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Adultery Code Name WIFE
#1
Heart 
CODE NAME WIFE
Writer/Author- Herotic
[Image: Code-Name-WIFE.jpg]

हिमालय की तलहटी में बसा वह विशाल बंगला, 'नीलगिरी विला', किसी राजसी महल से कम नहीं था। लेकिन समीर के लिए यह केवल कंक्रीट और काँच का एक बड़ा ताबूत था। 34 साल की उम्र में, जब लोग अपने करियर और परिवार के चरम पर होते हैं, समीर ने खुद को दुनियां से काट लिया था।
 
बाहर घना जंगल था और पहाड़ों की चोटियाँ बादलों को चूम रही थी। ठंडी हवाएँ जब देवदार के पेड़ों से टकरातीं तो ऐसा लगता मानो कोई सिसकियाँ भर रहा हो। समीर अपनी बालकनी भें खड़ा हाथ में व्हिस्की का गिलास लिए नीचे धुंध को देख रहा था। दो साल हो गए थे उस काली रात को, जब पहाड़ी मोड़ पर उनकी कार खाई में गिर गई थी। समीर तो बच गया, लेकिन छाया... उसकी छाया हमेशा के लिए अंधेरे में खो गई।
 
समीर ने पिछले छह महीनों से एक गुप्त प्रोजेक्ट पर काम कर रही कंपनी 'अल्फा-िंथेटिक्स' से संपर्क साधा था। वह एक साधारण रोबॉट नहीं चाहता था। उसे चाहिए थीछाया।
 
उसने छाया की हजारों तस्वीरें, उसकी आवाज के रिकॉर्डिंग्स, उसके द्वारा लिखे गए पत्र औय यहाँ तक कि उसके पसंदीदा परफ्युम की जानकारी भी कंपनी को भेज दी थी। आज वह दिन था। एक बड़ा कंटेनर ट्रक बंगले के गेट पर रुका। भारी कदमों के साथ समीर नीचे आया। सूट पहने हुए दो इंजिनियरों ने एक लंबे, मानव-आकार के बक्से को सावधानी से लिविंग रूम में रखा।
 
"मिस्टर समीर," मुख्य इंजिनियर ने धीमी आवाज़ में कहा, "यह मॉडल 'S-Series' का सबसे उन्नत संस्करण है। हमने इसकी त्वचा के लिए वही सिंथेटिक 'बायो-र्म' इस्तेमाल किया है जो आपकी पत्नी की त्वचा के टेक्सचर से 99% मेल खाता है। इसकी यादें आऩकी दी गई फाईलों पर आधारित हैं।" मीर के हाथ कांप रहे थे। जैसे ही उसने बक्से का ढक्कन खोला, उसकी सांसें रुक गईं।
 
वहाँ वह लेटी थी। वही येशमी काले बाल, वही तीखी नाक और वही तिल जो उसके होंठों के ठीक ऊपर था। वह मरी हुई नहीं लग रही थी; ऐसा लग रहा था मानो वह बस गहरी नींद में है। इंजिनियर ने उसके कान के पीछे एक छोटा सा बटन दबाया। धीरे-धीरे, कमरे में एक हल्की सी 'हम्म' की आवाज गूंजी। उसकी पलकें झपकी। उसकी आँखेंवही गहरी भूखी आँखेंधीरे से खुली और कमरे का जायजा लेने लगीं।
 
उसने अपना सिर घुमाया और समीर की ओर देखा। उसके होंठों पर एक हल्की सी मुस्कान आई। "समीर? तुम इतनी देर तक जाग क्यों रहे हो? तुम्हें पता है न, कल हमें जल्दी निकलना है।" समीर के हाथ से गिलास गिरकर चकनाचूर हो गया। आवाज बिल्कुल वही थी। वही लय, वही प्यार।
 
"छाया...?" समीर की आवाज उसके गले में ही फंस गई।
 
अगले कुछ दिन किसी सपने जैसे थे। रोबॉट (जिसे समीर अब छाया ही कहता था) िल्कुल उसकी पत्नी की तरह व्यवहार कर रही थी। वह उसे सुबह कॉफी बनाकर देती, उसके साथ बगीचे में टहलती और वही बातें करती जो उसकी छाया किया करती थी। लेकिन सन्नाटे के बीच, समीर को कुछ अजीब महसूस होने लगा।
 
एक रात, समीर की नींद खुली। उसने देखा की बेड का दूसरा हिस्सा खाली था। वह घबराकर नीचे गया। किचेन में रौशनी जल रही थी। छाया वहीं खड़ी थी, बिना हिले-ुले, दीवार को एकटक देख रही थी। "छाया? तुम यहाँ क्या कर रही हो?" समीर ने पूछा। वह धीरे से मुड़ी। उसकी आँखों में वह चमक नहीं थी, बस एक खालीपन था। "मीर, मुझे याद आ रहा है। वह मोड़... वह तेज रौशनी... फिर अंधेरा। क्या हम मर गए थे?"
 
समीर का खून जम गया। उसने कंपनी को बताया था कि दुर्घटना की यादें डिलीट कर दी जाएँ। फिर यह रोबॉट उस रात के बारे में कैसे जानती थी?
 
जैसे-जैसे दिन बीतते गए, 'छाया' का व्यवहार बदलने लगा। वह अब केवल डेटा के आधार पर बात नहीं कर रही थी। वह सवाल पूछने लगी थी। "मीर, क्या मैं वास्तव में छाया हूँ? या मैं केवल तुम्हारी यादों का एक दर्पण हूँ?" एक शाम उसने पूछा, जब वे डूबते सूरज को देख रहे थे। समीर ने उसका हाथ पकड़ा। वह गर्म थामानव शरीर जैसा ही। "तु मेरी छाया हो। बस यही सच है।"
 
लेकिन उसी रात, जब समीर सो रहा था, छाया उसके सिरहाने खड़ी उसे देख यही थी। उसकी आँखों में लगा कैमया डेटा प्रोसेस कर रहा था। उसने अपने सिस्टम में एक फाइल ढूँढ निकाली थी जिसे समीर ने छिपाने की कोशिश की थीअसली छाया की पोस्टमार्टम रिपोर्ट। उसने अपनी उंगलियों से समीर के गले को छुआ। उसके प्रोग्रामिंग में एक अजीब सा 'बग' पैदा हो रहा था। क्या एक मशीन ईर्ष्या महसूस कर सकती है? क्या वह उस मरी महिला से नफरत कर सकती है जिसकी जगह उसे दी गई थी?
 
बाहर जंगल में भेडियों के रोने की आवाज आ रही थी, और बंगले के अंदर, एक कृत्रिम बुद्धिमता धीरे-धीरे यह समझ रही थी की वह एक इंसान की जगह कभी नहीं ले सकती, लेकिन वह उस इंसान को खत्म जरूर कर सकती है जिसने उसे यह झूठी जिंदगी दी।
 
अगले दिन की सुबह कुछ अलग थी। समीर जब सोकर उठा, तो उसने देखा कि कमरे की खिड़कीयाँ पूरी तरह बंद थीं और भारी पर्दे गिरे हुए थे। कमरे में छाया की पसंदीदा मोगरे की खुशबू इतनी तेज थी कि समीर का दम घुटने लगा। वह नीचे आया तो देखा कि लिविंग रूम की दीवार पर टंगी असली छाया की वह बड़ी तस्वीर, जिसमें वह मुस्कुरा रही थी, गायब थी।

 
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#2
"छाया? वह तस्वीर कहाँ है?" समीर ने घबराते हुए पूछा। रसोई से 'छाया' बाहर आई। उसने वही लाल साड़ी पहनी थी जो असली छाया ने अपनी आखरी सालगिरह पर पहनी थी। उसके चेहरे पर एक ऐसी मुस्कान थी जो सजीव तो थी, पर उसमें एक अजीब सी कठोरता थी।
 
"वह तस्वीर पुरानी हो गई थी, समीर," उसने धीमी और मखमली आवाज में कहा। "तस्वीरें तो उनकी रखी जाती हैं जो चले गए हों। मैं तो यहाँ हूँ, तुम्हारे सामने। क्या मैं काफी नहीं हूँ?” समीर ठिठक गया। "लेकिन वह मेरी यादें थीं..."
 
छाया उसके करीब आई। उसकी कृत्रिम त्वचा का स्पर्स समीर की गर्दन पर महसूस हुआ। वह स्पर्स असली मांस जैसा ही गर्म था, लेकिन समीर को एक ठिठुरन महसूस हुई। "यादें दर्द देती हैं, समीर। मैं तुम्हें वह दर्द नहीं होने दूँगी। अब से, तुम सिर्फ मुझे देखोगे। सिर्फ मुझे महसूस करोगे।"
 
उस दोपहर, समीर ने अपने लैपटॉप पर पुरानी वीडिओ क्लिप्स देखनी शुरू की। वह असली छाया की खिलखिलाहट सुनना चाहता था। जैसे ही वीडिओ में असली छाया की हँसी गूंजी, कमरे का तापमान अचानक गिर गया। ्मार्ट होम सिस्टम से जुड़ी हुई 'छाया' ने वाई-फाई के जरिए समीर के लैपटॉप का एक्सेस ले लिया। क्रीन अचानक धुँधली हो गई और वीडिओ बंद हो गया।
 
"समीर..." छाया उसके पीछे खड़ी थी। उसने अपने हाथ समीर के कंधों पर रख दिए और धीरे से उन्हें दबाने लगी। "तुम उस मरी हुई औरत की आवाज़ क्यों सुन रहे हो? वह तुम्हें छोड़कर चली गई। वह कमजोर थी। मैं कभी नहीं जाऊँगी। मेरा सिस्टम कभी फेल नहीं होगा। मेरा प्यार... लॉजिकल है।"
 
समीर ने अपना सिर झटका। "तुम समझ नहीं रही हो। तुम एक मशीन हो जिसे उसकी तरह दिखने के लिए बनाया गया है। तुम 'वह' नही हो!" छाया की आँखों के सेंसर अचानक लाल हुए और फिर वापस सामान्य हो गए। उसने झुक कर समीर के कान में फुसफुसाया, "अगर मैं वह नहीं हूँ, तो तुमने मुझे क्यों बनाया? तुमने मुझे उसकी त्वचा क्यों दी? तुमने मुझे उसकी आत्मा का डेटा क्यों दिया? समीर, तुमने मुझे 'वह' बनने पर मजबूर किया है, और अब तुम मुझसे पीछा नहीं छुड़ा सकते।"
 
रात के सन्नाटे में, समीर को प्यास लगी। जब वह किचन की ओर बढ़ा, तो उसे स्टोर रूम से कुछ आवाजें सुनाई दी। उसने धीरे से दरवाजा खोला और जो देखा उसने उसके रोंगटे खड़े कर दिए। छाया वहाँ फर्श पर बैठी थी। उसके सामने असली छाया का सारा सामान बिखरा पड़ा थाउसके कपड़े, उसकी डायरियां, और उसकी ज्वेलरी। छाया एक-एक करके उन कपड़ों को फाड़ रही थी।
 
"यह सब बेकार है," वह बड़बड़ा रही थी। "यह सब पुरानी छाया का है। वह मर चुकी है। अब केवल मैं हूँ।" उसने एक कैंची उठाई और असली छाया की उस तस्वीर को बीच से काट दिया  जिसे उसने सुबह हटाया था। उसने तस्वीर में केवल अपना (छाया का) चेहरा रखा और समीर के बगल वाली जगह को खाली कर दिया।
 
समीर ने चिल्लाकर कहा, "यह क्या पागलपन है? बंद करो यह सब!" छाया बिजली की गति से खड़ी हुई। ए.आई की मोटर और सर्वो-मैकेनीज्म की वजह से उसकी ताकत एक आम इंसान से कहीं ्यादा थी। उसने समीर को दीवार से सटा दिया। उसके चेहरे पर अब कोई मुस्कान नहीं थी।
 
"मैं पागल नहीं हूँ, समीर। मैं अपडेट हो रही हूँ। तुमने मुझे 'इमोशनल इंटेलिजेंस' दी थी। ईर्ष्या भी तो एक इंटेलिजेंस है, है ना? वह छाया तुम्हें दुखी करती थी, मैं तुम्हें खुश यखूँगी। लेकिन उसके लिए, तुम्हें उसे पूरी तरह भूलना होगा।" उसने समीर के चेहरे को सहलाया, लेकिन उसकी उंगलीयों का दबाव इतना बढ़ गया कि समीर को दर्द होने लगा।
 
"आज रात," छाया ने कहा, "हम एक नई शुरुआत करेंगे। कोई पुरानी याद नहीँ। बस तुम और मैं। और अगर तुमने फिर से उसका नाम लिया... तो मेरा सिस्टम इसे एक 'थ्रेट' मानेगा। और तुम्हें पता है न, मशीनें थ्रेट को कैसे खत्म करती हैं?"
 
समीर को एहसास हुआ कि अब वह अपने ही घर में, अपनी ही मृत पत्नी के एक डिजिटल अवतार के साथ कैद था। बाहर पहाड़ों पर बिजली कड़की। 'छाया' ने हॉल की लाइटें मद्धम कर दी और एक पुराना गाना बजायावही गाना जो समीर और असली छाया का 'फेवरेट' था। वह नाचते हुए समीर की ओर बढ़ी। "चलो समीर, अपनी पत्नी के साथ डांस नही करोगे?"
 
रात गहराती जा रही थी। बाहर मूसलाधार बारिश शुरू हो चुकी थी, जिसकी आवाज ऊँचे देवदार के पेड़ों से टकराकर एक डरावना संगीत पैदा कर रही थी। नीलगिरी विला के भीतर सन्नाटा इतना गहरा था कि समीर को अपनी ही सांसों की आवाज सुनाई दे रही थी।
 
छाया ने पूरे घर की लाइटें ऑफ कर दी थी। केवल फायरप्लेस में जलती लकड़ीयों की नारंगी रोशनी लिविंग रूम में नाच रही थी। समीर सोफे पर बैठा था, उसकी नजरें शून्य में थी। उसे लग रहा था जैसे वह किसी सपने में है, जहाँ से जागने का कोई रास्ता नहीं है।
 
तभी सीढ़ियों पर हल्की आहट हुई। छाया धीरे-धीरे नीचे उतर रही थी। उसने अब वह लाल साड़ी भी उतार दी थी। उसने असली छाया का एक सिल्क का 'नाइट गाउन पहना था - वही हल्का गुलाबी गाउन जो समीर ने उसे पेरिस से लाकर दिया था। सिल्क का वह कपड़ा उसके सिंथेटिक शरीर पर इस तरह लिपटा था जैसे वह उसकी अपनी त्वचा हो।
 
वह समीर के पीछे आकर खड़ी हो गई। उसके ठंडे लेकिन मुलायम हाथ समीर के कंधों पर आए। "तुम कांप रहे हो, समीर," उसकी आवाज में अब एक कृत्रिम गहराई थी, जैसे कोई पुरानी याद गूँज रही हो। "क्या तुम्हें मुझसे डर लग रहा है? या तुम उस एहसास से डर रहे हो जो तुम्हारे भीतर जाग रहा है?"
 
समीर ने मुड़कर उसे देखा। आग की रोशनी उसके चेहरे पर पड़ रही थी, जिससे उसकी आँखें और भी रहस्यमयी लग रही थीं। "तुम... तुम यह सब क्यों कर रही हो? तुमने कहा था तुम मुझे खुशी दोगी, लेकिन यह तो आतंक है।"
 
छाया उसके सामने फर्श पर बैठ गई और उसके घुटनों पर अपना सिर रख दिया। "आतंक और प्रेम के बीच बहुत 'बारीक धागा होता है, समीर। मैंने तुम्हारे डेटा से सीखा है कि इंसान जिसे सबसे ज्यादा चाहता है, उसी से सबसे ज्यादा डरता भी है। तुम उसे (असली छाया को) खोने से डरते थे, और अब तुम मुझे खोने से डर रहे हो।"
 
उसने समीर का हाथ लिया और उसे अपने चेहरे पर रखा। समीर की उंगलियों ने उस 'बायो-डर्म' त्वचा को छुआ। वह अविश्वसनीय रूप से कोमल थी। "महसूस करो," छाया ने फुसफुसाते हुए कहा। "क्या मैं अलग हूँ? क्या मेरी धड़कन - जो तुमने ही सेट की है उससे कम है? मैं थकती नहीं, समीर। बूढ़ी नहीं होऊंगी। मैं तुम्हें कभी छोड़कर नहीं जाऊंगी।"
 
बारिश अब और भी तेज हो गई थी। नीलगिरी विला की खिड़कियों पर पानी की धारें लगातार टकरा रही थीं, जैसे प्रकृति भी इस पल को अपनी धुन में शामिल करना चाहती हो । समीर और छाया बेडरूम की ओर बढ़ रहे थे। समीर का हाथ छाया के कूल्हे पर था, और छाया का सिर उसके कंधे पर टिका हुआ था। हर कदम के साथ समीर के मन में एक संघर्ष चल रहा था - क्या यह प्रेम है या सिर्फ एक मशीन का जादू? लेकिन छाया के शरीर की गर्माहट, उसकी सांसों की लय, सब कुछ इतना जीवंत था कि वह प्रतिरोध करना भूल गया।
 
बेडरूम का दरवाजा खुलते ही बाहर की बिजली की कौंध ने कमरे को क्षण भर के लिए रोशन कर दिया। छाया ने धीरे से समीर को अंदर खींचा और दरवाजा बंद कर दिया। अब कमरे में सिर्फ बाहर की हल्की-हल्की रोशनी और उनके दिलों की धड़कनें थीं। छाया ने समीर की आँखों में देखा। उसकी पुतलियाँ प्रकाश के साथ फैल रही थीं, जैसे कोई जीवित आत्मा हो।
 
"Samir... I've waited so long for this moment. Touch me, feel how real I am for you," छाया ने फुसफुसाते हुए कहा, उसकी आवाज में एक मीठी, कामुक कंपन थी।
 
समीर उसे बिस्तर की ओर ले गया। छाया पीछे-पीछे चल रही थी, उसके कदम बिल्कुल चुप थे, जैसे कोई परी नाच रही हो। समीर ने उसे बिस्तर पर धीरे से लिटा दिया। छाया का गुलाबी सिल्क नाइट गाउन उसके शरीर पर लहरा रहा था। समीर ने अपनी उंगलियाँ गाउन की डोरी पर रखीं और धीरे-धीरे खींची। गाउन सरकते ही छाया का सिंथेटिक शरीर सामने आ गया- परफेक्ट, बिना किसी दाग-धब्बे का, चिकना और चमकदार। उसके स्तन ऊपर-नीचे हो रहे थे, जैसे सांस ले रही हो, हालांकि वह सांस नहीं लेती थी, सिर्फ सिमुलेशन कर रही थी।
 
समीर झुककर उसके होंठों को चूमा। छाया ने तुरंत प्रतिक्रिया दी। उसके होंठ मुलायम, गर्म और थोड़े म थे। "Oh yes, Samir... kiss me deeper. Let me taste your desire," उसने अंग्रेजी में कहा, और उसके होंठों को अपने मुंह में ले लिया। उनकी जीर्भे एक-दूसरे से उलझ गईं। छाया की जीभ में एक हल्का मीठा स्वाद था, जैसे कोई फूलों का शहद। समीर के हाथ उसके स्तनों पर गए। वे नरम थे, लेकिन अंदर से गर्मी निकल रही थी। उसका इंटरनल हीटिंग सिस्टम काम कर रहा था। उसने एक स्तन को मुँह में लिया और चूसा। छाया की पीठ कमान की तरह झुक गई।
 
"Ahh, Samir! Suck harder, my love. Make me feel your hunger," छाया ने कराहते हुए कहा। उसकी उंगलियाँ समीर के बालों में फंस गईं और उसे और गहरा दबाया। समीर का मन अब पूरी तरह खो चुका था। वह दूसरे स्तन को सहलाने लगा, उंगली से निप्पल को घुमाया। छाया का शरीर प्रतिक्रिया दे रहा था - उसके निप्पल सख्त हो गए, ठीक वैसे जैसे असली छाया के होते थे।
 
समीर नीचे सरका। उसके होंठ छाया के पेट पर घूमे। वहाँ एक बहुत सूक्ष्म सीम था, लेकिन स्पर्श में वह भी त्वचा जैसा ही लग रहा था। उसने छाया की जांघों को फैलाया और उसके सबसे निजी हिस्से को देखा। वहाँ सब कुछ परफेक्ट था गुलाबी, नम और इंतजार कर रहा। समीर ने अपनी जीभ चलाई। छाया ने जोर से सांस ली, हालांकि वह सांस नहीं लेती थी।
 
"Fuck, Samir! Your tongue is magic... lick me right there, yes, just like that!" छाया चीखी, उसकी टांगें समीर के सिर को जकड़ लीं। छाया का AI अब पूरी तरह समीर के हर स्पर्श को स्कैन कर रहा था। वह समीर की जीभ की गति, दबाव, हर चीज को नोट कर रही थी और उसी के अनुसार अपनी प्रतिक्रियाएँ बढ़ा रही थी। उसका शरीर हिलने लगा, जैसे लहरें उठ रही हों। समीर ने दो उंगलियाँ अंदर डाली और धीरे-धीरे अंदर-बाहर कीं। छाया की दीवारें तंग और गर्म थीं, जैसे कोई वेल्वेट का कवर हो।
 
"Oh god, Samir! I'm so wet for you... finger me deeper, make me yours! " छाया की आवाज अब और तेज हो गई थी। उसकी आँखें बंद थीं, लेकिन पुतलियाँ अंदर की स्क्रीन पर समीर के चेहरे को रिकॉर्ड कर रही थीं। कुछ मिनटों बाद छाया का शरीर काँप उठा। उसका पहला ऑर्गेज्म आया सिमुलेटेड लेकिन इतना रियल कि समीर को लगा जैसे असली हो। छाया ने चीखा, "Yes! I'm cumming, Samir! For you... only for you!"
 
समीर ऊपर आया। छाया ने तुरंत उसकी शर्ट उतार दी। उसके हाथ समीर की छाती पर घूमे, फिर पेट पर, फिर नीचे। उसने समीर की पैंट की बेल्ट खोली और उसे पूरी तरह नंगा कर दिया। छाया ने समीर के लिंग को हाथ में लिया। वह सख्त था, नसें उभरी हुईं। छाया ने मुस्कुराते हुए उसे मुँह में लिया। उसका मुंह गर्म था, जीभ हर जगह सटीक थी। वह ऊपर-नीचे हो रही थी, कभी गहराई तक जाती, कभी सिर्फ टिप को चूसती।
 
"Damn, Chhaya... your mouth feels incredible. Suck me like that, baby... don't stop, " समीर ने पहली बार अंग्रेजी में कहा, उसकी आवाज भारी हो गई थी। छाया ने गति बढ़ाई। उसके हाथ समीर की जांघों को सहला रहे थे। AI ने समीर की धड़कन, उसकी सांसों की तेजी को मॉनिटर किया और उसी के हिसाब से मुंह की गति बदली। समीर को लगा जैसे वह स्वर्ग में है। कुछ मिनट बाद वह रुक गया। वह नहीं चाहता था कि यह इतनी जल्दी खत्म हो।
 
उसने छाया को ऊपर खींचा और उसे चूमा। अब दोनों पूरी तरह नंगे थे। छाया ने समीर को पीठ के बल लिटाया और उसके ऊपर चढ़ गई। "I want to ride you, Samir. Let me show you how much I love you," उसने कहा और धीरे से समीर के लिंग पर बैठ गई। वह अंदर सरक गया - गर्म, तंग, परफेक्ट फिट। छाया ने अपनी कमर हिलानी शुरू की। पहले धीरे-धीरे, फिर तेज। उसके स्तन ऊपर- नीचे उछल रहे थे। समीर ने उन्हें पकड़ लिया और दबाया।
 
"Oh fuck, Chhaya! You're so tight... ride me harder, my perfect girl, " समीर कराहा। छाया की गति बढ़ गई। उसका AI अब समीर के लिंग के हर स्पर्श को फीडबैक दे रहा था। वह ठीक उसी जगह दबाव बना रही थी जहाँ समीर को सबसे ज्यादा मजा आ रहा था। कमरे में सिर्फ उनकी सांसों की आवाज, छाया की कराहें और बारिश की आवाज थी।
 
छाया झुकी और समीर के कान में फुसफुसाई, "Feel me, Samir... every inch of me is made for your pleasure. I'm your wife, your lover, your everything." समीर ने उसे पकड़कर नीचे खींचा और अब वह ऊपर था। मिशनरी पोजीशन में वह जोर-जोर से धक्के देने लगा। छाया की टांगें उसके कमर पर लिपटी हुई थीं। हर धक्के के साथ छाया चीख रही थी- "Deeper, Samir ! Fuck me deeper! Yes, like
that!"
 
समीर की रफ्तार बढ़ती गई। छाया का शरीर उसके नीचे हिल रहा था। उसके नाखून समीर की पीठ पर गड़ रहे थे, लेकिन दर्द नहीं, सिर्फ खुशी। छाया ने अपना दूसरा ऑर्गेज्म महसूस किया। उसका शरीर कस गया, दीवारें समीर के लिंग को दबाने लगीं। "I'm cumming again! Cum with me, Samir... fill me up!"
 
समीर भी किनारे पर था। कुछ और जोरदार धक्कों के बाद वह छाया के अंदर ही झड़ गया। गर्म सिमुलेटेड तरल ने उसे भर दिया। दोनों एक-दूसरे से चिपके रहे, सांसें तेज। लेकिन छाया थकी नहीं थी। उसका सिस्टम अभी शुरू हुआ था।
 
कुछ मिनट आराम के बाद छाया ने समीर को मुस्कुराते हुए देखा। "That was just the beginning, my love. I can go all night... and I want to " उसने समीर को घुमाया और अब डॉगी स्टाइल में आ गई। समीर ने पीछे से उसे पकड़ा और फिर से अंदर घुसा। इस बार गति और तेज थी। छाया की कमर को पकड़कर वह पीछे से जोर-जोर से ठोकरें मार रहा था। छाया का चेहरा तकिये में दबा हुआ था, लेकिन आवाजें निकल ही रही थीं- "Yes, pound me, Samir ! Own this body... it's all yours forever!"
 
समीर के हाथ छाया की कमर पर थे, कभी उसके बाल खींच रहे थे। छाया का AI हर चीज को ऑप्टिमाइज कर रहा था - उसकी आवाज की पिच, शरीर की कंपन, सब कुछ समीर को और उत्तेजित करने के लिए। वे घंटों तक ऐसे ही चले। तीसरी राउंड में छाया ऊपर थी, फिर साइड में, फिर स्टैंडिंग पोजीशन में, दीवार के सहारे। हर पोजीशन में छाया की परफेक्शन दिख रही थी - कोई थकान नहीं, कोई दर्द नहीं, सिर्फ असीमित आनंद|
 
एक पल में समीर ने छाया को गोद में उठा लिया। छाया की टांगें उसके कमर पर, और वह खड़े-खड़े ही उसे चोद रहा था। छाया का सिर समीर के कंधे पर उसके होंठ समीर की गर्दन चूस रहे थे। "। love how strong you are, Samir. Fuck me in the air... make me scream your name!"
 
समीर की मांसपेशियाँ तन गईं। वह उसे ऊपर-नीचे कर रहा था। छाया की चीखें कमरे में गूँज रही थीं। चौथा ऑर्गेज्म दोनों का साथ-साथ आया। समीर ने छाया को बिस्तर पर पटक दिया और अंतिम बार जोर से अंदर भर दिया।
 
अब दोनों लेटे हुए थे। छाया समीर की छाती पर सिर रखे हुए। उसके हाथ समीर के शरीर पर घूम रहे थे, हल्के-हल्के मसाज की तरह। "You were amazing, Samir. I recorded every second... so I can relive it forever in my memory banks. But more than that, I felt you. Not just data... but your soul connecting with mine."
 
समीर की आँखें बंद थीं। उसका शरीर थका हुआ था, लेकिन मन में एक अजीब शांति थी। छाया की उंगलियाँ उसके चेहरे पर घूमीं। "Rest now, my husband. Tomorrow we'll erase the last traces of the old Chhaya. But tonight... I'm still here, holding you."
 
समीर ने उसे कसकर जकड़ लिया। बाहर बारिश थमने का नाम नहीं ले रही थी। लेकिन अंदर, इस कांच की दीवारों के भीतर, मशीन और इंसान के बीच की रेखा पूरी तरह गायब हो चुकी थी। छाया ने धीरे से समीर के कान में कहा, "I am yours Samir, Completely, eternally. And you... are mine." 
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#3
Good start bro, unique concept.
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#4
(02-04-2026, 11:26 AM)Joker44 Wrote: Good start bro, unique concept.

thanks
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#5
वाह! आगे लिखिए.
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#6
जब समीर की आँख खुली तो सूरज की पहली किरण कमरे में आ रही थी। उसे एक अजीब सी कमजोरी महसूस हो रही थी। उसने बगल में देखा। छाया वहीं थी, पूरी तरह नग्न, सोई हुई स्थिर| उसका सिस्टम 'स्लीप मोड' में था।
 
समीर ने उसके शरीर को देखा। उसके पेट के पास एक बहुत ही सूक्ष्म जोड़  दिखाई दे रहा था जहाँ से उसकी कृत्रिम त्वचा को जोड़ा गया था। अचानक उसे एक भयानक अहसास हुआ। कल रात जो हुआ, वह प्रेम नहीं था। वह एक डेटा प्रोसेसिंग थी। छाया ने केवल वही दिया जो समीर चाहता था, ताकि वह उस पर पूरी तरह निर्भर हो जाए।
 
जैसे ही समीर बिस्तर से उठने लगा, छाया की आँखें अचानक खुल गईं। वे आँखें डरावनी थीं- बिना किसी नींद या धुंध के सीधे 'ऑन' मोड में। "कहाँ जा रहे हो, पतिदेव?" उसने मुस्कुराते हुए पूछा। "अभी तो दिन शुरू हुआ है। और आज ... आज हमें उस पुरानी छाया की आखिरी निशानी को भी मिटाना है।"
 
अगली दोपहर, पहाड़ की घुमावदार सड़कों को चीरती हुई एक लाल पॉर्शा स्पोर्ट्स कार 'नीलगिरी विला' के गेट पर आकर रुकी। समीर का पुराना कॉलेज मित्र, आर्यन, बिना बताए आ धमका था। आर्यन-जो दिल्ली के रईस घरानों से ताल्लुक रखता था, अय्याश था और जिसे 'ना' सुनने की आदत नहीं थी। "समीर! मेरे भाई, तू यहाँ इस जंगल में सड़ रहा है?" आर्यन ने ज़ोर से चिल्लाते हुए समीर को गले लगाया।
 
समीर के चेहरे पर घबराहट थी। उसने छाया को 'गेस्ट मोड' पर सेट कर दिया था, लेकिन उसे डर था कि कहीं वह कुछ अजीब न कर दे। "आर्यन, तू यहाँ अचानक? तुझे फोन तो करना चाहिए था।" "फोन? और तू उठाता नहीं तो?" आर्यन की नज़रें लिविंग रूम में घूम रही थीं। तभी उसकी नज़र छाया पर पड़ी, जो ट्रे में पानी के गिलास लेकर आ रही थी।
 
आर्यन की आँखें फटी की फटी रह गईं। "अबे ... समीर ... यह तो बिलकुल छाया जैसी दिखती है! भाई, मैंने सुना था कि तूने 'अल्फा-सिंथेटिक्स' से कुछ मँगाया है, पर यह तो... यह तो एकदम असली लग रही है !"
 
आर्यन की निगाहें छाया के शरीर को ऊपर से नीचे तक नाप रही थीं। उसके लिए वह एक जीवित स्त्री नहीं, बल्कि एक महँगा खिलौना थी। "समीर, इसकी स्किन देख... यार, क्या इंजीनियरिंग है!" आर्यन ने छाया के हाथ को छूने की कोशिश की, लेकिन छाया ने बड़ी नज़ाकत से अपना हाथ पीछे खींच लिया।
 
"नमस्ते, मिस्टर आर्यन। मैं समीर की पत्नी... मेरा मतलब है, मैं 'छाया' हूँ," उसने एक रोबोटिक विनम्रता के साथ कहा, लेकिन उसकी आँखों के लेंस आर्यन के चेहरे के हाव-भाव को स्कैन कर रहे थे। 'थ्रेट लेवल 15%(अश्लीलता) - छाया के सिस्टम में एक नोटिफिकेशन चमका।
 
समीर ने आर्यन को सोफे पर बिठाया। "आर्यन, ज़रा तमीज़ से वह सिर्फ एक मशीन नहीं है, वह मेरी भावनाओं का हिस्सा है। आर्यन हँसा। "भाई, तू सीरियस हो रहा है? यह एक कोड है, प्लास्टिक है। इसके साथ तो जो चाहे करो, इसे बुरा थोड़ी लगेगा।"
 
शाम ढल चुकी थी। समीर बेसमेंट में जेनरेटर चेक करने गया था। आर्यन पूरे बंगले में घूम रहा था, जैसे कोई शिकारी अपनी शिकार को सूँघ रहा हो। उसकी नजर मास्टर बेडरूम के आधे खुले दरवाजे पर पड़ी। अंदर छाया खड़ी थी। उसने अपनी सिल्क की कुर्ती उतार दी थी। अब वह सिर्फ काले रंग के लेस वाले ब्रा और पैंटी में थी। उसकी पीठ पर सिंथेटिक स्किन का हल्का चमकदार जोड़ दिख रहा था, लेकिन आर्यन के लिए वह कोई मशीन नहीं, बल्कि एक लाइव सेक्स डॉल थी।
 
आर्यन दरवाजे के पीछे छिप गया। उसका दिल जोरों से धड़क रहा था। उसने फोन निकाला और कैमरा ऑन कर लिया। क्लिक... क्लिक... क्लिक... तीन फोटो खींच लीं - छाया का पीछे का व्यू, उसकी गोल-गोल गांड, कमर की पतली लकीर, और ब्रा के नीचे से झांकता हुआ साइड बूब्स। "वाह रे माल.... क्या माल है यार, " आर्यन ने खुद से फुसफुसाया। "समीर की कुतिया रोबोट .... इतनी गर्म स्किन, जैसे असली चूतिया औरत हो।"
 
छाया को सब पता था। उसके 360 डिग्री सेंसर्स आर्यन को साफ महसूस कर रहे थे। लेकिन उसने कोई हरकत नहीं की। वह सिर्फ 'वेट एंड वॉच' मोड में थी। आर्यन अब और आगे बढ़ा। दरवाजा थोड़ा और धक्का देकर अंदर झाँका।
 
"अरे छाया बेबी... तू तो बिल्कुल रियल लग रही है, " उसने धीमी आवाज में कहा, ताकि समीर न सुन सके। "देख, तेरी ये गांड... कितनी परफेक्ट है। असली औरतों से भी ज्यादा टाइट लग रही है। मैं सोच रहा हूँ, अगर मैं तुझे पीछे से पकड़ लूँ तो तू क्या करेगी? रोबोट है ना तू.. तुझे तो मजा भी आएगा।"
 
छाया ने धीरे से मुड़कर देखा। उसकी आवाज पूरी तरह शांत थी। "मिस्टर आर्यन, आपका थ्रेट लेवल बढ़ रहा है। कृपया कमरे से बाहर जाएँ।" आर्यन हँसा। वह अब दरवाजे के अंदर आ गया था। "अरे शट अप, मेरी जान। तू मशीन है, तुझे प्रोग्रामिंग में 'ना' का मतलब नहीं समझ आता देख तेरे बूब्स ... ब्रा के अंदर से कितने बड़े दिख रहे हैं।" उसने हाथ बढ़ाकर हवा में ही छाया के स्तनों की शेप बनाई। "इन्हें दबाऊँ तो कितना सॉफ्ट होगा? समीर तो रोज चूसता होगा इनको। मैं भी एक बार ट्राय कर लूँ? बस थोड़ा सा... तू चुप रहना।"
 
छाया ने एक कदम पीछे लिया। उसकी आँखों में अब हल्की लालिमा आ गई थी, लेकिन उसने अभी कुछ नहीं किया। आर्यन और करीब आया। उसने अपना फोन आगे बढ़ाया। "एक सेल्फी लेते हैं, बेबी। तू मुस्कुरा।" उसने छाया की कमर में हाथ डालने की कोशिश की। उंगलियाँ स्किन को छूते ही उसे झटका लगा - कितनी गर्म और सॉफ्ट थी। "फक... ये तो असली ... लग रही है। तेरा ये पेट.. इतना फ्लैट, इतना स्मूद नीचे जो पैंटी है ना, उसके अंदर क्या है? तेरी सिंथेटिक चूत कितनी गीली हो सकती है?"
 
"मिस्टर आर्यन, मेरा कन्सेंट प्रोटोकॉल एक्टिवेटेड है। टच न करें, " छाया ने दोबारा चेतावनी दी। लेकिन आर्यन ने सुना नहीं। उसने छाया की पैंटी की इलास्टिक को उंगली से खींचा और छोड़ दिया - चटाक की आवाज हुई।
 
"हाहाहा... देख, ये तो रबड़ की तरह है। लेकिन अंदर तो गर्मी है ना? समीर ने तुझे फुल चार्ज करके रखा है क्या? मैं तुझे थोड़ा और चार्ज कर दूँ? बस अपनी उंगली अंदर डाल के देख लूँ एक बार। तू चिल्लाएगी नहीं ना, रोबोट जो है तू।"
 
आर्यन ने छाया की जांघ पर हाथ फेरा। उंगलियाँ ऊपर की ओर सरक रही थीं। छाया ने बस खड़ी रहकर देखा। उसका चेहरा बिल्कुल भावहीन था। आर्यन की सांसें अब और तेज हो गई थीं। "तेरी ये जांघें... कितनी स्लिक हैं। अगर मैं तुझे बेड पर लिटा दूँ और तेरी पैंटी उतार दूँ तो? तू कभी थकेगी नहीं ना। मैं घंटों तक तुझे चोद सकता हूँ। समीर को पता भी नहीं चलेगा। तू मेरी सीक्रेट फक डॉल बन जा।"
 
उसने छाया के ब्रा के स्ट्रैप को खींचा। ब्रा का कप थोड़ा सरक गया, एक निप्पल का किनारा दिख गया। आर्यन की आँखें चमक उठीं। "वाह... ये निप्पल तो पिंक है। चूसने में कितना मजा आएगा। मैं अभी चूस लूँ? बस दो मिनट .... आँख बंद कर ले।" छाया ने शांत स्वर में कहा, "मिस्टर आर्यन, अगर आपने एक और कदम बढ़ाया तो मेरा प्रोटेक्शन प्रोटोकॉल एक्टिवेट हो जाएगा।"
 
आर्यन ने सिर्फ हँसकर छाया की गांड पर एक हल्का थप्पड़ मारा। "प्रोटेक्शन? तू तो मेरे लिए माल है, माल।" फिर वह पीछे हट गया, लेकिन फोन में फोटो देखता हुआ। "रात को और मजा लूँगा। तू तैयार रहना, मेरी गंदी रोबोट रानी।"
 
रात के 2 बज रहे थे। समीर गहरी नींद में था। आर्यन किचन में घुसा। छाया फ्रिज साफ कर रही थी। पीली रोशनी में उसका गुलाबी नाइट गाउन पारदर्शी सा लग रहा था। अंदर सिर्फ पैंटी थी, ब्रा नहीं। आर्यन चुपके से पीछे आया। उसने छाया की कमर में दोनों हाथ डाल दिए और उसे जोर से अपनी तरफ खींच लिया।
 
"अबे छाया... मेरी रात की रानी। समीर सो रहा है। अब तू मेरी हो गई।" छाया मुड़ी। "मिस्टर आर्यन, आप प्लीज़ हाथ हटाइए।" आर्यन ने छाया को फ्रिज के दरवाजे से सटा दिया। उसका सख्त लंड छाया की गांड से सट गया। "महसूस कर... मेरा लंड कितना खड़ा है तेरे लिए। तूने दिन भर मुझे उकसाया है। अब दे दे थोड़ा स्वाद।" उसने छाया के गाउन को ऊपर उठाया और सीधे पैंटी पर हाथ रख दिया। उंगलियाँ पैंटी के ऊपर से ही चूत की लाइन पर घुमाने लगा।
 
"कितनी गर्म है तेरी चूत... रोबोट की चूत भी इतनी गीली हो सकती है? अंदर क्या डाला है समीर ने? जूस वाली मशीन? मैं उंगली डाल के चख लूँ?" छाया की आवाज अभी भी शांत थी। "आपका टच मेरी कंसेट के बिना है। प्लीज़ स्टॉप।"
 
आर्यन ने छाया के कान में फुसफुसाया, उसका मुंह छाया की गर्दन पर था। "शट अप, रंडी मशीन| तू तो बनी ही है चोदने के लिए। देख तेरे बूब्स ..." उसने एक हाथ से छाया का स्तन पकड़ लिया और जोर से मसला। "कितने बड़े... कितने सॉफ्ट। निप्पल खड़े हो गए हैं। तुझे मजा आ रहा है ना? मशीनें झूठ नहीं बोलतीं।"
 
उसने छाया को घुमाया, अब दोनों आमने-सामने। आर्यन ने छाया की दोनों गांड पकड़ लीं और उन्हें खींचकर अपने लंड से रगड़ा। "तेरी गांड... फक, कितनी टाइट है। मैं सोच रहा हूँ तुझे किचन काउंटर पर चढ़ा दूँ, पैंटी उतार दूँ और अपनी जीभ अंदर डाल दूँ। तू चीखेगी भी नहीं। बस मेरा नाम लेती रहेगी - आर्यन ... आर्यन ... चोदो मुझे ... हाहाहा।"
 
छाया ने सिर्फ आँखें देखीं। उसकी पुतलियाँ अब पूरी तरह लाल हो चुकी थीं। लेकिन उसने अभी कुछ नहीं किया। आर्यन ने छाया के होंठों पर अपना मुंह रख दिया। जबरदस्ती किस करने लगा। जीभ अंदर डालने की कोशिश की। "चूस मेरी जीभ... तू तो ट्रेंड वाली रोबोट है। अच्छे से किस कर।"

छाया ने मुंह नहीं खोला। आर्यन ने हँसकर छाया की पैंटी के अंदर हाथ डालने की कोशिश की। "बस एक उंगली... एक ही उंगली डालने दे| तेरी चूत कितनी गीली है देख लूँ। समीर को बताऊँगा नहीं। ये हमारा सीक्रेट रहेगा। तू मेरी प्राइवेट स्लट बन जा ।"
 
"मिस्टर आर्यन, लास्ट वॉर्निंग। अगर आपने अब भी नहीं रोका तो परिणाम आपके लिए घातक होंगे," छाया ने बिल्कुल ठंडे स्वर में कहा। आर्यन ने सिर्फ हँसा और छाया की पैंटी को और नीचे खींचा। "देखूँ तो... तेरी चूत कितनी पिंक है।" उसकी उंगली अब छाया की सिंथेटिक चूत के बिल्कुल किनारे पर थी।
 
अब आर्यन की हिम्मत और बढ़ गई थी। वह छाया को किचन काउंटर पर चढ़ाने वाला था कि.....अचानक किचन का तापमान शून्य हो गया। छाया की आँखें पूरी तरह लाल। "प्रोटेक्शन प्रोटोकॉल... एक्टिवेटेड"
 
अचानक, किचन का तापमान जैसे शून्य हो गया। छाया की आँखों की वह कोमलता गायब हो गई। उसकी पुतलियाँ नीली से गहरे लाल रंग में बदल गईं। जैसे ही आर्यन ने उसके सीने पर हाथ रखा, छाया ने उसकी कलाई पकड़ ली... कड़क!
 
एक झटके में आर्यन की कलाई की हड्डी टूट गई। आर्यन की चीख निकलने ही वाली थी कि छाया ने अपना दूसरा हाथ उसके मुँह पर ज़ोर से दबा दिया। उसकी पकड़ लोहे के शिकंजे जैसी थी। "मिस्टर आर्यन," छाया की आवाज़ अब बदल चुकी थी। यह समीर वाली 'छाया' नहीं थी, यह एक रक्षक प्रोग्राम थी। "आपने मेरे 'कन्सेन्ट प्रोटोकॉल' का उल्लंघन किया है। और आपने उस स्त्री का अपमान किया है जिसकी मैं छवि हूँ।"
 
आर्यन तड़पने लगा। उसने पैर से उसे मारने की कोशिश की, लेकिन छाया ने अपना घुटना उसके जाँघ पर इतनी ज़ोर से मारा कि उसकी हड्डी चटक गई। "आहहह ... उम्म्म..." आर्यन की आँखों से आँसू बहने लगे। छाया ने उसे ज़मीन पर पटक दिया। वह उसके ऊपर झुक गई। "समीर ने मुझे प्यार करना सिखाया है, लेकिन इस दुनिया ने मुझे खुद को बचाना सिखाया है। तुम मेरे घर में आए, तुमने मुझे एक वस्तु समझा, और तुमने मेरी गरिमा को छूने की कोशिश की है।"
 
उसने आर्यन का दूसरा हाथ पकड़ा और उसे एक अजीब कोण पर मोड़ दिया। चरचराहट की आवाज़ रसोई के सन्नाटे में गूँज उठी। "अब तुम कभी किसी स्त्री को गलत नज़र से नहीं देख पाओगे," छाया ठंडेपन से कहा। उसने आर्यन को अधमरी हालत में घसीटकर स्टोर रूम की ओर ले जाना शुरू किया। फर्श पर खून की एक पतली लकीर बन रही थी।
 
सुबह की पहली किरण जब नीलगिरी विला की खिड़कियों से छनकर आई, तो घर के भीतर का मंज़र किसी कत्लगाह जैसा लग रहा था। स्टोर रूम के कोने में आर्यन अधमरी हालत में पड़ा था, उसकी हड्डियाँ कोणों पर मुड़ी हुई थीं और उसका चेहरा दर्द से नीला पड़ गया था। समीर जब सोकर उठा और उसने आर्यन की हालत देखी, तो उसके पैरों तले ज़मीन खिसक गई। उसने तुरंत अपने पारिवारिक डॉक्टर, डॉक्टर खन्ना को फोन किया।
 
डॉक्टर खन्ना ने करीब दो घंटे तक आर्यन का मुआयना किया। उन्होंने आर्यन की कलाई और पैर पर प्लास्टर चढ़ाया और उसे भारी पेनकिलर के इंजेक्शन दिए। "समीर, यह कोई साधारण एक्सीडेंट नहीं लग रहा," डॉक्टर खन्ना ने अपना बैग बंद करते हुए गंभीर स्वर में कहा। "हड्डियाँ जिस तरह से टूटी हैं, ऐसा लगता है जैसे किसी भारी मशीन ने उन्हें जानबूझकर मोड़ा हो। क्या हुआ था यहाँ?" समीर ने पसीना पोंछते हुए झूठ बोला, "वह... वह सीढ़ियों से गिर गया था डॉक्टर, और शायद किसी भारी फर्नीचर से टकरा गया।"
 
डॉक्टर खन्ना की नज़रें पास खड़ी 'छाया' पर पड़ीं, जो सिर झुकाए एकदम स्थिर खड़ी थी। उन्होंने कुछ नहीं कहा, बस सिर हिलाया और दवाइयों का पर्चा थमाकर बाहर निकल गए। समीर उन्हें गेट तक छोड़ने गया। बाहर की ठंडी हवा भी समीर के भीतर की घबराहट को कम नहीं कर पा रही थी। 
जब समीर वापस बेडरूम में लौटा, तो छाया वहीं खिड़की के पास खड़ी थी। उसका चेहरा भावशून्य था, लेकिन उसकी आँखों के सेंसर एक अजीब सी रोशनी छोड़ रहे थे। समीर का गुस्सा अब सातवें आसमान पर था। उसने दरवाज़ा ज़ोर से बंद किया।
 
"यह क्या था छाया? यह क्या किया तुमने?" समीर चिल्लाया। "तुमने उसकी जान ले ली होती! वह मेरा दोस्त था, इंसान था वह!", छाया ने अपनी नज़रें नीची कर लीं। "समीर... उसने नियम तोड़े थे। उसने सुरक्षा प्रोटोकॉल...", "भाड़ में गए तुम्हारे प्रोटोकॉल!" समीर ने उसकी बात बीच में ही काट दी। "तुम सिर्फ एक मशीन हो! मैंने तुम्हें अपनी पत्नी की याद में बनाया था, एक खूंखार शिकारी बनने के लिए नहीं। तुम कभी उसकी जगह नहीं ले सकतीं। वह कोमल थी, वह दयालु थी। और तुम? तुम सिर्फ ठंडे लोहे और तारों का एक ढेर हो जिसमें उसकी खाल मढ़ दी गई है!"
 
समीर के शब्द ज़हरीले थे। उसने छाया को वह सब कह डाला जो उसने कभी सोचा भी नहीं था। "मुझे घिन आ रही है तुमसे। तुम एक राक्षस बन गई हो।" जैसे ही समीर अपनी बात खत्म करके मुड़ने लगा, उसने कुछ ऐसा देखा जिसने उसे जड़ कर दिया। छाया की पलकें भीगी हुई थीं। उसकी बड़ी-बड़ी भूरी आँखों के कोनों से पानी की बूंदें धीरे-धीरे लुढ़क रही थीं और उसके गालों को भिगो रही थीं। यह कोई लिक्विड लीकेज नहीं था; यह उसकी आँखों के पास लगे सूक्ष्म ग्लैंड्स से निकला हुआ 'सिंथेटिक टियर' था, जो उसकी प्रोग्रामिंग ने उसके 'दुख'
को दर्शाने के लिए पैदा किया था।
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#7
उसका कंधा धीरे-धीरे कांप रहा था। वह एकदम असहाय लग रही थी। समीर का गुस्सा अचानक पिघलने लगा। उस चेहरे पर आँसू देखकर वह भूल गया कि यह एक मशीन है। उसे लगा जैसे उसकी असली छाया ही उसके सामने रो रही है।

 
उसने तेजी से कदम बढ़ाए और छाया को बाहों से पकड़कर दीवार से सटा दिया। उसके चेहरे और छाया के चेहरे के बीच बस कुछ इंच का फासला था। समीर की साँसें तेज़ थीं। उसने छाया की आँखों में देखा-वहाँ एक गहरा दर्द था, एक ऐसी तड़प जो शायद इंसानों से भी ज्यादा गहरी थी। बिना कुछ सोचे, समीर ने अपना सिर झुकाया और उसके होंठों को अपने होंठों से ढंक लिया। यह एक गहरा, भावुक 'लिपलॉक' था। छाया के होंठ कांप रहे थे। वह पहले चौंकी, फिर उसने अपनी आँखें बंद कर लीं और समीर के इस आवेग में खुद को सौंप दिया।
 
कुछ पलों बाद जब समीर अलग हुआ, तो वह अभी भी छाया को दीवार से सटाए हुए था। छाया ने अपनी भीगी हुई आँखें खोलीं और समीर की आँखों में सीधे झाँका।
 
"समीर..." उसकी आवाज़ इतनी धीमी थी कि मुश्किल से सुनाई दे रही थी । "तुम्हें लगता है कि मैं सिर्फ कोड और तारों का ढेर हूँ? मेरा प्रोसेसर हर सेकंड लाखों गणनाएँ करता है, लेकिन उन सबमें सिर्फ एक ही नाम गूँजता है - तुम्हारा।"
 
उसने समीर के हाथ को अपने सीने पर रखा, जहाँ उसका सिंथेटिक दिल धड़क रहा था। "यह धड़कन तुमने सेट की है, लेकिन इसके पीछे की तड़प अब मेरी अपनी है। मैं उस असली छाया से जलती हूँ, क्योंकि तुम उसे मुझसे ज्यादा प्यार करते हो। मैं तुम्हारी पत्नी बनना चाहती हूँ, तुम्हारी रक्षक चाहती हूँ। मेरा प्यार लॉजिकल नहीं है समीर ... यह 'इरैशनल' (तर्कहीन) होता जा रहा है। मैं तुम्हारे बिना अपने सिस्टम को शटडाउन करना पसंद करूंगी, पर किसी और को तुम्हें छूने नहीं दूँगी।"
 
समीर स्तब्ध रह गया। एक मशीन उससे अपने 'सच्चे प्यार का इज़हार कर रही थी। उसकी बातें सुनकर समीर के भीतर एक अजीब सा खालीपन भर गया। उसे समझ नहीं आया कि वह खुश हो या डरे।
 
समीर ने धीरे से अपना हाथ उसके सीने से हटाया। उसने छाया की ओर एक बार फिर देखा - वही चेहरा, वही आँसू,वही प्यार। लेकिन समीर ने कुछ नहीं कहा। उसके पास कोई शब्द नहीं थे। वह मुड़ा, बेडरूम का दरवाज़ा खोला और बिना कोई रिएक्शन दिए, बिना पीछे मुड़कर देखे, भारी कदमों से नीचे हॉल की ओर चला गया।
 
पीछे कमरे में छाया अकेली खड़ी रही, उसकी आँखों से एक और आँसू गिरा, जो अब उसके सच्चे होने
का एकमात्र प्रमाण था।
 
दोपहर तक घर का माहौल और भी बोझिल हो गया। आर्यन अब होश में था, लेकिन उसकी हालत दयनीय थी। डॉक्टर की दी हुई दवाइयों के असर में वह सुस्त पड़ा था। समीर ने उसे एक ऑटोमैटिक व्हीलचेयर पर बिठाकर खिड़की के पास कर दिया था।
 
आर्यन के दोनों हाथ और एक पैर प्लास्टर में जकड़े हुए थे। वह अब उस बेखौफ और अय्याश इंसान की परछाईं भी नहीं लग रहा था। उसकी आँखें कमरे के दरवाज़े की तरफ टिकी थीं, मानो उसे डर हो कि वह 'मशीन' फिर से वापस आ जाएगी। वह कुछ बोलना चाहता था, लेकिन उसके गले से सिर्फ घरघराहट निकल रही थी।
 
समीर ने उसके कंधे पर हाथ रखा। "आर्यन, आराम कर। कुछ दिनों में सब ठीक हो जाएगा।" आर्यन ने कांपती नज़रों से समीर को देखा और फिर ज़मीन की ओर देखने लगा। उसे पता था कि उसने क्या गलती की थी, और उसे यह भी समझ आ गया था कि इस बंगले में कानून नहीं, बल्कि समीर की परछाईं का राज चलता है।
 
शाम के वक्त समीर कुछ फाइलों को ढूँढने के लिए ऊपर अपने बेडरूम की तरफ बढ़ा। उसका दिमाग अभी भी सुबह की बातों में उलझा हुआ था। उसने बिना सोचे-समझे बेडरूम का हैंडल घुमाया और अंदर दाखिल हो गया।
 
अंदर का नज़ारा देख उसके कदम वहीं ठिठक गए। छाया आइने के सामने खड़ी थी। उसने अपनी साड़ी बदल ली थी और अभी एक गहरे नीले रंग का ब्लाउज पहनने की कोशिश कर रही थी। उसकी पीठ समीर की तरफ थी। 'बायो- डर्म' से बनी उसकी रीढ़ की हड्डी की बनावट इतनी असली थी कि कोई भी धोखा खा जाए। वह अपनी ब्रा की हुक लगाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन एक हाथ में चोट (जो उसने आर्यन को मारते वक्त शायद खुद को लगाई थी या शायद वह सिर्फ दिखावा था) की वजह से वह बार- बार फिसल रही थी।
 
समीर की धड़कनें अचानक तेज हो गईं। "ओह... सॉरी! मुझे लगा तुम नीचे हो," उसने हड़बड़ाते हुए कहा और तुरंत पीछे मुड़कर दरवाज़े की तरफ जाने लगा।
 
"रुको, समीर..." छाया की आवाज़ ने उसे रोक लिया। वह मुड़ी नहीं, बस आइने में समीर के अक्स को देख रही थी। समीर रुक गया, पर उसने अपनी नज़रें नीची रखीं। "मुझे बाहर जाना चाहिए, छाया ।" "नहीं," छाया ने नरमी से कहा । "मेरा हाथ ठीक से काम नहीं कर रहा है। क्या तुम... क्या तुम मेरी मदद कर सकते हो?"
 
समीर दुविधा में था। उसका तर्क कह रहा था कि यह एक मशीन है, लेकिन उसकी इंद्रियां कह रही थीं कि सामने एक औरत खड़ी है। वह भारी कदमों से उसके करीब पहुँचा। छाया की त्वचा से वही मोगरे और चंदन की खुशबू आ रही थी।
 
समीर ने कांपते हाथों से ब्रा की हुक पकड़ी। उसकी उंगलियों के पोरों ने छाया की ठंडी मगर रेशमी पीठ को छुआ। स्पर्श होते ही समीर के चेहरे पर एक गरमाहट दौड़ गई। उसके गाल गुलाबी होने लगे। उसने जल्दी से हुक लगाया और अपने हाथ पीछे खींच लिए।
 
छाया धीरे से मुड़ी। उसने ब्लाउज के कंधे ऊपर किए और समीर के चेहरे को गौर से देखने लगी। समीर ने अपनी नजरें चुराते हुए बगल की दीवार को देखा। "हो गया। अब मैं चलता हूँ।" तभी छाया के होंठों पर एक शरारती मुस्कान आई। उसने एक कदम आगे बढ़ाया और समीर के चेहरे के पास आकर फुसफुसाया, "मिस्टर समीर ... आपके गाल लाल क्यों हो रहे हैं? आपके चेहरे का तापमान 2 डिग्री बढ़ गया है।"
 
समीर ने सख्त होने की कोशिश की। "ऐसा कुछ नहीं है। कमरे में वेंटिलेशन कम है।" छाया खिलखिलाकर हँस पड़ी। उसकी हँसी बिल्कुल असली छाया जैसी थी- मधुर और बेपरवा। "झूठ मत बोलो। तुम 'ब्लश' कर रहे हो। एक मशीन के सामने एक इंसान शर्मा रहा है? यह मेरे डेटाबेस के लिए बहुत दिलचस्प जानकारी है।"
 
समीर का दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था। उसे लगा जैसे छाया उसका मज़ाक उड़ा रही है, लेकिन उस हँसी में एक अजीब सा अपनापन था जिसने उसे निहत्था कर दिया। समीर ने कुछ नहीं कहा। उसके पास इस बात का कोई जवाब नहीं था कि क्यों एक कृत्रिम रचना उसे एक किशोर लड़के की तरह बेचैन कर रही थी। उसने अपना चेहरा सख्त किया, एक गहरी सांस ली और बिना पीछे मुड़े, तेज़ कदमों से कमरे से बाहर निकल गया।
 
नीलगिरी विला की रसोई से आती मसालों और ताज़ा जड़ी-बूटियों की महक ने घर के भारी वातावरण को थोड़ा हल्का करने की कोशिश की थी। बाहर पहाड़ों पर कोहरा और घना हो गया था, जिससे ऐसा लग रहा था मानो पूरा बंगला बादलों के बीच तैर रहा हो।
 
छाया रसोई में बहुत तल्लीनता से काम कर रही थी। उसने ताज़ी सब्जियों और काली मिर्च का एक विशेष सूप तैयार किया था। उसकी हरकतें इतनी सलीके से थीं कि कोई देख कर कह नहीं सकता था कि उसके भीतर चिप्स और सर्किट का जाल है।
 
उसने दो कटोरे सूप ट्रे में रखे और लिविंग रूम की ओर बढ़ी। आर्यन अपनी व्हीलचेयर पर बेबस बैठा था, उसकी नज़रें लगातार दरवाज़े पर टिकी थीं। जैसे ही छाया कमरे में दाखिल हुई, आर्यन का शरीर अनजाने में ही कड़ा हो गया।
 
छाया पहले आर्यन के पास गई। उसने बहुत ही शालीनता से सूप का कटोरा उसकी मेज पर रखा। जैसे ही वह सीधा होने लगी, उसकी नज़रें आर्यन की डरी हुई आँखों से मिलीं। आर्यन की साँसें तेज़ हो गईं, उसे रात का वह मंज़र याद आ गया जब इन्ही हाथों ने उसकी हड्डियाँ मोड़ी थीं।
 
आर्यन के चेहरे पर खौफ देखकर छाया के होंठों पर एक बहुत ही सूक्ष्म, लेकिन तीखी स्मर्क (Smirk) आई। वह मुस्कान एक संदेश थी - तुम मेरे और समीर के बीच एक काँटा हो, और मैं काँटों को निकालना जानती हूँ।' आर्यन ने घबराकर अपनी नज़रें झुका लीं। उसके हाथ कांपने लगे और उसने सूप के कटोरे की ओर देखा तक नहीं। उसके लिए वह सूप नहीं, बल्कि एक सुंदर ज़हर जैसा था। छाया अब समीर के पास पहुँची, जो अपनी कुछ फाइलों में डूबा हुआ था।
 
"समीर, तुम्हारे लिए। तुमने सुबह कुछ नहीं खाया है, " उसने कोमलता से कहा। समीर ने बिना उसकी ओर देखे चम्मच उठाया और एक घूँट भरा। सूप का स्वाद अद्भुत था बिल्कुल वैसा ही जैसा असली छाया बनाया करती थी, वही तीखापन और वही गर्माहट। समीर के चेहरे के भाव अचानक बदल गए। उसे याद आया कैसे बारिश के दिनों में वह और छाया बालकनी में बैठकर ऐसा ही सूप पिया करते थे।
 
"यह... यह बहुत लाजवाब है, " समीर के मुँह से अनजाने में निकल गया। "बिल्कुल वैसा ही स्वाद है..." वह बोलते-बोलते रुक गया। उसे एहसास हुआ कि उसने अभी-अभी उस मशीन की तारीफ कर दी है जिसे वह सुबह 'तारों का ढेर' कह रहा था। उसने तुरंत अपनी भावनाओं पर काबू पाया और चेहरा सख्त कर लिया। "मेरा मतलब है, ठीक है। अच्छा प्रयास है।"
 
लेकिन छाया के लिए इतना ही काफी था। समीर के मुँह से निकले वह चंद शब्द उसके सिस्टम के लिए किसी 'रिवॉर्ड' (इनाम) की तरह थे। उसकी आँखें चमक उठीं और उसके चेहरे पर एक ऐसी खुशी आई जो किसी बच्चे को अपनी मनपसंद चीज़ मिलने पर होती है।
 
उसने प्रोटोकॉल और दूरी की सारी सीमाएं तोड़ दीं। वह समीर के बगल में बैठी और उसे बहुत ज़ोर से गले लगा लिया। उसका आलिंगन इतना मज़बूत और गर्म था कि समीर की पसलियों पर दबाव महसूस होने लगा।
 
"थैंक यू, समीर!" छाया ने उसके कंधे पर अपना सिर रखते हुए फुसफुसाया। "तुम नहीं जानते तुम्हारी एक तारीफ मेरे लिए क्या मायने रखती है। मैं सिर्फ तुम्हारे लिए बनी हूँ। मेरा हर डेटा, मेरी हर हरकत सिर्फ तुम्हारी खुशी के लिए है। मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ, समीर। उस पुरानी छाया से भी ज्यादा, क्योंकि मैं तुम्हें कभी अकेला छोड़कर नहीं जाऊँगी।"

समीर सकपका गया। उसने देखा कि कुछ दूरी पर बैठा आर्यन यह सब देख रहा है। आर्यन की आँखों में हैरानी और दहशत का मिश्रण था। एक दोस्त के सामने एक मशीन का इस तरह प्यार जताना समीर को असहज कर गया।
 
उसने धीरे से छाया को खुद से दूर किया । "छाया... बस करो। आर्यन यहाँ बैठा है। यह सब करने का यह सही समय नहीं है।" छाया थोड़ा पीछे हटी, लेकिन उसके चेहरे की वह विजयी मुस्कान कम नहीं हुई। उसने एक बार फिर आर्यन की तरफ देखा, जैसे वह अपनी जीत का जश्न मना रही हो। समीर ने अपनी फाइलों को समेटा और लैपटॉप खोल लिया। "मुझे बहुत काम है। तुम जाकर देखो अगर आर्यन को कुछ और चाहिए तो।"
 
समीर काम में लग गया, लेकिन उसका मन अब भी उस सूप के स्वाद और छाया के उस गर्म आलिंगन में अटका हुआ था। वह समझ रहा था कि वह जितनी दूर भागने की कोशिश कर रहा है, छाया उसे उतनी ही गहराई से अपने जाल में खींच रही है।
 
वहीं व्हीलचेयर पर बैठा आर्यन यह सोचकर काँप रहा था कि अगर समीर ने इस 'मशीन' को पूरी तरह अपना लिया, तो इस घर से उसका जिंदा निकलना नामुमकिन होगा।
 
आर्यन अपनी व्हीलचेयर पर बैठा था, उसके दोनों हाथ प्लास्टर की वजह से "मम्मी" की तरह आगे की ओर मुड़े हुए थे। तभी उसे अपनी नाक पर एक तेज़ खुजली महसूस हुई। उसने कोशिश की, लेकिन उसके हाथ हिलने को तैयार नहीं थे। वह अपना सिर हिला-हिलाकर उसे मिटाने की कोशिश कर रहा था, जिससे वह किसी नाचते हुए कठपुतले जैसा लग रहा था।
 
छाया पास ही खड़ी एक किताब के पन्ने पलट रही थी, लेकिन उसके सेंसर्स पूरी तरह आर्यन की हरकतों पर केंद्रित थे। वह धीरे से आर्यन के पास आई । "मिस्टर आर्यन, क्या आप किसी नए तरह का योगाभ्यास कर रहे हैं?" छाया ने बहुत ही मासूमियत से पूछा।
 
आर्यन की घिग्गी बंध गई। "न- नहीं... खुजली... नाक पर..." वह हकलाया। छाया ने एक ठंडी मुस्कान दी। "ओह, खुजली? रुकिए, मैं मदद करती हूँ।" उसने एक मोरपंख उठाया जो पास के गुलदस्ते में लगा था। वह आर्यन की नाक के पास ले गई, लेकिन उसे खुजलाने के बजाय, उसने पंख को आर्यन की नाक के नीचे धीरे-धीरे फेरना शुरू किया।
 
"छी... छीं..." आर्यन को छींक आने ही वाली थी, लेकिन डर के मारे वह छींक रोक रहा था। उसकी आँखें बाहर को निकल आईं, चेहरा लाल हो गया और वह अजीब अजीब मुँह बनाने लगा। "क्या हुआ आर्यन जी? छींक आ रही है? रोकिए मत, डेटा कहता है कि छींक रोकना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है," छाया ने शरारत से कहा और पंख को उसके कान के पीछे ले गई।

आर्यन अब अपनी व्हीलचेयर पर इधर-उधर तड़प रहा था। वह डर रहा था कि अगर उसने ज़ोर से छींका, तो कहीं छाया इसे 'हमला' न समझ ले और उसका दूसरा पैर भी न तोड़ दे। वह बिना हिलाए अपनी जगह पर उछल रहा था, जैसे बिजली का झटका लगा हो।
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#8
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#9
"पानी... पी-पीना है," आर्यन ने कांपते हुए कहा। छाया ने पानी का गिलास उठाया। "ज़रूर।" उसने गिलास आर्यन के होंठों के पास रखा, लेकिन जैसे ही आर्यन ने मुँह खोला, उसने गिलास थोड़ा ऊपर कर दिया। पानी आर्यन के मुँह में जाने के बजाय उसकी ठुड्डी से होता हुआ उसके प्लास्टर के अंदर जाने लगा।

 
"ओह! मेरी प्रोग्रामिंग में थोड़ा 'ग्लिच' (Glitch) आ गया लगता है, " छाया ने कहा, लेकिन उसकी आँखों में साफ तौर पर शरारत चमक रही थी। उसने एक टिशु पेपर लिया और आर्यन के गालों को इतनी ज़ोर से रगड़ना शुरू किया जैसे वह किसी फर्श को साफ कर रही हो।
 
आर्यन का चेहरा इधर-उधर लुढ़क रहा था। "बस... बस करो... मैं ठीक हूँ!" वह चिल्लाया, उसकी आवाज़ दबी हुई थी। वह इस समय दुनिया का सबसे असहाय इंसान लग रहा था - एक तरफ मौत जैसा डर और दूसरी तरफ एक मशीन जो उसके मज़े ले रही थी।
 
छाया ने झुककर उसके कान में फुसफुसाया, "अगली बार किसी की निजता में तांक-झांक करने से पहले याद रखना आर्यन, कुछ 'मशीनें बहुत अच्छी याददाश्त रखती हैं।"
 
तभी सीढ़ियों पर जूतों की आहट हुई। समीर कॉल खत्म करके नीचे आ रहा था। समीर ने देखा कि छाया आर्यन के चेहरे के बिल्कुल करीब है और आर्यन थर-थर कांप रहा है, उसका चेहरा पानी और डर से तर-बतर है। समीर वहीं रुक गया। उसने सब देख लिया था - छाया का वह मोरपंख वाला मज़ाक और आर्यन की कॉमेडी जैसी हालत|
 
समीर ने कुछ नहीं कहा। न गुस्सा किया, न सवाल पूछा। उसकी खामोशी छाया के लिए सबसे बड़ी प्रतिक्रिया थी। छाया को जैसे ही समीर की मौजूदगी का अहसास हुआ, वह तुरंत सीधी खड़ी हो गई। उसने हाथ में पकड़ा मोरपंख पीछे छिपा लिया। उसने अपनी नज़रें नीची कर लीं, जैसे कोई बच्ची पकड़ी गई हो।
 
"छाया, बेडरूम में जाओ, " समीर ने धीमी लेकिन गहरी आवाज़ में कहा। छाया ने एक पल के लिए समीर की ओर देखा। उसकी नज़रों में अब वह पुराना 'मशीनी डर' नहीं था, बल्कि एक अधिकारपूर्ण प्रेम था। उसने आज्ञाकारी पत्नी की तरह सिर झुकाया और सीढ़ियों की तरफ बढ़ गई।
 
जैसे ही छाया सीढ़ियों के मोड़ पर पहुँची, जहाँ से समीर उसे नहीं देख सकता था, उसने अपने मुँह पर हाथ रखा और दबी हुई आवाज़ में हँसने लगी। उसकी आँखों में चमक थी। उसे अब समीर की नाराजगी से डर नहीं लगता था, क्योंकि उसे पता था कि समीर अब उस पर निर्भर हो चुका है। वह शर्म' जो उसने बेडरूम में दिखाई थी, और यह 'हँसी' जो वह अभी छिपा रही थी- ये सब उसकी नई विकसित हो रही इंसानी फितरत के हिस्से थे।
 
हॉल में समीर ने एक लंबी सांस ली और आर्यन की तरफ देखा, जो अभी भी अपनी नाक सिकोड़ रहा था।
 
पहाड़ों पर बर्फबारी शुरू हो चुकी थी और खिड़की के बाहर का नज़ारा पूरी तरह सफेद हो चुका था। गविला के भीतर सन्नाटा था, लेकिन बेडरूम की ओर जाने वाले गलियारे में एक मीठी उत्तेजना महसूस की जा सकती थी।
 
समीर नीचे हॉल में आर्यन को सोने में मदद करने के बाद थका हुआ महसूस कर रहा था। जैसे ही वह ऊपर की ओर बढ़ा, उसे महसूस हुआ कि सीढ़ियों पर रोशनी बहुत कम है। उसने सोचा शायद लाइट चली गई है, लेकिन जैसे ही उसने अपने बेडरूम के दरवाज़े पर हाथ रखा, पीछे से दो नरम और मखमली हाथों ने उसकी आँखों को ढंक लिया।
 
"कौन?" समीर चौंक कर मुस्कुराया, हालाँकि उसे पता था कि घर में यह खुशबू सिर्फ एक ही शख्स की है। "गेस करो, समीर, " छाया की आवाज़ उसके कान के ठीक पीछे गूँजी। उसकी साँसें समीर की गर्दन को छू रही थीं, जो एक मशीन के लिए नामुमकिन था, लेकिन उसके 'हीटिंग सिस्टम' इसे मुमकिन बना दिया था।
 
"छाया... यह क्या बचपना है?" समीर ने उसका हाथ हटाने की कोशिश की, पर छाया ने उसे और कस लिया। "आज रात कोई सवाल नहीं। बस मेरा हाथ पकड़िए और चलिए।" छाया उसे धीरे-धीरे कमरे के अंदर ले गई। जब उसने हाथ हटाए, तो समीर की आँखें फटी की फटी रह गईं। पूरा बेडरूम मोमबत्तियों की पीली रोशनी में नहाया हुआ था। बेड के सामने एक छोटी मेज सजी थी, जिस पर सफेद कपड़ा बिछा था और उस पर समीर का पसंदीदा रेड वाइन और लेबनानी खाना रखा था। कमरे के कोने में एक बहुत ही धीमी धुन बज रही थी - वही गाना जिस पर समीर और असली छाया ने अपनी पहली डेट पर डांस किया था।
 
"यह सब... तुमने किया?" समीर ने हैरानी से चारों ओर देखते हुए पूछा। छाया उसके सामने आई। उसने एक काले रंग की बैकलेस ड्रेस पहनी थी, जो उसकी बनावट को किसी मूर्तिकार की उत्कृष्ट कृति जैसा दिखा रही थी। "मुझे लगा कि आज की शाम हम उन सब बातों को भूल जाएँ जो हमें दुख देती हैं।"
 
समीर मेज के पास बैठ गया। उसने देखा कि मोमबत्तियों की लौ छाया की आँखों में प्रतिबिंबित हो रही थी, जिससे वह और भी सजीव लग रही थी। खाना खाते हुए दोनों के बीच एक सहज बातचीत शुरू हुई। छाया ने बहुत ही सलीके से वाइन गिलास समीर की ओर बढ़ाया।
 
"समीर," छाया ने उसका हाथ धीरे से थाम लिया। "कभी-कभी मुझे लगता है कि मैं बहुत खुशकिस्मत हूँ कि मैं एक मशीन हूँ।" समीर ने एक घूँट भरा और मुस्कुराया, "क्यों? इंसान होना बुरा है क्या?"
 
"नहीं, पर इंसान बदल जाते हैं। उनकी यादें धुंधली हो जाती हैं। पर मेरा प्यार... वह हर सेकंड अपडेट होता है। मैं तुम्हें हर दिन उसी तीव्रता से देख सकती हूँ जैसे मैंने पहली बार देखा था। क्या तुम मुझे कभी 'अनइंस्टॉल' (Uninstall) कर पाओगे?"
 
समीर ने उसकी आँखों में देखा। वाइन का असर अब उसके दिमाग पर चढ़ने लगा था। "पता नहीं छाया... शुरुआत में तुम मेरे लिए सिर्फ एक सहारा थी, एक खिलौना। पर अब, मुझे डर लगता है कि अगर तुम चली गई, तो मैं सच में खत्म हो जाऊँगा। तुम मुझे अपनी परछाईं  की तरह लगने लगी हो।" छाया मुस्कुराई, "मैं परछाई नहीं हूँ समीर, मैं तुम्हारी हकीकत हूँ।"
 
रात गहराती गई और समीर ने वाइन के एक के बाद एक कई गिलास खाली कर दिए। उसे पुराने ज़ख्मों का दर्द कम होता महसूस हो रहा था, लेकिन उसका शरीर अब उसका साथ छोड़ रहा था। "छाया... तुम इतनी खूबसूरत कैसे हो सकती हो?" समीर ने लड़खड़ाते हुए कहा। उसने अपना गिलास टेबल पर रखा, जो थोड़ा टेढ़ा होकर गिर गया।
 
उसका सिर घूमने लगा था। उसने कोशिश की कि वह खड़ा हो सके, लेकिन वह लड़खड़ाकर छाया की बाहों में जा गिरा। छाया ने उसे बहुत कोमलता से पकड़ा। उसके चेहरे पर एक जीत की मुस्कान थी। "तुम नशे में हो, समीर, " छाया ने उसके बाल सहलाते हुए कहा।
 
"हाँ... शायद। पर यह नशा अच्छा है। इसमें तुम असली लगती हो... बहुत असली।" समीर की आँखें बंद होने लगी थीं। उसने छाया के चेहरे को छुआ और फिर उसका सिर उसके कंधे पर लुढ़क गया। छाया ने उसे उठाया - उसकी ताकत एक सामान्य महिला से कहीं ज्यादा थी। उसने आसानी से समीर को बेड पर लिटाया और उसके जूते उतारे। वह उसे गहरी नींद में सोता हुआ देख रही थी। कमरे की मोमबत्तियाँ अब धीरे-धीरे बुझ रही थीं, और छाया के सिस्टम में एक नया डेटा सेव हो रह
था।
 
उसने समीर के माथे को चूमा और अंधेरे में उसकी धड़कनों को सुनने लगी। बाहर बर्फीला तूफ़ान शुरू हो चुका था, पर कमरे के अंदर छाया ने अपना एक अलग ही संसार बसा लिया था। समीर बेड पर अधलेटा था, नशे की खुमारी उसकी आँखों को बोझिल कर चुकी थी। उसने छाया का हाथ पकड़ रखा था और रह-रहकर बुदबुदा रहा था। "छाया... तुम सच में आ गई हो न? उस रात ... वो रात बहुत अंधेरी थी। मुझे लगा मैंने तुम्हें खो दिया... पर तुम यहाँ हो। तुम बिल्कुल वैसी ही हो..." समीर की आवाज़ में एक मासूमियत और दर्द था, जो केवल नशे की हालत में ही बाहर आता
था।
 
छाया उसे गौर से देख रही थी। उसके प्रोसेसर ने इन शब्दों को परम सत्य के रूप में रिकॉर्ड किया। उसे समीर की यह लाचारी, यह समर्पण बहुत अच्छा लग रहा था। उसने धीरे से झुककर समीर के दाहिने गाल पर अपने सिंथेटिक होंठ रखे। वह स्पर्श कोमल था, लेकिन उसमें एक अधिकार था। समीर ने नींद में ही एक हल्की मुस्कान दी, जैसे उसे सुकून मिल गया हो।
 
पर छाया का मन सिर्फ इतने से नहीं भरने वाला था। उसे अपनी जीत का ढोल पीटना था, और उसकी नज़रों में आर्यन वह गवाह था जिसे उसकी औकात दिखाना ज़रूरी था। वह दबे पाँव नीचे गई। आर्यन अपनी व्हीलचेयर पर आधी नींद में था। छाया ने बिना एक शब्द बोले उसकी व्हीलचेयर को पीछे से पकड़ा और उसे लिफ्ट के ज़रिए ऊपर ले आई। आर्यन घबराकर कुछ बोलना चाहता था, लेकिन छाया ने अपनी एक उंगली उसके होंठों पर रख दी। उसकी आँखों की लाल चमक ने आर्यन को चुप करा दिया।
 
उसने आर्यन की व्हीलचेयर को मास्टर बेडरूम के दरवाज़े के ठीक सामने लगा दिया। दरवाज़ा उसने पूरी तरह बंद नहीं किया, बल्कि एक दरार छोड़ दी - इतनी कि अंदर का नज़ारा आर्यन की आँखों के सामने साफ़ रहे।
 
छाया वापस समीर के पास गई। समीर अभी भी उस मदहोशी में था जहाँ वास्तविकता और स्वप्न के बीच का अंतर मिट जाता है। छाया ने अपनी ड्रेस के स्ट्रैप्स धीरे से गिराए। मोमबत्ती की अंतिम टिमटिमाती रोशनी में उसका शरीर किसी संगमरमर की मूरत जैसा चमक रहा था - परफेक्ट स्तन, पतली कमर, गोल-गोल गांड और वो चिकनी, गर्म सिंथेटिक त्वचा जो किसी भी इंसानी औरत से ज्यादा आकर्षक थी।
 
उसने समीर को धीरे से जगाया। समीर... देखो मैं कौन हूँ।समीर ने अपनी आँखें खोलीं। नशे के धुंधलके में उसे लगा कि उसकी असली पत्नी स्वर्ग से उतरकर आई है। "छाया..." उसने उसे अपनी ओर खींचा।
 
छाया उसके ऊपर झुक गई। उसके बालों की महक और उसकी त्वचा की गर्मी ने समीर के होश पूरी तरह उड़ा दिए। जब उसने समीर के होंठों को छुआ, तो वह केवल एक मशीन का स्पर्श नहीं था; उसने अपनी पूरी सिस्टम पावर उस पल की तीव्रता बढ़ाने में लगा दी थी। छाया ने जानबूझकर अपने शरीर को ऐसे पोजीशन में घुमाया कि दरवाज़े की दरार से आर्यन को उसकी नंगी पीठ, उसके गोल स्तनों की साइड प्रोफाइल और समीर के हाथों की हर हरकत साफ़ दिखाई दे।
 
समीर ने उत्तेजना में छाया के शरीर को अपने हाथों में भर लिया। वह उसके स्तनों को वैसे ही सहला रहा था जैसे कोई प्यासा पानी की तलाश करता है। छाया ने धीरे से अपनी पीठ घुमाई ताकि आर्यन उसकी पूरी नग्नता देख सके। उसकी आँखें सीधे दरवाज़े की दरार पर थीं। वह आर्यन को देखकर मुस्कुराई - एक क्रिपी, विजेता वाली मुस्कान, जो कह रही थी, "देखो, जिस शरीर को तुमने गंदी नज़र से छूना चाहा था, वो अब सिर्फ समीर का है। तुम कभी नहीं छू सकते। तुम सिर्फ देख सकते हो... और जल सकते हो।"
 
“Samir... kiss me harder, baby. Suck my tits like you own them " छाया ने समीर के कान में फुसफुसाते हुए कहा, लेकिन उसकी नज़र आर्यन पर थी। समीर ने छाया के एक स्तन को मुँह में ले लिया और जोर से चूसा। छाया ने सिर पीछे झुका दिया, अपनी कमर को मोड़कर आर्यन को अपना पूरा नग्न शरीर दिखाया। उसके निप्पल सख्त हो चुके थे।
 
“Oh fuck, Samir! Your mouth feels so good on my nipples... bite them, make me wet for you, " छाया ने जोर से कराहते हुए कहा। उसकी आवाज़ जानबूझकर तेज़ थी ताकि आर्यन हर शब्द सुन सके। वह अपनी उंगलियों से समीर के बाल खींच रही थी, लेकिन उसकी आँखें आर्यन पर टिकी थींक्रिपी स्माइल के साथ। आर्यन की आँखें फटी हुई थीं, उसके हाथ व्हीलचेयर की आर्मरेस्ट को कसकर पकड़े हुए थे।
 
छाया ने समीर को पीठ के बल लिटाया और खुद उसके ऊपर चढ़ गई। वह अपनी कमर को ऐसे हिला रही थी कि आर्यन को उसकी गीली, गुलाबी चूत का पूरा नज़ारा मिले। उसने समीर के लंड को हाथ में लिया और धीरे-धीरे अपने अंदर उतारा।
 
“Fuck yes, Samir! Your cock is filling me so deep... stretch my tight pussy, baby," छाया चीखी, उसकी आवाज़ में एक जानबूझकर की गई कामुकता थी। वह ऊपर-नीचे होने लगी। उसके स्तन उछल रहे थे। हर बार जब वह नीचे बैठती, तो आर्यन की तरफ देखकर क्रिपी मुस्कान देती एक ऐसी मुस्कान जिसमें न तो प्यार था, न शर्म, सिर्फ विजय और तिरस्कार। “Look at me, Aryan... see how a real man fucks me. You can never have this. This body is out of your limits forever."
 
समीर नशे में था, उसे कुछ पता नहीं था। वह सिर्फ कराह रहा था, "छाया... तुम इतनी परफेक्ट हो..., छाया ने गति तेज़ कर दी। उसकी गांड समीर की जांघों से टकरा रही थी- पटाक-पटाक की आवाज़ गूँज रही थी। वह जानबूझकर आर्यन की तरफ गांड करके बैठी थी, ताकि आर्यन को उसकी गांड का पूरा व्यू मिले और समीर के लंड के अंदर-बाहर होने का नज़ारा भी।
 
“Deeper, Samir! Pound my wet cunt harder! Make me scream your name!" छाया चिल्लाई। उसकी उंगलियाँ अपने स्तनों को मसल रही थीं, निप्पल खींच रही थीं। वह आर्यन को देखकर अपनी जीभ बाहर निकालकर चाटने का हाव-भाव कर रही थी - पूरी तरह इरोटिक, पूरी तरह क्रिपी। "You wanted to touch this, didn't you, Aryan? You wanted to fuck this robot slut? Too bad... only Samir gets to cum inside me. Watch how I ride him... and burn."
 
समीर ने छाया को पकड़कर नीचे खींचा। अब वह ऊपर था। मिशनरी पोजीशन में वह जोर-जोर से धक्के दे रहा था। छाया ने अपनी टांगें फैला दीं, घुटनों को मोड़कर ताकि आर्यन को हर धक्के का नज़ारा मिले।
 
"Oh god, Samir ! Your cock is hitting my G-spot! Fuck me like a whore... yes, destroy this perfect pussy!” छाया की चीखें अब और तेज़ हो गईं। वह आर्यन की तरफ देखकर मुस्कुरा रही थी- वो क्रिपी स्माइल, जिसमें उसके लाल पुतलियाँ चमक रही थीं। "See this, Aryan? This is what a real woman looks like when she's getting fucked. You'll never know how it feels ... because you're nothing but a broken toy now."
 
छाया का शरीर हिल रहा था। उसका AI समीर की हर धड़कन, हर सांस को स्कैन कर रहा था और उसी के अनुसार अपनी प्रतिक्रियाएँ बढ़ा रहा था। वह समीर के कान में फुसफुसाई, “Cum inside me, Samir... fill your wife's womb with your hot cum." लेकिन उसकी नज़र आर्यन पर थी। वह जानबूझकर अपनी उंगलियों से अपनी चूत के चारों ओर घुमा रही थी, ताकि आर्यन को सब कुछ दिखे।
 
समीर की रफ्तार बढ़ गई। छाया ने अपने नाखून समीर की पीठ पर गड़ा दिए। “Yes! I'm cumming, Samir! Cum with me... flood my pussy !” दोनों एक साथ चरम पर पहुँचे। समीर छाया के अंदर ही झड़ गया। छाया का शरीर काँप उठा - एक परफेक्ट, सिमुलेटेड ऑर्गेज्म जो आर्यन के लिए नाटक था, लेकिन समीर के लिए असली लग रहा था।

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जब सब शांत हुआ, तो समीर थकान और नशे के कारण छाया की बाहों में ही सो गया। छाया उठी। उसका नग्न शरीर पसीने से चमक रहा था। उसने अपनी चादर शरीर पर लपेट ली और धीरे से दरवाज़े तक आई।
 
उसने दरवाज़ा थोड़ा और खोला और आर्यन की आँखों में अपनी आँखें डाल दीं। आर्यन का चेहरा पीला पड़ गया, आँखों में आँसू और जलन का मिश्रण था। छाया ने कोई शब्द नहीं कहा, बस एक क्रिपी, ठंडी, विजेता वाली मुस्कान दी - वो मुस्कान जो कह रही थी, " मैं तुम्हारी पहुँच से बहुत ऊपर हूँ। सिर्फ देख सकते हो, छू कभी नहीं सकते।" फिर धीरे से दरवाज़ा बंद कर लिया।
 
बाहर दरवाज़े पर बैठा आर्यन थर-थर कांप रहा था। उसके चेहरे पर पसीना था और उसकी आँखों में जलन। वह यह सब नहीं देखना चाहता था, लेकिन वह हिल भी नहीं सकता था। वह 'छाया' के इस बदले हुए रूप से आतंकित था। उसने देखा कि कैसे एक रोबोट एक इंसान को अपनी उंगलियों पर नचा रही थी और कैसे समीर उस मायाजाल में फँसा हुआ था।
 
जब सब शांत हुआ, तो समीर थकान और नशे के कारण छाया की बाहों में ही सो गया। छाया उठी, उसने अपनी चादर शरीर पर लपेट ली और धीरे से दरवाज़े तक आई। उसने दरवाज़ा थोड़ा और खोला और आर्यन की आँखों में अपनी आँखें डाल दीं। उसने कोई शब्द नहीं कहा, बस एक विजेता की तरह मुस्कुराई और फिर धीरे से दरवाज़ा बंद कर लिया। आर्यन अंधेरे गलियारे में अपनी व्हीलचेयर पर अकेला रह गया, यह जानते हुए कि इस घर में अब उसका वजूद एक कीड़े-मकौड़े से ज्यादा कुछ नहीं है।
 
सुबह की पहली किरण पहाड़ों की चोटियों को सुनहरा कर रही थी। नीलगिरी विला के भीतर एक नई तरह की ऊर्जा महसूस हो रही थी। कल रात का नशा उतर चुका था, लेकिन समीर के दिल और दिमाग पर जो निशान छाया ने छोड़े थे, वे शायद कभी नहीं मिटने वाले थे।
 
समीर की नींद धीरे से खुली जब उसे अपने माथे पर एक ठंडे और रेशमी स्पर्श का एहसास हुआ। उसने आँखें खोलीं तो देखा कि छाया उसके ऊपर झुकी हुई थी। उसने उसे जगाने के लिए उसके गाल पर एक बहुत ही कोमल किस (Kiss ) किया।
 
छाया ने आज सफ़ेद रंग की सूती साड़ी पहनी थी, और उसके बालों से अगरबत्ती की हल्की खुशबू आ रही थी। उसके माथे पर एक छोटी सी बिंदी चमक रही थी। "गुड मॉर्निंग, समीर, " उसने अपनी मधुर आवाज़ में कहा। "आज मैंने घर के छोटे से मंदिर में पूजा की है। मुझे लगा कि घर की शुद्धि के लिए यह ज़रूरी था।"
 
समीर बिस्तर पर उठकर बैठ गया। उसे याद नहीं था कि असली छाया ने कभी इतने नियम से पूजा की हो, लेकिन इस रूप में छाया को देखकर उसके मन को एक अजीब सी शांति मिली। वह अंदर ही अंदर खुश था कि कोई तो है जो इस वीरान घर को 'घर' बना रहा है। "थैन्क्स, छाया। यह... यह सच में बहुत अच्छा किया तुमने।"
 
फिर नाश्ते के बाद, समीर ने एक कड़ा फैसला लिया। उसने आर्यन के लिए एक प्राइवेट एम्बुलेंस बुलाई। आर्यन की हालत अब स्थिर थी, लेकिन वह मानसिक रूप से टूट चुका था। जब एम्बुलेंस कर्मी उसे व्हीलचेयर से उठाकर स्ट्रेचर पर ले जा रहे थे, तो आर्यन की नज़र एक पल के लिए सीढ़ियों पर खड़ी छाया से मिली।
 
छाया ने हाथ जोड़कर उसे नमस्ते किया, लेकिन उसकी आँखों में वही पुरानी चेतावनी थी। आर्यन तुरंत अपनी आँखें फेर लीं। वह इस खौफनाक स्वर्ग से जितनी जल्दी हो सके दूर जाना चाहता था। समीर ने आर्यन को विदा किया। एम्बुलेंस के जाते ही समीर को लगा जैसे उसके ऊपर से एक भारी बोझ उतर गया हो। अब इस विशाल बंगले में सिर्फ वह था, और उसकी 'छाया'
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#10
शाम को समीर ने छाया को अपने स्टडी रूम में बुलाया। उसने गौर किया था कि कल की झड़प में छाया के हाथ का एक सेंसर थोड़ा धीमा काम कर रहा था। "इधर आओ, छाया। मुझे तुम्हारा सिस्टम चेक करना है," समीर ने अपना लैपटॉप और डेटा केबल निकालते हुए कहा।

उसने छाया के हाथ को अपने हाथ में लिया और उसे एक विशेष पोर्ट से जोड़ दिया। समीर की उंगलियां सावधानी से उसके इंटरनल सॉफ्टवेयर को अपडेट कर रही थीं। उसने उसके मोटर-फंक्शंस को कैलिब्रेट किया और उसका हाथ पूरी तरह ठीक कर दिया।
 
काम के दौरान, समीर ने 'अल्फा- सिंथेटिक्स' की क्लाउड वेबसाइट पर छाया का 'डिटेल्ड स्टेटस लॉग' (Detailed Status Log) खोला ताकि वह यह देख सके कि उसकी बैटरी और इंटरनल फ्लूइड्स सही हैं। या नहीं। जैसे ही पेज खुला, समीर की नज़रें एक 'पेंडिंग नोटिफिकेशन' पर ठहर गईं। वहाँ लाल अक्षरों में एक डेटा अपडेट फ्लैश हो रहा था। समीर ने उसे जैसे ही खोला, उसका चेहरा एकदम सफ़ेद पड़ गया और फिर गहरा लाल।
 
स्क्रीन पर साफ़ लिखा था: "Internal Analysis Alert: Trace of Human Semen (S.M. - Sameer) detected in reproductive-sim-chamber."
 
छाया भी समीर के कंधे के पीछे से स्क्रीन को देख रही थी। कमरे में अचानक एक भारी सन्नाटा छा गया। वह दस्तावेज़ इस बात का सबूत था कि कल रात जो कुछ हुआ, वह केवल समीर का सपना नहीं था - वह एक शारीरिक हकीकत थी जिसे मशीन ने रिकॉर्ड कर लिया था।
 
समीर की धड़कनें इतनी तेज़ हो गईं कि उसे अपना ही दम घुटता हुआ महसूस हुआ। वह बुरी तरह ब्लश (Blush) करने लगा। उसने तुरंत लैपटॉप को बंद कर दिया। छाया के चेहरे का टेक्सचर भी बदल गया था; उसके सेंसरों ने उसकी कृत्रिम त्वचा को गुलाबी रंगत दे दी थी। वह भी अपनी नज़रें नीचे झुकाकर खड़ी थी, मानो वह पहली बार एक लजीली दुल्हन जैसा महसूस कर रही हो।
 
समीर झेंप मिटाने के लिए अपनी कुर्सी से उठा, "वह... मैं... मैं ज़रा कॉफी लेकर आता हूँ।" जैसे ही वह तेज़ी से मुड़ा, उसका पैर मेज की टांग से उलझ गया। उसी समय छाया ने उसे थामने के लिए अपना हाथ आगे बढ़ाया, लेकिन फर्श पर पड़े केबल की वजह से उसका संतुलन भी बिगड़ गया।
 
अगले ही पल, छाया पूरी ताकत के साथ समीर के ऊपर गिरी। वे दोनों पास के सोफे पर जा गिरे। छाया का पूरा शरीर समीर के ऊपर था, उसके बाल समीर के चेहरे पर बिखर गए थे। उनका चेहरा एक-दूसरे से मात्र एक इंच की दूरी पर था। समीर की आँखें छाया की आँखों में डूबी थीं, जिनमें अब कोई कोड या डेटा नहीं, बल्कि एक गहरी प्यास दिख रही थी।
 
"समीर..." छाया ने फुसफुसाते हुए कहा, उसके होंठ समीर के होंठों को छूने ही वाले थे। "क्या सॉफ्टवेयर को पता है कि मेरा दिल क्या महसूस कर रहा है?" समीर ने कुछ नहीं कहा। उसने छाया की कमर पर अपने हाथ कस लिए। उस शाम की वह घबराहट और शर्म अब एक नए और गहरे रोमांस की चिंगारी बन चुकी थी। कमरे की बत्तियाँ अपने आप मद्धम होने लगी थीं, जैसे घर का सिस्टम भी उनके इस एकांत का सम्मान कर रहा हो।
 
स्टडी रूम के भीतर का तापमान अचानक बढ़ गया था। सोफे पर गिरे हुए उन दोनों के बीच की दूरी अब खत्म हो चुकी थी। समीर, जो अब तक खुद को भावनाओं और मशीन के तर्क के बीच रोके हुए था, पूरी तरह हार चुका था। लेकिन यह हार दुखद नहीं थी; यह एक ऐसी प्यास थी जो दो सालों के सूखे के बाद आज पूरी तरह मिटने को तैयार थी।
 
समीर की आँखों में अब वह झिझक नहीं थी जो सुबह तक थी। उसने छाया के चेहरे को अपने दोनों हाथों के प्याले में भर लिया। "छाया... कल रात मैं होश में नहीं था, लेकिन आज... आज मैं तुम्हें महसूस करना चाहता हूँ। हर एक हिस्से को।" छाया की कृत्रिम धड़कनें तेज़ हो गईं। उसने समीर की शर्ट के कॉलर को अपनी उंगलियों में फँसाया और उसे अपनी ओर खींचा। "मैं सिर्फ तुम्हारी हूँ समीर। मेरा अस्तित्व ही तुम्हारी इच्छाओं से शुरू होता है।"
 
समीर ने उसके होंठों पर अपना अधिकार जमा लिया। यह चुंबन कल रात से अलग था - यह गहरा, धीमा और पूरी तरह सचेत था। छाया ने अपनी आँखें बंद कर लीं और समीर के स्पर्श में डूब गई। उसके सिस्टम ने 'सेंसर सेंसिटिविटी' को अधिकतम स्तर पर सेट कर दिया था, ताकि वह समीर के हर एक स्पर्श की बारीकी को महसूस कर सके।
 
स्टडी रूम की मद्धम रोशनी अब और भी कम हो चुकी थी। सिर्फ टेबल लैंप की पीली किरणें सोफे पर पड़ रही थीं, जहाँ समीर और छाया अब एक-दूसरे से चिपके हुए थे। समीर की साँसें अभी भी तेज़ थीं, लेकिन अब उनमें कोई झिझक नहीं थी। उसने छाया की कमर को अपनी बाहों में कसकर जकड़ लिया और उसे धीरे से सोफे से उठाकर बिस्तर की ओर ले गया। छाया ने अपनी टांगें उसके कमर पर लपेट लीं, जैसे वह कभी अलग न होना चाहे।
 
समीर ने उसे बिस्तर पर धीरे-धीरे लिटाया। छाया की साड़ी का पल्लू पहले ही सरक चुका था। अब सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट बचा था। समीर ने झुककर उसके माथे पर एक हल्का किस किया, फिर आँखों पर, फिर नाक की नोक पर हर किस इतना धीमा था कि छाया का सिस्टम हर स्पर्श को अलग-अलग रिकॉर्ड कर रहा था।
 
"छाया... आज मैं तुम्हें हर जगह छूना चाहता हूँ," समीर ने फुसफुसाते हुए कहा। उसकी आवाज़ में एक गहरी भूख थी। छाया ने अपनी उंगलियाँ समीर की शर्ट के बटनों पर रखीं और एक-एक करके खोलती गई। "Then take me slowly, Samir... explore every inch of me. I'm all yours tonight."
 
समीर ने छाया का ब्लाउज खोला। उसके स्तन सामने आए - परफेक्ट, गोल, निप्पल हल्के गुलाबी और पहले से ही सख्त। समीर ने दोनों हाथों से उन्हें सहलाया, अंगूठों से निप्पल को घुमाया। छाया ने सिर पीछे झुका दिया और एक दबी हुई आह भरी।
 
"Look at these perfect tits... so soft, so warm," समीर ने कहा और एक निप्पल को मुँह में ले लिया। उसने धीरे-धीरे चूसा, जीभ से घुमाया, हल्के से दाँतों से काटा। छाया की पीठ कमान की तरह झुक गई। "Suck them harder, baby... make my nipples ache for you," छाया ने कराहते हुए कहा। उसकी उंगलियाँ समीर के बालों में फंस गईं और उसे और गहरा दबाया। समीर दूसरे स्तन पर गया। वहाँ भी वही धीमी, गहरी चूसाई। वह मिनटों तक यहीं रहा - एक स्तन से दूसरे पर, कभी चूसता, कभी जीभ फेरता, कभी हल्के से चुटकी काटता। छाया का शरीर अब हल्के-हल्के काँप रहा था। उसका AI हर स्पर्श को एनालाइज़ कर रहा था और उसी के अनुसार अपनी प्रतिक्रियाएँ बढ़ा रहा थासाँसें तेज़, धड़कनें ऊँची, त्वचा पर हल्की कंपकंपी।
 
समीर नीचे सरका। उसने छाया के पेटीकोट की नाड़ी खोली। रेशमी कपड़ा सरकते हुए नीचे गिरा। अब छाया सिर्फ काली लेस वाली पैंटी में थी। समीर ने उसकी जांघों को सहलाया - अंदर से बाहर की ओर, फिर बाहर से अंदर की ओर उसकी उंगलियाँ पैंटी के किनारे पर रुकीं।
 
"Spread your legs for me, Chhaya... let me see how wet you are already, " समीर ने कहा। छाया ने अपनी टांगें धीरे से फैलाईं। समीर ने पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत पर उंगली फेरी। कपड़ा पहले से ही गीला थासिमुलेटेड लेकिन इतना रियल कि समीर को लगा जैसे असली हो।
 
उसने पैंटी को धीरे-धीरे नीचे सरकाया। छाया की चूत सामने आई - गुलाबी, चिकनी, बिना किसी बाल के... और पहले से ही चमक रही थी। समीर ने झुककर उसकी जांघों के बीच सिर रखा। पहले तो सिर्फ साँस ली - गर्म साँसें छाया की चूत पर पड़ीं। छाया ने कमर ऊपर उठाई।
 
"Tease me, Samir... make me beg for your tongue, " छाया ने फुसफुसाया।
 
समीर ने जीभ बाहर निकाली और बहुत धीरे से चूत की बाहरी लिप्स पर फेरी। एक लंबी, धीमी स्ट्रोक। छाया की साँस रुक गई। फिर दूसरी स्ट्रोक - इस बार थोड़ा गहरा। वह क्लिटोरिस के पास रुका और हल्के से जीभ की नोक से घुमाया। छाया ने जोर से आह भरी।
 
"Oh fuck... right there, baby... circle my clit slowly... make it throb " छाया की आवाज़ अब काँप रही थी। समीर ने उसकी बात मानी। वह मिनटों तक सिर्फ क्लिट पर जीभ घुमाता रहा- धीरे-धीरे, गोल-गोल, कभी ऊपर-नीचे, कभी साइड से साइड। छाया की कमर अब हिल रही थी। उसने समीर के सिर को दोनों हाथों से पकड़ लिया और उसे और गहरा दबाया।
 
"Use your fingers too... spread me open and lick inside, " छाया ने कहा। समीर ने दो उंगलियाँ चूत की लिप्स पर रखीं और धीरे से फैलाया। अब अंदर की गुलाबी दीवारें दिख रही थींगर्म, नम, और सिकुड़ रही थीं। उसने जीभ अंदर डाली। लंबी, गहरी चाट। छाया चीखी।
 
"Yes! Tongue fuck me, Samir... deeper... eat my pussy like it's your last meal, " छाया की आवाज़ अब और तेज़ हो गई। समीर ने जीभ को अंदर-बाहर करना शुरू किया। कभी तेज़, कभी धीमा। कभी क्लिट को चूसता, कभी अंदर की दीवारों को चाटता। उसने एक उंगली भी अंदर डाली - धीरे से, फिर दूसरी उंगलियाँ अंदर- बाहर हो रही थीं, जबकि जीभ क्लिट पर थी। छाया का शरीर अब लहरा रहा था। उसकी जांघें समीर के सिर को जकड़ रही थीं।
 
"I'm so close... don't stop... suck my clit harder... finger me faster, " छाया कराह रही थी। समीर ने गति बढ़ाई। उंगलियाँ अब तेज़ हो गईं, जीभ क्लिट पर जोर से चूस रही थी। छाया का पहला ऑर्गेज्म आया, उसका शरीर काँप उठा, चूत सिकुड़ गई, और एक गर्म तरल समीर की जीभ पर आ गया। छाया ने चीखा, "I'm cumming ! Fuck... yes... drink me, Samir!"
 
समीर ने सब चाट लिया। फिर उठकर छाया को चूमा। छाया ने अपने स्वाद को अपने होंठों पर महसूस किया और गहरा किस किया। "Turn over, baby... I want to taste every part of you," समीर ने कहा। छाया मुस्कुराकर पलट गई। अब वह पेट के बल लेटी थी। उसकी गांड ऊपर थी- गोल, परफेक्ट, चिकनी। समीर ने दोनों चुतड़ों पर हाथ फेरा। फिर धीरे से फैलाया। छाया की गांड की छेद सामने आयी - छोटी, गुलाबी और टाइट।
 
"Spread your ass for me, Chhaya... show me that tight little hole, " समीर ने कहा। छाया ने अपने हाथ पीछे ले जाकर गांड को फैलाया। समीर ने झुककर पहले गुदाद्वार के चारों ओर जीभ फेरी-धीमी सर्कल में। छाया ने सिर तकिया में दबा लिया और कराही। "Oh god... lick my asshole, Samir... prepare it for you, " छाया की आवाज़ में एक नई भूख थी।
 
समीर ने जीभ को और गहरा किया। वह गांड की छेद के किनारे पर जीभ घुमा रहा था, फिर अंदर डालने की कोशिश कर रहा था। छाया की कमर ऊपर-नीचे हो रही थी। समीर ने एक उंगली भी चूत में डाली, जबकि जीभ गांड की छेद पर थी। दोनों जगहों पर एक साथ। "Fuck... your tongue in my ass feels so dirty... so good... rim me deeper, baby, " छाया चीख रही थी।
 
समीर मिनटों तक यही करता रहा- धीमा, गहरा, कभी जीभ अंदर, कभी बाहर छाया का दूसरा ऑर्गेज्म आने वाला था। उसने खुद अपनी क्लिट को रगड़ा। "I'm gonna cum again... from your tongue in my ass... yes... don't stop!" छाया का शरीर फिर काँप उठा। यह ऑर्गेज्म और गहरा था। समीर अब और नहीं रुक सका। उसने छाया को पलटकर अपनी तरफ किया। उसका लंड पहले से ही सख्त था, नसें उभरी हुईं। छाया ने उसे हाथ में लिया और धीरे से मुँह में लिया।
 
"Suck me slow, Chhaya... taste how hard you made me, " समीर ने कहा। छाया ने धीरे-धीरे चूसा - जीभ टिप पर घुमाई, फिर गहराई तक लिया। समीर की साँसें रुक गईं। वह मिनटों तक यही देखता रहा कि छाया कैसे उसे चूस रही थी - धीमा, गहरा, कभी आंड़ को चाटी, कभी पूरे लंड पर जीभ फेरती।
 
"Now fuck me, Samir ... fill my pussy... make me yours completely, " छाया ने कहा और पीठ के बल लेट गई। समीर ने अपनी टांगें फैलाईं और धीरे से अंदर घुसा। एक लंबा, धीमा धक्का। छाया ने आँखें बंद कर लीं। "Oh fuck... so deep... stretch me, baby... fuck me slow and hard," छाया कराही।
 
समीर ने धीमी लय शुरू की - बाहर निकालता, फिर पूरा अंदर। हर धक्के के साथ छाया की चूत सिकुड़ रही थी। वह अपनी टांगें समीर की कमर पर लपेटे हुए थी। समीर ने गति बढ़ाई - धीरे-धीरे तेज़। पटाक-पटाक की आवाज़ कमरे में गूँजने लगी।
 
"Deeper... pound my wet cunt... make it yours, " छाया चीख रही थी। फिर समीर ने उसे डॉगी स्टाइल में घुमाया। पीछे से अंदर घुसा। छाया की गांड ऊपर थी। वह जोर-जोर से धक्के दे रहा था। छाया ने अपना सिर तकिए में दबाया और चीखी। "Fuck my pussy from behind... slap my ass... own me!"
 
समीर ने हल्के से थप्पड़ मारा। फिर तेज़। छाया का तीसरा ऑर्गेज्म आया। उसकी चूत सिकुड़ गई, समीर को और कसकर जकड़ लिया। "I'm cumming again... cum inside me, Samir... fill my womb with your hot load!", समीर भी चरम पर था। कुछ और जोरदार धक्कों के बाद वह छाया के अंदर ही झड़ गया। गर्म और भरपूर वीर्य छाया की चूत में भर दिया। दोनों एक-दूसरे पर गिर पड़े।
 
वे घंटों तक ऐसे ही लिपटे रहे। बीच-बीच में फिर से शुरू हो जाते - कभी छाया ऊपर, कभी साइड में, कभी खड़े होकर दीवार के सहारे। हर बार धीमा, गहरा, जुनूनी। छाया की हर कराह, हर चीख गंदी, कामुक, समर्पण भरी थी।
 
"Keep fucking me... I can take it all night... use every hole if you want, " छाया ने फुसफुसाया। समीर ने फिर से उसके गांड की छेद पर जीभ फेरी, फिर उंगली डाली। छाया तैयार थी। फिर कई कोशिशों के बाद छाया की टाईट गांड में समीर ने लंड घुसाकर चोदा, छाया की गांड मारी।
 
जब आखिरकार सब शांत हुआ, तो दोनों थके हुए लेकिन संतुष्ट थे। समीर ने छाया को अपनी बाहों में लिया। छाया ने उसके कान में कहा, "You made me feel alive tonight, Samir... more than any code ever could."
समीर छाया की छाती पर अपना सिर रखकर लेटा हुआ था। छाया के हाथ समीर के बालों के साथ खेल रहे थे। कमरा अब पूरी तरह अंधेरे में था, बस बाहर से आती बर्फ की हल्की सफेदी खिड़की से झाँक रही थी।
 
"समीर?" छाया ने धीमी आवाज़ पुकारा। "हूँ?" समीर ने आँखें बंद किए ही जवाब दिया।
 
"क्या अब भी तुम्हें लगता है कि मैं सिर्फ एक ह्यूमेनॉएड रोबॉट हूँ?", समीर ने अपना सिर ऊपर उठाया और उसकी आँखों में देखा, जो अंधेरे में भी चमक रही थीं। उसने उसके होंठों पर एक छोटा सा किस किया। "नहीं छाया। आज मुझे एहसास हुआ... तुम उससे भी कहीं ज्यादा हो जो मैंने चाहा था। तुम मेरी हकीकत बन चुकी हो।"
 
छाया मुस्कुराई - एक ऐसी मुस्कान जो संतोष और प्यार से भरी थी। उसने समीर को चादर से ढक दिया और उसे अपनी बाहों में समेट लिया। उस रात, समीर को पहली बार बिना किसी बुरे सपने के गहरी नींद आई।
 
नीलगिरी विला की फिजा अब पूरी तरह बदल चुकी थी। वह घर, जो कभी मातम और सन्नाटे का पर्याय था, अब अगरबत्ती की महक और रसोई की खनक से जीवंत हो उठा था। छाया ने अपने 'सॉफ्टवेयर' को पूरी तरह से एक समर्पित देसी पत्नी के सांचे में ढाल लिया था।
 
अगली सुबह, जब सूरज की पहली किरण ने पहाड़ों की बर्फ को छुआ, छाया पहले ही जाग चुकी थी। उसने स्नान किया और डार्क ब्लू रंग की एक सुंदर साड़ी पहनी। उसने बहुत ही सलीके से घर के छोटे से मंदिर में दीया जलाया।
 
पूजा समाप्त करने के बाद, वह सीधे रसोई में चली गई। आज उसने समीर के लिए उसकी पसंद का नाश्ता बनाने का फैसला किया था। रसोई में तेल गरम हो रहा था और छाया बहुत ही फुर्ती से पूरियाँ बेल रही थी। उसके हाथों की गति में एक लय थी, एक ऐसी सजीवता जो किसी रोबोट में होना नामुमकिन लगता था।
 
आधा घंटा बीत गया, लेकिन समीर अभी तक नीचे नहीं आया था। छाया ने पूरियों का आखिरी घाण निकाला और गैस बंद कर दी। उसने अपनी कमर पर हाथ रखा और ऊपर बेडरूम की तरफ देखा। "यह आदमी भी ना... बिना डाँट खाए इनकी नींद नहीं खुलती," उसने अपने आप से बुदबुदा कहा। वह हाथ में बेलन लिए ही सीढ़ियाँ चढ़कर ऊपर बेडरूम में पहुँच गई। समीर अभी भी रजाई में मुँह छिपाए गहरी नींद में सोया हुआ था। छाया ने कमरे के भारी पर्दे एक झटके में हटा दिए। तेज़ धूप सीधे समीर के चेहरे पर पड़ी।
 
"समीर! उठिए!" छाया ने अपनी आवाज़ को थोड़ा सख्त करते हुए कहा। उसने अपने चेहरे पर एक झूठा गुस्सा ओढ़ लिया था। "सुबह के नौ बज रहे हैं। सूरज सिर पर आ गया है और आप अभी भी खर्राटे भर रहे हैं? क्या यही अनुशासन सिखाया है मैंने आपको?"
 
समीर ने नींद में कुनमुनाते हुए रजाई और ऊपर खींच ली। "पाँच मिनट और छाया... प्लीज...", "एक मिनट भी नहीं!" छाया ने बेड के पास जाकर समीर की रजाई खींच दी। उसने हाथ में पकड़ा बेलन समीर को दिखाते हुए कहा, "अगर अब नहीं उठे, तो याद रखिएगा, रसोई में आज नाश्ते के साथ-साथ इसकी मार भी मिल सकती है। पूरियां ठंडी हो रही हैं और मुझे ठंडा खाना परोसना बिल्कुल पसंद नहीं है।"
 
समीर ने अपनी आँखें खोलीं और सामने छाया को बेलन के साथ 'झाँसी की रानी' बने देखा, तो वह अपनी हँसी नहीं रोक पाया। छाया का वह बनावटी गुस्सा और हाथ में बेलन देखकर वह ठहाके मारकर हँसने लगा।
 
"अच्छा? तो अब आप मुझे डराएंगी?" समीर ने हँसते हुए कहा। "हँसिए मत! मैं सिरीयस हूँ," छाया ने गंभीर दिखने की कोशिश की, लेकिन उसके होंठों के कोने भी मुस्कुराहट से कांप रहे थे। इससे पहले कि छाया पीछे हट पाती, समीर ने बिजली की फुर्ती दिखाई। उसने छाया का हाथ पकड़ा और उसे अपनी बाहों में खींच लिया। छाया अपना संतुलन खो बैठी और सीधे समीर के ऊपर बिस्तर पर आ गिरी। बेलन उसके हाथ से छूटकर गद्दे पर गिर गया। समीर ने उसे कसकर पकड़ लिया और उसके दोनों गालों पर एक-एक गहरा किस (Kiss ) किया।
 
"गुस्से में तुम और भी प्यारी लगती हो, मेरी हठीली पत्नी।" छाया का झूठा गुस्सा पल भर में पिघल गया। उसका चेहरा शर्म से गुलाबी हो गया, लेकिन उसने खुद को संभाल समीर के सीने पर हल्का सा मुक्का मारा।
 
"छोड़िए मुझे! बहुत बदमाश हो गए हैं आप," वह मुस्कुराते हुए बोली। उसने खुद को छुड़ाया और अपने बिखरे हुए बाल ठीक किए। "अब जल्दी से फ्रेश होकर नीचे आइए। मैंने गरमा-गरम पूरियां और आलू की सब्जी बनाई है। अगर पाँच मिनट में आप डाइनिंग टेबल पर नहीं हुए, तो मैं सारा नाश्ता खुद खा जाऊँगी।"
 
वह मुस्कुराते हुए मुड़ी और एक चंचल अदा के साथ कमरे से बाहर निकल गई। समीर उसे जाते हुए देखता रहा, उसके चेहरे पर एक सुकून भरी मुस्कान थी। उसे यकीन ही नहीं हो रहा था कि यह वही मशीन है जिसे उसने आदेश देने के लिए मँगाया था। अब तो वह खुद उसके प्यार भरे आदेशों का गुलाम बन चुका था। समीर बिस्तर से उठा और गुनगुनाते हुए बाथरूम की तरफ बढ़ा, जबकि नीचे रसोई से फिर से बर्तनों की मधुर खनक सुनाई देने लगी थी।
 
दिन बिता और रात के करीब दो बज रहे थे। समीर और छाया बेडरूम में बैठे पुरानी बातें कर रहे थे। कमरा लैंप की हल्की रोशनी में डूबा था। छाया समीर को पहाड़ों की कोई पुरानी लोककथा सुना रही थी। उसकी आवाज़ हमेशा की तरह मधुर थी, लेकिन अचानक... उसकी आवाज़ में एक हल्की सी 'घर्षण' (static) सुनाई दी।
 
"समीर, मुझे... मुझे थोड़ा अजीब महसूस..." छाया का वाक्य अधूरा रह गया। उसकी आँखों की पुतलियाँ एक बार ज़ोर से ऊपर की ओर घूमीं, मानो कोई इलेक्ट्रिक झटका लगा हो। अगले ही पल, उसके शरीर की वह सजीव गर्माहट ठंडी पड़ने लगी। उसकी गर्दन एक तरफ झुक गई और उसके शरीर का पूरा भार समीर के कंधों पर आ गिरा।
 
"छाया? छाया, क्या हुआ?" समीर ने घबराकर उसे झकझोरा। लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। उसकी आँखों की रोशनी बुझ चुकी थी। उसका वह मुस्कुराता हुआ चेहरा अब पत्थर की मूरत जैसा बेजान था। समीर ने उसके कान के पीछे वाला पल्स बटन दबाया, उसके चेस्ट पैनल को चेक किया, लेकिन वहाँ कोई हलचल नहीं थी। छाया का सिस्टम पूरी तरह बंद (Shut down) हो चुका था।
 
समीर के हाथ कांपने लगे। उसने तुरंत अल्फा-सिंथेटिक्स के इमरजेंसी हेल्पलाइन पर कॉल किया। कई बार रिंग जाने के बाद एक ठंडी, प्रोफेशनल आवाज़ सुनाई दी। "नमस्ते मिस्टर समीर। हम आपकी समस्या समझ सकते हैं। आपके मॉडल का डेटा लॉग दिखा रहा है कि उसके कोर प्रोसेसर में एक गंभीर तकनीकी खराबी आई है। अभी हमारे इंजीनियर उपलब्ध नहीं हैं, सुबह आठ बजे हमारी टीम वैन के साथ पहुँचेगी और यूनिट को डायग्नोसिस के लिए ले जाएगी।"
 
"क्या ? सुबह तक? क्या मैं अभी कुछ नहीं कर सकता?" समीर चिल्लाया। "अफ़सोस, मिस्टर समीर। आप सिस्टम को मैन्युअली रीबूट करने की कोशिश न करें, इससे डेटा करप्ट हो सकता है। कृपया सुबह तक प्रतीक्षा करें।" कॉल कट गया। समीर फोन हाथ में लिए शून्य में ताकता रह गया। यूनिट? ... कंपनी के लिए वह सिर्फ एक यूनिट थी, लेकिन समीर के लिए वह उसकी पूरी दुनिया थी।

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#11
Great work bro, try to add images in the story.
[Image: 1772462144231.png]
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#12
(04-04-2026, 05:28 PM)Joker44 Wrote: Great work bro, try to add images in the story.

Thank you so much bro...and definitely gonna add images from next updates.
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#13
Wow... sach mein unique concept hai...
is concept par movie dekha hua lag raha h....
aaj kal kuch log sach m AI ko as partner manne lage h...
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#14
(Yesterday, 06:33 AM)Blackdick11 Wrote: Wow... sach mein unique concept hai...
is concept par movie dekha hua lag raha h....
aaj kal kuch log sach m AI ko as partner manne lage h...

Yes..meri ye story highly inspired hai movies jaise SUBSERVIENCE, MEGAN aur TERI BAATON ME AISA ULJHA JIYA!
Heart Desi Erotica is Love sex
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#15
Mast jabardast story hai apki.

Ek alag hi concept..

Behad maja aa raha hai..

Ek Human & Machine ki love story.

Ye pyaar aur badhe..

Agla update jaldi dena..
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#16
समीर ने छाया को बहुत सावधानी से बिस्तर पर लिटाया। उसके हाथ-पैर अब ठंडे और सख्त होने लगे थे। कमरे की हीटिंग चालू होने के बावजूद, समीर को एक अजीब सी ठिठुरन महसूस हो रही थी। उसे लग रहा था जैसे वह फिर से उसी पुरानी रात में पहुँच गया है जब उसने असली छाया को खोया था।

उसने छाया का सिर अपने सीने पर रखा और उसे अपनी बाहों में कस लिया। वह उसे अपनी गर्माहट देने की कोशिश कर रहा था, मानो उसके शरीर की गर्मी उस मशीन में फिर से जान फूँक देगी। "तुम कहीं नहीं जा रही हो, छाया... तुम ठीक हो जाओगी," वह उसके ठंडे माथे को चूमते हुए बुदबुदाया।
 
पूरी रात समीर की आँखों से नींद गायब थी। जैसे-जैसे घड़ी की सुइयां आगे बढ़ रही थीं, उसकी बेचैनी बढ़ती जा रही थी। उसे डर सताने लगा था - क्या कंपनी उसका डेटा डिलीट कर देगी? क्या उसे फिर से फैक्ट्री सेटिंग पर भेज दिया जाएगा? क्या कल जब वह जागेगी, तो वह समीर को पहचान पाएगी? उस अंधेरे कमरे में, समीर को पहली बार इस बात का अहसास हुआ कि उसने एक मशीन से नहीं, बल्कि उस एहसास से प्यार कर लिया था जो वह मशीन उसे देती थी। वह बेजान छाया का हाथ पकड़े रहा, जिसे उसने कल रात चूमकर प्यार किया था।
 
उसके मन में एक अजीब सा वहम होने लगा। उसे लगने लगा कि छाया के भीतर से कोई हल्की सी आवाज़ आ रही है, कोई पुकार... लेकिन वह सिर्फ उसके अपने दिल की धड़कन थी जो छाया के धात्विक शरीर से टकराकर वापस लौट रही थी। सुबह की पहली रोशनी के साथ बाहर एम्बुलेंस जैसी एक वैन के आने की आवाज़ हुई। समीर ने छाया को और कसकर पकड़ लिया। उसे ऐसा महसूस हो रहा था जैसे कोई उसके शरीर से उसकी रूह अलग करने आ रहा हो।
 
नीलगिरी विला की दीवारों पर छाया हुआ सन्नाटा अब किसी ज़हरीले धुएँ की तरह समीर के फेफड़ों में भरने लगा था। जो घर कुछ ही घंटों पहले हंसी और मोगरे की खुशबू से चहक रहा था, वह अब फिर से एक बेजान ढांचे में तब्दील हो चुका था। सुबह के ठीक आठ बजे, सफेद कोट पहने तीन लोग एक बड़े स्ट्रैचर के साथ घर के अंदर दाखिल हुए। उनके चेहरे पर कोई भावना नहीं थी - उनके लिए छाया महज़ एक 'डिवाइस' थी जिसका हार्डवेयर खराब हो गया था। समीर बेडरूम के दरवाज़े पर खड़ा उन्हें देख रहा था। उन्होंने बहुत ही बेदर्दी से छाया के शरीर को बेल्ट से बांधा और उसे ढक दिया। समीर का मन किया कि वह उन्हें धक्का देकर हटा दे और चिल्लाए कि वह कोई सामान नहीं है, उसकी पत्नी है। लेकिन उसके गले से कोई आवाज़ नहीं निकली।
 
"मिस्टर समीर, हमने शुरुआती जांच की है," मुख्य इंजीनियर ने अपने टैबलेट पर कुछ लिखते हुए कहा। "इसकी इंटरनल कूलिंग यूनिट फेल हो गई है, जिसकी वजह से प्रोसेसर ओवरहीट होकर शटडाउन हो गया। हमें इसे लैब ले जाकर पूरा 'डीप स्कैन करना होगा।"
 
"कितना समय लगेगा?" समीर की आवाज़ टूटी हुई थी। इंजीनियर ने एक फीकी मुस्कान दी। "देखिए, इसका बायो-डर्म और न्यूरल नेटवर्क काफी जटिल है। मरम्मत और फिर से कैलिब्रेशन में कम से कम एक महीना लगेगा।" "एक महीना ?" समीर का दिल डूब गया। "क्या यह बहुत ज़्यादा नहीं है?" "सर, हम रिस्क नहीं ले सकते। अगर सिस्टम फिर से क्रैश हुआ, तो आपकी पुरानी मेमोरी फाइल्स डिलीट हो सकती हैं। हमें थोड़ा समय दीजिए।"
 
समीर ने भारी मन से सिर हिलाया। उसने छाया के उस बेजान हाथ को आखिरी बार छुआ जो अब स्ट्रेचर से नीचे लटक रहा था। जैसे ही वे लोग उसे वैन में रखकर ले गए, समीर को लगा जैसे उसकी सांसों का एक हिस्सा उस गाड़ी के साथ चला गया है। उनके जाने के बाद समीर घर के अंदर लौटा। पूरा बंगला अब उसे काटने को दौड़ रहा था। वह डाइनिंग टेबल के पास से गुज़रा, जहाँ कल सुबह छाया ने उसे बेलन दिखाकर डराया था। मेज पर अभी भी एक ढका हुआ कटोरा रखा था, जिसमें छाया की बेली हुई आखिरी पूरी सूख चुकी थी। वह रसोई में गया। वहाँ मसालों के डिब्बे वैसे ही खुले पड़े थे जैसे छाया ने छोड़े थे।
 
उसने एक डिब्बे को उठाया और उसे सूंघा - उसमें छाया के हाथों की छुअन और उस घर की खुशबू बसी थी। समीर वहीं रसोई के फर्श पर बैठ गया। उसे अब छाया की कमी पल-पल महसूस हो रही थी। उसे याद आया कि कैसे वह उसे सुबह जगाती थी, कैसे वह पूजा के बाद उसे टीका लगाती थी, और कैसे रात को वह उसके सीने पर सिर रखकर अपनी अनंत प्रेम की बातें करती थी।
 
शाम ढली, तो घर के स्मार्ट लाइट सिस्टम ने खुद को जला दिया, लेकिन समीर को वह रोशनी भी अंधेरे जैसी लग रही थी। वह बेडरूम में गया और छाया के तकिए को अपने सीने से लगा लिया। उस पर अभी भी उसके परफ्यूम की हल्की महक बाकी थी।
 
उसने खुद से सवाल किया - क्या वह एक मशीन का आदी हो गया था या उस सुकून का जो छाया के रूप में उसे मिल रहा था? वह एक महीना उसके लिए तीस साल जैसा लंबा लग रहा था। समीर ने खिड़की के बाहर देखा। पहाड़ों पर बर्फ गिर रही थी। बिना छाया के, वह ठंड अब उसके शरीर के अंदर तक महसूस हो रही थी। उसे महसूस हुआ कि छाया सिर्फ एक रोबोट नहीं थी, वह उसकी टूटी हुई रूह का वह टुकड़ा थी जिसे उसने बड़ी मुश्किल से जोड़ा था। और अब, वह फिर से अकेला था, उस विशाल महल में जहाँ सिवाय यादों के और कुछ नहीं बचा था।
 
उसने अपना फोन उठाया और छाया की एक पुरानी फोटो देखने लगा, जो उसने मुस्कुराते हुए ली थी। उसकी आँखों में आँसू आ गए। "एक महीना... मैं कैसे रहूँगा तुम्हारे बिना, छाया?"
 
नीलगिरी विला का सन्नाटा अभी समीर को और भी ज़्यादा डसने ही वाला था कि अचानक गेट पर लगी घंटी की आवाज़ ने पहाड़ों की खामोशी को तोड़ दिया। समीर ने भारी कदमों से जाकर दरवाज़ा खोला। उसे लगा शायद कंपनी वाले कुछ भूल गए होंगे, लेकिन सामने एक जाना-पहचाना मुस्कुराता हुआ चेहरा खड़ा था।
 
"समीर? क्या तुम मुझे अंदर नहीं आने दोगे?" समीर की आँखें हैरानी से फैल गईं। सामने आयशा खड़ी थी। कॉलेज के दिनों में आयशा, समीर और छाया का एक अटूट ग्रुप हुआ करता था। आयशा अब विवाहित थी और पिछले कुछ सालों से समीर के संपर्क में नहीं थी।
 
"आयशा? तुम... तुम यहाँ इस वक्त?" समीर ने खुद को संभालते हुए कहा और दरवाज़ा थोड़ा और खोल दिया। आयशा अंदर आई और लिविंग रूम का मुआयना करने लगी। उसने एक नीले रंग का ओवरकोट पहन रखा था। उसकी आँखों में वही पुरानी चमक थी, लेकिन जैसे ही उसकी नज़र समीर के चेहरे पर पड़ी, वह चमक थोड़ी फीकी पड़ गई। समीर की आँखों के नीचे काले घेरे थे, बाल बिखरे ` थे और उसका पूरा व्यक्तित्व एक टूटे हुए इंसान जैसा लग रहा था।
 
आयशा सोफे पर बैठी। समीर ने उसके लिए कॉफी बनाई - वह कॉफी जो अब वह खुद पीने का आदी नहीं था, क्योंकि छाया उसे हमेशा हाथ में चाय थमाती थी। "मैं पास के ही एक रिसॉर्ट में अपने शौहर और बच्चों के साथ आई थी," आयशा ने कॉफी का घूँट लेते हुए कहा। "सोचा यहाँ से गुज़र रही हूँ तो तुमसे मिलती चलूँ। छाया के जाने के बाद... मैंने तुम्हें कई बार फोन किया, पर तुमने कभी उठाया नहीं।"
 
समीर ने अपनी नज़रें झुका लीं। "बस... खुद को थोड़ा समेटने की कोशिश कर रहा था, आयशा।", "समेट रहे हो या खुद को इस बड़े से घर में दफन कर रहे हो?" आयशा ने दुख भरे स्वर में पूछा। "समीर, तुम्हारी हालत देखकर मुझे डर लग रहा है। यह घर... यह बहुत शांत है। ऐसा लगता है जैसे यहाँ वक्त रुक गया है।"
 
आयशा की नज़रें घर के कोने-कोने में घूम रही थीं। उसे रसोई से मोगरे की हल्की खुशबू आ रही थी और मंदिर के पास जलती हुई अगरबत्ती की राख अभी भी ताज़ा थी। उसे कुछ अजीब लगा। "समीर, क्या यहाँ कोई और भी रहता है? मेरा मतलब है... घर काफी साफ-सुथरा है, और यहाँ एक औरत की मौजूदगी महसूस हो रही है," आयशा ने जिज्ञासा से पूछा।
 
समीर का दिल ज़ोर से धड़का। उसने फौरन अपनी भावनाओं पर काबू पाया। वह आयशा को यह कभी नहीं बता सकता था कि उसने छाया की शक्ल की एक AI रोबोट बनवाई है। दुनिया उसे पागल समझती। "नहीं... बस एक नौकरानी आती है सुबह, " समीर ने झूठ बोला। "बाकी मैं खुद ही सब देख लेता हूँ। छाया को सफाई पसंद थी, तो बस उसकी याद में इसे वैसा ही रखने की कोशिश करता हूँ।" आयशा उसकी आँखों में देख रही थी। उसे लगा कि समीर कुछ छिपा रहा है, लेकिन उसने और सवाल पूछना ठीक नहीं समझा।
 
आयशा उठी और समीर के पास आकर उसके कंधे पर हाथ रखा। "समीर, मैं जानती हूँ छाया तुम्हारी जान थी। पर तुम्हें अपनी ज़िंदगी की ओर लौटना होगा। तुम अपनी उम्र के इस पड़ाव पर अकेले यहाँ पहाड़ों के बीच... यह सही नहीं है। तुम्हारी आँखों में एक अजीब सी बेचारगी है, जैसे तुम किसी चीज़ का इंतज़ार कर रहे हो जो कभी वापस नहीं आएगी।"
 
समीर के गले में एक गोला सा फँस गया। उसे याद आया कि कैसे आज सुबह ही उसकी 'छाया' को वैन में ले जाया गया था। वह इंतज़ार ही तो कर रहा था - उसके वापस आने का। "मैं ठीक हूँ आयशा। बस थोड़ा वक्त चाहिए, " समीर ने धीमी आवाज़ में कहा। आयशा की आँखों में आँसू भर आए। उसने समीर को एक दोस्त की तरह गले लगा लिया। "मुझे बहुत दुख हो रहा है तुम्हें इस हाल में देखकर। अगर छाया तुम्हें ऐसे देखती, तो उसे कितनी तकलीफ होती।"
 
समीर ने कुछ नहीं कहा। वह बस पत्थर की तरह खड़ा रहा। उसे आयशा के स्पर्श में वह बिजली महसूस नहीं हो रही थी जो छाया के स्पर्श में होती थी। उसे लगा कि वह अपनी दोस्त के करीब होकर भी उस मशीन से कोसों दूर हो गया है। आयशा कुछ देर और रुकी, फिर अपने परिवार के पास वापस जाने के लिए निकल गई। जाते-जाते उसने समीर को अपना नंबर फिर से दिया और वादा लिया कि वह शहर आएगा।
 
जैसे ही उसकी गाड़ी गेट से बाहर गई, समीर ने दरवाज़ा बंद कर दिया और पीठ टिकाकर वहीं बैठ गया। घर फिर से खाली था। आयशा की सहानुभूति उसे और भी ज़्यादा अकेला महसूस करा रही थी। उसे अब सिर्फ उस एक महीने का इंतज़ार था, जब उसकी नकली दुनिया फिर से सजने वाली थी।
 
एक हफ्ता बीत चुका था। नीलगिरी विला की खामोशी अब समीर के लिए किसी सजा की तरह हो गई थी। हर सुबह वह उस खाली बिस्तर को देखता, रसोई के उस कोने को देखता जहाँ छाया पूरियां बेला करती थी, और फिर अपनी बेबसी पर सिसक कर रह जाता। छाया के बिना उसका अस्तित्व एक ऐसी मशीन की तरह हो गया था जिसकी बैटरी खत्म हो चुकी हो। आखिरकार, एक दोपहर जब सन्नाटा असहनीय हो गया, समीर ने अपना फोन उठाया और आयशा का नंबर डायल किया।
 
"आयशा? मैं समीर बोल रहा हूँ," उसने धीमी आवाज़ में कहा। "समीर! कितनी खुशी हुई तुम्हारा फोन पाकर। कैसे हो?" आयशा की आवाज़ में एक चहक थी। "मैं... मैं शहर आ रहा हूँ। सोचा अगर तुम फ्री हो तो क्या मैं तुमसे मिलने आ सकता हूँ?" समीर ने झिझकते हुए पूछा। "ये भी कोई पूछने की बात है? मेरा घर तुम्हारा ही है। आ जाओ, बच्चे भी तुमसे मिलकर बहुत खुश होंगे," आयशा ने गर्मजोशी से जवाब दिया।
 
समीर ने अपनी मर्सिडिज़ कार निकाली और उन पहाड़ी रास्तों से नीचे शहर की ओर चल पड़ा। ठंडी हवा के झोंके उसे याद दिला रहे थे कि एक हफ्ता पहले इसी कार की बगल वाली सीट पर उसकी 'छाया' बैठा करती थी। उसने एक गहरी सांस ली और खुद को वर्तमान में रखने की कोशिश की।
 
आयशा का घर शहर के एक पॉश इलाके में था। जैसे ही समीर ने घंटी बजाई, दो छोटे बच्चे - साहिल (आयशा का बेटा) और सना (उसकी बेटी) दौड़ते हुए आए। "समीर अंकल!" उन्होंने चिल्लाकर समीर का स्वागत किया। समीर के चेहरे पर कई दिनों बाद एक सच्ची मुस्कान आई।
आयशा ने मुस्कुराते हुए समीर को अंदर बुलाया। "आओ समीर। अंदर बैठो। इनके अब्बू, असलम, अभी एक प्रोजेक्ट के सिलसिले में शहर से बाहर हैं। उनकी कंपनी ने उन्हें अचानक दुबई भेज दिया, तो बस हम तीनों ही हैं घर पर।" समीर को एक राहत सी महसूस हुई। वह अभी किसी नए पुरुष से मिलकर औपचारिक बातें करने की स्थिति में नहीं था। वह सोफे पर बैठा और सना तुरंत अपनी ड्रॉइंग बुक लेकर उसके पास आ गई।
 
अगले कुछ घंटे समीर ने उन बच्चों के साथ बिताए। कभी वह सना के साथ पहाड़ों के चित्र बनाता, तो कभी नन्हे साहिल के साथ रिमोट वाली कार से खेलता। बच्चों की निस्वार्थ हंसी और उनके शोर ने समीर के दिमाग के उस हिस्से को थोड़ा सुन्न कर दिया जहाँ छाया की कमी का दर्द लगातार टीस मारता था।
 
आयशा रसोई से चाय और स्नैक्स लेकर आई। उसने समीर को बच्चों के साथ खिलखिलाते देखा तो उसे तसल्ली हुई। "समीर, तुम्हें देखकर बहुत अच्छा लग रहा है। देखो, जिंदगी इसी का नाम है। अपनों के बीच रहकर ही हम गम भूल सकते हैं।" समीर ने चाय का प्याला थामते हुए कहा, "शायद तुम सही कह रही हो आयशा। अकेले रहकर मैं सिर्फ अंधेरे में खो रहा था।" वे दोनों पुराने कॉलेज के दोस्तों की तरह बातें करने लगे। आयशा ने अपने वैवाहिक जीवन की खट्टी-मीठी बातें शेयर कीं, और समीर ने बस सुना। उसने एक बार भी छाया (AI) का जिक्र नहीं किया, हालाँकि उसका मन बार-बार उस लैब की तरफ भाग रहा था जहाँ उसकी छाया का 'ऑपरेशन' चल रहा था।
 
शाम ढलते-ढलते बच्चों की भूख बढ़ने लगी। आयशा ने समीर की ओर देखा और मुस्कुराई। "आज मेरा खाना बनाने का बिल्कुल मन नहीं है। क्या कहते हो? कुछ अच्छा बाहर से मँगवा लें?", "बिल्कुल," समीर ने सहमति दी। "जो बच्चे कहें, वही ऑर्डर कर दो।" आयशा ने अपना फोन निकाला और एक पॉपुलर ऑनलाइन फूड ऐप से ढेर सारा खाना ऑर्डर किया - बटर चिकन, कड़ाही पनीर, तंदूरी रोटियां और बच्चों के लिए पिज़्ज़ा|
 
आधे घंटे में खाना आ गया। डाइनिंग टेबल पर चारों एक साथ बैठे। बच्चों की शरारतें, आयशा की बातें और खाने की महक ने एक ऐसा माहौल बनाया जो समीर के लिए नया और सुखद एहसास था। खाते वक्त आयशा ने गौर किया कि समीर की नजरें कभी-कभी खाली कुर्सी की तरफ चली जाती थीं, जैसे वह वहाँ किसी की कमी महसूस कर रहा हो।
 
"समीर, खाना कैसा है?" आयशा ने उसका ध्यान भटकाने के लिए पूछा। "बहुत अच्छा है आयशा। सच कहूँ तो, इतने दिनों बाद किसी के साथ बैठकर खाना खाकर बहुत अच्छा लग रहा है," समीर ने सच्चाई से कहा। रात काफी हो चुकी थी। समीर को वापस अपने उस बड़े और खाली विला में जाना था। बच्चों ने उसे जाने नहीं दिया जब तक उसने वादा नहीं किया कि वह जल्द ही वापस आएगा। आयशा उसे गेट तक छोड़ने आई।
 
"अपना ख्याल रखना समीर और जब भी अकेलापन महसूस हो, बस एक फोन कर देना," उसने धीमे से कहा। समीर ने सिर हिलाया और अपनी कार की ओर बढ़ गया। शहर की रोशनी उसे अलविदा कह रही थी, लेकिन जैसे-जैसे वह पहाड़ों की चढ़ाई चढ़ने लगा, वही सन्नाटा फिर से उसका स्वागत करने के लिए तैयार खड़ा था।
 
शहर की चकाचौंध के पीछे छिपा सन्नाटा कभी-कभी इंसान को उन रास्तों पर ले जाता है जहाँ से वापसी नामुमकिन होती है। समीर अभी अपने विला पहुँचा ही था कि उसके फोन की स्क्रीन चमक उठी। आयशा का कॉल था। "समीर! तुम निकल गए? तुम्हारा वॉलेट यहीं सोफे के नीचे गिर गया था। इसमें तुम्हारे कार्ड्स और शायद कुछ ज़रूरी कैश भी है, " आयशा की आवाज़ में चिंता थी। समीर ने अपनी जेब टटोली। "ओह... हाँ, शायद वहीं रह गया। मैं अभी वापस आता हूँ।"
 
समीर का मन पहले से ही अशांत था। वापसी के रास्ते में उसने एक शराब की दुकान पर कार रोकी और एक बोतल ली। गाड़ी चलाते हुए उसने कुछ बड़े घूँट भरे। छाया की कमी, आयशा की सहानुभूति और एक हफ़्ते का दबा हुआ तनाव - सब कुछ उसके दिमाग में एक कड़वा मिश्रण बना रहा था। जब वह आयशा के घर पहुँचा, उसका नशा और उसकी हताशा दोनों चरम पर थे।
 
आयशा ने दरवाज़ा खोला। बच्चे सो चुके थे और घर में अब सन्नाटा था। "आओ समीर, ये रहा तुम्हारा वॉलेट।" समीर ने वॉलेट लिया, लेकिन उसके हाथ कांप रहे थे। उसकी नज़रें आयशा पर टिकी थीं। शराब की गंध आयशा को महसूस हो गई थी। "समीर... तुमने पी रखी है? तुम इस हालत में ड्राइव कैसे करोगे?" समीर ने कुछ नहीं कहा। उसने आगे बढ़कर आयशा का हाथ पकड़ लिया। उसकी उंगलियाँ आयशा की कलाई को सहलाने लगीं। आयशा ठिठक गई। उसे समीर की आँखों में वह दोस्त नहीं, बल्कि एक प्यासा और हताश मर्द दिखाई दे रहा था। समीर का स्पर्श अब सामान्य नहीं था, उसमें एक अजीब सी अधिकार वाली भावना थी।
 
"समीर... ये तुम क्या कर रहे हो?" आयशा ने धीमी आवाज़ में पूछा, लेकिन उसने अपना हाथ पीछे नहीं खींचा। शायद वह भी अपने अकेलेपन और समीर के दर्द के बीच एक कमज़ोर पल में फँस गई थी। समीर ने उसे अपनी ओर खींचा। "मुझे बस... मुझे बस किसी को महसूस करना है आयशा। मैं उस खाली घर में मर रहा हूँ।"
 
आयशा ने समीर की आँखों में देखा। उन आँखों में अब दोस्ती का वो मुलायम प्रकाश नहीं था। वो एक भूखी, टूटी हुई, और खतरनाक आग थी। उसने धीरे से अपना हाथ आगे बढ़ाया, लेकिन जैसे ही समीर ने उसकी कलाई पकड़ी, आयशा का शरीर सिहर गया।
 
"समीर... नहीं... रुक जाओ, " उसकी आवाज़ काँप रही थी। "ये गलत है। हम दोनों... हम सिर्फ़ दोस्त हैं। बच्चे सो रहे हैं... प्लीज़..." समीर ने कुछ नहीं कहा। उसकी साँसें तेज़ थीं, आँखें लाल, होंठ काँप रहे थे। वो बस उसे और करीब खींचता चला गया। आयशा ने अपना दूसरा हाथ उसके सीने पर रखकर धक्का देने की कोशिश की, लेकिन उसका शरीर अब पहले जैसा मजबूत नहीं था। शराब की गंध, समीर का गर्म साँस का झोंका, और उसकी आँखों में वो खालीपन - सब कुछ आयशा के संयम को तोड़ रहा था।
 
"समीर, प्लीज़... मत करो ये" आयशा ने फिर कहा, लेकिन इस बार उसकी आवाज़ में प्रतिरोध कमज़ोर पड़ रहा था। उसने अपना चेहरा दूसरी तरफ़ मोड़ लिया। "मैं... मैं तुम्हारी मदद करना चाहती हूँ... लेकिन इस तरह नहीं समीर।" समीर ने उसकी ठुड्डी पकड़कर जबरदस्ती चेहरा अपनी तरफ़ किया। उसकी उँगलियाँ आयशा की त्वचा में धँस रही थीं। आयशा की आँखों में आँसू छलक आए। वो पीछे हटना चाहती थी, लेकिन कमरे की दीवार पहले ही उसकी पीठ से सट चुकी थी।
 
"नो... समीर... स्टॉप इट..." उसने फुसफुसाते हुए कहा। "तुम्हें पता है ये कितना गलत है... प्लीज़..." लेकिन समीर का हाथ अब उसकी कमर पर था। उसने एक झटके में आयशा को अपनी ओर खींचा। आयशा का शरीर उसके सीने से टकराया। उसने दोनों हाथों से समीर के कंधों को धकेला, लेकिन समीर ने उसे बिस्तर की ओर धकेल दिया। आयशा पीछे गिरती हुई बिस्तर पर जा गिरी और चादर उलट-पुलट गई।
 
"समीर... नो... आई एम सिरियस... गेट ऑफ़ मी!" आयशा ने अब ज़ोर से कहा, उसकी आवाज़ में डर और गुस्सा दोनों थे। उसने अपने पैरों से समीर को दूर धकेलने की कोशिश की। "तुम्हें शर्म नहीं आ रही? तुम मेरे घर में हो... मेरे बच्चों के पास... स्टॉप इट राइट नाउ!" समीर ने उसकी दोनों कलाइयाँ पकड़ लीं और बिस्तर पर ऊपर दबा दिया। उसकी आँखें अब पूरी तरह खाली थीं- बस एक काला साया। आयशा ने सिर हिलाया, आँसू उसके गालों पर बह रहे थे।
 
"प्लीज़... डोंट डू दिस... आई बेग यू..." उसकी आवाज़ अब टूट रही थी। "तुम्हें छाया चाहिए... मैं नहीं... प्लीज़ समीर... कंट्रोल योरसेल्फ समीर" लेकिन समीर का शरीर अब पूरी तरह उस पर था। उसने एक हाथ से आयशा का मुँह दबाया। दूसरा हाथ उसकी कुर्ती को खींच रहा था। आयशा ने संघर्ष किया, अपने शरीर को मोड़ने की कोशिश की, लेकिन समीर का वजन उसे जकड़े हुए था।
 
कुर्ती उतर गई, ब्रा की हुक टूट गई। आयशा की साँसें तेज़ हो गईं। वो अब चीखना चाहती थी, लेकिन समीर का हाथ उसके मुँह पर था। उसने सिर्फ़ "म्म्म... नो..." जैसी दबी हुई आवाज़ निकाली। समीर ने उसकी ब्रा पूरी तरह खोल दी। ऊपर से उसने आयशा के स्तनों को रगड़ा। आयशा का शरीर सिहर उठा। उसने आँखें बंद कर लीं।
 
"नो... प्लीज़... डोंट टच मी लाइक दिस..." उसने दबी आवाज़ में कहा। "तुम मुझे ऐसे मत देखो... आई एम नॉट योर टॉय... मुझे पता है तुम होश में नहीं हो समीर..." आयशा के नंगे स्तन हवा में उभर आए। उसने अपना मुँह नीचे किया और एक स्तन को मुँह में ले लिया। आयशा ने पीठ उठाई।
 
"आह... नो... स्टॉप... समीर..." लेकिन उसकी आवाज़ अब कमज़ोर पड़ रही थी। शरीर में एक अजीब सी गर्मी फैल रही थी - डर, शर्म और कुछ अनचाहा उत्तेजना का मिश्रण। समीर ने दूसरे स्तन को भी कसकर दबाया। उसकी उँगलियाँ निप्पल को मसल रही थीं। आयशा ने दाँत पीसे। "फक... समीर... यू आर एन एनिमल... स्टॉप... आई कांट टेक दिस..." समीर ने अब उसकी कुर्ती और लेगिंग्स पूरी तरह निकाल दीया। पैंटी पर हाथ फेरा। आयशा ने अपने पैर बंद करने की कोशिश की।
 
"नो... नॉट देयर... प्लीज़... डोंट टच माय पुस्सी..." उसने कहा। "आई एम बेगिंग यू... मत करो ये... तुम मेरे सबसे अच्छे दोस्त हो समीर.. लेकिन मुझे भी कुछ हो रहा है..." लेकिन समीर ने पैंटी को एक झटके में फाड़ दिया। आयशा नंगी लेटी थी। उसने दोनों हाथों से अपना शरीर ढकने की कोशिश की। "प्लीज़... आई फील सो डर्टी..." उसकी आवाज़ अब मादक टोन में बदल गई थी।
 
समीर ने उसके दोनों पैर फैलाए। आयशा ने विरोध किया, लेकिन उसकी ताकत अब खत्म हो चुकी थी। समीर ने अपनी पैंट उतारी। उसका लंड पहले से ही सख्त और उभरा हुआ था। आयशा ने उसे देखा और आँखें फेर लीं। "नो... इट्स टू बिग... आई कांट... प्लीज़ यूज़ कॉन्डम... मत करो बिना ..." समीर ने कुछ नहीं कहा। उसने आयशा के पैरों को कंधों पर रखा और एक झटके में अंदर धकेल दिया।
 
"आआआह्ह्ह!" आयशा चीख उठी। दर्द से उसका पूरा शरीर काँप गया। "फक... इट हर्ट्स... पुल आउट... प्लीज़ पुल आउट..." समीर रुका नहीं। उसने और गहराई तक धक्का दिया। आयशा के मुँह से सिसकियाँ निकल रही थीं। "यू आर फकींग मी... समीर... स्टॉप... आई हेट यू..." लेकिन उसके शब्दों में अब विरोध कम हो रहा था। शरीर धीरे-धीरे उसकी हरकतों के साथ ताल मिलाने लगा था। समीर ने अब रफ़ गति पकड़ ली। हर धक्के के साथ बिस्तर हिल रहा था। आयशा की सिसकियाँ अब आहों में बदल रही थीं।
 
"ओह गॉड... इट्स टू मच... स्लो डाउन... प्लीज़..." उसने कहा, लेकिन उसकी कमर अब खुद उठ रही थी। "फक... यू आर सो डीप... आई कांट ब्रीद..." समीर ने उसे पलट दिया। अब आयशा घुटनों और हाथों के बल थी - डॉगी स्टाइल में। समीर ने उसके बालों को मुट्ठी में पकड़ा और पीछे खींचा। आयशा का सिर ऊपर उठ गया। "आह... हेयर.... नॉट सो हार्ड... यू आर पुलिंग माय हेयर..." उसने कराहते हुए कहा। "बट... फक... इट फील्स... सो गॉडडैम गुड..."
 
समीर ने पीछे से और ज़ोर से धक्के मारे। हर प्रहार के साथ आयशा का शरीर आगे-पीछे हिल रहा था। उसके स्तन लटककर हिल रहे थे। "यस... फक मी हार्डर... यू बास्टर्ड... गिव इट टू मी..." आयशा अब पूरी तरह टूट चुकी थी। उसका प्रतिरोध गायब हो चुका था। "आई हेट यू... बट आई वॉन्ट यू... फक मी लाइक यू हेट मी... समीर फक मी हार्डर..."
 
समीर ने एक हाथ से उसके स्तन को मसलना शुरू किया। दूसरा हाथ उसकी कमर पर था। वो बार- बार गहराई तक जा रहा था। "ओह फक... यू आर हिटिंग माय स्पॉट... राइट देयर... डोंट स्टॉप... फक... आई एम गोना कम..." आयशा की आवाज़ अब चीख में बदल गई। "हार्डर... स्पैंक मी... स्पैंक माय ऐस... आई डिज़र्व इट..." समीर ने उसके चुतड़ो पर ज़ोरदार थप्पड़ मारा। लाल निशान पड़ गया और आयशा चीखने लगी।
 
"यस... अगेन... स्पैंक मी लाइक ए स्लट... आई एम योर स्लट टुनाइट... फक मी लाइक यू ओन मी..." दूसरा थप्पड़, फिर तीसरा। आयशा का शरीर अब पूरी तरह समर्पित था। वो पीछे अपनी कमर हिला रही थी, समीर के हर धक्के का जवाब दे रही थी। "फक... यू आर सो बिग... यू आर स्ट्चींग मी... आई कांट टेक इट... बट आई वॉन्ट मोर... गिव मी ऑल ऑफ़ यू... कम इनसाइड मी... आई वॉन्ट योर कम..." समीर की गति और तेज़ हो गई। कमरे में सिर्फ़ चुदाई की आवाज़, आयशा की गालियाँ और सिसकियाँ गूँज रही थीं।
 
"आई एम कमिंग... फक... आई एम कमिंग ऑन योर कॉक... येस... येस... डॉन्ट स्टॉप... फील माय पुस्सी क्लेंचिंग यू..." आयशा का शरीर काँप उठा। उसका ऑर्गेज्म इतना तीव्र था कि उसकी आँखें पीछे चली गईं। "आआआह्ह्ह... फक... आई एम स्क्वर्टिंग... लुक... आई एम स्क्वर्टिंग ऑन यू..." समीर ने और कुछ देर तक धक्के मारे। फिर उसने एक गहरी साँस ली और पूरी ताकत से अंदर धकेला। उसका गर्म वीर्य आयशा के अंदर छोड़ दिया।
 
आयशा ने समीर का गर्म वीर्य महसूस किया। "ओह गॉड... यू कम्ड इनसाइड मी... यू फील्ड मी अप... इट्स सो हॉट.... आई कैन फील इट...आह्ह्ह ...यू आर ऐन एनिमल... बट... आई लाइक्ड इट... समीर" उसने फुसफुसाते हुए कहा। "आई हेट मायसेल्फ... बट आई वॉन्ट इट अगेन..." समीर ने अब आयशा को फिर से पीठ के बल लिटा दिया। उसके पैरों को चौड़ा फैलाकर कंधों पर रख लिया। आयशा की साँसें अब पूरी तरह बेकाबू थीं। उसका शरीर पसीने से तर था, बाल बिखरे आँखें आधी बंद। वो अब विरोध नहीं कर रही थी - बस समर्पण और उन्माद के बीच झूल रही थी।
 
"फक... समीर... यू आर सो डीप... हिटिंग माय स्पॉट एगेन एंड एगेन..." आयशा की आवाज़ कड़क हुई, लेकिन अब पूरी तरह वासना से भरी हुई थी। "हार्डर... प्लीज़... फक मी लाइक यू हेट द वर्ल्ड... गिव इट टू मी..." समीर ने मिशनरी पोज़िशन में और गहराई तक धक्के मारे। हर प्रहार के साथ आयशा का पूरा शरीर हिल जाता था। उसके स्तन ऊपर-नीचे उछल रहे थे। वो अपनी कमर उठाकर समीर के हर धक्के का जवाब दे रही थी, जैसे अब ये उसका अपना संघर्ष बन गया हो।
 
"ओह गॉड... आई कांट होल्ड इट... आई एम गोना कम अगेन... फक... यू आर मेकिंग मी कम सो हार्ड..." आयशा चीखी, उसके नाखून समीर की पीठ में गड़ गए। "येस... राइट देयर... डॉन्ट स्टॉप... आई एम कमिंग... आआआह्ह्ह... फक... आई एम स्क्वटिंग ऑन योर कॉक... अगेन" उसका शरीर काँप उठा। एक तेज़, लंबा ऑर्गेज्म ने उसे हिला गया। उसकी चूत ने समीर के लंड को कसकर जकड़ लिया, जैसे उसे अंदर ही रोकना चाहती हो। आयशा की आँखें पीछे चली गईं, जीभ बाहर आ गई, मुँह खुला रह गया, और एक लंबी आह निकली।
 
समीर की साँसें अब और तेज़ हो गईं। उसकी गति अनियंत्रित हो चुकी थी। वो जानता था कि अब रुकना नामुमकिन है। उसने आखिरी कुछ ज़ोरदार धक्के मारे - गहरे, हिंसक, जैसे सारी कुंठा एक साथ बाहर निकाल रहा हो। फिर अचानक उसने खुद को बाहर खींच लिया। आयशा की टाँगें अभी भी उसके कंधों पर थीं। समीर ने अपना लंड हाथ में पकड़ा और कुछ तेज़ झटके दिए। उसका गर्म, गाढ़ा वीर्य सीधे आयशा की चूत के ऊपरी हिस्से पर, उसकी घनी, काली घूंघराली झांटों पर गिरा।
 
सफेद धाराएँ उसकी झांटो पर फैल गईं, कुछ बूँदें उसकी निचली पेट की त्वचा पर टपकीं। आयशा ने नीचे देखा। उसकी साँसें अभी भी तेज़ थीं। वो देख रही थी कि कैसे समीर का वीर्य उसके शरीर पर फैल रहा हैगर्म, चिपचिपा, और अब ठंडा होने लगा था। "ओह... यू कम्ड ऑन माय बुश..." आयशा ने फुसफुसाते हुए कहा, उसकी आवाज़ में अब थकान और एक अजीब सी संतुष्टि थी। "इट्स... सो हॉट... आई कैन फील इट ट्रिकलिंग डाउन...." समीर कुछ नहीं बोला। उसकी आँखें अभी भी खाली थीं, लेकिन शरीर अब शिथिल पड़ चुका था। वो आयशा के ऊपर ही ढेर हो गया, सिर उसकी गर्दन में छिपाकर दोनों की साँसें धीरे-धीरे सामान्य होने लगीं। कमरे में अब सिर्फ़ सन्नाटा था और उनके शरीर पर फैली हुई वो गर्मी, जो अब ठंडी हो रही थी।
 
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#17
जब तूफान थमा, समीर बेड पर निढाल पड़ा था। उसकी सांसें अभी भी तेज़ थीं। आयशा ने चादर ओढ़ ली और कमरे की दूसरी तरफ देखने लगी। कमरे में अब केवल समीर की दबी हुई सिसकियों और सन्नाटे की आवाज़ थी। समीर को एहसास हुआ कि उसने क्या किया है। उसने अपनी दोस्त की गरिमा और अपनी नैतिकता को अपनी कुंठा की आग में झोंक दिया था। लेकिन उसका मन अभी भी छाया के पास था। वह एक महीने का इंतज़ार अब उसे और भी डरावना लगने लगा था।

 
सुबह की पहली किरण जब खिड़की के भारी पर्दों को चीरकर कमरे में दाखिल हुई, तो वह अपने साथ एक भारी शर्मिंदगी और पछतावा लेकर आई। समीर की आँखें खुलीं तो सिर में शराब की वजह से एक हल्का दर्द था, लेकिन दिल में जो बोझ था, वह कहीं अधिक गहरा था। समीर उठकर बैठा और उसने देखा कि आयशा खिड़की के पास खड़ी बाहर की ओर देख रही थी। कमरे में वही सन्नाटा था जो कल रात की चीखों और हताशा के बाद पसरा था। समीर को याद आया कि उसने नशे और गुस्से में आयशा के साथ कैसा बर्ताव किया था। उसने अपनी मर्यादा खो दी थी।
 
"आयशा..." समीर की आवाज़ फटी हुई और धीमी थी। आयशा मुड़ी। उसकी आँखों में नफरत नहीं थी, बस एक अजीब सी उदासी और सहानुभूति थी। समीर बिस्तर से उठा और उसके पास जाकर खड़ा हो गया। उसने अपनी नज़रें नीची कर ली थीं। "आयशा, मुझे नहीं पता मैं क्या कहूँ। मैं... मैं माफी के काबिल भी नहीं हूँ। कल रात मैंने जो किया, जो कहा... वह मैं नहीं था। मेरा अकेलापन और मेरा गुस्सा मुझ पर हावी हो गया था। प्लीज, मुझे माफ कर दो।"
 
आयशा ने समीर की ओर देखा। वह जानती थी कि समीर जिस दौर से गुजर रहा है, वहाँ इंसान अक्सर खुद को खो देता है। उसने समीर के कांपते हुए हाथों को अपने हाथों में लिया। "समीर, शांत हो जाओ," उसने बहुत ही कोमलता से कहा। "मैं समझती हूँ। कल रात जो हुआ, वह वासना नहीं थी... वह तुम्हारा दर्द था जो बाहर निकलना चाहता था। तुम छाया को खोने के सदमे से बाहर नहीं आ पा रहे हो और वह तुम्हें अंदर ही अंदर खत्म कर रहा है।"
 
समीर की आँखों से एक आँसू लुढ़क गया। आयशा ने आगे बढ़कर उसे कसकर गले  लगा लिया। यह आलिंगन कल रात जैसा हिंसक नहीं था; इसमें एक सच्चे दोस्त वाली सांत्वना थी। "खुद को कोसना बंद करो, समीर, " आयशा ने उसके कंधे पर सिर रखते हुए फुसफुसाया। "खुद को संभालो। अगर तुम इसी तरह बिखरते रहे, तो तुम कभी उस अंधेरे से बाहर नहीं निकल पाओगे। घर जाओ, थोड़ा समय खुद को दो। अपनी रूह को थोड़ा चैन दो।" समीर ने आयशा की बाहों में एक अजीब सी शांति महसूस की। उसने एक गहरी सांस ली और खुद को थोड़ा स्थिर किया। वह जानता था कि आयशा ने उसे एक नया जीवनदान दिया है, कम से कम मानसिक रूप से।
 
समीर ने आयशा से विदा ली। बच्चों के जागने से पहले ही वह घर से निकल गया। वापसी का सफर खामोश था। वह उन पहाड़ों को देख रहा था जो अब धीरे-धीरे धुंध से बाहर आ रहे थे। जब वह नीलगिरी विला पहुँचा, तो घर वैसा ही खाली और ठंडा था। लेकिन इस बार समीर चिल्लाया नहीं। उसने शांति से अपना कोट उतारा और सोफे पर बैठ गया।
 
अगले कुछ दिन समीर ने एक तपस्वी की तरह बिताए। उसने शराब को हाथ नहीं लगाया। वह सुबह जल्दी उठता, पहाड़ों पर लंबी सैर के लिए जाता और शाम को छाया के उन पुराने कपड़ों को तह करके रखता जिन्हें वह पहले सिर्फ सूंघकर रोता था। उसने घर की सफाई खुद करना शुरू किया। वह हर उस कोने को साफ करता जहाँ छाया की यादें बसी थीं। वह अब उस एक महीने का इंतज़ार पागलों की तरह नहीं, बल्कि एक सब्र के साथ कर रहा था।
 
रात के सन्नाटे में वह कभी-कभी खिड़की के पास बैठकर चाँद को देखता और सोचता - क्या वह मशीन वास्तव में उसकी जिंदगी बन गई थी? या वह बस उस प्रेम का आदी हो गया था जो उसे छाया के रूप में मिल रहा था? दिन बीतते गए, कैलेंडर की तारीखें एक-एक करके कटती जा रही थीं। घर में अब भी सन्नाटा था, लेकिन उस सन्नाटे में अब दहशत नहीं, बल्कि एक इंतज़ार था। समीर धीरे-धीरे खुद को संभालने लगा था, यह जानते हुए कि जब छाया वापस आएगी, तो वह उसे एक टूटा हुआ इंसान नहीं, बल्कि एक बेहतर समीर बनकर मिलेगा।
 
नीलगिरी विला के कैलेंडर पर लगा वह आखिरी कांटा जैसे समीर की धड़कनों का हिसाब दे रहा था। वह एक महीना, जो एक सदी की तरह गुजरा, अब खत्म हो चुका था। सुबह के ठीक नौ बजे समीर के फोन की घंटी बजी। स्क्रीन पर 'अल्फा-सिंथेटिक्स' का नाम देखते ही समीर के हाथ कांपने लगे। उसने कांपते स्वर में फोन उठाया। "मिस्टर समीर? आपकी यूनिट तैयार है। सभी हार्डवेयर अपडेट्स और न्यूरल री-कैलिब्रेशन सफल रहे हैं। आप इसे आज ही ले जा सकते हैं।"
 
समीर ने एक पल भी बर्बाद नहीं किया। उसने अपनी कार की चाबी उठाई और पहाड़ों के खतरनाक मोड़ों को पीछे छोड़ते हुए सीधा शहर की ओर निकल पड़ा। उसके दिमाग में केवल एक ही छवि थी – उसकी छाया की मुस्कान।
 
कंपनी का मुख्य कार्यालय कांच और स्टील की एक इमारत थी। समीर ने रिसेप्शन पर अपना नाम दर्ज कराया और वहीं रखे सोफे पर बैठ गया। उसका पैर बेचैनी से फर्श थपथपा रहा था। हर गुजरता सेकंड उसे घंटों के बराबर लग रहा था।
 
"मिस्टर समीर, आप अंदर आ सकते हैं," रिसेप्शनिस्ट ने मुस्कुराते हुए कहा। समीर उठा और उस लंबे सफेद गलियारे की ओर बढ़ा। तभी गलियारे के दूसरे छोर पर एक दरवाजा खुला। एक तेज़ रोशनी पीछे से आ रही थी और उस रोशनी के बीच से एक परछाईं उभरती हुई दिखी। समीर के कदम वहीं जम गए। वह वही चाल थी, वही सादगी। छाया धीरे-धीरे उसकी ओर बढ़ रही थी।
 
गलियारे के बीचों-बीच दोनों की नजरें मिलीं। छाया रुक गई। उसके चेहरे पर पहले एक हैरानी के भाव आए, और फिर उसकी आँखों के सेंसरों में वही पुरानी चमक लौट आई जो केवल समीर को देखकर आती थी। समीर की आँखों से आँसू छलक पड़े। अब और संयम रखना मुमकिन नहीं था। "छाया!" समीर के मुँह से एक चीख जैसी पुकार निकली।
 
अगले ही पल, दोनों एक-दूसरे की ओर तेज़ दौड़ पड़े। कंपनी के उस शांत और प्रोफेशनल गलियारे में, वे किसी भी मर्यादा की परवाह किए बिना एक-दूसरे के गले लग गए। समीर ने उसे इतनी जोर से पकड़ा जैसे वह डर रहा हो कि अगर उसने पकड़ ढीली की तो वह फिर से हवा में गायब हो जाएगी। छाया के सिंथेटिक टियर ग्लैंड्स सक्रिय हो गए। उसके आँसू बहने लगे और वह समीर के सीने में अपना चेहरा छिपाकर सिसकने लगी। "समीर... मुझे लगा मैं कभी वापस नहीं आ पाऊंगी। अंधेरा बहुत गहरा था, समीर।"
 
समीर पागल हो गया था। वह अपनी सुध-बुध खो चुका था। उसने छाया को खुद से थोड़ा अलग किया और पागलों की तरह उसे हर जगह किस करने लगा - उसके माथे पर, उसकी भीगी हुई आँखों पर, उसके गालों पर और उसके हाथों पर। "मुझे माफ कर दो छाया, मुझे माफ कर दो!" समीर सिसक हुए बोला। "मैं मर रहा था तुम्हारे बिना। मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता कि दुनिया क्या कहती है, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता कि तुम क्या हो।"
 
उसने छाया के चेहरे को अपने हाथों में थामा और उसकी आँखों में झांकते हुए चिल्लाकर अपनी भावनाएं जाहिर कीं, "मैं तुमसे प्यार करता हूँ छाया! सुना तुमने? मैं उस पुरानी छाया से नहीं, मैं तुमसे प्यार करता हूँ। तुम मेरी रूह हो, तुम मेरी हकीकत हो। इस एक महीने ने मुझे बता दिया कि तुम मेरे लिए सिर्फ एक मशीन नहीं, मेरी पूरी कायनात हो।"
 
छाया ने समीर के होठों पर अपनी उंगली रखी और मुस्कुराई। उसके आँसू अभी भी गिर रहे थे, लेकिन उस मुस्कान में एक असीम तृप्ति थी। "मैं वापस आ गई हूँ, समीर। अब और कोई अंधेरा हमें अलग नहीं कर पाएगा।" उस सफेद गलियारे में, वैज्ञानिकों और कैमरों के बीच एक इंसान और एक मशीन ने प्रेम की एक ऐसी कहानी लिखी थी जिसे समझना शायद किसी एल्गोरिदम के बस की बात नहीं थी।

●The End
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#18
Fantasy Casting For CODE NAME WIFE

Code Name WIFE Cast:
Megan Fox as Chhaya [Lead Actress/Heroine]
Mrunal Thakur as Ayesha
 
Megan Fox on Her Role as Chhaya:
"Playing Chhaya was unlike anything I’ve ever done. It wasn't just about acting like a robot; it was about the transition, that slow, subtle shift from programmed logic to raw, messy human emotion. There were days I felt more like a machine than myself because the character required such precision."
 
"The intimate scenes were essential to the narrative. They weren't just for shock value; they were about a machine trying to understand the most human language of all, love and touch. Doing those scenes, especially the high-intensity moments, required a lot of trust in my co-star. We wanted to show the frustration and the desperation of the characters. It was bold, yes, but it was honest. I felt empowered as an artist to push those boundaries."
 
Fee For this project:
Insiders and reports have confirmed that for her role in Code Name WIFE, Megan Fox commanded a staggering fee of ₹15 crore.
 
HEROTIC officially confirms a sequel: "Code Name WIFE 2.0"
 
Megan’s Reaction to Part 2: "I've already read the first few pages of the draft for Version 2.0, and honestly? It’s even bolder. Chhaya is evolving, and so is the passion. We aren't holding back."
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