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Misc. Erotica सुपरस्टीशन
Jab main khana kha raha tha, tab Kajal meri hawa kar rahi thi. Her fair, delicate fingers were slowly moving the fan. Her eyes kept glancing towards me. Khana khatam karne ke baad jaise hi main bed par leta, Champa turant mere paas aakar mere pair dabane lagi.

 
Her heavy breasts were swaying and her saree pallu thoda slip ho gaya tha. Maine dheere se kaha, "Rehne do Champa… tum thak gayi hogi."
 
Champa ne nazrein jhuka kar kaha, "Babaji, aapki seva karna mera saubhagya (good fortune) hai." Created by Maitri.
 
Tab Anjali aage badhi aur apni maa se kaha, "Maa, aap jaakar rest kijiye. Hum dono yahin Babaji ke room mein let jayenge. Agar unhe kuch chahiye hua toh hum le aayenge."
 
Champa ne ek pal dono ko dekha. Her face showed a little doubt, but she didn't say anything. Finally, usne sir hilaya aur kaha, "Theek hai beti… par careful rehna. Babaji ko koi inconvenience na ho."
 
Ye kehkar Champa kamre se bahar chali gayi aur door close kar diya.
 
Ab room mein sirf main, Anjali aur Kajal bache the.
 
Kajal mere pair dabati rahi. Her hands were slowly moving towards my thighs. Anjali mere sirhane baithi mere baalon mein ungliyan pher rahi thi. Dono ki nazrein baar-baar meri dhoti ki taraf ja rahi thi, jahan mera lund pehle se hi half-erect ho chuka tha.
 
Around 11 PM, Kajal thak kar side wale bed par so gayi. Anjali ab akeli mere pair daba rahi thi. Her hands were intentionally sliding upwards. Meri dhoti thodi slip ho gayi aur mera mota lund half-naked hokar bahar jhaankne laga.
 
Anjali thodi der use dekhti rahi. Phir uska hath unknowingly mere lund par aa gaya. Jaise hi uski hot fingers ne mere lund ko touch kiya, mera lund fully erect ho gaya. Lekhika Maitri hai.
 
Anjali dheere se whispered, "Babaji… aapka… bahut bada aur hot hai…"
 
Main chup raha. Anjali ne apna saree pallu sarakaya aur slowly mere lund par baithne lagi. Her wet pussy was touching the tip of my lund.
 
Ab room sirf teeno ki saanson aur halki sisskariyon se bhar gaya tha…
 
Anjali thodi der mere erect lund ko dekhti rahi. Her breathing became heavy. Phir uska hath slowly aage badha aur mere mote lund par pad gaya. Jaise hi uski hot fingers ne touch kiya, mera lund thar-tharane laga aur fully khada ho gaya.
 
Anjali ne ek pal meri taraf dekha, phir sharam aur excitement ke mix mein apna pallu aur lehenga upar utha liya. Her wet, hot pussy was touching my lund.
 
Slowly usne apna weight dala aur mere mote lund ko apni pussy mein andar lena shuru kar diya.
 
"Ahhh…" Anjali ke muh se ek halki moan nikli.
 
Main chupchap leta raha, eyes closed, but mera pura dhyan uski pussy par tha. Anjali ne dono hath meri chest par rakhe aur slowly upar-neeche hone lagi. Kuch hi der mein woh tezi se bounce karte hue chudai karne lagi. Her heavy breasts were bouncing wildly.
 
"Baba… aapka lund… bahut mota hai…" Anjali haanfte hue boli.
 
Finally maine aankhein kholi aur calm voice mein pucha, "Ye kya ho raha hai Anjali?"
 
Anjali sharam se red ho gayi, par ruki nahi, balki aur tezi se bounce karte hue boli, "Baba… aapki seva kar rahi hoon… aapka lund khada tha… laga bhookha hai… toh maine khana de diya…"
 
Maine kuch nahi kaha. Bas uske hips ko pakad kar uska saath dena shuru kar diya. Ab main bhi neeche se zor-zor se thrust maar raha tha.
 
Us raat Anjali teen baar mere lund par chadh kar chudai karwake puri tarah satisfied hui. Har baar jhadte waqt woh meri chest par gir jati aur kaanpte hue kehti, "Baba… main mar gayi… bahut maza aaya…" Maitri ki rachna.
 
Subah hone se pehle woh thak kar Kajal ke paas jaakar so gayi.
 
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Bas yahi tak dosto.

Maitri ki taraf se JAY BHARAT.

thanks        Namaskar
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(09-06-2026, 10:38 PM)maitripatel Wrote: Thank you dost.

Never mind, bas muje pata to ho ki koi to padh raha hai.

Aapse vinati hai ki aap mere post par aapke mantavo de.
Ho sake to rate bhi kare. Lekin comment jurur de.

Dusaro ka to muje bhi nahi pata par jo koi padhta hai aur comments deta unke liye uske liye likhti rahungi.

Shukriya dost.
Aap bahut hi behtar likh rahi ho, Going great...
Office ke chakkar ki wajah se time nahi mil paata hai warna lamba review deta !
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(12-06-2026, 08:37 PM)rajeev13 Wrote: Aap bahut hi behtar likh rahi ho, Going great...
Office ke chakkar ki wajah se time nahi mil paata hai warna lamba review deta !

Aapkaa bahot bahot dhanyawaad dost

koi baat nahi itnaa hi kaafi hai is se muje yah to pata chale ki koi to meri mahenat ko padh raha hai............................

samay mile aapne pure mantavyo denge aisi Asha hai .   thanks
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चलिए दोस्तों कहानी में आगे खोजते है
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सुबह 8 बजे मुखिया घर से निकल गया। चंपा चाय का ट्रे लेकर कमरे में आई और दोनों लड़कियों को जगाया।

 
“उठो बेटी… बाबाजी जी के लिए चाय लाई हूँ।”
 
काजल और अंजली आँखें मलते हुए उठीं। दोनों की चेहरे पर थकान और रात की चुदाई का नशा अभी भी साफ दिख रहा था।
 
चंपा ने चाय का कप मेरे हाथ में देते हुए पूछा, “बाबाजी, रात आपने आराम से सोया ना? अगर कोई जरूरत हो तो बताइए।”
 
मैंने चाय का घूँट लेते हुए कहा, “आराम तो हो गया… लेकिन अब पूजा की तैयारी करनी है। आज पहले अंजली की पूजा होगी, जो दोपहर 12 बजे तक चलेगी। इस पूजा में अंजली की माँ को भी बैठना है।”
 
चंपा ने सिर हिलाया, “जी बाबाजी… जैसी आपकी आज्ञा।”
 
काजल ने शरमाते हुए पूछा, “मैं क्या करूँ बाबाजी?”
 
मैंने काजल की तरफ देखकर कहा, “तुम नीचे रहो। जब तुम्हारी जरूरत पड़ेगी, तब बुला लेंगे।”
 
काजल ने “जी” कहकर सिर झुका लिया। लेकिन वह वही खड़ी रही तो मैंने फिर से कहा।

मैंने कहा, “दोनों नहाकर आओ। आज पहले अंजली की पूजा होगी, जो 12 बजे तक चलेगी। इस पूजा में अंजली की माँ को बैठना है। काजल, तुम नीचे रहना, जब जरूरत पड़ेगी बुला लेंगे।”
 
अब कमरे में सिर्फ मैं, अंजली और चंपा रह गए थे। पूजा की तैयारी शुरू होने वाली थी…


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जुड़े रहिये दोस्तों.


मैत्री.

Namaskar                          thanks
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9 बजे पूजा शुरू हुई। अंजली और चंपा दोनों मेरे सामने जमीन पर बैठी थीं। कमरे में अगरबत्ती की मंद सुगंध फैली हुई थी और हल्की-हल्की धूप ऊपरी खिड़की से आ रही थी। मैत्री की प्रस्तुति
 
थोड़ी देर तक मंत्रों का जाप करने के बाद मैंने चंपा की तरफ देखा और गंभीर स्वर में कहा, “चंपा, तुम जानती हो कि तुम्हारी बेटी की कोख सूख चुकी है?”
 
चंपा ने सिर झुकाकर धीरे से “हाँ” में सिर हिलाया। उसकी आँखों में चिंता और शर्म दोनों थे।
 
मैंने आगे कहा, “उसे हरी करने का एक ही उपाय है… अगर तुम तैयार हो तो?”
 
चंपा ने काँपते स्वर में पूछा, “वो क्या है बाबाजी?”
 
मैंने ठंडी नजर से दोनों को देखते हुए कहा, “हम तुम्हारी कोख को मंत्रों से इसकी कोख से जोड़ेंगे। लेकिन इसके लिए तुम दोनों को कपड़े उतारकर बैठना होगा। कोई बीच में नहीं रोकेगा। सोच लो। थोडा कठिन तो है पर इसके अलावा कोई और उपाय भी तो नहीं। और कोई जल्दी नहीं है, लेकिन जो करना है मन और तन से समर्पित होक करना है। अगर कोई समस्या है तो आगे जाके तकलीफ हो सकती है।”
 
चंपा ने एक पल के लिए अपनी बेटी अंजली की तरफ देखा, फिर सिर झुकाकर बोली, “अपनी बेटी की खुशी के लिए मैं तैयार हूँ बाबाजी। अगर ऐसा करने से मेरी बेटी का गर्भ हरा हो जाये तो मैं कुछ भी कर सकती हूँ। आप मेरे कोंख से उसकी कोंख जोड़ सकते हो बाबाजी। मुझे कोई आपत्ति नहीं।”
 
दोनों माँ-बेटी ने एक-दूसरे की तरफ देखा और फिर बिना कुछ कहे अपने सारे कपड़े उतार दिए।
 
अब मेरे सामने 45 साल की चंपा का भारी-भरकम, मोटा और परिपक्व शरीर था - उसके स्तन बेहद बड़े, भारी और थोड़े झुके हुए थे, कमर मोटी थी और गांड बहुत भारी तथा बाहर निकली हुई थी। वहीं 22-23 साल की अंजली का जवानी से भरा, गठीला और साँवला शरीर था - उसके स्तन ऊपर की तरफ उठे हुए, कमर पतली और गांड गोल-मटोल थी।
 
दोनों पूरी तरह मादरजात नंगी मेरे सामने बैठी थीं। मैत्री रचित कहानी
 
मैंने पहले गंगाजल की कटोरी उठाई और दोनों की चूत को धीरे-धीरे धोया। ठंडा जल उनकी गर्म चूतों को छूते ही दोनों हल्के से सिहर गईं।
 
फिर मैंने रोली और शहद का गाढ़ा लेप बनाया। अपनी उँगलियों पर लेप लेकर पहले चंपा की चूत में अंगुलियाँ डालकर अच्छे से लगाया। चंपा मचल रही थी, उसकी जाँघें काँप रही थीं, लेकिन वह चुपचाप सहन कर रही थी।
 
“आह्ह…” चंपा के मुँह से हल्की सिसकारी निकली जब मेरी उँगलियाँ उसके अंदर घुसीं।
 
फिर मैंने अंजली की चूत में भी वही लेप लगाया। अंजली की चूत अभी भी रात की चुदाई से थोड़ी सूजी हुई थी। चम्पा की पाकट आँखों से उसकी सूजी हुई चूत छिपी नहीं रह सकी। लेकिन उसने उस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया।
 
“बाबाजी… धीरे…” अंजली ने शर्म से कहा।
“बेटी,अब सहन भी तो करना पड़ेगा।“ मैंने बिना रुके कहा।
चंपा ने बेटी का हाथ पकड़ लिया और उसे सहारा देने लगी। उसे ऐसा ही था अकी बेटी के साथ यह पहली बार हो रहा है।
 
लेकिन मैं रुका नहीं। रचयिता मैत्री
 
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जुड़े रहिये दोस्तों.


मैत्री.


Namaskar        thanks
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फिर मैंने एक चम्मच में घी डाला, उसे अग्नि पर गरम किया और चंपा की चूत पर रख दिया। मैत्री रचित कहानी

 
“ऊई माँ!!! जल गई… बाबाजी… बहुत गरम है!!!” चंपा जोर से चीख उठी। उसका पूरा शरीर तड़प गया।
 
“सहन करो चंपा… थोड़ा जलना तो पड़ेगा। गुरुजी की क्रिया है।”
 
मैंने 2-3 बार गरम घी वाला चम्मच उसकी चूत में हल्का-हल्का दबाया। चंपा हर बार चीखती और मचलती।
 
फिर मैंने एक लंबा कलावा लिया। अपनी अंगुली पर घी लगाकर पहले चंपा की चूत में घुसाया और कलावे का एक सिरा अंदर डाल दिया। दूसरा सिरा मैंने अंजली की चूत में घुसा दिया। कलावा काफी लंबा (10-12 मीटर) था।
 
मैंने कहा,
 
“कलावा को कोख तक पहुँचाना है, लेकिन अंगुली से सिर्फ 3 इंच ही जा रहा है। अब एक ही चीज है जो इसे कोख तक ले जा सकती है… अगर तुम कहो तो?”
 
चंपा ने शर्म और व्याकुलता से कहा, “कीजिए बाबाजी… जो करना है कीजिए। मेरी बेटी के लिए कुछ भी सहन कर लूँगी।”
 
मैंने आगे बढ़कर अपना मोटा, खड़ा लंड चंपा की चूत पर रख दिया और धीरे-धीरे अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया। हर धक्के के साथ कलावा और अंदर सरक रहा था।
 
“आह्ह्ह… बाबाजी… आपका लंड… बहुत मोटा है… मेरी चूत फट रही है…” चंपा कराह रही थी।
 
अंजली बार-बार कह रही थी, “अभी नहीं पहुँचा बाबा… और अंदर जाने दीजिए…” उसने माँ की चूत के होंठो को थोडा फैलाया और बोली: “हाँ अब शायद ठीक है आपका साधन अब सही तरीके से अन्दर जा सकता है बाबाजी।“
 
मुझे समझ आ गया कि अंजली जानबूझकर चुदाई का पूरा मजा लेना चाहती है।
 
मैंने कलावे को और गहराई तक ठेल दिया और जोर-जोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए। अंजली की सिसकारियाँ कमरे में गूँजने लगीं - “आह्ह… बाबा… उफ्फ… धीरे… लेकिन और अंदर… हाँ… ऐसे…”
 
थोड़ी देर बाद मैंने गुरु वाली आवाज में कहा, “अंजली, अब कलावा कोख तक पहुँच गया है? जरा देखो तो।” रचयिता मैत्री

अंजलि ने माँ की चूत को थोडा फैलाया और अंजली ने अनमने और कामुक स्वर में कहा, “हाँ बाबा जी… लगता है, अब पहुँच गया…”
 
“माँ तुम्हे कैसा लगता है क्या बाबाजी का यह आपके अन्दर पूरा का पूरा समां गया है?”
 
“आ....आ....ह.....ह...ल...ग....तो.....कुछ ऐसा ही रहा है बेटी। लेकिन काफी दुःख रहा है, बाबाजी, थोडा धीरे धीरे डालो न.....थोडा मजा भी तो आ रहा है।“ चंपा ने अपने पैरो को कुछ ज्यादा फैला के लंड को जगह दी।
 
मैंने गुरु वाली भारी आवाज में आदेश दिया,
 
“अब हम कुछ मंत्रों का जाप करेंगे। तब तक तुम दोनों एक-दूसरे से चिपटकर जमीन पर लेट जाओ।”
 
चंपा और अंजली दोनों नंगी होकर एक-दूसरे से सटकर लेट गईं। अंजली की भरी हुई चूचियाँ अपनी माँ चंपा की भारी चूचियों से पूरी तरह दब रही थीं। दोनों की चूतें आपस में रगड़ खा रही थीं और चूत का पानी एक-दूसरे पर बह रहा था।
 
मैं मंत्र पढ़ते हुए दोनों की चूतों पर घी और चंदन लगाने लगा। फिर धूप दिखाकर मंत्रों का जाप करने लगा।
 
थोड़ी देर बाद मैंने शहद लेकर दोनों की चूतों पर प्यार से फैलाना शुरू किया। फिर मैंने अंजली को पलट दिया, अब चंपा अंजली के ऊपर आ गई।
 
चंपा की मोटी, भारी गांड देखकर मेरा लंड फड़क उठा और अधिक इच्छा हो गई। मैंने एक नया नाटक रचा और चंपा से कहा, “अब मैं तुम्हारे पेट में गंगाजल डालूँगा, जिससे तुम्हारी कोख का रस अंजली की कोख को हरा-भरा कर देगा।”
 
चंपा ने सहमति में सिर हिला दिया। प्रस्तुतकर्ता मैत्री
 
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शुक्रिया दोस्तों.

जुड़े रहिये

मैत्री की तरफ से जय भारत


Namaskar                        thanks
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Chaliye dosto HINGLISH me padhte hai
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Subah 8 baje Mukhiya ghar se nikal gaya. Champa chai ka tray lekar kamre mein aayi aur dono ladkiyon ko jagaya.

"Utho beti… Babaji ke liye chai layi hoon."
Kajal aur Anjali aankhen malte huye uthin. Dono ke chehre par thakaan aur raat ki sex ka nasha abhi bhi saaf dikh raha tha.
 
Champa ne chai ka cup mere haath mein dete huye poocha, "Babaji, raat aap araam se soye na? Agar koi zaroorat ho toh bataiye."
 
Maine chai ka sip lete huye kaha, "Aaram toh ho gaya… lekin ab pooja ki taiyari karni hai. Aaj pehle Anjali ki pooja hogi, jo dopahar 12 baje tak chalegi. Is pooja mein Anjali ki Maa ko bhi baithna hai."
 
Champa ne sir hilaya, "Ji Babaji… jaisi aapki aagya."
 
Kajal ne sharmaate huye poocha, "Main kya karoon Babaji?"
 
Maine Kajal ki taraf dekhkar kaha, "Tum neeche raho. Jab tumhari zaroorat padegi, tab bula lenge."
 
Kajal ne "Ji" kehkar sir jhuka liya. Lekin woh wahi khadi rahi toh maine phir se kaha.
 
Maine kaha, "Dono naha kar aao. Aaj pehle Anjali ki pooja hogi, jo 12 baje tak chalegi. Is pooja mein Anjali ki Maa ko baithna hai. Kajal, tum neeche rehna, jab zaroorat padegi bula lenge."
 
Ab kamre mein sirf main, Anjali aur Champa reh gaye the. Pooja ki taiyari shuru hone wali thi…
 
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Jude rahiye dosto......


Maitri.

Namaskar
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9 baje puja start hui. Anjali aur Champa dono mere saamne zameen par baithi thi. Kamre mein agarbatti ki mild fragrance phaili hui thi aur upar wali window se halki dhoop aa rahi thi.

 
Thodi der mantra chanting ke baad maine Champa ki taraf dekha aur serious tone mein kaha, "Champa, tum jaanti ho ki tumhari beti ki kokh sookh chuki hai?" Written by Maitri.

Champa ne sar jhuka kar dheere se "haan" kaha. Uski aankhon mein worry aur sharm dono thi.
 
Maine aage kaha, "Ise green karne ka bas ek hi tareeka hai… agar tum ready ho toh?"
 
Champa ne trembling voice mein poocha, "Woh kya hai Babaji?"
 
Maine thandi nazron se dono ko dekhte hue kaha, "Hum tumhari kokh ko mantras se iski kokh se connect karenge. Par iske liye tum dono ko kapde utaar kar baithna hoga. Koi beech mein nahi rokega. Soch lo. Thoda difficult hai par iske alawa koi aur option nahi hai. Koi jaldi nahi hai, par jo bhi karna hai, poore mann aur sharir se dedicated hokar karna hoga. Agar koi problem hui toh baad mein takleef ho sakti hai."
 
Champa ne ek pal ke liye Anjali ko dekha, phir sar jhuka kar boli, "Apni beti ki khushi ke liye main ready hoon Babaji. Agar aisa karne se meri beti ka garbh green ho jaye toh main kuch bhi kar sakti hoon. Aap meri kokh se uski kokh jod sakte ho, mujhe koi objection nahi hai."
 
Dono maa-beti ne ek dusre ko dekha aur bina kuch kahe apne saare kapde utaar diye.
 
Ab mere saamne 45 saal ki Champa ka heavy, thick aur mature body tha - uske breasts kaafi bade aur heavy the, waist moti thi aur hips kaafi heavy aur prominent the. Wahi 22-23 saal ki Anjali ka youthful, toned aur dusky body tha - uske breasts uplifted the, waist slim thi aur hips round the. Rachayita Maitri.
 
Dono poori tarah naked mere saamne baithi thi.
 
Maine pehle gangajal ki bowl uthayi aur dono ki genitals ko slowly wash kiya. Thanda paani unki hot parts ko touch karte hi dono halka sa shiver kar gayi.
 
Phir maine roli aur honey ka thick paste banaya. Apni fingers par paste lekar pehle Champa ki genital area mein fingers daal kar achhe se lagaya. Champa restless ho rahi thi, uski thighs kaanp rahi thi, par woh silently endure kar rahi thi.
 
"Ahhh…" Champa ke muh se halki sisskar nikli jab meri fingers andar gayi.
 
Phir maine Anjali ki bhi wahi paste lagaya. Anjali ki genitals abhi bhi raat ki sex ki wajah se thodi swollen thi. Champa ki sharp aankhon se woh swelling chhupi nahi reh saki, par usne zyada dhyan nahi diya.
 
"Babaji… dheere…" Anjali ne sharmate hue kaha.
 
"Beti, ab endure bhi toh karna padega," maine bina ruke kaha.
 
Champa ne beti ka haath pakad liya aur use support dene lagi. Use pata tha ki beti ke liye yeh pehli baar ho raha hai.
 
Lekin main ruka nahi.
 
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Stay tuned friends.......


Maitri.

Namaskar
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Phir maine ek spoon mein ghee dala, use fire par heat kiya aur Champa ki vagina par rakh diya.

 
"Ui Maa!!! Jal gayi… Babaji… bahut garam hai!!!" Champa zor se chilla uthi. Uska pura body tadapne laga.
 
"Sahan karo Champa… thoda burn toh karna hi padega. Guruji ki kriya hai." Maitri ki peshkash.
 
Maine 2-3 baar hot ghee wala spoon uski vagina mein halka-halka press kiya. Champa har baar cheekhti aur move karti.
 
Phir maine ek lamba Kalawa liya. Apni finger par ghee laga kar pehle Champa ki vagina mein insert kiya aur Kalawa ka ek end andar daal diya. Doosra end maine Anjali ki vagina mein ghusa diya. Kalawa kafi lamba (10-12 meters) tha.
 
Maine kaha,
 
"Kalawa ko womb tak pahunchana hai, lekin finger se sirf 3 inches hi ja raha hai. Ab bas ek hi cheez hai jo ise womb tak le ja sakti hai… agar tum kaho toh?"
 
Champa ne sharm aur restlessness ke saath kaha, "Kijiye Babaji… jo karna hai kijiye. Meri beti ke liye kuch bhi tolerate kar loongi."
 
Maine aage badhkar apna mota, hard penis Champa ki vagina par rakha aur slowly andar-bahar karna start kar diya. Har thrust ke saath Kalawa aur andar slide ho raha tha.
 
"Aahhh… Babaji… aapka penis… bahut thick hai… meri vagina phat rahi hai…" Champa moan kar rahi thi.
 
Anjali baar-baar bol rahi thi, "Abhi nahi pahuncha Baba… aur andar jaane dijiye…" Usne maa ki labia ko thoda spread kiya aur boli: "Haan ab shayad sahi hai, aapka tool ab properly andar ja sakta hai Babaji."
 
Mujhe samajh aa gaya ki Anjali jaan-boojhkar sex ka poora maza lena chahti hai.
 
Maine Kalawa ko aur depth tak push kiya aur hard thrusts lagane shuru kar diye. Anjali ki moans kamre mein goonjne lagi - "Aahhh… Baba… Uff… slow… lekin aur andar… haan… aise…"
 
Thodi der baad maine guru wali voice mein kaha, "Anjali, ab Kalawa womb tak pahunch gaya hai? Zara check karo."
 
Anjali ne maa ki vagina ko thoda spread kiya aur ek sexy tone mein kaha, "Haan Babaji… lagta hai, ab pahunch gaya…"
 
"Maa, tumhe kaisa feel ho raha hai? Kya Babaji ka ye aapke andar poora sama gaya hai?"
 
"Aa....aa....h.....h...l...g....toh.....kuch aisa hi lag raha hai beti. Lekin kafi pain ho raha hai, Babaji, thoda slowly daalo na… thoda maza bhi toh aa raha hai." Champa ne apne legs thode zyere spread karke penis ko space di. Maitri ki rachnaa.
 
Maine heavy guru voice mein order diya,
 
"Ab hum kuch mantras ka jaap karenge. Tab tak tum dono ek-doosre se chipak kar floor par let jao."
 
Champa aur Anjali dono naked hokar ek-doosre se chipak kar let gayi. Anjali ki heavy breasts apni maa Champa ki heavy breasts se puri tarah dab rahi thi. Dono ki vaginas aapas mein rub ho rahi thi aur juices ek-doosre par flow ho rahe the.
 
Main mantras padhte hue dono ki vaginas par ghee aur sandalwood lagane laga. Phir dhoop dikhakar mantra chanting shuru ki.
 
Thodi der baad maine honey lekar dono ki vaginas par pyaar se spread karna shuru kiya. Phir maine Anjali ko flip kar diya, ab Champa Anjali ke upar aa gayi.
 
Champa ki moti, heavy ass dekh kar mera penis throb karne laga aur desire aur badh gayi. Maine ek naya drama create kiya aur Champa se kaha, "Ab main tumhare stomach mein Gangajal daaloonga, jisse tumhari womb ka juice Anjali ki womb ko fertile kar dega." Edited by FunLove.
 
Champa ne agree karte hue sir hila diya.
 
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See you soon friends.

Until then Maitri wishes you JAY BHARAT.


Namaskar                         thanks
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(19-05-2026, 06:28 PM)maitripatel Wrote: रजनी शरमा कर बोली,


“माँ… जब गुरुजी ने मुझे 69 पोजीशन में चाटा था… तो मुझे बहुत मजा आया था। उनकी जीभ मेरी चूत के अंदर घुस रही थी। और लंड तो बाप.....रे....मुंह को काफी चोदे जा रहा था।”
 
गीता हँसी,

“वो तो शुरुआत थी बेटी। असली मजा तो तब आता है जब वो गोदी चुदाई करते हैं। मुझे अपने ऊपर बिठाकर कमर पकड़कर ऊपर-नीचे करते हैं। लंड जड़ तक घुसता है और निकलता है। मेरी बोबले उछल-उछलकर उनके मुँह में चली जाती थीं।”
 
रजनी ने अपनी माँ की भारी बोब्लो को देखते हुए पूछा, “और… गांड मारने की तकनीक?”
 
गीता की आँखें चमक उठीं। “तुम्हे गांड में भी रस है यह जान कर बहोत ख़ुशी हुई बेटी।“
 
“अरे बेटी… गुरुजी की गांड मारने की तकनीक सबसे खतरनाक है। पहले घी और शहद लगाकर गांड को चाटते हैं। फिर दो उँगलियाँ डालकर फैलाते हैं। जब गांड का छेद थोडा बड़ा हो जाता है और लंड के सुपारे को लेने के सक्षम बन जाता है तब गांड थोड़ी ढीली हो जाती है, तब अपना मोटा लंड एक ही झटके में पूरा घुसा देते हैं। पहले 5-10 मिनट धीरे, फिर तूफान। मुझे तो पहली बार में ही चीख निकल गई थी… लेकिन बाद में मजा आने लगा। अभी भी मेरी गांड में हल्का दर्द है। और मेरा मान ना है की एक दो और राउंड हो गए तो मेरी गांड का छेद उनके लंड के टोपे जितना बड़ा कर ही देंगे। और मैं यही चाहती भी हूँ बेटी, की मेरी गांड का छेद खोल दे और बड़ा सा सुराग कर दे।”
 
रजनी ने शर्म से कहा, “माँ… मुझे भी गुरुजी की ये सारी तकनीकें आजमानी हैं। और अभी तक मेरी गांड नहीं मारी गुरूजी ने। क्या मेरी गांड अच्छी नहीं है?”
गीता ने रजनी को चूमते हुए कहा, “बेटी, तुम अभी बहोत छोटी हो तुम्हारिगांड का छेद भी बहोत छोटा है। और गुरूजी ने अभी सही नहीं मन होगा। लेकिन अभी तो 6 दिन बाकी हैं। गुरूजी जब चाहे तुम्हारी गांड मार सकते है। और तुम्हे अच्छे से मरवानी भी चाहिए, भले ही गांड फट जाये। गुरुजी हमें और भी बहुत कुछ सिखाएंगे। उनकी हर तकनीक अलग स्वाद देती है - कभी मीठा दर्द, कभी जन्नत जैसा आनंद। बस हमें नंगी रहना है और उनकी हर आज्ञा माननी है।” मैत्री रचित कहानी.
 
दोनों माँ-बेटी एक-दूसरे को देखकर मुस्कुराईं। उनकी नंगी देहें सुबह की धूप में चमक रही थीं और बातें करते-करते दोनों की चूतें हल्की-हल्की गीली होने लगी थीं।


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आज के लिए बस इतना ही।

फिर मिलेंगे एक नए अपडेट के साथ।

तबै तक के लिए मैत्री की तरफ से जय भारत।।

माँ बेटी के संवाद ने तो दिल खुश कर दिया। कहानी का लय अब ठीक तो हो रहा है पर फिर भी टूटी हुई कई हिस्सों में बटी हुई लगती है। 
जहाँ भाग के अंत में कपड़े पहने हुए होते है अगले भाग में शुरू ही नग्न अवस्था होती है। 

ध्यान रखे। 

Erotic story। Hinglish and devnagri script writing me जो मेहनत होती होगी वो सराहनीय है।
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(19-05-2026, 06:28 PM)maitripatel Wrote: रजनी शरमा कर बोली,


“माँ… जब गुरुजी ने मुझे 69 पोजीशन में चाटा था… तो मुझे बहुत मजा आया था। उनकी जीभ मेरी चूत के अंदर घुस रही थी। और लंड तो बाप.....रे....मुंह को काफी चोदे जा रहा था।”
 
गीता हँसी,

“वो तो शुरुआत थी बेटी। असली मजा तो तब आता है जब वो गोदी चुदाई करते हैं। मुझे अपने ऊपर बिठाकर कमर पकड़कर ऊपर-नीचे करते हैं। लंड जड़ तक घुसता है और निकलता है। मेरी बोबले उछल-उछलकर उनके मुँह में चली जाती थीं।”
 
रजनी ने अपनी माँ की भारी बोब्लो को देखते हुए पूछा, “और… गांड मारने की तकनीक?”
 
गीता की आँखें चमक उठीं। “तुम्हे गांड में भी रस है यह जान कर बहोत ख़ुशी हुई बेटी।“
 
“अरे बेटी… गुरुजी की गांड मारने की तकनीक सबसे खतरनाक है। पहले घी और शहद लगाकर गांड को चाटते हैं। फिर दो उँगलियाँ डालकर फैलाते हैं। जब गांड का छेद थोडा बड़ा हो जाता है और लंड के सुपारे को लेने के सक्षम बन जाता है तब गांड थोड़ी ढीली हो जाती है, तब अपना मोटा लंड एक ही झटके में पूरा घुसा देते हैं। पहले 5-10 मिनट धीरे, फिर तूफान। मुझे तो पहली बार में ही चीख निकल गई थी… लेकिन बाद में मजा आने लगा। अभी भी मेरी गांड में हल्का दर्द है। और मेरा मान ना है की एक दो और राउंड हो गए तो मेरी गांड का छेद उनके लंड के टोपे जितना बड़ा कर ही देंगे। और मैं यही चाहती भी हूँ बेटी, की मेरी गांड का छेद खोल दे और बड़ा सा सुराग कर दे।”
 
रजनी ने शर्म से कहा, “माँ… मुझे भी गुरुजी की ये सारी तकनीकें आजमानी हैं। और अभी तक मेरी गांड नहीं मारी गुरूजी ने। क्या मेरी गांड अच्छी नहीं है?”
गीता ने रजनी को चूमते हुए कहा, “बेटी, तुम अभी बहोत छोटी हो तुम्हारिगांड का छेद भी बहोत छोटा है। और गुरूजी ने अभी सही नहीं मन होगा। लेकिन अभी तो 6 दिन बाकी हैं। गुरूजी जब चाहे तुम्हारी गांड मार सकते है। और तुम्हे अच्छे से मरवानी भी चाहिए, भले ही गांड फट जाये। गुरुजी हमें और भी बहुत कुछ सिखाएंगे। उनकी हर तकनीक अलग स्वाद देती है - कभी मीठा दर्द, कभी जन्नत जैसा आनंद। बस हमें नंगी रहना है और उनकी हर आज्ञा माननी है।” मैत्री रचित कहानी.
 
दोनों माँ-बेटी एक-दूसरे को देखकर मुस्कुराईं। उनकी नंगी देहें सुबह की धूप में चमक रही थीं और बातें करते-करते दोनों की चूतें हल्की-हल्की गीली होने लगी थीं।


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आज के लिए बस इतना ही।

फिर मिलेंगे एक नए अपडेट के साथ।

तबै तक के लिए मैत्री की तरफ से जय भारत।।
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(16-06-2026, 08:41 AM)Curiousbull Wrote: माँ बेटी के संवाद ने तो दिल खुश कर दिया। कहानी का लय अब ठीक तो हो रहा है पर फिर भी टूटी हुई कई हिस्सों में बटी हुई लगती है। 
जहाँ भाग के अंत में कपड़े पहने हुए होते है अगले भाग में शुरू ही नग्न अवस्था होती है। 

ध्यान रखे। 

Erotic story। Hinglish and devnagri script writing me जो मेहनत होती होगी वो सराहनीय है।

जी आपका बहोत बहोत धन्यवाद दोस्त

जी आपकी बात सही है एशिया है तो वह गलती है आगे से ध्यान रखूंगी

यही तो चाहिये दोस्त.................गलती दिखाई जायेगी तो आगे बेहतर कर पाउंगी..............


शुक्रिया फिर से आपका दोस्त

ऐसे ही बने रहिए और कहानी पढ़े जहा जरुरत हो वहा ध्यान में लाइए और अपने मंतव्यो भी दे.
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शुक्रिया दोस्त..........

जुड़े रहिये कहानी में
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आप सभी रीडर्स का धन्यवाद दोस्तों


चलिए कहानी में आगे बढ़ते है


Aap sabhi dosto kaa dil se dhanyawaad

Chaliye dosto kahaani me aage khojte hai
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मैंने अपनी अंगुली पर गंगाजल लगाया और बिना किसी रुकावट के चंपा की मोटी, कसी हुई गांड के छेद में जोर से घुसा दी।

 
“ऊईईई माँ!!! मर गई!!! फट गई मेरी गांड!!!” मैत्री रचित कहानी है.
 
चंपा ज़ोर से चिल्लाई। उसका पूरा भारी शरीर दर्द से तड़प उठा। उसकी आँखें चौड़ी हो गईं, और उसके मुँह से एक दर्द भरी कराह निकली।
 
उसकी बहू, काजल, ने उसकी चीखें सुनीं और ऊपर भागी। उसने यह नंगा और गंदा सीन देखा - उसकी सास, चंपा, और उसकी ननद, अंजलि, दोनों नंगी लेटी थीं, और बाबा की उंगली चंपा की गांड में घुसी हुई थी - काजल का चेहरा लाल हो गया। वह वहीं खड़ी रही, न हिली, न बोली। उसकी साँसें तेज़ हो गईं, और उसकी आँखें चौड़ी हो गईं। यह सीन देखकर, उसकी गांड में भी कुछ होने लगा और उसने अपना एक हाथ अपनी पीठ के पीछे ले जाकर अपनी गांड को सहलाना शुरू कर दिया।
 
मैंने काजल की तरफ देखकर इशारा किया, “आजा आजा...बैठ जा बेटी।”
 
काजल शर्म और उत्तेजना के मिश्रण में धीरे से बैठ गई।
 
काजल धीरे से बैठ गई, उसके गालों और आँखों में शर्म और एक्साइटमेंट का मिक्सचर साफ़ दिख रहा था। माँ और बेटी इतने करीब कैसे आ सकती थीं? ज़रूर बाबाजी का कोई जादू हुआ होगा।
 
फिर मैंने अपने लंड पर गंगाजल लगाया और एक ही जोरदार, पाशविक झटके में पूरा का पूरा 9.5 इंच लंबा और मोटा लंड चंपा की मोटी गांड में घुसा दिया। रचयिता मैत्री
 
"आआआआआह!!! उउउउ...ईईएए...यह फट गई!!! मेरी गांड फट गई, बाबाजी!"
 
चंपा ज़ोर-ज़ोर से कराह रही थी। मेरे लंड के प्रेशर से उसकी भारी गांड का छेद और चौड़ा हो गया था। मैंने तुरंत उसे ज़ोर से चोदना शुरू कर दिया - अब और ज़ोर से, और ज़ोर से, और अंदर तक… हर धक्के के साथ, चंपा मुझे बड़े मज़े से उसकी गांड चोदने के लिए छेड़ रही थी। हर धक्के के साथ उसके गंद के गोले ऊपर से नीचे तक घूम रहे थे। उसकी गांड कांप रही थी। उसका छेद फैल रहा था और मेरे लंड को निगल रहा था।
 
यह सब देखकर, काजल पहले से ही अराउज़ हो चुकी थी। उसने भी अपनी गांड तैयार कर ली थी और अब अपनी गांड चुदवाने के लिए तैयार थी। उसने अपनी चूत का रस अपनी गांड में मलकर चिकना कर लिया था। उसकी साँसें तेज़ चल रही थीं, और उसकी चूत थोड़ी गीली हो रही थी। मैंने उसे इशारा किया, और काजल ने जल्दी से अपने सारे कपड़े उतार दिए। अब वह भी पूरी तरह नंगी थी।
 
मैंने 15 मिनट तक चंपा की गांड ज़ोर से चोदी। फिर मैंने अंजलि को ऊपर उठाया और उसकी गांड भी ज़ोर से चोदी। अंजलि भी दर्द और मज़े के मिले-जुले एहसास में चिल्लाती और अपनी गांड हिलाती रही। अंजलि की गांड चंपा से ज़्यादा सख़्त और टाइट थी लेकिन मेरा लंड भी कहा कम था। उसकी गांड का किला पलवार में ढेह गया था और अब वह भोस के जैसा था।
 
जब मैं थक गया, तो मैंने उन तीनों से आँखें बंद करके मंत्र पढ़ने को कहा। मैंने अपना लंड गंगाजल से धोया और सीधे काजल के मुँह में डाल दिया। काजल उसे बड़े प्यार और लगन से चूसने लगी। नीचे बाकी दो औरतें मेरे लखोटा से खेल रही थीं। अब ऐसे में कौन सा लंड टिकनेवाला होगा भाई! थोड़ी देर बाद मैंने अपना वीर्य काजल के मुँह में उड़ेल दिया। काजल ने आँखें बंद करके उसे ऐसे निगल लिया, जैसे चॉकलेट चबा रही हो।


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जुड़े रहिये दोस्तों.

मैत्री.     Namaskar       thanks
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इसके बाद मैंने काजल की भरी हुई बोब्लो को जोर से दबाना शुरू किया और उल्टा होकर उसकी चूत चाटने लगा। मेरी जीभ उसकी चूत में अंदर-बाहर हो रही थी। कमरा पूरी तरह कामवासना और चूत चाटने की आवाजों से भर गया था। बाकी दो औरतें भी इसमें शामिल हो गईं और अब सिर्फ़ सेक्स ही था।

 
फिर मैंने अपना लंड काजल की चूत पर रखा और धीरे-धीरे अंदर की खाली जगह को भरने लगा। काजल अब पूरी तरह तैयार थी। मैंने उसकी जमकर चुदाई की। मैंने उसे ज़ोर-ज़ोर से और जैसे चाहा वैसे चोदा। काजल भी अपनी गांड उठा-उठाकर मेरा ज़ोर-ज़ोर से साथ दे रही थी। अब कोई शर्म नहीं थी।
 
आखिर में काजल ने मुझे लेटा दिया, वो मेरे ऊपर चढ़ गई और मेरे लंड पर बैठ गई और उछल-उछलकर मेरे लंड से खुद को चोदने लगी। यह खेल एक घंटे तक चलता रहा। आखिर में मैंने काजल की चूत को अपने लंड के जूस से भर दिया। अब वो तीनों बहुत खुश और सैटिस्फाइड लग रही थीं। यह काम-कार्य हो जाने के बाद भी, वे मेरे लंड से खेलती रहीं। कभी उन तीनों बचा हुआ वीर्य और उनके चुतरस अपने मुँह में डालकर चूसती, कभी मेरा पूरा लंड उनके मुँह में लेकर चूसती-चाटती। वो तीनों मज़े ले रही थीं। कोई कुछ नहीं बोली, बस काम चल रहा था और मैं बिस्तर पर लेटा यह सीन देख रहा था। लंड में कोई उम्मीद बची नहीं थी कि मैं उन्हें फिर से चोद सकूँ। मैत्री की रचना
 
सात दिनों तक, मैंने काजल, अंजलि और चंपा को अलग-अलग तरीकों से चोदा - कभी माँ-बेटी के साथ, कभी गांड के साथ, कभी मुँह से, कभी उन तीनों के साथ। कभी-कभी, मैंने उन्हें एक साथ नंगा करके चोदा, जबकि वे एक-दूसरे की चूत चाट रही थीं। कोई टाइम लिमिट नहीं थी। जब भी मेरा लंड कड़क होता, वे तीनों उसे ढीला करने के लिए तैयार हो जातीं, और करती भी।
 
7वें दिन जब मुखिया सात नदियों का जल लेकर आया, तो मैंने उस जल से अंजली को नहलाया और मुखिया से कहा कि अंजली के पति सुरज को बुला लो।
 
अगले दिन सुरज आ गया।
 
उसे देखते ही मैंने गंभीर होकर कहा, "सूरज, अब अगर तुम मेरे बताए तरीके को अपनाओगे, तो तुम ज़रूर पापा बनोगे।"
 
लगता था कि सूरज को ऐसी बातों पर यकीन नहीं था। लेकिन, अपने ससुराल वालों और बाकी घरवालों के ज़ोर देने पर सूरज मान गया।
 
मैंने कहा, "अगले चार दिनों तक अंजलि रोज़ दुल्हन की तरह सजेगी। हम कमरे में अगरबत्ती जलाएंगे और मंत्र पढ़ेंगे। जब मैं बाहर आऊंगा, तो तुम अंदर जाकर उसके साथ अपने तरीके से सुहागरात मनाओगे। यह चार दिनों तक चलेगा।" प्रस्तुतकर्ता मैत्री
 
सूरज ने कहा, "ठीक है," लेकिन उसके दिल में गहरे शक पैदा हो रहे थे। उसने मन ही मन कुछ तय कर लिया था...
 
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मैत्री.


Namaskar                    thanks
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सुरज ने ठीक हैकह तो दिया, लेकिन उसके अंदर एक आग सी सुलग रही थी। मैत्री रचित कहानी

 
वह रात भर सो नहीं पाया। बार-बार वही दृश्य उसकी आँखों के सामने घूम रहा था - अंजली दुल्हन की तरह सजी हुई, कमरे का बंद दरवाजा, बाबा अंदर घंटों तक रहना, और फिर जब बाबा बाहर आते थे तो अंजली का चेहरा लाल, साँसें तेज, आँखों में एक अजीब नशा और शरीर पर पसीने की चमक।
 
सुरज ने मन ही मन सोचा - “चार दिन तक रोज सुहागरात? क्या यह सब संभव है? क्या सच में इतनी पूजा की जरूरत है? क्या सच में उपरवाला बाबा के शरीर में आते हैं? या… ये सब सिर्फ एक बहाना है? यह सब क्या चुतियापा है? बहनचोद, कुछ समज में नहीं आ रहा।”
 
जैसे जैसे समय चलता गया, उसकी शंका दिन-ब-दिन बढ़ती गई।
 
पहले दिन जब अंजली दुल्हन की तरह तैयार होकर कमरे में गई, सुरज बाहर खड़ा था। उसने देखा कि अंजली के चेहरे पर शर्म के साथ एक अजीब सी चमक थी। जब बाबा भी अंदर गए और दरवाजा बंद हुआ, तो सुरज का दिल जोर-जोर से धड़कने लगा। लेखिका मैत्री है

वह सोचने लगा;

“मेरी पत्नी… मेरी अंजली… जिसे मैंने कभी छुआ तक नहीं… आज चार दिन तक इस बाबा के साथ अकेली रहेगी?
 
क्या सच में सिर्फ मंत्र पढ़ रहे होंगे?
 
या… बाबा उसकी चूत में अपना लंड डाल रहे होंगे?
 
क्या अंजली चीख रही होगी? क्या वह गांड उठा-उठाकर चुद रही होगी?”
 
पहले दिन बाबाजी बाहर आये और उन्हों ने इशारे से कहा अन्दर जाओ। सूरज अन्दर गया देखा अपनी बीवी सज के बैठी है। लेकिन उसके मानसिक संतुलन ने उसे कुछ करने नहीं दिया। थोड़ी देर बैठा और बाहर चला आया।
 
दूसरे दिन सुरज ने छिपकर दरवाजे के पास कान लगाया। अंदर से हल्की-हल्की सिसकारियाँ, “आह्ह… बाबाजी…” और “धीरे… फट रही है…” जैसी आवाजें आ रही थीं।
 
सुरज का खून खौल गया। लेकिन अपने आप को संभाल लिया। ऐसे लोगो पर शक करना मतलब खुद के लिए मुसीबत खड़ी करना सामान था।
 
तीसरे दिन जब बाबा कमरे से बाहर आए, तो अंजली का चेहरा पूरी तरह लाल था, होंठ सूजे हुए थे, साड़ी अस्त-व्यस्त थी और चलते समय वह जाँघें कसकर बंद किए हुए थी। सुरज ने साफ देखा कि अंजली की चाल लड़खड़ा रही थी - जैसे कोई उसे रात भर जोर-जोर से चोदा हो।
 
सुरज अब और नहीं सह पा रहा था। प्रस्तुतकर्ता मैत्री
 
रात को जब अंजली सोने आई, तो सुरज ने उससे पूछा, “अंजली… सच-सच बताओ… अंदर क्या होता है?
 
बाबा सिर्फ मंत्र पढ़ते हैं या… कुछ और भी?”
 
अंजली ने शर्मा कर नजरें झुका लीं और बोली, “सुरज… गुरुजी आते हैं… वो हमारे शरीर को शुद्ध करते हैं। तुम समझ नहीं सकते।”
 
सुरज का गुस्सा और शक दोनों बढ़ गए। वह मन ही मन ठान चुका था -
 
“चौथे दिन मैं खुद देखूँगा। चाहे जो हो जाए, मैं उस कमरे में घुसकर देखूँगा कि मेरी बीवी के साथ क्या हो रहा है। अगर बाबा उसे चोद रहा होगा… तो मैं… मैं…”
 
सुरज की आँखों में आग थी। उसने चुपचाप एक छोटा चाकू अपने पास रख लिया और चौथे दिन का इंतजार करने लगा।
 
उधर बाबा को सुरज के शक का अंदाजा हो चुका था, लेकिन वे मुस्कुराते हुए सोच रहे थे - “देखते हैं… यह भोसमारिका,लड़का क्या करता है। अगर चुदाई समारोह में घुसा तो… उसे भी शामिल कर लेंगे… या फिर…मन्त्र-तंत्र तो है ही, वह नहीं मानेगा तो क्या हुआ! बाकि सभी लोग मुज स काफी डरते है और जो मैं कहूँगा वही होना है अब इस घर में। यहाँ की सभी महिलाए अब मेरी बन चुकी है, मतलब मेरे कहने में वह कुछ भी कर सकती है। माँ-बेटी और बहु सभी अब मेरे इस लंड की गुलाम है और यह मुखिया चुटिया है, उसे कुछ समज आता नहीं और वह भी मेरे हर शब्द को पकड़ के जैसा मैं चाहता हूँ चुप-चाप करते जा रहा है।”
 
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क्रमश:

आज के लिए यही तक.

मैत्री की तरफ से जय भारत

Namaskar
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Ab HINGLISH me
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