27-12-2025, 05:30 PM
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Adultery खुशबू : गोल्ड डिगर हाउसवाइफ 2
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28-12-2025, 07:58 AM
(This post was last modified: 29-12-2025, 11:07 AM by Dhamakaindia108. Edited 1 time in total. Edited 1 time in total.)
भाग ::- 2 (शुरू )
में खुशबु । मैं 38 साल की हूँ, एक पत्नी और उस सबसे ऊपर, एक ऐसी औरत जो अपनी इच्छाओं को छिपाती नहीं। मेरी शादी मयंक से हुई है, जो 42 साल का है, एक साधारण सा इंसान, प्यार करने वाला, लेकिन बिस्तर पर वो जुनून नहीं जो मुझे चाहिए। मैं कोलकाता के एक मल्टीनेशनल कंपनी में असिस्टेंट मैनेजर थी लेकिन अब डायरेक्टर हूँ , और मेरा पूर्व बॉस, रंजन सिन्हा , 52 साल का एक मर्द, जो अपनी उम्र के बावजूद जवान मर्दों को टक्कर देता है। उसकी कद-काठी, गहरी आवाज़, और वो आँखों में चमक जो मुझे हर बार कमज़ोर कर देती है, वो सब मेरे लिए एक नशा है। ये कहानी उस दिन की है जब मैंने एक शुभ * त्योहार को अपने तरीके से मनाया, और अपने पति को बिना बताए उसकी आँखों के सामने धोखा दिया। बात उस रविवार की है, जब कोलकाता की गलियों में त्योहार की रौनक थी। सुबह-सुबह मैंने घर में पूजा का आयोजन किया। लाल साड़ी पहनकर मैंने मंदिर सजाया, दीये जलाए, और मयंक के साथ मिलकर भगवान से उसकी लंबी उम्र और सेहत की दुआ मांगी। मयंक, जो एक ग्रैमेंट की दुकान चलाते है, हमेशा की तरह मुझे प्यार भरी नज़रों से देख रहा था। उसकी सादगी मुझे प्यार तो करती थी, लेकिन मेरे अंदर की आग को बुझाने के लिए वो काफ़ी नहीं था। मेरे मन में कुछ और ही चल रहा था। पूजा के बाद, मैंने मयंक से कहा, “सुनो, मुझे ऑफिस का कुछ काम है। मिस्टर सिन्हा के घर से कुछ फाइल्स लेनी हैं। आज तो ऑफिस बंद है, लेकिन वो फाइल्स कल सुबह की मीटिंग के लिए चाहिए।” मैंने अपनी बात को इतना सच्चा बनाया कि मयंक को शक का मौका ही नहीं मिला। उसने हल्की सी नाराज़गी दिखाई, “अरे, खुशबू , आज तो त्योहार है, क्या ज़रूरत है?” मैंने उसका गाल सहलाते हुए कहा, “बस थोड़ी देर की बात है, मेरे राजा। मैं जल्दी वापस आ जाऊँगी।” मेरी मीठी बातों और हल्की सी मुस्कान ने उसे मना लिया। मैंने जानबूझकर एक टाइट ब्लाउज़ और हल्की सी साड़ी चुनी, जो मेरे कर्व्स को उभारे। मेरे बाल खुले थे, और मैंने हल्का मेकअप किया, ताकि मिस्टर सिन्हा को मेरी मंशा साफ़ दिखे। मयंक ने मुझे अपनी गाड़ी से मिस्टर सिन्हा के घर तक छोड़ा। मिस्टर सिन्हा का घर कोलकाता के पॉश इलाके में था। बड़ा सा बंगला, जिसके गेट पर गार्ड खड़ा था। मयंक ने गाड़ी रोकी और कहा, “मैं यहीं रुकता हूँ। जल्दी आना।” मैंने उसे चूमते हुए कहा, “हाँ, बिल्कुल। तुम चाय पी लो पास के ढाबे से।” वो मुस्कुराया और चला गया। मेरे दिल की धड़कनें तेज थीं, लेकिन ये डर की नहीं, बल्कि उत्तेजना की थीं। मैंने मिस्टर सिन्हा को फोन किया, “सर, मैं बाहर हूँ।” उसकी गहरी आवाज़ ने मेरे रोंगटे खड़े कर दिए, “आ जा, खुशबू । दरवाजा खुला है।” अंदर जाते ही मैंने देखा मिस्टर सिन्हा अपने लिविंग रूम में था, सिर्फ़ एक ढीली कुर्ती और पायजामा पहने। उसकी छाती के बाल और मज़बूत कंधे मुझे हमेशा से ललचाते थे। उसने मुझे देखा और उसकी आँखों में वही भूख थी जो मुझे हर बार दीवाना बना देती थी। “ खुशबु , आज तो त्योहार है। फिर भी काम?” उसने मज़ाक में कहा, लेकिन उसकी नज़रें मेरी साड़ी के पल्लू से मेरी कमर तक भटक रही थीं। मैंने हँसते हुए कहा, “हाँ, सर, लेकिन काम तो काम है। और वैसे भी, आपके साथ काम करने में मज़ा आता है।” मेरी आवाज़ में वो शरारत थी जो उसे समझ आ गई। उसने मुझे अपने पास बुलाया, और मैं उसके करीब गई। उसका हाथ मेरी कमर पर रखा गया, और मेरी साँसें तेज हो गईं। “ मयंक बाहर है न?” उसने पूछा, और मैंने हल्का सा सिर हिलाया। “उसे कुछ नहीं पता, सर। वो बस चाय पी रहा है।” मिस्टर सिन्हा ने हँसते हुए कहा, “तू तो बड़ी हरामिन है, खुशबू।” मैंने उसकी आँखों में देखा और कहा, “हरामिन ही तो चाहिए आपको, सर।” बस, यही वो पल था जब हमारी नज़रें टकराईं, और कमरे में गर्मी बढ़ गई। उसने मेरी साड़ी का पल्लू धीरे से खींचा, और मैंने उसे रोकने की कोई कोशिश नहीं की। मेरी साड़ी फर्श पर गिरी, और मैं सिर्फ़ अपने टाइट ब्लाउज़ और पेटीकोट में थी। मेरे स्तन ब्लाउज़ में कसे हुए थे, और मेरी साँसों के साथ वो ऊपर-नीचे हो रहे थे। सिन्हा ने मेरे ब्लाउज़ के हुक खोलने शुरू किए, एक-एक करके, और हर हुक के खुलने के साथ मेरी उत्तेजना बढ़ रही थी। “ खुशबु , तेरे ये चूचे कितने मस्त हैं,” उसने कहा, और उसका हाथ मेरे स्तनों पर गया। मैंने हल्का सा कराहा, “आह्ह… सर, धीरे…” लेकिन मेरी आवाज़ में वो कमज़ोरी थी जो उसे और उकसा रही थी। उसने मुझे सोफे की तरफ धकेला, और मैं चारों हाथ-पैरों के बल झुक गई, मेरी गांड हवा में थी, और मेरा चेहरा सोफे के मुलायम कुशन में दबा हुआ था। उसने मेरा पेटीकोट ऊपर उठाया, और मेरी पैंटी को एक झटके में नीचे खींच दिया। मेरी चूत पहले से ही गीली थी, और उसने अपनी उंगलियाँ मेरी चूत पर फिराईं। “आह्ह… सर… उफ्फ…” मैं कराह रही थी, और मेरी आवाज़ कमरे में गूँज रही थी। उसने मेरी गांड पर एक हल्का सा थप्पड़ मारा, “ खुशबु , तू तो पहले से तैयार है।” मैंने हँसते हुए कहा, “आपके लिए हमेशा तैयार हूँ, सर।” उसने अपना पायजामा उतारा, और उसका लंड मेरे सामने था। करीब 7 इंच का, मोटा, और सख्त। मैंने उसे हाथ में लिया और धीरे-धीरे सहलाने लगी। “सर, ये तो मेरे पति के लंड से कहीं बड़ा है,” मैंने शरारत से कहा। मिस्टर सिन्हा ने मेरे बाल पकड़े और कहा, “तो फिर इसे चूस, खुशबू । दिखा कितनी बड़ी रंडी है तू।” मैंने उसका लंड अपने मुँह में लिया, और धीरे-धीरे चूसने लगी। मेरी जीभ उसके लंड के सिरे पर घूम रही थी, और वो कराह रहा था, “उह्ह… खुशबू … तू तो जादू करती है।” मैंने और जोर से चूसा, और मेरे मुँह से “म्म्म…” की आवाज़ निकल रही थी। कुछ देर बाद, उसने मुझे फिर से सोफे पर झुकाया। “ खुशबु , आज तेरी गांड मारूँगा।” मेरे दिल में एक हल्का सा डर था, लेकिन उत्तेजना उससे कहीं ज्यादा। मैंने कहा, “सर, धीरे करना… मेरी गांड अभी तक इतना बड़ा लंड नहीं ले पाई।” उसने मेरी गांड पर थोड़ा तेल लगाया, और अपनी उंगलियाँ अंदर-बाहर करने लगा। मैं कराह रही थी, “आह्ह… उफ्फ… सर…” फिर उसने अपने लंड को मेरी गांड के छेद पर रखा और धीरे से दबाव डाला। “आआह्ह…” मैं चीखी, लेकिन दर्द के साथ-साथ मज़ा भी आ रहा था। उसने धीरे-धीरे अपने लंड को मेरी गांड में घुसाया, और हर धक्के के साथ मेरी साँसें रुक रही थीं। “थप-थप” की आवाज़ कमरे में गूँज रही थी, और मैं चिल्ला रही थी, “सर… और जोर से… मेरी गांड फाड़ दो… आह्ह…” उसने मेरे बाल पकड़े और और जोर से धक्के मारने लगा। “ खुशबु , तेरा पति तो तुझे ऐसा मज़ा नहीं दे सकता।” मैंने कराहते हुए कहा, “नहीं, सर… वो तो बस नाम का मर्द है… आप ही मेरी चुदाई करो… मेरी चूत को आपके माल से भर दो…” मेरी गंदी बातों ने उसे और जोश में ला दिया। उसने मुझे पलटा और मेरी चूत में अपना लंड घुसा दिया। “थप-थप-थप” की आवाज़ और तेज हो गई, और मैं चिल्ला रही थी, “आह्ह… उह्ह… सर… और जोर से… मेरी चूत फाड़ दो…” उसका हर धक्का मुझे जन्नत की सैर करा रहा था। मेरी चूत गीली थी, और उसका लंड अंदर-बाहर हो रहा था। करीब 20 मिनट की चुदाई के बाद, उसने कहा, “खुशबू , मैं झड़ने वाला हूँ।” मैंने चिल्लाते हुए कहा, “सर, मेरे अंदर ही झड़ जाओ… मेरी चूत को अपने माल से भर दो…” और फिर उसने एक जोरदार धक्का मारा, और मैंने महसूस किया कि उसका गर्म माल मेरी चूत में भर रहा था। “आह्ह…” मैंने एक लंबी सिसकारी भरी, और मेरे शरीर में झुरझुरी सी दौड़ गई। चुदाई के बाद, मैंने अपनी साड़ी ठीक की, लेकिन मेरी पैंटी अभी भी गीली थी। मिस्टर सिन्हा ने मेरे चूची पर कुछ नोट फेंके और कहा, “ये ले, अपनी मेहनत की कमाई।” मैंने हँसते हुए नोट उठाए और अपनी साड़ी में रख लिए। मेरी चूत से उसका माल अभी भी टपक रहा था, और हर कदम के साथ मुझे एक अजीब सी उत्तेजना हो रही थी। मैं बाहर निकली, और मयंक गाड़ी में मेरा इंतज़ार कर रहा था। उसने नाराज़गी भरे लहजे में कहा, “इतनी देर क्यों लगी, खुशबू ?” मैंने हँसते हुए कहा, “अरे, सर के साथ कुछ जरूरी डिस्कशन था। ये लो, तुम्हारे लिए गिफ्ट।” मैंने उसे वो नोट दिए, जो अभी भी मेरे पसीने और मिस्टर सिन्हा के माल की महक से सने थे। मैंने मयंक को गले लगाया और उसके होंठों को चूमा। मेरी चूत से मिस्टर सिन्हा का माल अभी भी रिस रहा था, और मेरे मन में एक शरारती मुस्कान थी।
28-12-2025, 10:45 AM
Pati ko bhi koi khusbhu dila do cheating do tarfa karwao to maza aey
28-12-2025, 03:28 PM
30-12-2025, 07:22 PM
Updated next ऑडिटिंग ऑफिसर - " दीप "
30-12-2025, 07:27 PM
ऑडिटिंग ऑफिसर - दीप
मैं " दीप " छब्बीस साल का एक हट्टा-कट्टा लड़का और मैं कंपनी में ऑडिटिंग ऑफिसर हूँ और हमारे कंपनी की शाखायें देश के अलग-अलग शहरों में हैं और अक्सर मुझे काम के सिलसिले में दूसरे शहरों की शाखाओं में दो-तीन महीनों के लिये जाना पड़ता है। मैं शादीशुदा नहीं हूँ इसलिये मुझे इसमें कोई दिक्कत नहीं होती है। एक बार मुझे काम के सिलसिले में तीन महीने के लिये कोलकाता के शाखा जाना पड़ा। वहाँ मेरी मुलाकात श्री सिन्हा से हुई उन्होंने मुझे कंपनी की सारी जानकारी और डॉक्यूमेंट दिया और कहां " अगर किसी चीज की जरूरत पड़ने पर वह खुशबू से मदद ले सकते हैं " और उन्होंने मेरी मुलाकात ‘ खुशबू ’ से करवाई। जो कि डायरेक्टर थी कंपनी की । उसकी उम्र 38-39 साल की थी और उसकी शादी को 5 साल हुए थे। खुशबू जो कि बेहद खूबसूरत थी और उसका फिगर ३६-३०-३८ था। उसका भरा-भरा सा जिस्म बेहद सुडौल था और मैं तो उसके चूतड़ों पर बहुत फिदा था। वो जब ऊँची हील की सेंडल पहन कर चलती थी तो गाँड मटका-मटका कर चलती थी। खुशबू काफी बनठन कर दफ्तर आती थी। एक महीने में ही काम के दरमियाँ काफी घुलमिल गयी थी। वह मुझे ‘ सर ’ कहकर बुलाती थी क्योंकि वो मुझसे जुनियर थी। मैं भी उम्र में उससे छः-सात साल छोटा होने की वजह से उसे ‘ खुशबू जी ’ कहकर बुलाता था । एक बार बातों-बातों में उसने मुझसे रिक्वेस्ट की कि “सर! आप चाहें तो मेरा प्रमोशन हो सकता है... इसलिये आप हेड ऑफिस में मेरी सफारिश करेंगे तो मेरा प्रमोशन हो जायेगा और मैं इसके लिये कुछ दे भी सकती हूँ!” तब मैंने कहा, “आप क्या दे सकती हो?” तो वो कुटिल मुस्कान भरते हुए अदा के साथ बोली, “चाय पानी!” मैं भी हंस कर रह गया। उसके बाद से तो मैंने महसूस किया कि वो मुझे अजीब निगाहों से देखती थी और उसकी नज़रों में काम वासना की ललक नज़र आती थी। पहले मैं समझ नहीं सका कि वो ऐसे क्यों देखती है। फिर मुझे लगा कि या तो वो प्रमोशन के लिये ऐसा कर रही है या फिर दो साल से प्यासी होगी। खुशबू को देख कर अक्सर मेरा लण्ड भी पैंट में तंबू की तरह खड़ा हो जाता था। एक दिन उसने मुझे डिनर के लिये इन्वाइट किया। उस दिन शुक्रवार था तो ऑफिस से मैं उनके साथ ही उसके होटल के लिये निकला। रास्ते में उसने व्हिस्की की बोतल खरीद ली और होटल पहुंचते ही उसने डिनर का ऑर्डर दे दिया। होटल पहुँच कर उसने मुझे रूम में बिठाया और खुद फ्रेश होने अंदर चली गयी। जब वो ऊँची हील की सैंडल खटखटाती हुई व्हिस्की की बोतल, सोडा, बर्फ और ग्लास वगैरह लेकर वापस आयी तो मैंने देखा कि खुशबू ने अपना मेक-अप दुरुस्त किया हुआ था और कपड़े बदलकर दूसरा सलवार-सूट पहन लिया था। उसने दो ग्लास में पैग बनाये तो मैंने चौंकते हुए पूछा, “खुशबू जी! आप भी ये शौक फरमाती हैं क्या?” वो अदा से हंसते हुए बोली, “क्यों औरतें शराब का मज़ा नहीं ले सकती क्या...?” और फिर एक ग्लास मुझे पकड़ाते हुए बोली, “अकेलापन दूर करने के लिये कभी-कभी पी लेती हूँ!” फिर हम दोनों व्हिस्की पीते हुए बातें करने लगे। जब हम दो-दो पैग पी चुके तो मैंने महसुस किया कि खुशबू कुछ ज्यादा ही खिलखिला कर हंस रही थी और बार-बार मुझे अजीब निगाहों से देखती थी और बातों-बातों में कभी-कभी आँख मार देती या अपने होंठों को अपने दाँतों से दबा लेती थी। मैं समझ गया कि वो आज गरम हो चुकी है और उसे नशा चढ़ने लगा है। उसकी हरकतों से मेरा लण्ड भी सख्त हो गया था। वो मेरे सामने सोफे पर बैठी थी और जब वो अपने लिये एक और पैग बनाने उठी तो मैंने खुशबू का हाथ पकड़ कर उसको अपनी तरफ़ खींच लिया। उसने कोई प्रतिरोध नहीं किया तो मैंने उठकर खुशबू को दीवार के सहारे खड़ा कर दिया और खुशबू के होंठों को चूमने और चूसने लगा। खुशबू एकदम पागल सी हो रही थी जैसे जन्नत का मज़ा आ रहा हो। मैं खुशबू की ज़ुबान भी चूसे जा रहा था और मेरे हाथ खुशबू की कमर पर चल रहे थे। फिर मैं एक हाथ से खुशबू चूची दबने लगा तो खुशबू बेताब होने लगी। मैंने खुशबू के कान में कहा, “बहुत ज्यादा भूखी हो आप तो खुशबू जी!” खुशबू सिर्फ़, “जी सर..” ही कह सकी। मेरा हाथ अब धीरे-धीरे खुशबू की सलवार के नाड़े पर आ गया और मैंने खुशबू को चूमते हुए एक झटके में ही सलवार के नाड़े को खोल दिया। खुशबू की लाल सलवार सरक कर नीचे उसके पैरों के पास ज़मीन पर गिर गयी। वो नीचे बिल्कुल नंगी थी। उसकी गोरी चूत बिल्कुल चिकनी थी और उस पर झाँटों का एक रेशा भी नहीं था। उसकी चूत बेहद गीली हो गयी थी। खुशबू ने मेरी पैंट में से लण्ड बाहर निकाल लिया और सहलाते हुए बोली, “हायऽऽऽऽ अल्लाहऽऽऽ काफी मोटा और लंबा है सर आपका ये!” फिर मैं खुशबू की टाइट कमीज़ ऊपर की तरफ़ करने लगा तो खुशबू और जोश में आ गयी और खुशबू ने सहुलियत के लिये अपने हाथ ऊपर की तरफ़ कर दिये। मैंने उसकी कमीज़ उतार दी। कमीज़ उतारने के बाद पीछे से खुशबु की ब्रा का हुक खोल दिया और एक झटके से खुशबू की ब्रा को उतार कर फेंक दिया। अब वो बिल्कुल नंगी थी और ऊँची हील के सैंडल में बहुत ही सैक्सी लग रही थी। फिर मैंने उसको दीवार की तरफ़ मुँह करके खड़ा किया और पीछे से उसकी चूचियों को दोनों हाथों में पकड़ लिया और मसलने लगा। जब मैंने उसके निप्पलों को मसलना शुरू किया तो खुशबू सिसकरियाँ भरने लगी। मैंने उसको दीवार के सहारे और दबा दिया। खुशबू की गाँड पर मेरा लण्ड सटा हुआ था और खुशबू के दोनों चूचियां मेरी मुठ्ठी में थे। मैं उंगली और अंगूठे से खुशबु के निप्प्लों को बेदर्दी से मसलने लगा। खुशबू तो जोश में एक दम जैसे पागल सी हो रही थी। दस मिनट बाद मैं खुशबू को पकड़ कर टेबल के पास ले गया और उसे टेबल पर बैठने को कहा। खुशबू टेबल पर बैठ गयी। अब मेरा मोटा और लंबा तना हुआ लण्ड खुशबू के सामने था। उसने तुरंत ही मेरा लण्ड हाथ में पकड़ा और सहलाने लगी। मैं बोला, “रानी, मुँह में लेकर चूसो इसको!” खुशबू लण्ड को पकड़ कर अपनी जीभ से चाटने लगी। थोड़ी ही देर बाद खुशबू ने लण्ड अपने मुँह में ले लिया और लण्ड के सुपाड़े को चूसने लगी। खुशबू भी जोश में अपने आपको काबू में नहीं रख पा रही थी और बोली, “ दीप , प्लीज़ जल्दी कुछ करो ना! नहीं तो मैं पागल हो जाऊँगी!” फिर मैंने खुशबू की गाँड को टेबल के किनारे पर किया और उसकी सुडौल टाँगों के बीच आकर खड़ा हो गया। खुशबू टेबल पर आधी लेटी हुई थी। मैंने खुशबू की टाँगों को हाथों से पकड़ कर फैला दिया और अपने लण्ड के सुपाड़े को उसकी चूत के बीच में रख दिया। फिर एक झटका दिया तो मेरा आधा लण्ड उसकी चूत को फाड़ता हुआ अंदर घुस गया। खुशबू दर्द से चिल्ला उठी, “ऊऊईईई! उफ़ उफ़ उफ़!! मर जाऊँगी मैं! आहहह रुक जाओ दीप ! प्लीज़ऽऽ!” खुशबू कराहने लगी तो मैं रुक गया और अपने लण्ड को खुशबू की चूत से बाहर निकल लिया। फिर मैंने एक तकिया लिया और खुशबू की गाँड उठाकर उसकी गाँड के नीचे रख दिया। अब खुशबू की चूत थोड़ा और ऊपर हो गयी। मैं खुशबू के ऊपर झुक गया और खुशबू के होंठों को अपने मुँह में ले लिया। फिर मैंने अपने लण्ड का सुपाड़ा एक बार फिर उसकी चूत के मुहाने पर रखकर एक जोरदार धक्का मारा। खुशबू की चींख निकलते-निकलते रह गयी क्योंकि मैंने उसके होंठों को अपने होंठों में दबा रखा था। खुशबू दर्द से कराह उठी तो मैं रुक गया। इसी दौरान खुशबू ने कहा ' उसके पति का लण्ड छोटा है और उसकी चूत का छेद छोटे लण्ड के लिये ही मुनासिब है। ' अब मेरा आधा लण्ड घुस चुका था। दो-तीन मिनट तक मैं उसके ऊपर बिना हिलेडुले लेटा रहा। फिर मैंने धीरे-धीरे लण्ड को अंदर बाहर करना शुरू किया। खुशबू अभी भी दर्द से कराह रही थी। अचानक मैंने एक जोरदार धक्का दिया तो मेरा लण्ड सरसराता हुआ खुशबू की चूत में और ज्यादा अंदर तक घुस गया। खुशबू चिल्लाते हुए रुकने के लिये कहने लगी लेकिन मैं नहीं रुका और खुशबू को तेजी से चोदने लगा। बिजली की तरह मेरा लण्ड खुशबू की चूत में अंदर बाहर हो रहा था। जैसे ही खुशबू की चींख कुछ कम होती मैं एक धक्का ज़ोर से लगा देता था और खुशबू फिर चींख पड़ती थी। कुछ देर तक मैं इसी तरह चोदता रहा। धीरे-धीरे मेरा पूरा लण्ड खुशबू की चूत की गहराई तक जगह बना चुका था और तेजी के साथ अंदर-बाहर हो रहा था। खुशबू दर्द से तड़प रही थी। आठ-दस मिनट के बाद खुशबू को भी मज़ा आने लगा। उसने अपने हाथ मेरी कमर पर कैंची की तरह कस दिये और अपनी गाँड उठा-उठा कर मेरा साथ देने लगी। मैं बोला, “शाबाश जानेमन! अब तो तुम्हें भी चुदवाने में मज़ा आ रहा है!” मैं उसको लगभग पंद्रह-बीस मिनट तक चोदता रहा। इस दौरान खुशबू तीन-चार बार झड़ चुकी थी लेकिन मेरा लण्ड था कि रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था।
30-12-2025, 07:30 PM
30-12-2025, 07:51 PM
(This post was last modified: 30-12-2025, 08:03 PM by Dhamakaindia108. Edited 1 time in total. Edited 1 time in total.)
अब मैं खुशबू के ऊपर से हट गया और उसको घोड़ी की तरह बन जाने को कहा। खुशबू उठकर ज़मीन पर आ गयी और घोड़ी की तरह हो गयी। मैंने उसकी कमर पकड़कर अपना लण्ड पीछे से खुशबू की चूत में डाल दिया। खुशबू फिर दर्द से कराहने लगी पर कुछ ही देर में खूशबू का दर्द कम हो गया और खुशबू को मज़ा आने लगा। खुशबू अब अपनी गाँड को पीछे ढकेल-ढकेल कर ताल से ताल मिला रही थी। दस-पंद्रह मिनट के बाद मैं खुशबू की चूत में ही झड़ गया और अपना लण्ड खुशबू की चूत से बाहर निकाल कर खुशबू के मुँह में दे दिया। खुशबू ने मेरे लण्ड को चाट-चाट कर साफ़ किया और हम दोनों साथ साथ ही ज़मीन पर ही लेट गये।
फिर हम दोनों ने नंगे ही खाना खाया और खाना खाने के बाद हम फिर शराब पी रहे थे तो मैंने खुशबू से कहा, “खुशबू जी , और मज़ा दोगी?” खुशबू नशे में थी। उसने मुस्कुराते हुए अपना सिर हाँ में हिला दिया और बोली, “मज़ा दूँगी भी और लूटुँगी भी!” फिर खुशबू ने मेरा लण्ड, जोकि फिर खड़ा हो गया था, अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी। थोड़ी देर बाद मैंने अपनी बीच की मोटी उंगली खुशबू की चूत में घुसा दी। “उफ़्फ़....!” खुशबू तड़प उठी। मेरी उंगली खुशबू की चूत में अंदर बाहर होने लगी। खुशबू को भी मज़ा आने लगा और खुशबू मेरा लण्ड चूसते हुए आहें भरने लगी। फिर मैंने खुशबू के मुँह में से अपना लण्ड निकाला और उसे लेटने को कहा। मैं भी उठा और खुशबू की टाँगों के बीच में आ गया। उसके पैर उठाकर अपने कंधों पर रख लिये। मेरा तना हुआ लण्ड खुशबू की चूत से केवल एक इंच की ही दूरी पर था। फिर मैंने उसकी आँखों में देखते हुए पूछा, “चोदूँ, मेरी रानी?” खुशबू ने अपना सर हाँ में हिला दिया और अपनी गाँड आगे ढकेलते हुए अपनी चूत मेरे लण्ड से सटा दी और बोली, “धीरे-धीरे चोदना प्लीज़! बहुत दर्द होता है... बहुत ही बड़ा है तुम्हारा!” फिर मैंने उसकी चूची को पकड़ा और निप्पलों को मसलते हुए अपने लण्ड को उसकी चूत में घुसाने लगा। अभी तक मैंने हल्का सा धक्का मारा था लेकिन आधा लण्ड खुशबू की चूत में घुस चुका था। खुशबू की चूचियों को दबाते हुए और दोनों निप्पलों को खींचते हुए मैं बोला, “एक बार में पुरा अंदर लोगी?” खुशबू तो एक दम जोश और नशे में थी और उसने दर्द की परवाह ना करते हुए कहा, “हाँ जानू!” फिर मैंने अपना लण्ड बाहर निकाल लिया। इससे पहले कि खुशबू कुछ समझ पाती कि एक ही धक्के में मैंने अपना पूरा लण्ड वापस खुशबू की चूत में गहराई तक घुसा दिया। खुशबू अपनी चींख बड़ी मुश्किल से रोक पायी। कुछ देर बाद मैंने खुशबू को तेजी से चोदना शुरू कर दिया। खुशबू के सैंडल मेरे हर धक्के के साथ मेरी गर्दन के पास थपथपाते थे जिससे मुझे और जोश आने लगा और मैं खुशबू को और तेजी के साथ चोदने लगा। मेरे हाथ अभी भी खुशबू की चूचियों और निप्पलों को मसल रहे थे और खुशबू को दर्द हो रहा था लेकिन उसे फिर भी मज़ा आ रहा था क्योंकि आज दो साल बाद कोई उसकी चूत की प्यास को बुझा रहा था वो भी इतने मोटे तगड़े लण्ड से। थोड़ी देर बाद मैंने खुशबू के पैरों को अपने कंधों से उठाया और खुशबू की टाँगें पीछे मोड़कर उसके कंधों की तरफ़ झुका दीं। अब खुशबू एक दम दोहरी हो गयी और खुशबू की चूत और ऊपर उठ आयी। फिर आगे होकर मैंने उसके पैरों के पास उसकी टाँगों को पकड़ कर बहुत ही तेजी के साथ खुशबू की चुदाई करनी शुरू कर दी। मुझे मेरे लण्ड के सुपाड़े पर उसकी बच्चेदानी का मुँह महसूस होने लगा था। खुशबू और भी जोश में आ गयी और अपनी आँखें बंद कर लीं। खुशबू के मुँह से केवल मस्ती भरी आवाज़ें निकल रही थी, “हाय मेरे जानू! ऐसे ही… और कस-कस कर जोर से चोदो... और जोर से चोदो... फाड़ दो मेरी चूत को!” मेरे चेहरे का पसीना खुशबू की चूचियों पर टपक रहा था लेकिन लण्ड रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था। खुशबू अब तक दो-तीन बार झड़ चुकी थी। कुछ ही देर में मेरे लण्ड ने फिर उसकी चूत में पानी छोड़ दिया था। मैं ऐसे ही थोड़ी देर खुशबू के ऊपर पड़ा रहा और खुशबू मुझे चूमती रही। फिर मैं खुशबू के ऊपर से हट कर उसके बगल में लेट गया। थोड़ी देर बाद खुशबू ने मेरे मुर्झाये हुए लण्ड को अपने हाथों में लिया और अपने होंठों को दाँत से काटते हुए बोली, “अगर बुरा ना मानो तो मैं तुम्हारे लण्ड को फिर से चूसना चाहती हूँ, प्लीज़!!!” मैं बोला, “इसमें इजाज़त की क्या बात है... ये लण्ड तो अब सिर्फ़ तुम्हारा ही है!” खुशबू मेरे पैरों के बीच में आकर बैठ गयी और दोनों हाथों से लण्ड को पकड़कर लण्ड के सुपाड़े पर धीरे से किस किया। खुशबू ने मेरी तरफ़ देखकर आँखमारी और वापस अपने होंठ मेरे लण्ड पर रख दिये। लण्ड को पकड़कर चूसते हुए खुशबू अपने मुँह को ऊपर-नीचे करने लगी और मेरा लण्ड बिल्कुल तन गया। फिर खुशबू उठकर मेरे ऊपर आ गयी और अपने हाथ से लण्ड को पोज़िशन में करके अपनी चूत के बीच में सटा दिया और ऊपर से दबाव डालने लगी पर सिर्फ़ सुपाड़ा ही खुशबू की चूत में घुस पाया। उसने तरसती निगाहों से मेरी तरफ़ देखा। मैं उसका इशारा समझ गया। मैंने उसकी कमर को पकड़कर ज़ोर से नीचे किया तो एक झटके से आधे से ज्यादा लण्ड खुशबू की चूत में घुस गया। अब खुशबू धीरे-धीरे ऊपर नीचे होने लगी और मैं खुशबू की कमर को पकड़े हुए था। खुशबू ने अपनी आँखें बंद कर लीं और चुदाई का मज़ा लेने लगी। उसकी रफ़्तार बढ़ने लगी और वो इतनी तेज़ हो गयी कि पता ही नहीं लगा कब हम दोनों झड़ गये। फिर हम दोनों एक दूसरे की बाँहों में लिपटकर लेट गये। थोड़ी देर बाद खुशबू उठकर बाथरूम में गयी। मैंने देखा कि चलते हुए नशे में खुशबू के कदम बीच-बीच में बहक रहे थे। उसने अभी भी ऊँची हील वाले सेंडल पहने हुए थे और नशे में डगमगाते हुए खुशबू के गुदाज़ चूतड़ बहुत ही कामुक ढंग से हिल रहे थे। ये देखकर मेरा लण्ड फिर तनने लगा था। जब वो बाथरूम से बाहर अयी तो मैं भी बाथरूम में जाकर थोड़ा प्रेश हुआ। बाथरूम से निकला तो खुशबू पैग बना रही थी। मैं अपना ग्लास लेकर सोफे पर बैठ गया और वो मेरी टाँगों के बीच में नीचे बैठ गयी। अचानक उसने मेरा लण्ड पकड़ कर अपने व्हिस्की के ग्लास में डुबा दिया और फिर बाहर निकाल कर अपने मुँह में लिया। खुशबू इसी तरह मेरा लण्ड व्हिस्की में डुबा-डुबा कर चूसने लगी। मेरा लण्ड फिर से पत्थर की तरह सख्त होकर तन गया था। मैं बोला, “खुशबू , अब तुम फिर से घोड़ी बन जाओ!” खुशबू ने जल्दी से अपना गिलास खाली किया और ज़मीन पर घोड़ी बन गयी। तब मैंने कहा, “खुशबू , अब मैं तुम्हारी गाँड मारुँगा!” खुशबू थोड़ा डरते हुए बोली, “लेकिन तुम्हारा लण्ड तो बहुत मोटा है!” फिर मैं बोला, “तुम घबराओ मत... मैं आराम से करुँगा!” खुशबू अब काफी नशे में थी और मस्ती में चहकते हुए बोली, “ओके, तुम सिर्फ मेरे बॉस ही नहीं बल्कि जानेमन हो, मेरा सब कुछ तुम्हारा ही तो है! चाहे जो करो... आज तुम्हारी खुशबू तुम्हारे लण्ड की ग़ुलाम है! मारो मेरी गाँड को, फाड़ दो इसे भी... मैं कितना भी चिल्लाऊँ... तुम रुकना मत.... अपनी खुशबू की गाँड बेदर्दी से पेलना!” मैं उठकर उसके पीछे आ गया और खुशबू की गाँड के छेद पर ढेर सारा थूक लगा दिया। मेरा लण्ड तो पहले से ही खुशबू के थूक से सना हुआ था। फिर मैंने खुशबू की गाँड के छेद पर अपने लण्ड की टोपी रखकर खुशबू की कमर को पकड़ लिया और धीरे-धीरे अपने लण्ड को खुशबू की गाँड में घुसाने लगा। खुशबू ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाने लगी। अभी तक लण्ड का सिर्फ़ सुपाड़ा ही घुस पाया था। फिर मैंने खुशबू की गाँड के छेद को हाथों से फैलाया और फिर से खुशबू की कमर पकड़ कर एक धक्का दिया। खुशबू दर्द से अपना सर कुत्तिया की तरह इधर-उधर हिलाने लगी। मैंने थोड़ा ज़ोर और लगाया तो खुशबू और भी ज़ोर-ज़ोर से चींखने-चिल्लाने लगी। मैं बोला, “खुशबू मेरी जान! अगर तुम ऐसे चिल्लाओगी तो कैसे काम बनेगा? अभी तो ये तीन इंच ही अंदर घुसा है!” खुशबू दर्द से चिल्लाते हुए ही बोली, “मेरे चिल्लाने कि तुम परवाह मत करो! घुसा दो अपने तमाम लण्ड को मेरी गाँड में... फाड़ डालो इसे!” फिर मैंने खुशबू के मुँह पर एक हाथ रख दिया और उसकी कमर को पकड़ कर धक्के पर धक्का लगाते हुए अपने लण्ड को खुशबू के गाँड में घुसाने लगा। लण्ड खुशबू की गाँड में और गहराई तक घुसने लगा तो खुशबू दर्द के मारे छटपटाने लगी। मैं बोला, “शाबाश खुशबू! मेरा लण्ड अब तुम्हारी गाँड में करीब छः इंच तक घुस चुका है!” दर्द से खुशबु कि हालत अभी भी खराब हो रही थी। मैं पूरी ताकत से खुशबू की गाँड में लंड ठूँसने में लगा था और रुकने का नाम ही नहीं ले रहे था। खुशबू की गाँड चौड़ी होती गयी और दर्द भी बढ़ता गया। गाँड में दर्द की वजह से खुशबू सिसकियाँ लेती रही। खुशबू के आँसू भी निकल आये पर खुशबू ने हिम्मत नहीं हारी। खुशबू की गाँड में अपना लण्ड पूरा घुसाने के बाद मैं रुक गया। थोड़ी देर में दर्द धीरे-धीरे कम हो गया तो मैंने फिर धीरे-धीरे पेलना शुरू कर दिया। अब मैं अपना आधा लण्ड बाहर निकालता और वापस एक ही धक्के में पूरा लण्ड उसकी गाँड में अंदर तक घुसेड़ देता। हालांकि दर्द अभी खतम नहीं हुआ था पर फिर भी खुशबू अब अपनी गाँड मेरे हर धक्के के साथ आगे-पीछे हिलाने लगी थी। अब मैं पुरी स्पिड से खुशबू को चोदने लगा। अब मैं अपना पुरा लण्ड बाहर निकालता और वापस तेजी के साथ अंदर घुसा देता। खुशबू को तो यकीन ही नहीं था कि इतना लंबा और मोटा लण्ड वो कभी अपनी गाँड में ले पायेगी। मैं बहुत मज़े ले-ले कर खुशबू की गाँड मारने में लगा हुआ था। खुशबू भी और ज्यादा मस्त हो गयी थी और अपनी गाँड ढकेलते हुए बोली, “पेलो मुझे! मेरी गाँड फाड़ दो! अपनी खुशबू की गाँड चौड़ी कर दो! बेदर्दी से पेलो मुझे... मेरे जनू! मेरे बॉस!” मैं खुशबू की गाँड पकड़ कर ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारता हुआ अपना लण्ड उसकी गाँड में गहराई तक घुसेड़-घुसेड़ कर पेलता रहा। वो भी कभी चींखती तो कभी सिसकती और कभी मुजे ज़ोर-ज़ोर से गाँड पेलने को कहती और फिर चींखने लगती। थोड़ी देर में मैं खुशबू की गाँड में ही झड़ गया और हम दोनों दोने ज़मीन पर ही लेट गये। दोनों की साँसें फूली हुई थीं। बीस पच्चीस मिनट ऐसे ही पड़े रहने के बाद मैं खुशबू को अपनी बांहों में सहरा दे कर बेडरूम में ले गया और हम दोनों बिस्तर पे लेट कर सो गये। अगले दिन सुबह खुशबू बहुत खुश थी और अब खुशबू तो मेरे लण्ड की दीवानी बन गयी थी और अगला एक महीने कैसे बीत पता ही नहीं चला अब खुशबू से सिर्फ मोबाइल पे हि बात होती है
06-01-2026, 06:02 PM
Updated part 2 " नमस्ते चाची " coming soon
06-01-2026, 06:10 PM
(This post was last modified: 06-01-2026, 06:11 PM by Dhamakaindia108. Edited 1 time in total. Edited 1 time in total.)
एक दिन आफिस में छुठी थी तो मैं कमरे में बैठकर लैपटॉप पर ऑफिस का काम कर रही थी तभी मयंक के फोन की घंटी बजी और वह किसी से बात करने लगे थोड़ी देर बात करने के बाद उन्होंने मुझे सारी बात बताई । मुझे कहां - " मेरे चचेरे भाई का लड़का " गोलू " जो इंजीनियरिंग कर रहा हैं उसके किसी परीक्षा का केंद्र कोलकाता में पड़ हैं वह पांच दिन के लिए परीक्षा देने आ रहा है हमारे यहां " यह बोलकर मयंक दुकान के लिए चले गये।
एक शाम जब मैं आफिस से घर आई ही थी तभी मेरे घर का दोरवेल बजा मैं दरवाजा खोला तो सामने एक लड़का खड़ा था वह देखने में काफी हैंडसम था . मैंने उससे पूछा " आप कौन ? " उसने अपना परिचय दिया और कहां " मैं गोलू " इतने में मयंक भी दुकान से आ गये उन्होंने उसे घर अंदर बुलाया । वह दोनों होल में बैठकर बात करने लगे । मैं जल्दी - जल्दी जाकर दो काप कॉफी बना कर लाई और उन दोनों को दिया फिर मयंक ने गोलू को बताया -" यह तेरी खुशबू चाची है तभी उसने मेरे पांव छूकर आशीर्वाद लिया " रात को जल्दी खाना खाकर सब सो गये। ( अब मेरे और गोलू के बीच किया हुआ यह आप गोलू बतायेगा ) मुझे कोलकाता आये हुए दो दिन हो चुके थे यह तीसरा था मयंक चाचा और खुशबू चाची सुबह सो रहे थे। मैं नहा-धोकर सोचा की काम वाली नौकरानी तो आयी नहीं है और खुशबू चाची भी अभी उठी नहीं है तो चाय कौन पिलायेगा। इसलिये मैं खुद ही रसोई में केवल टॉवल लपेट कर चाय बनाने चला गया। जब चाय बन कर तैयार हो गयी तो देखा खुशबू चाची रसोई में खड़ी-खड़ी मुझे देख रही थी। वह बोली, “गोलू ! मुझे उठा लिया होता तो मैं ही चाय बना देती।” मैंने कहा, “आप लोगों की नींद खराब ना हो इसलिये मैंने आप को नहीं जगाया और सोचा जब चाय बन जायेगी तो आप लोगों को जगा दुँगा।” इतने में वह मेरे पास आकर खड़ी हो गयी। तब मैं चाय को छलनी से छान रहा था कि पता नहीं कैसे मेरा टॉवल खुल कर नीचे गिरा और मैं बिल्कुल नंगा हो गया क्योंकि अंदर कुछ भी नहीं पहना था। मुझे नंगा देखकर वह अवाक रह गयी और सिर झुका कर खड़ी हो गयी। मैंने तुरंत चाय का बर्तन नीचे रखा और टॉवल उठा कर लपेट लिया। जब तक मैंने नंगे जिस्म को टॉवल में कैद नहीं किया वो तिरछी नज़र से मेरे मोटे और लंबे लौड़े को घूर रही थी। मैंने कहा, “सॉरी चाची !” वो बोली, “कोई बात नहीं… तुमने जानबूझ कर तो नहीं किया… ये सब अचानक हो गया!” फिर वह चाय की ट्रे लेकर अपने कमरे में चली गयी। मैं भी तैयार होकर परीक्षा केंद्र पर चला गया। शाम को जब सात बजे घर आया । घर आकर फ्रैश होके करीब पौने-नौ बजे चाचा जी और मैं खाना खाने बैठे। मैं बरमुडा और टी-शर्ट पहने हुए थे । तभी खुशबू चाची खाना लेकर आई जो कि आज पारदर्शी नाइटी पहनी थी जिस में से उनकी काली रंग की ब्रा और पैंटी साफ़ दिख रही थी। अपना खाना खाते हुए चाचा जी बोले, “यार गोलू ! मैं कल की सुबह कोलकाता से बाहर जा रहा हूं दो दिन बाद आऊँगा… तुम चाची का खयाल रखना।” मैंने कहा, “डोंट वरी चाचा ! ऑय विल टेक केयर!” हम लोगों ने खाना खाया और अपने कमरों में सोने के लिये चले गये। मुझे नींद नहीं आ रही थी। करीब साढ़े-बारह बजे मैं उठकर पेशाब करने गया और वापस आते हुए देखा कि चाचा जी के कमरे की लाईट जल रही थी। मेरे मन में जिज्ञासा हुई कि खिड़की से झाँक कर देखूँ कि वो क्या कर रहे हैं। मैंने खिड़की से झाँख कर देखा तो वो दोनों बिल्कुल नंगे थे और चाचा जी खुशबू चाची की चूत चटाई कर रहे थे। खुशबू चाची उनका सिर पकड़ कर उनका चेहरा अपनी चूत में दबा रही थी।
07-01-2026, 07:00 AM
(This post was last modified: 07-01-2026, 07:01 AM by Dhamakaindia108. Edited 1 time in total. Edited 1 time in total.)
07-01-2026, 09:32 AM
फिर मयंक चाचा उठकर उनकी चूत में लंड डाल कर फचाफच चोदने लगे। जब उनकी चुदाई खतम हुई तो मैं अपने कमरे में आकर सो गया लेकिन मेरे दिमाग में बार-बार उनकी बातें और चुदाई का खयाल घूम रहा था।
खैर सुबह करीब दस बजे मैं उठा और नहा धोकर जब नाश्ता करने लगा तो देखा मयंक चाचा घर पर नहीं थे। मैंने खुशबू चाची से पूछा, “चाची ! मयंक चाचा चले गये ?” खुशबू चाची बोली, “हां ” जब मैं नाश्ता कर रहा था तो मैंने देखा खुशबू चाची की नज़र बार-बार मेरे बरमूडे पर जा रही थी। जब हमारी नज़र चार हुई तो मैंने खुशबू चाची से पूछा, “ चाची क्या देख रही हो?” चाची घवराते बोली " कुछ भी नहीं ' । फिर मैं नाश्ता कर परीक्षा केंद्र के लिए निकल गया । शाम को मैं वापस घर पहुंचा तो वह किसी से फोन पर बात कर रही थी उनकी ये बातें सुनकर मैं हैरान हो गया । ( आइये में बताता हूं ) खुशबू चाची बोली, “ मैंने कल सुबह गोलू का लंड देखा है… उसका लंड बहुत मोटा और लंबा है!” ( अनजान आवाज ) बोले, “ क्या तुम उसके लंड से चुदवाना चाहती हो?” खुशबू चाची बोली , “ क्यों नहीं? जब से पिछला ऑफिसर छोड़कर वापस गया है तब से कोई नया लंड नहीं लिया… गोलू का लंड तो उस ऑफिसर से भी ज्यादा मोटा और लंबा है… उसे सिड्यूस करके उसके लंड से ज़रूर चुदवाऊँगी!” ( अनजान आवाज ) बोले, “तुम बाज़ नहीं आओगी उस ऑफिसर लड़के के साथ भी खूब मस्ती करी थी तुमने… चलो ऑल द बेस्ट! ” मैं उनकी पुरी बात सुनकर फिर रूम में आ गया और कपड़े बदलकर वापस हॉल में आकर बैठ गया। तभी खुशबू चाची ने मुझे आवाज लगाई उनकी आवाज किचन से आ रही थी । जब मैं किचन में पहुंचा तो खुशबू चाची बोली " मुझे अपने गोद में उठाओ क्योंकि मुझे उपर वाले दराज से कुछ समान उतराने है मेरा हाथ वहां तक नहीं पहुंच पा रहा है ,। मैंने बिना कुछ बोले उनके कमर में हाथ डालकर उपर उठाया फिर कुछ देर बाद वापस उन्होंने नीचे उतार दिया और हॉल में जाकर बैठा । थोड़ी देर बाद खुशबू चाची दो कप कॉफी बना लाई और एक कप मुझे दिया और एक कप खुद रखी और मेरे बगल में बैठकर बोली। खुशबू चाची बोली, “गोलू जब से मैंने तुम्हारा देखा है मैं हैरान हूँ… क्योंकि ऐसा मैंने आज तक किसी का ही देखा!” मैं बोला, “क्या नहीं देखा चाची ?” वह बोली, “गोलू ज्यादा अंजान मत बनो… कल जब तुम्हारा टॉवल गिरा तो मैंने तुम्हारी कमर के नीचे का हिस्सा नंगा देखा और दोनों टाँगों के बीच जो वो लटक रहा था… उसे देख कर मैं हैरत-अंगेज़ हूँ।” खुशबू चाची की ये बातें सुनकर मैं उत्तेजित हो गया और हिम्मत करके अपना लंड बरमूडे से निकाल कर उन्हें दिखाते हुए बोला, “खुशबू चाची … आप इसकी बतकर रही हो?” वह बोली, “हाँ.. बिल्कुल इसी की बात कर रही हूँ!” मैं बोला, “कल तो आपने दूर से देखा था… आज करीब से देख लो!” और उनका हाथ पकड़कर अपना लंड उसके हाथ में दे दिया। खुशबू चाची मेरे लंड को हाथ में पकड़ कर बोली, “हाय अल्लाह! कितना मोटा और लंबा है!” और लंड की चमड़ी को पीछे करके सुपाड़े पर एक चुम्मा दे दिया। फिर मैंने कहा, “ खुशबू चाची अब आपकी भी तो दिखा दो!” तो वह मेरे लंड को बरमूडे में डालकर बोली, “गोलू आज नहीं! बाद में दिखा दुँगी।” फिर हम दोनों उठकर खड़े हो गये। वह अपने काम में लग गयी और मैं टीवी देखने लगा। अगली शुक्रवार की सुबह मैं उठा तो सुबह के करीब सात बज रहे थे। खुशबू चाची भी ऑफिस जाने के लिये तैयार हो चुकी थी। मैंने खुशबू चाची से कहा, “ चाची ! मैं सोमवार को वापस घर लौट जाउंगा अब तो आपकी दिखा दो!” खुशबू चाची ने अदा से मुस्कुराते हुए तुरंत अपनी सलवार नीचे खिसका कर अपनी चूत दिखा दी। उनकी चूत पर एक भी बाल नहीं था, लगता है की हेयर रिमूवर से नियमित अपनी चूत साफ करती थी। मैं उनकी चूत पर हाथ रख कर थोड़ी देर सहलाया और फिर उनकी चूत पर चुम्मा लिया। वह बोली, “अब बस गोलू ! रात को और दिखा दुँगी। अभी ऑफिस के लिये लेट हो रहा है!” फिर वह ऑफिस चली गयी और उसके बाद मैं भी नहाकर परीक्षा केंद्र पर चला गया। परीक्षा में मेरा मन नहीं लग रहा था और शाम होने का बेसब्री से इंतज़ार कर रहा था। शाम को जब घर पहुँचा तो खुशबू चाची को देखकर बस देखता ही रह गया। उन्होंने घुटनों तक की छोटी सी मैरून रंग की नाइटी पहनी हुई थी। उनकी नाइटी इतनी पारदर्शी थी कि काली ब्रा और पैंटी में उनका पूरा हुस्न मेरी आँखों के सामने नंगा था। साथ में काले रंग के ही ऊँची हील वाले सैंडल पहने हुए थे जो उनके सैक्सी फिगर में चार चाँद लगा रहे थे। खुली ज़ुल्फें और मैरून लिपस्टिक लगे होंठों पर कातिलाना मुस्कुराहट कयामत ढा रही थी। मैंने खुशबू चाची को बाँहों में लेना चाहा तो वह बोली, “इतनी भी क्या बेसब्री है... पहले फ्रेश तो हो जाओ… मैं कहीं भगी तो नहीं जा रही हूँ… फिर जी भर के मेरे हुस्न का जाम पीना!” फिर मैं बाथरूम में जाकर नहाया और बरमूडा और टी-शर्ट पहन कर बाहर आया तो कमरे में रोमैन्टिक संगीत बज रहा था और खुशबू चाची हम दोनों के लिये पैग बना रही थी। हम दोनों बैठकर शराब पीने लगे और बातें करने लगे। खुशबू चाची के होंठों पर वही शरारती मुस्कुराहट थी। खुशबू चाची मुझे छेड़ते हुए बोली, “तो जनाब और कितनों के हुस्न का मज़ा ले चुके हैं!” “आप से झूठ नहीं बोलुँगा चाची… मैंने कईयों के साथ मस्ती की है…!” मैं बोला। “सुभान अल्लाह! दिखते तो बड़े सीधे हो!” खुशबू चाची आँखें नचाते हुए बोली। “वैसे चाची कम तो आप भी नहीं हो… क्यों सही कह रहा हूँ ना?” मैंने भी वापस उन्हें छेड़ा। “तुम्हें कैसे पता?” खुशबू चाची आँख मारते हुए बोली। “बस ऐसे ही अंदाज़ा लगा लिया… बताओ ना चाची सच है कि नहीं?” मैं ज़ोर देते हुए बोला। हम दोनों इसी तरह शराब पीते हुए बातें करते रहे। खुशबू चाची ने बताया कि वह बेहद चुदासी हैं और ज़िंदगी में पचासियों लौड़े अपनी चूत में ले चुकी हैं।बातें करते-करते हमने काफी शराब पी ली थी और खुशबू चाची की तो आवाज़ भी बहकने लगी थी। फिर वह बोली, “गोलु अपने कमरे में चलो… मैं भी दो मिनट में आती हूँ!” मैंने पहले बाथरूम में जाकर पेशाब किया और फिर अपने कमरे में चला गया। खुशबू चाची भी नशे में झुमती हुई मेरे कमरे में आयी और आते ही अपनी नाइटी उतार कर कर बोली, “गोलू देख लो दिल भर कर !” खुशबू चाची अब काली ब्रा-पैंटी और हाई हील के सैंडल पहने हुस्न की परी की तरह मेरे सामने खड़ी थीं। मैंने उन्हें अपनी बाँहों में भरते हुए कहा, “सिर्फ देखने से दिल नहीं भरेगा चाची !” “तो फिर कैसे…?” वह शरारती अंदज़ में बोली। “अब तो आपके हुस्न की झील में डूब के ही करार मिलेगा!” कहते हुए मैं अपने कपड़े उतार कर नंगा हो गया। फिर मैंने उनकी ब्रा और पैंटी भी उतार दी और उन्हें बेड पर लिटा कर उनकी गीली चूत को चाटने लगा और वह भी मेरा लंड पकड़ कर सहलाने लगी। जब मेरा लंड चुदाई के लिये तैयार हो गया तो मैं खुशबू चाची टाँगें फैला कर लंड के सुपाड़े को उनकी चूत पर रगड़ने लगा। मेरे लंड की रगड़न से वह उतेजित होकर मुँह से सिसकरी भरने लगी और कुछ ही देर में उनका जिस्म अकड़ने लगा और वह पहले चूत चटाई से अब लौड़े की रगड़न से झड़ गयी। फिर मैंने अपने सुपाड़े पर थूक लगा कर खुशबू चाची की चूत पर रख कर एक कस के धक्का मरा तो आधे से ज्यादा लंड उनकी चूत में घुस गया। लंड घुसते ही उनके मुँह से “ऊऊऊईईईई ऊफ़फ़फ़” सिसकरियाँ निकलने लगी और वह लंबी-लंबी साँसें लेने लगी। खुशबू चाची सिसकते हुए बोली, “गोलू ऐसे ही डाले रहो कुछ करना नहीं!” मैं कुछ देर तक बिना हिले-डुले आधे से ज्यादा लंड उनकी चूत में फसाये पड़ा रहा और उनकी दोनों चूचियों को अंगूठे और उंगली के बीच पकड़ कर मसलता रहा। कुछ ही देर में वह ज़रा नॉर्मल हुई तो मैंने कमर उठाकर थोड़ा लंड चूत से बाहर निकाल कर एक जोरदार धक्का मारा। मेरा लंड पूरा का पूरा उनकी चूत की गहरायी में घुसकर उनकी बच्चेदानी पर छू गया। खुशबू चाची फिर चिल्ला पड़ीं, “ऊऊऊऊईईईई अल्लाहहऽऽऽ मार डाला रे तेरे ज़ालिम लंड ने… प्लीज़ गोलू… हिलना डुलना नहीं!” मैं ऐसे ही लंड डाले पड़ा रहा। मेरे लंड पर उनकी चूत की दिवारें कसकर जकड़ी हुई थी। जब वह फिर नॉर्मल हुई तो मैं धीरे-धीरे अपना लंड खुशबू चाची की चूत के अंदर-बाहर करने लगा। जब मेरा लंड उनकी चूत के दाने को रगड़ता हुआ अंदर-बाहर होने लगा तो खुशबू चाची को भी जोश आ गया और बोली, “गोलू मॉय डार्लिंग! कीप फकिंग हार्ड… बेहद मज़ा आ रहा है! आआआहहह आआआईईई!” फिर उन्होंने अपनी टाँगें और फ़ैला दीं और मेरी कमर पर कस दीं। खुशबू चाची की सिसकारियों से मुझे भी जोश आ गया और मैं तेजी के साथ कस-कसकर चुदाई करते हुए लंड को अंदर-बाहर करने लगा। कुछ ही देर में उनकी चूत की सिकुड़न मुझे अपने लंड पर महसूस हुई। मैं समझ गया की वह झड़ रही थी लेकिन मैंने अपनी स्पीड नहीं रोकी बल्कि और बढ़ा दी। खुशबू चाची की चूत गीली होने से अब मेरा लौड़ा आसानी से ‘पुच-पुच’ की आवाजें करता हुआ अंदर-बाहर हो रहा था और पूरे कमरे में चुदाई की आवाजें गूँजने लगी।
10-01-2026, 08:27 PM
उनके झड़ने के बाद मैं करीब पंद्रह -मिनट तक चोदता रहा। फिर मेरा लंड भी खुशबू चाची की चूत में झड़ गया। मेरे लंड का पानी जब पूरा उनकी चूत में गिर गया तो मैंने लंड को बाहर निकाला। उनकी चूत खुलकर अंदर की गहरायी दिखा रही थी। हम दोनों जोर-जोर से साँसें ले रहे थे। फिर हम दोनों लिपट कर सो गये।
करीब तीन बजे मेरी आँख खुली तो खुशबू चाची सिर्फ सैंडल पहने बिल्कुल नंगी मुझसे लिपटी हुई सो रही थीं। मैंने फिर से उनकी चुदाई की और सुबह भी दफ़्तर जाने से पहले उनकी चुदाई की। अब तो ये रोज़ का सिलसिला हो गया। हम रोज रात को शराब के एक-दो पैग पीकर चुदाई करने लगे। खुशबू चाची तो मेरे लंड पर फ़िदा हो चुकी थी और वह बेहद चुदासी थीं। हर वक्त चुदाई के मूड में रहती थीं। हम दोनों हर रात एक ही बिस्तर पर नंगे सोते और अलग-अलग तरह से चुदाई करते। कईं बार तो आफिस के लिये निकलने वाली होती तो जाते-जाते भी अपनी सलवार और पैंटी नीचे खिसकाकर झटपट चोदने को कहतीं। हर दूसरे दीन मैं उनकी गाँड भी मारता था। जब भी हम दोनों में से किसी को चुदाई का मन होता, घर के किसी भी हिस्से जैसे कि किचन, बाथरूम, ड्राइंग रूम में कहीं भी चुदाई शुरू हो जाती। शुक्रवार और शनिवार को तो हम जम कर शराब पीते और नशे में धुत्त होकर खूब चुदाई करते। एक दिन खुशबू चाची की चचेरी बहन चंद्रिका कुछ दिनों के लिये आयी। चंद्रिका बत्तीस साल की थी । वह असम में किसी कॉलेज में प्रोफेसर थी और कोलकाता में किसी कॉलेज फंक्शन के लिये महीने भर के लिये आयी थी। वह करीब पाँच फुट चार इंच लंबी थी और उसका जिस्म ज्यादा मोटा भी नहीं था और ज्यादा पतला भी नहीं था। चंद्रिका बेहद खुबसूरत थी और ज्यादातर जींस और कुर्ता-टॉप पहनती थी । सब से ज्यादा आकर्षक उसकी गाँड थी। ऊँची हील की सैंडल पहनकर जब वह चलती थी तो टाईट जींस में उसकी गाँड मटकती देखकर मेरा लंड भी नाचने लगता था। उसकी और खुशबू चाची की बहुत पटती थी लेकिन शुरू-शुरू में थोड़ी शर्म की वजह से चंद्रिका मुझसे दूर रहती थी और ज्यादा बात भी नहीं करती थी। कभी-कभी शाम को खाने से पहले ड्रिंक्स में चंद्रिका हमारा साथ देती थी लेकिन औपचारिक बातें ही करती थी। चंद्रिका के आने से अब मैं और खुशबू चाची पहले की तरह खुलकर कभी भी या कहीं भी चुदाई नहीं कर सकते थे। लेकिन रात को खुशबू चाची अपने कमरे में मेरे साथ सोती थी और हम खूब चुदाई करते। एक दिन जब मैं परीक्षा केंद्र पर पहुँचकर एक घंटा ही हुआ था कि खुशबू चाची का फोन आया। मुझे थोड़ी हैरानी हुई क्योंकि खुशबू चाची ने पहले कभी इस तरह परीक्षा केंद्र पर मुझे फोन नहीं किया था और वह भी तो सुबह मेरे सामने ही तो आफिस जाने के लिये निकली थीं। जब मैंने फोन उठाया तो उन्होंने बताया कि किसी वजह से उनके आफिस में छुट्टी हो गयी है और वह घर वापस जा रही हैं। खुशबू चाची ने मुझे भी परीक्षा छोड़कर घर आने को कहा क्योंकि चंद्रिका कि गैर-मौजूदगी में शाम तक ऐश करने का ये अच्छा मौका था। मैंने कहा, “ठीक है चाची… लेकिन मुझे घर पहुँचने में दो घंटे लगेंगे ।” खुशबू चाची बोली, “मैं रास्ते में कैंटीन से घर का कुछ सामान और व्हिस्की वगैरह खरीदते हुए जाऊँगी… जल्दी आना गोलू … मुश्किल से ऐसा मौका मिला है!” मैं साढ़े ग्यारह तक घर पहुँच गया तो देखा कि खुशबू चाची पूरे मूड में थीं। एम-टी-वी चैनल पर कोई भड़कता हुआ म्यूज़िक एलबम देखते हुए खुशबू चाची सोफे पर बैठी शराब पी रही थीं। उन्हें देख कर ऐसा लग रहा था जैसे कि आते ही पीने बैठ गयी थीं क्योंकि खुशबू चाची ने सुबह जो सलवार-सूट पहना था, इस वक्त भी वही सुबह वाली कमीज़ और ऊँची पेन्सिल हील की बारीक पट्टियों वाली सैंडल पहनी हुई थी जबकि उनकी सलवार इस वक्त सोफे के पास फर्श पर पड़ी थी। मैंने अंदर आते ही कहा, “ये कया चाची... आप तो सुबह ही शराब पीने बैठ गयीं और मेरा भी इंतज़ार भी नहीं किया!” खुशबू चाची बोलीं, “गोलू! पिछले वीकेंड भी चंद्रिका की वजह से ना तो दिल खोल कर शराब पी और ना ही जमकर चुदाई की और अगले तीन-चार हफ्ते हमें एहतियात बरतनी पड़ेगी। इसलिये आज सारी कसर निकालने का इरादा है...!” ये कहते हुए वो सोफे से उठकर झूमती हुई मेरे नज़दीक आयी और मेरे गले में बाँहें डाल कर मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिये। ऊँची हील के सैंडलों में खुशबु चाची के लड़खड़ाते कदमों और बहकती ज़ुबान से साफ था कि वो काफी शराब पी चुकी थीं और नशे में धुत्त थीं। मैं जब भी खुशबू चाची को ऊँची हील की सैंडल पहने इस तरह नशे में लड़खड़ाते हुए देखता था तो मेरा लंड बेकाबू हो जाता था। मैंने उन्हें चूमते हुए सोफे पर वापस बिठाया और खुद एक पैग पीने के बाद अपने कपड़े उतार कर नंगा हो गया। इतने में खुशबु चाची ने भी अपनी सलवार और ब्रा उतार कर एक तरफ फेंक दी और पैरों में सैंडलों के अलावा मादरजात नंगी होकर फिर मुझसे लिपट गयीं। फिर हमारी चुदाई सोफ़े पर ही शुरू हो गयी। मैं सोफे पर पीछे टिक कर लेटा था और मेरे पैर ज़मीन पर थे। खुशबू चाची मुझ पर सवार हो गयी थी। मेरा ज़ालिम लंड उनकी चूत में घुसकर फंसा हुआ था। वह कुल्हे उठा-गिरा कर मेरा लंड अपनी चूत में अंदर-बाहर कर रही थी। उनकी चूचियाँ मेरे मुँह के ऊपर थीं और मैं उनके निप्पल चूस रहा था। शराब के नशे और चुदाई की मस्ती में खुशबु चाची जोर-जोर से सिसकारियाँ भर रही थीं। इतने में मेरी नज़र दरवाज़े की तरफ पड़ी तो देखा चंद्रिका वहाँ खड़ी-खड़ी हैरानी से स्तंभित सी हमें देख रही थी। मैंने चुदाई नहीं रोकी और बोला, “अरे चंद्रिका चाची... आप कब आयीं?” खुशबू चाची ने भी उसे देखा तो चुदाई चालू रखते हुए कहा, “आजा चंद्रिका... शरमा मत!”
10-01-2026, 09:34 PM
10-01-2026, 09:36 PM
11-01-2026, 07:14 AM
(This post was last modified: 11-01-2026, 07:17 AM by Dhamakaindia108. Edited 1 time in total. Edited 1 time in total.)
हमारी आश्चर्यचकित चंद्रिका जैसे अचानक कीया और भागकर हवेली में बात कर गए और हम अपनी चुदाई जारी रखते हैं और शाम तक ऐश करते रहते हैं। इस दौरान चंद्रिका कक्ष अपने से कुछ नहीं। फिर बाद में हम दोनों मेरे कमरे में प्रतियोगी ही सो गये।
अगले दिन सुबह जब हम उठे तो मीठी-मीठी बोली कि वो चंद्रिका को समझाती है। फिर हम तीन अपना-अपना काम, निकल गये। उस दिन मुझे परीक्षा केंद्र पर देर तक रुकना पड़ा। शाम को जब चटनी-चाची और चंद्रिका अकेले थे तो चटनी-चाची और चंद्रिका के साथ एक-एक पैग पीने गए। तब चंद्रिका ने चटनी-चाटी से कहा, " बहना। मुझे माफ कर देना, मैं अंजन में जल्दी आ गई थी... मुझे बिल्कुल नहीं था कि तुम वो...!" फुसफुसाते हुए बीच में ही बोली, "देखो, चंद्रिका! सैक्स केस में मैं बिल्कुल ओपन प्रॉसैट की हूं। बाउंसी-चुदवाने में मैं शर्म-हया नहीं रचती। मेरा मन करता है तो किसी भी तरह की मर्दाना लड़की हो सकती है! लेकिन मैं किसी ऐरे-गैरे के साथ चुदाई नहीं करती!" चंद्रिका बोली, "गोलू कैसा है? आप रोज़-रोज़...!" चटनी ने तपाक से कहा, "नहीं! रोज़-रोज़ नहीं! जब तक वह परीक्षा देती है तब तक लेकिन गोलू मुझे रोज़ चोदता है और वो भी कई दफ़ा। क्या तू बताए कि तू ज़िंदा है या थकी हुई ज़िंदगी गुज़ार रही है? चंद्रिका बोली, "नहीं दीदी! सुजीत को दो साल हो गए... तब से बस ऐसे ही... दिल तो बहुत करता है... पर मिठाई नहीं हुई कभी... जब कभी दिल ज्यादा ही मचलता है तो... यू नो.. केला या बैंगन वैगरह डाल कर अपनी प्यास लगती है!" यूसुफ़ चाची बोलीं, "छोड़ो ये बेकार की बातें! कब तक समाज की बेकारी की पाबंदियों से दर-दर की जवानी टूटती रहेगी... बस मुझे साफ़-साफ़ बताओ...जुहाना है गोलू से?" "दिल तो करता है मगर..." चन्द्रिका ने हँसी-चाटी कहते हुए कहा, "ये अगर मगर कुछ नहीं... बस यही वरना नहीं...!" चंद्रिका ने सिर हिलाकर हां कह दिया। उस दिन मैं परीक्षा केंद्र से काफी लेट आया था। रात को सैटेलाइट वक्ता चंद्रिका की बातें जो मुझे भावुक कर गईं। मैं तो खुद चंद्रिका को झटका देने के लिए बेकरार था। अगले दिन शाम को परीक्षा केंद्र से आने के बाद मैं मीठी चाय के साथ बैठकर शराब पी रहा था तो उन्होंने चंद्रिका को भी कंपनी में ऑफर के लिए बुलाया। चन्द्रिका आई तो मैं उसके हुस्न को देख ही रहा था। जब से चंद्रिका कोलकाता आई है तो मैंने उसे हमेशा के लिए समकक्ष और कुर्ता-टॉप में ही देखा था। आज शायद पेटेंट चाची की सलाह से वह प्लास्टिक गुलाबी रंग की पेंटिंग सी स्क्रिमलेस नाइटी उसकी स्कॉलर हुई थी जिसमें से बेपनाह हुस्न चाक रह रहा था। साइंटिस्ट पे लाल बैलाक और गालों पे पिंक रूज और स्टाक में सफेद रंग के हाईली पेंसिल हील के कातिलाना सैंडल पहने हुए थे। चंद्रिका भी हमारे साथ शराब पीने लगी लेकिन चंद्रिका मेरी नजर नहीं मिली रही थी। मैं और मीठी-मीठी बातें कर रहे थे और चंद्रिका मित्र अपना पैग पी रही थीं। हमें दो-दो पग खतम मिले तो चंद्रिका के भाव से साफ था कि उन्हें आदर्श उदासीनता का एहसास हुआ। सौतेली चाची ने जानबूझ कर चंद्रिका के लिए तगड़े पैग बनाए थे। अब चंद्रिका हमारी बातें पे फ़्रैंक खिलखिलाते हुए हंस रही थीं। मुझे भी पिक्चर सुरूर था और खुद कोमल चाय भी नशे में यम रही थी। कातिलाना मार्शलहाट के साथ उन्होंने मुझसे आंख मार कर कहा तो मैंने बेशरम से पूछा, "क्या खतरनाक है चंद्रिका चाची? पसंद आया तुम्हें मेरा लंड? कल तो तुम शर्मा कर अंदर ही भाग गई हो!" चंद्रिका ने शर्मा कर कहा, अपनी बहन की तरफ देखा तो मीठी-मीठी बातें करते हुए बोलीं, "हाय, देखो कैसी शर्मा रही है...! अरे शर्म हया छोड़ो... नहीं तो बस केले-बैंगन से काम चलाती रहती दोस्त जिंदगी... सच में गोलू! चंद्रिका तो बेकरार है दोनों लंड लेने के लिए!" "हाँ गोलू! दो साल से अपनी आँखों से दबा रखा था... अब और नहीं हुआ... बहन की तरह प्लीज़ मेरी प्यास भी दो!" चंद्रिका ज़रा खुलते हुए बोली। मैंने बोला, “क्यों शर्म कर रही हो मुझसे, बेकरार तो मैं इतने दिनों से हूं खूबसूरत हसीना को बकौल के लिए!” ये रिपोर्ट ही चंद्रिका के गालों पर लाली आ गई। हमने एक-एक पैग और पिया तो फुल चाटी ने अपनी एसयूवी में चलने का संकेत दिया। मैं स्टालिन में नारियल की चटनी के साथ जबरदस्ती कमरे में गया और दो मिनट के बाद वो दोनों भी सैंडल खटखटी हुई नशे में झूमती कमरे में आ गए। नशे में होने की वजह से चंद्रिका की चाल में लड़की का चेहरा साफ नजर आ रहा था। दोनों बिस्तर पर बैठ गए। मैं ज्वालामुखी चंद्रिका के पास आया और उसके गालों को छूने लगा। नशे की मस्ती के बावजूद भी वह बहुत शर्मा आ रही थी। मैं अपने पैर को लंबा करके पलंग बैठाया और चंद्रिका को गोद में खींच लिया और उसके चेहरे पर कुदाल कर उसके शरीर को अपनी गोद में ले लिया। फिर मैंने जीभ से उसकी मूठ चाटी और जीभ मुंह में बोलने का प्रयास किया लेकिन उसने मुंह नहीं खोला। “क्या हुआ चंद्रिका चाची? आपको अच्छा नहीं लग रहा क्या?” मैंने पूछा। ![]()
12-01-2026, 07:36 AM
चंद्रिका हंसते हुए धीरे से बोली, “नहीं-नहीं गोलू ! बस थोड़ा ऑउट ऑफ प्रैक्टिस हो गयी हूँ ना!”
मैंने फिर उसके होंठों पे अपने होंठ रख दिये और उसका नीचे वाला होंठ अपने होंठों के बीच ले कर चूसा तो चंद्रिका के जिस्म में झुरझुरी फ़ैल गयी और उसके दोनों निप्पल खड़े होने लगे। चंद्रिका भी अब मेरा साथ देने लगी और मैंने अपनी जीभ उसके मुँह में डाल दी और हम दोनों एक दूसरे की जीभें चूसने लगे। फिर मैं अपना हाथ उसके पेट से उसके मम्मों पर ले गया और नाइटी के ऊपर से सहलाने लगा। उसके मम्मों को सहलाते हुए मैं बोला, “ चंद्रिका जी, मम्मे तो बहुत बड़े-बड़े हैं और कठोर भी हैं!” वो कुछ नहीं बोली। कुछ देर तक मम्मे सहलाने के बाद मैंने उसकी नाइटी के हुक खोल दिये और फ़िर से उसके होंठों को चूमने लगा और फिर उसके बोब्बों को दबाने और सहलाने लगा। मेरी उंगलियाँ छूते ही उसके निप्पल खड़े हो गये। इतने में मैंने महसूस किया कि खुशबू चाची मेरा बरमूडा मेरी टाँगों से नीचे खिसका रही है। फिर उन्होंने मेरा अंडरवीयर और टी-शर्ट भी उतार दी। मैंने भी चंद्रिका की नाइटी और ब्रा और पैंटी उसके जिस्म से अलग कर दी। खुशबू चाची तो पहले ही कब नंगी हो गयी थीं मुझे पता ही नहीं चला। अब मैं बिल्कुल नंगा दो नंगी हसिनाओं के साथ एक ही बिस्तार पर मौजूद था। खुशबू चाची ने चॉकलेट रंग के पेंसिल हील के सैंडल पहने हुए थे और उनकी ननद चंद्रिका ने सफेद रंग के ऊँची हील के सैंडल। दोनों का नंगा हुस्न देखकर मैं तो पागल हो गया। चंद्रिका को लिटा कर मैं उसकी चूत को सहलाने लगा और चूत में दो उंगलियाँ भी डाल दी। इतने में खुशबु चाची मेरे लंड को मुँह में लेकर चूसने लगी। मैंने भी झुककर चंद्रिका की चूत पर अपने होंठ लगा दिये और उसकी चूत में जीभ डालकर चूसने लगा। चंद्रिका के होंठों से मस्ती में खुलकर सिसकरियाँ निकल रही थी और और वो टाँगें फैलाये हुए बिस्तर की चादर अपनी मुठियों में भींच रही थी। खुशबू चाची के चूसने से मेरा लंड पत्थर की तरह सख्त हो गया था और चंद्रिका भी काफी गरम हो चुकी थी। वो अब बिल्कुल बेशरम होकर मस्ती में बोली, “ गोलू ऽऽ अब बर्दाश्ट नहीं हो रहा... प्लीज़ चोदो मुझे...!” खुशबू चाची ने मेरे लंड अपने मुँह में से निकाला और बोली, “हाँ गोलू... अब चोद दो मेरी बहन को... देखो कैसे सब शर्म-ओ-हया छोड़कर चोदने के लिये गुज़ारिश कर रही है!” मैं चंद्रिका के ऊपर आ गया और खुशबू चाची ने मेरा लंड को अपनी उंगलियों में पकड़कर अपनी बहन की चूत के मुहाने रख दिया। मेरे लंड के गरम सुपाड़े को अपनी चूत पर महसूस करके चंद्रिका और भी तड़प कर सिसक उठी। मेरे लंड को चंद्रिका की चूत पर दबाते हुए खुशबू चाची बोली, “फक इट अप गोलू ... पूरा लौड़ा अंदर तक...!” मैंने एक जोर का धक्का मारा तो आधा लंड चंद्रिका की चूत में घुस गया। दर्द की वजह से चंद्रिका ज़ोर से चिल्लायी, “ऊऊऊईईईईई आआआहहह मेरे अल्लाह.... मरऽऽऽ गयीऽऽऽ!” अपनी बहन को दर्द से बेहाल होकर तड़पते देख खुशबू चाची चंद्रिका के पास जाकर उसके होंठों को चूमने लगी और उसके मम्मों को दबाने लगी। चंद्रिका की चींखें कुछ कम हुई तो मैंने फिर कसकर एक धक्का मारा तो पूरा लंड उसकी चूत में समा गया। चंद्रिका की चूत की कसी-कसी और गरम-गरम दीवारें मेरे लंड को जकड़े हुए थी। चंद्रिका की तो फिर से चींख निकाल पड़ी और वो अपने सिर को इधर-उधर पटकते हुए चिल्लायी, “याऽऽ अल्लाहऽऽऽ... मेरे मालिक... इस जालिम लंड ने तो मेरी जान ही निकाल डाली... आआआईईईऽऽऽ!” मैं कुछ देर उसकी चूत में पूरा लंड घुसाये पड़ा रहा और कुछ भी हर्कत नहीं की। खुशबू चाची अब भी अपनी बहन के मुँह में जीभ डालकर उसके होंठ चूम रही थी। जब चंद्रिका नॉर्मल हुई तो मैं अपने चूतड़ हिला कर धीरे-धीरे चोदने लगा। खुशबू चाची अब उसे चूमना छोड़कर चंद्रिका के बगल में लेटी हुई अपने हाथ से उसकी चूचियाँ और पेट पर सहला रही थी। चंद्रिका मस्ती में ज़ोर-ज़ोर से सिसकते हुए “आहह ऊँहह आँआँहह” कर रही थी। अपनी टाँगें उठा कर चंद्रिका ने मेरे पीछे कमर पर कैंची की तरह कस दीं और अपनी बाँहें मेरी बगलों में से मेरे कंधों पर कस दीं। “हाँ...ओहह मेरा खुदा... सो गुड... ओह डू इट... चोदो...!” बड़बड़ाते हुए चंद्रिका भी मेरे धक्कों के साथ-साथ अपने चूतड़ ऊपर उछालने की पूरी कोशिश कर रही थी। थोड़ी ही देर में मैंने महसूस किया की खुशबू चाची अब मेरे पीछे थीं और मेरे चूतड़ों पर हाठ फिरा रही थीं। मैं भी लंबे-लंबे धक्के मारता हुआ अपना लंड चंद्रिका की चूत में अंदर-बाहर चोद रहा था। “ओहह गोलू... आँहहा... अल्लाह... मैं... मैं... गयी... आआहहह!” चंद्रिका ज़ोर से चींखी और अपनी टाँगें बहुत ज़ोर से मेरी कमर पर कस दीं और अपनी उंगलियों के नाखुन मेरे कंधों में गड़ा दिये। उसका बदन अकड़ गया और चंद्रिका की चूत ने मेरे लंड पर पानी छोड़ दिया। मैंने चोदना नहीं रोका और अब मैं और भी लंबे-लंबे धक्के मारते हुए चोदने लगा। पूरा लंड बाहर खींच कर एक झटके में चंद्रिका की चूत में घुसेड़ने लगा। चंद्रिका भी फिर से मस्ती में आ गयी और नीचे से अपने चूतड़ उछालने लगी। थोड़ी ही देर में धक्कों की रफ़्तार और बढ़ने लगी। कमरे में चंद्रिका की “ऊँहहह आँहह” गूँज रही थी और उधर खुशबू चाची भी हमें जोश दिला रही थीं, “फक हर गोलू... और ज़ोर से चोद कुत्तिया को...!” करीब पंद्रह-बीस मिनटों की चुदाई के बाद मैं ज़ोर से चंद्रिका से लिपट गया और उसने भी मुझे ज़ोर से जकड़ लिया। हम दोनों ही झड़ने के कगार पर थे। पहले चंद्रिका झड़ते हुए ज़ोरे से चींखी और मैंने भी पूरी ताकत से अपना लंड चंद्रिका की चूत में अंदर तक ठाँस दिया। मेरी लंड की गोटियाँ भी चंद्रिका के चूतड़ों के बीच की दरार में धंसी गयीं। अगले ही पल मेरा लंड उसकी चूत की गहरायी में पाँच-सात पिचकारियाँ मार कर झड़ गया। कुछ देर तक हम दोनों ऐसे ही लिपटे रहे। फिर जब मैंने आधा मुर्झाया हुआ लंड बाहर निकाला तो देखा उसकी चूत से वीर्य की धार बह रही थी। खुशबू चाची ने लपककर अपनी जीभ चंद्रिका की चूत पर लगा दी और उसमें से बहता हुआ मेरा वीर्य चाटने लगी। मेरा लंड भी खुशबू चाची ने चूसकर साफ किया और फिर उन्होंने चंद्रिका से पूछा, “आया ना मज़ा?” चंद्रिका सिसकते हुए बोली, “या अल्लाह! इतने सालों से क्यों मैंने खुद को इतने मज़े से महरूम रखा?” फिर मैंने खुशबू चाची को भी चोदा। चंद्रिका भी खुशबू चाची की तरह ही चुदासी निकली। चंद्रिका जितने दिन कोलकाता रही हम तीनों रात को एक ही बिस्तर में सोते और रोज-रोज मैं उन दोनों बहनों को चोदता। दोनों चुदक्कड़ बहनों ने मुझे चुदाई की मशीन बना कर रख दिया और दोनों मिलकर मेरा लंड निचोड़ कर रख देतीं थीं। कईं दफा तो दोनों नशे धुत्त होकर में मेरे लौड़े के लिये आपस में बिल्लियों की तरह लड़ने और गाली-गलौच तक करने लगती थीं। चंद्रिका के जाने के बाद मैं भी अपने घर वापस आ गया लेकिन हर रात में खुशबु चाची और चंद्रिका चाची को याद करके और लंड को उसकी याद में हिलाया करता था ।
17-01-2026, 09:11 PM
(This post was last modified: 18-01-2026, 08:33 PM by Dhamakaindia108. Edited 1 time in total. Edited 1 time in total.)
27-01-2026, 09:14 PM
27-01-2026, 11:37 PM
(This post was last modified: 27-01-2026, 11:41 PM by ARJos. Edited 2 times in total. Edited 2 times in total.)
ये सारी कहानियाँ किरदारों के नाम बदल कर और authors के नाम बदल कर पोस्ट करा रहा है। ये कहानियाँ पहले ही xossipy पे पोस्ट हो चुकी हैं।
Example: ये ऊपर ऑडिटिंग ऑफिसर वाली कहानी “प्रोमोशन की मजबूरी” है जो लेखक Deenu की कई कहानियों में से एक है। Original कहानी Rohit भाई ने xossipy पे यहाँ पोस्ट की है: https://xossipy.com/thread-25588-post-45...pid4552886 |
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