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Adultery लफ़्ज़ों से कहाँ बयां हो पाता है हाले दिल...
#81
राजू ने रिशा के होठों को अपने होठों से भींच लिया...नीचे उसने अपना लौड़ा सुपाड़े तक बाहर निकाला और फिर एक जबरदस्त शॉट मारते हुए पूरा लौड़ा रिशा की चूत में गाड़ दिया। रिशा की चीख राजू के मुँह में ही दबकर रह गई

कुछ देर यूं ही रहने के बाद राजू ने धीरे-धीरे हरकत करते हुए अपना लौड़ा अंदर बाहर करना शुरू कर दिया। रिशा का दर्द भी अब काम हो गया था. दर्द की जगह मजे ने ले ली और रिशा की आह-आह निकलने का दौर फ़िर से शुरू हो गया!

रिशा बोल रही थी- आह आह और जोर से देवर जी … आह मेरी चूत … तुम्हारा लंड तो बहुत मस्त है देवर जी … आह्ह मेरी बजा दो। फाड़ डालो आज मेरी चूत..कोई रहम ना करना.

राजू.. “भाभी आज आपका देवर आपकी चूत और गांड दोनों को फाड़ देगा। बस आप मेरा साथ देते रहना”

15 मिनट चोदने के बाद राजू ने रिशा को बेड का किनारा पकड़ा कर घोड़ी बना दिया ! इसी बीच रिशा की चूत एक बार पानी छोड़ चुकी थी !राजू ने अपना लंड चूत से बाहर निकाल लिया और और रिशा की गांड के छेद को अपनी जीभ निकाल कर के चाटने लगा. गांड का भूरा छेद बहुत टाइट लग रहा था। राजू भी जानता था कि उसका लंड इतने आसानी से अंदर नहीं घुसेगा। उसने बिस्तर के साइड टेबल पर पड़ी वैसलीन की शीशी उठाई और ढेर सारी वैसलीन अपनी उंगलियों से रिशा की गांड में घुसेढ दी।


रिशा भी समझ गई कि आज उसकी गांड फ़टने वाली है। उसने अपना चेहरा तकिया के अंदर छुपा लिया और खुद को होने वाले हमले के लिए तैयार कर लिया. राजू गांड की गोलाई देख कर पगला रहा था। कितने दिनों से वो रिशा की गांड मरना चाहता था और आज वो मौका आ गया था। राजू ने एक के बाद एक दो चार थप्पड़ रिशा की कुंवारी गांड पर मार दिए जिससे रिशा की गांड लाल हो गई और रिशा दर्द से चिल्ला उठी…. उफ्फ्फ...नहीं राजू दर्द होता है।

राजू...”माफ़ करना भाभी। इतनी खूबसूरत गांड देख खुद को रखा नहीं पाया”

राजू..”राजू प्लीज़ जरा आराम से करना। तेरा लौड़ा बहुत लंबा और मोटा है और मेरी गांड एक दम कुंवारी।”

राजू..”फिकर मत करो भाभी..बड़े आराम से पेलूंगा बस आप अपनी गांड को ढीला रखना “

रिशा...”थोड़ी वैसलीन अपने लंड पर भी लगा ले शायद दर्द कम हो “

राजू ने डिब्बी से वैसलीन ले अपने लौड़े पर लगा ली और फिर लौड़ा गांड के छेद से सेट कर दिया और करीब पाँच मिनट तक रगड़ने के बाद राजू ने अपना लंड रिशा की गाँड के छेद में घुसेड़ना चाहा, लेकिन गाँड काफी टाईट थी और राजू को अपना लंड घुसेड़ने में काफी तकलीफ महसूस होने लगी। राजू ने एक हाथ आगे ले जा रिशा की चुची को जोर से मसल दिया। चुची मसले जाने से रिशा जोर से चींखी “ऊऊई” और उसने अपनी गाँड को ढील छोड़ दिया. राजू ने अपने लंड का सुपाड़ा एक जोरदार धक्के से उसकी गाँड के छेद के अंदर घुसेड़ दिया। रिशा ने अपनी गाँड को फिर से टाईट करना चाहा, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

रिशा बोली, “नहींईंईं... प्लीज़।”

चूँकि रिशा की गाँड और राजू का लंड वैसलीन से बहुत चीकना हो गया था, राजू का सुपाड़ा रिशा की गाँड में धँस चुका था और राजू उसकी दोनों चूंची कस कर पकड़ कर एक धक्के के साथ अपना पूरा का पूरा लंड उसकी कसी हुई गाँड के अंदर उतार दिया। राजू का पूरा का पूरा लंड रिशा की गाँड में एक झटके के साथ घुस गया। रिशा जोर से चींखी, “ऊऊऊईईईईईई माँ ओ ओ ऊईईईईईई ओह ओह ऊई ! मैं मर गयी। ऊईई मेरी गाँड फट गयी ऊऊऊऊ हाय माँ ओई मेरी गाँड फट गयी। प्लीज़ बाहर निकाल लो।”

रिशा ने अपना मुँह तकिये में घुसा दिया। वो दर्द से सुबक रही थी और बोल रही थी, “मेरी गाँड फाड़ दी, ऊईई मेरी गाँड फट गयी, बाहर निकालो नहीं तो मैं मर जाऊँगी।”

राजू उसकी चूंचियों को फिर से अपने हाथों से पकड़ कर मसलने लगा।


रिशा फिर बोली, “प्लीज़ बाहर निकालो राजू वरना मैं मर जाऊँगी।”

राजू ने उसकी चूंचियों को थोड़ा जोर दे कर दबाया और उससे कहा, “भाभी मैं तुम्हें मरने नहीं दुँगा, बस थोड़ी देर में ठीक हो जायेगा।”

रिशा अपना बाँया हाथ अपनी गाँड पर लायी और राजू के लौड़े को छू कर बोली, “उफफ ये बेहद मोटा है, इसने मेरी गाँड फाड़ दी… हाय।”

राजू ने उसकी चूंचियों को और थोड़ा जोर देकर मसला और पूछा, “क्या बहुत मोटा है?”

रिशा बोली, “वही जिसे तुमने मेरी गांड में घुसा रखा है।”

राजू ने फिर से पूछा, “यह क्या है, इस को क्या कहते हैं?”

रिशा ..”मुझे नहीं पता, तुम्हें पता होगा। मेरे से कुछ बोला भी नहीं जा रहा और तुम बिल्कुल मत हिलो, ... मुझे दर्द हो रहा है... बस आराम से अंदर डाल कर पड़े रहो।”

राजू ने फिर से रिशा से कहा, “पहले इसका नाम ले कर बोलो भाभी जैसे चूत चुदाई के वक्त बोल रही थी!”

रिशा राजू के आँडों को अपने हाथों से दबाती हुई बोली, “तुम बहुत बेहया हो, मुझसे गंदी बातें करवाना चाहते हो।”

रिशा ने अपना चेहरा घुमाया और राजू के सिर को पकड़ कर अपने चेहरे के पास ले आयी और राजू के कान मैं फुसफुसा कर बोली, “राजू तेरा इतना मोटा लंड अपनी गाँड में ले कर बेहया बनी हुई तो हूँ, और क्या चाहता है तू।”

ये सुन कर राजू बहुत गरम हो गया और रिशा की गाँड में अपना लंड धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा। रिशा की गाँड इतनी टाईट थी कि लंड को अंदर-बाहर करने में काफी जोर लगाना पड़ रहा था।

रिशा फिर चींखी और बोली, “नहीं प्लीज़ हिलना नहीं, मुझे बहुत दर्द हो रहा है, अभी ऐसे ही रहो... जब मेरी गाँड की तुम्हारे लंड से दोस्ती हो जाये तो फिर हिलना।”

राजू ने अपना हाथ रिशा के पेट के नीचे ले जा कर उसकी चूत में अपनी अँगुली डाल दी। जिससे रिशा को थोड़ा अच्छा लगने लगा ! फिर थोड़ी देर के बाद राजू रिशा की गाँड धीरे-धीरे चोदने की कोशिश करने लगा। रिशा चिल्ला रही थी, “ऊऊऊईईईईईई..... नहीं मैं मर जाऊँगी। मेरी गाँड फट जायेगी, प्लीज़ अभी अपने लंड को नहीं हिलाओ!” लेकिन राजू ने अबकी उसकी एक ना सुनी और उसकी गाँड जोर जोर से चोदने लगा। थोड़ी देर के बाद रिशा को भी मज़ा आने लगा और वो अपनी गाँड लंड के धक्कों के साथ आगे पीछे करने लगी। थोड़ी देर उसकी गाँड चोदने के बाद राजू का वीर्य उबलने लगा“ओह भाभी, मैं अब छूटने वाला हूँ।”

तब रिशा लंड को अपनी गाँड के और अंदर लेती हुई बोली, “अपने लंड को मेरी गाँड के अंदर छूटने दो और मेरी गाँड को अपने लंड की मलाई से भर दो!”


इसके साथ ही राजू ने दो चार और तेज़-तेज़ धक्के मार कर रिशा की गाँड के अंदर अपने लंड की पिचकारी छोड़ दी। रिशा ने भी राजू के झड़ने साथ ही अपनी चूत का पानी छोड़ दिया।

थोड़ी देर तक राजू रिशा की पीठ के ऊपर पड़ा रहा और फिर उसकी गाँड में से अपना लंड निकाला। लंड उसकी गाँड में से “पुच” की आवाज से बाहर निकल आया। रिशा जल्दी से उठ कर बाथरूम की तरफ़ भागी और थोड़ी देर के बाद राजू भी बाथरूम में चला गया। रिशा राजू के लंड को देखती हुई बोली, “देखो मेरी गाँड मार के कैसे मरे चूहे जैसा हो गया है।”मेरे तो जैसे शरीर में जान ही नहीं बची!


राजू मुस्कुराकर बोला, “अभी तो शुरू किया है भाभी। और करना है मुझे बहुत दिन से तड़प रहा था।

रिशा ने राजू के हाथ को पकड़कर अपने दोनों हाथों के बीच में रखा और बोली, “किसी को को पता मत चलने देना, पूरी जिंदगी तेरी कुतिया बन के रहूंगी।”
राजू बोला, “भाभी, तुम तो मेरी रानी हो। कुतिया तो बस चोदने के टाइम बनाऊंगा।”


कुछ देर आराम करने के बाद दोनों के बदन फिर से सुलगने लगे। आज की रात दोनों में से कोई भी सो कर बरबाद नहीं करना चाहता था . दोनों की आंखों में फिर से वासना के डोरे तैरने लगे, पूरी रात भर दोनों ने एक दूसरे को चूमते, चुस्ते चाटते हुए बितायी। उस रात रिशा की कई बार चूत चुदाई हुई और राज ने भी अगणनीत बार अपने लौड़े का प्रसाद रिशा को पिलाया।
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#82
लगाव केवल शब्द नहीं,
एक एहसास है...
संबंधों में घुला हो, तो
विश्वास है...
इंसान जितना इस
संसार में खोया रहता है...
अगर उतना परमात्मा में खो जाए
तो जीते जी मुक्त हो जाए..

[Image: 869dc1500cb9404c449cf9fa27f007e9.jpg]
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#83
आँख खुलते ही याद आ जाता है
तेरा चेहरा,
दिन की ये पहली खुशी भी कमाल
होती है...!!

[Image: 686968980-122139350498999165-6495556147136946179-n.jpg]
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#84
जब राजू जैसा देवर हो घर पर और अपना पति हो दूर

तब देवर के आगे घोड़ी बनाने को औरत हो जाती मजबूर

देवर को भी जब मिले बजाने को भाभी की गांड कुंवारी

फ़िर सारे छेद बजता है वो भाभी के बिस्तर पर बारी बारी

अक्सर भाभी भी गरमा जाती है देवर का देख के जोश

फ़िर चूत चुदी या गांड चुदी कहां रहता है उसको होश

[Image: 689226330-961740050167508-6624987732701414479-n.jpg]
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#85
आखिरी अपडेट में आपने पढ़ा कि कैसे राजू ने रिशा के साथ अपनी सुहागरात मनाई और उसकी कुंवारी गांड अपने लौड़े से फाड़ दी। रिशा ने भी पूरा साथ देते हुए पूरी रात राजू के साथ खूब मजे किये.


अब आगे..
सुबह जब आँख खुली तो उसने पाया कि रिशा बिस्तार पे नहीं थी। उसकी नज़र घड़ी पे गयी। . . . 8 बज चुके थे. बाथरूम से रिशा के गुनगुनाने और शॉवर की आवाज आ रही थी। राजू भी उठ कर अपने कमरे तक गया और फ्रेश हो लिया। पूरा समय उसकी आँखों के सामने रात की झलकियाँ तैर रही थी। उसका ध्यान रिशा के जिस्म से हट ही नहीं पा रहा था। खासकर के उसके सुडोल नितंब जैसे उसके दिमाग में छप गए हो। रात की रंगरलियां याद आते ही उसकी उत्तेजना फिर बढ़ गई और लौड़ा फिर से फनफना उठा। उसने तौलिया कमर पे लपेटा और रिशा के कमरे की तरफ बढ़ गया। उसमें जैसा कोई नशा सा सवार था। सोचने समझने की शक्ति गम हो चुकी थी और आँखों में बस एक ही तस्वीर थी... रिशा की मखमली मुलायम चिकनी गांड... जब वो उसके कमरे में पहुंचा तो रिशा अभी भी बाथरूम में ही थी। वो कोई सुरीला सा गीत गुनगुना रही थी। उसे पता भी नहीं चला कि राज कब बाथरूम में आ गया। चूंकि रिशा का मुँह शॉवर की तरफ था उसे कुछ दिखाई ना पड़ा। राजू ने अपना तौलिया खोल कर एक तरफ फेंक दिया और रिशा के ठीक पीछे जा कर उसे निहारने लगा। गुनगुने पानी की धार में रिशा का भीगता बदन चमक रहा था। सुराहीदार कमर से बहता हुआ पानी उसके मुलायम फूली हुई चुत्तडो को भीगोते हुए उसकी जांघों को नहला रहा था। रेशमी दूधिया रंग की गोरी जांघें कुल्हों का सौंदर्य दोगुना कर देती थी। राजू ठीक रिशा के पीछे घुटनो के बल ज़मीन पर बैठ गया और अपना चेहरा बिलकुल गांड के करीब ले आया। उसकी निगाहें एकटक रिशा की फूली हुई उभरी गांड को देख रही थी। सुडोल मंसल जांघें जब भी थोड़ी हिलती दोनों कुल्हे यूं थिरक पडते जैसे पानी भरे गुब्बारे, और ऊपर से झरनो की तरह गिरता पानी उनसे छल कर राज के चेहरे को भीगा रहा था।

राजू भी वासना में लिपटे हुए उस पानी में खुद को तार कर रहा था जैसे वो अमृत स्नान कर रहा हो। जब उससे रहा ना गया तो हाथ बढ़ा कर उसने रिशा की कमर थाम ली और कुल्हों के बीच लम्बी दरार को जीभ से चाट लिया। रिशा अचानक हमले के लिए तैयार न थी और उसने घबरा कर पीछे देखा। उसकी हैरानी का ठिकाना ना रहा जब उसने राजू को फर्श पर बैठा देखा। राजू और उसकी नजरें टकराईं. रिशा बड़ी बड़ी आँखों लिए सारा नजारा देख रही थी। राजू ने फिर उसकी गांड की दरार में जिभ रगड़ दी। एक मखमली सिस्की बाथरूम में गूंज गई। "स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्श!!" राजू ने रिशा पर नज़रें गढ़ाई राखी और कुल्हो को चाटना शुरू कर दिया। गांड पर बहता पानी अमृत समान पीते हुए उसने पूरी चूतड़ का रसस्वादन किया। रिशा की आंखें भी वासना से लाल होने लगीं। उसने सामने दीवार पर दोनों हाथ टिकाए और कुल्हो को पीछे की ओर ढकेल दिया। अब राजू का पूरा चेहरा उसके नितंबों के बीच धसा हुआ था, और वो पूरी मस्ती से गांड का रसपान कर रहा था। उसकी हथेलिया सरकती हुई उसके कुल्हो पर टिक गई। गरम हथेलियों के स्पर्श से रिशा के रोम रोम खड़े हो गए और वो भी मस्ती में आ गई।
[Image: IMG-7141.jpg]
उसने कमर लचका कर गांड राजू के चेहरे पर रगड़नी शुरू कर दी। राजू ने भी उसके कुल्हो की मस्त मालिश शुरू कर दी। बीच में वो कुल्हों को काट भी लेता, और मुँह में भर कर चूसता भी। रिशा पगलाये जा रही थी. उसके पैरों के बीच दूरी बढ़ती जा रही थी। एक हाथ नीचे लाकर उसने अपनी चुत रगड़नी शुरू कर दी। शावर अभी भी चालू था और दोनों अब पानी से तरबतर थे। राजू ने उसके नितंबो को दोनों हथेलियाँ से पकड़ लिया और फेला कर गांड के छेद पर कड़क जीभ की ठोकर मारी। रिशा बस आह करके रह गई। राजू ने अब तबियत से उसकी गुदा पे वार करने शुरू कर दिए। रिशा के उन्माद का तूफ़ान उफ़ान मारने लगा। वो कमर हिला हिला के राजू की ठोकरों का जवाब दे रही थी। यूं ही थोड़ी देर और चलता रहा। आख़िर राजू ने अपना अंगूठा उसके छेद में पेल दिया। रिशा मचल उठी. राजू ने उसकी जाँघों को चाटना शुरू किया तो रिशा की उंगली उसकी कोमल चूत में दाख़िल हो गई। अब राजू का अंगूठा उसकी गांड मार रहा था और रिशा की उंगलियाँ अपनी ही चूत पेल रही थी। साथ ही साथ राजू की जीभ उसकी गांड और जांघों के हर एक कोने को नाप रही थी।

थोड़ी ही देर में रिशा झड़ने लगी। राजू ने झट से मौके का फ़ायदा उठाया और सीधा खड़ा होकर रिशा की गांड पर अपना लंड रख दिया। गरम लौड़े के स्पर्श से रिशा पगला गई और उसका ओर्गासम और तेज़ हो गया। राजू ने सुपाड़े को उसके छेद पर टिकाया। गरम सुपाड़े के गांड के छेद पर स्पर्श होते ही रिशा समझ गई आगे क्या होने वाला है। लेकिन उसका शरीर अब उसके बस से बाहर चला गया था। उसने बस सुबकते हुए शॉवर के मुँह को पकड़ लिया। बहते पानी में कोई उसके आनंद के आंसू नई देख पता। उसने पीछे मुड़कर राजू को देखा। राजू की नज़रें उससे लड़ीं, और रिशा ने हां में सर हिलाया। राजू ने कमर को एक झटका दिया और गीला सुपाड़ा फच्च की आवाज करते हुए उसके छेद में दाखिल हो गया। राजू ने मदहोश कर देने वाले कसाव का अनुभव किया। उसने कमर थोड़े पीछे कर के एक मजबूत शॉट लगाया और लंड गांड को मानो चिरता हुआ जड़ तक रिशा की गांड में धंस गया। रिशा की एक लंबी चीख निकल पड़ी, जिस पर ध्यान दिया बिना राजू ने फिर धीरे से लंड पीछे खींचा और वापस जड़ तक पेल दिया। फिर तो गांड मरने का सिलसिला वापस शुरू हो गया। राजू धीरे से लंड सुपाड़े तक बाहर खिंचता और पूरे दम से गांड में पेल देता।. रिशा का बदन पूरा तन चुका था। वो दीवार पर चिपकी हुई थी और उसकी गांड पीछे को तनी हुई थी जिसमें राजू के शॉट दमदार पड रहे थे। गरम जिस्म से उठी भाप से कांच शावर सेक्शन धुंधला पड़ गया था। जब-जब राजू शॉट लगता था वो रिशा की गांड को अपनी तरफ खींचता था जिसका शॉट तगड़ा पड़ता था। रिशा बस दीवार पे सर टिकाए हुए अपनी गांड मरवा रही थी। पूरा बाथरूम में गीले जिस्मो के टकराने की आवाज गूंज रही थी। आवाज़ के साथ रिशा की सिसकिया भी गूँज रही थी। "आह!!... आह!!.. हाऐई!!.. मर गईई!!... ऊउमाआ!! आआह!! आह!! आह!! स्स्स!! सीई!! और तेज राजू!! और तेज!! आह!! आह! आह!!" राजू की मजबूत पकड़ से रिशा की मखमली गांड पर गुलाबी निशान पड़ गए थे, और ठोकरो ने उसके नितंबो को लाल कर दिया था। राजू से रहा ना गया और उसने रिशा की गांड पर एक जोरदार तमाचा जड़ दिया। "चटाक!!" रिशा की चीख निकल गयी, "आआअहहहहहहहहहहह!!"

थप्पड़ पड़ते ही उसके नितंब कड़क हो गए, जैसे राजू के लौड़े पर प्रेशर दोगुना हो गया। दोनों को बहुत मजा आया. राजू ने एक और शॉट लेते हुए फिर एक थप्पड़ दूसरे कुल्हे पे मारा, “चटाक्क!!” “ऊऊऊउम्माआ!! गांड का कसाव और बढ़ गया. लंड और जकड़ गया. राजू पूरी मस्ती में आ गया और उसने चांटो की झड़ी बरसा दी। "ताड़!! तड़ाक!! चटक!! ताड़!! ताड़!! ताड़! तपक!! तड़!! तड़!! ताड़!! उधर रिशा की चीख भी निकलती लगी। "और तेज!!...और तेज!! आआह्ह्हा!!आह!!हाहा!!...हां!! और तेज!! जियो मेरे राजा!! और मारो...मार मार के लाल कर दो मेरी गांड!! जब रिशा की पूरी गांड लाल हो गई तो राजू ने अपना शॉट हल्के कर दिया, और गांड की अंदर की दीवारों को अपने लंड से मालिश करने लगा। उसने नरम पड़ चुकी गांड पर हाथ फिराये तो रिशा की कराह निकल गयी। “आआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआ

राजू ने रिशा को खींच कर अपने सीने से चिपका लिया और गालों का चुम्बन लेते हुए उसके होठों तक पहुंच गया। साथ ही उसने गांड पेलना जारी रखा. रिशा भी उसके धक्को का जवाब देने में पीछे नहीं थी। दोनों की जुबान एक दूसरे के होठों को चाट रही थी। दोनों की जिभ एक दूसरे पर लाप्लापा रहे थे और हाथ जिस्म से खेल रहे थे। राजू ने उसके भरे हुए स्तनो को थाम लिया और उन्हें मस्ती में मसलने लगा। अपने चुचिओ की ऐसी बेरहम ट्रीटमेंट से रिशा थोड़ी घबराई की राजू कहीं उतावलेपन में उसे खरौंच ना दे। लेकिन राजू केवल उसके स्तनों को मसलता और बीच-बीच में उसके निपल्स को भी छेड़ देता। निपल्स के साथ ये खिलवाड रिशा को बेचैन कर रहा था। चुदाई काफ़ी धीमी चल रही थी और दोनों जिस्म एक दूसरे से चिपके हुए एक लय में झूम रहे थे। रिशा भी एक हाथ से अपनी चूत में उंगली कर रही थी। राजू ने एक हाथ नीचे को ले जा कर उसके हाथ के ऊपर रख लिया, और अपनी भी एक उंगली रिशा की उंगली के बीच से उसकी चूत में पेल दी। इस अनोखे युद्ध से रिशा की सांसें ही अटक गई और वो अचानक ढेर सारा पानी पी गई..

उसने शॉवर से अपना मुंह अलग किया और सांस लेने लगी लेकिन राजू की उस हरकत से उसका बदन तन कर बिल्कुल सीधा हो गया था और जाने अंजाने रिशा भी अपने पैरों की उंगलियों पर खड़ी थी। इस पोजीशन में लंड और गांड एक सीध में आ गया, जिसका सीधा भेदन संभव हो गया था। एंगल की रुकावट जैसी ही हटी राजू की गति अपने आप तेज हो गई। उसने पूरे जोश में रिशा की गांड लेनी शुरू कर दी। बड़ा ही अजीब सा खुशनुमा एहसास था. रिशा की गांड में उसका लंड और चूत में दोनों की उंगली। वो मन से चाहता था कि ये पल कभी ख़तम ना हो। रिशा भी इस एहसास से जुदा ना थी। अब तक वो 5 बार झड़ चुकी थी और अब वो भी दिल से चाहती थी कि चुदाई कभी ख़तम ना हो। वो चली तो थी राजू का जानवर जगाने लेकिन राजू ने उसके अंदर की ज्वाला जगा दी थी। वो भी मस्त होकर राजू के लंड का आनंद लेने लगी उसकी चूत ने फिर एक बार दम तोड़ दिया और वो फिर से पानी छोड़ने लगी।

सच कहा था चाणक्य ने कि औरत की भूख मर्द से चार गुना ज्यादा ही होती है। उसने हाथ पीछे लेजाकर राजू के कड़क नितंबों को थाम लिया और चुदाई में उसका जी भर के साथ देने लगी। राजू झटका देता तो वो और जोर से राजू को अपनी और खिंचती। उसके नाखून राजू के निताम्बो में गड़ गए थे। राजू पे इस दर्द ने अंकुश जैसा काम किया और वो पगलो की तरह शॉट लगाने लगा। दोनों जिस्म एक दूसरे से गोंद की तरह चिपके हुए। पानी भी उनकी गर्मी शांत करने में नाकाम रहा था। एक दूसरे को यूं ही उलझे हुए वो दोनों चुदाई जारी रखे हुए थे। राजू का ज्वालामुखी बस फटने ही वाला था। उसने रिशा की चुचिओ पर अपनी पकड़ और मजबूत कर दी और तभी वो मनोनमद में समा गया। गांड के अंदर गरम लावा जैसा वीर्य भरने लगा। वीर्य की गर्मी से रिशा का भी ओर्गास्म हो गया और वो अपनी चूत में उंगली करती हुई झड़ने लगी। दोनों एक दूसरे को कस कर थामे हुए थे और वासना की लहरो के रुकने का इंतज़ार कर रहे थे। राजू रिशा के कंधों को तब तक चूमता रहा जब तक उसका सारा वीर्य उसकी गांड में ना उतर गया।

रिशा ने धीरे से अपनी गांड से लंड निकाला और पलट कर घुटनो के बल ज़मीन पर बैठ गयी। उसने राजू का लंड अपने मुँह में भर लिया और चूस चूस कर सारा रस निचोड़ने लगी। लंड से अचानक दो पिचकारी और निकली और रिशा का गला तर हो गया।[Image: IMG-7149.jpg] 

फिर उसने साबुन लेकर लंड को धोना शुरू किया और फिर राजू के पूरे बदन पर साबुन लगाया। राजू ने भी उसके बदन के एक एक कोने को साबुन से नहलाया और दोनों काफी देर तक दूसरे के चिकने बदन को सहलाते हुए किस करते रहे। फिर शॉवर से दोनो ने एक दूसरे के बदन से साबुन साफ किया। सारी हरकतों से राजू का लिंग फिर तनने लगा। अब चूंकि दोनों नहा चुके थे तो रिशा की नज़र उसके पानी में चमकते लंड पर पड़ी। लंड आधा खड़ा देख उसने एक दबी सी मुस्कान से उसे थाम लिया और नीचे झुक कर उसे पूरा मुँह में भर के एक बार जोर से चूसा। फिर सुपाड़े पर एक जोर का चुम्मा जड़ दिया। राजू का लौड़ा फिर तन गया तो उसने एक चांटा उसका लंड पे दिया और बाथरूम से निकल कर कमरे में चली गई।
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#86
मोहब्बत
ऐसी दे दो जिस पर हक सिर्फ
हमारा हो..❣️
हम "तन्हा" भी रहे तो
तुम्हारी यादों में रहे.....
इतना "असर "हम पर तुम्हारा हो..!!

[Image: 698876292-122112620307265634-6971840990462516670-n.jpg]
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#87
इश्क़ होता है तो होने
दीजिए जनाब......!!!
मीठे जहर के शौकीन
हम भी कुछ ज्यादा ही हैं....!!!

[Image: 696968176-1583590983774122-1267410871532381874-n.jpg]
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#88
अब आगे..

राजू भी अचानक पड़े थप्पड़ से निहाल हो गया और तौलिया लैपेट कर बाहर आया तो देखा कि रिशा अपने बदन पर मॉइस्चराइजर से मालिश कर रही है। दोनों ने एक दूसरे को मुस्कुराते हुए देखा। रिशा ने राजू को यूं मुस्कुराता देख पूछा

[Image: IMG-7246.jpg]

रिशा.."क्या देख रहे हैं देवर जी. अभी भी भूख बाकी है क्या"

राजू.."तुम्हारी जैसी जिसकी भाभी हो उसका पेट कहां भरता है जल्दी"

रिशा: कल रात भी सोने नहीं दिया और अभी बाथरूम में भी पूरा निचोड़ लिया। मार मार के मेरी गांड और चूत दोनों की हालत खराब कर दी है। बस अब जल्दी से दुकान पर जाओ। बाकी रात को देखेंगे" जितनी बार तुमने कल रात से चोदा है इतना तो तुम्हारे भाई ने छह महीने में नहीं चोदा रिशा ने उसे एक शरारत भरी आंख मारी और खिलखिला पड़ी।




राजू...लेकिन भाभी आज तो रविवार है...छुट्टी है तो हम दोनों पूरे दिन ऐश कर सकते हैं

रिशा...नहीं बाबा मेरे पास अब हिम्मत नहीं दोबारा तेरा ये मोटा लंड लेने की.. और अभी नाश्ता भी तैयार करना है मुझे. तू अभी जा अपने कामरे में. नाश्ता त्यार करके तुझे आवाज़ देती हूँ

राजू मुस्कुराता हुआ अपने कमरे की तरफ बढ़ गया। अभी तो पूरा दिन बाकी था... ना जाने आगे क्या होगा? ये सोच कर रिशा हौले से मुस्कुराई और वापस अपने काम में लग गई। आख़िर उसके अंदर की औरत जाग गयी। राजू को इनाम तो देना ही पड़ेगा... और वो तैयार होकर किचन में नाश्ता बनाना चली गई। थोड़ी देर में कामवाली आई और साफ अफ़ाई के बीच नाश्ता भी बन के तैयार हो गया। कामवाली के जाते ही रिशा ने नाश्ता लगाया और राजू को आवाज लगाई... उसके मन में एक ही ख्याल चल रहा था... "राउंड 2"... और उसने मुस्कुराते हुए राजू को नाश्ते की टेबल पर आते देखा।

राजू: क्या बनाया है भाभी?

रिशा: तुम्हारे लिए ब्रेड ऑमलेट और दूध। काफ़ी ज़रूरत है तुम्हें. कल सुबह से मेहनत कर रहे हो।

राजू: मेहनत तो तुम भी कर रही हो मेरे साथ भाभी"

रिशा: मैं तो कल से तुम्हारा प्रोटीन शेक पी रही हूं। पूरा पेट भरा हुआ है. कितना माल निकलता है तुम्हारा"




राजू ये सुन थोड़ा शर्माया और पूछ..तुम्हें पसंद नहीं क्या प्रोटीन शेक"

रिशा:" बहुत पसंद है...एक दम गाडा और मलाईदार। ऐसा बोल रिशा खुलखिला के हंस पड़ी

“पर भाभी मुझे तो तुम्हारा दूध पीना है..इन मोटी मोटी गदराई चूचियो से ” रिशा की चुचियो को हाथो से दबते हुए राजू बोला




रिशा: लेकिन यहाँ तो अभी दूध कहाँ आता है देवर जी। और इनमें दूध तो तब आएगा जब मैं माँ बन जाऊँगी . अब तुम्हारे भैया तो यहां हां नहीं जो मुझे मां बना सके..तो फिल्हाल इस गिलास से दूध पी लो.

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राजू... भाभी मेरे बच्चे की माँ बनोगी?

रिशा...धत्..ऐसे कैसे हो सकता है.?

राजू..क्यों नहीं हो सकता भाभी? मैं अपना बीज तुम्हारी कोख में डाल दूंगा तो तुम भी मां बन जाओगी

रिशा..और दुनिया को क्या बोलूंगी कि किसका बच्चा है मेरे पेट में..तुम्हारे भैया तो छह महीने से घर नहीं आये…ये मुमकिन नहीं है राजू लेकिन मेरे वादा है तुमसे कि जब भी इनमे दूध आएगा तुम्हें जरूर पिलाउंगी....

ये सुन राजू ने रिशा को अपने आगोश में ले लिया और उसके होंठ चूमते हुए उसकी चुचिया और जोर से दबाने लगा


 

रिशा: रुक जाओ राजू वरना मैं अभी अपने होश खो दूंगी। अभी तुम जल्दी से नाश्ता ख़तम करो और थोड़ा आराम करो..रात को फिर से मेहनत करनी है तुम्हें.

राजू नाश्ता करके राजू अपने कमरे में चला गया। रिशा भी अपने रोज के काम निपटाने लगी।

थोड़ी देर बाद वो फुर्सत हुई तो देखा दोपहर होने ही वाली थी। उसने झटपट खाना बनाया और राजू को आवाज दी। राजू चुप चाप आया और खाना खाने लगा। खाना बहुत स्वादिष्ट था. उसने रिशा के खाने की खूब तारीफ की। रिशा भी खुश होकर उसे और प्यार से खिलने लगी। कभी कभी बिच में एकाध कौर खुद ही उसे खिला देती। दोनों ऐसा व्यवहार कर रहे थे जैसा नया प्रेमी जोड़ा। राजू खाना खा कर आराम करने चला गया। रिशा ने भी लंच किया और थोड़ी देर टीवी पर कुछ देखा और सो गई। शाम होने को ही थी उसकी आँख खुली। उसने देखा कि 4 बजे हैं, तो सोचा कि राजू को उठा दे। राजू के कमरे में पहुच कर देखा तो औंधा हुआ सो रहा था। रिशा उसके पास बिस्तर पर बैठ गई और प्यार से उसके बालों में उगलियां फिराते हुए उठे की कोशिश करने लगी। राजू अभी भी गहरी नींद में था और उसने एक करवट ली और सीधा लेट गया । उसने केवल अपनी अंडरवियर पहन ली थी। रोशनी में उसका बदन देख रिशा ने अपना होंठ काट लिए। राजू का माँसल पुश्त शरीर देखते ही उसकी आँखों में लाल डोरें तैरने लगी। उसकी नजरें राजू के अंडरवियर पे जा टिकी। उसका भारी लिंग उसमें समा ना रहा था। जबकी लंड खड़ा भी नहीं था. रिशा समझ गई कि अब उसे क्या करना है। राजू की रात की हरकत का भी तो जवाब देना ही था।



सोचते ही उसकी जाँघों के बीच तेज कम्पन हुआ और वो उठ कर राजू के सामने खड़ी हो गई। उसकी नज़रें एकटक उसकी जाँघों के बीच टिकी हुई थी। यूं शरारती ख्याल मन में भरे हुए उसने अपने लहंगे का नाडा खोला तो लहंगा उसकी मुलायम जांघों से सरकता हुआ फर्श पे गिर गया। अब वो केवल नारंगी रंग की पैंटी और काले रंग की झीनी चोली में खड़ी थी। उसने ब्रा नई पहनी थी. उसकी नज़रें खुद अपने बदन को निहारने लगी। उसे हमेशा अपनी जवानी पे नाज़ था।


अपने भरे हुए बदन के कारण वो मोहल्ले और कॉलेज में हमसे मशहूर थी। उसके हाथ अपने बदन को सहलाने लगे। उसके हाथ पहले रेशमी जाँघों से होते हुए सुराहिदार कमर पे और फिर अपने भरे हुए कोमल माँसल चुचिओ पर जा कर टिक गए। रिशा ने उन्हें बड़े प्यार से सहलाया।

अपने चुचिओ का भारीपन उसे बड़ा भाता था । कभी मस्ती करने के लिए वो टाइट ब्लाउज बिना ब्रा के पहन कर घुमने निकल जाती थी। उसके छलकते माँसल उभारो को देख कर जाने कितनो के दिल पे छुरिया चल जाती थी। उसने ब्रा में कसे स्तनो को जोर से दबाया तो उसकी हल्की सी आह निकल गई और उसने मस्त होकर अपने निपल्स को मसल दिया जिसे वो और कड़क हो गई।



फिर उसके हाथ अपने चेहरे तक पहुंच गए। उसकी हथेलियाँ अपने चेहरे को सहलाने लगीं। धीरे-धीरे उसकी उंगलियां अपने रेशमी गेसुओं में लिपट गई और उसने कस कर अपने बालों को जकड़ लिया और उन्हें थोड़ा और बिखरा दिया। उसकी नज़रें अभी भी राजू के लंड पर अटकी हुई थी। वो कमर के बल झुक गई और हथेलियां बिस्तर पर टीका दी।

 
फिर बिल्ली की चाल से चलते हाथ और घुटनो के बल बिस्तर पर चढ़ गई। उसका एक घुटना राजू की टांगों के बीच था और दूसरा एक टांग के बगल में। उसने झुक राजू की जाँघों को जीभ से चाट लिया।

 
मर्दानी खाल का स्वाद पाते ही वो उत्तेजित हो गई और राजू की जाँघों को हौले हौले अपनी जीभ से नहलाने लगी। राजू की टांगें नींद में ही फ़ैल गई। उसका लिंग अब पूरा तन चुका था और उसका सुपाड़ा अंडरवियर से बाहर निकला हुआ था। रिशा ने जिभ से उसके टोपे को चाट लिया। राजू ने नींद में करवट ले ली. रिशा ने मुँह बनाया फिर धीरे से मुस्कुरा दिया।

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राजू की ये मासूम सी हरकत उसे और प्यार करने पर मजबूर कर रही थी। लेकिन अच्छी बात ये थी कि राजू ने करवट ले ली थी। रिशा अभी भी उससे नींद में छेड रही थी! उसने दांतों से उसके अंडरवियर का बैंड खींच कर धीरे से घुटने तक खींच लिया। फिर एक उंगली फंसा कर धीरे से अंडर वियर उसके तन से अलग कर दिया। राजू अब पूरा नंगा था. उसका कसरती बदन देख कर रिशा के मुँह में पानी भर आया। मर्दाना चुस्ती, तीखे नैन नक्श, और जांघों के बीच उसकी मर्दानगी का सबूत।


रिशा उसके लिंग को हैरानगी से देख रही थी। वो सख्त और तना हुआ था, और यूं लहरा रहा था जैसे किसी नाग का फन। रिशा के शादी से पहले दो-तीन लड़कों से संबंध रहे द पर केवल ओरल। लेकिन किसी का और उसके पति का भी लौड़ा इतना लम्बा चौड़ा और तगड़ा ना था। पति जोर लगाता था लेकिन जल्दी दम तोड़ देता था। पर राजू तो जैसे सेक्स मशीन की तरह लगता था ..एक ही बार में जान निकाल देगा। रिशा के सामने रात का खेल घूम गया। उसने धीरे-धीरे राजू के सीने को चूमना शुरू किया। उसके सख्त बदन पर नाज़ुक होठों के चुम्बन देते हुए वो ऊपर को बढ़ने लगी। घुटने से ऊपर पहुचते ही राजू ने एक और करवट ली और चित्त लेट गया। रिशा मन ही मन मुस्करायी। अब उसका लंड हवा में सीधा तन गया था।

रिशा ने अपने चुम्बन जारी रखे और जाँघों तक पहुँच गई। राजू की टांगें अपने आप नींद में फ़ैल गईं। रिशा अब लंड के बहुत करीब पहुँच चुकी थी। लौड़ा अब सख्त होकर पूरा तन चूका था, और राजू के पेडु पर लेटा हुआ था। रिशा उसकी जाँघों को गीले चुम्बन से नहलाते हुए लंड की तरफ बढ़ गई। उसके होंठ राजू के अंडकोष पर थे। सांसों की भीनी गर्मी उसकी गोलियों पर पड़ रही थी। रिशा ने जीभ निकाल कर उसके टट्टो को चाट लिया। एक भीनी सी गरम खुशबू उसके गुप्तांगों से उठ रही थी। रिशा ने खुशबू सांसों में भरी और वापस टट्टो को चाटना शुरू कर दिया। अंडे अब पूरे गीले हो चुके थे. लार की लड़ियाँ होठों और टट्टो के बीच झूल रही थी। रिशा से अब मजा आ रहा था। उसने आगे बढ़कर राजू के लंड को नीचे से लेकर ऊपर सुपाड़े तक होठों में ले लिया और एक बार जीभ से गिला किया और फ़िर सुपाड़ा मुँह में ले लिया।


 
राजू ने अपने लंड पर कुछ गर्म महसूस किया और उसकी नींद खुल गयी। इस पहले कि वो कुछ समझ पाए रिशा ने एक सांस में उसका तीन चौथाई लंड मुँह में भर के जोर से चुसना चालू कर दिया।


राजू की आँखें फट पड़ी और उसने अंजाने में अपने कमर को एक झटका दिया तो लंड रिशा के गले तक उतर गया। रिशा इसके लिए तैयार न थी और सांस अटकने से उसके गले में तेज संकोचन हुआ जो लौड़े को और ज्यादा दबाता चला गया। राजू के मुंह से इक आह निकली और उसने नीचे देखा तो वहां का नजारा देख वो पूरे जोश और होश में आ गया। उसने एक शैतानी मुस्कान भरी और रिशा के सर पे एक उंगली रख कर उसे नीचे दबाया। रिशा गले तक फंसे लौड़े के कारण सांस नही ले पा रही थी। लेकिन राजू का चैलेंज स्वीकार कर के उसने लौड़े पे और दबाव बनाया और उसे अंदर ले लिया। अब उसकी नाक राजू के पेड़ू को छू रही थी, और अंडकोष उसकी ठोड़ी पे ठोकर मार रहा थे। रिशा को सांसों की बहुत ज़रूरत थी। उसके गले की दीवारें लंड पर कसी हुई और वो भी सांस रोके अपनी जीभ से लंड के निचले हिस्से को नहला रही थी। राजू ने देखा कि रिशा का चेहरा गुलाबी पड़ रहा था। उसने उसकी ठोड़ी को एक उंगली से ऊपर उठाया। गीला चिकना लंड किसी नाग की तरह रिशा के गले से बाहर निकल आया। रिशा ने ऊपर आते ही तेज सांस भारी। थोड़ी खांसी भी उसको हुई । लार की मोटी लड़िया पूरे लंड से निकली हुई रिशा के होठों और ठोड़ी पर लगी थी। राजू ये नजारा देख और कामुक हो गया. उसने आगे को सरक कर रिशा को अपनी बाहों में भर लिया और उसके गीले चेहरे को चाट कर साफ करने लगा। रिशा भी जी भर कर उसे चूमने लगी। वो उसके होठों को अपने गीले होठों के बीच लेकर चुस रही थी।



राजू ने उसकी चोली ढीली कर दी और खींच कर बदन से अलग कर दी। उसके दोनो भारी स्तन छलक कर अपने बंधनो से आजाद हुए ही थे कि राजू की हथेलिया उन पर जाम हो गई। राजू उनको जम कर रौंद रहा था. रिशा भी बार-बार चुचिओ को आगे ढकेल कर उसे न्योता दे रही थी। उसने भी राजू के लंड को कस कर मुट्ठी में बांध लिया और जोर जोर से रगड़ने लगी। उसकी इस हरकत से राजू पगला गया और एक के करके उसके निपल्स को चुसने लगा। काफ़ी देर तक दोनों एक दूसरे के बदन से खेलते रहे। लेकिन दोनों की भूख की कोई सीमा नहीं थी। थोड़ी देर और ऐसे ही चलता रहा। फिर रिशा ने राजू को ढकेल कर बिस्तर पर लिटा दिया और उसका लंड चुसने लगी। उसका सर बड़ी तेजी से ऊपर नीचे हो रहा था और लौड़ा घपागप उसके मुँह में जा रहा था। राजू का पानी बस छुटने ही वाला था. उसके लंड का कड़कपन अचानक बढ़ गया. रिशा ने ये महसूस कर लिया। उसने चुसने की तीव्रता बनाई राखी लेकिन स्पीड तुरंत आधी कर दी। वो राजू को मनोनमाद के शिखर तक पहुंचना चाहती थी। राजू अपने चरम से पहले ही रुक गया। रिशा ने एक और बार लंड अन्दर गले तक लिया और हट गयी। उसने अब अपनी स्थिति बदल दी। अब वो औंधी राजू की बगल में लेट गई। उसने अपने सुडोल मुलायम चुचिओ के बीच राज का लौड़ा दबा लिया और अपनी चुचियों से उसके लंड को चोदने लगी।

 

साथ ही वो सर नीचे ले जाकर सुपाड़े को जोर जोर से चुसती। राजू को बड़ा आनंद आ रहा था. थोड़ी देर बाद वो उठी और हाथ पैरों के बल बिल्ली की तरह राजू के ऊपर से सरकती हुई फर्श पे जा कर बैठ गई। राजू भी मोहित सा उसके पीछे पीछे बिस्तर के किनारे आ कर बैठ गया। उसके पैर बिस्तर से नीचे थे और उसका मजबूत लिंग तना हुआ अभी भी रिशा को आमंत्रण दे रहा था। रिशा सरकती हुई आगे आई और राजू के पैरों के बीच आ कर सीधी बैठ गई। राजू का मोटा बलशाली लौड़ा उसकी आँखों के सामने लहरा रहा था। उसने आगे बढ़कर लंड को चुचियों के बीच दबा कर ऊपर नीचे हिलाने लगी। चुचियों की मस्त चुदाई से राजू पगला गया. उसने हाथ बढ़ा कर दोनो स्तनो के निपल्स उंगलियां के बीच दबा कर मसलने शुरू कर दिये। रिशा के निपल्स में जैसे करंट दौड़ गया. उसने और तेजी से हिलना शुरू कर दिया। साथ ही उसने सर नीचे लेकर लंड मुँह में भर लिया और जोर जोर से चूसने लगी। उसने दोनों हाथों से अपने स्तनो को थाम लिया और लंड को पकड़ बीच में ले लिया। निपल्स को रगड़ती हुई वो जोर जोर से लंड को चूसने लगी। राजू मस्ती में पगलाया हुआ आह आह की आवाजें निकालने लगा। उसने वासना की मूरत अपनी भाभी के आगे थोड़ी ही देर में घुटने टेक दिये। उसका लावा फूट पड़ा. रिशा का पूरा मुँह गरम वीर्य से भर गया। वीर्य बहुत ज्यादा था और होठों के किनारे से टपक कर रिशा के पैरों पर टपकने लगा।

 

रिशा सारा वीर्य पी गई और लंड पे लगा सारा वीर्य चाटने लगी। वो बड़ी देर तक धीरे धीरे मजे लेते हुए राजू के लंड से वीर्य चाट कर साफ कर रही थी; मानो जैसे कोई बिल्ली दूध का प्याला चाट कर जाती हो। फिर उसने राजू की तरफ पागल निगाहों से देखा और उसे देखते हुए अपनी उंगलियों से अपने स्तन पर गिरे वीर्य को साफ कर के चाटने लगी। अपनी इस हरकत पे उसकी अपने आप ही हंसी छूट गई। वो राजू के सामने खड़े होकर अपने स्तनो पे लगे वीर्य के साथ खेलने लगी। थोड़ा वीर्य चाट जाती

और बाकी वीर्य माँसल स्तनो पे मल देती। राजू भी बिस्तर पर बैठा सारा नजारा देखता रहा। उसका लंड फिर खड़ा होने लगा। रिशा अब अपने स्तनो को हथेलियों में भर कर झंझोर रही थी। निपल्स को छेड़ रही थी. उन्हें दबोच रही थी. राजू देखता रह गया और उसका लिंग फिर से तन्ना गया। उसने रिशा की पैंटी उतारनी शुरू की। रिशा ने भी शरारती तरीके से कमर लहराते हुए उसकी मदद की। अब वो पूरी नंगी, दोपहर की तेज़ रोशनी में दमकते पागल देह की स्वामिनी लग रही थी। राजू ने उसकी कमर में हाथ डाल कर अपना ऊपर खींच लिया और रिशा को अपनी जाँघों पर चढ़ा लिया। चूत पे लौड़ा सेट किया और अपना लंड उसकी चूत में पेल दिया.. रिशा मीठे दर्द से चीख उठी...

आआआह्ह्ह्ह!!!!!! ओह्ह्ह्ह!!!!


 


रा...जू...आआह्ह्ह!!!!” और चुदाई का खेल वापस शुरू हो गया। दोनों बुरी तरह से एक दूसरे से चिपके हुए थे। रिशा कि मुलायम चुचिया राजू की मजबूत छाती से रगड़ खा रही थी। उसके निपल्स कड़क हो कर छाती में चूभ रहे थे।

[Image: IMG-7170.jpg] [Image: IMG-7169.jpg] [Image: IMG-7171.jpg]

राजू को भी मजा आ रहा था. रिशा भी निपल्स की कड़क घीसाई से मस्ती में आती जा रही थी। उसने दोनो टांगें राजू की कमर पे लपेट कर धक्के लगाना शुरू कर दिया और उसके हर धक्के का जवाब देने लगी। राजू भी उसके नितंबो को कस कर पकड़े हुए हर शॉट पे उसको अपने लंड थोडा खींच लेता और फिर जोर से वापस लंड चुत में ढकेल देता। शॉट तगडे पड रहे थे …रिशा ज्यादा देर टिक ना पाई और झड़ने लगी.


उसकी चूत कस कर और टाइट हो गई और राजू नए कसाव से झूम उठा। वो रिशा को थामे हुए खड़ा हो गया और गांड मसलते हुए चूत पे दनादन शॉट लगाने लगा। रिशा उसकी बाहों में किसी गुड़िया की तरह झूल रही थी। उसने अपनी बाहें राजू के गले में डाल राखी थी और उसे अपना स्तनपान करा रही थी। राजू मस्ती में उसके स्तन चुस और काट रहा था।

 
रिशा ने फिर पानी छोड़ना शुरू कर दिया। उसका रस बहता हुआ राज की जाँघों को गीला करने लगा। कमरे में फिर से सेक्स का पागल संगीत गूंज रहा था। अब रिशा की चूत किसी झरने की तरह बह रही थी!

"कुछ देर ऐसी ही चुदाई चलती रही। राजू रिशा को छोड़ने का नाम न ले रहा था। और रिशा भी हार न मान रही थी। दोनों ही पसीने में लठपथ हो चुके थे और कमरे में दो माँसल देहो के टकराने की थप थप आवाज गूंज रही थी। राजू अब थकने लगा था. दोनों एक दूसरे की बदन से रिस्ते पसीने और खुशबू में लिपटे हुए थे। रिशा के चिकने गीले नितंब उसकी पकड़ से छूट गए। रिशा समझ गई और राजू के आलिंगन से अलग हो गई, और चिपक कर खड़ी हो गई। राजू का लंड उन दोनों के जिस्म के बीच फंस गया। रिशा लौड़े को हाथ में भर कर उमेठने लगी. राजू भी उसकी चुचिया मसल रहा था, और जीभ लपलपा कर रिशा की रसीली जीभ का रसस्वादन कर रहा था। रिशा की उंगलियाँ राजू के लंड पे लगे अपने ही रस में भीग गई थी। उसने उंगलियां ऊपर लाकर राजू के मुंह में डाल दी। राजू ने भी भरपुर मजे से उगलियों पर लगे उसके रस को चूस लिया और फिर झुक कर रिशा को वापस चुम्बन किया। रिशा ने भी अपनी जीभ उसके मुँह में घुसा कर अपना स्वाद लिया।

मैं तो बड़ी टेस्टी हूं!" वो चहकते हुई बोली।
“वो तो है भाभी" राजू ने जवाब दिया।
रिशा ..”मुझे कुछ और भी स्वाद लेना है"
“क्या भाभी?”
रिशा ने एक नाखून से उसके लौड़े की लम्बाई को कुरेदा तो राजू समझ गया। उसने रिशा को पास खींच कर चुंबन की बरसात कर दी। रिशा भी झपट कर उसे तेजी से चूमने लगी। किस करते-करते वो उसकी छाती पर पहुँच गई। उसने उसके निपल्स को थोड़ा चबा कर चूसा तो राजू की सिसकारी निकल पड़ी। रिशा और आगे बढ़ गई और कमर को चूमती हुई उसके लंड तक पहुंच गई। मोटा जवान लंड उसकी आँखों के सामने लहरा रहा था। उसने लंड के सुपाड़े को जीभ से लपलपा कर चाटना शुरू किया तो राजू के बदन में करंट दौड़ गया। रिशा अब बस उसके सुपाड़े को छेड़ रही थी। उसकी जीभ बिजली सी राजू के सुपाड़े पर लहरा रही थी। लंड गीली जीभ के वारो से बेतरतीब लहराने लगा. राजू के पूरे जिस्म में सनसनी दौड़ गई! उसकी पैर काँपने लगे. आख़िरकार वो लड़खड़ा कर बिस्तर पर गिर पड़ा। रिशा मुस्कुरायी; ये बाजी आखिर वो जीत ही गई। वो भूखी शेरनी की तरह अपने शिकार पे नज़रें गड़ाए बिस्तर पर रेंगती हुई चढ़ गई और लंड पर अपनी जीभ फिराई। राजू, जो मदहोश था; ने सर उठा कर देखा तो रिशा की उंगलियां लौड़े की और सरकती दिखी। वो सांस रोके सारा नजारा देख रहा था। रिशा ने उसके मोटे लौड़े को अपनी मुट्ठी में भर लिया और सुपाड़ा बाहर निकाल कर पहले जैसे जीभ लपलपा कर उसे चाटने लगी।


[Image: IMG-7208.jpg] 

लंड में तेज़ सनसनी दौड़ रही थी. रिशा को अपने हाथ में लंड काँपता हुआ महसूस हुआ मानो वो बंधन से आज़ाद होना चाहता हो। रिशा सुर्ख आँखों से फ़नफ़नाते नाग के मुँह को देख रही थी। उसने एक तेज़ सांस भरी और सुपाड़ा मुँह में भर लिया। मुँह में सुपाड़ा भरे हुए वो बिस्तर पर घूमी और दोनों घुटनें राजू के सर के आजू बाजू सेट कर लिये। उसकी रसीली चूत राजू के मुँह के सामने झुमने लगी।

 

फिर रिशा गांड लहराते हुए राजू के मुँह पर बैठ गई। राजू ने भी जीभ घुसा कर उसकी चूत का रसपान किया। गरम जीभ के स्पर्श ने रिशा को काफी राहत दी और वो निडाल होकर लंड पर गिर पड़ी। लंड वापस उसके गले में क़ैद हो गया। उसने धीरे से सर ऊपर किया और वापस पूरा लंड गले तक भर लिया। राजू के गुप्तांग रिशा की लार में भीग रहे थे और चेहरे को चूत का रस भीग रहा था। वो स्वर्ग में था. काफ़ी देर तक यू ही मद्धम 69 चलता रहा। अब तक रिशा लंड को गले के पार तक लेने लगी थी. वो भी बिना गला घुटे. राजू भी अब रिशा की चूत दो उंगलियाँ और अपनी जीभ से चोद रहा था। दोनों कब अपने शिखर पर पहुँच गए पता भी ना चला।

राजू का लावा फूट गया और उसके वीर्य की मोटी धारो ने रिशा को गले तक तर कर दिया। दूसरी तरफ़ रिशा भी झड़ने लगी और निडाल पड़ गई जिससे उसकी चूत राजू के मुँह पर चिपक गई। राजू ने भी जी भर कर रस पिया और काफी देर तक जोर जोर से चूसता रहा जैसे मानो चूत का सारा रस निचोड़ लेगा। रिशा भी अब मुलायम लंड को चाट चाट कर साफ़ कर रही थी।
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