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Incest Dhurandhar
#1
Tongue 
Hello दोस्तों... Xossipy पर ये मेरी दूसरी कहानी है। इससे पहले मैंने एक कहानी और शेयर की थी जो मेरी नहीं थी लेकिन मैंने कहीं से कॉपी करके पोस्ट की थी। अब जो कहानी मैं आपके साथ शेयर करने जा रहा हूं ये मेरी अपनी और असली कहानी है जिसे मैंने सिर्फ लिखा नहीं बल्कि जिया है। ये कहानी लिखने के तीन मुख्य वजह हैं:-

पहला ये कि यहाँ पर ज्यादातर कहानियाँ शुरू तो होती हैं लेकिन सही तरीके से खत्म नहीं होती। दूसरा ये कि मुझे रोमन स्क्रिप्ट में लिखी कहानियाँ पसंद नहीं हैं इसलिए मैं अपनी ये कहानी देवनागरी स्क्रिप्ट में लिख रहा हूं। तीसरा ये कि मुझे लगता है यहाँ पर लिखी ज्यादातर कहानियाँ Fake हैं जो पढ़ने से ही पता चल जाती हैं। ऐसे में जो लोग मेरी तरह Mom Incest हैं उन्हें एक सच्ची कहानी पढ़ने को मिले मैं यही चाहता हूं।

कहानी का नाम मैंने धुरंधर रखा है....क्यूंकि भाई अपनी सगी मम्मी को चोदने वाला धुरंधर ही होता है...जो भी अपनी माँ को चोदना चाहते हैं मगर चोद नहीं पा रहे वो मेरी बात समझ सकते हैं| 

इस कहानी के पार्ट्स आपको नियमित मिलेंगे बस बदले में आपका सपोर्ट और कमेंट्स मिलते रहे। शुरुआत में कहानी आपको थोड़ा बोरिंग लग सकती है क्योंकि वहां कहानी बढ़ेगी... लेकिन जैसे-जैसे बढ़ती जाएगी आपको मजा आएगा। तो अब आते हैं कहानी पर।

Chapter 1 : Introduction

मेरा नाम अजय है और मैं U.P. के सुलतानपुर का रहने वाला हूँ। मेरे परिवार में मेरे पापा, मम्मी और एक छोटा भाई है। पापा एक सरकारी नौकरी में हैं, मैं अभी एक सॉफ्टवेयर कंपनी में काम करता हूँ, छोटा भाई इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा है और मम्मी एक हाउसवाइफ है। मम्मी की उम्र अभी 46 साल है और मैं अभी 26 का हूँ। इस कहानी की शुरुआत आज से 4 साल पहले हुई थी यानी 2022 में जब मम्मी 42 की और मैं 22 का था। कहते हैं एक मां को अपना बेटा और एक बेटे को अपनी मां हमेशा प्यारे लगते हैं चाहे फिर वो दुनिया को देखने में कैसे भी लगे। और यहाँ तो मेरी मम्मी सच में बहुत सुंदर है। 5 फीट 4 इंच का कद, दूध में जैसे थोड़ा सा रूह आफ़ज़ा डाल दिया हो ऐसा रंग और गज़ब का फिगर। सबसे अच्छी बात यह है कि उनके बूब्स का साइज 38-D होने के बाद भी इस उम्र में भी वो एकदम गोल और सुडोल हैं और गांड का तो कहना ही क्या।

Real Pic of Mummy
 
मुझे याद नहीं मुझमें मम्मी को लेकर फीलिंग्स कब से आईं लेकिन इतना पता है जब से होश संभाला है तब से मैं मम्मी की तरफ अट्रैक्टेड हूँ। शायद पहली मुट्ठी भी मम्मी को सोच के ही मारी थी। मेरी हमेशा से 2 Fantasies थीं| पहली तो मम्मी की चूत मारना और दूसरा मम्मी की चौड़ी गांड मारना|

2019 में इंजीनियरिंग करने के बाद मेरी नौकरी लग गई थी और मैं गुड़गांव चला गया था पर वहाँ भी मम्मी को लेकर मेरा अट्रैक्शन खत्म नहीं हुआ। हमेशा सोचता था कि काश एक बार मम्मी को चोद पाऊं। लेकिन ये संभव नहीं हो पा रहा था तो इंटरनेट पर मां और बेटे की सेक्स स्टोरीज़ पढ़के या वीडियो देख के ही काम चल रहा था। 

2020 में हालात बदले और कोविड के वजह से मैं वर्क फ्रॉम होम लेकर घर आ गया। यहाँ मम्मी को सामने देखकर और हालात खराब होती थी मेरी लेकिन मैं कुछ कर नहीं सकता था। फिर आया 2022, जहाँ से सब बदलना शुरू हुआ। अप्रैल 2021 में पापा का ट्रांसफर दूसरे शहर में हो चुका था तो वो वहीं पे रूम लेकर रहने लगे थे। वहाँ से उनका घर आना तभी हो पाता था जब 2-3 दिन की छुट्टी एक साथ मिल पाती थी। घर में सिर्फ मैं, मेरा छोटा भाई और मम्मी थे। जुलाई 2022 में भाई का एडमिशन इंजीनियरिंग में हो गया और वो बैंगलोर चला गया। मेरा सीन ये था कि मेरा WFH (वर्क फ्रॉम होम) अभी भी कंटिन्यू था। महीने में 3-4 दिन के लिए गुड़गांव चला जाता था ऑफिस के लिए और फिर वापस घर। तो इस तरह से घर में अब हम 2 लोग ही बचे थे। ये मेरे लिए एक मौका था लेकिन मुझे समझ नहीं आ रहा था कि क्या और कैसे करूं क्योंकि मैंने उन्हें हमेशा उनके घरेलू अवतार में ही देखा था। घर में रहने वाली, पूजा-पाठ करने वाली मम्मी को उनके बेटे तो क्या किसी भी दूसरे आदमी के साथ सेक्स के लिए राजी कर पाना लगभग impossible था।

Chapter 2 : The Plan

जैसा कि मैं पहले ही बता चुका हूँ कि मैं माँ-बेटा सेक्स स्टोरीज़ पढ़ा करता था, तो मैंने कहीं एक सेक्स स्टोरी पढ़ी थी जिसमें एक बेटा फेसबुक की मदद से अपनी माँ के साथ सेक्स करता है। मुझे लगा कि शायद इस कहानी से आइडिया लिया जाए तो काम बन सकता है क्योंकि मेरी मम्मी भी फेसबुक और व्हाट्सएप वगैरह यूज़ करती थीं। मेरे पास एक एडवांटेज ये थी कि मम्मी बहुत Tech savvy नहीं हैं। उनको जब मैंने स्मार्टफोन दिया था तो उनकी जीमेल आईडी, यूट्यूब, फेसबुक, व्हाट्सएप सब अकाउंट मैंने ही बना के दिए थे और मुझे स्क्रीन लॉक और पासवर्ड सब पता थे यहाँ तक कि उनके फोन में मैंने अपना फिंगरप्रिंट भी लगा रखा था। 

मैंने अपने प्लान पर काम करना शुरू किया मगर मन में ढेरों डाउट्स भी थे और साथ ही ये लालच भी था कि अगर प्लान सफल हो गया तो धरती पर ही जन्नत मिल जाएगी।

तो मैंने सोचा कि एक फेक फेसबुक प्रोफाइल बनाऊँ एक ऐसी लेडी के नाम से जो दिखने में आलमोस्ट मम्मी की ही उम्र की हो और उसकी फैमिली भी हमारी फैमिली जैसी हो जिससे कि मम्मी उसके साथ कनेक्ट कर पाए। फिर मैंने इंटरनेट पर बहुत सी फोटोज़, प्रोफाइल्स सर्च की जहाँ से मुझे इस फेक प्रोफाइल को असली जैसा फील कराने के लिए फोटोज़ मिल जाएँ। बड़ी मेहनत के बाद एक औरत की फोटोज़ मुझे मिली जो आलमोस्ट मम्मी की एज की थी और उसके कुछ फैमिली फोटोज़ भी थे। फिर मैंने इन फोटोज़ को यूज़ करके एक अच्छी सी फेसबुक प्रोफाइल बनाई और कुछ पोस्ट्स भी अपलोड कर दिए।
 
अब प्रॉब्लम ये थी कि इस फेक फेसबुक प्रोफाइल को मम्मी से इंट्रोड्यूस कैसे करूँ। मुझे कोई कॉमन लिंक चाहिए था। फिर मुझे ध्यान आया कि मम्मी ने एक सत्संग ग्रुप जॉइन कर रखा था। इस ग्रुप की कई ब्रांचेज़ हैं मेरे आस-पास के जिलों में तो मैंने डिसाइड किया कि इसी का सहारा लिया जाए। यह सोच के मैंने मम्मी को अंजलि नाम की इस फेक फेसबुक आईडी से फ्रेंड रिक्वेस्ट भेज दी।
 
एक दिन हो गया, दो दिन हो गए…धीरे-धीरे करके 5 दिन बीत गए लेकिन फ्रेंड रिक्वेस्ट एक्सेप्ट नहीं हुई। मुझे लगा मेरा प्लान तो पहले ही स्टेज में फेल हो गया।

फिर मैंने सोचा कि अगर मम्मी रिक्वेस्ट नहीं एक्सेप्ट कर रही हैं तो मुझे खुद ही उनके फोन से रिक्वेस्ट एक्सेप्ट कर देनी चाहिए। अगले दिन जैसे ही मम्मी नहाने के लिए बाथरूम में गई, मैंने उनका फोन अनलॉक किया और उनकी फेसबुक आईडी ओपन करके अंजलि की फ्रेंड रिक्वेस्ट एक्सेप्ट कर दी और उन्हें जैसा उनके सत्संग ग्रुप में हेल्लो बोला जाता था का एक मैसेज भेज दिया।  

लेकिन इससे भी कुछ खास फायदा नहीं हुआ… 2 दिन तक वो मैसेज सीन ही नहीं हुआ। मुझे फिर नाउम्मीदी होने लगी। ऐसा लग रहा था कि किस्मत मेरे साथ नहीं है। फिर मैंने एक लास्ट ट्राई करने की सोची कि अगर इससे बात नहीं बनी तो किसी और आइडिया पर ट्राई करेंगे। तो उस दिन जब मम्मी किचन में काम कर रही थीं तो मैंने किसी बहाने से उनका फोन उनसे मांगा… मम्मी ने कहा, "देख लो, चार्जिंग में लगा है।" तो मैंने रूम में जाकर फोन उठाया और 2 मिनट बाद उनसे कहा: - 
मैं:- "देखो मम्मी, इसमें किसी अंजलि का मैसेज आया है। शायद आपके सत्संग ग्रुप की कोई मेंबर है।" 
मम्मी:- "ठीक है। फ्री होकर देखती हूं।" 
मैं:- "इतने दिन तक मैसेज क्यों अनसीन छोड़ देती हो?" 
मम्मी:- "अरे बेटा! काम के चक्कर में ध्यान नहीं गया होगा। आज फ्री होऊंगी तो बात कर लूंगी ना।"  

मम्मी का रोज का एक फिक्स शेड्यूल था… सुबह जल्दी उठना फिर झाड़ू पोछा करके नहाना धोना और पूजन करना। उसके बाद मम्मी रसोई के कामों में लग जाती थीं तो 1-1:30 बजे ही फ्री होती थीं। फिर दिन में आराम करके शाम समय सत्संग जाती थीं और वहां से वापसी करके फिर वही किचन के काम। 
तो उस दिन जब मम्मी 1 बजे के आस-पास फ्री हुईं तो उन्होंने मैसेंजर खोला और अंजलि को जवाब दिया। उस समय मैं अपने रूम में बैठा था और ऑफिस का काम होल्ड पर रख के बड़ी बेसब्री से मम्मी के मैसेज का इंतजार कर रहा था कि कब वो मेरी बनाई फेक आईडी पर मैसेज करेंगी। अचानक से मेरे लैपटॉप की स्क्रीन पर चैट विंडो में मम्मी का मैसेज फ्लैश हुआ। 
 
मम्मी:- "**** अंजलि जी!" 
अंजलि:- "**** सारिका जी! कैसी हैं आप?" (मम्मी का नाम सारिका है) 
मम्मी:- "जी मैं ठीक हूं। माफ कीजिए, मैंने आपको पहचाना नहीं।" 
अंजलि:- "जी मैं ***** सत्संग ग्रुप से जुड़ी हूं। आपकी प्रोफाइल देखी तो लगा कि शायद आप भी उसी से जुड़ी हैं। तभी आपको मैसेज किया।" 
मम्मी:- "मगर मैंने कभी आपको सत्संग में देखा नहीं।" 
अंजलि:- "मैं अमेठी (मेरे पड़ोस का जिला) से हूं और यहां के ग्रुप में जुड़ी हूं।"

इस तरह से दोनों में बातचीत की शुरुआत हो गई। शुरू में तो मैं ही उनसे ज्यादा से ज्यादा सवाल पूछता था लेकिन फिर धीरे-धीरे वो भी अपनी तरफ से बातें करने लगी। बातों-बातों में मैंने उनसे उनके परिवार के बारे में पूछा और उन्होंने भी मेरी फैमिली के बारे में पूछा तो मैंने कहा कि मेरी फैमिली में मेरे पति, एक बेटा और एक बेटी है। मैंने उन्हें बताया कि मेरे यानी की अंजलि के पति एक MNC में थे और काम के सिलसिले में अक्सर बाहर ही रहते थे और बेटी की शादी हो चुकी थी। घर में अक्सर सिर्फ मैं और मेरा बेटा ही रहते थे। 

Chapter 3 : The Game 

खैर इस तरह धीरे-धीरे बातें करते-करते 10-12 दिन हो गए अभी। अब हम लोगों की बातें परिवार और Personal life से जुड़ने लगी थीं। कभी-कभार हंसी-मजाक और डबल मीनिंग बातें भी हो जाती थीं। शुरुआत में तो मैं ही अपनी तरफ से ऐसी बातें करता था लेकिन कुछ दिनों के बाद मम्मी भी कोई नॉटी बात बोल देती थीं। कई बार मैं अपनी तरफ से मैसेज नहीं करता तो मम्मी का ही मैसेज आ जाता। इससे मुझे आइडिया लग गया था कि अब मम्मी की अंजलि से अच्छी दोस्ती हो गई है और अब मेरा मन था कि बातों को दूसरी तरफ ले जाया जाए। क्योंकि सास-नंद की बातें करने के लिए तो मैंने आईडी नहीं बनवाई थी। 

लगभग 15 दिन बाद मैंने तय किया कि अब प्लान के अगले स्टेप पर काम किया जाए। तो उस दिन की चैट में मैंने कुछ देर इधर-उधर की बातें करने के बाद कहा – 
 
अंजलि :- सारिका यार एक बात बताओ 
मम्मी :- क्या अंजू (मम्मी भी मुझे अंजू बुलाने लगी थीं) 
अंजलि :- तुम्हारे पति इतने दिनों तक बाहर रहते हैं….कैसे मैनेज करती हो
मम्मी :- मैनेज करने जैसा क्या है….मेरा बेटा है वो ध्यान रखता है मेरा भी और घर का भी। सामान वगैरह जो भी लाना होता है वो उसी से मंगवा लेती हूं। 
अंजलि :- अरे नहीं यार मैं वो नहीं कह रही। मैं दूसरे वाले मैनेज की बात कर रही हूँ ? 
मम्मी :- ओह्ह Big Grin
अंजलि :- हाँ 
मम्मी :- पति तो तुम्हारे भी बाहर रहते हैं…ये सवाल तो मैं भी तुमसे पूछ सकती हूं। 
अंजलि :- नहीं सवाल पहले मैंने किया है…तो पहले आप बताओ 
मम्मी :- अच्छा 
अंजलि :- हाँ 
मम्मी :- यार सच कहूं तो मैनेज नहीं हो पा रहा है…बहुत मन करता है 
अंजलि :- हाँ मुझे लगा ही था 
मम्मी :- अच्छा! तुम्हें कैसे लगा था
अंजलि :- यार मैं भी एक औरत हूँ तो औरत के मन की बात और शरीर की डिमांड तो समझ ही सकती हूँ। 
मम्मी :- हाँ यार 
अंजलि :- और तुम इतनी सुंदर और सेक्‍सी भी हो तो जाहिर ही है 
मम्मी :- अच्छा जी ? 
अंजलि :- तो बताया नहीं आपने 
मम्मी :- क्या 
अंजलि :- यही कि कैसे मैनेज करती हो 
मम्मी :- बताया तो कि नहीं मैनेज हो पा रहा है। यही सोच के सत्संग जॉइन किया था कि माइंड कुछ डाइवर्ट हो लेकिन कोई फायदा नहीं हो रहा है। एक तो इनकी उम्र भी हो रही है तो पहले जैसी बात नहीं रही और उपर से आते भी बहुत कम हैं घर पे 
अंजलि :- अच्छा 
मम्मी:- हाँ 
अंजलि :- तो कोई BF बना लो या कोई पुराना लवर हो कॉलेज टाइम का 
मम्मी :- कॉलेज में ये सब कर पाने का टाइम ही नहीं मिला.. फर्स्ट ईयर में ही थी कि इनसे शादी हो गई…ग्रैजुएशन भी फिर यही से कंप्लीट किया। और अब इस उम्र में कहां BF बना लूं। किसी को पता चल गया तो बदनामी हो जाएगी। 
अंजलि :- हाँ यार ये तो सही कहा तुमने 
मम्मी :- अच्छा अब तुम बताओ 
अंजलि :- क्या
मम्मी :- यही कि कैसे मैनेज करती हो तुम? तुम्हारे भी तो same problem है | 
अब ये वो टाइम था जहाँ से आर या पार का फैसला होना था। अब मुझे मम्मी को आइडिया देना था कि वो अपने बेटे के साथ सेक्स करे और ये सोच के मेरी धड़कनें बहुत बढ़ी हुई थीं। क्योंकि किसी के लिए भी ये जानना बहुत बड़ी बात होती तो मैंने तय किया कि एकदम से नहीं बताऊंगा। इसीलिए मैंने कुछ ऐसे रिप्लाई किया। 
अंजलि :- नहीं यार मैं नहीं बता सकती। 
मम्मी :- क्यों
अंजलि :- नहीं यार थोड़ा awkward होगा तुम्हारे लिए…पता नहीं तुम्हें कैसा लगे सुनकर। फिर तुम जज करोगी 
मम्मी :- अरे ऐसा भी क्या है…किसी पड़ोसी का पुराने आशिक को अपने हुस्न के जाल में फसा लिया होगा :
शर्माओ नहीं…बताओ तो 
अब आगे टाइप करने की मेरी हिम्मत नहीं पड़ रही थी…धड़कनें बेकाबू हो रही थीं और मुंह सूखने लगा था तो मैं झट से ऑफलाइन हो गया।
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#2
Chapter 4 : Surprise or Shock

ऑफलाइन होने के बाद भी मुझे घबराहट लग रही थी कि अगर मैंने ये बोला तो क्या होगा। ये कुछ-कुछ वैसा ही था जैसे जब आप किसी लड़की को प्रपोज़ करने का मन बना लेते हो लेकिन करने के पहले डर लगने लगता है। काफी देर सोच-विचार करने के बाद मैंने डिसाइड किया कि ये करना तो है ही…बरसों की ख्वाहिश पूरी करनी है तो ये करना ही होगा लेकिन खुद के डर को कंट्रोल करने के लिए मैंने सोचा कि कल बताऊंगी अब। फिर अगले दिन मैंने मम्मी को मैसेज नहीं किया तो मम्मी का ही मैसेज आया – 

मम्मी :- यार अंजू ये क्या बात हुई। तुमने मुझसे तो पूछ लिया लेकिन मुझे अपनी बात नहीं बताई। 
अंजलि :- रहने दो यार…मुझे बताते संकोच हो रहा है। 
मम्मी :- अरे हम दोनों तो दोस्त हो गए हैं तो इसमें कैसा संकोच। 
अंजलि :- आप जज तो नहीं करोगी। 
मम्मी :- नहीं यार दोस्ती में ये सब थोड़ी होता है। 
अंजलि :- पहले प्रॉमिस करो जज नहीं करोगी। 
मम्मी :- अच्छा बाबा ठीक है…प्रॉमिस। 
अंजलि :- मैं अपने बेटे की हेल्प से मैनेज करती हूं। 
मम्मी :- क्या मतलब? उससे कैसे? 
अंजलि :- यार मैं अपने बेटे के साथ ही रिलेशनशिप में हूं……सेक्सुअली। 
मम्मी :- हे भगवान! ये क्या बोल रही हो यार अंजू। 
अंजलि :- देखो तुमने प्रॉमिस किया था कि जज नहीं करोगी। 
मम्मी :- मैं जज नहीं कर रही लेकिन ये क्या कह रही हो….अपने बेटे के साथ ही सेक्स किया तुमने
अंजलि :- सिर्फ किया नहीं…अभी भी करती हूं। 
मम्मी :- हे भगवान! कितनी अजीब बात कह रही हो…मतलब अभी भी तुम बेटे के साथ..
अंजलि :- हां। 
मम्मी :- मुझे यकीन नहीं हो रहा। 
इसी पल के लिए मैंने एक दो तीन फोटो पहले से फोटोशॉप करके रखी हुई थी जिसमें वो प्रोफाइल वाली लेडी की फोटो के साथ एक लड़के की फोटो थी और वो दोनों किस कर रहे थे। देखने से ऐसा लग रहा था जैसे अंजलि ने खुद ही सेल्फी ली हो। 
अंजलि :- रुकीये मैं आपको फोटो भेजती हूं। 
और मैंने वो फोटो उन्हें भेज दी। 
मम्मी :- यार ये तो सच में तुम अपने बेटे के साथ किस कर रही हो। 
अंजलि :- मैं झूठ क्यों बोलूंगी तुमसे…और वो भी ऐसा। मैं सच में अपने बेटे के साथ सेक्सुअल रिलेशनशिप में हूं। 
मम्मी :- यार मुझे ये जानके बहुत अजीब लग रहा है। 
अंजलि :- आपने प्रॉमिस किया था कि जज नहीं करोगी। 
मम्मी :- यार जज नहीं कर रही लेकिन ये तो बहुत बड़ी बात है। 
मेरे लिए अभी तक प्लस पॉइंट यही था कि मम्मी गुस्सा नहीं हुई थीं और बात कर रही थीं अभी तक। फिर उन्होंने पूछा – 
मम्मी :- कब से कर रही हो तुम अपने बेटे के साथ
अंजलि :- यही कोई 3-4 साल हो गए। 
मम्मी :- और शुरू कैसे हुआ था ये सब
अंजलि :- क्या बताऊं…इसके papa तो घर पे रहते नहीं थे और बेटी भी अपनी ससुराल में रहती है तो घर में हम मां-बेटा ही रहते थे। तो बाहर के सब काम मैनेज करना, घर का राशन वगैरह लाना सब बेटा ही करता था…घर के कामों में भी मेरी हेल्प कर देता था। हम लोग काफी टाइम साथ ही स्पेंड करते थे तो एक-दूसरे से बहुत कंफर्टेबल भी हो गए थे। कभी-कभी आके प्यार से मुझे हग या किस भी कर लेता था वो। इस तरह से हम दोनों बहुत करीब आ गए थे। एक-दूसरे का टच करना धीरे-धीरे अच्छा लगने लगा था। फिर एक दिन हम लोग साथ में बैठे मूवी देख रहे थे तो उसमें एक सेक्सी सीन आया तो मैंने बेटे का तना लंड देखा और मेरा मन डोल गया…बहुत दिनों से मैंने कुछ किया भी नहीं था। उस दिन फिर बेटे को सोते टाइम गुड नाइट किस दी…और उसके बाद सब अपने आप होता चला गया। 
(ये सब कहानी भी मैंने किसी सेक्स स्टोरी से ही बनाई थी) 
मम्मी :- हे भगवान! फिर तुम्हें गिल्टी नहीं फील हुआ। 
अंजलि :- यार सच कहूं तो जब अगले दिन उठी तब तो फील हुआ कि ये क्या हो गया…उस दिन शुरू में तो हम लोग एक-दूसरे से आंखें चुरा रहे थे लेकिन जैसे-जैसे दिन बीता….ऐसा लगा कि हम दोनों ही सुबह का गिल्ट भूलने लगे और रात में फिर वही सब हुआ हम दोनों के बीच। 
मम्मी :- अच्छा। 
अंजलि :- हां..और फिर तो जैसे मुझे आदत ही हो गई है…जब तक उसके साथ सेक्स न करूं तो दिन अधूरा सा लगता है। घर का कोई कोना ऐसा नहीं है जहां हमने सेक्स न किया हो। 
मम्मी :- Hmm
अंजलि: "और पता है… ये नए लड़के सेक्स में इतनी नई-नई चीज़ें करते हैं… इतना मज़ा आता है कि जैसा इसके बाप के साथ आज तक नहीं आया।"
मम्मी: "अच्छा… जैसे कि क्या?"
अंजलि: "अच्छा, आप बताओ आपके पति आपके साथ सेक्स कैसे करते हैं?"
मम्मी: "कैसे क्या, जैसे किया जाता है वैसे ही करते हैं।"
अंजलि: "नहीं, मतलब प्रोसेस बताओ… कैसे स्टार्ट करते हैं?"
मम्मी: "वही… 2-4 किस गालों पे की और फिर कपड़े ऊपर या नीचे खिसका के हो जाता है।"
अंजलि: "यानी आपने कभी पूरा नंगे होकर सेक्स नहीं किया?"
ये सब बातें मम्मी से कहते हुए मुझे ऐसा फील हो रहा था जैसे मेरी नसों में सनसनी हो रही हो… धड़कन एकदम बढ़ी हुई थी और घबराहट से हाथ काँप रहे थे। फिर मम्मी ने रिप्लाई किया—
मम्मी: "नहीं।"
 अंजलि: "आपके हसबैंड ने कभी आपको नीचे किस किया है या चटा है?"
मम्मी: "नीचे कहाँ?"
अंजलि: "चूत पे।"
मम्मी: "छि! ऐसे कौन करता है। गंदा होता है वहाँ।"
अंजलि: "यार तुम्हें पता नहीं तुम क्या मिस कर रही हो। मेरा बेटा तो मुझे वहाँ बहुत अच्छे से किस करता है… लिक (lick) करता है… इतना मज़ा आता है कि क्या बताऊँ।"
मम्मी: "अच्छा?"
अंजलि: "हाँ यार। जब वो मेरी चूत में अपनी जीभ डाल के चाटता है और फिर चूसता है… एकदम जन्नत जैसा फील होता है।"
मम्मी: "हूँ..."
फिर ऐसे ही कुछ बातों के बाद मम्मी ऑफलाइन हो गई थीं। अभी तक की बातों से मुझे ऐसा लग रहा था कि मम्मी को इंटरेस्ट तो आ रहा है सेक्स की बातें सुनने में, लेकिन वो अभी इस फैक्ट के साथ कंफर्टेबल नहीं थीं कि कोई माँ अपने बेटे के साथ भी सेक्स कर सकती है। इससे मुझे थोड़ी मायूसी तो हुई, पर अचानक एक नया प्लान मेरे दिमाग में आया। मुझे मम्मी की जीमेल आईडी (Gmail ID) और उसका पासवर्ड पता था।
मैंने उसे अपने लैपटॉप में यूट्यूब (YouTube) पर लॉगिन किया और उनकी आईडी से कई सारे 'माँ-बेटा सेक्स स्टोरी' के ऑडियो वाले वीडियो प्ले किए। मुझे उम्मीद थी कि इससे उनके ऐप में ऐसे वीडियो सजेशन (Suggestions) में आने लगेंगे। अगर मम्मी ने ऐसे 2-3 वीडियो देख लिए, तो शायद कुछ काम बने। मैंने 2-4 दिन तक यही किया और मैं उनकी हिस्ट्री (History) भी चेक करता जाता था कि क्या उन्होंने ऐसा कोई वीडियो देखा है या नहीं। इस बीच हमारी चैट (Chat) भी नॉर्मली चलती रही और उस बारे में कुछ दिन बात नहीं हुई।

Chapter 5 : Curiosity

दोस्तों, अपनी ही माँ को पाना कोई आसान काम नहीं है। बड़ी मेहनत, सब्र और तपस्या लगती है, लेकिन इसका फल एकदम स्वर्ग जैसा होता है। फिलहाल मेरी भी तपस्या चल रही थी। लगभग 7 दिनों के बाद पहली बार मुझे उनकी हिस्ट्री में एक वीडियो ऐसा दिखा जो मैंने नहीं देखा था, बल्कि उन्होंने खुद देखा था। ये देखकर मुझे इतनी एक्साइटमेंट (Excitement) हुई कि बता नहीं सकता। फिर अगले दिन मैंने चेक किया तो ऐसे 2-3 वीडियो उन्होंने देख रखे थे। अब मुझे लगने लगा था कि शायद मंज़िल मिल जाएगी और जल्द ही मेरी माँ की रसीली चूत में मेरा लंड होगा।

 
 
इस सब के दौरान माँ और अंजली की चैट रोज़ हो ही रही थी। वैसे ही घर परिवार की बातें, हंसी-मजाक और 2-4 नॉटी बातें जो कि mostly मेरी ही तरफ से होती थी। आखिरकार एक दिन मम्मी ने कुछ देर की चैट के बाद मुझसे यानी अंजली से कहा -
मम्मी :- अंजू यार मैं बड़े दिनों से एक बात सोच रही थी.. पूछू?
अंजली :- हाँ मेरी जान पूछो ना ?
मम्मी :- जो तुमने उस दिन बताया था कि तुम अपने बेटे के साथ सेक्स करती हो… तुमने कभी इसके reasons सोचे कि ये क्यों और कैसे हुआ? I mean तुम किसी और के साथ यानी बाहरवाले के साथ भी तो ये सब कर सकती थी तो बेटा ही क्यों?
ये सवाल सुनके मुझे लगा कि शायद मम्मी के मन में भी thoughts आने लगे हैं अपने बेटे को लेकर लेकिन वो भी sure नहीं है। अब उन्हें sure करने का काम मुझे करना था तो मैंने उसी तरह से reply किया।
अंजली :- देखो इसकी तो बड़ी simple सी वजह है पहले तो ये कि तुम खुद बताओ बेटे से तो तुम वैसे ही प्यार करती ही हो… I mean motherly love तो होता ही है ना। और वो भी तुमसे प्यार करता है। जैसे कि तुमने ही कहा था कि तुम्हारा बेटा तुम्हारे husband की absence में तुम्हारा और घर का ध्यान रखता है।
मम्मी :- हाँ
अंजली :- अब बताओ बाहरवाले के साथ तुम कैसे sure होगी कि वो तुम्हें प्यार करता है या नहीं? या वो कैसे तुम्हारा ध्यान रख पाएगा?
मम्मी :- Hmm
अंजली :- और दूसरी बात ये कि बाहर किसी के साथ पहले तो बदनामी का डर और दूसरा ये कि क्या पता कब वो वीडियो वगैरह बना ले और blackmail करने लगे… मजे की जगह सजा मिलने लगे।
मम्मी :- हाँ ये बात तो सही है
अंजली :- वैसे तुम ये क्यों पूछ रही हो… कहीं तुम्हारा भी तो मन नहीं है अपने बेटे के साथ try करने का ?
मम्मी :- अरे नहीं ऐसा नहीं है
ये सुनके मैं मायूस हो गया… मन में जितने लड्डू फुटे थे सब फुस्स हो गए। But फिर भी मैंने कहा
अंजली :- वैसे मेरी मानो तो try करो। तुम्हें भी sex की जरूरत है और बेटा तो तुम्हारे पास भी है।
मम्मी :- नहीं यार मुझे ये सब सही नहीं लग रहा
और ये बोल के वो offline हो गईं। इससे मैं भी मायूस हो गया कि इतने दिन की मेहनत का कोई फायदा नहीं हुआ। बात अभी भी वही की वही है।
But मैंने decide किया कि मैं उनके दिमाग में जब तक ये बात डालता रहूंगा। तो मैंने उनकी ID से youtube पे माँ बेटा sex stories वाले videos देखना continue रखा। और मैं ये भी notice कर रहा था कि माँ भी वो videos regular देख रही हैं जो कि मेरे लिए थोड़ी सी सुकून देने वाली बात थी लेकिन मैं confused भी हो रहा था कि एक तरफ तो माँ इसे accept नहीं करना चाह रही और दूसरी तरफ videos पूरे देख रही हैं। आखिर बात क्या है?
कुछ दिन और बीते मगर कुछ मेरे मन मुताबिक नहीं हो रहा था तो एक दिन चैट में मैंने ही फिर से पूछा
अंजली :- सारिका… मैंने जो तुमसे उस दिन कहा था उसके बारे में कुछ सोचा?
मम्मी :- किस बारे में?
अंजली :- wahi बेटे के साथ sex के लिए try करने के बारे में
मम्मी :- यार मान लो एक बार को मैं सोच भी लूं… मगर मेरा बेटा वैसा नहीं है। वो नहीं सोचेगा।
 
 
ये पढ़ के मुझे लगा कि कही मम्मी के मन में मेरी बाते का इफ़ेक्ट तो नहीं आने लगा है...शायद उनका मन बदल रहा है लेकिन अभी वो डाउट में हैं| अब इस डाउट को मुझे दूर करना था तो मैंने उनसे कहा -
अंजली :- एक तरीका है पता लगाने का लेकिन उसके लिए पहले तुम्हें अपना मन पक्का करना होगा कि तुम ये चाहती हो।
मम्मी :- यार मैं sure नहीं हो पा रही हूँ
अंजली :- रुको मैं तुम्हें कुछ भेजती हूँ
उसके बाद मैंने उन्हें एक news की link भेजी जिसमें कहीं विदेश के एक असली माँ बेटा love relationship में थे। और दो तीन sex videos भी भेजी जिनमें हिंदी voiceover था माँ बेटे का। ऐसा लगता था कि सच में माँ बेटे ही कर रहे हों। इसके साथ ही क्वोरा के कुछ लिंक भी भेजे इसी टॉपिक से रिलेटेड। ये सब पढ़ने और देखने के बाद मां का मैसेज फिर से आया। 
मम्मी :- अंजू? 
अंजलि :- हां….जो मैंने भेजा देखा? 
मम्मी :- हां 
अंजलि :- तो अब? क्या डिसाइड किया? 
मम्मी :- पता नहीं यार 
मुझे लग रहा था कि मम्मी कुछ-कुछ मान गई थी। लेकिन एक्सेप्ट नहीं कर रही थी। इसलिए मैंने कहा – 
अंजलि :- अच्छा तुम्हें अपने बेटे को लेकर डाउट है ना कि वो तुम्हारे साथ सेक्स करने के बारे में सोचेगा या नहीं? 
मम्मी :- Hmm
अंजलि: "तो एक काम करते हैं... पहले इसी बात का पता लगा लेते हैं। बस जैसे-जैसे मैं बोलती जाऊँ, वैसे-वैसे तुम्हें करना होगा। कर पाओगी?"
मम्मी: "ट्राई करूँगी।"
अंजलि: "गुड। तो सबसे पहले उसको अपने करीब रखना शुरू करो। जैसे घर के बाहर के काम तो वो करता ही है... तो घर के काम करते टाइम भी उसे साथ में लगा लो... जैसे किचन में या कपड़े धोते टाइम।"
 मम्मी: "अच्छा।"
अंजलि: "हाँ... और जो भी प्रोग्रेस हो मुझे ज़रूर बताना। मैं जैसे-जैसे बताऊँ, वैसे-वैसे करना है।"
मम्मी: "ओके।"
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#3
Chapter 6 : Working On Plan (Mummy Ki Malish)

अब मेरे मन में चल रहा था कि जो भी करना है बहुत सोच-समझ के करना होगा... जल्दबाज़ी में काम बिगड़ जाएगा। खैर... जैसा मैंने माँ को समझाया था... उसी दिन शाम को सत्संग से वापस आने के बाद माँ ने किचन से मुझे आवाज़ दी।


मम्मी: "अजय!"
 मैं: "आया मम्मी।"
मैं किचन में पहुँचा और पूछा, "क्या हुआ?"
मम्मी: "बेटा, थोड़ी हेल्प करा दे मेरी किचन में।"
 मैं (इरिटेशन के एक्सप्रेशन देते हुए): "मम्मी यार!"
मम्मी: "क्या 'मम्मी यार'? अब तो तेरा ऑफिस भी नहीं है... थोड़ी सी हेल्प करा दे। सुबह से शाम तक अकेले सब करती हूँ... तुझे तो माँ की कोई फिक्र ही नहीं है।"
 मैं: "अरे नहीं मेरी प्यारी मम्मी... फिक्र है! बोलो क्या करना है?"
मम्मी: "ये ज़रा आलू छिलवा दे।"
मैं: "ओके।"
फिर थोड़ी देर बाद मैंने पूछा कि पापा कब आने वाले हैं?
मम्मी: "पता नहीं... अबकी शायद टाइम ज़्यादा लगे आने में। कह रहे थे ऑफिस में काम ज़्यादा है। कोई इन्सपेक्शन के लिए आने वाला है।"
मैं: "अच्छा।"
ऐसी ही कुछ हल्की-फुल्की बातें हुईं और उसके बाद मैं बाहर आ गया। रात में मैंने ही माँ को मैसेज किया फेक आईडी से—
अंजलि: "सारिका?"
मम्मी: "हाँ।"
 अंजलि: "क्या रहा आज? बुलाया था बेटे को किचन में?"
मम्मी: "हाँ।"
अंजलि: "फिर क्या रहा?"
 
मम्मी: "कुछ नहीं, पहले नखरे कर रहा था फिर हेल्प कराई मेरी।"
 अंजलि: "एक काम करो... उसे बुलाओ और कहो कि तुम्हारी कमर में दर्द है तो तुम्हारी मालिश कर दे। और जब वो अपने कमरे में जाए तो एक गुड नाइट किस देकर भेजना।"
मम्मी: "अच्छा।"
फिर मम्मी ने मुझे आवाज़ दी। मैं उनके रूम में पहुँचा तो उन्होंने कहा—
मम्मी: "बेटा, मेरी कमर में दर्द हो रहा है, थोड़ी देर मालिश कर देगा क्या?"
अजय: "ओके मम्मी, कर तो दूँगा पर साड़ी में मालिश कैसे होगी?"
मम्मी: "ठीक है... इसे हटाए देती हूँ। तुम लाइट बंद करके ये छोटा वाला बल्ब जला दो।"
मैं: "ओके।"

ये कह के मैं जाकर ऑयल ले आया और मैंने ज़ीरो वॉट का बल्ब जला दिया... तब तक माँ साड़ी उतार के पेट के बल लेट गयी थीं। लाइट ग्रीन कलर का ब्लाउज़ और बादामी कलर का पेटीकोट और बीच में मम्मी की दूध जैसी गोरी कमर, और ऊपर को उभरी हुई बड़ी सी गाँड़। हालाँकि ये सीन मेरे लिए कोई नया नहीं था क्योंकि इसके पहले भी मैंने कई बार माँ को सिर्फ़ ब्लाउज़ और पेटीकोट में देखा था... वरना आपको क्या लगता है मेरे अंदर ऐसी फीलिंग्स कहाँ से आईं? घर में अक्सर ऐसा होता था कि पापा को सुबह जल्दी जाना होता तो माँ सिर्फ़ ब्लाउज़-पेटीकोट में ही उनके लिए नाश्ता बना रही होती थीं।
खैर वो टाइम और हालात दूसरे थे और आज का सीन कुछ और ही था। ऐसा नहीं था कि मैंने कभी उनकी मालिश नहीं की थी या पैर नहीं दबाए थे, पर आज ये जानते हुए मालिश करना कि उनके मन में क्या चल रहा है... अलग ही एक्साइटमेंट हो रही थी। मैं उनके साइड में बैठ गया और तेल लगाना शुरू किया। वो आँखें बंद करके लेटी हुई थीं और उनके बड़े-बड़े चूचे पेट के बल लेटे होने की वजह से साइड से निकले जा रहे थे। मेरी एक्साइटमेंट बढ़ती जा रही थी और मैंने थोड़ा और मज़े लेने की सोची। मैंने उनसे कहा—
मैं: "मम्मी, ऐसे सही से ताक़त नहीं लग रही है।"
मम्मी: "तो फिर जैसे ताक़त लगे, वैसे लगाओ।"

मैं फिर बेड के ऊपर आ गया और उनके पैरों के दोनों तरफ पैर करके बैठ गया और तेल लगाने लगा। उनकी मखमली कमर को छूकर, मसलकर और दबाकर कितना मज़ा आ रहा था, बता नहीं सकता। ये सब महसूस करते-करते मेरा लंड एकदम टाइट हो चुका था। अब सिचुएशन ये थी कि जब ऐसे बैठे-बैठे मैं उन्हें तेल लगाने के लिए आगे झुकता, तो मेरा लंड उनकी गाँड़ से ऑलमोस्ट टच हो जा रहा था, लेकिन मैंने होने नहीं दिया। क्योंकि अगर पहले ही दिन ये हो जाता तो बड़ी गड़बड़ हो जाती। थोड़ी देर ऐसे कमर पे मालिश करने के बाद मैंने माँ से पूछा—

मैं: "मम्मी, पैरों में भी मालिश कर दूँ?"
मम्मी: "ठीक है।"

फिर मैं ऐसे ही नीचे आ गया और पैरों में तेल लगाने लगा। थोड़ी देर मालिश करने के बाद माँ ने कहा, "बस कर बेटा… हो गया।" ये कह के वो सीधी हुईं और प्यार से मेरे गालों पे हाथ फेरा। फिर मेरे गाल पे किस करके बोलीं, "गुड नाइट बेटा।" पहली बार माँ के मुलायम होंठों का एहसास अपने गालों पे पाकर तो जैसे मैं जन्नत में था। ऐसा लग रहा था कि मेरी अब तक की लाइफ का वो बेस्ट पल है। इसके बाद मुझसे रहा नहीं गया। मैंने भी माँ के मुलायम गालों को चूमते हुए कहा, "गुड नाइट मम्मी।" ये कह के मैं अपने कमरे में आ गया… अब इस खड़े लंड को शांत करना ज़रूरी था। तो मैंने आज जो भी चीज़ें हुईं, उनको सोचकर मुठ मारी और सो गया।

अगले दिन मैंने चैट पे उनसे पूछा –

अंजलि :- कैसा लगा कल मालिश करवा के?
मम्मी :- अच्छा लगा… सारी थकान दूर हो गयी
अंजलि :- गुड
मम्मी :- अब आगे क्या करना है?
अंजलि :- अब तुम्हें रोज रात में बेटे से मालिश करवानी है और सोने के पहले उसे एक गुड नाईट किस (good night kiss) देनी है।
मम्मी :- ओके…. और कुछ
अंजलि :- हाँ एक और काम
मम्मी :- क्या?
अंजलि :- कल जब नहाने जाना तो बेटे को बाथरूम में बुलाना और कहना मेरी पीठ पे सही से साबुन नहीं लग पा रहा तो वो लगा दे।
मम्मी :- हाय ये सब नहीं होगा मुझसे
अंजलि :- अब चैलेंज लिया है तुमने तो पूरा करके भी तो देखो
मम्मी :- हाँ लेकिन ये सब कैसे… शर्म आएगी मुझे। रात में तो अंधेरा रहता है रूम में तो इतना नहीं लगता 
अंजलि :- अरे यार तो मैं कौन सा तुम्हें बेटे के सामने न्यूड होने को कह रही हूँ। पेटीकोट ऊपर करके बाँध लेना और साबुन लगवा लेना
मम्मी :- अच्छा ठीक है सोचूँगी
अंजलि :- ओके और जैसा रिएक्शन हो बेटे का वो ज़रूर बताना

Chapter 7 : Mummy ki Gori Peeth

फिर अगले दिन जब मैं उठा तो मैंने देखा कि मम्मी ने अभी तक नहाया नहीं था। जबकि अक्सर वो सुबह जल्दी ही नहा लेती थीं। मैंने उनसे पूछा तो बोलीं कि थोड़ा सफ़ाई कर रही थी छत पे तो लेट हो गया।

फिर मेरे उठने के करीब आधे घंटा बाद मम्मी नहाने के लिए गयीं और थोड़ी देर बाद मुझे आवाज़ दी… अजय 
मैं :- हाँ मम्मी
मम्मी :- क्या कर रहा है?
मैं :- कुछ नहीं… क्या हुआ… बताओ
मम्मी :- ज़रा यहाँ आके मेरी पीठ पे साबुन लगा दो… मेरा हाथ सही से नहीं पहुँचता
मैं :- ओके मम्मी… आ रहा हूँ

फिर मैं बाथरूम में गया तो देखा मम्मी चौकी पे सिर्फ़ पेटीकोट पहने मेरी तरफ़ पीठ करके बैठी हुई थीं। पेटीकोट उन्होंने अपने बूब्स (boobs) के ऊपर चढ़ा के पहन लिया था तो नीचे से उनकी गोरी टांगे दिख रही थीं। पेटीकोट गीला होके उनके शरीर से चिपक गया था और उनके गोरे जिस्म पे पानी की बूंदें चमक रही थीं।
मैं जब उन्हें साबुन लगाने गया तो उन्होंने पेटीकोट आगे से थोड़ा ढीला करके पीछे से नीचे कर लिया। मैं उनकी पीठ पे साबुन लगाने लगा। उनकी गोरी गोरी पीठ पे मेरे साबुन वाले हाथ फिसल रहे थे। इधर मेरा लंड मेरे बरमूडा में तम्बू बना हुआ था। थोड़ी देर तक मैं ऐसे ही उनकी पीठ पे हाथ फिराता रहा। बीच में कई बार हाथ फिसल के उनके बूब्स की तरफ़ भी चला जाता जिसे हम दोनों ने ही इग्नोर कर दिया। फिर मैं बाहर आ गया।
दोपहर में काम खत्म होने के बाद मम्मी ने मुझे यानी अंजलि को मैसेज किया।

मम्मी :- अंजलि !
अंजलि :- हाँ.. क्या हुआ आज?
मम्मी :- मैंने आज बेटे को साबुन लगवाने के लिए बुलाया था बाथरूम में
अंजलि :- ओहो… फिर
मम्मी :- फिर क्या उसने लगाया लेकिन एक चीज़ हुई पता नहीं जान बूझ के या अनजाने में
अंजलि :- क्या
मम्मी :- जब वो साबुन लगा रहा था तो एक आध बार उसका हाथ फिसल के मेरे बूब्स (boobs) की साइड में आ गया था
ओह… तो इसका मतलब मम्मी ने इग्नोर नहीं किया था। अब इसके रिएक्शन पे पता लगना था कि आगे क्या होने वाला है तो मैंने पूछा
अंजलि :- तो फिर… कैसा लगा तुम्हें?
मम्मी :- पता नहीं कैसा लगा… थोड़ा अजीब सा।
अंजलि :- अच्छा लगा या खराब?
मम्मी :- नहीं खराब तो नहीं लगा
अंजलि :- ठीक है फिर तो… बीच बीच में ऐसे ही उसे बुला लिया करना और बाकी तो तुम्हें पता है ही… जो कर रही हो वो करती रहो।

धीरे धीरे ऐसे ही चलता रहा। मम्मी मुझे अपने साथ कामों में लगाये रहती। मैं भी ख़ुशी ख़ुशी उनकी हेल्प करता, उनसे बातें करता और उनके करीब रहता…उनका ध्यान रखता। मैं जैसा जैसा आईडिया उन्हें चैट पे देता वैसे ही वो मेरे साथ करती और फिर मेरा रिएक्शन मुझे ही चैट पे बताती :D। इन दिनों में मैंने मम्मी को कुछ आदतें डलवा दी थीं जैसे कि रोज़ सोने से पहले मैं उनकी पीठ और पैरों की मालिश करता और फिर वो मुझे गुड नाईट किस (good night kiss) करतीं। और मैं जब सुबह उठता और मम्मी किचन में काम कर रही होतीं तो मैं उन्हें पीछे से जाके हग (hug) करता और सुबह का खड़ा लंड उन्हें फील कराने की कोशिश करता। 12-15 दिनों में हम दोनों काफी क्लोज़ आ गए थे और मुझे लग रहा था कि ये सब मम्मी को भी अच्छा लग रहा है।
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