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Adultery मेरी खूबसूरत पत्नी खुशबू भोला भाला बुद्धू सा में और बहुत सारे ,., मर्द
kitna acha likhate ho aap... aapke next update ka besabri se intzar hai
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4 days mai next update
[+] 2 users Like Namard pati's post
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aaj 4th day hai!!!
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खुशबू और असलम शावर से बाहर निकले,

लेकिन उनकी त्वचा पर वो गर्माहट अभी भी बाकी थी

पानी की बूंदें सूख रही थीं,


हवा में साबुन की मीठी लैवेंडर महक मिश्रित होकर एक कामुक बादल बना रही थी।


असलम ने सफ़ेद टॉवल कमर पर लपेटा, उसकी चौड़ी छाती पर पानी की लकीरें धीरे-धीरे वाष्पित हो रही थीं,


और उसके मसल्स की हर लाइन में वो मर्दाना ताकत झलक रही थी जो खुशबू को बार-बार खींचती थी।



मन ही मन वो सोच रहा था,



‘ये दू लड़की… मेरे कंट्रोल में… शादी के तीन महीने बाद पहली बार किसी रियल मर्द के साथ…


मैंने इसे हलाल कर दिया… अमित बेचारा… सोचता होगा हम सो गए… लेकिन ये वासना… ये पावर… स्लिम मर्द होने का ये अहंकार…

उफ्फ… कितना मजा है…’



उसकी आँखों में वो संतुष्टि थी, लेकिन साथ ही भूख भी—जैसे शाम अभी बाकी हो।




खुशबू ने अंदर काली लेस वाली ब्रा पहन ली


वो इतनी पतली थी कि उसके निप्पल्स की हल्की-हल्की शेप साफ़ महसूस हो रही थी,


और ऊपर सफ़ेद टॉवल लपेटा


टॉवल का नरम कपड़ा उसकी गोरी त्वचा पर चिपक रहा था,


घुटनों तक आता हुआ,


लेकिन हर कदम पर हल्का-सा सरकने का खतरा। उसके बाल गीले और बिखरे हुए थे,



चेहरे पर वो पोस्ट-ऑर्गास्मिक ग्लो गुलाबी गाल, आँखें थकी लेकिन चमकदार।



मन ही मन वो सोच रही थी,




‘असलम का ये बॉडी… ये टच… कितना अलग है अमित से…


अमित तो बस देखता है,

हिलाता है…

लेकिन असलम… वो मुझे जीतता है…


और अमित को नीचा दिखाने का मजा… उफ्फ… नीचे वो नौकरों के साथ बैठा होगा…

मैं रानी हूँ, वो नौकर… ये अपमान… मुझे और वाइल्ड बना रहा है…’




उसकी मनोदशा एक मिश्रण थी—संतुष्टि की, लेकिन साथ ही शैतानी की, जैसे वो अमित के दर्द में ही अपनी खुशी ढूँढ रही हो।





असलम ने खुशबू को गले लगाया, उसके गीले बालों को सहलाया


“जान… शावर तो कमाल था… लेकिन अब… रेस्ट…”



लेकिन खुशबू की नज़र कमरे की खिड़की से नीचे पर गई



बीच पर अमित जय और बाकी नौकरों के साथ बैठा था,

हँस-मज़ाक कर रहा था।


खुशबू को ये देखकर एक शैतानी लहर दौड़ गई



‘बेचारा… निचले तबके के लोगों के साथ घुल-मिल गया… जैसे खुद भी उनका हिस्सा हो… अमित… तू मेरा पति है, लेकिन देख… मैं तुझे नीचा दिखाने का एक भी मौका नहीं छोड़ूँगी…’



वो इतनी शातिर थी कि अमित को नीचा दिखाने का ये मौका हाथ से न जाने देना चाहती थी। वो असलम के कान में फुसफुसाई,



“असलम जी… अमित नीचे उन नौकरों के साथ बैठा है… बातें कर रहा है… चलो, उसे बुलाते हैं… जूस मंगवाते हैं… और फिर फोटोज… उसे याद दिला दूँ कि वो हमारा सर्वेंट है…”




असलम ने मुस्कुराकर सिर हिलाया,


“हाँ जान… बुला लो… बेचारे को थोड़ा काम मिलेगा… और हमें मजा…”



वो दोनों कमरे में घूमे, लेकिन खुशबू ने फोन उठाया,


जय का नंबर डायल किया


वो नौकर जो सबसे ज़्यादा अमित के करीब था।



“हैलो जय भाई… ऊपर आ जाओ ना… थोड़ा काम है… जल्दी…”



उसकी आवाज़ में वो मीठी कमांड थी, जैसे कोई रानी अपने नौकर को बुला रही हो।



जय तुरंत आ गया


उसके चेहरे पर उत्सुकता थी, लेकिन जैसे ही दरवाज़ा खुला,

वो खुशबू को टॉवल में देखकर रुक गया।


कमरा अभी भी भाप से भरा था, हवा गर्म और नम, बेडशीट उलझी हुई। असलम सोफे पर लेटा था, टॉवल में, मुस्कुराता हुआ।




खुशबू ने जय को अंदर आने दिया, दरवाज़ा बंद किया,


और बड़े नखरे और नाटक से शुरू हो गई।



वो मिरर के सामने खड़ी हो गई, टॉवल को हल्का-सा ढीला किया


जैसे अनजाने में—और बोली,



“अरे जय भाई… ये टॉवल… कितना टाइट हो गया… शावर के बाद… उफ्फ… थोड़ा ढीला करूँ… लेकिन ये ब्रा-पैंटी… गीली हो गई हैं… निकालनी पड़ेगी…”



वो जानबूझकर धीरे-धीरे टॉवल को ऊपर उठाई


जय की आँखें फैल गईं, वो थोड़ा-सा झलक पा गया खुशबू की गोरी जाँघों का,


ब्रा की काली लेस का किनारा।


खुशबू ने नाटक करते हुए टॉवल को और ढीला किया, अंदर हाथ डाला, और ब्रा का हुक खोल दिया

क्लिक की हल्की आवाज़ गूँजी।




“ओह्ह… ये ब्रा… कितनी चिपक गई… निकालती हूँ…”



वो बोली, और ब्रा को बाहर निकाल ली



लेकिन टॉवल से ढककर, जय को बस एक सेकंड का झलक मिला उसके निप्पल्स का, गोरी छाती का।




फिर पैंटी—वो टॉवल के नीचे से खींची, धीरे-धीरे, जैसे नखरे दिखा रही हो



“ये पैंटी… गीली… उफ्फ… निकालो तो…”




[Image: In-Shot-20260106-190200491.gif]



जय का मुंह सूख गया, वो घूरता रह गया, मन ही मन सोच रहा था,


‘मैडम… कितनी बोल्ड… साहब के सामने… ब्रा-पैंटी निकाल रही… मैं तो बस देख रहा हूँ… काश छू पाता…’




असलम सब समझ गया था


खुशबू का ये नाटक अमित को नीचा दिखाने का था।


वो हँसकर बोला,


पति की तरह बर्ताव करते हुए,



“जान… क्या कर रही हो… जय भाई के सामने… लेकिन ठीक है… निकाल लो… मैं हूँ ना… वैसे भी अब तो जए घर का ही आदमी है…”


वो उठा, खुशबू के पास आया,

उसके कंधे पर हाथ रखा,

जैसे कोई पति अपनी बीवी को सहारा दे रहा हो।



असलम ने खुशबू की कमर सहलाई, टॉवल को हल्का-सा सँभाला,

जैसे वो उसका हक जता रहा हो।


जय शर्म से लाल हो गया, लेकिन घूरता रहा।




खुशबू ने उतरी हुई ब्रा और पैंटी

गीली, चिपचिपी

जय के हाथ में थमा दी



जय भाई… ये ले जाओ… अमित को बोलना… अच्छे से धोकर साफ कर दे… वो तो जानता है ना… हमारी चीजें कैसे हैंडल करनी हैं…”



वो बोली, हँसते हुए, जैसे ये नॉर्मल बात हो।



जय ने ब्रा-पैंटी लीं—उनकी गर्माहट, नमी महसूस हो रही थी


और हकलाते हुए बोला,



“ह… हाँ मैडम… मैं… बोल दूँगा…”



असलम ने हँसकर कहा,



“हाँ भाई… अमित अच्छा काम करेगा… वो हमारा फेवरेट है…”


खुशबू ने फिर बोली,



“अब जाओ जय भाई… थैंक यू… दरवाज़ा बंद करते हुए जाओ…”


जय बाहर निकला, लेकिन खुशबु janti थी कि नीचे जाकर ये सीन अमित को बताएगा


‘मैडम ने ब्रा-पैंटी निकाली…

साहब के सामने…


और अमित को धोने को दिया…’


अमित को ये सुनकर जलन होगी, कन्फ्यूजन बढ़ेगा—‘खुशबू ने मेरे सामने क्यों नहीं किया? और जय को…?’

खुशबू ने दरवाज़ा बंद होते ही असलम की तरफ़ मुड़ी, हँसकर बोली,


“देखा असलम जी… अमित को नीचा दिखाने का ये मौका… कितना मज़ेदार था… जय नीचे जाकर बताएगा… अमित जल जाएगा…”


असलम ने उसे गले लगा लिया, “हाँ जान… तू तो क्वीन है… अब आ… असली मस्ती शुरू करते हैं…”





जय नीचे सर्वेंट क्वार्टर में पहुँचा, उसके हाथ में खुशबू की गीली ब्रा-पैंटी लिपटी हुई थी



काली लेस वाली,


अभी भी पानी की बूंदें टपक रही थीं,

और हवा में वो हल्की-हल्की कामुक महक फैला रही थी।



मैं चेयर पर बैठा था, जय के साथी नौकरों की बातें सुन रहा था, लेकिन मन कहीं और था


बीच पर असलम और खुशबू की वो मस्ती, फोटोज, वो चिपकाव…


सब घूम रहा था।



जय ने मेरे पास आकर बैठ गया, उसके चेहरे पर वो शैतानी मुस्कान थी,


जैसे वो कोई बड़ा राज़ लेकर आया हो।



“भाई अमित… ऊपर क्या सीन था रे… तू तो कल्पना भी न करे… मैडम और साहब… उफ्फ… शावर से ताज़ा निकले थे… साथ नहाकर… भाप भरी हवा… साबुन की महक… और मैडम… टॉवल में लिपटी… लेकिन वो नखरे… वो नाटक…”





मैंने हल्के से पूछा,


“क्या हुआ ऊपर?

जय भाई… बोल ना…”



लेकिन अंदर से दिल धक-धक कर रहा था


शक की एक लहर उठी, लेकिन साथ ही एक अजीब रोमांच भी, जैसे मैं जानना चाहता था, लेकिन डर भी लग रहा था।


जय ने मिर्च-मसाला डालकर, अश्लील शब्दों से शुरू किया—जैसे वो जानता हो कि ये सुनकर मैं जलूँगा, लेकिन एक्साइट भी हो जाऊँगा।





जय (आँखें चमकाते हुए, आवाज़ दबाकर लेकिन उत्साह से):  




“भाई… ऊपर पहुँचा तो सीन देखा… मैडम टॉवल में लिपटी, साहब भी टॉवल में… दोनों शावर से ताज़ा… भाप भरी हवा… साबुन की वो मीठी महक… जैसे अभी-अभी चुदाई का राउंड खत्म हुआ हो… मैडम मिरर के सामने खड़ी…


‘अरे जय भाई… ये टॉवल टाइट हो गया… शावर के बाद…’



बोली, और नखरे करने लगी…



टॉवल को हल्का-सा ढीला किया… भाई… झलक मिल गई… वो गोरी जाँघें…


काली ब्रा का किनारा…


उफ्फ… साहब सोफे पर लेटे थे, मुस्कुरा रहे थे…



‘जान… क्या कर रही हो जय भाई के सामने…’ बोले, लेकिन हाथ मैडम की कमर पर… जैसे पति अपनी बीवी को सहारा दे रहा हो…”




मैंने साँस रोकी,


शक की एक चुभन हुई


‘शावर से ताज़ा… साथ नहाकर? क्या… क्या सच में?’


लेकिन रोमांच भी था,



जैसे कल्पना में वो दृश्य घूमने लगा—खुशबू का नंगा बॉडी,


असलम के साथ…


नीचे लंड में हलचल हुई।



“फिर… फिर क्या हुआ?” मैंने हकलाते हुए पूछा।

जय (हँसकर, और मिर्च डालते हुए):



“फिर मैडम ने नाटक किया…


‘ये ब्रा… गीली हो गई… निकालनी पड़ेगी…’ बोली, और टॉवल के अंदर हाथ डाला… क्लिक… हुक खुला… भाई… एक सेकंड का झलक… वो गोरी छाती… निप्पल्स सख्त…



साहब बोले



, ‘जान… जय भाई देख रहा है… लेकिन ठीक है… निकाल लो…’


फिर पैंटी… ‘ये भी चिपक गई…’ टॉवल के नीचे से खींची… धीरे-धीरे… भाई… वो गांड… थोड़ा-सा दिखा… गीली, चमकती… मैं तो बस घूरता रह गया… साहब हँसे,



‘जय भाई… मैडम की हर चीज़ मेरी है…’




और मैडम ने उतरी हुई ब्रा-पैंटी मुझे थमा दी…



‘अमित को बोलना… अच्छे से धोकर साफ कर दे…’ बोली… गीली… चिपचिपी… साहब की महक… मैडम की… उफ्फ… तू कल्पना कर भाई… तेरी mam shaheb साहब के साथ शावर ले रही थी… नंगी… चिपककर… और अब ये गंदगी तू धोएगा…”






ये सुनकर मेरे दिल में शक की एक तीर-सी चुभ गई


‘साथ शावर?


नंगी?


ब्रा-पैंटी…


जय को दिखाई?


और मुझे धोने को?’


बुरा लग रहा था, जैसे कोई चाकू सीने में घुसा हो

मेरी प्यारी पत्नी… असलम के साथ बाथरूम में… नंगी…

छूते हुए…


लेकिन साथ ही रोमांच था, एक अजीब-सी उत्तेजना


कल्पना में वो दृश्य घूमने लगा,


खुशबू का नंगा बॉडी,


असलम का तगड़ा लंड,



पानी की धारें…


नीचे लंड टाइट हो गया।



जलन की आग लग गई


कैसे… कैसे वो असलम के साथ नहा सकती है?


वो मेरी बीवी है…’



लेकिन रोमांस का वो ट्विस्टेड रूप भी था—अपमान में ही मजा…


जैसे मैं खुद ही ये सब चाहता हूँ।



मैंने जय से ब्रा-पैंटी ली—गीली, गर्म, खुशबू की महक…

असलम की भी…


उँगलियों में चिपक रही थी।



“ध… धन्यवाद जय भाई…” मैंने हकलाया, लेकिन हाथ काँप रहे थे।





जय चला गया, और मैं अकेले में कमरे की तरफ़ चला गया


सर्वेंट क्वार्टर में। दरवाज़ा बंद किया, लाइट डिम की, और बेड पर लेट गया।



ब्रा-पैंटी हाथ में थी—मैंने उसे सूंघा,


खुशबू की परफ्यूम महक,


साबुन की,


और कुछ और… गीली नमी…



मन में सारे दृश्य घूमने लगे।



बीच पर असलम का हाथ खुशबू की कमर पर…


बिकिनी गीली होकर चिपकी हुई…



उसकी छाती उछल रही…


असलम की मर्दानगी,


तगड़ा बॉडी…


खुशबू की केमिस्ट्री उसके साथ—हँसी

, चिपकाव…


‘वो दोनों… कितने परफेक्ट… मैं तो बस फोटोग्राफर…’


शक गहरा हो गया, लेकिन रोमांच चरम पर—मैंने अपना छोटा-सा लंड निकाला, हिलाने लगा।



हर क्लिक पर कल्पना:


खुशबू असलम की गोद में…



‘असलम जी… जोर से…’


ब्रा-पैंटी को सहलाते हुए



, उसकी नमी महसूस करते हुए…


मैं झड़ गया—


दो-तीन बूंदें,


लेकिन संतुष्टि नहीं,


बस और भूख। ‘



खुशबू… तुम मेरी हो… लेकिन…’



मन में कन्फ्यूजन घूम रहा था—


जलन, रोमांस, अपमान… सब मिक्स।



‘नहीं… ये गलत सोच रहा हूँ…


खुशबू बेचारी अपशकुन से डर रही है…


लेकिन… कन्फर्म कर लूँ…’


मन में कन्फ्यूजन था


जलन की आग,


रोमांस का वो बीमार रूप,


और डर कि कहीं खुशबू नाराज़ न हो जाए।



आखिरकार,

मैं उठा, कैमरा साइड में रखा,


और ऊपर सूट की तरफ़ चला गया


शक दूर करने के लिए कंसल्ट करने का फैसला ले चुका था।





सूट का दरवाज़ा नॉक किया। अंदर से खुशबू की आवाज़ आई,


“आओ…”


मैं अंदर गया। कमरा एक राजमहल जैसा लग रहा था


एसी की ठंडी हवा, सॉफ्ट लाइट्स, बेड पर सिल्क की चादरें बिछी हुईं, हवा में परफ्यूम की हल्की-हल्की महक। खुशबू नॉर्मल लेकिन कंफर्टेबल कपड़ों में थी



एक लूज व्हाइट टी-शर्ट, जो उसके कर्व्स को हल्का-सा हाइलाइट कर रही थी, और नीचे शॉर्ट्स, जो उसकी जाँघें एक्सपोज कर रहे थे



। वो सोफे पर लेटी हुई थी,


असलम उसके बगल में, जैसे कोई राजा-रानी आराम कर रहे हों



असलम का हाथ उसके कंधे पर, खुशबू का सिर उसके सीने पर।



असलम टीवी पर कुछ देख रहा था, लेकिन खुशबू ने मुझे देखते ही मुस्कुरा दिया



उसे अपेक्षा थी ही कि अमित शक लेकर ऊपर आएगा।



वो इतनी शातिर थी कि मेरी हर हरकत पढ़ लेती थी।



“अमित… आ गए तुम… क्या बात है? बैठो ना…”



वो बोली, लेकिन इस बार असलम को बाहर नहीं भेजा



man of the house दिखाने के लिए।




‘असलम मेरा शौहर है… अगर पति होने के नाते अमित से बात करनी है, तो असलम को परेशान करके बाहर नहीं भेजूँगी… ये दिखाना है कि असलम ही बॉस है…’



मन ही मन सोच रही थी।

मैं नर्वस हो गया


डरते हुए, हाथ-पैर ठंडे पड़ गए।




कमरे में वो राजसी माहौल… असलम का प्रेजेंस… जैसे वो असली मालिक हो।



मैंने हकलाते हुए कहा,



“खु… खुशबू जी… मैं… बस… थोड़ी बात…”



मेरा दिल धक-धक कर रहा था, होंठ काँप रहे थे।



मन में घूम रहा थ



‘कैसे पूछूँ? गुस्सा हो जाएगी… लेकिन शक तो दूर करना है…’



मैंने गहरी साँस ली,


लेकिन शब्द रुक-रुक जाते थे।



“अरे यार… खुशबू जी… अभी जय मुझे नीचे मिला… वो बता रहा था… कि आप और असलम जी… एक साथ… शावर में…”



शब्द मेरे मुंह से निकलते हुए जैसे काँटे लग रहे थे—होंठ काँप रहे थे,


गला सूखा हुआ।



‘कैसे बोल रहा हूँ अपनी ही पत्नी से… असलम के साथ नहाना… ये तो… लेकिन पूछना तो पड़ रहा है…’


नर्वसनेस इतनी कि हाथ पसीने से भीग गए, आँखें नीचे झुक गईं।

खुशबू ने तुरंत मेरी हालत समझ ली



उसे अपेक्षा थी ही। वो असलम की तरफ़ मुड़ी, हल्के से सिर हिलाया—



“असलम जी… थोड़ी देर… आप यही बैठिए यह अमित को मुझे कुछ काम है मैं उसको निपटाकर आती हूं"



लेकिन बाहर नहीं भेजा। फिर उठी, मेरे हाथ पकड़े, और शांत, ममता भरी आवाज़ में बोली



, “चलो जान… बाहर बालकनी में चलते हैं… वहाँ बात करते हैं… असलम जी… आप आराम करो…”





वो मुझे कमरे की बड़ी बालकनी में ले गई



उसकी आँखें इतनी शांत, इतनी समझदार लग रही थीं, जैसे वो मेरी आत्मा तक झाँक रही हो।

उसके चेहरे पर कोई गुस्सा नहीं था, बल्कि एक ममता भरी मुस्कान—जैसे कोई माँ अपने बच्चे की हर गलती को माफ़ कर दे।


वो मेरे हाथ को और कसकर दबाई, और बहुत नरम, प्यार भरी आवाज़ में बोली,



“अरे अमित… तुम्हारी ये आँखें… कितनी उदास, कितनी थकी हुई लग रही हैं… मैं तो बस देखकर ही जान गई कि क्या तूफान चल रहा है तेरे दिल में… लेकिन जान… शांत हो जाओ… साँस लो… मैं हूँ ना तेरे साथ… हमेशा की तरह… मैं तेरी खुशी के लिए ही तो ये सब कर रही हूँ…


तेरी लंबी उम्र के लिए… हमारी शादी के लिए…

बोल… क्या परेशानी है?


जय ने क्या बकवास सुनाई? मैं सब बता दूँगी… तुझे चिंता करने की कोई ज़रूरत नहीं… तू मेरा प्यारा है… मेरा सबसे करीबी…”


उसकी आवाज़ इतनी मीठी थी,

जैसे शहद की तरह मेरे दिल के घाव पर लग रही हो—शुगर-कोटिंग इतनी परफेक्ट कि मेरा गुस्सा पिघलने लगा,


लेकिन शक अभी भी कोंच रहा था। उसके स्पर्श में वो गर्माहट थी, जो मुझे बचपन की याद दिला रही थी—जब माँ सांत्वना देती थी।




मैंने गहरी साँस ली, लेकिन होंठ काँप रहे थे, गला सूखा हुआ।

‘कैसे पूछूँ… ये तो मेरी पत्नी है… लेकिन शक तो है…’ मन में डर था—गुस्सा हो गई तो? लेकिन शब्द निकल ही गए, नर्वस होकर, डरते हुए, मूड ऑफ न हो जाए इसका ध्यान रखते हुए।




“खुशबू जी… मैं… बस… परेशान हूँ… जय बोला… आप और असलम जी…

एक साथ शावर में…

नहा रहे थे…

ये… ये कैसे?

मैं तो जानता हूँ अपशकुन का डर… लेकिन… बाथरूम में… साथ?


मुझे… बुरा लग रहा है…

सीने में जलन-सी हो रही है…


लेकिन मैं गुस्सा नहीं हूँ… बस…


समझना चाहता हूँ… कृपया… बताओ ना…”


शब्द मेरे मुंह से निकलते हुए जैसे आग के गोले लग रहे थे—

होंठ काँप रहे थे, आँखें नीचे झुक गईं, हाथ पसीने से भीग गए। मन में एक तूफान था—डर कि कहीं खुशबू रो न पड़े, या गुस्सा होकर चली न जाए;




साथ ही वो शक,


जो सीने को चीर रहा था।


‘अगर सच है तो… मेरी शादी… सब बर्बाद… लेकिन अगर नहीं, तो मैं क्यों इतना जल रहा हूँ?’





खुशबू ने पहले तो मेरी आँखों में गहराई से देखा—उसकी आँखें नम हो गईं, जैसे वो मेरे दर्द को महसूस कर रही हो।


फिर धीरे से सिर हिलाया, और बहुत शांत, समझदार लहजे में बोली,



“ओह जान… तो जय ने ये बताया? हाँ… उसने सही कहा है…


मैं और असलम जी शावर से बाहर निकले थे… साथ नहाकर…


लेकिन अमित…


तुम जरा सोचो ना…


जब नीचे बीच पर जब हम पानी में मस्ती कर रहे थे…

लहरों में नहा रहे थे…


पब्लिक के बीच…

सबके सामने…


वो सही था या गलत?


मैं तो तुम्हारे लिए ही कर रही थी…


ताकि सबको लगे हम पति-पत्नी हैं…


अपशकुन न हो… और तुम?


तुम्हें तो मजा आया था ना?


वो फोटोज…

तुम खुद ही ऐसी पोज़ बनवा रहे थे…


असलम जी के साथ मेरी…


वो भी सही था या गलत?


अगर बीच पर पब्लिक में नहाना सही था

, तो शावर में साथ नहाना…


वो भी सफाई का बहाना…

वो गलत क्यों?

जान… मैं तो बस तुम्हारी खुशी के लिए झूठ बोल रही हूँ…

तेरी लंबी उम्र के लिए…

हमारी शादी बचाने के लिए…

और तू…

हर बार ये शक…

हर बार ये सवाल…


मुझे कितना दुख होता है…


जैसे तू मुझे विश्वास ही न करे…”




उसके शब्दों में वो शुगर-कोटिंग थी—मीठी, लेकिन तर्कपूर्ण,


जैसे वो मुझे दोषी ठहरा रही हो बिना चिल्लाए। बीच पर नहाना…

फोटोज… हाँ…

वो सही कह रही है… ‘


मैं ही छोटा सोच रहा हूँ… मेरी गलती है…


’ मन में गिल्ट उठा,

शक हल्का सा कम हुआ,

आँखें नम हो गईं।


“सॉरी… सॉरी खुशबू जी… मैं… बस…”

खुशबू ने थोड़ा गुस्से का टोन लिया


नहीं चिल्लाकर,

लेकिन आँखों में वो चमक आ गई,

जैसे वो मुझे हल्का-सा दर्द दे रही हो,

लेकिन प्यार से।


“अरे अमित… मुझे तो ये समझ में नहीं आता… तुम्हारे छोटे से दिमाग में ये बात क्यों घुस नहीं रही?


हर बार ये क्यों भूल जाते हो कि मैं और असलम जी यहाँ पति-पत्नी हैं?


दिखावे में…


लेकिन जाहिर-सी बात है,


थोड़ा-बहुत तो उसके हिसाब से बर्ताव करेंगे ही ना


! बीच पर पब्लिक में नहाना सही था,

फोटोज खिंचवाना सही था…


तो शावर में साथ नहाना…


वो भी बस नहाने के लिए…

वो गलत क्यों?


अगर असलम जी मेरे ‘पति’ हैं, तो बाथरूम शेयर करना…


वो भी सफाई का बहाना…


इतना बड़ा मुद्दा क्यों बना देते हो?


मैं तो तुम्हारी खुशी के लिए झूठ बोल रही हूँ…


अपशकुन से बच रही हूँ…


और तुम?


हर बार शक… हर बार ये सवाल…


मुझे कितना दुख होता है जान…


जैसे तू मुझे विश्वास ही न करे…


तेरी आँखों में ये देखकर मेरा दिल टूट जाता है… तू मेरा पति है…

मैं तेरी बीवी…

लेकिन ये दिखावा…

ये झूठ… सब तेरे लिए ही तो…”




उसके गुस्से में वो दर्द थ


आँखें नम, आवाज़ काँपती हुई—जैसे वो सच में रोने वाली हो।


मुझे लगा जैसे मैंने उसे चोट पहुँचा दी है


। ‘हाँ… हर बार भूल जाता हूँ… वो पति-पत्नी हैं दिखावे में… मेरी गलती है… मैं ही छोटा सोच रहा हूँ…’




शक और कम हुआ, गिल्ट जगह ले रहा था,


सीने में एक भारीपन आ गया—


जैसे मैंने अपनी ही बीवी को दुख दिया हो।


आँखें नम हो गईं


, “खुशबू जी… सॉरी… मैं… मैं बेवकूफ़ हूँ… तुम सही कह रही हो…”




खुशबू ने तुरंत टोन बदला, फिर से मीठा कर दिया



मेरे हाथ सहलाते हुए, आँखों में वो ममता लौट आई।


“अरे जान… दुखि मत हो… कोई बात नहीं… लेकिन और एक बात…

जय ने तुझे ये नहीं बताया कि जब मैं बाहर निकली थी, तब मैं ब्रा-पैंटी पहन थी ना?


तो मैं पूरी नंगी तो नहीं नहाई होगी असलम जी के साथ… ब्रा पैंटी तो मैंने पहनी ही हुई थी ना यार

बस… साथ शावर लिया…

सफाई का बहाना…


ताकि रिसोर्ट वाले शक न करें।


और असलम जी?


वो मेरे साथ इतनी फोटोज खिंचवा रहे थे…


बीच में पानी में एंजॉय कर रहे थे…


लहरों में मस्ती…


तो क्या मैं उनके साथ शावर शेयर नहीं कर सकती?


इतनी भी समझ नहीं आती तुम्हें?


वो मेरे ‘पति’ हैं… तो थोड़ा-बहुत तो होना ही चाहिए ना…

सब तुम्हारी खुशी के लिए…

हमारी शादी बचाने के लिए…


तू तो मेरा सबसे प्यारा है… मेरा सहारा… मैं बिना तेरे के कुछ नहीं…”

अब से तू अपना रोल अच्छे से निभाना…

बिना शक, बिना सवाल…


मैं और असलम जी पति-पत्नी हैं—


दिखावे में… तो हम वैसा ही बर्ताव करेंगे…


और तू…

हमारा फोटोग्राफर…

हमारा हेल्पर…

हमारा… वो जो भी कहें


, वैसा करेगा…

बिना एक शब्द के…

समझा?


ये हमारी शादी के लिए… तेरी खुशी के लिए… वरना…


सब बर्बाद हो जाएगा…


तुम बस अपना काम कर ना … नीचे रह कर … हम ऊपर… ....तुम हमारी सर्विस कर…

बिना सोचे…

ये तेरा रोल है अब… "
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उसके शब्द डोमिनेंट थे

कॉन्फिडेंट, जैसे कोई रानी अपने नौकर को ऑर्डर दे रही हो—


लेकिन मीठे लहजे में, गिल्ट डालते हुए।



‘हाँ… मेरा रोल… हेल्पर… नौकर जैसा… बिना सवाल…’


मन में एहसास हुआ, शक एकदम खत्म हो गया—अब आगे सवाल करने का ख्याल ही नहीं आया। गिल्ट इतना था कि मैं सिर हिला दिया


, “हाँ… हाँ खुशबू जी… मैं… समझ गया… अब कभी नहीं पूछूँगा… तुम्हारी खुशी… बस… मैं… अपना रोल निभाऊँगा…”


सीने में वो भारीपन अब शांति में बदल गया,



खुशबू ने फिर अपना पक्ष रखा


अब थोड़ा और डिटेल में, लेकिन डोमिनेंट टोन में, ताकि कोई शक बाकी न रहे।


वो मेरी आँखों में देखकर बोली,


“और जान… और अगर तुम सोच रहे थे कि मैं जय को ऊपर क्यों बुलाया तो ये भी बता दूँ…


मैंने ऊपर से देखा था…

तू नीचे उन नौकरों के साथ एंजॉय कर रहा था…

जय, कमल…

सबके साथ हँस-मज़ाक…

मैंने सोचा, तुझे डिस्टर्ब न करूँ…

तू तो अब उनके साथ ही तो खुश है ना…


नीचे,

उन जैसे लोगों के साथ…

मैं तो ऊपर,

असलम जी जैसे  लोगों के साथ…


तुझे परेशान क्यों करूँ?


तू तो अब उनका ग्रुप है… नौकरों का…

मस्ती कर…

लेकिन हम…

हम ऊपर… …”

उसके शब्दों में वो इनडायरेक्ट तंज था


मुझे नीचा दिखाने का,


जैसे कह रही हो कि अब तू निचले तबके का है, असलम जैसे ऊँचे स्लिम मर्दों का नहीं

मन में एक चुभन हुई—


‘हाँ… मैं तो नीचे था… उनके साथ… लेकिन वो ऊपर…’ लेकिन गिल्ट इतना था कि विरोध नहीं कर पाया।




फिर वो बोली,


“और ब्रा-पैंटी… वो भी जानबूझकर जय के हाथों से भेजी… क्योंकि मुझे अच्छे से पता है… तुम मेरे पीछे कितना दीवाना है…

कितना पागल…

मेरी उतरी हुई चीजें छूकर,

सूंघकर तुझे रोमांच महसूस होता है ना?


मैंने सोचा… तुझे खुश करने के लिए… ये बहाना अच्छा रहेगा… तू अकेले में… वो महसूस कर… लेकिन खुश हो जा… ये सब तेरे लिए ही तो…”



उसके शब्द मीठे थे, लेकिन डोमिनेंट—जैसे वो मेरी कमजोरी को जानती हो,


और उसे हथियार बना रही हो।


‘हाँ… वो सही कह रही है… मुझे तो मजा आया था…’ मन में रोमांच की याद आई, शक और पिघल गया।

अंत में, वो कॉन्फिडेंट होकर, डोमिनेंट टोन में बोली,


“लेकिन अमित… अब हर बार ये एक्सप्लेनेशन नहीं दूँगी…

तुम्हें समझ जाना चाहिए…

तुम्हारा रोल क्या है इस हनीमून में…


तू हमारा नौकर है…

हेल्पर…

फोटोग्राफर…

जो भी कहें, वैसा कर…

बिना शक, बिना सवाल…

मैं और असलम जी पति-पत्नी हैं…

वैसा ही बर्ताव करेंगे…

ऊपर रहेंगे…

तुम नीचे…

सर्विस करेगा…

ये तुम्हारा काम है…

राजा-रानी का नौकर जैसा…

लेकिन प्यार से… समझा?


अब से कोई सवाल नहीं…


ये हमारी शादी के लिए…

तेरी खुशी के लिए… वरना… सब खत्म…"


” उसके शब्दों में वो कमांड थी, आँखों में वो सख्ती

लेकिन प्यार का आवरण। मन में एहसास हुआ


‘हाँ… मेरा रोल… नौकर जैसा… बिना सवाल…’ शक एकदम खत्म हो गया, अब आगे कभी सवाल करने का हौसला ही नहीं बचा। गिल्ट इतना था कि मैं सिर हिला दिया, “हाँ… समझ गया… अब कभी नहीं…”





खुशबू ने मुस्कुराकर मेरे गाल सहलाए



, “अच्छा लड़का…  कोई बात नहीं… अब चिंता मत करो… जाओ नीचे… रेस्ट कर लो… शाम को डांस पार्टी में मिलते हैं… मैं तुम्हारे लिए डांस करूँगी… तू बस खुश रह… यही मेरी खुशी है…”





खुशबू ने मेरे गाल सहलाए, उसका स्पर्श इतना नरम था कि वो गिल्ट की आग को और भड़का रहा था—


जैसे वो जानती हो कि मैं पहले ही खुद को दोषी मान चुका हूँ।


“ठीक है खुशबू जी… अब मैं… नीचे चला जाऊँगा…” मैंने धीमे से कहा, आँखें नीचे झुकाए, जैसे कोई बच्चा सज़ा कबूल कर रहा हो।




खुशबू ने मुझे दरवाज़े तक छोड़ा, लेकिन जाते-जाते उसके चेहरे पर वो शैतानी मुस्कान लौट आई—


वो जानती थी कि एक छोटा-सा “हड्डी का टुकड़ा” डाल देना है,

ताकि मेरा गिल्ट और खालीपन मीठे रोमांस में बदल जाए,

और मैं फिर से उसके जाल में फँस जाऊँ। वो मेरे कान के पास झुकी,

उसकी साँसें गर्म और परफ्यूम की खुशबू से भरी हुईं मेरे गाल पर लगीं, और फुसफुसाई,


“जान… जाते-जाते एक बात… पिछले दो दिन से तू मुझे देख-देखकर हीला रहा है ना?


वो फोटोज…


वो बीच वाली मस्ती…


तू अकेले में…

हिलाता रहता है…

आज मैं तुझे हिला दूँगी…



जब भी समय मिलेगा…"


लेकिन अभी तो पहले मुझे शाम की डांस पार्टी के लिए असलम जी के साथ जाने के लिए अच्छे से तैयार होना पड़ेगा… "

कपड़े!!!

, मेकअप…!!!!

सब…!!!!!


तो तू शाम को ऊपर आ जाना…!!!!


मुझे तैयार होने में हेल्प करने के लिए…!!!!


तू तो मेरा प्यारा हेल्पर है ना?

ठीक है?”




उसके शब्दों में वो मीठी शरारत थी—जैसे कोई मालकिन अपने पालतू को हड्डी फेंक रही हो।




“हिला दूँगी…”



ये शब्द मेरे कान में गूँज गए,


एक झटका-सा लगा—


शक का काँटा भूल गया, गिल्ट की जगह एक अचानक उत्तेजना ने ले ली।


‘वाह… वो जानती है… मेरी कमजोरी… शाम को ऊपर… तैयार होने में हेल्प… बिकिनी वाली झलक… उफ्फ…’


मैं तो जैसे पागलों की तरह खुश हो गया—



एक तरफ़ मैं अपने ही पत्नी पर शक कर रहा था, गिल्ट में डूबा हुआ था, दूसरी तरफ़ वो मेरी खुशी के लिए सामने से सोच रही है,


मुझे मजा देने का प्लान कर रही है।


मन में एक मीठी लहर दौड़ गई—



‘खुशबू… कितनी परफेक्ट है… शक के बाद भी… मेरे लिए… हेल्पर… लेकिन शाम को… वो…’




खालीपन भर गया, गिल्ट अब एक ट्विस्टेड रोमांस में बदल गया—


अपमान में ही वो उत्तेजना, जो नीचे लंड को हल्का-सा टाइट कर रही थी।


“हाँ… हाँ खुशबू जी… मैं आऊँगा… शाम को… हेल्प करूँगा…”


मैंने उत्साहित होकर कहा, आँखें चमक रही थीं, जैसे कोई बच्चा गिफ्ट पाकर।





खुशबू ने हल्के से हँसकर मेरे गाल पर एक चुम्बन दिया


उसके होंठों की नमी मेरी त्वचा पर लगी, एक मीठी सिहरन दौड़ गई।



“अच्छा लड़का… अब जाओ… इंतज़ार मत करना… शाम को…”


वो बोली, दरवाज़ा बंद करते हुए। मैं नीचे उतरता हुआ, मन में उसी का ख्याल घूम रहा था—



‘शक गलत था… वो मेरे लिए ही तो… शाम को… तैयार होने में… हेल्प… उफ्फ…’


गिल्ट अब एक मीठे अपराधबोध में बदल गया था, और खालीपन भर गया था उस रोमांच से जो शाम का वादा कर रहा था।





शाम ढल चुकी थी।


रिसोर्ट की लाइट्स धीरे-धीरे चमकने लगी थीं—सूरज का लालिमा समुद्र पर फैल रही थी,


जैसे कोई रक्तिम चादर,

और हवा में नमकीन महक मिश्रित होकर फूलों की हल्की-हल्की मादक खुशबू से बन गई थी,


जो नाक में घुसकर सिर चकरा देती।


वो खुशबू इतनी तीव्र थी कि साँस लेते ही सीने में एक मीठी सिहरन दौड़ जाती, जैसे कोई छिपा हुआ वादा।


लेकिन मेरे मन में वो खालीपन अभी भी घूम रहा था—


खुशबू की वो डोमिनेंट बातें,


“तेरा रोल… नौकर जैसा…”


हर शब्द एक काँटा बनकर सीने में चुभा हुआ था, हवा की हर लहर के साथ काँचता हुआ।



गिल्ट की आग बुझ चुकी थी, लेकिन राख अभी गर्म थी—

त्वचा पर एक चिपचिपी परत की तरह लग रही थी, पसीना नम था, साँसें भारी।


‘हाँ… मैं ही गलत था… वो मेरे लिए ही तो…’ मन में खुद को कन्विंस करने की कोशिश कर रहा था, लेकिन उत्तेजना का वो ट्विस्ट भी था


शाम को ऊपर जाने का वादा… तैयार करने में हेल्प… उफ्फ…


तभी मेरा फोन बजा—



“मालकिन”। ध्वनि इतनी तीखी थी कि कानों में गूँज गई,


दिल धक से हो गया, हाथ काँपते हुए उठाया—स्क्रीन पर उसका नाम चमक रहा था, जैसे कोई जादू का मंत्र।




“हेलो… खुशबू जी?” मेरी आवाज़ काँप रही थी, उत्साह और डर मिश्रित


गला सूखा हुआ, साँसें तेज़।

खुशबू की आवाज़ आई—



मीठी, लेकिन कमांडिंग,


जैसे कोई रानी अपने नौकर को बुला रही हो,


“जान अमित… शाम हो गई… ऊपर आ जाओ ना… डांस पार्टी के लिए तैयार होने में हेल्प चाहिए… असलम जी भी इंतज़ार कर रहे हैं… जल्दी आओ… दरवाज़ा खुला है…  शाम को तुझे हिला दूँगी… लेकिन पहले काम…”


उसकी आवाज़ में वो शरारत थी



, “हिला दूँगी…” ये शब्द कान में गूँज गए,


एक झटका-सा लगा—निचले हिस्से में हलचल हुई, साँसें और तेज़।


मैं तुरंत उठा, आईना देखा—


शर्ट स्ट्रेट की, चेहरा साफ किया, पसीना पोंछा—और ऊपर चला गया।




सूट का दरवाज़ा खुला था। मैं अंदर ग


और कमरा एक राजमहल जैसा लग रहा था


एसी की ठंडी हवा त्वचा पर लग रही थी, सिहरन पैदा कर रही,

सॉफ्ट गोल्डन लाइट्स कमरे को चमका रही थीं, जैसे कोई सुनहरा पर्दा, बड़े-बड़े किंग-साइज़ बेड पर सिल्क की चादरें बिछी हुईं, उनके नरम चमक पर रोशनी पड़ रही थी। हवा में गुलाब और चंदन की राजसी महक इतनी तीव्र थी कि नाक में घुसकर सिर भन्ना देती, साँस लेते ही एक राजसी एहसास होता।



असलम सोफे पर राजा की तरह बैठा था,


लूज व्हाइट शर्ट और पैंट में, एक हाथ में ग्लास


(शायद व्हिस्की का, बर्फ की खनक सुनाई दे रही थी), दूसरे में रिमोट—टीवी पर सॉफ्ट जज़ म्यूजिक चल रहा था, बीट्स दिल की धड़कन से ताल मिला रही। उसके चेहरे पर वो संतुष्ट मुस्कान थी, आँखों में वो मर्दाना अहंकार जो हवा में फैल रहा था



जैसे कमरा उसका साम्राज्य हो। वो मुझे देखकर मुस्कुराया, लेकिन उस मुस्कान में हक था


जैसे कोई साहब अपने नौकर को देख रहा हो, आवाज़ गहरी और कमांडिंग।



“अरे अमित भाई… आ गया… अच्छा… बैठ… खुशबू को तैयार कर दे… डांस पार्टी के लिए… अच्छे से…


मेकअप, !!!

ड्रेस… सब… !!!


ताकि वो चमक उठे…!!!!

तू तो जानता है ना… हमारी मैडम को कैसे हैंडल करना है… !!!

चल, शुरू कर…!!!

देर मत कर… पार्टी का समय हो रहा है…”



असलम का लहजा दोस्ताना था, लेकिन डोमिनेंट—हक जताते हुए, जैसे वो कमरे का मालिक हो, और मैं उसका अधीनस्थ, उसके शब्दों की गूँज कमरे की दीवारों से टकरा रही थी। मैंने सिर हिलाया,


“हाँ… हाँ असलम भाई… मैं… कर दूँगा… अच्छे से…” मन में अपमान की एक चुभन हुई—‘हाँ… तैयार कर दूँगा… जैसे नौकर…’ लेकिन उत्तेजना ने दबा दिया, साँसें तेज़ हो गईं।





खुशबू ने मुझे देखा, मुस्कुराई—उसकी आँखों में वो शैतानी चमक थी, जैसे वो जानती हो कि मैं उसके जाल में फँस चुका हूँ। वो एक लूज रॉब में थी, लेकिन उसके कर्व्स साफ़ झलक रहे थे


नीचे शायद ब्रा-पैंटी, बाल खुले, हवा में लहराते हुए एक सिल्की फील देते।



“चलो जान… बाथरूम में चलते हैं… वहाँ तैयार होऊँगी… तुम हेल्प कर लेना … असलम जी… आप आराम करो… मैं अमित से कह रही हूँ… शाम को डांस पार्टी के लिए… य…” वो बोली,


और मुझे अपने बड़े-से लग्ज़रियस बाथरूम में ले गई।



एक तरफ़ वॉक-इन क्लोसेट जैसा स्पेस, जहाँ ड्रेसेज लटक रही थीं,


उनके सिल्क के फोल्ड्स हवा में सरसराहट कर रहे थे। खुशबू ने दरवाज़ा बंद किया, लेकिन हल्का-सा खुला छोड़ दिया


जैसे जानबूझकर असलम को दिखाने के लिए, उसकी साँसें बाहर तक पहुँच रही हों।
उसने मुजे अपनी एक ड्रेस दिखाई

“देखो जान… ये ड्रेस… आज शाम के लिए… वन पीस… पिंक कलर की…

सिल्क मैटेरियल…!!!

कितनी सॉफ्ट… !!!

हाथ फेरो… !!!!
!
डांस पार्टी में असलम जी के साथ  डांस करूँगी… तो ये सिल्क… material होने के कारण काफी कंफर्टेबल रहेगा .....और तुम्हें तो पता है वैसे भी मैं अपने कॉलेज में डांस में चैंपियन थी...... तो असलम जी को भी अच्छा रहेगा.... मजा आएगा…!!!!



तुम देखो … कितनी शाइनी है… !!!!

नेकलाइन डीप…!!!

बैकलेस… !!!

स्लिट वाली… !!!

जाँघें झलकेंगी… !!!!


ये पहनूँगी…तुम हेल्प कर…!!!!

पहले ब्रा-पैंटी चेंज करनी है… !!!!

ताकि ड्रेस अच्छे से फिट हो… चल… शुरू कर તેં है …”

खुशबू ने रॉब खोला—नीचे वो काली लेस वाली ब्रा-पैंटी थी,


जो उसके कर्व्स को हाइलाइट कर रही थी,



त्वचा पर हल्की-हल्की चमक, हवा में वो परफ्यूम की महक और तेज़ हो गई। वो जानबूझकर धीरे-धीरे ब्रा का हुक खोली,



“जान… ये ब्रा… पुरानी है… नई पहननी है… तुम निकालो ना ander से … हुक खोल… धीरे से… स्ट्रैप्स सरका…”

मैंने हाथ बढ़ाया, ब्रा को सहलाया—नरम लेस, गर्म त्वचा, उसके निप्पल्स की हल्की शेप महसूस हुई, एक सिहरन दौड़ गई मेरी उँगलियों में।


‘ये मेरी पत्नी… लेकिन असलम के लिए…’


लेकिन रोल में खोया हुआ, मैंने निकाल दिया।


“हाँ… निकाल ली… सॉरी… अगर दर्द हुआ…”


मैंने धीमे से कहा। खुशबू हँसी,


“अरे जान… दर्द नहीं… मजा आया… अब नई ब्रा… ये देख… रेड सैटिन वाली… पुश-अप… ड्रेस के साथ मैच करेगी… तू पहना ओ ना … स्ट्रैप्स एडजस्ट करो … मेरी छाती को अच्छे से होल्ड करe wese…


असलम जी को डांस में छूने में आसानी हो…”



मैंने पहनाई, उसके निप्पल्स छूते हुए


‘मैं… हेल्पर हूँ… मालकिन को तैयार… कर रहा हूं लेकिन अपने आप को इसी बारे में नसीब वाला भी मानता हूं .....कि कम से कम इसी कारण सर मुझे मेरी ही पत्नी को हनीमून पर नंगा देखने का ....छूने का ....और हेल्प करने का मौका तो मिला......






उत्तेजना बढ़ गई,

साँसें तेज़, लेकिन अपमान भी





फिर पैंटी

खुशबू ने पुरानी उतारी,


“ये लो … साइड रख… नई pahenao…”

नई थोंग वाली,

रेड, सैटिन, चिकनी और स्लिपरी।


“ये डांस में… असलम जी के साथ चिपकूँगी… तो ये कम्फर्टेबल रहेगी… ...तुम पहनाव na.

....… कमर एडजस्ट करो....…


गांड को अच्छे से कवर करो …


लेकिन थोड़ा एक्सपोज भी…


” मैंने पहनाई,

उसकी जाँघें छूते हुए,


गांड की शेप महसूस करते हुए

नरम त्वचा,

सैटिन का चिकना स्पर्

मन में

‘ये मेरी… लेकिन…’


लेकिन रोल में खोया, मैंने कहा



, “परफेक्ट फिट… असलम भाई को पसंद आएगी… थोंग से गांड की शेप…’”



खुशबू ने हँसकर कहा,



“हाँ… तू तो अच्छा जानता है… उनकी पसंद… जब भी मैं आसपास होती हूं ...वो अपने हाथ पर कंट्रोल ही नहीं कर पाते हैं .....तुमने कितनी सारी फोटोस ली है..... हम दोनों की ......जहां वह हमारी गांड के साथ मस्ती मजाक करते रहता है .......गांड मसलेंगे तो… तू फोटोज में देखना…
अब ड्रेस…

तुम पहनाए …

ज़िप ऊपर कर…

स्लिट एडजस्ट…’


ड्रेस पहनाई


सिल्क का नरम स्पर्श उसके बॉडी पर चिपकता हुआ,

नेकलाइन डीप से छाती उभर आई,


स्लिट से जाँघें झलक रही,


सिल्क की वो चिकनाहट त्वचा पर रगड़ रही।



“हुक लगा… बैक एडजस्ट… सिल्क कितना सॉफ्ट है… …”


डायलॉग्स में वो जताती रही,



“जान… तू कितना अच्छा हेल्पर है… असलम जी खुश हो जाएँगे… देख… ये सिल्क… डांस में चिपकेगी… बॉडी पर लिपट जाएगी… मजा आएगा… तू फोटोज में देखना… कितना समर्पित है तू… मेरा प्यारा नौकर… ज़िप और ऊपर खींच… हाँ… ऐसे… छाती दब रही है… अच्छा…”





मैं पूरी शिद्दत से कर रहा था

अनजान,

परवाह किए बिना कि खुशबू दूसरे मर्द के लिए तैयार हो रही है।



‘हाँ… मेरा काम… मालकिन को खुश करना… साहब को…’


रोल में खोया, जैसे ये मेरा कर्तव्य हो, साँसें तेज़, हाथ काँपते हुए, लेकिन उत्तेजना में डूबा।



मेकअप में हेल्प—लिपस्टिक लगाई,

उसके होंठों पर रेड कलर चढ़ता हुआ,


चमकदार—


“ये रेड… असलम जी को पसंद… किस करने में चमकेगी…”


खुशबू हँसी



, “हाँ… डांस में किस करेगी तो… लेकिन असलम जी के होंठों पर लगेगी… तू तैयार कर रहा है… हा हा…”



तैयार हो गई


ड्रेस में चमक रही थी,


सिल्क की वो शाइनी फिनिश रोशनी में चमक रही।



“थैंक यू जान… अब जाओ… शाम को पार्टी में मिलते हैं… तू फोटोज लेना… लेकिन याद रख… अपना रोल…”






खुशबू ने बाथरूम का दरवाज़ा धीरे से खोला


कमरे की गोल्डन लाइट्स उसके पिंक सिल्क ड्रेस पर पड़ रही थीं,


जैसे कोई राजकुमारी का परिधान चमक रहा हो—ड्रेस इतनी टाइट और शाइनी कि उसके कर्व्स हर कोने से उभर आए थे,


नेकलाइन डीप V-शेप से छाती का हल्का-सा उभार दिख रहा था,


बैकलेस डिज़ाइन से पीठ की गोरी त्वचा चमक रही थी,



और साइड स्लिट से जाँघें झलक रही थीं,



हर कदम पर सिल्क की सरसराहट सुनाई दे रही। उसके बाल खुले,


हल्के कर्ल्स में लहराते हुए,


मेकअप परफेक्ट—


रेड लिप्स चमकदार,

आँखों में काजल की गहराई,


और हल्का ब्लश जो उसके गालों को और गुलाबी बना रहा था।



वो बाहर आई, कदमों की ठक-ठक कमरे की मार्बल फ्लोर पर गूँजी, और असलम की तरफ़ मुड़ी—जैसे कोई रानी अपने राजा को दिखा रही हो।





असलम सोफे पर बैठा था, ग्लास हाथ में, लेकिन जैसे ही खुशबू को देखा,


उसके हाथ से ग्लास फिसलने को हुआ—


बर्फ की खनक रुक गई,


आँखें खुली की खुली रह गईं,


जैसे कोई सपना सच हो गया हो



। “जान… तू… ये ड्रेस… उफ्फ… कितनी… कातिल लग रही है…”



वो गरजा, आवाज़ गहरी और भारी, कमरे की हवा में कंपन पैदा कर दी। उसके चेहरे पर वो रोमांच साफ़ झलक रहा था


आँखें चमक रही थीं, साँसें तेज़ हो गईं, नीचे शॉर्ट्स में हलचल महसूस हो रही थी।



मन ही मन वो सोच रहा था,



‘अल्लाह… ये  माल… सिल्क में लिपटी… डांस में चिपकेगी… रगड़ेगी… अमित बेचारा तैयार कर रहा था… लेकिन ये मेरी है… उफ्फ… आज रात तो…’



वो उठा, खुशबू के पास आया,


उसके कंधे पर हाथ रखा


उसकी उँगलियाँ सिल्क पर सरक रही थीं,


चिकनी फील महसूस कर रहा था।



“आ… करीब आ… ये स्लिट… जाँघें… नेकलाइन… सब कुछ… तू तो आग है जान… डांस पार्टी में सब जल जाएँगे… लेकिन मैं… मैं तो अभी…’



वो फुसफुसाया, और खुशबू के गाल पर हल्का-सा किस किया, उसके होंठों की गर्मी सिल्क के ऊपर से महसूस हो रही।



अब खुशबू और असलम एक दूसरे के साथ और मेरे सामने इतने कंफर्टेबल हो गए थे कि आराम से पति-पत्नी की तरह एक दूसरे को किस कर सकते थे जिसमें मुझे अब अजीब भी महसूस नहीं होता था.....






खुशबू ने शरमाते हुए,


लेकिन शैतानी मुस्कान के साथ असलम के सीने पर सिर टिका दिया,


“असलम जी… ये सब… तुम्हारे लिए ही तो… सिल्क… डांस में चिपकेगी… मजा आएगा…”




लेकिन उसकी नज़रें मुझ पर पड़ीं



मैं दरवाज़े के पास खड़ा था, हाथों में अब भी वो पुरानी ब्रा-पैंटी लटक रही थी

.
खुशबू को मुझ पर दया आई .....लेकिन उसने इस बात का भी फायदा उठाया ......उसने कहा



"क्या असलम जी !???हमारे बिचारे प्यार हेल्पर में आपकी आपके लिए मुझे इतना सजाया .....इतना अच्छे से तैयार किया ....उसके लिए टिप तो बनती है ना....!!!



असलम ने मुझे देखा, मुस्कुराया—उस मुस्कान में वो संतुष्टि थी, जैसे कोई राजा अपने नौकर को इनाम दे रहा हो।


असलम भी पूरे उत्साह में "हां हां क्यों नहीं!??




“अमित भाई… कमाल कर दिया तूने… खुशबू… चमक रही है… तू तो मास्टर है…

ये ड्रेस… ये मेकअप… सब परफेक्ट…


थैंक यू… ले… ये ले…


वो वॉलेट निकाला, दो हज़ार का नोट निकालकर मेरी तरफ़ बढ़ा दिया


नोट की कागज़ की खुरदुरी फील मेरी हथेली पर लगी, लेकिन मन में अपमान की चुभन—



‘ये मेरी बीवी को तैयार किया… और टिप… उसके दोस्त से…’


लेकिन परवाह किए बिना, मैंने ले लिया।



“थैंक यू असलम भाई… खुश… खुशी हुई…” मैंने कहा,



नोट जेब में डालते हुए—गिल्ट और रोमांच मिक्स हो गया, लेकिन संतुष्टि का एहसास हुआ—



‘मेरा काम… खुशबू और असलम दोनों खुश… यही तो मेरा रोल है…’ मन में एक मीठी लहर दौड़ गई, जैसे मैंने अपना कर्तव्य निभा लिया हो।






असलम ने खुशबू को गले लगाया,



“चल जान… नीचे चलें… डांस पार्टी इंतज़ार कर रही है…”


दोनों हाथ में हाथ डाले कमरे से बाहर निकले। मैं पीछे-पीछे चला गया—मन में संतुष्टि थी,



‘मेरा काम… अच्छा लगा… वो दोनों खुश…’ लेकिन कहीं अंदर वो खालीपन बाकी था।
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नीचे लॉबी और डांस पार्टी एरिया में पहुँचते ही, सबकी नज़रें असलम और खुशबू पर टिक गईं।



[Image: In-Shot-20260106-190012823.gif]






लाइट्स डिम थीं,


म्यूजिक की बीट्स हवा में कंपन पैदा कर रही थीं,



हवा में वाइन और परफ्यूम की मिश्रित महक। असलम का तगड़ा बॉडी,

व्हाइट शर्ट में चमकता हुआ,



और खुशबू का पिंक सिल्क ड्रेस



स्लिट से झलकती जाँघें, नेकलाइन से उभरती छाती—दोनों की बॉडी लैंग्वेज परफेक्ट थी:



असलम का हाथ खुशबू की कमर पर,


वो उसे अपनी तरफ़ खींचता हुआ,



खुशबू का सिर उसके कंधे पर, हँसी की वो मीठी ध्वनि।


उनका बिहेवियर—असलम का राजसी अंदाज़,


खुशबू की रानी जैसी चाल—


केमिस्ट्री इतनी तीव्र कि हवा में बिजलियाँ-सी दौड़ रही लग रही।


हनीमून कपल्स घूर रहे थे,


कॉलेज लड़के आँखें फाड़े हुए,


स्टाफ मुस्कुरा रहा था।


“वाह… वो कपल… कितने हॉट…” किसी ने फुसफुसाया।



लेकिन डिस्कोथीक की तरफ़ बढ़ते ही वो चमक तेज़ हो गई


एक भव्य इमारत, बाहर से पूरी तरह कांच से ढकी हुई,


जैसे कोई विशालकाय क्रिस्टल पैलेस।



वो कांच इतना साफ़ और पारदर्शी था कि बाहर खड़े लोग अंदर का हर दृश्य देख सकते थे


रंग-बिरंगी लाइट्स की झलक, डांस फ्लोर पर घूमती बॉडीज़,

म्यूजिक की बीट्स जो कांच से टकराकर कंपन पैदा कर रही थीं।


लेकिन वो कांच एक दीवार था


अंदर की दुनिया ऊँची, चमकदार, अमीरों की;



बाहर की दुनिया नीची, साधारण, आउट ऑफ़ लीग महसूस कराने वाली।



डिस्कोथीक हाई-एंड था—सॉफ्ट वुडन फ्लोर, गोल्डन चैंडेलियर्स जो क्रिस्टल की तरह चमक रहे थे, बार काउंटर पर चमचमाती बॉटल्स, और एयर में वो लक्ज़री परफ्यूम की महक जो बाहर वालों को जलन दिला देती। म्यूजिक की धुनें बाहर तक गूँज रही थीं—बीट्स इतनी तीव्र कि दिल की धड़कन से ताल मिला लेतीं, लेकिन कांच की वो दीवार सब कुछ दूर रखती।





मैं असलम और खुशबू के साथ पहुँचा था


मेरा मन उत्तेजना से भरा था,


लेकिन गिल्ट की वो राख अभी भी सुलग रही थी। तभी मैनेजर आया


एक स्मार्ट सूट वाला आदमी, मुस्कुराता हुआ, लेकिन आँखों में वो प्रोफेशनल सख्ती।




“सर… मैडम… वेलकम… लेकिन सॉरी… ये डिस्कोथीक हाई-एंड है… प्राइवेट… नौकरों की एंट्री नहीं… सिक्योरिटी चेक… सिर्फ़ गेस्ट्स…”





मैनेजर ने विनम्रता से कहा, लेकिन शब्दों में वो दीवार साफ़ थी।



असलम ने सिर हिलाया,



“ठीक है सर… हम समझ गए…” लेकिन खुशबू ने मुझे देखाउसकी आँखों में वो ममता थी, लेकिन साथ ही वो शैतानी चमक।

खुशबू ने मेरे कंधे पर हाथ रखा,


बहुत प्यार से, लेकिन आवाज़ में वो दुख था



जैसे वो सच में शर्मिंदा हो।


“ओह जान अमित… सॉरी ना… हम तो शर्मिंदा हो गए… तुझे अंदर नहीं ले जा पाएँगे… ये तो प्राइवेट है… लेकिन तू बाहर ही रुको ना… कांच से सब देख लेना… हम डांस करेंगे… तू फोटोज ले लेना… तेरा कैमरा तो हमेशा तैयार है ना?



हम तेरे लिए ही तो सब कर रहे हैं… तू बस खुश रह… इंतज़ार करना… बाद में मिलेंगे…”




उसकी आवाज़ इतनी मीठी थी, जैसे कोई मालकिन अपने पालतू को सांत्वना दे रही हो



लेकिन अंदर से वो सोच रही थी,



‘बेचारा… बाहर खड़ा… कांच की दीवार के पीछे… हम अंदर… राजा-रानी…’



असलम ने भी हाथ बढ़ाया, मेरे कंधे पर थपथपाया उसका स्पर्श मज़बूत था, लेकिन दोस्ताना।



“हाँ भाई… सॉरी यार… तू बाहर ही… लेकिन देखना… हम तेरी बीवी को डांस करते… मजा आएगा… तू फोटोज ले… बाद में दिखाना… ठीक है?”



उसके शब्दों में वो हल्का तंज था, लेकिन मुस्कान के पीछे।

मैं भारी मन से रुका



ना चाहते हुए भी, लेकिन गिल्ट और रोल ने दबा दिया।



‘हाँ… मेरा रोल… बाहर… फोटोज लेना…’ मन में जलन थी



‘मैं अंदर क्यों नहीं?’ लेकिन परवाह किए बिना, मैंने सिर हिलाया,



“हाँ… हाँ… जाओ… मजा करो… मैं बाहर ही… फोटोज ले लूँगा…”



वो दोनों हाथ में हाथ डाले अंदर चले गए—कांच का दरवाज़ा बंद होते ही, वो दुनिया मेरे लिए बंद हो गई। मैं बाहर खड़ा रहा, कांच से झाँकता हुआ—दिल भारी, लेकिन उत्तेजना का वो ट्विस्ट… ‘वो अंदर… डांस… असलम के साथ…’









अंदर जाते ही, डिस्कोथीक की लाइट्स ने उन्हें घेर लिया


रंग-बिरंगी, घूमती हुई, बीट्स इतनी तीव्र कि हड्डियाँ कँपकँपा देतीं। म्यूजिक की धुनें हवा में कंपन पैदा कर रही थीं, वाइन की तीखी महक, सिगारेट का धुआँ, और पसीने की हल्की-हल्की नमकीन गंध—सब मिश्रित होकर एक मादक माहौल बना रही। असलम और खुशबू जैसे राजा-रानी प्रवेश कर गए






मैं बाहर कांच से झाँक रहा था—दिल भारी, लेकिन उत्तेजना चरम पर। ‘वो… असलम के साथ… चमक रही है… मेरा काम…’ संतुष्टि थी, लेकिन खालीपन गहरा।






उसकी पिंक सिल्क ड्रेस की शाइनी फिनिश लाइट्स में चमक रही थी,


नेकलाइन डीप V-शेप से छाती का उभार झलक रहा था,


सिल्क का नरम स्पर्श हवा में सरसराता हुआ,


स्लिट से जाँघें हर स्टेप पर नाच रही थीं।



असलम का हाथ उसकी कमर पर,


बॉडी लैंग्वेज डोमिनेंट—


वो उसे अपनी तरफ़ खींचता,

[Image: In-Shot-20260106-185508090.gif]


मैंने ही खुशबू को वहां ड्रेस पहनाया था..

. इसलिए मुझे उसे ड्रेस की खूबी बड़ी अच्छे से पता थी कि ....जैसे ही वहां अपने पैर ऊपर नीचे करके डांस करेगी..... उसके अंदर पहने हुए पेटी मुझे आसानी से दिख जाएगी .....मैं बस उसी झलक के इंतजार में वही बाहर खड़ा हुआ यह देख रहा था.....

मैं बस उसे पल का इंतजार किया करता था कि जब खुशबू असलम से चिपक कर डांस करें और मुझे उसके अंदर पहनी हुई पेटी अच्छे से देखने को मिल जाए...

खुशबू हँसकर उसके सीने पर सिर टिकाती।


उनका बिहेवियर परफेक्ट था

असलम का राजसी अंदाज़, कमर पकड़कर घुमाना,


खुशबू की रानी जैसी चाल, कूल्हों की मोहक लहर—


केमिस्ट्री इतनी तीव्र कि हवा में बिजलियाँ-सी दौड़ रही लग रही।


मर्दों की नज़रें खुशबू की बॉडी पर टिकी थीं


किसी का मुंह सूख गया, किसी की आँखें फटीं, मन में कल्पना घूम रही


‘वाह… ये लड़की… सिल्क में लिपटी… गांड हिल रही… छाती उछल रही… काश…’


लेकिन खुशबू बिंदास और कॉन्फिडेंट थी


कदमों में वो स्वाभाविक लहर, चाल में वो मोहकता, आँखों में वो चमक—क्योंकि जानती थी कि असलम जैसा रियल मर्द उसके साथ है।



‘ये सब घूर रहे हैं… लेकिन मैं असलम की हूँ… वो मेरा शौहर… ये पावर… उफ्फ…’



वो मन ही मन सोच रही थी, असलम के होल्ड में और चिपक गई।



असलम ने उसे डांस फ्लोर पर ले जाकर घुमाया,


सिल्क की सरसराहट म्यूजिक से ताल मिला रही, और सबकी नज़रें चिपक गईं



उनकी केमिस्ट्री, वो चिपकाव, वो हँसी… सब कुछ परफेक्ट।








डांस फ्लोर पर पहुँचते ही, माहौल एक भयावह, मादक तूफान बन गया था


जैसे कोई जीवंत, साँस लेने वाला राक्षस सबको निगल लेना चाहता हो।


लाइट्स की रंग-बिरंगी धाराएँ हवा में नाच रही थीं, नीली चमक जो त्वचा पर सिहरन पैदा कर देती, लाल लहरें जो खून की गर्माहट को भड़का देतीं, बैंगनी छायाएँ जो रहस्यमय उत्तेजना भर देतीं, हरी झलकें जो एक जंगली, प्राकृतिक भूख जगातीं



हर कलर की लहर फ्लोर पर सरक रही थी, लोगों की त्वचा पर चिपक रही थी,


जैसे कोई रंगीन ज्वाला सबको जला रही हो। म्यूजिक की बीट्स इतनी तीव्र थीं कि हड्डियाँ कँपकँपा देतीं


बास का गहरा धमाका सीने में घुसकर दिल को दबा देता, ड्रम की थापें साँसों को तेज़ कर देतीं, हाई नोट्स कान में गूँजकर सिर को चकरा देते,



जैसे कोई जादू की लहर हर कोशिका को उत्तेजित कर रही हो। हवा गर्म और भारी थी



वाइन की तीखी, मीठी महक मिश्रित होकर सिगारेट के धुएँ की कड़वाहट से, पसीने की नमकीन गंध से, और परफ्यूम की राजसी मादकता से



सब कुछ एक दूसरे में घुलकर एक नशे की तरह साँसों में उतर रहा था, नाक में घुसकर सिर भन्ना देता, साँस लेते ही सीने में एक सिहरन दौड़ जाती, जैसे हर साँस वासना का इंजेक्शन हो।




डांस फ्लोर पर लोग थे


कपल्स चिपककर नाच रहे थे,


बॉडीज़ रगड़ रही थीं,


सिल्क और साटन की सरसराहट,

पसीने की चिपचिपी फील


, हँसी की मीठी ध्वनियाँ—


किसी लड़की की चीख़,


“ओह्ह… जोर से!”


किसी लड़के की गरज,


“आ… चिपक…”



सब कुछ एक कामुक सिम्फनी बना रहा, हवा में वो गर्माहट—पसीने से नम, लेकिन उत्तेजक, जैसे हर साँस में वासना घुली हो। कोने में सॉफा एरिया—लेदर के नरम कुशन,

जहाँ कपल्स चिपककर बैठे थे,

हाथों का सहलाना,

होंठों का स्पर्श—


सब कुछ दिख रहा था,


लेकिन कांच की दीवार से बाहर वालों के लिए बस एक सपना, एक जलन भरा सपना।







खुशबू को अच्छे से वाकिफ़ था कि बाहर कांच की दीवार के पीछे अमित खड़ा होकर सब देख रहा




वो जानबूझकर असलम से और चिपक गई,



उसके सीने पर सिर टिका दिया,


कमर उसके हाथों में लपेट ली।



“असलम जी… ये बीट्स… कितनी तेज़… मुझे और चिपका लो…”




[Image: In-Shot-20260106-185528313.gif]



असलम ने मुस्कुराकर उसे और कस लिया,



“हाँ जान… चिपक… सब देख रहे हैं… लेकिन तू मेरी है…”



वो बोला, और अल्कोहल का ग्लास उठाया


खुशबू ने भी एक घूँट लिया, वाइन की तीखी, मीठी गर्माहट गले से उतरकर सीने में फैल गई, सिर चकराने लगी, लेकिन एंजॉयमेंट बढ़ गया।




“ये वाइन… कितनी हॉट… जैसे तुम्हारा टच…” खुशबू हँसी, और नशे में डूबकर असलम से चिपक गई—





अल्कोहल की वो गर्माहट बॉडी में फैल रही थी, सिर हल्का, लेकिन वासना चरम पर।

असलम को ये मौका मिला तो वो फायदा उठाने से नहीं चूका


पब्लिक में, सबके सामने, वो जानबूझकर खुशबू से चिपककर डांस करने लगा।



उसके हाथ खुशबू की कमर पर,



बॉडी को अपनी तरफ़ दबाता हुआ—



सिल्क का नरम स्पर्श उसके पाम्स पर रगड़ रहा था,


खुशबू की छाती उसके सीने से चिपक गई,


हर बीट पर दबाव बढ़ता।



“जान… ये सिल्क… कितना स्लिपरी… डांस में रगड़… उफ्फ…”



[Image: In-Shot-20260106-185917254.gif]


वह पिक सिल्की ड्रेस में खुशबू ने जो हाथ में शादी का जोड़ा पहना था वह चार चांद लग रहा था.






असलम गरजा, और खुशबू की गांड पर हल्का-सा थप्पड़ मारा


चटाक की आवाज़ म्यूजिक में घुल गई, लेकिन सबने सुनी।



“असलम जी… हाँ… थप्पड़ मारो… सब देख रहे हैं… लेकिन मैं तुम्हारी हूँ…”



खुशबू चीख़ी,


लेकिन हँसकर,


और असलम ने उसे घुमाया,



उसके होंठों पर किस कर दिया



गहरा, जीभें लिपटती हुईं,


वाइन का स्वाद मुँह में फैल गया।
खुशबू और असलम ने इतना डीप लिप किस किया के खुशबू की लाल रंग की लिपस्टिक सारी असलम के होंठ पर लग गई.......





असलम ने फिर छाती दबाई



हाथ सिल्क के ऊपर से सरकता हुआ


, निप्पल्स की शेप महसूस करते हुए—


“ये छाती… मेरी… डांस में दबाऊँगा…”



वो फुसफुसाया, और खुशबू ने सहयोग दिया,


सीने को आगे किया,



“हाँ… दबाओ… सबके सामने… अमित देख रहा होगा… लेकिन मजा आ रहा है…”



असलम ने गांड मसली


उँगलियाँ सिल्क पर दबाव डालतीं,


थप्पड़ की चटाक—

[Image: In-Shot-20260106-185903195.gif]



“ये गांड… मेरी… रगड़ूँगा…”


सबके सामने,


लेकिन जताने के लिए कि पति-पत्नी हैं।





खुशबू पूरा सहयोग दे रही थी


नशे में डूबी,


अल्कोहल की गर्माहट बॉडी में फैल रही थी,


सिर हल्का, लेकिन वासना चरम पर।



वो असलम से चिपककर घूमी, कमर मोड़कर गांड रगड़ी,


“असलम जी… और जोर से… थप्पड़… दबाओ… सब देख रहे हैं… लेकिन मैं तुम्हारी बीवी हूँ…”



वो चीख़ी, हँसकर, और असलम ने छाती दबाई,




“हाँ… मेरी बीवी… ये सब मेरा हक…”



वो गरजा मैं बाहर से देख रहा था—उसका रोमांच चरम पर,



(लेकिन मेरी और खुशबू की जो पिछली कन्वर्सेशन हुई थी .....वहां पर खुशबू ने सबकॉन्शियसली मेरे दिमाग में ऐसा सब कुछ डाल दिया था .......कि किसी भी तरह का शक और सवाल करने की मेरी कैपेबिलिटी ही नहीं रही थी ......मैं अपने आप को ही समझ रहा था कि......" यह तो बहुत सामान्य सी बात है अब disco है .....और जाएंगे कपल अगर अंदर तो ....साथ में चिपक कर डांस तो करेगी ही ना.....)





Mai कांच की दीवार के ठीक बाहर खड़ा था, उसके हाथ कैमरा पकड़े हुए थे, लेकिन क्लिक का बटन दबाने का हौसला ही नहीं हो रहा था।



डिस्कोथीक की लाइट्स बाहर से भी चमक रही थीं




नीली, लाल, बैंगनी की धाराएँ कांच पर सरक रही थीं, जैसे कोई रंगीन आग बाहर तक फैल रही हो, लेकिन वो दीवार सब कुछ रोक रही थी।


हवा में म्यूजिक की बीट्स गूँज रही थीं—बास का गहरा धमाका सीने में कंपन पैदा कर रहा था, ड्रम की थापें पैरों तले फ्लोर को कँपा रही थीं, और हाई नोट्स कान में घुसकर सिर को भन्ना दे रहे थे। हवा गर्म और भारी थी





जय उसके बगल में खड़ा था,


बीयर का कैन हाथ में,


आँखें कांच पर टिकी हुईं।


“भाई अमित… देख… तेरी मैडम… उफ्फ… कितनी चमक रही है… सिल्क में लिपटी… डांस फ्लोर पर… साहब के साथ चिपकी… वो थप्पड़… चटाक… सुना?

गांड पर… हा हा… साहब तो जानवर हैं


रे… मैडम की छाती दबा रहे हैं…


नेकलाइन से उभर आई…

तू बाहर खड़ा… लेकिन मजा आ रहा है ना?”



जय की आवाज़ में वो अश्लील उत्साह था, आँखें चमक रही थीं।



अमित ने हल्के से मुस्कुराया—मन में रोमांच की एक लहर दौड़ गई, लेकिन साथ ही वो बाहरीपन—‘हाँ… मैं बाहर… वो अंदर…’


लेकिन जय के कमेंट्स सुनकर उत्तेजना बढ़ गई, जैसे कोई गंदी सच्चाई सुनकर मजा आ रहा हो।





अंदर, डांस फ्लोर पर खुशबू असलम से चिपककर घूम रही थी



सिल्क ड्रेस की सरसराहट म्यूजिक की बीट्स से ताल मिला रही थी,


लाइट्स उसके चेहरे पर नाच रही थीं,


पिंक सिल्क पर रंगीन छायाएँ सरक रही थीं।



असलम का हाथ उसकी कमर पर, बॉडी को दबाता हुआ—हर थाप पर छाती उसके सीने से रगड़ रही थी,



सिल्क की चिकनाहट त्वचा पर फिसल रही।


“जान… ये बीट्स… तेरी साँसों से ताल मिला रही हैं… चिपक… और चिपक…”


असलम गरजा, और खुशबू ने सहयोग दिया, कमर मोड़कर गांड रगड़ी—




“हाँ… रगड़ो… सब देख रहे हैं… लेकिन मजा… उफ्फ…”



असलम ने छाती दबाई—हाथ सिल्क के ऊपर से सरकता, निप्पल्स की शेप महसूस करते हुए—






“ये… मेरी… दबाऊँगा…”


खुशबू चीख़ी,


“दबाओ… जोर से… अमित देख रहा होगा… लेकिन मैं तुम्हारी…”


गांड पर थप्पड़—चटाक की आवाज़, सिल्क पर कंपन— “ये… मेरी… मसलूँगा…” असलम ने कहा, और खुशबू ने पीछे मुड़कर होंठ चूमे—“हाँ… मसलो… पति-पत्नी हैं हम… सबके सामने…”




मैं बाहर से देख रहा था


कांच पर हाथ रखे, साँसें भाप बना रही—रोमांच इतना कि नीचे लंड टाइट हो गया,


लेकिन बाहरीपन का दर्द सीने को चीर रहा था।




‘वो… इतनी खुश… चंचल… मस्ती में… असलम के साथ… मेरे साथ कभी नहीं…



’ खुशबू का चेहरा चमक रहा था,


हँसी की वो लहरें, उत्साह की वो चमक



जैसे वो आज़ाद हो गई हो।



अमित के साथ वो कभी इतनी बिंदास नहीं रहती—हमेशा संकोच, लेकिन असलम के साथ…



वो उड़ रही थी।


‘मैं… बाहर… वो अंदर…’


जय ने कहा,



“भाई… देख… मैडम की thirkan… कमर मोड़ रही… सिल्क रगड़ रही… साहब की बॉडी से… उफ्फ… छाती दब गई… गांड पर थप्पड़… चटाक… … कितनी रंडी लग रही है… मजा आ रहा है ना?”




मैं मुस्कुराया, रोमांच की लहर दौड़ गई—‘हाँ… मजा…’ लेकिन आँखें नम हो गईं।



की तभी असलम ने देखा वह जो कुछ 4 कॉलेज के लड़के थे



जो सुबह से खुशबू के ऊपर अपनी नजर लगाए हुए थे


वह लोग भी पूरे नशे में थे और वहीं पर डांस कर रहे थे


और जैसे कोशिश कर रहे थे या किसी मौके के इंतजार में थी कि वह कैसे खुशबू के करीब आए और उसके साथ डांस करें



असलम एक रियल मर्द था


उसे अच्छे से पता था कि जब तक वह वहां रहेगा सारी स्थिति उसके नियंत्रण में रहेगी


उसने उन चार लोगों को इशारों से खुशबू के पास आकर डांस करने के लिए कहा



उन लोगों को तो जैसे ऐसा महसूस हुआ कि उन लोगों की लॉटरी निकल गई


इशारा करने की ही देर थी कि तुरंत ही वह चार लोग खुशबू के एकदम करीब आकर चिपक कर उसके साथ डांस करने लगे



खुशबू भी तुरंत ही समझ गई कि यह सारा प्लान असलम का ही है


वैसे भी उसे किसी भी तरह से डरने की जरूरत नहीं थी


जब तक वहां पर असलम था


और उसने मन ही मन यह सोचा कि वह प्रेक्टिस ही कर ले


क्योंकि वापस जाकर भी अमित के बाकी के दोस्तों के साथ भी उसे आज नहीं तो कल हम बिस्तर होना ही है


तो वह इस स्थिति का अच्छे से फायदा उठाकर मजा कर लेना चाहती थी


उसे यह बात का भी अच्छे से पता था कि यह सारी घटना भी अमित बाहर खड़े हुए देख रहा होगा बेचारा लेकिन कुछ कर नहीं आएगा या कुछ बोल नहीं पाएगा



वो उत्साहित होकर आगे बढ़ी, बिना विरोध, बल्कि खुद को पेश करते हुए


“आओ… डांस करते हैं…”



[Image: In-Shot-20260106-185735246.gif]



लड़कों की तो लॉटरी लग गई—वो चिल्लाए,


“वाह बेबी!” और खुशबू को चारों तरफ़ से घेर लिया।



चारों लड़के—तेज़, मस्कुलर, शराब के नशे में—खुशबू को घेर लिया,


[Image: In-Shot-20260106-185634278.gif]




म्यूजिक की बीट्स पर। एक ने कमर में हाथ डाल दिया


उँगलियाँ सिल्क पर सरकतीं,


कमर को मसलते हुए—


“बेबी… तेरी कमर… कितनी पतली… मसल दूँ?”



दूसरा छाती के हिस्से को सहलाने लगा


हाथ नेकलाइन पर सरकता,


उभार को दबाता—



“उफ्फ… ये छाती… सिल्क के नीचे… कितनी सॉफ्ट…”



तीसरा जाँघों के साथ मस्ती करने लगा


स्लिट में हाथ डालकर, जाँघों को रगड़ता



“ये जाँघें… स्मूथ… डांस में रगड़…” चौथा गांड को दबा रहा था

[Image: In-Shot-20260106-185619945.gif]




उगलियाँ सिल्क पर दबाव डालतीं,


थप्पड़ मारता

“गांड… किलर… दबा दूँ?”


खुशबू सबको सब कुछ करने दे रही थी—हँसकर, चिपककर, थिरकन लेते हुए

“हाँ… दबाओ… मसलो… मजा आ रहा है…”


पूरी मस्ती से इंजॉय कर रही थी, नशे में डूबी, असलम की नज़रों में।

असलम मुस्कुराता रहा,


‘हाँ… तैयार हो जा… शहर में सलीम, रहीम… सबके साथ…’




और न जाने क्यों शायद यह पूरा इत्तेफाक था..... लेकिन जब खुशबू उन चार लड़कों के साथ डांस कर रही थी ......तब मेरी कल्पना में तो मैं अपने ही दोस्त सलीम असलम रहीम को ही वहां पर उन लोगों की जगह पर देखा था ....वह कल्पना.... वह इत्तेफाक ....मुझे बहुत ही ज्यादा रोमांचित कर रहा था.......



थोड़ी देर वहां पर इसी तरह से उन सबके साथ डांस करने के बाद और थोड़ा थक कर जब


डिस्कोथीक से बाहर निकलते ही,
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असलम और खुशबू की हालत मदहोशी की चरम सीमा पर थी


वाइन की तीखी गर्माहट उनके रक्त में उबाल ला रही थी,


सिर हल्का-हल्का चकरा रहा था,



लेकिन बॉडी में वो जंगली भूख और तीव्र हो रही थी।


असलम का हाथ खुशबू की कमर पर था, सिल्क ड्रेस पर सरकता हुआ,


और खुशबू उसके कंधे पर सिर टिकाए,


हँसी की वो मीठी,

उन्मादी ध्वनि हवा में गूँज रही थी।


बाहर में और जय खड़े थे

मेरा का चेहरा उदास लेकिन रोमांच से भरा


, जय का बीयर कैन हाथ में,


आँखें चमक रही।


असलम ने उन्हें देखा,

मुस्कुराया

उस मुस्कान में वो पावर था,

जैसे कह रहा हो,


‘देखा… हमारा मजा…’


लेकिन खुशबू ने तुरंत असलम का कान पकड़ा, फुसफुसाई,


“असलम जी… अब ऊपर चलें… रात का असली मजा बाकी है…”





दोनों रुके, लेकिन असलम ने जानबूझकर आवाज़ ऊँची की


जैसे पति-पत्नी की निजी बातें हों,


लेकिन अमित और जय को सुनाने के लिए।




“जान… हाँ… ऊपर… लेकिन कंडोम… लेना पड़ेगा… रिसोर्ट के स्टोर से…

कौन सा फ्लेवर ले? स्ट्रॉबेरी? या चॉकलेट?


तुझे चॉकलेट पसंद है ना… मीठा… जैसे तेरी चीखें…”




असलम बोला, आवाज़ गहरी, लेकिन हँसते हुए, हाथ खुशबू की कमर पर और कसते हुए।

खुशबू ने हँसकर, नशे में डूबी आवाज़ में जवाब दिया,


“हाँ… चॉकलेट… लेकिन साइज… तुम्हारा वाला वो तगड़ा… XL लेना… छोटा न हो… और क्वांटिटी… कम से कम 6… रात भर तो चलेगी… सुबह तक… तू तो जानता है… तेरी स्टैमिना…”


वो चीख़ी, हँसकर, और असलम ने गांड पर हल्का थप्पड़ मारा


चटाक की आवाज़ हवा में गूँजी।


“हाँ जान… 6… और लुब्रिकेंटेड… ताकि रगड़ में मजा आए… तू तो गीली हो जाती है… लेकिन एक्स्ट्रा…”


असलम गरजा, और खुशबू ने उसके होंठ चूमे,



“हाँ… एक्स्ट्रा… तू तो जानवर है… हमारी रात… हॉट होगी…”


वो जानबूझकर ऊँची आवाज़ में बोली, अमित और जय को सुनाने के लिए

मेरा का चेहरा लाल हो गया, लेकिन नीचे उत्तेजना बढ़ गई।

लेकिन मुझे कुछ समझ में ही नहीं आया कि यह डिस्को से बाहर निकलते ही खुशबू और असलम यह सारी किस तरह की बातें कर रहे हैं


वह भी इतने ओपन ली


और वह भी मुझे सुनाई दे उसे तरह से


यह क्या बात है

खुशबू भला कंडोम क्यों मंगवा रही है


वह पीछे वह भी डबल एक्सेल साइज के


कन्फ्यूजन की स्थिति से मेरा दिमाग भरा पड़ा था




कंडोम की डिटेल्स फिक्स हो गईं



फ्लेवर चॉकलेट, साइज XL, क्वांटिटी 6, लुब्रिकेंटेड।



खुशबू ने असलम का हाथ पकड़ा, लेकिन डोमिनेंट टोन में बोली,


“असलम जी… आप जाकर ले आए … मैं इंतज़ार करूँगी… जय भाई… तू भी असलम जी के साथ चल… हेल्प कर… रिसोर्ट स्टोर बंद न हो जाए…”



असलम ने सिर हिलाया,



“हाँ जान… आता हूँ… 5 मिनट में…” और जय के साथ बाहर की तरफ़ चले गए


Mai अकेला खड़ा रहा, मन में उत्तेजना और खालीपन मिश्रित।



मुझे बड़ा अच्छे से पता था कि इस तरह की बात और मेरे सवाल सुनकर शायद खुशबू का इतना रंगीन मूड पूरा ऑफ हो जाएगा


लेकिन बात और मुद्दा ही ऐसा था कि मुझे उसका जवाब चाहिए ही था





मैंने हल्के से पूछ ही बैठा, आवाज़ काँपते हुए,


“खुशबू जी… XL… इतनी बड़ी… क्यों?” 6'6 क्यों bhala!???और ये सब किस लिए...!???





लेकिन खुशबू अल्कोहल के नशे में थी, सिर हल्का, चेहरा लाल, आँखें चमक रही—वो हँसकर, शरारती मुस्कान के साथ बोली,




“अरे जान… सरप्राइज है तुम्हारे लिए … बाद में पता चलेगा…

अभी तुम ऊपर चलो!!!!




उसके शब्दों में वो मैनिपुलेशन था—शक को हँसी में उड़ा दिया,

मैं चुप हो गया, मन में रोमांच बढ़ गया,


‘सरप्राइज… बाद में…’


लेकिन कहीं अंदर चुभन बाकी।










उधर असलम जय के साथ रिसोर्ट स्टोर की तरफ़ चला गया



जय उसके पीछे-पीछे चल रहा था, बीयर का कैन अभी भी हाथ में,

लेकिन आँखें चमक रही थीं


चापलूसी का मौका था।



“साहब… वाह… मैडम तो आग हैं रे… डांस में वो thirkan… सिल्क रगड़ रही… और आप… कितने किंग हैं… मैडम को संभाल रहे… मैं तो बस देखता रह गया… साहब, आपका लक… ऐसी बीवी…”




जय बोला, आवाज़ में वो चापलूसी थी, जैसे कोई कुत्ता मालिक को खुश करने को ललव कर रहा हो। असलम हँसा,



“हाँ  जय… खुशबू… उफ्फ… फिगर वाइज तो बॉम्ब है… 36-28-36…

गोरी त्वचा…

सिल्क में लिपटी…

डांस में चिपकी…

लेकिन बिस्तर पर…

जानवर है रे… चीखती है…


‘जोर से…’

‘फाड़ दो…’


लेकिन मैं… XL… फाड़ता हूँ… हा हा…


तू देखना… रात को कमरे से चीखें सुनाई देंगी…”



असलम बिंदास बोल रहा था, नशे में, एक निचले नौकर जय के साथ,


जैसे अमित की पत्नी पर कोई हक हो।



जय हँसा,



“साहब… सही कहा… मैडम की गांड… छाती… बिस्तर पर… उफ्फ… अगर कभी मौका मिले… छोटी ब्रा-पैंटी में देख लूँ… बस…”



जय ने चापलूसी की, ताकि असलम खुश होकर मौका दे।


असलम हँसा,


“देखना पड़ेगा भाई… लेकिन पहले कंडोम ले… XL… चॉकलेट… रात लंबी है…”









खुशबू ने असलम को जाने दिया, लेकिन उसके मन में एक शरारती योजना थी—




अमित को थोड़ा खुश करना,


ताकि उसका इंटरेस्ट इस हनीमून में बना रहे।


‘बेचारा अमित… बाहर खड़ा… जल रहा होगा… लेकिन मैं इसे थोड़ा मजा दूँगी… ताकि वो मेरे कंट्रोल में रहे… और असलम को आने में 2-5 मिनट लगेंगे… अमित तो इतनी ही देर में खत्म हो जाएगा… कितना पागल है ये मेरे फिगर का…’



वो सोच रही थी, नशे की हल्की गर्माहट अभी भी बॉडी में बाकी थी,


सिल्क ड्रेस पर पसीने की चमक, साँसें तेज़। वो अमित की तरफ़ मुड़ी, मुस्कुराई



उसकी आँखों में वो मीठी, लेकिन डोमिनेंट चमक।


“अमित… तुम आओ ना… ऊपर चलो… असलम जी कंडोम लेने गए हैं… थोड़ी देर है… मैंने वादा किया था ना… तुम्हें हिला दूँगी… चलो… अकेले में… मजा आएगा…”



उसकी आवाज़ शरारती थी, लेकिन कमांडिंग—जैसे कोई मालकिन अपने पालतू को इनाम दे रही हो।



अमित का चेहरा लाल हो गया, रोमांच की लहर दौड़ गई—




‘हाँ… ऊपर… अकेले…’ वो सोचकर, बिना सवाल, उसके पीछे-पीछे चला गया।

सूट के कमरे में पहुँचते ही,


दरवाज़ा बंद हुआ


खुशबू ने अमित को सोफे पर बिठाया,


उसके बगल में बैठ गई


उसकी जाँघ अमित की जाँघ से रगड़ गई,

सिल्क का नरम स्पर्श महसूस हुआ।



“तुम्हें पता है अमित… मैं तुम्हें खुश देखना चाहती हूँ… ये हनीमून तुम्हारा भी है… लेकिन असलम जी आ रहे हैं… तो जल्दी… नंगा हो जाओ… मैं तुम्हें हिला दूँगी… वादा निभाऊँगी…”



वो शरारत से बोली, हाथ अमित के कंधे पर रखकर सहलाया—



उँगलियाँ नरम, लेकिन दबाव वाला, जैसे कोई मालकिन अपने पालतू को सहला रही हो।



मेरा का दिल धक-धक करने लगा, चेहरा लाल, नीचे लंड टाइट हो गया


‘हनीमून पर… पहली बार… हाथ से…’ वो सोचकर, काँपते हाथों से शर्ट उतारी,


पैंट खोली—नंगा हो गया,


छोटा लंड तना हुआ।



“खुशबू जी… तुम… इतनी अच्छी हो…”



अमित फुसफुसाया, शर्म से आँखें नीचे।

खुशबू हँसी, नशे की हल्की चमक आँखों में



“अच्छी? हाँ… तुम्हारे लिए ही तो… लेकिन देखो… कितना पागल हो गया तू…


मेरा फिगर देखकर…


मेरी बॉडी… गांड… बिकिनी… सबका दीवाना…”



वो शरारत से बोली, और अमित पर चढ़ गई




उसकी जाँघें अमित की कमर के दोनों तरफ़ फैल गईं,


सिल्क ड्रेस अमित की त्वचा पर रगड़ रही थी, गर्माहट महसूस हो रही।



अमित का लंड उसके स्लिट से रगड़ गया, एक सिहरन दौड़ गई


। “खुशबू जी… आह…”


अमित सिसका। खुशबू ने हाथ नीचे किया, छोटा लंड पकड़ा


नरम लेकिन टाइट, गर्म मन ही मन सोचने लगी


“देखो… कितना छोटा… लेकिन कितना तड़प रहा… मेरी गांड की याद में?


बीच पर बिकिनी में…

थिरक रही थी ना?


असलम जी के साथ…


तू बाहर देख रहा था…

लेकिन अब… मैं हिला रही हूँ…”





वो हिलाने लगी, धीरे-धीरे, उँगलियाँ ऊपर-नीचे, अमित की सिसकारियाँ कमरे में गूँजने लगीं


“हाँ… खुशबू जी… तुम्हारी गांड… बिकिनी… उफ्फ…”



अमित कराहा, आनंद में डूबा।

खुशबू के मन में विचारों का तूफान था


‘बेचारा… कितना पागल… मेरा फिगर… लेकिन असलम के साथ तो असली मजा… ये छोटा… 2 मिनट में खत्म… लेकिन इसे खुश रखना है… कंट्रोल में…’




वो बेइंतहा एंजॉय कर रही थी,


पावर का नशा



‘मैं दोनों को कंट्रोल कर रही हूँ… अमित को ये… असलम को वो… कितना मजा…’


हिलाते हुए, वो बीच-बीच में नीचा दिखाती



“तुम तो कितने क्यूट हो… छोटा लंड… लेकिन मेरी बॉडी का दीवाना…  लेकिन तू मेरा प्यारा… हिला रही हूँ ना… चीखो…”



अमित स्वर्ग में था



‘पत्नी… हाथ से… हनीमून पर… पहली बार…’ आनंद की लहरें दौड़ रही थीं,



2 मिनट में झड़ गया—“आह… खुशबू जी…” वो सिसका, संतुष्ट।






अमित का निकल जाना एक झटके-सा था


दो-तीन बूंदें सिल्क चादर पर गिर गईं, कमरे की डिम लाइट्स में चमक उठीं, हवा में एक हल्की-हल्की नमकीन महक फैल गई।




उसका बॉडी काँप रहा था, साँसें तेज़ और उखड़ी हुईं, सीने पर एक मीठी थकान की लहर दौड़ रही थी


जैसे कोई लंबा इंतज़ार खत्म हो गया हो।


‘हनीमून पर… पहली बार… हाथ से… खुशबू ने…



’ मन में ये विचार घूम रहा था, आनंद की एक लहर में डूबा हुआ,


लेकिन साथ ही गिल्ट की हल्की चुभन



‘असलम आने वाला है…’


वो धीरे-धीरे स्वस्थ हुआ, साँसें सामान्य होने लगीं, बॉडी की वो कंपकंपी शांत हो रही थी।



काँपते हाथों से पैंट पहनी, शर्ट स्ट्रेट की—त्वचा पर अभी भी खुशबू के स्पर्श की गर्माहट बाकी थी, सिल्क ड्रेस की वो चिकनी रगड़ की याद में नीचे हल्की हलचल बाकी।



“खुशबू जी… थैंक यू… तुम… कितनी अच्छी हो…” अमित फुसफुसाया, चेहरा लाल, आँखें नीचे, लेकिन मुस्कान के साथ—संतुष्टि का एहसास, जैसे स्वर्ग का एक टुकड़ा मिल गया हो।




खुशबू ने हँसकर उसके बाल सहलाए,




“अच्छा लड़का… तुम्हें मजा आया ना?

अब जाओ… रेस्ट कर लो… असलम जी आ रहे होंगे…”


लेकिन तभी दरवाज़े पर नॉक हुआ


असलम का आगमन। दरवाज़ा खुला, असलम अंदर आया


कंडोम का पैकेट जेब में, चेहरा नशे से लाल, आँखें चमक रही,


हवा में वाइन की तीखी महक उसके साथ आई।



“जान… ले आया… XL… 6… चॉकलेट… अब रात का मजा…”



असलम गरजा, खुशबू को गले लगा लिया, होंठों पर गहरा किस


जीभें लिपटती हुईं, कमरे में एक कामुक सिसकारी गूँजी।


अमित खड़ा हो गया, शर्म से लाल, लेकिन रोल में खोया—




“असलम भाई… मैं… जाता हूँ…”




अमित को इस वक्त खुशबू के साथ कमरे में रहते हुए जैसा यह महसूस हो रहा था कि वह अपनी बीवी को नहीं बल्कि असलम की बीवी के साथ करीबी बना रहा था


उसे अब कहीं ना कहीं सच में ऐसा लगने लगा था जैसे वह अपनी पत्नी से करीब आकर कुछ ऐसा कर रहा है जो उसे नहीं करना चाहिए था

उसे ऐसा महसूस हो रहा था जैसे वह सच में असलम की बीवी हो



खुशबू ने असलम के किस को तोड़ा, लेकिन अमित को देखा


उसकी आँखों में वो शातिर चमक।



“हाँ अमित… तुम जाओ… गुड नाइट… रेस्ट कर लो… कल सुबह मिलते हैं…”



वो बोली, मीठे लेकिन इनडायरेक्ट लहजे में, जैसे कोई मालकिन अपने नौकर को विदा कर रही हो।



लेकिन जाते-जाते, वो अमित के कान में फुसफुसाई



“लेकिन याद रखना… देर शाम को जब मैं मैसेज करूँगी… तुम अपने नीचे वाले दोस्तों को ऊपर लेकर आ जाना… कमरे के बाहर… तुम्हें और उन्हें बड़ा मजा आएगा… सरप्राइज रहेगा… बस इतना ही… कुछ मत सोचना…”



उसके शब्दों में वो शरारत थी, लेकिन डोमिनेंट कमांड—अमित का मन कन्फ्यूजन से भर गया,



‘नीचे वाले दोस्तों… जय, कमल… ऊपर… कमरे के बाहर? मजा? क्या सरप्राइज?’


लेकिन गिल्ट और रोल ने दबा दिया



“हाँ… हाँ खुशबू जी… मैसेज का इंतज़ार करूँगा…” अमित बोला, और कमरे से बाहर निकल गया—दरवाज़ा बंद होते ही, अंदर असलम और खुशबू की हँसी गूँजी।










मैं सीढ़ियाँ उतरते हुए कन्फ्यूजन में डूबा था—मन में विचारों का तूफान।


‘खुशबू ने ऊपर आने के लिए क्यों कहा… बाकी नौकरों के साथ?

कमरे के बाहर… मजा?

क्या सरप्राइज?

और इतने कंडोम… 6… XL… सरप्राइज… क्या मतलब?’


सीने में एक हल्की चुभन थी, शक की एक लहर उठ रही थी, लेकिन गिल्ट ने दबा दिया


नहीं… वो मेरे लिए ही तो… सरप्राइज… मजा आएगा… अपना रोल निभाना है…’


नीचे पहुँचते-पहुँचते, कन्फ्यूजन गहरा हो गया, लेकिन रोमांच का ट्विस्ट भी था—‘कल… सरप्राइज…’ वो सोचकर लेट गया, नींद नहीं आ रही।
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रात के 12:45 बजे का समय था।


रोमांच की आग, लेकिन गिल्ट की ठंडी चुभन, जैसे कोई मीठा जहर धीरे-धीरे फैल रहा हो।


‘ये सरप्रप्राइज… सुनना… लेकिन क्यों… खुशबू जी… असलम भाई…’


मन में कन्फ्यूजन का तूफान मच रहा था


‘क्यों बुलाया हमें… नौकरों को? क्या ये अपमान है? लेकिन… मजा… सुनने का…’



वो खुद को जस्टिफाई कर रहा था,


‘हनीमून है… नशे में… पति-पत्नी… मजा करेंगे… बुराई क्या?


मैं तो हेल्पर हूँ… सुनूँगा… उत्साहित हूँ…’


नीचे लंड फिर से टाइट हो गया, हाथ काँप रहे थे, लेकिन उत्साह की लहर दौड़ रही थी


कन्फ्यूजन गहरा था, लेकिन रोमांच इतना तीव्र कि साँसें तेज़ हो गईं।

खुशबू का मैसेज मेरे फोन पर आ गया था कि बाकी के नौकरों को लेकर ऊपर आ जाओ..... वह लोग भी उत्साह से .....और क्या होगा इस बात से अनजान..... मेरे साथ ऊपर आ गए और अब हम सब लोग कमरे के बाहर खड़े हैं....


कमरा एक राजसी, कामुक गुफा बन चुका था


एसी की ठंडी हवा त्वचा पर सिहरन पैदा कर रही थी, लेकिन अंदर की गर्माहट सब दबा रही थी,


डिम लाइट्स सिल्क चादरों पर सुनहरी चमक बिखेर रही थीं,


असलम ने दरवाज़ा बंद किया—क्लिक की आवाज़ गूँजी,


और खुशबू को दीवार से सटा लिया, उसके होंठों पर गहरा किस


“जान… तू मेरी जिंदगी है… तेरी ये आँखें… ये बॉडी… मैं तेरे लिए पागल हूँ… हर रात तुझे चोदने का सपना देखता हूँ…”



असलम की आवाज़ गहरी, प्रेम से भरी, लेकिन वासना की आग से जलती हुई।


खुशबू ने उसके होंठ काटे


“असलम जी… तू मेरा राजा… तेरी ये ताकत… तेरी ये मर्दानगी… मैं तेरे लिए पागल हूँ… तेरे बिना जी नहीं सकती… आज रात… पूरी तरह अपना बना लो…”


वो चीख़ी, आवाज़ इतनी जोर की कि आसपास के कमरों में गूँज गई, दीवारें कंपा दीं।


"हां डियर वैसे भी हमारा हनीमून है .....और हनीमून पर तो हम जैसे हॉट पति-पत्नी एक दूसरे में खो ही जाते हैं ....और एक दूसरे को पूरा प्यार से नहला ही देते हैं ना..    "असलम ने कहा



"बिल्कुल असलम जी मैं आपकी हूं और आप भी मुझे अपना बना ही लीजिए"

खुशबू ने भी एकदम रोमांटिक अंदाज में कहा



खुशबू और असलम दोनों अच्छे से जानते थे कि  अमित के साथ बाकी के नौकर भी दरवाजे के ऊपर खड़े यह सारी बात सुन रहे हैं






असलम ने उसे बेड पर पटक दिया,

ऊपर चढ़ गया मिशनरी पोजीशन में,

वैसे भी खुशबू नाइटी में थी हल्के-हल्के उसके नाइटी ऊपर करके उसकी छाती को निचोड़ने लगा...


खुशबू भी उसका पूरा साथ दे रही थी और उसका सर अपने छाती के ऊपर और दबा रही थी...


साथ ही साथ वह दोनों भूखे कुत्तों की तरह एक दूसरे को लिप किस कर रहे थे.....


वह दोनों जैसे बस इंतजार नहीं कर पा रहे थे एक दूसरे के साथ घुल मिल जाने में.....


खुशबू ने नीचे से असलम का अंडरवियर निकाल कर उसे पूरा नंगा कर दिया असलम ने भी लगभग वासना से भारी हुई अपनी दिमाग का काबू खोकर खुशबू की नाइटी फाड़ने जैसी हालत में कर दी.....




कंडोम पहना,


और अंदर घुसा


“उफ्फ… कितनी टाइट… मेरी जान… तू मेरी रानी… तेरी चूत… मेरे लिए बनी है… मैं तेरे लिए जीता हूँ…”




धक्के तेज़, बेड की चरचराहट गूँजी।


खुशबू चिल्लाई


“आह… असलम जी… फाड़ दो… जोर से… तेरा लंड… कितना तगड़ा… मैं तेरी दीवानी… चोदो… आह्ह्ह… मजा… तेरे प्रेम में डूब रही हूँ…”




उसकी चीखें इतनी जोर की कि बाहर तक गूँजीं,


आसपास के कमरों में लोग जाग गए।



असलम को मजा आ रहा था


हर धक्के में खुशबू की टाइटनेस, उसकी गर्माहट, चीखें—


“तेरी चीखें… मेरी दवा… तू मेरी पागल… मैं तेरा गुलाम…”


वो बोला, छाती चूसते हुए, निप्पल्स काटते



“ये छाती… मेरी… चूसूँगा हमेशा…”


“हाँ… चूसो… काटो… दर्द… मजा… तू मेरा सब कुछ…”


वह दोनों जैसे भूल ही गए हैं कि बाकी की कोई भी दुनिया है ....वह दोनों एक दूसरे में इतने खो गए हैं कि उन्हें इस वक्त एक दूसरे की बॉडी और सेक्स के अलावा कुछ देख ही नहीं रहा है.......

असलम जितनी जोर से धक्का देता खुशबू इतनी जोर से चिल्लाती और उतना ही असलम के पीछे से उसको और अंदर आने के लिए कहती जैसे वह उसे पूरे का पूरा ख जाना चाहती हो.....


असलम ने भी एक रियल मर्द होने के नाते खुशबू को निराश नहीं किया वह भी अपनी पूरी मर्दाना बॉडी मिशनरी पोजीशन में उसके ऊपर डालकर जोर-जोर से धक्का देने लगा...

खुशबू की च** इतना पानी छोड़ रही थी कि असलम जितना बड़ा और तगड़ा लैंड भी आराम से अंदर बाहर हो रहा था......





पोजीशन चेंज—डॉगी स्टाइल,


असलम ने गांड मारी



“ये गांड… मेरी… मसलूँगा… तू मेरी रानी… तेरे लिए पागल हूँ…”


थप्पड़ की चटाक



“हाँ… मसलो… थप्पड़ मारो… मैं तेरी गुलाम… चोदो… आह्ह्ह… फाड़ो… तेरे प्रेम में मर रही हूँ…”



खुशबू की चीखें और जोर की,


कमरे की दीवारें हिल रही थीं,


बाहर तक गूँज रही थीं।



असलम को मजा चरम पर


गांड की टाइटनेस, रगड़, चीखें


“तेरी गांड… जन्नत… तू मेरी जान… हर रात यही चाहता हूँ…”


वैसे भी असलम उसकी गांड के पीछे दीवाना था वह इतनी गोरी चिकनी सॉफ्ट और सुबह थी के पीछे से उसका नजारा देखकर ही असलम अपने आप को काबू नहीं कर पाया..... वहां उसके ऊपर थप्पड़ मारते मारते उसके बाल पीछे से खींचते खींचते असलम उसे घोड़े की तरह chod रहा था.....

खुशबू भी इन सारी घटनाओं में बिना किसी परेशानी से उसका साथ दे रही थी क्योंकि वह भी अपने आप को इतने दिनों बाद एक मर्द की सौbत में देखकर जन्नत जैसा महसूस कर रही थी


रिवर्स काउगर्ल


“घूम… thirक… तेरी कमर… मेरे लिए…”


खुशबू घूमी, गांड रगड़ी



“हाँ… देखो… मैं तेरी… चोदो… आह्ह्ह… तेरे लंड में पागल हूँ…”


चीखें इतनी जोर की कि आसपास के कमरों में लोग जाग गए, दीवारें कंप रही थीं।




6 राउंड—हर पोजीशन में प्रेम की बातें


“तू मेरी जिंदगी…”


“तू मेरा राजा…”

चीखें

“फाड़ दो… जोर से… तेरा लंड… जन्नत…”


असलम का मजा


“तेरी चीखें… मेरी दवा…” खुशबू एंजॉय—“तेरा स्पर्श… मेरी आग…”


उसे रात तकरीबन 2 घंटे में असलम ने छह बार अपना गाढ़ा वीर्य उसे बड़ी साइज के कंडोम में भर दिया होगा.....




बाहर—मैं और नौकरों .... मुझे तो कुछ समझ में ही नहीं आ रहा था कि यह सब क्या हो रहा है


यह मैं क्या सुन रहा हूं


मुझे तो मेरे कान के ऊपर यकीन ही नहीं हो रहा था


दिल बहुत ही तेजी से धड़क रहा था


और कन्फ्यूजन चरम सीमा के ऊपर था


खुशबू और असलम अंदर एक दूसरे के साथ क्या कर रहे हैं


वह देखने की हिम्मत भी नहीं हो रही थी


लेकिन जानने की उत्सुकता भी बहुत हो रही थी


खुशबू की "चिखें" मेरे कानों में अब तक गूंज रही थी


नर्वसनेस से मेरी पूरी बॉडी कैंप पर रही थी मैं जैसे पूरा ब्लैंक हो गया था.....


ना दिलो दिमाग में कुछ सवाल हो रहा था ना कोई जवाब मिल रहा था मैं बस जैसे वहां पर था ना था एक जैसा था.......


जबकि मेरे साथ आए हुए मेरे बाकी के नौकर दोस्तों के लिए तो यह अनुभव किसी जन्नत और लॉटरी लगने से क म नहीं था....


जाहिर सी बात है होटल में काम करते हुए उन लोगों को शायद ऐसे आगे बहुत अनुभव हुए होंगे लेकिन यह पूरी तरह से अलग था कमरे के अंदर की बातचीत हम लोग बहुत अच्छे से और आराम से सुन पा रहे थे.....


जय ने फुसफुसाया,


“भाई… सुन… मैडम की चीख… ‘फाड़ दो…’

साहब… ‘गांड…’ उफ्फ… सरप्राइज ये है… सुनने का मजा… तेरी mam… कितनी वाइल्ड…”



जय की आवाज़ में वो गंदा उत्साह था,


आँखें चमक रही, साँसें तेज़, जैसे कोई कुत्ता शिकार की गंध सूँघ रहा हो, बॉडी काँप रही।



कमल ने कान लगाया,


“हाँ… ‘रेड लिंगरी…’ ‘6 राउंड…’ भाई… साहब का स्टैमिना… मैडम की thirkan… सुन… चीख…” कमल उत्साहित था,


पसीना आ रहा,



“मजा… सरप्राइज… मैडम की बॉडी… अंदर… नंगी… हम तो बस सुन रहे… लेकिन कल्पना कर… गांड मसली जा रही…”



राज ने अमित का कंधा थपथपाया,



“भाई… तू लकी है… सरप्राइज… सुनना… मैडम की गांड… साहब मसल रहे… हा हा… हम तो बस सुन रहे… लेकिन तू… कभी अंदर था… कितना लकी…”





राज हँसा, लेकिन अमित मुस्कुराया—रोमांच बढ़ा


, ‘हाँ… सुनना… एंजॉय… बुराई क्या…’


लेकिन कन्फ्यूजन बाकी



‘क्यों हमें बुलाया… अपमान? नहीं… सरप्राइज… मजा…’


उत्साह ने दबा दिया, वो खुद को कन्विंस कर रहा था,


‘डांस पार्टी के बाद… नशे में… जाहिर है… मजा… शायद असलम और खुशबू होश खो चुके हैं.....

अंदर कमरे में—खुशबू और असलम का उन्माद




अमित का मन घूम रहा था


चीखें…

‘फाड़ दो’… ‘तेरा लंड’… 6 राउंड…’


कन्फ्यूजन गहरा, लेकिन उत्साह कहीं ना कहीं एक ऐसी चीज पाने की आशा या कोशिश करना जो शायद अमित के बस में नहीं थी.....

और अचानक ही उसे कुछ ऐसी घटना याद आ गई जो


उसके साथ पहले भी हो चुकी है


बहुत बार ऐसे ही तो

असलम

सलीम

रहीम वगैरा


जब अपनी गर्लफ्रेंड को अपने फार्म हाउस पर लेकर जाते थे


अमित बाहर खड़े होते ऐसे ही सब सुनता था


और अपने आप को खुश करता था


क्योंकि उसे वक्त भी वह फार्म हाउस पर आने वाली लड़कियां उसके पहुंच से बहुत बाहर थी


और आप शायद फिर उसी तरह की घटना का पुनरावर्तन हो रहा है


लेकिन अब तो वह लड़की उसकी ही पत्नी खुशबू है


और वहां अंदर वह अपने ही एक दोस्त के साथ है


अमित को जैसे ऐसा महसूस हो रहा था कि अगर जमीन उसे जगह दे तो वही अभी उसमें sama जाए










रात के करीब 2:00 बज चुके थे। डिस्कोथीक की मस्ती और उसके बाद कमरे में असलम-खुशबू का पलंग-तोड़ सेक्स अब अंतिम दौर में था।



बेड की चरचराहट धीमी पड़ गई थी,

सिल्क चादरें गीली और उलझी हुईं, हवा में पसीने, वाइन और सेक्स की वो तीखी,


नमकीन महक फैली हुई थी।


असलम और खुशबू दोनों थक चुके थे


साँसें भारी, बॉडी पर पसीने की चमक, लेकिन चेहरों पर वो संतुष्टि की मुस्कान।



असलम खुशबू के ऊपर लेटा था,


उसकी छाती पर सिर टिका, धीरे-धीरे साँस लेते हुए—


“जान… आज रात… तूने मुझे मार डाला… 6 राउंड… तेरी चीखें… अभी भी कानों में गूँज रही हैं…”


खुशबू ने हल्के से हँसकर उसके बाल सहलाए



“असलम जी… तूने तो मुझे फाड़ दिया… लेकिन मजा… उफ्फ… तेरे बिना जी नहीं सकती…”


दोनों थके हुए थे, बॉडी में वो मीठी थकान, लेकिन प्रेम की वो गर्माहट अभी भी बाकी।

खुशबू ने बेडसाइड टेबल से फोन उठाया



हाथ काँप रहे थे, लेकिन वो जानती थी कि बाहर अमित और नौकर अभी भी खड़े होंगे।



उसने मैसेज टाइप किया, आवाज़ में वो मीठी कमांड



“अमित… तुम नीचे सर्वेंट क्वार्टर में जाकर सो जाओ… सबको ले जाना… अभी जो कुछ हुआ, उसका एक्सप्लेन कल सुबह तुम्हें अपने आप पता चल जाएगा… बस इंतज़ार करना… गुड नाइट जान… ❤️”



मैसेज सेंट हुआ।


असलम ने मुस्कुराकर कहा, “अच्छा किया… बेचारा बाहर जल रहा होगा… लेकिन कल सरप्राइज…”


खुशबू हँसी, “हाँ… कल मजा आएगा…”

बाहर अमित का फोन बजा—मैसेज देखते ही उसका दिल धक से हो गया।



‘कल सुबह… अपने आप पता चलेगा… सरप्राइज…’



मन में कन्फ्यूजन का तूफान और तेज़ हो गया—



‘क्या हुआ अंदर… चीखें… 6 राउंड… XL कंडोम… और कल सरप्राइज?’ लेकिन मैसेज में वो दिलासा था, वो ❤️, जिसने उसे थोड़ा शांत किया।



वो जय, कमल और राज को बोला,



“चलो… नीचे… मैडम ने कहा… सोने…” लेकिन उसकी आवाज़ काँप रही थी,



मन ऊपर के कमरे में अटका हुआ था



‘अंदर क्या हो रहा होगा… अभी भी… थके होंगे… लेकिन…’ नीचे उतरते हुए उसका दिल और दिमाग ऊपर ही था—खुशबू की चीखें कानों में गूँज रही थीं, असलम की गरज, सिल्क की सरसराहट, बेड की चरचराहट—सब कुछ याद आ रहा था, रोमांच और कन्फ्यूजन मिश्रित।




सर्वेंट क्वार्टर में पहुँचकर सब अलग-अलग बेड पर लेट गए, लेकिन नींद कहाँ आनी थी।


जय ने सबसे पहले शुरू किया


अंधेरे में हाथ नीचे,


“भाई… सुन… मैडम की चीखें… ‘फाड़ दो’… साहब का XL… गांड मसली… छाती दबाई… उफ्फ… मैं तो हिला रहा हूँ…” कमल हँसा, “हाँ… ‘6 राउंड’… मैडम थक गई होंगी… लेकिन मजा… कल सरप्राइज क्या होगा?” राज बोला, “मैडम की गांड… सिल्क में… थप्पड़… चटाक… मैं तो सोच-सोचकर…” सब हँसे, अंधेरे में हाथों की हलचल की आवाज़ें—



हिलाने की, सिसकारियाँ दबी हुईं। अमित चुप था, लेकिन उसका मन ऊपर था



‘खुशबू जी… असलम भाई… चीखें… मजा…’ वो भी हिला रहा था, रोमांच चरम पर, लेकिन कन्फ्यूजन



“कल… सरप्राइज… क्यों बुलाया था हमें?” सब नौकर ऊपर हुई घटनाओं को याद करके, चीखें, थप्पड़, धक्के—सब कल्पना करके हिला रहे थे, मजा ले रहे थे, जैसे कोई मुफ्त का शो देख लिया हो
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Ye galat ho raha hai bahut jyada itna koi kaise apne pati ko gira sakta hai
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अपनी तरफ से मैंने पूरी कोशिश की है

मैं जो महसूस किया


और मैंने जो देखा या मेरे साथ जो हुआ उसे शब्दों में बयां करने की



आशा करता हूं सबको यह नया अध्याय पढ़कर मजा आया होगा



साथ ही साथ कुछ सजेशन भी चाहूंगा कि


आप लोग चाहते हैं क्या की कहानी को में और तेजी से आगे बढ़ा हूं या  ye गति बराबर hai!???



आप लोगों की ढेर सारी कमेंट का इंतजार रहेगा
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Do you still want amit to be treated like this
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Excellent story. Just more pics with nudity please.
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Tongue 
(07-01-2026, 02:54 PM)Namard pati Wrote: अपनी तरफ से मैंने पूरी कोशिश की है

मैं जो महसूस किया


और मैंने जो देखा या मेरे साथ जो हुआ उसे शब्दों में बयां करने की



आशा करता हूं सबको यह नया अध्याय पढ़कर मजा आया होगा



साथ ही साथ कुछ सजेशन भी चाहूंगा कि


आप लोग चाहते हैं क्या की कहानी को में और तेजी से आगे बढ़ा हूं या  ye गति बराबर hai!???



आप लोगों की ढेर सारी कमेंट का इंतजार रहेगा

आपने बहुत अच्छा अपडेट दिया । आज के इस अपडेट को पढ़ते हुए मैं 3 बार झड़ गया ।
खुश्बू जैसी होशियार और समझदार पत्नी होना सौभाग्य की बात है, जो अपने ही H इंदु पति को उसकी असली जगह उसकी औकात बताती है और उससे उसे स्वीकार करवाती है । मैं भगवान से खुशबू जी जैसी परम सुंदरी समझदार और बोल्ड पत्नी की मांग करता हु । जिस तरह से खुशबू ने अपने पति को उसकी असली औकात दिखाई उसके अपना ओर अपने M स्लिम शौहर का नौकर बना दिया वो भी उसके मर्जी से ये इस कहानी में खुशबू की अपने M स्लिम मालिकों और उनके मूसल लुंड के प्रति प्यार और समर्पण को दर्शाता है ।
XXL साइज के 6 पैकेट कंडोम जो कि शायद M स्लिम मर्दों को छोटे भी पड़ सकते है , और एक रात के लिए कम भी और फट भी सकते है ।
कम पड़ने की स्थिति में अगर अमित को ही कंडोम लाने भेजा जाए तो काहानि में एक अलग जान आयेगी , अमित को और एहसास होगा उसकी नामर्दानगी का, उसकी गुलामी का , उसकी असली जगह का ओर उसके औकात का ।
खुश्बू के सरप्राइज़ का इंतजार अमित ओर उसके स्तर के नौकर दोस्तो से ज्यादा मुझे हो रहा है ।काश मेरी फ्यूचर वाइफ भी मुझे ऐसी सरप्राइस दे ।
स्टोरी की रफ्तार एकदम सही है बस अपडेट्स थोड़े जल्दी लाने की जरूरत है और pics gifs एड हो जाए तो सोने पर सुहागा ।
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(07-01-2026, 03:22 PM)Ayush01111 Wrote: Do you still want amit to be treated like this

Q bhai kya hua....!??anything wrong
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(07-01-2026, 03:22 PM)Ayush01111 Wrote: Do you still want amit to be treated like this

Q bhai....kya hua....any problem
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(07-01-2026, 09:07 PM)Namard pati Wrote: Q bhai kya hua....!??anything wrong

I want some spice its just wife is having fun not husband i am found of reaction of action
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(07-01-2026, 09:16 PM)Namard pati Wrote: Q bhai....kya hua....any problem

Bhai ager m community ko is tarah se kalpnic bato se Khushi milti hai to lekhate raho but stories ko ase leko jo toda hajm ho sirf sex ke mat likho toda to real life ke sath likho jisme husband ka apna bhi wajud ho
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Nice update dear..

But shuru me jo aap likhte the usse thoda ab kam majedar hone laga hai.

Phir bhi maja bahut aaya.. Keep it up..

Honeymoon ko thoda aur Extreme level pe le jao..

Aur uske baad Khusboo ka past dikhao.. Ki wo kaisi itni badi chinal Ladki bani..

college aur college ke dino me usne kya kya kia aur kitno ke sath kia..

Waiting for next update dear.
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(07-01-2026, 09:17 PM)Ayush01111 Wrote: I want some spice its just wife is having fun not husband i am found of reaction of action

हां मेरे भाई हो सकता है शायद आपकी बात सही है लेकिन कहानी के स्तर पर तो जो घटना हुई थी वही में बयां कर रहा हूं
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(08-01-2026, 01:19 AM)Bada bhai Wrote: Bhai ager m community ko is tarah se kalpnic bato se Khushi milti hai to lekhate raho but stories ko ase leko jo toda hajm ho sirf sex ke mat likho toda to real life ke sath likho jisme husband ka apna bhi wajud ho

हां शायद आप सही कह रहे हैं लेकिन यह कहानी मेरी जिंदगी की सच्ची घटना के ऊपर आधारित है तो जाहिर सी बात है उसमें तो मैं इस बात का जिक्र करूंगा जो मेरे साथ हुआ है मैंने जो देखा है और मैंने जो महसूस किया है लेकिन आप जो बोल रहे हो उसे बात पर भी मैं आपको एक और बात समझाना चाहूंगा कि मैं अभी से ऐसा नहीं हुआ है वह शुरुआत से बचपन से ही ऐसा है..... वह जिस गली मोहल्ले जिन लोगों के साथ पाल बड़ा हुआ था उसने बचपन से ही ऐसी ही सब बातें अच्छी थी सुनी थी और महसूस थी जो कहीं ना कहीं मेरे सब कॉन्शियस माइंड पर बहुत अच्छा और गहरा असर करने लगी थी
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