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मैं उनकी गोद में सर रख कर लेट गया. वो कुछ देर मेरे बालों को सहलाती रहीं. मुझे उस वक्त उनके चूचे अपनी आंखों के बिल्कुल सामने दिख रहे थे, जिससे मेरा लंड एक बार फिर तन गया.
बुआ ने भी शायद खड़ा लंड देख लिया था. अब वो भी कुछ नॉटी मूड में आ गयी थीं.
बुआ ने पूछा- गर्लफ्रेंड के साथ कुछ किया या नहीं?
मैं एकदम गर्म था, तो कह दिया- बहुत कुछ कर चुका हूं.
बुआ बोलीं- बहुत कुछ मतलब क्या!
वो मेरी छाती पर हाथ सहला रही थीं. मैंने आंखों आंखों में ही बुआ को अपने लंड की तरफ इशारा किया और स्माइल कर दिया.
उन्होंने मुझे प्यार से चांटा मार दिया और हंसने लगीं. फिर बुआ धीरे धीरे हाथ नीच मेरी जांघों तक ले गईं और सहलाने लगीं.
मैंने भी उनका मुँह पकड़ा और उन्हें होंठों पर किस कर दिया. तभी उन्होंने मेरा लंड पकड़ लिया और मसल दिया.
बस अब क्या था … मैं उठ कर उनके बाजू में बैठा और उन्हें किस करने लगा. वो भी मेरा पूरा साथ दे रही थीं. मैं अपने एक हाथ से उनके चेहरे को पकड़े हुए था और दूसरा हाथ उनके मम्मों पर फेर रहा था.
हम दोनों ने लगभग 5 मिनट किस किया और इस दौरान मैंने अपना हाथ उनके मम्मों से ले जाते हुए उनकी जांघ पर फेरना शुरू कर दिया.
वो भी गर्म होने लगीं. मैंने उनकी नाइटी को घुटनों तक ऊपर किया और उनके गोरे चिकने पैरों पर हाथ फेरने लगा. हम एक दूसरे को पागलों की तरह किस कर रहे थे. मैंने अपना हाथ उनकी नाइटी में डालकर उनकी जांघ को मसलने लगा.
बुआ तो इससे जैसे पागल ही हो गईं और मुझे जोर जोर से किस करने लगीं.
अब हम दोनों के सब्र का बांध टूटने को था. हम दोनों ने एक दूसरे की जरूरत को समझ लिया था. हम बेडरूम में गए और मैंने बुआ को बेड पर लिटा दिया. मैं अपनी शर्ट उतारी और उनके ऊपर चढ़ कर उन्हें किस करने लगा.
वो मेरे बालों में और पीठ हाथ फेरने लगीं.
मैं उनकी गर्दन पर जोर जोर से चूमने चाटने लगा, जिससे वो बेहद कामुक होकर गर्म आहें भरने लगीं. उनकी सुराही सी गर्दन को चाटते हुए मुझे उनके पसीने का स्वाद और भी उत्तेजित कर रहा था.
फिर मैं उठकर उनके पैरों के पास गया और उनके पैर का अंगूठा मुँह में लेकर चूसने लगा.
मैं आपको बता दूं कि मुझे आर्मपिट फेटिश और फुट फेटिश बहुत पसंद है.
धीरे धीरे मैं ऊपर आते हुए उनके पैर को चाटते हुए उनकी जांघ तक पहुंच गया. मैंने उनकी नाइटी उतार दी और उनके पेट को चाटने लगा. उन्होंने उस वक्त ब्रा नहीं पहनी थी. मैं अपनी जुबान उनकी नाभि में डालकर चाटने चूसने लगा.
बुआ पूरी तरह से उत्तेजित हो चुकी थीं और उनकी लाल रंग की पैंटी पूरी गीली हो चुकी थी. मैंने उन्हें और तड़पना चाह रहा था.
मैं अब उनके मम्मों पर आ गया और उनके मम्मों को बारी बारी से चूसने लगा. उनके चूचे बहुत बड़े और मुलायम थे. मैं उनके मम्मों को किसी पागल कुत्ते की तरह काट रहा था.
बुआ भी जोर जोर से सिसकारियां लेते हुए कह रही थीं- अअअ … आहह समीर बस करो .. और मत तड़पाओ, अब चोद दो मुझे.
पर मैं उनकी बातों को अनसुना कर रहा था. मैं उनके निप्पलों को जोर से चूस रहा था और बीच बीच में काट लेता, जिससे वो कामुक सिसकारियां लेने लगतीं.
मैंने चूस चूस कर उनके मम्मों को पूरे लाल कर दिए थे.
तभी बुआ ने मुझसे पूछा- समीर तुझे चूत चाटना पसंद है?
जिसके उत्तर में मैंने हां में सर हिलाया.
तुरंत ही उन्होंने मेरा सर पकड़ा. अपनी चूत की तरफ कर दिया और पैरों से मेरे सर को जकड़ लिया.
मैं बुआ की चूत चाटने लगा. उनकी चूत थोड़ी सांवली थी, पर चुत की खुशबू मुझे मदहोश कर रही थी. मैं उनकी चूत का पानी चाटने लगा.
जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
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वो मेरा सर अपने पैरों से दबा कर जोर जोर से सिसकारियां लेने लगीं- ओह हाय … आह समीर चाट ले … ऐसे ही मेरी चूत को खा ले … और मुझे संतुष्ट कर दे. आह मुझे चुदे हुए बहुत दिन हो गए. आज चोद दे मुझे … और बुझा दे मेरी चूत की प्यास.
बुआ की बातें सुन कर मैं भी गर्म हो रहा था. मैं उठा और बुआ के मुँह के पास अपना लंड लगा दिया. तो बुआ मेरा लंड लेटे लेटे ही चूसने लगीं.
फिर हम 69 के पोज़ में आ गए. ऐसे ही 5 मिनट की चटाई चुसाई के बाद हम दोनों झड़ गए.
मैं बुआ के बगल में लेट गया और उनके मम्मों से खेलने लगे. बुआ और मैं पसीने से तरबतर हो चुके थे. मैंने बुआ का हाथ उठाया और उनके बालों से भरी बगल को चाटने लगा. बुआ को थोड़ी गुदगुदी हो रही थी, पर मुझे बहुत अच्छा लग रहा था. उनके पसीने और चमड़ी का टेस्ट मुझे उत्तेजित करने लगा और मैं 5 मिनट में ही फिर से चुदाई के लिए तैयार हो गया.
मैं अब बुआ की चूत में उंगली करने लगा. कुछ देर में बुआ भी उत्तेजित हो गईं और मुझसे चोदने को कहने लगीं.
मैंने भी समय नहीं गंवाया और अपना लंड उनकी चूत पर लगाकर एक धक्का दे मारा … लेकिन लंड फिसल गया.
बुआ ने अपने हाथ से लंड को पकड़ा और चुत की फांकों में सैट करके इशारा कर दिया. मैंने धक्का दे दिया. इस बार मेरा आधे से ज्यादा लंड चुत के अन्दर चला गया और बुआ की मादक सिसकी निकल गयी.
अब बुआ ने अपनी गांड उचकाना शुरू कर दिया और मैं भी धक्के लगाने लगा. मैं बुआ की धकापेल चुदाई करने लगा. बुआ जोर जोर से वासना से भरी सिसकारियां ले रही थीं और मेरी गांड पकड़ कर अपनी ओर खींच रही थीं. इस बीच मैं उन्हें किस करता जा रहा था, उनके मम्मों को चूस रहा था.
लगभग 5 मिनट बाद मैं बुआ में पीछे लेट गया और पीछे से अपना लंड उनकी चूत में डाल कर धक्के मारने लगा.
मैं पीछे से उनके मम्मों को पकड़ के दबा रहा था. उनके निप्पलों को जोर से दबाते हुए मसल रहा था, जिससे वो चिल्ला देतीं और सिसकारियां लेने लगतीं.
मैंने उनके बाल सरकाए और उनकी गर्दन पर पीछे से किस करने लगा. इसके बाद मैंने अपना हाथ नीचे ले जाते हुए उनकी भग्नासा (क्लाइटोरिस) को मसलना शुरू कर दिया, जिससे बुआ बिन पानी की मछली की तरह तड़प उठीं.
वो अब बहुत ज्यादा उत्तेजित हो चुकी थीं और मैं भी निकलने वाला था. इसलिए मैं एक मिनट रुक गया और लंड निकाल कर उनकी गीली चूत चाटने लगा.
बुआ ने मुझे थका देखा, तो मुझे नीचे लिटाया और मेरे ऊपर आकर लंड पर बैठ गईं.
अब वो लंड पर कूदने लगीं … इससे उनके बड़े बड़े चूचे जोरों से हिलने लगे. मैं बुआ के मम्मों को दबाने लगा.
कुछ मिनट बाद हम दोनों झड़ने को हुए तो मैंने बुआ को फिर से अपने नीचे लिटाया और ऊपर आकर जोर से धक्के मारने लगा.
बुआ चिल्लाते हुए झड़ गईं. मैं भी दस बारह धक्के देता हुआ उनकी चुत में ही झड़ गया और उनके ऊपर ही लेट गया.
इसके बाद बुआ के फ़ोन पर कॉल आया तो हम दोनों उठ गए. ये फोन उनकी किसी सहेली का था.
उस वक्त दोपहर के चार बज रहे थे और उनकी सहेली ने बताया कि वो दो और औरतों के साथ पांच बजे आने वाली थी.
अब मैं और बुआ उठे और अपने अपने कपड़े पहने. मैंने अपने बदन पर टी-शर्ट बरमूडा डाल लिया और बुआ ने गाउन पहन लिया.
उन्होंने अपने इस गाउन के नीचे कुछ नहीं पहना था. हमने एक किस की और घर संवारने में लग गए. हम दोनों उन सभी के आने की तैयारी करने लगे.
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लगभग एक घंटे बाद बुआ की वो तीनों सहेलियां घर आ गईं. उनके नाम नीलिमा, स्वर्णा और साक्षी था. वो तीनों आईं, तो बुआ ने उन्हें अन्दर बुलाया और वो सब सोफे पर बैठ गईं.
बुआ ने उनके खाने पीने की सारी तैयारी पहले ही कर रखी थी. वो औरतें बैठी बातें कर रही थीं. मैं उनके लिए जूस और स्नैक्स की प्लेट ले गया.
फिर बुआ ने उनसे मेरा परिचय करवाया. मैं भी वहीं बैठ गया. वो तीनों औरतें बड़ी ही सुंदर थीं.
नीलिमा उनमें से सबसे अलग और सबसे सेक्सी थी. वो बेहत गोरी थी और लाल लिपस्टिक लगाए हुए थी. उसकी हाइट कुछ 5 फुट 3 इंच की होगी. उस वक्त उसने नीले रंग की सलवार कमीज पहनी थी, जिसमें उसके चूचे बेहद गोल मटोल लग रहे थे. उसकी सेक्सी जांघों को देख कर मैं कुछ उत्तेजित हो रहा था.
उसने अपनी फिगर काफी अच्छे से मेन्टेन कर रखी थी.
स्वर्णा क्रीम कलर की साड़ी पहनी हुई थी. वो भी सेक्सी थी, पर थोड़ी मोटी सी थी. ज्यादा नहीं, बस कुछ कुछ और हाइट 5 फुट 4 इंच का रहा होगा. उसका रंग गेहुंआ था. साक्षी भी दिखने में ठीक-ठाक थी, पर उसके बूब्स और गांड बहुत बड़ी थी. वो साड़ी पहनी हुई थी.
वो तीनों और बुआ आपस में बातें कर रही थीं.
तभी नीलिमा मुझसे बात करने लगी और मेरे बारे में पूछने लगी. फिर वो अपनी सहेलियों से बात करने में मशगूल हो गई. कुछ देर तक उनकी बातें चलीं.
फिर बुआ मुझसे अन्दर रूम में जाने को बोलीं, तो मैं उठ कर रूम में चल गया. पर न जाने क्यों मेरे मन में आया कि क्यों न देखा जाए, ये सब क्या बातें कर रही हैं.
मैं छिप कर उनकी बातें सुनने लगा. मैंने सुना कि स्वर्णा कुछ दुखी थी. मैंने ध्यान से सुना, तो वो कह रही थी कि उसके पति को घर आए पांच महीने हो गए थे और इस वजह से वो शारीरिक सुख के लिए तड़प रही थी.
तब नीलिमा उसे कॉलबाय ट्राय करने को बोल रही थी, पर स्वर्णा इसमें कुछ आनाकानी कर रही थी.
कुछ देर बाद वो सभी जाने को निकलीं, तो मैं भी रूम से बाहर आ गया.
बुआ, स्वर्णा और साक्षी आगे चली गयी थीं और नीलिमा सबसे पीछे थी. मैं उनकी बातें सुन कर कुछ उत्तेजित हो गया था, जिससे मेरा लंड खड़ा था.
मैं बाहर आया, तो नीलिमा ने मुझसे पूछा- क्या तुमने हमारी बातें सुनी हैं?
मैंने कहा- नहीं.
नीलिमा- अच्छा … तो ये पैंट में क्या खड़ा है?
वो ये कहकर हंसते हुए बाहर चली गयी और मेरी तरफ देख कर आंख मारते हुए एक नॉटी सी स्माइल दे गई. वो गांड मटकाते हुए चली गयी.
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उन सभी के जाने के बाद कुछ देर मैंने और बुआ ने टीवी देखा. इसके बाद बुआ खाना बनाने चली गईं.
कुछ देर बाद मैं भी उनके पीछे चला गया. किचन में मैंने बुआ को पीछे से पकड़ लिया और उनकी गर्दन पर चूमने लगा. आगे हाथ करके मैं बुआ के चूचे दबाने लगा.
बुआ मुझसे छोड़ने को कहने लगीं, तो मैंने उन्हें छोड़ दिया और नीचे बैठ कर गाउन के ऊपर से ही उनकी गांड दबाने और चाटने लगा. इससे बुआ अजीब सी सिसकारियां लेने लगीं.
फिर मैंने उनका गाउन उठाया और अन्दर घुस गया. मैंने उनकी गांड के होल को चाटा तो वो उत्तजित होने लगी थीं. मैं अपनी जीभ उनकी गांड के अन्दर तक डालता जिससे वो सिसक उठतीं.
कुछ देर बाद बुआ पलट गई और मेरा मुँह उनकी चूत पर आ गया. मैं तुरंत उनकी चूत को चाटने लगा. उनकी चुत गीली हो गयी थी. कुछ देर तक मैं उनकी चूत का रस चाटता रहा.
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कुछ देर में उनके पैर लड़खड़ाने लगे, तो वो किचन की स्लैब पर बैठ गईं. थोड़ी ही देर में वो मेरे मुँह में झड़ गईं. मैं अब उनके गाउन से बाहर निकल आया और उन्हें किस करने लगा.
बुआ फिर से खाना बनाने में लग गईं. मेरा लंड भी बेहद तन चुका था. मैंने बुआ से मेरा लंड चूसने को कहा.
इस पर वो बोलीं- अभी ही निकाल लोगे, तो बाद में मेरी चुदाई कैसे करोगे! इसे अब ज्यादा थकाओ मत, आराम करने दो ताकि ये रात भर मेरी चूत को अपना पानी पिला सके.
ये कहकर बुआ ने मेरे लंड पर धीरे से हाथ मार दिया.
मैं भी उनकी बात से सहमत था, तो मैं भी थोड़ा अपने आपको कंट्रोल करके हॉल में जाकर बैठ गया.
फिर बुआ ने खाना लगा दिया और हम दोनों खाने बैठ गए.
मैंने बुआ से कहा- आप खुद मुझे अपने हाथ से खिलाओ.
वो मान गईं. पर मेरे मन में पोर्न देखने की वजह से कुछ अलग ही आईडिया आया था.
मैंने बुआ से कहा- बुआ मुझे खाने में मजा नहीं आ रहा है, कुछ स्वाद ही नहीं आ रहा.
बुआ- क्यों खाने में कुछ कमी है क्या?
मैं- हां … इसमें आपके मुँह का टेस्ट ही नहीं है. आप पहले निवाला अपने मुँह में डालो, फिर अपने मुँह से मेरे मुँह में डालो.
बुआ- छी: गंदा … ऐसे थोड़ी हो सकता है.
बुआ ने कुछ देर मना किया, पर मेरे बहुत फ़ोर्स करने पर वो मान गईं.
इस तरह से खाने में बहुत मज़ा आ रहा था. बुआ को पहले ये थोड़ा अजीब लगा, पर बाद में उन्हें भी ये अच्छा लगने लगा.
अब हमने खाना खत्म किया और हॉल में टीवी देखने लगे.
मैंने बुआ से कहा- क्यों न हम टीवी पर पोर्न मूवी देखें.
बुआ को ये आईडिया अच्छा लगा, तो मैंने टीवी पर पोर्न मूवी लगा दी. अब हम दोनों ही उत्तेजित होने लगे थे.
मैंने अपना हाथ बुआ की जांघ पर रख और सहलाने लगा.
मुझे पोर्न देख कर बगल चाटने, थूक अदला बदली जैसी फेटिश चीजें बहुत पसंद हैं. मैंने पोर्न भी ऐसी ही लगाई थी, जिसमें पहले लड़का लड़की की बगलें चाटता है, फिर उसे जोर जोर से चोदते वक्त उसके मुँह में थूकता है और लड़की उसके मुँह में अपना रस गिराती है.
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ये देख कर बुआ बोलीं- ये कितना घिनौना लग रहा है.
मैं- बुआ एक बार ट्राय करके देखो, तब आपको इसका मज़ा समझ में आएगा.
बुआ हंस दीं.
मैंने बुआ से कहा कि मुझे आपकी बगलें चाटनी हैं.
इस पर उन्होंने साफ मना कर दिया.
पर मैं कहां सुनने वाला था. मैंने बुआ का हाथ ऊपर उठा दिया और उनकी बगल चाटने लगा. उन्होंने शायद बगल कुछ 10-15 दिन पहले साफ की थीं, क्योंकि उसमें छोटे से रोयेंदार बाल उगे थे.
बुआ ने मुझे रोकने की कोशिश की, पर बाद में हार मानकर बैठ गईं.
मैंने 15 मिनट तक उनकी दोनों बगलें चाटीं. अब उन्हें भी मज़ा आने लगा था, तो वो मेरा सिर अपनी बगल में दबा रही थीं.
उनकी बगल की खुशबू बहुत अच्छी थी और उसमें पसीने का खारा टेस्ट मुझे पागल कर रहा था.
फिर मैंने उन्हें छोड़ा और उन्हें किस करने लगा.
मैंने उनसे कहा कि जिस तरह पोर्न में देखा था, आप भी मेरे मुँह में थूको. कुछ मनाने के बाद हमने वो भी किया. मुझे उनकी थूक बहुत ही मीठी लग रही थी.
अब हम दोनों बहुत उत्तेजित हो गए थे, तो बुआ ने मेरा हाथ पकड़ा और बेडरूम में ले गईं.
मैं उनके पीछे चलते वक्त उनकी मटकती गांड देख रहा था, जिससे मुझे रहा नहीं गया और मैंने उनकी गांड पर एक चमाट लगा दी. इससे वो थोड़ी उछलीं और मेरी तरफ देख कर स्माइल करने लगी. फिर वो जाकर बेड पर बैठ गईं. मैं उनके सामने खड़ा हुआ और उनका चेहरा पकड़ कर उन्हें किस करने लगा.
बुआ अब अपना एक हाथ मेरे लंड पर सहला रही थीं. मैं भी उनके मम्मों को गाउन के ऊपर से ही दबा रहा था.
मैंने अपना हाथ उनके गाउन के अन्दर डाला और उनके निप्पलों को उंगलियों से मसलने लगा. वो जोर से सिसकारियां लेने लगीं.
उन्होंने मेरी शर्ट उतारी और मुझे खींच कर बेड पर लिटा दिया. अब वो बहुत उत्तेजित हो गयी थीं और किसी भूखी शेरनी की तरह मुझ पर टूट पड़ीं. उन्होंने मेरे गले पर किस किया और मेरे गले को चूसने लगीं.
फिर वो किस करते हुए नीचे आने लगीं. उन्होंने मेरे निप्पलों पर पहले हल्के से किस किया, फिर जोर से चूसना शुरू कर दिया.
उनकी इस हरकत से मेरा लंड एकदम तन गया और किसी लोहे की रॉड की तरह हो गया.
बुआ ने उसे देखा और मेरे लंड पर हाथ फेरने लगीं. उन्होंने मेरी बरमूडा पैंट भी उतार दी, जिसके साथ ही मेरी चड्डी भी निकल गई. अब मैं बिल्कुल नंगा लेटा था. बुआ मेरे सीने पर निप्पलों को चूस रही थीं और एक हाथ से मेरा लंड सहला रही थीं.
कुछ देर बाद वो खड़ी हुईं और उन्होंने अपना गाउन उतार दिया. अब वो भी पूरी तरह नंगी थीं. वो मेरे करीब आईं और मेरे मुँह पर अपनी गीली चूत रखकर बैठ गईं.
उनकी चूत बहुत ज्यादा गीली थी. वो 69 की पोज़ में आ गयी थीं और मेरा लौड़ा चूसने लगी थीं. मैं उनकी चूत चाटते वक्त उनकी गांड में उंगली भी कर देता, जिससे वो एकदम कराह उठतीं.
हमने ये चुसाई का खेल कुछ मिनट खेला. फिर वो जोर से अपनी चूत मेरे मुँह पर रगड़ते हुए झड़ गईं. मैं भी झड़ने वाला था, तो उन्होंने मेरा लंड हिला कर मेरा माल अपनी चुचियों पर ले लिया और उसे अच्छे से अपनी चुचियों पर किसी क्रीम की तरह रगड़ लिया.
इसके बाद बुआ मेरे बाजू में आकर लेट गईं. बुआ ने मुझसे पूछने लगीं.
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बुआ- आज आयी हुई मेरी सहेलियों में से तुझे कोई पसंद आई?
मैं- हां, वो तो तीनों ही बड़ी सेक्सी थीं. पर आज जब वो जा रही थीं, तो नीलिमा आंटी ने मेरा लंड पैंट में खड़ा देख लिया था और हंसकर चली गयी थीं.
बुआ इस पर हंसते हुए बोलीं- तो तुझे नीलिमा मस्त लगी. तू चाहे तो मैं उससे बात करूं? वो भी एक नम्बर की चुदक्कड़ औरत है. आज तक न जाने कितनों से चुद चुकी है.
मैंने कहा- बुआ वो तो अच्छी है पर अब तो मुझे आप ही पसंद हो. मैं तो आप की चूत का फैन हो गया हूं.
बुआ- अच्छा, चल चल अब ज्यादा बातें मत कर.
मैं- बुआ क्या आपकी कोई सेक्स फैंटेसी है?
बुआ- हां, मैं हमेशा से ही खुले आसमान के नीचे चुदना चाहती हूं.
मैं- अच्छा, चलिए फिर क्यों न इसे आज पूरा किया जाए.
बुआ- सच में … चल फिर हम 12:00 बजे टेरेस पर जाकर वहीं चुदाई करेंगे.
मैंने हामी भर दी. फिर रात के कुछ 12 बजे हम दो गद्दे लेकर ऊपर टेरेस पर आ गए. मैंने वहां गद्दे बिछा दिए और बुआ को ऊपर बुलाया.
मैं वहीं पर लेट गया. कुछ देर बाद बुआ आईं और आकर मेरे बाजू में लेट गईं. बाहर की ठंडी हवा मेरे हर अंग को गुदगुदा रही थी.
बुआ ने अपना एक हाथ मेरे गले में डाल दिया और एक पैर मेरे ऊपर रखकर लेट गईं. मैं उन्हें सहलाने लगा और कुछ देर बाद वो मेरे ऊपर लेट गईं और मेरे खड़े लंड को अपनी चूत पर एडजस्ट करने लगीं. लंड सैट होते ही वो एक झटके के साथ ही मेरे लौड़े पर बैठ गईं. अंधेरे में सिर्फ चांद की रोशनी में वो जैसे चमक रही थीं. मैंने उन्हें नीचे खींचा और उन्हें किस करने लगा. तभी मैंने उनके बाल भी खोल दिये.
वो अब अपने खुले बालों के साथ मेरे लंड पर कूद रही थीं और मैं उनके मम्मों को दबा रहा था.
हमारी चुदाई कुछ 20-25 मिनट चली. फिर बुआ झड़ कर मेरे ऊपर ही लेट गयी और हम वैसे ही नंगे सो गए.
मेरी नींद कुछ 4:30 के आस पास खुली, तो देखा बुआ मेरा लंड चूस रही थीं. मैंने तुरंत उन्हें लेटाया और लंड पेल कर उन्हें ताबड़तोड़ चोदने लगा. उनके चेहरे के हाव-भाव मुझे पागल कर रहे थे. उनके चेहरे पर एक अलग खुशी थी, जो उनकी संतुष्टि की थी.
हम दोनों कुछ देर की चुदाई के बाद झड़ गए और नीचे रूम में आकर सो गए.
इस तरह उस रात मैंने बुआ को घर में चोदा चुदाई से पूरी तरह संतुष्ट कर दिया.
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बुआ की बात से मैं बहुत खुश हुआ.
दरअसल बुआ और नीलिमा कॉलेज से अच्छी सहेली थीं और उन दोनों ने मिलकर बहुत बार लेस्बियन सेक्स किया था.
उन दोनों ने कई लड़कों से साथ में भी सेक्स किया था.
इस सब वजहों से उन दोनों में बहुत गहरी दोस्ती थी.
ये मुझे बुआ ने बताया था.
इन दोनों चुदक्कड़ औरतों की कहानी मैं आपको अगले भाग में जरूर बताऊंगा.
फिलहाल आप मेरी बुआ की सहेली नीलिमा की चुदाई का मजा लें.
अब बुआ ने अपना हाथ नीलिमा की ओर बढ़ाया.
नीलिमा ने भी तुरंत उनका हाथ पकड़ा और आकर उनकी गोद में बैठ गईं.
मैं बुआ की बगल में बैठा ये सब देख रहा था.
तभी नीलिमा ने बुआ का मुँह पकड़ा और उनके होंठों पर किस कर लिया
फिर उसने अपना एक हाथ से बुआ के एक बूब को पकड़ लिया और मसलने लगी.
मैं ये देख कर हैरान तो था, पर उससे कहीं ज्यादा उत्तेजित हो गया था.
मैंने अपना हाथ बुआ के दूसरे बूब पर रख और दबाने लगा.
बुआ ने भी तुरंत मेरा लंड पकड़ा और मसलने लगीं.
कुछ देर तक बुआ के मम्मों को दबाने के बाद नीलिमा उठी और आकर मेरी गोद में बैठ गयी.
इस वक्त मेरा लंड पूरा खड़ा हो गया था और जब नीलिमा मेरी गोद में बैठी, तो उसकी गांड में चुभने लगा.
वो अपनी गांड को मेरे लंड पर रगड़ने लगी, मुझे किस करने लगी और मेरी छाती पर हाथ फेरने लगी.
बुआ भी मेरे गले पर किस कर रही थी और साथ ही नीलिमा के बूब्स दबा रही थीं.
कुछ देर ऐसा ही चलता रहा.
फिर नीलिमा उठी और उसने अपने पर्स से एक गोली निकाली और मुझे देकर बोली- समीर ये खा ले ताकि हमारी चुदाई जल्दी न रुके.
मैंने वो गोली खा ली.
अब नीलिमा उठी और मेरी बनियान निकाल कर मेरी छाती चूमने लगी.
मुझे उसके ऐसे करने से बहुत मज़ा आ रहा था.
तभी बुआ मेरे करीब आईं और मुझे किस करने लगीं.
कुछ देर बाद नीलिमा ने मेरे बरमूडा पैंट को नीचे खींच दिया.
मैं उन दोनों औरतों के सामने पूरा नंगा था.
मुझे देख कर बुआ ने भी अपना गाउन उतार दिया और वो भी पूरी नंगी हो गईं.
अब बुआ मेरी गोद में आकर बैठ गईं और उन्होंने नीलिमा को अपनी ओर खींच लिया.
बुआ अपनी सहेली के कपड़े निकालने लगीं.
पहले बुआ ने उसकी टी-शर्ट निकाली और मैंने उसकी जींस निकाल दी.
अब वो सिर्फ क्रीम कलर की ब्रा और वायलेट कलर की पैंटी में थी.
मैंने उसे अपनी ओर खींच लिया और बुआ उसकी पीठ पर किस करने लगीं, उसकी ब्रा निकाल दी.
कुछ ही देर में नीलिमा अब सिर्फ पैंटी में थी.
जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
भीड़ है क़यामत की फिर भी हम अकेले हैं.
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बुआ बात-बात पर समीर के मजबूत बॉडी को छोटी थी उसके मजबूत बांहों में आग लगा दी थी उसके सीने पर भी हाथ लगा देती थी।
समीर को लेकर बुआ के अंदर हवस बहुत ही ज्यादा बढ़ चुकी थी और बढ़ती ही जा रही थी।
जब वह अपनी चरम सीमा पर थी और वह समीर को सोच समझकर अपनी चूत में उंगली कर रही थी। बुआ चुदाई मांग रही थी और वह बहुत ही ज्यादा प्यासी थी जिनकी प्यास केवल समीर ही मिटा सकता था।
और समीर भाई अपने कमरे में अंत्र्वासना कहानीपढ़कर अपने लंड को मसल रहा था और वह बुआ को अपने मन में सोचके मुट्ठ मार रहा था।
तभी अचानक से बिजली कड़की और बुआ समीर के कमरे में आ गई। बुआ ने समीर को अपने लंबे लंड से मुठ मारते हुए देख लिया और कहा – “इतनी कीमती चीज को तुम ऐसे बर्बाद कर रहे हो!!!!!!!!!”
माहौल बहुत ही ज्यादा कामुकता से भरा हुआ था और समीर ने कहा – तो मैं क्या करूं बुआ जी??!!
बुआ ने बोला – क्यों ना हम दोनों एक दूसरे की प्यास को पूछा ल!!!
और फिर बुआ समीर के ऊपर चढ़ गई और उसे अचानक से पागलों की तरह चूमने लगी। समीर के कामवासना के सुख में सब कुछ भूल गया और वह बुआ को बहुत जोर जोर से चूमने लगा।
फिर समीर ने अपने आप को रोका और कहा – नहीं हुआ यह गलत है!!!
बुआ ने बोला – कुछ गलत नहीं है, वासना कोई रिश्तेदारी नहीं देखती, यह बस हो जाती है कुछ भी गलत नहीं है… समीर।
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और फिर समीर ने बुआ को पूरा नंगा कर दिया। बुआ का गोरा हसीन शरीर देखकर समीर के लैंड से पानी टपकने लगा और समीर में नंगा हो गया।
दोनों नंगे होकर एक दूसरे को निहार रहे थे और अपनी कामुकता को और ज्यादा बढ़ा रहे थे फिर समीर में पूरा को बिस्तर पर पटक दिया और उनकी चूत में अचानक से लंड घुसा दिया।
बुआ – आ आ आया हम्म अम्म आ,,, धीरे डालो तुम्हारा बहुत मोटा है!!!
समीर बोला – अब मुझसे कंट्रोल नहीं होता!!!
और वह बुआ को जबरदस्त तरीके से खचाखच चोदने लगा उसमें बुआ के दोनों टांगों को अपने कंधे के ऊपर रखा और पूरा दम लगा कर दुआ की चूत पर चोट मारने लगा।
बुआ कामवासना के चरम सुख से अपने चेहरे को दाएं बाएं हिला रही थी – आ आ आ आ आ या आ अम्म अम्म अहह अहह… हां… अहह!!!!
समीर – मज़ा आ रहा ह बताओ मुझे मज़ा आ रहा
फुआ बोली – हां मजा आ रहा है हां हां बहुत ज्यादा मजा आ रहा है तो दो अपनी बुआ की चुदाई करो!!!
समीर फिर और जोर-जोर से बुआ को चोदने लगा और चोदते चोदते हो बुआ की चूत के ऊपर खुजली भी कर रहा था।
इसे बुआ की कामवासना और भी ज्यादा चरम सीमा पर पहुंच रही थी और उसकी आंखें पीछे को लौट रही थी लेकिन फिर भी समीर से चोदे जा रहा था और वासना पर सुख दे रहा था।
जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
भीड़ है क़यामत की फिर भी हम अकेले हैं.