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Adultery एक पत्नी का सफर
#61
Absolutely wonderful. Wish longer updates
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#62
Agla update 21 k bad hi aa payega.... Deri k liye maafi
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#63
(07-12-2025, 10:38 PM)Tiska jay Wrote: Agla update 21 k bad hi aa payega.... Deri k liye maafi

Hum log sabr say karengey intezar update keliye
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#64
(07-12-2025, 10:38 PM)Tiska jay Wrote: Agla update 21 k bad hi aa payega.... Deri k liye maafi

KLPD ho gaya...
Even though disappointed, waiting eagerly for next update. I can understand that priority is other stuff in life. Hope to see you soon updating
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#65
mast update ja raha hai bro..

bro.. 21 date ko 12 me badal sakte ho kya ? with hot pics
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#66
hi bro.. next update
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#67
पूजा अब रोज़ अवस्थी सर के घर आने लगी थी।
पहले तो सिर्फ़ पढ़ाई के बहाने।
फिर धीरे-धीरे…
उसकी देखभाल के बहाने।

वो सर की बीवी के बारे में पूछती।
“सर… शालिनी मैम कैसी थीं?”

अवस्थी सर आँखें नम करके बताते।
“बहुत अच्छी थी बेटा…
मुझे अपने हाथ से खाना खिलाती थी…
उसके जाने के बाद…
अच्छा खाना तक नहीं मिला…
बस होटल का… या बाहर का…”

पूजा का दिल पिघल जाता।
उसका अपराधबोध और बढ़ जाता।
“मैंने सर पर शक किया…
और सर इतने अकेले हैं…”

एक दिन।
पूजा ने कहा,
“सर… आज मैं आपके लिए खाना बनाती हूँ…”

अवस्थी सर ने मुस्कुराकर मना किया।
“अरे नहीं बेटा… तुम्हारी तकलीफ़…”

पर पूजा ज़िद करने लगी।
“नहीं सर… आपने मेरी इतनी मदद की…
मैं आपके लिए इतना तो कर ही सकती हूँ…”

किचन में – 6:30 बजे
पूजा किचन में गई।
अवस्थी सर बाहर बैठे देख रहे थे।
पूजा ने रोटी बनाई।
दाल।
सब्ज़ी।
चावल।
उसके हाथ तेज़ चल रहे थे।
पर मन में उधेड़बुन।

**पूजा का मन**
“ये ठीक है ना…?
सर अकेले हैं…
मैं बस मदद कर रही हूँ…
संजय को पता चलेगा तो बुरा नहीं मानेगा…
ये तो बस एक बूढ़े की देखभाल है…”

पर कुर्ता पसीने से चिपक गया था।
बूब्स का शेप साफ़।
निप्पल्स हल्के उभरे हुए।
गर्मी में पसीने की बूँदें गर्दन से होती हुईं क्लीवेज में लटक रही थीं।
मंगलसूत्र उस घाटी में लटका हुआ – हर साँस में हिल रहा था।

पूजा ने प्लेट सजाई।
रोटी, दाल, सब्ज़ी।
अवस्थी सर के सामने रखी।

अवस्थी सर ने प्लेट देखी।
उनकी आँखें भर आईं।
फिर वो रोने लगे।
ज़ोर-ज़ोर से।
“ये… ये खाना…
शालिनी के हाथ का खाना…
20 साल बाद…
कोई मेरे लिए…
अपने हाथ से…”

पूजा घबरा गई।
“सर… क्या हुआ…?
रोइए मत…”

अवस्थी सर ने आँसू पोंछे।
“बेटा… शालिनी मुझे अपने हाथ से खिलाती थी…
मुँह के आगे रोटी रखती…
और मैं खाता…
उसके बाद…
किसी ने नहीं खिलाया…”

पूजा का दिल फट गया।
उसकी आँखें भी नम।
वो बोली,
“सर… मैं आपके लिए इतना तो कर ही सकती हूँ…”

वो प्लेट उठाई।
रोटी का टुकड़ा तोड़ा।
दाल-सब्ज़ी लगाकर।
अवस्थी सर के मुँह के आगे किया।

अवस्थी सर ने मुँह खोला।
पूजा ने रोटी उनके मुँह में डाली।
अवस्थी सर ने चबाया।
उनकी आँखें बंद।
आँसू बह रहे थे।

**अवस्थी का मन**
“साली… आज मेरे मुँह में खाना डाल रही है…
कल मेरे मुँह में अपना निप्पल डालेगी…
ये क्लीवेज…
पसीने की बूँदें…
मंगलसूत्र लटक रहा है…
मैं तो इसे यहीं झुका दूँ…
इसके बूब्स मुँह में ले लूँ…
पर रुक…
इसे और पिघलने दे…
ये खुद ही मेरे पास आएगी…”

पूजा एक-एक निवाला खिलाती गई।
अवस्थी सर की नज़रें उसके क्लीवेज पर।
पसीने की बूँदें मंगलसूत्र पर लटक रही थीं।
हर बार जब पूजा झुकती, क्लीवेज और गहरा हो जाता।
अवस्थी सर का लंड पैंट में तन गया।
पर वो रोने का नाटक करते रहे।

पूजा का मन उधेड़बुन में।
“ये ठीक है ना…?
सर रो रहे हैं…
मैं बस उन्हें खिला रही हूँ…
जैसे बेटी अपने पिता को…
पर क्यों मेरी चूत में सिहरन हो रही है…?
क्यों मेरे निप्पल्स सख्त हो रहे हैं…?
नहीं पूजा… ये गलत नहीं है…
तू बस मदद कर रही है…”

खाना खत्म हुआ।
अवस्थी सर ने पूजा का हाथ चूमा।
“बेटा… तुमने मुझे आज 20 साल बाद घर का एहसास कराया…”

पूजा की आँखें नम।
“सर… मैं कल फिर आऊँगी…
आपके लिए खाना बनाकर…”

अवस्थी सर ने मुस्कुराकर सिर हिलाया।
पर उनकी आँखों में भूख थी।
और पूजा…
पूजा घर लौटी तो उसका अपराधबोध और बढ़ गया था।
“मैंने सर को खुशी दी…
पर क्यों मुझे अजीब लग रहा है…?
क्यों मेरी चूत अभी भी गीली है…?”

और अवस्थी सर अकेले हँस रहे थे।
“साली खुद मेरे जाल में आ रही है…
कल इसे और करीब बुलाऊँगा…
फिर देखता हूँ कितने दिन टिकती है…”
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#68
संजय का कॉल आया।
पूजा ने फोन उठाया।
उसकी आवाज़ में हल्की-सी थकान थी, लेकिन वो छिपाने की कोशिश कर रही थी।
“हेलो जान… सब ठीक है ना?”

संजय की आवाज़ में हमेशा की तरह प्यार था।
“हाँ जान… बस थोड़ी थकान है। कॉलेज में पढ़ाई… तुम बताओ, दिल्ली कैसी?”

“अरे मैं ठीक हूँ। बस तुम्हारी याद आ रही है। जल्दी आ रहा हूँ लेने। क्या चाहिए तुम्हें वहाँ से?”

पूजा ने मुस्कुराने की कोशिश की।
“कुछ नहीं… बस तुम आ जाओ। आई लव यू…”

“आई लव यू टू जान… ख्याल रखना अपना।”

फ़ोन रखा।
पूजा ने साँस ली।
अवस्थी सर का नाम नहीं लिया।
न उसकी उंगलियाँ, न उसके होंठ, न वो दबाव।
“कैसे बताऊँगी… वो क्या कहेगा?”

वो बेड पर लेट गई।
रेणु अभी नहीं आई थी।
कमरा अकेला।
पूजा ने आँखें बंद कीं।
और नींद आ गई।
वो अवस्थी सर के घर में थी।
पर घर अब बड़ा था।
बिस्तर पर लेटी हुई।
नंगी।
उसकी गोरी त्वचा चमक रही थी।
उसकी हाइट 5 फीट 4 इंच – नाजुक, लेकिन कर्व्स परफेक्ट।
उसकी कमर 24 इंच की – इतनी पतली कि कोई भी हाथ घेर ले।
कूल्हे गोल, मोटे – 36 इंच के, जैसे कोई परफेक्ट आकार।
बूब्स 36B – गोल, भरे हुए, गोरे, जैसे दो दूध की प्यालियाँ।
निप्पल्स गुलाबी, छोटे-छोटे, लेकिन सपने में सख्त होकर तने हुए।
उसकी चूत – चिकनी, गुलाबी, होंठ सूजे हुए, पहले से ही गीली।
बाल खुले, लहराते हुए।
चेहरा – मासूम, पर आँखों में हवस।
होंठ काँपते हुए।
उसके गले में मंगलसूत्र – जो उसके बूब्स के बीच लटक रहा था।

और अवस्थी सर – नंगे।
उनका लंड तना हुआ, पूजा की चूत में घुसा हुआ।
पूजा उनके ऊपर थी।
उनके लंड पर कूद रही थी।
हर कूद में उसकी गांड हिल रही थी – गोल, मोटी, जैसे दो तकियों की तरह उछल रही थी।
हर धक्के में गांड नीचे गिरती और अवस्थी सर के जाँघों से टकराती।
चट-चट की आवाज़ कमरे में गूँज रही थी।
पूजा की कमर लहरा रही थी – जैसे कोई डांस कर रही हो।
उसके बूब्स ऊपर-नीचे उछल रहे थे – गोल, भरे हुए, जैसे दो गुब्बारे हवा में नाच रहे हों।
निप्पल्स हर उछाल में और सख्त।
मंगलसूत्र उसके बूब्स के बीच में उछल रहा था – जैसे चिल्ला रहा हो।
पूजा का चेहरा – आँखें बंद, होंठ खुले, मुँह से आहें निकल रही थीं।
उसका चेहरा लाल, पसीने से चमकता हुआ – जैसे कोई आनंद की चरम पर हो।
उसके बाल बिखरे हुए, चेहरे पर गिरे हुए।
वो जोर-जोर से चिल्ला रही थी –
“आह्ह… पति देव… और जोर से…
आह्ह… मेरे पति देव… फाड़ दो मुझे…
आह्ह… जॉर से… जॉर से…”

उसकी गांड हर धक्के में और तेज़ हिल रही थी –
नीचे गिरती, फिर ऊपर उछलती।
उसकी जाँघें अवस्थी सर की जाँघों से रगड़ खा रही थीं।
उसकी चूत अवस्थी सर के लंड को पूरा निगल रही थी –
गीली, सूजी हुई, हर धक्के में और फैल रही थी।
अवस्थी सर पूजा की गांड दोनों हाथों से पकड़े हुए थे।
उंगलियाँ गोश्त में धँसी हुईं।
वो भी चीख रहे थे –
“आह्ह… जान मेरी प्यारी बीवी…
आह्ह… मेरी पूजा… तू मेरी है… बस मेरी…
आह्ह… चूत मारूँगा तेरी…
आह्ह… गांड भी मारूँगा…
मेरी रंडी… मेरी रखैल…”

दोनों की साँसें तेज़।
पूजा की आहें कमरे में गूँज रही थीं –
“आह्ह… पति देव… हाँ… और… आह्ह… फाड़ दो…
आह्ह… मैं तुम्हारी हूँ… तुम्हारी बीवी…
आह्ह… जोर से… जोर से चोदो…”

उनकी गांड और तेज़ हिल रही थी –
जैसे कोई मशीन हो।
बूब्स उछलते हुए – अवस्थी सर के चेहरे पर लगते हुए।
उनका मंगलसूत्र हर उछाल में उनके बीच में लटकता हुआ।
पूजा का चेहरा – आनंद से भरा, होंठ खुले, आँखें बंद, मुँह से लार टपक रही थी।

फिर दोनों एक साथ झड़ गए।
पूजा की चूत से रस बह निकला।
अवस्थी सर का वीर्य पूजा की चूत में भर गया।
दोनों ने एक-दूसरे को जोर से गले लगाया।
और होंठों पर होंठ रख दिए।
गहरा किस।
जीभें मिलीं।
लार का आदान-प्रदान।
पूजा की सिसकी –
“पति देव… आई लव यू…”

अवस्थी सर ने कहा,
“मेरी बीवी… मेरी पूजा…”

और फिर…
पूजा की आँख खुली।
उठकर बैठ गई।
उसकी साँसें तेज़।
बेड गीला।
उसकी चूत से रस बह रहा था।
वो चीखी –
“ये क्या सपना था…?
नहीं… नहीं… ये नहीं हो सकता…!!!”

उसका दिल धड़क रहा था।
वो रोने लगी।
तकिया गले लगाकर।
“नहीं पूजा… नहीं…
तू क्या हो गई है…?”

पर उसकी चूत अभी भी धड़क रही थी।
और मन में वही आवाज़ –
“पति देव… और जोर से…”

वो खुद से घिन्न कर रही थी।
पर रोक नहीं पा रही थी।
और उस रात वो फिर नहीं सोई।
बस रोती रही।
और खुद को कोसती रही।

क्योंकि अब वो जानती थी –
सपना सच होने वाला था।
और वो खुद ही उसकी तरफ़ बढ़ रही थी।
धीरे-धीरे।
पर बढ़ रही थी।
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#69
अगले दिन से पूजा अवस्थी सर से नज़रें चुराने लगी।  
क्लास में जब वो बोर्ड पर लिखते, पूजा की नज़रें ज़मीन पर।  
पर जैसे ही सर की तरफ़ देखती –  
सपना याद आ जाता।  
वो सपना जिसमें वो अवस्थी सर के ऊपर थी।  
उनका लंड उसकी चूत में।  
वो खुद कूद रही थी।  
उसकी गांड हिल रही थी।  
उसके बूब्स उछल रहे थे।  
और वो चिल्ला रही थी – “पति देव… और ज़ोर से…”

पूजा का चेहरा लाल हो जाता।  
उसकी साँसें तेज़।  
ना चाहते हुए भी उसकी नज़रें अवस्थी सर की पैंट पर जातीं।  
उसके लंड की जगह पर।  
वो सोचती –  
“कितना बड़ा होगा…?  
सपने में तो बहुत बड़ा था…  
मोटा… मेरी चूत फाड़ रहा था…”

वो खुद को कोसती।  
“नहीं पूजा… नहीं…  
ये गलत है…”

पर नज़रें फिर चली जातीं।  
हर बार।

अवस्थी सर के घर जाना बंद कर दिया।  
पेपर्स शुरू हो गए थे।  
पूजा दिन-रात पढ़ती।  
पर रात को सपना फिर आता।  
वो अवस्थी सर के ऊपर।  
उनका लंड उसकी चूत में।  
वो कूद रही।  
“पति देव… आह्ह… और ज़ोर से…”

वो बैचेन होकर उठ जाती।  
चूत गीली।  
निप्पल्स सख्त।  
वो रोती।  
“मैं कितनी गंदी हो गई हूँ…”

लास्ट पेपर के बाद – शाम  
पेपर्स अच्छे गए थे।  
रात को संजय आने वाला था।  
पूजा ने सोचा –  
“सर से मिलकर थैंक्स बोल दूँ…  
फिर सब खत्म।  
संजय के साथ चली जाऊँगी…”

वो अवस्थी सर के घर गई।  
डोरबेल बजाई।  
कोई जवाब नहीं।  
दरवाज़ा धक्का दिया – खुला था।

अंदर रोने की आवाज़।  
पूजा अंदर गई।  
ड्रॉइंग रूम में अवस्थी सर फर्श पर बैठे थे।  
शालिनी मैम की फोटो के सामने।  
उस पर फूल।  
दीया जला हुआ।  
अवस्थी सर ज़ोर-ज़ोर से रो रहे थे।  
कंधे हिल रहे थे।

“सर… क्या हुआ…?”

अवस्थी सर ने आँसू भरी आँखों से देखा।  
“आज का दिन ही था पूजा…  
आज ही के दिन वो मुझे छोड़कर चली गई थी…  
20 साल…  
20 साल हो गए…  
और आज…  
तुम भी चली जाओगी…”

वो फिर रोने लगे।  
“एक तुम थीं…  
जो शालिनी की तरह…  
मुझे अपने हाथ से खाना खिलाती थीं…  
उसकी तरह देखभाल करती थीं…  
और आज… तुम भी चली जाओगी…
अब फिर अकेलापन…”

पूजा का दिल फट गया।  
वो उनके पास बैठ गई।  
“अरे नहीं सर… मैं वापस तो आऊँगी ना…  
बस एक महीने की तो बात है…”

अवस्थी सर ने आँसू भरी आँखों से देखा।  
उनकी नज़रें पूजा के कुर्ते के गले पर रुकीं –  
जहाँ पसीने से कुर्ता चिपक गया था, बूब्स का शेप साफ़ दिख रहा था।  
“पता नहीं तब तक मैं रहूँ या न रहूँ…”

“नहीं सर… ऐसा मत बोलिए…”

“और क्या करूँ…?  
तुम अपने पति के साथ होगी…  
सब अपने घरवालों के साथ…  
और मैं अकेला फिर से…  
अब तक तो बच्चों को पढ़ाकर मन बहला लेता था…  
फिर तुम आईं…  
घाव को कुरेद गईं…  
मेरा अकेलापन मुझे काटने लगेगा…”

पूजा की आँखें भर आईं।  
उसकी साँसें तेज़।  
उसने अवस्थी सर का हाथ पकड़ा।  
उनकी उंगलियाँ गर्म थीं।  
“प्लीज़ सर… ऐसा मत बोलो…  
मैं आपसे रोज़ बात करूँगी…  
मैं आपका साथ दूँगी…  
आपको कभी अकेला महसूस नहीं होने दूँगी…”

“कसम से…?”

“हाँ कसम से सर…”

“तो खाओ मेरी मरी हुई बीवी की कसम…”

पूजा ने आँखें बंद कीं।  
उसकी चूत में एक हल्की सिहरन।  
पर वो बोली,  
“आपकी बीवी तो अब इस दुनिया में नहीं हैं सर…  
फिर भी… मैं उनकी और अपने पति की कसम खाती हूँ…  
आपको कभी अकेला महसूस नहीं होने दूँगी…  
आपका हमेशा साथ दूँगी…  
आपको आपकी बीवी की कमी नहीं खलने दूँगी…”

बोल तो गई।  
फिर मन में सोचा –  
“ये क्या बोल दिया मैंने…?  
पर अब बोल दिया… तो निभाऊँगी…”

अवस्थी सर रोते हुए पूजा को गले लगा लिए।  
उन्होंने पूजा को पूरा फील किया।  
उसके बूब्स उनकी छाती से दबे हुए – मुलायम, गर्म, निप्पल्स सख्त होकर उनकी शर्ट में घुस रहे थे।  
उनकी साँसें पूजा की गर्दन पर गर्म हवा फेंक रही थीं।  
उनका हाथ पूजा की कमर पर – धीरे से नीचे सरकता हुआ, गांड पर।  
हल्का सा दबाव।  
पूजा की साँस रुक गई।  
उसकी चूत में बिजली दौड़ गई।  
पैंटी गीली हो गई।  
पर वो अलग नहीं हुई।  
आज वो जुदा होने वाली थी।  
अकेला छोड़ने वाली थी।

अवस्थी सर की साँसें तेज़।  
उनका लंड पूजा की जाँघ से दब रहा था – सख्त, गर्म।  
पूजा ने महसूस किया।  
उसकी चूत और गीली हो गई।  
पर वो चुप रही।

“आपको वादा करना होगा…  
कि आप मेरा वेट करोगे…”

“हाँ मैं करूँगा बेटा…”

“बेटा नहीं… पूजा…  
आप मुझे अब पूजा ही बुलाएँगे…”

“ठीक है पूजा… मैं वेट करूँगा…  
पर तुम क्या सच में वापस आओगी…?  
यहीं बनके मुकर गई तो मैं मर…”

“इतना ही बोल पाए अवस्थी…”  
पूजा ने उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए।  
किस।  
धीरे से।  
फिर गहरा।  
जीभें मिलीं।  
अवस्थी सर की साँसें पूजा के मुँह में।  
पूजा की सिसकी।  
उसकी जीभ अवस्थी सर के मुँह में घूम रही थी।  
अवस्थी सर का हाथ पूजा की गांड पर – ज़ोर से दबाया।  
उंगलियाँ दरार में।  
पूजा की चूत से रस बह निकला।

किस टूटा।  
दोनों की साँसें तेज़।  
पूजा के होंठ गीले।  
अवस्थी सर के होंठ पर पूजा की लार।

पूजा ने कहा,  
“लो… अब भरोसा हुआ ना…?”

“हाँ पूजा… मैं तुम्हारा इंतज़ार करूँगा…”

पूजा उठी।  
आँखें नम।  
दुपट्टा संभाला।  
पर उसकी चूत अभी भी धड़क रही थी।  
उसके निप्पल्स सख्त।  
वो दरवाज़े तक गई।  
एक बार पलटी।  
अवस्थी सर अभी भी रो रहे थे।  
वो मुस्कुराई।  
“सर… मैं आऊँगी…  
पक्का…”

और चली गई।  
नम आँखों के साथ।  
पर मन में एक अजीब सा सुकून।  
और एक नई आग।

**अवस्थी का मन**  
“साली ने किस कर दिया…  
अपने नरम होंठ मेरे होंठों पर…  
उसकी जीभ मेरे मुँह में…  
उसकी गांड मेरे हाथ में…  
अब ये मेरी है…  
ये वापस आएगी…  
और तब मैं इसे पूरा अपना बना लूँगा…  
इसकी चूत में अपना लंड पेलूँगा…  
इसके बूब्स चूसूँगा…  
ये मेरे लिए रोएगी…  
और मेरे लिए चीखेगी…”

**पूजा का मन**  
“मैंने क्या कर दिया…?  
एक बूढ़े को किस…  
उसकी साँसें मेरे मुँह में…  
उसका हाथ मेरी गांड पर…  
पर मुझे… अच्छा लग रहा था…?  
मेरी चूत क्यों गीली हो गई…?  
संजय… माफ़ कर दो…  
पर सर रो रहे थे…  
मैंने बस सांत्वना दी…”

वो हॉस्टल लौटी।  
संजय का इंतज़ार कर रही थी।  
पर उसके होंठों पर अभी भी अवस्थी सर की साँसें थीं।  
उसकी चूत में अभी भी वो सिहरन।  
और मन में एक नया वादा।  
जो वो निभाने वाली थी।  
चाहे कुछ भी हो जाए।

रात गहरी थी।  
और पूजा की ज़िंदगी…  
अब एक नई दिशा में मुड़ चुकी थी।  
एक ऐसी दिशा…  
जहाँ वापसी मुश्किल थी।
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#70
अवस्थी सर बेड पर लेटे थे।
पूजा के जाने के बाद उनका लंड अभी भी तना हुआ था।
उस किस की याद – पूजा के नरम, गुलाबी होंठ, उसकी जीभ का मीठा स्वाद, उसकी साँसें उनके मुँह में।
उसकी कमर पर उनका हाथ – वो पतली कमर जो पूरी तरह उनके हाथ में आ गई थी।
उसकी गांड का दबाव।
वो सब याद करके अवस्थी सर का लंड और सख्त हो गया।
उन्होंने फोन उठाया।
डायल किया।

“हेलो… गई क्या पूजा?”

दूसरी तरफ़ रेणु की आवाज़ – हल्की हँसी के साथ।
“हाँ सर… वो गई अपने पति के साथ… बहुत दुखी लग रही थी… आपने  chod दिया क्या?”

“अरे अभी कहाँ… वो तेरी तरह नहीं है ना… साली शादीशुदा के नखरे बहुत होते हैं…”

“अच्छा… तो अब?”

“हाँ… तू आ जा… साली ने लंड खड़ा कर दिया है… पूरा 9 इंच का तंबू बन गया है…”

रेणु ने हँसकर कहा,
“आ जाऊँगी… पर आज तो आप बहुत जोश में लग रहे हैं…”

“हाँ… पास कर दूँगा तुझे भी… और तेरे बीएफ को भी… आ जा कुतिया… जल्दी…”

आधे घंटे बाद।
डोरबेल बजी।
अवस्थी सर ने दरवाज़ा खोला।

रेणु खड़ी थी।
सेक्सी ब्लैक क्रॉप टॉप – इतना छोटा कि उसका पेट पूरा बाहर, नाभि में चाँदी की रिंग चमक रही।
ब्रा नहीं पहनी थी – उसके गहरे भूरे निप्पल्स टॉप में साफ़ उभरे हुए, सख्त।
नीचे काले डेनिम शॉर्ट्स – इतने छोटे कि गांड का आधा हिस्सा बाहर, जाँघें पूरी चमक रही थीं।
उसकी दुस्की त्वचा पर हल्का पसीना।
बाल खुले, लहराते।
लिपस्टिक गहरी लाल।
आँखों में काजल।
वो मुस्कुराई – भूखी मुस्कान।

“आ गई मेरी कुतिया…”

अवस्थी सर ने उसे अंदर खींचा।
दरवाज़ा बंद।
रेणु को दीवार से सटाकर किस किया।
जीभ मुँह में घुसाई।
हाथ सीधे टॉप के नीचे – उसके बूब्स पकड़े।
ज़ोर से मसला।
निप्पल्स को चुटकी में लिया।
खींचा।

“उम्म… सर… आज तो बहुत जोश में हो…
आह्ह… निप्पल्स दर्द कर रहे हैं…
पर अच्छा लग रहा है…
आह्ह… और दबाओ…”

अवस्थी सर ने उसे गोद में उठाया।
बेड पर पटक दिया।
रेणु की सिसकी निकली।
“आह्ह… सर… धीरे…”

अवस्थी सर उसके ऊपर चढ़ गए।
टॉप ऊपर किया।
बूब्स बाहर।
गहरे भूरे निप्पल्स सख्त।
अवस्थी सर ने एक निप्पल मुँह में लिया।
ज़ोर से चूसा।
दूसरे को दाँतों से काटा।
जीभ से गोल-गोल घुमाया।

“आह्ह… सर… आह्ह… चूसो…
और ज़ोर से…
आह्ह… दाँत लगाओ…
उम्म… हाँ वैसे ही…
आह्ह… मेरे निप्पल्स को काटो…
आह्ह… दर्द अच्छा लग रहा है…”

अवस्थी सर ने शॉर्ट्स खींची।
पैंटी के साथ।
रेणु अब पूरी नंगी।
उसकी चूत – बाल हल्के ट्रिम्ड, होंठ गहरे भूरे, पहले से गीली, रस टपक रहा था।

अवस्थी सर ने रेणु का सिर बेड के किनारे लटका दिया।
मुँह नीचे।
अपना पायजामा नीचे किया।
उसका 9 इंच का लंड बाहर।
मोटा, लंबा, नसें फूली हुईं, सुपारा लाल और चमकदार।

“ले कुतिया… चूस…
पूजा की तरह चूस…”

रेणु ने मुँह खोला।
अवस्थी सर ने लंड मुँह में घुसाया।
गहरा।
रेणु की गैगिंग शुरू।
“ग्लक… ग्लक… आह्ह… सर… बहुत बड़ा है…
ग्लक… गला तक पहुँच गया…
आह्ह… आह्ह… दम घुट रहा है…”

अवस्थी सर ने कमर पकड़कर मुँह चोदना शुरू किया।
तेज़-तेज़।
“ले पूजा… ले साली…
तेरी चूचियाँ याद करके चोद रहा हूँ…
आह्ह… पूजा… चूस मेरा लंड…
गहरा ले… हाँ वैसे ही…
आह्ह… तेरी जीभ… मेरे लंड पर…”

रेणु की आँखों से आँसू बह रहे थे।
उसका मुँह लार से भरा।
गला लाल।
“क्या सर… पूजा क्यों बोल रहे हो…
पहले तो ऐसे नहीं चुसवाया… इतना वाइल्ड…
आह्ह… ग्लक… सर… दम घुट रहा है…
पर अच्छा लग रहा है…
आह्ह… और गहरा…”

अवस्थी सर ने और ज़ोर से घुसाया।
“पूजा ने लंड ऐसा खड़ा किया है…
क्या बताऊँ उसका फिगर…
उम्म… उसके बूब्स… उसकी गांड…
उसकी चूत… टाइट होगी…
आज तुझे पूजा बनाकर चोदूँगा…”

फिर रेणु को उठाया।
डॉगी स्टाइल me
रेणु की गांड ऊपर।
अवस्थी सर ने लंड चूत पर रगड़ा।
रस से चमक गया।
फिर एक झटके में पूरा घुसाया।

“आआह्ह्ह… सर… फाड़ दिया…!!!
आह्ह… बहुत बड़ा है…
आह्ह… धीरे… आह्ह…”

“ले कुतिया… ले पूजा…
तेरी चूत तो ढीली हो गई है…
पर पूजा की तो टाइट होगी…
आह्ह… ले… ले मेरा लंड…”

वो ज़ोर-ज़ोर से चोदने लगे।
थप-थप-थप-थप की आवाज़ कमरे में गूँज रही थी।
रेणु की गांड हर धक्के में हिल रही थी –
गोल, दुस्की, मुलायम गोश्त लहरा रहा था।
उसके बूब्स लहरा रहे थे।
अवस्थी सर ने एक हाथ से बूब पकड़ा।
मसला।
निप्पल खींचा।

“आह्ह… सर… चोदो…
पूजा बनकर चोदो मुझे…
आह्ह… हाँ… और ज़ोर से…
आह्ह… फाड़ दो मेरी चूत…
आह्ह… पति देव… चोदो अपनी पूजा को…”

अवस्थी सर लेट गए।
रेणु ऊपर बैठी।
उसने लंड चूत में लिया।
धीरे से नीचे बैठी।
“आह्ह… सर… पूरा अंदर…
आह्ह… कितना मोटा है…”

वो कूदने लगी।
उसकी गांड अवस्थी सर की जाँघों पर टकरा रही थी – चट-चट-चट।
उसके बूब्स उछल रहे थे – अवस्थी सर के चेहरे पर लगते।
अवस्थी सर ने दोनों बूब्स पकड़कर मसला।
निप्पल्स चुटकी में लेकर खींचा।
मुँह में लिया।
चूसा।

“आह्ह… पूजा… मेरी रंडी…
कूद… और तेज़…
आह्ह… तेरी चूत मेरे लंड को निगल रही है…
आह्ह… हाँ वैसे ही…
आह्ह… तेरी गांड हिल रही है…
कितनी मस्त है…”

रेणु की आहें –
“आह्ह… पति देव… आह्ह… तुम्हारा लंड…
मेरी चूत में… आह्ह… पूरा…
आह्ह… झड़ने वाली हूँ…
आह्ह… और ज़ोर से…
आह्ह… चोदो… चोदो अपनी पूजा को…
आह्ह… हाँ… नीचे से धक्का मारो…”

अवस्थी सर ऊपर।
रेणु की टाँगें उनके कंधों पर।
लंड पूरा गहराई तक।
अवस्थी सर ने तेज़-तेज़ धक्के मारे।
रेणु की चूत से रस की आवाज़ें – चप-चप-चप।

“आह्ह… सर… आह्ह… बहुत गहरा…
आह्ह… मेरी बच्चेदानी तक पहुँच गया…
आह्ह… फाड़ दो…
आह्ह… हाँ… और तेज़…”

अवस्थी सर ने उसकी टाँगें और ऊपर कीं।
लंड और गहरा।
“ले पूजा… ले मेरी रंडी…
तेरी चूत में मेरा लंड…
आह्ह… कितनी गर्म है…
आह्ह… सिकुड़ रही है…”

दोनों करवट लेकर।
अवस्थी सर पीछे से।
एक हाथ से बूब मसलते।
दूसरे से क्लिट रगड़ते।
लंड धीरे-धीरे अंदर-बाहर।

“आह्ह… सर… ये पोजीशन…
आह्ह… बहुत अच्छी लग रही है…
आह्ह… धीरे-धीरे…
आह्ह… हाँ… मेरी क्लिट…
आह्ह… रगड़ो…
आह्ह… झड़ने वाली हूँ फिर…”

अवस्थी सर ने रेणु को उठाया।
दीवार से सटाया।
एक टाँग ऊपर उठाई।
लंड चूत में घुसाया।
ज़ोर-ज़ोर से चोदा।
रेणु की पीठ दीवार से रगड़ खा रही थी।

“आह्ह… सर… खड़े-खड़े…
आह्ह… मेरी टाँग काँप रही है…
आह्ह… हाँ… और ज़ोर से…
आह्ह… दीवार से टकरा रही हूँ…
आह्ह… चोदो… चोदो मुझे…”

अवस्थी सर की साँसें फट रही थीं।
“पिल्स ले रही है ना…?”

“हाँ… ले रही हूँ…
आह्ह… अंदर ही डाल दो…
आह्ह… भर दो मुझे…
आह्ह… अपना वीर्य… मेरी चूत में…”

अवस्थी सर ने स्पीड और बढ़ाई।
रेणु की चूत सिकुड़ गई।
वो झड़ गई।
“आआह्ह्ह… आह्ह… सर… झड़ गई…
आह्ह… तुम्हारा लंड… आह्ह…”

अवस्थी सर भी नहीं रुके।
“ले पूजा… ले मेरी रंडी…
मेरा वीर्य ले…
आह्ह… आह्ह… ले…”

और वो झड़ गए।
रेणु की चूत में।
गर्म, गाढ़ा वीर्य।
बहुत सारा।
रेणु की चूत से बाहर बहने लगा।
उनकी जाँघों पर।

दोनों हाँफ रहे थे।
अवस्थी सर रेणु पर गिर पड़े।
उसके होंठों पर किस।
गहरा।
जीभें मिलीं।
लार का आदान-प्रदान।

रेणु ने हँसकर कहा,
“सर… आज तो आपने पूजा को ही चोद दिया…
मुझे तो बस इस्तेमाल किया…
पर मज़ा आया… बहुत…”

अवस्थी सर हँसे।
“तू तो मेरी पुरानी रंडी है…
पर पूजा… वो नई माल है…
अब वो आएगी…
और तब असली मज़ा आएगा…”

रूम में थप-थप की आवाज़ थम गई थी।
पर अवस्थी सर की भूख…
और बढ़ गई थी।
और रेणु…
रेणु बस हँस रही थी।
क्योंकि उसे पता था –
अवस्थी सर का अगला शिकार कौन है।

और पूजा…
दूर दिल्ली में…
संजय के साथ…
पर उसके सपने में अभी भी अवस्थी सर थे।
और उसकी चूत…
अभी भी गीली थी।
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#71
Images nhi kr pa rha hu genrate koi ho app to btao nhi to aap add kro do mai story me add kr dunga thanks
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#72
(09-12-2025, 06:14 AM)exbiixossip2 Wrote: mast update ja raha hai bro..

bro.. 21 date ko 12 me badal sakte ho kya ? with hot pics

Bhai pics ka nhi kr pa rha hu sorry
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#73
Fabulous ?
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#74
Shandaar update and awesome story and waiting for next update
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#75
next update bro..
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#76
next update bro..

sex seduce karana lekin sex nahin itni jaldi... opari maza do..
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#77
Update please
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#78
Pooja 1 month beet gya tha aur vo apne room par wapas aa gayi thi. Sanjay ne uska bag room me rakha aur bye bol kar chala gaya. Sanjay ne Pooja ki taraf dhyan se dekha tak nahi tha. Usne Renu ke baare me zaroor pucha tha warden se, jab warden ne bataya ki vo abhi nahi aayi, Sanjay udas sa ho kar chala gya wapas ghar ko.

Bite hue pure month me jab vo Sanjay ke sath thi, yahi ho raha tha. Sanjay phone par hi rehta tha. Sex hua donon me par aisa kuch alag ahsas nahi hua. Niras sa kiss jaise bas formalities puri kar rahe ho. Kabhi kabhi Sanjay late aate the. Ek bar to unke kapdo me red dag lage the, Pooja ko laga lipstick hai par Sanjay ne use daant diya ki kya lagta hai mai aisa hu, tumhara dimag kharab ho gya hai college jaake.

Pooja Awasthi ko msg karti thi, call uthate nahi the professor. Kabhi kabhi hi call aata to Pooja apni problems chhupa leti thi, unki baatein sunti. Mai aaungi aapki help karne bolti.

Us kiss ka ehsas abhi b tha use jo Awasthi se bichadte time hua tha. Vo wada ki Pooja Awasthi ka khayal rakhegi.

Pooja pics dekhti to Vikram ka chehra dekh kar pyar aa jata. Ahhh kash maine tumhe ha kaha hota Vikram, kash tum meri shadi se pehle mujhe mil jaate. Vo man mar kar reh jaati.

Use vaha vahi suit ya sari hi pahnti thi. Abhi b gharwalo ke bich me jeans nahi pahanna chahti thi.

Sanjay use bolta kabhi kabhi sexy se Lingerie pahanne ko raat ko Pooja pehan k aayi.
Vo red color ki  Lingerie thi top strap wali, itna small ki Pooja ke boobs 36 inch ke usme dab gaye, nipples saaf ubhre, cleavage deep. Bra nahi pahni thi, langiri ke niche red panty, Pooja ki chabbi hone ki vjh se uski kamar 26 inch ki thi par hips 36 inch ke, panty me uski gand ka ched saaf dikh raha tha, janghen moti par gori. Badan – gora, boobs bhare hue, nippal gulaabi, choot chikni, figure 36-26-36, par chabbi hone se langiri tight
[Image: 4926f9ae-7ce0-4f81-994b-5aa92617e2a4.png?cache=1], Sanjay ne dekha to bola, “Moti ho gayi ho, ye tum par suit nahi kar rhi. kisi kaam ki nahi ho tum chlo leto
Pooja chup chap let gyi. Sanjay ne waise hi niras sa sex kiya Sanjay ka thodi der me nikal gya usne condom faika or so gya.
Is samay Pooja ki aakho me aashu the use Raju ki yaad aayi ki usne kitna pyar kiya tha use. Uski body ko ganda nahi bola paisne me thi phir b chata puri body ko....ohh uska lund mere pati se bada tha....kash phir mil pati.
Vo man me vo yaad krne lagi. raju ki yaad me visuals aane lage use us  din k vo sab soch k Pooja chut me ugli krne lagi.aahhh
Vo din  basti ke us chhote se kamre me, fars par, donon nange. Raju ka badan – mota, pait bahar, par mazboot, pisine se bhiga, daru ki bu aa rahi thi. Usne mujhe lita kar mere boobs chuse – meri aah nikal rahi thi, “Ahhh Raju… dhheere… ahhh… tumhare daant… dard ho raha hai par mazza aa raha hai…” Raju ka lund bada lamba Sanjay se bhi, mota, nasen ubhri hui, maine usse chuma, fir munh me liya, Raju bola tha, “Pooja… ahhh… tumhare honth… kitne naram… chuso… ahhh…” maine  jor se chusa, uski aakhen nam, moan karti hui, “Ummm… Raju… tumhara lund… itna bada… ahhh…” Fir Raju ne meri chut chati – uski jeebh andar tak, meri kamar uthi, “Ahhh… Raju… vaha… jeebh… ahhh… mat rukna… ahhh… main jhad rahi hu… ahhh!!!” maine jhad diya, Raju ne sara ras pi liya. Fir Raju ne mujhko choda , maine khud sath diya tha meri gand hil rahi thi, Raju ke har dhakke me thap-thap ki aawaz, vo chillayi thi  “Ahhh… Raju… fadd do… ahhh… tumhara lund… meri chut… ahhh… aur jor se… ahhh…” Raju ke dhakke tez, uska pait Pooja ki gand se takrata, Pooja ke boobs hilte, mangalsutra uske boobs ke bich latakta. Meri aankhen band thi muh khula, lar tapakti, gaal laal. Ham donon ek sath jhad gaye, Raju ka virya meri chut me bhara, garam, gadha.
Pooja jhad gyi thi. Ugli me ras tha...ohh nhi ye mai kya soch rhi hu maine wada kiya tha mai aisa kaise nhi
Nahi nahi mai aisa nahi soch sakti....nhi chi

Ek bar usne dekha Sanjay ek sexy si ladki ke sath khada tha ghar ke bahar jo car me thi. Has-has k baat kar rahe the donon. Pooja ne pucha to usne bataya ki vo bas office me kaam karti hai sath me.

Ek bar vo ghar b aayi milne short dress me. Bhut hi sexy lag rahi thi. Pooja ko dhyan aaya ki jo lingerie Sanjay laye the vo is ladki par fit aati.

Sanjay ne milaya Pooja ko hi Pooja ye Riya hai jo us din dekha tha tumne.
Riya short red dress pahne thi – strapless, upar se itni tight ki uske boobs ubhre hue, cleavage deep, nipples ka shape saaf dikh raha tha. Dress niche se itni short ki jangh tak aati thi, chalte time uski gori janghen chamak rahi thi, kamar 26 inch ki, hips 34 inch ke goll, dress me chhupte nahi. Uska chehra – fair skin, laal lipstick, kaajal wali aankhen, baal straight khule, figure 34-26-34, jaise koi model. Pooja ko dekh kar usne muskura kar kaha, “Hi bhabhi, kitni pyari ho tum!”
[Image: c863acdd-d294-4676-95b3-5cd7156786bf.png?cache=1]

Baatein hui thodi phir chai banane gyi Pooja.
Room me Sanjay or Riya tha baatin kr rhe the. 

Jab chai leke aayi Pooja to dekha Sanjay or Riya kafi sate hue hain usko aata dekj alag hue. Or Sanjay muskura k bola chai piyo Riya.
 Pooja ne kuch nhi bola. Usne dhayn se dekha baatin krte hue to Riya ka lipstick thoda kharab ho gya hai.


Usne professor se sham ko baat ki rote hue boli mujhe shak hai kahi affair to nhi kar rahe vo. Professor bole are ro mat mai hu sab sambhal lunga bs tum yaha aane tak dekho sambhal k rehna kuch mat karna mai intazar kar raha hu tumhara.

Pooja ne khud ko sambhala. Aaj 1 month bad vo wapas college me aa gyi.
Aaj Pooja khush thi – skirt black pencil skirt, knee tak, par tight, uski gori janghen chamak rahi thi, hips goll ubhre hue, chalne me hil rahi thi. Shirt white, button wali, upar do button khule, cleavage dikhti thi, boobs bhare hue ubhre, nippal shirt me saaf dikh rahe the. Gale me mangalsutra latak raha tha. Figure – gora badan, baal khule laharate, chehra masoom, aankhen kaajal se bhari, honth gulaabi. Chalti to skirt me uski gand ka sway, boobs ka halka bounce. Vo soch rahi thi, “Aaj sir ko surprise dungi… unhe khush karungi.”

Tabhi usne dekha Vikram or Renu ek dusre ko kiss kar rahe hain. Uski aankhain fati reh gayi.

Meri best friend or mera pyar nahi ye nahi ho sakta donon....nahi mera pyar kyu mujhe isse kya lena..par

Pooja ko aankho me aashu aa gaye the apne aap jaise uske sath dhokha hua ho.

Vo khudse boli.

Kaisa dhokha Pooja tune kabhi usse kaha nahi or Renu ki b apni life hai or tu mat bhool ki teri shadi ho gyi pyar karne ka koi hak nahi tujhe.
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#79
next update bro...
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#80
Good going, please keep updating..
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