Thread Rating:
  • 16 Vote(s) - 2.81 Average
  • 1
  • 2
  • 3
  • 4
  • 5
Adultery Compromise...
#21
(14-02-2026, 12:23 AM)The_Writer Wrote:
अपने वक्षों पर लगातार पड़ते उसके हाथों के दबाव और चुम्बनों से वह कामोत्तेजित होकर कसमसाने लगी… बिना ब्रा का हल्की गुलाबी ब्लाउज, भूरे निप्पल और उसके आसपास के हिस्से लार से बुरी तरह भीग गए... साथ ही हाथों के दबाव और यौन-क्रीड़ा ने ब्लाउज की सिलाई को बेतरतीब ढंग से ख़राब कर दिया है. तंग ब्लाउज में कैद चूचियों के नीचे पड़ते दबाव, गोल - सुडौल चूचियों को ब्लाउज के ऊपर के खुले क्षेत्र से बाहर निकल आने को कह रहे थे. खुले, काले बाल कमर तक नागिन की भांति लहराने लगे. खुले गले का ब्लाउज का कंधे वाला बॉर्डर अब मानो धीरे-धीरे कंधे से ही नीचे उतर जाने को उतावले होने लगे. एक धक्के से उसे सुला दी… उस बंद कमरे में उन दोनों के अलावा और कोई नहीं था और ना ही किसी के होने का सवाल था. उसे लिटा कर वह भी उसके बगल में लेट गई. थोड़ी देर चुप्पी छाई रही. फ़िर वह उठ बैठी; अपने लम्बे बालों को संभाली; पर अब वे उसके चेहरे पर से होकर लटकने. उसे गुदगुदी होने लगी --- उसके हटाने से पहले ही वो हँसते हुए अपने बालों को उसके चेहरे से हटा ली. दोनों एक-दूसरे की आँखों में एकटक देखते रहे – दोनों ही के आँखों में एक-दूसरे के प्रति भूख साफ़ दिख रही थी – पर एक अंतर के साथ ... आशा की आँखों में यौन क्षुधा के साथ-साथ अपनत्व का भाव था— पर, पर उसकी आँखों में सिर्फ़ और सिर्फ़ स्वयं के यौन क्षुधा को तृप्त करने की शीघ्रता थी.......

वाह, क्या वर्णन है! उत्तम!
[+] 1 user Likes rangeeladesi's post
Like Reply
Do not mention / post any under age /rape content. If found Please use REPORT button.
#22
(15-02-2026, 11:17 AM)Blackdick11 Wrote: Beautiful Update
[Image: (1).jpg]
यही आशा है?
[+] 1 user Likes rangeeladesi's post
Like Reply
#23
आपकी भाषा बहुत परिष्कृत है. ऐसी भाषा यहां कम ही देखने को मिलती है.
[+] 1 user Likes rangeeladesi's post
Like Reply
#24
Next update kab doge, mitra?
[+] 1 user Likes Blackdick11's post
Like Reply
#25
(19-02-2026, 03:14 PM)Blackdick11 Wrote: Next update kab doge, mitra?

शीघ्र अपडेट दूँगा. प्लीज थोड़ी प्रतीक्षा करें. Namaskar

कल लिखने का समय बिल्कुल नहीं मिला. इसलिए आज पोस्ट नहीं कर पाया.

थोड़ा धैर्य रखें.    Namaskar
My Current Story:
  ----------
Compromise  Running











Like Reply
#26
Koi jaldbazi nahi hai. Take your time.
[+] 2 users Like Blackdick11's post
Like Reply
#27
भाग २)
रणधीर सिन्हा.. एंड फर्स्ट एनकाउंटर विद हिम


ज़ाहिर है कि बेशुमार दौलत जिसके पास हो और घर में बीवी ना हो तो ऐसे लोग खुले सांड की तरह हो जाते हैं.


कुछ ऐसा ही हाल था रणधीर बाबू का भी... पिछले कुछ महीनों से उनके घर में महिलाओं और लड़कियों का आना-जाना शुरू हो गया है. और सिर्फ़ शुरू ही नहीं हुआ; बल्कि बेतहाशा बढ़ भी गया है! ये औरतें और लड़कियाँ अधिकांश वो होती हैं जो रणधीर बाबू के किसी न किसी बिज़नेस या फर्म में काम करती हैं. रणधीर बाबू ने इतने फर्म्स खोल रखे हैं की शहर में किसी को भी अगर नौकरी की ज़रूरत होती तो वह सबसे पहले सीधे रणधीर बाबू के ही किसी एक ऑफिस में जा कर आवेदन करता. रणधीर बाबू अच्छी सैलरी देने के साथ ही अपने एम्प्लाइज को और ज़्यादा निखारने के लिए समय-समय पर उनकी ग्रूमिंग भी करते —- वो भी खुद अपने निरीक्षण में ! इससे उसके अंडर में काम करने वालों को डबल फ़ायदा होता…. एक तो अच्छी सैलरी मिलना और दूसरा, भविष्य के लिए खुद को और अधिक योग्य बनाना.


और इसलिए एम्प्लाइज भी हमेशा रणधीर बाबू के कुछ गलत आदतों-बातों को नज़रअंदाज़ कर दिया करते हैं. मसलन, रणधीर बाबू का अक्सर नशे में होना, शार्ट टेम्पर होना, हर लेडी स्टाफ को ग़लत नज़र से देखना और उनके साथ मनमाफिक छेड़खानी करना इत्यादि.. शराब और शबाब को लेकर उनके पूर्ण हृदय-समर्पण के बारे में तो हर कोई जानता है… विशेषतः खाती-पीती, अच्छी दिखने वाली महिलाओं के प्रति उनकी कमज़ोरी तो हर किसी के सामने जगजाहिर है.

रणधीर बाबू ऐसे व्यक्ति पहले नहीं थे.

पर समय से कहीं पहले धर्मपत्नी का वियोग, संतानों का विदेश में सेटल हो जाने के बाद वो काफी अकेले पड़ गए थे. सिर्फ घर में नहीं, अपितु वर्षों से अपने हाथों से सींच कर खड़ा किए अपने ही कार्यक्षेत्र में भी स्वयं को अत्यंत अकेला अनुभव करने लगे थे. इसका कोई ठोस कारण वो कभी समझ नहीं पाए. ऑफिस से घर आने पर तब तो अकेला फील होना समझ में आता है किंतु यदि ऑफिस वगैरह में भी 'एकांत' आपको काटने को दौड़े तो फिर जवाब सिर्फ दूसरों का संगति ही हो सकता है, अन्य कुछ नहीं.

कुछ समय तक तो दोस्तों-रिश्तेदारों के सोहबत ने उनके इस 'एकांत' को उनसे दूर रखा पर धीरे-धीरे ये तरीका फीका पड़ने लगा. आखिर सबके तो अपने पर्सनल लाइफ है, हर कोई हमेशा तो किसी एक को उसका 'अकेलापन' दूर करने की खातिर कंपनी तो नहीं दे सकता न.

ये बात रणधीर बाबू को जल्द ही समझ में आ गयी और इसलिए उन्होंने समय रहते स्वयं को दूसरों की संगति से अलग कर लिया था.

पर किसी का साथ तो चाहिए ही था…

शीघ्र ही उनकी भेंट हुई उन्हीं की एक नन - बैंकिंग कंपनी में काम करने वाली 'रूचि' से... पहले - पहल तो रूचि में कोई खास रूचि उनकी जागी नहीं लेकिन समय बीतने के साथ न जाने क्यों और कैसे दोनों पास आते गए और बात फॉर्मल बातों से जा कर खास मेल-मुलाकातों में बदल गई. रूचि की पर्सनैलिटी ने रणधीर बाबू को काफी मोहित किया था. उसका चलना, बोलना, हँसना, इत्यादि सब कुछ जैसे किसी खास साँचे में ढाला गया था…

रूचि को देखते ही रणधीर बाबू को ज़ी न्यूज़ की एंकर 'रूबिका' की याद जाती थी --- हाँ, एक समय वह बहुत बड़ी क्रश हुआ करती थी रणधीर बाबू की. स्क्रीन पे उसका कोई शो आते ही रणधीर बाबू सब काम एक ओर रखकर वो शो देखने लगते थे….

आह, क्या मस्त क्लीवेज-दर्शन करवाती थी!

रूचि भी कुछ कम नहीं थी. कई मायनों में वह बिल्कुल 'रूबिका' ही लगती थी.

और दोनों के बीच सब कुछ बहुत बढ़िया चल भी रहा था…

पर बढ़ती उम्र में रणधीर बाबू के नए - नए शौक ने खिलते, फलते रिश्ते में दरार डाल दिया...

हद तो तब हो गई जब एक दिन एकाएक रणधीर बाबू को गाँड मारने का नायाब शौक चढ़ गया! रूचि के साथ हमबिस्तर होने के थोड़ी देर बाद ही रणधीर बाबू ने उसे डॉगी पोजीशन में ले आए और चुत में 8-10 बार अंदर-बाहर करने के बाद बिना किसी लुब्रीकेंट के, बिना किसी चेतावनी के, बिना कोई आभास दिए, लंड छेद पे टिकाया और फक्क से उसका टोपा अंदर कर दिया था!

बेचारी मारे दर्द के ऐसा चीखी, ऐसा चिल्लाई... माँ-बहन की ऐसी तगड़ी गालियाँ बकीं जिन्हें खुद कभी रणधीर बाबू ने भी नहीं सुना होगा.

पर कहते हैं न कि,

हवस में इंसान अगर एक बार हैवान बन जाए तो तब तक नहीं रुकता जब तक की या तो उसकी हवस न मिट जाए या फिर उसके पसंद की हैवानियत खत्म न हो जाए…

रूचि के केस में भी यही हुआ...

रणधीर बाबू छेद बड़ा होने तक गाँड मारते रहे....

तब तक, जब तक कि उनका लंड बिना किसी ट्रैफिक के बड़ी सुगमता से अंदर-बाहर होने नहीं लगा था... छेद और रूचि की हालत की बात न ही की जाए तो बेहतर होगा.


और एक बार नहीं,... कुल चार बार उस छेद पर अपनी मुसल की कृपा-वर्षा की. मन तो फिर भी नहीं भरा उनका लेकिन रात के 2:30 बजे के बाद उनका शरीर भी जवाब देने लगा था. ये पहली बार था जब रणधीर बाबू रूचि पर जानवरों जैसा बरसे थे,. चूचियों, खास कर निप्पल और एरोला को, कमर, कंधे, पीठ में कई जगह इतना काटे थे; और कुछ बेरहमी के साथ काटे थे की कई जगह से खून की बूँदें छलक आईं थीं!

उस एक रात के बाद अगले कुछ दिनों तक रूचि काम पे नहीं आई थी. फिर एक दिन अचानक फोन पे ही अपना इस्तीफा दे दी. इस बात को लेकर उसके ऑफिस में, यहाँ तक की धीरे-धीरे रणधीर बाबू के सभी बिज़नेस हाउस में कई तरह की अफवाहें उड़ने लगीं थीं. कई ने रूचि के मामले को महज अफवाह मान कर हवा में उड़ा दिया तो कुछ ने रणधीर के कारनामों के ताबूत पे अंतिम कील समझ कर बिज़नेस के बाहर के लोगों को भी ये अफवाह मसाला लगा कर सुनाया था. लेकिन जैसा की जगत का नियम है कि ‘ताकतवर को, सामर्थ्यवान को दोष नहीं लगता…’ ठीक यही नियम रणधीर बाबू के केस में भी चरितार्थ हुआ. यही नहीं, जिन लोगों ने अफवाहों को उड़ाने और उन्हें बल देने में स्पेशल इंटरेस्ट दिखाया था, उन सभी पर सख्त कार्यवाही की गई थी. धीरे-धीरे यह कांड समय के रेत में जल्दी दब गई... और रणधीर बाबू के कारनामे थोड़े समय के वनवास के बाद फिर से चालू हो गए थे…


आशा को अपनी ही एक सहेली से रणधीर बाबू के ऑफिस का नंबर मिला था… नौकरी के लिए आवेदन करने हेतु. वैकेंसी के बारे में जानकारी लेने के सिलसिले में ऑफिस में किसी लेडी स्टाफ़ से फ़ोन पर बात हुई थी आशा की. दो-तीन पोजीशन खाली होने के बारे में बताया गया था और इसी दरम्यान आशा से उसके बारे में भी जानकारी ली गई थी --- बाद में उसी दिन शाम को ऑफिस से फ़ोन आया था कि रणधीर बाबू ने ऑफिस से पहले एक बार उसे अपने घर बुलाया है बायोडाटा और दूसरे एकेडमिक सर्टिफिकेट्स के साथ; ऐसा इसलिए क्योंकि ऑफिस में मिलने से पहले रणधीर बाबू हर क्लाइंट से घर में मिलते हैं... कार्यक्षेत्र में ऑफिशियली मिलने से पहले घर में पर्सनली मिल कर जॉब के लिए अप्लाई करने वालों को एक व्यक्ति, एक इंसान के तौर पर टटोल लेने में विश्वासी रहे हैं रणधीर बाबू,. अब या तो ये सब उन्हीं का कोई बिज़नेस फंडा होगा या फिर शायद कोई अंधविश्वास होगा.


रणधीर बाबू के यहाँ बुलाए जाने की बात सुनते ही आशा ख़ुशी से नाच उठी थी. उसे पूरा भरोसा था कि रणधीर बाबू ने अगर बुलाया है तो फिर जॉब पक्की है. उसे अपनी क्वालिफिकेशन के साथ-साथ अपनी ख़ूबसूरती पर भी अडिग विश्वास रहा था हमेशा से… क्वालिफिकेशन देख कर 'ना' करना भी चाहे कोई अगर तो शायद आशा की सुंदरता के आगे अपने फैसले बदलने को मज़बूर हो जाए! आशा को एक औरत के दो कारगर हथियारों के बारे में बहुत अच्छे से पता रहा है हमेशा से और वो हैं;

१) औरत की ख़ूबसूरत देह और

२) औरत के आँसू


किसी भी औरत के ये दो ऐसे तेज़ हथियार हैं जो दिलों को ही क्या ---- बड़े-बड़े सत्ता तक को हिला और मिट्टी में मिला सकते हैं. दिग्गज ज्ञानी और विद्वान भी इन दो हथियारों के अचूक निशाने से खुद को बचा पाने में पूरी तरह से विफ़ल पाते हैं. फिर रणधीर बाबू जैसे लोगों की बिसात ही क्या है?

अगले ही दिन आशा बहुत अच्छे से तैयार हो कर रणधीर बाबू के यहाँ चली गई ---- गोल्डन बॉर्डर की बीटरेड साड़ी, साड़ी पर ही लाल और सुनहरे धागे से छोटे-छोटे फूल और कई सुंदर कलाकृतियाँ बनी हुई हैं---मैचिंग ब्लाउज --- शॉर्ट स्लीव--- ब्लाउज भी थोड़ा टाइट--- चूचियों को उनके पूरी गोलाईयों के साथ ऊपर की ओर स्थिर उठाए हुए --- सामने से डीप ‘वी’ कट और पीछे काफ़ी खुला हुआ--- डीप ‘यू’ कट--- ब्लाउज के निचले बॉर्डर और कमर पर बंधी साड़ी के बीच काफ़ी गैप है--- और चलने-फिरने से उस गैप से आशा का गोरा चिकना पेट साफ़ दिख रहा है. बाहर की ओर निकली हुई गोलाकार पिछवाड़ा टाइट बाँधी हुई साड़ी में एकदम स्पष्ट रूप से समझ में आ रही है और हर पड़ते कदम के साथ ऊपर-नीचे करती हुई नाच रही है.



नीर को अपने साथ लेकर आशा ऑटो से रणधीर बाबू के यहाँ पहुँची. इससे पहले रास्ते भर ऑटोवाला रियरव्यू मिरर से आशा की कसी बदन को ताड़ता रहा... ऑटो के तेज़ चलने से आने वाली हवा के झोंकों से कभी आशा के दाएँ  तो कभी बाएँ तरफ़ का साड़ी का पल्ला उड़ जाता... अगर दायीं तरफ़ का उड़ता तो तंग ब्लाउज कप में कसी आशा की भरी गदराई चूची के ऊपरी गोलाई के दर्शन हो जाते और यदि बाएँ साइड से पल्ला उड़ता तो ब्लाउज कप में कैद आशा का बायाँ वक्ष अपनी पूरी गोलाई के आकार के साथ दिखता---और तो और ब्लाउज के निचले बॉर्डर से शुरू होकर कमर तक करीब 5-6 इंच के गैप में आँखों को बाँध देने वाली गोरी नर्म पेट का दर्शन हो रहा था.


जैसे - जैसे जगह मिलते ही ऑटो की स्पीड बढ़ती; वैसे - वैसे चलने वाली हवा भी तेज़ हो जाती---और इन्हीं तेज़ हवा के झोंकों से, रह-रह कर आशा का पल्लू उसके सीने पर से हट जाता और उस लाल तंग ब्लाउज के कप में कैद दायीं चूची पूरी और बायीं चूची का थोड़ा सा हिस्सा नज़र आ जाता... और इसके साथ ही एक लंबी-सी घाटी, अर्थात क्लीवेज भी दृष्टिगोचर हो जाती. एक तंग ब्लाउज में कैद पुष्टता से परिपूर्ण एक-दूसरे से सट कर लगे दो चूचियों के कारण बनने वाली एक क्लीवेज का आकार क्या और कैसा हो सकता है इसका तो हर कोई सहज ही अंदाज़ा लगा सकता है--- और जब बात बिल्कुल अपने सामने देखने की हो तो ऐसा अलौकिक दृश्य भला कौन मूर्ख छोड़ना चाहेगा?! बाएँ कंधे पर साड़ी को अगर सेफ्टी पिन से न लगाया होता, आशा ने तो शायद अब तक पूरा पल्लू ही हट गया होता!  वो गोरी-गोरी चूचियाँ जो रोड के हरेक गड्ढे और उतार-चढ़ाव के आने पर ऐसे उछलती जैसे की कोई रबर बॉल या बैलून --- या – या फ़िर मानो पानी वाले गुब्बारे हों, जिन्हें भर कर ज़रा सा हिलाने पर जैसा हिलते हैं ठीक वैसे ही ऊपर-नीचे हो कर हिल रही थीं. चूचियाँ तो कयामत ढा ही रही थीं पर आशा का दुधिया क्लीवेज भी --- जो पत्थर तक को पिघला कर पानी कर दे ---- ऑटोवाले को मदहोश किए जा रही थी.


ऐसा नहीं की आशा को पता नहीं चला था की ऑटोवाले का ध्यान कहाँ है... पर शायद कहीं न कहीं वो किसी भी मर्द को टीज़ करने में बड़ा सुख पाती है --- मर्दों का बेचैन हो जाना, थोड़ा और – थोड़ा और कर के लालायित रहना ---- यहाँ तक की ज़रा सा देह दर्शन करा देने से आजीवन चरणों का दास बने रहने की मर्दों की मौन सौगंध और स्वीकृति उसे अंदर तक गुदगुदा देती है. कॉलेज जीवन में फेरी वालों से 2-5 रुपये का कुछ बिल्कुल मुफ्त में लेना हो या फिर चाटवाले से कॉम्प्लीमेंट के तौर पर 2 एक्स्ट्रा बिना पानी वाला पानीपूरी खा लेना --- ये सब वह करती थी--- और ये सब वो करती थी अपनी ‘सिर्फ़ २ इंच का दूधिया क्लीवेज दिखा कर!’

बीते दिनों की यादों ने आशा के चेहरे पर एक कमीनी, कातिल मुस्कान ला दी; तिरछी आँखों से वह कुछेक बार ऑटोवाले लड़के की ओर देख चुकी है अब तक और हर बार ऑटोवाले लड़का एक हाथ से हैंडल पकड़े, दूसरे हाथ को सामने नीचे की ओर रखा हुआ मिला--- आँखों को सामने रोड पर टिकाए रखने की असफ़ल कोशिश करता हुआ.  

‘फ़िक’ से धीमी आवाज़ में आशा की हँसी निकल गई… वह समझ गई की लड़का दूसरे हाथ से अपने हथियार को फड़क कर खड़ा होने से रोकना चाह रहा है पर नाकाम हो रहा है. बेचारे लड़के की ऐसी दुर्दशा का ज़िम्मेवार ख़ुद को मानते हुए आशा गर्व से ऐसी फूली समाई कि उसकी दोनों चूचियाँ और अधिक फूल कर सामने की ओर तनने लगीं...

खैर,

रणधीर बाबू के घर के सामने पहुँच कर ऑटो रुका...

घर तो नहीं एक बड़ा बंगला हो जैसे. आशा अपने बेटे को ले कर जल्दी से उतर कर बैग से पैसे निकालने लगी--- पल्लू अब भी यथास्थान न होने के कारण ऑटोवाला लड़का अभी भी बहुमूल्य संपत्तियों का नयनसुख ले रहा है. आशा बिना उसकी ओर देखे उसकी आँखों की दिशा को भाँपते हुए चोर नज़र से अपने शरीर को देखी और देखते ही एक झटका लगा उसे—पल्लू का स्थान गड़बड़ाने से उसकी दाईं चूची और क्लीवेज तो दिख ही रहा है पर साथ ही साथ, पल्लू बाएँ साइड से भी उठा हुआ होने के कारण बाईं चूची का गोल आकार और निप्पल का इम्प्रैशन साफ़ समझ में आ रहा है... वो भी ब्लाउज के ऊपर से ही!! इतना ही नहीं, आशा का दूधिया पेट और गोल गहरी नाभि भी सामने दृश्यमान हैं! वह लड़का कभी गहरी नाभि को देखता तो कभी रसीले दूधों को. आशा खुद को संभालते हुए जल्दी से पल्लू ठीक कर ऑटोवाले को पैनी नज़रों से देखी. लड़का डर कर तुरंत दूसरी तरफ देखने लगा. पैसे देकर आशा पलट कर जाने ही वाली थी कि लड़का पूछ बैठा,

“मैडम..... मैं रहूँ या चलूँ?”


आशा ज़रा सा पीछे सर घूमा कर बोली,


“तुम जाओ.. मेरा काम हो गया.”


इतना कहकर नीर का हाथ पकड़ कर गेट की ओर बढ़ गई और इधर वह लड़का आशा के रूखे शब्द सुनकर और अपेक्षित उत्तर न पाकर थोड़ा निराश तो हुआ पर पीछे से आशा की गोल उभरी गाँड को देखकर उसकी वह निराशा पल भर में उत्तेजना में बदल गया और किसी मदमस्त गजगामिनी की भाँति आशा के चलने से गोल गाँड में होती थिरकन को देख, एक वासनायुक्त ‘आह’ कर के रह गया.



जारी है....
My Current Story:
  ----------
Compromise  Running











[+] 4 users Like The_Writer's post
Like Reply
#28
(18-02-2026, 03:59 PM)rangeeladesi Wrote: वाह, क्या वर्णन है! उत्तम!

(18-02-2026, 04:05 PM)rangeeladesi Wrote: आपकी भाषा बहुत परिष्कृत है. ऐसी भाषा यहां कम ही देखने को मिलती है.

आपका बहुत धन्यवाद.   Namaskar

'आशा' करता हूँ की इस कहानी को आपका पूर्ण समर्थन और प्रेम मिलेगा.
My Current Story:
  ----------
Compromise  Running











Like Reply
#29
(20-02-2026, 11:51 AM)Blackdick11 Wrote: Koi jaldbazi nahi hai. Take your time.

धैर्य और समर्थन के लिए आपका बहुत धन्यवाद.  Namaskar 

कृपया रेपो न भूलें. Namaskar
My Current Story:
  ----------
Compromise  Running











Like Reply
#30
(17-02-2026, 10:31 PM)Bakchod Londa Wrote: कहानी का दूसरा कैरेक्टर—Mr. Randhir Sinha—काफी इंटरेस्टिंग लग रहा है।
छोटी-सी इंट्रो में तो बड़े ही सभ्य और सज्जन टाइप के इंसान दिखते हैं, लेकिन पिछले अपडेट के बाद थोड़ा डाउट तो बनता है कि सच में वैसे ही हैं या कुछ और।
अब तक जिस काम में हाथ डाला, वहाँ सफल ही रहे हैं।
देखना है आशा के मामले में उनकी किस्मत कितनी उनकी साथ देती है

(18-02-2026, 08:38 AM)Loveakb18 Wrote: Hotttt n sexy

(18-02-2026, 03:34 PM)Lovecraft Wrote: Yeh dekhna kafi interesting hoga ki current situation kaise is scene tak lead karti hai.

anyways, quite engaging story and narration.

कहानी और इसके किरदारों के प्रति आप सबकी दिलचस्पी के लिए बहुत धन्यवाद.   Namaskar

नया अपडेट भी पोस्ट कर दिया है अभी. announce
My Current Story:
  ----------
Compromise  Running











[+] 1 user Likes The_Writer's post
Like Reply
#31
Great update
[+] 2 users Like Loveakb18's post
Like Reply
#32
Lovely update, beautifully narrated.

Jaisa randhir babu ne nature hai–weakness towards beautiful & attractive women aur jis tarah asha ban than ke aaye hai interview ke liye. randhir babu ka asha ke husn ke jaal mein phasna aur asha ka job lagna, dono pakki hai!!!

[Image: IMG-20260222-033014.jpg]
[+] 2 users Like Blackdick11's post
Like Reply
#33
रुचि की आकर्षक व्यक्तित्व से रणधीर मोहित हो गया था अगर वो आशा को देख लेगा तो पूरा का पूरा दीवाना हो जाएगा उसके हुस्न का...
[+] 2 users Like Bakchod Londa's post
Like Reply
#34
Marvelous update Heart

[Image: IMG-20260223-103404.jpg]
Asha slaying in red sree.
[+] 2 users Like Lovecraft's post
Like Reply
#35
रोचक वर्णन.
[+] 1 user Likes rangeeladesi's post
Like Reply
#36
(23-02-2026, 10:49 AM)Lovecraft Wrote: Marvelous update Heart

[Image: IMG-20260223-103404.jpg]
Asha slaying in red sree.

katai maal bankar gayi hai. randhir na to keh hi nahi sakta. asha ko dekh ke agar auto wale ladke ka pant m uska lund phadphada raha tha, pata nahi randhir babu ka kya hoga ..
[+] 1 user Likes Lovecraft's post
Like Reply
#37
गेट से लेकर मेन डोर तक सब कुछ साफ-सुथरा और चमक रहा था. डोरबेल बजने पर एक आदमी आ कर दरवाज़ा खोल गया --- नौकर ही होगा शायद— रणधीर बाबू के बारे में पूछने पर बताया कि,

“साहब अभी नाश्ता कर रहे हैं—आप बैठिए.”


सामने सोफ़े की ओर इंगित कर के वह चला गया. आशा उसी सोफे पर बैठ गई… नीर बीच-बीच में जल्दी घर जाने की ज़िद कर रहा था. इसी बीच वही नौकर दो गिलास में पानी दे गया. आशा को प्यास लगी थी, इसलिए पानी गटकने में देर नहीं की. एक प्लेट में कुछ बिस्किट्स भी ले आया था वो आदमी. आशा के कुछ समझने से पहले ही नीर झट से दो बिस्कुट उठाकर अपने मुँह में रख लिया. आशा उसे घूर कर देखी. नीर सहम कर दूसरी तरफ देखने लगा... लेकिन बिस्कुट फिर भी नहीं निकाला मुँह से और जल्दी-जल्दी खा गया.

जहां तक हो सके... जितना हो सके... आशा नज़रें घूमा-घूमा कर उस आलिशान रूम को देखने लगी ---- टाइल्स, मार्बल्स, दीवार घड़ी, टेबल, चेयर्स,सोफ़ा सेट... सब कुछ शायद इम्पोर्टेड ही रखा हुआ है वहाँ! क्या फर्नीचर और क्या खिड़की  के पलड़े --- यहाँ तक की खिड़कियों पर लगे पर्दे भी अपनी ख़ूबसूरती से खुद के बेशकीमती होने के सबूत देना चाह रहे थें.

कुछ मिनटों के बाद अंदर के कमरे से रणधीर बाबू आए. कुरता-पजामा में वो काफ़ी जंच रहे थें — आशा की ओर देखते हुए एक स्वागत वाली मुस्कान दे कर ठीक सामने वाली सोफ़ा चेयर पर बैठ गए. रणधीर बाबू को नमस्ते करके आशा भी बैठ गई. बैठते समय आशा को आगे की ओर थोड़ा झुकना पड़ा था --- और यही झुकना ही शायद उसकी बहुत बड़ी गलती हो गई थी उस दिन. आशा के मुखरे की खूबसूरती देख प्रभावित हुआ रणधीर बाबू अब भी उसी की ओर ही देख रहा था कि तभी वो भी नमस्ते करके बैठते हुए तनिक झुक गई --- और इससे उसका दायाँ स्तन टाइट ब्लाउज-ब्रा कप के कारण ऊपर की ओर ज़्यादा निकल आया! यूँ समझिए की लगभग पूरा ही निकल आया था!! सुनहरी गोल फ्रेम के चश्मे से आशा की ओर देख रहे रणधीर बाबू वो नज़ारा देखते ही क्षण भर में बदहवास सा हो गए... मुँह से पान की पीक निकलते-निकलते रह गई… यहाँ तक की वह निगलना तक भूल गए और इसलिए होंठों के एक किनारे से थोड़ी पीक निकल भी आई. आँख गोल बड़े-बड़े हो गए. हद तो तब हो गई जब 2 सेकंड बाद ही आशा नीर के द्वारा एक बिस्कुट गिरा दिए जाने पर झुक कर कारपेट पर से बिस्कुट उठाने लगी और उसके ऐसा करने से रणधीर बाबू ने शायद अपने जीवन में अब तक का चिर-परिचित किन्तु सबसे सुन्दर नज़ारा देखा होगा... चूची के वजन से दाएँ साइड से साड़ी का पल्ला हट गया थे और तंग ब्लाउज में से उतनी बड़ी चूची एक तो वैसे ही नहीं समा रही थी, और तो और, पूरा ही बाहर निकल आने को बस रत्ती भर की देर थी ---- सिर्फ यही नहीं, करीब-करीब सात इंच का एक लंबा गहरा दूधिया क्लीवेज भी सामने प्रकट हो गया था!


चाहे कितना भी नंगा देख लो, पर अधनंगी चूचियों को देखने में एक अलग ही मज़ा आता है ---- खास कर यदि चूचियों में पुष्टता हो और क्लीवेज की भी एक अच्छी लंबाई व गहराई हो --- ऊपर से रणधीर बाबू तो इन्ही दो चीज़ों पर जान छिड़कते थे.

आशा सीधी होकर बैठ गई — पर पल्लू को ठीक नहीं की. शायद उसका ध्यान नहीं गया होगा. इससे दायीं ब्लाउज कप में कैद दायीं चूची ऊपर को निकली हुई अपनी गोलाई के साथ पल्लू से बाहर झाँकती रही और रणधीर बाबू को एक अनुपम नयनसुख का एहसास कराती रही.


रणधीर बाबू तो जैसे अंदर ही अंदर स्वर्गलाभ करने लगे थे... साथ ही यह दृढ़ निश्चय भी करने लगे कि अगर इसी तरह प्रत्येक दिन दूध वाले सौन्दर्य दर्शन करना है तो उन्हें न सिर्फ़ अभी के अभी इस नायाब माल को नौकरी के लिए हाँ करना है बल्कि बिल्कुल भी इंकार न कर सके ऐसा कोई ज़बरदस्त ऑफर भी करना होगा.

गला खँखारते हुए उन्होंने पूछा,

“यहाँ आते हुए कोई दिक्कत तो नहीं हुई न, आशा जी?”

“नहीं सर, कोई प्रोब्लम नहीं हुई... पर सर, आप प्लीज़ मुझे ‘जी’ कह कर संबोधित मत कीजिए. मैं बहुत छोटी हूँ आपसे—तकरीबन आपकी बेटी की उम्र की हूँ.”


आशा के ऐसा कहते ही एक उत्तेजना वाली लहर दौड़ गई रणधीर बाबू के पूरे शरीर में. अब ध्यान दिया --- आशा की उम्र लगभग उनकी अपनी बेटी की उम्र के आसपास ही होगी. अपने से इतनी कम उम्र की किसी लड़की के साथ सम्बन्ध बनाने की कल्पना मात्र से ही रणधीर बाबू का रोम-रोम एक अद्भुत रोमाँच से भर गया.


पहले तो नहीं, पर अब आशा को अच्छे से देखने से वाकई लग रहा है कि कम से कम 20-22 साल का अंतर तो होगा ही दोनों में --- रणधीर बाबू ने खुद अनुमान लगाया की जब वह खुद 65 के हैं तो आशा तो कम से कम 35-40 की होगी ही... उम्र का ये अंतर भी काफ़ी था उनके पजामे में हरकत करवाने में.

थोड़ी देर तक इधर-उधर की फॉर्मेलिटी पूछ्ताछ के बाद,

“अच्छा आशा, तुम्हारे जवाबों से मुझे संतुष्टि तो हुई है... मम्ममम..... (अब नज़र आशा के बेटे पर गई…) प्यारा बच्चा है, क्या नाम है इसका…?”


आशा ने खुद जवाब न देकर नीर से कहा,

“बाबू... अंकल के निजेर नाम बौलो.” (“बाबू... अंकल को अपना नाम बताओ.”)

तनिक तोतलाते हुए नीर ने जवाब दिया,

“न..नीर.. नीरज... नीरज मुखर्जी…”

रणधीर बाबू उसका जवाब सुनकर हँसते हुए पूछे,

“एंड व्हाट्स योर फादर्स नेम?”




जारी है....

…………………………………………..
My Current Story:
  ----------
Compromise  Running











[+] 2 users Like The_Writer's post
Like Reply
#38
प्रोफेशनल काम में अत्यधिक व्यस्तता के कारण अपडेट लिखने का समय ठीक से मिल नहीं रहा है. अपडेट पोस्ट करने में बहुत ज़्यादा दिन न लग जाए इसलिए आज छोटा अपडेट डाला है.


इस बात के लिए सभी पाठक बंधु, मुझे क्षमा कीजिएगा. Namaskar

साथ ही, स्पेलिंग और ग्रामर मिस्टेक्स अगर हैं तो उस बात के लिए भी क्षमा-प्रार्थी हूँ.  Namaskar
My Current Story:
  ----------
Compromise  Running











[+] 1 user Likes The_Writer's post
Like Reply
#39
(21-02-2026, 05:26 PM)Loveakb18 Wrote: Great update

thanks
My Current Story:
  ----------
Compromise  Running











Like Reply
#40
(22-02-2026, 04:02 AM)Blackdick11 Wrote: Lovely update, beautifully narrated.

Jaisa randhir babu ne nature hai–weakness towards beautiful & attractive women aur jis tarah asha ban than ke aaye hai interview ke liye. randhir babu ka asha ke husn ke jaal mein phasna aur asha ka job lagna, dono pakki hai!!!

[Image: IMG-20260222-033014.jpg]

Good Analysis...

& Thank you for this beautiful pic. happy
My Current Story:
  ----------
Compromise  Running











Like Reply




Users browsing this thread: 2 Guest(s)