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Adultery लफ़्ज़ों से कहाँ बयां हो पाता है हाले दिल...
#61
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#62
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#63
अब आगे..


शर्ट तो राजू ने पहले ही निकल रखी थी। उसकी चौड़ी छाती पर हाथ फिराते हुए सरिता उठेजाना भर स्वर में बोली..."क्यू राजू आज सुबह सुबह तूने अपना औज़ार खड़ा कर रखा है. पता है इसमें कितना जोखिम है..ऐसा बोल सरिता एक हाथ उसकी छाती पर हाथ फेरने लगी और दूसरा हाथ नीचे लेजा उसका लंड पकड़ लिया.

राजू.."क्या करु मालिकिन। आपसे दूर अब नहीं जाता। ऐसा बोल उसने पीछे से सरिता की गांड को पकड़ लिया और उसके होठों को फिर से चूसने लगा। अगले कुछ पली में ही उसने सरिता को नंगे कर दिया और उसकी चुची को दबा कर चूसने लगा
[b]सरिता[/b]

वैसे तो राजू ने सरिता को पहले भी नंगा देखा था लेकिन उन दोनों की ज्यादातर चुदाई रात को ही होती थी। आज दिन के उजाले में सरिता का नंगा बदन देख राजू एक दम पागल हो गया था। 36 की बड़ी बड़ी सुडोल चुचिया और उसके ऊपर भूरे रंग के तने हुए निपल ... नीचे बल खाती कमर और फिर 38 इंच की चौड़ी गांड..

[Image: IMG-6199.jpg]
.
सरिता का ऐसा कामुक रूप देख राजू पागल हो गया। हमसे झट से सरिता को पीठ के बल बिस्तर पर लिटाया और उसकी चिपचिपी बुर पर अपने होंठ रख दिए.
अपनी लंबी जीभ से वो सरिता के छत्ते से बहता हुआ शहद चाटने लगा...सरिता अपनी आंखें बंद किए हुए राजू का सिर पकड़ कर अपनी चूत दबा रही थी और उसके मुंह से उन्माद भारी सिस्कारिया निकल रही थी...

सरिता.."चाट राजू चाट। अपनी मालकिन की चूत का सारा रस पी ले आज..उफ्फ्फ राजू …जितनी अंदर तक तेरी जीभ जा रही है वहां तक तो तेरे सेठ जी का लंड भी नहीं जाता। तू तो किसी भी औरत को अपनी जीभ से ही ठंडा कर सकता है . काश !तेरे लालाजी का लंड भी तेरे जैसा होता”

राजू.."अरे मालिकिन..अगर लालाजी का लंड भी मेरा जैसा होता तो आज आप लाला के नीचे होती और न कि मेरे नीचे...फिर मैं आपकी इस रसीली चूत को कैसे चोद पाता”


सरिता..”हाय राजू इतनी मीठी बातें करना तू कहां से सिखा रे..वैसे क्या तुझे मेरी चूत सच में इतनी पसंद है?”

राजू.. "आपकी चूत तो मैं सारा दिन चाट सकता हूँ"

सरिता..”सुन राजू सिर्फ चूत चाटने से काम नहीं चलेगा मुझे तेरा लंड चाहिए अपनी चूत में... बोल राजू...अपनी मालिकिन को रोज़ ऐसे ही चोदेगा ना?

राजू..हां मालिकिन आप जब कहोगी तभी आपको नंगा करके अपने लौड़े पर बिठा लूँगा और ख़ूब चोदूंगा”

सरिता..” चल अब देर ना कर और घुसा दे अपना लौड़ा मेरी चूत में

राजू..."इतनी भी जल्दी क्या मालिकिन। पहले आप भी तो एक बार मेरा लौड़ा चूस कर इसको अपनी चूत के लिए तैयार करो...बेचारा कब से अप्पके सुर्ख होठों को स्पर्श पाने को तरस रहा है.. इतना बोल राजू ने अपना लौड़ा सरिता के मुँह के पास कर दिया. राजू का लौड़ा पूरा तन गया था।


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#64
सरिता ने हाथ बढ़ाया और राजू का लौड़ा पकड़ लिया। गरम गरम लौड़ा पकड़ उसे लगा जैसा कोई गरम लोहे की छड़ पकड़ ली हो. उसकी आँखों में देखते हुए उसने लंड की चमड़ी को पीछे सरकया और टोपा बाहर निकाल दिया फिर ज्यादा देर ना करते हुए टोपे पर अपनी जीभ चला दी. राजू की सिस्की निकल गयी. गाँव की बहुत से औरतों ने राजू का लौड़ा पहले भी चूसा था लेकिन सरिता की बात ही कुछ और थी. वो पूरा लौड़ा मुँह में लेकर चूसती थी और लंड के नीचे लटक रहे टट्टे भी साथ में चाटती थी.

राजू बिस्तर पर बैठ गया और सरिता उसकी टांगो के बीच बैठ कर पूरा लौड़ा मुँह में घुसा कर चूसने लगी. इस बीच राजू उसके बालों से खेल रहा था और अपनी कमर उठा कर उसके गले तक लंड पेल रहा था। सरिता के मुंह से गों गों की आवाज आ रही थी. रिशा ज्यादा देर वहां और ना रुक सकी और अपने कमरे में अपने सारे कपड़े उतर नंगी हो गई और चूत को मसलने लगी.. अपनी सास का ऐसा रंडीपना देख उसको विश्वास नहीं हो रहा था. किचन में जा वो एक मोटा सा खीरा उठा लाई और उसको अपनी चूत में पेल दिया। पांच सात मिनट में उसका पानी निकल गया। जब थोड़ा शांत हुई तो सोचने लगी कि वो राजू को अब कैसे उसके बिस्तर तक लाया जाए.
उधर राजू सरिता का सर पकड़ कर धक्के लगा कर सरिता के मुँह में लंड पेल रहा था. जब उसे लगा कि अब वो और ज्यादा देर सरिता की चुसाई के आगे टिक नहीं पाएगा तो उसने सरिता के मुंह से लौड़ा बाहर निकाल दिया और सरिता को उठाकर बिस्तर पर पटक दिया. सरिता की टांगो को पकड़ उसने अपने कंधों पर रखा और चूत के मुहाने पे लौड़ा रख जोर का धक्का मार दिया.. सरसराता हुआ लौड़ा चूत के अंदर घुस गया और सीधा बच्चेदानी पे ठोकर मार दी. सरिता के मुँह से आह निकल गई.



सरिता.. “जरा आराम से राजू...तेरा लौड़ा कुछ ज्यादा ही लंबा और मोटा है”

राजू..मालिकिन आपको भी तो लंबा और मोटा ही पसंद है ना?


सरिता.."हां राजू पसंद तो है लेकिन तेरा ये लौड़ा मेरी चूत का भोसड़ा बना देगा और फिर तेरे लालाजी को पता चल जाएगा तो मुसीबत हो जाएगी!
राजू..लालाजी तो अब बुड्ढे हो गए हैं। आप अभी जवान हो और कोई तगड़ा मर्द ही आपकी प्यास बुझा सकता है। इसलिए तड़पने से बेहतर है मेरा साथ दो और चुदाई का मजा लो. सरिता की चूत काफी पानी छोड़ रही थी और राजू का लौड़ा गपा गप चूत की धुनाई कर रहा था


कुछ समय बाद सरिता ने राजू को बिस्तर पर लिटा दिया और खुद उसके लंड पर बैठ कर चुदवाने लगी चूत पर बजते हुए हर धक्के के साथ सरिता के गले में लटका मंगलसूत्र उसकी चुचियों के बीच झूल रहा था और इन अद्भुत क्षणों का गवाह बन रहा था.

इसी बीच सरिता एक बार छूट चुकी थी लेकिन राजू के धक्के अभी भी जारी थे.

दोनों की कमर लय में एक दूसरे के साथ थिरकती जा रही थी और मुंह से काम वासना की आहें निकल रही थी।

सरिता ने अपनी बाहों को के राजू गले में डाल कर सहारा लिया और खुद को संतुलित किया।

राजू ने सरिता के होंठों को अपने कब्जे में लेकर उन्हें चूसना शुरू कर दिया।
नीचे उसका औजार सरिता की मुनिया की खुदाई करता जा रहा था। आज राजू का लिंग अलग ही तरह का तनाव और आकार लिए हुए था। उसका सुपारा टमाटर जैसा फूला हुआ था और उस नसें खुरदरापन लिए फूली हुई थी जिसकी वजह से योनि में रगड़ बढ़ गई थी.
उनका सुपारा जब बच्चेदानी पर ठोकर मारता तो सरिता को मीठा मीठा दर्द होता।





सरिता की योनि तो अब झरना बन चुकी थी जिससे लगातार योनि रस बहता जा रहा था.




राजू के लिंग की रगड़ और धक्के की स्पीड इतनी ज्यादा थी कि ज्यादा समय तक सरिता इस आनन्द को झेल नहीं पाई और सरिता की योनि से फव्वारा फूट पड़ा।

झड़ने के बाद सरिता की योनि ढीली पड़ गई लेकिन राजू अभी भी धक्के लगाते जा रहा था. राजू ने एक बार फिर से सरिता को बिस्तर पर लिटा दिया और चुदाई चालू कर दी!

सरिता ने अपनी दोनों टांगे कैंची की तरह राजू की कमर पर लपेट ली और फिर खुद को उसके हवाले कर दिया।

राजू ने सरिता के नितम्बों पर हाथ लगाया और उनके सहारे सरिता को उठा उठा कर धक्के लगाने लगा



उसके हर धक्के से सरिता के बदन में कम्पन पैदा हो जाती

और उसके कंगन और पायल आवाज करने लगते।

सरिता की आंखें आनन्द के मारे बंद हो गई थी और मुंह से जोर जोर की आवाजें आ रही थी।

करीब दस मिनट और चोदने और दो बार सरिता को स्खलित करने के बाद राजू की जवानी अपने चरम पर पहुंच गई और उसने सरिता की चूत को अपने वीर्य से सराबोर कर दिया।

वो किसी जोंक की तरह सरिता से चिपक गया और अपने लिंग का एक एक हिस्सा योनि की गहराई में उतार दिया।

सरिता की योनि उनके लिंग का गर्मागर्म वीर्य पाकर सिकुड़ गई.

जब उसने अपना लिंग बाहर निकाल लिया तो उसका वीर्य सरिता के कामरस के साथ मिक्स होकर चूत के दरवाजे से बहने लगा.
सरिता ने पहले उंगली से वीर्य को उठाया और मजे से चाट गई, फिर टिशू पेपर से खुद को साफ किया।

सरिता अब तक दो बार झड़ी थी इसीलिए उसकी भी सांसें राजू की तरह ही तेज हो गई थी।
वह बेड पे लेट गई और खुद को संभालने लगी।

10 मिनट बाद जब सरिता का जिस्म जरा संभल गया तो वो राजू की तरफ मुंह कर उसकी छाती पर हाथ फेरने लगी.

सरिता..”गधा जैसा लंड है तेरा और घोड़ा जैसी ताकत. मुझ जैसी औरत की तू जान निकल देता है। कोई नई बयाही या कुंवारी लड़की तो तेरा लंड झेल नहीं पाएगी”

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#65
[Image: bra-romance.gif]
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#66
इतना बोल सरिता ने हाथ नीचे कर राजू का लौड़ा पकड़ लिया। हाथ लगते ही राजू का लंड फिर से कुनमुनाने लगा।

सरिता...”हे भगवान. ये तो फिर से तन गया. नहीं राजू मैं अब और नहीं झेल पाऊंगी..वैसे भी रिशा कभी भी वापस आ सकती है”

राजू..अभी तो भाभी को वापस आने में काफी वक्त है और फिर आपने आज अपनी गांड देने का वादा किया था. आप जल्दी से बिस्तर पर घोड़ी बन जाओ..

जाब राजू ने सरिता को घोड़ी बनाने को कहा तो सरिता भी समझ गई कि आज राजू गांड का उद्घाटन कर के ही मानेगा. वक्त बर्बाद ना करते हुए वो जल्दी से बिस्तर पर घुटने रख के झुक गई.



घोड़ी बनी सरिता की उभरी हुई गांड देख राजू के मुँह में पानी आ गया . राजू ने सरिता के बाल पकड़ कर उनको पोनीटेल की तरह से बांध दिया और फिर उसकी गांड पर दो तीन बार जोर से चपत लगाई।
सरिता मदहोशी में इस दर्द का मजा लेने लगी।

राजू ने अपने हाथ सरिता की गांड पर फेरने शुरू कर दिए और फिर गांड की दरार में अपनी उंगलियां घुमाने लगा. राजू का सरिता की गांड में उंगली करना उसको बहुत उत्तेजित कर रहा था।

राजू की उंगली सरिता की गांड में हलचल मचाने लगी, और वो धीरे धीरे अपनी गांड को अंदर की तरफ भींचने लगी।

अचानक वो हुआ जिसकी उसको जरा भी उम्मीद नहीं थी।

राजू की उंगली गांड में घुसने लगी तो सरिता चीखी- आआह … मादरचोद ये क्या कर रहा है, दर्द होता है मुझे, मेरी गांड में उंगली मत कर राजा..

लेकिन राजू ने सरिता की एक नहीं सुनी और अपनी बीच की पूरी उंगली गांड में घुसा दी।

सरिता दर्द और जलन से सिसकी लेने लगी- , राजू प्लीज निकाल लो इसे, बहुत दर्द हो रहा है! प्लीज मान जा, मैं ये नहीं कर पाऊंगी।
राजू- “डरो मत मालिकिन मैं इतनी आराम से करूंगा की दर्द नहीं बल्कि मजा आयेगा”।

सरिता जानती थी कि आज राजू उसकी गांड मारे बिना नहीं मानेगा

सरिता...राजू मुझे पता है तेरी नज़र अब मेरी गांड पर है..लेकिन मेरी गांड मारने से पहले अपना लौड़ा तेल से अच्छे से चिकना कर ले और थोड़ा तेल मेरी गांड में भी उड़ेल दे ताकि तेरा लौड़ा लेने में ज्यादा दर्द न हो

राजू ने पास रखी तेल की शीशी से कुछ तेल सरिता की गांड में उड़ेल दिया और थोड़ा सा तेल अपने लंड पे मल लिया. फिर उसने अपना लंड सरिता की गांड के छेद पर टिका दिया अपना लन सरिता की कुंवारी गांड में डालने लगा पहले धक्के में तो लौड़ा फिसल गया लेकिन राजू ने फिर से लौड़ा गांड के छेद पर सेट किया और अबकी बार गांड के छल्ले को पार करने में सफल हो गया.
सरिता के चेहरे पर दर्द के भाव थे।
वो होंठों को भींचे किसी तरह अपनी सिसकी रोक कर लेटी थी।


राजू ने एक हाथ से उसकी चोटी पकड़ी और फिर धीरे धीरे उसकी पीठ पर किस करने लगा और जितना लौड़ा अंदर घुसा था उसको ही अंदर बाहर करने लगा. सरिता का थोड़ा दर्द कम हुआ तो वो भी अपनी गांड को पीछे ढकेल लंड का स्वाद लेने लगी

राजू ने अचानक से एक धक्का लगाया और आधा लिंग सरिता की गांड में जा घुसा- हाय दईया … मर गई मैं!



सरिता के मुंह से यही आह निकली तो राजू ने फिर से एक धक्का लगाया.
इस बार सरिता दर्द से चीख उठी और इसी के साथ राजू का पूरा लंड गांड में घुस गया।

सरिता की आंखें दर्द के मारे भर आई और होंठ कांपने लगे।
उसके मुंह से एक घुटी हुई आह निकली- हाय माँ. राजू बहुत दर्द हो रहा है।

लेकिन मर्द अपनी हवस मिटाने के लिए औरत को हमेशा दर्द देता आया है।

राजू पर सरिता की सिसकी का कोई असर नहीं पड़ा।

सरिता की गांड अंदर की तरफ सिकुड़ गई और राजू के लंड को पूरी ताकत से भींच लिया।
सरिता को ऐसा लग रहा था कि जैसे कोई मोटा गर्म लोहे का रॉड उसकी गांड में घुसा हुआ हो।

राजू को सरिता की गांड की कसावट की वजह से धक्के लगाने में दिक्कत पेश आ रही थी- मालिकिन अपनी गांड को ढीला करो वरना धक्के कैसे लगाऊंगा।
सरिता सुबकती हुई बोली- राजू मुझसे नहीं हो पाएगा..प्लीज इसको निकाल ले और जितना चाहे मेरी चूत मार ले

राजू- ठीक है मालिकिन निकाल लूंगा लेकिन इसे ढीला करो तभी तो निकलेगा।

राजू की बात सुनकर सरिता ने गांड को ढीला छोड़ दिया।

राजू ने अपना लंड बाहर खींचना शुरू किया और जैसे ही सुपारा गांड के छल्ले के पास पहुंचा, उसने पूरे जोर से सरिता की गांड में अपना लंड दोबारा उतार दिया।



सरिता के मुंह से दर्द भरी चीख निकल पड़ी और उसने बिस्तर पर पड़े तकिये से अपनी चीख दबाने की नाकाम कोशिश की

थोड़ी देर बाद जब सरिता का दर्द कम हुआ तो वो मस्ती से करहाने लगी

सरिता.."राजू ..पहली बार मैंने अपनी कुंवारी चूत अपने पति को दी थी और आज अपनी कुंवारी गांड मैंने तेरे को दे दी है..एक तरह से अब तू भी मेरा पति है। मेरे अपने पति से ज्यादा अब ये चूत और गांड पर तेरा हक है”

इधर राजू धीरे धीरे कर के सरिता गांड को चोदने लगा और अपना एक अंगूठा उसके मुंह में और अपनी उंगली से उसकी योनि को सहलाने लगे।
राजू का हर धक्का अब सरिता के जिस्म में दर्द के साथ साथ मजे की लहर भी उत्पन्न करने लगा।

उसकी गांड को पहली बार लंड का स्वाद मिला था।

सरिता को दर्द और मजा दोनों का मिला-जुला एहसास हो रहा था.

सरिता के नये हरजाई खसम राजू ने सरिता की गांड पर अपने मोटे लौड़े से जो मेहनत की थी,उसी का नतीजा था कि सरिता मस्ती के सागर में गोते खा रही थी

सरिता की जुबान मुँह से बाहर आ गई और कंठ से दबी हुई आवाज निकल गई ‘उओह्ह्ह उह्ह साले हरामी आह फाड़ दे साले आह राजू मेरी जान क्या पेला है तूने आह.’

राजू मजे से एक शॉट और मारता हुआ बोला- अभी सही बोल रही है कुतिया आह ले बहन की लवड़ी, लंड का मजा ले!


राजू के मुँह से ये भद्दी गलियाँ भी आज सरिता को अच्छी लग रही थी

‘आह सच में राजू तेरे इन झटकों में जन्नत नज़र आ गई … आह ले चलो अपनी इस घोड़ी को चाँद पर आह.’

राजू सरिता की चुची मसलता हुआ धीमे धीमे चोदने लगा.

सरिता ने उसे गुस्सा दिलाने के लिए बोला- “क्या हुआ मादरचोद… कहीं थक तो नहीं गया?”


राजू ..”हम थकते नहीं रानी … थका देते हैं. आज दिन भर तुझे घोड़ी बनाकर तेरी गांड का भोसड़ा बना दूंगा साली रंडी! “

इतना कह कर उसने दो चार तेज झटके मार दिए.
उन झटकों से सरिता की दर्द और आनन्द भरी मीठी आवाजें निकलने लगीं ‘वाआह्हह आह हाय हुउई उम्ममा … आई.’

सरिता की अंगड़ाइयां और खुला मुँह राजू को और उत्तेजित किए जा रहे थे, ये उसके झटकों की तेजी में साफ नजर आ रहा था. पूरा कमरा धक धक पक पक की आवाज से गूंज रहा था.

अब उसके दोनों हाथ सरिता की मुसम्मियों को पकड़ कर उसकी चुदाई में सहायक बने हुए थे.

उसके झटकों की मार से सरिता की कमर हवा में उठ उठ जा रही थी और लंड गांड की गहराई तक खोदे जा रहा था.



करीब आधा घंटा तक राजू ने सरिता को खूब ठोका.

राजू के इस आधा घंटा के हड्डी तोड़ गांड फाड़ अभियान ने सरिता को स्वर्ग में पहुंचा दिया था. वो समझ गई थी सिर्फ उसकी जवानी सही मर्द के हाथ में है.

राजू अब अपना रस छोड़ने वाला लग रहा था, उसके तेज होते धक्के इस बात का सबूत थे.

कुछ ही झटकों में सरिता को एक तेज और गर्म धार मेरे पेट तक महसूस हुई. राजू ने झट से लंड सरिता की गांड से निकाला अपना और सारा माल सीधा सरिता के चेहरे और बूब्स पर टपका दिया.


अब दिन के एक बज चुके थे और रिशा के वापस आने का समय भी हो चुका था लेकिन राजू का मन अभी नहीं भरा था उसके लंड का तनाव सरिता की बजाने के लिए वापस रेडी था.

राजू..”मालिकिन अगर मजा आया तो एक राउंड और हो जाए?”

सरिता..”राजू मजा तो बहुत आया पर अभी एक और राउंड के लिए वक्त नहीं है “

राजू.. ठीक है मालिकिन लेकिन आज रात को आपका चूत और गांड दोनों चोदूंगा


सरिता: बोल तो ऐसा रहा है जैसे मेरे मना करने पे तू मान जाएगा ..रात को आ जाना कमरे में..मेरी चूत और गांड तेरे लंड के लिए त्यार मिलेगी इतना बोल दोनों ने अपने कपड़े पहने और सरिता हल्का सा लड़खड़ाती हुई राजू के कमरे से निकल गई l
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#67
# __ये फरवरी भी ना जाने
कितने गुलाबो को पेड़ से अलग कर जाएगी,
किसी दिल मे दर्द तो किसी मे प्यार भर जाएगी...!!

[Image: FB-IMG-1575337546626.jpg]
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#68
अब आगे:

सरिता जब राजू के कमरे से बाहर आई तो वहां रिशा को बैठा देख चौंक गई।


अंजान बनते हुए वो रिशा से पूछने लगी.. "अरे बहू तू कब आई"

रिशा. “तभी जब आप राजू से अपना बुर चटवा के उसको काड़ा पिला रही थी"


सरिता एक दम से भोचक्की रह गई और इसके मुंह से कुछ बोलते नहीं बना। फिर थोड़ी हिम्मत कर वो बोली.."क्या करु बहू. जवान खून है. मुझे अपने कमरे में अकेली देख खुद को रोक नहीं पाया और पटक दिया अपने बिस्तर पर"



रिशा.."आप भी तो पूरा साथ दे रही थी"

सरिता.."तो क्या करती। उसकी जवानी और जोश देख मैं भी खुद को रोक नहीं पाई और चुदवा बैठी"



इतना बोल सरिता अपने कमरे की और चलने लगी लेकिन गांड चुदाई और अधिक दर्द के कारण उसके कदम लड़खड़ा रहे थे। रिशा ने झट से सरिता को कमर से पकड़ा और उसको कमरे की तरफ ले जाने लगी।


रिशा.."लगता है राजू ने बुरी तरह चोदा है आज"

सरिता..” हां कमीने ने आज मेरी कुंवारी गांड मार ली. असहनिय पीड़ा हो रही है.

रिशा..चलिए मैं आपको आपके कमरे तक छोड़ दूं और थोड़े गरम पानी से सिकाई कर दूं

सरिता.."हां बहू ये ठीक रहेगा। कुत्ते ने बहुत बुरी तरह से चोद कर गांड फाड़ दी है मेरी

रिशा ने सरिता को उसके जमरे में ले जा बिस्तर पर लिटाया और गरम पानी की बोतल लेने किचन में चली गई. रिशा जब वापस आई तो देखा सरिता साड़ी उतार कर सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउज में बिस्तर पर लेटी हुई थी.
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#69
[Image: FB-IMG-1556342107300.jpg]
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#70
रिशा गरम पानी से सरिता के बदन की सिकाई करने लगी! कुछ समय के बाद रिशा सरिता के बदन को हल्के हाथों से सहला और दबा रही थी। चालीस की उम्र में भी सरिता ने अपना ख्याल रखा था !

[Image: FB-IMG-1604828673765.jpg]

चमकती त्वचा, सुराही सी गर्दन, कठौर वक्ष और उभरी हुई गांड। राजू तो क्या, कोई भी मर्द उसे भोगने को लालायित हो जाएगा ! फिर रिशा को ना जाने क्या सूझा.. रिशा ने धीरे से सरिता की गर्दन को चाट लिया; पहले एक बार, फिर दूसरी बार, फिर तीसरी ... और बाद में तो उसे जहाँ खुली जगह मिली वहां वो जीभ फिराती रही। जाने अंजाने अब फोरप्ले की शुरुआत हो गई थी.:बस ये देखना था की ये फोरप्ले कितना कामुक हो सकता है। फिर रिशा ने धीरे से सरिता के एक गाल चूम लिया और दूसरे पर अपनी उँगलियाँ घुमाने लगी जैसे वो कुछ लिखने की कोशिश कर रही हो। रिशा सरिता के गाल चूमती जा रही थी और सरिता आँखें खोलकर सब देख रही थी। सरिता की आँखें खुली थी और उसके होंठ बुरी तरह काँप रहे थे। रिशा ने एक बार सरिता के होंठ पर अपनी उंगलियाँ फेरी तो उसकी उंगली पर सरिता के होंठों के लाली के कुछ अंश आ गये; जिसे रिशा ने बड़ी अदा से अपने मुंह डाल लिया और चूसने लगी. फिर अपनी लार से गीली उंगली सरिता के मुंह में घुसेड़ दी जिसे सरिता ने एक बार अपनी जीभ से छू लिया। जैसे ही रिशा ने अपने होंठ सरिता के होंठ पर रखे वैसे ही सरिता आँखें बंद हो गई और उसकी सांसें रुक गई। बड़ी हिम्मत करके रिशा ने उसके होंठ चूमने शुरू किये। राजू के वीर्य का स्वाद सरिता के होठों से रिशा के मुँह में घुलने लगा!

[Image: 20250106-075734.jpg]

रिशा ने सरिता को हाथों को उठा कर अपने उरोजों पर रखवा लिए और अपने हाथों पर दबाव बनाते हुए उसके हाथ से चुचे दबवाने लगी। सरिता भी आखिर कब तक शांत रहती ... उसने रिशा का साथ देना शुरू किया। पहले सरिता ने रिशा के होंठ को एक बार चूमा फिर धीरे से अपने मुंह को खोलकर अपने मुंह में रिशा की जीभ को प्रवेश की अनुमति दे दी। दोनों एक दूसरे को चूमने में व्यस्त थी. कभी सरिता रिशा का ऊपर वाला होंठ पकड़ लेती तो रिशा उसका निचला होंठ अपने दांतों से दबा देती। रिशा ने सरिता के गालों को चूमा और फिर क्लीवेज को चाटते हुए नाभि की तरफ बढ़ने लगी। सरिता के पूरे तन बदन पर राजू की चुदाई के निशान थे !

जैसे ही रिशा ने सरिता की नाभि को चूमा, सरिता ने रिशा के सर को अपनी नाभि में घुसा लिया और खुद अपनी कमर घुमाती हुई नाभि चटवाने का मजा लेने लगी। रिशा उसकी नाभि चाट रही थी .
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#71
रिशा...दीदी अगर आप कहें तो ये पेटीकोट निकाल के अच्छे से सिकाई कर दूँ!

सरिता.."हां निकल दे बहू..अब तेरे से कैसी शर्म। हम दोनों तो पहले भी इक दूजे को नंगी देख चुकी हैं!

रिशा ने हाथ बढ़ा कर पेटीकोट का नाडा खोला और पेटीकोट जांघों से निकाल दिया। सरिता नीचे से पूरी नंगी थी। अपनी पेंटी शायद वो राजू के कमरे में ही भूल आई थी! राजू का वीर्य उसकी गांड और चूत से निकल जांघों तक बह रहा था

रिशा ने देखा सरिता की चूत पहले से अधिक खुली लग रही थी। राजू के लंड ने सरिता की चूत का मुँह खोल दिया था और चूत पहले से अधिक फुली हुई लग रही थी। रिशा एक हाथ आगे कर चूत को ऊपर से सहलाने लगी. अपनी एक उंगली उसकी चूत की लकीर में फिराने लगी। रिशा जितना उंगली सहलाती उतना ही सरिता के मुंह से आअह्ह ... आअह्ह ... अह्ह की सिसकारी निकलती। चूत सहलाते सहलाते रिशा ने एक उंगली सरिता की चूत के अंदर घुसेड़ दी। राजू के लंड का माल अभी भी सरिता की चूत में भरा हुआ था. रिशा ने अपनी उंगली में राजू का माल लपेटा और घप्प से वही उंगली अपने मुंह में घुसा कर राजू की मलाई चाटने लगी! राजू की गाढ़ी मलाई और अपनी सास के चूत के रस के मिश्रण का स्वाद उसे काफी अच्छा लगा!

सरिता उसे ऐसा करते देख मुस्कुराने लगी और बोली कि कितनी बड़ी छिनार है तू रिशा.

रिशा.." अरे वाह खुद तो लंड मूंह में लाकर आइसक्रीम के जैसे चूस रही थी और मैंने जरा सा उंगली से स्वाद ले लिया तो मैं छिनार? इतना बोल दोनों खिलखिला कर हंसने लगी!

सरिता.."तो उंगली से काहे चाट रही है सीधे मुंह लगा कर चूत पर सारी मलाई चाट ले!




रिशा ने भी एक शैतानी मुस्कान चेहरे पर लाते हुए सरिता की जांघों को अपने हाथ से चौड़ा किया और अपना मुंह उसकी जांघों के बीच घुसा दिया। पहले तो वो हल्के हल्के से चूत के आस पास किस करती रही और फिर अपनी जीभ निकाल कर उसकी गिल्ली चूत के अंदर घुसा दी। ताजी चुदाई की महक और वीर्य की तीखी गंध उसके दिमाग में हलचल मचाने लगी.

थोड़ी देर में सरिता की चूत पनिया गई और चूतरस उसकी चूत से टपकने लगा। रिशा ने अपनी जीभ उसकी चूत के दाने पर रख दी। दाने पर जीभ पड़ते ही सरिता ने रिशा के सर को पूरी ताकत से अपनी चूत के ऊपर दबा लिया. रिशा भी अपनी जीभ से चूत के हर कोने को चाटने में लगी हुई थी। सरिता की चूत चाटते हुए रिशा उसके चूतड़ों से भी खेल रही थी दोनों को अब अब इस में मजा आने लगा था। थोड़ी देर बाद दोनों अपनी जगह बदलने की सोची. सरिता ने रिशा का हाथ पकड़ा और उसे अपने ऊपर से धक्का दे बिस्तर पर लिटा दिया. धक्का लगते ही रूपाली बेड पर धम्म से पसर गई। सरिता घुटनों के बल चलते हुए उसके बदन पर हावी होने लगी। पहले उसने अपनी बहू रिशा के होंठ को चूम लिया। फिर रिशा के दोनों हाथ ऊपर किए और पसीने से भीगी उसकी बगलों को नाक लगा कर सूंघने लगी. अपनी जीभ से उसकी एक बगल को चाटने लगी। जितना वो रिशा की बगलें चाटती, रिशा उतनी ही जोर से खिलखिला कर हंस रही थी। फिर वह रिशा की चूचियों को दोनों हाथों में लेकर तोलने लगी जैसे वो ये देखना चाह रही थी कि उसकी और रिशा की चूचियों में से किसकी ज्यादा उन्नत हैं। जब सरिता पूरी तरह से आश्वस्त हो गई कि उसकी चूचियां रिशा से ज्यादा बड़ी ज्यादा ठोस और ज्यादा सुडौल हैं तो इस बात पर सरिता मुस्कुरा दी। फिर सरिता आगे झुकी और उसने रिशा की एक चूची को मुंह में भर लिया और चूसने लगी। वो रिशा के निप्पल ऐसे चूस रही थी जैसे छोटा बच्चा भूख लगने पर अपनी माँ के स्तन चूसता है। रिशा ने सरिता के मुंह से अपनी एक चूची निकाली और दूसरी वाली उसको दे दी चूसने को! सरिता चूचियां चूसने में मग्न थी और रिशा उसकी पीठ पर हाथ फेर रही थी।




कुछ देर बाद दोनों सास और बहू 69 की पोज़िशन मैं आ गयी। रिशा की आवाज़ काफ़ी तेज़ हो गयी थी। इतने में रिशा ने अपने पैरों से सरिता का सर जकड़ लिया और उसका मुँह अपनी चूत पर दबाने लगी.

रिशा- दीदी, प्लीज़ कुछ करो! और चाटो! और अंदर डालो आआहह!

सरिता...”अब जीभ से तो इतना ही हो पाएगा बहू। अब तेरे लिए लंड कहाँ से लाऊ जो तुझे चोद कर ठंडा कर दे”.

अचानक रिशा के दिमाग में एक विचार आया।

रिशा झट से अपने कमरे में गई और वापस आई तो उसके हाथ में एक छोटा पर्स था ! रिशा ने पर्स खोला और उसमें से एक डिल्डो और हथकड़ी निकाली जो वो अक्सर यूज किया करती थी।
सरिता ये देख के बोली- साली छीनाल, तू भी मुझसे बड़ी रण्डी है। ये क्या क्या जमा कर रखा है?

“क्या करूं सासू माँ…आपका बेटा तो शादी करके परदेस चला गया , मुझ जैसी जवान और अकेली औरत को जरूरत पड़ती है इन सबकी कभी कभी”’ “40 की उमर में आप कहर बरपा रही हो, तो मैं तो ठीक से 25 की भी नहीं हूं।” रिशा ने जवाब दिया।
सरिता ने कहा- “बात तो सही है तेरी, तेरा मर्द शहर से दूर है और मेरा मर्द घर में रह कर भी मेरे किसी काम का नहीं. ऐसे में शरीर की भूख या तो कोई गैर मर्द ही बुझा सकता है ये फिर तेरा ये खिलोना”

रिशा..”नहीं सासु माँ जो मजा असली लंड में है वो इस रबर के लंड में कहाँ। हां जब उंगली करने का मन ना हो और कोई मर्द पास ना हो तो ये खिलोना कुछ समय के लिए शांति जरूर दे देता है”

रिशा ने हथकड़ी से सरिता के हाथ बांध दिए और डिल्डो को बेल्ट के जरिए अपने कमर पर फिट किया।
रिशा ने सरिता को कहा- आज मैं आपको यह डिल्डो से चोदुगी. देखती हूं कितनी आग है आप के अंदर जो राजू के लंड का अकेला अकेला मजा ले रही है! बातो बातो में रिशा ने सरिता को अपनी पीड़ा बयां कर दी!!

“हां रिशा मेरी जान, जो जी चाहे कर आज। मैं कुछ नहीं बोलूंगी।


रिशा ने डिल्डो बांध कर सरिता को उठाया और उसे चूसने को कहा।

सरिता ने भी उसे किसी असली लन्ड की तरह थूक लगा कर चूसा।

रिशा ने सरिता को कहा- चलो दीदी अब कुतिया बन जाओ!

सरिता जल्द से पलटी और कुतिया बन गई. सरिता की गांड का हाल देख रिशा की हंसी छूट गई। गांड सूज के बंदर की पिछवाड़े जैसी लाल हुई पड़ी थी और गांड का छेद होज़ पाइप की तरह खुला था. देखने से ही पता चल रहा था कि राजू ने बुरी तरह मारी है गांड.


रिशा ने सरिता की चूत पर डिल्डो घिस दिया।
सरिता को लगा कि रिशा चूत में डालने वाली है

मगर अगले ही पल रिशा ने इरादा बदला और एक झटके में डिल्डो सरिता की गांड में पेल दिया।

सरिता इस अचानक हमले से दर्द के मारे बिलबिला उठी- रिशा साली इतनी बेरहमी से पेलता है कोई? बता तो देती!

रिशा ने डिल्डो को अंदर बाहर करना शुरू किया।
सरिता सिसकारियां भरने लगी।

“अह्ह्ह … उह्ह …आराम से रिशा. पहली बार आज गांड में लंड लिया था और अब ये खिलोना.


रिशा 8 इंच लम्बा डिल्डो सरिता की गांड में डालकर बेरहमी से उसे चोद रही थी। लगभग 10 मिनट तक चोदने बाद रिशा ने डिल्डो बाहर निकाला और अब सरिता को डिल्डो बांध कर उसे चोदने को बोला.

सरिता ने डिल्डो बांध रिशा को बिस्तर पर लिटाया और उसकी पीठ के नीचे एक तकिया लगाया.
अब रिशा की चूत फूल कर सरिता के सामने थी।

सरिता ने जल्द से रिशा के ऊपर सवार होकर डिल्डो उसकी चूत के मुंह पर रखा और जोरदार धक्का लगाया।
चूत का हलका गीलापन होने की वजह से पहले धक्के में ही 4 इंच डिल्डो रिशा की चूत की गहराई तक पहुंच गया।

रिशा मादक आहें भर रही थी। सरिता ने एक बार फिर से डिल्डो बाहर निकाला और इस बार पूरी ताकत से अंदर पेल दिया। 8 इंच का रबर का लंड पूरा जड़ तक रिशा की चूत में घुस चुका था। रिशा की हल्की से चीख निकल गई...ओह सासू मां ये आपका भोसड़ा नहीं मेरी कमसिन चूत है..जरा आराम से.

सरिता ने अब रिशा की चुचियों को मुँह में ले कर चूसना चालू कर दिया और नीचे से धक्के दे रिशा की चूत चोदने लगी. कुछ देर की धमाकेदार चूदाई के बाद रिशा की चूत ने एक बार फिर पानी छोड़ा। रिशा निढाल और संतुष्ट हो गई थी।

दोनों सास और बहू पसीने से लथपथ हुई थी। सरिता रिशा के ऊपर ही लेटी हुई उसे किस करने लगी। रिशा एकदम निश्चिन्त सी थी, उनके चेहरे पर चरम सुख का भाव था। उसने भी सरिता को बेतहाशा चूम लिया।

सरिता फिर धीरे से रिशा के कान में बोली...परसो मैं लाला जी के साथ 2 दिन के लिए अपने मायके जाने का सोच रही हूं। राजू यहीं रहेगा..तेरे पास और ऐसा बोल उसके चेहरे पर एक रहस्यमयी सी मुस्कान थी। रिशा ने एक बार फिर से सरिता को चूम लिया और गले लग कर बोली...धन्यवाद दीदी
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#72
शौक़ के शहर-ए-तमन्ना के, ठिकाने गुज़रे,,,
रात फिर ज़ेहन से, कुछ ख़्वाब पुराने गुज़रे,,
चाँद जब झील में उतरा, तो मनाज़िर की तरह,,,
मुझ को छूकर, तिरे बाज़ू तिरे शाने गुज़रे,,
जाने किस शख़्स के बारे में, परेशान हो तुम,,
अब हमें, ख़ुद को भुलाते भी ज़माने गुज़रे,,
हम तो हर मोड़ बिछा आए थे, दामन अपना,,,
जाने किस राह, बहारों के ख़ज़ाने गुज़रे,,,
बुझने लगता है, किसी शम्अ' के मानिंद वजूद,,,
जब तिरी याद, हवाओं के बहाने गुज़रे,,,

[Image: FB-IMG-1579873645074.jpg]
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#73
अब आगे….
दो दिन बाद सरिता सुबह ही लाला जी के साथ गाड़ी में अपने मायके के लिए निकल गई। जाने से पहले वो राजू को बोल दी'' अरे राजू अपनी भाभी का ख्याल रखना ..जो मांगे दे देना और ज्यादा तंग नहीं करना। फिर मेरी तरफ मुंह करके मुझे भी बोल दी..बहू..दो तीन दिन मैं आ जाऊंगा। राजू यहीं रहेगा तुम्हारे पास। बस तुम समय-समय पर देती रहना...


रिशा...क्या दीदी?

सरिता..अरे खाना पीना और क्या..इतना बोल अपनी आंख दबा दी।

रिशा भी मुंह नीचे कर शरमाने लगी

सरिता के जाने के बाद रिशा ने नहाया और जानबूझकर अंदर कुछ नहीं पहना। उसने सिर्फ एक पतली, पारदर्शी नाइटी पहनी, जो बदन के उतार चढाव को और दिखाये और उभारे। उसकी चूचियाँ नाइटी में साफ दिख रही थीं, और निप्पल्स उभरे हुए थे। उसने ऊँची हील की चप्पलें पहनीं और राजू के कमरे में चली गई। उसका दिल जोर-जोर से धड़क रहा था और वो बार-बार उसके लंड के बारे में सोच रही थी।


रिशा जब कमरे में पहुँची तो राजू गहरी नींद में था। उसकी लुंगी आज बेड के नीचे फर्श पर पड़ी थी, और उसका 8 इंच का लंड खड़ा था। रिशा ने उसकी लुंगी उठाकर ड्रेसिंग टेबल पर रख दी। फिर वो बेड पर उसके बगल में बैठ गई और उसके लंड को देखने लगी। उसका लंड इतना मोटा और सख्त था कि रिशा कि चूत में गुदगुदी होने लगी। उसकी साँसें तेज हो गईं, और चूत गीली होने लगी। उसने खुद को रोका, लेकिन उस से रहा नहीं गया। रिशा ने धीरे से उसका लंड पकड़ लिया। “आह…” रिशा के मुँह से हल्की सी सिसकारी निकली। राजू का लंड गर्म और सख्त था, जैसे कोई लोहे की रॉड। रिशा ने उसे धीरे-धीरे सहलाना शुरू किया।


अपने लंड पर मेरे हाथ का एहसास होता ही राजू हड्बड़ा के उठ गया। मुझे अपने पास यूं बैठ देख और उसके लंड को सहलाते देख राजू ने झट से पास पड़ा तकिया अपने लंड के ऊपर रख लिया और बोला.."आप ये क्या कर रही हैं भाभी। किसी ने देख लिया तो मुसीबत हो जाएगी"।

रिशा.."अभी कोई नहीं है यहाँ। हम दोनों अकेले ही हैं . तेरे और मेरे सिवा कौन है जो हमको देख सके. और वैसे भी मैं तो सिर्फ तुझसे ये पूछने आयी थी कि नाश्ते में क्या खायेगा। देखा तो तू तो सोया था पर तेरा लंड जगा हुआ था..खुद को इसको पकड़ के देखने से रोक नहीं पाई। वैसे भी तेरे पास तो मेरे लिए वक्त नहीं है..घूसा रहता है अपनी बड़ी मालिकिन की चूत में। एक ताना सा मरते हुए रिशा बोली”

राजू.." नहीं ऐसी कोई बात नहीं है भाभी। वो तो मालिकिन ने सिक्युरिटी को बताने की धमकी दी थी तो मैं डर गया था। वरना जो बात आप में है वो बड़ी मालिकिन में कहां..ऐसा बोल राजू ने रिशा को अपने पास खींचकर अपनी बाहों में भर लिया”

रिशा..."बस रहने दे ज्यादा मक्खन लगाने की जरूरत नहीं है..मैं सिर्फ जगाने और नाश्ते का पूछने आई थी"

राजू...”झूठ मत बोलो भाभी. एक पतली से नाइटी में और नीचे पूरी नंगी..सच बोलो जगाने आई थी या मरवाने आई थी'' बड़ी बेबकी से ऐसा बोल राजू ने नाइटी के ऊपर से ही रिशा की चूची दबा ली और रिशा के होठों पर रख उन्हें चुसने लगा!



रिशा..."हाय कितना बेशरम है तू राजू ..अपनी बड़ी भाभी से कोई ऐसी बात करता है क्या?

राजू...”सच कहूँ भाभी...आप को देख ना जाने मुझे क्या हो जाता है। दिल के अरमान जगने लगते हैं”.

रिशा..”अरमान के साथ-साथ तेरा सामान भी जगा हुआ है..राजू के लंड की तरफ इशारा कर के रिशा बोली”

राजू..”वो भाभी जवान मर्द का औज़ार तो सुबह सुबह खड़ा ही होता है”

रिशा..”हाय कुर्बान जाउ तेरी जवानी और तेरे औज़ार पे। कब करवाएगा अपनी औज़ार से जन्नत की सैर”

राजू...”ये तो तैयार है भाभी..आओ जाओ और बैठ जाओ इस पर...अपने लंड को मसलता हुआ” राजू बोला

रिशा..”ये सच है राजू कि मैं तुझसे चुदना चाहती हूँ पर ऐसे जल्दी मैं नहीं..मैं इत्मिनान से तेरे से चुदवाना चाहती हूँ”राजू के लंड को मुट्ठी में दबा रिशा बोली



राजू..”अब जो इसको खड़ा किया है..इसका क्या करू। ये पानी फेंके बिना अब ठंडा नहीं होगा"

रिशा..”अगर तू कहे तो मैं हाथ से हिला कर ठंडा कर देती हूं"

राजू...मैं तो कहता हूं भाभी चुदवा लो...आपकी चूत भी सुलग रही है और मेरा लंड भी तड़प रहा है..दोनो का मिलन करवा दो”

रिशा..मेरी मजबूरी को समझ राजू। कामवाली बाई कभी भी आती होगी. मैं नहीं चाहती कि हमारे प्रेम मिलन में कोई बाधा आए... इसिलिये रात को इत्मिनान से चुदाई करना मेरे कमरे में आकर…इतना बोल रिशा राजू का लंड पकड़ मुठियाने लगी।



रिशा ने उसके लंड को तेजी से सहलाना शुरू किया। उसका सुपाड़ा गुलाबी और चमकदार था। रिशा ने अपनी उंगली उसके सुपाड़े पर फिराई, तो राजू सिसकार उठा, “उह… भाभी, क्या मज़ा दे रही हो ..और तेज सहलाओ, भाभी,” !”

राजू ने रिशा की नाइटी खींचकर उतार दी। रिशा अब पूरी तरह नंगी थी। उसकी चूचियाँ हल्के से हिल रही थीं, और निप्पल्स सख्त हो चुके थे। रिशा ने शरम से आँखें बंद कर लीं। राजू निप्पल्स को अपनी उंगलियों से मसलना लगा। “आह… ओह…” रिशा जोश में सिसकार रही थी। उसकी चूत अब पूरी तरह गीली थी। राजू ने रिशा का चेहरा अपने लंड की ओर किया और बोला, “देखो, भाभी, ये तुम्हारे लिए तैयार है।”

रिशा ने आँखें खोलीं। राजू का लंड अब और बड़ा और सख्त लग रहा था। “इसे मुँह में लो,” राजू ने कहा और रिशा का सिर अपने लंड की ओर खींच लिया। उसका सुपाड़ा रिशा के होंठों से टकराया। “चूसो, भाभी,” उसने कहा। रिशा ने उसके सुपाड़े को अपने मुँह में लिया और धीरे-धीरे चूसना शुरू किया। “आह… भाभी… उह…” राजू सिसकार रहा था। रिशा उसका लंड गहराई तक चुस रही थी,
और उसकी जीभ उसके सुपाड़े पर गोल-गोल घूम रही थी। राजू ने एक हाथ से सिर को सहलाया और दूसरे से उसकी चूचियों को मसला। “आह राजू… …धीरे कर…” रिशा दर्द और जोश में बुदबुदाई।



राजू... मेरा बस होने वाला है भाभी.. रुकना मत भाभी...पूरा अंदर तक लेकर चूसो.

रिशा ने मुस्कुराकर राजू की तरफ देखा और फिर उसका लंड घप से मुँह में लेकर चूसने लगी।




रिशा भी अब पूरे लंड को मुंह में लेकर लॉलीपॉप की तरह कभी चूस रही थी और कभी हाथ से हिला रही थी! बीच बीच में वो राजू के टट्टे भी दबा देती तो राजू दर्द के मारे कराह उठता.

राजू..आह भाभी क्या लंड चूसती हो। बस ऐसे ही चुस्ती रहो और कुछ देर”.

रिशा के मुँह की गरमी राजू सह नहीं पाया और अगले 5 मिनट में ही राजू के लंड ने वीर्य की बौछार कर दी.कुछ वीर्य तो रिशा के गले के नीचे उतर गया और कुछ चेहरे पे गिर गया




पने चेहरे पर गिरा वीर्य रिशा ने उंगलियों से साफ किया और फ़िर अपनी उंगलियों पर लगा राजू का गाड़ा वीर्य रिशा राजू की आंखों में देखती हुई चाटने लगी।



रिशा....हे भगवान...कितना वीर्य भरा है तेरे टट्टो में. तेरे भैया का तो इसका एक चौथाई भी नहीं बनता और वो भी पतला पानी जैसा.. तेरा तो इतना ज्यादा और गाढ़ा माल है. रात में आते हुए मेडिकल शॉप से कंडोम का पैकेट लेते आना...कहीं बच्चा ही ना ठहर जाये तुझसे चुदवा के….चल राजू तू अब दुकान पे जा और मैं भी घर का सारा काम निपट लूं. कामवाली भाई भी आती होगी.

राजू..भाभी आज कामवाली की छुट्टी कर दो ना। मेरा मन नहीं भरा अभी.

रिशा..मन तो मेरा भी नहीं भरा राजू पर किसी को शक नहीं होना चाहिए। रात को जितना चाहे चोद लेना..कुछ नहीं कहूंगी इतना बोल रिशा कमरे से बाहर निकल गई।

वो भी जानती थी कि अगर कुछ देर और रुकी तो वो भी खुद को काबू में नहीं रखेगी। कमरे में पहुंच उसने अपनी नाइटी निकाल फेंकी। चुत बुरी तरह से गीली थी.



रिशा वहीं फ़र्श पे नंगी बैठ चुत में उंगली करने लगी. दस मिनट तक राजू के लंड में बारे में सोचती हुई रिशा चूत में उंगली करती रही।



चूत का पानी निकल जाने पर रिशा कुछ ठंडी हुई.. इतने में जब कामवाली की आवाज़ आई तो रिशा को होश आया। उसने जल्दी से साड़ी पहन ली और किचन में पहुंच गई।
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#74
मुझे लग गया है तेरे इश्क का रोग,

अब फिक्र नहीं कि क्या कहेंगे लोग !!

[Image: FB-IMG-1580300877214.jpg]
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#75
अब आगे….
किचन में पहुंच कर रिशा घर के काम में व्यस्त हो गई। उधर राजू भी लाला जी बताए कामो को निपटाने निकल पड़ा। रह रह कर रिशा का ध्यान सुबह राजू के संग बिताये उन पलो की तरफ जा रहा था। काम वाली बाई ने एक दो बार रिशा से पूछा भी कि दीदी क्या आपकी तबीयत ठीक है...आप कुछ खोई खोई सी लग रही हो। रिशा बस मुस्कुरा के रह गई! रिशा का दिल धड़क रहा था कि कहीं बाई को कुछ शक न हो जाए! कुछ समय बाद बाई काम निपटा के निकल गई तो रिशा ने खाना बनाने की सोची। फ्रिज में सब्जी लेने गई तो हाथ में एक लंबा मोटा बैंगन आ गया।

[Image: IMG-6884.jpg]








बैंगन हाथ में पकड़ते ही रिशा को राजू के लंड का ध्यान आ गया... उफ्फ्फ राजू का भी इतना ही लंबा और मोटा औज़ार था.. और कड़क तो इस से कहीं ज़्यादा। और सुबह जब उसकी मुट्ठी मारी थी तो कितना ज्यादा माल निकला था ये सब सोचते हुए रिशा की चूत फिर से गीली हो गई। उसकी चूत में चींटियाँ रेगने लगी. सब्जी को वही छोड़ रिशा वापस अपने बेडरूम में आ धड़ाम से बेड पर गिर पड़ी ! राजू का मोटा और लम्बा मदमस्त लण्ड रिशा कि आँखो के आगे बार-बार घूम रहा था ! उसका खूबसूरत चेहरा, उसका बलिष्ठ शरीर उसको बैचेन कर रहा था। रिशा कि सांस तेज हो चली थी। पसीना छलक उठा था। रिशा बिस्तर पर बिना जल की मछली की तरह तड़पने लगी।
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#76
ना जाने कितनी राते उसने या तो अंगुली से या मोमबत्ती को अपनी चूत में घुसा कर अपनी छटपटाहट कम की थी। पर चूत की प्यास तो लण्ड ही बुझा सकता है। जब से उसका राजू से सामना हुआ था वो अब बस उसके लंड से चुदने के ख्वाब देख रही थी!

रिशा ने अपनी साड़ी और ब्रा निकाल फ़ेंकी नीचे से भी पेन्टी उतार दी। आलमारी से उसने अपना डिल्डो निकाला और झट से चूत में घुसा दिया.. साथ साथ अपनी चूंचियाँ दबाती जाती और आहें भरने लगती…. बाहर बरसात का महौल हो रहा था। कमरे में उमस भी काफ़ी थी। पसीना छलक आया था। पांच सात मिनट तक वो नकली लंड चूत में पेलने के बाद रिशा का पानी निकल गया तो रिशा को कुछ आराम मिला.

रिशा ने अपने कपडे पहने और बाथरूम में जाकर अपना चेहरा धोया। इतने में बाहर दरवाजे पर घंटी बजी। बाहर राजू खड़ा था, आँखों में शरारत लिये।


रिशा.."अरे राजू इतनी जल्दी कैसे आ गये?"

राजू.. "भाभी बाहर बारिश का मौसम बन रहा था और मेरे को ठंडी भी लग रही थी.. "तुम्हारे हाथ की चाय का स्वाद चखने आया हूँ," उसने फुसफुसाया।

रिशा का चेहरा गुलाबी हो गया। रसोई में चाय की तैयारी शुरू हुई। इलायची और अदरक की खुशबू हवा में फैली। उसने चाय पकड़ते हुए रिशा की उंगलियों को छुआ। "भाभी ये चाय का जादू है या तुम्हारा?" उसकी आवाज में गर्मी थी। रिशा ने चाय की चुस्की लेते वक्त उसकी नजरों से नजरें मिलाईं। वो पास आया, उसने अपना हाथ रिशा की कमर पर रखा।


"भाभी सब कुछ भूल जाओ, आज सिर्फ हम," राजू ने कहा। रिशा की साँसें रुक गईं, पर उसने विरोध नहीं किया। चाय भाप छोड़ रही थी, मगर उनके बीच का तनाव गर्म था।

राजू करीब आया और उसने रिशा के बालों में उंगली फेरी। "भाभी तुम चाय से भी ज्यादा नशीली हो," रिशा ने शरमाते हुए उसकी बाँहों में सिर छिपाया और उसकी आँखों में डूब गई। चाय ठंडी हो गई, पर उनके बीच की गर्मी बढ़ती रही। दोनों के होंठ आपस में मिल गए और दोनों एक दूजे के होठों को जी भर के चूसने लगे.


राजू ने वही रसोई में खड़े खड़े ही रिशा को नंगा करना शुरू कर दिया और उसे सिर से लेकर पैरों तक चूमने लगा। रिशा मदहोश होने लगी..


रिशा..यहाँ नहीं राजू...मुझे कमरे में ले चल.

राजू ने झटके से रिशा को अपनी मजबूत बाहों में उठा लिया और बेडरूम की ओर बढ़ गया


कमरे में आकर राजू ने रिशा को सोफे पर गिरा दिया और उसके चुचे मसलने लगा. गर्दन पर किस करने लगा.

रिशा भी मदमस्त होने लगीं और जोर जोर से सांसें लेने लगीं. रिशा के बड़े बड़े टाइट चुचे देख कर राजू पागल ही हो गया. सरिता के मुकाबले रिशा के दूध एकदम टाईट थे और जरा भी नहीं ढलके थे. रिशा भी बड़ी अदा से राजू को अपनी चूचियों को हिला कर मदहोश कर रही थीं.



राजू ने भी देर नहीं की और झट से अपने होंठ आगे बढ़ा दिए. रिशा ने भी अपने एक चुची को राजू के लिए आगे कर दिया.राजू ने एक निप्पल को अपने मुँह में भर लिया और खींचते हुए चूसने लगा. रिशा भी मस्त होने लगीं और मादक सिसकारियां लेने लगीं.

राजू ने उसकी आंखों में देखा तो रिशा ने राजू के सर को अपने हाथ से पकड़ा और अपना दूध पिलाने लगीं.



एक मिनट बाद रिशा बोलीं- एक से ही मजा ले लेगा क्या? राजू ने झट से दूसरे दूध के निप्पल को अपने मुँह में भर लिया.


अब रिशा अपने दोनों मम्मों को बारी बारी से चुसवाने लगीं और मादक आवाजें लेती हुई राजू को अपने मम्मों का रस पिलाने लगीं.


चुचियो का अच्छे से निचोडने और रसपान करने के बाद राजू खड़ा हुआ! राजू का कड़कता हुआ लण्ड सीधा खड़ा तन्ना रहा था। रिशा शरम के मारे सिमटी जा रही रही थी।उसका लण्ड रिशा के मुख के करीब था। राजू ने और पास कर लण्ड रिशा के मुँह के पास सटा दिया। रिशा ने ऊपर देखा…. बाहर बिजली कड़की….शायद बरसात तेज हो चुकी थी।

“भाभी….! ले लो लण्ड मुँह में ले लो….! चूस लो….! अपना मन भर लो…. !” उसने अपना लण्ड रिशा के चेहरे पर बेशर्मी से रगड़ दिया। उसकी लण्ड की टोपी में से दो बूंद चिकनाई की छलक उठी थी। रिशा बैचेन हो उठी। उसने उसके लण्ड की चमड़ी उपर की और लाल सुपाड़ा बाहर निकाल लिया। और अपने मुँह में रख लिया।


उसका टमाटर सा मोटा सुपाड़ा प्यार से घुमा घुमा कर चुसने लगी। मन की भड़ास निकालने लगी। इतना जवान लण्ड…. कड़क….बेहद तन्नाया हुआ…. राजू सिसकारियाँ भरने लगा।

अपने लंड को चुसवाने के बाद राजू ने रिशा को पकड़ कर खड़ा कर दिया. रिशा पूरी नंगी राजू के सामने खड़ी हो गईं.



राजू की नजरें रिशा की चुत पर ही टिकी थी.
रिशा ने अपने दोनों टांगें चिपका चुत को छिपा लिया!

राजू ने रिशा को धक्का दिया और पलंग पर लिटा दिया.
अगले ही पल राजू ने अपने सारे कपड़े उतार दिए और रिशा की तरफ वासना से देखने लगा.

राजू को नंगा देख कर रिशा पलंग पर पीछे को खिसक कर लेट गईं और अपनी टांगें फैला दीं.

राजू ने बिस्तर के नीचे से ही चुत पर अपनी जीभ लगा दी और चूत में जीभ डाल कर चाटने लगा.



रिशा की चुदास भरी सिसकारियां और तेज हो गईं.
राजू ने रिशा की दोनों टांगों को कुछ ज्यादा फैलाया और खुद बिस्तर के किनारे बैठ कर चुत पर झुक गया और चुत को तेज तेज चाटने लगा.

रिशा अपने दोनों फैलाए हुए पैरों को घुटनों से मोड़ कर राजू के सर को अपनी चुत पर दबाने लगीं.

राजू चुत के दाने को अपने होंठों से पकड़ कर खींचते हुए चुत चटाई का मजा लेने लगा.रिशा भी मादक आवाजों के साथ मजे लेने लगीं- उईई अह्ह उह्ह म्ह्ह …


कुछ देर बाद रिशा का पानी छूट गया.
राजू ने एक बूंद रस भी बर्बाद नहीं होने दिया और अपनी जीभ से चुत को अन्दर तक चाटने लगा.


रिशा उसके बाल पकड़ कर सिसकारियां लेती रहीं.

पूरा रस चाट लेने के बाद भी राजू चुत चाटता रहा.
रिशा उसको हटने को बोल रही थीं लेकिन राजू हटा ही नहीं और चाटने में लगा रहा.

इससे थोड़ी देर बाद रिशा फिर से गर्म हो गईं.

अब राजू ने रिशा की दोनों टांगें अपने दोनों कंधों पर रख चूत के होठों पर अपना लम्बा मोटा लंड रख दिया.


राजू चुत की फांकों में लंड का सुपारा घिसने लगा और चुत को लंड लेने के लिए ललचाने लगा.

रिशा की बेताबी बढ़ती जा रही थी और वो अपनी गांड ऊपर को उठा कर लंड चुत में लेने की कोशिश कर रही थीं.
राजू दबाव देते हुए लंड चुत में घुसेड़ने लगा.

अभी लंड का सुपाड़ा भर ही रिशा की चुत में घुसा था कि वह लंड की मोटाई से चीख पड़ीं. उसकी चुत चिरने सी लगी थी.

राजू ने अपने होंठ बढ़ाए और रिशा का मुँह बंद कर दिया.


नीचे राजू का सुपाड़ा चुत फाड़ने की तैयारी में गुर्रा रहा था.उसी पल राजू ने एक तेज शॉट मारा और अपना आधा

लंड चूत में डाल दिया. रिशा छटपटा उठीं और उसकी आंखों से आंसू आ गए.

राजू उसी पल रुक गया और उसके शांत होने का इन्तजार करने लगा. रिशा की कसमसाहट कम होने लगी थी.


लंड ने चुत को अपने मुताबिक पसार लिया था. राजू ने मौका देख फिर लंड को बाहर खींचा और इस बार एक तेज धक्के के साथ अपना पूरा लंड रिशा की चूत में घुसा दिया. रिशा की चीख पूरे कमरे में गूंज गई..ओह माँ मर गई। फाड़ डाली मेरी चूत इस कमीने ने। लेकिन राजू रुका नहीं। रिशा की चीखो कि परवाह किये बिना वो जोर जोर से लंड पेलता रहा ! कुछ समय बाद चूत ने पानी छोड़ कर चालू कर दिया जिस से चूत में चिकनाहट बढ़ गई और रिशा का दर्द कम हो गया l
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राजू ने लंड अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया और कुछ ही धक्कों में रिशा को भी मजा आने लगा. रिशा कामुक सिसकारियां लेने लगीं- अह्ह इहह्ह उम्म … राजू तुम्हारा बहुत बड़ा है … तुम्हारे भइया का तो बस इसका आधा ही है.




राजू का लंड रिशा की बच्चेदानी तक तक पहुंच रहा था. मोटे लम्बे लंड से रिशा को काफी मजा आ रहा था और वो मजे ले लेकर राजू के लंड से चुदती रहीं. करीब 25 से 30 मिनट तक राजू चोदता रहा और वह भी चिल्ला चिल्ला कर चुदाई के मजे लेती रहीं.

रिशा …”बड़ा मजा आ रहा है राजा अह्ह्ह … कितना अन्दर तक पेल रहे हो राजू… आह मजा आ रहा … और जोर से पेलो … आंह और पेलो … आज मेरी चूत फाड़ दो!

कुछ देर बाद जब रिशा झड़ गईं तो राजू ने रिशा की चुत से लंड निकाला और उसे कपड़े से पौंछ कर उसे पोज बदलने को कहा. रिशा ने राजू की आँखों में में देखा, तो राजू ने उसको कुतिया बन जाने का इशारा किया.

रिशा पलंग से नीचे उतर कर कुतिया बन गईं.

अब राजू ने रिशा के पीछे आ कर रिशा की चूत में लंड घुसा दिया रिशा को कुतिया बनाकर चोदना चालू कर दिया . उसकी दोनों चुचिया पकड़ कर हचक हचक कर चोदा और रिशा को मस्त कर दिया.


कुछ देर बाद रिशा फिर से झड़ने लगीं लेकिन राजू अभी तक झड़ा नहीं था और अभी भी रिशा को उतने ही जोश से ठोक रहा था. रिशा की टांगें कांपने लगीं तो उसने राजू को अपने ऊपर आने को कहा.

राजू ने झट से रिशा को अपने नीचे लिया और लंड पेल दिया. ताबड तोड़ धक्को के साथ में राजू रिशा की चूत की धुनाई करने लगा। ऐसा जोश और जनून रिशा को पहले कभी महसूस नहीं हुआ था। वो भी कमर उठा कर राजू का साथ देने लगी रिशा ने कस कर राजू को पकड़ा और अपनी चूत ऊपर को उठा दी.

दस मिनट की धमाकेदार चुदाई के बाद राजू के लिंग में तनाव बढ़ने लगा।

राजू..." मेरा होने वाला है भाभी। अंदर ही निकल दूं क्या?

रिशा..नहीं नहीं राजू...मेरे मुँह के अंदर। मैं तेरा स्वाद चखना चाहती हूँ

राजू ने झटके से लंड चुत से निकाला और रिशा के मुंह में दे दिया..एक के बाद एक...आठ दस पिचकारियां रिशा के मुंह के अंदर। कुछ वीर्य तो रिशा के हलक के नीचे उत्तर गया और कुछ मुंह से बहने लगा. रिशा ने राजू की आंखों में देखते हुए सारा माल उंगली से चाट लिया।


दोनों बहुत देर तक ऐसे ही लेटे रहे और थोड़ी देर बाद रिशा ने लंड अपने मुँह में लेकर फिर से खड़ा कर दिया.

इस बार वो राजू के लंड पर अपनी चूत रख कर राजू के ऊपर उछलने लगीं.


इस तरह चुदाई का एक राउंड और शुरू हो गया. दुनिया से बेखबर दोनों एक दूजे की प्यास मिटाने में खो गए थे।



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