Thread Rating:
  • 16 Vote(s) - 2 Average
  • 1
  • 2
  • 3
  • 4
  • 5
Adultery लफ़्ज़ों से कहाँ बयां हो पाता है हाले दिल...
#81
राजू ने रिशा के होठों को अपने होठों से भींच लिया...नीचे उसने अपना लौड़ा सुपाड़े तक बाहर निकाला और फिर एक जबरदस्त शॉट मारते हुए पूरा लौड़ा रिशा की चूत में गाड़ दिया। रिशा की चीख राजू के मुँह में ही दबकर रह गई

कुछ देर यूं ही रहने के बाद राजू ने धीरे-धीरे हरकत करते हुए अपना लौड़ा अंदर बाहर करना शुरू कर दिया। रिशा का दर्द भी अब काम हो गया था. दर्द की जगह मजे ने ले ली और रिशा की आह-आह निकलने का दौर फ़िर से शुरू हो गया!

रिशा बोल रही थी- आह आह और जोर से देवर जी … आह मेरी चूत … तुम्हारा लंड तो बहुत मस्त है देवर जी … आह्ह मेरी बजा दो। फाड़ डालो आज मेरी चूत..कोई रहम ना करना.

राजू.. “भाभी आज आपका देवर आपकी चूत और गांड दोनों को फाड़ देगा। बस आप मेरा साथ देते रहना”

15 मिनट चोदने के बाद राजू ने रिशा को बेड का किनारा पकड़ा कर घोड़ी बना दिया ! इसी बीच रिशा की चूत एक बार पानी छोड़ चुकी थी !राजू ने अपना लंड चूत से बाहर निकाल लिया और और रिशा की गांड के छेद को अपनी जीभ निकाल कर के चाटने लगा. गांड का भूरा छेद बहुत टाइट लग रहा था। राजू भी जानता था कि उसका लंड इतने आसानी से अंदर नहीं घुसेगा। उसने बिस्तर के साइड टेबल पर पड़ी वैसलीन की शीशी उठाई और ढेर सारी वैसलीन अपनी उंगलियों से रिशा की गांड में घुसेढ दी।


रिशा भी समझ गई कि आज उसकी गांड फ़टने वाली है। उसने अपना चेहरा तकिया के अंदर छुपा लिया और खुद को होने वाले हमले के लिए तैयार कर लिया. राजू गांड की गोलाई देख कर पगला रहा था। कितने दिनों से वो रिशा की गांड मरना चाहता था और आज वो मौका आ गया था। राजू ने एक के बाद एक दो चार थप्पड़ रिशा की कुंवारी गांड पर मार दिए जिससे रिशा की गांड लाल हो गई और रिशा दर्द से चिल्ला उठी…. उफ्फ्फ...नहीं राजू दर्द होता है।

राजू...”माफ़ करना भाभी। इतनी खूबसूरत गांड देख खुद को रखा नहीं पाया”

राजू..”राजू प्लीज़ जरा आराम से करना। तेरा लौड़ा बहुत लंबा और मोटा है और मेरी गांड एक दम कुंवारी।”

राजू..”फिकर मत करो भाभी..बड़े आराम से पेलूंगा बस आप अपनी गांड को ढीला रखना “

रिशा...”थोड़ी वैसलीन अपने लंड पर भी लगा ले शायद दर्द कम हो “

राजू ने डिब्बी से वैसलीन ले अपने लौड़े पर लगा ली और फिर लौड़ा गांड के छेद से सेट कर दिया और करीब पाँच मिनट तक रगड़ने के बाद राजू ने अपना लंड रिशा की गाँड के छेद में घुसेड़ना चाहा, लेकिन गाँड काफी टाईट थी और राजू को अपना लंड घुसेड़ने में काफी तकलीफ महसूस होने लगी। राजू ने एक हाथ आगे ले जा रिशा की चुची को जोर से मसल दिया। चुची मसले जाने से रिशा जोर से चींखी “ऊऊई” और उसने अपनी गाँड को ढील छोड़ दिया. राजू ने अपने लंड का सुपाड़ा एक जोरदार धक्के से उसकी गाँड के छेद के अंदर घुसेड़ दिया। रिशा ने अपनी गाँड को फिर से टाईट करना चाहा, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

रिशा बोली, “नहींईंईं... प्लीज़।”

चूँकि रिशा की गाँड और राजू का लंड वैसलीन से बहुत चीकना हो गया था, राजू का सुपाड़ा रिशा की गाँड में धँस चुका था और राजू उसकी दोनों चूंची कस कर पकड़ कर एक धक्के के साथ अपना पूरा का पूरा लंड उसकी कसी हुई गाँड के अंदर उतार दिया। राजू का पूरा का पूरा लंड रिशा की गाँड में एक झटके के साथ घुस गया। रिशा जोर से चींखी, “ऊऊऊईईईईईई माँ ओ ओ ऊईईईईईई ओह ओह ऊई ! मैं मर गयी। ऊईई मेरी गाँड फट गयी ऊऊऊऊ हाय माँ ओई मेरी गाँड फट गयी। प्लीज़ बाहर निकाल लो।”

रिशा ने अपना मुँह तकिये में घुसा दिया। वो दर्द से सुबक रही थी और बोल रही थी, “मेरी गाँड फाड़ दी, ऊईई मेरी गाँड फट गयी, बाहर निकालो नहीं तो मैं मर जाऊँगी।”

राजू उसकी चूंचियों को फिर से अपने हाथों से पकड़ कर मसलने लगा।


रिशा फिर बोली, “प्लीज़ बाहर निकालो राजू वरना मैं मर जाऊँगी।”

राजू ने उसकी चूंचियों को थोड़ा जोर दे कर दबाया और उससे कहा, “भाभी मैं तुम्हें मरने नहीं दुँगा, बस थोड़ी देर में ठीक हो जायेगा।”

रिशा अपना बाँया हाथ अपनी गाँड पर लायी और राजू के लौड़े को छू कर बोली, “उफफ ये बेहद मोटा है, इसने मेरी गाँड फाड़ दी… हाय।”

राजू ने उसकी चूंचियों को और थोड़ा जोर देकर मसला और पूछा, “क्या बहुत मोटा है?”

रिशा बोली, “वही जिसे तुमने मेरी गांड में घुसा रखा है।”

राजू ने फिर से पूछा, “यह क्या है, इस को क्या कहते हैं?”

रिशा ..”मुझे नहीं पता, तुम्हें पता होगा। मेरे से कुछ बोला भी नहीं जा रहा और तुम बिल्कुल मत हिलो, ... मुझे दर्द हो रहा है... बस आराम से अंदर डाल कर पड़े रहो।”

राजू ने फिर से रिशा से कहा, “पहले इसका नाम ले कर बोलो भाभी जैसे चूत चुदाई के वक्त बोल रही थी!”

रिशा राजू के आँडों को अपने हाथों से दबाती हुई बोली, “तुम बहुत बेहया हो, मुझसे गंदी बातें करवाना चाहते हो।”

रिशा ने अपना चेहरा घुमाया और राजू के सिर को पकड़ कर अपने चेहरे के पास ले आयी और राजू के कान मैं फुसफुसा कर बोली, “राजू तेरा इतना मोटा लंड अपनी गाँड में ले कर बेहया बनी हुई तो हूँ, और क्या चाहता है तू।”

ये सुन कर राजू बहुत गरम हो गया और रिशा की गाँड में अपना लंड धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा। रिशा की गाँड इतनी टाईट थी कि लंड को अंदर-बाहर करने में काफी जोर लगाना पड़ रहा था।

रिशा फिर चींखी और बोली, “नहीं प्लीज़ हिलना नहीं, मुझे बहुत दर्द हो रहा है, अभी ऐसे ही रहो... जब मेरी गाँड की तुम्हारे लंड से दोस्ती हो जाये तो फिर हिलना।”

राजू ने अपना हाथ रिशा के पेट के नीचे ले जा कर उसकी चूत में अपनी अँगुली डाल दी। जिससे रिशा को थोड़ा अच्छा लगने लगा ! फिर थोड़ी देर के बाद राजू रिशा की गाँड धीरे-धीरे चोदने की कोशिश करने लगा। रिशा चिल्ला रही थी, “ऊऊऊईईईईईई..... नहीं मैं मर जाऊँगी। मेरी गाँड फट जायेगी, प्लीज़ अभी अपने लंड को नहीं हिलाओ!” लेकिन राजू ने अबकी उसकी एक ना सुनी और उसकी गाँड जोर जोर से चोदने लगा। थोड़ी देर के बाद रिशा को भी मज़ा आने लगा और वो अपनी गाँड लंड के धक्कों के साथ आगे पीछे करने लगी। थोड़ी देर उसकी गाँड चोदने के बाद राजू का वीर्य उबलने लगा“ओह भाभी, मैं अब छूटने वाला हूँ।”

तब रिशा लंड को अपनी गाँड के और अंदर लेती हुई बोली, “अपने लंड को मेरी गाँड के अंदर छूटने दो और मेरी गाँड को अपने लंड की मलाई से भर दो!”


इसके साथ ही राजू ने दो चार और तेज़-तेज़ धक्के मार कर रिशा की गाँड के अंदर अपने लंड की पिचकारी छोड़ दी। रिशा ने भी राजू के झड़ने साथ ही अपनी चूत का पानी छोड़ दिया।

थोड़ी देर तक राजू रिशा की पीठ के ऊपर पड़ा रहा और फिर उसकी गाँड में से अपना लंड निकाला। लंड उसकी गाँड में से “पुच” की आवाज से बाहर निकल आया। रिशा जल्दी से उठ कर बाथरूम की तरफ़ भागी और थोड़ी देर के बाद राजू भी बाथरूम में चला गया। रिशा राजू के लंड को देखती हुई बोली, “देखो मेरी गाँड मार के कैसे मरे चूहे जैसा हो गया है।”मेरे तो जैसे शरीर में जान ही नहीं बची!


राजू मुस्कुराकर बोला, “अभी तो शुरू किया है भाभी। और करना है मुझे बहुत दिन से तड़प रहा था।

रिशा ने राजू के हाथ को पकड़कर अपने दोनों हाथों के बीच में रखा और बोली, “किसी को को पता मत चलने देना, पूरी जिंदगी तेरी कुतिया बन के रहूंगी।”
राजू बोला, “भाभी, तुम तो मेरी रानी हो। कुतिया तो बस चोदने के टाइम बनाऊंगा।”


कुछ देर आराम करने के बाद दोनों के बदन फिर से सुलगने लगे। आज की रात दोनों में से कोई भी सो कर बरबाद नहीं करना चाहता था . दोनों की आंखों में फिर से वासना के डोरे तैरने लगे, पूरी रात भर दोनों ने एक दूसरे को चूमते, चुस्ते चाटते हुए बितायी। उस रात रिशा की कई बार चूत चुदाई हुई और राज ने भी अगणनीत बार अपने लौड़े का प्रसाद रिशा को पिलाया।
[+] 1 user Likes nitya.bansal3's post
Like Reply
Do not mention / post any under age /rape content. If found Please use REPORT button.
#82
लगाव केवल शब्द नहीं,
एक एहसास है...
संबंधों में घुला हो, तो
विश्वास है...
इंसान जितना इस
संसार में खोया रहता है...
अगर उतना परमात्मा में खो जाए
तो जीते जी मुक्त हो जाए..

[Image: 869dc1500cb9404c449cf9fa27f007e9.jpg]
[+] 1 user Likes nitya.bansal3's post
Like Reply
#83
आँख खुलते ही याद आ जाता है
तेरा चेहरा,
दिन की ये पहली खुशी भी कमाल
होती है...!!

[Image: 686968980-122139350498999165-6495556147136946179-n.jpg]
[+] 1 user Likes nitya.bansal3's post
Like Reply
#84
जब राजू जैसा देवर हो घर पर और अपना पति हो दूर

तब देवर के आगे घोड़ी बनाने को औरत हो जाती मजबूर

देवर को भी जब मिले बजाने को भाभी की गांड कुंवारी

फ़िर सारे छेद बजता है वो भाभी के बिस्तर पर बारी बारी

अक्सर भाभी भी गरमा जाती है देवर का देख के जोश

फ़िर चूत चुदी या गांड चुदी कहां रहता है उसको होश

[Image: 689226330-961740050167508-6624987732701414479-n.jpg]
[+] 1 user Likes nitya.bansal3's post
Like Reply
#85
आखिरी अपडेट में आपने पढ़ा कि कैसे राजू ने रिशा के साथ अपनी सुहागरात मनाई और उसकी कुंवारी गांड अपने लौड़े से फाड़ दी। रिशा ने भी पूरा साथ देते हुए पूरी रात राजू के साथ खूब मजे किये.


अब आगे..
सुबह जब आँख खुली तो उसने पाया कि रिशा बिस्तार पे नहीं थी। उसकी नज़र घड़ी पे गयी। . . . 8 बज चुके थे. बाथरूम से रिशा के गुनगुनाने और शॉवर की आवाज आ रही थी। राजू भी उठ कर अपने कमरे तक गया और फ्रेश हो लिया। पूरा समय उसकी आँखों के सामने रात की झलकियाँ तैर रही थी। उसका ध्यान रिशा के जिस्म से हट ही नहीं पा रहा था। खासकर के उसके सुडोल नितंब जैसे उसके दिमाग में छप गए हो। रात की रंगरलियां याद आते ही उसकी उत्तेजना फिर बढ़ गई और लौड़ा फिर से फनफना उठा। उसने तौलिया कमर पे लपेटा और रिशा के कमरे की तरफ बढ़ गया। उसमें जैसा कोई नशा सा सवार था। सोचने समझने की शक्ति गम हो चुकी थी और आँखों में बस एक ही तस्वीर थी... रिशा की मखमली मुलायम चिकनी गांड... जब वो उसके कमरे में पहुंचा तो रिशा अभी भी बाथरूम में ही थी। वो कोई सुरीला सा गीत गुनगुना रही थी। उसे पता भी नहीं चला कि राज कब बाथरूम में आ गया। चूंकि रिशा का मुँह शॉवर की तरफ था उसे कुछ दिखाई ना पड़ा। राजू ने अपना तौलिया खोल कर एक तरफ फेंक दिया और रिशा के ठीक पीछे जा कर उसे निहारने लगा। गुनगुने पानी की धार में रिशा का भीगता बदन चमक रहा था। सुराहीदार कमर से बहता हुआ पानी उसके मुलायम फूली हुई चुत्तडो को भीगोते हुए उसकी जांघों को नहला रहा था। रेशमी दूधिया रंग की गोरी जांघें कुल्हों का सौंदर्य दोगुना कर देती थी। राजू ठीक रिशा के पीछे घुटनो के बल ज़मीन पर बैठ गया और अपना चेहरा बिलकुल गांड के करीब ले आया। उसकी निगाहें एकटक रिशा की फूली हुई उभरी गांड को देख रही थी। सुडोल मंसल जांघें जब भी थोड़ी हिलती दोनों कुल्हे यूं थिरक पडते जैसे पानी भरे गुब्बारे, और ऊपर से झरनो की तरह गिरता पानी उनसे छल कर राज के चेहरे को भीगा रहा था।

राजू भी वासना में लिपटे हुए उस पानी में खुद को तार कर रहा था जैसे वो अमृत स्नान कर रहा हो। जब उससे रहा ना गया तो हाथ बढ़ा कर उसने रिशा की कमर थाम ली और कुल्हों के बीच लम्बी दरार को जीभ से चाट लिया। रिशा अचानक हमले के लिए तैयार न थी और उसने घबरा कर पीछे देखा। उसकी हैरानी का ठिकाना ना रहा जब उसने राजू को फर्श पर बैठा देखा। राजू और उसकी नजरें टकराईं. रिशा बड़ी बड़ी आँखों लिए सारा नजारा देख रही थी। राजू ने फिर उसकी गांड की दरार में जिभ रगड़ दी। एक मखमली सिस्की बाथरूम में गूंज गई। "स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्श!!" राजू ने रिशा पर नज़रें गढ़ाई राखी और कुल्हो को चाटना शुरू कर दिया। गांड पर बहता पानी अमृत समान पीते हुए उसने पूरी चूतड़ का रसस्वादन किया। रिशा की आंखें भी वासना से लाल होने लगीं। उसने सामने दीवार पर दोनों हाथ टिकाए और कुल्हो को पीछे की ओर ढकेल दिया। अब राजू का पूरा चेहरा उसके नितंबों के बीच धसा हुआ था, और वो पूरी मस्ती से गांड का रसपान कर रहा था। उसकी हथेलिया सरकती हुई उसके कुल्हो पर टिक गई। गरम हथेलियों के स्पर्श से रिशा के रोम रोम खड़े हो गए और वो भी मस्ती में आ गई।
[Image: IMG-7141.jpg]
उसने कमर लचका कर गांड राजू के चेहरे पर रगड़नी शुरू कर दी। राजू ने भी उसके कुल्हो की मस्त मालिश शुरू कर दी। बीच में वो कुल्हों को काट भी लेता, और मुँह में भर कर चूसता भी। रिशा पगलाये जा रही थी. उसके पैरों के बीच दूरी बढ़ती जा रही थी। एक हाथ नीचे लाकर उसने अपनी चुत रगड़नी शुरू कर दी। शावर अभी भी चालू था और दोनों अब पानी से तरबतर थे। राजू ने उसके नितंबो को दोनों हथेलियाँ से पकड़ लिया और फेला कर गांड के छेद पर कड़क जीभ की ठोकर मारी। रिशा बस आह करके रह गई। राजू ने अब तबियत से उसकी गुदा पे वार करने शुरू कर दिए। रिशा के उन्माद का तूफ़ान उफ़ान मारने लगा। वो कमर हिला हिला के राजू की ठोकरों का जवाब दे रही थी। यूं ही थोड़ी देर और चलता रहा। आख़िर राजू ने अपना अंगूठा उसके छेद में पेल दिया। रिशा मचल उठी. राजू ने उसकी जाँघों को चाटना शुरू किया तो रिशा की उंगली उसकी कोमल चूत में दाख़िल हो गई। अब राजू का अंगूठा उसकी गांड मार रहा था और रिशा की उंगलियाँ अपनी ही चूत पेल रही थी। साथ ही साथ राजू की जीभ उसकी गांड और जांघों के हर एक कोने को नाप रही थी।

थोड़ी ही देर में रिशा झड़ने लगी। राजू ने झट से मौके का फ़ायदा उठाया और सीधा खड़ा होकर रिशा की गांड पर अपना लंड रख दिया। गरम लौड़े के स्पर्श से रिशा पगला गई और उसका ओर्गासम और तेज़ हो गया। राजू ने सुपाड़े को उसके छेद पर टिकाया। गरम सुपाड़े के गांड के छेद पर स्पर्श होते ही रिशा समझ गई आगे क्या होने वाला है। लेकिन उसका शरीर अब उसके बस से बाहर चला गया था। उसने बस सुबकते हुए शॉवर के मुँह को पकड़ लिया। बहते पानी में कोई उसके आनंद के आंसू नई देख पता। उसने पीछे मुड़कर राजू को देखा। राजू की नज़रें उससे लड़ीं, और रिशा ने हां में सर हिलाया। राजू ने कमर को एक झटका दिया और गीला सुपाड़ा फच्च की आवाज करते हुए उसके छेद में दाखिल हो गया। राजू ने मदहोश कर देने वाले कसाव का अनुभव किया। उसने कमर थोड़े पीछे कर के एक मजबूत शॉट लगाया और लंड गांड को मानो चिरता हुआ जड़ तक रिशा की गांड में धंस गया। रिशा की एक लंबी चीख निकल पड़ी, जिस पर ध्यान दिया बिना राजू ने फिर धीरे से लंड पीछे खींचा और वापस जड़ तक पेल दिया। फिर तो गांड मरने का सिलसिला वापस शुरू हो गया। राजू धीरे से लंड सुपाड़े तक बाहर खिंचता और पूरे दम से गांड में पेल देता।. रिशा का बदन पूरा तन चुका था। वो दीवार पर चिपकी हुई थी और उसकी गांड पीछे को तनी हुई थी जिसमें राजू के शॉट दमदार पड रहे थे। गरम जिस्म से उठी भाप से कांच शावर सेक्शन धुंधला पड़ गया था। जब-जब राजू शॉट लगता था वो रिशा की गांड को अपनी तरफ खींचता था जिसका शॉट तगड़ा पड़ता था। रिशा बस दीवार पे सर टिकाए हुए अपनी गांड मरवा रही थी। पूरा बाथरूम में गीले जिस्मो के टकराने की आवाज गूंज रही थी। आवाज़ के साथ रिशा की सिसकिया भी गूँज रही थी। "आह!!... आह!!.. हाऐई!!.. मर गईई!!... ऊउमाआ!! आआह!! आह!! आह!! स्स्स!! सीई!! और तेज राजू!! और तेज!! आह!! आह! आह!!" राजू की मजबूत पकड़ से रिशा की मखमली गांड पर गुलाबी निशान पड़ गए थे, और ठोकरो ने उसके नितंबो को लाल कर दिया था। राजू से रहा ना गया और उसने रिशा की गांड पर एक जोरदार तमाचा जड़ दिया। "चटाक!!" रिशा की चीख निकल गयी, "आआअहहहहहहहहहहह!!"

थप्पड़ पड़ते ही उसके नितंब कड़क हो गए, जैसे राजू के लौड़े पर प्रेशर दोगुना हो गया। दोनों को बहुत मजा आया. राजू ने एक और शॉट लेते हुए फिर एक थप्पड़ दूसरे कुल्हे पे मारा, “चटाक्क!!” “ऊऊऊउम्माआ!! गांड का कसाव और बढ़ गया. लंड और जकड़ गया. राजू पूरी मस्ती में आ गया और उसने चांटो की झड़ी बरसा दी। "ताड़!! तड़ाक!! चटक!! ताड़!! ताड़!! ताड़! तपक!! तड़!! तड़!! ताड़!! उधर रिशा की चीख भी निकलती लगी। "और तेज!!...और तेज!! आआह्ह्हा!!आह!!हाहा!!...हां!! और तेज!! जियो मेरे राजा!! और मारो...मार मार के लाल कर दो मेरी गांड!! जब रिशा की पूरी गांड लाल हो गई तो राजू ने अपना शॉट हल्के कर दिया, और गांड की अंदर की दीवारों को अपने लंड से मालिश करने लगा। उसने नरम पड़ चुकी गांड पर हाथ फिराये तो रिशा की कराह निकल गयी। “आआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआ

राजू ने रिशा को खींच कर अपने सीने से चिपका लिया और गालों का चुम्बन लेते हुए उसके होठों तक पहुंच गया। साथ ही उसने गांड पेलना जारी रखा. रिशा भी उसके धक्को का जवाब देने में पीछे नहीं थी। दोनों की जुबान एक दूसरे के होठों को चाट रही थी। दोनों की जिभ एक दूसरे पर लाप्लापा रहे थे और हाथ जिस्म से खेल रहे थे। राजू ने उसके भरे हुए स्तनो को थाम लिया और उन्हें मस्ती में मसलने लगा। अपने चुचिओ की ऐसी बेरहम ट्रीटमेंट से रिशा थोड़ी घबराई की राजू कहीं उतावलेपन में उसे खरौंच ना दे। लेकिन राजू केवल उसके स्तनों को मसलता और बीच-बीच में उसके निपल्स को भी छेड़ देता। निपल्स के साथ ये खिलवाड रिशा को बेचैन कर रहा था। चुदाई काफ़ी धीमी चल रही थी और दोनों जिस्म एक दूसरे से चिपके हुए एक लय में झूम रहे थे। रिशा भी एक हाथ से अपनी चूत में उंगली कर रही थी। राजू ने एक हाथ नीचे को ले जा कर उसके हाथ के ऊपर रख लिया, और अपनी भी एक उंगली रिशा की उंगली के बीच से उसकी चूत में पेल दी। इस अनोखे युद्ध से रिशा की सांसें ही अटक गई और वो अचानक ढेर सारा पानी पी गई..

उसने शॉवर से अपना मुंह अलग किया और सांस लेने लगी लेकिन राजू की उस हरकत से उसका बदन तन कर बिल्कुल सीधा हो गया था और जाने अंजाने रिशा भी अपने पैरों की उंगलियों पर खड़ी थी। इस पोजीशन में लंड और गांड एक सीध में आ गया, जिसका सीधा भेदन संभव हो गया था। एंगल की रुकावट जैसी ही हटी राजू की गति अपने आप तेज हो गई। उसने पूरे जोश में रिशा की गांड लेनी शुरू कर दी। बड़ा ही अजीब सा खुशनुमा एहसास था. रिशा की गांड में उसका लंड और चूत में दोनों की उंगली। वो मन से चाहता था कि ये पल कभी ख़तम ना हो। रिशा भी इस एहसास से जुदा ना थी। अब तक वो 5 बार झड़ चुकी थी और अब वो भी दिल से चाहती थी कि चुदाई कभी ख़तम ना हो। वो चली तो थी राजू का जानवर जगाने लेकिन राजू ने उसके अंदर की ज्वाला जगा दी थी। वो भी मस्त होकर राजू के लंड का आनंद लेने लगी उसकी चूत ने फिर एक बार दम तोड़ दिया और वो फिर से पानी छोड़ने लगी।

सच कहा था चाणक्य ने कि औरत की भूख मर्द से चार गुना ज्यादा ही होती है। उसने हाथ पीछे लेजाकर राजू के कड़क नितंबों को थाम लिया और चुदाई में उसका जी भर के साथ देने लगी। राजू झटका देता तो वो और जोर से राजू को अपनी और खिंचती। उसके नाखून राजू के निताम्बो में गड़ गए थे। राजू पे इस दर्द ने अंकुश जैसा काम किया और वो पगलो की तरह शॉट लगाने लगा। दोनों जिस्म एक दूसरे से गोंद की तरह चिपके हुए। पानी भी उनकी गर्मी शांत करने में नाकाम रहा था। एक दूसरे को यूं ही उलझे हुए वो दोनों चुदाई जारी रखे हुए थे। राजू का ज्वालामुखी बस फटने ही वाला था। उसने रिशा की चुचिओ पर अपनी पकड़ और मजबूत कर दी और तभी वो मनोनमद में समा गया। गांड के अंदर गरम लावा जैसा वीर्य भरने लगा। वीर्य की गर्मी से रिशा का भी ओर्गास्म हो गया और वो अपनी चूत में उंगली करती हुई झड़ने लगी। दोनों एक दूसरे को कस कर थामे हुए थे और वासना की लहरो के रुकने का इंतज़ार कर रहे थे। राजू रिशा के कंधों को तब तक चूमता रहा जब तक उसका सारा वीर्य उसकी गांड में ना उतर गया।

रिशा ने धीरे से अपनी गांड से लंड निकाला और पलट कर घुटनो के बल ज़मीन पर बैठ गयी। उसने राजू का लंड अपने मुँह में भर लिया और चूस चूस कर सारा रस निचोड़ने लगी। लंड से अचानक दो पिचकारी और निकली और रिशा का गला तर हो गया।[Image: IMG-7149.jpg] 

फिर उसने साबुन लेकर लंड को धोना शुरू किया और फिर राजू के पूरे बदन पर साबुन लगाया। राजू ने भी उसके बदन के एक एक कोने को साबुन से नहलाया और दोनों काफी देर तक दूसरे के चिकने बदन को सहलाते हुए किस करते रहे। फिर शॉवर से दोनो ने एक दूसरे के बदन से साबुन साफ किया। सारी हरकतों से राजू का लिंग फिर तनने लगा। अब चूंकि दोनों नहा चुके थे तो रिशा की नज़र उसके पानी में चमकते लंड पर पड़ी। लंड आधा खड़ा देख उसने एक दबी सी मुस्कान से उसे थाम लिया और नीचे झुक कर उसे पूरा मुँह में भर के एक बार जोर से चूसा। फिर सुपाड़े पर एक जोर का चुम्मा जड़ दिया। राजू का लौड़ा फिर तन गया तो उसने एक चांटा उसका लंड पे दिया और बाथरूम से निकल कर कमरे में चली गई।
[+] 2 users Like nitya.bansal3's post
Like Reply
#86
मोहब्बत
ऐसी दे दो जिस पर हक सिर्फ
हमारा हो..❣️
हम "तन्हा" भी रहे तो
तुम्हारी यादों में रहे.....
इतना "असर "हम पर तुम्हारा हो..!!

[Image: 698876292-122112620307265634-6971840990462516670-n.jpg]
[+] 1 user Likes nitya.bansal3's post
Like Reply
#87
इश्क़ होता है तो होने
दीजिए जनाब......!!!
मीठे जहर के शौकीन
हम भी कुछ ज्यादा ही हैं....!!!

[Image: 696968176-1583590983774122-1267410871532381874-n.jpg]
[+] 1 user Likes nitya.bansal3's post
Like Reply
#88
अब आगे..

राजू भी अचानक पड़े थप्पड़ से निहाल हो गया और तौलिया लैपेट कर बाहर आया तो देखा कि रिशा अपने बदन पर मॉइस्चराइजर से मालिश कर रही है। दोनों ने एक दूसरे को मुस्कुराते हुए देखा। रिशा ने राजू को यूं मुस्कुराता देख पूछा

[Image: IMG-7246.jpg]

रिशा.."क्या देख रहे हैं देवर जी. अभी भी भूख बाकी है क्या"

राजू.."तुम्हारी जैसी जिसकी भाभी हो उसका पेट कहां भरता है जल्दी"

रिशा: कल रात भी सोने नहीं दिया और अभी बाथरूम में भी पूरा निचोड़ लिया। मार मार के मेरी गांड और चूत दोनों की हालत खराब कर दी है। बस अब जल्दी से दुकान पर जाओ। बाकी रात को देखेंगे" जितनी बार तुमने कल रात से चोदा है इतना तो तुम्हारे भाई ने छह महीने में नहीं चोदा रिशा ने उसे एक शरारत भरी आंख मारी और खिलखिला पड़ी।




राजू...लेकिन भाभी आज तो रविवार है...छुट्टी है तो हम दोनों पूरे दिन ऐश कर सकते हैं

रिशा...नहीं बाबा मेरे पास अब हिम्मत नहीं दोबारा तेरा ये मोटा लंड लेने की.. और अभी नाश्ता भी तैयार करना है मुझे. तू अभी जा अपने कामरे में. नाश्ता त्यार करके तुझे आवाज़ देती हूँ

राजू मुस्कुराता हुआ अपने कमरे की तरफ बढ़ गया। अभी तो पूरा दिन बाकी था... ना जाने आगे क्या होगा? ये सोच कर रिशा हौले से मुस्कुराई और वापस अपने काम में लग गई। आख़िर उसके अंदर की औरत जाग गयी। राजू को इनाम तो देना ही पड़ेगा... और वो तैयार होकर किचन में नाश्ता बनाना चली गई। थोड़ी देर में कामवाली आई और साफ अफ़ाई के बीच नाश्ता भी बन के तैयार हो गया। कामवाली के जाते ही रिशा ने नाश्ता लगाया और राजू को आवाज लगाई... उसके मन में एक ही ख्याल चल रहा था... "राउंड 2"... और उसने मुस्कुराते हुए राजू को नाश्ते की टेबल पर आते देखा।

राजू: क्या बनाया है भाभी?

रिशा: तुम्हारे लिए ब्रेड ऑमलेट और दूध। काफ़ी ज़रूरत है तुम्हें. कल सुबह से मेहनत कर रहे हो।

राजू: मेहनत तो तुम भी कर रही हो मेरे साथ भाभी"

रिशा: मैं तो कल से तुम्हारा प्रोटीन शेक पी रही हूं। पूरा पेट भरा हुआ है. कितना माल निकलता है तुम्हारा"




राजू ये सुन थोड़ा शर्माया और पूछ..तुम्हें पसंद नहीं क्या प्रोटीन शेक"

रिशा:" बहुत पसंद है...एक दम गाडा और मलाईदार। ऐसा बोल रिशा खुलखिला के हंस पड़ी

“पर भाभी मुझे तो तुम्हारा दूध पीना है..इन मोटी मोटी गदराई चूचियो से ” रिशा की चुचियो को हाथो से दबते हुए राजू बोला




रिशा: लेकिन यहाँ तो अभी दूध कहाँ आता है देवर जी। और इनमें दूध तो तब आएगा जब मैं माँ बन जाऊँगी . अब तुम्हारे भैया तो यहां हां नहीं जो मुझे मां बना सके..तो फिल्हाल इस गिलास से दूध पी लो.

[Image: IMG-6969.jpg]

राजू... भाभी मेरे बच्चे की माँ बनोगी?

रिशा...धत्..ऐसे कैसे हो सकता है.?

राजू..क्यों नहीं हो सकता भाभी? मैं अपना बीज तुम्हारी कोख में डाल दूंगा तो तुम भी मां बन जाओगी

रिशा..और दुनिया को क्या बोलूंगी कि किसका बच्चा है मेरे पेट में..तुम्हारे भैया तो छह महीने से घर नहीं आये…ये मुमकिन नहीं है राजू लेकिन मेरे वादा है तुमसे कि जब भी इनमे दूध आएगा तुम्हें जरूर पिलाउंगी....

ये सुन राजू ने रिशा को अपने आगोश में ले लिया और उसके होंठ चूमते हुए उसकी चुचिया और जोर से दबाने लगा


 

रिशा: रुक जाओ राजू वरना मैं अभी अपने होश खो दूंगी। अभी तुम जल्दी से नाश्ता ख़तम करो और थोड़ा आराम करो..रात को फिर से मेहनत करनी है तुम्हें.

राजू नाश्ता करके राजू अपने कमरे में चला गया। रिशा भी अपने रोज के काम निपटाने लगी।

थोड़ी देर बाद वो फुर्सत हुई तो देखा दोपहर होने ही वाली थी। उसने झटपट खाना बनाया और राजू को आवाज दी। राजू चुप चाप आया और खाना खाने लगा। खाना बहुत स्वादिष्ट था. उसने रिशा के खाने की खूब तारीफ की। रिशा भी खुश होकर उसे और प्यार से खिलने लगी। कभी कभी बिच में एकाध कौर खुद ही उसे खिला देती। दोनों ऐसा व्यवहार कर रहे थे जैसा नया प्रेमी जोड़ा। राजू खाना खा कर आराम करने चला गया। रिशा ने भी लंच किया और थोड़ी देर टीवी पर कुछ देखा और सो गई। शाम होने को ही थी उसकी आँख खुली। उसने देखा कि 4 बजे हैं, तो सोचा कि राजू को उठा दे। राजू के कमरे में पहुच कर देखा तो औंधा हुआ सो रहा था। रिशा उसके पास बिस्तर पर बैठ गई और प्यार से उसके बालों में उगलियां फिराते हुए उठे की कोशिश करने लगी। राजू अभी भी गहरी नींद में था और उसने एक करवट ली और सीधा लेट गया । उसने केवल अपनी अंडरवियर पहन ली थी। रोशनी में उसका बदन देख रिशा ने अपना होंठ काट लिए। राजू का माँसल पुश्त शरीर देखते ही उसकी आँखों में लाल डोरें तैरने लगी। उसकी नजरें राजू के अंडरवियर पे जा टिकी। उसका भारी लिंग उसमें समा ना रहा था। जबकी लंड खड़ा भी नहीं था. रिशा समझ गई कि अब उसे क्या करना है। राजू की रात की हरकत का भी तो जवाब देना ही था।



सोचते ही उसकी जाँघों के बीच तेज कम्पन हुआ और वो उठ कर राजू के सामने खड़ी हो गई। उसकी नज़रें एकटक उसकी जाँघों के बीच टिकी हुई थी। यूं शरारती ख्याल मन में भरे हुए उसने अपने लहंगे का नाडा खोला तो लहंगा उसकी मुलायम जांघों से सरकता हुआ फर्श पे गिर गया। अब वो केवल नारंगी रंग की पैंटी और काले रंग की झीनी चोली में खड़ी थी। उसने ब्रा नई पहनी थी. उसकी नज़रें खुद अपने बदन को निहारने लगी। उसे हमेशा अपनी जवानी पे नाज़ था।


अपने भरे हुए बदन के कारण वो मोहल्ले और कॉलेज में हमसे मशहूर थी। उसके हाथ अपने बदन को सहलाने लगे। उसके हाथ पहले रेशमी जाँघों से होते हुए सुराहिदार कमर पे और फिर अपने भरे हुए कोमल माँसल चुचिओ पर जा कर टिक गए। रिशा ने उन्हें बड़े प्यार से सहलाया।

अपने चुचिओ का भारीपन उसे बड़ा भाता था । कभी मस्ती करने के लिए वो टाइट ब्लाउज बिना ब्रा के पहन कर घुमने निकल जाती थी। उसके छलकते माँसल उभारो को देख कर जाने कितनो के दिल पे छुरिया चल जाती थी। उसने ब्रा में कसे स्तनो को जोर से दबाया तो उसकी हल्की सी आह निकल गई और उसने मस्त होकर अपने निपल्स को मसल दिया जिसे वो और कड़क हो गई।



फिर उसके हाथ अपने चेहरे तक पहुंच गए। उसकी हथेलियाँ अपने चेहरे को सहलाने लगीं। धीरे-धीरे उसकी उंगलियां अपने रेशमी गेसुओं में लिपट गई और उसने कस कर अपने बालों को जकड़ लिया और उन्हें थोड़ा और बिखरा दिया। उसकी नज़रें अभी भी राजू के लंड पर अटकी हुई थी। वो कमर के बल झुक गई और हथेलियां बिस्तर पर टीका दी।

 
फिर बिल्ली की चाल से चलते हाथ और घुटनो के बल बिस्तर पर चढ़ गई। उसका एक घुटना राजू की टांगों के बीच था और दूसरा एक टांग के बगल में। उसने झुक राजू की जाँघों को जीभ से चाट लिया।

 
मर्दानी खाल का स्वाद पाते ही वो उत्तेजित हो गई और राजू की जाँघों को हौले हौले अपनी जीभ से नहलाने लगी। राजू की टांगें नींद में ही फ़ैल गई। उसका लिंग अब पूरा तन चुका था और उसका सुपाड़ा अंडरवियर से बाहर निकला हुआ था। रिशा ने जिभ से उसके टोपे को चाट लिया। राजू ने नींद में करवट ले ली. रिशा ने मुँह बनाया फिर धीरे से मुस्कुरा दिया।

[Image: IMG-6823.jpg]

राजू की ये मासूम सी हरकत उसे और प्यार करने पर मजबूर कर रही थी। लेकिन अच्छी बात ये थी कि राजू ने करवट ले ली थी। रिशा अभी भी उससे नींद में छेड रही थी! उसने दांतों से उसके अंडरवियर का बैंड खींच कर धीरे से घुटने तक खींच लिया। फिर एक उंगली फंसा कर धीरे से अंडर वियर उसके तन से अलग कर दिया। राजू अब पूरा नंगा था. उसका कसरती बदन देख कर रिशा के मुँह में पानी भर आया। मर्दाना चुस्ती, तीखे नैन नक्श, और जांघों के बीच उसकी मर्दानगी का सबूत।


रिशा उसके लिंग को हैरानगी से देख रही थी। वो सख्त और तना हुआ था, और यूं लहरा रहा था जैसे किसी नाग का फन। रिशा के शादी से पहले दो-तीन लड़कों से संबंध रहे द पर केवल ओरल। लेकिन किसी का और उसके पति का भी लौड़ा इतना लम्बा चौड़ा और तगड़ा ना था। पति जोर लगाता था लेकिन जल्दी दम तोड़ देता था। पर राजू तो जैसे सेक्स मशीन की तरह लगता था ..एक ही बार में जान निकाल देगा। रिशा के सामने रात का खेल घूम गया। उसने धीरे-धीरे राजू के सीने को चूमना शुरू किया। उसके सख्त बदन पर नाज़ुक होठों के चुम्बन देते हुए वो ऊपर को बढ़ने लगी। घुटने से ऊपर पहुचते ही राजू ने एक और करवट ली और चित्त लेट गया। रिशा मन ही मन मुस्करायी। अब उसका लंड हवा में सीधा तन गया था।

रिशा ने अपने चुम्बन जारी रखे और जाँघों तक पहुँच गई। राजू की टांगें अपने आप नींद में फ़ैल गईं। रिशा अब लंड के बहुत करीब पहुँच चुकी थी। लौड़ा अब सख्त होकर पूरा तन चूका था, और राजू के पेडु पर लेटा हुआ था। रिशा उसकी जाँघों को गीले चुम्बन से नहलाते हुए लंड की तरफ बढ़ गई। उसके होंठ राजू के अंडकोष पर थे। सांसों की भीनी गर्मी उसकी गोलियों पर पड़ रही थी। रिशा ने जीभ निकाल कर उसके टट्टो को चाट लिया। एक भीनी सी गरम खुशबू उसके गुप्तांगों से उठ रही थी। रिशा ने खुशबू सांसों में भरी और वापस टट्टो को चाटना शुरू कर दिया। अंडे अब पूरे गीले हो चुके थे. लार की लड़ियाँ होठों और टट्टो के बीच झूल रही थी। रिशा से अब मजा आ रहा था। उसने आगे बढ़कर राजू के लंड को नीचे से लेकर ऊपर सुपाड़े तक होठों में ले लिया और एक बार जीभ से गिला किया और फ़िर सुपाड़ा मुँह में ले लिया।


 
राजू ने अपने लंड पर कुछ गर्म महसूस किया और उसकी नींद खुल गयी। इस पहले कि वो कुछ समझ पाए रिशा ने एक सांस में उसका तीन चौथाई लंड मुँह में भर के जोर से चुसना चालू कर दिया।


राजू की आँखें फट पड़ी और उसने अंजाने में अपने कमर को एक झटका दिया तो लंड रिशा के गले तक उतर गया। रिशा इसके लिए तैयार न थी और सांस अटकने से उसके गले में तेज संकोचन हुआ जो लौड़े को और ज्यादा दबाता चला गया। राजू के मुंह से इक आह निकली और उसने नीचे देखा तो वहां का नजारा देख वो पूरे जोश और होश में आ गया। उसने एक शैतानी मुस्कान भरी और रिशा के सर पे एक उंगली रख कर उसे नीचे दबाया। रिशा गले तक फंसे लौड़े के कारण सांस नही ले पा रही थी। लेकिन राजू का चैलेंज स्वीकार कर के उसने लौड़े पे और दबाव बनाया और उसे अंदर ले लिया। अब उसकी नाक राजू के पेड़ू को छू रही थी, और अंडकोष उसकी ठोड़ी पे ठोकर मार रहा थे। रिशा को सांसों की बहुत ज़रूरत थी। उसके गले की दीवारें लंड पर कसी हुई और वो भी सांस रोके अपनी जीभ से लंड के निचले हिस्से को नहला रही थी। राजू ने देखा कि रिशा का चेहरा गुलाबी पड़ रहा था। उसने उसकी ठोड़ी को एक उंगली से ऊपर उठाया। गीला चिकना लंड किसी नाग की तरह रिशा के गले से बाहर निकल आया। रिशा ने ऊपर आते ही तेज सांस भारी। थोड़ी खांसी भी उसको हुई । लार की मोटी लड़िया पूरे लंड से निकली हुई रिशा के होठों और ठोड़ी पर लगी थी। राजू ये नजारा देख और कामुक हो गया. उसने आगे को सरक कर रिशा को अपनी बाहों में भर लिया और उसके गीले चेहरे को चाट कर साफ करने लगा। रिशा भी जी भर कर उसे चूमने लगी। वो उसके होठों को अपने गीले होठों के बीच लेकर चुस रही थी।



राजू ने उसकी चोली ढीली कर दी और खींच कर बदन से अलग कर दी। उसके दोनो भारी स्तन छलक कर अपने बंधनो से आजाद हुए ही थे कि राजू की हथेलिया उन पर जाम हो गई। राजू उनको जम कर रौंद रहा था. रिशा भी बार-बार चुचिओ को आगे ढकेल कर उसे न्योता दे रही थी। उसने भी राजू के लंड को कस कर मुट्ठी में बांध लिया और जोर जोर से रगड़ने लगी। उसकी इस हरकत से राजू पगला गया और एक के करके उसके निपल्स को चुसने लगा। काफ़ी देर तक दोनों एक दूसरे के बदन से खेलते रहे। लेकिन दोनों की भूख की कोई सीमा नहीं थी। थोड़ी देर और ऐसे ही चलता रहा। फिर रिशा ने राजू को ढकेल कर बिस्तर पर लिटा दिया और उसका लंड चुसने लगी। उसका सर बड़ी तेजी से ऊपर नीचे हो रहा था और लौड़ा घपागप उसके मुँह में जा रहा था। राजू का पानी बस छुटने ही वाला था. उसके लंड का कड़कपन अचानक बढ़ गया. रिशा ने ये महसूस कर लिया। उसने चुसने की तीव्रता बनाई राखी लेकिन स्पीड तुरंत आधी कर दी। वो राजू को मनोनमाद के शिखर तक पहुंचना चाहती थी। राजू अपने चरम से पहले ही रुक गया। रिशा ने एक और बार लंड अन्दर गले तक लिया और हट गयी। उसने अब अपनी स्थिति बदल दी। अब वो औंधी राजू की बगल में लेट गई। उसने अपने सुडोल मुलायम चुचिओ के बीच राज का लौड़ा दबा लिया और अपनी चुचियों से उसके लंड को चोदने लगी।

 

साथ ही वो सर नीचे ले जाकर सुपाड़े को जोर जोर से चुसती। राजू को बड़ा आनंद आ रहा था. थोड़ी देर बाद वो उठी और हाथ पैरों के बल बिल्ली की तरह राजू के ऊपर से सरकती हुई फर्श पे जा कर बैठ गई। राजू भी मोहित सा उसके पीछे पीछे बिस्तर के किनारे आ कर बैठ गया। उसके पैर बिस्तर से नीचे थे और उसका मजबूत लिंग तना हुआ अभी भी रिशा को आमंत्रण दे रहा था। रिशा सरकती हुई आगे आई और राजू के पैरों के बीच आ कर सीधी बैठ गई। राजू का मोटा बलशाली लौड़ा उसकी आँखों के सामने लहरा रहा था। उसने आगे बढ़कर लंड को चुचियों के बीच दबा कर ऊपर नीचे हिलाने लगी। चुचियों की मस्त चुदाई से राजू पगला गया. उसने हाथ बढ़ा कर दोनो स्तनो के निपल्स उंगलियां के बीच दबा कर मसलने शुरू कर दिये। रिशा के निपल्स में जैसे करंट दौड़ गया. उसने और तेजी से हिलना शुरू कर दिया। साथ ही उसने सर नीचे लेकर लंड मुँह में भर लिया और जोर जोर से चूसने लगी। उसने दोनों हाथों से अपने स्तनो को थाम लिया और लंड को पकड़ बीच में ले लिया। निपल्स को रगड़ती हुई वो जोर जोर से लंड को चूसने लगी। राजू मस्ती में पगलाया हुआ आह आह की आवाजें निकालने लगा। उसने वासना की मूरत अपनी भाभी के आगे थोड़ी ही देर में घुटने टेक दिये। उसका लावा फूट पड़ा. रिशा का पूरा मुँह गरम वीर्य से भर गया। वीर्य बहुत ज्यादा था और होठों के किनारे से टपक कर रिशा के पैरों पर टपकने लगा।

 

रिशा सारा वीर्य पी गई और लंड पे लगा सारा वीर्य चाटने लगी। वो बड़ी देर तक धीरे धीरे मजे लेते हुए राजू के लंड से वीर्य चाट कर साफ कर रही थी; मानो जैसे कोई बिल्ली दूध का प्याला चाट कर जाती हो। फिर उसने राजू की तरफ पागल निगाहों से देखा और उसे देखते हुए अपनी उंगलियों से अपने स्तन पर गिरे वीर्य को साफ कर के चाटने लगी। अपनी इस हरकत पे उसकी अपने आप ही हंसी छूट गई। वो राजू के सामने खड़े होकर अपने स्तनो पे लगे वीर्य के साथ खेलने लगी। थोड़ा वीर्य चाट जाती

और बाकी वीर्य माँसल स्तनो पे मल देती। राजू भी बिस्तर पर बैठा सारा नजारा देखता रहा। उसका लंड फिर खड़ा होने लगा। रिशा अब अपने स्तनो को हथेलियों में भर कर झंझोर रही थी। निपल्स को छेड़ रही थी. उन्हें दबोच रही थी. राजू देखता रह गया और उसका लिंग फिर से तन्ना गया। उसने रिशा की पैंटी उतारनी शुरू की। रिशा ने भी शरारती तरीके से कमर लहराते हुए उसकी मदद की। अब वो पूरी नंगी, दोपहर की तेज़ रोशनी में दमकते पागल देह की स्वामिनी लग रही थी। राजू ने उसकी कमर में हाथ डाल कर अपना ऊपर खींच लिया और रिशा को अपनी जाँघों पर चढ़ा लिया। चूत पे लौड़ा सेट किया और अपना लंड उसकी चूत में पेल दिया.. रिशा मीठे दर्द से चीख उठी...

आआआह्ह्ह्ह!!!!!! ओह्ह्ह्ह!!!!


 


रा...जू...आआह्ह्ह!!!!” और चुदाई का खेल वापस शुरू हो गया। दोनों बुरी तरह से एक दूसरे से चिपके हुए थे। रिशा कि मुलायम चुचिया राजू की मजबूत छाती से रगड़ खा रही थी। उसके निपल्स कड़क हो कर छाती में चूभ रहे थे।

[Image: IMG-7170.jpg] [Image: IMG-7169.jpg] [Image: IMG-7171.jpg]

राजू को भी मजा आ रहा था. रिशा भी निपल्स की कड़क घीसाई से मस्ती में आती जा रही थी। उसने दोनो टांगें राजू की कमर पे लपेट कर धक्के लगाना शुरू कर दिया और उसके हर धक्के का जवाब देने लगी। राजू भी उसके नितंबो को कस कर पकड़े हुए हर शॉट पे उसको अपने लंड थोडा खींच लेता और फिर जोर से वापस लंड चुत में ढकेल देता। शॉट तगडे पड रहे थे …रिशा ज्यादा देर टिक ना पाई और झड़ने लगी.


उसकी चूत कस कर और टाइट हो गई और राजू नए कसाव से झूम उठा। वो रिशा को थामे हुए खड़ा हो गया और गांड मसलते हुए चूत पे दनादन शॉट लगाने लगा। रिशा उसकी बाहों में किसी गुड़िया की तरह झूल रही थी। उसने अपनी बाहें राजू के गले में डाल राखी थी और उसे अपना स्तनपान करा रही थी। राजू मस्ती में उसके स्तन चुस और काट रहा था।

 
रिशा ने फिर पानी छोड़ना शुरू कर दिया। उसका रस बहता हुआ राज की जाँघों को गीला करने लगा। कमरे में फिर से सेक्स का पागल संगीत गूंज रहा था। अब रिशा की चूत किसी झरने की तरह बह रही थी!

"कुछ देर ऐसी ही चुदाई चलती रही। राजू रिशा को छोड़ने का नाम न ले रहा था। और रिशा भी हार न मान रही थी। दोनों ही पसीने में लठपथ हो चुके थे और कमरे में दो माँसल देहो के टकराने की थप थप आवाज गूंज रही थी। राजू अब थकने लगा था. दोनों एक दूसरे की बदन से रिस्ते पसीने और खुशबू में लिपटे हुए थे। रिशा के चिकने गीले नितंब उसकी पकड़ से छूट गए। रिशा समझ गई और राजू के आलिंगन से अलग हो गई, और चिपक कर खड़ी हो गई। राजू का लंड उन दोनों के जिस्म के बीच फंस गया। रिशा लौड़े को हाथ में भर कर उमेठने लगी. राजू भी उसकी चुचिया मसल रहा था, और जीभ लपलपा कर रिशा की रसीली जीभ का रसस्वादन कर रहा था। रिशा की उंगलियाँ राजू के लंड पे लगे अपने ही रस में भीग गई थी। उसने उंगलियां ऊपर लाकर राजू के मुंह में डाल दी। राजू ने भी भरपुर मजे से उगलियों पर लगे उसके रस को चूस लिया और फिर झुक कर रिशा को वापस चुम्बन किया। रिशा ने भी अपनी जीभ उसके मुँह में घुसा कर अपना स्वाद लिया।

मैं तो बड़ी टेस्टी हूं!" वो चहकते हुई बोली।
“वो तो है भाभी" राजू ने जवाब दिया।
रिशा ..”मुझे कुछ और भी स्वाद लेना है"
“क्या भाभी?”
रिशा ने एक नाखून से उसके लौड़े की लम्बाई को कुरेदा तो राजू समझ गया। उसने रिशा को पास खींच कर चुंबन की बरसात कर दी। रिशा भी झपट कर उसे तेजी से चूमने लगी। किस करते-करते वो उसकी छाती पर पहुँच गई। उसने उसके निपल्स को थोड़ा चबा कर चूसा तो राजू की सिसकारी निकल पड़ी। रिशा और आगे बढ़ गई और कमर को चूमती हुई उसके लंड तक पहुंच गई। मोटा जवान लंड उसकी आँखों के सामने लहरा रहा था। उसने लंड के सुपाड़े को जीभ से लपलपा कर चाटना शुरू किया तो राजू के बदन में करंट दौड़ गया। रिशा अब बस उसके सुपाड़े को छेड़ रही थी। उसकी जीभ बिजली सी राजू के सुपाड़े पर लहरा रही थी। लंड गीली जीभ के वारो से बेतरतीब लहराने लगा. राजू के पूरे जिस्म में सनसनी दौड़ गई! उसकी पैर काँपने लगे. आख़िरकार वो लड़खड़ा कर बिस्तर पर गिर पड़ा। रिशा मुस्कुरायी; ये बाजी आखिर वो जीत ही गई। वो भूखी शेरनी की तरह अपने शिकार पे नज़रें गड़ाए बिस्तर पर रेंगती हुई चढ़ गई और लंड पर अपनी जीभ फिराई। राजू, जो मदहोश था; ने सर उठा कर देखा तो रिशा की उंगलियां लौड़े की और सरकती दिखी। वो सांस रोके सारा नजारा देख रहा था। रिशा ने उसके मोटे लौड़े को अपनी मुट्ठी में भर लिया और सुपाड़ा बाहर निकाल कर पहले जैसे जीभ लपलपा कर उसे चाटने लगी।


[Image: IMG-7208.jpg] 

लंड में तेज़ सनसनी दौड़ रही थी. रिशा को अपने हाथ में लंड काँपता हुआ महसूस हुआ मानो वो बंधन से आज़ाद होना चाहता हो। रिशा सुर्ख आँखों से फ़नफ़नाते नाग के मुँह को देख रही थी। उसने एक तेज़ सांस भरी और सुपाड़ा मुँह में भर लिया। मुँह में सुपाड़ा भरे हुए वो बिस्तर पर घूमी और दोनों घुटनें राजू के सर के आजू बाजू सेट कर लिये। उसकी रसीली चूत राजू के मुँह के सामने झुमने लगी।

 

फिर रिशा गांड लहराते हुए राजू के मुँह पर बैठ गई। राजू ने भी जीभ घुसा कर उसकी चूत का रसपान किया। गरम जीभ के स्पर्श ने रिशा को काफी राहत दी और वो निडाल होकर लंड पर गिर पड़ी। लंड वापस उसके गले में क़ैद हो गया। उसने धीरे से सर ऊपर किया और वापस पूरा लंड गले तक भर लिया। राजू के गुप्तांग रिशा की लार में भीग रहे थे और चेहरे को चूत का रस भीग रहा था। वो स्वर्ग में था. काफ़ी देर तक यू ही मद्धम 69 चलता रहा। अब तक रिशा लंड को गले के पार तक लेने लगी थी. वो भी बिना गला घुटे. राजू भी अब रिशा की चूत दो उंगलियाँ और अपनी जीभ से चोद रहा था। दोनों कब अपने शिखर पर पहुँच गए पता भी ना चला।

राजू का लावा फूट गया और उसके वीर्य की मोटी धारो ने रिशा को गले तक तर कर दिया। दूसरी तरफ़ रिशा भी झड़ने लगी और निडाल पड़ गई जिससे उसकी चूत राजू के मुँह पर चिपक गई। राजू ने भी जी भर कर रस पिया और काफी देर तक जोर जोर से चूसता रहा जैसे मानो चूत का सारा रस निचोड़ लेगा। रिशा भी अब मुलायम लंड को चाट चाट कर साफ़ कर रही थी।
Like Reply
#89
कुछ देर के लिए राजू रिशा की गोद में सिर रख कर सुस्ताने लगा। सोया हुआ राजू रिशा को बड़ा ही प्यारा लग रहा था। उसने अपनी गर्दन झुकाते हुए राजू के चेहरे पर एक चुम्बन जड़ दिया! राजू की विशाल छाती पर वो धीरे से अपनी उँगलिया घुमामे लगी!


[Image: IMG-7462.jpg] 
सोए हुए राजू का लंड अंगड़ाई लेने लगा। थोड़ा नीचे खिसकते हुए रिशा ने राजू का लंड दुबारा मुँह में भर लिया। वो अब क्षण भर भी इस लंड से दूर नहीं रहना चाहती थी। राजू फिर उत्तेजित हो उठा. रिशा लंड की जड़ को जीभ से चाटते हुए तनाव में आते देखने लगी। वो फिर नाग की तरह सर उठा कर लहराने लगा।

 
उधर राजू भी उत्तेजना में आकर रिशा को अपनी बाहों के जकड़ लिया और उसके होठों को चूमने लगा। फ़िर उसने रिशा को धीरे से बिस्तर पर लिटाया और उसके भग्नाशा पर टूट पड़ा। उसकी जीभ गुलाबी पंखुड़ियों के बीच फंसी हुई भाग को छेड़ रही थी।

  [Image: IMG-7414.jpg]
रिशा के पैर वापस कांपने लगे और मदहोशी में उसने राजू के लिंग को वापस मुँह में ले लिया और पूरी जान लगा कर चुसना शुरू कर दिया। उसकी उंगलियाँ राजू की जाँघों में चुभ रही थी। राजू ने भी जवाब में उसकी कोमल मांसल गांड को जोर से काट लिया। रिशा चिल्ला उठी लेकिन रुकी नही। उसने इठला कर अपने निताम्बो को लहरा के राजू को निमंत्रण दिया। राजू ने गद्देदार मांस को हाथों में भर लिया और वापस उन्हें चूमने लगा। फिर छेद पर जिभ से ठोकर करते हुए जिभ अंदर डाल दी। दी। रिशा उन्माद में पागल राजू के लंड को गले तक भरे हुए पड़ी हुई थी। उसकी चीखे लंड से टकरा कर एक मादक सा कंपन पैदा करती तो राजू सिहर उठता। रिशा मानो लंड से अपनी जान लेना चाहती हो। वो उसके टट्टो को उंगलियों से सहला रही थी तभी, राजू के लंड के एक और वार से वो लड़खड़ा गई और उसके बगल में गिर गई, लेकिन लंड अभी भी उसके मुँह में ही था और राजू भी चुत से चिपक गया था। अब दोनों अगल बगल लेटे 69 कर रहे थे. ये बड़ी

  
आरामदायक स्थिति थी जिसे दोनों को और मजा आने लगा। उत्तेजना में राजू रिशा के ऊपर आ गया. रिशा सीधी लेटी हुई थी और राजू उसके गले तक समा गया। राजू ने धीरे से कमर उठा कर लंड को बाहर निकाला तो रिशा की जान में जान आई। संभालने का मौका दिए बिना ही राज ने अपना लंड रिशा के मुँह में जड़ तक पेल दिया। फिर उसने रिशा के मुँह में दनादन तेज़ शॉट लगाने शुरू कर दिए जैसे वो कोई चुत थी। रिशा बस उक्क!! उक्क! उक्क! उक्क!! की आवाज ही कर पा रही थी. पुरा मुँह राजू के लंड से चिपके रस से भर गया था।

  [Image: IMG-7401.jpg]
राजू थोड़ी देर ऐसे ही पेलता रहा और फिर थक कर बगल में लेट गया। मौका सही था. रिशा झट से लंड पे सवार हो गई। उसकी दहकती दरार में जैसे ही गरम लोहा दाखिल हुआ उसने एक राहत भारी सांस ली। उसने राजू के मजबूत सीने पर अपने हाथ टिकाए और पंजो के बाल बैठ कर गांड उछाल उछाल कर चूत पेलवाने लगी।

राजू भी उसके चुचिओ के साथ खेलने लगा जिसमें उसकी मस्ती दोगुनी हो उठी। चूत और लंड के मिलन से फच फच की आवाज़ गूँज रही थी।


  
थोड़ी देर में ही रिशा की गति अपने चरम पर पहुँच चुकी थी। अब टकराव उसकी गांड और राजू की जाँघों के बीच हो रहा था। कमरे में गीली जांघों और मुलायम मांसल गांड के टकराने का संगीत गूंज रहा। रिशा की आहें तेज़ हो चुकी थी। राजू भी मदहोशी में तेज़ आहें भर रहा था। तभी राजू ने रिशा को नितम्बो से थाम लिया और दनादन कमर हिलाते हुए रिशा को पेलने लगा। ऐसे में रिशा तैयार न थी और वो झड़ने लगी। उसके नाख़ून राजू के सीने को खुरचने लगे। ऑर्गेज्म इतना तेज़ था कि उसके पैरो की अंगलिया तक ऐंठ गई। वो लगतार काँप रही थी पर राजू को उसपे दया नहीं आई और वो शॉट पेलता रहा। लंड से फच फच की आवाज रिशा को पागल बना रही थी। रिशा एक बार फिर झड़ गई। उसे लगा कि उसकी जान जाने वाली है। चूत की दीवारें बेइंतहा घर्षण से आग जैसी गर्म हो चुकी थीं। उसने ऊपर से हटने की कोशिश की तो लंड चूत से बाहर आ गया। रिशा ने राहत की सांस ली ही थी कि राजू ने रिशा को अपने लंड पर वापस खींच लिया। रिशा थोड़ा लड़खड़ायी और लंड पर गिर पड़ी। उसकी एक दर्दनाक चीख निकल पड़ी। राजू को भी असीम कसाव का अनुभव हुआ और वो भी चीखने लगा। रिशा और राजू दोनो की नज़र लंड पे गयी तो पाया की चूत के बजाय लंड गांड में घुस गया था, वो भी जड़ तक। रिशा को जैसे ही पूरी स्थिति का ज्ञान हुआ वो जोर से बोली.... "आआहह!!!...हायईई...जाआलिम्म...मार ही डाला आज मुझे..!!!"। लेकिन हिलने की कोशिश भी ना की। अचानक हुई हरकत से दोनों ही सन्न रह गए थे। दोनों थोड़ी देर यूं ही पड़े हुए सांस लेते रहे। राजू ने रिशा को खींच कर अपने से चिपका लिया और बोला "मुझे माफ़ कर दो भाभी... मेरा ऐसा कोई इरादा नहीं था। मैं बस थोड़ा बहक गया था।"

  
राज की घबराई आवाज़ सुनकर उसने उसे दिलासा दिया। रिशा ने उसे चूमते हुए ना में सर हिलाया और धीरे धीरे कमर हिला कर गांड में लंड लेने लगी। दोनों एक दूसरे से चिपके हुए हौले हौले हिलने लगे। जब गांड थोड़ी ढीली पड़ी तो स्पीड अपने आप बढ़ गई। अब राजू ने लंबे समय तक आराम से शॉट लगाना शुरू किया ताकि वो गांड का पूरा मजा ले सके। रिशा भी कमर की हल्की हरकत से लंड गांड में ले रही थी। राजू ने फिर रिशा को स्थिर कर लिया और लम्बे धीमे शॉट्स लगाने लगा। धीरे से अंदर घुसता लौड़ा उसके जज्बातो में आग लगा देता। वो जब भी तेजी दिखाती राजू उसके मम्मो को दबोच कर वापस स्थिर कर देता। काफ़ी देर तक ऊपर रहने के कारण रिशा अब थक चुकी थी, लेकिन वासना का नशा यूं चढ़ा हुआ था कि दोनों बहकते रहना चाहते थे। रिशा निडाल होकर उसके बगल में गिर पड़ी। राजू भी उठ कर बैठ गया. रिशा ने अपना सर उसकी गोद में रख लिया और लंड को प्यार करने लगी। उसकी आंखें बंद थीं और चेहरे पर एक मुस्कान खेल रही थी। तभी सेलफोन की घंटी बजेगी। दोनों चौंक कर इधर उधर देखने लगे मानो कि चोरी पकड़ी गई हो जैसे!
Like Reply
#90
अब आगे..

दोनों ने फिर एक दूसरे को देखा और खिलखिला कर हंस पड़े। रिशा ने राजू को एक चुम्मा दिया और कॉल रिसीव किया। "नमस्ते?" "हैलो दीदी!!...मैं उमा!!"

रिशा -”उमा!!!...कैसी हो? बड़े दिनों बाद याद किया?...."

उमा-“हां दीदी, आज ही मेरा वीज़ा आया है। मैं अगले महीने ऑस्ट्रेलिया जा रही हूं!!"

रिशा - “वाह!!!!...कांगो यारर...अब तो तेरे वहां भी आशिक होंगे...हेहे!!"

उमा-“कहां दीदी... मैं वैसे भी वहां काम में बिजी रहूंगी। कॉरपोरेट वर्ल्ड में तो बस चूतिये ही भरे होते हैं। आपको तो पता ही है।" उमा नटखट अंदाज में बोली.

रिशा - “चुप कर शैतान। कहीं मेरे देवर ने सुन लिया तो?" राजू के कान खड़े हो गए, वो भाभी की शैतानी भरी बातें सुनने को सरक कर उसके पास आ गया। रिशा ने फोन स्पीकर मोड पर कर दिया।

"अरे.... तो उसे भी कुछ सिखा देना ना..." उमा चहकी। रिशा खिलखिला उठी. "हाहाहाहा!!! चुप करो और ये बताओ यहां कब आ रही हो?. 5 साल हो गए तुझे देखे हुए.. अब तो काफी बड़ी हो गई होगी"


[Image: IMG-7392.jpg] [Image: IMG-7389.jpg]
"हां दीदी... मुझे भी जिज्जू से मिलने का मन हो रहा है।" रिशा राजू की तरफ पीठ की बात कर रही थी। राजू ने आगे बढ़ कर रिशा से खुद को चिपका लिया। रिशा अचानक स्पर्श से सिहर उठी और तेज सिस्कारी लेते हुए बोली... "सस्स्स्स्स.... ते-तेरे जीजाजी तो यहां नहीं है। व-वो के-किसी काम से बाहर हो गए हैं"। राजू के हाथ किसी नाग की तरह रिशा के संगमरमर जैसे जिस्म पर लिपट गए। जवान जिस्मो की गरमाहट ने दोनों को बड़ी राहत दी। रिशा अब काफी आराम से बात करने लगी।

“उमा बोली "ओह.. तो फिर मैं बोर हो जाऊंगी ना.."

"क्यों?? राजू हैं ना.." उसने फ़ोन पर मुस्कुराते हुए कहा

"राजू?? वो तो बच्चा है"

ना रे!! बहुत बड़ा हो गया है वो"। राजू ने धीरे से अपना लंड रिशा की गांड में घुसा दिया। बड़ी मुश्किल से उसने अपनी कराह को काबू किया।



"क्या सच है?" उमा ने पूछा.

राजू ने हल्की कमर पीछे करके एक सटिक वार किया तो पूरा लंड गांड में जड़ तक धंस गया। चुनकी जाँघें चिपकी हुई थी, छेद टाइट लग रहा था। रिशा बड़ी मुश्किल से सिस्की को रोके हुए बोली। "ह-हा-हां काफ़ी बड़ा है" "

क्या?" उमा ने पूछा.

"राजू काफ़ी बड़ा हो चुका है पगली... और जवान भी।" उधर राजू ने हल्के धक्के लगाने शुरू कर दिये।


[Image: IMG-7598.jpg]
“सच!! फिर तो मजा आएगा छेड़ने में''

सोच ले. आह! वो छोड़ेगा नही तुझे"

"अच्छा दीदी मैं फ़ोन रखती हूँ। कल शाम तक आ जाऊँगी।

ठीक है?" "ओ-ओ-ओक्क!!! कल शाम.. बब्ब-ब-बाय!!!" कह कर रिशा ने राजू को खींच कर अपने गरम बदन से सटा लिया।

राजू ने मौका पाते ही दनादन शॉट्स लगाना शुरू किया और उसके स्तनो को दोनों हाथों में थाम लिया। रिशा ने भी उसकी हथेलियों को ऊपर से पकड़ लिया और स्तनो की मालिश करवाते हुए गांड पेलवाने लगी।


[Image: IMG-7597.jpg]
शॉट्स तेज और तगड़े पड रहे थे. थोड़ी ही देर में कमरे में अब जाँघों और नितंबो के टकराने की आवाज़ फिर गूंजने लगी। दोनों एक दूसरे से नाग की तरह लिपटे हुए थे। राजू ने उसके स्तनो को कस कर थामा हुआ था। लगतार पड़ती ठोकरो से रिशा के नितंब गुलाबी पड़ गए थे। मदहोशी में राजू ने उसे अपने ऊपर खींच लिया। अब वो रिवर्स काउगर्ल पोजीशन में आ गई।

  [Image: IMG-7575.jpg]


रिशा ने हाथ पीछे राजू के सीने पर टीका दीये और सहारा लेकर अपने नितंबो से उसकी जाँघों पर मर्दन करती हुई सिस्कारियो के साथ लंड गांड में लेने लगी। मुलायम गद्देदार चूतडो की रगड से राजू भी मतवाला हो गया। उसने हथेलियों में रिशा की गांड के मुलायम मांस को थाम लिया और जोर जोर से मालिश करने लगा। बीच

बीच में वो गांड पे हल्की थपकियां भी देता जा रहा था। रिशा कुछ ही देर में जोश में आ गई, और उछल उछल कर गांड मरवाने लगी। स्पीड ज्यादा नही थी लेकिन शॉट्स तगड़े पड रहे थे। काफ़ी देर तक इसी स्थिति में खेल चलता रहा।

एक आखिरी शॉट के साथ रिशा लंड पे पूरा बैठ गई। लंड जड़ तक गांड में घुसा हुआ फड़फड़ा रहा था। रिशा पीठ के बाल राजू के ऊपर लेट गई और अपना सिर उसके कंधे पे टीका लिया। ऐसा करने से उसकी कमर में तनाव आ गया और उसके भरे हुए स्तन भी काफी तन गए। राजू ने रिशा के गाल चूमते हुए उसके निपल्स से खेलना शुरू कर दिया। वो उसके निपल्स को उगलियों के बीच हल्के हल्के मसल रहा था। फ़िर दोनों निपल्स को खींच कर लम्बा कर देता। काफ़ी देर तक यूं ही चलता रहा। उसकी इस हरकत ने और गांड में फंसे गरम लौडे ने रिशा का बुरा हाल कर दिया था। वो तेज़ सिस्कारियाँ ले रही थी और अपने होठों को भी चबा रही थी। "स्स्स!!!!! आअहह!!! ऊऊहह!!! और करो ना देवरजी! आह!! ओह!! बहुत मजा आ रहा है हाआइइइइ! हां...ऊहह मां!!! मैं पागल हो जाऊंगी देवरजी!!! उम्म्ह!! म्म्म्ह्ह्ह्फ्फ्म्म!!!!!" राज ने जोश में आ कर उसके स्तनो को जोर जोर से मसलना शुरू कर दिया, मानो उनका सारा रस ही निचोड़ लेगा। उसका लंड तो पूरे जोश में था ही. रिशा अचानक हुए जोशीले हमले के लिए तैयार न थी। चूचियों की मालिश के नशे में अपने चरम पर पहुंच गई और अपना रस छोड़ दिया।


 
चूत का रस, रिशा के नितंबों से होकर राजू की जाँघों, लंड और टट्टो को भीगोता चला गया। राजू ने जोश में आकर रिशा की गुलाबी चुचियों पर थप्पड़ बरसा दिये।

आआआहह!!!!!!!" रिशा चिल्लाई और जोश में आकर उठ कर सीधी बैठ गई। उसके हाथ आगे बिस्तर पर टिकाये और गांड उछाल उछाल कर वापस मरवाने लगी। क्या अद्भुत नजारा था। रिशा की गोरी चिकनी गांड और उसमें अंदर बाहर सरकता हुआ राजू का मोटा तगड़ा लंड। राजू एकटक उसकी मलाईदार गांड को निहार रहा था। मुलायम मांस के टुकड़ों की थिरकन उसे उर जोश दिला रही थी। लंड यूं अंदर बाहर हो रहा था मानो मक्खन में छुरी. वो कभी नितंबों पे हाथ फिरता तो कभी एक चुटकी काट देता। जैसी ही वो चुटकी करता रिशा की गांड टाइट हो जाती और रिशा नये जोश में आकर और तेजी से उछलने लगती। राजू अब पूरे जोश में आ गया और रिशा की गांड पे हर शॉट पर एक तमाचा मार देता। रिशा भी मीठे दर्द भरी सिस्कारियाँ लेती और फिर दोगुने उत्साह से लंड पे गिर जाती। काफ़ी देर ऐसा ही चलता रहा। रिशा के नितंबों का रंग अब लाल पड़ चूका था। वो काफ़ी थक भी गई थी। उसकी सांसें उखड़ रही थी। मनोनमाद के चरम को अब तक वो कई बार छू चुकी थी। लेकिन फिर भी वो रुकने का नाम नही ले रही थी।

राजू ने ऊपर आ कर उसे अपने आगोश में ले लिया और पलटा। अब रिशा पेट के बाल बिस्तर पर हो गई और राजू उसके ऊपर। कड़क लंड के दबाव ने रही सही कसर भी पूरी कर दी। राजू दंड पेलने की स्थिति में आ गया और कमर से हल्के हल्के लम्बे शॉट देने लगा। रिशा हर शॉट पर कराह रही थी... "आह!! आह!! आह! आह! आह!! म्म्ह!! म्म्ह!! ओह्ह!! आआह!!!हाऐइ!! हां!!! हैई!!! ओह्ह!! ओह्ह राजू!!" राजू उसकी आहों से और जोश में शॉट लगाने लगा। जिस्म फिर से तबाही मचाने लगे। कमरे में फिर आहों और ठोकरो की आवाज गूंजने लगी। राजू बस झड़ने ही वाला था. रिशा को उसका लंड थोड़ा फूलता सा महसूस हुआ, तो वो झट से पलटी। लंड गांड से बाहर निकल आया, और रिशा ने अपने रसीले होठों की कैद में कर लिया। वो पूरी तन्मयता से लिंग का रसस्वादन कर रही थी। जल्दी ही राजू अपने चरम पर पहुंच गया, और रिशा के मुंह में गरम खोलते वीर्य की नदी बह गई।


  
रिशा ने भी वीर्य की एक बूँद बर्बाद की और घूँट भर-भर कर वीर्य पीने लगी। इस बार रिशा ने कोई चूक नहीं की और बिना बर्बाद किए सारा वीर्य पीती चली गई। वो प्यार भरे अंदाज़ में लंड चूस रही थी जैसे कतरा कतरा वीर्य निचोड़ लेगी। राजू के पैरो में कम्पन होना शुरू हो गया तब जा कर रिशा ने उसे छोड़ा। फिर उसके स्थिर पडते लिंग पर रस भर चुम्बन करती हुई, उसकी नाभि से होती हुई सीने पे गई। फिर राजू को एक अलसाये अंदाज़ में चुम्बन दिया। राज भी हल्के हल्के चूमने लगा. थकन के कारण दोनों नग्न जिस्म एक दूसरे की गर्माहट में समा गए। अब तक रात ढल चुकी थी। राजू ने हाथ बढ़ा कर फोन लिया और डिनर होम डिलीवरी ऑर्डर किया। जब तक खाना आया तब तक दोनों एक दूसरे से लिपटे रहे। खाना खाने के बाद थोड़ी बातें शुरू हुईं।

"कल उमा आ जाएगी तो फिर यूं साथ भी नहीं रह पाएंगे।" राजू ने मायुस होते हुए कहा।

"कुछ नहीं होगा ऐसा। मेरे पास इक आइडिया है"।

"क्या?"
Like Reply
#91
अब आगे..

रिशा उठ कर बिस्तर पर बैठ गई और दोनों टांगें फैला कर राजू को इशारा किया। राजू भी सामने का नजारा देख कर उत्साहित हो गया और रिशा के पास जाकर उसकी गुलाबी चूत की पंखुडियों पर हाथ फिराते हुए पूछा।




 
"बताओ ना भाभी क्या आइडिया है"

रिशा- “मेरा गला सुख रहा है देवर जी.... पहले क्यों ना व्हिस्की का एक एक पैग हो जाए।

राजू झट से अपने कमरे से व्हिस्की की बोतल और दो गिलास ले आया।

रिशा- “तुम गिलास से पिओगे? “

राजू- “मैं समझा नहीं भाभी. ग्लास के बिना कैसे पियेंगे?”

रिशा ने बोतल का ढक्कन खोल के धीरे से व्हिस्की अपनी चुचियो पे उड़लनी शुरू कर दी और एक कातिल अदा से राजू की तरफ देख मुस्काई

रिशा का इशारा समझ राजू ने झट से अपने मुंह में रिशा की चुची से लगा दिया और बूंद बूंद गिरती व्हिस्की का मजा लेने लगा। एक तो रिशा की जवानी का नशा और ऊपर से व्हिस्की का नशा...ये डबल डोज राजू के लिए जन्नत से कम नहीं थी.

रिशा के निपल्स पर रेंगती हुई राजू की जीभ एक अद्भुत और सुखद एहसास प्रदान कर रही थी। रिशा की चूत फिर से कुलबुला उठी। चूत में चींटियाँ रेगने लगी और चूत रिस रिस कर बहने लगी।

रिशा ने धक्का देकर राजू को बिस्तर पर गिरा दिया और राजू के लंड पर टूट पड़ी। अपनी जीभ से राजू का लौड़ा चाटने लगी और फिर घप से पूरा लंड मुँह में घुसेड़ पागलों की तरह चूसने लगी।

राजू भी रिशा के मुंह की गर्मी ज्यादा देर बर्दाश्त न कर पाया और लावा उगलने लगा। रिशा ने झट से पास पड़ा ग्लास उठाया और पूरा माल ग्लास में भर लिया। फिर उसने बोतल से थोड़ा सी शराब ग्लास में उड़ेली और राजू की आंखों में देखते हुए पूरा ग्लास खाली कर दिया। राजू के लिए ये रिशा का एक नया रूप था.


[Image: IMG-7477.jpg]


दोनों ने एक एक पैग और लगाया। रिशा को हल्का सरूर होने लगा था। इसी बीच रिशा अपनी उंगलियों से राजू के लंड से छेड़ छाड़ करती रही

रिशा- “कैसा लगा मेरा सरप्राइज़ देवर जी”

राजू- “बहुत अच्छा भाभी.. बहुत मजा आया”

रिशा- अब मुझे खुश करो देवर जी"

राजू का भारी लिंग फिर तन कर नाग जैसा लहराने लगा था। राजू ने रिशा की खुली टांगों के बीच पोजीशन लेकर एक धक्का लगाया और चोदते हुए पूछा “बताओ ना भाभी...उमा के बारे में आपका क्या प्लान है?"

जरा कान तो पास लाओ!! आह्ह!!" रिशा ने लेट कर कहा.

राजू उसके ऊपर चढ़ गया और शॉट्स लगाते हुए उसे बाहों में भर लिया। रिशा कान के पास जाकर कुछ फुसफुसाने लगी। जैसा जैसा वो राजू को अपना आइडिया बताती जा रही थी ,राजू के शॉट्स तगडे होते जा रहे थे। थोड़ी देर बाद राजू की समझ में सब आ गया। दोनों अब एक दूसरे पर जानवरों की तरह टूट पड़े। सारी रात हवस का नंगा नाच चलता रहा। राजू ने दो बार और रिशा की गांड मारी। जब सुबह की हल्की रोशनी कमरे में आई तब जा कर दोनों सोए।


[Image: IMG-7597.jpg] 
अगले दिन एक नया अध्याय शुरू जो होना था।

अगले दिन सुबह रिशा के मोबाइल पर सरिता का फोन आया तो रिशा चौंक गई। राजू के साथ बिताये कामुक पलो के बीच वो भूल गई थी की आज सरिता भी वापस आने को बोल गई थी। रिशा ने झट से फोन उठाया और बात करने लगी!

रिशा: प्रणाम दीदी

सरिता: कैसी हो रिशा?

रिशा: मैं ठीक हूं...आप कैसे हैं और आपके पिताजी कैसे हैं अब

सरिता: अरे वही बताने को फोन किया था. पिताजी की तबीयत अभी कुछ ज्यादा ठीक नहीं है..शायद मुझे 1-2 दिन और रुकना पड़े. बाकी तुम बताओ राजू ज्यादा तंग तो नहीं कर रहा.

रिशा: नहीं दीदी वो तंग नहीं बल्कि खुली कर रहा है। ऐसा बोल रिशा खुद शरमा गई.

सरिता: हां बहुत जबरदस्त हथियार है कमीने का। अन्दर तक घुस के ठोकता है और जल्दी ढीला भी नहीं होता। बस एक बात का ख्याल रखना...उसका माल कहीं अंदर मत गिरवा लेना

रिशा: हाँ दीदी. पूरा ख्याल रखा है

सरिता: चल बाद मैं बात करती हूं आराम से। इतना बोल सरिता ने फोन काट दिया।

सरिता के वापस नहीं आने से रिशा खुश थी कि राजू के साथ और अतरंग पल बिताने का मौका मिलेगा। अब चिंता थी तो केवल उमा की लेकिन वो आश्वस्त थी कि उसका भी कुछ हाल निकल आएगा

सुबह जब राजू की नींद खुली तो पाया कि 8 बज चुके हैं। रात की जबरदस्त चुदाई के कारण उसके पूरे बदन में एक हल्कापन सा आ गया था। उसने एक अंगड़ाई ली और करवट बदल के देखा तो रिशा कहीं नजर नहीं आई। तभी उसे खाने की खुशबू आई। वो ख़ुशी ख़ुशी बाथरूम नहाने चला गया। जब वो नहाकर आया तो सीधा किचन में चला गया और रिशा को पीछे से पकड़ कर उसे इक चुम्बन दिया। "भाभी, तुम्हें मेरी पसंद नापसंद सब पता है।


[Image: IMG-7742.jpg]
"हां देवरजी मुझे सब पता है कि तुम्हें क्या पसंद है और क्या नहीं" कहते हुए रिशा ने अपने कुल्हे राजू के शॉर्ट्स पर दबा दिये।

राजू भी उसके नितांबों से खेल रहा था। थोड़ी देर यूं ही चलता रहा फिर दोनों ही नाश्ता खाने बैठ गए। खाना बहुत स्वादिस्ट था. खाना ख़तम करके राजू टी.वी. देखने बैठ गया. रिशा भी उसके बगल में आकर बैठ गयी। अब तक कामवाली आ चुकी थी। जब तक वो सफाई में लगी हुई थी तब तक रिशा राजू को टी.वी. देखने के बहाने छेड़ने लगी. कभी वो उसके गाल खींचती तो कभी बालों में हाथ फिरा कर बाल बिगाड़ देती। बीच में वो उसके लंड को हल्के से दबा भी देती।

रात की थकावट अभी उतरी नहीं थी। सरिता के वापस ना आने के करण रिशा भी जानती थी के अब उसके पास भरपुर समय है। इसलिए दोनों ने कुछ आराम करने का फैसला लिया. कामवाली के जाने के बाद रिशा और राजू अपने अपने कमरों में चले गए.

दोपहर के 1 बज चुके थे, राजू वापस जाग कर रिशा के कमरे तक पहुंच गया। दरवाजे से उसने झांका तो रिशा का कहीं अता पता नहीं था। उसने पुकारा भी; लेकिन कोई जवाब नहीं मिला. वो उसके बाथरूम में चेक करने को गया तो अचानक पीछे से रिशा ने उसे दबा लिया। राजू थोड़ा घबराया लेकिन तब तक रिशा ने उसके दोनों हाथ पीछे करके कलाइओ को इक रेशमी पट्टी से बांध दिया। उसके हाथ अब जांघों से आगे नही आ पा रहे थे। रिशा ने उसे ज्यादा तंग नहीं बांधा था। केवल इतना कि वो हिल डुल सके लेकिन सीमित।

"ये क्या कर रही हो भाभी?" राजू ने पूछा।

रिशा ने कोई जवाब नहीं दिया और उससे अलग हो गई। राजू ने पलटा तो देखा रिशा ने एक बाथिंग गाउन पहना हुआ था। उसके बाल इक जूड़े में बंधे हुए थे। बाथिंग गाउन उसके सुडोल जिस्म पर यूं चिपका था जैसे किसी आशिक ने अपने माशूका को आगोश में ले लिया हो।


[Image: IMG-7741.jpg]
रिशा ने राजू के गले में इक रेशम का कपड़ा लगाम की तरह बांधा और उसे समझाते हुए कहा, "आज मैं तुम्हारी मल्लिका हूं और तुम मेरे गुलाम"। ये कहते हुए उसने उसके लंड को जोर से पुचकारा और लगाम के सहारे उसे बिस्तर पर ले जाकर बिठा दिया। राजू रिशा के इस अवतार को देख कर हैरान रह गया। लेकिन साथ ही उसके जिस्म में इक अलग सा करंट भी दौड़ रहा था। रिशा ने एक झटके से उसके शॉर्ट्स खींच कर उतार दिये। अगले ही पल राजू के तन से सारे कपड़े अलग हो गए। रिशा मानो उसे नोच खाने को बेताब थी। राजू के बदन को भूखी नज़रों से निहारने लगी। उसके चौड़े कंधे मजबूत सीना कसी हुई कमर और शक्तिशाली जांघों के बीच खड़े लिंग पे नजर जाते ही उसकी हवस परवान चढ़ने लगी।

राजू अब उसकी कैद में था। वो जो चाहे उसके साथ कर सकती थी। उसने घूम कर अपनी पीठ राजू की तरफ कर दी। राजू का मुँह अब उसके नितंबों के सामने था। उसने इशारा समाज कर उसके नितांबों पर चुम्बन की झड़ी लगा दी, और रिशा ने भी धीरे से गाउन खींच कर ऊपर कर दिया। राजू उसके मुलायम नितंबों पे यू ही काफी देर चुम्बन करता रहा। रिशा ने आगे झुक कर अपनी हथेली जमीन पर टीका ली। उसके नितांब अब फेल कर चूत और गांड के छेद का नज़ारा राजू को दे रहे थे। राजू ने बेसबरा होकर उसकी नितंबों को चबाना शुरू किया। वो बेबसी में भी अजीब आज़ादी महसूस कर रहा था। उसने जीभ की ठोकरों से अपने वार गांड के छेद और चूत पे शुरू कर दिए। दोनों की हवस परवान चढ़ रही थी। रिशा कमर लहराती हुई राजू के जीभ का जवाब दे रही थी। रिशा की उन्माद भरी सिसकियों से राजू का कामवेश भी बढ़ रहा था। "आह...श्शहा!...स्स!!...स्स्स!!!....आह ..ह्म्म्म....ममम!!! म्म्ह्ह!!!" जैसी आवाज के साथ रिशा बड़बड़ा रही थी।
[+] 1 user Likes nitya.bansal3's post
Like Reply
#92
बहुत तकलीफ देता है.. !!
ख्वाबों का.ख्वाब रह जाना..!!

[Image: 734067717-1130789170125103-8217169293939340161-n.jpg]

[+] 1 user Likes nitya.bansal3's post
Like Reply
#93
पढ़ सको तो पढ़ लो ख्वाहिश इन आंखों की..!!?
लिखा इनमें वो भी है, जो हम कह नही पायें.

[Image: 736384783-1524697359338708-4578573151912047671-n.jpg]
[+] 1 user Likes nitya.bansal3's post
Like Reply
#94
मैंने कब कहा की.. मुझमें कोई ऐब नहीं..!!
गुस्सा हैं, नादानी हैं पर दिल में कोई फरेब नहीं..!

[Image: 735831916-1556043912856264-7748457313612721204-n.jpg]
[+] 1 user Likes nitya.bansal3's post
Like Reply
#95
[Image: GVu-RHPVa8AEvz-BB.jpg][Image: GVu-RHPVa8AEvz-BB.jpg]
[+] 1 user Likes nitya.bansal3's post
Like Reply
#96
काफ़ी देर यूं ही चलता रहा. अब अगले कदम की बारी थी. रिशा ने सीधे होकर खुद को राजू से दूर किया। और बड़े मादक अंदाज़ में नितंबों को छलकाते हुए बोली, "देखो ना देवरजी, मेरे उभार तुम्हारी चुवन को कैसे मचल रहे हैं। क्या तुम्हें इनपर प्यार नहीं आता?" कहकर रिशा अपनी गांड को तबियत से हिलाने लगी। उसकी लचकती, लहराती, छलछलाती गांड को देख कर राजू का गला सुखने लगा। सुडोल नितंबों की थिरकन ऐसी थी मानो जैसी जेली।


  
अब तक रिशा ने स्ट्रिपटीज़ शुरू कर दिया था। धीरे-धीरे गाउन उसके बदन से सरक कर अलग हो गया। चुंकि

रिशा की पीठ अभी भी राजू की तरफ थी, राजू का पूरा ध्यान उसकी चमकती कोमल पीठ और मांसल गांड पर टिका हुआ था। रिशा कमर लहराते हुए राजू की तरफ घूमी तो उसकी छलकते हुए भारी चुचिओ को देख उसका लंड और फड़फड़ा उठा। रिशा थोड़ा पास आ कर राजू की तरफ झुकी तो उसके भारी चिकने स्तन राजू के करीब लहराने लगे। झुकते हुए रिशा ने एक चुम्बन राजू के सुपाड़े पर जड़ दिया। राजू ने एक राहत भरी कराह ली.


  [Image: IMG-7900.jpg]
आअहहहाआ"। रिशा ने दोनों हाथ राजू की झाँघों पर टीका कर उसके सुपाड़े को होठों के बीच भर कर चूसना शुरू कर दिया। राजू से रहा ना गया और उसने कमर का धक्का लगा कर लंड रिशा के मुँह में पेल दिया। पर रिशा भी मझी हुई खिलाड़ी थी, उसने झट से लंड मुँह से बाहर किया और एक तेज तमाचा लंड पे दे दिया। राजू का पूरा बदन तिलमिला उठा। तमाचे से उसके लिंग में और अकड़न आ गई, और साथ ही उसकी बेचैनी में स्थिरता।

रिशा ने लंड पर एक और जोर का तमाचा जड़ दिया और बोली, “आज शिकार करने की बारी मेरी है देवरजी. तुम आज वही करोगे जो मैं कहूंगी; अपनी मर्जी चलाने की कोशिश की तो..." कह कर रिशा ने एक और चांटा राजू के लिंग पर दे मारा। "आअहह!!!" राजू चीख उठा. पर रिशा के हाथ न रुके। तमाचों की झड़ी लगा दी उसने. एक एक तमाचे से राजू की चीख दोगुनी होकर आती। साथ ही उसका लिंग अब और सख्त और लाल पड़ रहा था। तकरीबन 10 मिनट तक रिशा यूंही लंड को तमाचाँ से मारती रही। लेकिन लंड तो तना का तना था.

"तमाचों की वजह से लिंग में खून दौड़ रहा था और वो लाल और संवेदनशील हो गया था। रिशा ने सीधे खड़े होकर राजू को निहारा। वो आंखें बंद किये पसीने में लथ पथ पड़ा हुआ था।

बंधन में जकडे राजू पर रिशा को थोड़ा तरस आया। उसने आगे झुक कर राजू को एक मादक और धीमा चुम्बन दिया। चुम्बन के दौरन उसने उसके होठों को बड़े जोर से चबाया भी। राजू का कोई रिएक्शन ना देख कर वो समझ गई कि अब वो उसके वश में था। उसने राजू के चेहरे को जकड़ लिया और नागिन की तरह लपलापाती जिभ उसके मुंह में घुसा दी। राजू ने भी जिभ लपलपा कर उसका जवाब दिया। जीभ के टकराने से दोनों का रस नीचे टपकने लगा। रस सीधे लंड पर टपक रहा था जिससे गर्म, झुलसा हुआ लंड थोड़ी राहत पा रहा था। दोनो की साँसें अब बहुत तेज़ हो गई थी और लार टपक टपक कर लंड गीला किये जा रही थी। तभी रिशा ने राजू को एक धक्का दिया और उसके सीने पे चढ़ गई, और राजू की मांसल छाती पर दोनो टांगे फेला कर बैठ गई।


  
हाथ बंधे होने के करण राजू हिल भी नही पा रहा था, और अब रिशा उसके ऊपर सवार थी। उसे लगा रिशा अब उसकी सारी बेचैनी खत्म कर देगी लेकिन रिशा के मन में कुछ और ही चल रहा था। उसने पूरे दबाव के साथ अपनी कमर को हरकत दी। उसकी चूत राजू की कसी हुई छाती पर रगड़ खाने लगी। चुंकी राजू के सीने के बाल थोड़े कड़क थे, चूत पर जोर का घर्षण हुआ। "सस्स्स्स्स्स्सहाआ!!!", की आवाज़ करते हुए रिशा ने रगड़ तेज़ कर दी, और चूत की गर्म भाप राजू को भी महसूस होनी शुरू हो गई। थोड़ी ही देर में रिशा झाड़ने के करीब पहुंच रही थी। उसका पानी राजू के सीने को गीला किये हुए था। रिशा ने रुक कर पोजीशन बदली और घूम कर वापस सीने पर बैठ गई। रगड़ वापस चालू हो गई. राजू अब सूजी हुई चूत और रेशमी मांसल नितंबो को हरकत में साफ देख रहा था। उसका लंड पगलों की तरह फड़क रहा था. रिशा ने हथेलियाँ राजू के जाँघों पर टिकाई और आगे झुक का लंड पूरा मुँह में ले लिया। राजू ने राहत भारी सांस ली. अब एक तरफ रिशा अपनी चूत राजू के सीने पर रगड़ रही थी और दूसरी तरफ लंड भी चूस रही थी। मजा दोगुना हो गया था. राजू भी रिशा के झुकने की वजह से उसकी फूली चूत की फाँको और गांड के छेद का नजारा देख रहा था। उसका पानी छुटने वाला ही था। रिशा को भी इसका एहसास हुआ कि उसका लंड बेहद कड़क हो चुका है। उसने तुरंत चूसाई छोड़ी और लंड पर तमाचो की बारिश वापस चालू कर दी। "चटाक्क!!! चटक्क!! चटक्क!!" "आह!! आह!!आह!!आह!! भाभी पागल हो गई हो क्या?" "तुम्हारा रस बेकार नहीं जाने दूंगी देवरजी!...और पागल तो मैं हूं ही...तुम्हारे जिस्म की।"

कहते हुए रिशा वापस घूमी। पहले उसने राजू के लंड से होते हुए उसके होठों तक उसके जिस्म को तबियत से अपनी जीभ से चाटा, और होठों पर पहुचते ही एक रसभरा गीला चुम्बन दिया। साथ ही उसके होठों को बड़ी बेरहमी से काट खाया। फिर अपने नितंबों के सहारे राजू के लंड पर बैठ गई। लंड अब उसकी गदराई जाँघों के बीच फंस गया। उसने अपने पैरों के तलवे राजू के गले पर टीका दिए और पीछे झुक कर हाथ बिस्तर पर।

उसने धीरे-धीरे अपनी गांड उछालनी शुरू कर दी जिससे राजू का लंड उसकी कसी हुई जाँघों के मुलायम मांस में पिसने लगा। राजू का उन्माद अब 7वें आसमान पर पहुंच चुका था। गले पर पड़ रहे दबाव से उसकी सांसें भी उखड़ रही थीं। रिशा ने रगड़न तेज कर दी थी. वो पूरी जान लगा कर राजू के लिंग को अपनी जाँघों में कसे हुई थी। लंड जाँघों के साथ साथ उसकी चूत पर भी रगड़ खा रहा था। रिशा की उखडी सांसें उसकी उतवालापन बयां कर रही थी "म्म्ह्ह!! म्म्ह्ह!! म्म्फ!! ह्ह्ह!! मुह्ह!! हाआह!! म्म्ह्ह!!!"


   
रिशा के वार के आगे राजू ज्यादा देर टिक ना पाया, और बड़ी तेजी से झड़ने लगा। उसके वीर्य की बौछार से रिशा का पूरा जिस्म भीग गया। वीर्य की फुहार उसके स्तनों तक को गिला कर रही थी। उसकी जाँघें वीर्य से लथपथ हो गई। रिशा ने मौका गँवाये बिना पहले राजू को झड़ने दे दिया, फिर उसके बदन पर सरक कर आगे आ गई और राजू के मुँह पर अपनी चूत चिपका दी। राजू भी मदहोशी में उसकी चूत चाटने लगा। उसका वीर्य रिशा के स्तनों से बहता हुआ, नाभि से होता हुआ चूत को गिला किये जा रहा था। वो समझ भी नहीं पाया कि उसने अपना वीर्य ही पी लिया था। राजू का ध्यान पूरी तरह से रिशा की गिली चूत पर था। वो पूरे जोश में उसकी चूत लपलपा कर चाट रहा था। रिशा भी धीरे-धीरे कामोन्माद की तरफ बढ़ रही थी। उसकी सिसकियाँ अब धीरे-धीरे आहों में बदल रही थीं।

आआअह्ह्ह्ह!!!!!! ओह्ह्ह!!!! राआज्ज्ज्ज्!!!! स्स्स्स!!!!! आआह!!! ओह्ह्ह!!!! और करो ना देवरजी! आह!! ओह!! बहुत मजा आ रहा है! हाँ...ओहह माँ!!!! मैं पागल हो जाउंगी देवरजी!!! उम्म्ह्ह!! ममहहफफम!!!!!" जोश में आकर उसने राजू के बालों को जकड़ लिया और जोर जोर से चूत उसके मुँह पर रगड़ने लगी। "आह!!... आह!!.. हाऐई!!.. मर गई!!... ऊउमाआ!! आआह!! आह!! आह!! स्स्स!! सीई!! और तेज राजा!! और तेज!! आह!! आह! आह!! आह!! आह!! ..आह!! आआह!! होआहह!! म्मह!! हाहाहा!! और तेज़!! और तेज़!! हां राजा!! में तो गाई!! में तो गाई!! आआआआआआआआआआआआआ हा हा हा हा मेरा होने वाला है!! ... " यूँ ही चीखते हुए रिशा राजू के मुँह में झड़ने लगी। राजू भी चूत पर किसी जोंक की तरह चिपक गया था और पूरा रस पीने की कोशिश कर रहा था। रिशा की फुली मुलायम फांको से बहते अमृत का स्वाद किसी भी स्वाद से बढ़ कर था। रिशा भी धीरे-धीरे ठंडी पड़ने लगी और हौले हौले चूत राजू के मुंह पर रगड़ते हुए सांसें थामने लगी। पर राजू पर तो जैसे वापसी भूत सवार हो गया।


   
"वो रिशा की चूत की फांको को फ्रेंच किस करने लगा। रिशा को भी बड़ा मजा आया और वो स्थिर बैठ कर इसका मजा लेने लगी। रिशा सिस्कार उठी. "आआआह्ह्ह्ह्म्म्म्म!!!" रिशा का बदन उन्माद की उँचाईयाँ छूने लगा और उसका जिस्म अकडने लगा! दोनों अब जोर जोर से आगे बढ़ते हुए वासना के सागर में गोते लगा रहे थे। "आ..आ..आ..आह्ह्ह्ह!!! मैं गइ राज्जाआ.आ..आ...आआह्ह्ह्ह!!!. . . .आआआआआआह!!! इक खामोश चीख के साथ वो और तेजी से झड़ने लगी। उसकी सांसे फूल रही थी और उसकी गदराई चुचियां तेजी से ऊपर नीचे हो रही थी। रिशा की कमर, चुचियां, गर्दन और चेहरा तक उसके मुंह और पसीने से तर बतर हो चुका था। रिशा के दोनो हाथ सर के पीछे थे। ऐसा लग रहा था मानो वो अंगड़ाई ले रही हो। एक हल्की सी मुस्कान उसके चेहरे पर खेल रही थी। वो आनंद में सराबोर थी. अपने बदन में एक अलग सा हल्कापन महसूस हो रहा था!

उधर राजू अभी भी चालू था जो उसका मजा वापस उफान पर था। उसकी जबान की हरकत का जवाब रिशा की मद्धम आहे दे रही थी।

अह्ह्ह आआह्ह्ह्ह उन्ह्ह्ह ऊह्ह्ह्ह ऊओह्ह्ह्ह हाआआअन हाआआई मीईरे रज्जज्ज, अह्ह्ह्ह! उह्ह्ह!! आह! आह! आह! आह!! आआह!! आह!! आआआह!! आआआआहह!!! मम्म!!!! म्म्म्म्म्म्म्फ्ह्ह!!!" रिशा उसके मुंह के स्पर्श से पागल हो गई और अचानक ही उसकी आंखे फट पड़ी और उसके मुंह से एक खामोश हाँफती हुई चीख निकल गई। "आ..आ..आ..आ.हह..ह...ह..हह.हह..हह..हह.!!!!!!म्म्प्पप्प्ह्ह!!!.एसएसएसएसएसएसssssss!!!" वो हेरान थी कि वो तीन बार झड़ चुकी थी। राजू वाकई एक शानदार सेक्स पार्टनर था. "लेकिन गुरु तो मैं ही हूं" सोचते हुए रिशा मुस्कुरा दी। अब तक दोनों की हवस पूरी परवान चढ़ चुकी थी। दोनों ही एक दूसरे को नोच खाने को तैयार थे। शायद इसी का इंतज़ार रिशा कर रही थी. उसने झट पोजीशन बदली और राजू के ऊपर सीधी खड़ी हो गई। इस कोण से रिशा के मांसल भारी नितंब, रसीली दरार और दोनों गदराए हुए स्तन; तीनो एक लाइन में राजू को दिखाई दे रहे थे। रिशा की उंगलियां अपने नितांबों और चूत से खेलने लगी। राजू उसकी इस हरकत से पागल हो रहा था कि अचानक रिशा वैसे ही उसके चेहरे पर बैठ गई और इस बार उसने चूत के जगह गांड का छेद राजू के मुँह पर रख दिया।


   
उसके बदन से आती भीनी भीनी खुशबू राजू का जी मचलने लगी। रिशा दनादन अपनी चूत में उगलियों का वार किये जा रही थी जिस से चूत का पानी रिस कर उसके चेहरे को गीला कर रहा था। वो मदहोशी में अपनी जिह्वा से उसको छेड़ने लगा। जीभ की नोक का स्पर्श पाते ही रिशा बौखला उठी। उसके जिस्म का एक एक रोम तन उठा। "आआआआआहह!!!!...सस्स्स्स्स्स्स्स!!!" उसने उन्माद में बेतरबी से अपनी नंगी गांड से राजू का चेहरा रौंदना शुरू कर दिया। राजू की सांसें फूल रही थी लेकिन वो भी रिशा की हर चुनौती का भरपूर जवाब देना चाहता था। रिशा ने आगे झुक कर उसके कड़क लंड को दोनों मुट्ठियों में जकड़ लिया और सुपाड़े को बेचैनी के साथ चुसने लगी। राजू की आहे उसकी जाँघों के बीच ही गूँज कर रह गई। "हुह्म्म!!म्म्ह्ह!!!म्म्प्प्ह्ह!!!आह्म्म्ह्ह!!!एसएलआरआरआर!!!म्म्प्प्ह्ह!!!"

रिशा ने थोड़ी देर चुसाई के बाद राजू के लिंग को शांत कर लिया और सुपाड़े को जोर जोर से चूमते हुए लिंग पर दबाव बड़ा दिया। राजू उसकी इस हरकत से तमतम गया और लंड की अकडन बढ़ने से उसके लिंग में बहते खून का दबाव भी महसूस होने लगा। इस से उसकी उत्तेजना और तेज हो गई। वो और जोश में रिशा की गांड पर टूट पड़ा और जीभ की ठोकरों के साथ उसकी गांड के मुलायम मांस को नोच ने भी लगा। रिशा भी उसकी इस हरकत में उसका साथ देने लगी और गांड को हल्का हल्का उछाल कर जिभ की ठोकरो का मजा लेने लगी। " आआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआ!! तेज़!!!और तेज़!!हां रज्ज!!!कत्ल हो गया आज तो मेरा!!!!!!!!मामाआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआ. यू चीखते हुए रिशा झड़ने लगी। उसका सारा रस राजू के मुखड़े पर और उसके मुँह में टपक रहा था। राजू भी जोश में सारा पानी पी गया। इधर रिशा जब तक अपनी सांस थामती तब तक राजू की जीभ वापस हरकत में आ गई।


  [Image: IMG-7899.jpg]  
चुकी स्खलन के बाद रिशा हिल नही पा रही थी, राजू को पूरा समय मिला रिशा की गांड के मजे लेने का। उसने जीभ की ठोकरों से गांड के छेद को काफी ढीला कर दिया था। अब जरा सी ताकत से जीभ ज्यादा अंदर तक घुसती जा रही थी। उसने जीभ को रिशा की गांड के अंदर डाल कर लपलपाया, अचानक हुए हमले से कराह उठी। आह!!... आह!!.. हाऐई!!!.. मर गईई!!!.... ऊओमाआ!!! आआह!! आह!!! आह!!! स्स्स्स!!! आई!!! और तेज़ रा...जू!! और तेज़!!! आह!! आह! आह!!" उसने बेचैनी में राजू के लिंग को और कस कर दबोचा। राजू ने भी और जोश में जवाब दिया। काफी देर तक लंड फंसने के कारण बुरी तरह से फड़फड़ा रहा था। रिशा की नज़रें वासना से उभरे हुए सुपाड़े को देख रही थी। उससे और नहीं सहा जा रहा था. उसने गरम कड़क लोहे से जैसे ही अपना हाथ हटाया, खून की नई लहर मानो उसमें दौड़ पड़ी हो। किसी काले नाग की तरह लिंग फुफकार उठा। उसे बिल में जाना ही था. रिशा ने एक आखिरी लचक के साथ गांड उठाई तो राजू की जीभ 'पुक्क' की आवाज के साथ बाहर आ गई. वो समझ गया कि अब असली खेल शुरू होने वाला है। रिशा ने भी बिना देर किये पोजीशन बदली औरा अब वो राजू का सामना करते हुए उसके लंड के ऊपर खड़ी थी। वो बेशरम होकर चूत में उंगली किए जा रही थी और दूसरे हाथ से अपने स्तनों का मांस नोच रही थी।

वो उकडू होकर बैठी और राजू के सुपाड़े पर चूत टीका कर, अपनी गांड लहराने लगी जिससे सुपाड़ा चूत के मुहाने से होता हुआ गांड के छेद पर घिसने लगा। रिशा किसी रांड की जैसी लग रही थी. राजू का पूरा बदन पसीना पसीना था। उसकी नज़रें अपने सुपाड़े पर टिकी हुई थी। वो जानना चाहता था कि लिंग पहले किसका स्वाद चखेगा। रगड़ के कारण उसका लंड अचानक तेजी से फनफनाया और सुपाड़ा गांड के मुंह में जा कर टिक गया। रिशा जालिम अंदाज़ में मुस्कुरायी, "गुड चॉइस देवरजी" और एक झटके में लिंग पर बैठ गई। गरम लोहा रिशा की गांड को चीरता हुआ पूरा का पूरा अंदर दाखिल हो गया। रिशा की चीख़ गई और पूरा बदन टूटने लगा। "आह!!! आह!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!! उउउइइइ माँ!!!!!!!!!!!!.

उसकी सांसें उखड़ने लगी. उसने नितंबों को कस कर जकडा तो राजू की आह निकल गई। लंड पर कसाव बढ़ने से उसका भी मजा दोगुना हो रहा था। गांड का कसाव मानो उसके लिंग को मसलने की कोशिश कर रहा हो। रिशा भी उसके एक एक इंच को अपने अंदर जाते महसूस कर रही थी। अब उसकी गांड पूरी तरह मुलायम हो चली थी। यूँ ही आराम से थोड़ी देर और चलता रहा। राजू का भी हाल बेहाल था. छेद बहुत टाइट था. उससे दर्द भी हो रहा था और मजा भी आ रहा था। पर हिलने की हिम्मत उसकी भी नई हो रही थी। रिशा ने अपनी गांड कस कर जकड़ ली थी। राजू का लिंग गरम पत्थर के सामान महसूस हो रहा था। "ओह राजू, जी करता हैं तुम्हारा सारा रस निचोड़ लूं" कह कर रिशा हल्के हल्के शॉट लगाने लगी। अब दोनों को गांड का मजा वापस आने लगा। एक तरफ राजू की तेज सांसें थीं तो दूसरी तरफ रिशा की सिस्कारियां। थोड़ी ही देर में सिस्कारियां आहों में बदल गईं और राजू भी आहे लेने लगा.. शॉट्स अभी भी धीरे ही सही लेकिन लंबे पढ़ रहे थे। रिशा इस पल का पूरा मजा लेना चाहती थी। गांड का कसाव मानो राजू के लिंग को मसलने की कोशिश कर रहा हो।


   
यूँ ही आराम से थोड़ी देर और चलता रहा। अब रिशा भी लंबे शॉट्स ले रही थी। रिशा की चूत भी फिर से बहने लगी थी। उसने दो अंगलिया थूक में गिली करके अपनी चूत में जड़ दी और बोली... "बस मेरे भोले सैयां....अब सब्र नहीं होता....अब देखो भाभी कैसे देती है अपनी ही गांड!!!" राजू का इतना सुनना था कि रिशा ने शॉट्स तेज कर दिए। लम्बे शॉट्स वो पहले से ही लगा रही थी। राजू ने भी तेज हमलो का दिल खोल कर स्वागत किया और करहाते हुए मजे लेने लगा। अब दोनों मस्ती में झूम रहे थे। राजू ने रिशा का साथ देना शुरू किया। उसने अंगडाई लेते हुए कमर उछालनी शुरू कर दी। रिशा उसकी ताक़त की इस अजमाइश से ख़ुश हो गई और अपने हवस में उसे बडावा देने लगी। "चोदो मेरे रज्जजा!!!! चोद लो अपनी भाभी की गांड। आज फैला ही डालना इसे!!!! शाबाश मेरे शेर!!!!!!, और जोर से रज्जजा!!!!!!!!! और तेज!!! और तेज!!!.. जान ले लो मेरीIII!!!!...आह!!! आह!!! आआह!!! आआह्ह्ह्ह!!! हाआइIII!!!! इस्स्स्स्स!!!!!! आआआहहहहहहहहहहह!!!!!!

राजू भी पगलाया सा दनादन शॉट लगाने लगा. लंड बड़ी तेजी से अन्दर बाहर हो रहा था.... रिशा भी अपनी चूत रगड़ते हुए मरवाने के मजे ले रही थी। तभी उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया। रिशा का पूरा बदन ऐंठ गया और गांड भी कस गई। "आआआआहहह!!!सस्सशशशश!!!!!!" राजू के जबड़े भींच गए इस तेज दबाव से पर उसने हार ना मानी। उसने और दुगनी ताकत से गांड पेलना शुरू कर दिया। रिशा की चीखो की कोई सीमा ना रही। उसने राजू के गर्दन को यू थाम लिया जैसे उसकी जान उसपे टिकी हो, और काफी देर तक झड़ती रही। राजू अपनी वासना के नशे में रिशा की चीखो पर ध्यान दिए बिना शॉट पे शॉट पेलता रहा। दोनों पसीन में तर हो चुके थे। आपस में टकराते जिस्म की ताल बदल गई थी। रिशा गर्दन को जकड़े हुए थी जिस से राजू की अब सांस फूलने लगी थी। रिशा की चीखें भी कब कराहो में तबदील हुई पता ही नहीं चला। और अब वो बस सिस्कारियां ले रही थी.. राजू भी बस चरम पे बहुत ही चुका था।

रिशा अब अपने स्तनों को हथेलियों में भर कर झंझोर रही थी। निपल्स को छेड़ रही थी. उन्हें दबोच रही थी. राजू देखता रह गया और उसका लिंग और मजबूत हो गया। उसने रिशा की गांड वापस पेलनी शुरू की। रिशा मीठे दर्द से चीख उठी. रिशा ने भी शरारती तरीके से कमर लहराते हुए उसकी मदद की। वो पूरी नंगी, शाम की हल्की रोशनी में दमकते मादक देह वाली वेश्या लग रही थी। "आआअहह!!!!!! ऊहहह!!! राआज्जज्ज!!!" और चुदाई का खेल वापस शुरू हो गया। रिशा झुक कर उससे लिपट गई। दोनों बुरी तरह से एक दूसरे से चिपके हुए थे। रिशा के मुलायम स्तन राजू की मजबूत छाती से रगड़ खा रहे थी। उसके निपल्स कड़क हो कर छाती में चुब रहे थे। राजू को मजा आ रहा था. रिशा भी निपल्स की कड़क घर्षण से मस्ती में आती जा रही थी। उसने दोनो टांगे राजू की कमर के बगल में सेट कर लंड पर कूदना शुरू किया और उसके हर धक्के का जवाब देने लगी। राजू भी उसके हर शॉट पे अपने लंड से जवाब देता। शॉट तगडे पड रहे थे. रिशा ज्यादा देर टिक नै पाई और झड़ने लगी। उसकी चूत का रस लंड को भीगोता जा रहा था और राजू गांड के नये कसाव से झूम उठा। वो रिशा के होठों को काटते हुए गांड में दनादन शॉट पेलने लगा। रिशा किसी गुड़िया की तरह झूल रही थी। उसने अपनी बाहें राजू के गले में डाल राखी थी और उसको अपना स्तनपान करवा रही थी। राजू मस्ती में उसके स्तन चुस और काट रहा था।

रिशा ने फिर पानी छोड़ना शुरू कर दिया। उसका रस बहता हुआ राजू की जाँघों को गीला करने लगा। कमरे में फिर से सेक्स का मादक संगीत गूंज रहा था। अब रिशा की चूत किसी झरने की तरह बह रही थी। कुछ देर ऐसे ही वासना का नंगा नाच चलता रहा। राजू रुकने का नाम ना ले रहा था. और रिशा भी हार ना मान रही थी. दोनों ही पसीने में लथपथ हो चुके थे और कमरे में दो मांसल देहो के टकराने की थपाथप आवाज गूंज रही थी। राजू अब भी नहीं थक रहा था. दोनों एक दूसरे की बदन से रिस्ते पसीने और खुशबू में लिपटे हुए थे। रिशा के चिकने गीले नितांब उसकी जांघों पर थप थप की आवाज करके टकराते। अब तक रिशा के झड़ने की गिनती नही बची थी। वो सारी शाम और रात ऐसे ही वासना के सागर में डूबे रहना चाहती थी। "आआहह!!!...हायईई...जाआलिम्म...मार ही डाला आज मुझे..!!!"। आज मुझे पता चला की सरिता दीदी उस दिन तुझसे गांड मरवाने के बाद लड़खड़ा के क्यों चल रही थी! बहुत जालिम हथियार है रे तेरा. अंदर तक चोट करता है ये सुन राजू मुस्कुरा उठा!


   
एक आखिरी शॉट के साथ रिशा लंड पे पूरा बैठ गई। लंड जड़ तक गांड में घुसा हुआ फड़फड़ा रहा था। रिशा पीठ के बाल राजू के ऊपर लेट गई और अपना सारा भार उसके कंधे पे टीका लिया।

गांड में फंसे गरम लोहे ने रिशा का बुरा हाल कर दिया था। वो तेज़ सिस्कारियाँ ले रही थी और अपने होठों को भी चबा रही थी। "स्स्स!!!!! आअहह!!! ऊऊहह!!! और करो ना देवरजी! आह!! ओह!! बहुत मजा आ रहा है हाआइइइइ! हां...ऊहह मां!!! मैं पागल हो जाऊंगी देवरजी!!! उम्म्ह!! म्म्म्ह्ह्ह्फ्फ्म्म!!!!!" रिशा हर शॉट पर कराह रही थी... "आह!! आह!! आह! आह! आह!! म्म्ह!! म्म्ह!! ओह्ह!! आआह!!!एसएसएस!!! हाऐइ!! हां!!! हैई!!! ओह्ह!! ओह्ह राजू!!" राजू उसकी आहों से और जोश में शॉट लगाने लगा। जिस्म फिर से तबाही मचाने लगे। कमरे में फिर आहों और जिस्मो के टकराने की आवाज गूंजने लगी। राजू बस झड़ने ही वाला था. रिशा को महसूस हुआ कि उसके लिंग की अकडन बढ़ गई है, तो वो झट से हरकत में आ गई। लंड गांड से बाहर निकल आया, और रिशा ने अपने रसीले होठों की कैद में कर लिया। वो पूरी तन्मयता से लिंग का रसस्वादन कर रही थी। जल्दी ही राजू अपने चरम पर पहुंच गया, और रिशा के मुंह में गरम खुलते वीर्य की नदी वापस आ गई। रिशा ने भी वीर्य की एक बूँद बर्बाद की और घूँट भर-भर कर वीर्य पीने लगी। रिशा ने कोई चूक नहीं की और बिना बर्बाद किए सारा वीर्य पीती चली गई। वो प्यार भरे अंदाज़ में लंड चूस रही थी जैसे कतरा कतरा वीर्य निचोड़ लेगी!

राजू के पैरो में कम्पन होना शुरू हो गया तब जा कर उसने उसे छोड़ा। रिशा फिर उसके लिंग पर रस भर चुम्बन करती हुई, उसकी नाभि से हो सीने पे गई। फिर राजू को एक अलसाये अंदाज़ में चुम्बन दिया। राजू भी हल्के हल्के चूमने लगा. रिशा ने उसके हाथों की पट्टीयाँ खोल दी और लाल पड़ चुकी हथेलियों को चूमते हुए सहलाने लगी। उसकी आखें राजू की हथेलियां की खरोंचों पे पड़ी तो आंसुओं से दबदबा उठी। राजू ने उसका चेहरा अपनी हथेलियों में भर लिया और होठों को चूमते हुए उसके आंसू पोंछने लगा। रिशा मुस्कुरा दी और उसके सीने पर सर रख कर शांत पड़ गई ! थकान के कारण दोनों नग्न जिस्म एक दूसरे की गरमाहट में समा गए।


    
"रात हो गई है, उमा आती ही होगी। शायद ये हमारी आखिरी रात हो साथ में", रिशा बोली। राजू ने उसे कस कर आगोश में भर लिया और कहा, "नहीं"
[+] 1 user Likes nitya.bansal3's post
Like Reply
#97
रात हो गई है, उमा आती ही होगी। शायद ये हमारी आखिरी रात हो साथ में", रिशा बोली। राजू ने उसे कस कर आगोश में भर लिया और कहा, "नहीं"…
[b]           अब आगे...[/b]

क्या मतलब?" रिशा ने राजू के बगल में सरकते हुए पूछा। राजू भी निश्चिंत होकर सीधा लेट गया और रिशा ने उसके कांधे पर अपना सर टीका लिया। "तुम्हीं ने तो कहा था भाभी.... जब उमा यहां होगी तो हम उसके साथ क्या करेंगे" राजू ने मुस्कुराते हुए कहा.. अपनी कही बात जैसे ही रिशा को याद आई उसका बदन फिर गरम होने लगा। उसकी चूत की गुलाबी पंखुड़िया पनिया कर टपकने लगी। अपने ही ख्यालों में खोई जाने वो कब अपने देवर के जिस्म से चिपक गई और उसके लंड पर अपनी जांघें रगड़ने लगी। उसका ध्यान तब टूटा जब कड़क लंड का गरम चिपचिपा लेसदार रस उसकी मुलायम काया से को फिर से भीगो ने लगा उसके फिर से तनते हुए लंड की गर्मी ने रिशा का ध्यान तोड़ा तो नज़र आया कि राजू शैतानी मुस्कान के साथ उसके भारी स्तनो के साथ खेल रहा था। निपल की घुंडियों को मरोड़ते ही उसके जिस्म में आग सी जल पड़ी। मुस्कुराती कराह के साथ उसने इस हरकत का स्वागत किया।


 
"हाआअइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइ!!! "देवर जी, मैंने तो बस इक कहानी बनाई थी.. मेरा कोई पक्का इरादा नई था.. जब ये सुनते ही तुम्हारे धक्के तेज़ हो गए तो मुझे भी चुदवाने में और मजा आने लगा और मैंने गंदी गंदी कहानी और बन डाली।" इतना कहते हुए रिशा ने उसके लंड को अपनी जांघों में दबोच कर दबा लिया! मर्दाने हथियार की गर्मी ने फिर वासना का तूफ़ान उठा दिया और रिशा राजू के बगल में लेटते ही उसकी कमर पर चुत रगड़ने लगी। राजू का थोड़ा चेहरा उतर गया पर रिशा की योनि से उठी भाप ने उसके जिस्म या ख्यालों में उबाल ला दिया था। रिशा को भी थोड़ा अच्छा नहीं लग रहा था ये सब कह कर तो उसने बात संभालने के लिए राजू के लंड को थोड़ा और जोर से दबाया। "सच ही कहते है.. मर्द के लंड की भूख कभी एक औत की चूत से शांत नहीं होती.. रोज़ नए नए छेद ढूंढता है! अब ऐसे मुंह ना उतारो ..अच्छा नहीं लगता, मैं उमा को मन लूंगी। वैसे भी तुम दोनो ही जवान हो क्या पता मुझे कुछ करना ही ना पड़े?" ये कहते हुए रिशा ने अपने नाखुनों से राजू के निपल हौले हौले कुरेदने शुरू कर दिये। राजू के बदन में इस हरकत से ऐसी सिरहन सी दौड़ी कि उसके ऊपर से नीचे तक रोम रोम लंड समेता खड़े हो गए। राजू ने रिशा को अपनी बाहों में भर कर एक बार फिर चूम लिया। रिशा भी चूमते हुए उस पर ऊपर आ गई। अब लंड उसकी योनि से चिपके हुए उसकी नितंबो के बीच टीका हुआ था। योनि की गरम भाप लंड को और कड़क कर रही थी जिस से सुपाड़े की ठोकर बार बार गांड के छेद पर हो रही थी।

 

रिशा और राजू एक दूसरे को जकड़े हुए चुम्बनों में खोए हुए थे। पसीने की झीनी चादर में लिपटे दोनों बदन एक दूसरे पर फ़िसल रहे। उधर योनि रस में भीग कर राजू का लंड भी बड़े आराम से नितंबो की दरार में फ़िसल रहा था। जैसा जैसा वक्त गुजर रहा था दोनों की सांसे फूल रही थी, नरम चुचिया मर्दानी छाती पर रगड़ खा रहे थी। बदन इतने जोर से चिपक गए थे कि हवा भी ना गुजर पाए। धीरे-धीरे बदन के साथ कमरे का तापमन भी बढ़ चला। जाने कब राजू के सुपाड़े की नोक रिशा के गांड के छेद में फंस गई। दोनो ही चौंक उठे और चुम्बन टूट गया। रिशा और राजू एक दूजे को निहार रहे थे कि अचानक उसका लंड फड़का। रिशा "आह" करके रह गयी। अब लंड का टोपा उसकी गांड के अन्दर था. रिशा की आंखों में हवस की डोरियां तैर गई। अपने कमर को हल्का सा मटकाते हुए उसने राजू का लिंग और अंदर ले लिया। लंड मोटा और छेद छोटा, आवाज़ तो आती ही। 'आहह!!! स्स्स्स!!!! ऊओहहह!!म्म्म्माआह!!!'.... 'हाय रे ये जालिम लंड तुम्हारा, प्यार में भी दर्द देता है कमीना आह!!'

"मुझसे गंदी गंदी बातें करो ना भाभी" राजू ने रिशा को कहा।

"क्यों? ऐसा भी क्या मजा गंदी बातों में जो इसमें नहीं?" पूछते हुए रिशा ने अपने नितंबो को कसाव दिया तो सुपाड़े की जान निकल गई।

इस हरकत से दोनो के जिस्म में मादकता की तरंगें बहने लगी..

"तुम्हारी चुदाई का मज़ा नशे में बदल जाता है भाभी...प्लीज़ ना..." कहते हुए राजू ने उसकी कमर को थामा और धीरे से रिशा के कंधे पर दबाव बनाया जिसे रिशा उसके लिंग पर लगभग पूरी बैठ गई। लंड के गांड के अंदर घुसते ही रिशा की साँसें अटक गई, उसने राजू का सीना नोच लिया।

"आ-आ-आ-आ-हह-हह-हह!!!...हह-हाय जालिम, जान निकल दी फिर से!!''

"ओह्ह भाभी!!!" कहते हुए राजू ने उसके सुलगते होठों को अपने होठों के बीच दबा लिया।

"उउफ़्फ़!! तुम मुझे रिशा क्यों नहीं बुलाते हो राजू। मैं तो तुम्हें तुम्हारे नाम से ही बुलाती हूं ना आहह!!!"

"पता नहीं भाभी.. आपको भाभी बुलाना बहुत सेक्सी लगता है"बदन में एक अलग सा रोमांच और लंड में ज्यादा तनाव आता है।. ऐसा कहते ही उसकी लिंग गांड के अंदर फरक उठा।

"उफ्फ्फ.. अगर ऐसी ही बात है तो मैं भी तुम्हें देवरजी ही बुलाऊंगी-आह!!"

रिशा के मुँह से देवरजी निकलते ही राजू का लिंग फिर झटका मार गया।

"ओह मेरे प्यारे देवरजी-आह!!मम्म!!,

कभी तुम कितने भोले देवरजी-ऊहह!!! थे!! अब देखो इस भोले भले देवरजी-स्स्स!!! को कैसे अपने लंड पर बिठा कर भाभी को दो दिनों से चोद रहा है ! खुद भी बेशरम बन गया है और मुझे भी बेशरम बना दिया है और लोग कहेंगे कि इस भाभी-म्म्ह- ने अपने मासूम देवर- आह!! को बिगाड़ दिया!!"


 

रिशा के अल्फ़ाज़ पिघले मौम के जैसे राजू के कानों में टपक के रह गए। उसका लंड फड़कना रुक ही नहीं रहा था; मानो जैसे उसका अपने लिंग पर काबू ही ना हो। रिशा की शहद भारी आवाज उसके कानों में फिर गिरी। अह्ह्म्म्म!!! जी करता है मेरे देवर का लंड हमेशा के लिए अपनी भाभी की चूत और गांड को ऐसे ही ठोकता रहे-आह!!! और अपने लंड से अपनी प्यासी भाभी को जन्नत की सैर करवाएं!!!”

इतना कहना ही था कि राजू ने उसके मुँह में अपनी जीभ घुसा दी और उसकी आवाज़ दबी ही रह गई। फड़कते लंड की थरथराहट ने रिशा को ऐसा ही पागल बना दिया था। उसकी जीभ भी राजू से गुत्थम गुत्थी करने लगी। लपलापाती जिव्हाँ से देवर की सारी लार रिशा के मुँह में और रिशा के मुँह की लार राजू के मुँह में टपकने लगी। इधर राजू वो सारी लार गटक रहा था उधर लंड पे सवार रिशा के सब्र का बांध टूट चुका था। उसने अपनी कमर लचकाई और राजू के लिंग पर पूरा बैठ गई। कड़क लंड जड़ तक उसकी गांड में फिट हो गया। रिशा की पनियाई चूत तेज़ झड़ने लगी और उसके चिपचिपे रस में दोनों भीग गए..

दोनों की ही साँसें फूल रही थी। बिना कुछ बोले दोनो बस वासना के सागर में तैर रहे थे।

थोड़ी देर यूं ही पड़े रहने के बाद रिशा बोली "मज़ा नशे में बदलना है देवरजी?"

"हां भाभी" राजू ने जवाब दिया।

रिशा ने धीरे धीरे कमर लचकाना शुरू किया और लंड फच्च! फच्च! की आवाज से धीरे धीरे गांड में अंदर बाहर होने लगा।

“चोदो मेरे ठरकी देवर...और जोर से चोदो अपनी रंडी भाभी को और हमेशा के लिए अपनी गुलाम बना लो! इस मजे के लिए मैं ना जाने कब से तरस रही थी...आज कुछ रहम ना करना अपनी भाभी पर और मेरे सारे छेद खोल के अपने गरम गरम वीर्य से नहला दो”

रिशा के मुंह से रंडी सुन सूरज राजू का लंड और जोर से फडकने लगा और उसके धक्के पे पहले से भी ज्यादा तेजी आ गई

चूँकि गांड के छेद की चिकनाहट थोड़ी कम थी तो घर्षण ज्यादा होने से मजा और दर्द दोनों बढ़ रहे थे। राजू ने हाथ बढ़ा कर वैसलीन की डिब्बी उठाई और ढेर सारी वैसलीन लेकर अपने लिंग पर लगा दिया, चुदाई चालू रहने से ढेर सारा वैसलीन रिशा की गांड में भी चला गया। अब चिकनी दरार में लंड आराम से फ़िसल रहा था। बचा हुआ वैसलीन उसने रिशा की मुलायम निताम्बो पे फेला दिया और जाम कर उन्हें दबाने लगा। चिकने माँ पर उसकी उंगलियाँ फिसल सी जाती। इन हरकतों ने रिशा का उन्माद बढ़ा दिया और वो बहुत तेजी से कुल्हे लहराते हुए लंड अंदर लेने लगी। डोनो जिस्मो की गर्मी से वैसलीन भी पिघल कर हर जगह फेल रही थी।


 

जिससे नितंबों और जांघों की टक्कर दर टक्कर पे छप्प!! चाप!! की आवाज़ आ रही थी जो किसी मधुर संगीत से कम नहीं लग रही थी ओह! आह्ह!!सस्स्सआह्ह्ह्ह!! कि मदम सिस्कारियों ने भी खूब समां बनाया हुआ था। धीरे से जब रिशा को अपने आगोश से राजू ने आज़ाद किया तो वो उन्मादित होकर आराम से कमर लहराने लगी। अब राजू का लंड घपाघप पूरा गांड में घुसा जा रहा था। रिशा ने भी उसकी कलाईयाँ थाम कर सिरहाने पर दबा दी और उसके सीने से उठ गई। उसे यकीन था कि इस पोजीशन में लंड और ज्यादा आराम से अंदर जा सकता है। राजू की कलाईयां जकडे रख रिशा ने हौले हौले से कमर लचकनी शुरू कर दी, उसकी योनि राजू की झांटो पर रगड़ रही थी। मर्दाना झांटो का कड़क स्पर्श मुलायम योनि के फलो पे पड़ते ही उसके बदन में झुरझुरी होने लगी। रिशा धीरे-धीरे बेकाबू होने लगी। झुरझुरी कम्पन में बदलने लगी।

रिशा -“हाए...राजू क्या मस्त लंड है तेरा...पूरा अंदर तक घुस के चोट करता है..हर झटके में इतना जोश। तू सच में कमाल का मर्द है”

राजू -“भाभी क्या भैया ने तुम्हारी गांड कभी नहीं मारी। एक दम टाइट और कसी गांड है तुम्हारी”

रिशा -“अरे तेरे भैया तो मेरी चूत भी ढग से नहीं मार पाये...गांड क्या खाक मारते। लेकिन तूने तो सारे छेद दो दिन में ही खोल डाले”


 
रिशा के मुख से ये बात सुन राजू का जोश दुगना और धक्को की स्पीड चौगुनी हो गई! रिशा के सुडोल स्तन राजू के सामने झूम रहे थे. बदन की थरथराहट से स्तनो में भी कम्पन उठ रहा था जिसे वो इधर उधर छलक रहे थे। दोनों रसीले शाही टुकड़ों ने राजू की कामवासना की आग में घी का काम कर दिया। उसने गर्दन ऊंची कर अपनी जिह्वा निकल कर दोनो स्तनो को चाट लिया। सुलगते जिस्म की गर्मी से उसकी जुबान जल गई। वासना का तूफ़ान दोनो को लीलने लगा। राजू अपनी जिह्वा से रिशा के यौवन का रसपान करता रहा। जीभ लहरा लहरा कर वो स्तनो को आइसक्रीम के जैसी चाट रहा था। गीली जुबान की हरकतें और चूत पर कड़क झांटों की रगड़न से रिशा का पूरा बदन कांप रहा था। काँपती हुई कराह के साथ वो राजू के पेडू पर झड़ने लगी। "आ-आ-आ-आ-हह-हह-म्म्म्ह-ह!!...हाअइइइइइइह! मैं आई गई राजू....!" गरम लावा के जैसा रस बदन पर गिरते ही राजू ने आपा खो दिया और अपने हाथ छुड़ा कर रिशा के मांसल स्तनो को दबा लिया। रिशा भी गरम हाथों की मजबूत पकड़ से आनंदित हो उठी और अपने दोनों हाथ दीवार पर टीका दिए, जिसका बदन स्थिर हो गया और गदराए स्तन बिल्कुल राजू के चेहरे के आगे झूलने लगे।

राजू उसके निपलों को जोर से पकड़ कर खिचता हुआ मुंह के पास लता और जीभ से आस पास चाट लेता।


रिशा स्थिर उसके बदन पे टिकी हुई अपनी चुचिया अपने हाथों में दबा उसके मुँह के पास ला उसे बस लालाच दे रही थी। "क्यों देवरजी; क्या हुआ? थोड़ी और कोशिश करो ना.. उफ्फ!! इतनी देर कोई और होता तो ना करता.. अब तक तो मेरी रसीली चुचियों का रस निचोड़ देता वो!!!" रिशा के मुँह से ऐसी बातें सुनते ही राजू का जिस्म सिहर उठा। वासना के पागलपन में चूर उसने लगभाग एक स्तन को नोचते हुए उसके निपल पर एक झापड़ जड़ दिया.. चटअक्क!! "आह!!" रिशा चिल्ला उठी.

रिशा -“ हाय कितने जालिम हो देवर जी..अपनी भाभी को ऐसा भी दर्द देता है क्या कोई?”

उसपर कोई ध्यान दिए बिना राजू ने दूसरे स्तन को जोर से दबा कर रगड़ दिया जिसे कड़क निप्पल और फूल कर मोटे से हो गए। दूसरे निपल पर भी उसने एक थप्पड़ रसीद दिया। चटअक्क!! "आह!!"


 
राजू ने अपनी जीभ से अपनी उंगलियां गिली करी और फिर कड़क निप्प्लो पर हमला कर दिया। ताड़!! तडक्क!! चटाक!! की आवाज़ से कामरा गूंज उठा। रिशा की चीखें अब उन्माद भरी हंसी में बदल चुकी थीं। वो मदहोशी में बड़बड़ा रही थी। अहहाहाहा- और तेज़ राज्जजू!! और तेज से मारो नाआअहहहहह!! बहुत अच्छा लग रहा है!! निकाल दो मेरे बदन की सारी गरमी!! एसएसएसएस!! निम्बू समझ कर निचोड़ दो मेरे निपल मेरे देवरर जी!!!" "चूसो इन्हें...काट खाओ और मरोड़ के सारी अकड़ निकाल दो इनकी!! चूस चूस के लाल कर दो मेरी चुचियाँ!!! काट खाओ मेरा मुलायम जिस्स को अम्म्म्माआह्ह्ह्ह!!!!!" मेरे जिस्म के हर अंग पर अपनी निशानी छोड़ दो मेरे राजा ! बड़ा तड़पाती है ये चुचिया...मैं खुद मसलती हूं तो इतना मजा नहीं आता जितना मजा तेरे हाथों से मसलवाने से आ रहा है राजू उफ्फ्फ!!

राजू ने भी गदराये उभारों को किसी वहशी की तरह चुमना चाटाना जारी रखा था। उसकी लार और पसीने से दोनों चुचिया चमक रही थी गए। राजू भी मदमस्त होकर निप्पलो को काटने से पहले ही दम लगा कर स्तन की मालिश कर रहा था। दर्द होने की हद तक वो उन्हें दबाता और फिर पूरी नंगी छाती पर हथेलिया रगड़ कर चुमता जाता। रिशा अभी भी उसका लिंग जो गांड में घुसा था उसपर बैठी थी। राजू की हरकतों से आनंदित होकर उसकी आंखें चढ़ गईं। इतनी मजबूत मालिश और लम्बी चुदाई से उसकी चूत से उसकी चूत फिर झड़ने लगी. "आह्ह्ह्ह्ह!!!!!!" मैं फिर से छूट गई मेरे राजा !चूत से मादक सुगंध वाला योनि रस फूट पड़ा। इस बार जोर बहुत तेज था. रस की फुहारें राजू के बदन को जलाते हुए यहां वहां बिखर रही थी। राजू के चेहरे, छाती और जिव्हा पर भी काफी रस झड़ चुका था।

"उसके कमर के पास रस बह कर बिस्तर गिला कर रहा था। इधर रिशा का चरम उन्माद से बुरा हाल था। जड़ तक धंसे हुए लंड के झटके गांड में तूफान मचा रहे थे। उसकी जांघें बुरी तरह कांप रही थी, पूरा बदन शांत पड़ चुका था। वो बस हाथों के सहारे राजू के ऊपर टिकी हुई थी। उसकी जुबान बहार को लटक गई और उखडती सांसों के बीच उसकी लार जिह्वा से टपक कर उसकी छाती पर बहने लगी। बड़ा सुंदर दृश्य था. राजू ने भी उसके स्तनो पर बहती लार का रसास्वादन कर लिया। रिशा ने उसे खींच कर सीधा किया और दोनों टांगे उसकी कमर के पीछे फंसा कर उसका सर अपने सीने में छुपा लिया। उसने राजू को जोर से जकड़ रखा था और तेज़ सांसों से उठते-बैठते गदराए स्तन मानो राजू के लिए तकिये का काम कर रहे थे। वो अभी भी उसके भारी स्तनो का रस पी रहा था।

उसने रिशा की गद्देदार नितंबो को थाम कर उसे सहारा दिया। धीरे-धीरे वो उसके नितंब भी सहलाने लगा। अब तक गांड का छेद फेल कर काफी ढीला हो चुका था। लिंग के इतनी गहराई तक घुसे होने से अब रिशा को कोई दिक्कत नई हो रही थी। थोड़ी देर तक दोनों एक दूसरे से यूं ही लिपटे रहे।

“उफ़्फ़ देवरजी-आह”

लंड फिर फड़क गया गांड के अंदर; रिशा ने उसके कानों में धीरे से कहा, "मेरी गांड मारो ना देवर राजा! तुम्हारे मजबूत लौड़े को तरस रही है मेरी गांड.. तुम्हारे मूसल का मर्दाना दर्द महसूस करना चाहती है मेरी गांड। मारो नाआह!!" रिशा की कराह भारी पुकार से राजू खुद को रोक न पाया और मांसल नितंबो को भीच कर पकड़ लिया। उसकी नाखून उसकी मुलायम गांड में घुस गए। नाखूनो

की चुभन से रिशा उचक पड़ी जिससे लंड थोड़ा बाहर निकल आया। राजू ने उसका एक निपल ढेर सारे मांस के साथ अपने मुंह में भरा और जोर से रिशा को अपने लिंग पर खींचा। अचानक हमले से लंड फच्च की आवाज के साथ गांड में पूरा समा गया।

"आह"

उसने रिशा की गांड फिर उठा के अपने लंड पर बैठा दिया। एक और कराह..

"आह!! देवरजीइइइ!!!!सस्स्स!!!"

सुनते ही राजू ने उन्माद में फिर उसके नितंबो को उठा कर अपने लंड पर पेल दिया।

"ओह माआह!! देवर जी!!!आज मार ही डालोगे क्या अपनी भाभी को लंड पेल पेल कर”

राजू ने फिर उसकी गांड उचका कर घप्प से अपने लंड पर बैठा लिया।

"ह्ह्हाआऐइइइ ममीरिइइ गाआआँधाआह्ह्ह्ह!!!'


 
राजू इधर घपाघप उसकी गांड को अपने लंड पर पेल देता और उधर रिशा की कामुक कराहे उसके कानों में गूँज रही थी। "आह! आह! ओह्ह!! ओह्ह!! ददैय्या रे! ओ मेरे देवरजी! हाय!! आह्ह!! बस्स ऐसे पेलते रहो रज्जा!! तुम्हारा मुसल हाय!! मेरी ओखली ईई!! कुट डालो मेरी गांड!! धीरेईई!!! आआहह!!! हौले हौले मेरे सैंया ! फाड़ डालो मेरी गांड..मेरे राजा”

गांड चुदाई ऐसे ही मदम मदम काफी देर चलती रही। लंड का काफ़ी सारा रस गांड की दीवारों को चिकना कर चुका था। अब बस मामुली सी हरकत से भी लंड अंदर तक चला जाता। हवस के बादल फिर घिरने लगे। राजू भी अब पूरी लय से रिशा की गांड ले रहा था। अब वो सुपाड़े के लगभाग बहार आने तक गांड को ऊपर खिंचता और फिर रिशा को लंड पे बिठा लेता। उसकी मीठी बातें जोश में और इज़ाफ़ा कर रही थी। थोड़ी ही देर में चोदन की लय बदल गई। अब गांड से पूरा लंड पक से बाहर आता और फेले हुए छेद में फिर फच्च से घुस जाता। रिशा की मद्धम कराहे इस ताल में सुर दे रही थी।

पक!! . . . फच्च!! . . . "आह" पक!! . . . फच्च!! . . . "ओह" पक!! . . . फच्च!! . . . "हन्नह" पक!! . . . फच्च!! . . . "मम्ह" पक!!. . . फच्च!! . . .


"मक्खन निकल दो मेरा" फक!! . . . फच्च!! . . . "तुम्हारी मलाई से भर दो नाआह!!!" फक!! . . . फच्च!! . . . "पूरा रस उतार देना मेरी मासूम गांड में" पक!! . . . फच्च!! . . . "बस ऐसे दबोच कर पेलते रहो मेरी गांड आह्ह" पक!! . . . फच्च!! . . . "दिन भर और रात भर" पक!! . . . फच्च!! . . . "ऐसे मेरी गांड में लंड भर कर सोना है मुझे आहह" पक!! . . . फच्च!! . . . "काट खाओ मेरी भारी चुचियाँ भी" पक!! . . . फच्च!! . . . "पूरा रस निचोड़ दो देवर रज्जा!! अब मैं तुम्हें और किसी के साथ नहीं बांट सकती मेरे राजा..तुम सिर्फ मेरे हो और मैं तुम्हारी दासी। मेरी चूत और गांड पर सिर्फ तुम्हारा अधिकार है...जब चाहो चोद लेना...कभी मना नहीं करूंगी
[+] 1 user Likes nitya.bansal3's post
Like Reply
#98
अब आगे..

ऐसे ही बुदबदाते हुए रिशा अपनी गांड जोर जोर से राजू के लंड पर पटक रही थी और इसी बीच चुत फिर से फड़क उठी और चरमसुख के उन्माद में वो फिर झड़ गई। इस बार चूत से किसी पिचकारी की तरह रस फूट पड़ा। रस की फ़ुहार ने राजू की जाँघों को और गीला करते हुए उसके लिंग और अंडकोष को भी गीला कर दिया। लिंग पर लगे ताज़ा ताज़ा योनि रस ने लंड और गांड की चिकनाहट बढ़ा दी। लंड और चिकना होकर सटासट गांड में दाख़िल होने लगा फिर से। चूत अभी भी पिचकारी पे पिचकारी दे रही थी। इतना सब रिशा से बर्दाश्त ना हुआ और उसने अलिंगन छोड़ कर दोनों हाथों से अपनी चूत थाम ली। ज़ालिम लौड़े के वारों से इतना झड़ कर चूत भी फूल गयी थी। रिशा ने अंजुलियों में अपना रिसता हुआ सोमरस भर लिया और राजू के होठों के पास ले आई। हवस के नशे में राजू भी जीभ निकल कर उसकी चूत का पानी लपलपाने लगा मानो जैसी बिल्ली!



उसे ऐसे देख रिशा हौले से मस्काई और सारा माल उसके बदन पर फेला दिया। पसीने के साथ योनि रस के मिलन से अजीब खुशबू उठी। सांसों में मादकता का तूफान भर आया। रिशा ने उसका एक जोरदार चुम्बन लेते हुए अपने बदन से चिपका लिया। फिर एक बार कड़क निप्पल और गुदाज बदन का गर्म स्पर्श होते ही राजू ने राहत की सांस ली। फ़िर रिशा बोली, "अब अपना रसपान भी तो कराओ ना देवर रज्जा!!, अब और देर ना करो, ये प्यासी भाभी अब भूखी बन चुकी है" ये सुनते ही राजू के तन बदन में कोई चिंगारी दौड़ गई। रिशा के मांसल नितंबों को मज़बूती से जकड़ कर वो घुटनो पे आ गया। रिशा का पांव उसकी कमर पर कस गया। उसने उसके बगीचे में अपनी कोमल बाहें पीरो दी। रिशा की गांड को थामे राजू ने निशाना साधा कर कमर का एक दमदार झटका लगाया। फौलादी लोहा गांड को चीरता हुआ जड़ तक धंस गया। जोरदार हमले से रिशा चिल्ला उठी, "आआआआअह्हह्हह!!! ऊह्ह्हमाआआ!!!"। लंड काफ़ी देर तक छेद में फंसे रहने से गांड फैल गई थी तो कोई दर्द तो ना हुआ लेकिन बदन में इस झटके से करंट दौड़ गया। रिशा को बड़ा मजा आया. उसने भी कमर पर अपनी पैर कस दिए जिससे राजू के बदन पर वो किसी नागिन जैसी लिपट गई।

 

"हाययययी.... क्या दमदार मर्दाना वार किया है देवर रज्जा!!! चलो अब दिखाओ कितना दम है तुम्हारी मर्दानगी में.. मारो अपनी प्यासी भाभी की गांड'' ललकारते हुए रिशा बोली और अपनी जीभ राजू के मुंह में घुसा दी। राजू ने चुनौती स्वीकार कर ली. अपना कूल्हा पीछे खींच कर फिर से लिंग बाहर तक खींच और फिर जड़ तक गांड में पेल दिया। इस बार शॉट इतना तेज़ पड़ा कि उसके गोटे नितंबों पर टकरा गए। "आआहाहाहाहाहा!!!" रिशा मारे ख़ुशी के झूम उठी. राजू ने अच्छा जवाब दिया. अगली टक्कर पहले से भी जबरदस्त थी। राजू ने बिफरे सांड जैसे गांड का मर्दन शुरू कर दिया था। उसकी उंगलियां नितंबों के मुलायम गद्देदार मांस में ढांसी जा रही थी। दोनों एक दूसरे की जीभ से जीभ लड़ा रहे थे। पसीने में लथपथ चिकने बदन एक दूसरे से लिपटे उबाल मार रहे थे। चुदाई का घमासान फिर से शुरू हो गया. राजू एक के बाद एक दम उखाड़ देने वाले झटके लगाता और रिशा उसका लंड अपनी गांड में ऐसे ले लेती जैसे पूरा खा जाएगी।

इतनी जबरदस्त चुदाई से उसकी योनि राजू के पेड़ू पे चपचप रिस रही थी। झड़ने की इंतेहां हो चुकी थी। उसकी पनियाई चुत से बस रस की एक धार टपक रही थी। चिपचिपा रस फिसल कर लिंग पे फैल रहा था। लिंग की चिकनाई बरकरार रहने से राजू का मुसल बहुत आराम से और गहरी गांड में जा रहा था। नितंब और मजबूत जांघों की टक्कर से कमरे में फिर से थप थप का मधुर संगीत बजने लगा। उस बीच दोनों की आहें और एक दूसरे के लिए अश्लील बोल भी समा बाँध रहे थे। थप थपा ओ!!! "आह!! और जोर से!!" रिशा चीखी.

"ये लो भाभी" तगड़ा वार करते राजू बोला।


 

"फिर से" उसके होंठ काटते हुए रिशा बोली।

"हन्ह्ह..लो मेरी प्यासी भाभी.. खा जा अपने आशिक का लंड"

"बस इतना ही जोर है क्या?? इतना तो मैं अपनी गांड लचका कर लगा लू!! और जोर से ईईईईईईआआआहहहह!!!!"

ये ले!! और ले!! हाहा!! हम्म्फ!! अब आया मजा!! और लोगी? ये लो!! अपनी ओखली में मेरा मुसल कैसा लग रहा भाभी?!!!"

“बस पेलते रहो रज्जाजी!!! आआअहह!!!" मेरा फिर पानी छुड़ा दो एक बार!! मैं बस अपनाआहह!! बहता रस तुम्हें पिलानाहह!!! चाहती हूंउन्नहह!!

पलंगतोड़ चुदाई की अब ताल बन चुकी थी। जिस्मो के टकराव की आवाज, और रिशा की आहें संगीत जैसी गूंज रही थी। घप्प!! "आह!!" फच्च!! "आह!!" फच्च!! "और तेज़!!!!!आआह्ह्ह्ह!!" थप्पपक!! "हाहाहाहाहाहा! मजादार देवरजीIII.. फिर से!!" ताड़!! "हाअइइइइइइइइइइइइइइ!!" घप्प!! "आह!!" घप्प!! "आह!!" घप्प!! घप्प!! घप्प!! घप्प!! घप्प!! घप्प!! फचाक!!! फचाक!!! "!!!!!!!!!!!! मैं ग…ई देवर जी!! मैं गई उफ़्फ़्फ़्फ़!!! मैं गई!!!!!!!!" चीखते हुए रिशा निडाल होकर राजू पर झूल गई मानो बेहोश हो चुकी हो। राजू ने मज़बूती से थामा और बिस्तर पर चित लिटा दिया। रिशा का पूरा जिस्म कांप रहा था और उसका मुँह एक खामोश चीख में खुला हुआ था। आखें सर में घूम गई थी. राजू ने उसके पैरो के पंजे पकड़ कर तांगे फेला दी और लिंग का सुपाड़ा उसकी फूली चूत पर रख दिया। गरम कोयले जैसा टोपा जैसे ही रिशा की भागनसे पर लगा उसका फव्वारा फिर फूट पड़ा। बिना मौका गँवाये राजू ने पनियाई चूत में जड़ तक लंड फँसा दिया। रिशा की चूत बहुत गरम हो चुकी थी। ऐसा लगा जैसे गरम लावे में अपना लोहा डाल दिया हो। गर्मी से भभकति चुत ने पूरा लंड ले लिया. राजू ने कमर हिला हिला कर शॉट लगाने शुरू किया तो चूत का फव्वारा और तेजी से झड़ने लगा। बस इतना ही नज़ारा शायद काफ़ी था। राजू से भी रुका ना गया और वो तेजी से झड़ने लगा। काफ़ी सारा वीर्य रिशा की चूत में उतारने के बाद उसने लंड बाहर खींच कर टोपे को उंगलियों से दबा लिया और रिशा के चेहरे के पास बैठ गया। फिर सुपाड़ा रिशा के खुले होठों के बीच पेल दिया। बचा हुआ सारा वीर्य रिशा के गले में उतरने लगा जिसे वो पूरा गटक गई। एक दो मिनट तक ऐसा ही लंड चूसते चाटते आधी बेहोसी में उसने पूरा रस पी लिया। उसकी चूत और गांड से भी काफ़ी माल रिस रहा था. राजू ने धीरे से अपना लंड बाहर खींचा और सुपाड़े से मुलायम गालों पर हल्की चोट करी जिससे आखिरी कुछ बूंदें रिशा के मुलायम गालों पर टपका दी। रिशा ने नशे में ही अपनी उंगलियाँ से उन बून्दों को पोंछ लिया और अपनी उंगलियाँ चाटते हुए निडाल हो गई। उसकी आँखें आधी बंद थी। साँसें भारी थी. उसके सीने के उभार ऊपर नीचे हो रही थे।


 
एक करवट लेकर उसने राजू से मुंह फेर लिया और राजू उसके पीछे जाकर लेट गया। उसकी गांड की दरार में अपना लंड चिपका कर लेट गया और धीरे धीरे उसके स्तन सहलाने लगा। रिशा अभी भी अपनी उंगलियों पर लगा रस चूस रही थी। इतने काम क्रीड़ा के बाद राजू का उसके स्तन सहलाना बहुत सुकून दे रहा था। थोड़ी देर यूँ ही वो उसके स्तनो से खेलता रहा। जोरा जोरी में रिशा के मुलायम बदन पर गुलाबी निशान पड़ गए थे। वो सब धीरे-धीरे हल्के पड़ने लगे। बस नितांबों का गुलाबीपन बरकारर था। राजू ने हाथ नीचे ले जा कर उसके निताम्बो को सहलाना शुरू कर दिया। उसके मुलायम स्पर्श से रिशा ने एक घुटी हुई राहत भारी सांस छोड़ी। इतना हल्का सुकून भरा स्पर्श पाकर वो मंद मंद ही मुस्कुराने लगी।

 
चुंकी राजू बस एक बार झड़ा था उसका लिंग दोनों जिस्मो के बीच दबा हुआ धीरे-धीरे उत्तेजित हो रहा था। निताम्बो की दरार के बीच उसका लोहा धीमी आंच में सिक रहा था। आधे खड़े लिंग का सुपाडा जैसे ही उसके छेद पर चुभा रिशा ने अलसाई नज़र घुमा कर राजू को देखा। दोनों की आंखें टकराईं और एकटक राजू को देखते हुए वो बड़े ही मादक अंदाज में अपनी उंगलियां दांतों तले दबा कर चुसने लगी। राजू भी उसे निहार रहा था.. उसके लिंग में तनाव बढ़ता चला गया और लिंग का सुपाड़ा फिर से गांड के छेद पर दस्तक देने लगा। रिशा स्पर्श से बरबस ही सिसक उठी "स्स्स्स्स....म्म्म्ह्ह्ह्ह"। चुदाई बड़ी दमदार रही थी, और उसने अनमना सा विरोध भी नहीं किया। राजू भी इशारा समझ रहा था. उससे भी रहा नहीं गया और हौले से उसने कमर का एक झटका दिया; सुपाड़ा फच्च से गांड में चला गया.. "हहहहहहहहहह!!" “ओह्ह ….. भाभ्भीईईई…तुम्हें दर्द नहीं हुआ ना?” और जवाब में रिशा ने अपने छेद से सुपाड़े को जोर से दबा दिया।

 
समझदार को इशारा काफी था। बिना रुके राजू ने कमर पीछे खींची और फिर से हल्का धक्का लगाया। लिंग थोड़ा और अंदर तक चला गया। गांड की गर्मी ने फिर से राजू को मतवाला कर दिया। उसने रिशा की कमर को जोर से पकड़ लिया और फिर एक जोरदार झटका दिया। इस बार लिंग जड़ तक अंदर धंस गया। रिशा उखड़ी हुई सांस के साथ सिस्कार उठी "आअहहहाआआहहसस्सशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशश... म्म्म्ममममममममममममम" उसकी थकन भारी सिस्कारियां और आहें राजू को मतवाला करती जा रही थी। जिस्म करीब होने के कारण दोनों की सांसों की ताल मिल गई। एक साथ सांसें चलने से लिंग हल्के हल्के से गांड में खुद ही अंदर बाहर होने लगा। दोनों एक दूसरे को कस कर पकड़े हुए थे और हल्की चुदाई का आनंद ले रहे थे। सांसों की रफ़्तार धीरे-धीरे तेज़ होती जा रही थी। राजू की हवस के सामने रिशा ने भी हथियार डाल दिये। वो बस उस आग में जलना चाहती थी। आखों में लाल हवास की डोरियाँ फिर तन गई। छेद चौड़ा होकर लिंग खाते जा रहा था। लेकिन अब चिकनाहट कम होने से घर्षण तेज हो रहा था। मीठी जलन से निताम्बो के बीच सुरसुरी सी मचने लगी। रिशा की कराहें बस आहो में बदलने ही वाली थीं तभी फोन की घंटी बजी।

 
उसने तुरंत होश संभालते हुए खुद को राजू से अलग किया। लंड फक्क करके गांड से बाहर निकल आया. औंधे मुह बिस्तर के बगल में मेज़ से फ़ोन उठा कर देखा तो उमा का कॉल था। हड़बड़ा कर वो अचानक घुटनो के बल बैठ गई और कॉल पिकअप किया।

"हैलो... हां उमा.. अरे कहां रह गई? तेरी राह देखते मेरी आंख लग गई।"

"दीदी मैं आज नई आ पाऊंगी। मेरी फ्लाइट कैंसिल हो गई है। मुझे अगली फ्लाइट अब सुबह 5 बजे मिलेगी। तो मैं कल ही आ पाऊंगी.... सॉरी"।

"अरी पगली। सॉरी काहे का? ध्यान रख अपना। और कुछ लगे तो फोन कर देना मुझे। कोई ना तू सुबह आ जाना" पीछे बिस्तर पर लेटा राजू ये सब सुन रहा था। उसकी नज़रें रिशा की नंगी पीठ से होती हुई उसकी गदराई गांड पे जा टिकी। वो बात करते करते घुटनो के बाल बैठ गई थी और थोड़े आगे को झुक कर एक हाथ के सहारे बिस्तर पर टिकी हुई थी। उसकी योनि की फाँके फूल कर गुलाबी दमक रही थी और गांड का छेद हल्का सा उसकी सांसों के साथ खुल बंद हो रहा था।

राजू ने दूसरी मेज से वैसलीन उठाई और ढेर सारा अपने सुपाड़े पर लगा लिया। ढेर सारा वैसलीन फिर अंगूठे पर लगाते हुए ही वो रिशा की तरफ बढ़ा। धीरे से अपनी जिह्वा निकल कर उसने मखमली नितंबों को चाट लिया।

बीच बात में ही हमला हुआ और रिशा खुद को कहने से रोक न पाई। "और अपना ध्यान रखना-आहह!!!"

"दीदी? क्या हुआ? चोट लगी क्या?"

"नही नही, कुछ नई हुआ। वो बस अंगूठा फंस गया दराज में-हाहाआह!!!"

इतना कहना ही था कि राजू अपना वैसलीन चुपड़ा अंगूठा और एक उंगली उसकी गांड में घुसा दी।


 
"आह-तू-हम्म- अपना ध्यान रख-ए-ए-और सुबह जल्दी आजा। ठीक-ठीक है?"

"हां दीदी। ठीक है। बस रखती हूं कल फ्लाइट से संदेश डाल दूंगी"

"ओह-ओह-ओहकैय"...कह कर रिशा ने फोन काट दिया।

अब तक राजू का दूसरा हाथ फिसल कर रिशा की जाँघों से होता हुआ आगे उनके बीच आकार फंस गया। दो मोटी मोटी उंगलियां के चूत की फाँके फेला कर उसने पूरी मज़बूती से बीच की उंगली उसकी चूत में धंस दी।

"आआहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहा हम्म"।

मौका ताड़ कर गांड से अंगूठा निकला और अपना सुपाड़ा छेद पर चिपका दिया। रिशा ऐसी छटपटाई जैसे घोड़े को गरम नाल चुभा दी गई हो। राजू ने दूसरा हाथ भी आगे बढ़ाया और उसकी उंगलियां भी चूत में पेल दी। अब चूत इतनी भर चुकी थी मानो मुसल ही घुसा हुआ हो. मर्दाना उंगलियाँ फिर रिशा की भग्नासे से रगड़ खाने लगी। उसने राजू की कलाइयाँ थाम कर उसको इशारों में रुकने की गुज़ारिश की। लेकिन रुकने की जगह राजू ने अपनी उंगलियां निकालीं और रिशा की कलाईयां थाम कर उसकी उंगलियां ही उसकी योनि में डाल दी। अपनी ही उंगलियों पर अपनी ही गरम चूत की भाप पड़ते रिशा के होठ थरथरा उठे। राजू के हाथ रिशा के बदन का इंच इंच नापते हुए ऊपर उसके उरेजो पर जा टिके। उसकी उंगलियों के स्पर्श से निपल और कड़क हो कर तन गई। दोनों स्तनो को मुट्ठी में भींचते हुए राजू ने उसे अपने पास खींच लिया। दोनों जिस्म आपस में चिपक गए. रिशा के नितंब फिसल कर राजू की जांघो पर टिक गए, और लंड नितंबों की दरार में जड़ तक धंस गया।

रिशा की आंखें नशे में पथरा गईं। चौतरफा हमले से वो स्थिर राजू के पाश में फंसी हुई थी। हल्के से खुले मुँह में एक कच्ची आह अटक गई।

"हाहा--"

राजू ने धीरे से जब लंड बाहर खींचा तो उसकी कराह छूटी। "-आआह्ह्ह्ह"।

राजू ने उसको चूचियों के सहारे दबोच रखा था और हौले हौले केवल कमर हिला हिला कर उसकी गांड पेलने लगा।

उसके हर झटके पर रिशा की सिस्की फूट जाती है। "आह. आह. आह. आह. आह. आह. आह. आह.आ. आ. आ. आ.."

धीरे धीरे चुदाई की स्पीड बढ़ने लगी. धक्के अब ठोकरों में तबदील हो गई।

कमरे में थप थप का मधुर संगीत फिर गूंजने लगा। रिशा का गला अब करहते हुये रूंध हो गया था। इतना मधुर एहसास उसे जीवन भर कभी नहीं हुआ था। चाहे वो उसकी सहेली के साथ गुजारे 3 दिन हो या जियोग्राफी सर के प्राइवेट ट्यूशन।। राजू की मर्दानगी के आगे सब फेल। इधर राजू की मुसलाधर शॉट्स की बारिश रुकने का नाम नई ले रही थी। रिशा भी बस फूली फूली सांसें लेकर मैदान में टिकी हुई थी।

लगतार चुदाई में उसे पता भी नहीं चला कि कब वो अपनी ही योनि में दनादन अपनी उंगली पेलने लगी थी। चरमसुख की मुस्कान चेहरे पर फेल हो गई। इतना प्यारा एहसास था कि उसकी आँखों में ख़ुशी के आँसू छलक गये। अपनी ही उंगलियों पर उसका कामरस बहना लगा। उसकी गांड का छेद भी टाइट होता जा रहा था। उधर राजू भी पूरी मस्ती में किसी हवस भरे जानवर जैसा अपना मुसल रिशा की गांड में लगतार पेले जा रहा था। अचानक उसका पूरा जिस्म अकड गया। उसने फिर एक और जोरदार शॉट रिशा की गांड पर किया। रिशा इस शॉट से लगभग बिस्तर से उछल पड़ी। राजू के कामरस से गांड की दीवारें भीगती चली गईं। उसने अपना लिंग पूरा अंदर तक धंस रखा था। वीर्य की गरमी पाते ही रिशा भी झड़ने लगी। हांफती सांसों के बीच उसने उगलियां चुत में पूरी गहरायी तक पेल दी। फचाफच रिसते कामरस से बिस्तर गीला हो चुका था। उन्माद के बादल हट चुके थे और अंधेरे कमरे में छन्न कर आती चाँद की रोशनी में दोनों प्रेमियो का जिस्म दमक रहे थे। दोनों आगोश में ही निडाल होकर आगे को गिर पड़े। लंड की पिचकारियां अभी भी गांड में जारी थीं. काफ़ी सारा वीर्य छेद से बहार को रिसने लगा था। राजू के गोटे अब योनि पर टिके हुए थे।

फुलती सांसें अब धीरे धीरे मद्धम हो रही थी। दोनों इसी हालात में काफी देर पड़े रहे। लंड अब स्थिर होकर छेद से बाहर आ चुका था। छेद का मुँह फैल कर चौड़ा हो गया था और अभी भी वीर्य उससे रिस रहा था। राजू ने बिस्तर के बगल से फोन उठाया और ऑनलाइन खाना ऑर्डर करने लगा। रिशा ने चेहरा घुमा कर उसकी तरफ कर लिया और एकटक उसे देखने लगी। उससे जाने क्यों इतना प्यार आ रहा था अपने देवर पर। वो उसे देखते हुए मुस्कुराने लगी। राजू ने भी खाना ऑर्डर कर के फोन बगल में रखा और रिशा को निहारने लगा। उसका बिखरा काजल और पसीने में नहाया बदन बड़ा आकर्षित लग रहा था। हाथ आगे बढ़ा कर उसने उसकी उंगलियां थाम ली और दोनों एक दूसरे को देखते-देखते नींद के आगोश में चले गए।
[+] 1 user Likes nitya.bansal3's post
Like Reply
#99
..रिशा राजू को किसी से बांटना नहीं चाहती क्योंकि जी अधूरापन उसने अपने जीवन में आज तक महसूस किया था उससे शून्य को भरने का काम किया है राजू ने..शादी के बाद पति छोड़ कर चला गया...पहली बार जब राजू से प्यार करने का मौका मिला बढ़ गई तो सास ने पहले अपना हक जता दिया..


ये बात सच है कि हर महिला के जीवन में ऐसा वाक्या नहीं घटता लेकिन कुछ एक महिलाएं ऐसी भी होती हैं जिनकी शादीशुदा जिंदगी में भी एक तरह का सूनापन रहता है। शादी होने के बाद भी किन्ही अनचाहे कारणों से पति के साथ उस तरह का खुलापन या प्रेम नहीं हो पाता जैसा कि होना चाहिए और ऐसे में उसे एक अदद साथ की, एक दोस्त की सख्त ज़रूरत महसूस होती ही रहती है जिससे वह जब चाहे डांट सके, लड़ सके, कंधे पर सिर रख कर रो सके, खुलकर हँस सके, घूम सके, जब चाहें मन चाही खुल कर चैट कर सके, बेझिझक होकर निःसंकोच सब कुछ उसे बता सके, बिना इस बात की परवाह किये कि सामने वाला व्यक्ति क्या सोचेगा या कहीं उसे जज तो नहीं करेगा...?

एक ऐसा इंसान पा लेना, एक ऐसा व्यक्ति मिलना जो स्त्री के भीतर छिपे ज़ज़्बात समझ सके, उसकी बातो को जान सके। एक स्त्री किसी से कुछ नहीं मांगती बस तन और मन की संतुष्टि और थोड़ा सा सम्मान चाहती है। अगर एक ऐसा दोस्त स्त्री के पास है तो वह आंतरिक तौर पर खुश हैं वरना शादीशुदा औरतें मूल रूप से इसी कारण दुखी हैं कि हमारे पास सुनाने वाले तो बहुत हैं पर सुनने वाला कोई नहीं। इच्छा ज़ाहिर करने वाले तो बहुत हैं, इच्छा समझने वाला कोई नहीं, दिलफरेब दीवाने तो बहुत हैं, दिल में रखने वाला कोई नहीं।

एक शादीशुदा स्त्री का प्यार लाजवाब होता है जिस मे जिस्म के साथ साथ खूबसूरत मन को सौंपने साथ की चाहत भी होती है,

अगर एक अधूरी और किसी के साथ और तलाश को ढूंढ रही स्त्री के मन की भावनाओं को समझने वाला मिल जाए तो.......खुद को या कुछ हदों के पार जाकर खुद के जिस्म भी वह सौंप देना मुमकिन भी है…ये वासना नहीं बल्कि आत्मा की तृप्ति और आंतरिक संतुष्टि के लिए अनिवार्य है।
[+] 1 user Likes nitya.bansal3's post
Like Reply
पुरुष में वासना की उत्पति पानी के बुलबुले की तरह क्षणिक होती है, किन्तु स्त्री में यह एक लहर कि तरह होती जो बहुत गहराई तक जाती है... और सहज शांत भी नहीं होती... इसे शांत करने के लिये कुशलता व अनुभव की जरूरत होती है... जब कोई पुरूष इसे करने में परांगत हो जाता है... तब स्त्री स्वयं ही उसे आमंत्रण देती है और प्रेम मे लीन होकर स्वयं को सौप देती है..!

[Image: 1593598636410.jpg]
[+] 1 user Likes nitya.bansal3's post
Like Reply




Users browsing this thread: 1 Guest(s)