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मेरी बाकी दो बुआ उसकी बात को सुनकर हंस रही थी. मैं सोच में पड़ गया था कि कोई बुआ अपने ही भतीजे के लंड से अपनी चूत की चुदाई क्यों करवाना चाहेगी. फिर ध्यान आया कि वो सब मुझ पर इसीलिए प्यार लुटाती थीं ताकि मैं अपने लंड से उनकी चूत की गर्मी को शांत कर सकूं.
यह सब तब शुरू हुआ जब मैंने अपनी कॉलेज की पढ़ाई शुरू करने की प्लानिंग करनी चालू कर दी थी. परीक्षाएं समाप्त होने के बाद रिजल्ट भी आ गया था. मैं रायपुर में रह कर पढ़ाई करने के बारे में सोच रहा था.
मेरी सबसे बड़ी बुआ हमारे ही गांव में रहती थी. उनका हमारे घर पर आना-जाना लगा रहता था. वो बहुत दिनों से मुझे पटाने की फिराक में थी. मैंने एक बार तीज-त्यौहार के दिन उन तीनों की बातें सुन ली थीं. मेरी छोटी बुआ बड़ी वाली से कह रही थी- अगर मीना हमारे पप्पू को पटा ले तो मैं भी अपने भतीजे से अपनी चूत की चुदाई करवा लूं.
मंझली बुआ के ख्यालात भी कुछ ऐसे ही थे. वो तीनों ही पूरी प्लानिंग के साथ मुझ पर कोशिश कर रही थीं. मगर अभी तक उनको सही मौका नहीं मिल पाया था. मेरी बड़ी बुआ मीना कई बार रात में हमारे घर रुक जाया करती थी.
जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
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जब मैं सो रहा होता था तो वो सुबह मुझे उठाने के बहाने मेरे लंड को हाथ में पकड़ कर देखा करती थी. मैंने कई बार उनको मेरे लंड को छेड़ते हुए देखा था. लेकिन मैं इस बारे में किसी से कुछ कह भी नहीं सकता था.
ऐसे ही दिन निकल गये और मैं पढ़ाई करने के लिए रायपुर शहर आ गया. अब मेरे फूफा जी की उम्र भी काफी हो गई थी. जब भी मैं छुट्टियों में अपने गांव जाता था तो मेरी बुआ मेरे सामने अपनी साड़ी को जांघों तक उठा कर बैठ जाती थी. मेरे पैरों पर अपने पैरों को रगड़ती थी.
अब तक मेरे अंदर भी चूत चोदने की प्यास प्रबल हो चुकी थी. इधर मेरी बुआ की चूत की खुजली भी पहले से ज्यादा बढ़ चुकी थी. जब फूफा जवान थे तो बुआ की चुदाई करके उनको शांत रखते थे. मगर अब फूफा की उम्र ज्यादा हो गई थी और बुआ की चूत प्यासी रहने लगी थी.
एक बार तीज के त्यौहार पर मैं अपनी बड़ी बुआ को लेने उनके घर गया. मेरी बाकी दो बुआ को पापा लेने गये थे. जब मैं बुआ के घर पहुंचा तो वो मुझे देख कर काफी खुश हो गयी. मैंने उनके पैर छुए और फिर कुछ बातें कीं.
रात में हम लोगों ने साथ में खाना खाया. बुआ के घर में तीन कमरे थे. एक में बुआ और फूफा सोते थे. दूसरे में उनके लड़के लोग सोते थे और तीसरा कमरा गेस्ट के लिए रखा हुआ था. सोने के समय पर मैं गेस्टरूम में था.
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कुछ देर मालिश करवाने के बाद बुआ उठ कर साड़ी लपेटने लगी. फिर बोली- तेरे फूफा मेरा इंतजार कर रहे होंगे. हम अपना बाकी का काम फिर किसी दिन करेंगे.
इतना कह कर बुआ चली गई.
मेरा लंड फड़फड़ा रहा था. बुआ की बात मैं समझ नहीं पाया. वो बोल कर गई थी कि बाकी का काम फिर किसी दिन करेंगे. उनके जाने के बाद मैंने लंड को बाहर निकाल कर मुठ मारी और फिर सो गया.
अगले दिन सुबह उठ कर मैं तैयार हो गया. बुआ भी चलने के लिए तैयार थी. हम लोग अपने गांव वाले घर में आ गये. मेरी बाकी दो बुआ भी तब तक पहुंच चुकी थी. उन तीनों ने एक दूसरे से बातें करना शुरू कर दिया.
उन तीनों को मैंने आपस में कुछ फुसफुसाते हुए सुना. मैं समझ तो नहीं पाया कि वो तीनों आपस में क्या बातें कर रही थीं मगर कुछ तो बात थी जो वो आपस में एक दूसरे को बता रही थीं.
वो तीन दिन तक हमारे घर में रहीं और तीनों दिन मेरा ही गुणगान करती रहीं. फिर वो सब अपने अपने घर वापस चली गईं.
मेरी छुट्टियां चल रही थीं तब एक दिन अचानक ही बड़ी बुआ घर आई और मेरी मां से बोली- पप्पू के फूफा और बच्चे सब बाहर गये हैं.
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मेरी मां से बुआ कहने लगी- पप्पू को मेरे घर भेज दे. मुझको घर में अकेले डर लगता है.
उनके कहने पर मैं उनके घर चला गया. घर जाकर हमने शाम का खाना खाया. मैं टीवी देख रहा था कि तभी बुआ आई और बोली- पप्पू, एक बार हमें खेत में जाना पड़ेगा. खेत में रात के वक्त मवेशी घुस जाते हैं और सारी फसल को खराब कर देते हैं.
उनके कहने पर हम दोनों खेत के लिए निकल गये. वहां हमें रात भर रुकना था. खेत में एक कमरा बनाया गया था. उसके अंदर पंखा और बेड सब रखा हुआ था.
वो मुझे सोने के लिए कहने लगी. मगर मैंने कहा- मैं आपकी हेल्प करने के लिए आया हूं. पहले एक बार खेत में राउंड लगा कर आते हैं और उसके बाद दोनों साथ में ही सो जायेंगे.
वो मेरी तरफ देख कर मुस्कराने लगी.
हम दोनों खेत में निकल गये. बाहर अंधेरा था. बुआ आगे चल रही थी और मैं पीछे. मैंने अपने फोन की फ्लैश लाइट ऑन कर दी. बुआ की गांड मुझे मटकती हुई दिख रही थी. मेरे अंदर भी सेक्स और चुदाई की भावना आने लगी थी. मेरा लंड तन गया था.
फिर कुछ दूर जाकर बुआ कहने लगी- पप्पू अभी तो सब ठीक है. तुम अब अंदर रूम में चलो. मैं आती हूं जरा.
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बुआ बोली कि सेक्स वीडियो की तरह ही हम भी चुदाई करेंगे. उसके बाद हम दोनों फिर से शुरू हो गये. रात के 11 बजे से लेकर सुबह के 5 बजे तक मैंने बुआ की चूत की चुदाई खूब जमकर की. चुदाई के चार राउंड हुए.
सुबह उठ कर फिर हम घर आ गये. आकर सो गये.
9 बजे उठे तो फूफा जी अभी तक भी नहीं आये थे. फिर हम दोनों साथ में नहाने के लिए गये. शावर में चुदाई के दो राउंड फिर से हुए. बुआ के साथ बाथरूम में नंगी चुदाई करके और ज्यादा मजा आया.
इस तरह से मैंने अपनी बुआ की चुदास को अच्छी तरह शांत किया.
उस दिन के बाद से हम दोनों की ये चोदन कथा आज तक चल रही है. मेरी बड़ी बुआ ने मेरी दो अन्य बुआ को भी शायद इसके बारे में बता दिया. उन्होंने भी अपनी चूत की प्यास मेरे लंड से बुझवाई.
तब से ही मैं औरतों की चूत चुदाई का प्यासा रहता हूं. अपनी छोटी बुआ की चूत को भी मैंने इसी मकसद से चोदा.
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