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Mai Ek New Erotica Story likh raha hu jo ki puri trah se Kalpinik hai or ye Story Maheen mohe rang diya k writer Pink baby se Inspire ho kr likh raha hu is story ki Heroine k nam bhi Maheen rakha h to chaliye Shuru karte hai
Yaar ne Rang laga ker Badal Diya
माहीन अहमद की उम्र 27 साल थी। हैदराबाद की एक अमीर और रूढ़िवादी फैमिली से थी वो। उसके अब्बू एक बड़े बिजनेसमैन थे, जो शहर की कमेटी के मेंबर भी थे। अम्मी घर संभालती थीं, और घर में हमेशा पर्दे का माहौल रहता था।
महीन ने बचपन से और पहनना सीखा था — कॉलेज-कॉलेज में भी पूरी तरह ढकी रहती थी। शादी के बाद भी उसकी जिंदगी में ज्यादा बदलाव नहीं आया। उसका शौहर फैसल 32 साल का था — दुबई में एक बड़ी कंपनी में मैनेजर। शादी को तीन साल हो गए थे, लेकिन फैसल साल में मुश्किल से चार-पांच महीने ही भारत आ पाता।
बाकी समय वीडियो कॉल्स, फोन और यादों पर गुजरता।माहीन बहुत खूबसूरत थी। गोरी चिट्टी त्वचा, जो धूप में भी चमकती। लाइट ब्राउन आँखें, जो देखने में किसी को भी बेकरार कर दें। गुलाबी होंट, जो मुस्कुराते तो मोती जैसे दाँत नजर आते। उसके बाल सिल्क जैसे मुलायम, कमर तक लंबे — लेकिन हमेशा में छिपे रहते। फिगर था 34-28-38 — ब्रेस्ट भरे-भरे, जो सलवार-कमीज में भी हल्का उभार बनाते, कमर पतली और हिप्स गोल-मटोल।
लेकिन माहीन ये सब कभी शो नहीं करती थी। वो प्रोफेशनल सूट्स या ब्रांडेड सलवार-कमीज पहनती, दुपट्टे से सीना ढककर। ऑफिस में भी लोग उसे देखते, लेकिन वो किसी से ज्यादा बात नहीं करती। टैलेंटेड थी — एक बड़ी IT कंपनी में सीनियर सॉफ्टवेयर इंजीनियर। मेहनती, समझदार, और हमेशा मुस्कुराती
। लेकिन दिल में एक खालीपन था — फैसल की कमी। रातें अकेली गुजरतीं, और कभी-कभी वो सोचती कि जिंदगी में और कुछ रंग क्यों नहीं?फैसल बहुत अच्छा इंसान था। गोरा, स्मार्ट, फिट बॉडी — जिम जाता था दुबई में। शादी अरेंज्ड थी, लेकिन प्यार जल्दी हो गया।
फैसल बहुत केयरिंग था — जब घर आता तो माहीन को इतना प्यार देता कि वो भूल जाती सब। रातें उनकी बहुत इंटीमेट होतीं — फैसल उसे पूरी तरह संतुष्ट करता। लेकिन अब दूरियाँ बढ़ गई थीं। माहीन पढ़ती, लेकिन मन somewhere और भटकने लगा था। वो सोचती, "ऊपरवाला मुझे माफ करना, लेकिन ये अकेलापन क्यों?"
ऑफिस में माहीन का एक को-वर्कर था — आर्यन शर्मा। 30 साल का, कट्टर फैमिली से। दिल्ली से हैदराबाद शिफ्ट हुआ था दो साल पहले। लंबा — 6 फुट, चौड़ी छाती, जिम बॉडी। रंग सांवला, लेकिन हैंडसम। डार्क आँखें, स्टाइलिश बाल, हमेशा स्माइल।
आर्यन भी सीनियर पोजिशन पर था — माहीन के साथ ही एक प्रोजेक्ट पर काम करता। शादीशुदा नहीं था, लेकिन अफेयर्स की अफवाहें थीं। आर्यन को रूढ़िवादी पर्दे में छिपी लड़कियों का क्रेज था — खासकर कंजर्वेटिव वाली। उसे मजा आता था उनकी को छूने में, लेकिन वो कभी जल्दबाजी नहीं करता।
धीरे-धीरे बातें बढ़ाता।ऑफिस में माहीन और आर्यन की टेबल पास-पास थी। शुरू में सिर्फ प्रोफेशनल बातें — "माहीन, ये कोड चेक कर लो" या "आर्यन जी, मीटिंग में क्या पॉइंट्स हैं?" लेकिन धीरे-धीरे बातें पर्सनल होने लगीं।
आर्यन पूछता, "माहीन, तुम हमेशा क्यों पहनती हो? इतनी गर्मी में।" माहीन मुस्कुराकर कहती, "ये हमारा मजहब है आर्यन जी।
उपर वाले का हुक्म।" आर्यन हंसता, "बहुत डिसिप्लिन्ड हो तुम। मुझे तो तुम्हारी स्माइल बहुत अच्छी लगती है।
"होली का टाइम आ रहा था। ऑफिस में सब उत्साह में थे। लोग रंग, पिचकारी प्लान कर रहे थे। माहीन चुप रहती — होली उसके लिए मना थी। रंग लगाना, नाच-गाना — सब गुनाह। लेकिन आर्यन ने एक दिन लंच में कहा, "माहीन, होली में ऑफिस पार्टी है। तुम आओगी ना?
बस थोड़ा रंग लगेगा, मजा आएगा।" माहीन ने मना कर दिया, "नहीं आर्यन जी, मैं नहीं मनाती। फैसल को भी पसंद नहीं।" आर्यन ने मुस्कुराकर कहा, "अरे, एक दिन तो ट्राई करो। जिंदगी में थोड़ा रंग चाहिए ना?
"उस दिन घर लौटकर माहीन सोच में पड़ गई। फैसल से वीडियो कॉल पर बात की। फैसल ने कहा, "माहीन, ऑफिस पार्टी है तो जाओ, लेकिन रंग से दूर रहना। मैं जल्द आऊंगा।" माहीन ने हाँ कहा, लेकिन मन में कुछ अजीब सा लगा।
आर्यन की बातें याद आईं — "थोड़ा रंग चाहिए।" रात को बेड पर लेटकर वो सोचती रही। उसकी जिंदगी सफेद-काली थी — घर ऑफिस, घर। कोई रंग नहीं। फैसल दूर, और मन में एक खालीपन। पहली बार उसने महसूस किया कि आर्यन की नजरें कुछ अलग थीं — सम्मान में छिपी हुई कुछ और।अगले दिन ऑफिस में आर्यन ने फिर पूछा, "सोचा होली के बारे में?"
माहीन ने शरमाकर सिर झुका लिया। "देखती हूँ।" आर्यन की आँखों में चमक आई। वो जानता था — धीरे-धीरे रंग लगेगा।
माहीन घर गई। अम्मी से फोन पर बात की। अम्मी ने कहा, "बेटी, त्योहार से दूर रहो। " लेकिन माहीन का मन नहीं माना। वो ड्रेसिंग टेबल के सामने खड़ी हुई। उतारा। बाल खोले। आईने में खुद को देखा। "क्या मैं सच में इतनी खूबसूरत हूँ?" पहली बार उसने सोचा। फैसल की याद आई, लेकिन आर्यन की स्माइल भी। दिल में एक हल्की सी उथल-पुथल। उपरवाले से माफी मांगी, लेकिन नींद नहीं आ रही थी
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Great start! Please don't hurry up for early sex encounter. Let there be slow and steady seduction by the hero or Villain. And let there be great resistance from Maheen as she is a pakeeza,majabi and strictly faithful wife of an aristocratic rich family. So it will not be easy task for the villain to compel Maheen to fall into his evil sex trap.
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Congrats for new story. Fantastic start.
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(19-01-2026, 09:29 PM)Rahul007 Wrote: Great start! Please don't hurry up for early sex encounter. Let there be slow and steady seduction by the hero or Villain. And let there be great resistance from Maheen as she is a pakeeza,majabi and strictly faithful wife of an aristocratic rich family. So it will not be easy task for the villain to compel Maheen to fall into his evil sex trap.
Agree with you.
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(19-01-2026, 09:29 PM)Rahul007 Wrote: Great start! Please don't hurry up for early sex encounter. Let there be slow and steady seduction by the hero or Villain. And let there be great resistance from Maheen as she is a pakeeza,majabi and strictly faithful wife of an aristocratic rich family. So it will not be easy task for the villain to compel Maheen to fall into his evil sex trap.
You are right.
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(19-01-2026, 09:29 PM)Rahul007 Wrote: Great start! Please don't hurry up for early sex encounter. Let there be slow and steady seduction by the hero or Villain. And let there be great resistance from Maheen as she is a pakeeza,majabi and strictly faithful wife of an aristocratic rich family. So it will not be easy task for the villain to compel Maheen to fall into his evil sex trap.
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Ek bhi story complete nahi hoti h tmhari to please na likho tm
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पार्ट 2: दिल की उथल-पुथल
Holi का दिन करीब आता जा रहा था। ऑफिस में माहौल रंगीन हो गया था — लोग पिचकारियाँ ला रहे थे, गुलाल की थैलियाँ टेबल पर रखी रहतीं, और लंच ब्रेक में होली सॉन्ग्स बजते। सब हँसते, प्लान बनाते — "इस बार बॉस को भी नहीं छोड़ेंगे!"
लेकिन माहीन चुपचाप अपनी सीट पर बैठी कोडिंग करती रहती। उसका मन कहीं और था। आर्यन की वो बात बार-बार याद आती — "जिंदगी में थोड़ा रंग चाहिए ना?" वो सोचती, "क्या सच में चाहिए? मेरी जिंदगी तो Upperwale ki रहमत से भरी है — फैसल है, फैमिली है, अच्छी जॉब है। फिर ये खालीपन क्यों? क्या मैं कमजोर हूँ जो ऐसे ख्यालात आ रहे हैं?" उसकी आँखें कभी-कभी नम हो जातीं, और वो बाथरूम में जाकर चेहरा धोती।
"Upperwale मुझे माफ करना। मैं फैसल की वफादार हूँ, लेकिन ये उदासी... ये दिल की पुकार क्यों?" वो याद करती फैसल की आखिरी विजिट — वो रात जब फैसल ने उसे गले लगाया था, और कहा था, "माहीन, तुम मेरी दुनिया हो। दूरियाँ बस टेम्परेरी हैं।" लेकिन अब वो दूरियाँ जैसे अनंत लगतीं। माहीन सोचती, "फैसल, तुम्हें पता है मैं कितना सह रही हूँ? रातें अकेली, दिन खाली। क्या प्यार सिर्फ़ यादों से जीता है?"
रात को घर लौटकर माहीन ***** पढ़ती। में dua मांगती, "या Upper Wale मेरे दिल को सुकून दे। फैसल को जल्दी वापस बुला। ये अजीब से ख्यालात क्यों आ रहे हैं? क्या मैं गुनाह की तरफ बढ़ रही हूँ?" लेकिन ***** के बाद भी मन शांत नहीं होता। वो बेड पर लेटती और फैसल की यादों में खो जाती। शादी की पहली रात याद आती — फैसल ने कितने प्यार से उसे छुआ था, कितना सम्मान दिया था। वो रातें जब फैसल घर पर होता, तो सुबह उठकर वो उसके लिए चाय बनाती, और फैसल पीछे से गले लगाकर कहता, "माहीन, तुम मेरी जान हो।"
अब वो सब दूर था। दुबई की व्यस्त जिंदगी ने फैसल को बदल दिया था — कॉल्स कम हो गई थीं, बातें छोटी। माहीन सोचती, "क्या मैं ही ज्यादा उम्मीद करने लगी हूँ? या सच में अकेलापन खा रहा है मुझे? फैसल, काश तुम समझते मेरा दर्द। मैं रोज रोती हूँ, लेकिन तुम्हें बताती नहीं — डरती हूँ कि तुम और दूर हो जाओगे।" उसकी छाती भारी हो जाती, और वो तकिए में मुँह छिपाकर सिसकियाँ लेती। "
Upperwale ताकत दो। लेकिन ये खालीपन... ये जैसे कोई हिस्सा मिसिंग है।"अम्मी से फोन पर बात होती। अम्मी कहतीं, "बेटी, सब्र रखो। फैसल अच्छा लड़का है, जल्दी आएगा। माहीन हाँ कहती, लेकिन दिल में एक सवाल उठता — "अम्मी, क्या सब्र से सब ठीक हो जाता है? क्या औरत का दिल कभी थकता नहीं? मैं बचपन से सब सहती आई हूँ
— कॉलेज में हिजाब की वजह से दोस्त कम, कॉलेज में लड़कों की नजरें, शादी में दूरियाँ। क्या जिंदगी बस सहना है?" वो ये बात किसी से शेयर नहीं करती। फैमिली में ऐसे ख्यालात गुनाह समझे जाते। उसकी छोटी बहन सारा तो अभी कॉलेज में थी — माहीन उसे देखकर सोचती, "मैं भी कभी ऐसी ही थी — बेफिक्र, पाक। अब क्या हो गया है मुझे? क्या ये अकेलापन मुझे बदल रहा है?
Upperwale, मुझे वापस वैसी बना दो।" लेकिन रातें और लंबी लगतीं, और नींद नहीं आती। वो कभी-कभी पुरानी फोटोज देखती — फैसल के साथ हनीमून की, जहां वो खुश थी। लेकिन अब वो खुशी दूर लगती। दिल में एक डर — क्या ये दूरियाँ हमें अलग कर देंगी? क्या फैसल वहाँ खुश है? क्या वो भी मेरी तरह रोता है?
ऑफिस में आर्यन के साथ काम करते वक्त माहीन का दिल तेज़ धड़कता। आर्यन पास आकर कोड एक्सप्लेन करता, तो उसकी साँसें माहीन की गर्दन पर पड़तीं। आर्यन की खुशबू — एक हल्की सी परफ्यूम, जो मर्दाना लगती। माहीन शरमाकर नजरें झुका लेती। लेकिन मन में विचार आता, "आर्यन जी कितने कॉन्फिडेंट हैं। हमेशा मुस्कुराते। फैसल भी पहले ऐसे ही था। लेकिन अब... आर्यन की बातों में एक अजीब सा सुकून है। क्या ये गुनाह है?"
आर्यन कभी-कभी कंप्लीमेंट देता — "माहीन, तुम्हारा ये हिजाब बहुत सूट करता है। तुम्हारी आँखें और चमकती हैं।" माहीन लाल हो जाती, "आर्यन जी, बस कीजिए। ये ऑफिस है। लेकिन... शुक्रिया।" अंदर से एक मीठी सी सिहरन होती। पहली बार किसी गैर मर्द की तारीफ़ ने उसे अच्छा लगा। वो सोचती, "ये क्यों अच्छा लग रहा है?
फैसल की तारीफ़ से अलग क्यों? Upperwale माफ करना। मैं कमजोर हूँ। लेकिन ये भावनाएँ... जैसे कोई नई जिंदगी की झलक।"एक दिन लंच में आर्यन ने फिर होली की बात छेड़ी। "माहीन, पार्टी में आ रही हो ना? मैं स्पेशल ठंडाई बनाऊंगा — बिना भांग वाली, तुम्हारे लिए।
" माहीन हिचकिचाई। दिल में दो आवाज़ें — एक कहती, "मत जाओ, गुनाह है। फैसल नाराज़ होगा। अम्मी क्या कहेंगी?" दूसरी फुसफुसाती, "बस एक दिन। थोड़ा बदलाव। अकेलापन कम होगा। आर्यन के साथ बातें करके दिल हल्का होता है।" उसकी आँखें नम हो गईं। आर्यन ने देखा तो चिंता से पूछा, "माहीन, क्या हुआ? उदास क्यों?"
माहीन ने सिर झुका लिया, "कुछ नहीं आर्यन जी। बस... जिंदगी कभी-कभी भारी लगती है।" आर्यन का दिल पिघला — वो सोचता, "माहीन इतनी मजबूत दिखती है, लेकिन अंदर से टूट रही है। काश मैं उसके दर्द को शेयर कर पाता।" लेकिन बाहर से बस कहा, "माहीन, होली जैसे त्योहार खुशियाँ लाते हैं। ट्राई करो। मैं साथ हूँ।" माहीन का दिल धड़का — "साथ हूँ" सुनकर एक गर्माहट महसूस हुई। लेकिन गिल्ट की लहर — "फैसल, मुझे माफ कर दो। मैं सिर्फ़ दोस्ती कर रही हूँ।
"घर जाकर माहीन ने वार्डरोब खोला। उसने एक लाइट पिंक सलवार-कमीज निकाली — जो फैसल ने गिफ्ट की थी। आईने के सामने खड़ी होकर ट्राई की। दुपट्टा सिर पर रखा, लेकिन हल्का सा साइड किया ताकि चेहरा ज्यादा दिखे। खुद को देखकर सोची, "क्या मैं ये पार्टी के लिए तैयार कर रही हूँ? नहीं, बस ऐसे ही। लेकिन आर्यन जी की तारीफ़... काश फैसल भी अब ऐसे कहता।" उसकी आँखों में आँसू आ गए। "फैसल, तुम क्यों नहीं समझते मेरा दर्द? मैं तड़प रही हूँ।"
रात को फैसल से कॉल आई। फैसल थका हुआ लगा — "माहीन, आज मीटिंग थी। तुम ठीक हो?" माहीन ने होली पार्टी की बात छिपाई। बस कहा, "सब ठीक है। तुम कब आओगे?" फैसल ने कहा, "अगले महीने ट्राई करूंगा।" कॉल कटने के बाद माहीन रोने लगी। तकिए में मुँह छिपाकर। "फैसल, मुझे माफ कर दो। मैं कमजोर पड़ रही हूँ। लेकिन ये अकेलापन... ये जैसे मुझे किसी नए रास्ते की तरफ खींच रहा है।
Upperwale सही रास्ता दिखा।"अगले दिन ऑफिस में होली पार्टी शुरू हो गई। माहीन आई — देर से, लेकिन आई। हिजाब में, लेकिन मुस्कुराती। आर्यन ने दूर से देखा तो दिल खुश हो गया। वो पास आया, हाथ में हल्का गुलाल। "वेलकम माहीन। आज थोड़ा रंग लगेगा?"
माहीन का दिल तेज़ धड़का। गिल्ट की लहर आई —, फैमिली सब याद आए।
लेकिन आँखें आर्यन से मिलीं तो कुछ पिघल सा गया। वो फुसफुसाई, "बस थोड़ा सा... सिर्फ़ गाल पर।" आर्यन ने धीरे से गुलाल लगाया — माहीन के गाल पर। स्पर्श हल्का, लेकिन बिजली सा। माहीन की आँखें बंद हो गईं एक पल के लिए। दिल में तूफान — खुशी, डर, गिल्ट, और एक अजीब सी चाहत। "ये रंग... कितना मीठा लग रहा है। लेकिन फैसल, मैं क्या कर रही हूँ? Faisal mere wafadar Shauhar mujhe माफ करना
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पार्ट 3: पार्टी का पहला स्पर्श और सहेलियों की शुरुआत Holi पार्टी ऑफिस में जोरों पर थी। संगीत बज रहा था — होली के गाने, जो माहीन के कानों में पहली बार इतने जोर से गूंज रहे थे। लोग रंग लगाते, हंसते, डांस करते। माहीन कोने में खड़ी थी, हाथ में एक गिलास ठंडाई का, जो आर्यन ने स्पेशल उसके लिए बनाई थी — बिना कुछ मिलाए।
उसका दिल अभी भी उथल-पुथल में था। गाल पर लगा गुलाल अभी भी गर्म लग रहा था — आर्यन का स्पर्श जैसे त्वचा पर रुक गया हो। वो सोचती, "ये क्या हो रहा है? बस एक रंग, लेकिन दिल क्यों इतना तेज धड़क रहा?
Faisal, अगर तुम्हें पता चला तो क्या सोचोगे? मैंने कुछ गलत तो नहीं किया... बस एक टच। लेकिन ****** मुझे माफ करना। मैं घर जाकर ***** पढ़ूंगी, सब ठीक हो जाएगा।" उसकी आँखें नम हो गईं। पार्टी की खुशी में वो खुद को अकेला महसूस कर रही थी — जैसे सब खुश हैं, लेकिन वो बीच में फंसी है, दो दुनिया के बीच। एक तरफ उसकी पाकीजगी, फैमिली, मजहब; दूसरी तरफ ये नई सी आजादी की झलक। "क्या ये आजादी है?
या गुनाह की शुरुआत? फ...सल, तुम दूर हो, लेकिन तुम्हारी याद मुझे रोक रही है। लेकिन ये स्पर्श... क्यों अच्छा लगा?" उसकी छाती भारी हो गई, और वो मन ही मन रो रही थी, लेकिन बाहर से मुस्कुराती रही।
दिल में गिल्ट की लहर — "***** मैं क्या कर रही हूँ? घर लौटकर माफी मांगूंगी।"आर्यन पास आया, उसके चेहरे पर मुस्कान। "माहीन, एंजॉय कर रही हो? देखो, सब कितने खुश हैं। होली का मतलब ही है — पुरानी बातें भूलकर नई शुरुआत।
" माहीन ने सिर झुका लिया। "आर्यन जी, अच्छा लग रहा है... लेकिन दिल भारी है। घर याद आ रहा है, फ...सल याद आ रहे हैं। क्या मैं यहां होनी चाहिए? क्या ये सब मेरे लिए है?"
आर्यन का दिल पिघला। वो सोचता, "माहीन इतनी ईमानदार है। उसकी उदासी मुझे चुभती है। काश मैं उसे दिखा पाता कि जिंदगी में रंग कितने जरूरी हैं। लेकिन धीरे-धीरे... वो तैयार नहीं अभी।
उसके दिल का दर्द... मैं समझता हूँ, मेरा भी ब्रेकअप हुआ था।" वो बोला, "माहीन, उदास मत हो। चलो, मैं तुम्हें इंट्रोड्यूस करवाता हूँ कुछ सहेलियों से। वो तुम्हें कंपनी देंगी, शायद दिल हल्का हो जाए।
"आर्यन उसे ले गया एक ग्रुप की तरफ — चार लड़कियाँ खड़ी थीं, हंसती-बातें करतीं। पहली थी प्रिया — 26 साल की, ऑफिस में जूनियर डेवलपर। लंबे बाल, मॉडर्न ड्रेस में, लेकिन ट्रेडिशनल ज्वेलरी पहने। दूसरी नेहा — 28 साल की, सिंगल, बहुत ओपन-माइंडेड, वेस्टर्न कपड़ों में,
जो पार्टी में रंग से सनी थी।
3rd फातिमा — 27 साल की, माहीन जैसी ही, लेकिन थोड़ी ज्यादा सोशल, दुपट्टा सिर पर लेकिन स्टाइलिश तरीके से।
चौथी रिया — 25 साल की, ,., बैकग्राउंड लेकिन बहुत ओपन — छोटे बाल, जींस-टॉप में, फातिमा की क्लोज फ्रेंड।
आर्यन ने इंट्रोड्यूस किया, "ये माहीन है, हमारी टीम की। माहीन, ये प्रिया, नेहा, फातिमा और रिया।"प्रिया ने मुस्कुराकर हाथ मिलाया। "हाय माहीन! पहली बार होली पार्टी में? मैं तो हर साल आती हूँ। होली में कितना मजा है — रंग लगाना, डांस करना। मेरे घर में तो पूजा होती है, भ...वान को रंग चढ़ाते हैं। हि** धर्म में ऐसे त्योहार औरतों को आजादी देते हैं — कोई सख्ती नहीं, बस खुशी और भक्ति।"
माहीन चौंकी — "भ...वान? आजादी? मतलब?" प्रिया हंसी, "हाँ, हमारे H**** धर्म में। जैसे देवी-देवता हमें सिखाते हैं कि जिंदगी रंगों से भरी हो। लेकिन अभी पार्टी है, बाद में बताऊंगी डिटेल्स।
तुम्हारा गाल पर रंग अच्छा लग रहा है!" माहीन शरमा गई, लेकिन प्रिया की बातों में एक अजीब सी जिज्ञासा जगी। "धर्म... क्या वो सच में आजादी देता है? मेरे मजहब में तो... लेकिन सुनकर अच्छा लगा। क्या मैं कभी जान सकती हूँ?"
नेहा ने गुलाल लगाते हुए कहा, "अरे माहीन, रिलैक्स! जिंदगी में थोड़ी आजादी लेनी चाहिए। मैं तो कहती हूँ, शादी के बाद भी फन करो। जैसे हॉट लगना, सेक्सी फील करना। हिजाब के नीचे भी तुम हॉट हो, थोड़ा मेकअप ट्राई करो, टाइट कपड़े।
शौहर दूर हैं, तो क्या? खुद को एंजॉय करो। सेक्सी बनने में क्या बुराई? मजा आता है जब लोग नजरें घुमाकर देखें।"
माहीन की आँखें फैल गईं — "सेक्सी बनने? नेहा, ये... गुनाह है। फ...सल क्या कहेंगे?" लेकिन अंदर से एक सिहरन हुई। वो सोचती, "क्या मैं कभी ऐसी बन सकती हूँ? हॉट... सेक्सी। फ...सल तो कभी नहीं कहते। लेकिन... कैसा लगता होगा? क्या आजादी यही है?"
फातिमा, जो माहीन जैसी ही थी, ने गले लगाया। "माहीन, मैं समझती हूँ। मैं भी thumari wali हूँ, लेकिन थोड़ी ओपन हो गई हूँ। आजादी लेनी पड़ती है। और सेक्स के मजों के बारे में... वो तो अलग दुनिया है। मैं
ने ट्राई किया है — zina Kiya h ***** से।"
माहीन चौंकी, "फातिमा, तुम... ***** से? कैसा लगा? डिटेल में...?" फातिमा फुसफुसाई, "हाँ, मजा? जैसे बॉडी में आग लग जाती है।
पहली बार स्पर्श — उँगलियाँ गर्दन पर, फिर दूध दबाए, निप्पल चूसे। नीचे... चूत पर जीभ, गीला कर दिया। फिर Special लंड घुसा — मोटा, जो भर देता है। दर्द पहले, फिर मजा — झड़ना, चीखना। हलाल छोड़कर हराम, लेकिन वो खुशी... स्वर्ग mil jata h H***** लड़के अलग — कोई बंदिश नहीं, बस प्यार। लेकिन धीरे-धीरे ट्राई करो।"
रिया ने आँख मारकर कहा, "माहीन, मैं भी मु**** हूँ, लेकिन अब ओपन। आजादी मतलब — खुद चुनना। मैंने हिं**** बॉयफ्रेंड से सेक्स किया — वाह, क्या मजा! डिटेल? वो छूता तो बिजली दौड़ती। दूध मसलता, गांड पर थप्पड़। चूत में उँगलियाँ, फिर special लंड — 8 इंच, जो अंदर तक जाता। मजा? जैसे बॉडी काँपती, ऑर्गैज्म बार-बार।
हिं**** से रिलेशन — कोई गुनाह नहीं लगता, बस फ्रीडम। तुम ट्राई करो, शौहर दूर हैं।"
माहीन का चेहरा लाल हो गया, बदन गरम। "रिया, फातिमा... इतनी डिटेल? दर्द? मजा? Faisal माफ करना। लेकिन... क्यों अच्छा लग रहा है? क्या मैं भी...?"माहीन थोड़ी देर और रुकी। सहेलियाँ हंसाती रहीं —
प्रिया ने फेस्टिवल्स की छोटी स्टोरी सुनाई, नेहा ने आजादी की बातें, फातिमा और रिया ने सेक्स के हल्के मजों का। लेकिन माहीन का मन आर्यन पर अटका था — वो दूर से देखकर मुस्कुरा रहा था। "आर्यन जी... तुम्हारी वजह से ये हुआ। लेकिन अच्छा लग रहा है। फ...सल, मुझे माफ कर दो। मैं बस दोस्त बना रही हूँ।" घर जाते वक्त माहीन रोई। "Faisal क्या मैं बदल रही हूँ? ये सहेलियाँ... धीरे-धीरे बेहका रही हैं। लेकिन जिज्ञासा... रोक नहीं पा रही
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पार्ट 4: सहेलियों की बातों का असर और नेहा की स्टोरी
)होली पार्टी से लौटकर माहीन का मन शांत नहीं था। घर पहुंचते ही उसने दरवाजा बंद किया और बेड पर गिर पड़ी। आँखें बंद करके वो सहेलियों की बातें याद करने लगी — नेहा की आजादी वाली बातें, प्रिया का dhaर्म का जिक्र, फातिमा और रिया की सेक्स के मजों वाली डिटेल्स। "ये क्या सुन लिया मैंने?
नेहा कह रही थी हॉट बनो, सेक्सी फील करो... क्या मतलब? मैं तो कभी सोचती भी नहीं। लेकिन... कैसा लगता होगा? क्या मैं भी कभी खुद को ऐसे देख सकती हूँ — हॉट, सेक्सी, आजाद?
फ...सल, तुम दूर हो, लेकिन तुम्हारी याद मुझे रोक रही है। लेकिन ये बातें... क्यों दिल छू रही हैं?" उसकी साँसें तेज हो गईं, आँखों में आँसू आ गए। फातिमा की वो फुसफुसाहट याद आई — "हिं**** लड़के से ट्राई किया... हलाल छोड़कर हराम, लेकिन वो खुशी... स्वर्ग।"
माहीन सिहर गई, बदन में एक अजीब सी गर्माहट, लेकिन साथ में गिल्ट की लहर। Faisal मुझे माफ करना। ये गुनाह है। लेकिन क्यों मन नहीं मान रहा? रिया की बातें — हिं**** से रिलेशन, कोई बंदिश नहीं, बॉडी काँपती, ऑर्गैज्म बार-बार। क्या फ...सल के साथ भी ऐसा होता? नहीं, वो तो बस नॉर्मल... लेकिन ये डिटेल्स... क्यों जिज्ञासा बढ़ रही है? क्या मैं कमजोर हूँ? या अकेलापन मुझे तोड़ रहा है?" उसका दिल तेज धड़क रहा था, छाती में दर्द सा।
प्रिया की बातें — "***** धर्म में औरतें देवी हैं, कोई सख्ती नहीं।" माहीन सोचती, "क्या मेरे मजहब में ऐसी आजादी नहीं? मैं क्यों बंधी हूँ? फ...सल, अगर तुम यहां होते तो शायद ये ख्यालात नहीं आते। लेकिन अब... क्या ये सहेलियाँ सही हैं? धीरे-धीरे ट्राई करो... लेकिन मैं? क्या मैं बदल सकती हूँ? Upperwale मुझे ताकत दो, लेकिन ये भावनाएँ... जैसे दिल रो रहा है, लेकिन साथ में एक नई उम्मीद जाग रही है।"
रात भर वो करवटें बदलती रही, गिल्ट, उदासी, और उत्सुकता के बीच। आँसू बहते रहे — "फ...सल, सॉरी। मैं बस सुन रही हूँ, लेकिन ये बातें... मुझे बदल रही हैं।
"अगले दिन ऑफिस में माहीन थकी हुई पहुंची, आँखें सूजी हुईं। लंच टाइम में सहेलियाँ फिर मिलीं — कैफेटेरिया में
। नेहा ने देखते ही कहा, "माहीन, कल की बातें सोची? आजादी, हॉट बनना? लगता है रात भर रोई हो... दिल भारी है?" माहीन की आँखें फिर नम हो गईं। "हाँ नेहा... पूरी रात सोचती रही। उदास हो गई। फ...सल की याद, गिल्ट... लेकिन तुम्हारी बातें... जिज्ञासा बढ़ा रही हैं। डिटेल में नहीं समझी। बताओ ना, एक-एक करके। तुम्हारी स्टोरी से शुरू करो।"
सहेलियाँ हंस पड़ीं, लेकिन नेहा ने गंभीर होकर चाय का सिप लिया और शुरू की, "ठीक है, सुनो मेरी स्टोरी।
Note sabhi saheliyon ki story shorts m bateyi jayegi kyunki Focus Maheen pr bna rhe
ये सिर्फ सेक्स की नहीं, भावनाओं की भी है। मैं 22 साल की थी, कॉलेज में। दिल टूटा हुआ था — पहला ब्रेकअप, उदासी में डूबी। लगता था जिंदगी खत्म। तभी मिला वो — अमीर, हैंडसम बॉयफ्रेंड। पहली बार किसी ने मुझे देखा जैसे मैं स्पेशल हूँ। पहली डेट पर पार्क में ले गया। बातें की — मेरे दर्द सुने, गले लगाया। स्पर्श से बॉडी में बिजली दौड़ी, दिल रोया लेकिन खुशी से। फिर किस — होंट मिले, जीभ अंदर घुसी, चूसते हुए। मैं काँप गई, आँसू आ गए — उदासी भूल गई। घर जाकर पहली बार खुद को छुआ — चूत पर उँगली फेरी, गीली हो गई। निप्पल मसले, सिसकारी निकली। मजा? जैसे दिल का दर्द बाहर निकल रहा हो। लेकिन भावुकता... जैसे कोई मुझे पूरा कर रहा है। फिर अगली मीटिंग में होटल ले गया। कमरे में घुसते ही गले लगाया, रोते हुए। 'तुम हॉट हो,' बोला। कपड़े उतारे — धीरे-धीरे, हर इंच को चूमते।
मेरे दूध देखकर आँखों में प्यार — चूसे, दबाए जोर से, निप्पल काटे हल्के से। दर्द हुआ, लेकिन मीठा दर्द — जैसे मेरी उदासी मिट रही हो। फिर नीचे — जीभ फेरी क्लिट पर, चाटा लंबे समय तक, उँगली अंदर-बाहर। मैं चीखी, रोई, झड़ी दो बार — आँसू खुशी के। दिल कह रहा था, 'ये आजादी है, कोई बंदिश नहीं।' फिर N kat लंड दिखाया — 7 इंच, मोटा, chamri वाली। मैंने मुँह में लिया — चूसा धीरे-धीरे, जीभ से चाटा, गला तक ठोंका। उल्टी आई, लेकिन मजा आया — जैसे मैं कंट्रोल में हूँ। फिर चूत में घुसाया — पहली बार दर्द, जैसे फट रही हूँ, खून निकला, रोई जोर से।
लेकिन वो रुका, गले लगाया, 'प्यार करता हूँ' बोला। फिर धीरे-धीरे ठोंकना शुरू — अंदर-बाहर, स्पीड बढ़ाई। मिशनरी में दूध चूसते, फिर डॉगी में गांड पर थप्पड़ मारते, जोर से धक्के। मैं बोली, 'जोर से! मेरा दर्द निकालो!' वो घुमा-घुमाकर चोदा — साइड से, ऊपर से, हर एंगल। मजा? जैसे बॉडी जल रही, लेकिन मीठी आग — चूत गीली, लंड स्लाइड करता, ऑर्गैज्म बार-बार, काँपती रही। अंत में मुँह में झड़ा — गर्म वीर्य, निगला मैंने, आँसू बहते रहे खुशी के।
वो रात... उदासी मिटी, आजादी मिली। अब मैं सेक्सी बन गई — टाइट ड्रेस, मेकअप, हर रात अलग लड़के। लेकिन वो पहली बार... भावुक था, जैसे दिल जुड़ गया। आजादी यही है — कोई गुनाह नहीं, बस बॉडी और दिल की जरूरत। तुम ट्राई करो, माहीन। हिजाब उतारो, हॉट बनो। शौहर दूर हैं, क्या पता कितना मजा आए, कितनी उदासी मिटे।" नेहा की आँखें नम हो गईं, जैसे यादें ताजा हो गईं।माहीन सुनकर काँप गई, आँसू बहने लगे — "नेहा, इतनी डिटेल... भावुक... दर्द, मजा, प्यार? मैं... रो रही हूँ। लेकिन अगली स्टोरी?" नेहा हंसी, "एक पार्ट में एक। कल प्रिया की सुनना।" माहीन का मन और उलझ गया। नेहा की स्टोरी बार-बार याद आ रही थी — "किस, चूसना, ठोंकना, ऑर्गैज्म... क्या मैं भी? Ammi रोक lo लेकिन... जिज्ञासा। Faisal सॉरी। धीरे-धीरे... देखती हूँ
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Update Kaisa ja raha reply jarur kare
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(19-01-2026, 09:29 PM)Rahul007 Wrote: Great start! Please don't hurry up for early sex encounter. Let there be slow and steady seduction by the hero or Villain. And let there be great resistance from Maheen as she is a pakeeza,majabi and strictly faithful wife of an aristocratic rich family. So it will not be easy task for the villain to compel Maheen to fall into his evil sex trap.
Dekhte hai kya ho sakta hai
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Bhai ap ne sab se best Rabiya vali story incomplete chor. Di hai
Hope use app pura karo ge
Or next update plz right in Hinglish font ..
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(20-01-2026, 12:26 AM)nsmb420 Wrote: Bhai ap ne sab se best Rabiya vali story incomplete chor. Di hai
Hope use app pura karo ge
Or next update plz right in Hinglish font ..
Wo bhi Puri hogi or Story Hindi m likh chuka hu isliye hinglish font mushkil hai
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Waiting for next update... Hope it should be in Hinglish font..
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(Yesterday, 01:14 AM)nsmb420 Wrote: Waiting for next update... Hope it should be in Hinglish font..
Hindi likh chuka bahut aage tk ab Hinglish m likhna possible nhi h
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