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(29-05-2020, 12:27 PM)spider123 Wrote: plz update continue kro,utsukta badhti jaa rhi hai.
(14-06-2020, 07:31 AM)kamdev99008 Wrote: आगे भी लिखो
(14-06-2020, 03:38 PM)harishgala Wrote: Waiting for update
जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
भीड़ है क़यामत की फिर भी हम अकेले हैं.
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तभी अंजलि की आवाज आई, ‘‘बड़ी देर लगा दी?’’
‘‘बोलो अंजलि, क्या बात करनी है?’’
‘‘इतनी भी क्या जल्दी है?’’
नेहा को उन की बातचीत का 1-1 शब्द साफ सुनाई दे रहा था.
अनिल की गंभीर आवाज आई, ‘‘बात शुरू करो, अंजलि.’’
‘‘अनिल, यहां आने पर सब से ज्यादा खुश मैं इस बात पर थी कि तुम से मिल सकूंगी, लेकिन तुम्हें देख कर तो लगता है कि तुम मुझे भूल गए… मुझे तो उम्मीद थी मेरा कैरियर बनने तक तुम मेरा इंतजार करोगे, लेकिन तुम तो शादी कर के बीवीबच्चों के झंझट में पड़ गए. देखो, मैं ने अब तक शादी नहीं की, तुम्हारे अलावा कोई नहीं जंचा मुझे… क्या किसी तरह ऐसा नहीं हो सकता कि हम फिर साथ हो जाएं?’’
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15-06-2020, 04:39 PM
(This post was last modified: 15-06-2020, 04:46 PM by neerathemall. Edited 1 time in total. Edited 1 time in total.)
‘‘अंजलि, तुम आज भी पहले जैसी ही स्वार्थी हो. मैं मानता हूं नेहा से शादी मेरे लिए एक समझौता था, अपनी सारी भावनाएं तो तुम्हें सौंप चुका था… लगता था नेहा को कभी वह प्यार नहीं दे पाऊंगा, जो उस का हक है, लेकिन धीरेधीरे यह विश्वास भ्रम साबित हुआ. उस के प्यार और समर्पण ने मेरा मन जीत लिया. हमारे घर का कोनाकोना उस ने सुखशांति और आनंद से भर दिया. अब नेहा के बिना जीने की सोच भी नहीं सकता. जैसेजैसे वह मेरे पास आती गई, मेरी शिकायतें, गुस्सा, दर्द जो तुम्हारे लिए मेरे दिल में था, सब कुछ खत्म हो गया. अब मुझे तुम से कोई शिकायत नहीं है. मैं नेहा के साथ बहुत खुश हूं.’’
गेट से कान लगाए नेहा को अनिल की आवाज में सुख और संतोष साफसाफ महसूस हुआ.
अनिल आगे कह रहा था, ‘‘तुम भाभी की बहन की हैसियत से तो यहां आराम से रह सकती हो लेकिन मुझ से किसी भी रिश्ते की गलतफहमी दिमाग में रख कर यहां मत रहना… मेरे खयाल में तुम्हारा यहां न रहना ही ठीक होगा… नेहा का मन तुम्हारी किसी हरकत पर आहत हो, यह मैं बरदाश्त नहीं करूंगा. अगर यहां रहना है तो अपनी सीमा में रहना…’’
इस के आगे नेहा को कुछ सुनने की जरूरत महसूस नहीं हुई. उसे अपना मन पंख जैसा हलका लगा. आंखों में नमी सी महसूस हुई. फिर वह तेजी से सीढि़यां उतरते हुए मन ही मन यह सोच कर मुसकराने लगी कि टेढ़ा है पर मेरा है.
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15-06-2020, 04:41 PM
(This post was last modified: 16-06-2020, 11:28 AM by neerathemall. Edited 2 times in total. Edited 2 times in total.)
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बहुत खूब.............. ये मुझे अपनी ज़िंदगी का ही एक पल वापस जीता हुआ लगा...............
ज़िंदगी में ना जाने कितनी आयीं और गईं..........
लेकिन एक वो ही हैं........... जिनको मेंने अपना घर ही नहीं....मन भी सौंप दिया तो अब किसी और को क्या दूँ
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शुक्रिया
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756........................
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कुछ 2- 4 एपिसोड शयनकक्ष कार्यक्रम के भी डाले जा सकते थे। कहानी शुरू हुई नहीं कि खत्म भी कर दी।
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(17-06-2020, 08:23 PM)bhavna Wrote: कुछ 2- 4 एपिसोड शयनकक्ष कार्यक्रम के भी डाले जा सकते थे। कहानी शुरू हुई नहीं कि खत्म भी कर दी।
D:) कहानी है , D:) उपन्यास नहीं
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(15-06-2020, 04:37 PM)neerathemall Wrote: तभी अंजलि की आवाज आई, ‘‘बड़ी देर लगा दी?’’
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