24-02-2026, 10:01 PM
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Adultery Compromise...
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24-02-2026, 10:04 PM
24-02-2026, 10:07 PM
(23-02-2026, 04:59 PM)rangeeladesi Wrote: रोचक वर्णन. (24-02-2026, 01:06 PM)Lovecraft Wrote: katai maal bankar gayi hai. randhir na to keh hi nahi sakta. asha ko dekh ke agar auto wale ladke ka pant m uska lund phadphada raha tha, pata nahi randhir babu ka kya hoga .. माल बन कर तो गई है; अब देखना ये है कि ऐसा ही बने रहती है या रणधीर बाबू अच्छे से इस माल से मलाई निकालने वाले हैं.
25-02-2026, 05:50 AM
Are wah, asha ko zyada kuch karna nahi pada, uske blouse mein se jhankti hui uske do kohinoor ne kam kar diya.
randhir babu to pure hypnotize ho gaye us swargiya nazare se
25-02-2026, 10:12 AM
(24-02-2026, 10:04 PM)The_Writer Wrote: आशा को एक औरत के दो कारगर हथियारों के बारे में बहुत अच्छे से पता रहा है हमेशा से और वो हैं; पहला हथियार का इस्तेमाल हो चुका... रहा अब दूसरे की...लगता नहीं उसकी जरूरत पड़ेगी। पर वह भी इस्तेमाल हो जाए तो पूरा पुष्टि हो जाएगा कि उसकी जॉब पक्की , और इसी बहाने नीर के पिता और आशा के पति "अभय" के बारे में भी थोड़ा पता चल जाएगा...
27-02-2026, 12:51 PM
28-02-2026, 10:26 AM
“अ..अभ...अभय मुखर्जी….”
जवाब देते हुए नीर एकबार अपनी माँ की तरफ़ देखा और फ़िर रणधीर बाबू की ओर...
जब नीर ने आशा की ओर देखा, तब रणधीर बाबू ने भी नीर की दृष्टि को फ़ॉलो करते हुए आशा की ओर देखा; और पाया कि नीर से उसके पापा का नाम पूछते ही आशा थोड़ी असहज सी हो गई थी... चेहरे की मुस्कान विलीन हो गई थी… नीर भी जैसे पापा का नाम बताते हुए अपनी मम्मी से इसकी अनुमति माँग रहा था…
रणधीर बाबू जैसे मंझे खिलाड़ी को ये समझते देर नहीं लगी कि दाल में कुछ काला है --- इतना ही नहीं, आशा के बॉडी लैंग्वेज से उसे ये डाउट भी हुआ की हो न हो शायद पूरी दाल ही काली है…!
आशा के मन को थोड़ा टटोलते हुए पूछा,
“पापा से बहुत प्यार करता है न यह?”
आशा ने चेहरे पर एक फीकी मुस्कान लाते हुए धीरे से कहा,
“जी सर.”
रणधीर बाबू हर क्षण आशा के चेहरे के भावों को पढ़ने लगे --- इतने सालों से वो देश-दुनिया को देख रहे हैं --- इतने बड़े और तरह - तरह के व्यापार सँभालने वाला कोई भी व्यक्ति इतना परिपक्व तो हो ही जाता है की वो सामने वाले के चेहरे पर आते - जाते विचारों के बादल को पढ़ और समझ सके.
“ह्म्म्म.. देखो आशा, मुझे जो भी जानना था सो जान लिया --- तुम्हारा क्वालिफिकेशन लगभग ठीक ही है. दो - तीन जगह खाली हैं मेरे आर्गेनाइजेशन में... देखता हूँ; क्या किया जाए तुम्हारे केस में…”
अभी अपनी बात पूरी कर भी नहीं पाए थे रणधीर बाबू के अचानक से आशा सेंटर टेबल पर थोड़ा और झुकते हुए, हाथों को आपस में जोड़ते हुए से मुद्रा लिए बोली,
“प्लीज़ सर, प्लीज़ कंसीडर कीजिएगा --- मेरा एक जॉब पाना बहुत ज़रूरी है... आई नीड इट... प्लीज़ सर, आई प्रॉमिस की आपको मेरी तरफ़ से कोई शिकायत नहीं होगी. पूरी ईमानदारी और मेहनत से काम करूँगी—आपकी कभी कोई बात नहीं टालूँगी —…”
“अच्छा, अच्छा…. रुको — ” रणधीर बाबू ने हाथ उठा कर आशा को चुप करने का इशारा किया.
आशा की तरफ़ गौर से कुछ पल निहारा…
आशा का सामने की ओर झुके होने की वजह से एकबार फ़िर उसकी दायीं चूची का ऊपरी गोलाई वाला हिस्सा बाहर आने को मचलने लगा था --- रणधीर बाबू की नज़रें वहीँ अटक गईं थीं —- और इस बार आशा ने भी इस बात को नोटिस किया पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी. शायद इस भरोसे में की अगर ये बुड्ढा थोड़ा नयनसुख लेकर उसे एक अच्छी नौकरी दे देता है तो इतना सा अपने जिस्म का अंग दिखाने में हर्ज़ ही क्या है?!
'पर आशा, एक बात मैं तुम्हें अभी से ही बिल्कुल क्लियर कर देना चाहूँगा कि अगर मैंने तुम्हें नौकरी पर रखा तो मैं हमेशा ही इस बात की अपेक्षा रखूँगा की तुम कभी मेरा कोई कहना नहीं टालोगी--- ज़रा सा भी ना-नुकुर नहीं --- और यही तुम्हारी फर्स्ट ड्यूटी, मतलब की परम कर्तव्य भी होगा... ठीक है??’
अंतिम के शब्दों को कहते हुए रणधीर बाबू ने चश्मे को नाक पर थोड़ा नीचे करते हुए बड़ी - बड़ी आँखों से सीधे आशा की आँखों में झाँका --- रणधीर बाबू के इस तरह देखने से आशा थोड़ी सहम ज़रूर गई पर बात को ज़्यादा गंभीरता से नहीं लेते हुए चेहरे पर एक फीकी स्माइल लिए सिर हिलाते हुए ‘बिल्कुल सर’ बोली.
‘आई प्रॉमिस की मैं आपकी हर आदेश का, हर बात का पालन करुँगी --- किसी भी बात में कभी कोई बाधा न दूँगी और न बनूँगी. आपकी हर बात सर आँखों पर .....’
कहते हुए आशा को फील हुआ कि वह फ्लो-फ्लो में ज़रूरत से ज़्यादा कह गई.
इधर आशा को बिना इक पल की भी देरी किए; ज़रूरत से ज़्यादा हरेक बात को मानते देख रणधीर बाबू मन ही मन बहुत खुश हुए. चिड़िया खुद ही उसके लिए बिछाए गए जाल को अपने ऊपर ले ले रही है; हवसी को ये समझते देर नहीं लगी.
साथ ही लोगों को पढ़ने में माहिर रणधीर बाबू ने ताड़ लिया की अभी शायद आशा को भी अपनी ये चूक समझ में आ गई है. इससे पहले की वो अपने कहे गए वाक्य में कोई संशोधन करे उससे पहले ही रणधीर बाबू बोल पड़े,
“वैरी गुड आशा! तुम्हारे रेस्पोंस ने मुझे काफी प्रभावित किया. वाकई तुममें ‘काम’ करने की एक ललक है (काम शब्द पर थोड़ा ज़ोर दिया रणधीर बाबू ने) --- अब समझ ही लो की तुम लगभग एक जॉब पा गई --- बस, एक बात के लिए तुम्हें हाँ करनी है... इसे एक शर्त समझो या... म्मम्मम... इट्स लाइक एन एग्जाम, अ टेस्ट... टू गेट सिलेक्टेड फॉर द जॉब.”
‘यस सर... एनीथिंग…!’ – आशा जोश में आकर बोली. ‘हम्म्म्म’ रणधीर बाबू के होंठों पर एक कुटिल मुस्कान खेल गई. और फ़िर खुद को दूसरों के सुख - दुःख का साथी बताने वाले उस लंपट ने वह शर्त बताया --- उस टेस्ट के बारे में कहना शुरू किया जिसे पास करते ही आशा को, एक सिंगल मदर को एक शानदार जॉब मिलेगा. जैसे - जैसे रणधीर बाबू शर्त और उसकी बारीकियाँ समझाते गए... वैसे - वैसे; आशा की आँखें घोर आश्चर्य और अविश्वास से चौड़ी होती चली गई… हृदय स्पंदन कई गुना बढ़ गया — अपने ही कानों पर यकीन नहीं हुआ आशा को. रणधीर बाबू के शर्त के एक - एक शब्द, आशा के काँच सी अस्तित्व पर पत्थर की सी चोट कर; उसके अस्तित्व को समाप्त करने लगे. बुत सी बैठी रह गई सोफ़े पर… जारी रहेगा.... ............................................
28-02-2026, 10:27 AM
28-02-2026, 10:35 AM
(25-02-2026, 05:50 AM)Blackdick11 Wrote: Are wah, asha ko zyada kuch karna nahi pada, uske blouse mein se jhankti hui uske do kohinoor ne kam kar diya. New Update Posted... (25-02-2026, 10:12 AM)Bakchod Londa Wrote: पहला हथियार का इस्तेमाल हो चुका... रहा अब दूसरे की...लगता नहीं उसकी जरूरत पड़ेगी। बिल्कुल सही बात. New Update Posted... (25-02-2026, 01:18 PM)BHOG LO Wrote: NICE UPDATE Thanks. New Update Posted... (27-02-2026, 12:51 PM)Lovecraft Wrote: Randhir babu, is maal se malai to nikalenge hi. par uske liye unko thoda intezar karna padega. jaldbazi karenge to hath mein kuch nahi ayega... बिल्कुल सही कहा आपने. वैसे रणधीर बाबू हैं बड़े माहिर खिलाड़ी. शायद उनको कुछ खास करने की ज़रूरत ही न पड़े. New Update Posted...
28-02-2026, 11:32 AM
Update 3:-
![]() किसी भी नारी के लिए अपने पति के अलावा कहीं और, किसी और के सामने समर्पण कर देना, उसे अपना मान कर अपना जिस्म सौंप देना कोई सरल कार्य नहीं होता. लेकिन फिर भी बहुत कोई ऐसा करती है. कोई ऐसा करने को विवश होती है, तो कोई कुछ पाने के लिए खुद से ही खुद को समर्पित कर देती है. आजकल के कार्यक्षेत्रों में सेक्सुअल हैरासमेंट कॉमन होता जा रहा है... पर क्या ये सही है? ये सवाल इसलिए भी है क्योंकि सेक्सुअल हैरासमेंट, कॉमन होने के बावजूद सिक्युरिटी रिपोर्टिंग कुछ खास नहीं होती. क्यों नहीं होती? --- क्योंकि शायद किसी को कुछ पाने का ख्वाब रहता है तो किसी को कुछ खो जाने का... हमेशा के लिए…. और अगर वो कोई सिंगल मदर हुई, या फिर कोई सच में परिस्थितियों की मारी, सताई हुई... तो फिर कहना ही क्या... सवाल करना ही क्यों...?
01-03-2026, 02:27 AM
आशा अब क्या करेगी? उसे जॉब किसी भी क़ीमत पे चाहिए। फ्लो–फ्लो में बोल गई रणधीर बाबू जो बोलेंगे वह सब करेगी। वैसे रणधीर बाबू ने ऐसा क्या शर्त रखा है कि आशा के सुनते ही होश उड़ गए,,,(थोड़ा उसका विवरण मिल जाता तो मज़ा आ जाता)
01-03-2026, 06:03 PM
randhir babu ke condition se agree hone matlab—Job to pakki, sath hi sexual harrasment bhi pakki. current situation aise h k use job ki bahut jarurat hai.
aise mein asha ke pass do hi raste h —1. Swabhiman ke sath jeena aur is job ko manna karna( chances kam h) 2. compromise kar lena.
02-03-2026, 02:17 PM
Niceeee update but ho sake to thoda bada update diya karo,,, story aur iska narration itna mast h k...Yeh Dil Mange Moreeee
02-03-2026, 02:37 PM
Kisi ki halat aur majburi ka fayda kese uthaya jaye koi randhir babu se sikhe...
05-03-2026, 03:30 PM
यह कथा तो बेहद ही रोचक हो जा रही है| मुझे पता नही था की आप हिन्दी भी अच्छा लिखते है| सुंदर और बैसहाय आशा के पास कोई विकल्प ही नही है और वो अपने आप दलदल मै पांव रखने जा रही है| आगे का विवरण आपके सिद्ध शैली मै पढना एक अनुभूति होगी| इंतजार रहेगा.
Like erotic stories? check my Profie
06-03-2026, 12:47 AM
Hi guys have not read this story. Is the story has old man Tharki uncle type of story?
06-03-2026, 09:00 PM
(05-03-2026, 03:30 PM)garamrohan Wrote: यह कथा तो बेहद ही रोचक हो जा रही है| मुझे पता नही था की आप हिन्दी भी अच्छा लिखते है| सुंदर और बैसहाय आशा के पास कोई विकल्प ही नही है और वो अपने आप दलदल मै पांव रखने जा रही है| आगे का विवरण आपके सिद्ध शैली मै पढना एक अनुभूति होगी| इंतजार रहेगा. Thank you so much. Such appreciation from a Writer like you means a lot to me. I'm really so glad to see that you've managed time to share your views here. Yeah, I love to write mainly in Hindi language other than Bengali and English. Right now, I'm also working on an English story that I'll be posting in the next month. Thanks again for your time & views. Stay tuned.
06-03-2026, 09:13 PM
भाग ३:-
सरेंडर
ऑफर
“ओह नहीं, नहीं... ये क्या कह रहे हैं आप?? नहीं, सर, मैं ऐसी-वैसी नहीं हूँ. मुझे जॉब चाहिए — पर मैं कोई ऐसी औरत नहीं हूँ जो इतना नीचे गिर जाए! माफ़ कीजिए; मुझसे नहीं हो पाएगा.”
“कूल डाउन आशा... मैंने बस तुम्हें एक ऑफर दिया है… इसका मतलब ये नहीं की तुम्हें ऐसा कुछ करना ही है --- ऐसा नहीं की तुम अगर नहीं करोगी तो तुम्हें जॉब नहीं मिलेगी,... मिलेगी, पर प्रमोशन नहीं मिलेगा, इंसेंटिव नहीं मिलेगी, एक्सटेंडेड हॉलीडेज नहीं मिलेंगे... और भी कई चीज़ें हैं जो तुम्हें नहीं मिल पाएँगी…….” आशा ने बीच में ही टोकते हुए पूछा, “पर मैं ही क्यों? अभी-अभी आपने कहा था कि मेरी क्वालिफिकेशन सारी सही हैं और आपके यहाँ 2-3 पोजीशन्स खाली हैं… और तो और मैंने आज ही आपसे मुलाकात की और आज ही आप मुझे ऐसा ऑफर कर रहे हैं— क्यों?!!” अविश्वास से भरे उसके कंठस्वर बरबस ही ऊँचे हो चले थे --- और ऊँचे आवाज़ में कोई रणधीर बाबू से बात करे ये रणधीर बाबू को बिल्कुल पसंद नहीं था. अपने कर्मजीवन के आरंभ से रणधीर बाबू ने जो पत्थर-तोड़ मेहनत की है, उसी का परिणाम है की आज वो शहर के उन चंद रसूखदार प्रभावशाली लोगों में से हैं जो अपने एक इशारे से पूरा सिस्टम हिला दे; तो फिर कोई ऐसा व्यक्ति किसी भी ऐरे - गैरे का प्रतिरोध, प्रतिवाद क्यों सुनेगा... वो भी उसी के सामने ऊँचे आवाज़ में...? “लो योर वोइस डाउन, आशा. मुझे ऊँची आवाज़ बिल्कुल पसंद नहीं. हाँ, मैंने कहा है कि इस एक शर्त को मान लेने पर तुम्हें जॉब मिल जाएगी. और तुम ही क्यों? तुम्हें क्यों ऑफर दे रहा हूँ... क्या, क्यों, कैसे... ये सब घर जाकर सोचना. आई डोंट लाइक टू एक्सप्लेन माइसेल्फ! और अगर शर्त मंज़ूर हो, तो आज से तीन दिन बाद, ****** हाई कॉलेज में दिन के 11:00 – 1:00 के बीच आ कर मिलना, ओके?? नाउ यू मे गो.” आशा को अब बहुत तेज़ गुस्सा आने लगा… गुस्से से नथुने फूलने - सिकुड़ने लगे. उसी दावानल वाले गुस्से में ही वह उठने को हुई की एकाएक उसकी नज़र अपने जिस्म के ऊपरी हिस्से पर गई --- पल्ला अपने स्थान से हटा हुआ था और दाईं चूची का ऊपरी हिस्सा गोल हो कर हद से अधिक बाहर की ओर निकला हुआ था! गुस्से को एक पल के लिए भूल, स्त्री सुलभ लज्जा से आशा ने झट से अपनी आँचल को ठीक किया. ठीक करते समय उसने तिरछी नज़र से रणधीर बाबू की ओर देखा... रणधीर बाबू एकटक दृष्टि से उसके वक्षों की ओर ही नज़र जमाए हुए हैं. उन की नज़रों में नर्म गदराए माँस पिंडों को पाने की बेइंतेहा ललक और प्रतिक्षण उनके चेहरे पर आते - जाते वासना के बादल को देख पल भर में दो वैचारिक प्रतिक्रियाएं हुईं आशा के मन में... पहला तो ये कि वह एक बार फ़िर अपनी ही शारीरिक गठन और ख़ूबसूरती पर; होंठों के कोने पर कुटिल मुस्कान लिए, गर्व कर बैठी... दूसरा, अभी इस गर्वीले क्षण का वो आनंद ले; उससे पहले ही उसे रणधीर बाबू के द्वारा दिए गए शर्त वाली बात याद आ गई और याद आते ही उसका मन अटूट बेबसी और कड़वाहट से भर गया. वह तेज़ी से उठी; नीर को साथ ली और पैर पटकते हुए चली गई. बाहर निकलने से पहले एकबार के लिए वह ज़रा सा सिर घूमा कर पीछे देखी --- रणधीर बाबू बड़ी हसरत से उसकी गोल, उभरे हुए नितम्बों को देख रहा था... उनके चेहरे और आँखों से ऐसा लगा मानो वो साँस लेना तक भूल गए हैं! एकटक... एक दृष्टि... अपलक भाव से देखते हुए........... जारी है.... …………………………………. |
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