22-11-2025, 05:13 PM
Waiting for update
|
Adultery एक पत्नी का सफर
|
|
22-11-2025, 05:13 PM
Waiting for update
23-11-2025, 09:56 AM
सुबह 6 बजे।
हॉस्टल की घंटी बजी, लेकिन पूजा पहले से जाग रही थी। उसने रात में सिर्फ़ दो घंटे सोया था। बाकी समय तकिए को गले लगाकर रोती रही। टी-शर्ट अभी भी वही गुलाबी थी, लेकिन अब उसमें राजू की साँसों की गंध थी। उसने आईने के सामने खड़ी होकर खुद को देखा। गले में मंगलसूत्र, लेकिन उसकी चमक आज फीकी लग रही थी। बूब्स पर हल्के लाल निशान – राजू के दाँतों के। निप्पल्स अभी भी थोड़े सूजे हुए। उसने उँगलियों से छुआ – एक सिहरन दौड़ गई। फिर आँसू आ गए। “मैंने क्या कर दिया…” उसने फुसफुसाया। फोन में राजू का मैसेज आया था रात 3 बजे। **राजू:** पूजा… वो पल… कभी भूलूँगा नहीं। तेरे बूब्स… वो स्वाद… वो गर्मी… मैं आज भी काँप रहा हूँ। थैंक यू। तू मेरी जिंदगी में आई और सब बदल दिया। ❤️ पूजा ने मैसेज देखा और फोन दीवार पर दे मारा। फोन टूट गया। उसके मन मे अजीब से विचार थे। वो अपने पति को आज दूसरी बार धोका दे चुकी थी। जयपुर, जून की दोपहर। धूप इतनी तेज़ कि सड़क पर चलते हुए लगता था पैर तलवे जल जाएँगे। पूजा का फोन जो टूट चुका था वो ठीक कराने के लिए वो दुकान देख रही थी। नज़दीकी दुकान थी – “मुन्ना मोबाइल रिपेयरिंग”, गली नंबर 7, मानसरोवर। छोटी सी दुकान, बाहर बोर्ड पर लाल-नीले अक्षरों में लिखा था – “सभी ब्रांड्स ठीक होते हैं, 10 मिनट में।” पूजा साधारण सलवार-सूट में थी – हल्का पीला कॉटन, दुपट्टा कंधे पर। गर्मी में पसीना आ रहा था, सूट हल्का सा चिपक गया था। ब्रालेट पहनी थी, लेकिन पतली कॉटन में हल्का उभार दिख ही रहा था। दुकान में घुसी तो अंदर सिर्फ़ एक लड़का था – **मुन्ना**। उम्र 25-26, दुबला-पतला, आँखें लाल-लाल (शायद रात भर जागने की वजह से), होंठों पर हमेशा एक घटिया सी मुस्कान। टी-शर्ट में “SWAG” लिखा था। “हाँ मैडम, क्या प्रॉब्लम है?” पूजा ने फोन आगे बढ़ाया। “टूट गया है स्क्रीन टूट गयी। देख लो प्लीज़। नई लगा दो" मुन्ना ने फोन लिया। उसकी नज़रें फोन से पहले पूजा पर गईं – गले से नीचे, छाती पर, कमर पर, फिर जाँघों पर। मन ही मन बोला, “वाह क्या माल है यार… शादीशुदा लग रही है, मंगलसूत्र भी है… लेकिन बॉडी तो कमाल की। बूब्स एकदम गोल… कमर पतली… ये तो चखना बनता है।” “मैडम, 10 मिनट रुक जाओ, मैं चेक करता हूँ।” पूजा बाहर कुर्सी पर बैठ गई। दुकान में दो-तीन और कस्टमर थे, धीरे-धीरे चले गए। मुन्ना ने फोन लैपटॉप से connect किया। गैलरी खोली। पहले तो नॉर्मल फोटो… फिर… अंदर पूजा की कुछ सेल्फीज़ – ब्रा में, नाइट गाउन में, एक दो में बूब्स का क्लोज़अप। और चैट्स… राजू के साथ। बूब्स की फोटो… वो रात की। मुन्ना की आँखें चमक उठीं। लंड तुरंत खड़ा हो गया। “अरे वाह… सती-सावित्री बनती है, लेकिन अंदर से तो आग है। ये तो मेरे हाथ लग गई।” 10 मिनट बाद मुन्ना बाहर आया। हाथ में फोन। “मैडम… फोन तो ठीक हो जाएगा। लेकिन… पेमेंट थोड़ा ज़्यादा लगेगा।” पूजा परेशान, “कितना?” मुन्ना ने चारों तरफ़ देखा, फिर पास आकर धीरे से बोला, “हर रोज़… 1 घंटा। मेरे साथ।” पूजा चौंकी। “ये क्या बदतमीज़ी है?!” मुन्ना हँसा। फोन उसकी तरफ़ घुमाया। स्क्रीन पर पूजा की नंगी बूब्स की फोटो। “ओहो… सती सावित्री बन रही हो? शादीशुदा होकर AC वाले हरामी को अपनी बूब्स की फोटो भेज रही हो? और वो चैट्स… वाह मैडम, वाह।” पूजा का चेहरा सफ़ेद पड़ गया। हाथ-पैर ठंडे। “ये… ये तुम… कैसे…?” “अरे चुप… अब मेरी बात मान लो। वरना ये सब… तेरे पति को, तेरे कॉलेज ग्रुप में, फेसबुक पर… सबको भेज दूँगा। वायरल कर दूँगा। समझी?” पूजा की आँखें भर आईं। होंठ काँप रहे थे। “प्लीज़… ऐसा मत करना… मेरी ज़िंदगी बर्बाद हो जाएगी…” मुन्ना पास आया। उसकी साँसें पूजा के चेहरे पर। “तो आज दोपहर 3 बजे आ जाना। दुकान बंद कर दूँगा। 1 घंटा। बस। फिर फोन तुझे वापस। और फोटोज़ डिलीट। वरना…” पूजा रोते हुए फोन लिए बिना बाहर निकल गई। सड़क पर चलते हुए आँसू नहीं रुक रहे थे। लोग देख रहे थे, लेकिन उसे कुछ दिख नहीं रहा था। “संजय… मैंने क्या कर दिया… अब क्या होगा… मैं मर क्यों नहीं जाती…” दोपहर के 3 बजने में अभी ढाई घंटे बाकी थे। और पूजा के पास कोई रास्ता नहीं दिख रहा था। उसकी ज़िंदगी में अंधेरा अभी से छा गया था।
23-11-2025, 03:51 PM
Super update and nice story and dekhate hai munna kya karta hai Pooja ke sath waiting for next update
23-11-2025, 05:27 PM
(This post was last modified: 24-11-2025, 12:04 AM by Tiska jay. Edited 1 time in total. Edited 1 time in total.)
जयपुर, दोपहर के ठीक 2:55 बजे।
धूप ने सड़क को तवा बना रखा था। पूजा चल रही थी, लेकिन उसका ध्यान कहीं नहीं था। आँखें लाल, सूजी हुईं। होंठ काँप रहे थे। हर कदम भारी। जैसे कोई मरघट की ओर ले जाया जा रहा हो। “मैं क्यों जा रही हूँ?” “मैं रुक क्यों नहीं पाती?” “संजय… मुझे माफ़ कर दो…” ये तीन वाक्य उसके दिमाग़ में बार-बार घूम रहे थे। सड़क पर तेज़ रफ्तार से एक ट्रक आ रहा था। पूजा रोड क्रॉस कर रही थी, बिना देखे। ट्रक का हॉर्न बजा। ड्राइवर ने ब्रेक मारा। ठीक उसी पल। एक मज़बूत हाथ ने पूजा का दाहिना हाथ ज़ोर से खींचा। वो सड़क के किनारे गिरते-गिरते बची। “अरे क्या है मैडम! आँखें बंद करके चल रही हो? मारने का इरादा है क्या?” पूजा ने सिर उठाया। सामने खड़ा था – विजय। सिक्युरिटी की खाकी वर्दी। हट्टा-कट्टा बदन। 35 साल। चौड़ी छाती। मूँछें घनी। आँखें तेज़, लेकिन चिंता से भरी। पूजा ने फुसफुसाया, “शायद…” “क्या?” विजय ने भौंहें चढ़ाईं। “कुछ नहीं… मैं चलती हूँ। मुझे… देर हो रही है।” उसकी आँखों से आँसू बह रहे थे। चेहरे पर उदासी और डर साफ़ दिख रहा था। विजय ने देखा – लड़की टूट चुकी है। “रुको। नाम क्या है तुम्हारा?” पूजा ने कुछ नहीं कहा। हाथ छुड़ाया और तेज़ कदमों से चल दी। विजय उसे जाता देखता रहा। उसकी सिक्युरिटीिया नज़र ने सब नोट कर लिया – लड़की का डर। उसकी आँखें। वो दिशा जिसमें जा रही थी। मुन्ना की दुकान – ठीक 3:00 बजे शटर आधा नीचे था। पूजा ने झुककर अंदर घुसी। मुन्ना काउंटर पर बैठा था। उसे देखते ही होंठों पर घिनौनी मुस्कान फैली। “आ गई हमारी रानी…?” उसने रिमोट दबाया। शटर पूरी तरह नीचे आ गया। क्लिक। ताला लगा। अंदर अँधेरा। बस एक ट्यूबलाइट की पीली रोशनी। कूलर की आवाज़। मुन्ना उठा। पास आया। पूजा पीछे हटी। उसकी पीठ दीवार से टकराई। “डर मत… आज सिर्फ़ शुरुआत है। एक घंटा। हर रोज़। और तेरी वो गंदी चैट्स… तेरी नंगी फोटोज़… संजय को नहीं जाएँगी।” पूजा की साँसें तेज़। आँखें बंद। “प्लीज़… जल्दी खत्म कर दो…” शटर पूरी तरह बंद। अंदर सिर्फ़ एक पीली ट्यूबलाइट की रोशनी। कूलर की आवाज़। और पूजा की काँपती साँसें। मुन्ना ने पूजा को दीवार से सटाया। उसकी आँखों में घिनौनी चमक। उसके मन में तूफ़ान चल रहा था। मुन्ना मन में “वाह… आज तो लॉटरी लग गई। ये साड़ी वाली रंडी… कितनी मस्त लग रही है। साड़ी पतली जॉर्जेट की, गुलाबी रंग की… पेट से चार इंच नीचे बंधी हुई। नाभि पूरी खुली… गहरी, गोल… जैसे उँगली डालकर खेलने को बुला रही हो। पल्लू ढीला… हर साँस में बूब्स ऊपर-नीचे हो रहे हैं। ब्लाउज़… अरे बाप रे! गुलाबी रंग का, स्लीवलेस, पीठ पर सिर्फ़ दो पतली डोरियाँ। गला इतना गहरा कि बूब्स का आधा हिस्सा बाहर झाँक रहा है। ब्रा की लाइन भी नहीं… मतलब बिना ब्रा के आई है साली। निप्पल्स साफ़ उभरे हुए… जैसे चिल्ला रहे हों – चूसो मुझे। कमर इतनी पतली कि एक हाथ में आ जाएगी। और नीचे… पेटीकोट… टाइट… गांड का शेप साफ़ दिख रहा है। जाँघें गोरी… चिकनी… इसे तो आज पूरी नंगी करके… हर कोने में घुसाऊँगा। संजय का नाम लेकर रोयेगी… फिर भी मजे लेगी। ये शरीफ़ बनने का नाटक… अब देखता हूँ कितना चलता है।” मुन्ना ने पूजा का पल्लू एक झटके में खींच लिया। फेंक दिया। “साड़ी उतार… जल्दी!” पूजा रोते हुए साड़ी खींचने लगी। पल्लू सरका… फिर पूरा… साड़ी ज़मीन पर गिरी। अब वो सिर्फ़ ब्लाउज़ और पेटीकोट में। ब्लाउज़ गुलाबी नेट का, पारदर्शी। सामने सिर्फ़ दो हुक। पीछे क्रॉस डोरियाँ। बूब्स इतने भरे हुए कि हुक दबाव में थे। निप्पल्स साफ़ दिख रहे थे – गुलाबी, छोटे, सख्त। हर साँस में ब्लाउज़ फटने को था। पेटीकोट सफ़ेद साटन का, कमर पर पतली नाड़ी। टखनों तक। लेकिन इतना टाइट कि गांड का हर कर्व साफ़। पेटीकोट का निचला हिस्सा हल्का सा ऊपर चढ़ा हुआ था… जाँघें चमक रही थीं। मुन्ना की आँखें लाल। “वाह… क्या माल है साली। ब्लाउज़ भी उतार… पूरी नंगी हो जा।” पूजा ने हाथ जोड़े। “प्लीज़… बस इतना ही… मैं शरीफ़ घर की हूँ… मेरी इज़्ज़त…” “इज़्ज़त? जो राजू को नंगी फोटो भेज रही थी?” उसने ब्लाउज़ के हुक खोले। एक। दो। ब्लाउज़ खुल गया। बूब्स बाहर। गोल, भरे हुए, बिल्कुल परफेक्ट। निप्पल्स तने हुए। मुन्ना ने दोनों हाथों से पकड़ा। मसला। ज़ोर से। “आह्ह्ह्ह… प्लीज़…” पूजा की आह निकली। “क्या मस्त चूचे हैं रे… इतने गोरे… इतने नरम… संजय को तो मज़े आते होंगे…” फिर मुँह लगाया। चूसा। काटा। दाँतों से निप्पल खींचा। “आह्ह्ह… मत काटो… दर्द हो रहा है…” “दर्द? अभी तो शुरूआत है कुतिया…” उसका हाथ पेटीकोट के अंदर। पेटीकोट को उपर उठाया पिंक पैंटी दिखी लेस वाली। चूत का शेप साफ़। पैंटी गीली हो चुकी थी। मुन्ना ने पैंटी में हाथ डाला। उँगली चूत पर। “वाह… पूरी गीली। बोलती है शरीफ़ है… चूत तो कह रही है चोद मुझे…” पूजा रो रही थी। लेकिन बदन काँप रहा था। “नहीं… प्लीज़… बाहर निकालो…” मुन्ना सोच रहा था “ये देख… रो रही है… लेकिन चूत से पानी टपक रहा है। अंदर से रंडी है साली। आज इसे पूरा रगड़ूँगा। पहले मुँह में दूँगा। फिर चूत में। फिर गांड में। रोयेगी… फिर भी माँगेगी। ये शरीफ़ औरतें… जब खुलती हैं… सबसे गंदी होती हैं।” वो पूजा को ज़मीन पर लिटाने ही वाला था… तभी शटर ज़ोर से खुला। विजय अंदर। पिस्तौल तानी हुई। “हाथ ऊपर साले!” मुन्ना का चेहरा सफ़ेद। पूजा दौड़कर विजय के पीछे छिप गई। रोते हुए बोली, “मुझे बचा लो सर… इसने मुझे ब्लैकमेल किया है… मेरे साथ ज़बरदस्ती कर रहा था…” मुन्ना गिरते-गिरते बोला, “झूठ बोल रही है ये रंडी! ये पैसे के बदले चुदने आई थी साहब… मेरा विश्वास करो!” विजय ने एक ज़ोरदार थप्पड़ मुन्ना के गाल पर मारा। मुन्ना ज़मीन पर गिर पड़ा। विजय ने पूजा की ओर पलटा। पूजा अपने बूब्स हाथ से छिपाए, पेटीकोट में खड़ी थी। खुले बाल, आँसुओं से भीगा चेहरा। उसकी गोरी त्वचा, नंगे कंधे, काँपता बदन… विजय का पैंट में तुरंत तंबू बन गया। उसने नज़रें फेरीं, लेकिन पूजा ने देख लिया। वो चुप रही। मुन्ना ज़मीन पर लेटे-लेटे बोला, “साहब… मुझे जेल भेज के क्या मिलेगा? इसे अभी साथ में चोदते हैं। क्यों साहब?” पूजा डर के मारे विजय की ओर देखने लगी। विजय ने मुन्ना को एक और लात मारी। “चुप साले!” फिर पूजा की ओर मुड़ा। उसके कपड़े उठाए। धीरे से दिए। “पहन लो। डरो मत। अब कोई कुछ नहीं करेगा।” उसने अपना नंबर दिया। “कुछ भी ज़रूरत पड़े… मुझे फ़ोन करना। सिक्युरिटी स्टेशन में भी आ सकती हो।” फिर मुन्ना का लैपटॉप खोला। सैकड़ों लड़कियों के वीडियो, फोटोज़। सब जब्त। मुन्ना को हथकड़ी लगाई। जाते-जाते मुन्ना चीखा, “कुतिया… मैं आकर बदला लूँगा। तेरी गांड, तेरी चूत… सब फाड़ूँगा साली रंडी!” विजय ने उसे घसीटा। “चल साले!” शटर फिर बंद हुआ। इस बार बाहर से। पूजा ने कपड़े पहने। साड़ी फिर से लपेटी। हाथ काँप रहे थे। फिर भी उसने विजय को धन्यवाद कहा। वो चुपचाप निकल गई। हॉस्टल पहुँची। दरवाज़ा बंद किया। फोन हाथ में था – अब पूरी तरह ठीक। लेकिन उसकी ज़िंदगी… अब पहले जैसी कभी नहीं रहेगी। वो बेड पर बैठी। विजय का नंबर देखा। और पहली बार… राहत की साँस ली।
23-11-2025, 08:18 PM
Shandaar update and nice story
24-11-2025, 12:09 AM
Agla update 2 din k bad tab tak suggest kro ki pooja kiske sath sex kre?
Vikram? Raju? Vijay? Professor? Munna? (Badla lene aaye?) Ya Renu? Ya renu ka bf? Ya koi or?
24-11-2025, 01:29 AM
Raju ke sath Pooja ka love making sex scenes dikho
24-11-2025, 01:30 AM
Waiting for update
24-11-2025, 11:56 PM
(This post was last modified: 25-11-2025, 12:06 AM by Tiska jay. Edited 1 time in total. Edited 1 time in total.)
हॉस्टल, शाम 6:30 बजे
पूजा कमरे में घुसी। दरवाज़ा बंद किया। चटकनी लगाई। फिर बेड पर गिर पड़ी। साड़ी अभी भी वही गुलाबी थी, पर अब उसमें मुन्ना की गंदी उँगलियों के निशान थे। ब्लाउज़ का एक हुक टूटा हुआ था। पेटीकोट की नाड़ी ढीली। होंठ सूजे हुए। आँखें लाल। वो तकिए को गले लगाकर रोने लगी। “संजय… मुझे माफ़ कर दो… मैं कितनी गंदी हो गई…” हॉस्टल आते वक्त राजू मिला था। वो दूर से देखकर मुस्कुराया था। “अरे पूजा… आज तो बहुत सेक्सी लग रही हो… खा ही जाऊँगा तुम्हें… मौका दो तो…” उस वक्त पूजा के अंदर जो आग भरी थी – मुन्ना की, अपनी बेबसी की – वो राजू पर फूट पड़ी। “अपनी औकात में रहो थोड़ा! क्या मैंने मीठी बातें कर दीं तो सिर चढ़ गए? हाथ दिया तो गला पकड़ने लगे! निकल जाओ यहाँ से… और दोबारा शक्ल मत दिखाना!” राजू का चेहरा लटक गया। “पूजा… मैं तो मज़ाक…” पर पूजा ने दरवाज़ा बंद कर दिया था। अब कमरे में अकेली… पछतावा शुरू हो गया। “मैंने क्या कर दिया… राजू ने तो कभी ज़बरदस्ती नहीं की थी… वो तो बस… दर्द बाँट रहे थे हम… मैंने अपना गुस्सा उस पर निकाल दिया…” संजय को कॉल किया। पहली बार – नहीं उठा। दूसरी बार – काट दिया। तीसरी बार – मैसेज आया: संजय:- मीटिंग में हूँ जान। रात को बात करते हैं। लव यू। ❤️ पूजा ने फोन साइड फेंका। “कोई नहीं है मेरा…” फिर राजू का ख़याल आया। “गलती मेरी थी… उसे माफ़ी माँग लूँ…” राजू को कॉल किया। पहली बार – रिंग गई, फिर कट। दूसरी बार – स्विच ऑफ। पूजा फिर रो पड़ी। “मैंने सब खो दिया… संजय दूर… राजू नाराज़… मुन्ना जैसा हरामी… मैं अकेली… पूरी तरह अकेली…” विक्रम का नंबर स्क्रीन पर आया-गया। उसने सोचा – “अगर इसे कॉल कर दूँ… मैं खुद को रोक नहीं पाऊँगी… फिर वही गलती न कर बैठू खुद को रोक नहीं पाऊँगी उसके साथ। " तकिया गले लगाया। मुँह में दबाकर फूट-फूट कर रोने लगी। “मैं मर क्यों नहीं जाती…” दरवाज़े पर खटखट। “पूजा… दरवाज़ा खोल ना यार…” पूजा ने आँसू पोंछे। दरवाज़ा खोला। रेणु अंदर आई। पूजा को देखते ही चौंकी। “अरे… ये क्या हाल बना रखा है? आँखें लाल… साड़ी फटी हुई… क्या हुआ रे?” पूजा ने कुछ नहीं कहा। रेणु को गले लगा लिया। और फिर… सब कुछ उड़ेल दिया। मुन्ना वाला ब्लैकमेल… सिक्युरिटी वाला सीन… सब। ### कमरा 204, रात 11:45 बजे लाइट बंद थी। सिर्फ़ रेणु के फोन की हल्की नीली रोशनी। दोनों एक ही बेड पर लेटी थीं। रेणु ने पूजा को पीठ से लिपटाया हुआ था। पूजा का बदन अभी भी काँप रहा था। रेणु ने बहुत धीरे से पूछा, “पूजा… सब बता दे। अंदर ही अंदर घुट रही है तू। मैं हूँ… मैं सुनूँगी। कोई जजमेंट नहीं करूँगी। बस… बता दे।” पूजा चुप रही। फिर उसकी सिसकी निकली। और फिर… वो टूटकर बोल पड़ी। हर शब्द आँसुओं में डूबा हुआ। “रेणु… मैंने आज… अपने आप को पूरी तरह खो दिया था… मुन्ना… उसने मुझे… जैसे कोई चीज़ नहीं… जैसे कोई खिलौना…” वो रुक गई। साँसें तेज़। फिर बोली, "उसने मुझे ब्लैकमेल किया मैं फोन ठीक कराने गयी थी तो उसने मेरी pics रख ली अपने पास। उसने मुझे शाम को आने को बोला जब मैं गयी तो उसने पहले मेरा पल्लू खिचा फिर साड़ी का पल्लू नीचे गिराया… फिर साड़ी पूरी उतार दी… मैं रो रही थी… हाथ जोड़ रही थी… पर वो हँस रहा था… उसकी आँखों में… कोई रहम नहीं था… सिर्फ़ हवस… और बदला…” रेणु ने पूजा को और कसकर पकड़ लिया। “फिर ब्लाउज़… उसने हुक खोले… धीरे-धीरे… जैसे मज़ा ले रहा हो… मेरे बूब्स… बाहर आ गए… मैंने हाथों से छिपाने की कोशिश की… पर उसने मेरे हाथ पीछे कर दिए… और… और मुँह लगा दिया… चूसा… काटा… बहुत ज़ोर से… दाँतों से निप्पल खींचे… दर्द हो रहा था… पर… पर बदन में एक अजीब सी सिहरन भी थी… मैं खुद से नफ़रत करने लगी… क्योंकि… मेरी चूत… गीली हो गई थी… मैं रो रही थी… पर बदन… मेरी मर्ज़ी के खिलाफ़… उसके स्पर्श पर… उसके मुँह पर… सिहर रहा था…” पूजा की आवाज़ फट गई। वो रेणु के सीने में मुँह छिपाकर रोने लगी। “फिर उसने पेटीकोट को उपर उठाया उसने पैंटी में हाथ डाला… उँगली… मेरी चूत में… और बोला… ‘देख… कितनी गीली हो गई है… शरीफ़ बनती है… पर अंदर से रंडी है…’ मैंने मना किया… रोई… पर वो हँसता रहा… और उँगली अंदर-बाहर करने लगा… मेरे मुँह से… आह… निकल रही थी… मैं खुद को कोस रही थी… कि मेरा बदन… उसके स्पर्श पर… क्यों जवाब दे रहा है…” रेणु के भी आँसू बह रहे थे। पर वो चुप थी। बस पूजा को सहलाती रही। “मैंने सोचा था… आज वो मुझे… पूरी तरह तोड़ देगा… मुझे ज़मीन पर लिटाने ही वाला था… तभी… शटर ज़ोर से खुला…” पूजा की आवाज़ में पहली बार राहत आई। “विजय सर… वो अंदर आए… उनकी खाकी वर्दी… उनकी तेज़ आवाज़… ‘हाथ ऊपर साले!’ मुन्ना डर गया… उसकी पकड़ ढीली पड़ गई… मैं दौड़कर उनके पीछे छिप गई… और रोते हुए बोली… ‘मुझे बचा लो सर…’ मैं नंगी थी उपर से बूब्स हाथ से छिपाए… पर मुझे… पहली बार लगा… मैं सुरक्षित हूँ…” “विजय सर ने मुन्ना को दो थप्पड़ मारे… उसे ज़मीन पर गिरा दिया… फिर मेरे कपड़े उठाए… धीरे से मेरी ओर बढ़ाए… बोले… ‘पहन लो… डरो मत… अब कोई कुछ नहीं करेगा…’ उनकी आँखों में… गुस्सा था… पर मेरे लिए… सहानुभूति भी…” “मुन्ना चीख रहा था… ‘ये रंडी पैसे के बदले आई थी…’ पर विजय सर ने उसे और मारा… फिर मेरा नंबर लिया… बोले… ‘कुछ भी हो… मुझे फ़ोन करना…’ और मुन्ना को घसीटकर ले गए…” पूजा ने रेणु का हाथ पकड़ा। उसकी उँगलियाँ ठंडी थीं। “रेणु… मैं आज मरते-मरते बची… पर मुझे… खुद से घिन्न आ रही है… मैंने संजय को धोखा दिया… मुन्ना ने मेरे साथ जो किया… उसकी वजह से भी… मैं खुद को दोषी मान रही हूँ… मैं… मैं अब जीने लायक नहीं रही…” रेणु ने पूजा का चेहरा अपने हाथों में लिया। आँखों में आँखें डालीं। और बहुत प्यार से बोली, “सुन मेरी बात… तूने कुछ गलत नहीं किया। तू इंसान है। अकेली थी। कमज़ोर पल में बह गई। पर आज… तूने हिम्मत दिखाई। तू चीखी नहीं… पर तू लड़ी भी नहीं… क्योंकि तू टूट चुकी थी। पर अब… तू फिर से खड़ी हो रही है। और मैं तेरे साथ हूँ। हम कल सुबह विजय सर से मिलेंगे। पूरा केस लिखवाएँगे। मुन्ना को सज़ा दिलवाएँगे। और संजय को… जब तू तैयार होगी… तू खुद बता देगी। वो तुझे छोड़ेगा नहीं। क्योंकि वो तुझे प्यार करता है। और प्यार… गलतियों को माफ़ कर देता है।” पूजा ने रेणु को फिर गले लगा लिया। और पहली बार… रात भर रोते-रोते… क्या सच। हाँ सच। रेणु ने उसे देखा। उसके माथे पर किस किया। और फुसफुसाई, “मेरी मजबूत लड़की… अब कोई तुझे तोड़ नहीं पाएगा। मैं हूँ ना…” बाहर चाँद निकला था। और कमरे में… दो सहेलियाँ… एक-दूसरे की ताकत बनी हुई थीं। सब कुछ शांत था। सिर्फ़ दो दिलों की धड़कनें और एक-दूसरे की साँसें सुनाई दे रही थीं। रेणु पूजा के बालों में उँगलियाँ फेरे जा रही थी। पूजा ने आँखें बंद कर रखी थीं, पर नींद अभी पूरी नहीं आई थी। उसका बदन अब भी हल्का-हल्का काँप रहा था। फिर अचानक पूजा ने आँखें खोलीं। अँधेरे में भी रेणु की आँखें चमक रही थीं। दोनों चुप। बस एक-दूसरे को देखती रहीं। पूजा ने बहुत धीरे से रेणु का हाथ अपने गाल पर रखा। फिर उसकी उँगलियाँ रेणु के होंठों तक पहुँचीं। हल्के से छुआ। जैसे पूछ रही हो… “क्या मैं… अब भी प्यार के लायक हूँ…?” रेणु ने उसका हाथ पकड़ा। अपने होंठों पर रखा। और फिर… धीरे से झुकी। उनके होंठ मिले। पहले सिर्फ़ छुअन… जैसे दो पंखुड़ियाँ एक-दूसरे को सहलाती हों। फिर थोड़ा दबाव। नरम। गर्म। पूजा की साँस रुक गई। रेणु ने उसका निचला होंठ हल्के से चूसा। धीरे-धीरे। बिना जल्दबाज़ी। बिना हवस। सिर्फ़ प्यार। सिर्फ़ सुकून। पूजा ने भी जवाब दिया। उसके होंठ काँप रहे थे, पर उसने रेणु के होंठों को अपने में समेट लिया। दोनों की आँखें बंद। होंठ एक-दूसरे पर पिघलते जा रहे थे। न कोई जीभ। न कोई दाँत। बस एक लंबा, गहरा, नरम किस। जैसे सारी दुनिया को भूलकर… बस एक-दूसरे को महसूस कर रही हों। किस टूटा। दोनों की साँसें तेज़। माथे से माथा टिका हुआ। पूजा ने फिर होंठ रेणु के होंठों पर रख दिए। इस बार थोड़ा और गहरा। उसके हाथ रेणु की पीठ पर। रेणु के हाथ पूजा के गालों पर। फिर दोनों अलग हुईं। एक-दूसरे को देखकर हल्के से मुस्कुराईं। आँसुओं भरी मुस्कान। कमरा 204, रात के ठीक 1:47 बजे अब एक भी शब्द नहीं बोला जा रहा था। सिर्फ़ साँसें थीं… और वो साँसें भी जैसे एक-दूसरे से पूछ रही हों, “तू ठीक है ना…?” रेणु ने पूजा को अपनी बाहों में इतनी कसकर लिया था कि दोनों के दिलों की धड़कन एक ही लय में बज रही थी। पूजा का माथा रेणु की गर्दन पर था। उसकी गर्म साँसें रेणु के गले पर लग रही थीं। हर साँस के साथ पूजा का पूरा बदन हल्का सा काँप जाता। रेणु ने बहुत धीरे से पूजा के माथे को चूमा। फिर आँखों के कोनों को। वहाँ अभी भी आँसुओं की नमी थी। रेणु ने उन आँसुओं को अपने होंठों से सोख लिया। और फुसफुसाई, “तेरे ये आँसू… अब मेरे हैं। कोई और नहीं पीएगा… मैं पी लूँगी सारे… जब तक एक भी बूंद नहीं बचेगी…” पूजा ने आँखें बंद रखीं। उसके होंठ काँप रहे थे। वो धीरे से बोली, “रेणु… मैं आज… सच में टूट गई थी… जैसे कोई काँच का खिलौना… जो ज़मीन पर गिरकर लाख टुकड़े हो गया हो… मुझे लगा… मैं कभी जुड़ नहीं पाऊँगी…” रेणु ने पूजा के होंठों पर उँगली रखी। “शशश…” फिर अपना माथा पूजा के माथे से टिका दिया। दोनों की नाकें आपस में छू रही थीं। और फिर… रेणु ने बहुत, बहुत धीरे से… पूजा के ऊपरी होंठ को अपने होंठों में लिया। जैसे कोई माँ अपने बच्चे के होंठों को चूमती है, जब बच्चा बहुत रो चुका हो। बस एक हल्का सा दबाव… एक लंबी, गहरी साँस… फिर निचले होंठ को… धीरे से चूसा। पूजा की आँखों से फिर आँसू गिरे। पर इस बार… वो दर्द के नहीं थे ही नहीं। वो सुकून के थे। वो किसी ने उसे बिना शर्त स्वीकार कर लिया था, ये एहसास था। पूजा ने भी रेणु के होंठों को अपने में समेट लिया। दोनों की साँसें एक हो गईं। होंठ एक-दूसरे पर पिघल रहे थे। न कोई जल्दी थी… न कोई हवस… बस एक बहुत गहरा, बहुत नरम, बहुत लंबा किस। जैसे दो टूटी हुई आत्माएँ… एक-दूसरे के टुकड़ों को जोड़ रही हों। किस के बीच में ही पूजा ने फुसफुसाया, “रेणु… मैं… मैं अब भी प्यार के लायक हूँ ना…?” रेणु ने होंठ नहीं हटाए। बस उसी हालत में बोली, “तू मेरे लिए सबसे पवित्र चीज़ है इस दुनिया में… तेरे सारे दाग… मैं अपने होंठों से मिटा दूँगी… एक-एक करके…” फिर दोनों ने एक-दूसरे को और कसकर जकड़ लिया। होंठ फिर मिले। इस बार थोड़ा ज़्यादा देर तक। पूजा के हाथ रेणु की पीठ पर थे। रेणु के हाथ पूजा के गालों और बालों में। जब किस टूटा… दोनों की आँखें खुलीं। दोनों रो रहे थे। पर मुस्कुरा भी रहे थे। पूजा ने रेणु की हथेली पर अपना होंठ रखा। और बोली, “तू मेरी साँस है… अगर तू न होती… तो मैं आज सच में मर जाती…” रेणु ने पूजा को फिर सीने से लगा लिया। उसके कानों में फुसफुसाया, “सो जा मेरी जान… अब मैं तेरे हर सपने में रहूँगी… हर साँस में… हर धड़कन में… तू अब कभी अकेली नहीं सोएगी…” पूजा ने आँखें बंद कीं। उसके चेहरे पर पहली बार… एक शांत मुस्कान थी। जैसे कोई बच्चा… अपनी माँ की गोद में सो रहा हो। और रेणु… पूजा के बालों में उँगलियाँ फेरती रही… पूरी रात। बिना रुके। बाहर चाँद ढल चुका था। पर कमरे के अंदर… दो दिलों ने एक नया सूरज उगा दिया था। जो कभी नहीं डूबेगा। रेणु ने पूजा को फिर सीने से लगा लिया। पूजा ने अपना सिर रेणु की गर्दन पर रख दिया। और नींद सच में आ गई। ![]() दो सहेलियाँ… दो आत्माएँ… एक-दूसरे में समा गई थीं। बिना कुछ कहे। बिना कुछ माँगे। बस एक किस ने… सारी दर्द भरी रात को… प्यार में बदल दिया।
25-11-2025, 04:42 PM
Super hot update and nice story
25-11-2025, 04:43 PM
Waiting for update
25-11-2025, 10:23 PM
सुबह 8:45 बजे, कमरा 204
पूजा की आँख खुली तो सबसे पहले रात का वो पल याद आया। रेणु का माथे पर लंबा सा किस… उसकी गर्म साँसें… वो फुसफुसाहट। पूजा का चेहरा एकदम लाल हो गया। उसने तकिया मुँह में दबाकर शर्मा लिया। रेणु तैयार हो रही थी, हँसते हुए बोली, “अरे क्या हुआ डार्लिंग? किस ही तो किया था… कौन सा तुझे चोद दिया मैंने रात को?” “शटअप रेणु!” पूजा ने तकिया फेंका और दोनों हँस पड़ीं। फिर रेणु ने उसका हाथ पकड़ा, बहुत नरमी से, “यार देख… तूने बहुत बहादुरी का काम किया है। मुन्ना जैसा हरामी जेल में है। तू चिंता मत कर, सब ठीक हो जाएगा। चल कॉलेज।” पूजा ने सिर हिलाया, आँखें नीची करके, “नहीं यार… आज मेरा मन नहीं है। मैं यहीं रुकती हूँ।” “तेरी मर्ज़ी। आराम कर तू।” रेणु ने जाते-जाते उसका माथा चूमा और चली गई। पूजा अकेली रह गई। संजय को फ़ोन किया। बात हुई, पर मुन्ना के बारे में कुछ नहीं बताया। फ़ोन रखा तो कॉल हिस्ट्री में राजू का नंबर दिखा। कल की उसकी कड़वी बातें कानों में गूँज गईं। पूजा का दिल बैठ गया। वो वॉर्डन आंटी के पास गई, “राजू का कुछ पता है…?” “पास की बस्ती में रहता है बेटी। चौक से राइट… किसी से भी पूछ लेना, राजू इलेक्ट्रीशियन।” पूजा निकल पड़ी।
25-11-2025, 10:31 PM
बस्ती का वो छोटा सा कमरा – दोपहर 12:30 से शाम 5:45 तक
(लगभग 5 घंटे, पर दोनों को लगा जैसे पूरी ज़िंदगी एक पल में सिमट आई हो) पूजा दरवाज़े पर खड़ी थी। नीला सलवार-सूट बदन से चिपक गया था। पसीने की बूँदें गर्दन से होती हुईं सूट के गले में समाती जा रही थीं। सीने पर गीले धब्बे बन गए थे। साँसें तेज़ थीं – डर, अपराधबोध और एक अजीब सी बेचैनी की मिली-जुली। *पूजा का मन: “अगर वो सच में कुछ कर ले तो…? मैंने ही तो उसे नाली का कीड़ा कहा था… मैंने ही तो उसका दिल तोड़ा था… अगर आज यहाँ कुछ गलत हुआ तो… सारी ज़िंदगी खुद को माफ़ नहीं कर पाऊँगी…” वो खटखटाती है। कोई जवाब नहीं। फिर ज़ोर से। दरवाज़ा अंदर से खुला हुआ था – हल्का सा धक्का, और खुल गया। अंदर घना अँधेरा। दारू की तेज़ बू। फर्श पर राजू पड़ा था। हाथ-पाँव फैले हुए। एक खाली क्वार्टर पास में लुढ़का हुआ। उसका चेहरा पीला, होंठ नीले। पूजा का दिल मुँह को आ गया। “राजू…!!!” वो दौड़कर उसके पास बैठ गई। हाथ काँप रहे थे। उसने उसका सीना टटोला – साँस चल रही थी, धीमी, पर चल रही थी। फिर लोटे से पानी लिया और उसके मुँह पर छिड़का। राजू ने धीरे-धीरे आँखें खोलीं। धुंधली नज़र। पूजा को देखकर पहले लगा सपना है। फिर कड़वाहट भरी हँसी। “क्यों… सपने में भी आ गई मेरी बेज्ज़ती करने…? मैं तो तुम्हें अपना हमदर्द समझता था… और तुमने मुझे बस एक नाली का कीड़ा समझा…” उसकी आवाज़ फटी हुई थी। हर शब्द में दारू नहीं, दर्द बोल रहा था। **राजू का मन:** “ये वही पूजा है… जिसकी एक मुस्कुराहट के लिए मैं रात-रात भर जागता था… जिसके लिए मैं चाय बनाता था, बिना कुछ लिए… और उसने एक पल में मुझे कीड़ा बोल दिया… मैं मर क्यों नहीं गया…?” पूजा की आँखें भर आईं। वो उसके गाल पर हाथ रखते हुए बोली, “नहीं राजू… ऐसा कुछ नहीं है… मैं… मैं सच में यहाँ हूँ…” राजू ने हाथ बढ़ाया। उसके गाल पर उँगलियाँ फेरीं। पसीने से गीले। फिर चौंका। “हैं…? तुम सच में यहाँ हो…?” “हाँ… देखो… क्या हालत कर रखी है तुमने अपनी… उठो ना… प्लीज़…” उसकी आवाज़ में ममता थी, अपराधबोध था, और बहुत सारा डर। राजू ने खुद को दीवार से टिकाया। सिर हिलाया। “अरे चले जाओ यहाँ से… तुम अमीर लोग क्या जानो हम गरीबों का दर्द… बस एक मज़ाक किया था… और तुमने मुझे क्या-क्या बोल दिया… हाँ… मेरी औकात यही है… ऐसे ही पड़े रहने की…” उसकी आँखें नम थीं। वो रो नहीं रहा था – मर्द था ना। पर उसकी आवाज़ में वो दर्द था जो सालों से दबा हुआ था। पूजा ने उसके गालों पर हाथ रखा। पसीना, दारू की बू, पर उसे कुछ नहीं लग रहा था। “नहीं राजू… ऐसा मत कहो… मेरे साथ क्या बीती थी, तुम्हें नहीं पता…” “तुम निकल जाओ मेरे घर से… शक्ल भी नहीं देखनी थी ना तुमने मेरी…? जाओ मैडम जी… जाओ…” वो कोने में सरका और दीवार से सटकर लेट गया। जैसे दुनिया से मुँह छिपा लिया हो। पूजा ने एक पल सोचा। फिर उसके बगल में फर्श पर ही लेट गई। दोनों कंधे से कंधा मिलाकर। सूट का दुपट्टा नीचे सरक गया। पसीने से भीगा हुआ सीना ऊपर-नीचे हो रहा था। “देखो… तुम्हें नहीं मिलना मुझसे, मत मिलो… बस एक बार सुन लो…” उसकी आवाज़ काँप रही थी। आँसू गालों पर लुढ़क रहे थे। “कल मैं अपना फ़ोन ठीक कराने मुन्ना की दुकान पर गई थी… उसने मेरे फ़ोन से हमारी चैट्स… हमारी वो फोटोज़… सब निकाल लिया… और मुझे ब्लैकमेल किया…” राजू ने एकदम से उसकी ओर देखा। आँखों में डर, गुस्सा, और रहम। “फिर… फिर उसने मेरे बदन को छुआ… मेरी इज़्ज़त के साथ खेला… मुझे दुकान पर ही आधा नंगा कर दिया… मैं रो रही थी… गिड़गिड़ा रही थी… पर वो हँस रहा था…” पूजा की आवाज़ फट गई। वो सिसकियाँ लेने लगी। “वो तो सिक्युरिटी समय पर आ गई… वरना आज मैं यहाँ नहीं होती… मैं खुद को मार देती…” राजू ने अचानक चीखा, “नहीं…!!!” और पूजा को ज़ोर से गले लगा लिया। जैसे कोई टूटा हुआ बच्चा अपनी माँ को पकड़ ले। दोनों की आँखों से आँसू बह रहे थे। राजू की छाती पर पूजा का सिर। उसकी सिसकियाँ राजू के कंधे भिगो रही थीं। “मुझे माफ़ कर दो पूजा… मुझे नहीं पता था तुम ये सब सह रही हो… मैं उस मुन्ना को जान से मार डालूँगा…” पूजा ने उसके गालों को पोंछा। उसके आँसुओं से भीगे हाथों से। “वो जेल में है… सिक्युरिटी सज़ा देगी… और मेरी भी गलती है… मुझे तुमसे गलत नहीं बोलना चाहिए था… आई एम सॉरी राजू…” “नहीं… आप क्यों सॉरी बोल रही हो मैडम…” “फिर मैडम…?” पूजा ने मुस्कुराने की कोशिश की। “मैं जा रही हूँ…” उठने लगी तो राजू ने उसका हाथ पकड़ा और ज़ोर से खींचा। पूजा उसके ऊपर गिर पड़ी। दोनों की साँसें एक-दूसरे पर। पूजा का पसीने से भीगा सीना राजू की छाती से सटा हुआ। “सॉरी पूजा… क्या तुमने मुझे माफ़ किया…?” “मैंने तुम्हें कल के लिए किया… पर कहा तुमने मुझे किया माफ…?” “हाँ पूजा… मैंने तुम्हें माफ़ कर दिया…” “पर कल के लिए क्या मतलब…?” “मतलब ये… कि आज तुम ऐसे लेटे हो, दारू पीके… अगर कुछ हो जाता तो…?” “तो क्या… मर ही तो जाता…” पूजा ने तुरंत अपना हाथ उसके मुँह पर रख दिया। “मरेंगे तुम्हारे दुश्मन…!” “अच्छा जी…?” “हाँ जी…” दोनों की साँसें तेज़। होंठ करीब। और फिर… एक गहरा, लंबा, बहुत लंबा किस। जैसे सालों से बिछड़े हों। राजू के मुँह से दारू की महक, बदन से पसीना और शराब की बू… पर पूजा को कुछ नहीं लग रहा था। उसके हाथ राजू की पीठ पर फिर रहे थे। राजू के हाथ पूजा की कमर पर, पसीने से भीगे सूट को चिपकाते हुए। *पूजा सोचती है “ये गलत है… मैं शादीशुदा हूँ… पर इस पल में… मुझे कोई नहीं बचा रहा… मैं खुद को बचा रही हूँ… इसके दर्द में डूबकर… अपना दर्द भूल रही हूँ…” **राजू मन मे: “ये सपना नहीं है… ये वही पूजा है… जो मेरे लिए रो रही है… जो मेरे गंदे बदन को गले लगा रही है… मैं इसके लायक नहीं… पर इस पल में… मैं इसे कभी नहीं छोड़ूँगा…” किस ख़त्म हुआ। दोनों की आँखें बंद। माथे से माथा टिका हुआ। राजू ने फुसफुसाया, “तुम मेरे लिए इतना कुछ… और मैंने तुम्हें जाने को बोला…?” पूजा ने उसका मुँह बंद कर दिया। “बस… अब एक शब्द नहीं… बस मुझे गले लगा लो… और मुझे माफ़ कर दो…” राजू ने उसे और ज़ोर से गले लगाया। जैसे पूरी दुनिया से बचा रहा हो। कमरे में सिर्फ़ उनकी साँसें थीं। और बाहर की गर्मी में भी… दो दिल बहुत ठंडे पड़ चुके थे। एक-दूसरे की गर्मी में पिघलकर। पूरी तरह।
26-11-2025, 05:16 PM
Excellent writing and great story and waiting for next update
26-11-2025, 11:28 PM
किस अभी खत्म नहीं हुआ था।
राजू के होंठ पूजा के होंठों पर थे। उसके मुँह से तेज़ दारू की बू आ रही थी, बदन से पसीना और शराब की मिली-जुली गंध। पर पूजा को सब अच्छा लग रहा था। उसने आँखें बंद कर ली थीं। **पूजा का मन** “इस पल मैं सिर्फ़ राजू की हूँ… संजय की बीवी नहीं… संजय की पत्नी नहीं… सिर्फ़ एक औरत हूँ… जो टूट चुकी है… और जिसे कोई अपना समझ रहा है… कोई मुझसे प्यार कर रहा है… बिना शर्त के… बिना कुछ माँगे…” राजू ने उसकी कमर पर हाथ कस दिया। पूजा का पसीने से भीगा सूट उसके बदन से चिपक गया था। उसने धीरे से पूजा को पीठ के बल लिटाया। फर्श ठंडा था, पर दोनों को गर्मी महसूस हो रही थी। राजू ने अपना शर्ट का बटन खोला। एक-एक करके। उसकी छाती पर पुराने पसीने के दाग थे। बाल घने, सीना चौड़ा। पूजा ने हाथ बढ़ाया और उसकी छाती पर हाथ फेरा। “राजू… तुम्हारा बदन… इतना गर्म है…” राजू ने उसकी आँखों में देखा। “पूजा… तुम चाहो तो रुक जाएँ… मैं कुछ नहीं माँगूँगा…” पूजा ने अपना हाथ उसके गाल पर रखा। “नहीं राजू… मैं रुकना नहीं चाहती… मुझे तुम चाहिए… सिर्फ़ तुम…” राजू ने अपना शर्ट उतार फेंका। फिर पैंट की बेल्ट खोली। पूजा ने उसकी पैंट नीचे सरकाई। अब राजू सिर्फ़ एक पुराना नीला अंडरवियर में था। उसका लंड पहले से ही तना हुआ था। पूजा ने उसकी जाँघों पर हाथ फेरा। फिर उसका अंडरवियर नीचे सरकाया। पहली बार… संजय के अलावा किसी और का लंड उसने देखा। राजू का लंड संजय से बहुत बड़ा था। मोटा, लंबा, नसें उभरी हुईं। सुपारा गुलाबी। पूजा की साँस रुक गई। वो उसे देखती रही। फिर धीरे से हाथ बढ़ाया। उसे छुआ। गर्म था। सख्त था। राजू ने उसका हाथ पकड़ा। “पूजा… तुम्हें अच्छा नहीं लग रहा तो…” पूजा ने सिर हिलाया। “नहीं राजू… मुझे बहुत अच्छा लग रहा है… मैं तुम्हें चूमना चाहती हूँ…” वो नीचे झुकी। उसके लंड को होंठों से छुआ। फिर चूमा। धीरे-धीरे। राजू ने उसका सिर सहलाया। “पूजा… चूसोगी…?” पूजा ने उसकी आँखों में देखा। फिर अपना मुँह खोला। उसके लंड को मुँह में लिया। धीरे-धीरे चूसने लगी। प्यार से। जैसे कोई कीमती चीज़ हो। राजू की साँसें तेज़ हो गईं। “पूजा… आह्ह… तुम… तुम बहुत अच्छा कर रही हो…” पूजा ने उसे और गहराई तक लिया। उसकी जीभ लंड के नीचे फिर रही थी। राजू ने उसका सिर सहलाते हुए कहा, “पूजा… मैं तुम्हें कभी नहीं छोडूँगा…” पूजा ने लंड मुँह से निकाला। उसके लंड पर उसकी लार चमक रही थी। वो ऊपर आई। राजू ने उसका कुर्ता ऊपर किया। पूजा ने खुद हाथ ऊपर करके कुर्ता उतार दिया। अब वो सिर्फ़ क्रीम कलर की ब्रा और पैंटी में थी। उसके बूब्स ब्रा में कैद थे। राजू ने उसकी ब्रा का हुक खोला। पूजा के गोरे, भरे हुए बूब्स बाहर आ गए। निप्पल्स गुलाबी और सख्त। राजू ने उसे देखा। “पूजा… तुम बहुत सुंदर हो…” वो उसके बूब्स पर झुका। एक बूब चूसा। दूसरे को हाथ से मसलते हुए। पूजा की आह निकल गई। “राजू… आह्ह… धीरे…” राजू ने उसका निप्पल दाँतों से काटा। पूजा की कमर ऊपर उठ गई। “राजू… मुझे तुम्हारी बहुत ज़रूरत है…” राजू नीचे सरक गया। उसने पूजा की पैंटी नीचे की। पूजा की चूत पूरी तरह गीली थी। राजू ने उसकी जाँघों को चूमा। फिर उसकी चूत पर मुँह रख दिया। जीभ से चाटने लगा। पूजा की सिसकी निकल गई। “राजू… आह्ह… वहाँ… मत… आह्ह…” राजू ने उसकी क्लिट चाटी। फिर जीभ अंदर डाली। पूजा का बदन काँपने लगा। “राजू… मैं… मैं झड़ने वाली हूँ…” राजू ने और तेज़ चाटा। पूजा की चूत से पानी निकल गया। वो पूरी तरह झड़ गई। राजू ने उसका पानी चाट लिया। फिर ऊपर आया। पूजा के होंठों पर अपना मुँह रखा। पूजा ने अपना ही पानी चखा। राजू ने अपना लंड उसकी चूत पर रखा। धीरे से अंदर किया। पूजा की चूत तंग थी। पर गीली भी। राजू ने धीरे-धीरे अंदर किया। पूजा की आँखें बंद थीं। “राजू… धीरे… दर्द हो रहा है…” राजू ने रुका। फिर धीरे-धीरे आगे बढ़ा। पूजा की चूत ने उसे पूरा ले लिया। राजू ने धीरे-धीरे चोदना शुरू किया। पूजा की सिसकियाँ और आहें कमरे में गूँज रही थीं। “राजू… तुम बहुत बड़े हो… मुझे पूरा भर दिया…” राजू ने स्पीड बढ़ाई। पूजा की कमर ऊपर उठ रही थी। दोनों एक-दूसरे में खो चुके थे। राजू ने पूजा को गले लगाया। उसके कान में फुसफुसाया, “पूजा… मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ…” पूजा की आँखों से आँसू बह रहे थे। “राजू… मैं भी तुमसे प्यार करती हूँ… इस पल मैं सिर्फ़ तुम्हारी हूँ…” राजू ने और तेज़ चोदा। पूजा फिर झड़ गई। इस बार राजू भी नहीं रुका। उसने पूजा की चूत में ही झड़ गया। दोनों की साँसें तेज़ थीं। राजू पूजा के ऊपर लेटा रहा। पूजा ने उसे कसकर गले लगा लिया। **पूजा का मन** “ये गलत है… मैंने संजय को धोखा दिया… पर इस पल में मुझे कोई पछतावा नहीं है… राजू ने मुझे वापस जीना सिखाया… उसने मुझे अपना बना लिया… और मैंने उसे अपना बना लिया…” दोनों चुप थे। बस एक-दूसरे की साँसें सुन रहे थे। राजू ने पूजा के माथे पर किस किया। “पूजा… तुम मेरी हो…” पूजा ने मुस्कुराया। “हाँ राजू… मैं तुम्हारी हूँ…” और उस पल में… दोनों ने एक-दूसरे को पूरा अपना बना लिया था। बिना किसी शर्त के। बिना किसी डर के। सिर्फ़ प्यार से। और उस छोटे से कमरे में… दो टूटे हुए दिलों ने एक-दूसरे को जोड़ लिया था। शायद हमेशा के लिए।
27-11-2025, 06:26 PM
Amazing update and awesome story and waiting for next update
28-11-2025, 06:08 PM
Waiting for update
30-11-2025, 06:45 AM
30-11-2025, 06:31 PM
कमरे में सेक्स के बाद
दोनों फर्श पर नंगे लेटे थे। कोई चादर नहीं, कोई तकिया नहीं। बस एक-दूसरे की बाँहें और साँसें। राजू का लंड अब ढीला होकर पूजा की जाँघ पर लेटा था। उसके सुपारे से अभी भी थोड़ा सा सफेद वीर्य रिस रहा था, जो पूजा की जाँघ पर चिपक गया था। पूजा की चूत लाल और सूजी हुई थी। अंदर-बाहर से गीली। राजू का वीर्य उसकी चूत से धीरे-धीरे बाहर निकल रहा था, फर्श पर एक छोटा सा गीला धब्बा बना रहा था। कुछ वीर्य पूजा की गांड की दरार में भी चला गया था। उसकी जाँघें चिपचिपी थी पूजा की ब्रा और पैंटी एक कोने में फेंकी हुई थीं। राजू का अंडरवियर उल्टा पड़ा था। कुर्ता और पजामी दीवार से सटकर गिरी थीं। दोनों एक-दूसरे से लिपटे हुए थे। राजू का एक हाथ पूजा की कमर पर था, दूसरा उसके बालों में। पूजा का चेहरा राजू की छाती पर था, आँसुओं से भीगा हुआ। राजू का सीना भी गीला था – पूजा के आँसुओं से। **अचानक पूजा सिहर उठी।** उसकी साँसें तेज़ हो गईं। वो राजू से अलग हुई। हाथ से अपनी चूत छूई – चिपचिपी, गीली, सूजी हुई। उसके हाथ पर वीर्य लगा हुआ था। उसने देखा और एकदम से रोने लगी। “राजू… मैंने क्या कर दिया… मैं शादीशुदा हूँ… संजय… संजय मुझसे बहुत प्यार करता है… मैंने उसका विश्वास तोड़ दिया… मैं बहुत गंदी हूँ… मैंने तुम्हारे साथ… तेरे अंदर… तेरा सब कुछ ले लिया… और मैं… मैं किसी और की हूँ…” वो घुटनों के बल बैठ गई। हाथों से मुँह ढाँपकर फूट-फूट कर रोने लगी। उसके नंगे बूब्स काँप रहे थे। चूत से अभी भी वीर्य रिस रहा था। राजू उठकर उसके पास बैठ गया। उसने पूजा को पीछे से गले लगा लिया। अपना नंगा बदन उसके नंगे बदन से चिपकाकर। उसकी पीठ पर होंठ रखकर बोला, “पूजा… शशश… रो मत… हम दोनों भावनाओं में बह गए थे… तुमने कुछ गलत नहीं किया… मैंने भी तो… मैंने भी तुम्हें अपना बना लिया… हम दोनों ने एक-दूसरे को साँत्वना दी… ये कोई गुनाह नहीं… ये बस… दर्द था… जो एक-दूसरे में समा गया…” पूजा रोते हुए पलटी। राजू के गले लग गई। “पर संजय… वो मुझे कभी माफ़ नहीं करेगा…” राजू ने उसके आँसुओं को चूमा। “ये हमारा राज़ रहेगा… कभी किसी को पता नहीं चलेगा… हम भूल जाएँगे… जैसे कभी हुआ ही न था… पर आज… आज तुम मेरी थीं… और मैं तुम्हारा था… बस इतना याद रखना…” पूजा ने उसकी छाती पर सिर टिकाया। “राजू… मैं ये भूलना चाहती हूँ… पर भूल नहीं पाऊँगी… तुमने मुझे आज जीना सिखाया… पर मैं… मैं अब और ज़्यादा टूट गई हूँ…” राजू ने उसे और कसकर गले लगाया। “तुम टूटी नहीं हो पूजा… तुम आज पहली बार पूरी हुई हो… मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूँ… चाहे दूर से ही…” दोनों बहुत देर तक ऐसे ही लिपटे रहे। नंगे। चुप। बस एक-दूसरे की धड़कनें सुनते हुए। ### थोड़ी देर बाद… पूजा ने धीरे से खुद को अलग किया। उसने अपनी पैंटी उठाई – उस पर भी वीर्य का दाग था। उसे सूँघा और फिर रोने लगी। राजू ने उसे गले लगाया। “छोड़ो इसे… मैं धो दूँगा…” पूजा ने कुर्ता-पजामी पहना। बिना ब्रा-पैंटी के। कुर्ता पसीने और वीर्य की गंध से भरा था। उसने दुपट्टा ओढ़ा और राजू को देखा। राजू अभी भी नंगा बैठा था। उसका लंड अब पूरी तरह ढीला था। उसके चेहरे पर सुकून था, और दर्द भी। पूजा ने उसके माथे पर किस किया। “राजू… मैं जा रही हूँ… ये सब… हम भूल जाएँगे ना…?” राजू ने उसका हाथ चूमा। “हाँ पूजा… हम भूल जाएँगे… पर मैं तुम्हें कभी नहीं भूलूँगा…” पूजा ने आँसुओं को पोंछा। दरवाज़ा खोला। एक आखिरी बार पलटी। राजू को देखा। और चली गई। ### हॉस्टल वापस रास्ते भर पूजा रोती रही। कुर्ते में उसकी चूत अभी भी गीली थी। हर कदम पर वीर्य की चिपचिपाहट महसूस हो रही थी। लोग देख रहे थे, पर उसे कुछ नहीं दिख रहा था। कमरे में घुसी। दरवाज़ा बंद किया। कपड़े उतारे। सूट फेंक दिया। नहाने गई। पानी बहुत तेज़ किया। चूत को बार-बार रगड़ा। पर वो गंध… वो एहसास… जाने का नाम नहीं ले रहा था। वो नहाती रही। रोती रही। और फिर बेड पर लेट गई। तकिया गले लगाकर। और फुसफुसाई… “संजय… मुझे माफ़ कर दो… राजू… मुझे माफ़ कर दो… मैं… मैं अब किसी की नहीं रही…” और उस रात… वो सो नहीं पाई। बस लेटी रही। अपने बदन पर राजू की उंगलियों का एहसास लिए। और आँसुओं में डूबी हुई। |
|
« Next Oldest | Next Newest »
|