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सरिता की आँखों में अब कोई हिचकिचाहट नहीं थी, बस भूख थी जो पूरी तरह राजू की मर्दानगी पर टिकी थीं। वो धीरे से बोली
तेरे अंदर जो ताक़त है, वो मैंने किसी और में कभी महसूस नहीं की। जितने जोश और बेरहमी से तू रिशा को पेल रहा था वही जोश और मर्दंगी मैं भी महसूस करना चाहती हूं
आज मैं इसे पूरी तरह अपना बनाकर ही चैन लूँगी।” इतना कहकर सरिता ने अपने नर्म होंठ राजू के होठों पर रख दिए और अपना हाथ नीचे राजू के अंडरवियर में घुसा उसका लंड पकड़ लिया। उसकी गर्म साँसें राजू को उत्तेजीत कर रही थी. वो राजू के लंड पर हाथ फेरते हुए फुसफुसाई —“तुम्हारा यह जोश… यही तो मुझे चाहिए था। आज रात मैं खुद को पूरी तरह तुम्हारे हवाले कर दूँगी।”
उसकी बातें सुनकर राजू का भी लहू खौल उठा।
वासना के वशीभूत होकर सरिता अपने हाथों से खुद अपने ही मम्मे मसलने लगी. फिर सरिता ने राजू का एक हाथ पकड़ कर अपनी चूची पर रख दिया और बोली...राजू इन्हें अपने हाथों से मसल के देख।
सरिता दो दो मर्दों से चुदी हुई थी. उसके मम्मे रिशा के मुकाबले मांसल थे.
राजू ने झट से सरिता के नरम गोल चूचो को अपने हाथों में दबा लिया और उन्हें बेदर्दी से मसलने लगा। इतने नरम मुलायम चूचे उसने आज तक नहीं देखे थे। धीरे से उसने अपने मुँह में नीचे लिया और सरिता की एक चुची को अपने मुँह में भर लिया और दूसरे हाथ से दूसरी चुची की घुंडी मसलने लगा. उफ्फ्फ..राजू बस ऐसे ही चूस। बड़ा तंग करती है ये कमिनी चुचिया मुझे। आज इनकी सारी अक्कड़ ख़तम कर दे. राजू को भी सरिता की गोलाईया चूसने में बड़ा मजा आ रहा था। कभी वो एक मम्मे को चूसता और कभी दूसरा.
धीरे-धीरे वो मम्मो को चूसता हुआ नीचे की तरफ जाने लगा। सरिता की कमर से होते हुए वो सरिता की नंगी चूत तक जा पाहुंचा.
राजू का एक हाथ पकड़ सरिता ने अपनी चूत के ऊपर रख दिया और बोली देख कैसी गीली हुई पड़ी है तेरी मालिकिन की चूत. एक बार अपनी जीभ से चाट कर इस निगोड़ी चूत का भी रस चख कर देख। देख कैसे पानी बह रही है तेरी मर्दानगी देख कर. सरिता आज खुल कर सेक्स का मजा लेना चाहती थी
राजू का डर भी अब ख़तम हो चूका था। वो समझ चुका था कि रिशा की तरह सरिता भी जवानी की आग में जल रही है और चुदने को बेकरार है . उसने भी और देर ना करते हुए सरिता की टांगों को खोल सरिता की टपकती हुई चूत को अपनी मुट्ठी में भर कर दबा लिया.
सरिता की चूत का मुंह रिशा की चूत से हल्का ज्यादा खुला था लेकिन सरिता की चूत रिशा से ज्यादा फूली हुई और मजेदार लग रही थी. ज्यादा देर ना करते हुए उसने अपने होठों को सरिता की तपती हुई चूत के ऊपर रख दिया... होठों का स्पर्श पाते ही सरिता तड़प उठी। तपती हुई चूत पर राजू की गरम सांसें जैसे आग में घी का काम कर रही थी. राजू की जीभ सरिता की चूत के कामरस से भीगी फाँको पे चलने लगी. कमरे का सन्नाटा अब सिर्फ़ सरिता की कराहों और उन दोनों की तेज चलती हुई साँसों से भर चुका था। सरिता मस्ती से करहाती हुई राजू का सर अपनी चूत पर दबाने लगी.....चाट राजू. चाट …आज इस चूत का सारा रस पी जा.
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मैं ,
क्या जानूँ दर्द की कीमत...?
मेरे ,
अपने मुझे मुफ्त में देते है !!
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अब आगे…
दस पंद्रह मिनट तक सरिता की चूत की अच्छे से चुसाई करने के बाद राजू उठ खड़ा हुआ. राजू ने अपना अंडरवियर उतारा और बिस्तर पर सरिता के पास जाकर बैठ गया. उसने सरिता का हाथ पकड़ के अपने लंड पर रख दिया. सरिता ने लंड को पकड़ा और देखने लगी! राजू का लंड इतने करीब से देख कर सरिता मुंह खुला का खुला ही रह गया. दस इंच लम्बा लंड देख कर सरिता डर ही गई. सरिता उसका लंड पकड़ बोली- “हे भगवान ये क्या है. ये किसी इंसान का लंड है या किसी गधे का. अब समझ में आया कि रिशा तेरे से चुद क्यों गयी! क्या जवान और शानदार लंड है तेरा. तू तो किसी अधेड़ उम्र की औरत की चूत की भी धज्जिया उड़ा देगा... रिशा तो बेचारी अभी नई ब्याही है।”
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राजू का लंड पकड़ कर उसे ऐसा लगा जैसे उसने कोई गरम लोहे की छड़ पकड़ ली हो पहली बार सरिता को मालूम पड़ा कि असली मर्द का लंड कैसा होता है. लाला का लंड तो किसी काम का था नहीं और उसके पहले पति का लंड भी कुछ खास नहीं था। हवस के मारे उसकी आंखें चमक उठी और उसने देर ना करते हुए लंड का टोपा चमड़ी से बाहर निकाला और फिर लंड के टोपे पर अपनी जीभ चला दी. सरिता ने लंड के टोपे पर पहले जीभ की नोक हल्की-हल्की सी घुमाई और उस के बाद जीभ से लंड के सुपारे को चाटने लगीं. फिर सरिता ने लंड को ऊपर से लेकर नीचे तक जीभ से चाटा और धीरे-धीरे अपने मुँह में लेने की कोशिश करने लगीं. लेकिन सरिता के मुँह में लंड ठीक से नहीं जा पा रहा था, तो जितना हो सका … उतना मुँह में लेकर चूसने लगीं. बीच-बीच में वे पूरे लंड को चाटतीं और गोटियों को भी मुँह भरकर चूसतीं-चाटतीं. जब भी सरिता मुँह में लंड लेतीं, राजू उसके बाल पकड़ कर उसके मुँह को चोदने लगता. राजू की तो मानो आज लॉटरी निकल गई हो। पहले मलकिन की जवान बहू और अब खुद जवान मलकिन उसका लंड चूस रही थी.
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लंड चूसते चूसते सरिता ने राजू से कहा- तू ऐसे देखता रहेगा भोसड़ी के, कुछ तू भी तो कर … मादरचोद मुझे चोदने आया है या मेरी आरती उतारने? अब शर्मा मत और मजे दे मुझे!. अब राजू की भी हिम्मत बढ़ गई.
उसने सरिता को लिटाया और उसकी चूत में दो उंगलियाँ घुसा दी और धीरे-धीरे उन्हें अंदर बाहर करने लगा सरिता तो तड़प उठी. ऐसा सुख उसे उसके दोनों पतियों ने किसी ने नहीं दिया था.
राजू ने अपना एक हाथ नीचे किया और सरिता के चूत के दाने को मसलने लगा. सरिता की चूत पहले से गीली हुई पड़ी थी. चूत का दाना मसलने से सरिता और ज़्यादा तड़प उठी .अब तो सरिता राजू का लंड अन्दर लेने के लिए मचल रही थी. उसका धैर्य अब जवाब देना लगा था वो अब चाहती थी राजू जल्दी उसकी तपती चूत में अपना लौड़ा घुसा कर उसकी गर्मी को शांत कर दे. राजू का हाथ पकड़ वो बोली।" बस राजू अब उंगली से और नहीं...मेरी चूत पानी छोड देगी। मैं तेरी उंगली से नहीं तेरे लंड से चुद कर झड़ना चाहती हूँ ! अब और मत तड़पा राजू और अपने लौड़े से मेरी चूत की धुनाई चालू कर दे और इसकी बरसों की प्यास बुझा दे .. और हां इतना लंबा और मोटा लौड़ा मैंने कभी नहीं लिया है अपनी चूत में...जरा आराम से घुसाना धीरे धीरे मेरी चूत में अपना ये हल्लाबी लंड और तेरा लंड लेते हुए शायद मैं चिल्ला दू..लेकिन तू रुकना मत और अगर लालाजी की आंखें खुल जाएं तो इधर बिस्तर के नीचे छिप जाना, बाकी मैं संभाल लूंगी.”
“हां मालकिन..बड़े आराम से घुसाऊंगा अपना लंड। आप चिंता मत करो “ इतना बोल राजू उठ कर सरिता की जांघों के बीच आ गया और अपना लौड़ा सरिता की चूत की फाँको पे रगड़ने लगा.
“मादरचोद अब इसे रगड़ता ही रहेगा या मेरी चूत की ठुकाई चालू करेगा। नीचे चूत में आग लगी पड़ी है। ऐसा लग रहा है जैसे सैकड़ों चींटियाँ काट रही हो... और तुझे मस्ती सूझ रही है”
सरिता ने राजू के लंड को अपने हाथ से अपनी फुद्दी के छेद में फ़िट किया और तभी राजू ने ठोकर मार दी. राजू के लंड का सुपाड़ा सरिता की चूत में बोतल में कॉर्क के जैसा फिट हो गया.. सरिता जैसी पहले से चुदी हुई औरत की भी इतना मोटा सुपाड़ा घुसते ही सरिता हल्की-सी कराह उठीं- आहह्ह! …. आराम से राजू...मैं कहीं भागी नहीं जा रही...पूरी रात है अपनी पास मस्ती के लिए.
राजू ने लंड का सुपाड़ा बाहर निकल के फिर से लंड चूत की गिली फ़ांको पे टिकाया और जोर का धक्का दे दिया. इस बार चूत को चीरते हुए लंड चार इंच अन्दर तक चला गया.
सरिता चीखती हुई बोलीं- साले मादरचोद … आराम से नहीं डाल सकता था क्या?
राजू ने हंस कर सरिता की चुची को सहलाया, उनको होंठों को चूसा और फिर से एक जोरदार धक्का मारा, जिससे राजू का लंड आधे से ज़्यादा घुस गया.लंड के घुसते ही सरिता की चीख निकल पड़ीं- ईईईई मर गई आह …उसकी चीख सुनकर राजू के अन्दर और जोश आ गया. उसने लंड को हल्का-सा बाहर खींचकर एक और जोरदार धक्का मारा, जिससे उसका पूरा लंड अबकी बार सरिता की चूत में समा गया.
सरिता की और जोरदार चीख निकल पड़ी- आआह आह … मर गई आह!!! उसकी आंखों से आंसू आ गए.
राजू ने अपने आपको रोका और सरिता के होंठों को चूमने लगा, साथ ही उसकी चूचियों को चूसने लगा.
इससे सरिता को दर्द में थोड़ा आराम मिल गया.
कुछ मिनट बाद ही सरिता ने अपनी गांड को ऊपर-नीचे हिलाकर राजू को चोदना का इशारा दे दिया. सरिता की गांड के हिलने की वजह से राजू समझ गया कि अब सरिता को चोदना शुरू करना चाहिए. राजू ने सरिता का इशारा पाकर जोर से झटके मारने चालू कर दिये
राजू पूरा लंड सरसराता हुआ सरिता की चूत में अन्दर तक ठोकर मार रहा था.
राजू ने सरिता की एक टांग को अपने कंधे पर रखा और दूसरी को बिस्तर पर ही रहने दिया, फिर धीरे-धीरे धक्के मारने लगा. सरिता को हल्का दर्द के साथ मज़ा भी आ रहा था. वो ‘आह … आह …’ जैसी आवाज़ें निकाल रही थीं.
फिर राजू ने सरिता की दोनों टांगों को अपने कंधों पर रखा और दोनों हाथों को क्रॉस में एक हाथ से पकड़ लिया और दूसरे हाथ से उसकी चूचियों को सहलाते हुए कभी तेज़-तेज़ तो कभी धीरे-धीरे सरिता की चूत में लंड पेलने लगा.
सरिता भी इस चुदाई का आनन्द लेने लगीं और ‘आहह आहह्ह्ह और तेज़ चोदो मेरी जान!’ जैसी आवाज़ें निकालने लगीं.
कुछ पल बाद राजू ने पोज़ीशन बदली और सरिता को बिना लंड निकाले अपने ऊपर ले लिया.
वो बोला....मल्किन अब आपकी बारी है। आप मेरे ऊपर आके मेरे लंड पर बैठ कर चुदाई करवाओ सरिता उसकी आँखों में शरारत से देखती हुई बोली...वाह राजू। मैं तो सोची थी कि चुदाई के खेल में तू अभी अनाड़ी होगा लेकिन तू तो एक दम शातिर खिलाड़ी है रे..कहां से सिखाया ये सब! सरिता ने राजू को हटाया और नीचे लिटाया.वह उसके लंड के ऊपर चढ़ गई, अपने हाथों से उसका लंड अपनी चूत के ऊपर सैट किया और अन्दर धकेला. सरिता को ऐसा अहसास हुआ मानो वह सातवें आसमान पर पहुंच गयी हो. वह संभल कर और कसके नीचे होकर बैठी तो लंड उसकी बच्चेदानी को छू गया. फिर सरिता ने राजू के दोनों हाथों को अपनी कमर से हटाकर अपनी चूचियों पर रख लिये और अपने हाथों को राजू के सीने पर रखकर उसके लंड पर कूदने लगीं. अब सरिता धीरे धीरे गांड उछालने लगी और राजू को भी गांड उछालने को उकसाती रही. अभी दोनों की चुदाई ने रफ़्तार नहीं पकड़ी थी. सरिता राजू से बोली- हरामी, ऊपर तो बड़ी जोर से पेलम पाल कर रहा था, यहां तेरी क्यों फटी पड़ी है?
राजू ने इस पर सरिता को कमर से पकड़ा और नीचे से एक जोर का धक्का मार कर लंड पेल दिया. आखिर सरिता ने उसकी मर्दानगी को छेड़ा था.
उसने जल्दी ही सरिता की आहें निकाल दीं. सरिता अपनी गांड ऊपर तक उठा कर लंड ले रही थी और राजू भी नीचे से झटके दे दे कर उसकी चूत का बाजा बजा रहा था.
सरिता भूल गयी कि बगल में लालाजी सो रहे हैं. वह राजू को और जोर से करने के लिए उकसा रही थी.
राजू ने स्पीड बढ़ा दी;
कुछ देर बाद राजू ने सरिता को बिस्तर पर घोड़ी बना दिया राजू !सरिता के चूतड़ों से खेलने लगा उसके पीठ को चूमते हुए कमर को चूमा फिर धीरे धीरे उसके चूतड को मसलता हुआ उनके साथ खेलने लगा. उसने फिर लंड पर थोड़ा थूक लगाया और उसकी गांड की गोलाइयों को पकड़ कर एक ही झटके में लंड उसकी चूत में डाल दिया. लंड धीरे धीरे गहराई में घुसता चला गया!
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23-01-2026, 05:48 PM
(This post was last modified: 23-01-2026, 05:52 PM by nitya.bansal3. Edited 1 time in total. Edited 1 time in total.)
है "गुजारिश " नहीं सम्भलता ये इश्क़
हमसे. ,,
अव तो टूटकर "बांहों "मे बिखर जाने
दो..!!
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23-01-2026, 05:51 PM
(This post was last modified: 23-01-2026, 05:51 PM by nitya.bansal3. Edited 1 time in total. Edited 1 time in total.)
बेवजह तो
नहीं है"दिल "को तेरा सुरूर ,,
धडकनें
कह रही है "इश्क़" है जरूर..!!
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मुझे करनी तुझसे बहुत सारी बाते
तू मिल मुझे मेरे सो जाने के बाद.!
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Lajawab.....aise hi likhiye....haule haule tadap ke sath....
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28-01-2026, 04:36 PM
(This post was last modified: 28-01-2026, 04:37 PM by nitya.bansal3. Edited 1 time in total. Edited 1 time in total.)
सरिता की गांड की गोलाई देखकर राजू से रहा नहीं गया और सरिता की गांड पर 8-10 तमाचे जड़ दिए ‘चट्ट चट्ट.’ सरिता ‘आह्ह्ह आहह …’ करने लगीं. सरिता का दो बार पानी निकल चुका था, जिससे उसकी चूत चिकनी हो गई थी और लंड आसानी से अन्दर-बाहर होने लगा.
राजू ने सरिता के लंबे बालों को एक हाथ से पकड़ा और दूसरा हाथ उसकी कमर पर रख जोर के झटके मार मार के लंड उसकी चूत में लंड पेलने लगा. सरिता भी अपनी चूत को आगे-पीछे करके राजू से चुदने लगीं और बोलने लगीं- हां मेरे राजा … आह ऐसे ही तेज़-तेज़ चोदो मुझे आज … मेरी चूत का भर्ता बना दो … साली बहुत तंग करती है मुझे … आहहह आआह ईई … स्स्स्स्स् … हां ऐसे ही चोदो मेरे राजा!’
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इधर राजू भकाभक लंड पेल रहा था उधर सरिता जोर जोर से उह आह करके चिल्ला रही थीं.
राजू सरिता से बोला- धीरे धीरे चिल्लाइए मालकिन सेठ जी उठ जाएंगे. वो बोली- जागने दो और सुनने दो … मैं तो कहती हूँ चलो मुझे उनके बिस्तर के सामने ले जाकर चोदो. जरा वो भी तो देखे कि एक जवान बीवी की चूत की आग को कैसे ठंडा किया जाता है. साले बुड्ढे के लन में दम तो है नहीं और मुझ से शादी कर के मेरी जिंदगी खराब कर दी.
आअह्ह जोर जोर से राजू आआहह उह … चोद चोद आअह … अगर तू लाला जी के बेटे जैसा न होता तो तुझसे शादी करके तुझे अपना पति बनाकर ज़िन्दगी भर के लिए तेरी रखैल बन जाती!”
राजू बोला- “कोई बात नहीं सेठानी जी...आप जब भी कहोगे मैं आपको चोद दूंगा। जब भी मौका मिलेगा आपको अपना लंड पे बिठा कर ऐसे ही चोदूंगा और आपकी प्यास बुझा दूंगा”
सरिता- आअह उफ्फ राजू… तूने अपनी सेठानी समझ के अब तक मुझे चोदा है ना … अब रांड समझ के चोद
लगभग 20 मिनट की इस ताबड़तोड़ चुदाई के बाद राजू का अब निकलने वाला था. उसने सरिता को सीधा लिटाया और चूत में एक ही झटके में लंड पेल दिया. सरिता स्स्स्स्स्सी ईईईई!’ करके रह गईं.
सरिता की साँसें अब बेकाबू थीं, चेहरा सुर्ख़ और आँखें बंद।वो राजू के सीने से चिपककर काँपते हुए बोली —
“मैं और नहीं रोक सकती…
राजू ने उसकी ठोड़ी उठाई, आँखों में देखा और कसकर अपनी बाँहों में जकड़ लिया और सरिता को दे दनादन चोदने लगा और उसकी चूत के दाने को रगड़ने लगा.
आख़िरकार, एक तेज़ सिसकारी के साथ सरिता झड़ गईं. और राजू की बाँहों में ढह गई —उसकी आँखों में तृप्ति, होंठों पर मुस्कान इस बात की गवाही थे कि राजू ने उसे आज वो सुख दिया था जिसकी चाह शायद वो काई बरसों से कर रही थी! उसके होंठ काँप रहे थे, और बदन पिघलता जा रहा था। वो चरमसुख प्राप्त कर चुकी थी. वो हाँफते हुए फुसफुसाई —
“राजू तू असली मर्द है… तूने ही आज मुझे स्त्री होने का सही सुख दिया है। चुदाई क्या होती है ये मुझे आज पता चला है। ऊपर तो कोई भी चढ़ सकता है लेकिन तूने अपना दमदार हथियार और चुदाई से मेरा तन और मन जीत लिया है
सरिता के झड़ने के बाद कुछ तेज धक्के लगाने के बाद राजू को भी एहसास हुआ की उसका भी माल निकलने वाला था.
उसने सरिता से कहा- मालकिन मेरा आने वाला है! कहाँ निकालू
सरिता बोली “मेरे मुँह में झड़ना … मुझे तेरे लंड के रस का स्वाद चखना है!”
राजू ने झट से अपना लंड सरिता की चूत से निकाला और सरिता के मुँह में दे दिया. सरिता ने जीभ राजू के लंड के टोपे पर घुमाई और थोड़ी देर में राजू के लंड ने सरिता के मुँह में उलटी शुरू कर दी.
ढेर सारा गाढ़ा वीर्य सरिता के मुँह में चला गया. सरिता ने वीर्य की एक-एक बूंद पी ली और चाट-चाट कर पूरे लंड को साफ कर दिया.
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सुबह सरिता और रिशा दोनों आमने सामने हुई तो मुस्कुरा उठी. रिशा अपनी सास को छेड़ती हुई बोली..'' क्या बात है दीदी..कल रात आपके कमरे से करहाने की आवाज आ रही थी जैसे कोई भयंकर पीड़ा में हो
सरिता भी चुटकी लेते हुए बोली...हां बहू...जो चिंटा कल रात ऊपर तेरे कमरे में तुझको काट रहा था वही शायद मेरे ऊपर भी चढ़ गया था सरिता की बात सुन रिशा और सरिता दोनों हंसने लगी
रिशा: दीदी कैसा लगा राजू का लंड? मजा तो खूब आया होगा और ज्यादा दर्द तो नहीं दिया।
सरिता: अरे पुछ मत रिशा. तू सही कह रही थी. लाजवाब लंड है कमीने का. अंदर तक चोट करता है और हद से ज्यादा मजा देता है। बदन का एक अंग ढीला कर दिया है। ऐसे दर्द के लिए ही तो हम औरतें तरसती हैं
सास बहू जुगाड़ मिलने से बहुत खुश थीं.
सरिता ने रिशा से कहा कि रिशा तू राजू को ऐसा दिखाना, जिससे उसे पता नहीं चल पाए कि मैंने उसे माफ़ कर दिया या नहीं … और तू जब भी राजू को चुदाई के लिए बुलाये तो मुझको पहले बता दे.
रिशा ने हां कह दी.
सरिता आगे बोली- इसी तरह जब मैं बुलाऊंगी, तो तुझको बता दूँगी. राजू को हमेशा एक दूसरे का डर बना रहना चाहिए. अब तुमसे क्या छुपा है .:बढ़ती उमर के साथ जिस्म की भूख भी बढ़ती जा रही है,आज उमर के इस पड़ाव में आ चुकी हूँ जहां धन दौलत,मान सम्मान बेहद छोटी चीजें लगने लगी है। अब बस एक ही चीज की चाहत है वो है"चरमसुख"
इस तरह से सास बहू दोनों को घर में एक ऐसा मजबूत लंड मिल गया था, जो उनके काबू में आया हुआ सांड था. दोनों उससे अपनी अपनी चूत की प्यास बुझवा लेतीं और मजे से रहतीं.
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28-01-2026, 04:47 PM
(This post was last modified: 28-01-2026, 04:48 PM by nitya.bansal3. Edited 1 time in total. Edited 1 time in total.)
रात की जलवा बता रहा था सरिता के चेहरे का नूर ,
राजू ने शायद चो* चो* के दिया था सुख भरपुर l
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https://xossipy.com/thread-70449-page-8.html
Pls click on link, PINKI ki randi banne ki kahani.
iamstubborn
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30-01-2026, 03:57 PM
(This post was last modified: 30-01-2026, 03:58 PM by nitya.bansal3. Edited 1 time in total. Edited 1 time in total.)
मत तरसा इतना किसी को..
अपनी मोहब्बत के लिए ..
क्या पता तेरी मोहब्बत पाने के
लिए जी रही हो कोई ..
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सुनो ना
❤️#इश्क मे #बढ रही है,
#बेचैनीया..!
थोड़ी,,,#शरारत ही कर दो ना..!❤️❤️
❤️#छुपा कर रख लो #मुझे अपने,,,
#दिल में,
या,,, फिर,#मोहब्बत ही कर लो ना..!!❤️❤️
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31-01-2026, 09:34 AM
(This post was last modified: 31-01-2026, 09:35 AM by nitya.bansal3. Edited 1 time in total. Edited 1 time in total.)
अब आगे..
इस तरह घर में जो चुदाई का खेल शुरू हुआ था वो अगले कुछ दिन यूं ही चलता रहा लेकिन खिलाड़ी सिर्फ दो ही थे...सरिता और राजू। रिशा चाह कर भी इस खेल में शामिल नहीं हो पा रही थी। एक तो सरिता ने पहला ही बोल दिया था कि हमारे इस राज़ का राजू को पता ना चले और दूसरा सरिता राजू को छोड़ ही नहीं रही थी. अब तो सरिता रोज रात को सोने से पहले लालाजी के दूध के गिलास में नींद की गोली मिला देती और जब लाला बिस्तर पर खर्राटे मार रहा होता है तो सरिता वही बिस्तर पर राजू से अपना चूत की आग ठंडी करवाती।
रिशा ने कई बार दरवाजे की ओट से उन दोनों को बिस्तर पर एक दूसरे से संभोग करते देखा था। वापीस कमरे में आ वो अपनी चूत को अपने हाथों से शांत करने की कोशिश करती थी लेकिन लंड की भूख उंगली से कहां शांत होने वाली थी.
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रिशा ने जाने अंजाने उसे वो दे दिया था जिसकी कल्पना सरिता ने कभी नहीं की थी !लाला की कमज़ोरी के कारण उसने एक दो बार बाहर मुँह मारने का सोचा भी था लेकिन डर के मारे वो ऐसा कुछ कर नहीं पाई। जो भी ऐशो आराम पैसा इज्जत उसे यहां मिल रही थी वो सब एक नए लंड के कारण खतरे में नहीं पड़ सकती थी और सरिता वो जोखिम कभी भी लेना नहीं चाहती थी. अब राजू का लंड मिल जाने के बाद उसे चुदाई का भरपुर सुख मिल रहा था . राजू जैसा जोशीला और जवान मर्द एक तगड़े लंड का मालिक था और अपने मालिकिन की जम कर चुदाई कर रहा था और सब से बड़ी बात यह है कि घर की बात घर में ही रह गई थी। किसी तरह का कोई खतरा नहीं !!
बस बेचारी रिशा अपनी बेवकूफी पर गुस्सा हो रही थी। क्यो उसने राजू का राज़ सरिता को बताया। अब तक रिशा सिर्फ एक बार ही राजू के लंड का स्वाद चख पाई थी..दूसरी रात तो सरिता राजू को छीन के ले गई थी और तब से अब तक सिर्फ सरिता ही राजू के लंड की स्वाद चख पाई थी. एक दो बार रिशा ने सरिता से अपनी चूत की आग राजू से चुदवा कर मिटाने की बात करी लेकिन सरिता हमेशा ये बोल के चुप करवा देती कि जवान छोरा है...कहीं कुछ बक ना दे। पहले मुझे अच्छे से उसे काबू में कर लेने दे फिर हम दोनों मिलकर ऐश करेंगे. लेकिन सरिता की ये बात रिशा को पच नहीं रही थी..यहां वो लंड के लिए तड़प रही थी और वहां सरिता अब तो जब मौका मिलता है राजू को कमरे में खींच कर ले जाती.
एक दिन रिशा थोड़ा देर से उठ कर जब किचन की तरफ आई तो जो उसने देखा उसे पांव वहीं रुक गए। उसकी सास किचन में काम कर रही थी और राजू सरिता के पीछे खड़ा अपने लंड का दबाव सरिता की गांड पर बना कर खड़ा था और उसके दोनों हाथ आगे से ब्लाउज के अंदर घुसे हुए थे और सरिता की चुची को मसल रहे थे.
देखने से ही पता चल रहा था कि सरिता और राजू अब इस खेल में काफी आगे निकल चुके हैं।
सरिता.. "राजू छोड़ दो मुझे !कोई देख लेगा तो मुसीबत हो जाएगी"
राजू" कौन देखेगा मालिकिन..सेठ जी तो कब से दुकान पे चले गए और भाभी शायद अभी सोई पड़ी होगी"इतना बोल राजू ने सरिता को अपनी गोद में उठा लिया
सरिता.." नहीं राजू... रिशा अभी आती ही होगी। उसने हमें ऐसे देख लिया तो मुसीबत हो जाएगी और वैसे भी तूने कल रात ही तो दो बार मेरी चूत मारी है और अब सुबह सुबह तेरा लंड खड़ा हो गया है"
राजू....”क्या करु मालिकिन. आपकी चूत है ही किसी कुंवारी लौडिया जैसी। जितनी बार भी चोदता हूँ एक अलग ही मजा आता है”. इतना बोल राजू ने सरिता के ब्लाउज के हुक खोल दिया और ब्रा के ऊपर से उसकी चूची और गर्दन को चूमने लगा
राजू.... “मालिकिन आप कब से मुझे अपनी गांड देने का वादा कर रही हैं। आज तो आप इस साड़ी में कयामत ढा रही हो.. आपकी बाहर को निकली हुई गांड देख कर ही मेरा लौड़ा खड़ा हो गया है आप कहें तो यहीं पर साड़ी उठा कर अपना लौड़ा पेल दूं गांड में”
सरिता" पागल मत बन राजू। रिशा अभी यहां आती ही होगी। तू एक काम कर। तू अपने कमरे में वापस जा। मैं रिशा को कोई बहाना कर बाहर भेजती हूं और फिर तेरे पास आती हूं। आज मार लेना मेरी गांड!
राजू" ठीक है मालिकिन मैं अभी जाता हूं लेकिन जल्दी आ जाना आप”। इतना बोल राजू वहां से निकल जाता है और तभी रिशा किचन में प्रवेश करती है।
रिशा "दीदी राजू आज दुकान पर नहीं गया क्या ?
सरिता.." नहीं उसकी तबीयत कुछ ठीक नहीं है तो मैंने उसको अपने कमरे में आराम करने को बोला है। अभी थोड़ी देर में मैं उसके लिए काड़ा बना कर दे आऊंगी।
रिशा..लगता है दीदी आप कुछ ज्यादा ही मेहनत करवा रही है राजू से
सरिता..अंजान बनते हुए..अरे नहीं। कल कुछ ज्यादा गर्मी थी तो कहीं उल्टा सीधा खाने से तबियत बिगड गई होगी
रिशा.."दीदी आप कहो तो मैं उसको काड़ा बना कर दे आती हूं
सरिता.." नहीं बहू तो एक काम कर तू आज मंदिर हो आ और वापीस आते हुए बाजार से थोड़ी सब्जी और राशन ले आना। तब तक मैं दोपहर का खाना भी बना लूंगी.
रिशा: राशन तो कल ले आऊंगी दीदी..अगर आपको ठीक लगे तो आते हुए मेरी एक सहेली है उसके पास कुछ समय बिता कर आ जाउ। काफ़ी दिन से बोल रही है। रिशा ने ये जानबूझ कर बोला ताकि सरिता को लगे कि उसको ज्यादा टाइम लगेगा वापस आने में।
सरिता: हां हां क्यू नहीं बहू. तू आराम से अपनी सहेली से मिल कर आ जाना। मैं यहां सब संभाल लूंगी
इतना बोल रिशा वहां से निकल पड़ी और घर के पिछवाड़े बने एक पेड़ के पीछे छुप कर देखने लगी कि आखिर उन दोनों के बीच क्या चल रहा है।
रिशा के निकलते ही सरिता चुपचाप पिछले दरवाजे से राजू के कमरे की तरफ चल पड़ी। सरिता के जाते ही रिशा वहां से निकली और राजू के कमरे के बाहर दबे पांव पहुंच गई
एक छोटी सी खिड़की थोड़ी सी खुली थी जहां से रिशा को अंदर का नजारा साफ दिख रहा था। उसने देखा की राजू ने उसकी सास को अपनी बाहों में दबोच लिया था और दोनों एक दूसरे के होठों को चूस रहे थे. कुछ देर सरिता के होंठ चूसने के बाद राजू ने सरिता को दीवार के साथ लगा दिया और उसकी साड़ी उसकी जांघों तक सरका कर पैंटी के ऊपर से ही सरिता की चूत को दबा लिया
सरिता...क्यो राजू आज यहीं खड़े खड़े ही चोद देगा क्या मुझे? इतना बोल सरिता ने राजू को बिस्तर पर धकेल दिया और उसके ऊपर सवार हो गई.
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