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Incest नई शादी शुदा सगी बहन की जवानी का मजा
#1
नई शादी शुदा सगी बहन की जवानी का मजा
जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
भीड़ है क़यामत की फिर भी  हम अकेले हैं.



thanks
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#2
इस समय हम दोनों मनाली ट्रिप पर थे | मैंने पहले ही एक 4 स्टार होटल बुक करा रखा था और सुबह जब बस मनाली पहुंची बस स्टैंड पर हमको लेने होटल की कार पहले से थी और हम दोनों होटल पहुँच गए ,होटल के मेनेजर ने रिसेप्शन पर हमारा स्वागत किया और कहा की सर जो रूम अपने बुक किया था वो अभी खाली नहीं हुआ है मैं आपको उससे भी बढ़िया बिना एक्स्ट्रा चार्ज के एक होनीमून स्पेशल रूम दे देता हु ये सुन कर हम दोनों भाई बहन के चेहरे पर मुस्कराहट आ गयी |




जब हम अपने रूम में पहुंचे तो हमारा सामान पहले ही रूम में पहुँच चूका था और मैंने रूम के गेट के बाहार do not disturb कर दिया और फिर मैंने प्रीती को बेड पर गिरा कर उसके ऊपर चढ़ गया और बोला अब हम हनीमून कपल है एक भाई अपनी सगी छोटी अब एक भाई अपनी सगी बहन के साथ हनीमून बनाएगा वो भी मनाली की हसीन वादियो में और मैंने अपने होंठ प्रीती के रसीले होंठो पर रख दिए और हम दोनों एक दूसरे के होंठो को पागलो की तरह चूसते रहे फिर प्रीती बोली भैया पहले नाहा धोकर फ्रेश हो लेते है |  | मैंने कहा ठीक है और प्रीती ने सूटकेस के अपने कपड़े निकले और बाथरूम में घूस गई ,मैंने भी टीवी चलकर देखने लगा कुछ देर बाद प्रीती की बाथरूम से आवाज़ आई अनुज भैया मेरा तौलिया बहार सूटकेस में छूट गया है देना और मैंने जैसे ही बाथरूम के दरवाजे से तौलिया देने के लिए हाथ बढ़ाया प्रीती ने मुझे बाथरूम में खिंच लिया अंदर प्रीती पूरी तरह नंगी थी |

उसके गोरे बूब्स पर शावर का पानी गिर कर प्रीती की चूत जो की बिलकुल चिकनी थी से निचे गिर रहा था ,प्रीती बोली भैया आज अपनी बहन को नहलाओगे नहीं ,मैंने कहा क्यों नहीं बहन इस दिन के लिए तो मैं तरस रहा था |

आह भैया मजा आ रहा है

,मैंने अपने सरे कपड़े खोल कर पूरा नंगा हो गया और हम दोनों ने शावर का पानी तेज कर दिया और नहाने लगे मैंने प्रीती के बदन पर साबुन लगाने लगा और प्रीती मेरे बदन पर साबुन लगाने लगी और काफी देर पानी में भीगने के बाद मैंने प्रीती की एक टांगको उठाकर बाथटब पर रख दिया और निचे बैठकर प्रीती की चिकनी और पाव जैसी फूली चूत पर अपने धधकते प्यासे होंठ रख दिए मेरे होंठ जैसे ही प्रीती की चूत पर पड़े प्रीती के मुह से आह की आवाज निकल गयी और मैंने अपने दोनों हाथो से प्रीती को पकड़ कर अपने होंठो को प्रीती की चूत पर रगड़ने लगा और पुरे बाथरूम में प्रीती की आह आह की आवाज गूंजने लगी और प्रीती बड़बड़ाने लगी आह आह भैया और तेज आह भैया और तेज चुसो प्रीती तो जैसे पागल हो गयी और मैंने अब अपनी गरम गरम जीभ प्रीती की चूत में घुसाने लगा प्रीती भी अपनी चूतड़ और आगे कर मेरा सर पाकर कर अपनी चूत में घुसाने लगी और में जो सपने में भी नहीं सोच सकता था की मैं यू अपनी बहन की चूत चाटूँगा , प्रीती बोली आह भैया मजा आ रहा है |

इस तरह तो मेरे पति रजत ने कभी मेरी चूत चाट कर मजा नहीं दिया और प्रीती की चूत मेरी गरम जीभ से रगड़ खा खा कर अपना कामरस छोड़ना शरू कर दिया और मैं प्रीती की चूत से निकला पूरा कामरस चाट गया ,प्रीती तो जैसे पागल गो गयी थी अब प्रीती निचे बैठी और मेरे 8 इंच लंबे लंड को अपने मुह में लेने लगी मेरे मोटा लंड प्रीती के मुह में आसानी से नहीं जा रहा था पर प्रीती तो काम वासना में पागल थी और किसी तरह मेरे लंड को मुह में ले ही लिया और आगेपीछे करने लगी मैंने प्रति के सर को पाकर कर ज्यादा से ज्यादे अपने लंड को प्रीती के मुह में गुसाने लगा और काफी समय बाद मैंने अपने वीर्ये की पिचकारी प्रीती के मुह में छोड़ दी और प्रीती मेरे लंड से निकला पूरा माल अपने गले में घटक गयी | |

उसके बाद प्रीती और मैं शावर के निचे काफी समय तक नहाते रहे और मैं प्रीती को अपनी बाँहों में उठा कर कमरे में ला कर बेड पर पटक दिया और उस पर चढ़ने लगा तो प्रीती बोली नहीं भैया इतंने उतावले मत हो अपनी बहन की चूत में लंड डालने को धीरे धीरे सेक्स का मजा ही कुछ होता है ,अब पहले हम दोनों किसी नए नवेले शादीशुदा जोड़े की तरह बाजार गुमेंगे और रात को आपकी ये सगी बहन आपको अपनी चूत में जन्नत की सैर कराएगी और हम दोनों हँसने लगे और बाजार जाने के लिए तयार होने लगे प्रीती और मैं जब तयार होकर निचे बाजार में उतरे तो कोई भी हमें ये नहीं कह सकता था की हम भाई बहन है हम एकदम नए शादी शुदा जोड़े की तरह लग रहे थे हमने एक रेस्तरां में जाकर लंच किया और एक टैक्सी करके मानली के आस पास की जगह घूमने निकल गए ,मुझे तो इस महसूस हो रहा था जैसे में जन्नत में है |

शाम को जब हम वापस अपने होटल के रूम में जाने से पहले मैंने एक केमिस्ट से ई-पिल और कुछ वियाग्रा की टेबलेट ले ली ,रूम में पहुँच कर मैंने प्रीती को पकड़ कर बीएड पर गिरा दिया तो प्रीती बोली क्या भैया इतनी जल्दी भीक्या है तो मैंने क्या मेरी बहन मुझे तो प्यास लगी है और ये प्यास तो तेरी चूतके कामरस से ही बुझेगी और मैंने प्रीती के कपड़े उतरने लगा और प्रीती ने भी मेरा पूरा सहयोग किया ,अब प्रीती केवल बता पैंटी में थी मैंने प्रीती की ब्रा के ऊपर से उसके बूब्स दबाने लगा प्रीती को मजा आने लगा और उसके मुह से आह आह की आवाज निकलने लगी मैंने प्रीती की ब्रा उतार दी और उसके एक बूब्स को अपने मुह में लेकर चूसने लगा और एक हाथ उसकी पैंटी में दाल कर उसकी बालरहित चूत को रगड़ने लगा और प्रीती तो जैसे पागल हो गयी ,उसके मुह से तेज तेज आवाज निकलने लगी आह भैया आह भैया आह मजा आ रहा है 
और मैंने भी प्रीती की चूत में ऊँगली दाल कर आगे पीछे करने लगा और अब प्रीती ने भी मेरे लंड को पकड़ आगे पीछे करने लगी और मैंने प्रीती की पैंटी भी उतार दी और उसकी दोनों टैंगो को उठा कर उसकी जांघो के भीच लेट कर उसकी चूत पर अपना मुह लगा दिया और अपने होंठो से प्रीती की चूत चूसने लगा प्रीती भी अपनी कमर और गांड उचकाकर अपनी चूत मेरे मुह पर रगड़ने लगी मैंने अपनी जीभ अपनी बहन की चूत में घुसा दी और चूत के अंदर घूमने लगा और फिर हम दोनों भाई बहन 69 की पोजीशन में आकर एक दूसरे के यौनांगों को मजे से चूसने लगे ,
फिर मैंने प्रीती को बेड के किनारे पर लेटाया और उसकी टांगों को अपने कंधे पर रख कर एक बार फिर अपनी जीभ प्रीती की चूत पर लगा दी।

थूक से प्रीती की चूत को अच्छे से गीला करने के बाद मैंने खड़े होकर अपने लंड का सुपाड़ा प्रीती की चूत पर रगड़ना शुरू कर दिया।
मेरे लंड के चूत पर रगड़ने से प्रीती की चूत भी अब लंड को अन्दर लेने के लिए बेचैन होने लगी थी। वो भी बार बार गांड उठा कर लंड का स्वागत करने लगी थी।

तभी मैंने थोड़ा लंड को चूत में दबाया तो प्रीती के चेहरे पर दर्द की लकीरें दिखाई देने लगी तो मैंने कहा तू घबरा मत तेरा भाई अपनी बहन की चुदाई बहुत प्यार से करेगा। फिर से लंड को प्रीती की चूत पर रगड़ने लगा।
भैया और कितना तड़पाओगे अब डाल भी दो अन्दर… अब नहीं रुका जा रहा है! बस यह बोल कर प्रीती ने अपनी शामत बुला ली क्यूंकि यह सुनते ही मैंने जोश जोश में लंड के सुपारे को चूत के मुहाने पर लगा कर एक जोरदार धक्का लगा दिया और फट की आवाज के साथमेरे लंड का सुपाड़ा प्रीती की चूत के अन्दर था
वो जोर से चीख पड़ी और दर्द के मारे हाथ पैर मारने लगी।

मैंने प्रीती के होंठों पर होंठ रख कर उसको शांत करने की कोशिश की,प्रीती मेरे नीचे दबी हुई छटपटा रही थी, लंड अभी सिर्फ दो इंच ही घुसा था।
मैंने देर करना सही नहीं समझा और एक बार उचक कर फिर से दो जोरदार धक्के लगा कर आधे से ज्यादा लंड अपनी बहन प्रीती की चूत में उतार दिया।। मेरा लंड भी जैसे किसी शिकंजे में फंस गया था क्यूंकि प्रीती की चूत थी ही इतनी टाईट।

फिर मैंने एक लम्बी सांस ली और फिर लगातार दो तीन धक्के लगा कर पूरा लंड प्रीती की चूत में फिट कर दिया।
अब मैंने धक्के लगाने बंद कर दिए और प्रीती की चूचियों को मुँह में लेकर चुम्भ्लाने लगा और दूसरी को मसलने लगा।,प्रीती दर्द के मारे कराह रही थी।
बस मेरी बहना… बस अब दर्द नहीं होगा… देख पूरा लंड तेरी चूत में जा चुका है। तेरी चूत मेरा पूरा सात इंच का लंड निगल गया है।,प्लीज भैया , बहुत दर्द हो रहा है प्लीज निकाल लो ,अरे देख तो पूरा लंड घुस चुका है अब दर्द नहीं होगा,मैं लगातार प्रीती की चूचियों और होंठों को चूमता रहा।
करीब दो तीन मिनट बाद प्रीती को अपना दर्द कुछ कम होता महसूस हुआ तो वो भी मेरे चुम्बन का जवाब चुम्बन से देने लगी। मैंने भी ग्रीन सिग्नल मिलते ही लंड को कुछ हरकत दी, उसने धीरे धीरे अपना लंड चूत से लगभग आधा निकाला और फिर धीरे धीरे ही दुबारा प्रीती की चूत में उतार दिया। आप यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |
प्रीती को दर्द हुआ पर अब वो इस दर्द को सहने के लिए तैयार थी।ऐसे ही पहले धीरे धीरे लंड को अन्दर बाहर करते करते मैंने अपने धक्को की स्पीड बढ़ा दी। प्रीती की चूत ने भी थोड़ा पानी छोड़ दिया था जिस कारण थोड़ा चिकनापन आ गया था चूत में और लंड अब प्रीती की चूत में फिसलने लगा था।
मेरी बहन को भी अब चुदाई में मज़ा आने लगा था, वो भी अब मेरे हर धक्के का स्वागत अपनी गांड उठा उठाकर कर रही थी जो इस बात का सबूत था कि अब दोनों मज़े में थे।
करीब पांच मिनट और धीरे धीरे चुदाई चली फिर तो जैसे बेड पर तूफ़ान आ गया और दोनों बहन भाई जोरदार चुदाई में लीन हो गए, दोनों एक दूसरे को पछाड़ने की कोशिश कर रहे थे।
लगभग दस मिनट के बाद प्रीती का शरीर अकड़ा और एक सरसराहट के साथ प्रीती की चूत पानी फेंकने लगी।
प्रीती की चूत का पानी मैं अपने लंड के पास से जाता हुआ साफ़ महसूस हो रहा था।

झड़ने के बाद प्रीती थोड़ी सुस्त हुई पर मैं लगातार धक्के पर धक्के लगा रहा था। कुछ देर की चुदाई के बाद प्रीती फिर से हरकत में आई और मेरे धक्कों का जवाब देने लगी।

एक ही आसन में चुदाई करते करते मैं अब कुछ अलग करने के मूड में था तो उसने प्रीती को बेड पर घोड़ी बना लिया और फिर पीछे जाकर अपना लंड फिर से प्रीती की चूत में उतार दिया।

और फिर से चुदाई शुरू हो गई, मेरे टट्टे हर धक्के के साथ थाप दे रहे थे और कमरे में फच्च फच्च की आवाज आने लगी थी जो कमरे के माहौल को मादक बना रही थी।

समय का अंदाज नहीं पर ये चुदाई बहुत लम्बी चली और फिर पहले प्रीती की चूत ने तीसरी बार अपने काम रस से मेरे लंड को भिगो दिया और फिर कुछ देर बाद मेरे लंड ने भी प्रीती की चूत को वीर्य से लबालब भर दिया।
झड़ते ही दोनों पस्त होकर लेट गए।

मेरा लंड अभी भी प्रीती की चूत में ही था जो की कुछ देर बाद सुकड़ कर फ़क की आवाज के साथ बाहर निकल गया।
लंड के निकलते ही प्रीती की चूत से मेरा वीर्य निकलकर बेड की चादर पर फैलने लगा।
जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
भीड़ है क़यामत की फिर भी  हम अकेले हैं.



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#3
[img]भाई का लंड पकड़ कर मुठ मारा मैंने[/img]
भाई का लंड पकड़ कर मुठ मारा मैंने
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भीड़ है क़यामत की फिर भी  हम अकेले हैं.



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#4
h ospitalised
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भीड़ है क़यामत की फिर भी  हम अकेले हैं.



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