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Misc. Erotica महीन को अपने रंग में रंग दिया
#21
(21-01-2026, 02:45 PM)razaraj2 Wrote: Hindi likh chuka bahut aage tk ab Hinglish m likhna possible nhi h

Ok bhai waiting for next update..
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Do not mention / post any under age /rape content. If found Please use REPORT button.
#22
Zabardast story bhai....waiting for next update
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#23
पार्ट 5: नेहा की यादें और प्रिया की स्टोरी

की स्टोरी सुनने के बाद माहीन का मन और ज्यादा उलझ गया था। ऑफिस से घर लौटकर वो बेड पर लेट गई, आँखें बंद करके नेहा की बातें दोहराने लगी। "कितनी भावुक थी वो... ब्रेकअप का दर्द, फिर वो स्पर्श, आजादी... जैसे उदासी मिट गई। क्या मेरी उदासी भी ऐसे मिट सकती है? फ...सल, तुम दूर हो, लेकिन नेहा की तरह अगर मैं भी... नहीं, गुनाह है। लेकिन वो डिटेल्स... क्यों बदन गरम हो रहा है? क्या मैं भी कभी ऐसा महसूस कर सकती हूँ? नेहा कह रही थी आजादी... हॉट बनो। लेकिन मैं? हिजाब में बंधी, अकेली रातें... आँसू क्यों आ रहे हैं? Faisal , मुझे माफ करना। फ...सल की याद आ रही है, लेकिन नेहा की स्टोरी जैसे दिल को छू गई। क्या आजादी सच में ऐसी है — दर्द और मजा मिलाकर? मैं रो रही हूँ, लेकिन जिज्ञासा... रोक नहीं पा रही। कल प्रिया की स्टोरी सुनूंगी... शायद * धर्म के बारे में और जानूँ। लेकिन डर लग रहा है, क्या मैं बदल रही हूँ?

" माहीन की सिसकियाँ निकल रही थीं, छाती भारी, लेकिन बदन में एक नई सी उत्तेजना। वो आईने के सामने खड़ी हुई, हिजाब उतारा, बाल खोले। "क्या मैं हॉट हूँ? नेहा की तरह... क्या कोई मुझे ऐसे देखेगा?" आँसू बहते रहे, लेकिन दिल में एक छोटी सी उम्मीद जागी। रात भर नींद नहीं आई, नेहा की स्टोरी की इमेजेस मन में घूमती रहीं — "उदासी मिटी, प्यार जुड़ा... क्या मेरे लिए भी?"अगले दिन ऑफिस में माहीन फिर थकी हुई लग रही थी, लेकिन सहेलियों से मिलने की उत्सुकता थी। लंच टाइम में कैफेटेरिया में सब इकट्ठी हुईं। नेहा ने मुस्कुराकर कहा, "माहीन, कल की स्टोरी सोची? भावुक हो गई ना?"

Maheen की आँखें नम हो गईं। "हाँ नेहा... रोई बहुत। तुम्हारा दर्द, वो मजा... दिल छू गया। लेकिन अब प्रिया की स्टोरी सुनाओ अगर कोई भावुक हिस्सा हो तो डिटेल में।" सहेलियाँ मुस्कुराईं। प्रिया ने गहरी सांस ली, जैसे यादें ताजा हो रही हों, और शुरू की, "ठीक है, सुनो मेरी स्टोरी। ये सिर्फ धर्म की है, दिल की भी। मैं 24 साल की थी, फैमिली स्ट्रिक्ट ****— पूजा, त्योहार, भ...वान की भक्ति। लेकिन दिल उदास था — पापा की मौत हो गई थी, मम्मी अकेली। लगता था जिंदगी में रंग नहीं। मैं रोज मंदिर जाती, भ...वान कृष्ण से दुआ मांगती — 'मुझे सुकून दो।' धर्म में ऐसे रिचुअल्स हैं — सुबह उठकर पूजा, आरती, भजन गाना। होली में रंग चढ़ाना, दिवाली में दीये जलाना, नवरात्रि में देवी पूजा। औरतें यहां देवी हैं — लक्ष्मी, दुर्गा, शक्ति।

कोई सख्ती नहीं, बस भक्ति और आजादी — त्योहार मनाओ, डांस करो, प्यार करो। भ...वान कृष्ण राधा से रास लीला करते, रंग लगाते — वो प्यार का सिंबल। मैंने इन रिचुअल्स से सुकून पाया — मंदिर में घंटी बजाना, अगरबत्ती जलाना, प्रसाद चढ़ाना। भावुक हो जाती थी — आँसू आते, लेकिन दिल हल्का होता। एक बार ***** boyfriend मिला — लेकिन वो सेक्स में कमजोर था, उसका बहुत छोटा था। उसके बाद मैंने कभी ****** लड़कों का ख्याल नहीं किया,

डिटेल में तो बिल्कुल नहीं। मैं ........रिचुअल्स में डूब गई — जैसे करवा चौथ में व्रत रखना, पति की लंबी उम्र के लिए। या रक्षा बंधन में भाई को राखी बाँधना। ***** धर्म सिखाता है — जिंदगी रंगों से भरी हो, कोई बंदिश नहीं। उदासी में भी खुशी ढूंढो — पूजा से, भजन से। अब मैं खुश हूँ, क्योंकि धर्म ने आजादी दी — खुद चुनो, भ...वान पर भरोसा रखो। तुम ट्राई करो, माहीन। ***** रिचुअल्स सीखो, आजादी मिलेगी, उदासी मिटेगी। पूजा से शुरू करो — एक छोटी सी आरती, देखो दिल कैसे हल्का होता है।" प्रिया की आँखें नम हो गईं, जैसे पापा की याद और धर्म की भक्ति मिलकर भावुक कर रही हों।माहीन सुनकर रोने लगी — "प्रिया, इतनी भावुक... ****** र्म, रिचुअल्स, आजादी... पूजा, भ...वान... दिल छू गया। क्या मैं भी ट्राई कर सकती हूँ? लेकिन अगली स्टोरी?" प्रिया मुस्कुराई, "एक पार्ट में एक। कल फातिमा की सुनना।" माहीन का मन और उत्तेजित हो गया। प्रिया की स्टोरी याद आ रही थी — "रिचुअल्स, देवी, आजादी... क्या मैं भी? अ...ह, रोक। लेकिन... जिज्ञासा। फ...सल, सॉरी। धीरे-धीरे... देखती हूँ
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#24
(21-01-2026, 02:45 PM)razaraj2 Wrote: Hindi likh chuka bahut aage tk ab Hinglish m likhna possible nhi h

I just use Gemini AI to translate to Hinglish. Tell AI not to add or delete anything, just do translation. Most of the time, it does a good job.
Deepak Kapoor
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  1. An Innocent Beauty Series ( 5 Books )
  2. सम्मान और बदला ( 5th-Book in hindi)
https://xossipy.com/thread-72031.html -- सम्मान और बदला
https://xossipy.com/thread-71793.html -- अनीता सिंह --किरदार निभाना




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#25
7.प्रिया की यादें और फातिमा की स्टोरीप्रिया की स्टोरी सुनने के बाद माहीन का मन और ज्यादा उलझ गया था। ऑफिस से घर लौटकर वो बेड पर लेट गई, आँखें बंद करके प्रिया की बातें दोहराने लगी। "कितनी भावुक थी वो... पापा का दर्द, फिर ***** रिचुअल्स से सुकून — पूजा, आरती, भ...वान की भक्ति, औरतों को देवी मानना। मैं भी कभी ऐसी आजादी महसूस कर सकती हूँ — त्योहार मनाना, डांस करना, कोई सख्ती नहीं?

प्रिया कह रही थी uski zindagi m azadi h uska yaar use azadi देता है... जिंदगी रंगों से भरी। लेकिन मैं? लेकिन उदासी नहीं मिटती। फ...सल, तुम दूर हो, लेकिन प्रिया की तरह अगर मैं भी पूजा ट्राई करूँ... नहीं, गुनाह है। लेकिन वो डिटेल्स... मंदिर में घंटी बजाना, अगरबत्ती जलाना, प्रसाद चढ़ाना... क्यों दिल छू रहा है? क्या भ...वान सच में सुकून देते हैं?

मैं रो रही हूँ, क्योंकि मेरी जिंदगी में रंग नहीं — सिर्फ अकेलापन। अ...ह, मुझे माफ करना। लेकिन जिज्ञासा... कल फातिमा की स्टोरी सुनूंगी... शायद और समझ आए। लेकिन डर लग रहा है, क्या ये बातें मुझे बदल रही हैं?" माहीन की सिसकियाँ निकल रही थीं, छाती भारी, लेकिन दिल में एक नई सी उत्सुकता। वो आईने के सामने खड़ी हुई, दुपट्टा सिर से हटाया, और सोची, "क्या मैं hot जैसी हूँ?

प्रिया की तरह... आजादी क्या है?" आँसू बहते रहे, लेकिन दिल में एक छोटी सी चमक जागी। रात भर नींद नहीं आई, प्रिया की स्टोरी की इमेजेस मन में घूमती रहीं — "देवी, भक्ति, आजादी... क्या मेरे लिए भी?"अगले दिन ऑफिस में माहीन फिर थकी हुई लग रही थी,

लेकिन सहेलियों से मिलने की उत्सुकता थी। लंच टाइम में कैफेटेरिया में सब इकट्ठी हुईं। प्रिया ने मुस्कुराकर कहा, "माहीन, कल की स्टोरी सोची? * रिचुअल्स, आजादी?" माहीन की आँखें नम हो गईं। "हाँ प्रिया... रोई बहुत। तुम्हारा दर्द, वो भक्ति... दिल छू गया। लेकिन अब फातिमा की स्टोरी सुनाओ। और अगर कोई भावुक हिस्सा हो तो डिटेल में।"

सहेलियाँ मुस्कुराईं। फातिमा ने गहरी सांस ली, जैसे यादें ताजा हो रही हों, और शुरू की,
"ठीक है, सुनो मेरी स्टोरी। ये सिर्फ मजों की नहीं, भावनाओं की भी है। मैं 25 साल की थी, ****** फैमिली, स्ट्रिक्ट —ghar me rehna parde m rehna लेकिन दिल उदास था — शौहर से तलाक हो गया था, वो कमजोर था, सेक्स में कुछ नहीं कर पाता। लगता था जिंदगी खत्म।


तभी मिला वो — ******* लड़का, मजबूत, केयरिंग। पहली बार मिले कॉफी शॉप में — बातें की, मेरे दर्द सुने। स्पर्श से बॉडी में बिजली दौड़ी, दिल रोया लेकिन खुशी से। फिर किस — होंट मिले, जीभ अंदर घुसी, चूसते हुए लंबे समय तक। मैं काँपी, आँसू आ गए — तलाक का दर्द मिट रहा था। घर जाकर न...ज पढ़ी, लेकिन मन उधर था। फिर अगली मीटिंग में उसके घर ले गया।

कपड़े उतारे — धीरे, हर हिस्से को चूमते। मेरे दूध देखकर बोला, 'तुम देवी हो।' चूसे, दबाए जोर से, निप्पल काटे हल्के से, जीभ से घुमाया। दर्द हुआ, लेकिन मीठा दर्द — जैसे मेरा अकेलापन मिट रहा हो। नीचे जीभ फेरी — चूत पर चाटा, क्लिट को चूसा, उँगली अंदर-बाहर धीरे-धीरे। मैं चीखी, रोई, झड़ी तीन बार — आँसू खुशी के, जैसे शौहर का दर्द निकल रहा। दिल कह रहा था, 'ये हराम है, लेकिन सुकून मिल रहा है।' फिर लंड दिखाया — 9 इंच, मोटा, वेन वाली। मैंने मुँह में लिया — चूसा धीरे, जीभ से चाटा हर वेन को, गला तक ठोंका। उल्टी आई, लेकिन मजा — जैसे मैं नई जिंदगी जी रही हूँ। फिर चूत में घुसाया — दर्द, जैसे फट रही, लेकिन वो रुका, गले लगाया, 'प्यार करता हूँ' बोला, आँसू पोछे। फिर धीरे-धीरे ठोंकना शुरू — अंदर-बाहर, स्पीड बढ़ाई, हर धक्के में गहराई। मिशनरी में दूध चूसते, निप्पल काटते, फिर डॉगी में गांड पर थप्पड़ मारते, जोर से धक्के, बाल पकड़कर खींचते। मैं बोली, 'जोर से! मेरा दर्द निकालो!' वो घुमा-घुमाकर चोदा — साइड से, ऊपर से, रिवर्स काउगर्ल में मैं उछलती, हर एंगल से लंड अंदर तक। चूत गीली, स्लाइड करता, ऑर्गैज्म बार-बार — बॉडी काँपती, चीखती रही। मजा?

जैसे स्वर्ग — भावुक, जैसे अ...ह की माफी, लेकिन खुशी। अंत में मुँह में झड़ा — गर्म वीर्य, निगला मैंने, आँसू बहते रहे खुशी के। वो रात... उदासी मिटी, ***दू लड़के की वजह से आजादी मिली — कोई बंदिश नहीं, बस प्यार। अब मैं ओपन हूँ, हलाल छोड़कर हराम ट्राई किया, लेकिन वो मजा... वर्थ इट। तुम ट्राई करो, माहीन। Tu bhi try ker tujhe कितना मजा आएगा, उदासी मिटेगी।" फातिमा की आँखें नम हो गईं, जैसे तलाक का दर्द और नई खुशी मिलकर भावुक कर रही हों।माहीन सुनकर रोने लगी — "फातिमा, इतनी भावुक... तलाक का दर्द, वो मजा, * लड़का... दिल छू गया। लेकिन अगली स्टोरी?" फातिमा मुस्कुराई, "एक पार्ट में एक। कल रिया की सुनना।" माहीन का मन और उत्तेजित हो गया। फातिमा की स्टोरी याद आ रही थी — "दर्द, मजा, ठोंकना, ऑर्गैज्म... क्या मैं भी? Faisal रोक। लेकिन... जिज्ञासा। फ...सल, सॉरी।
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#26
Very much interesting writing
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#27
Zabardast
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#28
Mast writing ✍️
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#29
Chamatkar aur bahut bahut shandar writing
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#30
Ekdom terrific story writings! bahut hi mast aur behad hi shandaar narrations! Namaskar
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#31
bahut badhiya,bahut khoob aur ekdom umda story writings!
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#32
Waiting for
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#33
Bahut khub..
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#34
Witting next update
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#35
Waiting Waiting next update
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#36
Waiting for update
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#37
Is पार्ट में आर्यन से क्लोजनेस शुरू — सहेलियों की बातों का असर और आर्यन की हल्की सी नजदीकी

सहेलियों की स्टोरीज सुनने के बाद माहीन का मन पूरी तरह से उलझ चुका था। हर स्टोरी — नेहा की आजादी, प्रिया का Azadi k dikhaya hua sapna फातिमा और रिया का सेक्स का मजा — रात-दिन उसके दिमाग में घूमती रहती। लेकिन अब स्टोरीज खत्म हो गईं थीं, और माहीन सोचती, "अब क्या? ये बातें तो बस शुरुआत थीं...

लेकिन दिल में कुछ बदल रहा है। फ...सल, तुम्हारी याद आ रही है, लेकिन ये जिज्ञासा... रोक नहीं पा रही। क्या मैं इन बातों पर अमल करूँ? या बस सुनकर भूल जाऊँ?" वो ऑफिस में काम करती, लेकिन मन कहीं और होता। सहेलियाँ अब रोज लंच में मिलतीं, लेकिन अब बातें आर्यन पर आ गई थीं। नेहा कहती, "माहीन, आर्यन अच्छा लड़का है। बात करो उससे, शायद दिल हल्का हो।"

माहीन शरमाती, "नहीं... वो तो बस को-वर्कर है। लेकिन... हाँ, अच्छा लगता है बात करके।" दिल में एक हल्की सी उथल-पुथल — आर्यन की मुस्कान याद आती, लेकिन अभी बस हल्की सी फीलिंग, जैसे कोई दूर का आकर्षण। "क्या ये पसंद है? नहीं, बस दोस्ती। फ...सल, मुझे माफ कर दो।"अगले दिन ऑफिस में माहीन अपनी डेस्क पर काम कर रही थी।

आर्यन पास की डेस्क पर था, लेकिन आज वो थोड़ा ज्यादा ध्यान दे रहा था। मीटिंग के बाद आर्यन ने कहा, "माहीन, लंच में चलें? कुछ प्रोजेक्ट की बात कर लें।" माहीन ने हाँ कहा, लेकिन दिल में हल्की सी घबराहट — "बस प्रोजेक्ट की बात... लेकिन क्यों अच्छा लग रहा है?" कैफेटेरिया में बैठे, आर्यन ने कॉफी दी। "माहीन, तुम्हारी सहेलियाँ अच्छी हैं ना? पार्टी के बाद तुम्हारा चेहरा चमक रहा है।" माहीन शरमाकर बोली, "हाँ आर्यन जी... वो बातें करती हैं, दिल हल्का होता है। तुम्हारी वजह से मिलीं वो। शुक्रिया।

" आर्यन मुस्कुराया, "खुशी हुई। अगर कभी उदास हो तो बताना... मैं सुन सकता हूँ।" उसकी आँखों में केयर थी, और माहीन के दिल में हल्की सी फीलिंग जागी — जैसे कोई गर्माहट, लेकिन बहुत हल्की, बस एक पल की। "आर्यन जी... अच्छा इंसान हैं। लेकिन ज्यादा नहीं सोचना। फ...सल, ये बस दोस्ती है।" बातें प्रोजेक्ट पर हुईं, लेकिन बीच में आर्यन ने हल्का सा हाथ छुआ — कॉफी देते हुए। माहीन सिहर गई, लेकिन कुछ नहीं कहा। दिल में हल्की सी लहर — "ये स्पर्श... पार्टी वाले रंग जैसा। लेकिन बस हल्का सा। अ... मुझे माफ करना।"

शाम को घर जाकर माहीन सोचती रही, "आर्यन से बात करके अच्छा लगा... लेकिन क्यों? बस हल्की सी फीलिंग... जैसे कोई दोस्त। ज्यादा नहीं। फ...सल, मैं वफादार हूँ। लेकिन ये सहेलियाँ... और आर्यन... धीरे-धीरे क्या हो रहा है?" वो रोई, लेकिन दिल में एक छोटी सी चमक थी।
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#38
आर्यन की नजदीकी और दिल का तूफान
पिछले दिनों से माहीन का मन पूरी तरह से बदल चुका था। सहेलियों की स्टोरीज ने उसके दिल में एक तूफान खड़ा कर दिया था — नेहा की आजादी, प्रिया का * धर्म, फातिमा और रिया का सेक्स का मजा... हर बात उसके दिमाग में घूमती रहती। लेकिन अब आर्यन की तरफ ध्यान ज्यादा हो रहा था। ऑफिस में काम करते वक्त भी आर्यन की मुस्कान याद आती, और दिल में एक हल्की सी फीलिंग जागती —

जैसे कोई गर्माहट, लेकिन अभी बस शुरुआत। "आर्यन जी... अच्छे हैं, लेकिन ज्यादा नहीं सोचना। फ...सल, तुम्हारी याद तो है, लेकिन ये अकेलापन... क्यों इतना सताता है?" माहीन सोचती, और सहेलियाँ भी कहतीं, "माहीन, आर्यन से बात करो। वो तुम्हें समझेगा।" एक दिन लंच में नेहा ने कहा, "आर्यन, माहीन को मूवी दिखाओ ना। नई फिल्म आ रही है — रोमांटिक, मजा आएगा। हम सब भी चलेंगे।"

आर्यन ने मुस्कुराकर हाँ कहा, "हाँ, अच्छा आइडिया। माहीन, चलोगी?" माहीन हिचकिचाई, दिल में हल्की सी घबराहट — "मूवी? गैर मर्द के साथ? लेकिन सब साथ हैं... ठीक है।" वो बोली, "हाँ... चलूंगी। लेकिन बस ग्रुप में।" सहेलियाँ एक-दूसरे को देखकर मुस्कुराईं — जानबूझकर प्लान कर रही थीं। माहीन को लगा कुछ अजीब, लेकिन वो अनदेखा कर गई।

दिल में हल्की सी उत्सुकता — "आर्यन जी के साथ मूवी... बस दोस्ती की तरह। फ...सल, मुझे माफ कर दो।"शुक्रवार शाम को ग्रुप मूवी हॉल पहुंचा। फिल्म थी एक रोमांटिक थ्रिलर — *-,., लव स्टोरी, जो माहीन के मन को और उलझा रही थी। टिकट लेते वक्त आर्यन ने कहा, "माहीन, मैं और तुम एक राउ में बैठेंगे? प्रोजेक्ट की बात भी कर लेंगे।"

सहेलियाँ ने तुरंत हामी भरी — नेहा बोली, "हाँ, हम अलग राउ में बैठेंगे। पॉपकॉर्न ले लो, मजा आएगा!" प्रिया ने आँख मारकर कहा, "हाँ, हम पीछे वाले राउ में। तुम दोनों एंजॉय करो।" माहीन को शक हुआ — "क्यों अलग? लेकिन... ठीक है, ग्रुप ही तो है।" वो सहमत हो गई, लेकिन दिल में हल्की सी घबराहट बढ़ गई। हॉल अंधेरा था, लाइट्स डिम, और स्क्रीन पर प्रीव्यू चल रहा था। आर्यन और माहीन बीच वाले सीट पर बैठे — कंधे लगभग सटे हुए। सहेलियाँ जानबूझकर पीछे चली गईं, और नेहा ने काउंटर से बड़ा पॉपकॉर्न का बैग लिया।

वो माहीन के पास आकर बोली, "ये लो माहीन, आर्यन को भी ऑफर करना। एंजॉय!" और मुस्कुराकर चली गई। माहीन ने बैग लिया, लेकिन सहेलियाँ ने इशारा किया कि वो अलग बैठेंगी — "हम तो पीछे हैं, तुम्हें डिस्टर्ब न करें।"फिल्म शुरू हो गई। स्क्रीन पर रोमांस के सीन — हीरो-हीरोइन का पहला स्पर्श, किस, इंटरफेथ का कॉन्फ्लिक्ट। माहीन का दिल तेज धड़क रहा था — फिल्म जैसे उसके मन की कहानी। आर्यन पास था, उसकी बॉडी की गर्माहट महसूस हो रही। माहीन ने हिम्मत करके कहा, "आर्यन जी... पॉपकॉर्न लो?"

बैग आगे बढ़ाया। लेकिन अंधेरे में हाथ फिसला — कुछ पॉपकॉर्न माहीन की गोद में गिर गए, और थोड़े आर्यन की गोद में। माहीन घबरा गई, "ओह... सॉरी!" वो झुककर साफ करने लगी, लेकिन हाथ आर्यन की जांघ से टच हो गया — हल्का सा, बस एक सेकंड का। आर्यन का हाथ भी माहीन की गोद की तरफ गया, पॉपकॉर्न साफ करते हुए थोड़ा सा टच — माहीन की कमर के पास। वो टच बहुत हल्का था, लेकिन माहीन के बदन में करंट सा दौड़ गया। दिल तेज धड़का, साँसें रुक गईं। "ये क्या... आर्यन जी का हाथ... मेरी कमर पर?" टच इतना हल्का था कि बस महसूस हुआ, लेकिन माहीन की चूत में एक अजीब सी सिहरन हुई — हल्की सी गीलापन महसूस हुआ, जैसे बॉडी रिएक्ट कर रही हो।

वो शरम से लाल हो गई, लेकिन अंधेरे में छिप गई। आर्यन ने भी महसूस किया — उसका लंड हल्का सा खड़ा हो गया, पैंट में उभार आया, लेकिन वो भी चुप रहा, बस मुस्कुराया। "सॉरी माहीन... अंधेरा है।" माहीन ने फुसफुसाया, "हाँ... कोई बात नहीं।" लेकिन दिल में तूफान — "ये टच... क्यों अच्छा लगा? चूत गीली हो गई... अ...ह, गुनाह है। लेकिन हल्का सा... बस इत्तफाक।"फिल्म आगे चली। फिर एक इंसिडेंट — हीरो-हीरोइन का इंटीमेट सीन आया, और हॉल में कोई आवाज आई। माहीन घबरा गई, हाथ कसकर पकड़ लिया — आर्यन का हाथ। बस एक सेकंड का, लेकिन फिर टच हुआ। आर्यन ने हल्का सा दबाया, जैसे कंसोल करने के लिए, लेकिन तुरंत छोड़ दिया। माहीन की साँसें तेज हो गईं, चूत और गीली महसूस हुई, बदन में गर्मी।

आर्यन का लंड पूरी तरह खड़ा हो गया, लेकिन वो हिला नहीं। माहीन सोच रही थी, "ये क्या हो रहा है? आर्यन जी का हाथ... मजा आ रहा है? नहीं, रोक। फ...सल..." फिल्म के बीच में एक और छोटा इंसिडेंट — एसी की हवा से माहीन का दुपट्टा हल्का सा सरका, कंधा दिखा। आर्यन ने नोटिस किया, लेकिन कुछ नहीं कहा, बस हल्का सा कंधा छुआ — जैसे दुपट्टा ठीक करने के लिए। टच फिर हल्का, लेकिन माहीन के दिल में लहर — "उसका स्पर्श... क्यों बॉडी रिएक्ट कर रही? चूत गीली... लंड का उभार महसूस हो रहा? नहीं, कल्पना है।

" फिल्म खत्म हुई, लाइट्स ऑन हुईं। सहेलियाँ आईं, नेहा ने आँख मारकर कहा, "कैसी लगी फिल्म? एंजॉय किया?" माहीन शरमाकर बोली, "हाँ... अच्छी थी।" लेकिन मन में उथल-पुथल।घर लौटकर माहीन का दिल भारी हो गया। दरवाजा बंद किया, लाइट बंद की, और बेड पर गिर पड़ी। आँसू बहने लगे — "ये क्या कर दिया मैंने? आर्यन जी के साथ मूवी, वो टच... पॉपकॉर्न गिरा, हाथ लगे, कंधा छुआ... चूत गीली हो गई, वो फीलिंग... **** मुझे माफ करना! फ...सल, मैंने गुनाह कर दिया।

एक गैर मर्द के साथ इतना करीब... कैसे कर सकती हूँ मैं? मैं शादीशुदा हूँ, तुम्हारी अमानत... लेकिन क्यों बॉडी ने रिएक्ट किया? वो स्पर्श... हल्का सा था, लेकिन मजा आया? नहीं, गुनाह है! सहेलियाँ जानबूझकर अकेला छोड़ दिया, पॉपकॉर्न का बहाना... मैं क्यों नहीं रुकी? दिल धड़का, चूत गीली... क्या मैं रंडी बन रही हूँ? फ...सल, अगर तुम्हें पता चला तो क्या सोचोगे? मैं रो रही हूँ, लेकिन अफसोस... कितना गहरा। Faisal, तौबा करता हूँ! कभी नहीं होगा ऐसा फिर। पढ़ूंगी, Fast रखूंगी, सब भूल जाऊंगी। लेकिन ये गिल्ट... छाती फाड़ रहा है।

क्यों अच्छा लगा वो टच? आर्यन जी का लंड का उभार महसूस हुआ... नहीं, सोचना भी गुनाह। फ...सल, सॉरी... मैं कमजोर हूँ, अकेलापन ने तोड़ दिया। लेकिन तौबा... Faisal, मुझे माफ कर।" माहीन जोर-जोर से रोई, तकिए में मुँह छिपाकर सिसकियाँ लीं। घंटों रोती रही, अफसोस की लहरें आती रहीं — "कैसे कर सकती हूँ? गैर मर्द... स्पर्श... गीलापन... तौबा, तौबा!" दिल टूटा हुआ, लेकिन कहीं गहराई में वो हल्की फीलिंग बाकी थी। रात भर जागी, लेकिन नींद नहीं आई। गिल्ट इतना भारी कि सुबह तक रोती रही।

"फ...सल, कभी मत जानना। मैं बदलूंगी... लेकिन ये यादें... क्यों मिट नहीं रही?"
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#39
पार्क की मुलाकातमूवी वाली शाम के बाद माहीन की रातें और भी बेचैन हो गई थीं।

वो पॉपकॉर्न का इंसिडेंट, वो हल्का सा टच, आर्यन का स्पर्श — सब कुछ उसके दिमाग में घूमता रहता। अगली सुबह वो उठी तो आँखें सूजी हुई थीं, दिल भारी। Faisal मुझे माफ करना... मैं ऑफिस नहीं जाऊंगी आज। वो सब सहेलियाँ, आर्यन जी... मैं क्या कर रही हूँ? फ...सल, तुम्हें धोखा दे रही हूँ। गुनाह... हराम... मैं कैसे एक गैर मर्द के इतना करीब गई? चूत गीली हो गई थी उस टच से... कैसे? मैं रंडी नहीं हूँ, मैं तुम्हारी wafadar begaumहूँ!"

Wo रोने लगी, बेड पर ही सिसकियाँ लेती रही। ऑफिस को मैसेज किया — "बीमार हूँ, आज नहीं आ सकती।" लेकिन मन में अफसोस की आग जल रही थी। "कल की फिल्म... वो सीन, वो टच... मैंने क्यों नहीं रोका? सहेलियाँ ने जानबूझकर अकेला छोड़ दिया, लेकिन मैं क्यों नहीं उठी? फ...सल, अगर तुम जानोगे तो क्या सोचोगे? मैं रो रही हूँ, दिल टूट रहा है। तौबा... मैं तौबा करती हूँ। कभी नहीं होगा ऐसा।"

, लेकिन बीच में रोना आ गया — "upper Wale मुझे सजा दे दो। मैं कमजोर हूँ, अकेलापन ने मुझे तोड़ दिया। लेकिन अब नहीं... मैं घर में रहूंगी, तुम्हारी याद में जीऊंगी।" पूरा दिन वो रोती रही, खाना नहीं खाया, बस बेड पर लेटी अफसोस करती। दिल में गिल्ट इतना गहरा कि साँसें भारी हो गईं — "कैसे कर सकती हूँ मैं? गैर मर्द का स्पर्श... और मजा आया? नहीं, गुनाह है।

फ...सल, सॉरी... मैं तुम्हारी नहीं रही अब।"ऑफिस में आर्यन को माहीन की गैरहाजिरी का पता चला। वो चिंतित हो गया — "माहीन नहीं आई? कल मूवी में सब ठीक था... शायद बीमार। लेकिन वो उदास लग रही थी।" सहेलियों से पूछा, नेहा ने कहा, "बीमार है शायद। लेकिन तुम चेक करो ना।" आर्यन ने माहीन को मैसेज किया — "माहीन, आज नहीं आई? सब ठीक है?

अगर कोई दिक्कत हो तो बताओ।" माहीन ने देखा लेकिन जवाब नहीं दिया, दिल में डर — "नहीं... बात नहीं करनी। गुनाह बढ़ेगा।" लेकिन आर्यन ने फोन किया। माहीन ने काँपते हाथों से उठाया, "हेलो... आर्यन जी?" आर्यन की आवाज चिंतित थी, "माहीन, सब ठीक? बीमार हो? शाम को पार्क में मिलो ना... बात कर लेंगे। बस 10 मिनट। मैं वेट करूंगा।" माहीन ने मना करने की कोशिश की, "नहीं... मैं ठीक हूँ।"

लेकिन आर्यन ने इंसिस्ट किया, "प्लीज, दोस्त की तरह। पार्क में, सुरक्षित जगह। अगर नहीं आई तो मैं चिंता करूंगा।" माहीन का दिल डूबा — "क्यों? लेकिन अगर नहीं गई तो वो और मैसेज करेगा... ठीक है, बस बात करके लौट आऊंगी। फ...सल, सॉरी... लेकिन बस मिलकर कह दूंगी कि दूर रहो।" वो तैयार हुई, हिजाब ठीक से पहना, और शाम को पार्क पहुंची। दिल तेज धड़क रहा था, आँखें नम — "ये क्या कर रही हूँ? घर पर रहना था। लेकिन अब... बस कह दूंगी सच्चाई।"पार्क में आर्यन बेंच पर वेट कर रहा tha

।Mahin को देखकर मुस्कुराया, लेकिन माहीन का चेहरा उदास था। वो पास बैठी, लेकिन दूरी बनाकर। "आर्यन जी... मैं... मैं बीमार नहीं थी। बस... कल की शाम से परेशान हूँ।" आर्यन ने चिंता से पूछा, "क्या हुआ? मूवी में कुछ गलत लगा?" माहीन की आँखें भर आईं, वो रोने लगी — "आर्यन जी... मैं ऐसी नहीं हूँ। मैं एक शादीशुदा औरत हूँ, फ...सल की वफादार। कल वो टच, वो closeness... गुनाह है

। मैं आजादी के बारे में सोचकर गलत कर रही हूँ। सहेलियाँ कहती हैं आजादी लो, लेकिन ये धोखा है। मैं अपने पति की प्रतिपालक हूँ, उनकी अमानत। कैसे गैर मर्द के इतना करीब आई? मैं रो रही हूँ, अफसोस हो रहा है। अ...ह से डर लग रहा है। मुझे माफ कर दो, लेकिन अब नहीं मिलूंगी।" उसकी आवाज काँप रही थी, सिसकियाँ निकल रही थीं। दिल में तूफान — "फ...सल, सॉरी... मैंने गुनाह किया। लेकिन अब तौबा।" आर्यन ने गंभीर होकर कहा, "माहीन, रुको।

तुम कुछ भी गलत नहीं कर रही हो। आजादी मतलब धोखा नहीं — खुद को खुश रखना है। तुम्हारा शौहर दूर हैं, तुम अकेली हो। दोस्ती में क्या बुराई? कल का इंसिडेंट इत्तफाक था, कोई इंटेंशन नहीं। * धर्म में, या किसी भी में, आजादी मतलब अपनी खुशी चुनना। तुम्हें कोई सजा नहीं मिलेगी, बस जियो। तुम अच्छी इंसान हो, बस थोड़ा रिलैक्स करो।" उसने हाथ नहीं छुआ, बस बातों से समझाया — "देखो, जिंदगी में बदलाव आते हैं। आजादी लो, लेकिन दिल से।


तुम गुनाह नहीं कर रही, बस जी रही हो।" माहीन रोती रही, लेकिन आर्यन की बातें दिल को छू गईं — "क्या सही कह रहा है? लेकिन फ...सल... नहीं, मैं नहीं मानूंगी।" वो बोली, "शुक्रिया... लेकिन मुझे जाना है।" और रोते हुए घर लौट गई।घर पहुंचकर गिल्ट और बढ़ गया — "आर्यन जी की बातें... आजादी जस्टिफाई कर रहे थे। लेकिन मैं? गुनाह है। फ...सल, सॉरी। मैं रो रही हूँ, दिल टूट रहा है। तौबा... तौबा।" वो रोती रही,
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#40
Zabardast update bhai...maazaa aaa gaya
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