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पटना की व्यस्त सड़कों पर, जहाँ गंगा की लहरें शहर की धड़कन को छूती हैं, वहाँ एक छोटी सी दुनिया में शिवानी और प्रिंस की कहानी शुरू हुई। शिवानी, सिर्फ 5 फीट की ऊँचाई वाली एक 24 साल की लड़की, लेकिन उसकी सेक्सी फिगर हर किसी को मोहित कर देती थी। उसकी कमर पतली, कूल्हे भरे हुए, और छाती उभरी हुई – वो एक ऐसी सुंदरता थी जो पटना की गलियों में चमकती थी। वो एक छोटी सी कॉफी शॉप में काम करती थी, जहाँ वो ग्राहकों को मुस्कान के साथ कॉफी सर्व करती। उसकी आँखें बड़ी-बड़ी, काली और गहरी, जो किसी को भी अपनी ओर खींच लेतीं।
प्रिंस, 26 साल का जवान लड़का, पटना में ही रहता था। वो एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर था, लेकिन उसका दिल रोमांटिक था। लंबा कद, चौड़ा सीना, और वो मुस्कान जो शिवानी को पहली नजर में ही पसंद आ गई। वो रोज अपनी कंपनी से लौटते वक्त उस कॉफी शॉप में रुकता, सिर्फ शिवानी को देखने के लिए। शुरू में तो ये सिर्फ नजरें मिलाना था, लेकिन धीरे-धीरे बातें होने लगीं। “एक ब्लैक कॉफी, प्लीज,” प्रिंस कहता, और शिवानी मुस्कुरा कर जवाब देती, “जी सर, अभी लाती हूँ।”
एक दिन बारिश हो रही थी। पटना की सड़कें पानी से भर गईं। प्रिंस कॉफी शॉप में बैठा था, बाहर की बारिश देख रहा था। शिवानी का शिफ्ट खत्म हो गया था, लेकिन वो बाहर नहीं जा पा रही थी। प्रिंस ने हिम्मत करके पूछा, “शिवानी, अगर आप को बुरा न लगे तो मैं आपको घर ड्रॉप कर दूँ?” शिवानी शर्मा गई, लेकिन उसकी आँखों में एक चमक थी। “ठीक है, प्रिंस जी,” वो बोली। कार में बैठकर दोनों घर की ओर चले। रास्ते में बातें हुईं – पटना की जिंदगी, सपने, और हँसी-मजाक। उस दिन से उनकी दोस्ती शुरू हो गई।
धीरे-धीरे दोस्ती प्यार में बदल गई। प्रिंस शिवानी को गंगा घाट पर ले जाता, जहाँ वो सूर्यास्त देखते। “शिवानी, तुम मेरी जिंदगी की सबसे खूबसूरत चीज हो,” प्रिंस एक दिन बोला, और शिवानी ने शर्माते हुए अपना सिर उसके कंधे पर रख दिया। उनका पहला吻 (चुंबन) गंगा के किनारे हुआ, जहाँ लहरों की आवाज उनके दिल की धड़कनों से मिल गई। शिवानी की नरम होंठ प्रिंस को मदहोश कर देते। वो दोनों एक-दूसरे के लिए जीने लगे। पटना की गर्मियों में वो आइसक्रीम शेयर करते, सर्दियों में एक-दूसरे को गर्माहट देते।
एक साल बीत गया। अब उनका प्यार गहरा हो चुका था। प्रिंस ने शिवानी को अपने फ्लैट पर बुलाया, जहाँ वो अकेला रहता था। “आज स्पेशल डिनर है,” प्रिंस ने कहा। शिवानी तैयार होकर आई – लाल साड़ी में, जो उसकी सेक्सी फिगर को और उभार रही थी। डिनर के बाद, दोनों सोफे पर बैठे। प्रिंस ने शिवानी को अपनी बाहों में लिया। “आई लव यू, शिवानी,” वो बोला। शिवानी ने जवाब में उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। चुंबन गहरा होता गया। प्रिंस की जीभ शिवानी की जीभ से खेलने लगी। शिवानी की साँसें तेज हो गईं।
प्रिंस ने शिवानी की साड़ी का पल्लू सरका दिया। उसकी ब्लाउज से उभरी छाती दिख रही थी। “प्रिंस, धीरे से,” शिवानी शर्मा कर बोली, लेकिन उसकी आँखें चाहत से भरी थीं। प्रिंस ने ब्लाउज के हुक खोल दिए। शिवानी की ब्रा में कैद उसके स्तन बाहर आने को बेताब थे। प्रिंस ने ब्रा उतार दी। शिवानी के गुलाबी निप्पल्स सख्त हो चुके थे। प्रिंस ने उन्हें मुँह में लिया, चूसने लगा। शिवानी सिसकारियाँ भरने लगी, “आह… प्रिंस… उफ्फ…” उसका हाथ प्रिंस की पैंट पर गया, जहाँ उसका लंड सख्त हो चुका था।
शिवानी ने प्रिंस की पैंट उतार दी। उसका 8 इंच का मोटा लंड बाहर आ गया। शिवानी की आँखें फैल गईं। “इतना बड़ा?” वो बोली। प्रिंस हँसा, “तेरे लिए ही है, जान।” शिवानी ने उसे हाथ में लिया, हिलाने लगी। फिर झुककर मुँह में ले लिया। वो चूसने लगी, जैसे कोई लॉलीपॉप हो। प्रिंस के मुँह से आहें निकलने लगीं, “शिवानी… आह… कितना अच्छा लग रहा है…” शिवानी ने गहराई तक लिया, गैगिंग करते हुए। प्रिंस ने उसके बाल पकड़े, मुँह में धक्के देने लगा।
फिर प्रिंस ने शिवानी को बेड पर लिटा दिया। उसकी साड़ी पूरी उतार दी। अब वो सिर्फ पैंटी में थी। प्रिंस ने पैंटी उतारी – शिवानी की चूत गीली हो चुकी थी, बालों से साफ, गुलाबी और चमकदार। प्रिंस ने अपनी जीभ से उसे चाटना शुरू किया। शिवानी चीख उठी, “प्रिंस… आह… मत करो… उफ्फ… हाँ… और…” प्रिंस की जीभ अंदर-बाहर हो रही थी, क्लिटोरिस को चूस रहा था। शिवानी का शरीर काँपने लगा, वो झड़ गई – उसकी चूत से पानी निकल आया।
अब प्रिंस का लंड शिवानी की चूत पर रगड़ रहा था। “डालो ना, प्रिंस… सहन नहीं हो रहा,” शिवानी बोली। प्रिंस ने धीरे से अंदर डाला। शिवानी की चूत टाइट थी, वो दर्द से चीखी, “आह… धीरे…” लेकिन प्रिंस ने पूरा अंदर कर दिया। अब वो धक्के मारने लगा। शिवानी की छाती उछल रही थी, वो प्रिंस की पीठ पर नाखून गड़ा रही थी। “फक मी हार्ड, प्रिंस… जोर से… आह… यस…” शिवानी चिल्ला रही थी। प्रिंस ने स्पीड बढ़ा दी, कमरे में थप-थप की आवाज गूँज रही थी।
प्रिंस ने शिवानी को डॉगी स्टाइल में किया। उसकी गांड ऊपर, प्रिंस पीछे से धक्के मार रहा था। शिवानी की गांड मोटी और गोल थी, प्रिंस उसे थप्पड़ मार रहा था। “आह… प्रिंस… और जोर से… मेरी चूत फाड़ दो…” शिवानी बोली। प्रिंस ने उसके बाल पकड़े, जोर-जोर से पेलने लगा। शिवानी फिर झड़ गई, लेकिन प्रिंस नहीं रुका। अब वो शिवानी को अपनी गोद में उठाकर चोद रहा था। शिवानी उछल रही थी, उसके स्तन प्रिंस के मुँह में थे।
अंत में प्रिंस ने शिवानी को बेड पर लिटाया, मिशनरी पोजीशन में। वो तेज-तेज धक्के मार रहा था। “शिवानी… आई एम कमिंग…” प्रिंस बोला। “अंदर ही डालो, प्रिंस… मुझे तुम्हारा स्पर्म चाहिए…” शिवानी बोली। प्रिंस ने जोर का धक्का मारा, और अंदर ही झड़ गया। दोनों पसीने से तर, एक-दूसरे की बाहों में लेट गए।
लेकिन ये सिर्फ शुरुआत थी। अगले दिन सुबह, शिवानी नंगी उठी, प्रिंस को जगाया। “फिर से?” वो बोली। प्रिंस हँसा, और फिर शुरू हो गया। इस बार किचन में – शिवानी काउंटर पर बैठी, प्रिंस उसकी चूत में लंड डाले हुए। वो चोदते हुए कॉफी बना रहे थे। फिर बाथरूम में शावर के नीचे – पानी बहता, और प्रिंस शिवानी को दीवार से सटाकर पेल रहा था। शिवानी की सिसकारियाँ गूँज रही थीं, “प्रिंस… तुम्हारा लंड कितना मोटा है… आह… फक मी… हार्डर…”
उनका प्यार अब जुनून में बदल चुका था। हर रात वो नए-नए तरीके आजमाते। एक दिन प्रिंस ने रस्सी से शिवानी को बाँधा, ब्लाइंडफोल्ड किया। वो उसके शरीर पर आइसक्यूब रगड़ता, फिर चाटता। शिवानी तड़प रही थी, “प्रिंस… प्लीज… चोदो मुझे…” प्रिंस ने पहले उसके मुँह में लंड डाला, फिर चूत में, फिर गांड में ट्राई किया। शिवानी दर्द से चीखी, लेकिन मजा आ रहा था। “आह… प्रिंस… मेरी गांड… उफ्फ… यस… डीपर…”
पटना की गलियों में उनका प्यार छिपा रहा, लेकिन उनके फ्लैट में वो जंगली हो जाते। शिवानी प्रिंस की गुलाम बन गई, और प्रिंस उसका राजा। वो रोल-प्ले करते – कभी टीचर-स्टूडेंट, कभी बॉस-सेक्रेटरी। हर बार hardcore – जोरदार धक्के, चीखें, और अंत में संतुष्टि।
एक दिन गंगा घाट पर, शाम को, प्रिंस ने शिवानी से शादी का प्रस्ताव रखा। “शिवानी, हमेशा के लिए मेरी हो जाओ?” शिवानी ने हाँ कहा, और वो रात फिर जश्न मनाया – पूरी रात चुदाई करके। उनका प्यार शुरू हुआ था प्यार से, लेकिन अब वो सेक्स की आग में जल रहा था। पटना की ये जोड़ी, शिवानी और प्रिंस, हमेशा के लिए एक हो गए।
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शिवानी और प्रिंस की कहानी – अगला भाग
शादी का प्रस्ताव स्वीकार करने के बाद से शिवानी और प्रिंस की जिंदगी में एक नया रंग आ गया था। पटना की गर्मियों में भी उनके बीच की आग कभी ठंडी नहीं पड़ती। प्रिंस ने फैसला किया कि वो जल्द से जल्द शादी करेंगे, लेकिन पहले कुछ महीने सिर्फ एक-दूसरे को एक्सप्लोर करने के। शिवानी अब प्रिंस के फ्लैट में ज्यादा समय बिताने लगी। उसकी माँ को लगता था कि वो कॉफी शॉप की ड्यूटी के बाद दोस्त के घर पढ़ाई करती है, लेकिन हकीकत में वो प्रिंस की बाहों में होती।
एक शाम, प्रिंस ने शिवानी को सरप्राइज दिया। फ्लैट को पूरी तरह रोमांटिक बना दिया था – लाल गुलाब की पंखुड़ियाँ बिस्तर पर बिछी हुईं, मंद रोशनी, और हल्की-हल्की रोमांटिक म्यूजिक। शिवानी अंदर आई तो उसकी आँखें चमक उठीं। वो लाल साड़ी पहने थी – वो ही वाली जिसे प्रिंस सबसे ज्यादा पसंद करता था। साड़ी का पल्लू इतना पारदर्शी था कि उसकी ब्लाउज से उभरी छाती साफ दिख रही थी। 0 “LARGE” 1 “LARGE”
प्रिंस ने उसे बाहों में उठा लिया और बेडरूम में ले गया। “आज रात सिर्फ हम दोनों हैं, कोई रोक-टोक नहीं,” प्रिंस ने कहा। शिवानी ने शर्मा कर उसका गला लगाया। चुंबन शुरू हुआ – धीरे-धीरे, गहरा होता गया। प्रिंस की जीभ शिवानी के मुँह में घुस गई, दोनों एक-दूसरे को चूसने लगे। शिवानी की साँसें तेज हो गईं। प्रिंस ने साड़ी का पल्लू नीचे सरकाया, ब्लाउज के हुक खोले। शिवानी की ब्रा लाल रंग की थी, जो उसके गोरे स्तनों पर बहुत सुंदर लग रही थी।
प्रिंस ने ब्रा उतारी और उसके निप्पल्स को मुँह में लिया। वो चूस रहा था, काट रहा था हल्के से। शिवानी सिसकारियाँ भर रही थी, “आह… प्रिंस… कितना अच्छा लग रहा है… और जोर से चूसो…” उसका हाथ प्रिंस की शर्ट के बटन खोल रहा था। प्रिंस ने खुद को नंगा किया। उसका लंड पहले से ही खड़ा था, नसें फूली हुईं, सिर लाल। शिवानी ने उसे देखा और मुस्कुराई, “मेरा राजा… आज इसे और ज्यादा मजा दूँगी।”
वो घुटनों पर बैठ गई। प्रिंस का लंड अपने हाथ में लिया, जीभ से चाटा। फिर मुँह में लिया, गहराई तक। प्रिंस के मुँह से कराह निकली, “शिवानी… उफ्फ… तेरी जीभ जादू करती है…” शिवानी ने तेज-तेज चूसना शुरू किया, हाथ से सहलाते हुए। प्रिंस ने उसके सिर को पकड़ा, मुँह में धक्के देने लगा। शिवानी की आँखों में आँसू आ गए, लेकिन वो रुकी नहीं। वो गले तक ले रही थी, गैगिंग कर रही थी।
फिर प्रिंस ने शिवानी को उठाया, बेड पर पटका। साड़ी पूरी उतार दी। अब वो सिर्फ पैंटी में थी। प्रिंस ने पैंटी फाड़ दी – शिवानी की चूत पहले से गीली थी, चमक रही थी। प्रिंस ने अपनी जीभ अंदर डाली, क्लिटोरिस को चूसने लगा। शिवानी चीख उठी, “प्रिंस… आह… हाँ… वहाँ… और तेज…” उसका शरीर काँप रहा था। प्रिंस ने दो उँगलियाँ अंदर डालीं, तेज-तेज अंदर-बाहर करने लगा। शिवानी झड़ गई – उसकी चूत से गरम पानी निकला, प्रिंस के मुँह पर।
अब प्रिंस तैयार था। उसने शिवानी की टाँगें फैलाईं, लंड चूत पर रगड़ा। “डालो ना… इंतजार नहीं होता,” शिवानी बोली। प्रिंस ने एक झटके में पूरा अंदर कर दिया। शिवानी चीखी, “आह… इतना गहरा… फाड़ दोगे…” लेकिन उसकी आँखें खुशी से चमक रही थीं। प्रिंस ने धक्के मारने शुरू किए – जोरदार, तेज। बेड हिल रहा था। शिवानी की छाती उछल रही थी, वो प्रिंस की पीठ पर नाखून गाड़ रही थी। “फक मी हार्ड… जोर से… मेरी चूत तुम्हारी है… आह… यस…” 3 “LARGE”
प्रिंस ने पोजीशन बदली। शिवानी को डॉगी स्टाइल में किया। उसकी गांड ऊपर, प्रिंस पीछे से पेल रहा था। वो गांड पर थप्पड़ मार रहा था – लाल निशान पड़ गए। “तेरी गांड कितनी सेक्सी है… आज इसे भी आजमाएँगे?” प्रिंस बोला। शिवानी शर्मा गई लेकिन बोली, “हाँ… लेकिन धीरे से… पहली बार है।” प्रिंस ने पहले लुब्रिकेंट लगाया, फिर धीरे से लंड गांड में डाला। शिवानी दर्द से चीखी, “आह… दर्द हो रहा है… लेकिन रुको मत…” प्रिंस ने धीरे-धीरे पूरा अंदर किया। फिर स्पीड बढ़ाई। शिवानी की चीखें मजा में बदल गईं, “उफ्फ… प्रिंस… मेरी गांड… चोदो… हार्ड…”
अब वो रोल-प्ले में चले गए। शिवानी बोली, “सर, मैं आपकी नई सेक्रेटरी हूँ… मुझे प्रमोशन चाहिए।” प्रिंस हँसा, “तो मेरे सामने घुटनों पर बैठो और दिखाओ कितनी मेहनत कर सकती हो।” शिवानी ने फिर लंड मुँह में लिया, प्रिंस उसे “प्रमोशन” दे रहा था धक्कों से। फिर प्रिंस ने उसे टेबल पर लिटाया, ऑफिस स्टाइल में चोदा। शिवानी चिल्ला रही थी, “बॉस… और जोर से… आपका लंड बहुत बड़ा है…”
रात भर चुदाई चलती रही। बीच-बीच में ब्रेक लेते, पानी पीते, फिर शुरू। एक बार शावर में – पानी के नीचे प्रिंस ने शिवानी को दीवार से सटाकर पेला। पानी उनकी बॉडी पर बह रहा था, शिवानी की सिसकारियाँ गूँज रही थीं। “प्रिंस… तुम्हारा लंड मेरी चूत में फिट बैठता है… हमेशा अंदर रहना चाहिए…”
सुबह होने तक दोनों थक चुके थे, लेकिन खुश। शिवानी प्रिंस की छाती पर सिर रखे लेटी थी। “प्रिंस, शादी के बाद भी ऐसे ही रहेगा न?” वो बोली। प्रिंस ने उसके माथे पर किस किया, “और भी ज्यादा। हमारी हर रात ऐसी होगी – प्यार और जुनून से भरी।”
कुछ दिनों बाद, प्रिंस ने शिवानी को गंगा घाट पर फिर ले गया। सूर्यास्त के समय, वो दोनों हाथ पकड़े बैठे थे। शिवानी ने कहा, “यहाँ से हमारी कहानी शुरू हुई थी। अब ये जगह हमारी यादों से भर जाएगी।” प्रिंस ने उसे गले लगाया। शाम ढल रही थी, और उनकी आँखों में भविष्य की चमक थी।
लेकिन उनका जुनून कभी कम नहीं हुआ। अगले हफ्ते, प्रिंस ने एक नया टॉय खरीदा – वाइब्रेटर। रात को शिवानी को बाँधकर, वो पहले वाइब्रेटर से उसे तड़पाता, फिर खुद चोदता। शिवानी चीखती, “प्रिंस… सहन नहीं होता… जल्दी डालो…” प्रिंस हँसता, “अभी तो शुरुआत है, जान।”
पटना की ये जोड़ी अब सिर्फ प्रेमी नहीं, बल्कि एक-दूसरे की सबसे गहरी इच्छाओं की पूरी करने वाली बन चुकी थी। उनकी कहानी अभी खत्म नहीं हुई – ये तो बस और गहरी, और हॉट हो रही थी। हर रात नया एडवेंचर, हर सुबह नई ताजगी। शिवानी और प्रिंस – पटना की सबसे सेक्सी और प्यारी जोड़ी।
(कहानी जारी रहेगी…)
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शिवानी और प्रिंस की कहानी – अगला भाग (रोमांटिक टेंशन के साथ)
शादी का प्रस्ताव हो चुका था, लेकिन प्रिंस ने कहा, “शिवानी, हम अभी शादी नहीं करेंगे। पहले कुछ महीने सिर्फ हम दोनों… एक-दूसरे को और गहराई से जानेंगे। हर पल में वो टेंशन, वो इंतजार, वो आग… जो हमें बाँधे रखे।” शिवानी की आँखें चमक उठीं। वो जानती थी कि प्रिंस क्या कहना चाहता है – वो चाहता था कि उनका प्यार सिर्फ शारीरिक न हो, बल्कि वो दिल की गहराइयों तक की चाहत, वो अनकही बातें, वो नजरों का खेल… सब कुछ और तीव्र हो जाए।
एक शाम प्रिंस ने शिवानी को मैसेज किया: “आज शाम 7 बजे गंगा घाट पर मिलो। लाल साड़ी पहनना। और… कोई अंडरगारमेंट मत पहनना।” शिवानी का दिल धड़क उठा। वो शर्मा गई, लेकिन उसकी बॉडी में एक अजीब सी सिहरन दौड़ गई। वो तैयार हुई – वो लाल साड़ी जो उसकी कमर को इतना खूबसूरत बनाती थी, ब्लाउज टाइट, पल्लू हल्का सा पारदर्शी। अंदर कुछ नहीं। वो घाट पर पहुँची। सूर्यास्त हो रहा था, गंगा की लहरें सुनहरी हो रही थीं। प्रिंस पहले से वहाँ था, सफेद कुर्ता-पायजामा में, हाथ में एक छोटा सा फूलों का गुलदस्ता।
जैसे ही शिवानी पास आई, प्रिंस ने उसे देखा। उसकी नजरें शिवानी की आँखों में टिक गईं। कोई बात नहीं हुई। बस नजरें मिलीं। शिवानी की साँसें तेज हो गईं। प्रिंस धीरे से उसके पास आया, इतना पास कि उनकी साँसें एक हो गईं। लेकिन छुआ नहीं। बस इतना करीब कि शिवानी को उसकी बॉडी की गर्मी महसूस हो रही थी। “शिवानी…” प्रिंस की आवाज भारी थी, “तुम आज कितनी खूबसूरत लग रही हो… मैं तुम्हें देखकर… सहन नहीं कर पा रहा।” शिवानी ने नजरें झुका लीं, लेकिन होंठों पर मुस्कान थी। “प्रिंस… तुम भी… तुम्हारी आँखें मुझे… पागल कर रही हैं।”
प्रिंस ने उसका हाथ पकड़ा, उँगलियाँ आपस में फंसाईं। वो दोनों घाट की सीढ़ियों पर बैठ गए। सूरज डूब रहा था। प्रिंस ने धीरे से शिवानी के कंधे पर हाथ रखा। शिवानी का शरीर सिहर उठा। वो जानती थी कि अंदर कुछ नहीं है, और साड़ी का पल्लू हवा में उड़ रहा था। प्रिंस की नजरें उसकी छाती पर गईं – वो उभार साफ दिख रहे थे। प्रिंस की साँसें रुक गईं। “शिवानी… तुमने… सच में…” वो बोला, आवाज काँप रही थी। शिवानी ने शरमाते हुए कहा, “तुम्हारे लिए… सब कुछ तुम्हारे लिए। लेकिन… आज सिर्फ देखो… छुओ मत।”
ये टेंशन… वो इंतजार… दोनों को मार रहा था। प्रिंस का हाथ शिवानी की कमर पर गया, लेकिन सिर्फ छुआ, दबाया नहीं। शिवानी की सिसकी निकल गई, “प्रिंस… मत तड़पाओ… मैं जल रही हूँ।” प्रिंस ने उसके कान में फुसफुसाया, “मैं भी… लेकिन आज रुकेंगे। ये इंतजार… हमें और करीब लाएगा।” वो दोनों घंटों वहाँ बैठे रहे, बस नजरें मिलाते, हाथ थामे, कभी-कभी होंठ इतने करीब कि साँसें मिल जाएँ, लेकिन किस नहीं किया।
घर लौटते वक्त कार में भी यही हुआ। प्रिंस ड्राइव कर रहा था, शिवानी पास बैठी। उसने अपना हाथ प्रिंस की जाँघ पर रख दिया। प्रिंस का शरीर सख्त हो गया। “शिवानी… मत करो… ड्राइव नहीं कर पाऊँगा।” शिवानी ने शरारत से कहा, “तो रुक जाओ ना… कहीं सुनसान जगह पर।” प्रिंस ने कार एक अंधेरी गली में रोकी। अब दोनों एक-दूसरे की ओर मुड़े। नजरें मिलीं – आग लग गई। प्रिंस ने शिवानी का चेहरा अपने हाथों में लिया, लेकिन फिर भी किस नहीं किया। बस नाकें रगड़ीं, होंठ इतने करीब कि छूने को तैयार। शिवानी की आँखें बंद हो गईं, “प्रिंस… प्लीज…” प्रिंस बोला, “नहीं… अभी नहीं। घर चलो। वहाँ… सब कुछ होगा।”
फ्लैट में पहुँचते ही दरवाजा बंद हुआ। रोशनी मंद। प्रिंस ने शिवानी को दीवार से सटाया। अब टेंशन चरम पर था। प्रिंस की आँखें शिवानी की आँखों में डूबी हुईं। “शिवानी… आज मैं तुम्हें… इतना चाहता हूँ कि… दर्द हो रहा है।” शिवानी ने उसके होंठों पर उँगली रखी, “तो ले लो… सब कुछ। लेकिन पहले… मुझे महसूस कराओ… कितना पागल हो तुम मेरे लिए।”
प्रिंस ने धीरे-धीरे साड़ी का पल्लू सरकाया। शिवानी की छाती नंगी हो गई। उसके निप्पल्स सख्त, गुलाबी। प्रिंस ने बस देखा, छुआ नहीं। शिवानी तड़प उठी, “प्रिंस… छुओ ना…” प्रिंस ने मुस्कुरा कर कहा, “इंतजार करो… जैसे मैं कर रहा हूँ।” फिर धीरे से उसकी कमर पकड़ी, साड़ी नीचे सरकाई। शिवानी पूरी नंगी हो गई। उसकी चूत गीली, चमक रही थी। प्रिंस घुटनों पर बैठ गया, लेकिन सिर्फ साँसें उस पर छोड़ीं – गर्म साँसें। शिवानी चीख उठी, “आह… प्रिंस… मत तड़पाओ… मैं मर जाऊँगी।”
प्रिंस उठा, खुद के कपड़े उतारे। उसका लंड खड़ा, नसें फूली हुईं। शिवानी ने देखा, उसकी आँखें फैल गईं। वो हाथ बढ़ाने लगी, लेकिन प्रिंस ने रोका। “नहीं… पहले मुझे देखो… कितना तुम्हारे लिए तैयार हूँ।” वो दोनों बेड पर लेटे, एक-दूसरे के सामने, लेकिन छुए नहीं। बस नजरें। शिवानी की साँसें तेज, प्रिंस की भी। आखिरकार, टेंशन टूटा। प्रिंस ने शिवानी को अपनी बाहों में खींचा। अब चुंबन – गहरा, जंगली। जीभें आपस में लड़ रही थीं। प्रिंस ने उसके स्तनों को दबाया, निप्पल्स चूसे। शिवानी चिल्लाई, “आह… हाँ… अब… सब कुछ…”
प्रिंस ने उसे लिटाया, टाँगें फैलाईं। लंड चूत पर रगड़ा – लेकिन अंदर नहीं डाला। शिवानी रोने लगी, “प्रिंस… प्लीज… डालो… सहन नहीं होता।” प्रिंस ने फुसफुसाया, “ये टेंशन… यही तो हमारा प्यार है।” फिर धीरे से अंदर गया। शिवानी का शरीर काँप उठा। धक्के धीमे, लेकिन गहरे। हर धक्के में वो टेंशन और बढ़ता। शिवानी चीख रही थी, “प्रिंस… जोर से… अब रुको मत… फाड़ दो मुझे…” प्रिंस ने स्पीड बढ़ाई, जोरदार धक्के। कमरा उनकी सिसकारियों से भर गया।
डॉगी स्टाइल में, प्रिंस पीछे से, बाल पकड़े। शिवानी की गांड थप्पड़ खा रही थी। “तेरी ये आँखें… जब तड़पती हैं… मुझे पागल कर देती हैं,” प्रिंस बोला। शिवानी बोली, “तो पागल कर दो… पूरी रात…” वो दोनों घंटों चुदाई करते रहे – कभी धीमे, टेंशन बनाते, कभी जंगली। अंत में प्रिंस अंदर झड़ा, शिवानी भी झड़ गई। दोनों थक कर लेटे, लेकिन आँखों में अभी भी वो चमक – वो रोमांटिक टेंशन जो कभी खत्म नहीं होने वाला।
अगली सुबह, शिवानी प्रिंस की छाती पर सिर रखे बोली, “प्रिंस… ये इंतजार… ये टेंशन… हमें हमेशा जिंदा रखेगा।” प्रिंस ने किस किया, “हाँ… और हर बार… और गहरा होगा।”
(कहानी जारी रहेगी…)
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Yesterday, 07:12 AM
(This post was last modified: 11 hours ago by Shivani4u. Edited 1 time in total. Edited 1 time in total.)
- शादी का प्रस्ताव और रोमांटिक टेंशन के बाद शिवानी और प्रिंस का रिश्ता और गहरा हो गया था। लेकिन पटना की जिंदगी में कभी-कभी अनजाने मोड़ आ जाते हैं। एक दिन शिवानी की कॉफी शॉप में एक नया ग्राहक आया – नाम था अहमद। 28 साल का, लंबा कद, घनी दाढ़ी, गहरी आँखें, और वो सफेद कुर्ता-पायजामा जो उसे और आकर्षक बनाता था। वो ,., था, पटना के पुराने इलाके से, एक छोटी सी ज्वेलरी शॉप चलाता था। वो रोज आता, ब्लैक कॉफी माँगता, और शिवानी से हल्की-फुल्की बातें करता।
शुरू में तो बस मुस्कान का आदान-प्रदान था। लेकिन अहमद की आँखों में एक अलग सी गहराई थी – वो शिवानी को ऐसे देखता जैसे वो दुनिया की सबसे कीमती चीज हो। शिवानी को भी उसकी आवाज में वो सुकून मिलता जो प्रिंस के जुनून में नहीं था। प्रिंस का प्यार आग था, लेकिन अहमद का… शायद वो शांति और खतरनाक आकर्षण का मिश्रण। शिवानी खुद को रोक नहीं पाती – वो सोचती, “ये गलत है… प्रिंस है मेरे साथ… लेकिन ये नजरें… ये बातें…”
एक शाम बारिश हो रही थी। प्रिंस कंपनी में लेट हो गया था। अहमद आया, शिवानी का शिफ्ट खत्म होने वाला था। “बारिश में भीगोगी? मैं ड्रॉप कर दूँ?” अहमद ने पूछा। शिवानी ने हाँ कह दिया – दिल में एक अजीब सा थ्रिल। कार में बैठे, रास्ता लंबा लग रहा था। अहमद ने रेडियो पर कोई पुराना गाना लगाया – “चाँदनी रातें…” शिवानी की साड़ी भीग गई थी, ब्लाउज से उसकी सेक्सी फिगर साफ झलक रही थी। अहमद की नजरें बार-बार उस पर जा रही थीं।
“शिवानी… तुम बहुत खूबसूरत हो,” अहमद ने धीरे से कहा। शिवानी शर्मा गई, “अहमद भाई… ऐसा मत कहो।” लेकिन उसकी आवाज में वो डर और उत्सुकता दोनों थी। अहमद ने कार एक सुनसान जगह पर रोकी – गंगा के किनारे, जहाँ कोई नहीं था। बारिश की बूँदें कार की छत पर गिर रही थीं। अहमद ने शिवानी का हाथ पकड़ा। “मैं जानता हूँ तुम किसी और की हो… लेकिन ये दिल… रुक नहीं रहा।” शिवानी ने हाथ नहीं छुड़ाया। उसकी साँसें तेज हो गईं।
अहमद ने धीरे से उसका चेहरा अपनी ओर किया। उनकी नजरें मिलीं – वो इंटरफेथ थ्रिल, वो निषिद्ध आकर्षण, वो डर कि कहीं कोई देख न ले। शिवानी की आँखें बंद हो गईं। अहमद ने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। चुंबन धीमा, लेकिन गहरा। शिवानी का शरीर सिहर उठा। अहमद की दाढ़ी उसके गालों पर रगड़ रही थी – एक नई सेंसेशन। शिवानी ने खुद को रोकने की कोशिश की, लेकिन उसके हाथ अहमद की छाती पर चले गए।
“अहमद… ये गलत है… प्रिंस…” शिवानी फुसफुसाई। अहमद बोला, “जानती हो ना… ये गलत होना ही इसे इतना रोमांचक बनाता है। * लड़की… ,., लड़का… पटना की गलियों में छिपकर…” वो बातें सुनकर शिवानी की बॉडी में आग लग गई। अहमद ने उसकी साड़ी का पल्लू सरकाया। ब्लाउज गीला था, निप्पल्स सख्त दिख रहे थे। अहमद ने ब्लाउज के हुक खोले, उसके स्तनों को हाथों में लिया। “अल्लाह… कितनी नरम…” वो बोला। शिवानी सिसकारी, “आह… अहमद… धीरे…”
अहमद ने उसे कार की सीट पर लिटाया। बारिश की आवाज के बीच उसने शिवानी की साड़ी ऊपर की। पैंटी गीली थी। अहमद ने उसे उतारा, अपनी जीभ से चाटना शुरू किया। शिवानी चीख उठी, “उफ्फ… अहमद… ये… पहली बार किसी और के साथ…” थ्रिल और बढ़ गया – प्रिंस को छुपाकर ये सब। अहमद का लंड पैंट में सख्त हो चुका था। शिवानी ने उसे निकाला – मोटा, लंबा, नसें फूली हुईं। “अहमद… इतना बड़ा…” वो बोली।
अहमद ने धीरे से अंदर डाला। शिवानी की चूत टाइट थी, वो दर्द और मजा दोनों महसूस कर रही थी। “आह… अहमद… जोर से… ये पाप… ये मजा…” अहमद धक्के मारने लगा – जोरदार, लेकिन कंट्रोल्ड। कार हिल रही थी। शिवानी की छाती उछल रही थी, वो अहमद की पीठ पर नाखून गाड़ रही थी। “फक मी… जैसे कोई ,., राजा अपनी * रानी को…” शिवानी चिल्लाई। अहमद ने स्पीड बढ़ाई, “तेरी चूत… मेरे लिए बनी है… अल्लाह की कसम…”
डॉगी स्टाइल में अहमद ने उसे पकड़ा। शिवानी की गांड ऊपर, अहमद पीछे से पेल रहा था। वो उसके बाल खींच रहा था, गांड पर थप्पड़ मार रहा था। “ये इंटरफेथ… ये थ्रिल… कभी खत्म नहीं होना चाहिए,” अहमद बोला। शिवानी झड़ गई – उसकी चूत से पानी निकला। अहमद भी अंदर झड़ गया, गरम स्पर्म भर दिया।
बारिश थम गई। दोनों साँसें लेते हुए लेटे। शिवानी बोली, “अहमद… ये सिर्फ एक बार… प्रिंस को पता नहीं चलना चाहिए।” अहमद ने मुस्कुरा कर कहा, “जान… ये शुरूआत है। हर बार… और गहरा थ्रिल।”
घर लौटकर शिवानी प्रिंस के साथ लेटी, लेकिन मन में अहमद की यादें। प्रिंस ने उसे गले लगाया, “कहाँ थी इतनी देर?” शिवानी मुस्कुराई, “बारिश में… बस थोड़ी देर।” लेकिन उसकी आँखों में वो नया राज था – इंटरफेथ का राज, जो अब उसकी जिंदगी में नई आग लगा रहा था।
कुछ दिनों बाद अहमद ने मैसेज किया: “कल रात… मेरी दुकान पर आना। बंद रहती है… सिर्फ हम दोनों।” शिवानी का दिल धड़का। प्रिंस को बहाना बनाकर वो गई। दुकान के पीछे कमरे में अहमद इंतजार कर रहा था। रोशनी मंद, अगरबत्ती की खुशबू। अहमद ने उसे बाहों में लिया। इस बार कोई रुकावट नहीं – वो पूरी रात चुदाई करते रहे। अहमद ने उसे नमाज पढ़ने के बाद छुआ – वो थ्रिल और बढ़ गया। शिवानी बोली, “अहमद… तेरे साथ… सब कुछ नया लगता है… धर्म, संस्कृति… सब मिक्स हो जाता है।”
अहमद ने उसे दीवार से सटाकर पेला, “तेरी ये बॉडी… मेरे लिए हलाल हो गई है।” शिवानी चीखी, “हाँ… ले ले मुझे… पूरी तरह।” रात भर नए-नए पोज – कभी मिशनरी, कभी राइडिंग, कभी स्टैंडिंग। अहमद ने उसके मुँह में भी डाला, शिवानी ने चूसा जैसे कोई सबसे कीमती चीज हो।
सुबह होने से पहले शिवानी लौटी। प्रिंस सो रहा था। लेकिन अब शिवानी की जिंदगी में दो आगें – प्रिंस का जुनून और अहमद का इंटरफेथ थ्रिल। वो दोनों राज रख रही थी, लेकिन हर मुलाकात में वो आग और भड़क रही थी। पटना की गलियों में छिपा ये राज… कभी बाहर आएगा या हमेशा छिपा रहेगा?
(कहानी जारी रहेगी…)
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अहमद के साथ वो पहली मुलाकात के बाद से शिवानी का मन दो टुकड़ों में बंट गया था। दिन में प्रिंस के साथ वो हँसती, उसके गले लगती, उसके साथ प्लान बनाती – शादी की तारीख, घर, बच्चे। प्रिंस की आँखों में वो प्यार देखकर उसका दिल पिघल जाता। प्रिंस उसे “जान” कहकर पुकारता, उसके माथे पर किस करता, और कहता, “तुम मेरी पूरी दुनिया हो, शिवानी। कभी मत छोड़ना मुझे।” हर बार शिवानी का गला रुँध जाता। वो सोचती, “प्रिंस… मैं तुम्हें कितना प्यार करती हूँ… फिर भी…”
रात होते ही अहमद की यादें आ घेरतीं। उसकी दाढ़ी की रगड़, उसकी गहरी आवाज में “अल्लाह की कसम” कहना, वो इंटरफेथ का निषिद्ध रोमांच – सब कुछ शिवानी को खींचता। लेकिन साथ ही अपराधबोध भी। वो आईने के सामने खड़ी होकर खुद से बात करती, “शिवानी… तू क्या कर रही है? प्रिंस ने तुझे कभी धोखा नहीं दिया। वो तेरे लिए सब कुछ छोड़ सकता है। और तू… एक गलती से अपनी जिंदगी बर्बाद कर रही है?”
एक शाम प्रिंस ने सरप्राइज दिया। फ्लैट में कैंडल लाइट डिनर। टेबल पर फूल, शिवानी का पसंदीदा खाना। प्रिंस घुटनों पर बैठ गया, एक छोटी सी रिंग हाथ में। “शिवानी… अगले महीने शादी फाइनल कर लें? मैं इंतजार नहीं कर पा रहा। तुम्हारे बिना… अधूरा लगता हूँ।” शिवानी की आँखों में आँसू आ गए। वो रिंग देख रही थी – सिंपल, लेकिन प्रिंस की सच्ची मोहब्बत से भरी। उसने हाँ कहा, लेकिन दिल में तूफान था। प्रिंस ने उसे गले लगाया, “क्यों रो रही हो, जान?” शिवानी ने बहाना बनाया, “खुशी के आँसू… बस।”
उसी रात, जब प्रिंस सो गया, शिवानी फोन उठाकर अहमद को मैसेज किया: “नहीं मिलना चाहिए अब। ये गलत है। मैं प्रिंस से शादी करने वाली हूँ।” अहमद का रिप्लाई तुरंत आया: “शिवानी… मैं समझता हूँ। लेकिन क्या तुम सच में खुश हो? या बस डर रही हो? मैं तुम्हें जबरदस्ती नहीं रखूँगा… लेकिन वो रातें… वो सिहरन… वो सब झूठ नहीं था।”
शिवानी का दिल टूट रहा था। वो बेड पर लेटी रोने लगी। एक तरफ प्रिंस – जो उसका बचपन का सपना था, उसकी सुरक्षा, उसका घर। दूसरी तरफ अहमद – जो उसकी आत्मा को छूता था, जो उसे वो आजादी देता था जो वो कभी महसूस नहीं कर पाई। वो सोचती, “अगर प्रिंस को पता चला तो? वो टूट जाएगा। मैं उसे मार डालूँगी। लेकिन अगर मैं अहमद को छोड़ दूँ… तो क्या मैं कभी खुद को माफ कर पाऊँगी?”
अगले दिन अहमद ने दुकान पर बुलाया। शिवानी नहीं जाना चाहती थी, लेकिन पैर खुद-ब-खुद वहाँ पहुँच गए। दुकान बंद थी। अहमद ने दरवाजा खोला। अंदर अगरबत्ती जल रही थी, कुरान की आयतें दीवार पर। अहमद ने उसे देखा, आँखें नम। “शिवानी… मैंने सोचा था मैं तुम्हें भूल जाऊँगा। लेकिन नहीं हो पा रहा।” शिवानी रो पड़ी, “अहमद… मैं प्रिंस को धोखा नहीं देना चाहती। वो मेरा सब कुछ है। लेकिन तुम… तुम्हारे बिना भी अधूरा लगता है। मैं क्या करूँ?”
अहमद ने उसे बाहों में लिया। इस बार कोई जुनून नहीं – बस गहरा दर्द। वो दोनों बैठे रहे, एक-दूसरे को गले लगाए। अहमद बोला, “मैं ,., हूँ… तुम *। हमारा मिलना समाज कभी मंजूर नहीं करेगा। लेकिन दिल… दिल तो नहीं मानता। अगर तुम कहो तो मैं चला जाऊँगा पटना से। तुम्हारी खुशी सबसे जरूरी है।”
शिवानी ने उसका चेहरा अपने हाथों में लिया। “नहीं… मत जाओ। मैं… मैं कन्फ्यूज हूँ।” उनकी नजरें मिलीं। धीरे से चुंबन हुआ – इस बार जुनून से ज्यादा दर्द भरा। अहमद ने उसकी साड़ी नहीं उतारी। बस उसे सहलाया, जैसे वो आखिरी बार हो। शिवानी रोते हुए बोली, “अहमद… अगर मैं प्रिंस से शादी कर लूँ… तो क्या तुम मुझे भूल जाओगे?” अहमद ने कहा, “नहीं… लेकिन मैं तुम्हें कभी परेशान नहीं करूँगा। तुम्हारी खुशी… बस यही दुआ करूँगा।”
शिवानी घर लौटी। प्रिंस इंतजार कर रहा था। “कहाँ थी इतनी देर?” शिवानी ने झूठ बोला, “दुकान गई थी कुछ सामान लेने।” प्रिंस ने उसे गले लगाया। शिवानी की आँखों से आँसू गिरे। प्रिंस ने पूछा, “क्या हुआ?” शिवानी ने कहा, “कुछ नहीं… बस तुम्हें बहुत मिस कर रही थी।” लेकिन अंदर से वो चीख रही थी – “प्रिंस… मुझे माफ कर दो… मैं तुम्हें प्यार करती हूँ… लेकिन मेरा दिल दो जगहों पर है।”
रात को प्रिंस ने उसे प्यार से छुआ। धीरे-धीरे, रोमांटिक। शिवानी ने आँखें बंद कीं, लेकिन मन में अहमद की तस्वीर। वो प्रिंस के साथ थी, लेकिन उसका दिल कहीं और। प्रिंस ने कहा, “शिवानी… तुम आज कुछ अलग लग रही हो। सब ठीक है न?” शिवानी ने मुस्कुरा कर कहा, “हाँ… बस थक गई हूँ।”
अगले कुछ दिन शिवानी ने अहमद से दूरी बनाई। लेकिन हर बार जब प्रिंस उसे “आई लव यू” कहता, उसका अपराधबोध बढ़ता। वो सोचती, “मैं दो लोगों को दुख दे रही हूँ। प्रिंस को धोखा… अहमद को इंतजार। मैं कौन सी लड़की हूँ?” एक रात वो अकेले गंगा घाट पर गई। बैठी रही, रोती रही। “भगवान… मुझे रास्ता दिखाओ। मैं किसे चुनूँ? या दोनों को खो दूँ?”
फिर अचानक फोन बजा – अहमद का। “शिवानी… मैं जा रहा हूँ पटना से। कल सुबह ट्रेन है। बस… एक बार मिल लो। आखिरी बार।” शिवानी का दिल धड़क उठा। वो जानती थी – अगर वो मिली तो शायद वापस न लौट पाए। लेकिन अगर नहीं मिली… तो शायद हमेशा पछताएगी।
उस रात वो प्रिंस से कहा, “कल सुबह जल्दी शिफ्ट है।” प्रिंस ने किस किया, “ठीक है, जान। सेफली जाना।” शिवानी रो पड़ी – प्रिंस को पता नहीं था कि ये शायद आखिरी किस हो।
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अहमद के जाने का फैसला शिवानी के दिल को चीर रहा था, लेकिन उस रात जब वो प्रिंस के साथ बेड पर लेटी, तो सब कुछ बदल गया। प्रिंस ने महसूस किया कि शिवानी कुछ अलग है – उसकी आँखों में दर्द, लेकिन साथ ही एक भूख जो छिप नहीं रही थी। प्रिंस ने उसे अपनी बाहों में खींचा, होंठ उसके होंठों पर रख दिए। चुंबन शुरू हुआ – पहले धीमा, फिर जंगली। प्रिंस की जीभ शिवानी के मुँह में घुस गई, दोनों एक-दूसरे को चूसने लगे जैसे सालों बाद मिले हों।
शिवानी का अपराधबोध अभी भी था, लेकिन प्रिंस का स्पर्श उसे सब भुला रहा था। वो सोच रही थी, “अहमद जा रहा है… अब सिर्फ प्रिंस… मुझे उसे सब कुछ देना है… उसे साबित करना है कि मैं सिर्फ उसकी हूँ।” उसने प्रिंस की शर्ट फाड़ दी, उसके चौड़े सीने पर नाखून फिराए। प्रिंस ने शिवानी की टी-शर्ट उतारी – ब्रा नहीं थी, उसके स्तन बाहर आ गए, निप्पल्स पहले से सख्त। प्रिंस ने उन्हें मुँह में लिया, जोर-जोर से चूसने लगा, काटने लगा। शिवानी चीख उठी, “आह… प्रिंस… चूसो जोर से… मेरे निप्पल्स फाड़ दो…”
प्रिंस ने शिवानी को बेड पर पटका, उसकी शॉर्ट्स उतारी। पैंटी गीली हो चुकी थी। प्रिंस ने उसे फाड़ दिया – शिवानी की चूत नंगी, बाल साफ, गुलाबी और चमकदार। प्रिंस ने अपनी जीभ अंदर डाली, क्लिटोरिस को चूसने लगा जैसे भूखा शेर हो। शिवानी का शरीर काँप रहा था, वो चिल्ला रही थी, “प्रिंस… उफ्फ… जीभ अंदर डालो… चाटो मेरी चूत… आह… मैं झड़ जाऊँगी…” प्रिंस ने दो उँगलियाँ अंदर डालीं, तेज-तेज फिंगर फक करते हुए क्लिट चूस रहा था। शिवानी ने पहला ऑर्गेज्म पकड़ा – उसकी चूत से गरम पानी निकला, प्रिंस के मुँह पर।
प्रिंस ने अपना लंड निकाला – 8 इंच का मोटा, नसें फूली हुईं, सिर लाल और चमकदार। शिवानी ने उसे देखा, आँखें फैल गईं। “प्रिंस… आज इसे मेरे अंदर दफन कर दो… पूरी तरह…” वो बोली। प्रिंस ने शिवानी की टाँगें कंधों पर रखीं, एक झटके में पूरा लंड अंदर डाल दिया। शिवानी चीखी, “आआह्ह्ह… इतना गहरा… फाड़ दोगे मेरी चूत…” लेकिन उसकी आँखें खुशी से चमक रही थीं। प्रिंस ने धक्के मारने शुरू किए – जोरदार, तेज, बिना रुके। बेड हिल रहा था, थप-थप की आवाज कमरे में गूँज रही थी।
शिवानी चिल्ला रही थी, “फक मी हार्ड… जोर से… मेरी चूत तुम्हारी है… पेलो मुझे… आह… यस… और तेज…” प्रिंस ने स्पीड बढ़ा दी, हर धक्के में लंड पूरी तरह बाहर- अंदर। शिवानी की छाती उछल रही थी, वो प्रिंस की पीठ पर नाखून गाड़ रही थी, खून निकल आया। प्रिंस ने उसे पलटा, डॉगी स्टाइल में किया। शिवानी की गांड ऊपर, प्रिंस पीछे से पेल रहा था। वो गांड पर जोर-जोर से थप्पड़ मार रहा था – लाल निशान पड़ गए। “तेरी गांड… कितनी सेक्सी… आज इसे भी फाड़ूँगा,” प्रिंस बोला।
शिवानी बोली, “हाँ… मेरी गांड में डालो… पहली बार नहीं… लेकिन आज जोर से…” प्रिंस ने लुब्रिकेंट लगाया, फिर धीरे से लंड गांड में डाला। शिवानी दर्द से चीखी, “आह… दर्द… लेकिन रुको मत… पूरा डालो…” प्रिंस ने पूरा अंदर कर दिया, फिर धक्के शुरू। शिवानी की चीखें मजा में बदल गईं, “उफ्फ… प्रिंस… मेरी गांड… चोदो… हार्ड… गहरा… आह…” प्रिंस बाल खींच रहा था, गांड पर थप्पड़ मार रहा था, लंड तेज-तेज अंदर-बाहर।
फिर प्रिंस ने शिवानी को गोद में उठाया, स्टैंडिंग पोजीशन में। शिवानी उसकी कमर पर टाँगें लपेटे, उछल रही थी। प्रिंस उसे चोद रहा था, दीवार से सटाकर। शिवानी चिल्ला रही थी, “प्रिंस… तुम्हारा लंड… मेरी चूत में… हमेशा रहना चाहिए… आह… मैं फिर झड़ रही हूँ…” उसकी चूत काँप उठी, दूसरा ऑर्गेज्म। प्रिंस ने उसे बेड पर पटका, मिशनरी में फिर से शुरू। अब वो और जंगली हो गया – लंड चूत में धक्के, हाथ से क्लिट रगड़ रहा था। शिवानी रो रही थी मजा से, “प्रिंस… कम इनसाइड… मुझे तुम्हारा स्पर्म चाहिए… भर दो मेरी चूत…”
प्रिंस ने जोर का धक्का मारा, गरम स्पर्म अंदर छोड़ दिया। दोनों थक कर लेट गए, लेकिन शिवानी अभी रुकी नहीं। वो प्रिंस के लंड को फिर से मुँह में ले लिया – क्लीनअप ब्लोजॉब। वो चूस रही थी, गले तक ले रही थी, गैगिंग कर रही थी। प्रिंस फिर सख्त हो गया। इस बार शिवानी ऊपर चढ़ी – काउगर्ल पोजीशन। वो उछल रही थी, लंड अंदर-बाहर, छाती उछाल रही थी। “प्रिंस… देखो… मैं तुम्हारी रंडी हूँ… आज पूरी रात चोदो मुझे…” वो बोली। प्रिंस ने उसके निप्पल्स पकड़े, नीचे से धक्के मार रहे थे।
रात भर चुदाई चलती रही। बीच-बीच में ब्रेक – पानी पीते, फिर शुरू। एक बार किचन में – शिवानी काउंटर पर बैठी, प्रिंस खड़ा चोद रहा था। फिर बाथरूम में शावर के नीचे – पानी बहता, प्रिंस दीवार से सटाकर पेल रहा था। शिवानी की सिसकारियाँ गूँज रही थीं, “प्रिंस… तुम्हारा लंड… मेरी जान… फाड़ दो सब कुछ…”
सुबह होने तक दोनों पसीने और स्पर्म से तर। शिवानी प्रिंस की छाती पर सिर रखे लेटी थी। उसका अपराधबोध अब कम हो चुका था – वो सोच रही थी, “अहमद जा रहा है… अब सिर्फ प्रिंस… मैंने उसे सब कुछ दे दिया… ये मेरा फैसला है।” प्रिंस ने उसके माथे पर किस किया, “शिवानी… आज रात… तुमने मुझे महसूस कराया कि तुम सिर्फ मेरी हो। आई लव यू… हमेशा।”
शिवानी मुस्कुराई, लेकिन आँखों में एक हल्का सा दर्द अभी भी था। वो जानती थी कि अहमद की ट्रेन सुबह निकल चुकी होगी। लेकिन अब वो प्रिंस के साथ पूरी तरह थी – या कम से कम कोशिश कर रही थी। उनका जुनून अब और गहरा हो चुका था, हर रात ऐसी ही हार्डकोर, ऐसी ही जंगली।
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कुछ हफ्ते बीत गए थे। अहमद पटना छोड़कर चला गया था – उसकी ट्रेन की आवाज अब भी शिवानी के कानों में गूँजती थी, लेकिन वो खुद को समझा रही थी कि सब खत्म हो गया। प्रिंस के साथ उसकी जिंदगी अब पहले से ज्यादा मजबूत लग रही थी। हर रात हार्डकोर सेक्स, प्यार भरी बातें, शादी की तैयारियाँ – सब कुछ परफेक्ट। लेकिन पिछले कुछ दिनों से शिवानी को कुछ अजीब लग रहा था। उल्टियाँ, थकान, ब्रेस्ट में दर्द, और पीरियड्स लेट। वो डर रही थी, लेकिन प्रिंस को कुछ नहीं बताया।
एक सुबह शिवानी ने फार्मेसी से प्रेग्नेंसी टेस्ट किट खरीदी। बाथरूम में जाकर टेस्ट किया। दो लाइनें – पॉजिटिव। शिवानी का हाथ काँपने लगा। वो आईने में खुद को देख रही थी – आँखें नम, चेहरा पीला। “ये… प्रिंस का नहीं हो सकता,” वो फुसफुसाई। क्योंकि आखिरी बार प्रिंस के साथ जब वो इतनी जोरदार चुदाई हुई थी, वो उसके बाद का समय था। लेकिन अहमद के साथ… वो कार वाली रात, दुकान वाली पूरी रात – वो सब बिना प्रोटेक्शन के था। टाइमिंग मैच कर रही थी। बच्चा अहमद का था।
शिवानी का दिल टूट रहा था। वो फर्श पर बैठ गई, रोने लगी। “भगवान… मैंने क्या कर दिया? प्रिंस… वो खुश होगा… लेकिन ये उसका नहीं है। अहमद… वो तो जा चुका है। मैं क्या करूँ?” अपराधबोध, डर, और एक अजीब सी खुशी – बच्चे की। वो पेट पर हाथ रखकर बोली, “तू… तू अहमद का है… लेकिन मैं तुझे कैसे बताऊँ?”
शाम को प्रिंस घर आया। खुश था, हाथ में फूलों का गुलदस्ता। “जान… आज स्पेशल डिनर! शादी की डेट फाइनल हो गई है।” शिवानी मुस्कुराने की कोशिश की, लेकिन आँखें छिप नहीं पा रही थीं। डिनर के बाद प्रिंस ने उसे बाहों में लिया। “क्या हुआ? आज कुछ उदास लग रही हो।” शिवानी ने हिम्मत जुटाई। “प्रिंस… मुझे कुछ बताना है।”
वो बेड पर बैठी। प्रिंस उसके सामने। शिवानी ने टेस्ट किट निकाली। “मैं… प्रेग्नेंट हूँ।” प्रिंस की आँखें चमक उठीं। वो खुशी से चीखा, “सच में? ओह माय गॉड… शिवानी! हमारा बच्चा!” वो उसे गले लगाने लगा, किस करने लगा। लेकिन शिवानी रो पड़ी। प्रिंस रुक गया। “क्यों रो रही हो? खुशी के आँसू?”
शिवानी ने सिर झुका लिया। “प्रिंस… ये बच्चा… तुम्हारा नहीं है।” कमरे में सन्नाटा छा गया। प्रिंस का चेहरा सफेद पड़ गया। “क्या… मतलब?” शिवानी रोते हुए बोली, “अहमद… वो ,., लड़का… जिससे मैं मिलती थी… वो… वो बच्चे का बाप है। मैंने धोखा दिया… मैं सॉरी हूँ… मैंने सब बर्बाद कर दिया।”
प्रिंस उठ खड़ा हुआ। उसकी आँखें लाल, गुस्सा और दर्द। “तू… तूने मुझे धोखा दिया? इतने दिनों से? और अब… बच्चा किसी और का?” वो चिल्लाया। शिवानी घुटनों पर बैठ गई, उसके पैर पकड़े। “प्रिंस… प्लीज… मैं प्यार करती हूँ तुमसे… लेकिन वो गलती हो गई… मैं कन्फ्यूज थी… लेकिन अब… मैं तुम्हारे साथ रहना चाहती हूँ। बच्चे को… तुम अपना मान लो ना?”
प्रिंस ने उसे झटका। “अपना मान लूँ? किसी ,., का बच्चा? पटना में सब जानेंगे… हमारी इज्जत… सब कुछ…” वो दीवार से सिर टकराने लगा। शिवानी रो रही थी, “प्रिंस… मार दो मुझे… लेकिन छोड़ना मत… मैं तुम्हारे बिना नहीं जी सकती।”
प्रिंस कुछ देर चुप रहा। फिर धीरे से बोला, “शिवानी… मैं तुझे प्यार करता हूँ… बहुत ज्यादा। लेकिन ये… ये सहन नहीं होगा।” वो बाहर चला गया। शिवानी अकेली रोती रही। रात भर नहीं सोई। सुबह प्रिंस लौटा। उसकी आँखें सूजी हुईं। वो शिवानी के पास बैठा। “मैंने सोचा है। बच्चा… अगर तू चाहे तो… मैं उसका बाप बन सकता हूँ। लेकिन शर्त है – अहमद से कभी संपर्क नहीं। और ये राज हमेशा राज रहेगा।”
शिवानी ने उसे गले लगाया। “प्रिंस… थैंक यू… मैं वादा करती हूँ।” लेकिन अंदर से वो टूट रही थी। प्रिंस ने उसे किस किया – लेकिन वो किस पहले जैसा नहीं था। अब वो बच्चे के साथ सेक्स नहीं कर सकता था जैसे पहले करता था। वो धीरे-धीरे, केयरफुली छूता। लेकिन शिवानी की बॉडी अब बदल रही थी – पेट उभरने लगा, स्तन भरे हुए।
एक रात प्रिंस ने कहा, “शिवानी… प्रेग्नेंसी में सेक्स सेफ है… लेकिन अब… मैं नहीं कर पाता। तू किसी और की… लगता है।” शिवानी रो पड़ी। लेकिन वो जानती थी – ये उसकी सजा है। वो अकेले पेट सहलाती, बच्चे से बात करती – “तू अहमद का है… लेकिन मैं तुझे प्रिंस के नाम से पालूँगी।”
कुछ महीनों बाद शिवानी का पेट बड़ा हो गया। प्रिंस बाहर से खुश दिखता, लेकिन अंदर दर्द था। शिवानी अब सिर्फ प्रिंस की थी – लेकिन बच्चा याद दिलाता रहता कि एक गलती ने सब बदल दिया। उनका प्यार अब दर्द और जिम्मेदारी का मिश्रण था। पटना की गलियों में वो जोड़ी अब अलग लगती – खुश, लेकिन टूटी हुई।
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शिवानी का पेट अब काफी बड़ा हो चुका था। 7 महीने का हो गया था। वो लाल साड़ी में घर के काम करती, लेकिन हर बार आईने में खुद को देखकर रुक जाती। बच्चा अंदर हिलता, और वो पेट पर हाथ रखकर फुसफुसाती, “तू किसका है… लेकिन मैं तुझे प्यार करूँगी।” प्रिंस बाहर से सपोर्टिव था – डॉक्टर के चेकअप ले जाता, फल लाता, लेकिन रात को जब वो शिवानी को छूता, तो उसकी आँखों में वो पुराना जुनून नहीं रहता था। वो धीरे से किस करता, लेकिन सेक्स अब दूर की बात हो गई थी। प्रिंस कहता, “बच्चे को कुछ नहीं होना चाहिए,” लेकिन शिवानी जानती थी – वो बच्चे को देखकर अहमद याद आता है।
एक दोपहर शिवानी कॉफी शॉप के बाहर घूम रही थी – अब वो काम नहीं करती थी, बस घर पर रहती। अचानक वो ठिठक गई। सड़क के उस पार, ज्वेलरी शॉप के सामने अहमद खड़ा था। वही दाढ़ी, वही गहरी आँखें, लेकिन अब चेहरे पर थकान। वो पटना वापस आ गया था। शिवानी का दिल धड़क उठा। वो भागना चाहती थी, लेकिन पैर नहीं चले। अहमद ने उसे देख लिया। उनकी नजरें मिलीं – वो पुराना थ्रिल, वो दर्द, सब वापस आ गया।
अहमद धीरे से पास आया। “शिवानी…” उसकी आवाज काँप रही थी। शिवानी ने पेट पर हाथ रखा, जैसे बच्चे को छिपाना चाहती हो। “अहमद… तू… तू वापस क्यों?” वो फुसफुसाई। अहमद की आँखें शिवानी के पेट पर गईं। वो समझ गया। “ये… मेरा है ना?” उसने पूछा, आवाज में दर्द और खुशी दोनों। शिवानी रो पड़ी। “हाँ… लेकिन प्रिंस… वो मुझे माफ कर चुका है। वो बच्चे का बाप बनेगा। तू चला जा… प्लीज।”
अहमद ने हाथ बढ़ाया, लेकिन छुआ नहीं। “मैं गया था… सोचा भूल जाऊँगा। लेकिन नहीं भूल पाया। हर रात तेरी याद आती। मैं वापस आया… सिर्फ देखने के लिए। लेकिन अब… ये बच्चा…” वो घुटनों पर बैठ गया, सड़क पर। लोग देख रहे थे, लेकिन उसे फर्क नहीं पड़ा। “शिवानी… मुझे एक मौका दे। मैं तुम दोनों को ले जाऊँगा। मैं ,., हूँ… लेकिन मैं बच्चे को अपना मानूँगा।”
शिवानी का दिल टूट रहा था। वो रोते हुए बोली, “अहमद… मैं प्रिंस से वादा कर चुकी हूँ। वो टूट जाएगा। और समाज… पटना में सब जानेंगे।” लेकिन अहमद उठा, उसे एक सुनसान गली में ले गया। वहाँ कोई नहीं था। वो शिवानी को दीवार से सटाया – लेकिन जुनून से नहीं, दर्द से। “मैं तुझे जबरदस्ती नहीं लूँगा। लेकिन बच्चा मेरा है… मुझे उसका हक है।” शिवानी ने उसका चेहरा छुआ। “अहमद… मैं भी तुझे भूली नहीं। लेकिन अब… सब कुछ बदल गया।”
अहमद ने उसे गले लगाया। शिवानी का पेट उनके बीच था। वो बच्चे को महसूस कर रहा था। “मेरा बच्चा…” वो फुसफुसाया। शिवानी रो रही थी। “प्रिंस घर पर इंतजार कर रहा है। वो अच्छा आदमी है… उसने मुझे छोड़ा नहीं।” अहमद ने कहा, “मैं जानता हूँ। लेकिन क्या तू खुश है? सच में?” शिवानी चुप रही।
उस शाम शिवानी घर लौटी। प्रिंस ने देखा उसकी आँखें लाल। “क्या हुआ?” शिवानी ने झूठ बोला, “बस… थक गई।” लेकिन रात को वो नहीं सो पाई। प्रिंस सो रहा था, शिवानी उठी। फोन उठाया, अहमद को मैसेज किया: “कल मिल… गंगा घाट पर। शाम को।” वो जानती थी – ये फैसला लेना होगा।
अगली शाम गंगा घाट पर। सूर्यास्त। शिवानी लाल साड़ी में, पेट बड़ा। अहमद आया। वो दोनों बैठे। अहमद ने शिवानी का हाथ पकड़ा। “शिवानी… मैं तुझे और बच्चे को ले जाना चाहता हूँ। मैं दिल्ली में नई जिंदगी शुरू कर सकता हूँ।” शिवानी रो पड़ी। “अहमद… प्रिंस ने सब सह लिया। मैं उसे छोड़कर नहीं जा सकती। लेकिन… बच्चा… वो तेरे जैसा दिखेगा।”
अहमद ने पेट पर हाथ रखा। बच्चा हिला। दोनों की आँखें नम। अहमद बोला, “तो क्या करूँ? मैं दूर से देखूँगा? या…” शिवानी ने कहा, “मैं प्रिंस से बात करूँगी। शायद… वो समझ जाए। लेकिन अगर नहीं… तो मैं अकेली रहूँगी बच्चे के साथ।”
उस पल में अहमद ने शिवानी को किस किया – धीमा, भावुक। शिवानी ने जवाब दिया। लेकिन जल्दी अलग हो गई। “नहीं… अभी नहीं।” वो उठी, चली गई। अहमद पीछे देखता रहा।
घर लौटकर शिवानी ने प्रिंस से कहा, “प्रिंस… अहमद वापस आ गया है।” प्रिंस का चेहरा सफेद पड़ गया। “क्या… वो जानता है?” शिवानी ने हाँ में सिर हिलाया। प्रिंस चुप रहा। फिर बोला, “शिवानी… तू फैसला ले। मैं… मैं तुझे खोना नहीं चाहता। लेकिन बच्चा… अगर वो उसका है… तो मैं कैसे?”
शिवानी रो पड़ी। “प्रिंस… मैं तुम दोनों को नहीं खोना चाहती।” लेकिन अब फैसला उसका था – प्रिंस के साथ रहना, या अहमद के साथ नई शुरुआत। पटना की गलियाँ अब और तंग लग रही थीं। बच्चा आने वाला था – और सच सामने आने वाला था।
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अहमद की वापसी के बाद घर का माहौल और तनावपूर्ण हो गया था। प्रिंस बाहर से शांत दिखता, लेकिन अंदर से जल रहा था। वो शिवानी को देखता, उसके बड़े होते पेट को देखता, और मन ही मन सोचता – “ये बच्चा किसी और का है… फिर भी मैं इसे अपना मान रहा हूँ।” शिवानी का अपराधबोध चरम पर था। वो प्रिंस को खुश रखने की कोशिश करती, लेकिन रातें अब पहले जैसी नहीं थीं। प्रिंस अब उसे छूता भी तो सावधानी से, जैसे कोई नाजुक चीज हो।
एक रात बारिश हो रही थी। पटना की सड़कें खाली। प्रिंस कंपनी से लौटा, भीगा हुआ। शिवानी ने उसे तौलिया दिया। प्रिंस ने उसे देखा – शिवानी लाल नाइट गाउन में, पेट उभरा हुआ, स्तन भरे हुए, निप्पल्स कपड़े से साफ दिख रहे थे। प्रिंस की आँखों में अचानक वो पुरानी आग भड़क उठी। वो शिवानी को दीवार से सटा दिया। “शिवानी… आज मैं रुक नहीं सकता। मैं तुझे चाहता हूँ… पूरी तरह… जैसे पहले।”
शिवानी की साँसें तेज हो गईं। “प्रिंस… बच्चा… डॉक्टर ने कहा है…” लेकिन प्रिंस ने उसके होंठ दबा दिए। चुंबन जंगली था – जीभें लड़ रही थीं, दाँत कट रहे थे। प्रिंस ने नाइट गाउन ऊपर खींचा, शिवानी की ब्रा नहीं थी। उसके भरे हुए स्तन बाहर आ गए – निप्पल्स गहरे गुलाबी, दूध की बूँदें टपक रही थीं। प्रिंस ने एक स्तन मुँह में लिया, जोर से चूसने लगा। शिवानी चीख उठी, “आह… प्रिंस… दूध… चूसो… जोर से…” दूध उसके मुँह में आ रहा था, प्रिंस और पागल हो गया। वो दोनों स्तनों को बारी-बारी चूस रहा था, काट रहा था। शिवानी की सिसकारियाँ कमरे में गूँज रही थीं।
प्रिंस ने शिवानी को बेड पर लिटाया। उसकी टाँगें फैलाईं। नाइट गाउन पूरी तरह ऊपर। शिवानी की चूत गीली हो चुकी थी, गर्भावस्था की वजह से और ज्यादा संवेदनशील। प्रिंस ने अपनी जीभ अंदर डाली, क्लिटोरिस को चूसने लगा। शिवानी चिल्लाई, “प्रिंस… उफ्फ… हाँ… चाटो… मेरी चूत… आह… बच्चा हिल रहा है… लेकिन रुको मत…” प्रिंस ने उँगलियाँ अंदर डालीं – तीन उँगलियाँ, तेज-तेज अंदर-बाहर। शिवानी का शरीर काँप रहा था, वो झड़ गई – चूत से गरम पानी निकला।
प्रिंस ने अपना लंड निकाला – पहले से ही सख्त, मोटा, नसें फूली हुईं। वो शिवानी के पेट को देख रहा था, लेकिन अब रुकने का मन नहीं था। “शिवानी… मैं साइड से करूँगा… ताकि बच्चे पर दबाव न पड़े।” वो शिवानी को साइड में लिटाया, पीछे से लिपटा। लंड चूत पर रगड़ा, फिर धीरे से अंदर डाला। शिवानी चीखी, “आह… प्रिंस… इतना मोटा… गहरा मत… लेकिन… और डालो…” प्रिंस ने पूरा अंदर कर दिया। धक्के शुरू – धीमे लेकिन गहरे, पीछे से। शिवानी की गांड प्रिंस की जाँघों से टकरा रही थी।
“फक मी… प्रिंस… जोर से… मैं तुम्हारी हूँ… सिर्फ तुम्हारी…” शिवानी चिल्ला रही थी। प्रिंस ने स्पीड बढ़ाई, एक हाथ से उसके स्तन दबा रहा था, दूध निकल रहा था। दूसरा हाथ क्लिट पर – रगड़ रहा था। शिवानी फिर झड़ गई, चूत सिकुड़ रही थी लंड के चारों ओर। प्रिंस ने बाल पकड़े, कान में फुसफुसाया, “तेरी चूत… अब भी टाइट है… बच्चा होने के बाद भी… मैं तुझे हर रात ऐसे ही चोदूँगा।”
प्रिंस ने पोजीशन बदली। शिवानी को घुटनों पर बैठाया – डॉगी स्टाइल, लेकिन सावधानी से। पेट नीचे, गांड ऊपर। प्रिंस पीछे से फिर अंदर। अब धक्के जोरदार। थप-थप की आवाज, शिवानी की चीखें – “आह… प्रिंस… मेरी गांड… थप्पड़ मारो… हाँ… जोर से…” प्रिंस ने गांड पर थप्पड़ मारे, लाल निशान पड़ गए। लंड चूत में तेज-तेज। शिवानी रो रही थी मजा से, “प्रिंस… कम इनसाइड… मुझे तुम्हारा स्पर्म चाहिए… बच्चे के साथ… तुम्हारा भी महसूस हो…”
प्रिंस ने जोर का धक्का मारा, गरम स्पर्म अंदर छोड़ दिया। दोनों थक कर लेट गए। लेकिन शिवानी अभी रुकी नहीं। वो प्रिंस के लंड को मुँह में ले लिया – क्लीनअप, लेकिन फिर चूसने लगी। प्रिंस फिर सख्त हो गया। इस बार शिवानी ऊपर चढ़ी – लेकिन सावधानी से, पेट को सपोर्ट देकर। वो उछल रही थी, लंड अंदर-बाहर। “प्रिंस… देखो… मैं अभी भी तुम्हारी रंडी हूँ… चोदो मुझे… हार्ड…” प्रिंस नीचे से धक्के मार रहा था, स्तनों को दबा रहा था।
रात भर चुदाई चलती रही। बारिश की आवाज के साथ उनकी सिसकारियाँ मिक्स हो रही थीं। बीच में ब्रेक – प्रिंस ने शिवानी के स्तनों से दूध चूसा, शिवानी ने प्रिंस के लंड को फिर चूसा। अंत में दोनों पसीने, स्पर्म और दूध से तर। प्रिंस ने शिवानी को गले लगाया, पेट पर हाथ रखा। बच्चा हिला। प्रिंस बोला, “शिवानी… ये बच्चा… चाहे किसी का भी हो… लेकिन तू मेरी है। मैं तुझे कभी नहीं छोड़ूँगा।”
शिवानी रो पड़ी – खुशी के आँसू। “प्रिंस… थैंक यू… मैं तुम्हें कभी नहीं छोड़ूँगी।” लेकिन मन में एक छोटा सा डर था – अहमद अभी भी पटना में था। क्या वो वापस आएगा? क्या बच्चे का जन्म सब बदल देगा?
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अहमद पटना वापस आया था, लेकिन वो अब पहले जैसा नहीं था। वो चुपके-चुपके शिवानी को देखता रहता – कॉफी शॉप के पास से गुजरता, गंगा घाट पर दूर से नजर रखता। उसकी आँखों में अब सिर्फ प्यार नहीं, बल्कि एक ठंडी साजिश थी। वो जानता था कि बच्चा उसका है। वो जानता था कि प्रिंस ने शिवानी को माफ कर दिया है। लेकिन अहमद का दिल अब बदला लेने और हासिल करने के बीच झूल रहा था।
अहमद ने पटना में अपनी पुरानी ज्वेलरी शॉप फिर से खोल ली थी, लेकिन वो सिर्फ दिखावा था। असल में वो एक छोटा सा प्लान बना रहा था – गुप्त, धीमा, और खतरनाक। वो शिवानी को वापस लेना चाहता था, लेकिन जबरदस्ती नहीं। वो चाहता था कि शिवानी खुद आए। और इसके लिए वो बच्चे का इस्तेमाल करेगा।
एक शाम अहमद ने एक पुराने दोस्त से बात की – वो दोस्त पटना सिक्युरिटी में इंस्पेक्टर था, और अहमद के साथ पुराना कर्ज था। अहमद ने उसे बताया, “भाई… मुझे एक काम है। शिवानी नाम की लड़की… उसका प्रिंस नाम का बॉयफ्रेंड है। मुझे उनके बारे में सब कुछ चाहिए – उनके घर का पता, प्रिंस की कंपनी, उनके रोज के रूटीन। और हाँ… कोई भी कदम उठाने से पहले मुझे बता देना।”
इंस्पेक्टर ने पूछा, “क्यों भाई? क्या बात है?” अहमद ने मुस्कुरा कर कहा, “बस… पुरानी मोहब्बत है। लेकिन अब मैं इसे सही तरीके से हासिल करना चाहता हूँ।” असल में अहमद का प्लान था – प्रिंस को बदनाम करना। वो प्रिंस के खिलाफ कुछ फर्जी केस बनवाना चाहता था – शायद कोई छोटा सा फ्रॉड का इल्जाम, या कुछ और जो प्रिंस की जॉब और इज्जत पर असर डाले। जब प्रिंस परेशान होगा, तब शिवानी टूटेगी। और टूटे हुए दिल को अहमद संभालेगा। बच्चे का नाम अहमद के नाम पर करवाएगा। शिवानी को समझाएगा कि प्रिंस अब उसके लिए सुरक्षित नहीं रहा।
अहमद ने शिवानी को एक अननोन नंबर से मैसेज भेजा:
“शिवानी… मैं जानता हूँ तू प्रिंस के साथ खुश होने की कोशिश कर रही है। लेकिन सच जान ले – प्रिंस की कंपनी में कुछ गड़बड़ चल रही है। जल्दी पता चलेगा। बच्चे के लिए… सोच ले। मैं तेरे लिए हूँ। हमेशा। – A”
शिवानी ने मैसेज पढ़ा और फोन गिरा दिया। उसका दिल धड़क रहा था। वो प्रिंस से पूछना चाहती थी, लेकिन डर रही थी। प्रिंस घर आया तो शिवानी ने उसे गले लगाया, लेकिन उसकी आँखें डरी हुई थीं। प्रिंस ने पूछा, “क्या हुआ जान?” शिवानी ने कहा, “कुछ नहीं… बस बच्चा हिल रहा है।”
उसी रात अहमद ने अपना अगला कदम उठाया। वो प्रिंस की कंपनी के बाहर गया। प्रिंस की कार पार्क में थी। अहमद ने एक छोटा सा GPS ट्रैकर कार के नीचे चिपका दिया। अब वो प्रिंस की हर मूवमेंट ट्रैक कर सकता था। वो जानता था कि प्रिंस रोज शाम 7 बजे घर लौटता है, लेकिन कभी-कभी लेट होता है। अहमद ने सोचा, “अगर मैं प्रिंस को किसी लड़की के साथ फोटो में कैद कर लूँ… या कोई फेक स्कैंडल… तो शिवानी खुद आएगी मेरे पास।”
अगले दिन अहमद ने शिवानी को फिर मैसेज किया:
“कल शाम गंगा घाट पर आ। सिर्फ 5 मिनट। बच्चे की एक अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट दिखाऊँगा – डॉक्टर ने कहा है कि बच्चा हेल्दी है… लेकिन कुछ स्पेशल है। प्लीज… आ जाना।”
शिवानी का मन डोल गया। वो जानती थी कि ये गलत है, लेकिन बच्चे की बात सुनकर वो नहीं रोक पाई। शाम को वो घाट पर गई। अहमद वहाँ था – अकेला, हाथ में एक फाइल। शिवानी पास आई। अहमद ने उसे देखा, उसका पेट देखा। “शिवानी… तू कितनी खूबसूरत लग रही है… मेरा बच्चा तेरे अंदर।”
शिवानी ने फाइल माँगी। अहमद ने उसे दी – लेकिन अंदर अल्ट्रासाउंड नहीं था। एक पुरानी फोटो थी – शिवानी और अहमद की कार वाली रात की, जहाँ वो किस कर रहे थे। शिवानी की आँखें फैल गईं। “ये… ये कहाँ से?” अहमद बोला, “मैंने रखा था… यादों के लिए। लेकिन अब… अगर तू नहीं मानी तो… प्रिंस को दिखा दूँगा। या सिक्युरिटी को। इंटरफेथ अफेयर… बच्चा… सब कुछ बर्बाद हो जाएगा।”
शिवानी काँप उठी। “अहमद… तू… तू ब्लैकमेल कर रहा है?” अहमद ने उसका हाथ पकड़ा। “नहीं ब्लैकमेल… बस… तुझे याद दिला रहा हूँ कि तू मेरी है। बच्चा मेरा है। प्रिंस सिर्फ नाम का बाप बनेगा। लेकिन मैं असली हूँ। आ जा मेरे साथ… दिल्ली… नई जिंदगी।”
शिवानी रो पड़ी। वो भागकर घर आई। प्रिंस इंतजार कर रहा था। शिवानी ने उसे गले लगाया, लेकिन अब उसकी आँखों में डर था। प्रिंस ने पूछा, “कहाँ गई थी?” शिवानी बोली, “बस… घूमने।” लेकिन अंदर से वो टूट रही थी। अहमद का प्लान काम कर रहा था – शिवानी अब डर गई थी। वो सोच रही थी, “अगर प्रिंस को पता चला… तो सब खत्म। लेकिन अगर मैं अहमद के साथ चली गई… तो प्रिंस का दिल टूट जाएगा।”
अहमद घर लौटा, मुस्कुरा रहा था। वो जानता था – अब शिवानी खुद आएगी। और जब आएगी… तो वो उसे पूरी तरह अपना बना लेगा – बच्चे के साथ, जुनून के साथ, और बदले के साथ।
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शिवानी अब हर पल डर में जी रही थी। अहमद का मैसेज, वो पुरानी फोटो, और उसकी धमकी – सब कुछ उसके दिमाग में घूम रहा था। वो प्रिंस से कुछ कहना चाहती थी, लेकिन हर बार गला रुक जाता। प्रिंस बाहर से खुश दिखता, लेकिन वो भी बदल गया था – अब वो शिवानी को देखता तो आँखों में प्यार के साथ एक हल्का सा शक भी होता। बच्चे का जन्म नजदीक आ रहा था, और शिवानी का पेट अब इतना बड़ा हो चुका था कि चलना भी मुश्किल हो रहा था।
एक दोपहर शिवानी अकेली घर पर थी। प्रिंस कंपनी गया हुआ था। दरवाजे की घंटी बजी। शिवानी ने झाँका – अहमद खड़ा था। सफेद कुर्ता, दाढ़ी सँवारी हुई, लेकिन आँखों में वो ठंडी चमक। शिवानी का दिल धड़क उठा। वो दरवाजा नहीं खोलना चाहती थी, लेकिन अहमद ने धीरे से कहा, “शिवानी… बस 2 मिनट। बच्चे के लिए।”
शिवानी ने काँपते हाथों से दरवाजा खोला। अहमद अंदर आया। वो घर को देख रहा था – प्रिंस और शिवानी की फोटोज, शादी की तैयारियाँ। अहमद मुस्कुराया, लेकिन वो मुस्कान दर्द भरी थी। “ये सब… मेरे बच्चे के लिए है?” वो बोला। शिवानी ने पेट पर हाथ रखा। “अहमद… प्लीज चला जा। प्रिंस कभी भी आ सकता है।”
अहमद पास आया। वो इतना करीब कि शिवानी उसकी साँस महसूस कर रही थी। “मैं नहीं जाऊँगा। तू जानती है मेरा प्लान क्या है।” शिवानी की आँखें नम हो गईं। “क्या प्लान? तू मुझे ब्लैकमेल कर रहा है… ये प्यार नहीं है।”
अहमद ने उसका चेहरा अपने हाथों में लिया। “प्यार है… लेकिन अब बदला भी है। प्रिंस ने जो मेरा लिया… मैं वो वापस लूँगा।” उसने जेब से एक पेन ड्राइव निकाली। “यहाँ सब है – प्रिंस की कंपनी के कुछ फेक डॉक्यूमेंट्स। मैंने इंस्पेक्टर से बनवाए। अगर मैंने सिक्युरिटी को दिए… तो प्रिंस जेल जाएगा। फ्रॉड का केस। जॉब जाएगी, इज्जत जाएगी। और तू… अकेली रह जाएगी बच्चे के साथ।”
शिवानी काँप उठी। “तू… तू इतना गिर सकता है?” अहमद ने कहा, “गिरा नहीं… मजबूर हूँ। तू मेरी थी। बच्चा मेरा है। मैं दिल्ली में सब तैयार कर चुका हूँ – घर, दुकान, नई जिंदगी। बस तू हाँ कर दे। प्रिंस को मैं खुद संभाल लूँगा। वो टूट जाएगा… लेकिन वो टूटने लायक है।”
शिवानी रो पड़ी। वो घुटनों पर बैठ गई। “अहमद… मैं प्रिंस से प्यार करती हूँ। वो ने मुझे माफ किया… सब सह लिया। तू मुझे क्यों नहीं छोड़ देता?” अहमद उसके सामने घुटनों पर बैठ गया। उसने शिवानी का पेट छुआ – बच्चा हिला। अहमद की आँखें नम हो गईं। “क्योंकि मैं तुझे भूल नहीं पाया। हर रात तेरी याद आती है… तेरी वो सिसकारियाँ… वो रातें कार में… दुकान में। और अब ये बच्चा… मेरा खून।”
अहमद ने शिवानी को उठाया, बेडरूम की ओर ले गया। शिवानी विरोध नहीं कर पाई – डर और पुरानी चाहत दोनों थीं। अहमद ने उसे बेड पर लिटाया। उसने धीरे से शिवानी की साड़ी का पल्लू सरकाया। शिवानी के स्तन भरे हुए, दूध टपक रहे थे। अहमद ने ब्रा उतारी, एक स्तन मुँह में लिया। दूध चूसने लगा – धीरे, लेकिन गहराई से। शिवानी सिसकारी, “अहमद… मत… प्रिंस…” लेकिन उसका शरीर जवाब दे रहा था।
अहमद ने साड़ी पूरी उतार दी। शिवानी नंगी लेटी थी – पेट बड़ा, चूत गीली। अहमद ने अपनी पैंट उतारी। उसका लंड सख्त था – मोटा, लंबा। वो शिवानी की टाँगों के बीच बैठा। “शिवानी… आज आखिरी बार… अगर तू मना करेगी तो मैं चला जाऊँगा… और प्लान रुक जाएगा। लेकिन अगर तूने जवाब दिया… तो तू मेरी हो जाएगी।”
अहमद ने लंड चूत पर रगड़ा। शिवानी चीखी, “आह… अहमद… नहीं…” लेकिन उसकी चूत गीली थी। अहमद ने धीरे से अंदर डाला। शिवानी की चूत टाइट थी – गर्भावस्था की वजह से और ज्यादा संवेदनशील। अहमद धक्के मारने लगा – धीमे, लेकिन गहरे। शिवानी चिल्ला रही थी, “उफ्फ… अहमद… बच्चा… धीरे… लेकिन… और…” अहमद ने स्पीड बढ़ाई। वो शिवानी के स्तनों को दबा रहा था, दूध निकाल रहा था।
डॉगी स्टाइल में – शिवानी घुटनों पर, पेट नीचे। अहमद पीछे से पेल रहा था। बाल खींच रहा था, गांड पर थप्पड़ मार रहा था। “तेरी चूत… अभी भी मेरी है… प्रिंस कभी इतना नहीं दे सकता…” शिवानी रो रही थी मजा और अपराधबोध से, “आह… अहमद… जोर से… फाड़ दो… लेकिन प्लीज… प्रिंस को मत…” अहमद ने जोर का धक्का मारा, स्पर्म अंदर छोड़ दिया।
दोनों थक कर लेटे। अहमद ने शिवानी को गले लगाया। “अब फैसला तेरा है। कल तक जवाब दे। हाँ… तो मैं प्लान रोक दूँगा। नहीं… तो प्रिंस की जिंदगी बर्बाद।” वो उठा, चला गया।
शिवानी रोती रही। शाम को प्रिंस आया। शिवानी ने उसे देखा – उसकी मासूम मुस्कान। वो प्रिंस के गले लग गई। “प्रिंस… मुझे कुछ बताना है।” लेकिन शब्द नहीं निकले। वो बस रो रही थी। प्रिंस ने पूछा, “क्या हुआ जान?” शिवानी ने कहा, “बस… डर लग रहा है… बच्चा आने वाला है।”
लेकिन अंदर से वो जान रही थी – कल फैसला करना होगा। अहमद का प्लान अब उसके हाथ में था। क्या वो प्रिंस को बचाएगी… या अहमद के साथ भाग जाएगी?
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11 hours ago
(This post was last modified: 11 hours ago by Shivani4u. Edited 1 time in total. Edited 1 time in total.)
शिवानी की रातें अब नींद से दूर हो गई थीं। अहमद का चेहरा हर सपने में आता, उसकी धमकी वाली मुस्कान, वो पेन ड्राइव जो प्रिंस की जिंदगी बर्बाद कर सकती थी। पटना की बारिश रुकने का नाम नहीं ले रही थी, जैसे शहर भी शिवानी के दिल के तूफान में डूबा हो। वो प्रिंस के बगल में लेटी रहती, लेकिन उसका दिमाग कहीं और। “अगर मैं अहमद को हाँ कह दूँ… तो प्रिंस क्या होगा? जेल? इज्जत बर्बाद? और अगर नहीं… तो वो फोटोज… वो वीडियो… सब बाहर आ जाएगा। इंटरफेथ अफेयर, बच्चा… समाज हमें जीने नहीं देगा।” शिवानी का पेट भारी था, बच्चा अंदर हिलता, जैसे वो भी महसूस कर रहा हो माँ की परेशानी।
सुबह हुई। प्रिंस कंपनी के लिए तैयार हो रहा था। वो शिवानी को देखता, उसके माथे पर किस करता। “जान, आज डॉक्टर का अपॉइंटमेंट है। मैं जल्दी लौटूँगा।” शिवानी मुस्कुराने की कोशिश करती, लेकिन उसकी आँखें बता रही थीं – कुछ गलत है। प्रिंस बाहर निकला, कार स्टार्ट की। लेकिन वो नहीं जानता था कि कार के नीचे लगा GPS ट्रैकर अहमद को उसकी हर मूवमेंट बता रहा था। अहमद अपनी दुकान में बैठा था, फोन पर ऐप खोला – प्रिंस की कार कंपनी की ओर जा रही थी। अहमद मुस्कुराया। “आज से शुरू… प्रिंस का अंत।”
अहमद ने इंस्पेक्टर को फोन किया। “भाई, वो फेक डॉक्यूमेंट्स तैयार हैं? प्रिंस की कंपनी में फ्रॉड का केस बनाओ। बस इतना कि वो ट्रैप हो जाए।” इंस्पेक्टर ने हाँ कहा। “हो जाएगा। लेकिन तू क्यों कर रहा है ये सब?” अहमद ने ठंडी आवाज में कहा, “मोहब्बत… और बदला। वो लड़की मेरी है। बच्चा मेरा है। प्रिंस सिर्फ रुकावट है।”
उधर शिवानी घर में अकेली थी। उसने अहमद को मैसेज किया: “मिलना है। आज शाम। गंगा घाट पर।” अहमद का रिप्लाई तुरंत आया: “आना। और फैसला ले आना।” शिवानी का दिल तेज धड़क रहा था। वो तैयार हुई – लाल साड़ी, जो अब उसके बड़े पेट पर टाइट लग रही थी। स्तन भरे हुए, निप्पल्स दर्द कर रहे थे। वो आईने में देखती, “मैं क्या करूँ? प्रिंस को बचाना है… लेकिन कैसे?”
शाम हुई। गंगा घाट पर बादल घने थे, हवा तेज। शिवानी वहाँ पहुँची। अहमद पहले से खड़ा था, हाथ में एक बैग। वो शिवानी को देखकर पास आया। “शिवानी… तू आई। अच्छा है।” शिवानी ने डरते हुए कहा, “अहमद… मैं हाँ कहती हूँ। लेकिन प्रिंस को मत छुओ। मैं तुम्हारे साथ दिल्ली चलूँगी। लेकिन बच्चा होने तक रुको।” अहमद की आँखें चमक उठीं। वो शिवानी का हाथ पकड़ लिया। “वादा? तू मेरी हो जाएगी?” शिवानी ने सिर हिलाया, लेकिन उसकी आँखें झूठ बोल रही थीं। वो सोच रही थी – “मैं प्रिंस को बताऊँगी। सिक्युरिटी से मदद लूँगी। लेकिन अभी… अहमद को रोकना है।”
अहमद ने उसे गले लगाया। उसकी दाढ़ी शिवानी के गाल पर रगड़ी। वो कान में फुसफुसाया, “आज रात… मेरे साथ। दुकान पर। आखिरी बार पटना में।” शिवानी का शरीर सिहर उठा। “नहीं… बच्चा…” लेकिन अहमद ने कहा, “बच्चे को कुछ नहीं होगा। मैं जानता हूँ कैसे।” शिवानी मना नहीं कर पाई – डर से, और कहीं पुरानी चाहत से।
रात हुई। शिवानी प्रिंस को मैसेज किया: “माँ के घर जा रही हूँ। रात रुकूँगी।” प्रिंस ने ओके कहा। शिवानी अहमद की दुकान पर पहुँची। दुकान बंद थी, पीछे का कमरा मंद रोशनी में। अगरबत्ती जल रही थी, कुरान की आयतें दीवार पर। अहमद ने दरवाजा बंद किया। वो शिवानी को देख रहा था – उसकी साड़ी, बड़ा पेट, भरे स्तन। “शिवानी… तू कितनी सेक्सी लग रही है… गर्भावस्था में और ज्यादा।”
अहमद ने शिवानी को बाहों में लिया। चुंबन शुरू – गहरा, जंगली। उसकी जीभ शिवानी के मुँह में घुस गई। शिवानी की साँसें तेज। अहमद ने साड़ी का पल्लू सरकाया, ब्लाउज खोला। ब्रा उतारी। शिवानी के स्तन बाहर – दूध टपक रहा था। अहमद ने मुँह में लिया, चूसने लगा। “उफ्फ… अहमद… दूध… जोर से चूसो…” शिवानी सिसकारी। दूध उसके मुँह में आ रहा था, अहमद और पागल हो गया। वो दोनों स्तनों को बारी-बारी चूस रहा था, काट रहा था।
अहमद ने शिवानी को दीवार से सटाया। साड़ी नीचे सरकाई। पैंटी उतारी। शिवानी की चूत गीली, गुलाबी। अहमद घुटनों पर बैठा, जीभ से चाटने लगा। क्लिटोरिस चूस रहा था। शिवानी चीखी, “आह… अहमद… हाँ… वहाँ… बच्चा हिल रहा है… लेकिन रुको मत…” अहमद ने उँगलियाँ अंदर डालीं, तेज-तेज। शिवानी झड़ गई – पानी निकला।
अहमद ने पैंट उतारी। लंड बाहर – मोटा, 9 इंच का, नसें फूली हुईं। वो शिवानी को बेड पर लिटाया, साइड में। पीछे से लिपटा, लंड चूत में डाला। शिवानी चीखी, “आह… इतना बड़ा… धीरे… पेट…” लेकिन अहमद धक्के मारने लगा – गहरे, तेज। “तेरी चूत… मेरे बच्चे की वजह से और टाइट… फक यू… मेरी रानी…” शिवानी चिल्ला रही थी, “अहमद… जोर से… मेरी चूत फाड़ दो… आह… यस…” कमरा सिसकारियों से भर गया।
अहमद ने पोजीशन बदली। शिवानी ऊपर – वो उछल रही थी, लंड अंदर-बाहर। पेट हिल रहा था, स्तन उछल रहे थे। अहमद नीचे से धक्के मार रहा था, स्तनों से दूध चूस रहा था। “मेरा बच्चा… तेरे अंदर… और मैं तुझे चोद रहा हूँ…” शिवानी फिर झड़ गई। अहमद ने स्पर्म अंदर छोड़ दिया।
रात भर चुदाई चली। अहमद ने शिवानी को बाँधा – रस्सी से, ब्लाइंडफोल्ड। वो उसके शरीर पर आइसक्यूब रगड़ता, फिर चाटता। शिवानी तड़पती, “अहमद… प्लीज… चोदो मुझे…” अहमद ने पहले मुँह में लंड डाला, गले तक। शिवानी गैगिंग कर रही थी। फिर चूत में, फिर गांड में ट्राई किया – धीरे, लेकिन जोरदार। शिवानी दर्द से चीखी, “आह… मेरी गांड… उफ्फ… डीपर…” अहमद पेलता रहा।
सुबह हुई। शिवानी थक कर लेटी थी। अहमद ने कहा, “कल रात… हमारी नई शुरुआत। अब तू मेरी है। प्रिंस को छोड़।” शिवानी ने सिर हिलाया, लेकिन मन में प्लान बना रही थी। वो घर लौटी। प्रिंस इंतजार कर रहा था। “माँ के घर कैसा रहा?” शिवानी ने मुस्कुरा कर कहा, “अच्छा।” लेकिन उसकी बॉडी पर निशान थे – थप्पड़ के, काटने के। वो बाथरूम में गई, रोती रही। “मैंने फिर धोखा दिया… लेकिन प्रिंस को बचाने के लिए।”
दोपहर में अहमद ने अपना प्लान आगे बढ़ाया। उसने इंस्पेक्टर को फोन किया – “काम शुरू करो। प्रिंस की कंपनी में रेड डालो। फेक डॉक्यूमेंट्स प्लांट कर दो।” इंस्पेक्टर ने हाँ कहा। शाम को प्रिंस की कंपनी में सिक्युरिटी आई। रेड। प्रिंस शॉक्ड। “क्या हुआ सर?” इंस्पेक्टर ने कहा, “फ्रॉड का केस। डॉक्यूमेंट्स में गड़बड़ी।” प्रिंस की दुनिया उजड़ गई। वो घर लौटा, शिवानी को बताया। “जान… मैं ट्रैप हो गया। कोई साजिश है।”
शिवानी रो पड़ी। वो जानती थी – अहमद। लेकिन कह नहीं पाई। रात को प्रिंस तनाव में था। वो शिवानी को गले लगाया। “मैं ठीक हो जाऊँगा। लेकिन अब तू और बच्चा… कैसे?” शिवानी ने उसे सांत्वना दी। लेकिन मन में फैसला किया – अहमद को रोकना है। वो चुपके से सिक्युरिटी स्टेशन गई – दूसरे इंस्पेक्टर से मिली। “सर… कोई मुझे ब्लैकमेल कर रहा है। अहमद नाम का। वो प्रिंस को फँसा रहा है।” इंस्पेक्टर ने कहा, “सबूत?” शिवानी ने पेन ड्राइव दी। “यहाँ सब है।”
लेकिन अहमद को शक हो गया। उसके GPS से पता चला – शिवानी सिक्युरिटी गई है। अहमद गुस्से से पागल हो गया। “शिवानी… तूने धोखा दिया?” वो रात को शिवानी के घर के बाहर पहुँचा। लेकिन प्रिंस घर पर था। अहमद ने इंतजार किया। सुबह प्रिंस कंपनी गया। अहमद घर में घुस गया – चुपके से, पीछे के दरवाजे से। शिवानी किचन में थी। अहमद ने उसे पकड़ा, मुँह दबाया। “शिवानी… तू सिक्युरिटी गई? अब देख… क्या होता है।”
शिवानी डर गई। “अहमद… छोड़…” लेकिन अहमद ने उसे बेडरूम में ले जाकर बाँध दिया। “अब तू मेरे साथ चलेगी। दिल्ली। अभी।” वो शिवानी की साड़ी फाड़ने लगा। शिवानी चीखी, लेकिन मुँह बंद था। अहमद ने उसके स्तनों को दबाया, चूसा। “तेरा दूध… मेरा है…” वो लंड निकाला, शिवानी की चूत में डाला। धक्के मारने लगा – जंगली, क्रूर। शिवानी दर्द से तड़प रही थी, “आह… मत… बच्चा…” लेकिन अहमद नहीं रुका। “तू मेरी है… अब हमेशा।” वो चोदता रहा, स्पर्म अंदर।
फिर अहमद ने शिवानी को कार में डाला – किडनैप। वो पटना से बाहर निकल रहा था। लेकिन शिवानी के फोन से प्रिंस को लोकेशन शेयर हो गई थी – वो पहले से तैयार थी। प्रिंस सिक्युरिटी के साथ आया। हाईवे पर चेज। अहमद की कार तेज, लेकिन सिक्युरिटी की जीप ने ब्लॉक कर दिया। अहमद ने गन निकाली – इंस्पेक्टर से चुराई। “रुक जाओ… वरना शिवानी को मार दूँगा।”
सस्पेंस चरम पर। प्रिंस चिल्लाया, “अहमद… छोड़ उसे। बच्चा…” अहमद हँसा, “बच्चा मेरा है।” लेकिन शिवानी ने हिम्मत की – उसने अहमद के हाथ से गन छीनी। गोली चली – अहमद के कंधे पर। सिक्युरिटी ने अहमद को पकड़ा। किडनैप, ब्लैकमेल, फ्रॉड – सब केस।
शिवानी अस्पताल में। प्रिंस उसके पास। “जान… तू ठीक है?” शिवानी रो पड़ी। “प्रिंस… मैंने सब बता दिया। सॉरी…” प्रिंस ने गले लगाया। “मैं जानता था… लेकिन तूने मुझे बचाया।” बच्चा समय से पहले आ गया – लड़का, स्वस्थ। प्रिंस ने उसे गोद लिया। अहमद जेल में। लेकिन कहानी खत्म नहीं – अहमद जेल से मैसेज भेजता, “मैं लौटूँगा… बच्चा मेरा है।”
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शिवानी और प्रिंस की कहानी – अगला भाग (लंबी, गहरी और ट्विस्ट से भरी)
अहमद की गिरफ्तारी के बाद पटना की हवा में एक अजीब सी खामोशी छा गई थी। सिक्युरिटी स्टेशन से निकलते वक्त अहमद ने शिवानी की ओर देखा था – वो नजरें अब भी शिवानी के सपनों में आतीं। उसकी आँखों में नफरत नहीं थी, बल्कि एक ठंडा वादा था: “ये खत्म नहीं हुआ। मैं लौटूँगा।” शिवानी ने उसकी नजरें टाल दीं, लेकिन अंदर से वो काँप रही थी। प्रिंस ने उसे अस्पताल से घर ले जाया। बच्चा – एक छोटा सा लड़का – अब अस्पताल के क्रिब में सो रहा था। नाम रखा गया था आरव। प्रिंस ने उसे गोद में लिया, उसकी छोटी-छोटी उँगलियाँ पकड़ीं। “ये हमारा बेटा है, शिवानी। बस यही सच है।” शिवानी ने मुस्कुराने की कोशिश की, लेकिन उसकी आँखों में आँसू थे। वो जानती थी – आरव का खून अहमद का था। लेकिन प्रिंस की बाहों में वो सुरक्षित महसूस कर रही थी… या कम से कम कोशिश कर रही थी।
पहले कुछ हफ्ते सब कुछ सामान्य लग रहा था। प्रिंस ने अपनी कंपनी से छुट्टी ली। वो घर पर रहता, आरव को गोद में लेकर घुमाता, शिवानी के लिए खाना बनाता। रातें अब धीमी हो गई थीं। सेक्स की वो जंगली रातें याद बन चुकी थीं। शिवानी की बॉडी अभी भी रिकवर कर रही थी – स्तन दूध से भरे, पेट पर स्ट्रेच मार्क्स, चूत में हल्का दर्द। प्रिंस उसे छूता तो बहुत प्यार से। कभी-कभी वो शिवानी के स्तनों से दूध चूसता, धीरे-धीरे। शिवानी सिसकारी भरती, “प्रिंस… हल्के से…” लेकिन प्रिंस रुक जाता। “बच्चा सो रहा है।” वो कहकर सो जाता। शिवानी को लगता – प्रिंस अब उसे पहले जैसा नहीं चाहता। या शायद वो बच्चे को देखकर अहमद याद आता है।
एक रात शिवानी को नींद नहीं आ रही थी। आरव रोया। वो उठी, उसे गोद में लिया। खिड़की के पास खड़ी होकर उसे झुलाती रही। बाहर बारिश हो रही थी। अचानक मोबाइल वाइब्रेट हुआ। अननोन नंबर। मैसेज:
“आरव अच्छा सो रहा है? उसकी आँखें मेरी जैसी हैं। – A”
शिवानी का हाथ काँप गया। फोन गिरते-गिरते बचा। वो आरव को बिस्तर पर लिटाकर बाथरूम में गई। दरवाजा बंद किया, रोने लगी। “वो जेल में है… फिर भी…” वो जानती थी – अहमद के कनेक्शन पटना में अभी भी थे। सिक्युरिटी ने उसे गिरफ्तार किया था, लेकिन जमानत मिल गई थी। केस चल रहा था, लेकिन अहमद बाहर था। वो छिपकर रह रहा था – दिल्ली में नहीं, पटना के आसपास ही कहीं। शिवानी ने प्रिंस को जगाया नहीं। वो खुद ही सोच रही थी – “मुझे प्रिंस को सब बताना चाहिए। लेकिन वो फिर टूट जाएगा।”
अगले दिन प्रिंस कंपनी गया। शिवानी घर पर अकेली। आरव सो रहा था। दरवाजे की घंटी बजी। शिवानी ने झाँका – कोई नहीं। लेकिन बाहर एक लिफाफा पड़ा था। अंदर एक फोटो – शिवानी और अहमद की, दुकान वाले कमरे में, जब अहमद उसे चोद रहा था। पीछे लिखा: “ये फोटो प्रिंस को मिल जाएगी तो क्या होगा? या सिक्युरिटी को? इंटरफेथ, बच्चा, किडनैप का केस… सब उलट जाएगा।” शिवानी का दिल बैठ गया। वो फोटो फाड़कर फेंकना चाहती थी, लेकिन हाथ नहीं चले। वो उसे जलाने के लिए माचिस जलाई, लेकिन फिर रुक गई। “अगर ये बाहर आया… तो आरव की जिंदगी बर्बाद।”
शाम को प्रिंस लौटा। खुश था। “जान, आज कंपनी में प्रमोशन की बात हुई। सब ठीक हो रहा है।” शिवानी ने मुस्कुरा कर कहा, “बहुत अच्छा।” लेकिन उसकी आँखें झूठ बोल रही थीं। रात को प्रिंस ने उसे छुआ। धीरे से। शिवानी की नाइट गाउन ऊपर की। उसके स्तनों को सहलाया। दूध निकला। प्रिंस ने चूसा। शिवानी की सिसकारी निकली, लेकिन मन कहीं और था। प्रिंस ने उसकी चूत पर हाथ रखा। गीली थी। वो उँगली अंदर डाली। शिवानी चीखी, “प्रिंस… हाँ…” लेकिन उसकी आँखें बंद थे, और दिमाग में अहमद की तस्वीर। प्रिंस ने लंड निकाला। साइड से डाला। धक्के धीमे। शिवानी चिल्लाई, “जोर से… प्रिंस… जैसे पहले…” प्रिंस ने स्पीड बढ़ाई। लेकिन शिवानी का मन नहीं लगा। वो झड़ गई, लेकिन खुशी नहीं थी। प्रिंस अंदर झड़ा। दोनों लेटे। प्रिंस बोला, “आई लव यू।” शिवानी ने कहा, “आई लव यू टू।” लेकिन वो झूठ था।
अगले हफ्ते अहमद ने फिर कदम बढ़ाया। शिवानी को कॉल आया – अननोन। वो उठाई। अहमद की आवाज। “शिवानी… मैं पटना में हूँ। आरव को देखना चाहता हूँ। एक बार।” शिवानी चीखी, “नहीं! तू जेल में था!” अहमद हँसा। “जमानत मिल गई। और सिक्युरिटी मेरे पीछे है, लेकिन मैं छिपा हूँ। बस एक मुलाकात। पार्क में। शाम को।” शिवानी ने मना किया। लेकिन अहमद बोला, “अगर नहीं आई… तो वो फोटो प्रिंस के ऑफिस में भेज दूँगा। सबको।” शिवानी टूट गई।
शाम को वो पार्क गई। आरव को घर पर छोड़कर। प्रिंस को कहा – “दोस्त के घर जा रही हूँ।” पार्क में अहमद बेंच पर बैठा था। दाढ़ी बढ़ी हुई, आँखें लाल। वो शिवानी को देखकर उठा। “शिवानी…” वो पास आया। शिवानी पीछे हटी। “आरव कहाँ है?” अहमद ने पूछा। शिवानी बोली, “घर पर। मैं अकेली आई हूँ।” अहमद ने उसका हाथ पकड़ा। “मुझे दिखा।” शिवानी ने हाथ छुड़ाया। “नहीं। तू दूर रह।”
अहमद ने उसे एक सुनसान कोने में खींच लिया। “तू मेरी है। बच्चा मेरा है। प्रिंस सिर्फ नाम का बाप है।” वो शिवानी को दीवार से सटाया। चुंबन करने लगा। शिवानी विरोध कर रही थी। “छोड़… लोग देख लेंगे।” लेकिन अहमद ने उसकी साड़ी ऊपर की। हाथ चूत पर। गीली थी। “देख… तेरा शरीर अभी भी मेरा जवाब देता है।” शिवानी रो रही थी। “अहमद… मत कर… मैं प्रिंस से प्यार करती हूँ।” लेकिन अहमद ने लंड निकाला। पैंट नीचे। शिवानी की टाँग उठाई। एक झटके में अंदर। शिवानी चीखी, “आह… नहीं…” लेकिन उसकी चूत ने लंड को निचोड़ा। अहमद धक्के मारने लगा। पार्क में अंधेरा था। कोई नहीं था। शिवानी चिल्ला रही थी, “प्रिंस… सॉरी…” लेकिन मजा आ रहा था। अहमद ने जोर-जोर से पेला। स्पर्म अंदर।
शिवानी रोती हुई भागी। घर आई। प्रिंस इंतजार कर रहा था। “कहाँ थी?” शिवानी ने झूठ बोला। लेकिन प्रिंस को शक हो गया। वो शिवानी की साड़ी पर देखा – गीले निशान। “ये क्या है?” शिवानी रो पड़ी। सब बता दिया – अहमद की धमकी, मुलाकात, सब। प्रिंस का चेहरा सफेद पड़ गया। वो चुप रहा। फिर बोला, “अब बस। मैं सिक्युरिटी जाऊँगा।” लेकिन शिवानी बोली, “नहीं… वो आरव को ले जाएगा। वो पागल है।”
प्रिंस ने फैसला किया। वो शिवानी और आरव को लेकर पटना छोड़ने वाला था – दिल्ली। नई जिंदगी। लेकिन अहमद को पता चल गया। उसके कनेक्शन से। वो ट्रेन स्टेशन पर इंतजार कर रहा था। जब प्रिंस, शिवानी और आरव प्लेटफॉर्म पर आए – अहमद ने आकर आरव को छीनने की कोशिश की। प्रिंस ने उसे धक्का दिया। झगड़ा हुआ। लोग इकट्ठे हो गए। सिक्युरिटी आई। अहमद भागा। लेकिन प्रिंस ने उसे पकड़ लिया। “तू कभी नहीं छूटेगा।”
ट्रेन छूट गई। वो तीनों वापस घर लौटे। लेकिन अब शिवानी और प्रिंस का रिश्ता और मजबूत हो गया था। रात को प्रिंस ने शिवानी को बेड पर लिटाया। “अब कोई डर नहीं।” वो शिवानी की साड़ी उतारी। उसके स्तनों को चूसा। दूध निकला। शिवानी सिसकारी। प्रिंस ने चूत चाटी। शिवानी चीखी। फिर लंड अंदर। जोरदार धक्के। “प्रिंस… हाँ… फाड़ दो… मैं सिर्फ तेरी हूँ…” दोनों झड़े।
अहमद अब जेल में था – इस बार पक्का। लेकिन शिवानी जानती थी – कहानी कभी पूरी तरह खत्म नहीं होती। आरव बड़ा होगा। एक दिन सवाल पूछेगा। तब क्या होगा? लेकिन अभी… वो प्रिंस की बाहों में थी। पटना की गलियाँ अब शांत थीं। लेकिन दिल में एक छोटा सा डर हमेशा रहेगा
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आरव के जन्म के बाद से 8 महीने बीत चुके थे। पटना की गर्मी अब भी वैसी ही थी, लेकिन शिवानी की जिंदगी में एक नया रंग आ गया था। अहमद जेल में था – इस बार पक्का, क्योंकि किडनैप और ब्लैकमेल के सबूत मजबूत थे। प्रिंस ने कंपनी में प्रमोशन पा लिया था, और अब वो घर ज्यादा समय बिताने लगा था। आरव अब हँसता-खेलता था, छोटी-छोटी बातें करता। शिवानी और प्रिंस का रिश्ता धीरे-धीरे पहले जैसा हो रहा था – वो प्यार, वो जुनून, वो रातें। लेकिन शिवानी के मन में एक खालीपन था। वो सोचती, “क्या मैं सिर्फ माँ और बीवी बनकर रह जाऊँगी? या मेरे अंदर की वो आग अभी भी बाकी है?”
एक दिन प्रिंस की कंपनी में नई जॉइन हुई – नाम था नेहा। 25 साल की, लंबी, गोरी, फिगर 36-28-36, लंबे बाल, और वो मुस्कान जो किसी को भी मोह ले। वो मार्केटिंग हेड थी, प्रिंस की टीम में। प्रिंस ने घर आकर बताया, “जान, आज ऑफिस में एक नई लड़की जॉइन हुई है। नेहा। बहुत स्मार्ट है।” शिवानी ने हँसकर कहा, “अच्छा? कितनी खूबसूरत?” प्रिंस ने शरमाते हुए कहा, “अरे, बस नॉर्मल।” लेकिन शिवानी को शक हो गया। वो जानती थी – प्रिंस कभी किसी लड़की की तारीफ नहीं करता था।
कुछ दिनों बाद कंपनी का एक पार्टी थी – ऑफिस के नए प्रोजेक्ट की सेलिब्रेशन। प्रिंस ने शिवानी को साथ चलने को कहा। “आरव को माँ के पास छोड़ देंगे। चलो, थोड़ा एंजॉय करेंगे।” शिवानी तैयार हुई – ब्लैक साड़ी, लो बैक ब्लाउज, पेट अभी भी थोड़ा सा उभरा हुआ लेकिन सेक्सी लग रही थी। पार्टी में पहुँचे तो नेहा वहाँ थी – रेड ड्रेस में, कंधे खुले, होंठ लाल, आँखों में काजल। वो प्रिंस को देखकर मुस्कुराई, “सर, आपकी वाइफ?” प्रिंस ने हाँ कहा। नेहा ने शिवानी से हाथ मिलाया, “आप बहुत खूबसूरत हैं, भाभी।” शिवानी ने मुस्कुरा कर कहा, “थैंक यू। आप भी कम नहीं।”
पार्टी में डांस शुरू हुआ। प्रिंस ने शिवानी को डांस फ्लोर पर लिया। दोनों करीब-करीब नाच रहे थे। नेहा पास आई, “सर, एक डांस?” प्रिंस ने शिवानी की तरफ देखा। शिवानी ने हाँ कहा। नेहा और प्रिंस नाचने लगे। शिवानी देख रही थी – नेहा का हाथ प्रिंस की कमर पर, प्रिंस का हाथ नेहा की कमर पर। शिवानी का दिल जलने लगा। वो सोच रही थी, “ये लड़की… क्या चाहती है?” लेकिन साथ ही एक अजीब सी उत्तेजना भी हुई। “अगर प्रिंस को ये पसंद आ गई… तो क्या मैं…? नहीं… मैं नहीं छोड़ूँगी।”
पार्टी खत्म होने के बाद प्रिंस और शिवानी घर लौटे। कार में शिवानी चुप थी। प्रिंस ने पूछा, “क्या हुआ?” शिवानी बोली, “नेहा… बहुत फ्लर्टी लग रही थी।” प्रिंस हँसा, “अरे, बस पार्टी में ऐसा होता है।” लेकिन शिवानी का मन नहीं माना। रात को बेड पर शिवानी ने प्रिंस को ऊपर चढ़ाया। “आज मुझे जोर से चोदो… जैसे पहले चोदते थे।” प्रिंस ने मुस्कुरा कर कहा, “ठीक है, जान।”
प्रिंस ने शिवानी की साड़ी उतारी। ब्लाउज के हुक खोले। ब्रा उतारी। शिवानी के स्तन अभी भी भरे हुए थे, दूध की बूँदें टपक रही थीं। प्रिंस ने एक स्तन मुँह में लिया, जोर से चूसने लगा। शिवानी सिसकारी, “आह… प्रिंस… चूसो… दूध पी लो… मेरे निप्पल्स काटो…” प्रिंस ने दाँत से हल्के से काटा। शिवानी चीखी। प्रिंस ने दूसरा स्तन दबाया, दूध निकाला, फिर चूसा। शिवानी की साँसें तेज। प्रिंस नीचे आया। शिवानी की पैंटी उतारी। चूत गीली, चमक रही थी। प्रिंस ने जीभ डाली, क्लिट चूसने लगा। शिवानी टाँगें फैलाकर चिल्लाई, “हाँ… जीभ अंदर… चाटो… मेरी चूत… उफ्फ… और तेज…” प्रिंस ने उँगलियाँ डालीं – दो, फिर तीन। तेज-तेज फिंगर फक। शिवानी झड़ गई – पानी निकला, प्रिंस के मुँह पर।
प्रिंस ने लंड निकाला – 8 इंच, मोटा, सख्त। शिवानी ने हाथ में लिया, हिलाया। “प्रिंस… आज इसे मेरे मुँह में डालो…” प्रिंस ने शिवानी के मुँह में डाला। शिवानी चूसने लगी – गहराई तक, गले तक। गैगिंग कर रही थी। प्रिंस ने सिर पकड़ा, मुँह में धक्के दिए। “शिवानी… तेरी जीभ… कितनी गरम…” शिवानी ने चूसा, लंड चाटा, बॉल्स चूसे। प्रिंस कराह रहा था।
फिर प्रिंस ने शिवानी को लिटाया। टाँगें कंधों पर। लंड एक झटके में अंदर। शिवानी चीखी, “आआह्ह… प्रिंस… पूरा… फाड़ दो मेरी चूत…” प्रिंस धक्के मारने लगा – जोरदार, तेज। बेड हिल रहा था। थप-थप की आवाज। शिवानी चिल्ला रही थी, “जोर से… फक मी हार्ड… मेरी चूत तुम्हारी है… आह… और गहरा…” प्रिंस ने स्पीड बढ़ाई। शिवानी की छाती उछल रही थी। वो प्रिंस की पीठ पर नाखून गाड़ रही थी।
पोजीशन बदली – डॉगी। शिवानी घुटनों पर, गांड ऊपर। प्रिंस पीछे से। लंड चूत में। धक्के। गांड पर थप्पड़। “तेरी गांड… कितनी गोल… आज इसे भी…” प्रिंस ने लुब्रिकेंट लगाया, लंड गांड में डाला। शिवानी दर्द से चीखी, “आह… धीरे… लेकिन रुको मत… पूरा…” प्रिंस ने धक्के शुरू। शिवानी मजा ले रही थी, “उफ्फ… मेरी गांड… चोदो… हार्ड…” प्रिंस बाल खींच रहा था, थप्पड़ मार रहा था। शिवानी फिर झड़ गई।
फिर काउगर्ल। शिवानी ऊपर। उछल रही थी। लंड अंदर-बाहर। स्तन उछल रहे थे। प्रिंस नीचे से धक्के। “शिवानी… तुम कितनी सेक्सी हो… मैं तुझे कभी नहीं छोड़ूँगा…” शिवानी बोली, “तो चोदो… पूरी रात… मेरी चूत… गांड… सब कुछ…” प्रिंस ने स्पर्म अंदर छोड़ा। दोनों थक कर लेटे। लेकिन शिवानी अभी रुकी नहीं। वो प्रिंस के लंड को फिर चूसने लगी। प्रिंस फिर सख्त। इस बार स्टैंडिंग – शिवानी दीवार से सटी, प्रिंस पीछे से। धक्के। शिवानी चीख रही थी, “प्रिंस… यस… और… आह…”
रात भर चुदाई। सुबह दोनों थक कर सोए। लेकिन शिवानी के मन में नेहा की तस्वीर थी। अगले दिन प्रिंस ऑफिस गया। शिवानी ने सोचा – “मुझे पता लगाना है… नेहा क्या चाहती है।” वो प्रिंस के फोन में नेहा का नंबर देखा। मैसेज भेजा – “हाय, मैं शिवानी। प्रिंस की वाइफ। आज मिल सकती हो?” नेहा ने रिप्लाई किया – “हाँ भाभी, कॉफी शॉप पर?”
शिवानी गई। नेहा वहाँ थी। दोनों बैठीं। नेहा बोली, “भाभी, आप बहुत अच्छी लग रही हैं।” शिवानी ने सीधा पूछा, “नेहा… तुम प्रिंस को पसंद करती हो?” नेहा हँसी। “भाभी… प्रिंस अच्छा है। लेकिन मैं… मैं लड़कियों को भी पसंद करती हूँ।” शिवानी चौंकी। नेहा ने कहा, “मैं बाइसेक्शुअल हूँ। प्रिंस को देखकर अच्छा लगता है… लेकिन आप… आप बहुत हॉट हो।” शिवानी का चेहरा लाल हो गया। नेहा ने हाथ रखा शिवानी के हाथ पर। “क्या आप… कभी ट्राई किया है… लड़की के साथ?”
शिवानी का दिल तेज धड़का। वो सोच रही थी – “ये नया ट्विस्ट… मजेदार हो सकता है।” वो बोली, “नहीं… लेकिन… सोच सकती हूँ।” नेहा मुस्कुराई। “तो आज शाम… मेरे फ्लैट पर? प्रिंस को भी बुला लें?” शिवानी ने हाँ कह दिया।
शाम को तीनों नेहा के फ्लैट पर। नेहा ने वाइन दी। बातें हुईं। धीरे-धीरे नेहा ने शिवानी को किस किया। शिवानी ने जवाब दिया। प्रिंस देख रहा था। नेहा ने प्रिंस को भी किस किया। तीनों बेडरूम में। नेहा ने शिवानी की साड़ी उतारी। प्रिंस ने नेहा की ड्रेस उतारी। नेहा ने शिवानी के स्तनों को चूसा। शिवानी चीखी। प्रिंस ने नेहा की चूत चाटी। नेहा सिसकारी। फिर शिवानी ने नेहा की चूत चाटी – पहली बार। नेहा चिल्लाई, “भाभी… कितनी अच्छी जीभ… हाँ… क्लिट चूसो…” प्रिंस ने शिवानी को पीछे से चोदा। नेहा ने प्रिंस का लंड चूसा। तीनों एक साथ – शिवानी प्रिंस को चोद रही थी, नेहा शिवानी को चाट रही थी। कमरा सिसकारियों से भर गया।
रात भर थ्रीसम। नेहा ने शिवानी को स्ट्रैप-ऑन से चोदा। प्रिंस ने दोनों को बारी-बारी। शिवानी ने नेहा की गांड में उँगली डाली। सब झड़े – कई बार। सुबह तीनों थक कर लेटे। शिवानी बोली, “ये… नया मजा था।” प्रिंस हँसा। नेहा बोली, “अब हम तीनों… साथ रह सकते हैं।”
शिवानी की जिंदगी अब और रंगीन हो गई। अहमद का साया था, लेकिन अब नया जुनून था। पटना की ये जोड़ी अब तीन हो गई – शिवानी, प्रिंस और नेहा। रातें अब और हॉट, और मजेदार। लेकिन क्या ये खुशी हमेशा रहेगी? या अहमद कभी लौटेगा?
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आरव अब 1 साल का हो चुका था। छोटा-सा, शरारती, लेकिन रात को अच्छे से सो जाता था। शिवानी और प्रिंस की जिंदगी अब रूटीन में ढल चुकी थी – दिन में घर, बच्चा, घरेलू काम; रात में प्रिंस के साथ प्यार, लेकिन वो पुरानी आग अब धीमी पड़ चुकी थी। प्रिंस थक जाता था ऑफिस से, शिवानी भी माँ बनकर थोड़ी थकी-थकी रहती। लेकिन शिवानी के अंदर की वो सेक्सुअल भूख कभी कम नहीं हुई। वो रात को बिस्तर पर लेटकर सोचती, “क्या मैं सिर्फ बीवी और माँ बनकर रह जाऊँगी? मेरी चूत अभी भी जलती है… वो जंगली प्यास… वो जोरदार धक्के… वो चीखें… सब कुछ चाहिए।”
एक दिन प्रिंस ने बताया, “जान, मेरी एक पुरानी दोस्त आ रही है पटना। नाम है रिया। दिल्ली से। वो 3-4 दिन रुकेगी। हम लोगों के साथ टाइम स्पेंड करेगी।” शिवानी ने पूछा, “कौन रिया?” प्रिंस हँसा, “कॉलेज टाइम की फ्रेंड। बहुत मस्त लड़की है। अब शादीशुदा है, लेकिन हसबैंड विदेश में है। अकेली घूमती-फिरती है।” शिवानी के मन में एक शरारत हुई। “अच्छा… तो मिलकर अच्छा लगेगा।”
रिया आई – 27 साल की, लंबी, फेयर स्किन, बॉडी बिल्कुल फिट – बड़े स्तन, पतली कमर, गोल मटोल गांड। बाल लंबे, लहरदार। वो जींस-टॉप में आई, लेकिन उसकी हर अदा में सेक्सीपन था। घर आते ही रिया ने शिवानी को गले लगाया, “वाह भाभी… कितनी हॉट लग रही हो! प्रिंस कितना लकी है।” शिवानी हँसी, लेकिन उसकी नजर रिया के क्लीवेज पर गई। “तुम भी कम नहीं हो रिया।”
पहली रात डिनर के बाद तीनों सोफे पर बैठे बातें कर रहे थे। आरव सो चुका था। वाइन खुली। बातें हल्की-फुल्की से गर्म होती गईं। रिया बोली, “प्रिंस, याद है कॉलेज में हम लोग कितना मस्ती करते थे?” प्रिंस हँसा। शिवानी ने पूछा, “कैसी मस्ती?” रिया ने आँख मारकर कहा, “वो सब… जो लड़के-लड़कियाँ करते हैं।” शिवानी का दिल तेज धड़का। वो बोली, “अब भी मस्ती कर सकते हो ना?”
रिया ने शिवानी की तरफ देखा। “भाभी… अगर आप और प्रिंस को बुरा न लगे… तो क्यों नहीं?” प्रिंस ने शिवानी की तरफ देखा। शिवानी ने मुस्कुराकर कहा, “मुझे तो कोई प्रॉब्लम नहीं। आज रात… सब कुछ ट्राई करते हैं।” रिया की आँखें चमक उठीं। वो उठी, शिवानी के पास आई। शिवानी का चेहरा दोनों हाथों में लिया। धीरे से होंठ रख दिए। चुंबन शुरू – नरम, फिर गहरा। शिवानी ने जवाब दिया। उनकी जीभें खेलने लगीं। प्रिंस देख रहा था, उसका लंड सख्त हो गया।
रिया ने शिवानी की साड़ी का पल्लू सरकाया। ब्लाउज के हुक खोले। ब्रा उतारी। शिवानी के स्तन बाहर – अभी भी भरे हुए, निप्पल्स सख्त। रिया ने एक स्तन मुँह में लिया। चूसने लगी। शिवानी सिसकारी, “आह… रिया… कितना अच्छा लग रहा है… चूसो जोर से…” रिया ने दाँत से हल्के से काटा। शिवानी चीखी। प्रिंस ने अपनी शर्ट उतारी। पैंट उतारी। लंड बाहर – सख्त, नसें फूली। रिया ने देखा, मुस्कुराई। “प्रिंस… अभी भी वही मोटा लंड।”
रिया ने शिवानी को सोफे पर लिटाया। साड़ी पूरी उतार दी। शिवानी नंगी लेटी थी। रिया ने अपनी जींस उतारी, टॉप उतारा। ब्रा-पैंटी में थी। वो शिवानी की टाँगों के बीच बैठी। जीभ से चूत चाटने लगी। क्लिटोरिस पर जीभ घुमाई। शिवानी चिल्लाई, “उफ्फ… रिया… जीभ अंदर… चूसो मेरी चूत… आह… कितना मजा आ रहा है…” रिया ने उँगलियाँ डालीं – दो, फिर तीन। तेज-तेज अंदर-बाहर। शिवानी का शरीर काँप रहा था। वो झड़ गई – पानी रिया के मुँह पर। रिया ने चाट लिया।
प्रिंस अब नहीं रुक सका। वो रिया के पीछे आया। रिया की पैंटी उतारी। उसकी चूत गीली, शेव्ड। प्रिंस ने लंड रगड़ा, फिर पूरा अंदर डाल दिया। रिया चीखी, “आह… प्रिंस… कितना मोटा… फाड़ दो मेरी चूत…” प्रिंस धक्के मारने लगा। जोरदार। रिया शिवानी की चूत चाट रही थी, और प्रिंस उसे पीछे से पेल रहा था। शिवानी ने रिया के स्तनों को दबाया, निप्पल्स चूसे। तीनों की सिसकारियाँ कमरे में गूँज रही थीं।
पोजीशन बदली। शिवानी घुटनों पर। प्रिंस पीछे से शिवानी को चोद रहा था। रिया शिवानी के सामने लेटी, टाँगें फैलाकर। शिवानी रिया की चूत चाट रही थी। रिया बाल पकड़कर शिवानी का मुँह अपनी चूत पर दबा रही थी। “भाभी… जीभ और अंदर… चूसो क्लिट… आह… हाँ…” प्रिंस शिवानी की गांड पर थप्पड़ मार रहा था। “शिवानी… तेरी चूत आज कितनी गीली है… रिया की वजह से?” शिवानी चिल्लाई, “हाँ… दोनों की वजह से… चोदो जोर से… दोनों को…”
रिया ने स्ट्रैप-ऑन निकाला – बड़ा, काला। उसने पहना। शिवानी को लिटाया। स्ट्रैप-ऑन चूत में डाला। शिवानी चीखी, “आह… रिया… इतना मोटा… फाड़ दो…” रिया धक्के मार रही थी। प्रिंस ने अपना लंड रिया की गांड में डाला। अब रिया बीच में – आगे से शिवानी को चोद रही थी, पीछे से प्रिंस उसे। तीनों एक साथ हिल रहे थे। कमरा थप-थप, चीखों और सिसकारियों से भर गया।
शिवानी बोली, “रिया… मेरी गांड में भी… प्रिंस… तुम दोनों मिलकर…” प्रिंस ने लंड निकाला, शिवानी की गांड में डाला। रिया स्ट्रैप-ऑन से चूत में। डबल पेनेट्रेशन। शिवानी पागल हो गई। “आआह्ह… दोनों… फाड़ दो मुझे… मेरी चूत… गांड… सब कुछ… जोर से… आह… मैं झड़ रही हूँ…” वो कई बार झड़ी। पानी बहता रहा। प्रिंस और रिया भी झड़े – प्रिंस ने शिवानी की गांड में स्पर्म छोड़ा, रिया स्ट्रैप-ऑन से चूत में दबाव डालती रही।
फिर तीनों शावर में। पानी के नीचे फिर शुरू। रिया ने शिवानी को दीवार से सटाकर चूत चाटी। प्रिंस ने रिया को पीछे से चोदा। शिवानी ने प्रिंस का लंड चूसा। फिर प्रिंस ने शिवानी को गोद में उठाया, स्टैंडिंग में चोदा। रिया नीचे से शिवानी की चूत और प्रिंस के बॉल्स चाट रही थी। पानी बहता रहा, सिसकारियाँ गूँजती रहीं।
बेडरूम में वापस। रात भर चुदाई। कभी शिवानी और रिया 69 में – एक-दूसरे की चूत चाटतीं। प्रिंस उन्हें बारी-बारी चोदता। कभी प्रिंस और रिया शिवानी को बीच में रखकर। कभी शिवानी प्रिंस का लंड चूसती, रिया उसकी गांड में उँगली। सब कुछ – जोरदार, जंगली, बिना रुके। शिवानी की प्यास पूरी तरह बुझ गई। वो चिल्लाती रही, “हाँ… और… दोनों… मुझे पूरी तरह भर दो… मेरी चूत… गांड… मुँह… सब कुछ…”
सुबह तीनों थक कर लेटे। शिवानी बोली, “रिया… तुम कितने दिनों रुकोगी?” रिया हँसी, “जितने दिन तुम चाहो। मेरी प्यास भी अभी बुझी नहीं।” प्रिंस ने कहा, “तो अब हम तीनों… साथ।” शिवानी मुस्कुराई। “हाँ… लेकिन आरव को पता नहीं चलना चाहिए।”
रिया पटना में ही रुक गई – एक फ्लैट लिया पास में। अब रातें तीनों की होतीं। कभी शिवानी और रिया अकेले – लेस्बियन प्ले। कभी प्रिंस के साथ थ्रीसम। शिवानी की सेक्स की प्यास अब पूरी तरह मिट गई – या कहें, और बढ़ गई। वो सोचती, “ये नई जिंदगी… ये नया मजा… अब मैं कभी रुकूँगी नहीं।”
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आरव अब 1 साल का हो चुका था। छोटा-सा, शरारती, लेकिन रात को अच्छे से सो जाता था। शिवानी और प्रिंस की जिंदगी अब रूटीन में ढल चुकी थी – दिन में घर, बच्चा, घरेलू काम; रात में प्रिंस के साथ प्यार, लेकिन वो पुरानी आग अब धीमी पड़ चुकी थी। प्रिंस थक जाता था ऑफिस से, शिवानी भी माँ बनकर थोड़ी थकी-थकी रहती। लेकिन शिवानी के अंदर की वो सेक्सुअल भूख कभी कम नहीं हुई। वो रात को बिस्तर पर लेटकर सोचती, “क्या मैं सिर्फ बीवी और माँ बनकर रह जाऊँगी? मेरी चूत अभी भी जलती है… वो जंगली प्यास… वो जोरदार धक्के… वो चीखें… सब कुछ चाहिए।”
एक दिन प्रिंस ने बताया, “जान, मेरी एक पुरानी दोस्त आ रही है पटना। नाम है रिया। दिल्ली से। वो 3-4 दिन रुकेगी। हम लोगों के साथ टाइम स्पेंड करेगी।” शिवानी ने पूछा, “कौन रिया?” प्रिंस हँसा, “कॉलेज टाइम की फ्रेंड। बहुत मस्त लड़की है। अब शादीशुदा है, लेकिन हसबैंड विदेश में है। अकेली घूमती-फिरती है।” शिवानी के मन में एक शरारत हुई। “अच्छा… तो मिलकर अच्छा लगेगा।”
रिया आई – 27 साल की, लंबी, फेयर स्किन, बॉडी बिल्कुल फिट – बड़े स्तन, पतली कमर, गोल मटोल गांड। बाल लंबे, लहरदार। वो जींस-टॉप में आई, लेकिन उसकी हर अदा में सेक्सीपन था। घर आते ही रिया ने शिवानी को गले लगाया, “वाह भाभी… कितनी हॉट लग रही हो! प्रिंस कितना लकी है।” शिवानी हँसी, लेकिन उसकी नजर रिया के क्लीवेज पर गई। “तुम भी कम नहीं हो रिया।”
पहली रात डिनर के बाद तीनों सोफे पर बैठे बातें कर रहे थे। आरव सो चुका था। वाइन खुली। बातें हल्की-फुल्की से गर्म होती गईं। रिया बोली, “प्रिंस, याद है कॉलेज में हम लोग कितना मस्ती करते थे?” प्रिंस हँसा। शिवानी ने पूछा, “कैसी मस्ती?” रिया ने आँख मारकर कहा, “वो सब… जो लड़के-लड़कियाँ करते हैं।” शिवानी का दिल तेज धड़का। वो बोली, “अब भी मस्ती कर सकते हो ना?”
रिया ने शिवानी की तरफ देखा। “भाभी… अगर आप और प्रिंस को बुरा न लगे… तो क्यों नहीं?” प्रिंस ने शिवानी की तरफ देखा। शिवानी ने मुस्कुराकर कहा, “मुझे तो कोई प्रॉब्लम नहीं। आज रात… सब कुछ ट्राई करते हैं।” रिया की आँखें चमक उठीं। वो उठी, शिवानी के पास आई। शिवानी का चेहरा दोनों हाथों में लिया। धीरे से होंठ रख दिए। चुंबन शुरू – नरम, फिर गहरा। शिवानी ने जवाब दिया। उनकी जीभें खेलने लगीं। प्रिंस देख रहा था, उसका लंड सख्त हो गया।
रिया ने शिवानी की साड़ी का पल्लू सरकाया। ब्लाउज के हुक खोले। ब्रा उतारी। शिवानी के स्तन बाहर – अभी भी भरे हुए, निप्पल्स सख्त। रिया ने एक स्तन मुँह में लिया। चूसने लगी। शिवानी सिसकारी, “आह… रिया… कितना अच्छा लग रहा है… चूसो जोर से…” रिया ने दाँत से हल्के से काटा। शिवानी चीखी। प्रिंस ने अपनी शर्ट उतारी। पैंट उतारी। लंड बाहर – सख्त, नसें फूली। रिया ने देखा, मुस्कुराई। “प्रिंस… अभी भी वही मोटा लंड।”
रिया ने शिवानी को सोफे पर लिटाया। साड़ी पूरी उतार दी। शिवानी नंगी लेटी थी। रिया ने अपनी जींस उतारी, टॉप उतारा। ब्रा-पैंटी में थी। वो शिवानी की टाँगों के बीच बैठी। जीभ से चूत चाटने लगी। क्लिटोरिस पर जीभ घुमाई। शिवानी चिल्लाई, “उफ्फ… रिया… जीभ अंदर… चूसो मेरी चूत… आह… कितना मजा आ रहा है…” रिया ने उँगलियाँ डालीं – दो, फिर तीन। तेज-तेज अंदर-बाहर। शिवानी का शरीर काँप रहा था। वो झड़ गई – पानी रिया के मुँह पर। रिया ने चाट लिया।
प्रिंस अब नहीं रुक सका। वो रिया के पीछे आया। रिया की पैंटी उतारी। उसकी चूत गीली, शेव्ड। प्रिंस ने लंड रगड़ा, फिर पूरा अंदर डाल दिया। रिया चीखी, “आह… प्रिंस… कितना मोटा… फाड़ दो मेरी चूत…” प्रिंस धक्के मारने लगा। जोरदार। रिया शिवानी की चूत चाट रही थी, और प्रिंस उसे पीछे से पेल रहा था। शिवानी ने रिया के स्तनों को दबाया, निप्पल्स चूसे। तीनों की सिसकारियाँ कमरे में गूँज रही थीं।
पोजीशन बदली। शिवानी घुटनों पर। प्रिंस पीछे से शिवानी को चोद रहा था। रिया शिवानी के सामने लेटी, टाँगें फैलाकर। शिवानी रिया की चूत चाट रही थी। रिया बाल पकड़कर शिवानी का मुँह अपनी चूत पर दबा रही थी। “भाभी… जीभ और अंदर… चूसो क्लिट… आह… हाँ…” प्रिंस शिवानी की गांड पर थप्पड़ मार रहा था। “शिवानी… तेरी चूत आज कितनी गीली है… रिया की वजह से?” शिवानी चिल्लाई, “हाँ… दोनों की वजह से… चोदो जोर से… दोनों को…”
रिया ने स्ट्रैप-ऑन निकाला – बड़ा, काला। उसने पहना। शिवानी को लिटाया। स्ट्रैप-ऑन चूत में डाला। शिवानी चीखी, “आह… रिया… इतना मोटा… फाड़ दो…” रिया धक्के मार रही थी। प्रिंस ने अपना लंड रिया की गांड में डाला। अब रिया बीच में – आगे से शिवानी को चोद रही थी, पीछे से प्रिंस उसे। तीनों एक साथ हिल रहे थे। कमरा थप-थप, चीखों और सिसकारियों से भर गया।
शिवानी बोली, “रिया… मेरी गांड में भी… प्रिंस… तुम दोनों मिलकर…” प्रिंस ने लंड निकाला, शिवानी की गांड में डाला। रिया स्ट्रैप-ऑन से चूत में। डबल पेनेट्रेशन। शिवानी पागल हो गई। “आआह्ह… दोनों… फाड़ दो मुझे… मेरी चूत… गांड… सब कुछ… जोर से… आह… मैं झड़ रही हूँ…” वो कई बार झड़ी। पानी बहता रहा। प्रिंस और रिया भी झड़े – प्रिंस ने शिवानी की गांड में स्पर्म छोड़ा, रिया स्ट्रैप-ऑन से चूत में दबाव डालती रही।
फिर तीनों शावर में। पानी के नीचे फिर शुरू। रिया ने शिवानी को दीवार से सटाकर चूत चाटी। प्रिंस ने रिया को पीछे से चोदा। शिवानी ने प्रिंस का लंड चूसा। फिर प्रिंस ने शिवानी को गोद में उठाया, स्टैंडिंग में चोदा। रिया नीचे से शिवानी की चूत और प्रिंस के बॉल्स चाट रही थी। पानी बहता रहा, सिसकारियाँ गूँजती रहीं।
बेडरूम में वापस। रात भर चुदाई। कभी शिवानी और रिया 69 में – एक-दूसरे की चूत चाटतीं। प्रिंस उन्हें बारी-बारी चोदता। कभी प्रिंस और रिया शिवानी को बीच में रखकर। कभी शिवानी प्रिंस का लंड चूसती, रिया उसकी गांड में उँगली। सब कुछ – जोरदार, जंगली, बिना रुके। शिवानी की प्यास पूरी तरह बुझ गई। वो चिल्लाती रही, “हाँ… और… दोनों… मुझे पूरी तरह भर दो… मेरी चूत… गांड… मुँह… सब कुछ…”
सुबह तीनों थक कर लेटे। शिवानी बोली, “रिया… तुम कितने दिनों रुकोगी?” रिया हँसी, “जितने दिन तुम चाहो। मेरी प्यास भी अभी बुझी नहीं।” प्रिंस ने कहा, “तो अब हम तीनों… साथ।” शिवानी मुस्कुराई। “हाँ… लेकिन आरव को पता नहीं चलना चाहिए।”
रिया पटना में ही रुक गई – एक फ्लैट लिया पास में। अब रातें तीनों की होतीं। कभी शिवानी और रिया अकेले – लेस्बियन प्ले। कभी प्रिंस के साथ थ्रीसम। शिवानी की सेक्स की प्यास अब पूरी तरह मिट गई – या कहें, और बढ़ गई। वो सोचती, “ये नई जिंदगी… ये नया मजा… अब मैं कभी रुकूँगी नहीं।”
लेकिन पटना की गलियों में एक पुराना साया अभी भी था – अहमद जेल से बाहर आने वाला था। क्या वो वापस आएगा? या शिवानी की नई दुनिया अब हमेशा के लिए बदल चुकी है?
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आरव अब 2 साल का हो चुका था। छोटा-सा, शरारती, लेकिन उसकी आँखें – वो गहरी काली आँखें – कभी-कभी शिवानी को अहमद की याद दिलातीं। पटना की गलियाँ अब भी वैसी ही थीं – व्यस्त, गर्म, और रहस्यों से भरी। अहमद जेल में था, लेकिन उसके कनेक्शन अभी भी जिंदा थे। प्रिंस अब कंपनी का हेड था, नेहा उसके साथ काम करती थी, और रिया – वो दिल्ली वाली दोस्त – अब पटना में ही शिफ्ट हो गई थी। रिया का हसबैंड विदेश में था, और वो शिवानी और प्रिंस के साथ अक्सर समय बिताती। तीनों का रिश्ता अब एक सेक्रेट बॉन्ड बन चुका था – दिन में दोस्त, रात में जंगली प्रेमी। लेकिन शिवानी की जिंदगी में अब एक नया चेहरा आने वाला था – नाम था करण। 30 साल का, पटना सिक्युरिटी में इंस्पेक्टर, लंबा कद, चौड़ा सीना, और वो आँखें जो किसी को भी स्कैन कर लेतीं।
एक शाम शिवानी घर पर अकेली थी। आरव अपनी दादी के घर गया था। प्रिंस नेहा के साथ मीटिंग में लेट था, रिया दिल्ली गई हुई थी। दरवाजे की घंटी बजी। शिवानी ने खोला – करण खड़ा था, यूनिफॉर्म में। “मैम, मैं इंस्पेक्टर करण हूँ। अहमद के केस के सिलसिले में आया हूँ।” शिवानी का दिल धड़क उठा। वो उसे अंदर ले आई। “क्या हुआ? अहमद तो जेल में है।” करण ने कहा, “हाँ, लेकिन उसके कुछ साथी बाहर हैं। उन्होंने धमकी दी है – आरव को ले जाने की। आपको प्रोटेक्शन चाहिए।” शिवानी रो पड़ी। “भगवान… वो फिर से?”
करण ने शिवानी को सांत्वना दी। उसका हाथ शिवानी की कमर पर गया। शिवानी सिहर उठी। करण की आँखें शिवानी के सेक्सी फिगर पर थीं – 26 साल बाद भी वो 5 फीट की ऊँचाई के साथ पतली कमर, भरे स्तन, गोल गांड। करण बोला, “मैम… आप डरिए मत। मैं 24/7 आपके साथ रहूँगा।” शिवानी की आँखें मिलीं – वो आँखें चाहत से भरी थीं। “करण… आप… कितने स्ट्रॉंग लगते हो।” करण मुस्कुराया। “मैम, सिक्युरिटी वाले ऐसे ही होते हैं।”
उसी रात प्रिंस लौटा। नेहा उसके साथ थी। “जान, नेहा आज रुक जाएगी।” शिवानी ने करण को इंट्रोड्यूस किया। नेहा की आँखें चमक उठीं – करण का मस्कुलर बॉडी। रिया को फोन आया – वो भी आ गई। अब घर में पूरा कास्ट – शिवानी, प्रिंस, नेहा, रिया, करण, और दूर से अहमद का साया। डिनर के बाद सब सोफे पर। वाइन खुली। बातें गर्म हुईं। नेहा बोली, “करण सर… सिक्युरिटी वाले कितने हॉट होते हैं।” करण हँसा। रिया ने कहा, “हाँ… क्या कभी थ्रीसम ट्राई किया?” करण चौंका। प्रिंस ने शिवानी की तरफ देखा। शिवानी मुस्कुराई – “आज रात… सब कुछ ट्राई करते हैं। आरव नहीं है घर पर।”
बेडरूम में। नेहा ने शिवानी को किस किया। रिया ने प्रिंस को। करण देख रहा था। नेहा ने करण का शर्ट उतारा। उसके चौड़े सीने पर हाथ फेरा। “वाह… कितना स्ट्रॉंग…” करण ने नेहा को गोद में उठाया, किस किया। शिवानी ने रिया की ड्रेस उतारी। सब नंगे हो गए। शिवानी की चूत गीली हो चुकी थी। नेहा ने शिवानी को लिटाया, चूत चाटने लगी। शिवानी सिसकारी, “आह… नेहा… जीभ अंदर… चूसो… उफ्फ…” रिया ने प्रिंस का लंड चूसा। करण ने रिया की चूत में लंड डाला – उसका लंड 9 इंच का, सबसे मोटा। रिया चीखी, “आह… करण… फाड़ दो… जोर से…”
प्रिंस ने शिवानी को डॉगी में किया। पीछे से पेल रहा था। नेहा शिवानी के स्तनों को चूस रही थी। रिया करण को राइड कर रही थी। कमरा सिसकारियों से भर गया। शिवानी चिल्लाई, “प्रिंस… जोर से… मेरी चूत… नेहा… निप्पल्स काटो…” नेहा ने काटा। शिवानी झड़ गई। करण ने रिया को पलटा, गांड में ट्राई किया। रिया दर्द से चीखी, “उफ्फ… करण… धीरे… लेकिन मजा आ रहा है…” प्रिंस ने नेहा को चोदा। शिवानी रिया की चूत चाट रही थी।
फिर सब मिक्स। करण ने शिवानी को गोद में उठाया, स्टैंडिंग में चोदा। शिवानी उछल रही थी, “आह… करण… तुम्हारा लंड… सबसे बड़ा… फाड़ दो मुझे…” नेहा प्रिंस का लंड चूस रही थी। रिया स्ट्रैप-ऑन से नेहा को चोद रही थी। शिवानी की चूत से पानी बह रहा था। करण ने स्पीड बढ़ाई, “शिवानी… तेरी चूत कितनी टाइट… सिक्युरिटी वाले ऐसे ही चोदते हैं…” शिवानी फिर झड़ गई।
रात भर ग्रुप सेक्स। कभी चार लड़कियाँ करण को – सब मिलकर उसका लंड चूसतीं, उछलतीं। कभी प्रिंस और करण डबल पेनेट्रेशन – शिवानी की चूत में प्रिंस, गांड में करण। शिवानी पागल हो गई, “आआह्ह… दोनों… फाड़ दो… मेरी प्यास… बुझाओ… जोर से… आह… यस…” नेहा और रिया एक-दूसरे को चाट रही थीं। अंत में सब झड़े – स्पर्म, पानी, सब मिक्स।
लेकिन सस्पेंस। अगले दिन करण ने बताया, “अहमद जेल से भाग गया है। उसके साथी ने मदद की। वो आरव को लेने आएगा।” शिवानी डर गई। प्रिंस ने कहा, “हम मिलकर लड़ेंगे।” नेहा और रिया ने भी कहा, “हम साथ हैं।” लेकिन रात को घर में कोई घुसा – अहमद। वो आरव को लेने आया था। झगड़ा हुआ। करण ने उसे पकड़ा, लेकिन अहमद ने चाकू निकाला। नेहा ने पीछे से हमला किया। सिक्युरिटी आई। अहमद फिर गिरफ्तार। लेकिन इस बार मौत हो गई – लड़ाई में।
अब सब सुरक्षित। लेकिन शिवानी की प्यास अब पूरी हो चुकी थी – करण, नेहा, रिया, प्रिंस के साथ। वो सब मिलकर रहने लगे – एक बड़ा परिवार, जुनून से भरा। पटना की वो जोड़ी अब एक ग्रुप थी। रातें अब और लंबी, और हॉट।
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आरव अब 3 साल का हो चुका था। पटना की गलियाँ अब भी वही थीं – गंगा की लहरें, भीड़, और वो छिपे हुए राज। अहमद की मौत के बाद सब कुछ शांत हो गया था, लेकिन शिवानी की जिंदगी में एक नया तूफान आने वाला था। रिया अब दिल्ली वापस चली गई थी, नेहा प्रिंस की कंपनी में ही थी लेकिन अब वो सिर्फ प्रोफेशनल रह गई थी। करण – वो सिक्युरिटी वाला – अब शिवानी के घर के पास ही रहता था, प्रोटेक्शन के नाम पर। लेकिन असल वजह कुछ और थी। करण शिवानी को देखता रहता, उसकी आँखों में वो भूख थी जो छिप नहीं पाती थी।
एक शाम शिवानी पार्क में आरव को खेलने ले गई थी। वहाँ एक नया चेहरा दिखा – नाम था जावेद। 32 साल का, लंबा, मस्कुलर, घनी दाढ़ी, गहरी काली आँखें, और वो सफेद कुर्ता-पायजामा जो उसके मजबूत शरीर पर चिपका हुआ था। वो ,., था, पटना के पुराने इलाके से, एक बड़ा बिजनेसमैन – लेकिन उसका कारोबार काला था। जावेद अहमद का पुराना दोस्त था। अहमद की मौत के बाद जावेद ने वादा किया था – “शिवानी और उसका बच्चा… मेरा होगा।” वो पटना लौट आया था, बदला लेने और हासिल करने।
जावेद ने शिवानी को देखा। आरव खेल रहा था। जावेद पास आया। “शिवानी… कितने साल हो गए।” शिवानी चौंक गई। “आप… कौन?” जावेद मुस्कुराया, “अहमद का दोस्त। जावेद। आरव… कितना बड़ा हो गया। उसकी आँखें अहमद की तरह हैं।” शिवानी का चेहरा सफेद पड़ गया। वो आरव को गोद में उठाकर भागने लगी। लेकिन जावेद ने कहा, “रुको। मैं तुम्हें कुछ देना चाहता हूँ।” उसने एक एनवेलप दिया – अंदर अहमद की पुरानी फोटोज, वीडियो की USB। “ये सब प्रिंस को मिल जाए तो क्या होगा? या सिक्युरिटी को? मैं नहीं चाहता कि तुम्हारी जिंदगी बर्बाद हो। बस… एक मुलाकात। मेरे साथ।”
शिवानी घर लौटी, काँप रही थी। प्रिंस को कुछ नहीं बताया। रात को प्रिंस लौटा। शिवानी ने उसे गले लगाया। “प्रिंस… आज रात… मुझे बहुत जोर से चाहिए।” प्रिंस मुस्कुराया। “ठीक है, जान।”
बेडरूम में। शिवानी ने प्रिंस को धक्का देकर बेड पर पटका। वो ऊपर चढ़ गई। “आज मैं कंट्रोल करूँगी।” शिवानी ने प्रिंस की शर्ट फाड़ दी। उसके सीने पर किस करने लगी, नाखून गाड़े। प्रिंस सिसकारा। शिवानी नीचे गई, पैंट उतारी। लंड बाहर – सख्त। शिवानी ने मुँह में लिया, गहराई तक। गले तक। गैगिंग कर रही थी। प्रिंस कराह रहा था, “शिवानी… कितनी भूखी हो आज…” शिवानी ने तेज-तेज चूसा, हाथ से सहलाया। लंड चाटा, बॉल्स चूसे। प्रिंस का शरीर काँप रहा था।
शिवानी ने अपना नाइट गाउन उतारा। नंगी हो गई। स्तन भरे, निप्पल्स सख्त। वो प्रिंस के चेहरे पर बैठ गई – फेस-सिटिंग। “चाटो मेरी चूत… पूरी तरह…” प्रिंस ने जीभ डाली, क्लिट चूसा। शिवानी उछल रही थी, “आह… हाँ… जीभ अंदर… चूसो… मेरी चूत का रस पी लो…” वो प्रिंस के मुँह पर रगड़ रही थी। प्रिंस ने उँगलियाँ डालीं, तेज फिंगर फक। शिवानी झड़ गई – पानी प्रिंस के मुँह में।
शिवानी ने प्रिंस को पलटा। डॉगी स्टाइल। वो पीछे से लंड पकड़ा, अपनी चूत में डाला। उछलने लगी। “प्रिंस… आज जोर से… मेरी चूत फाड़ दो…” प्रिंस नीचे से धक्के मार रहा था। शिवानी चिल्ला रही थी, “हार्ड… जोर से… आह… लंड पूरा अंदर… मेरी चूत जल रही है…” प्रिंस ने गांड पर थप्पड़ मारे। शिवानी की गांड लाल हो गई। वो बाल खींच रहा था। शिवानी फिर झड़ गई।
प्रिंस ने शिवानी को उठाया। दीवार से सटाया। स्टैंडिंग मिशनरी। टाँगें कंधों पर। लंड पूरा अंदर। धक्के तेज। शिवानी चीख रही थी, “आआह्ह… प्रिंस… गहरा… फाड़ दो… मेरी चूत… गांड… सब कुछ… मैं तुम्हारी रंडी हूँ…” प्रिंस ने स्पीड बढ़ाई। हर धक्के में शिवानी का शरीर हिल रहा था। स्तन उछल रहे थे। प्रिंस ने निप्पल्स काटे। शिवानी दर्द और मजा में रो रही थी। “स्पर्म अंदर… भर दो मुझे… जोर से…”
प्रिंस ने जोर का धक्का मारा, गरम स्पर्म अंदर छोड़ दिया। शिवानी काँप उठी, फिर झड़ गई। दोनों थक कर लेटे। लेकिन शिवानी का मन शांत नहीं था। जावेद की धमकी।
अगले दिन शिवानी जावेद से मिलने गई – उसके ऑफिस में। जावेद ने दरवाजा बंद किया। “शिवानी… तू आई। अच्छा है।” वो पास आया। शिवानी डर रही थी। “क्या चाहते हो?” जावेद ने कहा, “तुझे… और आरव को। प्रिंस को छोड़।” शिवानी ने मना किया। जावेद ने उसे दीवार से सटाया। “तू मेरी होगी… जैसे अहमद की थी।” वो शिवानी की साड़ी ऊपर कर रहा था। शिवानी विरोध कर रही थी। लेकिन जावेद का हाथ उसकी चूत पर। गीली थी। “देख… तेरा शरीर झूठ नहीं बोलता।”
जावेद ने शिवानी को डेस्क पर लिटाया। साड़ी फाड़ दी। ब्लाउज खोला। स्तन बाहर। जावेद ने चूसे – जोर से। शिवानी चीखी, “नहीं… छोड़ो…” लेकिन उसकी सिसकारी मजा की थी। जावेद ने पैंट उतारी। लंड – 10 इंच का, मोटा, काला। शिवानी की आँखें फैल गईं। “इतना बड़ा…” जावेद ने लंड चूत पर रगड़ा। फिर एक झटके में पूरा अंदर। शिवानी चीखी, “आआह्ह… दर्द… लेकिन… मत रुको…” जावेद धक्के मारने लगा – जंगली, क्रूर। डेस्क हिल रहा था। शिवानी चिल्ला रही थी, “जावेद… जोर से… मेरी चूत फाड़ दो… आह… गहरा… हाँ… और तेज…” जावेद ने बाल पकड़े, गांड पर थप्पड़ मारे। “तेरी चूत… मेरी है… प्रिंस कभी इतना नहीं दे सकता…”
शिवानी झड़ गई – कई बार। जावेद ने पोजीशन बदली। शिवानी को गोद में उठाया, चोदता रहा। शिवानी उछल रही थी, “जावेद… तुम्हारा लंड… मेरी जान… फाड़ दो… स्पर्म अंदर… भर दो…” जावेद ने जोर का धक्का मारा, स्पर्म अंदर। शिवानी काँप उठी।
शिवानी घर लौटी, पसीने से तर। प्रिंस को कुछ नहीं बताया। लेकिन अब जावेद का साया था। वो धमकी दे रहा था – “आरव को ले जाऊँगा… या तुझे।” शिवानी डर रही थी। लेकिन उसकी बॉडी में नई आग लग गई थी। वो सोच रही थी, “क्या मैं जावेद के साथ… फिर से? या प्रिंस को बताऊँ?”
रात को प्रिंस ने शिवानी को चोदा – लेकिन शिवानी के मन में जावेद था। वो चिल्लाई, “जोर से… फाड़ दो…” प्रिंस ने सोचा – शिवानी आज बहुत भूखी है। लेकिन सच कुछ और था।
जावेद का प्लान चल रहा था – वो आरव को लेने की साजिश रच रहा था। करण को पता चला। वो शिवानी से मिला। “मैम… जावेद खतरनाक है। मैं तुम्हें बचाऊँगा।” लेकिन करण की आँखों में भी वो भूख थी। शिवानी ने सोचा – “शायद करण मदद करेगा… लेकिन उसकी कीमत क्या?”
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शिवानी और प्रिंस की कहानी – अगला भाग (जावेद और शिवानी सबके सामने)
जावेद का दबाव अब दिन-ब-दिन बढ़ रहा था। वो शिवानी को मैसेज करता रहता – “आज शाम मेरे ऑफिस आ। नहीं आई तो प्रिंस को सब वीडियो भेज दूँगा। आरव की फोटोज भी।” शिवानी का दिल डर से धड़कता। वो प्रिंस से कुछ कह नहीं पा रही थी। करण को भी पता था – वो सिक्युरिटी वाला – लेकिन करण खुद शिवानी पर लाइन मार रहा था। “मैम… अगर जावेद को रोकना है तो मुझे कुछ देना पड़ेगा।” शिवानी समझ गई – करण भी जावेद जैसा ही था, बस यूनिफॉर्म में।
एक शाम जावेद ने शिवानी को मैसेज किया – “आज रात 8 बजे मेरे क्लब में आ। सब लोग होंगे – प्रिंस, नेहा, करण, रिया भी। मैंने सबको पार्टी का इनवाइट भेज दिया है। तू आएगी… और सबके सामने मेरी होगी। नहीं आई तो कल सुबह सब वीडियो ऑनलाइन होंगे।”
शिवानी का दिमाग सुन्न हो गया। क्लब – पटना का सबसे प्राइवेट, हाई-प्रोफाइल क्लब, जहाँ अमीर लोग पार्टी करते थे। वो प्रिंस को बताया नहीं। बस बोली, “आज शाम बाहर जाना है।” प्रिंस ने कहा, “ठीक है, मैं भी आ रहा हूँ। नेहा और रिया भी आ रही हैं। करण ने भी कहा है वो आएगा।” शिवानी का दिल बैठ गया। सब लोग… एक जगह… और जावेद का प्लान।
रात 8 बजे क्लब पहुँचे। अंदर म्यूजिक तेज, लाइट्स डिम, लोग डांस कर रहे थे। जावेद VIP लाउंज में बैठा था – सफेद कुर्ता, दाढ़ी सँवारी, चारों तरफ उसके गुंडे। वो सबको देखकर मुस्कुराया। “आओ… सब आए हो। अच्छा लगा।” प्रिंस ने हाथ मिलाया। “जावेद भाई… क्या बात है?” जावेद ने शिवानी को देखा – वो लाल साड़ी में, लो बैक ब्लाउज, पेट अभी भी थोड़ा उभरा लेकिन सेक्सी लग रही थी।
जावेद ने सबको ड्रिंक्स दी। बातें हुईं। धीरे-धीरे जावेद ने माइक लिया। क्लब का म्यूजिक रुक गया। सबकी नजरें उस पर। “दोस्तों… आज एक स्पेशल अनाउंसमेंट है।” वो शिवानी की तरफ मुड़ा। “शिवानी… ये लड़की… मेरी है। अहमद की मौत के बाद मैंने वादा किया था – उसका बच्चा और उसकी औरत… मेरी होगी।” क्लब में सन्नाटा छा गया। प्रिंस उठ खड़ा हुआ। “क्या बकवास कर रहे हो?” नेहा और रिया चौंकीं। करण ने हाथ पिस्तौल पर रखा।
जावेद हँसा। “प्रिंस… तू जानता है शिवानी कितनी बार मेरे साथ सोई है? वो वीडियो सबके पास हैं।” उसने फोन निकाला। स्क्रीन पर वीडियो प्ले हुआ – शिवानी और जावेद का सेक्स, ऑफिस में। शिवानी रो पड़ी। प्रिंस का चेहरा सफेद। नेहा ने कहा, “ये… ये सच है?” करण ने कहा, “जावेद… तू गिरफ्तार है।”
लेकिन जावेद के गुंडे आगे आए। “कोई हिलेगा नहीं।” जावेद ने शिवानी का हाथ पकड़ा। “आज सबके सामने… शिवानी मेरी बनेगी।” वो शिवानी को स्टेज पर ले गया। म्यूजिक फिर शुरू। जावेद ने शिवानी की साड़ी का पल्लू सरकाया। सब देख रहे थे। शिवानी काँप रही थी। “नहीं… जावेद… मत…” लेकिन जावेद ने ब्लाउज के हुक खोल दिए। शिवानी के स्तन बाहर – ब्रा नहीं थी। निप्पल्स सख्त। क्लब में सिसकारी और सीटी।
जावेद ने शिवानी को स्टेज पर लिटाया। साड़ी पूरी उतार दी। शिवानी सिर्फ पैंटी में। जावेद ने पैंटी फाड़ दी। शिवानी की चूत नंगी – गीली, चमक रही थी। जावेद ने अपनी पैंट उतारी। लंड बाहर – 10 इंच, मोटा, नसें फूली। सब देख रहे थे। प्रिंस चिल्लाया, “छोड़ उसे!” लेकिन गुंडों ने उसे पकड़ लिया।
जावेद ने शिवानी की टाँगें फैलाईं। लंड चूत पर रगड़ा। शिवानी रो रही थी, “नहीं… सबके सामने… प्लीज…” लेकिन जावेद ने एक झटके में पूरा अंदर कर दिया। शिवानी चीखी – “आआआह्ह्ह… जावेद… इतना गहरा… दर्द… लेकिन… आह…” जावेद धक्के मारने लगा – जोरदार, तेज, बेरहम। स्टेज हिल रहा था। थप-थप की आवाज म्यूजिक से ऊपर गूँज रही थी। शिवानी की छाती उछल रही थी। वो चिल्ला रही थी, “जावेद… जोर से… मेरी चूत फाड़ दो… सब देख रहे हैं… आह… हाँ… और तेज…” उसकी आँखें बंद, लेकिन शरीर जवाब दे रहा था।
जावेद ने शिवानी को पलटा – डॉगी स्टाइल। गांड ऊपर। लंड फिर अंदर। थप्पड़ मार रहा था गांड पर – लाल निशान। “देखो सब… ये शिवानी… मेरी रंडी है… प्रिंस… तू देख… तेरी बीवी कितनी चुद रही है…” प्रिंस रो रहा था। नेहा और रिया डरी हुई। करण ने कोशिश की लेकिन गुंडे पकड़े हुए थे।
जावेद ने शिवानी के बाल पकड़े। “बोल… तू मेरी है?” शिवानी रोते हुए बोली, “हाँ… मैं तेरी हूँ… चोद मुझे… सबके सामने… मेरी चूत… गांड… सब तेरी…” जावेद ने लुब्रिकेंट लगाया, लंड गांड में डाला। शिवानी चीखी – “आह… दर्द… लेकिन… डालो पूरा… फाड़ दो मेरी गांड…” जावेद धक्के मारने लगा। शिवानी की चीखें मजा में बदल गईं – “उफ्फ… जावेद… मेरी गांड… चोदो… हार्ड… सब देखो… मैं जावेद की हूँ…”
जावेद ने स्पीड बढ़ाई। शिवानी कई बार झड़ गई – पानी बहता रहा। क्लब में लोग तालियाँ बजा रहे थे। जावेद ने जोर का धक्का मारा – स्पर्म शिवानी की गांड में। शिवानी काँप उठी, फिर झड़ गई। दोनों थक कर लेटे। जावेद ने शिवानी को गोद में उठाया। “अब ये मेरी है। आरव भी मेरा।”
लेकिन तभी करण ने गुंडों से छुटकारा पाया। पिस्तौल निकाली। “जावेद… हाथ ऊपर!” सिक्युरिटी की सायरन बजने लगी। जावेद के गुंडे भागे। जावेद ने शिवानी को छोड़ा। सिक्युरिटी ने उसे पकड़ लिया। शिवानी रो रही थी – अपमान, डर, और अजीब सी राहत। प्रिंस दौड़कर आया। शिवानी को गले लगाया। “जान… सब ठीक हो जाएगा।”
क्लब खाली हो गया। शिवानी घर लौटी। प्रिंस ने उसे नहलाया। बेड पर लिटाया। “शिवानी… तू मेरी है। हमेशा।” वो धीरे से किस किया। शिवानी रो पड़ी। “प्रिंस… मैंने सबके सामने… अपमान…” प्रिंस ने कहा, “मुझे फर्क नहीं पड़ता। तू मेरी बीवी है।”
रात को प्रिंस ने शिवानी को बहुत प्यार से चोदा – धीमा, गहरा। शिवानी ने कहा, “प्रिंस… आज से सिर्फ तू… कोई और नहीं।” लेकिन मन में वो इंटेंस पल याद आ रहे थे। जावेद जेल में था। लेकिन शिवानी जानती थी – उसकी प्यास कभी पूरी नहीं होगी।
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