10 hours ago
कहानी तो बहुत अच्छी और थ्रिलर है अब देखना है आगे क्या है शिवानी किसकी होती है
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Romance शिवानी और प्रिंस की प्रेम कहानी
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10 hours ago
कहानी तो बहुत अच्छी और थ्रिलर है अब देखना है आगे क्या है शिवानी किसकी होती है
3 hours ago
जावेद की गिरफ्तारी के बाद पटना की हवा में फिर से एक अजीब सी शांति छा गई थी। वो क्लब वाला अपमान – सबके सामने चुदाई – शिवानी के दिमाग में घूमता रहता। प्रिंस ने उसे माफ कर दिया था, लेकिन शिवानी खुद को माफ नहीं कर पा रही थी। “मैंने सबके सामने… अपनी चूत… गांड… सब कुछ जावेद को दे दिया। लेकिन मजा… वो तो आया था।” वो रात को बिस्तर पर लेटकर सोचती, उसके शरीर में वो आग फिर भड़क उठती। प्रिंस अच्छा था, लेकिन अब वो धीमा हो गया था – डर से, या शायद थकान से। नेहा और रिया अभी भी पटना में थीं, करण – वो सिक्युरिटी वाला – घर के पास ही रहता। आरव को दादी के पास भेज दिया गया था कुछ दिनों के लिए। शिवानी ने फैसला किया – “आज रात… सबको बुलाऊँगी। मेरी प्यास… सबके साथ मिटाऊँगी। ये मेरी सबसे जंगली रात होगी।”
शाम को शिवानी ने मैसेज किया – प्रिंस, नेहा, रिया, और करण को। “आज रात 9 बजे घर पर। कोई बहाना मत बनाना। मैं सब कुछ दे दूँगी।” प्रिंस ने रिप्लाई किया, “ठीक है जान। लेकिन क्या?” शिवानी ने सिर्फ इमोजी भेजा – आग का। नेहा ने लिखा, “हॉट प्लान?” रिया ने, “मैं आ रही हूँ।” करण ने, “मैम… आपकी सेफ्टी के लिए।” लेकिन सब जानते थे – ये सेफ्टी का बहाना था। रात 9 बजे। घर का दरवाजा बंद। लाइट्स मंद। बेडरूम में किंग साइज बेड, कंडोम्स, लुब्रिकेंट, टॉयज – सब तैयार। शिवानी ने ब्लैक लेस की नाइटी पहनी – पारदर्शी, उसके भरे स्तनों और गीली चूत के सिल्हूट साफ दिख रहे थे। दरवाजा खुला। प्रिंस आया, उसके पीछे नेहा – रेड मिनी ड्रेस में। फिर रिया – काली बॉडीकॉन ड्रेस में। आखिर में करण – सिविल ड्रेस में, लेकिन उसकी मस्कुलर बॉडी छिप नहीं पा रही थी। शिवानी ने सबको सोफे पर बिठाया। वाइन की बोतल खोली। “आज रात… कोई रोक-टोक नहीं। मैं सेंटर हूँ। सब मिलकर मेरी प्यास बुझाओगे।” प्रिंस मुस्कुराया, “जान… तू तैयार है?” नेहा ने शिवानी का हाथ पकड़ा। रिया ने आँख मारी। करण की आँखें शिवानी के स्तनों पर। शिवानी उठी, म्यूजिक ऑन किया – स्लो, सेक्सी बीट्स। वो डांस करने लगी – हिप्स मूव कर रही थीं, नाइटी ऊपर हो रही थी। सब देख रहे थे। शिवानी ने नेहा को खींचा। नेहा ने उसके होंठ चूसे। फिर रिया। फिर प्रिंस। आखिर में करण – उसका चुंबन सबसे जंगली, जीभ गहरी। सब बेडरूम में। शिवानी ने नाइटी उतार दी। नंगी हो गई – गोरी स्किन, भरे स्तन, निप्पल्स सख्त, चूत गीली, बाल साफ। वो बेड पर लेटी। “शुरू करो… सब मिलकर।” नेहा और रिया दोनों उसके स्तनों पर – नेहा बाएँ, रिया दाएँ। दोनों चूसने लगीं – जोर से, काटने लगीं। शिवानी चीखी, “आह… नेहा… रिया… चूसो… मेरे निप्पल्स फाड़ दो… दूध जैसा रस निकालो…” नेहा ने दाँत से काटा। रिया ने निप्पल्स पर जीभ घुमाई। शिवानी का शरीर काँप रहा था। प्रिंस नीचे आया। शिवानी की टाँगें फैलाईं। चूत पर जीभ डाली। क्लिट चूसने लगा। “प्रिंस… हाँ… जीभ अंदर… मेरी चूत चाटो… रस पी लो…” प्रिंस ने तेज चाटा। करण ने अपना लंड निकाला – 9 इंच का, मोटा। वो शिवानी के मुँह के पास लाया। “मैम… चूसो…” शिवानी ने मुँह खोला, गले तक लिया। गैगिंग कर रही थी। “उफ्फ… करण… तेरा लंड… कितना मोटा… चूसूँगी पूरी रात…” वो चूस रही थी, हाथ से सहला रही थी। प्रिंस नीचे से उँगलियाँ डाल रहा था – तीन उँगलियाँ, तेज फिंगर फक। शिवानी झड़ गई – पहली बार, पानी प्रिंस के मुँह पर। अब पोजीशन बदली। शिवानी डॉगी स्टाइल में – घुटनों पर। प्रिंस पीछे से चूत में लंड डाला। धक्के मारने लगा – जोरदार। “शिवानी… तेरी चूत… आज कितनी गीली…” शिवानी चिल्लाई, “प्रिंस… जोर से… फाड़ दो… मेरी चूत तेरी है…” नेहा शिवानी के नीचे लेटी, चूत चाट रही थी। रिया शिवानी के स्तनों को दबा रही थी। करण मुँह में लंड डाल रहा था। शिवानी का मुँह भरा, चूत भरी, स्तन दबे। वो कराह रही थी – “आह… सब… मिलकर… मुझे चोदो… नेहा… जीभ और अंदर… रिया… निप्पल्स काटो… करण… गले तक धक्का दो… प्रिंस… चूत फाड़…” प्रिंस ने स्पीड बढ़ाई। थप-थप की आवाज। शिवानी फिर झड़ गई। प्रिंस ने स्पर्म अंदर छोड़ा। लेकिन रुका नहीं। करण ने जगह ली – पीछे से चूत में। उसका लंड सबसे मोटा। शिवानी चीखी, “आआह्ह… करण… इतना मोटा… फाड़ दोगे… लेकिन… और गहरा… हाँ… सिक्युरिटी वाला… चोद अपनी मैम को…” करण धक्के मार रहा था – क्रूर, तेज। नेहा अब शिवानी के मुँह पर बैठ गई – फेस-सिटिंग। “भाभी… मेरी चूत चाटो…” शिवानी ने जीभ डाली, नेहा की चूत चाटी। रिया स्ट्रैप-ऑन पहनकर शिवानी की गांड में डालने लगी। डबल पेनेट्रेशन – चूत में करण, गांड में स्ट्रैप-ऑन। शिवानी पागल हो गई। “उफ्फ… दोनों… फाड़ दो… मेरी चूत… गांड… सब भर दो… आह… नेहा… तेरी चूत का रस… स्वादिष्ट… चूसूँगी…” कमरा उनकी चीखों से गूँज रहा था। शिवानी कई बार झड़ी – पानी बहता रहा, बेड गीला हो गया। करण ने स्पर्म चूत में छोड़ा। रिया ने स्ट्रैप-ऑन निकाला। अब नेहा स्ट्रैप-ऑन पहनकर शिवानी को चोदने लगी। प्रिंस ने नेहा को पीछे से पेला। चेन रिएक्शन। रिया शिवानी के स्तनों को चूस रही थी। करण अब रिया की चूत में लंड डाल रहा था। सब मिक्स – एक-दूसरे को चोदते, चाटते। शिवानी बीच में – सबकी भूख का केंद्र। “हाँ… सब… मिलकर… मेरी प्यास बुझाओ… जोर से… चोदो… चूसो… फाड़ दो मुझे…” फिर ग्रुप पोज – शिवानी बीच में लेटी। प्रिंस चूत में, करण गांड में, नेहा और रिया स्तनों पर। डबल पेनेट्रेशन रियल। शिवानी चिल्लाई, “आआह्ह… दो लंड… मेरी चूत और गांड में… फाड़ दो… प्रिंस… करण… और जोर से… धक्के दो… नेहा… रिया… मेरे निप्पल्स चूसो… काटो… आह… मैं मर जाऊँगी मजा से…” धक्के तेज। थप-थप, सिसकारियाँ। शिवानी का शरीर काँप रहा था। वो झड़ी – सबसे बड़ा ऑर्गेज्म, पानी फव्वारा की तरह। प्रिंस और करण दोनों अंदर झड़े – स्पर्म भर गया। नेहा और रिया ने उँगलियाँ डालीं शिवानी की चूत में, स्पर्म चाटा। शावर में फिर शुरू। पानी के नीचे शिवानी को सबने घेरा। करण ने दीवार से सटाकर चोदा। नेहा ने मुँह में उँगलियाँ। रिया ने गांड में। प्रिंस ने स्तन चूसे। शिवानी चीख रही थी, “हाँ… पानी में… चोदो… सब गीले… मेरी चूत… फिर से… आह…” सब फिर झड़े। रात भर चली – बेड पर, फ्लोर पर, किचन में। शिवानी को सबने बारी-बारी चोदा, ग्रुप में। उसकी प्यास पूरी हो गई – या कहें, सबसे जंगली रात बनी। सुबह सब थक कर लेटे। शिवानी बोली, “ये… मेरी बेस्ट रात थी। सबके साथ।” प्रिंस ने किस किया। “हमेशा साथ रहेंगे।”
2 hours ago
जावेद की गिरफ्तारी और क्लब वाले अपमान के बाद शिवानी का मन पूरी तरह टूट चुका था। प्रिंस उसे प्यार करता था, लेकिन वो प्यार अब बोझ लगने लगा था। हर रात जब प्रिंस उसे छूता, शिवानी को लगता – “ये सब कुछ नहीं है। मेरी चूत को और ज्यादा चाहिए… और जोरदार… और ज्यादा लोग… और पैसा… सम्मान नहीं, बस भूख मिटानी है।” आरव अब दादी के पास रहने लगा था – प्रिंस ने कहा था, “बच्चे को सेफ रखना है।” शिवानी अकेली रह गई। घर में सिर्फ वो और अपनी प्यास।
एक रात शिवानी ने फैसला किया। वो पटना के सबसे डार्क इलाके में गई – वो गलियाँ जहाँ रात को पैसा और सेक्स का खेल चलता है। वहाँ एक नया आदमी मिला – नाम था विक्रम सिंह। 45 साल का, मोटा, अमीर, पटना का सबसे बड़ा दलाल और प्रॉपर्टी डीलर। विक्रम शहर की सारी हाई-क्लास रंडियों का मालिक था। वो शिवानी को देखते ही आँखें चमक उठीं। “कौन हो तुम? इतनी हॉट… लेकिन नई लग रही हो।” शिवानी ने सिर झुकाकर कहा, “मैं… पैसा चाहती हूँ। बहुत पैसा। मेरी बॉडी… जो चाहो, ले लो। लेकिन मेरी शर्त – कोई नाम नहीं, कोई सवाल नहीं। बस चोदो… और पैसे दो।” विक्रम हँसा। “अच्छा? तो सुन… शहर की सबसे महंगी रंडी बनना है? तो पहले मुझे साबित कर। आज रात मेरे क्लब में – 10 आदमी हैं। सब अमीर। सब हाई-प्रोफाइल। अगर तू सबको खुश कर देगी… तो तू मेरी हो जाएगी। हर महीने 5 लाख… और हर कस्टमर से अलग-अलग।” शिवानी का दिल तेज धड़का। लेकिन उसने हाँ कह दिया। “ठीक है। आज रात… सबके सामने… मैं तुम्हारी रंडी बनूँगी।” क्लब – वही पुराना क्लब, लेकिन अब प्राइवेट रूम में। अंदर 10 आदमी – बिजनेसमैन, पॉलिटिशियन, सिक्युरिटी ऑफिसर (करण नहीं था, लेकिन उसके जैसे कई)। सब नशे में, सब भूखे। विक्रम ने शिवानी को स्टेज पर बुलाया। “ये है शिवानी… पटना की नई क्वीन। आज रात ये सबकी है। जो सबसे ज्यादा पैसे देगा… वो पहले लेगा।” शिवानी ने ब्लैक लेस की ड्रेस पहनी थी – छोटी, टाइट। विक्रम ने ड्रेस फाड़ दी। शिवानी नंगी खड़ी थी – गोरी स्किन, भरे स्तन, सख्त निप्पल्स, गीली चूत, गोल गांड। सबकी साँसें रुक गईं। शिवानी ने खुद को छुआ – स्तनों को दबाया, चूत पर हाथ फेरा। “आओ… चोदो मुझे… सब मिलकर… मैं तुम सबकी रंडी हूँ।” पहला आदमी – एक मोटा बिजनेसमैन। उसने शिवानी को सोफे पर पटका। लंड निकाला – मोटा, लेकिन छोटा। शिवानी ने मुँह में लिया, चूसा। फिर चूत में डाला। धक्के मारने लगा। शिवानी चिल्लाई, “आह… जोर से… फाड़ दो… पैसा दो… और चोदो…” वो झड़ गई। आदमी ने स्पर्म अंदर छोड़ा। 50 हजार नोट्स फेंके। दूसरा – एक पॉलिटिशियन। उसने शिवानी को घुटनों पर बिठाया। मुँह में लंड डाला। गले तक। शिवानी गैगिंग कर रही थी। “चूस… रंडी… अच्छे से…” शिवानी ने तेज चूसा। फिर वो शिवानी को डॉगी में किया। गांड में लंड डाला। शिवानी चीखी, “आह… गांड फाड़ दो… जोर से… हाँ… पैसा और दो…” वो धक्के मारता रहा। शिवानी की गांड लाल हो गई। स्पर्म अंदर। 1 लाख नोट्स। तीसरा – एक युवा बिजनेसमैन। उसने शिवानी को गोद में उठाया। स्टैंडिंग में चोदा। शिवानी उछल रही थी। “हाँ… गहरा… मेरी चूत… भर दो…” नेहा और रिया जैसी लड़कियाँ भी थीं – वो सबको चाट रही थीं। लेकिन शिवानी सेंटर में थी। चौथा आदमी ने शिवानी की चूत में लंड डाला, पाँचवें ने मुँह में। डबल। शिवानी चीख रही थी, “आह… दोनों… फाड़ दो… मेरी चूत… मुँह… सब भर दो…” छठा आदमी ने गांड में। ट्रिपल पेनेट्रेशन। शिवानी पागल हो गई। “उफ्फ… तीन लंड… मेरे अंदर… आह… जोर से… धक्के दो… मैं शहर की रंडी हूँ… चोदो मुझे… पैसा दो…” सब मिलकर – एक के बाद एक। शिवानी की चूत, गांड, मुँह – सब भरे रहे। पानी बहता रहा। स्पर्म बहता रहा। वो कई बार झड़ी – इतनी बार कि गिनती नहीं। क्लब में तालियाँ। विक्रम देख रहा था। “ये लड़की… गोल्ड माइन है।” आखिर में विक्रम खुद आया। उसका लंड सबसे बड़ा। शिवानी को स्टेज पर लिटाया। सब देख रहे थे। विक्रम ने लंड चूत में डाला – पूरा। शिवानी चीखी, “आआह्ह… विक्रम… फाड़ दो… मेरी चूत… शहर की सबसे महंगी रंडी… तेरी है…” विक्रम धक्के मारने लगा – जंगली, बेरहम। शिवानी की चीखें कमरे में गूँज रही थीं। “जोर से… गांड भी… दोनों… ट्रिपल… हाँ… स्पर्म अंदर… भर दो…” विक्रम ने चूत में झड़ा। फिर गांड में। फिर मुँह में। शिवानी सब पी गई। रात खत्म हुई। शिवानी पसीने, स्पर्म और पानी से तर। नोट्स बिखरे हुए। विक्रम ने कहा, “तू अब मेरी हो। हर हफ्ते 10 क्लाइंट। 10 लाख महीना।” शिवानी ने मुस्कुरा कर कहा, “ठीक है… लेकिन मेरी शर्त – कोई नाम नहीं। बस चोदो और पैसे दो।” घर लौटी। प्रिंस सो रहा था। शिवानी बाथरूम में गई। नहाई। लेकिन उसकी आँखों में अब नई चमक थी। “ये जिंदगी… ये प्यास… ये पैसा… अब यही मेरी जिंदगी है।” अगले दिन विक्रम ने नया क्लाइंट दिया – एक बड़ा पॉलिटिशियन। शिवानी तैयार हुई। लेकिन मन में एक छोटा सा डर – प्रिंस को पता चलेगा तो? आरव को? लेकिन वो डर अब मजा बन चुका था। शिवानी अब पटना की सबसे महंगी रंडी बन चुकी थी। शहर की गलियाँ उसकी कहानी सुनातीं। लेकिन प्रिंस को अभी भी पता नहीं था। या पता था… और वो चुप था?
2 hours ago
शिवानी की नई जिंदगी अब पूरी तरह बदल चुकी थी। विक्रम के अंडर में काम करते हुए उसे हर हफ्ते 10-15 क्लाइंट मिलते – अमीर आदमी, जो उसकी बॉडी के लिए लाखों फेंकते। पैसा आ रहा था, लेकिन शिवानी की प्यास कभी कम नहीं हुई। वो रात को घर लौटती, प्रिंस सो रहा होता, और वो बाथरूम में जाकर खुद को उँगलियों से संतुष्ट करती। “प्रिंस… तू अच्छा है… लेकिन मुझे और ज्यादा चाहिए… और गहरा… और जोरदार…” आरव दादी के पास था, प्रिंस काम में व्यस्त। शिवानी अब शहर की सबसे महंगी रंडी बन चुकी थी – लेकिन उसके अंदर की वो औरत, जो प्यार और जुनून चाहती थी, अभी भी तड़प रही थी।
एक रात विक्रम ने शिवानी को फोन किया। “शिवानी… आज एक स्पेशल क्लाइंट है। नाम है फरहान। 35 साल का, ,.,, शहर का सबसे बड़ा राइवल दलाल। वो मुझे चैलेंज कर रहा है – कह रहा है कि तू मेरी सबसे अच्छी रंडी है, लेकिन वो तुझे चुरा लेगा। आज रात उसके साथ जा। लेकिन याद रख… तू मेरी है।” शिवानी का दिल धड़का। फरहान – वो नाम सुना था। अहमद का पुराना साथी, जावेद का दोस्त। फरहान अब पटना के डार्क वर्ल्ड का किंग था – ड्रग्स, प्रॉस्टिट्यूशन, और ब्लैकमनी का खेल। वो विक्रम का राइवल था, और शिवानी को लेकर दोनों के बीच जंग चल रही थी। फरहान ने विक्रम को मैसेज किया था – “शिवानी को भेज। एक रात में उसे अपनी बना लूँगा। 10 लाख दूँगा… अगर वो मेरी हो गई तो।” शिवानी तैयार हुई – ब्लैक साड़ी, ट्रांसपेरेंट ब्लाउज, अंदर कुछ नहीं। उसकी सेक्सी फिगर – 5 फीट की ऊँचाई, पतली कमर, भरे कूल्हे, उभरी छाती – सब उभर रही थी। वो फरहान के प्राइवेट विला में पहुँची – गंगा किनारे, बड़ा घर, गार्ड बाहर। फरहान ने दरवाजा खोला – लंबा कद, मस्कुलर बॉडी, घनी दाढ़ी, आँखें गहरी और डरावनी लेकिन सेक्सी। “आओ शिवानी… मैं इंतजार कर रहा था।” उसकी आवाज भारी थी। शिवानी अंदर आई। घर में मंद रोशनी, अगरबत्ती की खुशबू, और बेडरूम में बड़ा बेड। फरहान ने दरवाजा बंद किया। “विक्रम ने भेजा? लेकिन आज रात तू मेरी हो जाएगी। मैं तेरी प्यास इतनी गहराई से बुझाऊँगा कि तू कभी वापस नहीं जाना चाहेगी।” शिवानी शर्मा गई, लेकिन उसकी चूत गीली हो गई। “फरहान… ये सिर्फ एक रात है। पैसा दो और…” फरहान ने उसे दीवार से सटा दिया। “पैसा? मैं तुझे दुनिया दे सकता हूँ। लेकिन पहले… तुझे महसूस कराऊँगा।” वो शिवानी का चेहरा अपने हाथों में लिया। चुंबन शुरू – धीमा, लेकिन गहरा। उसकी जीभ शिवानी के मुँह में घुस गई, खेलने लगी। शिवानी की साँसें तेज। फरहान की दाढ़ी उसके गालों पर रगड़ रही थी – एक नई सेंसेशन, दर्द और मजा का मिश्रण। शिवानी ने जवाब दिया – उसकी जीभ फरहान की जीभ से लड़ने लगी। चुंबन लंबा चला – मिनटों तक। फरहान के हाथ शिवानी की कमर पर, फिर कूल्हों पर। वो दबा रहा था – जोर से, जैसे वो उसकी बॉडी को जीत रहा हो। शिवानी की सिसकारी निकली, “उफ्फ… फरहान… धीरे…” फरहान ने साड़ी का पल्लू सरकाया। ब्लाउज के हुक खोल दिए। शिवानी के स्तन बाहर – गुलाबी निप्पल्स, सख्त। फरहान ने एक स्तन हाथ में लिया, दबाया। “कितने नरम… लेकिन सख्त निप्पल्स… तेरे शरीर में आग है शिवानी…” वो मुँह में लिया – चूसने लगा, जीभ से घुमाया, दाँत से हल्के से काटा। शिवानी चीखी, “आह… फरहान… चूसो जोर से… मेरे निप्पल्स फाड़ दो… दर्द दो… मजा दो…” फरहान ने जोर से चूसा, जैसे दूध निकाल रहा हो। शिवानी की पीठ दीवार से सटी, शरीर काँप रहा था। फरहान का दूसरा हाथ शिवानी की चूत पर – साड़ी के ऊपर से। वो रगड़ रहा था। शिवानी की पैंटी गीली हो चुकी थी। “फरहान… वहाँ… रगड़ो… उँगली डालो…” फरहान ने साड़ी पूरी उतार दी। शिवानी नंगी खड़ी थी। फरहान ने उसे बेड पर धक्का दिया। शिवानी लेटी। फरहान उसके ऊपर – लेकिन अभी नहीं चोद रहा था। वो शिवानी के शरीर पर किस करता रहा – गर्दन से शुरू, छाती, पेट, फिर टाँगों के बीच। उसकी दाढ़ी हर जगह रगड़ रही थी – दर्द और टिक्लिंग का मिश्रण। फरहान ने शिवानी की चूत पर साँसें छोड़ीं – गर्म साँसें। शिवानी तड़प उठी, “फरहान… चाटो… जीभ डालो…” फरहान ने जीभ से छुआ – क्लिटोरिस पर। धीरे-धीरे चाटने लगा। शिवानी की सिसकारियाँ तेज – “आह… हाँ… वहाँ… चूसो… मेरी क्लिट… उफ्फ… और गहरा…” फरहान ने जीभ अंदर डाली, क्लिट चूसने लगा जैसे कोई जूस हो। उसने दो उँगलियाँ डालीं – अंदर-बाहर, कर्व्ड करके G-स्पॉट पर हिट कर रहा था। शिवानी का शरीर आर्क हो गया – “फरहान… उँगलियाँ… तेज… मैं झड़ रही हूँ… आआह्ह…” वो झड़ गई – पानी फरहान के मुँह पर। फरहान ने सब चाट लिया। “तेरा रस… कितना मीठा… मैं तेरी चूत का गुलाम बन जाऊँगा।” फरहान उठा। अपनी पैंट उतारी। लंड बाहर – 10 इंच का, मोटा, नसें फूली, सिर लाल और चमकदार। शिवानी ने देखा, उसकी आँखें फैल गईं। “फरहान… इतना बड़ा… डालो… लेकिन धीरे…” फरहान मुस्कुराया। “धीरे? नहीं… आज गहरा… इंटेंस…” वो शिवानी की टाँगें कंधों पर रखा। लंड चूत पर रगड़ा – ऊपर-नीचे, क्लिट पर। शिवानी तड़प रही थी, “डालो ना… सहन नहीं होता…” फरहान ने धीरे से सिर डाला – फिर एक झटके में आधा अंदर। शिवानी चीखी – “आआह्ह… दर्द… लेकिन… और… पूरा डालो…” फरहान ने पूरा अंदर कर दिया। शिवानी की चूत स्ट्रेच हो गई – दर्द, लेकिन गहरा मजा। फरहान रुका – लंड अंदर, हिलाए बिना। शिवानी की आँखें उसकी आँखों में – “फरहान… तेरा लंड… मेरी चूत में… महसूस कर रही हूँ… हर नस…” फरहान ने धीरे-धीरे धक्के शुरू किए – गहरे, लेकिन स्लो। हर धक्के में पूरा बाहर, फिर पूरा अंदर। शिवानी की सिसकारियाँ – “आह… हाँ… गहरा… महसूस कर… मेरी चूत तेरे लंड को निचोड़ रही है… जोर से… अब तेज…” फरहान ने स्पीड बढ़ाई – अब जंगली धक्के। बेड हिल रहा था। थप-थप की आवाज। शिवानी की छाती उछल रही थी। वो फरहान की पीठ पर नाखून गाड़ रही थी – खून निकल आया। “फरहान… जोर से… मेरी चूत फाड़ दो… मैं तेरी रंडी हूँ… चोद… और तेज… आह… हाँ… मैं झड़ रही हूँ…” शिवानी झड़ गई – उसकी चूत सिकुड़ी, फरहान के लंड को निचोड़ा। फरहान नहीं रुका – और तेज। शिवानी की आँखें बंद, मुस्कान चेहरे पर – दर्द और मजा का परफेक्ट मिश्रण। फरहान ने पोजीशन बदली – शिवानी को ऊपर। शिवानी उछलने लगी – लंड अंदर-बाहर। “फरहान… देख… मैं तेरे लंड पर नाच रही हूँ… मेरी चूत… तेरे लंड को खा रही है… आह… हाँ…” फरहान नीचे से धक्के मार रहा था, शिवानी के कूल्हे पकड़े। शिवानी की छाती उसके मुँह में – वो चूस रहा था, काट रहा था। शिवानी फिर झड़ गई – पानी फरहान के लंड पर। फिर डॉगी – शिवानी घुटनों पर। फरहान पीछे से। बाल पकड़े, गांड पर थप्पड़। “तेरी गांड… कितनी सेक्सी… आज इसे भी लूँगा।” उसने लुब्रिकेंट लगाया – उँगली से शिवानी की गांड में। शिवानी सिसकारी, “हाँ… उँगली… और अंदर… तैयार कर…” फरहान ने लंड सिर डाला – धीरे-धीरे पूरा अंदर। शिवानी दर्द से चीखी – “आह… दर्द… लेकिन… मत रुको… पूरा… फाड़ दो मेरी गांड…” फरहान ने धक्के शुरू – गहरे, तेज। शिवानी की चीखें मजा में – “उफ्फ… फरहान… मेरी गांड… तेरे लंड के लिए बनी है… जोर से… थप्पड़ मारो… बाल खींचो… आह… हाँ… मैं फिर झड़ रही हूँ…” फरहान ने स्पीड बढ़ाई – हर धक्के में उसका शरीर शिवानी की गांड से टकराता। शिवानी का शरीर पसीने से तर, आँखें नम, लेकिन मुस्कान। “फरहान… स्पर्म… मेरी गांड में… भर दो… गरम स्पर्म…” फरहान ने जोर का धक्का मारा – गरम स्पर्म शिवानी की गांड में छोड़ दिया। शिवानी काँप उठी – उसका सबसे गहरा ऑर्गेज्म। दोनों थक कर लेट गए। फरहान ने शिवानी को गले लगाया – “शिवानी… तू मेरी हो गई ना?” शिवानी की आँखों में आँसू – “हाँ… लेकिन ये सिर्फ रात है… विक्रम को मत बताना।” लेकिन फरहान हँसा – “विक्रम? वो मेरा आदमी है। मैंने तुझे चेक किया… अब तू मेरी रंडी है। शहर की क्वीन… लेकिन मेरी।” शिवानी चौंक गई। फरहान विक्रम का राइवल नहीं था – वो उसका बॉस था। सब साजिश थी। शिवानी रो पड़ी – लेकिन उसके शरीर में संतुष्टि थी। “फरहान… अब क्या?” फरहान ने कहा, “अब तू मेरे साथ दिल्ली चलेगी। नई जिंदगी… और ज्यादा पैसा… और ज्यादा चुदाई। प्रिंस को छोड़। आरव को ले लेंगे।” शिवानी का दिल टूटा – लेकिन उसकी प्यास ने हाँ कह दिया। वो घर लौटी। प्रिंस सो रहा था। वो नोट छोड़कर चली गई – “माफ कर देना… मैं जा रही हूँ। आरव को देखना।” फरहान के साथ दिल्ली। अब शिवानी दिल्ली की सबसे महंगी रंडी बन चुकी थी – फरहान की। लेकिन क्या ये अंत है? या प्रिंस आएगा वापस लाने?
2 hours ago
दिल्ली में शिवानी की जिंदगी अब एक अलग ही रंग ले चुकी थी। फरहान ने उसे एक लग्जरी अपार्टमेंट में रखा था – हाई-फ्लोर, गंगा जैसी नदी का व्यू, लेकिन वो नदी अब पटना की याद दिलाती थी। फरहान शिवानी को रोज चोदता – कभी बेड पर, कभी बालकनी में, कभी कार में। लेकिन शिवानी की प्यास कभी कम नहीं होती। वो सोचती, “फरहान अच्छा है… लेकिन मुझे और चाहिए… और गहरा… और ज्यादा लोग… और वो दर्द जो मजा दे।” फरहान को पता था – शिवानी अब उसकी रंडी नहीं, बल्कि उसकी सबसे बड़ी कमाई का स्रोत थी। वो उसे हाई-प्रोफाइल क्लाइंट्स के लिए भेजता – लेकिन शिवानी अब सिर्फ पैसों के लिए नहीं, अपनी भूख के लिए करती थी।
एक शाम फरहान ने कहा, “शिवानी… आज एक स्पेशल क्लाइंट है। नाम है रेहान खान। मेरा पुराना राइवल। वो मुंबई से आया है। कह रहा है कि वो तुझे एक रात में तोड़ देगा। अगर तू उसे खुश कर देगी… तो वो मेरा बिजनेस छोड़ देगा। लेकिन अगर नहीं… तो वो तुझे चुरा लेगा।” शिवानी की आँखें चमक उठीं। “रेहान खान? वो कौन?” फरहान ने बताया, “मेरा पुराना दुश्मन। अहमद का भी साथी था। अब मुंबई का सबसे बड़ा दलाल। उसका लंड… सबसे बड़ा और क्रूर माना जाता है। वो औरतों को तोड़ता है। लेकिन तू… तू उससे लड़ सकती है।” शिवानी ने मुस्कुरा कर कहा, “ठीक है। आज रात… मैं उसे तोड़ूँगी।” फरहान ने उसे एक प्राइवेट पेंटहाउस का पता दिया – मुंबई स्टाइल, लेकिन दिल्ली में। रात 10 बजे शिवानी वहाँ पहुँची। काली साड़ी, लो बैक ब्लाउज, अंदर कुछ नहीं। रेहान ने दरवाजा खोला – 38 साल का, लंबा, चौड़ा सीना, घनी दाढ़ी, आँखें लाल – नशे और भूख से। वो शिवानी को देखकर हँसा। “शिवानी… फरहान की क्वीन। आज तू मेरी होगी।” रेहान ने शिवानी को अंदर खींचा। कमरा बड़ा था – बड़ा बेड, मिरर दीवारों पर, लाइट्स रेड। रेहान ने दरवाजा बंद किया। “पहले… तुझे चखूँगा।” वो शिवानी को दीवार से सटा दिया। चुंबन – जंगली, दाँत कट रहे थे। उसकी जीभ शिवानी के मुँह में घुस गई, गले तक। शिवानी की साँस रुक गई। रेहान की दाढ़ी उसके गालों, गर्दन पर रगड़ रही थी – दर्द इतना कि शिवानी की आँखों में आँसू आ गए, लेकिन चूत गीली हो गई। “रेहान… धीरे…” लेकिन रेहान ने साड़ी का पल्लू फाड़ दिया। ब्लाउज के हुक तोड़ दिए। शिवानी के स्तन बाहर – निप्पल्स सख्त, लाल। रेहान ने एक स्तन हाथ में लिया, इतना जोर से दबाया कि शिवानी चीखी – “आह… दर्द… लेकिन… और…” रेहान ने मुँह में लिया – चूसने लगा, दाँत से काटा, जैसे खा रहा हो। शिवानी की पीठ दीवार से रगड़ रही थी। “रेहान… चूसो… मेरे निप्पल्स… फाड़ दो… दर्द दो… मजा दो…” रेहान ने शिवानी को बेड पर पटका। साड़ी पूरी फाड़ दी। शिवानी नंगी लेटी थी। रेहान ने अपनी शर्ट उतारी – उसके सीने पर टैटू, मस्कुलर बॉडी। पैंट उतारी। लंड बाहर – 11 इंच का, सबसे मोटा, काला, नसें फूली, सिर बड़ा। शिवानी की आँखें फैल गईं। “रेहान… ये… इतना बड़ा… नहीं आएगा…” रेहान हँसा। “आएगा… और फाड़ेगा।” वो शिवानी की टाँगें फैलाईं। लंड चूत पर रगड़ा – ऊपर-नीचे, क्लिट पर दबाव। शिवानी तड़प रही थी, “डालो… सहन नहीं होता… लेकिन धीरे…” रेहान ने सिर डाला – धीरे-धीरे। शिवानी की चूत स्ट्रेच हो गई – दर्द इतना कि वो चीखी, “आआआह्ह्ह… दर्द… फाड़ रहा है… लेकिन… मत रुको… पूरा…” रेहान ने आधा अंदर किया, रुका। शिवानी की साँसें तेज। “रेहान… महसूस कर… तेरा लंड मेरी चूत में… हर नस… हर धड़कन…” रेहान ने धीरे-धीरे पूरा अंदर कर दिया। शिवानी का शरीर आर्क हो गया – दर्द और मजा का परफेक्ट बैलेंस। “आह… पूरा… गहरा… अब धक्के… जोर से…” रेहान ने धक्के शुरू किए – स्लो, लेकिन बहुत गहरे। हर धक्के में पूरा बाहर, फिर पूरा अंदर। शिवानी की चूत उसके लंड को निचोड़ रही थी। “रेहान… गहरा… महसूस कर… मेरी चूत तेरे लंड को प्यार कर रही है… अब तेज… फाड़ दो…” रेहान ने स्पीड बढ़ाई – अब जंगली धक्के। बेड हिल रहा था। थप-थप की आवाज कमरे में गूँज रही थी। शिवानी की छाती उछल रही थी। वो रेहान की पीठ पर नाखून गाड़ रही थी – खून निकल आया। “रेहान… जोर से… मेरी चूत… तेरे लंड के लिए बनी है… आह… हाँ… और गहरा… मैं झड़ रही हूँ…” शिवानी झड़ गई – उसकी चूत सिकुड़ी, पानी बहा। रेहान नहीं रुका – और तेज। शिवानी की आँखें नम, लेकिन मुस्कान – “फाड़ दो… दर्द दो… मजा दो… मैं तेरी रंडी हूँ… चोद… पूरी रात…” पोजीशन बदली – शिवानी ऊपर। वो उछलने लगी – लंड अंदर-बाहर। “रेहान… देख… मैं तेरे लंड पर नाच रही हूँ… मेरी चूत… तेरे लंड को निचोड़ रही है… आह… हाँ…” रेहान नीचे से धक्के मार रहा था, शिवानी के कूल्हे पकड़े। वो शिवानी के स्तनों को दबा रहा था, निप्पल्स काट रहा था। शिवानी फिर झड़ गई – पानी रेहान के लंड पर। फिर डॉगी – शिवानी घुटनों पर। रेहान पीछे से। बाल पकड़े, गांड पर थप्पड़ – जोरदार। शिवानी की गांड लाल। “तेरी गांड… आज इसे भी लूँगा।” उसने लुब्रिकेंट लगाया – उँगली से शिवानी की गांड में। शिवानी सिसकारी, “हाँ… उँगली… और अंदर… तैयार कर…” रेहान ने लंड सिर डाला – धीरे-धीरे पूरा अंदर। शिवानी दर्द से चीखी – “आह… दर्द… फाड़ रहा है… लेकिन… मत रुको… पूरा… फाड़ दो मेरी गांड…” रेहान ने धक्के शुरू – गहरे, तेज। शिवानी की चीखें मजा में – “उफ्फ… रेहान… मेरी गांड… तेरे लंड के लिए बनी है… जोर से… थप्पड़ मारो… बाल खींचो… आह… हाँ… मैं फिर झड़ रही हूँ…” रेहान ने स्पीड बढ़ाई – हर धक्के में उसका शरीर शिवानी की गांड से टकराता। शिवानी का शरीर पसीने से तर, आँखें नम, लेकिन वो चिल्ला रही थी, “स्पर्म… मेरी गांड में… भर दो… गरम स्पर्म… आह…” रेहान ने जोर का धक्का मारा – गरम स्पर्म शिवानी की गांड में छोड़ दिया। शिवानी काँप उठी – उसका सबसे गहरा, सबसे लंबा ऑर्गेज्म। दोनों थक कर लेट गए। रेहान ने शिवानी को गले लगाया – “शिवानी… तू मेरी हो गई। फरहान को छोड़। मेरे साथ मुंबई चलेगी।” शिवानी की आँखों में आँसू – “रेहान… ये रात… सबसे गहरी थी… लेकिन मैं… मैं अब किसी की नहीं। मैं अपनी हूँ।” शिवानी उठी। कपड़े पहने। रेहान ने 20 लाख नोट्स दिए। “ये तेरे लिए।” शिवानी ने लिए – लेकिन मन में फैसला था। वो दिल्ली छोड़कर पटना लौटने वाली थी। प्रिंस के पास। आरव के पास। लेकिन क्या वो वापस आ पाएगी? या फरहान और रेहान की जंग में फँस जाएगी?
2 hours ago
दिल्ली की चमचमाती रातें अब शिवानी की जिंदगी का हिस्सा बन चुकी थीं। फरहान का लग्जरी अपार्टमेंट – जहां से दिल्ली की स्काईलाइन दिखती, वो जगह अब शिवानी का कैदखाना और जुनून का अड्डा दोनों थी। फरहान – वो ,., किंगपिन – शिवानी को हर रात चोदता, लेकिन वो चुदाई अब रूटीन हो गई थी। शिवानी की चूत में वो आग अब भी जल रही थी, जो कभी बुझती नहीं। वो सोचती, “फरहान… तू अच्छा है… लेकिन मुझे और चाहिए। गहरा दर्द… वो थ्रिल जो जान ले ले। और इंटरफेथ का वो मजा… * लड़की ,., लंडों से चुदते हुए… वो अपमान और मजा का मिश्रण।” लेकिन फरहान ने शिवानी को सख्ती से बाँध रखा था – “तू मेरी रंडी है। बाहर किसी से मिली तो आरव को ले लूँगा।” सस्पेंस की शुरुआत यहीं से हुई। शिवानी को पता चला – फरहान ने उसके फोन में ट्रैकर लगाया था। वो हर कदम देख रहा था।
एक शाम फरहान ने कहा, “शिवानी… आज एक नया क्लाइंट है। नाम है असलम। मेरा पुराना राइवल। वो कराची से आया है, लेकिन दिल्ली में बिजनेस है। वो तुझे देखकर बोला है – ‘तेरी * रंडी को एक रात देदे, मैं उसे तोड़ दूँगा।’ अगर तू उसे खुश कर देगी… तो वो मेरे साथ सौदा करेगा। नहीं तो… वो तुझे चुरा लेगा।” शिवानी का दिल धड़का। असलम – एक और ,.,, पाकिस्तानी बैकग्राउंड, दिल्ली के डार्क वर्ल्ड का खिलाड़ी। वो फरहान का राइवल था – ड्रग्स और प्रॉस्टिट्यूशन की जंग में। असलम ने फरहान को चैलेंज किया था – “शिवानी को भेज। अगर वो मेरी हो गई… तो तेरा बिजनेस मुंबई में बंद।” सस्पेंस बढ़ गया – शिवानी जानती थी, अगर असलम जीता… तो फरहान उसे मार देगा। या असलम उसे ले जाएगा। थ्रिलर का खेल शुरू हो गया। शिवानी तैयार हुई – लाल साड़ी, पारदर्शी ब्लाउज, अंदर कुछ नहीं। उसके निप्पल्स कपड़े से उभर रहे थे, कमर पतली, कूल्हे भरे। वो असलम के होटल सुइट में पहुँची – 5-स्टार, टॉप फ्लोर, जहां से दिल्ली की लाइट्स चमक रही थीं। असलम ने दरवाजा खोला – 40 साल का, काला रंग, मोटी दाढ़ी, आँखें शिकारी जैसी, बॉडी बॉडीबिल्डर जैसी। “शिवानी… आ गई। फरहान की * माल। आज रात तू मेरी बनेगी।” उसकी आवाज में धमकी थी। शिवानी काँप गई, लेकिन उसकी चूत में सिहरन दौड़ गई। “असलम… ये सिर्फ एक रात है।” असलम हँसा – “एक रात में तुझे इतना चोदूँगा कि तू फरहान को भूल जाएगी।” असलम ने शिवानी को खींचकर बालकनी में ले गया – बाहर दिल्ली की हवा, नीचे शहर की लाइट्स। वो शिवानी को रेलिंग से सटा दिया। साड़ी का पल्लू सरकाया। ब्लाउज खोला। स्तन बाहर – असलम ने दोनों हाथों से दबाए, इतना जोर से कि शिवानी चीखी – “आह… असलम… दर्द… लेकिन… और जोर से…” असलम ने मुँह में लिया – चूसने लगा, काटने लगा। दाँत से निप्पल्स खींचे। शिवानी की सिसकारियाँ हवा में गूँज रही थीं। “उफ्फ… असलम… मेरे निप्पल्स… फाड़ दो… काटो… दर्द दो… मजा आ रहा है…” असलम की दाढ़ी उसके स्तनों पर रगड़ रही थी – दर्द इतना कि शिवानी की आँखों में आँसू, लेकिन चूत गीली। असलम ने हाथ नीचे किया – साड़ी ऊपर, चूत पर उँगली। “देख… कितनी गीली… * रंडी… ,., लंड के लिए तड़प रही है।” शिवानी रोते हुए बोली, “हाँ… तड़प रही हूँ… डालो… लेकिन बाहर… कोई देख लेगा…” असलम हँसा – “देख ले… तू शहर की रंडी है।” असलम ने पैंट उतारी। लंड बाहर – 12 इंच का, सबसे मोटा, काला, नसें फूली, सिर बड़ा। शिवानी की साँस रुक गई। “असलम… ये… नहीं आएगा… फाड़ देगा…” असलम ने शिवानी को रेलिंग पर झुकाया – गांड बाहर की तरफ। लंड चूत पर रगड़ा – हवा में, लाइट्स में। “आएगा… और फाड़ेगा…” असलम ने सिर डाला – धीरे-धीरे। शिवानी चीखी – “आआआह्ह… दर्द… फाड़ रहा है… लेकिन… मत रुको… पूरा डालो…” असलम ने आधा अंदर किया, रुका। शिवानी की चूत स्ट्रेच हो गई – दर्द इतना गहरा कि वो रोने लगी, लेकिन मजा इतना कि वो खुद पीछे धक्का देने लगी। “असलम… महसूस कर… तेरा लंड मेरी चूत में… हर नस… हर धड़कन… गहरा… और गहरा…” असलम ने पूरा अंदर कर दिया। शिवानी का शरीर हिल गया – दर्द और मजा का तूफान। “आह… पूरा… अब धक्के… जोर से… फाड़ दो मेरी चूत…” असलम ने धक्के शुरू किए – स्लो लेकिन बेहद गहरे। हर धक्के में पूरा बाहर, फिर पूरा अंदर। शिवानी की चूत उसके लंड को निचोड़ रही थी। बालकनी की रेलिंग हिल रही थी। शिवानी चिल्ला रही थी, “आह… हाँ… गहरा… महसूस कर… मेरी चूत तेरे लंड को प्यार कर रही है… अब तेज… फाड़ दो…” असलम ने स्पीड बढ़ाई – अब क्रूर धक्के। थप-थप की आवाज हवा में गूँज रही थी। शिवानी की छाती उछल रही थी। वो असलम की पीठ पर नाखून गाड़ रही थी – खून निकल आया। “असलम… जोर से… मेरी चूत… तेरे लंड के लिए बनी है… आह… हाँ… और गहरा… मैं झड़ रही हूँ…” शिवानी झड़ गई – उसकी चूत सिकुड़ी, पानी बहा, असलम के लंड पर। असलम नहीं रुका – और तेज। शिवानी की आँखें बंद, मुस्कान चेहरे पर – दर्द और मजा का परफेक्ट फ्यूजन। “फाड़ दो… दर्द दो… मजा दो… मैं तेरी * रंडी हूँ… चोद… पूरी रात…” पोजीशन बदली – असलम ने शिवानी को गोद में उठाया। स्टैंडिंग में चोदा – बालकनी पर, शहर की लाइट्स के सामने। शिवानी उछल रही थी, “असलम… देख… दिल्ली देख रही है… तेरी * रंडी चुद रही है… आह… हाँ… गहरा…” असलम धक्के मार रहा था, शिवानी के कूल्हे पकड़े। वो शिवानी के स्तनों को काट रहा था, गर्दन पर दाढ़ी रगड़ रहा था। शिवानी फिर झड़ गई – पानी नीचे गिरा। फिर बेड पर – डॉगी स्टाइल। असलम पीछे से। बाल पकड़े, गांड पर थप्पड़ – इतने जोर से कि निशान पड़ गए। “तेरी गांड… आज इसे भी फाड़ूँगा।” असलम ने लुब्रिकेंट लगाया – उँगली से शिवानी की गांड में। शिवानी सिसकारी, “हाँ… उँगली… और अंदर… तैयार कर…” असलम ने लंड सिर डाला – धीरे-धीरे पूरा अंदर। शिवानी दर्द से चीखी – “आह… दर्द… फाड़ रहा है… लेकिन… मत रुको… पूरा… फाड़ दो मेरी गांड…” असलम ने धक्के शुरू – गहरे, तेज। शिवानी की चीखें मजा में – “उफ्फ… असलम… मेरी गांड… तेरे लंड के लिए बनी है… जोर से… थप्पड़ मारो… बाल खींचो… आह… हाँ… मैं फिर झड़ रही हूँ…” असलम ने स्पीड बढ़ाई – हर धक्के में उसका शरीर शिवानी की गांड से टकराता। शिवानी का शरीर पसीने से तर, आँखें नम, लेकिन वो चिल्ला रही थी, “स्पर्म… मेरी गांड में… भर दो… गरम स्पर्म… आह…” असलम ने जोर का धक्का मारा – गरम स्पर्म शिवानी की गांड में छोड़ दिया। शिवानी काँप उठी – उसका सबसे गहरा, सबसे लंबा ऑर्गेज्म। दोनों थक कर लेट गए। असलम ने शिवानी को गले लगाया – “शिवानी… तू मेरी हो गई। फरहान को छोड़। मेरे साथ मुंबई चलेगी।” शिवानी की आँखों में आँसू – “असलम… ये रात… सबसे गहरी थी… लेकिन मैं… मैं अब किसी की नहीं। मैं अपनी हूँ।” शिवानी उठी। कपड़े पहने। असलम ने 20 लाख नोट्स दिए। “ये तेरे लिए।” शिवानी ने लिए – लेकिन मन में फैसला था। वो दिल्ली छोड़कर पटना लौटने वाली थी। प्रिंस के पास। आरव के पास। लेकिन क्या वो वापस आ पाएगी? या फरहान और असलम की जंग में फँस जाएगी?
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दिल्ली की चकाचौंध में शिवानी की जिंदगी अब एक थ्रिलर फिल्म जैसी हो चुकी थी। फरहान का अपार्टमेंट – जहां वो हर रात चुदाई की दावत देता – अब कैद जैसा लगता। फरहान शिवानी को कहता, “तू मेरी है… मेरी * रंडी। मैं तुझे ,., लंड से इतना चोदूँगा कि तू प्रिंस को भूल जाएगी।” लेकिन शिवानी की आँखों में पटना की यादें थीं – प्रिंस की बाहें, आरव की मुस्कान। वो चुपके से प्रिंस को मैसेज करती, लेकिन फरहान का ट्रैकर सब देखता। सस्पेंस की शुरुआत यहीं से हुई – शिवानी को पता चला कि फरहान ने उसके शरीर पर एक छोटा सा ट्रैकर चिपका दिया था – दिल के पास, जहां कोई नहीं देखता। “अगर भागी… तो मैं आरव को मार दूँगा।” फरहान की धमकी। शिवानी रोती, लेकिन उसकी चूत में वो आग जलती रहती – इंटरफेथ का मजा, ,., मर्दों की क्रूरता, * लड़की का अपमान।
एक दिन फरहान ने कहा, “शिवानी… आज एक नया क्लाइंट है। नाम है अब्दुल्लाह। वो दुबई से आया है, एक बड़ा शेख। ,.,, धार्मिक, लेकिन सेक्स का भूखा शेर। वो फरहान का राइवल है – बिजनेस में, और अब तुझे लेकर। वो कह रहा है, ‘तेरी * माल को एक रात देदे, मैं उसे अपनी हवस से तोड़ दूँगा।’ अगर तू उसे खुश कर देगी… तो वो मेरे साथ सौदा करेगा – दिल्ली का बिजनेस आधा-आधा। नहीं तो… वो तुझे किडनैप कर लेगा दुबई।” शिवानी का दिल धड़का – ड्रामा की शुरुआत। अब्दुल्लाह – एक नया ,., राइवल, 45 साल का, लंबा, सफेद दाढ़ी, आँखें आग जैसी, बॉडी जैसे कोई योद्धा। वो फरहान से बदला लेना चाहता था – एक पुरानी दुश्मनी, जहां फरहान ने उसकी एक रंडी चुराई थी। अब अब्दुल्लाह शिवानी को अपना बनाना चाहता था – इंटरफेथ का थ्रिल, एक * लड़की को ,., शेख की हवस से तोड़ना। शिवानी तैयार हुई – सफेद साड़ी, पारदर्शी ब्लाउज, अंदर कुछ नहीं। उसके निप्पल्स कपड़े से उभर रहे थे, जैसे कोई चुनौती। वो अब्दुल्लाह के होटल सुइट में पहुँची – 7-स्टार, टॉप फ्लोर, जहां से दिल्ली की लाइट्स चमक रही थीं। लेकिन सुइट में गार्ड थे – सस्पेंस बढ़ गया। अब्दुल्लाह ने दरवाजा खोला – सफेद थोब में, दाढ़ी लंबी, आँखें गहरी। “शिवानी… आ गई। फरहान की * रंडी। आज रात तू मेरी बनेगी। मैं तुझे इतनी गहराई से चोदूँगा कि तू अल्लाह का नाम लेगी।” उसकी आवाज में धमकी और हवस दोनों थे। शिवानी काँप गई – “अब्दुल्लाह… ये सिर्फ एक रात है।” अब्दुल्लाह हँसा – “एक रात में तुझे तोड़ दूँगा। फरहान को पता चलेगा – उसकी माल अब मेरी है।” अब्दुल्लाह ने शिवानी को बालकनी में ले गया – बाहर दिल्ली की ठंडी हवा, नीचे शहर की हलचल। वो शिवानी को रेलिंग से सटा दिया। साड़ी का पल्लू सरकाया। ब्लाउज खोला। स्तन बाहर – अब्दुल्लाह ने दोनों हाथों से दबाए, इतना जोर से कि शिवानी चीखी – “आह… अब्दुल्लाह… दर्द… लेकिन… और जोर से…” अब्दुल्लाह ने मुँह में लिया – चूसने लगा, काटने लगा। दाँत से निप्पल्स खींचे। शिवानी की सिसकारियाँ हवा में गूँज रही थीं। “उफ्फ… अब्दुल्लाह… मेरे निप्पल्स… फाड़ दो… काटो… दर्द दो… मजा आ रहा है…” अब्दुल्लाह की दाढ़ी उसके स्तनों पर रगड़ रही थी – दर्द इतना कि शिवानी की आँखों में आँसू, लेकिन चूत गीली। अब्दुल्लाह ने हाथ नीचे किया – साड़ी ऊपर, चूत पर उँगली। “देख… कितनी गीली… * रंडी… ,., शेख के लिए तड़प रही है।” शिवानी रोते हुए बोली, “हाँ… तड़प रही हूँ… डालो… लेकिन बाहर… कोई देख लेगा…” अब्दुल्लाह हँसा – “देख ले… तू शहर की रंडी है।” अब्दुल्लाह ने थोब उतारा। लंड बाहर – 11 इंच का, मोटा, काला, नसें फूली, सिर बड़ा। शिवानी की साँस रुक गई। “अब्दुल्लाह… ये… नहीं आएगा… फाड़ देगा…” अब्दुल्लाह ने शिवानी को रेलिंग पर झुकाया – गांड बाहर की तरफ। लंड चूत पर रगड़ा – ऊपर-नीचे, क्लिट पर दबाव। शिवानी तड़प रही थी, “डालो… सहन नहीं होता… लेकिन धीरे…” अब्दुल्लाह ने सिर डाला – धीरे-धीरे। शिवानी की चूत स्ट्रेच हो गई – दर्द इतना कि वो चीखी, “आआआह्ह… दर्द… फाड़ रहा है… लेकिन… मत रुको… पूरा डालो…” अब्दुल्लाह ने आधा अंदर किया, रुका। शिवानी की साँसें तेज। “अब्दुल्लाह… महसूस कर… तेरा लंड मेरी चूत में… हर नस… हर धड़कन… गहरा… और गहरा…” अब्दुल्लाह ने पूरा अंदर कर दिया। शिवानी का शरीर हिल गया – दर्द और मजा का तूफान। “आह… पूरा… अब धक्के… जोर से… फाड़ दो मेरी चूत…” अब्दुल्लाह ने धक्के शुरू किए – स्लो लेकिन बेहद गहरे। हर धक्के में पूरा बाहर, फिर पूरा अंदर। शिवानी की चूत उसके लंड को निचोड़ रही थी। बालकनी की रेलिंग हिल रही थी। शिवानी चिल्ला रही थी, “आह… हाँ… गहरा… महसूस कर… मेरी चूत तेरे लंड को प्यार कर रही है… अब तेज… फाड़ दो…” अब्दुल्लाह ने स्पीड बढ़ाई – अब क्रूर धक्के। थप-थप की आवाज हवा में गूँज रही थी। शिवानी की छाती उछल रही थी। वो अब्दुल्लाह की पीठ पर नाखून गाड़ रही थी – खून निकल आया। “अब्दुल्लाह… जोर से… मेरी चूत… तेरे लंड के लिए बनी है… आह… हाँ… और गहरा… मैं झड़ रही हूँ…” शिवानी झड़ गई – उसकी चूत सिकुड़ी, पानी बहा, अब्दुल्लाह के लंड पर। अब्दुल्लाह नहीं रुका – और तेज। शिवानी की आँखें बंद, मुस्कान चेहरे पर – दर्द और मजा का परफेक्ट फ्यूजन। “फाड़ दो… दर्द दो… मजा दो… मैं तेरी * रंडी हूँ… चोद… पूरी रात…” पोजीशन बदली – अब्दुल्लाह ने शिवानी को गोद में उठाया। स्टैंडिंग में चोदा – बालकनी पर, शहर की लाइट्स के सामने। शिवानी उछल रही थी, “अब्दुल्लाह… देख… दिल्ली देख रही है… तेरी * रंडी चुद रही है… आह… हाँ… गहरा…” अब्दुल्लाह धक्के मार रहा था, शिवानी के कूल्हे पकड़े। वो शिवानी के स्तनों को काट रहा था, गर्दन पर दाढ़ी रगड़ रहा था। शिवानी फिर झड़ गई – पानी नीचे गिरा। फिर बेड पर – डॉगी स्टाइल। अब्दुल्लाह पीछे से। बाल पकड़े, गांड पर थप्पड़ – इतने जोर से कि निशान पड़ गए। “तेरी गांड… आज इसे भी फाड़ूँगा।” अब्दुल्लाह ने लुब्रिकेंट लगाया – उँगली से शिवानी की गांड में। शिवानी सिसकारी, “हाँ… उँगली… और अंदर… तैयार कर…” अब्दुल्लाह ने लंड सिर डाला – धीरे-धीरे पूरा अंदर। शिवानी दर्द से चीखी – “आह… दर्द… फाड़ रहा है… लेकिन… मत रुको… पूरा… फाड़ दो मेरी गांड…” अब्दुल्लाह ने धक्के शुरू – गहरे, तेज। शिवानी की चीखें मजा में – “उफ्फ… अब्दुल्लाह… मेरी गांड… तेरे लंड के लिए बनी है… जोर से… थप्पड़ मारो… बाल खींचो… आह… हाँ… मैं फिर झड़ रही हूँ…” अब्दुल्लाह ने स्पीड बढ़ाई – हर धक्के में उसका शरीर शिवानी की गांड से टकराता। शिवानी का शरीर पसीने से तर, आँखें नम, लेकिन वो चिल्ला रही थी, “स्पर्म… मेरी गांड में… भर दो… गरम स्पर्म… आह…” अब्दुल्लाह ने जोर का धक्का मारा – गरम स्पर्म शिवानी की गांड में छोड़ दिया। शिवानी काँप उठी – उसका सबसे गहरा, सबसे लंबा ऑर्गेज्म। दोनों थक कर लेट गए। अब्दुल्लाह ने शिवानी को गले लगाया – “शिवानी… तू मेरी हो गई। फरहान को छोड़। मेरे साथ दुबई चलेगी।” शिवानी की आँखों में आँसू – “अब्दुल्लाह… ये रात… सबसे गहरी थी… लेकिन मैं… मैं अब किसी की नहीं। मैं अपनी हूँ।” शिवानी उठी। कपड़े पहने। अब्दुल्लाह ने 30 लाख नोट्स दिए। “ये तेरे लिए।” शिवानी ने लिए – लेकिन मन में फैसला था। वो दिल्ली छोड़कर पटना लौटने वाली थी। प्रिंस के पास। आरव के पास। लेकिन क्या वो वापस आ पाएगी? या फरहान और अब्दुल्लाह की जंग में फँस जाएगी? सस्पेंस बढ़ गया – शिवानी ट्रेन में थी, पटना की ओर। लेकिन फरहान को पता चला – वो गुस्से से पागल। “शिवानी… तू भाग रही है? मैं तुझे मार दूँगा।” वो अपने आदमियों को भेजा। ट्रेन में एक आदमी शिवानी के पास आया – “फरहान ने भेजा है। वापस चलो… नहीं तो आरव को मार देंगे।” शिवानी का दिल रुक गया। थ्रिलर – वो ट्रेन से कूदने की कोशिश की, लेकिन आदमी ने पकड़ लिया। ड्रामा – शिवानी चीखी, “छोड़ो… प्रिंस को बुलाओ…” लेकिन आदमी ने फोन किया – फरहान को। “सर… पकड़ लिया।” लेकिन तभी एक कॉल आया – प्रिंस का। प्रिंस ने शिवानी को ट्रैक किया था – करण की मदद से। “शिवानी… मैं आ रहा हूँ।” ट्रेन स्टेशन पर कंफ्रंटेशन – फरहान के आदमी, प्रिंस, करण। लड़ाई हुई। थ्रिलर – गोली चली, लेकिन शिवानी सुरक्षित। फरहान भागा। अब्दुल्लाह को पता चला – वो दुबई से आया। “शिवानी… तू मेरी है।” लेकिन शिवानी अब प्रिंस के साथ थी। “प्रिंस… मैंने सब गलत किया… लेकिन अब बस तू।” प्रिंस ने गले लगाया। लेकिन शिवानी की प्यास… वो अब भी जल रही थी।
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दिल्ली की वो रातें अब शिवानी और प्रिंस की जिंदगी में एक नया मोड़ ले चुकी थीं। अब्दुल्लाह की वो गहरी चुदाई – जहां दर्द और मजा का मिश्रण था – शिवानी को भूलती नहीं थी। फरहान से भागकर पटना लौटने के बाद शिवानी प्रिंस के साथ खुश थी, लेकिन रातों में वो अब्दुल्लाह की याद आती। प्रिंस ने शिवानी को माफ कर दिया था, और अब दोनों की सेक्स लाइफ फिर से जंगली हो गई थी। लेकिन एक दिन अब्दुल्लाह का मैसेज आया – “शिवानी… वो रात भूल नहीं पा रहा हूँ। दुबई आओ। प्रिंस को भी ले आओ। मैं तुम्हें 1 मिलियन डॉलर गिफ्ट दूँगा। बस एक हफ्ता… मेरे साथ।” शिवानी ने प्रिंस को दिखाया। प्रिंस चौंका, लेकिन शिवानी की आँखों में वो चमक देखकर बोला, “चलो… लेकिन मैं साथ रहूँगा। तुझे देखते हुए… मुझे भी मजा आएगा।” शिवानी मुस्कुराई – कुकॉल्ड का खेल शुरू हो गया।
दुबई पहुँचते ही अब्दुल्लाह ने उन्हें एयरपोर्ट से पिक किया – लग्जरी कार में। अब्दुल्लाह – सफेद थोब में, दाढ़ी लंबी, आँखें चमकदार। “शिवानी… प्रिंस… वेलकम।” उसने शिवानी को गले लगाया, प्रिंस को हाथ मिलाया। वो दोनों को अपने प्राइवेट विला में ले गया – दुबई की बीच पर, बड़ा घर, स्विमिंग पूल, प्राइवेट बेडरूम। अब्दुल्लाह ने कहा, “आज रात शुरू करते हैं। प्रिंस… तू देखेगा। मैं तेरी बीवी को चोदूँगा… और तुझे मजा आएगा।” प्रिंस ने हाँ कहा – उसकी आँखों में उत्सुकता थी। रात हुई। विला में मंद रोशनी, अगरबत्ती की खुशबू। अब्दुल्लाह ने शिवानी को बेडरूम में बुलाया। प्रिंस कुर्सी पर बैठा – देखने के लिए। शिवानी लाल गाउन में थी – पारदर्शी, अंदर कुछ नहीं। अब्दुल्लाह ने उसे बाहों में लिया। चुंबन शुरू – गहरा, जीभें आपस में लड़ रही थीं। अब्दुल्लाह की दाढ़ी शिवानी के गालों पर रगड़ रही थी। शिवानी सिसकारी, “आह… अब्दुल्लाह… धीरे… लेकिन गहरा…” अब्दुल्लाह ने गाउन उतार दिया। शिवानी नंगी – स्तन भरे, निप्पल्स सख्त, चूत गीली। अब्दुल्लाह ने स्तनों को दबाया – जोर से। शिवानी चीखी, “आह… चूसो… मेरे निप्पल्स…” अब्दुल्लाह ने मुँह में लिया – चूसने लगा, काटने लगा। प्रिंस देख रहा था – उसका लंड सख्त हो गया। “शिवानी… मजा आ रहा है?” शिवानी बोली, “हाँ… प्रिंस… देख… अब्दुल्लाह मुझे चूस रहा है…” अब्दुल्लाह ने शिवानी को बेड पर लिटाया। टाँगें फैलाईं। चूत पर जीभ डाली – क्लिट चूसने लगा। शिवानी चीखी, “आह… अब्दुल्लाह… जीभ अंदर… चाटो मेरी चूत… उफ्फ… प्रिंस… देख… वो मेरी चूत चाट रहा है…” प्रिंस ने अपना लंड निकाला, हिलाने लगा। अब्दुल्लाह ने उँगलियाँ डालीं – तीन, तेज-तेज। शिवानी झड़ गई – पानी निकला। “प्रिंस… मैं झड़ रही हूँ… देख…” अब्दुल्लाह ने थोब उतारा। लंड बाहर – 11 इंच, मोटा। शिवानी ने देखा, “अब्दुल्लाह… डालो…” अब्दुल्लाह ने लंड चूत में डाला – पूरा। शिवानी चीखी, “आआह्ह… गहरा… फाड़ दो…” अब्दुल्लाह धक्के मारने लगा – जोरदार। शिवानी चिल्लाई, “प्रिंस… देख… अब्दुल्लाह मुझे चोद रहा है… उसका लंड मेरी चूत में… मजा आ रहा है…” प्रिंस हिलाने लगा – उसे मजा आ रहा था। अब्दुल्लाह ने स्पीड बढ़ाई – थप-थप। शिवानी झड़ गई। अब्दुल्लाह ने स्पर्म अंदर छोड़ा। अगली रात पूल साइड। अब्दुल्लाह ने शिवानी को पानी में ले जाकर चोदा – स्टैंडिंग। प्रिंस किनारे पर देख रहा था। शिवानी चीखी, “प्रिंस… देख… पानी में… अब्दुल्लाह का लंड… मेरी चूत में…” प्रिंस को मजा आ रहा था – वो खुद झड़ गया देखकर। अब्दुल्लाह ने शिवानी की गांड में डाला – पानी में। शिवानी चीखी, “आह… गांड फाड़ दो… प्रिंस… देख… मैं कुकॉल्ड बना रही हूँ तुझे…” अब्दुल्लाह खुश होकर बोला, “प्रिंस… तेरी बीवी सबसे अच्छी है। मैं 1 मिलियन डॉलर गिफ्ट दूँगा।” प्रिंस को अब मजा आने लगा – वो देखकर उत्तेजित होता। अगली रात अब्दुल्लाह ने शिवानी को डॉगी में चोदा – प्रिंस करीब से देख रहा था। शिवानी बोली, “प्रिंस… अब्दुल्लाह का लंड… देख… मेरी चूत में… तुझे मजा आ रहा है?” प्रिंस ने हाँ कहा – “हाँ… देखकर… मैं भी चोदूँगा बाद में।” अब्दुल्लाह ने स्पर्म छोड़ा। फिर प्रिंस ने शिवानी को चोदा – अब्दुल्लाह देखकर। हफ्ता खत्म हुआ। अब्दुल्लाह ने 1 मिलियन डॉलर गिफ्ट दिया – खुश होकर। “शिवानी… प्रिंस… फिर आना।” प्रिंस अब कुकॉल्ड बन चुका था – उसे मजा आता। दोनों पटना लौटे – लेकिन अब उनकी सेक्स लाइफ और हॉट हो गई थी।
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दुबई की वो रातें अब शिवानी और प्रिंस की जिंदगी का हिस्सा बन चुकी थीं। अब्दुल्लाह का 1 मिलियन डॉलर गिफ्ट – वो पैसा अब उनके बैंक में था। प्रिंस ने कंपनी छोड़ दी थी, और शिवानी के साथ मिलकर पटना में एक बड़ा घर खरीद लिया था – गंगा किनारे, लग्जरी विला, जहां से नदी की लहरें दिखतीं। पैसा इतना था कि दोनों अब सबसे अमीर थे – कारें, गहने, ट्रैवल। लेकिन वो पैसा अब्दुल्लाह का गिफ्ट था, और उसकी शर्त थी – “प्रिंस… तू शिवानी का गुलाम बनेगा। उसके हर आदेश मानना। वो जो कहे, वो कर। मैं कभी-कभी दुबई बुलाऊँगा… और तू देखेगा।” प्रिंस ने हाँ कह दिया था – कुकॉल्ड का मजा उसे अब आने लगा था। शिवानी अब क्वीन थी – घर की मालकिन, और प्रिंस उसका आज्ञाकारी। आरव अब 4 साल का था – शरारती, लेकिन वो माँ के साथ खेलता, और प्रिंस को “पापा” कहकर गले लगाता। शिवानी आरव को देखकर सोचती, “ये मेरा बेटा… लेकिन अब हम अमीर हैं। लेकिन प्रिंस… तू अब मेरे आदेश मान।”
एक शाम शिवानी ने प्रिंस को बुलाया। आरव दादी के पास खेलने गया था। घर में सिर्फ दोनों। शिवानी ने लाल नाइट गाउन पहना था – पारदर्शी, उसके भरे स्तन और गीली चूत साफ दिख रही थी। “प्रिंस… आज रात तू मेरा गुलाम बनेगा। मेरा हर आदेश मान।” प्रिंस की आँखें चमक उठीं – “हाँ जान… तू कह… मैं करूँगा।” शिवानी ने कहा, “पहले… मेरे पैर चाट।” प्रिंस घुटनों पर बैठ गया। शिवानी के पैर चाटने लगा – जीभ से, उँगलियाँ चूसने लगा। शिवानी सिसकारी, “आह… अच्छे से… मेरे पैर… गुलाम…” प्रिंस ने चाटा, मालिश किया। शिवानी ने गाउन ऊपर किया। “अब… मेरी चूत चाट।” प्रिंस ने जीभ डाली – क्लिट चूसने लगा। शिवानी चीखी, “आह… जीभ अंदर… चाटो मेरी चूत… रस पी लो… गुलाम… और तेज…” प्रिंस ने तेज चाटा, उँगलियाँ डालीं – दो, फिर तीन। शिवानी झड़ गई – पानी प्रिंस के मुँह पर। “पी लो… मेरा रस… गुलाम।” शिवानी ने प्रिंस को बेड पर लिटाया। “अब तू लेट… मैं तेरे ऊपर।” वो प्रिंस के लंड पर बैठी – उछलने लगी। लंड अंदर-बाहर। शिवानी चिल्लाई, “आह… तेरा लंड… मेरी चूत में… लेकिन तू हिलेगा नहीं… मैं चोदूँगी…” प्रिंस लेटा रहा, शिवानी उछल रही थी। उसके स्तन उछल रहे थे। वो प्रिंस के निप्पल्स काट रही थी। “आह… मजा आ रहा है… तू मेरा गुलाम… देख… मैं तेरे लंड पर नाच रही हूँ…” शिवानी झड़ गई। प्रिंस ने कहा, “जान… मैं भी…” लेकिन शिवानी ने कहा, “नहीं… अभी नहीं झड़ना… मेरा आदेश।” शिवानी ने प्रिंस को पलटा। “अब डॉगी में… लेकिन तू हिलेगा नहीं… मैं पीछे से लूँगी।” वो प्रिंस के लंड पर बैठी – रिवर्स काउगर्ल। उछलने लगी। “आह… गहरा… तेरा लंड… मेरी चूत फाड़ रहा है… लेकिन तू गुलाम… देख… मैं तेरे ऊपर हूँ…” शिवानी की गांड प्रिंस के सामने उछल रही थी। वो अपनी उँगली अपनी गांड में डाली – “देख… मैं खुद को चोद रही हूँ… तू देख…” प्रिंस कराह रहा था, लेकिन हिल नहीं रहा। शिवानी फिर झड़ गई – पानी प्रिंस के लंड पर। अब शिवानी ने आदेश दिया, “अब तू मुझे चोद… लेकिन धीरे-धीरे… गहरा… और मैं कहूँ तभी तेज।” प्रिंस ने शिवानी को लिटाया। टाँगें कंधों पर। लंड डाला – धीरे-धीरे। शिवानी सिसकारी, “आह… गहरा… महसूस कर… तेरा लंड मेरी चूत में… हर नस… धीरे… अब तेज…” प्रिंस ने स्पीड बढ़ाई – जोरदार धक्के। थप-थप। शिवानी चिल्लाई, “हाँ… जोर से… फाड़ दो… लेकिन मेरा आदेश… अब रुक…” प्रिंस रुका। शिवानी तड़पी – “अब फिर… तेज…” प्रिंस ने फिर शुरू – गहरे धक्के। शिवानी की छाती उछल रही थी। वो प्रिंस की पीठ पर नाखून गाड़ रही थी। “आह… हाँ… अब स्पर्म… अंदर… लेकिन इजाजत से…” प्रिंस ने स्पर्म छोड़ा। शिवानी झड़ गई – साथ में। रात भर चली। शिवानी ने प्रिंस को बाँधा – रस्सी से। “अब तू बंधा… मैं तेरे ऊपर।” वो उछलती रही, प्रिंस तड़पता रहा। “आह… गुलाम… तेरा लंड… मेरी चूत में… मैं चोद रही हूँ…” शिवानी ने स्ट्रैप-ऑन पहना – प्रिंस की गांड में डाला। प्रिंस चीखा, “आह… जान… दर्द…” शिवानी बोली, “चुप… मेरा आदेश… मजा ले…” वो धक्के मारती रही। प्रिंस को मजा आ रहा था। शिवानी झड़ी – कई बार। सुबह शिवानी बोली, “प्रिंस… अब हम अमीर हैं… लेकिन तू हमेशा मेरा गुलाम बनेगा।” प्रिंस ने किस किया, “हाँ जान… मुझे मजा आता है।” आरव घर आया – “मम्मी… पापा…” शिवानी ने उसे गले लगाया। “अब हम सब खुश रहेंगे… अमीर… और साथ।”
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अब्दुल्लाह के साथ दुबई की वो रातें और 1 मिलियन डॉलर का गिफ्ट शिवानी और प्रिंस की जिंदगी को हमेशा के लिए बदल चुका था। पटना में उनका नया विला अब लग्जरी का प्रतीक बन चुका था – बड़ा स्विमिंग पूल, प्राइवेट जिम, गार्डन, और आरव के लिए सबसे अच्छा प्ले रूम। प्रिंस अब बिजनेस में था – अब्दुल्लाह के कनेक्शन से विदेशी इन्वेस्टमेंट आ रहे थे। वो अमीर हो चुके थे, लेकिन शिवानी की आँखों में वो पुरानी भूख कभी कम नहीं हुई। प्रिंस अब उसका गुलाम बन चुका था – घर में वो शिवानी के हर आदेश मानता। लेकिन शिवानी को लगता – “ये सब अच्छा है… लेकिन मुझे और चाहिए… वो थ्रिल… वो नई बॉडी… वो नया आदमी जो मुझे पूरी तरह तोड़ दे।”
एक दिन प्रिंस ने बताया, “जान… एक बड़ा बिजनेसमैन पटना आ रहा है। नाम है रोहन मेहरा। मुंबई का। रियल एस्टेट का बड़ा प्लेयर। वो हमारे साथ पार्टनरशिप करना चाहता है। कल डिनर पर आएगा।” शिवानी की आँखें चमक उठीं। रोहन मेहरा – 42 साल का, लंबा, फिट, चेहरा तेज, आँखें शार्प। वो अमीर था – करोड़ों की प्रॉपर्टी, लेकिन उसकी अफवाह थी कि वो औरतों का शौकीन है। शिवानी ने सोचा, “ये मौका है… नया अफेयर… नया मजा।” कल शाम रोहन आया – ब्लैक सूट में, महँगी घड़ी, मुस्कान आकर्षक। आरव ने उसे “अंकल” कहकर गले लगाया। डिनर के दौरान रोहन शिवानी को देखता रहा – उसकी साड़ी में उभरे स्तन, पतली कमर, गोल कूल्हे। शिवानी ने भी उसे देखा – उसकी चौड़ी छाती, मजबूत हाथ। डिनर के बाद प्रिंस ने कहा, “रोहन जी… आप आज रुक जाइए। गेस्ट रूम तैयार है।” रोहन मुस्कुराया, “ठीक है… लेकिन शिवानी जी… क्या आप मुझे घर दिखा सकती हैं?” प्रिंस ने हाँ कहा – वो जानता था शिवानी क्या चाहती है। शिवानी रोहन को ऊपर ले गई – टेरेस पर। रात थी, तारे चमक रहे थे। रोहन ने कहा, “शिवानी… तुम बहुत खूबसूरत हो। प्रिंस लकी है।” शिवानी ने मुस्कुरा कर कहा, “प्रिंस अच्छा है… लेकिन मैं… थोड़ी और चाहती हूँ।” रोहन ने उसका हाथ पकड़ा। “तो आज रात… मुझे दो।” शिवानी ने हाँ में सिर हिलाया। रोहन ने उसे गले लगाया। चुंबन शुरू – गहरा, जीभें लड़ रही थीं। रोहन की जीभ शिवानी के मुँह में घुस गई, गले तक। शिवानी सिसकारी, “आह… रोहन… गहरा… और जोर से…” रोहन ने शिवानी की साड़ी का पल्लू सरकाया। ब्लाउज खोला। स्तन बाहर – निप्पल्स सख्त। रोहन ने चूसा – जोर से, काटा। शिवानी चीखी, “आह… चूसो… मेरे निप्पल्स फाड़ दो… दर्द दो…” रोहन ने दाँत से खींचा। शिवानी की पीठ काँप रही थी। रोहन ने शिवानी को टेरेस की रेलिंग से सटाया। साड़ी ऊपर की। पैंटी फाड़ दी। शिवानी की चूत नंगी – गीली, चमक रही थी। रोहन ने उँगलियाँ डालीं – दो, फिर तीन। तेज-तेज अंदर-बाहर। शिवानी चिल्लाई, “आह… उँगलियाँ… और तेज… मेरी चूत… फाड़ो…” रोहन ने क्लिट चूसा। शिवानी झड़ गई – पानी बहा। रोहन ने लंड निकाला – 9 इंच, मोटा, नसें फूली। शिवानी ने देखा, “रोहन… डालो…” रोहन ने एक झटके में पूरा अंदर कर दिया। शिवानी चीखी, “आआह्ह… गहरा… फाड़ दो मेरी चूत…” रोहन धक्के मारने लगा – जोरदार, तेज। टेरेस हिल रहा था। शिवानी की छाती उछल रही थी। वो रेलिंग पकड़े चिल्ला रही थी, “रोहन… जोर से… मेरी चूत… तेरे लंड से भर दो… आह… हाँ… और गहरा…” रोहन ने शिवानी को पलटा – डॉगी स्टाइल। बाल पकड़े। गांड पर थप्पड़ – लाल निशान। “तेरी गांड… कितनी सेक्सी…” उसने लुब्रिकेंट लगाया। लंड गांड में डाला – धीरे-धीरे पूरा। शिवानी दर्द से चीखी, “आह… दर्द… लेकिन… मत रुको… पूरा… फाड़ दो मेरी गांड…” रोहन ने धक्के शुरू – गहरे, तेज। शिवानी की चीखें मजा में – “उफ्फ… रोहन… मेरी गांड… चोदो… जोर से… थप्पड़ मारो… बाल खींचो… आह… हाँ… मैं झड़ रही हूँ…” रोहन ने स्पीड बढ़ाई। शिवानी फिर झड़ गई। रोहन ने स्पर्म गांड में छोड़ा। शिवानी काँप उठी। रोहन ने शिवानी को गोद में उठाया। बेडरूम में ले गया। प्रिंस सो रहा था – लेकिन शिवानी ने उसे जगाया। “प्रिंस… देख… रोहन ने मुझे चोदा।” प्रिंस की आँखें खुलीं – वो देखने लगा। रोहन ने शिवानी को फिर चोदा – प्रिंस के सामने। शिवानी चिल्लाई, “प्रिंस… देख… रोहन का लंड… मेरी चूत में… मजा आ रहा है?” प्रिंस हिलाने लगा। रोहन ने शिवानी की चूत में फिर स्पर्म छोड़ा। शिवानी झड़ गई। सुबह रोहन बोला, “शिवानी… मैं तुम्हें हर हफ्ते बुलाऊँगा। प्रिंस… तू देखेगा।” प्रिंस ने हाँ कहा – उसे मजा आ रहा था। शिवानी अब रोहन के साथ अफेयर में थी – हर हफ्ते दिल्ली या मुंबई। प्रिंस देखता, और शिवानी की प्यास मिटती। आरव घर में खेलता – “मम्मी… पापा… मैं बड़ा होकर अमीर बनूँगा।” शिवानी मुस्कुराती – “हाँ बेटा… हम सब अमीर हैं।” |
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