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Misc. Erotica सम्मान और बदला: Hindi Version Of Honor and Vengeance
(15-08-2026, 07:01 AM)Qutub Minar Wrote: Thanks for posting back to back updates.
Congratulations on 2 lakh views.
Naya Mod 1 finally introduced Chandan baba into the household.
Will be interesting to see whether Chandan baba is able to figure out Sher and his intentions.
Will he try to stop Sher or will be he moved out of the way by Sher?
Also liked that Sartaj still cares about Meera.

Now that Meera has decided she will no longer honour her promise for Jyoti to Sher, will she finally be able to put up a fight to Sher?
Also it remains to be seen how the tantrik baba angle plays out if Meera decides to break her promise.

Can't wait to find out if Meera will be able to recognise Sher in the dark of night in her bed.
Hope Sher will be able to make his dream come to reality on her bed in the next parts.

Keep it up Deepak bhai.
Waiting for your new update.

Thanks , i like it when reader are that involved , that gives me feedback . otherwise it is just posting and hoping that people are loving it .
Deepak Kapoor
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  1. An Innocent Beauty Series ( 5 Books )
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Do not mention / post any under age /rape content. If found Please use REPORT button.
(15-08-2026, 09:47 AM)Shabaz123 Wrote: Chandan Baba and sher together fuck meera..

Lets See how it work out .
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(15-08-2026, 02:30 AM)Rizzi1198 Wrote: Absolutely wonderful update great twist ab dakhty shatir sher kasa meera ka mazay leta andhere kamre man and thanks biddy for continuous updates back to back

(15-08-2026, 06:18 AM)anushka Wrote: Hope to get a very big update in this weekend…

Plan to give it next episode today  . If not then it will on Monday , as i am traveling.
Deepak Kapoor
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नया मोड़ —2
 
सामने मीरा अकेलीबेफिक्र होकर सो रही थी। चादर के नीचे से उसकी गोरीनंगी टाँगों का कुछ हिस्सा बाहर झाँक रहा था और सफेद स्लिप में उसकी छाती की ढलान साफ झलक रही थी।
 
शेर (लाइट की रोशनी में मीरा के नंगे जिस्म का दीदार करते): "अबे तेरी तो... क्या माल सो रहा है बे! साली सफेद कपड़े में तो पूरी परी लग रही है! साहब निकल गया और यह रांड बेखबर होकर पड़ी है... आज तो इस अंधेरे का पूरा फायदा उठाऊँगा!"
 
शेर ने दबे पाँव बिस्तर के बिल्कुल पास पहुँचकर अपनी साँसें रोक लीं। उसने बहुत ही आहिस्ता सेबिना कोई आहट किएमीरा के बदन पर से चादर को पीछे खिसकाना शुरू कर दिया।
 
जैसे-जैसे चादर हटती गईमोबाइल की धुंधली रोशनी में मीरा का कामुक रूप शेर की आँखों के सामने था । शेर की आँखें फटी की फटी रह गईंउसका गला प्यास के मारे सूखने लगा।
 
सामने का नज़ारा उसके लिए किसी सपने से कम नहीं था—मीरा की दोनों गोरीचिकनी और नंगी टाँगें। उसकी सफेद स्लिप उसके हिप्स तक उठी हुई थीऔर उसकी नंगी जाँघों के बीच फँसी हुई वह छोटी सी काली पैंटी साफ चमक रही थी।
 
ऊपर सेस्लिप का गला इतना गहरा और ढीला था कि उसके दोनों बड़े-बड़ेभरे-पूरे मम्मे आधे से ज़्यादा बाहर झलक रहे थे। नींद में डूबा उसका नूरानीबेखबर चेहरा इस पूरे माहौल को और भी कातिलाना बना रहा था।
 
शेर (कामुक उन्माद में आँखें फाड़ेमन ही मन हांफते हुए बड़बड़ाया): "अबे मादरचोद... क्या कमाल की चीज़ सो रही है! कसम सेऐसी गोरी रंगत और ऐसे सुडौल मम्मे तो किसी हीरोइन के भी नहीं होंगे! साली बेखबर सो रही हैऔर यहाँ मेरा लंड पैंट फाड़ने को तैयार है!"
 
कुछ पलों तक तो शेर बस अपनी निगाहों से मीरा के उस नंगे जिस्म को पीता रहा। फिर अचानक उसके दिमाग में ख्याल आया। वह जानता था कि ऐसा मौका बार-बार नहीं मिलता और यह नज़ारा हमेशा के लिए उसके पास होना चाहिए।
 
शेर ने जेब से अपना मोबाइल निकालाउसका कैमरा ऑन किया और वीडियो रिकॉर्डिंग चालू कर दी।
 
वह मोबाइल को मीरा के चेहरे से लेकर उसकी आधी बाहर छातीउसकी पतली कमरकाली पैंटी और उसकी पूरी नंगी जाँघों पर धीरे-धीरे घुमाने लगा। उसने हर कोण  से मीरा के उस बेखबरआधे-नंगे जिस्म का क्लोज़-अप वीडियो बनाना शुरू कर दिया।
 
शेर (वीडियो बनाते हुएमुँह में लार भरते हुए कमीनेपन से मुस्कुराया): "रिकॉर्ड कर ले शेर... रिकॉर्ड कर ले! यह माल तो ज़िन्दगी भर मुट्ठ मारने के काम आएगा! और अगर कभी यह मालकिन ज़्यादा नखरे दिखाएगीतो यही वीडियो इसके मुँह पर मारूँगा... फिर देखना कैसे सीधी मेरी जाँघों के बीच आकर गिरेगी!"
 
शेर ने बड़ी होशियारी से मोबाइल को साइड टेबल पर किताबों के सहारे इस तरह टिकाकर खड़ा कर दिया कि कैमरे का पूरा फोकस बिस्तर पर सो रही मीरा और उसकी नंगी जाँघों पर रहे। रिकॉर्डिंग चालू थी।
 
अब बेफिक्र होकर शेर दबे पाँव बिस्तर पर चढ़ा और मीरा की फैली हुई नंगी जाँघों के पास घुटनों के बल बैठ गया। उसका दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था—एक तरफ पकड़ाने का खौफ थातो दूसरी तरफ इस बेखबर गोरे जिस्म को छूने का भयानक सुरूर।
 
उसने कांपतेहाथ को आगे बढ़ाया और डरते-डरते अपनी उंगलियाँ मीरा की नंगी जाँघ पर टिका दीं।
 
उंगलियों का स्पर्श होते ही शेर के पूरे वजूद में करंट दौड़ गया।
 
शेर (मन ही मन कामुकता में पागल होते हुए हांफने लगा): "उफ़्फ़ मादरचोद... क्या चीज़ है यह! बिल्कुल मक्खन... एकदम मखमली! हाथ तो साला ऐसे फिसल रहा है जैसे बर्फ पर कोई तेल लगा दिया हो!"
 
मीरा की चिकनी, गोरी त्वचा की गर्माहट और उसका रेशमीपन शेर के हाथों में उतर रहा था। शेर ने धीरे-धीरे अपनी हथेली को उसकी जाँघों पर ऊपर से नीचे और नीचे से ऊपर फेरना शुरू कर दिया। उसकी उंगलियाँ मीरा की काली पैंटी के किनारों को छूती हुई निकल रही थीं।
 
इस छुअन और नज़ारे का असर यह हुआ कि शेर की लुंगी के अंदर उसका लंड सख्त होकर अकड़ गया और कपड़े को फाड़कर बाहर आने को बेताब होने लगा।
 
उधर, साइड टेबल पर रखा मोबाइल इस पूरे घिनौने और कामुक दृश्य को खामोशी से अपने कैमरे में रिकॉर्ड कर रहा था—मीरा का बेखबर नूरानी चेहरा, उसकी सफेद स्लिप में से झांकते मम्मे, उसकी गोरी जाँघों पर रेंगता शेर का काला हाथ, और लुंगी में तना हुआ उसका सख्त लंड।
 
शेर (कैमरे की तरफ एक पल को देखकर कमीनेपन से मुस्कुराया): "रिकॉर्ड हो रहा है सब... पूरा सबूत बन रहा है मीरा रानी ! अब तो तुम चाहकर भी इस शेर के चंगुल से नहीं भाग सकती!"
 
जाँघों पर हाथ फेरते-फेरते शेर की हवस और बढ़ती चली गई। वह अपना मुँह नीचे ले गया और अपने होठों को मीरा की गोरी, मखमली जाँघों पर टिका दिया।
 
वह बहुत आहिस्ता-आहिस्ता अपनी जीभ से उसकी जाँघों की चिकनी त्वचा को चाटने और चूमने लगा। उसकी गर्म सांसें और जीभ का गीलापन मीरा के बदन को छू रहा था।
 
तभी अचानक नींद की आगोश में डूबी मीरा हल्की सी कुनमुनाई और उसकी टाँग में मामूली सी हलचल हुई।
 
शेर झटके से वहीं रुक गया। उसने अपनी साँसें थाम लीं और एकटक मीरा के चेहरे को देखने लगा। ऐसा नहीं था कि वह मीरा से डरता था, बल्कि वह जानता था कि अगर मीरा जाग गई तो शोर मचाएगी और यह मज़ा वहीं खत्म हो जाएगा।
 
वह तो बस यही चाहता था कि मालकिन ऐसे ही बेखबर सोती रहे और वह बिना किसी रुकावट के उसके इस कयामत जिस्म से खिलवाड़ करता रहे, और यह सारा नज़ारा मोबाइल में रिकॉर्ड होता रहे।
 
जब मीरा फिर से गहरी साँसें लेने लगी और शांत हो गई, तो शेर के होठों पर एक मुस्कान तैर गई।
 
वह रेंगते हुए और ऊपर खिसका और मीरा की दोनों जाँघों के जोड़ पर पहुँच गया, जहाँ उसकी काली पैंटी फँसी हुई थी। उसने बहुत ही सावधानी और नरमी से अपने कांपते हाथों से पैंटी  को पकड़ा और उसे धीरे-धीरे नीचे की तरफ खिसकाना शुरू कर दिया।
 
जैसे-जैसे काली पैंटी नीचे सरकती गई, मोबाइल की धुंधली रोशनी में मीरा की बिल्कुल साफ़, चिकनी और सुंदर चूत बेपर्दा होने लगी।
 
शेर (उस बेदाग, साफ-सुथरी चूत को सामने देखकर आँखें फाड़े, मन ही मन हवस में बुरी तरह हांफने लगा): "उफ़्फ़ मादरचोद... क्या कमाल का नज़ारा है! साला ऐसी साफ़ और मक्खन जैसी चूत सामने हो तो कोई भी मचल जाए! आज तो इस कैमरे में ऐसी-ऐसी चीज़ रिकॉर्ड होगी कि मालकिन ज़िन्दगी भर इस शेर की उंगलियों पर नाचेगी!"
 
कैमरे में लाल डॉट अब भी खामोशी से झपक रहा था और शेर की नीच हरकत का एक-एक पल रिकॉर्ड हो रहा था।
 
शेर का मन तो बार-बार मचल रहा था कि सीधे अपनी जीभ मीरा की उस साफ़ चूत पर टिका दे, लेकिन वह जानता था कि नीचे का हिस्सा बहुत संवेदनशील  होता है। ज़रा सी जीभ की छुअन से मीरा की नींद टूट सकती थी और सारा खेल बिगड़ सकता था।
 
इसलिए उसने पहले ऊपर के हिस्से को निशाना बनाने का फैसला किया।
 
वह बहुत आहिस्ता से खिसककर मीरा के चेहरे के पास बैठा। उसने अपने हाथों को आगे बढ़ाया और उसकी सफेद स्लिप को धीरे-धीरे नीचे की तरफ धकेल दिया। स्लिप के नीचे सरकते ही मीरा के दोनों भरे-पूरे, गोरे मम्मे पूरी तरह नंगे होकर बाहर आ गए।
 
शेर ने बहुत ही हल्के हाथों से, बिना ज़्यादा दबाव दिए, उन मम्मों को सहलाना शुरू किया। उसकी  उंगलियाँ मीरा के मखमली मम्मों और कड़क होते निप्पलों पर रेंग रही थीं।
 
फिर उसने अपना मुँह नीचे झुकाया और मीरा के चेहरे को बड़े गौर से देखा। उसके गुलाबी, सुराहीदार होंठ... वही होंठ जहाँ मीरा ने उसको चूमने नहीं दिया था
 
शेर (कमीनेपन से मुस्कुराते हुए, मन ही मन बड़बड़ाया): "बहुत नखरे दिखा रही थी उस दिन कि होंठों को मत छूना शेर... आज देख, तेरे उन्हीं होंठों का रस कैसे पीता हूँ, और तू बेखबर सोती रह जाएगी!"
 
शेर ने बड़ी नज़ाकत से अपने मोटे, होठों को मीरा के नाज़ुक होठों पर टिका दिया। वह बहुत हल्के-हल्के से मीरा के ऊपरी और निचले होंठ को अपने मुँह में भरकर चूसने लगा।
 
उसकी एक हथेली मीरा के नंगे मम्मे पर बहुत आहिस्ता से घूम रही थी, और उसके होंठ मीरा के रसीले होठों का मज़ा ले रहे थे। उधर साइड टेबल पर रखा मोबाइल इस पूरे घिनौने, कामुक और चोरी-छिपे किए जा रहे किस को खामोशी से कैमरे में कैद कर रहा था।
 
नींद के आगोश में सो रही मीरा के बेखबर बदन पर जब शेर की गर्म सांसें, होठों की चुंबन और मम्मों पर हाथों का रेंगना जारी रहा, तो उसका शरीर अनजाने में ही उत्तेजित होने लगा। नींद की धुंध में उसे लगा कि उसका पति उसके साथ प्यार कर रहा है।
 
मीरा ने नींद ही नींद में अपना मुँह हल्का सा खोला और बेहद मदहोश आवाज़ में फुसफुसाई, "सरताज... सोने दो न..."
 
मीरा के मुँह खोलते ही शेर को जैसे मुँह माँगी मुराद मिल गई। उसने एक पल की भी देरी किए बिना अपने मोटे होठों को मीरा के मुँह पर कसकर चिपका दिया और अपनी जीभ सीधे मीरा के मुँह के अंदर घुसा दी। वह मीरा की जीभ और मुँह के अंदरूनी हिस्से को चाटने और चूसने लगा।
 
नींद और जिस्मानी सुरूर के चक्रव्यूह में फँसी मीरा इसे सरताज का प्यार समझकर इस चुंबन का सकारात्मक जवाब देने लगी। उसके गले से हल्की-हल्की कामुक आहें और सिसकियाँ निकलने लगीं— "उम्मम्म्म... आह्ह्..."
 
वह नींद में ही शेर की जीभ का साथ देने लगी और अपनी जीभ से उसकी जीभ को लपेटने लगी।
 
अब शेर की जीभ पूरी तरह मीरा के मुँह के अंदर गहराई तक समा चुकी थी। दोनों की लार आपस में मिल रही थी। इस सकारात्मक प्रतिसाद से शेर का हौसला सातवें आसमान पर पहुँच गया। उसने अपने हाथों का दबाव बढ़ाया और मीरा के दोनों नंगे, मम्मों को और ज़्यादा कसकर भींचना शुरू कर दिया।
 
मीरा अब भी नींद और गहरी उत्तेजना के भंवर में फँसी हुई थी। उसे ज़रा भी अहसास नहीं था कि जिसे वह अपना पति सरताज समझकर चुंबन दे रही है और जिसकी छुअन पर सिसकियाँ भर रही है, वह उसका नौकर शेर है—और साइड टेबल पर रखा मोबाइल इस पूरे धोखे और गहरी वासना के खेल का एक-एक पल खामोशी से रिकॉर्ड कर रहा था।
 
लगभग दो मिनट तक मीरा के होठों का रसीला रस पीने और उसकी जीभ को चूसने के बाद, शेर आहिस्ता से पीछे हटा। वह जानता था कि अगर ज़्यादा देर तक मुँह में जीभ घुसाई रखी, तो दम घुटने या ज़्यादा हलचल से मीरा की नींद टूट सकती थी, और वह इस सुनहरे मौके को इतनी जल्दी गँवाना नहीं चाहता था।
 
वह बिस्तर से नीचे उतरा और उसने बिना कोई आहट किए झटके से अपनी धोती और बाकी के सारे कपड़े उतारकर ज़मीन पर फेंक दिए। अब वह पूरी तरह नंगा हो चुका था, और उसका कड़क, तना हुआ लंड उसके बदन के आगे फन फैलाए खड़ा था।
 
शेर घुटनों के बल खिसकते हुए वापस बेड पर मीरा के चेहरे के पास आया। उसने अपने कड़क लंड को पकड़ा और उसकी लाल सुपारी को मीरा के गुलाबी, नंगे होठों पर धीरे-धीरे रगड़ना शुरू कर दिया।
 
मीरा के होठों की गर्माहट से शेर के लंड के मुहाने से चिपचिपा पानी (प्री-कम) रिसने लगा, जो सीधे मीरा के निचले और ऊपरी होठों पर गुदगुदाते हुए छपने लगा।
 
शेर (कामुक उन्माद में आँखें मूँदकर, मन ही मन नीचता से हँसते हुए फुसफुसाया): "ज़िंदगी भर बड़े नखरे दिखाए तूने रांड! जब भी तेरे पास आता था, तो मुँह फेर लेती थी... कहती थी कि 'होठों को मत छूना'। आज देख... तेरा यह नौकर अपना तना हुआ लंड सीधे तेरे होठों और मुँह पर घिस रहा है! और सबसे मज़े की बात तो यह है कि साइड में रखा यह कैमरा तेरी इस ज़िल्लत की एक-एक तस्वीर और वीडियो रिकॉर्ड कर रहा है!"
 
मीरा नींद की आगोश में अपने होठों पर उस अजीब सी गर्माहट और चिपचिपाहट को महसूस करके हल्की सी सिसकी ले रही थी, जबकि शेर अपने लंड की सुपारी को उसके पूरे चेहरे और होठों पर रगड़े जा रहा था।
 
शेर धीरे से उठा और घुटनों के बल खिसकते हुए वापस मीरा की जाँघों के पास आ गया।
 
उसने बहुत ही सावधानी और नरमी से मीरा की काली पैंटी के किनारों को पकड़ा और उसे धीरे-धीरे खींचकर उसकी टाँगों से पूरी तरह बाहर निकाल दिया। अब मीरा की साफ़ और सुडौल योनि बिल्कुल बेपर्दा होकर शेर की नज़रों के सामने थी। उस पर कामुक रस की एक हल्की सी चमकीली बूंद छलक रही थी—शायद नींद में ही शेर की छुअन और चुंबन का ही नतीजा था।
 
जैसे ही शेर ने अपना मुँह झुकाकर अपनी गर्म जीभ से उस नाज़ुक जगह को हल्का सा छुआ, नींद में डूबी मीरा के मुँह से एक तीखी सिसकी निकल गई— "उफ़्फ़..."
 
शेर तुरंत रुक गया और अपनी साँसें थाम लीं। आज उसका मकसद मीरा को जगाना बिल्कुल नहीं था।
 
जब मीरा फिर से गहरी साँसें लेने लगी, तो शेर ने आहिस्ता से अपने हाथों को ऊपर बढ़ाया और उसकी सफ़ेद स्लिप को धीरे-धीरे कंधों और सीने से नीचे सरकाना शुरू किया। कुछ ही पलों में उसने उस स्लिप को भी मीरा के जिस्म से अलग कर के एक तरफ फेंक दिया।
 
अब मीरा बिना किसी कपड़े के, पूरी तरह नंगी बिस्तर पर सो रही थी। उसके बड़े-बड़े मम्मे, पतली कमर और गोरी चिकनी चूत धुंधली रोशनी में जगमगा रहे थे। और उसके ठीक पास खड़ा था नंगा शेर—अपने  सख्त और तने हुए लंड के साथ।
 
साइड टेबल पर रखा मोबाइल इस पूरे नज़ारे को बिना रुके रिकॉर्ड कर रहा था।
 
शेर (अपने कड़क लंड पर हाथ फेरते हुए, कैमरे की तरफ देखकर मुस्कान के साथ मन ही मन बड़बड़ाया): "बस... खेल खत्म! आज की रात के इस एक वीडियो के बाद यह मीरा और इसका वो पति सरताज, दोनों हमेशा-हमेशा के लिए मेरी मुट्ठी में हैं! अब यह मालकिन अपनी इज़्ज़त बचाने के लिए इस शेर के इशारों पर नाचेगी!"
 
शेर ने बिस्तर पर पड़ी चादर उठाई और उसे अपने और मीरा के ऊपर इस तरह ढँक लिया कि दोनों के जिस्म चादर के भीतर छुप गए। चादर के नीचे छाए उस अंधियारे में अब शेर का भारी, गठीला और पूरी तरह से नंगा बदन मीरा के बेहद कोमल, गोरे और बेपर्दा जिस्म के साथ चिपका हुआ था। दोनों की नंगी त्वचा जब आपस में टकराई, तो चादर के भीतर एक अजीब सी तपन और सरगर्मी तैर गई।
 
शेर ने बिना कोई आवाज़ किए, अपना एक भारी हाथ मीरा के सर के नीचे से निकाला और उसकी पतली कमर पर अपनी उंगलियों की पकड़ कसते हुए उसे धीरे से खींचकर अपनी तरफ़ कर लिया। मीरा, जो अब भी गहरी नींद की आगोश में अचेत पड़ी थी, इस छुअन को पहचान न सकी। आधे-अधूरे ख्वाब और मदहोशी के आलम में उसने यही समझा कि यह उसका पति सरताज है जो रात की ख़ामोशी में उसे प्यार से अपनी बाहों में समेट रहा है।
 
इसी मुग़ालते में मीरा की तरफ़ से कोई विरोध नहीं हुआ; बल्कि उसने नींद में ही एक हल्की सी सिसकारी भरी और सरताज का अहसास समझकर शेर के नंगे, चौड़े सीने के और भी करीब आ गई। उसने अपना चेहरा शेर के गरम सीने में छुपा लिया और उसकी जांघों से अपना जिस्म सटा दिया।
 
शेर ने झुककर मीरा की नाजुक, गोरी गर्दन को सहलाते हुए धीरे-धीरे अपनी जीभ से चाटना शुरू कर दिया। उसकी गर्दन की महक और भीगी रंगत देखकर शेर का मन हुआ कि वह उसकी त्वचा पर एक गहरा 'लव बाइट' दे दे और अपने निशान छोड़ दे, लेकिन वह नहीं चाहता था कि किसी भी तरह मीरा की नींद टूटे और यह हसीन पल हाथ से निकल जाए। इसलिए वह अपनी हवस पर काबू रखते हुए बिल्कुल नरमी से अपनी गीली जीभ उसकी गर्दन पर फेरता रहा।
 
उसकी चौड़ी, काली जांघ मीरा की दोनों गोरी, नंगी जांघों के बीच जमी हुई थी और वह धीरे-धीरे अपनी रंगत को मीरा की संवेदनशीलता के साथ रगड़ रहा था। इस रगड़ से उठती तपन पूरे बिस्तर में फैल रही थी। वहीं शेर का एक भारी हाथ मीरा के भरे हुए नंगे स्तन पर जमा हुआ था, जिसे वह बेहद आहिस्ता-आहिस्ता सहला रहा था, दबा रहा था।
 
चादर के उस तंग और गरम अँधेरे में मीरा नींद की गहरी मदहोशी में डूबती जा रही थी। जिस्म में उठती इस अनचाही मिठास और छुअन से उसके हलक से एक हल्की सी कराह निकल आई।
 
इस स्पर्श को महसूस करते ही मीरा बेसुध होकर बोली, "सरताज... यह क्या कर रहे हो? "
 
शेर ने बेहद सावधानी और नरमी से मीरा के नरम, गोरे हाथ को पकड़ा और उसे धीरे से खींचते हुए सीधे अपने अकड़े हुए भारी लिंग पर रख दिया। उसका लिंग सात इंच लंबा और सामान्य से दुगना मोटा था। अंधेरे चादर के नीचे, उसकी गहरी काली रंगत और मीरा की गोरी-चिट्टी उंगलियों का संगम एक अजीब ही दृश्य बना रहा था।
 
मीरा, जो गहरी नींद की मदहोशी में डूब चुकी थी, उसे अब भी यही लग रहा था कि यह उसका पति सरताज है। उसने नींद के खुमार में ही अपनी उंगलियों की पकड़ उस गरम और सख्त अंग पर कस ली और अनजाने में ही उसे सहलाना शुरू कर दिया। उसकी गोरी, सुडौल उंगलियां उस काले, भारी और नसों से भरे अंग के इर्द-गिर्द लिपटकर धीरे-धीरे ऊपर-नीचे रेंग रही थीं।
 
शेर ने मीरा के हाथ के ऊपर अपना भारी हाथ जमा रखा था और उसके हाथों की हरकत को दिशा देते हुए बेहद धीमी गति से हिचकोले दे रहा था। मीरा के हाथ का स्पर्श इतना कोमल और गरम था कि शेर की आँखों में एक अजीब सा वहशीपन उतर आया। उसे एक असीम, अकल्पनीय आनंद का अहसास हो रहा था। हर एक सहलाहट के साथ उसका लिंग और अधिक अकड़कर सख्त होता जा रहा था, मानो उसकी नसें फटने को तैयार हों।
 
शेर का सांस लेना भारी हो गया। चादर के भीतर उठती उस गरम सांस और जिस्मानी तपन के बीच, मीरा नींद में ही अपनी पतली कमर को थोड़ा सा ऐंठती हुई शेर के और करीब आ गई, जबकि उसका हाथ बिना रुके उस कठोर अंग की गर्माहट को मापता जा रहा था। शेर अब अपनी हवस के चरम पर पहुँच रहा था, और उसका पूरा जिस्म उस बेकाबू मिठास से कांपने लगा था।
 
वह बहुत आहिस्ता से रेंगते हुए मीरा के नंगे बदन के ऊपर आ गया। उसने अपना पूरा वजन मीरा के नाजुक शरीर पर नहीं डाला, बल्कि अपने हाथों और कोहनियों के सहारे खुद को थोड़ा ऊपर उठाए रखा। उसकी चौड़ी छाती मीरा के दोनों बड़े-बड़े, गर्म मम्मों से सटकर रगड़ खा रही थी। उसने अपना चेहरा चादर के अंधेरे में पूरी तरह छुपा रखा था ताकि अगर मीरा अचानक जाग भी जाए, तो नींद के खुमार में यही समझे कि उसका पति सरताज ही उसके ऊपर लेटा हुआ है।
 
शेर ने अपने कांपते हाथों से अपनी कमर को थोड़ा नीचे खिसकाया और अपने कड़क लंड की सुपारी को मीरा की भीगी हुई, रसीली योनि के मुहाने पर टिकाकर धीरे-धीरे रगड़ना शुरू कर दिया।
 
फिर, एक गहरी सांस लेते हुए, उसने अपनी कमर का हल्का सा दबाव बनाया और लंड को आहिस्ता-आहिस्ता मीरा की टाइट चूत के अंदर उतारना शुरू किया।
 
मीरा की बेहद टाइट और मखमली चूत शेर के मोटे लंड को धीरे-धीरे अपने भीतर निगलने लगी। उस तंग और गर्म गहराई का अहसास होते ही शेर के रोएँ खड़े हो गए।
 
इस स्पर्श को महसूस करते ही मीरा बेसुध होकर बोली, "सरताज... यह क्या कर रहे हो? अभी थोड़ी देर पहले ही तो किया था ना... प्लीज, अब मेरा मूड नहीं है।"
 
शेर ने मीरा की बात सुनकर मन ही मन भारी गाली दी—"साली! सरताज को दे सकती है, बस मेरे को ही देने में इसको आफ़त आती है... 'मूड नहीं है'! साली नखरे ज़्यादा करती है।"
 
उसने मीरा की फरियाद पर ज़रा भी ध्यान नहीं दिया
 
यह वही लम्हा था जिसके सपने वह सालों से देख रहा था—!
 
शेर (कामुक सुरूर में आँखें मूँदकर, चादर के अंदर मन ही मन हांफते हुए बड़बड़ाया): "उफ़्फ़ मादरचोद... क्या गर्मी है! क्या कसाव है इस चूत में! आज सालों की हसरत पूरी हो गई... मालकिन आज तेरी यह अकड़ हमेशा के लिए मिट गई!"
 
धीमे-धीमे, बिना कोई झटका दिए, शेर अपनी कमर को ढकेलता गया और उसका पूरा का पूरा सख्त लंड मीरा की योनि की गहराइयों में समा गया।
 
नींद की आगोश में डूबी मीरा ने अपने निचले हिस्से में उस भारी खिंचाव और फैलाव को महसूस करके एक लंबी, कामुक सिसकी भरी— "उफ़्फ़... सरताज... श्श्श्..."
 
उधर साइड टेबल पर रखा मोबाइल चादर के बाहर से हिलती हुई आकृतियों और सिसकियों की आवाज़ों को खामोशी से रिकॉर्ड किए जा रहा था, जबकि चादर के अंदर शेर अपनी ज़िंदगी का सबसे बड़ा घिनौना सपना पूरा कर रहा था।
 
चादर के अंदर शेर का उत्साह अपने चरम पर था। जैसे ही उसने पहला ज़ोरदार झटका मारने के लिए अपने लंड को थोड़ा बाहर खींचा ताकि पूरी ताकत से वापस अंदर धकेल सके, उसकी किस्मत ने उसका साथ छोड़ दिया।
 
सालों की दबा कर रखी गई हवस, मीरा के नंगे जिस्म का नज़ारा और उसकी टाइट चूत की गर्माहट का पहला स्पर्श ही शेर के लिए बर्दाश्त से बाहर साबित हुआ। अभी वह ढोंग पूरा कर भी नहीं पाया था कि उसके तने हुए लंड में एक तेज़ झनझनाहट उठी और वह बेकाबू होकर तड़पने लगा।
 
बिना अंदर गए ही, उसका वीर्य फव्वारे की तरह छूटकर मीरा की नंगी चूत के बाहरी हिस्से और जाँघों पर बिखर गया।
 
शेर (कामुक बौखलाहट और खौफ में घबराकर मन ही मन चीखा): "अबे शिट... शिट! अबे रुक जा मादरचोद! अभी नहीं... थोड़ा सब्र कर भोसड़ी के!"
 
लेकिन सब बेकार साबित हुआ। कुछ ही सेकंडों में उसका कड़क लंड पूरी तरह ढीला पड़कर किसी मरे हुए केंचुए की तरह लटक गया।
 
नींद के खुमार में डूबी मीरा को कुछ भी खास अहसास नहीं हुआ; वह वैसे ही बेखबर सोती रही।
 
शेर अपनी इस शर्मनाक परफॉर्मेंस पर बुरी तरह खीझ उठा। उसे खुद पर इतनी ग्लानि और गुस्सा आ रहा था जिसकी कोई सीमा नहीं थी। उसकी हालत किसी नौसिखिया टीनेजर से भी बदतर साबित हुई थी जो पहली बार में ही ढेर हो जाता है।
 
शेर (घोर निराशा और गुस्से में खुद को मन ही मन गालियाँ देते हुए): "अबे चूतिया है क्या बे तू शेर?! साला भड़वा... इतनी मेहनत करके यहाँ तक पहुँचा, सब कुछ सेट था, और तूने दो सेकंड में ही पूरा खेल गुड़-गोबर कर दिया! थू है तेरी इस मर्दानगी पर!"
 
उसने भारी निराशा के साथ खुद को मीरा के ऊपर से उठाया। नीचे गिरी अपनी धोती उठाई और मीरा की चूत और जाँघों पर बिखरे अपने वीर्य को बहुत संभालकर पोंछा, ताकि सुबह कोई सबूत न छूटे।
 
फिर उसने डरते-डरते और खुद को कोसते हुए, आहिस्ता-आहिस्ता मीरा को वापस वही काली पैंटी पहनाई और उसकी सफेद स्लिप को खींचकर उसके नंगे मम्मों को ढक दिया। उसने चादर को भी ठीक वैसे ही मीरा के बदन पर उड़ा दिया जैसा कि उसने पहले देखा था।
 
वह माहौल को बिल्कुल वैसा ही छोड़ देना चाहता था जैसा उसके आने से पहले था, ताकि मीरा को ज़रा सा भी शक न हो।
 
उसने साइड टेबल से अपना मोबाइल उठाया, रिकॉर्डिंग बंद की और पसीने से तर-बतर होकर दबे पाँव कमरे से बाहर निकल गया। उसकी बरसों पुरानी हसरत हाथ आते-आते भी अधूरी रह गई थी—सब कुछ होने के बाद भी वह खाली हाथ लौट आया था।
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Naya Mod — 2

Saamne Meera akele, befikr hokar so rahi thi. Chaadar ke neeche se uski gori, nangi taangon ka kuch hissa baahar jhaank raha tha aur safed slip mein uski chhati ki dhalaan saaf jhalak rahi thi.

Sher (light ki roshni mein Meera ke nange jism ka deedaar karte): "Abe teri to... kya maal so raha hai be! Saali safed kapde mein to poori pari lag rahi hai! Sahab nikal gaya aur yeh rand bekhabar hokar padi hai... aaj to is andhere ka poora fayda uthaunga!"

Sher ne dabe paanv bistar ke bilkul paas pahunchkar apni saansen rook liin. Usne bahut hi aahista se, bina koi aahat kiye, Meera ke badan par se chaadar ko peeche khisakaana shuru kar diya.

Jaise-jaise chaadar hatti gayi, mobile ki dhundhli roshni mein Meera ka kaamuk roop Sher ki aankhon ke saamne tha . Sher ki aankhen phati ki phati rah gayiin, uska gala pyaas ke maare sookhne laga.

Saamne ka nazaara uske liye kisi sapne se kam nahi tha—Meera ki dono gori, chikni aur nangi taangen. Uski safed slip uske hips tak uthi hui thi, aur uski nangi jaanghon ke beech phansi hui vah chhoti si kaali panty saaf chamak rahi thi.

Uupar se, slip ka gala itna gahra aur dheela tha ki uske dono bade-bade, bhare-poore mamme aadhe se zyaada baahar jhalak rahe the. Neend mein dooba uska nooraani, bekhabar chehra is poore mahaul ko aur bhi kaatilaana bana raha tha.

Sher (kaamuk unmaad mein aankhen phaade, man hi man haanfte hue badbadaaya): "Abe maadarchod... kya kamaal ki cheez so rahi hai! Kasam se, aisi gori sangat aur aise sudaul mamme to kisi heroine ke bhi nahi honge! Saali bekhabar so rahi hai, aur yahaan mera lund pant phaadne ko taiyaar hai!"

Kuch palon tak to Sher bas apni nigahon se Meera ke us nange jism ko peeta raha. Phir achanak uske dimaag mein khayaal aaya. Vah jaanta tha ki aisa mauka baar-baar nahi meelta aur yeh nazaara hamesha ke liye uske paas hona chahiye.

Sher ne jeb se apna mobile nikaala, uska camera on kiya aur video recording chaalu kar di.

Vah mobile ko Meera ke chehre se lekar uski aadhi baahar chhati, uski patli kamar, kaali panty aur uski poori nangi jaanghon par dheere-dheere ghumaane laga. Usne har kon se Meera ke us bekhabar, aadhe-nange jism ka close-up video banaana shuru kar diya.

Sher (video banaate hue, muunh mein laar bharte hue kameenepan se muskuraaya): "Record kar le Sher... record kar le! Yeh maal to zindagi bhar mutth maarne ke kaam aayega! Aur agar kabhi yeh maalkin zyaada nakhre dikhaayegi, to yahi video iske muunh par maarunga... phir dekhna kaise seedhi meri jaanghon ke beech aakar giregi!"

Sher ne badi hoshiyaari se mobile ko side table par kitaabon ke sahaare is tarah tikaakar khada kar diya ki camera ka poora focus bistar par so rahi Meera aur uski nangi jaanghon par rahe. Recording chaalu thi.

Ab befikr hokar Sher dabe paanv bistar par chadha aur Meera ki phaili hui nangi jaanghon ke paas ghutnon ke bal baith gaya. Uska dil zor-zor se dhadak raha tha—ek taraf pakdaane ka khauf tha, to doosri taraf is bekhabar gore jism ko chhoone ka bhayaanak suroor.

Usne kaampte, haath ko aage badhaaya aur darte-darte apni uungliyan Meera ki nangi jaangh par tika diin.

Uungliyon ka sparsh hote hi Sher ke poore wajood mein current daud gaya.

Sher (man hi man kaamukta mein paagal hote hue haanfne laga): "Ufff maadarchod... kya cheez hai yeh! Bilkul makkhan... ekdam makhmali! Haath to saala aise fisal raha hai jaise barf par koi tel laga diya ho!"

Meera ki chikni, gori tvacha ki garmaahat aur uska reshmeepan Sher ke haathon mein utar raha tha. Sher ne dheere-dheere apni hatheli ko uski jaanghon par uupar se neeche aur neeche se uupar pheurna shuru kar diya. Uski uungliyan Meera ki kaali panty ke kinaaron ko chhooti hui nikal rahi theen.

Is chhuan aur nazaare ka asar yeh hua ki Sher ki lungi ke andar uska lund sakht hokar akad gaya aur kapde ko phaadkar baahar aane ko betaab hone laga.

Udhar, side table par rakha mobile is poore ghinowne aur kaamuk drishya ko khaamoshi se apne camera mein record kar raha tha—Meera ka bekhabar nooraani chehra, uski safed slip mein se jhaankte mamme, uski gori jaanghon par rengta Sher ka kaala haath, aur lungi mein tana hua uska sakht lund.

Sher (camera ki taraf ek pal ko dekhkar kameenepan se muskuraaya): "Record ho raha hai sab... poora saboot ban raha hai Meera rani ! Ab to tum chaahkar bhi is Sher ke changul se nahi bhaag sakti!"

Jaanghon par haath pheerte-pheerte Sher ki havas aur badhti chali gayi. Vah apna muunh neeche le gaya aur apne hotHon ko Meera ki gori, makhmali jaanghon par tika diya.

Vah bahut aahista-aahista apni jeebh se uski jaanghon ki chikni tvacha ko chaatne aur choomne laga. Uski garm saansen aur jeebh ka geelapan Meera ke badan ko chhoo raha tha.

Tabhi achanak neend ki aagosh mein doobi Meera halki si kunmunaai aur uski taang mein maamooli si halchal hui.

Sher jhatke se wahi rook gaya. Usne apni saansen thaam liin aur ektak Meera ke chehre ko dekhne laga. Aisa nahi tha ki vah Meera se darta tha, balki vah jaanta tha ki agar Meera jaag gayi to shor machaayegi aur yeh maza wahi khatam ho jaayega.

Vah to bas yahi chahta tha ki maalkin aise hi bekhabar sooti rahe aur vah bina kisi rukaawat ke uske is kayaamat jism se khilvaad karta rahe, aur yeh saara nazaara mobile mein record hota rahe.

Jab Meera phir se gahri saansen leene lagi aur shaant ho gayi, to Sher ke hotHon par ek muskaan tair gayi.

Vah rengte hue aur uupar khisaka aur Meera ki dono jaanghon ke jod par pahunch gaya, jahaan uski kaali panty phansi hui thi. Usne bahut hi saavdhaani aur narmi se apne kaampte haathon se panty ko pakda aur usse dheere-dheere neeche ki taraf khisakaana shuru kar diya.

Jaise-jaise kaali panty neeche sarkati gayi, mobile ki dhundhli roshni mein Meera ki bilkul saaf, chikni aur sundar choot beparda hone lagi.

Sher (us beedaag, saaf-suthri choot ko saamne dekhkar aankhen phaade, man hi man havas mein buri tarah haanfne laga): "Ufff maadarchod... kya kamaal ka nazaara hai! Saala aisi saaf aur makkhan jaisi choot saamne ho to koi bhi machal jaaye! Aaj to is camera mein aisi-aisi cheez record hoogi ki maalkin zindagi bhar is Sher ki uungliyon par naachegi!"

Camera mein laal dot ab bhi khaamoshi se jhapakk raha tha aur Sher ki neech harkat ka ek-ek pal record ho raha tha.

Sher ka man to baar-baar machal raha tha ki seedhe apni jeebh Meera ki us saaf choot par tika de, lekin vah jaanta tha ki neeche ka hissa bahut sanvedansheel hota hai. Zara si jeebh ki chhuan se Meera ki neend toot sakti thi aur saara khel bigad sakta tha.

Isliye usne pehle uupar ke hisse ko nishaana banaane ka faisla kiya.

Vah bahut aahista se khisakkar Meera ke chehre ke paas baitha. Usne apne haathon ko aage badhaaya aur uski safed slip ko dheere-dheere neeche ki taraf dhakel diya. Slip ke neeche sarkate hi Meera ke dono bhare-poore, gore mamme poori tarah nange hokar baahar aa gaye.

Sher ne bahut hi halke haathon se, bina zyaada dabaav diye, un mammon ko sahlaana shuru kiya. Uski uungliyan Meera ke makhmali mammon aur kadak hote nipplon par reng rahi theen.

Phir usne apna muunh neeche jhukaaya aur Meera ke chehre ko bade gaur se dekha. Uske gulaabi, suraahidaar hontH... wahi hontH jahaan Meera ne usko choomne nahi diya tha.

Sher (kameenepan se muskuraate hue, man hi man badbadaaya): "Bahut nakhre dikhaa rahi thi us din ki hotHon ko mat chhoona Sher... aaj dekh, tere unhi hotHon ka ras kaise peeta hoon, aur too bekhabar sooti rah jaayegi!"

Sher ne badi nazaakat se apne mote, hotHon ko Meera ke naajuk hotHon par tika diya. Vah bahut halke-halke se Meera ke uupari aur neechle hontH ko apne muunh mein bharkar choosne laga.

Uski ek hatheli Meera ke nange mamme par bahut aahista se ghoom rahi thi, aur uske hontH Meera ke raseele hotHon ka maza le rahe the. Udhar side table par rakha mobile is poore ghinowne, kaamuk aur chori-chhipa kiye ja rahe kiss ko khaamoshi se camera mein kaid kar raha tha.

Neend ke aagosh mein so rahi Meera ke bekhabar badan par jab Sher ki garm saansen, hotHon ki chumban aur mammon par haathon ka rengna jaari raha, to uska shareer anjaane mein hi uttejit hone laga. Neend ki dhundh mein usse laga ki uska pati uske saath pyaar kar raha hai.

Meera ne neend hi neend mein apna muunh halka sa khoola aur behad madhosh aawaz mein phusphusaai, "Sartaj... soone do na..."

Meera ke muunh khoolte hi Sher ko jaise muunh maangi muraad mil gayi. Usne ek pal ki bhi deri kiye bina apne mote hotHon ko Meera ke muunh par kaskar chipka diya aur apni jeebh seedhe Meera ke muunh ke andar ghusa di. Vah Meera ki jeebh aur muunh ke andarooni hisse ko chaatne aur choosne laga.

Neend aur jismani suroor ke chakraavyooh mein phansi Meera isse Sartaj ka pyaar samajhkar is chumban ka saakaaraatmak jawaab dene lagi. Uske gale se halki-halki kaamuk aahen aur siskiyan nikalne lagiin— "Ummmmm... aahh..."

Vah neend mein hi Sher ki jeebh ka saath dene lagi aur apni jeebh se uski jeebh ko lapetne lagi.

Ab Sher ki jeebh poori tarah Meera ke muunh ke andar gahrai tak sama chuki thi. Dono ki laar aapash mein mil rahi thi. Is saakaaraatmak pratisaad se Sher ka hausla saatwen aasmaan par pahunch gaya. Usne apne haathon ka dabaav badhaaya aur Meera ke dono nange, mammon ko aur zyaada kaskar bheenchna shuru kar diya.

Meera ab bhi neend aur gahri uttejna ke bhanwar mein phansi hui thi. Usse zara bhi ehsaas nahi tha ki jisse vah apna pati Sartaj samajhkar chumban de rahi hai aur jiski chhuan par siskiyan bhar rahi hai, vah uska naukar Sher hai—aur side table par rakha mobile is poore dhokhe aur gahri vaasna ke khel ka ek-ek pal khaamoshi se record kar raha tha.

Lagbhag do minute tak Meera ke hotHon ka raseela ras peene aur uski jeebh ko choosne ke baad, Sher aahista se peeche hata. Vah jaanta tha ki agar zyaada deer tak muunh mein jeebh ghusaayi rakhi, to dam ghutne ya zyaada halchal se Meera ki neend toot sakti thi, aur vah is sunhare mauke ko itni jaldi ganwaana nahi chahta tha.

Vah bistar se neeche utra aur usne bina koi aahat kiye jhatke se apni dhoti aur baaki ke saare kapde utaarkar zameen par pheenk diye. Ab vah poori tarah nanga ho chuka tha, aur uska kadak, tana hua lund uske badan ke aage phan phailaaye khada tha.

Sher ghutnon ke bal khisakte hue waapas bed par Meera ke chehre ke paas aaya. Usne apne kadak lund ko pakda aur uski laal supaari ko Meera ke gulaabi, nange hotHon par dheere-dheere ragadna shuru kar diya.

Meera ke hotHon ki garmaahat se Sher ke lund ke muhaane se chipchipa paani (pre-cum) risne laga, jo seedhe Meera ke neechle aur uupari hotHon par gudgudaate hue chhapne laga.

Sher (kaamuk unmaad mein aankhen moondehue, man hi man neechta se hanste hue phusphusaaya): "Zindagi bhar bade nakhre dikhaaye toone rand! Jab bhi tere paas aata tha, to muunh pheur leeti thi... kahti thi ki 'hotHon ko mat chhoona Sher'. Aaj dekh... tera yeh naukar apna tana hua lund seedhe tere hotHon aur muunh par ghis raha hai! Aur sabse maze ki baat to yeh hai ki side mein rakha yeh camera teri is zillat ki ek-ek tasveer aur video record kar raha hai!"

Meera neend ki aagosh mein apne hotHon par us ajeeb si garmaahat aur chipchipahat ko mehsus karke halki si siski le rahi thi, jabki Sher apne lund ki supaari ko uske poore chehre aur hotHon par ragade ja raha tha.

Sher dheere se utha aur ghutnon ke bal khisakte hue waapas Meera ki jaanghon ke paas aa gaya.

Usne bahut hi saavdhaani aur narmi se Meera ki kaali panty ke kinaaron ko pakda aur usse dheere-dheere kheenchkar uski taangon se poori tarah baahar nikaal diya. Ab Meera ki saaf aur sudaul yoni bilkul beparda hokar Sher ki nazaron ke saamne thi. Us par kaamuk ras ki ek halki si chamkeeli boond chhalak rahi thi—shayad neend mein hi Sher ki chhuan aur chumban ka hi nateeja tha.

Jaise hi Sher ne apna muunh jhukaakar apni garm jeebh se us naajuk jagah ko halka sa chhua, neend mein doobi Meera ke muunh se ek teekhi siski nikal gayi— "Ufff..."

Sher turant rook gaya aur apni saansen thaam liin. Aaj uska maqsad Meera ko jaagaana bilkul nahi tha.

Jab Meera phir se gahri saansen leene lagi, to Sher ne aahista se apne haathon ko uupar badhaaya aur uski safed slip ko dheere-dheere kandhon aur seene se neeche sarkana shuru kiya. Kuch hi palon mein usne us slip ko bhi Meera ke jism se alag kar ke ek taraf pheenk diya.

Ab Meera bina kisi kapde ke, poori tarah nangi bistar par so rahi thi. Uske bade-bade mamme, patli kamar aur gori chikni choot dhundhli roshni mein jagmaga rahe the. Aur uske theek paas khada tha nanga Sher—apne sakht aur tane hue lund ke saath.

Side table par rakha mobile is poore nazaare ko bina ruke record kar raha tha.

Sher (apne kadak lund par haath pheerte hue, camera ki taraf dekhkar muskaan ke saath man hi man badbadaaya): "Bas... khel khatam! Aaj ki raat ke is ek video ke baad yeh Meera aur iska wo pati Sartaj, dono hamesha-hamesha ke liye meri mutthi mein hain! Ab yeh maalkin apni izzat bachaane ke liye is Sher ke ishaaron par naachegi!"

Sher ne bistar par padi chaadar uthaayi aur usse apne aur Meera ke uupar is tarah dhank liya ki dono ke jism chaadar ke bheetar chhup gaye. Chaadar ke neeche chhaaye us andhiyaare mein ab Sher ka bhaari, gathila aur poori tarah se nanga badan Meera ke behad komal, gore aur beparda jism ke saath chipka hua tha. Dono ki nangi tvacha jab aapash mein takraayi, to chaadar ke bheetar ek ajeeb si tapan aur sargarmi tair gayi.

Sher ne bina koi aawaz kiye, apna ek bhaari haath Meera ke sir ke neeche se nikaala aur uski patli kamar par apni uungliyon ki pakad kaste hue usse dheere se kheenchkar apni taraf pheur liya. Meera, jo ab bhi gahri neend ki aagosh mein achet padi thi, is chhuan ko pehchaan na saki. Aadhe-adhoore khvaab aur madhoshi ke aalam mein usne yahi samajha ki yeh uska pati Sartaj hai jo raat ki khaamoshi mein usse pyaar se apni baahon mein samet raha hai.

Isi mugaalte mein Meera ki taraf pheur koi virodh nahi hua; balki usne neend mein hi ek halki si siskaari bhari aur Sartaj ka ehsaas samajhkar Sher ke nange, chaude seene ke aur bhi kareeb aa gayi. Usne apna chehra Sher ke garm seene mein chhipa liya aur uski jaanghon se apna jism sata diya.

Sher ne jhuk-kar Meera ki naajuk, gori gardan ko sahlaate hue dheere-dheere apni jeebh se chaatna shuru kar diya. Uski gardan ki mahak aur bheegi sangat dekhkar Sher ka man hua ki vah uski tvacha par ek gahra 'love bite' de de aur apne nishaan chhod de, lekin vah nahi chahta tha ki kisi bhi tarah Meera ki neend toot-te aur yeh haseen pal haath se nikal jaaye. Isliye vah apni havas par kaabu rakhte hue bilkul narmi se apni geeli jeebh uski gardan par pheerta raha.

Uski chaudi, kaali jaangh Meera ki dono gori, nangi jaanghon ke beech jami hui thi aur vah dheere-dheere apni sangat ko Meera ki sanvedansheelata ke saath ragad raha tha. Is ragad se uthti tapan poore bistar mein phail rahi thi. Wahi Sher ka ek bhaari haath Meera ke bhare hue nange stan par jama hua tha, jisse vah behad aahista-aahista sahla raha tha, daba raha tha.

Chaadar ke us tang aur garm andhere mein Meera neend ki gahri madhoshi mein doobti ja rahi thi. Jism mein uthti is anchaahi meethas aur chhuan se uske halak se ek halki si karaah nikal aai.

Is sparsh ko mehsus karte hi Meera besudh hokar booli, "Sartaj... yeh kya kar rahe ho? "

Sher ne behad saavdhaani aur narmi se Meera ke naram, gore haath ko pakda aur usse dheere se kheenchte hue seedhe apne akde hue bhaari ling par rakh diya. Uska ling saat inch lamba aur saamaanya se dugna mota tha. Andhere chaadar ke neeche, uski gahri kaali sangat aur Meera ki gori-chitti uungliyon ka sangam ek ajeeb hi drishya bana raha tha.

Meera, jo gahri neend ki madhoshi mein doob chuki thi, usse ab bhi yahi lag raha tha ki yeh uska pati Sartaj hai. Usne neend ke khumaar mein hi apni uungliyon ki pakad us garm aur sakht ang par kas li aur anjaane mein hi usse sahlaana shuru kar diya. Uski gori, sudaul uungliyan us kaale, bhaari aur nason se bhare ang ke ird-gird lipatkar dheere-dheere uupar-neeche reng rahi theen.

Sher ne Meera ke haath ke uupar apna bhaari haath jama rakha tha aur uske haathon ki harkat ko disha dete hue behad dheemi gati se hichkole de raha tha. Meera ke haath ka sparsh itna komal aur garm tha ki Sher ki aankhon mein ek ajeeb sa vahshipan utar aaya. Usse ek aseem, akalpaneey aanand ka ehsaas ho raha tha. Har ek sahalaahat ke saath uska ling aur adhik akadkar sakht hota ja raha tha, maano uski nasen phatne ko taiyaar hon.

Sher ka saans lena bhaari ho gaya. Chaadar ke bheetar uthti us garm saans aur jismani tapan ke beech, Meera neend mein hi apni patli kamar ko thoda sa aainthti hui Sher ke aur kareeb aa gayi, jabki uska haath bina ruke us kathoor ang ki garmaahat ko maapta ja raha tha. Sher ab apni havas ke charam par pahunch raha tha, aur uska poora jism us bekaabu meethas se kaampne laga tha.

Vah bahut aahista se rengte hue Meera ke nange badan ke uupar aa gaya. Usne apna poora wazan Meera ke naajuk shareer par nahi daala, balki apne haathon aur kohniyon ke sahaare khud ko thoda uupar uthaaye rakha. Uski chaudi chhati Meera ke dono bade-bade, garm mammon se satkar ragad kha rahi thi. Usne apna chehra chaadar ke andhere mein poori tarah chhipaa rakha tha taaki agar Meera achanak jaag bhi jaaye, to neend ke khumaar mein yahi samajhe ki uska pati Sartaj hi uske uupar leta hua hai.

Sher ne apne kaampte haathon se apni kamar ko thoda neeche khisakaaya aur apne kadak lund ki supaari ko Meera ki bheegi hui, raseeli yoni ke muhaane par tikaakar dheere-dheere ragadna shuru kar diya.

Phir, ek gahri saans lete hue, usne apni kamar ka halka sa dabaav banaaya aur lund ko aahista-aahista Meera ki tight choot ke andar utaarna shuru kiya.

Meera ki behad tight aur makhmali choot Sher ke mote lund ko dheere-dheere apne bheetar nigalne lagi. Us tang aur garm gahrai ka ehsaas hote hi Sher ke roen khade ho gaye.

Is sparsh ko mehsus karte hi Meera besudh hokar booli, "Sartaj... yeh kya kar rahe ho? Abhi thodi deer pehle hi to kiya tha na... please, ab mera mood nahi hai."

Sher ne Meera ki baat sunkar man hi man bhaari gaali di—"Saali! Sartaj ko de sakti hai, bas mere ko hi dene mein isko aafat aati hai... 'mood nahi hai'! Saali nakhre zyaada karti hai."

Usne Meera ki phariyaad par zara bhi dhyaan nahi diya.

Yeh wahi lamha tha jiske sapne vah saalon se dekh raha tha—!

Sher (kaamuk suroor mein aankhen moondehue, chaadar ke andar man hi man haanfte hue badbadaaya): "Ufff maadarchod... kya garmi hai! Kya kasaav hai is choot mein! Aaj saalon ki hasrat poori ho gayi... maalkin aaj teri yeh akad hamesha ke liye mit gayi!"

Dheeme-dheeme, bina koi jhatka diye, Sher apni kamar ko dhakelta gaya aur uska poora ka poora sakht lund Meera ki yoni ki gahraiyon mein sama gaya.

Neend ki aagosh mein doobi Meera ne apne neechle hisse mein us bhaari khinchaav aur phailaav ko mehsus karke ek lambi, kaamuk siski bhari— "Ufff... Sartaj... shhh..."

Udhar side table par rakha mobile chaadar ke baahar se hilti hui aakritiyon aur siskiyon ki aawazon ko khaamoshi se record kiye ja raha tha, jabki chaadar ke andar Sher apni zindagi ka sabse bada ghinowna sapna poora kar raha tha.

Chaadar ke andar Sher ka utsaah apne charam par tha. Jaise hi usne pehla zordaar jhatka maarne ke liye apne lund ko thoda baahar kheincha taaki poori taakat se waapas andar dhakel sake, uski kismat ne uska saath chhod diya.

Saalon ki daba kar rakhi gayi havas, Meera ke nange jism ka nazaara aur uski tight choot ki garmaahat ka pehla sparsh hi Sher ke liye bardaasht se baahar saabit hua. Abhi vah dhong poora kar bhi nahi paaya tha ki uske tane hue lund mein ek tez jhanjhanahat uthi aur vah bekaabu hokar tadapne laga.

Bina andar gaye hi, uska veerya fawwaare ki tarah chhootkar Meera ki nangi choot ke baahari hisse aur jaanghon par bikhar gaya.

Sher (kaamuk baukhlaahat aur khauf mein ghabraakar man hi man cheekha): "Abe shit... shit! Abe ruk ja maadarchod! Abhi nahi... thoda sabr kar bhosdi ke!"

Lekin sab bekaar saabit hua. Kuch hi secondon mein uska kadak lund poori tarah dheela padkar kisi mare hue kenchue ki tarah latak gaya.

Neend ke khumaar mein doobi Meera ko kuch bhi khaas ehsaas nahi hua; vah waise hi bekhabar sooti rahi.

Sher apni is sharmnaak performance par buri tarah kheejh utha. Usse khud par itni glaani aur gussa aa raha tha jiski koi seema nahi thi. Uski haalat kisi nausikhiya teenager se bhi badtar saabit hui thi jo pehli baar mein hi dher ho jaata hai.

Sher (ghor niraasha aur gusse mein khud ko man hi man gaaliyan dete hue): "Abe chutiya hai kya be too Sher?! Saala bhadwa... itni mehnata karke yahaan tak pahuncha, sab kuch set tha, aur toone do second mein hi poora khel gud-gobar kar diya! Thoo hai teri is mardaangi par!"

Usne bhaari niraasha ke saath khud ko Meera ke uupar se uthaaya. Neeche giri apni dhoti uthaayi aur Meera ki choot aur jaanghon par bikhre apne veerya ko bahut sambhaalkar poonchha, taaki subah koi saboot na chhoode.

Phir usne darte-darte aur khud ko koosne hue, aahista-aahista Meera ko waapas wahi kaali panty pahnaayi aur uski safed slip ko kheenchkar uske nange mammon ko dhak diya. Usne chaadar ko bhi theek waise hi Meera ke badan par odaa diya jaisa ki usne pehle dekha tha.

Vah mahaul ko bilkul waisa hi chhod dena chahta tha jaisa uske aane se pehle tha, taaki Meera ko zara sa bhi shak na ho.

Usne side table se apna mobile uthaaya, recording band ki aur paseene se tar-batar hokar dabe paanv kamre se baahar nikal gaya. Uski barson puraani hasrat haath aate-aate bhi adhoori rah gayi thi—sab kuch hone ke baad bhi vah khaali haath laut aaya tha.
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(15-08-2026, 11:53 AM)Deepak.kapoor Wrote: Both Versions Posted. Enjoy your Weekend. Leave your rating, comments, and like.

super its mind blowing simply awesome
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Sab kuch hoke v kuch v ho nahi paya
Gajab ki writing
Let's see what hold next
Blackmail kar sakte hai
But agar v cum rehne deta toh meera ko kahan pata chalta kiska hai
Usse toh lagta sartaj ki hai
Aur agar doubt hota v toh har waqt sher k baare mein hi sochte rehti
Ab video toh bana liya hai
Woh mere ko bol sakta hai adha video dikha ke ki usne aise pehle bhi bahut baar kiya hai use saath
Baad video ek baar banayi hai
To enjoy in future episode
Let's see next update mein kya milta hai
Eagerly waiting
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Fantastic ek dam superb bro kasa koi writer itna perfect ho sakta ek dam original hatts off to u
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(15-08-2026, 11:52 PM)Crazy007 Wrote: Sab kuch hoke v kuch v ho nahi paya
Gajab ki writing
Let's see what hold next
Blackmail kar sakte hai
But agar v cum rehne deta toh meera ko kahan pata chalta kiska hai
Usse toh lagta sartaj ki hai
Aur agar doubt hota v toh har waqt sher k baare mein hi sochte rehti
Ab video toh bana liya hai
Woh mere ko bol sakta hai adha video dikha ke ki usne aise pehle bhi bahut baar kiya hai use saath
Baad video ek baar banayi hai
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Let's see next update mein kya milta hai
Eagerly waiting

Thanks For kind words . some of assumptions you made have opened my mind to too .Lets see how things work out in future . 
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(16-08-2026, 03:24 AM)Rizzi1198 Wrote: Fantastic ek dam superb bro kasa koi writer itna perfect ho sakta ek dam original hatts off to u

Thanks For your kind words .
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Superb hot update....
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This was a nice update
Did not expect Meera to completely sleep through it considering Sher didn't give her sleeping pills
Nonetheless a new high for Sher or new low too with his performance
Maybe Sher can try to go in good books of Chandan baba and share some common sob story so that Sher can use him to get Meera
Would love for Meera to be fucked in a suhagraat type setup pleasing Sher along the way

Keep it up Deepak bhai.
Waiting for the next update.
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(19-08-2026, 08:03 AM)Qutub Minar Wrote: This was a nice update
Did not expect Meera to completely sleep through it considering Sher didn't give her sleeping pills
Nonetheless a new high for Sher or new low too with his performance
Maybe Sher can try to go in good books of Chandan baba and share some common sob story so that Sher can use him to get Meera
Would love for Meera to be fucked in a suhagraat type setup pleasing Sher along the way

Keep it up Deepak bhai.
Waiting for the next update.

As she and Sartaj had sex before . she just thought it Sartaj again . In husband and wife sometime sex happen when one guy take initiative and other just let it happen as they are too tired to get involved .

Regarding Sher losing Erection that too happen in actual life , as person is too aroused and has thought about that sequence so many times in mind . 
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My next 10-day schedule looks very tight. I have the next 2-3 chapters ready, but I need to do final editing. Whenever I get a chance, I will do that and post it here. But i can not commit on dates .
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(19-08-2026, 08:03 AM)Qutub Minar Wrote: This was a nice update
Did not expect Meera to completely sleep through it considering Sher didn't give her sleeping pills
Nonetheless a new high for Sher or new low too with his performance
Maybe Sher can try to go in good books of Chandan baba and share some common sob story so that Sher can use him to get Meera
Would love for Meera to be fucked in a suhagraat type setup pleasing Sher along the way

Keep it up Deepak bhai.
Waiting for the next update.

In my mind Sartaj and Meera are loving couple , who are faithful to each other whereas Sher uses very trick possible to seduce Meera .
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Waiting next update
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Long time….. Eagerly waiting for new big update…
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नया मोड़ —3

 
सुबह की सुनहरी धूप खिड़की से छनकर कमरे में आ रही थी। मीरा की जब आँखें खुलीं, तो उसने अंगड़ाई ली, लेकिन शरीर में एक अजीब सी थकावट और अनजाना सा खिंचाव महसूस हुआ।
 
बिस्तर पर बैठते ही उसकी नज़र अपने कपड़ों पर पड़ी—उसकी सफ़ेद स्लिप थोड़ी अस्त-व्यस्त थी और ठीक से नहीं पहनी हुई लग रही थी। उसके दिमाग में रात की कुछ धुंधली सी यादें कौंधने लगीं—वो होठों पर किसी का स्पर्श, सीने पर किसी की गर्माहट, मुँह में जीभ का घुलना और बदन में उठी वो कामुक सिहरन...
 
उसने तुरंत अपने बगल में देखा, पर सरताज बिस्तर पर नहीं थे।
 
हालाँकि, मीरा के लिए यह कोई नई बात नहीं थी। सिक्युरिटी की नौकरी होने के कारण कई बार सरताज को आधी रात को या तड़के ही अचानक ड्यूटी पर निकलना पड़ता था।
 
सरताज की हमेशा से आदत थी कि वह मीरा को कभी जगाते नहीं थे; उनका मानना था कि बेफिजूल में मीरा की नींद खराब करने का क्या फायदा।
 
मीरा के चेहरे पर एक हल्की सी शर्मीली मुस्कान आ गई।
 
मीरा (मन ही मन सोचकर मुस्कुराई): "ज़ाहिर है रात को जाने से पहले सरताज ने ही मुझे प्यार किया होगा... वो चुपचाप आए होंगे और नींद में ही मेरे होठों को चूमकर चले गए होंगे। कितने बेपरवाह हैं, जाते-जाते स्लिप भी ठीक से बंद नहीं की!"
 
उसने अपने होठों को उंगली से छुआ, जहाँ अभी भी एक अजीब सा गीलापन और गर्माहट महसूस हो रही थी। वह इस प्यारे से वहम में पूरी तरह डूब गई कि यह सब उसके पति का प्यार था।
 
इस घिनौने सच से बिल्कुल बेखबर कि रात के अंधेरे में उसके साथ सरताज ने नहीं, बल्कि उस नीच नौकर शेर ने घिनौनी हरकत की थी और सब कुछ कैमरे में रिकॉर्ड कर लिया था, मीरा मुस्कुराते हुए उठी और फ्रेश होने के लिए बाथरूम की तरफ बढ़ गई।
 
 
उधर अपनी घिनौना हरकत और नाकामी से तिलमिलाया शेर पूरी रात कमरे में जागता रहा। रात के करीब 4 बजे तक वह जागता रहा और खुद को मां-बहन की नंगी गालियाँ देता रहा।
 
शेर (रात भर खुद को कोसते हुए): "साला मादरचोद! ज़िंदगी का सबसे बड़ा मौका हाथ में था और तूने दो सेकंड में अपनी गाँड मरवा ली! थू है तेरी ऐसी जवानी पर... साला मुट्ठ मार-मार के लंड का कबाड़ा कर लिया है तूने!"
 
सुबह करीब 7 बजे जब चंदन बाबा तैयार होकर उठे, तो उन्होंने देखा कि शेर चादर तानकर पड़ा हुआ है। उन्होंने उसे आवाज़ देकर जगाने की कोशिश की।
 
चंदन बाबा (आवाज़ देते हुए): "अरे शेर... उठ भाई! सुबह हो गई है।"
 
शेर (चादर के अंदर से ही चिढ़कर, खीझ भरी आवाज़ में बोला): "बाबा, आज मेरी तबीयत ठीक नहीं लग रही है... सिर में बहुत दर्द है। आप जाओ, मैं थोड़ी देर बाद आऊँगा।"
 
चंदन बाबा ने ज़्यादा बहस नहीं की और अकेले ही मुख्य कोठी की तरफ बढ़ गए।
 
चंदन के जाने के करीब एक घंटे बाद शेर भारी सिर और गुस्से के साथ बिस्तर पर उठकर बैठा। उसका मूड अब भी बेहद खराब था। लेकिन तभी उसके दिमाग में एक ख्याल आया—रात को टेबल पर रखा हुआ मोबाइल!
 
शेर (आँखें मलते हुए, बड़बड़ाया): "भले ही लंड ने एन मौके पर दगा दे दिया हो... पर वो मोबाइल तो चालू था! देखूँ तो सही कि उस साले कैमरे में क्या-क्या रिकॉर्ड हुआ है!"
 
उसने तुरंत अपना मोबाइल उठाया, गैलरी खोली और रात वाली वीडियो फाइल पर क्लिक कर दिया। उसकी धड़कनें तेज़ी से चलने लगीं कि आखिर रात के अंधेरे में कैमरे ने मीरा के उस बेपर्दा बदन का कौन-कौन सा रूप कैद किया था।
 
वीडियो बिल्कुल साफ़ और सही तरीक़े से रिकॉर्ड हुई थी। कैमरे ने कमरे के उस धुंधले अंधेरे में सब कुछ साफ़-साफ़ क़ैद कर लिया था।
 
वीडियो में मीरा का वह बेखबर, नंगा बदन... उसकी सफ़ेद स्लिप का उतरना, उसकी साफ़ और मखमली योनि, शेर का उस पर ज़बरदस्ती जीभ लगाना साफ़ दिख रहा था। यही नहीं, कैमरे ने उस पल को भी बड़ी बारीकी से कैद किया था जब शेर ने मीरा के होठों पर अपने होंठ टिकाकर उसे जबरन किस किया था, और उसके बाद अपने कड़क लंड को मीरा के रसीले होठों पर बेशर्मी से रगड़ा था।
 
अपनी ही बनाई इस घिनौनी वीडियो को देखते-देखते शेर का ढीला पड़ा लंड एक बार फिर से लुंगी के अंदर कड़क और सख्त हो गया।
 
शेर (अपने अकड़े हुए लंड को देखकर गुस्से से दाँत भींचते हुए चीखा): "अबे मादरचोद! तेरी बहन का...! जब रात को असली काम का टाइम आता है, तब तो तेरे को साला साँप सूँघ जाता है! और अब खाली वीडियो देखकर ऐसे अकड़ रहा है जैसे कितना बड़ा सुरमा हो! भोसड़ी के, ऐन वक्त पर धोखा दे दिया!"
 
खुद को और अपने लंड को दो-चार कड़वी गालियाँ बकने के बाद शेर ने एक लंबी साँस ली और अपने चेहरे पर एक कमीनी मुस्कान ले आया।
 
उसने तुरंत मोबाइल से मेमोरी कार्ड निकाला और इस खास वीडियो फाइल को उसमें कॉपी कर लिया। सिर्फ इतने पर ही उसका मन शांत नहीं हुआ; उसने बिना कोई रिस्क लिए उस पूरी वीडियो को अपने एक सीक्रेट क्लाउड अकाउंट पर भी अपलोड कर दिया, ताकि अगर फोन कभी गुम या खराब भी हो जाए, तो सबूत हमेशा महफ़ूज़ रहे।
 
हालांकि, वीडियो सुरक्षित करने के बाद शेर के दिमाग में अपने भाई शंकर का अंजाम याद आ गया।
 
शेर (गहराई से सोचने लगा): "शेर, जल्दबाज़ी में यह वीडियो सीधा मीरा के मुँह पर मारने की गलती मत कर बैठना! साला, पहले मेरे भाई शंकर ने भी ऐसी ही वीडियो की धमकी देकर मालकिन को दबाने की कोशिश की थी, और नतीजे में क्या हुआ? मीरा ने डरने के बजाय सरताज को सब सच बता दिया था और शंकर का खेल हमेशा के लिए खत्म हो गया! मैं अपने भाई जैसी बेवकूफी नहीं दोहराऊँगा। इस वीडियो का इस्तेमाल तो मैं सबसे आखिरी हथियार के तौर पर ही करूँगा। सीधे धमकी दी, तो यह रंडी फिर से अपने पति के गले लगकर सब उगल देगी और मेरी हालत भी शंकर जैसी बना देगी।"
 
इस खौफनाक सबक को याद करने के बाद शेर की आँखों के सामने रात के वो कुछ सेकंड कौंध गए जब उसका लंड मीरा की योनि के अंदर समाया था।
 
शेर (अधखुली आँखों से उस अहसास को याद करते हुए फुसफुसाया): "उफ़्फ़ मादरचोद... क्या टाइट चूत थी साली की! कसम से, जैसे मेरे पूरे लंड को जकड़ के रख लिया हो... एकदम मक्खन, एकदम गर्म! कोई बात नहीं शेर... अभी तो यह बस शुरुआत है। इस वीडियो को ब्रह्मास्त्र बनाकर जेब में रखता हूँ, और मौके का इंतज़ार करता हूँ। जब सही वक्त आएगा, तो मालकिन को ऐसे घेरूंगा कि वो चाहकर भी सरताज के पास न भाग सके!"
 
शेर बिस्तर से उठा, अपने कड़क लंड को संभाला और एक शातिर इरादे के साथ कोठी की तरफ बढ़ने की तैयारी करने लगा।
 
 
 
तैयार होकर शेर सीधे रसोई की तरफ बढ़ा। रसोई का दरवाज़ा आधा खुला था और अंदर का नज़ारा देखकर शेर के कदम वहीं ठिठक गए।
 
चंदन बाबा और मीरा साथ मिलकर दोपहर के खाने की तैयारी कर रहे थे। मीरा ने पीले रंग की घुटनों तक लंबी मिडी ड्रेस पहन रखी थी, जिसकी ज़िप उसकी पीठ के पीछे लगी थी। वह ड्रेस उसकी छाती और कमर पर बेहद कसी हुई थी, जिससे उसके जिस्म के उभार साफ़ उभरकर सामने आ रहे थे।
 
चंदन बाबा की घर में मौजूदगी की वजह से आज मीरा के मन में शेर का खौफ थोड़ा कम था। वह बेफिक्र होकर सब्ज़ी काट रही थी। लेकिन जैसे ही उसकी नज़र रसोई के दरवाज़े पर खड़े शेर पर पड़ी, उसने महसूस किया कि शेर की निगाहें उसकी पीली ड्रेस में कसे मम्मों और हिप्स को किस तरह स्कैन कर रही थीं। मीरा ने नज़रअंदाज़ किया और अपना ध्यान काम में लगा लिया।
 
सब्ज़ी बनाते और मसाले मिलाते वक्त कई बार चंदन बाबा और मीरा की उंगलियाँ और हाथ आपस में छू जाते थे, कभी-कभी कंधे भी आपस में टकरा जाते थे। लेकिन उन दोनों के बीच एक पवित्र, बाप-बेटी जैसा रिश्ता था; दोनों के मन में एक-दूसरे के लिए कोई गलत भावना या मैली नज़र नहीं थी।
 
लेकिन दूर खड़ा शेर इस पूरे नज़ारे को अपनी ज़हरीली आँखों से देख रहा था। चंदन बाबा का मीरा के इतने करीब होना और उसके बदन से बार-बार टकराना शेर के सीने में आग लगा रहा था।
 
शेर (दरवाज़े के पास खड़ा होकर, चंदन बाबा को मन ही मन मां-बहन की गालियाँ बकने लगा): "साला मादरचोद बुड्ढा! रंडी का पिल्ला... बड़ा शरीफ बनता है! पूरे टाइम मालकिन के बदन से अपनी छाती और हाथ रगड़े जा रहा है। भोसड़ी के को साला कोई काम-धाम नहीं है, बस यहाँ मालकिन की गांड के पीछे चिपका हुआ है! काश इस साले गांडू की जगह आज मैं खड़ा होता... तो हाथ मिलाने के बहाने ही इस रंडी के कसाव का पूरा मज़ा ले लेता!"
 
शेर की निगाहें चंदन बाबा की सादगी और मीरा के प्रति उसके पिता तुल्य स्नेह पर टिकी हुई थीं। चंदन बार-बार मीरा को 'बिटिया... बिटिया' कहकर पुकार रहा था।
 
यह सुनते ही शेर के हवस से अंधे दिमाग में एक बेहद घिनौना और नीच ख्याल कौंध गया।
 
शेर (मन ही मन हवस में हांफते हुए बड़बड़ाया): "अबे यह बुड्ढा तो इसको 'बिटिया' बोलता रहता है... क्या कमाल का सीन बनता अगर इस बुड्ढे की जगह मैं होता! मैं इस रंडी मीरा के ऊपर चढ़ता, इसके कसदार मम्मों को दबाता और इसके कान में फुसफुसाकर बोलता— 'ले मेरी बिटिया... ले मेरा यह कड़क लंड अपनी इस टाइट चूत में... और चूस इसको!' उफ़्फ़ मादरचोद! सोच के ही लंड पैंट में फटने लगा है!"
 
शेर बाहर खड़ा होकर अपनी हवस भरी सोच में जलता रहा, जबकि अंदर चंदन बाबा और मीरा अपने काम में लगे रहे।
 
रसोई के दरवाज़े पर टिके-टिके शेर का दिमाग खुराफात के नए-नए जाल बुन रहा था। वह जितनी बार चंदन बाबा को मीरा के पास मुस्कुराते और हाथ बटाते देखता, उसका सीना जलन से जलने लगता।
 
वह अच्छी तरह समझ चुका था कि जब तक यह बुड्ढा इस घर में ढाल बनकर खड़ा रहेगा, तब तक मीरा पर दोबारा हाथ डालना या उसे दबाना लगभग नामुमकिन होगा।
 
शेर ( नफरत से बुदबुदाया): "साला मादरचोद बुड्ढा बीच में सबसे बड़ा रोड़ा बना बैठा है! जब तक यह यहाँ खड़ा रहेगा, मेरा कोई भी दांव सही नहीं बैठेगा। इस मुसीबत को रास्ते से हटाने का कोई न कोई तोड़ तो निकालना ही पड़ेगा..."
 
तभी शेर की शैतानी खोपड़ी में एक बेहद खौफनाक विचार कौंधा। उसकी आँखें चमक उठीं।
 
शेर (कमीनी मुस्कान के साथ मन ही मन बड़बड़ाया): "अबे भाई... कैसा हो अगर इस बुड्ढे का दिमाग ही पूरी तरह से भ्रष्ट कर दिया जाए? अभी तो यह साला बड़ा 'बिटिया-बिटिया' चिल्लाता है ... पर है तो आखिर मर्द ही! अगर किसी तरह इसके दिमाग में कामवासना का ज़हर घोल दिया जाए, ताकि यह भी इस पीली ड्रेस वाली मालकिन को बेटी की नज़र से नहीं, बल्कि एक रंडी की तरह हवस की निगाहों से देखने लगे... उफ़्फ़ मादरचोद! तब तो नज़ारा ही बदल जाएगा!"
 
इस गंदे ख्याल के आते ही शेर की आँखों के सामने एक खौफनाक मंज़र तैरने लगा—जहाँ वह अकेले नहीं, बल्कि चंदन बाबा को भी अपना साथी बनाकर मीरा की इज़्ज़त की धज्जियाँ उड़ा रहा होगा।
 
शेर (अपनी लुंगी के ऊपर से ही अपने अकड़ते हुए लंड को दबाते हुए हांफने लगा): "अबे कसम से... अगर यह बुड्ढा भी पट गया, तो मज़ा ही आ जाएगा! फिर तो दोनों मिलकर इस मीरा को दबोचेंगे... एक आगे से पेलेगा तो दूसरा पीछे से! बेचारी मालकिन चीखेगी-चिल्लाएगी, पर कोई बचाने वाला नहीं होगा! दोनों मिलकर इसकी टाइट चूत और गांड की धज्जियाँ उड़ा देंगे!"
 
लेकिन फिर शेर ने अपना सिर झटका और थोड़ा संभला।
 
शेर (गंभीर होकर सोचने लगा): "पर सवाल यह है कि इस बुड्ढे की खोपड़ी को घुमाया कैसे जाए? यह इतना सीधा और भगत आदमी है, ऐसे तो लाइन पर आने से रहा... इसके दिमाग में हवस की चिंगारी कैसे लगाई जाए? कोई न कोई तगड़ा नाटक या चाल तो चलनी ही पड़ेगी। कोई ऐसा आइडिया ढूँढना होगा कि बुड्ढे का ईमान डोल जाए। सोचना पड़ेगा...!"
 
महज़ इस विचार के दिमाग में आते ही शेर के पैंट के अंदर बैठा लंड तनकर अकड़ गया था। उसने रसोई की तरफ एक आखिरी हवस भरी निगाह डाली और दबे पाँव वहाँ से खिसककर अपने अगले चाल की योजना बनाने में जुट गया।
 
 
 
दोपहर के लगभग दो बज चुके थे। सुबह से ही शेर का बदन हवस की आग में तपने लगा था। वह बार-बार मीरा के करीब जाने के बहाने ढूंढ रहा था, लेकिन चंदन बाबा साये की तरह रसोई और घर के आसपास बने हुए थे, जिसकी वजह से शेर को एक पल के लिए भी मौका नहीं मिल पा रहा था।
 
खाना खाने के बाद चंदन बाबा कुछ काम से बाहर चले गए। सरताज अपनी सिक्युरिटी ड्यूटी पर बाहर थे ही।
 
रसोई के पास बने वॉशबेसिन पर मीरा बर्तन साफ करने के बाद अकेले हाथ-मुँह धो रही थी। उसकी पीली मिडी ड्रेस उसके सुडौल बदन पर अब भी कसी हुई थी। मौका देखते ही शेर के चेहरे पर कमीनी मुस्कान आ गई और वह दबे पाँव, बिल्कुल मीरा के पीछे जाकर खड़ा हो गया।
 
मीरा ने जैसे ही टॉवल से हाथ पोंछकर पीछे मुड़ना चाहा, शेर ने उसका रास्ता रोक लिया।
 
शेर (अपनी मूंछों पर हाथ फेरते हुए, घूरकर नीचता से फुसफुसाया): "मीरा जी... आज अंदर कौन से कलर की कच्छा पहनी हो?"
 
यह गंदा और बेशर्म सवाल सुनते ही मीरा का मुँह खुला का खुला रह गया। उसकी आँखों में खौफ और घिन एक साथ तैर गए।
 
मीरा (गुस्से में लाल होकर, दबी आवाज़ में डांटते हुए बोली): "शेर! अपनी औकात में रहो और तमीज़ से बात करो! यह क्या बकवास कर रहे हो?"
 
शेर (आगे कदम बढ़ाते हुए, ढिठाई से मुस्कुराया): "अरे मालकिन, सुबह से आपके इर्द-गिर्द घूम रहा हूँ... छूने तक का तो मौका मिला नहीं। अब इतना तो बता ही सकती हो कि अंदर कौन से रंग का कपड़ा छुपा रखा है? इसमें इतना शर्माना क्या!"
 
इतना अश्लील और बेहया शब्द सुनकर मीरा का पूरा चेहरा शर्म और गुस्से से तमतमा उठा।
 
तभी शेर ने अपनी लुंगी के हिस्से की तरफ इशारा किया, जहाँ उसका कड़क लंड साफ़ उभर रहा था।
 
शेर (आँख मारते हुए, बेशर्मी की सारी हदें पार करके बोला): "देखो न मीरा जी... सुबह से आपको देख-देखकर यह कैसे खड़ा हो गया है!"
 
मीरा इतनी घबरा गई और हड़बड़ाहट में उसके मुँह से अनजाने में निकल गया— "क्या...?"
 
शेर (अपनी कमीनी हँसी हँसते हुए, सीधे आँखों में देखकर बोला): "मेरा लंड मीरा जी... मेरा लंड! सुबह से आपके पीछे लपलपा रहा है!"
 
जैसे ही मीरा झटके से पीछे मुड़कर वहाँ से भागने लगी, शेर ने बड़ी फुर्ती से अपना हाथ आगे बढ़ाकर मीरा की गोरी कलाई को कसकर दबोच लिया।
 
मीरा हड़बड़ा गई और उसका दिल तेज़ी से धड़कने लगा। उसने झटके से अपना हाथ छुड़ाने की कोशिश करते हुए दबी और गुस्से से कांपती आवाज़ में कहा, "छोड़ो मेरा हाथ! शेर छोड़ो मुझे... !"
 
शेर के चेहरे पर रत्ती भर भी खौफ नहीं था। उसने मीरा की कलाई पर अपनी पकड़ और मज़बूत कर ली और चेहरे पर एक बेहद कमीनी मुस्कान ले आया।
 
शेर (मीरा के बिल्कुल करीब झुककर, उसकी आँखों में हवस से घूरते हुए फुसफुसाया): "अरे ऐसे कैसे जाने दें मालकिन... आपने बताया तो नहीं कि अंदर क्या पहन रखा है? और मीरा जी... कसम के मुताबिक तो मैं आपको जब चाहूँ पकड़ सकता हूँ, जहाँ चाहूँ छू सकता हूँ! यह तो मेरी शराफ़त है कि सुबह से दूर-दूर से तड़प रहा हूँ।"
 
मीरा का जिस्म खौफ और शर्म के मारे थर-थर कांपने लगा। वह समझ नहीं पा रही थी कि इस नीच नौकर के चंगुल से खुद को कैसे छुड़ाए।
 
शेर ने मीरा की कसी हुई पीली ड्रेस पर ऊपर से नीचे तक एक निगाह दौड़ाई ।
 
शेर (मीरा के चेहरे के पास मुँह लाकर, नीचता से मुस्कुराते हुए बोला): "वैसे जितना मैं आपको और आपके इस गोरे जिस्म को जानता हूँ न मालकिन... मेरा दांव कहता है कि आज आपने इस पीली ड्रेस के अंदर पीले ही रंग की कच्छा पहन रखी है... है ना?"
 
यह सुनते ही मीरा के पैर तले ज़मीन खिसक गई! उसकी आँखें सदमे से फटी की फटी रह गईं और उसका मुँह खुला का खुला रह गया।
 
शेर का अंदाज़ा बिल्कुल सही था—उसने सचमुच अंदर पीले रंग की ही पैंटी पहन रखी थी।
 
मीरा यह सोचकर अंदर तक दहल गई कि इस नीच नौकर को यह बात कैसे पता चली। क्या उसने किसी तरह उसकी पैंटी को ड्रेस के नीचे से देख लिया है? यह कैसे हो सकता है?
शेर उसके हैरान चेहरे को देखकर समझ गया कि उसका तीर निशाने पर लगा है, और वह हाथ दबाते हुए अपनी इस गंदी जीत पर मन ही मन हँसने लगा।
 
मीरा के मुँह से डर और हैरत के मारे अपने आप निकल गया, "तुम्हे... तुम्हें कैसे पता?"
 
उसकी आवाज़ में छिपा घबराहट देखकर शेर का मज़ा दोगुना हो गया। उसके चेहरे की कमीनी मुस्कान और चौड़ी हो गई। उसने मीरा की कलाई को हल्का सा झटका देकर अपनी तरफ थोड़ा और खींच लिया, जिससे मीरा के सुडौल मम्मे शेर की छाती से बस कुछ ही इंच की दूरी पर आ गए।
 
शेर (आँख मारते हुए, बेहद बेशर्मी से मुस्कुराकर बोला): "अरे मालकिन! इस शेर की नज़र बहुत पारखी है। बस थोड़ा सा अंदाज़ा लगाया... जब आपने ऊपर इतनी कड़क पीली ड्रेस पहन रखी है, तो मैचिंग के हिसाब से अंदर की पैंटी भी तो पीले ही रंग की होनी चाहिए ना? औरतें तो वैसे भी मैचिंग की शौकीन होती हैं!"
 
मीरा शर्म से पानी-पानी हो रही थी और अपनी कलाई छुड़ाने की नाकाम कोशिश कर रही थी।
 
शेर की हवस भरी निगाहें अब मीरा की पीली मिडी ड्रेस के कसदार सीने पर टिक गईं, जहाँ उसके दोनों मम्मे ड्रेस की ज़िप को फाड़कर बाहर आने को बेताब लग रहे थे।
 
शेर (अपनी जीभ से होठों को चाटते हुए, नीचता से फुसफुसाया): "और जब कच्छा पीला है मालकिन... तो मेरी मानो, आपकी ब्रा भी पक्का पीले ही रंग की होगी! क्यों... सही पकड़ा न? कहो तो ज़रा ज़िप खोलकर चेक कर लूँ कि मेरा अंदाज़ा कितना सही है?"
 
इतना कहकर शेर ने अपनी हथेली मीरा की पीठ की तरफ ले जाकर उसकी ड्रेस की ज़िप के पास टिका दी।
 
मीरा का दिल खौफ से ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगा।
 
तभी अचानक बाहर से चंदन बाबा के कदमों की आहट आई। वे रसोई का दरवाज़ा ढकेलते हुए अंदर दाखिल हुए और सहज आवाज़ में बोले, "बिटिया, आज रात को खाने में क्या बनना है? आपने बताया ही नहीं..."
 
लेकिन अपनी बात पूरी करने से पहले ही चंदन बाबा की नज़र मीरा पर पड़ी। उसका चेहरा डर के मारे एकदम पीला पड़ चुका था, और उसकी आँखों में खौफ साफ़ दिख रहा था।
 
चंदन की निगाहें तुरंत नीचे गईं और उन्होंने देखा कि शेर ने मीरा की कलाई को कसकर दबोच रखा है।
 
माहौल का सन्नाटा और चंदन का चौंकना देखते ही शेर की हवा निकल गई। उसने तुरंत झटके से मीरा का हाथ छोड़ दिया और दो कदम पीछे हटकर ऐसे खड़ा हो गया जैसे कुछ हुआ ही न हो।
 
मीरा ने खुद को संभाला और चंदन बाबा के करीब पहुँच गई। अपनी कांपती आवाज़ को छुपाते हुए उसने कहा, "बाबा... आज रात को चिकन करी बना लो। ज्योति को बहुत अच्छी लगती है।"
 
चंदन बाबा ने शेर को एक शक भरी और सख्त निगाह से देखा, फिर मीरा की तरफ देखकर नरमी से बोले, "ठीक है मीरा बिटिया, जैसा तुम कहो। मैं अभी तैयारी कर देता हूँ।"
 
उधर दूर खड़ा शेर दबे पाँव खिसकते हुए मन ही मन चंदन बाबा को मां-बहन की नंगी गालियाँ बकने लगा।
 
शेर (आँखें तरेरकर, चंदन को घूरते हुए ): "अबे बिटिया के बच्चे! साला हर बार कबाब में हड्डी बनकर टपक पड़ता है! अभी बस मालकिन की ज़िप खोलने ही वाला था कि यह बुड्ढा बीच में रायता फैलाने आ गया। साले का इलाज बहुत जल्द करना पड़ेगा... जब तक इसको रास्ते से नहीं हटाऊँगा, तब तक इस पीली मिडी वाली रंडी का मज़ा नहीं ले पाऊँगा!"
 
शेर (आँखों से चंदन को घूरकर बड़बड़ाया): "इस साले के दिमाग में हवस का ज़हर ऐसा घोलूँगा कि यह खुद मालकिन की ज़िप खोलने दौड़ेगा। इसका इलाज तो अब मुझे करना ही पड़ेगा!"
 
शेर बाहर निकल गया।
 
 
उधर रसोई में खड़ा चंदन गहरी सोच में पड़ गया। उसका दिमाग पुरानी बातों और अभी घटी घटना को जोड़ने लगा।
 
चंदन (मन ही मन गहरी चिंता में डूबते हुए सोचने लगा): "क्या इसी वजह से सरताज मुझे इतनी जल्दी यहाँ वापस ले आया? क्या मीरा और शेर के बीच ऐसा कुछ चल रहा है जो सही नहीं है? पर जितना मैं मीरा बिटिया को जानता हूँ, वह वैसी औरत तो हरगिज़ नहीं है... उसका चरित्र तो बिल्कुल साफ़ है।"
 
तभी चंदन को सरताज की कही हुई एक बात याद आई।
 
चंदन : "हाँ! सरताज ने ही तो मुझसे कहा था कि कई बार मीरा अचानक बहुत सहम जाती है, किसी अनजाने खौफ में आ जाती है। तो क्या वह खौफ इस शेर की वजह से है? क्या यह शेर ठीक इंसान नहीं है?"
 
चंदन ने अपनी नज़रें उस दरवाज़े की तरफ उठाईं जहाँ से शेर अभी-अभी खिसका था। उसके चेहरे पर सतर्कता और गम्भीरता छा गई।
 
चंदन (दृढ़ निश्चय के साथ): "मुझे अब और ज़्यादा चौकन्ना रहना होगा। सुबह जब मीरा बिटिया मेरे साथ रसोई में काम कर रही थी, तो कितनी खुश थी, कितनी बेफिक्र हँस रही थी... और अभी? अभी जब मैंने उसे देखा, तो उसका चेहरा डर के मारे एकदम पीला पड़ा हुआ था, जैसे किसी ने उसकी गर्दन पर तलवार रख दी हो! उस शेर ने जिस तरह उसका हाथ दबोच रखा था, वह किसी भी कोण से तमीज़दार नौकर की हरकत नहीं थी।"
 
चंदन ने तय कर लिया कि अब वह मीरा पर कोई मुसीबत नहीं आने देगा और इस घर में एक ढाल बनकर शेर की हर एक हरकत पर पैनी नज़र रखेगा।
 
अपने क्वाटर में वापस आकर शेर बिस्तर पर लेट गया और अपने मोबाइल पर नीली फ़िल्में देखने लगा। एडल्ट वीडियो देखते-देखते उसने गैलरी खोली और रात वाली मीरा की गुप्त वीडियो चला ली।
 
स्क्रीन पर मीरा का बेखबर, नंगा बदन और अपनी घिनौनी हरकत देखते ही शेर की लुंगी के अंदर उसका लंड लोहे की तरह तनकड़कर खड़ा हो गया।
 
लंड पर हाथ फेरते-फेरते शेर के खुराफाती दिमाग में एक बेहद शातिर योजना ने जन्म लिया।
 
शेर (कमीनी हँसी के साथ बड़बड़ाया): "अबे भाई! क्या दिमाग़ चला है मेरा... अगर इस चंदन बुड्ढे को किसी तरह इन नीली फ़िल्मों की लत लगा दी जाए तो? पहले इसको नॉर्मल पोर्न फ़िल्में दिखाऊँगा, फिर धीरे-धीरे नौकर और मालकिन वाली गंदी फ़िल्में... जब यह रोज़-रोज़ वैसी फ़िल्में देखेगा, तो इसका दिमाग अपने आप भ्रष्ट हो जाएगा! फिर यह मीरा को 'बिटिया' नहीं, बल्कि बदन से लबालब भरी एक औरत की तरह देखने लगेगा!"
 
लेकिन तभी शेर के चेहरे पर एक पल के लिए शक की लकीरें उभर आईं।
 
शेर (माथे पर हाथ रखकर सोचने लगा): "पर साला यह बुड्ढा तो 60 साल की आस्था का ढोंग रचाए बैठा है... क्या इसके अंदर अभी भी हवस बची होगी? कहीं साले का औज़ार पूरी तरह से ठप्प ही हो चुका हो तो मेरी यह पोर्न वाली सारी स्कीम धरी की धरी रह जाएगी! बुड्ढे का खड़ा ही नहीं होगा तो फ़िल्म देखकर भी क्या उखाड़ लेगा?"
 
शेर ने अपनी दाढ़ी खुजलाई और फिर झटके से उसकी आँखें संतोष से चमक उठीं। उसने अपनी योजना की आखिरी कड़ी जोड़ ली थी।
 
शेर (हाथ पर हाथ मारते हुए, हवस में हांफकर बोला): "हाँ मादरचोद! यह हुई न बात! इसके अंदर हवस की आग भड़काने के लिए इसके खाने या दूध में वियाग्रा  की गोली मिला दूँगा! जब दिन-रात साले का लंड लोहे की तरह तना रहेगा और नीचे खिंचाव पैदा होगा, तब इसके सामने मीरा की सुंदरता और उसके कसदार मम्मों की तारीफें करूँगा... बुड्ढे की खोपड़ी अपने आप घूम जाएगी!"
 
उसने अपने दिमाग में इस घिनौनी साजिश का पूरा खाका तैयार कर लिया:
 
वियाग्रा की गोली  अश्लील पोर्न फ़िल्मेंनौकर-मालकिन वाली गंदी वीडियोमीरा के बदन की उत्तेजक कहानियाँबुड्ढे का दिमाग पूरी तरह भ्रष्ट!
 
शेर (अपने अकड़े हुए लंड को सहलाते हुए ज़हरीली मुस्कान से मुस्कुराया): "एक बार इस बुड्ढे का ईमान डोला... फिर तो यह खुद मीरा की ज़िप खोलने दौड़ेगा! और जब हम दोनों मिलकर उस छिनाल को घेरेंगे, तो मालकिन चाहकर भी सिक्युरिटी वाले पति के पास मुँह उठाने लायक नहीं रहेगी!"
 
सारा दिन शेर चील की तरह नज़रें गड़ाए मीरा पर झपटने का मौका ढूँढता रहा, पर उसकी एक न चली। चंदन बाबा साये की तरह मीरा के आसपास ही डटे रहे, और जब वे नहीं होते, तो मीरा खुद को अपने कमरे में बंद रख रही थी।
Deepak Kapoor
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