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thanks
जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
भीड़ है क़यामत की फिर भी हम अकेले हैं.
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We will be there in the next few days
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agar aakhir mein kahani samapt ya THE END likh dete to aur badiya ho jaata, dear writer.
// सुनील पंडित // 
मैं तो सिर्फ तेरी दिल की धड़कन महसूस करना चाहता था
बस यही वजह थी तेरे ब्लाउस में मेरा हाथ डालने की…!!!
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(12-03-2023, 01:09 AM)redarc Wrote: रोटी का मतलब किसी भूखे इंसान से पूछो तो वो बतायेगा उसका मतलब या फ़िर उससे पूछो जो पाने के लिये जी तोड़ मेहनत करते हैं । किसी 5 स्टार होटल में अपने कुत्ते के साथ जाने वाला इंसान कभी भी रोटी का महत्व नहीं समझ सकता।
रश्मी भूखी तो कई महिनों से थी लेकिन जैसे ज्यादा उपवास करने से भूख का अहसास खतम हो जाता है और इंसान का शरीर उस भूख के साथ समझौता कर लेता है,वैसे ही रश्मी को भी कामवासना का अहसास खतम हो चुका था। वो खुद को बूढी समझने लगी थी लेकिन तुषार ने उसकी बुर चोद कर उसे जवान होने का अहसास करा दिया था।
रश्मी और तुषार की अन्तरात्माएं तो पहले ही मौन धारण कर चुकी थी, सो पाप का अहसास जैसी कोई बात दोनों के मन में दूर दूर तक नहीं थी। और तुषार तो वैसे भी ये मान कर चल रहा था कि अपनी भाभी को चोदना उसका धरम है, सो वो अपनी भाभी को चोदने का पुनित धार्मिक कार्य पूरे मनोयोग से कर रहा था।
रश्मी भी तुषार से एक बार चुदने के बाद काफ़ी हल्का महसूस कर रही थी,अपने शरीर में उसे एक अजीब बेचैनी जो महसूस होते रहती थी जिसे वो समझ नहीं पाती थी,उसकी वो बेचैनी और वो आकुलता शांत हो गई थी। एक बार की चुदाई ने ही उसके मन और मस्तिष्क को प्रसन्न कर दिया और sex उसके लिये एक दवा का काम कर रहा था क्योंकि इसने महिनों से चले आ रहे रश्मी के अवसाद को खत्म कर दिया था। वो पुर्ननवीन हो गई थी और अपने जवान होने के अहसास ने उसे प्रसन्नचित्त कर दिया था।
जैसे महिंनो की तपिश के बाद जब सावन की पहली बौछार धरती पर गिरती है तो धरती झूम उठती है और पेड़,पौधे झूम झूम कर सावन का स्वागत करते है,रश्मी भी वैसे ही झूम रही थी और तुषार के लंड़ का अपनी चूत में स्वागत कर रही थी।लेकिन सावन की केवल पहली बौछार ही धरती की प्यास नहीं बुझा पाती बल्की पहली बौछार के मिट्टी में लगते ही वतावरण में मिट्टी की सौंधी सौंधी खुशबु चारों तरफ़ फ़ैल जाती है और गर्मी की तपिश की बिदाई का संकेत दे देती है वैसे ही रश्मी भी अपनी पहली
चुदाई से खुश जरूर थी लेकिन संतुष्*ट नहीं थी बल्कि इस चुदाई ने उसकी चुदने की भूख को और बढा दिया था और उसे और भी मादक बना दिया था। तुषार उसकी इस मादकता को महसूस कर रहा था।
नग्न रश्मी की मादक अदाओं ने तुषार को उत्तेजना की चरम उंचाईयों तक पहुंचा दिया और उसका लंड़ और भी कड़क हो गया अब वो और तेजी से रश्मी की चूत में प्रहार करने लगा उसने रश्मी के दोनों विशाल स्तन अपने हाथों पकड़ लिये और उसे मसलने लगा रश्मी भी वासना के सागर में तैरने लगी और अपनी कमर को झटके मार मार कर उछालने लगी और उसके लंड़ को अपनी चूत की गहराईयों तक पहुंचाने मे तुषार का साथ देने लगी।
तुषार एक तरफ़ तो रश्मी की चूत में तजी से अपना लंड़ अंदर बाहर कर रहा था और दूसरी तरफ़ उसके स्तनों को मसले जा रहा था अब रस्मी ने अपने हाथ उसके दोनों हाथ पर रख लिये और उसे मसलने लगी वो अपनी छातियों को और भी जोर मसलने के लिये उसे उकसा रही थी। कुछ देर के बाद उसने अपने हाथ उसके हाथों से हटाए और वो अपने हाथों से उसकी पीठ ,बाहों और सिर को सहलाने लगी।
रश्मी के नरम हाथों के अपने बदन में घुमने से तुषार को बेहद आनंद आ रहा था और अब मारे उत्तेजना के उसने रश्मी के दोनों स्तनों को छोड़ दिया और उसके जिस्म पर लुड़क गया और उसे अपनी बाहों में भर लिया, दोनों के नंगे जिस्म एक बार फ़िर गुत्थम गुत्था हो गये और तुषार अब रश्मी के होठों पर अपने होठ रख देता है और उसे चूसने लगता है।
कुछ देर तक उसके होठों को चूसने के बाद तुषार अपनी जीभ उसके होठों पर फ़िराने लगता है और फ़िर घिरे से उसके मुंह के अंदर अपनी जीभ ड़ाल देता है और उसकी जिभ से रगड़्ने लगता है। तुषार की जीभ के अपनी जिभ से टकराने से रश्मी को बेहद मजा आने लगता है और वो उसकी जीभ को चूसने लगती है। कुछ देर तक अपनी जीभ रश्मी के मुंह में अपनी जीभ रखने के बाद वो उसे बाहर निकालता है और रश्मी को उसकी जीभ अपने मुंह के अंदर ड़ालने के लिये कहता है। रश्मी अपनी जीभ उसके मुंह में ड़ालती है तो तुषार उसे चूसने लगता है। रश्मी की जीभ चूसने से उसे ऐसा आनंद मिलता है की वो सब कुछ भूल कर उसी काम में लग जाता है।
रश्मी के मुंह से निकलने वाले रस से तुषार साराबोर हो जाता है और वो उसे पीने लगता है। दोनों ने एक दूसरे को जोर से भींच कर रखा हुआ था और बारी बारी एक दूसरे के मुंह मे अपनी जीभ ड़ालते और एक दूसरे को उसे चूसने का आनंद दे रहे थे। लगभग १५-२० मीनट तक इस क्रिया को दोहराने से दोनों के शरीर में ऐसी गर्मी पैदा हो जाती है कि दोनों ही पसीने से लथपथ हो जाते है। गर्मी इतनी बढ़ जाती है कि तुषार को रश्मी को अपनी बाहों से छोड़ना पड़्ता है और फ़िर से उकड़ू बैठ कर उसे चोदने लगता है।
तुशार ने अपने हाथ अब कालीन पर रखे हुए थे और वो रस्मी की बूर में तजी से लंड़ पेल रहा था तभी रश्मी तुषार के हाथ को उठाकर अपने स्तन में रखने का प्रयास करती है तुशार समझ जाता है कि वो अपने स्तन को मसलवाना चाहती है लेकिन वो अपने हाथ उसके स्तन पर नहीं रखता और उसे कहता है "जान, जैसा तुम मेंरे हाथों से इसे मसलवाना चाहती हो तुम वैसे ही इसे मसलो तभी मुझे समझ आयेगा कि तुमको क्या और कैसे इसे मसलवाना पसंद है। रश्मी पहले तो मना करती है और कहती है "नहीं, मुझे शरम आती है" तुशार कहता है "जब मसलवाने में शरम नहीं आती तो फ़िर खुद मसलने में कैसी शरम, प्लीज करो जो मैं कहता हुं तुमको ऐसा करते देख कर मुझे मजा आता है और मैं और भी
उत्तेजित होता हुं। अब नखरे मत करो और करो जो मैं कहता हुं sex करते समय शर्म मत किया करो नही तो इसका पूरा मजा कभी भी नहीं ले पाओगी।" रश्मी उसकी बात मान लेती है और अपने हाथों से अपने स्तनों को मसलने लगती है।
अपने बड़े बड़े स्तनों को जब रश्मी अपने ही हाथों से मसलने लगती है तो उस्के दोनों विशाल स्तन कभी उपर कभी नीचे तो कभी दांए बांए हिलने लगते है। ऐसे अपने ही हाथॊ से अपने स्तनों को मसलते हुए रश्मी बला की कामुक लग रही थी और उसने तुषार की उत्तेजना को और भी चरम शिखर तक पहुंचा दिया। तुषार लगातार अपने लंड़ से रश्मी की बुर में अपना लंड़ अंदर बाहर कर रहा था। कुछ देर तक ऐसे ही उसे चोदने के बाद वो अपना लंड़ उसकी चूत से बाहर निकालता है तो रश्मी बेचैन हो जाती है और हवा में ही जोर जोर से अपनी कमर उछालने लगती है । वो दर असल कुछ और देर तक उसके लंड़ का मजा लेना चाहती थी वो अपने स्खलन पर पहुंचने ही वाली थी कि तुषार ने अपना लंड़ उसकी चूत से बाहर निकाल लिया।
असल में तुषार अब उसे घोड़ी बना कर चोदना चाहता था और इसी लिये उसने अपना लंड़ बाहर निकाला था। तुषार उसे पलटने के लिये कहता है , रश्मी अभी और चुदना चाहती थी इसलिये उसकी बात मानने के अलावा उसके पास कोई भी चारा नहीं बचा था और वो पलट जाती है, अब तुशार उसे अपनी कमर को उपर उठाने के लिये कहता है रश्मी अपनी कमर उठाकर घोड़ी बन जाती है ।
अब रश्मी के दोनों विशाल स्तन नीचे की तरफ़ लटक जाते है और उसकी दोनों विशाल बड़ी गांड़े तुषार की तरफ़ खुली पड़ी थी। उसकी नंगी गांड़ो को देखते ही तुशार पागल हो जाता है और उसे जोरों से चूमने लगता है फ़िर वो अपना लंड़ उसकी गांड़ो के पास ले जाता है और उसकी चूत को तलाशते हुए अपना लंड़ उसकी चूत में फ़िर से घुसा देता है और रश्मी को पीछे से चोदने लगता है।
रश्मी अब अपनी गांड़ॊ को हिला हिला कर उसका लंड़ अपनी चूत में ले रही थी और तुशार भी बड़ी तेजी से अपना लंड़ उसकी चूत में ड़ाल रहा था। गांड़ उठा कर चुदवाने के कारण तुषार को रश्मी की गांड़ साफ़ दिखाई दे रही थी। अब वो अपने मुंह में थोड़ा सा थूक भर कर उसकी गांड़ के छेद मे ड़ाल देता है और उसकी गांड़ के छेद को अपनी अंगूठे से दबा देता है और उसे धीरे धीरे मसलने लगता है।
अपनी चूत में तुषार का लंड़ और गांड़ में अंगूठा रगड़े जाने से वो और भी उत्तेजित हो जाती है और अपनी गांड़ो को और भी जोरों से हिलाने लगती है उससे उसकी बड़ी बड़ी गांड़ भी तेजी से हिलने लगती है जिससे उसकी कामुकता और भी बढ़ जाती है। अब तुषार उत्तेजना के मारे अपनी एक उंगली उसकी गांड़ मे ड़ाल देता है और उसे अंदर बाहर करने लगता है और अपने लंड़ से उसकी बूर चोदना भी जारी रखता है।
अपने दोनों छेदों में लगातार प्रहार से रश्मी उत्तेजना के मारे पागल हो जाती है और थरथराने लगती है। उसे ऐसा लगा कि यदि थोड़ी देर तक और उसके साथ ऐसा हुआ तो वो मारे उत्तेजना के बेहोश हो जायेगी । उसकी सांसे उखड़्ने लगती है और वो वो खुद पर पर काबू नहीं रख पाती और कुछ ही क्षणों में आह्ह्ह्ह्ह्ह ओफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ आईमांऽऽऽऽऽऽ की अवाज निकालते हुए स्खलित हो जाती है।
स्खलित होते ही वो चैन की सांस लेती है और उसका शरीर ढीला पड़ जाता है वो निढाल हो कर वहीं करपेट पर ही सो जाती है लेकिन इधर तुशार का माल अभी नहीं गिरा था इसलिये वो रश्मी को फ़िर से खींच कर आने पास करता है उसको पीछे से थोड़ा उठा कर अपनी जांघो के पास रखता है और उसकी चूत में लंड़ ड़ाल उसे चोदने लगता है।
वो समझ जाता है कि अब ये झड़ चुकी है तो इस बार वो भी तेजी से अपना लंड़ अंदर बाहर करने लगता और कुछ ही देर में वो झड़ जाता है और जैसे उसका माल बाहर आता है तो वो अपना लंड़ उसकी चूत से बाहर निकालता है और अपना पूरा माल उसकी गांड़ में उंडेल देता है।और वो रश्मी के उपर ही लेट जाता है।
कुछ देर तक रश्मी के उपर सोये रहने के बाद तुषार उठता है और घड़ी की तरफ़ देखता है । ११ बज चुके थे और आधे घंटे में उन्हें नीचे पहुंच जाना था इसलिये वो नंगी सोई पड़ी रश्मी को हिलाता है जो अभी तक हांफ़ रही थी और लंबी सांसे रही थी। वो उसे धीरे से कहता है रश्मी ११ बज चुके है हमें आधे घंटे में नीचे पहुंचना है।
११ बजने का नाम सुनते ही रश्मी हड़्बड़ा कर खड़ी होती है और सीधे बाथरुम में पहुंच कर शावर चालू कर फ़िर से स्नान करने लगती है। उसे आज पूजा का सामान भी खरिदना था इसलिये वो इस हालत में बजार नहीं जा सकती थी। वो लग्भग दस मीनट तक नहाने के बाद बाहर आती है और जल्दी से अपने कपड़े पहनने लगती है। तभी उसका ध्यान तुषार की तरफ़ जाता है लेकिन वो कमरे में नहीं था और उसके कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था। दर असल वो रश्मी की पिछे वाली बाल्कनी से अपनी बाल्कनी में कूद कर अपने कमरे में जा चुका था।
लगभग १५ मीनट में साड़ी पहन कर और तैयार हो कर नीचे की तरफ़ जाने लगती है । तुशार के कमरे के पास निकलते हुए वो उसके कमरे के दरवाजे पर थपथपाते हुए नीचे उतर जाती है। जैसे ही नीचे पहुंचती है उसके आश्चर्य की सीमा नहीं रहती जब वो तुषार को नाशते की टेबल पर बैठ कर नाश्ता करते हुए देखती है।
तुशार उसकी तरफ़ देखता है और मुस्कुरा देता है और कहता है अब कैसी तबीयत है आपकी भाभी? यदि तबियत ठीक नहीम लग रही है तो थोड़ा और सो लिजिये और ऐसा बोल कर वो हल्के से अपनी एक आंख दबा देता है। रश्मी भी प्रतुत्तर में ज्यादा कुछ नहीं कहती केवल इतना ही कहती है कि अब तबियत पहले से कफ़ी बेहतर है।
तभी उसके ससुर बोलते हैं " अरे बेटा टाइम खराब मत करो जल्दी से तुम भी नाश्ता कर लो तो हम चलें बाजार , आज सारा दिन लगने वाला इसी काम में । फ़िर वो तुषार की मां से कहने लगते है अरे भई जब तक ये दोनों नाश्ता करते हैं तुम एक बार फ़िर से अपनी लिस्ट चेक कर लो कहीं कुछ छूट ना जाय , फ़िर आज के बाद हमें समय नहीं मिलने वाला बाजार वगैरह जाने के लिये। तुशार की मां उन्हें कहती है आप चिंता मत करो सारी लिस्ट तैयार और कहीं कुछ भी नहीं छूटा है लिखने से हम पिछले तीन दिन से इस लिस्ट को तैयार् कर रहे हैं। उसके पिताजी आश्वस्त हो जाते हैं और कहते है "तो ठीक है अब मैं गाड़ी बाहर निकालता हूं और तुम लोग भी बिना देरी किये जल्दी से गाड़ी में आ कर बैठो। ऐसा बोल कर वो अपने घर् के गैरेज से गाड़ी निकालने के लिये निकल जाते हैं।
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(19-09-2023, 09:51 PM)sri7869 Wrote: Nice Update
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