योगेश जी… म्म्म्म… कैसे आप इतना मज़ा देते हो… और एक मेरा पति साला चूतिया, भड़वा, गंडू… कुछ काम का नहीं… बस मर्द बना फिरता है।”

अंकल (मुँह ऊपर करके): “उस गंडू को मैं सिखाऊँगा कि तेरी बीवी किस तरह खुश होती है। साले को एक दिन पकड़के उसकी गाँड मारूँगा।”

मम्मी: “आआआआह्ह्ह्ह… हेहेहे… हाँ यही करना होगा उसके साथ। खुद खाली होकर मुझे तड़पता छोड़ सो जाता था। मुश्किल से महीने में एक बार करता था। लेकिन पिछले छह महीनों से जब से आपसे चुद रही हूँ… उस कुत्ते को तो मैंने हाथ भी नहीं लगाने दिया। मेरी चुत पे सिर्फ़ आपका ही अधिकार है… इस नामर्द का नहीं।”

अंकल: “अरे तुझ जैसी गरम माल को वो गंडू क्या ठंडा करेगा… म्म्म्ममुउ… सुप… सुप… म्म्म्म…”

मम्मी: “अब ऐसे ही करते रहो… मेरा पानी छूटने वाला है… आआआआह्ह्ह्ह… स्स्स्ज़्ज़… म्म्म्म… आआआआह्ह्ह्ह… और ज़ोर से चूसो… अपनी ज़ुबान डालो अंदर… और चोदो मुझे… आआआआह्ह्ह… मैं आ… आ… इत…”
इतना बोलकर मम्मी झड़ने लगती हैं। मम्मी की चुत से मानो दरिया ही बहने लगता है। अंकल पूरा का पूरा पानी चाट जाते हैं और खड़े हो जाते हैं। मम्मी लंबी-लंबी साँसें ले रही थीं।

अंकल: “अब तैयार हो ना रानी? मेरा लंड अपनी चुत में समा लेने को?”

मम्मी: “हाँ मेरे राजा… अब देर मत करो। आ जाओ और चढ़ जाओ मुझ पर… और मेरी आग बुझा दो।”

अंकल को जैसे ही ये सुनता है, अपने हाथ पे थूक लगाके लंड पर मसलते हैं और मम्मी के दोनों पाँव के बीच आकर लंड के सुपाड़े को चुत पर रखकर रगड़ने लगते हैं।

मम्मी अंकल की इस हरकत से और गरम होने लगती हैं और ज़ोर-ज़ोर से सिसकारियाँ लेने लगती हैं।

मम्मी: “स्स्स्स्स्ज़्ज़… आआआआह्ह्ह्ह… अब क्यों तड़पा रहे हो राजा… डाल दो अंदर… और कर दो मेरी आग ठंडी।”

इतना सुनते ही अंकल लंड के सुपाड़े को मम्मी की चुत में घुसा देते हैं।
धीरे-धीरे अंकल का पूरा लंड मम्मी की चुत में समा जाता है।

मम्मी के मुँह से ज़ोर से सिसकारी निकल जाती है—“आआआआआह्ह्ह्ह… भ्ह्ह… स्स्स्स्स्ज़्ज़…”

मम्मी: “छह महीनों से आपसे चुद रही हूँ… पर आज भी आपका ये मूसल मेरी चुत में जाते ही दर्द देता है… स्स्स्स्स… आआआआह्ह्ह्ह…”

अंकल: “अरे मेरी रानी… तेरी चुत ही कमाल की है। कितनी कसी हुई है आज भी… और कितनी गरम। मैं तो तेरी इस चुत का दीवाना हूँ मेरी जान।”
ये बोलते हुए धीरे-धीरे धक्के लगाना शुरू करते हैं।

मम्मी: “आआह… ऐसे ही पेलो मेरे राजा… मज़ा आ रहा है… स्स्स्स… आआआह्ह्ह…”

पाँच मिनट तक अंकल धीरे-धीरे धक्के मारते हैं।

मम्मी: “आआआआह्ह्ह्ह… लगाओ ज़ोर मेरे राजा… ज़ोर से मारो… म्म्म्म… मज़ा आ रहा है।”

मम्मी के मुँह से ये सुनते ही अंकल अपनी गति बढ़ा देते हैं। कुछ देर बाद अंकल अपना लंड मम्मी की चुत से निकाल लेते हैं और मम्मी को घोड़ी बनाते हैं और पीछे होकर ज़ोरदार शॉट मम्मी की चुत में मारते हैं। मम्मी के मुँह से एक बड़ी चीख निकलती है। फिर शुरू होती है धक्कों की रेस। अंकल पूरे जोश में मम्मी को चोद रहे थे। मम्मी अंकल का पूरा साथ दे रही थीं। तभी—

मम्मी: “आआआआ… योगेश जी… ऐसे ही ज़ोर से मारो… आआआह्ह्ह… फाड़ दो मेरी चुत को… मारो ज़ोर से शॉट… मैं झड़ने वाली हूँ… आआआह्ह्ह…”

अंकल पूरे जोश में मम्मी की ठुकाई करने में लगे हैं। दोनों के शरीर पूरे पसीने से भीग चुके हैं। तभी अंकल हाथ आगे ले जाके मम्मी के दोनों निप्पल्स दोनों हाथों की चुटकी में दबाकर आगे की ओर खींच देते हैं।

मम्मी (चिल्लाते हुए): “आआह… और ज़ोर से खींचो… दबाओ… आआआह्ह्ह… मैं गई… मैं गई…”
कहते हुए झड़ने लगती हैं। पर अंकल रुकने का नाम ही नहीं ले रहे। मम्मी सोफे पर पेट के बल पड़ी हुई हैं पर अंकल मम्मी को चोदे जा रहे हैं।

मम्मी की जान ही निकल रही है पर अंकल धक्के मार रहे थे। कुछ तीस-पैंतीस धक्कों के बाद अंकल अपना लंड मम्मी की चुत से निकाल लेते हैं और मम्मी को कहते हैं—

अंकल: “आजा मेरी रानी… मेरा निकलने वाला है। ये आजा… पी ले मेरा पूरा माल। तुझे बहुत पसंद है ना?”

मम्मी (अपनी साँसें सँभालते हुए): “हाँ मेरे राजा।”

मम्मी उठकर अंकल के सामने घुटनों पर बैठ जाती हैं। अंकल का पानी निकलने वाला होता है। वो लंड को ज़ोर-ज़ोर से हिलाने लगते हैं और उनके लंड से वीर्य की पिचकारी मम्मी के मुँह में जाने लगती है। कुछ मम्मी के चेहरे पे और कुछ मम्मी की चूचियों पर भी अंकल का वीर्य गिर जाता है।

दोनों शांत होकर सोफे पर बैठ जाते हैं।

फिर मैं देखता हूँ—दो बज चुके थे। मुझे भूख लगी थी तो मैं घर में नहीं खा सकता था क्योंकि मम्मी-अंकल को नहीं पता था मैं घर में हूँ। इसलिए मैं उन्हें छोड़कर चुपचाप घर से निकल गया।

और फिर होटल में खाना खाकर मैं दोस्त के घर चला गया। फिर दोस्त के घर से सात बजे वापस आया और देखता हूँ दोनों अभी भी लगे हैं चुदाई में। फिर थोड़ी देर बाद थक जाते हैं और एक-दूसरे के ऊपर ढले रहते हैं।

दोनों सोफे पर बैठे-बैठे कुछ देर आराम करते हैं। अचानक मम्मी घड़ी की तरफ़ देखती हैं—“अब आप जाइए… सात बज गए हैं।” और बाथरूम में घुस जाती हैं। अंकल भी अपना अंडरवियर पहनकर फिर से सोफे पर बैठ जाते हैं और अपनी पैंट उठाके उसमें से एक सिगरेट केस निकालके उसमें से एक सिगरेट निकालके जलाकर उसका लुत्फ़ उठा रहे थे। तभी बाथरूम का डोर ओपन होता है और मम्मी सिर्फ़ एक तौलिया में बाहर आती हैं। गोरे दूध जैसे बदन को वो तौलिया से लपेटकर छुपाने की नाकाम कोशिश कर रही थीं। मम्मी की चूचियाँ आधे से ज़्यादा तौलिया से दिख रही थीं। नीचे तो जाँघों को छुपाने की कोशिश ही नहीं… सिर्फ़ मम्मी की मादक और भरी हुई गाँड के थोड़ा नीचे तक ही छुप रहा था। मम्मी के बाल भी थोड़े गीले थे।

मम्मी को देख अंकल मेरी मम्मी को एक आँख मार देते हैं और कहते हैं, “गज़ब की क़यामत लग रही हो तुम तो वर्षा।”

मम्मी शर्मा जाती हैं और कहती हैं—

मम्मी (शर्माकर): “अभी भी मन नहीं भरा आपका? कितना थका दिया आपने तो आज। आप सैंतालीस की उम्र में भी कितनी मस्ती करते हो कि मेरे जैसी तैंतीस साल की औरत को खुश कर देते हो… हेहेहे।”

अंकल: “सिर्फ़ तुम्हें मेरी वर्षा रानी… मेरी ज़िंदगी में वीरान ही थी। पर जब से तुमने मेरा प्यार और (लंड पर हाथ रखकर) तुम्हारे इस बाबू को अपनाया है… मेरी ज़िंदगी में भी अब रंगीन बन गई है। थैंक्स फॉर एवरीथिंग माय लव।”

मम्मी: “अब बस कीजिए और जाकर फ्रेश हो जाइए।”

अंकल अपनी सिगरेट बुझाते हैं और किसी आज्ञाकारी बंदे जैसा हँसकर बाथरूम में चले जाते हैं।
मम्मी भी अब कपड़े पहनकर तैयार हो जाती हैं और किचन में जाकर कॉफी बनाने लगती हैं।

थोड़ी देर बाद अंकल मम्मी को आवाज़ देते हैं—“वर्षा…”

मम्मी: “कॉफी लेके आ रही हूँ जी। आप ज़रा हॉल में साइड पर बैठिए।”

अंकल तैयार होकर सोफे पर बैठे मम्मी का इंतज़ार करने लगते हैं। कुछ पाँच मिनट में मम्मी किचन से हाथ में ट्रे लेके आती हैं। ट्रे में दो कॉफी मग और कुछ स्नैक्स होते हैं। मम्मी ट्रे टेबल पर रखकर एक मग अंकल को देती हैं, एक खुद लेके सोफे पर अंकल के पास बैठ जाती हैं।

मम्मी: “लीजिए कॉफी… और कुछ खा भी लीजिए थोड़ा।”

अंकल कॉफी मग लेते हैं और चुस्कियाँ लेते पीने लगते हैं। कोई कुछ नहीं बोल रहा। दोनों बस खामोश कॉफी ही पी रहे थे। खामोशी तोड़ते हुए—

अंकल: “वर्षा… क्या बात है? चुप कैसे हो? अपने गुलाम से नाराज़ हो?”

Update 14

मम्मी: “क्या आप भी योगेश जी… कुछ भी। आप गुलाम नहीं, मेरे दिल के राजा हो आप… हेहेहे। चलिए अब देर नहीं हो रही क्या? मेरा बेटा और वो बुढ़िया आने वाली होगी। अंकुश ने कहा था छह बजे तक आ जाएँगे… लेकिन उनसे हारी चुदाई के लिए एक घंटा ज़्यादा दे दिया है। अब आपकी जाना चाहिए।”

अंकल: “हाँ, काफ़ी देर हो गई। चलो मैं चलता हूँ। पर कुछ मीठा मिल जाता तो मज़ा आ जाता।”
ये बोलकर सोफे से उठ जाते हैं और एक शरारती मुस्कान से मम्मी को देखते हैं।

मम्मी को समझ में आता है। वो शर्मा जाती हैं और उठके अंकल के पास जाकर अंकल के लिप पर अपने नरम गुलाबी लिप रख देती हैं। और अंकल के ओठ चूसने लगती हैं। किस थोड़ी देर बाद तोड़ देती हैं और अंकल उसे बाय बोलकर निकल जाते हैं।

मम्मी मुस्कुराते हुए डोर बंद कर लेती हैं। और बेडरूम में जाकर बिस्तर पर लेटकर सोचने लगती हैं।

फिर मैं घर से चुपचाप निकल जाता हूँ और आठ बजे मम्मी को कॉल करता हूँ।
मम्मी को बता देता हूँ दादी कल आएगी और खाना पैक कराकर लाऊँगा। फिर मैं खाना पैक कराकर लाता हूँ और मम्मी एक संस्कारी पतिव्रता औरत की तरह साड़ी पहनकर तैयार हो जाती हैं। फिर पापा भी आ जाते हैं और खाने के बाद सो जाते हैं।
Like Reply
#17
Update 15

चुदाई के कारण मम्मी थक गई थीं। रात को पापा-मम्मी साथ में सोए थे और मैं दूसरे रूम में। दादी मेरे दोस्त के घर ही रुक गई थीं।

नेक्स्ट डे मम्मी का व्रत था। मम्मी ने पापा से ऑफिस जाते समय कहा, “मेरा फास्ट है।”
पापा ने कहा, “तो आराम करना।” और पापा ऑफिस चले गए।

पापा के जाने के बाद मैंने मम्मी से कहा, “क्या मम्मी, आज आपने व्रत क्यों रखा?”

मम्मी: “क्यों? क्या मैं व्रत नहीं रख सकती हूँ?”

मैं: “नहीं मम्मी, मेरा मतलब… आप दिन भर भूखी रहोगी, इसलिए पूछा।”

मम्मी: “बेटा, मेरी आदत में है।”

मैं: “ओके मम्मी। और मम्मी, आज दादी भी घर पे नहीं, पापा ऑफिस गए हैं तो आप अंकल के घर चली जाओ कंप्यूटर सीखने।”

मम्मी: “नहीं, मेरा फास्ट है इसलिए मैं नहीं जाऊँगी और न ही उन्हें यहाँ बुलाना।”

मैं: “क्यों मम्मी? कंप्यूटर सीखने में क्या हरज़ है? आपको फास्ट से क्या?”

मम्मी: “बेटा, योगेश जी कंप्यूटर सिखाने आते हैं तो वो मुझे सेड्यूस करने की कोशिश करते हैं। मैं तुझे कितनी बार बता चुकी… जो कि गलत है। मैं एक शादीशुदा औरत हूँ और तू मेरे बेटे होकर एक गैर मर्द के साथ…”

मैं: “मम्मी, इसमें कुछ गलत नहीं। अंकल आपको लाइक करते हैं। उनका डिवोर्स हो गया है, वो सिंगल हैं। और पापा आपको टाइम नहीं देते। आपको भी नीड है।”

मम्मी चिल्लाते हुए: “चुप! बकवास बंद कर!”

मैं: “मम्मी, मैं आपका बेटा हूँ। मैं आपको खुश देखना चाहता हूँ। पापा आपको टाइम नहीं देते, ये मैं इतना समझता हूँ। आप अभी तैंतीस की हो और इस उम्र में प्यार की सख्त ज़रूरत होती है जो पापा आपको नहीं देते। और आप कब तक अपनी इच्छाओं को दबाते रहोगी? कब तक? और आप पति के होते हुए भी और माँग में सिंदूर होते हुए भी विधवा का जीवन जी रही हो। आपको भी एक मर्द की सख्त ज़रूरत है। मैं जानता हूँ पापा की उम्र ज़्यादा है आपसे… वो आपसे बीस साल बड़े हैं और वो आपको प्यार नहीं करते। प्लीज़ मम्मी, अंकल का प्यार स्वीकार कर लो।”

मम्मी: “नहीं बेटा। मैं बिना मर्द के अपना जीवन हर लूँगी। भले ही तेरे पापा का प्यार मुझे न मिले, लेकिन मैं एक गैर मर्द की बाँहों में नहीं जा सकती। मैं किस मुँह से समाज का सामना करूँगी?”

मैं: “मम्मी, मैंने आपको कितनी बार कहा है… आप दूसरों की बातों का ध्यान मत दो। कोई कुछ नहीं सोचेगा। मैंने आपको बताया था मेरे दोस्त की मम्मी उनके चाचा से प्यार करती हैं तो उनसे तो कोई कुछ नहीं कहता। मम्मी, आपको अपने दिल की ख्वाहिश पूरी करने का अधिकार है। और मम्मी, मैं आपके साथ हूँ। किसी को कुछ पता नहीं चलेगा। सिर्फ़ आपको, मुझे और अंकल को पता रहेगा। और मम्मी, मैं आपसे वादा करता हूँ… मैं आपके साथ हूँ।”

मम्मी: “बेटा, ये गलत है। और एक न एक दिन किसी को पता चल ही जाएगा। और किसी ने देख लिया तो मैं मर जाऊँगी।”

मैं: “मम्मी, मैं वादा करता हूँ… जब भी आप अंकल से मिलोगी, मैं इस बात का ध्यान रखूँगा कि कोई देखे ना। मैं खुद आपको अंकल से मिलवाऊँगा और वादा करता हूँ।”

मम्मी: “क्या बेटा? ऐसे कैसे होगा? कोई देख ही लेगा। तू कब तक ध्यान देगा? मान ले कभी योगेश जी ने मुझे बुलाया अपने घर पे या वो अपने घर आए तो क्या करेगा? कोई क्या सोचेगा… ये रूम में एक गैर मर्द के साथ…”

मैं: “मम्मी, मैं किसी को पता नहीं चलने दूँगा। आप मुझ पे भरोसा करो। जब आप अंकल के साथ अकेली होंगी तब मैं आपके रूम के बाहर रहूँगा।”

मम्मी हँसते हुए: “चुप नालायक बेशरम! क्या बोल रहा है तू? तुझे पता है तूने क्या बोला? तू मम्मी को एक गैर मर्द के साथ रूम में भेजकर उनकी पहरेदारी करेगा? तुझे शर्म नहीं आएगी? तू तेरी ही मम्मी और एक गैर मर्द की पहरेदारी कर रहा है?”

मैं: “नहीं मम्मी, इसमें शर्म की क्या बात है? मैं तो एक बेटा होने का फ़र्ज़ निभाऊँगा। एक बेटे का फ़र्ज़ होता है अपनी माँ की खुशियों का ख्याल रखना, अपनी माँ को खुश रखना और अपनी माँ को खुशियाँ दिलाना… चाहे पापा से या फिर अंकल से। और अपनी माँ की रक्षा करना, अपनी माँ को सुरक्षा देना… एक बेटे का फ़र्ज़ है। हर बेटे का फ़र्ज़ होता है उसकी माँ की खुशियों में कोई बाधा न आए, उसकी माँ की खुशियाँ भंग न हों, उसकी माँ की खुशियों में कोई अड़चन न हो, उसकी माँ की खुशियों में कोई डिस्टर्बेंस न हो… उसके लिए माँ की पहरेदारी करना एक बेटे के लिए गर्व की बात है मम्मी।
मम्मी, जब आपने मुझे अपने पेट में नौ महीने रखकर मेरी सुरक्षा की और मुझे जन्म देने का अत्यंत दर्द सहा और मुझे अपना दूध पिलाकर पाला, मेरी लैटरिंग साफ की, मेरे कपड़े धोए… आपके इतने एहसान हैं मुझ पे कि मैं उन्हें अपनी जान देकर भी बेटा माँ के एहसानों को नहीं चुका सकता। तो क्या मैं आपकी पहरेदारी भी नहीं कर सकता?”

मम्मी मेरी बातों को ध्यान से सुन रही थीं और बोलीं, “बेटा, मैं बहुत खुशनसीब हूँ जो मुझे तेरे जैसे लाल मिला। तू मेरे कलेजे का टुकड़ा है मेरे लाल।
पर बेटा, मैंने सोच लिया है… भले ही मुझे तेरे पापा प्यार करते हैं, मैं उसी में खुश हूँ। और योगेश जी के साथ कोई गलत काम नहीं करूँगी।”

मैं: “लेकिन मम्मी…”

मम्मी बीच में ही बोलीं, “चुप! एकदम चुप! अब एक भी शब्द नहीं बोलना। अब तू जाकर स्टडी कर। मैं नाश्ता बनाती हूँ।” और फिर मम्मी किचन में चली गईं।

फिर नाश्ते के बाद मम्मी अपने रूम में गईं और फिर पूरा दिन ऐसे ही निकल गया। शाम को पाँच बजे मम्मी बोलीं, “बेटा, मैं छत पे जा रही हूँ और तू नीचे ही रहना।” और मम्मी ऊपर चली गईं। तो मैंने सोचा आज तो उनका फास्ट है तो ये अंकल से दूर रहेगी, इसलिए मैं ऊपर नहीं गया। और फिर एक घंटे बाद मम्मी छत से दोस्ती हुई हँसती हुईं और सीधे रूम में चली गईं। मुझे कुछ समझ में नहीं आया और न ही मैंने इसपर ध्यान दिया।

रात को पापा ने मुझे फोन करके कहा वो आज नहीं आएँगे, कल आएँगे। मैंने मम्मी को भी बता दिया और आज घर पे सिर्फ़ मैं और मम्मी ही थे। ये जानकारी मैंने अंकल को भी दे दी।

मैंने फिर से मम्मी से कहा, “मम्मी, अंकल को कंप्यूटर सिखाने के लिए बोलो।”

मम्मी ने मुझे बीच में रोक दिया हाथ के इशारे से चुप रहने का कहा बिना कुछ बोले ही और मैं चुप हो गया।

मम्मी ने लाल कलर की ड्रेस पहनी। लाल कलर की ड्रेस में मम्मी आज अलग ही दिख रही थीं। बार-बार अपने आप को मिरर के आगे देख वो खुद ही खुश हो रही हैं कि भगवान ने उसे कितना सुंदर बनाया है।

अभी रात को आठ पीएम ही हुए थे तो मैं खाना खाकर अपने रूम में स्टडी करने चला गया तो मम्मी ने कहा, “बेटा, आज मेरे रूम में ही सो जाना।”

मैं जानता था मम्मी मुझे अपने रूम में सुलाना चाहती हैं ताकि वो अंकल से चुदने से बच जाएँ। लेकिन मुझे अंकल ने बोला था तू दूसरे रूम में सोना और मैं आठ बजे आकर तेरी मम्मी की चुत फाड़ूँगा। इसलिए मैं जल्दी आठ बजे रूम में आ गया था।

मैं: “नहीं मम्मी, मुझे नींद आ रही है इसलिए मैं अपने रूम में ही सोऊँगा।”

मम्मी: “ठीक है, मैं भी तेरी ही रूम में सो जाऊँगी।”

मैं: “नहीं मम्मी, मैं अकेला सोऊँगा।”

मम्मी: “नहीं, मैंने कहा ना… मैं तेरे साथ में सोऊँगी। इसलिए मैं किचन का काम करके एक घंटे में आकर तेरे साथ सो जाऊँगी। जब तक तू सो जा।” और मम्मी मेरे रूम से चली गईं।

मेरे पास अंकल का कॉल आया और बोले, “ज़ीने का गेट खोल जल्दी। मैं आ गया हूँ।”

मैं: “अंकल, आप मम्मी को बोलो तो वो खोल देंगी।”

अंकल: “मैंने वर्षा को बोला तो उसने मना कर दिया। बोली आज मेरा व्रत है इसलिए वो आज मुझसे दूर रहेगी।”

मैं: “तो फिर आज रहने दो।”

अंकल: “नहीं बेटा। जब तक तेरी मम्मी की चुदाई नहीं करूँगा मुझे नींद नहीं आएगी। इसलिए गेट खोल।”

फिर मैं धीरे से रूम से निकला और देखा मम्मी किचन में हैं। और मैंने जाकर ज़ीने का गेट खोल दिया। अंकल अंदर आए और मैं रूम में आ गया और रूम की विंडो से देखने लगा। मम्मी किचन में काम करती साफ नज़र आ रही थीं और अंकल हॉल में थे और धीरे-धीरे किचन में जाने लगे।

मम्मी किचन में काम कर रही थीं।
मम्मी की मखमली नाज़ुक सी गाँड अंकल की तरफ़ थी जिसे देख अंकल अपने आप को रोक नहीं पाए।

अचानक अंकल ने अपने पैंट की जेब से एक सोने की चेन निकाली और हाथ में चेन लिए मम्मी को पीछे से आकर अपनी गोद में उठा लेते हैं, जिसे देख मम्मी एकदम चौंक जाती हैं।

मम्मी: “आप अंदर कैसे आ गए?”

अंकल: “मैं तो अपनी जान की प्यास बुझाने आया था जो कल अधूरी रह गई।”

मम्मी: “आज नहीं… आज मेरा व्रत है इसलिए…”

अंकल: “नहीं जान… आज तो तेरी चुत में लंड डालकर तेरी प्यास बुझाऊँगा।”

मम्मी: “चुपचाप चले जाओ नहीं तो मैं चिल्लाकर अंकुश को बुला लूँगी।”

अंकल: “अंकुश ने ही तो गेट खोला है और उसी ने कहा है जाकर मम्मी को प्यार करो।”
इतना कहकर अंकल मम्मी की साड़ी का पल्लू नीचे गिरा देते हैं और अपने हाथ मम्मी के बूब्स की ओर बढ़ा देते हैं।

मम्मी अंदर की ओर भागने लगती हैं, लेकिन अचानक मम्मी को लगता है जैसे उनकी साड़ी का पल्लू कहीं अटक गया है।

आज अंकल मम्मी को किसी भी कीमत पर छोड़ना नहीं चाहता था। अंकल ने पहले ही मम्मी की साड़ी पर अपना पैर रख दिया था।

अंकल मम्मी की साड़ी का पल्लू पकड़ उसे खींचने लगते हैं और उसे खींचकर दूर फेंक देते हैं।
मम्मी अपने बूब्स को अपने हाथों से ढकने की नाकाम कोशिश करती हैं। अंकल भी मम्मी के पीछे आ कर मम्मी के हाथों को जकड़ लेते हैं।

अंकल का लंड मम्मी की गाँड में धँस जाता है। मम्मी के शरीर की कोमलता अंकल की हवस को और भड़का रही है।

मम्मी: “योगेश जी प्लीज़ मुझे छोड़ दो।”

अंकल: “मान जाओ ना वर्षा… क्यों खुद भी तरस रही हो और मेरी भी प्यास बढ़ा रही हो।”

मम्मी: “प्लीज़ आज रहने दो… मेरा फास्ट है… प्लीज़ मैं आज भूखी हूँ।”

अंकल: “मैं जानता हूँ आज तू भूखी है… इसलिए तो तुझे अपना लंड तेरी चुत में डालकर तेरी भूख मिटाऊँगा।”

मम्मी: “मेरा आज फास्ट है इसलिए मैं आज आपको मेरा फायदा नहीं उठाने दूँगी। आप हमेशा मेरा फायदा उठाते हैं।”

अंकल मम्मी की एक नहीं सुनते हैं और मम्मी के होठों को चूमना शुरू कर देते हैं।

अंकल अपनी जीभ से मम्मी के होठों को चाटते हुए उसके बदन को मसलना शुरू कर देते हैं।

अंकल: “मैंने आपका फायदा उठाया या आपने वर्षा?”

मम्मी: “क्यों? मैंने क्या किया?”

अंकल: “आप तो अपनी चुत झड़ने के बाद उठकर भाग गईं। प्यासा तो मुझे ही रहना पड़ा ना। अभी शाम को…”
(अब मुझे समझ में आया था कि मम्मी शाम को एक घंटे के ऊपर गई थीं और छह बजे दोस्ती हुई हँसती हुईं आई थीं और सीधे अपने रूम में चली गई थीं। इसका मतलब वो छत के रास्ते अंकल के घर जाकर चुत चटवाकर भागकर आई थीं।)

मम्मी: “तुम मेरी बात समझो योगेश जी… मैं शाम को भाग गई थी आपकी हरकतों की वजह से। लेकिन मैं आज ये सब नहीं करना चाहती हूँ। आज मेरा फास्ट है।”

अंकल: “वर्षा ये तो गलत है ना।”

मम्मी: “आखिर तुम चाहते क्या हो मुझसे फिर?”

अंकल: “ज़्यादा कुछ नहीं वर्षा… बस मेरा लंड झड़ने में मेरी मदद कर दो। मैं तुम्हारा फास्ट नहीं तुड़वा रहा हूँ… बस मेरे लंड का पानी निकाल दो।”

ये कहकर अंकल मम्मी के बदन से खेलना चालू रखते हैं और मम्मी के बूब्स को मसलने लगते हैं। न चाहते हुए भी मम्मी भी लगातार अंकल के द्वारा अपनी गाँड में लंड रगड़ने और उनके शरीर को चूमने की वजह से गरम होने लगती हैं।

मम्मी अंकल को मना तो करती हैं पर फिर भी अंकल समझ जाते हैं कि मम्मी गरम होने लगी हैं।

अंकल: “वर्षा मेरा लंड देखो ना कैसा तड़प रहा है आपके लिए। एक बार इसे मेरे पैंट से बाहर निकालकर अपने हाथ में ले लो प्लीज़।”

मम्मी: “श्श्श… योगेश जी मुझे प्लीज़ जाने दो… ये सब सही नहीं है आज के लिए। कल कर लेना।”

अंकल मम्मी के ब्लाउज़ को कंधे से नीचे खींचने लगते हैं जिससे मम्मी के ऊपर के दो बटन भी टूट जाते हैं। मम्मी थोड़ा आगे होने की कोशिश करती हैं पर अंकल मम्मी को ऐसे ही पीछे से खींचकर बेडरूम में ले जाने लगते हैं। तो मैं भी अपने रूम से निकलकर मम्मी के रूम की विंडो पे चला जाता हूँ और देखता हूँ अंकल ने मम्मी को बिस्तर पे पटक दिया है। और रूम का गेट ओपन रहता है।

मम्मी को ऐसा लगता है जैसे उसके शरीर में जान न रही हो। वो चाहकर भी उठ नहीं पातीं।

अंकल: “ठीक है… मैं कुछ नहीं करूँगा। लेकिन आप एक काम कर दीजिए।”

मम्मी: “क्या?”

अंकल: “मुझसे अपना पाँव चटवा लो और मैं चला जाऊँगा।”

मम्मी: “छी… आप क्या बोल रहे हो? मैं ऐसा नहीं कर सकती हूँ। मैं आपको पति मानती हूँ और आप… छी…”

अंकल: “आपको मेरी कसम वर्षा।”

मम्मी: “नहीं… मैं आपसे अपना पाँव नहीं चटवाऊँगी। और मुझे माफ कर देना… मैं आपको आज खुश नहीं कर पाऊँगी।”

लेकिन अंकल ने मम्मी का एक पाँव उठाया और अपने चेहरे के पास ले आए। और मम्मी बार-बार मना कर रही थीं—“नहीं… नहीं… प्लीज़ ऐसा मत करो… मेरे पैर गंदे हैं… प्लीज़ रुक जाओ।” लेकिन अंकल नहीं रुके।

अंकल बड़े गौर से मम्मी को रिक्वेस्ट करते देख रहे थे कैसे वो अंकल को मना कर रही थीं—“मेरा पैर मत चाटो।”

अब अंकल को भी मज़ा आने लगा था मम्मी को गिड़गिड़ाते देख। और वो मम्मी के पैर का अंगूठा अपने होठों पर रख लेते हैं और अंगूठे को अपने होठों पे धीरे-धीरे फेरने लगते हैं। फिर अंकल अपना मुँह खोल लेते हैं और मम्मी के अंगूठे को मुँह में लेकर चूसने लगते हैं। अंकल की इस हरकत से मम्मी के जिस्म के रोएँ एक बार फिर से खड़े हो जाते हैं और मम्मी की साँसें एक बार फिर से तेज़ हो जाती हैं।

मम्मी भी बड़े गौर से अंकल के चेहरे को देखे जा रही थीं… हवस अब मम्मी की आँखों में भी साफ देखी जा सकती थी। अंकल अब सब कुछ भूलकर मम्मी के पाँव और उसके तलवे को अपने होठों में लेकर चूस और चाट रहे थे। अंकल को देखने में ऐसा लग रहा था जैसे अंकल को दुनिया की सबसे प्यारी चीज़ मिल गई हो। मम्मी की साँसें अब भारी होने लगी थीं… अब मम्मी की भी आँखें सुरख लाल हो चुकी थीं… काफ़ी देर तक अंकल मम्मी के पाँव के हर उँगली को बारी-बारी से अपने मुँह में लेकर चूसते जा रहे थे… आज उन्हें भी इसमें बड़ा मज़ा आ रहा था।

मम्मी के मुँह से एक बहुत ही धीमी सिसकारी निकल रही थी… लज़्ज़त से मम्मी की आँखें एक बार फिर से बंद हो गई थीं… इधर धीरे-धीरे अंकल अपनी जीभ की रफ्तार बढ़ाते जा रहे थे। मम्मी फिर से अंकल का सर अपने हाथों में पकड़ लेती हैं और कसकर उसे अपने सीने पर ज़ोर से दबाने लगती हैं। अंकल भी अब कहाँ रुकने वाले थे… इस वक्त अंकल का लंड अब पूरा खड़ा हो गया था…

मम्मी की आँखें बिल्कुल नशीली हो चुकी थीं… वो अब इस समय मदहोशी के आलम में थीं… कुछ देर बाद अंकल अपनी जीभ मम्मी के निप्पल्स पर ब्लाउज़ के ऊपर से ही फेरते हैं… तभी मम्मी झट से अंकल से दूर होने की कोशिश करती हैं लेकिन अंकल मम्मी की टाँगों को लड़के पकड़ लेते हैं और फिर…

अंकल मम्मी की टाँगों को चूमते हुए ऊपर की ओर बढ़ जाते हैं।

अंकल के ऐसे करने से मम्मी का पेटीकोट भी ऊपर को खिसक जाता है।

मम्मी की गोरी जाँघों को देख अंकल मम्मी के पेटीकोट में हाथ डाल देते हैं और मम्मी की गाँड को मसलना शुरू कर देते हैं।
मम्मी धीरे-धीरे आहें भरने लगती हैं।
अंकल अपना हाथ मम्मी की पैंटी की इलास्टिक पर ले जाते हैं।

मम्मी समझ जाती हैं कि अंकल उनकी पैंटी उतारने वाले हैं।
मम्मी अंकल को मना करती हैं पर अंकल मम्मी की पैंटी को नीचे खींच देते हैं, और मम्मी के कानों में कहते हैं कि जान आज अपनी चुत नहीं चटवाना चाहोगी मुझे।

अंकल जानते हैं कि मम्मी चुत चाटने से पागल सी हो जाती हैं। वो मम्मी के मना करने के बावजूद अपनी जीभ मम्मी की चुत पर लगा देते हैं।

अब मम्मी का सारा विरोध लगभग खत्म हो जाता है। अंकल एक कुत्ते की तरह मम्मी की चुत को चाटकर मम्मी को हवस की आग में डूबने को मजबूर कर देते हैं। मम्मी बार-बार अंकल का नाम लेने लगती हैं जिसे सुन अंकल मम्मी की चुत में अपनी जीभ डाल-डाल कर उसे हल्का-हल्का बाइट करते हुए मम्मी की चुत का रस पीने लगते हैं।

मम्मी की सिसकारियाँ बढ़ती देख अंकल मम्मी को और तड़पाने लगते हैं। मम्मी अंकल के बालों में हाथ डाल उसे अपनी चुत पर प्रेस करने लगती हैं और अपनी लेग्स में अंकल को बाँधने की कोशिश करती हैं।

अंकल समझ जाते हैं कि मम्मी झड़ने के लिए ऐसा कर रही हैं, क्योंकि एक बार पहले भी उनके साथ ऐसा हो चुका है शाम को। पर अब अंकल किसी तरह की कोई गलती नहीं करना चाहते थे। अंकल मम्मी की चुत चाटना उसी समय रोक देते हैं और सामने खड़े होकर अपने कपड़े उतारने लगते हैं।

मम्मी अंकल की ओर तरसती निगाहों से देखती हैं तो अंकल मम्मी को देख हँस पड़ते हैं। अंकल की हँसी मम्मी को झकझोर देती है। वो अपने शरीर की सारी इच्छाशक्ति बटोर कर एक बार फिर अपने आप को सँभालने की कोशिश करती हैं। अंकल को कपड़े उतारते देख मम्मी न चाहते हुए भी बिस्तर से उठ जाती हैं पर अंकल मम्मी को वहीं पकड़ लेते हैं।

अंकल मम्मी की कमर में हाथ डाल उसे सहलाने लगते हैं।

अंकल: “क्या हुआ वर्षा? कहाँ चली?”

मम्मी: “योगेश जी… मैं ये सब नहीं कर सकती… मुझे जाने दो प्लीज़।”

अंकल: “मैंने तो पहले ही कहा है आपको कि आज मेरा लंड आपको झड़ना ही होगा। बिना लंड झड़े तो मैं आपको जाने नहीं दूँगा। वैसे भी आप भी तो प्यासी हो।”

ये कहकर अंकल मम्मी की कमर को मसलते हुए अपनी उँगली उसकी नाभि में फिराने लगते हैं।

मम्मी: “आह… योगेश जी समझो ना प्लीज़।”

अंकल: “मेरा लंड मेरे पैंट से बाहर निकालकर हिलाओ वर्षा।”

लेकिन मम्मी चुप रहीं। मम्मी ने अंकल का पैंट नहीं उतारा।

अंकल: “वर्षा… अब मेरी पैंट भी उतारकर इसे प्यार करो। ये तुम्हारे प्यार के लिए तरस रहा है।”

मम्मी फिर आगे बढ़ती हैं और अंकल का पैंट पे हाथ रखती हैं लेकिन खोलती नहीं। अंकल फिर से बोलते हैं तो मम्मी पैंट की ज़िप खोलती हैं और अंदर अंडरवियर पहना था अंकल ने तो मम्मी अंडरवियर के अंदर से लंड निकालती हैं तो लंड एकदम से बाहर निकलता है जैसे स्प्रिंग की तरह एकदम तना हुआ रॉड की तरह था।
Like Reply




Users browsing this thread: 5 Guest(s)