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राणा भी सोचने लगा की इतनी उत्तेजना बढ़ाने के बाद भी वो कैसे कंट्रोल कर पा रही है...आज तक जितनी भी लड़कियों की उसने चुदाई की थी, वो तो सिर्फ़ उसके हाथ लगाने भर की वेट करती थी...और खुद ब खुद नंगी होकर उसके लंड पर टूट पड़ती थी...काजल ना जाने किस मिट्टी की बनी थी..कभी तो उसकी आँखो मे सेक्स की भूख एकदम साफ़ दिखाई देती थी..और कभी वो एकदम से पीछे होकर उसपर कंट्रोल करती दिखाई देती थी..
पर राणा से अब कंट्रोल नही हो रहा था...भले ही वो खुद को राजा समझ कर उसपर पैसे लुटाता हुआ अभी तक मज़े ले रहा था, पर अब अपनी सेक्स की भूख उससे बर्दाश्त नही हो रही थी...वो काजल को पाने के लिए राजा से भिखारी बनने के लिए भी तैयार था अब...
राणा : "ऐसा ना करो काजल...देखो ना, मेरे लंड की क्या हालत हो रही है...सिर्फ़ एक बार इसको सक्क कर लो ...प्लीज़ ...मैं तुम्हारे हाथ जोड़ता हू...मेरी हालत पर तरस खाओ ...''
राणा तो अब भीख माँगने पर उतर आया था..
काजल की नज़रें अभी भी उसके पास पड़े पैसों के उपर थी...जो करीब 20 हज़ार रुपय थे..
काजल की आँखो का इशारा राणा समझ गया...उसने अपने 20 हज़ार रुपय एकदम से निकाल कर काजल के आगे रख दिए..
काजल : "तूने मुझे कोई धंधे वाली समझा है क्या...जो इन पैसों के बदले तेरी सेवा करूँगी... जो भी करूँगी, गेम खेलकर ही, पैसे जीतकर, ऐसे भीख लेने की आदत नही है मेरी..''
राणा सहम सा गया, वैसे भी वो काजल को नाराज़ करके अपने लिए कोई घाटे का सौदा नही करना चाहता था..
यानी काजल का मतलब साफ़ था...अगली गेम शुरू करो..
राणा को भी सारे पैसे हारने की जल्दी थी, इसलिए उसने अगली गेम शुरू कर दी..
पत्ते बाँटे गये, और इस बार राणा ने सीधा 2 हज़ार की ब्लाइंड चल दी, अपने लंड से रगड़कर ..
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राणा का उठा हुआ लंड काजल को काफ़ी लालायित कर रहा था..इसलिए उसके हाथ अपने आप ही चूत की तरफ बड़ जाते थे...उसने अपने पायजामे को नीचे खिसका दिया और पहली बार राणा ने उसकी नयी नवेली चूत के दर्शन किए...
काजल भी अब कोई परदा नही रखना चाहती थी...इसलिए उसने धीरे-2 करते हुए अपने पायजामे को घुटनो से नीचे कर दिया..और अब उसकी सफाचत चूत राणा की नज़रों के सामने पूरी नंगी थी...पर बेचारा चाह कर भी उसे छू नही सकता था वो...उसकी चूत की चिकनाहट देखकर राणा का मन उसे चूसने का करने लगा..
काजल भी समझ नही पा रही थी की कैसे वो इतनी बेशर्मी से अपने जिस्म से कपड़े हटाती जा रही है और नंगेपन की नुमाइश राणा के सामने कर रही है..पर ना जाने क्यो उसे ये सब अच्छा भी लग रहा था..वो शायद इसलिए भी क्योंकि वो कुछ ऐसा ही केशव के साथ भी कर चुकी थी..अपने भाई के साथ करते हुए जब उसे शरम नही आई तो इसके साथ क्यो आए और वो भी तब जब वो उसके उपर अँधा होकर पैसे भी लूटा रहा था..
राणा ने अगली ब्लाइंड जब चली तो नोट पर उसके लंड से निकला पानी साफ़ चमक रहा था...ऐसा सीन देखकर अच्छे -2 का प्रीकम निकल जाता है...काजल का तो मन किया की वो नोट उठाए और उसे चाट कर सॉफ कर दे..साला कैसे तरसा रहा है उसे वो राणा...काजल ने भी उसको सताने की सोची और अपनी रसीली चाशनी में हज़ार के दो नोटों को अच्छी तरह से घुसा कर उन्हे पूरा गीला कर लिया और फिर उन्हे नीचे फेंक दिया...
राणा ने तुरंत वो नोट उठा लिए और बड़ी ही बेशर्मी से उन्हे चाटने लगा..सारा रस चाट गया वो उन नोटों से
काजल उसे ऐसा करते हुए देखती रही..और फिर उसने भी राणा वाला वो नोट उठा लिया जिसपर उसका प्रीकम लगा हुआ था..और धीरे से उसपर अपनी जीभ लगाई...एकदम टेस्टलेस था वो...पर उसकी महक बड़ी ही कामुक और मदहोशी से भरी थी..काजल ने एक लंबी साँस लेकर उसे अंदर तक महसूस किया और अपनी जीभ पर उसके स्वाद को काफ़ी देर तक महसूस करती रही..
राणा भी समझ चुका था की अब तो नाम मात्र की दीवार रह गयी है दोनो के बीच..
दोनो एक दूसरे के सामने नंगे होकर खेल रहे थे...राणा के पास अभी भी लगभग 10 हज़ार रुपय थे, जो उसको गँवाने थे..
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काजल ने अगली ब्लाइंड नही चली और अपने पत्ते उठा लिए..और उन्हे देखकर उसे एक बार फिर से विश्वास हो गया की उसकी हर बार टोटके को बड़ चड़कर करना इस बार भी सफल हो गया है...क्योंकि इस बार उसके पास ऐसे पत्ते आए थे जिनका शायद ही कोई तोड़ होता...बादशाह की ट्रेल..यानी 3 बादशाह आए थे उसके पास..
उसने एक ही बार में 4 हज़ार की चाल चल दी..राणा तो पहले से ही लूटने के लिए बैठा था..इसलिए उसने अपने पत्ते नही देखे बल्कि अपनी ब्लाइंड को भी डबल करते हुए 4 हज़ार कर दिया और लंड से रगड़कर फिर से पैसे नीचे फेंक दिए..
काजल तो पूरे कॉन्फिडेंस में थी..उसने भी चाल को डबल किया और आठ हज़ार बीच मे फेंक दिए..और इस बार उसने हर नोट को ऐसे अपनी चूत पर रगड़ा जैसे उसपर अपने रस की परत चड़ा देना चाहती हो...गीले-2 नोटों का अंबार सा लगता जा रहा था बीच में ..किसी पर काजल की चूत का रस था तो किसी पर राणा के लंड का पानी...
अब तो राणा के पास सिर्फ़ 2 हज़ार ही थे...इसलिए उसने अपने पत्ते उठा लिए..और अपने पत्ते देखकर वो भी दंग रह गया..उसके पास सीक़वेंस आई थी, और वो भी सुच्ची , पाने के पत्तो की, 8,9,10 नंबर...
ऐसे पत्ते तो कभी कभार ही आते हैं..पर उसके पास चलने के लिए पैसे ही नही थे...सिर्फ़ 2 हज़ार थे और शो माँगने के लिए भी कम से कम उसे 8 हज़ार चाहिए थे...पर ऐसे पत्तों के साथ वो शो नही माँगना चाहता था, बल्कि गेम को आगे खेलकर जीतना चाहता था, और जीते हुए पैसों को वापिस करके वो काजल से मज़े लेना चाहता था..इसलिए उसने काजल से 20 हज़ार उधार माँग लिए..काजल ने भी दे दिए क्योंकि वो जानती थी की उससे अच्छे पत्ते राणा के पास हो ही नही सकते..
राणा ने पैसे लिए और 8 हज़ार की चाल चली..काजल ने 14 हज़ार की चाल चली ...क्योंकि अब राणा के पास उतने ही पैसे बचे थे...राणा ने भी ना चाहते हुए शो माँग ही लिया..वैसे तो उसे विश्वास ही था की वही जीतेगा..पर जैसे ही काजल ने अपने पत्ते उसके सामने रखे तो काजल के 3 बादशाह देखकर उसका सिर ही चकरा गया...उसने अपनी कल्पना में भी ऐसा नही सोचा था की काजल के पास ट्रेल आएगी...
राणा बेचारा सिर झुका कर बैठ गया..
काजल ने हंसते हुए सारे पैसे अपनी तरफ कर लिए..
काजल ने राणा के उदास चेहरे को देखा और बोली : "ऐसे मुँह लटका कर क्यो बैठ गये...मैने कहा था ना की जब मैं खुश होउंगी तब भी तुम्हारा ही फायदा है...''
राणा की आँखे चमक उठी...उसने ललचाई हुई आँखों से काजल को देखा..
काजल बड़े स्टाइल में बोली : "कब तक मेरे जूस को नोटों के उपर से चाटते रहोगे...सीधा ही आ जाओ...''
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नीचे भी बाजी ख़त्म हो चुकी थी, बिल्लू ने जीत लिए थे सारे पैसे...केशव भी अपने 10 हज़ार हार चुका था ...और गणेश भी कंगला हो चुका था..अब वो आराम से बैठकर दारू पी रहे थे..
केशव ने राणा का लटका हुआ चेहरा देखा तो वो समझ गया की वो अपने सारे पैसे हार चुका है...भले ही वो खुद नीचे बैठकर 10 हज़ार हार गया था पर वो ये जानता था की उपर बैठकर उसकी बहन ने काफी रूपए जीते है आज, वो करीब 90 हज़ार जीत गयी थी ...कुल मिलाकर वो काफ़ी फायदे में था...
रात काफ़ी हो चुकी थी...इसलिए सभी अपने-2 घर चल दिए...अगले दिन दीवाली थी, इसलिए सबने जम कर जुआ खेलने की बात कही...
केशव ने भी सब कुछ समेटा और दरवाजा बंद करके उपर चल दिया...
वो सीधा अपनी माँ के रूम में गया पहले..वो सो रही थी...पर काजल वहाँ नही थी...वो शायद उसके कमरे में ही थी अब तक..
वो झूमता हुआ सा अपने कमरे की तरफ चल दिया..
और जैसे ही वो अंदर पहुँचा, काजल उसके पीछे से आई और अपनी बाहें उसके गले मे डालकर उसकी कमर पर झूल गयी...
केशव ने उसका भार संभालने के लिए जैसे ही अपने हाथ पीछे करके उसे पकड़ा तो उसका नशा एक ही बार मे उड़ गया..
वो पूरी नंगी थी...केशव के हाथ सीधा उसके नंगे चूतड़ों पर जा लगे...
और काजल तो बदहवास सी होकर उसकी गर्दन को अपने होंठों से चूस रही थी..उसे चूम रही थी...
केशव समझ गया की आज की रात वो अपनी बहन के साथ वो सब करने वाला है, जिसके लिए वो ना जाने कब से तरस रहा था...
उसकी चुदाई..
उसने काजल को लेजाकर अपने बिस्तर पर पटक दिया...और वो बिस्तर पूरा नोटों से ढका पड़ा था..जो काजल ने आज जुए में जीते थे...और वो उन्ही नोटों के बिस्तर पर अपने कुंवारेपन को लुटाना चाहती थी...
गरमा गरम करारे नोटों के उपर काजल का नंगा जिस्म मचल रहा था...वो पूरी तरह से सुलगी हुई थी...उसने बदन से उठ रही गर्मी ने बेड पर पड़े नोटों की गर्मी को और बड़ा दिया था...उसके अंदर से निकल रही गर्मी से वो नोट और करारे हो गये थे..
काजल बड़े ही सेक्सी तरीके से उसे देखने लगी..आज वो बड़ी ही बेशर्मी से इस तरह से खुल कर अपने भाई के सामने लेटी थी...शायद जो थोड़ी बहुत शुरूवाती शरम थी वो राणा के साथ जुआ खेलते हुए नंगी होकर निकल चुकी थी...वो राणा की हवस भरी आँखो के सामने अपने आपको रखकर उतनी खुश नही थी, जितनी अब केशव के सामने रखकर हो रही थी.
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सुबह काजल की नींद जल्दी खुल गयी..और उसने अपने कपड़े पहने, और अपनी माँ के पास जाकर लेट गयी..
दीवाली का दिन था, इसलिए सोई नही वो उसके बाद...पूरे घर की अच्छी तरह से सफाई की...केशव के कमरे में गयी और उसे नहाने के लिए भेजा...बिस्तर की हालत देखकर उसे खुद ही बड़ी शर्म आई...काफ़ी नोट फट चुके थे..कई नोटों पर खून की बूंदे और कई पर उनके प्यार की मिली जुली निशानी चमक रही थी...उसने उन ख़ास नोटों को अलग रख लिया निशानी के तोर पर और बाकी नोटों को समेट कर अलमारी में रख दिया...
अब दोनो को शाम का इंतजार था..और वो शाम कितनी कामुक होने वाली थी ये तो काजल को भी नही पता था..
दीवाली का दिन था इसलिए पूरे दिन घर में कोई ना कोई मेहमान या गली में रहने वाले लोग आते-जाते रहे...दीवाली की शुभकामनाए और मिठाई के साथ... काजल ने भी काफ़ी गिफ्ट और मिठाइयाँ ली और अपने रिश्तेदारों और पड़ोसियों के घर जाकर दे आई...ये सब करते-2 कब शाम हो गयी उसको भी पता नही चला..केशव घर पर ही था..सुबह से माँ की तबीयत ठीक नही लग रही थी इसलिए वो उनके साथ ही रुका हुआ था.
शाम को जब तक काजल घर पहुँची, डॉक्टर उनके घर से निकल रहा था..जिसे देखकर काजल घबरा गयी..वो भागती हुई उपर के कमरे में गयी, केशव अपनी माँ के पास बैठा था. पूछने पर पता चला की उन्हे साँस लेने मे तकलीफ़ हो रही है...शायद नजला जम गया है और उसकी वजह से उनके हार्ट पर भी ज़ोर पड़ रहा है..इसलिए डॉक्टर ने सलाह दी की इन्हे एक दिन के लिए हॉस्पिटल में एडमिट कर दो और नेबोलाइस करवा लो...साथ ही साथ हार्ट पर जो दबाव पड़ रहा है उसकी भी जाँच हो जाएगी...
प्रोसिज़र तो सिंपल था और सिर्फ़ एक ही दिन का था..पर मुसीबत ये थी की त्योहार का दिन था..पर माँ की तबीयत पहले है, इसलिए दोनो भाई बहन उसी वक़्त माँ को हॉस्पिटल ले आए...वैसे भी उनके पास अब पैसों की कमी तो थी ही नही ..माँ को एडमिट करवाया , केशव ने कहा की वो उनके साथ ही रुकेगा..और काजल को वापिस घर भेज दिया...और साथ ही साथ उसने सारिका को भी फोन करके बोल दिया की वो आज रात के लिए उसके घर पर ही रुक जाए, क्योंकि काजल को वो अकेला नही छोड़ना चाहता था.
काजल करीब 9 बजे घर वापिस पहुँची..और थोड़ी ही देर मे सारिका भी आ गयी..उसकी माँ छोड़ने आई थी उसको..दोनो ने मिल कर खाना खाया..
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काजल ने टाइम देखा, राणा और दूसरे जुआरियों के आने का टाइम होने वाला था...वो दुविधा में थी की क्या करे..उसने केशव को फोन किया, उसने काजल को निश्चिंत होकर खेलने की सलाह दी...माँ तो ठीक ही थी..और काजल के साथ सारिका भी थी, इसलिए केशव ने बिना डरे उसे आज भी खेलने के लिए कहा..क्योंकि वो अच्छी तरह से जानता था की आज दीवाली का दिन है, और अगर आज काजल की किस्मत ने साथ दिया तो काफ़ी पैसे जीत सकती है वो..काजल के मन में भी लालच था..पर पैसों का नही , किसी और चीज़ का..
खैर, दस बजे के करीब सभी आना शुरू हो गये..और आधे घंटे के अंदर-2 सभी वहाँ पर थे..और सभी अंदर ही अंदर ये सोचकर काफ़ी खुश थे की आज की रात काजल अकेली है घर पर और वो उनके साथ खेलेगी..वो मन ही मन उसके साथ कैसे मज़े लेंगे, ये सोचने के उपाय निकालने लगे..
आज सभी के पास काफ़ी पैसे थे..क्योंकि दीवाली का दिन था, इसलिए जुआ भी मोटा होने वाला था.
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सारिका को भी ये सब देखकर काफ़ी रोमांच का एहसास हो रहा था..पिछली बार भी उसे बड़ी उत्सुकतता थी की कैसे काजल इस खेल को खेलती है...आज वो उसके साथ पूरी रात यही रहने वाली थी, इसलिए पूरी गेम को देखकर वो भी कुछ नया सीखना चाहती थी...पर उसे क्या पता था की काजल किस तरह के खेल खेलती है..
काजल के कहने पर सारिका ने किचन संभाल ली और सबके लिए कुछ स्नेक्स का इंतज़ाम करने लगी..और बाकी सभी लोग टेबल के चारों तरफ बैठ गये और खेल शुरू कर दिया.
राणा तो कल काजल के हुस्न का दीदार कर ही चुका था..उसे पूरा नंगा देखकर...उसे चूस्कर...बस चुदाई की कमी रह गयी थी..वो ये बात भी जान चुका था की काजल अभी तक कुँवारी है..पर बेचारे को ये बात नही पता थी की कल रात ही केशव ने उसकी चुदाई करके उसे कली से फूल बना दिया है..
और बिल्लू और गणेश भी अपनी ललचाई हुई नज़रों से काजल के जिस्म को देख रहे थे..आज त्योहार का दिन था इसलिए उसने काफ़ी सेक्सी रेड कलर का टॉप पहना हुआ था..जिसमे से उसकी क्लीवेज साफ़ दिख रही थी
सारिका भी कम नही लग रही थी...उसने भी डोरी वाला येल्लो टॉप पहना था और स्लीवलेस होने की वजह से उसकी गोरी और सुडोल बाहें काफ़ी सेक्सी लग रही थी..नीचे की जीन्स मे उसकी फंसी हुई गांड , जिसे केशव ने मार-मारकर इतना टेंप्टिंग कर दिया था की हर लोंडे की नज़र उसके मोटे उभारों से पहले नीचे की फेलावट पर जाती थी..
कुल मिलाकर आज की रात दोनो सहेलियाँ कयामत ढा रही थी..
खेल शुरू हुआ..आज की रात राणा अकेला ही आया था..जीवन किसी बड़े क्लब में अपनी किस्मत आज़माने गया हुआ था..आख़िर दीवाली पर जुआ खेलने का मौका रोज-2 तो आता नही है ना..
राणा ने पत्ते बाँटे...और पहली बाजी शुरू हुई..सारिका भी तब तक सबके लिए कबाब तल कर ले आई और काजल की बगल मे बैठकर खेल को समझने की कोशिश करने लगी..
आज पहले ही तय हो चुका था की 500 की ब्लाइंड होगी, इसलिए सबने एक के बाद एक ब्लाइंड फेंकनी शुरू कर दी..4 ब्लाइंड चलने के बाद बिल्लू ने अपने पत्ते उठाए और उसने खुशी -2 दो हज़ार की चाल चल दी..
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उसकी चाल आते ही गणेश ने भी पत्ते उठा लिए और काफ़ी सोचने के बाद उसने भी चाल चल ही दी..
पर काजल ने अपने पत्ते नही उठाए और एक हज़ार की ब्लाइंड चल दी...और उसकी देखा देखी राणा ने भी हज़ार की ब्लाइंड चल दी..
अब दो लोग चाल पर थे और दो ब्लाइंड पर..
बिल्लू ने बड़े ही आराम से एक बार फिर से चाल को डबल किया और 4 हज़ार की चाल चल दी..गणेश के पास पेयर था 4 का..इसलिए उसकी फटने लगी थी...उसे पता चल गया की हो ना हो बिल्लू के पास 3 पत्तों वाला कुछ आया है...कलर या सीक़वेंस..इसलिए उसने पेक कर दिया ..
अब काजल ने अपने पत्ते उठा ही लिए...पर बड़े ही बेकार से थे वो...इसलिए उसने भी पेक कर दिया..
और वो इस पहली हार मे ही समझ चुकी थी की हर बार की तरह अभी उसका लक क्यो काम नही कर रहा ...क्योंकि उसने आज अंडरगार्मेंट्स पहने हुए थे...कल वो देख ही चुकी थी की अंदर के कपड़े उतारने के बाद ही उसका टोटका काम कर रहा था..इसलिए वो उठी और उपर के कमरे की तरफ चल दी..ये बोलकर की बस 1 मिनट में आई...
सारिका पीछे से बैठकर उन लोगो का खेल देखने लगी..
राणा ने जब देखा की काजल ने पेक कर दिया है तो उसकी रूचि भी खेल मे ख़त्म हो गयी और उसने अपने पत्ते उठा लिए...उसके पास 9 का पेयर आया था...पर फिर भी बिल्लू का कॉन्फिडेंस देखकर उसने शो माँग लिया..
बिल्लू ने अपने पत्ते दिखाए , उसके पास सीक़वेंस था..और वो भी 1,2,3 का..
उसने मुस्कुराते हुए सारे पैसे समेट लिए..करीब 15 हज़ार आए उसके पास..
तभी काजल भी वापिस आ गयी..और किसी ने तो नही पर राणा ने उसके हिलते हुए मुम्मे देखकर ये अंदाज़ा लगा ही लिया की वो ब्रा उतारकर आई है...वो भी राणा की आँखो मे देखकर मुस्कुराती हुई अपनी सीट पर बैठ गयी..
सारिका वापिस सोफे के हत्थे पर चड़कर बैठ गयी...और अचानक उसने नोट किया की वो काजल के गले में काफ़ी अंदर तक देख पा रही है...जबकि पहले ऐसा नही था..उसकी ब्रा गायब थी...
उसने काजल के कान मे फुसफुसाते हुए कहा : "तेरी ब्रा कहाँ गयी...सब सॉफ-2 दिख रहा है..''
काजल (धीरे से) : "वो मैने उतार दी...चुभ रही थी निगोडी..''
सारिका : "पर ये सब देख रहे हैं...राणा को देख ज़रा..तेरे बूब्स को कैसे घूर रहा है..''
काजल : "तभी तो उतारी है...ताकि ये घूर सके मुझे...''
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काजल के मुँह से ऐसी बेशर्मी भरी बात सुनकर सारिका चोंक गयी...वो बेचारी नही जानती थी की ये गेम आगे चलकर किस लेवल तक जाने वाली है...
अगली गेम शुरू हुई,और 3 ब्लाइंड के बाद इस बार काजल ने अपने पत्ते उठा लिए..और फिर उसने वो किया जिसकी उम्मीद राणा को तो थी पर और किसी को नही..उसने अपने पत्ते दाँये हाथ मे पकड़े हुए थे...और अचानक उसी हाथ को अपनी टॉप के गले से अंदर डालकर अपने मुम्मों पर रगड़ डाला और जब सभी उसकी इस हरकत को देखकर आँखे फाड़ने लगे तो वो बोली : "उफफफफ्फ़.... ये मच्छर भी ना....''
सारिका का तो मुँह खुला का खुला रह गया...काजल ने जिस बेशर्मी से अपनी गहरे गले की टॉप में हाथ डालकर अपने मुम्मो को रगड़ा था, सामने बैठे हर इंसान ने वो हरकत देखी थी...पहले तो वो ब्रा उतार आई और उसके बाद इतनी बेशर्मी से वो हाथ अंदर डालकर अपने बूब्स रगड़ रही थी जैसे उन्हे नोच डालेगी..
अब उसे क्या पता था की वो तो अपना टोटका बैठाने की कोशिश कर रही थी...अपने मुम्मों पर अपने पत्ते रगड़कर वो उनकी किस्मत बदल देना चाहती थी..और अपनी भी..
और उसके मुम्मों से रगड़ खाकर जैसे उन पत्तों की किस्मत सच मे बदल चुकी थी...उसके पास पान के पत्तों का कलर आया था..उसने मुस्कुराते हुए 2 हज़ार डाल दिए बीच में और चाल चल दी..और वो भी हल्के से अपनी चूत से रगड़कर ...जिसे राणा के अलावा किसी और ने नोट ही नही किया...बिल्लू और गणेश तो अभी तक उसके बिना ब्रा के मुम्मों के उपर लगे निप्पल के इंप्रेशन को देखकर सकते में थे...
राणा ने भी अपने पत्ते उठाए...और टोटके पर टोटका चलाते हुए उसने भी उतनी ही बेशर्मी से अपने लंड के उपर उन्हे रगड़ा और पत्ते देखे..
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उसके पास भी कलर आया था...और वो भी पान का...पर जाहिर सी बात थी , दोनो के नंबर्स अलग थे...और ये बात तो तब साबित होती जब दोनो का शो होता..
गणेश ने पत्ते उठाए और देखते ही पेक कर दिया..बिल्लू का भी यही हाल था...उसके पास भी सिर्फ़ इक्का आया था और दो छोटे पत्ते...सामने से दो चाल आ चुकी थी, इसलिए उसने भी पेक कर दिया..
अब बचे थे सिर्फ़ राणा और काजल...
राणा सोचने लगा की काश कल की ही तरह वो लोग आज भी अकेले में होते तो इतने नाटक ना करने पड़ रहे होते अभी तक..सीधा अपने वाले खेल में आ चुके होते दोनो..जिसमे जीतने के बाद काजल खुश होकर खुद ही अपने कपड़े उतार कर उसके साथ मज़े ले रही थी..
मज़े लेने के मूड में तो वो आज भी थी..और वो तो हमेशा से ही तैयार रहता था..पर बिल्लू और गणेश के सामने वो कैसे करे, यही पंगा था..और उपर से सारिका भी साथ मे थी ...ऐसे मे आज की रात कुछ भी कल जैसा होना मुश्किल सा लग रहा था उसे..
पर वो नही जानता था की काजल के दिमाग़ में क्या चल रहा है..पैसे जीतना आज काजल की मंशा नही थी..आज की रात तो वो कल की रात से भी ज़्यादा मज़े लेना चाहती थी..और वो भी सब के साथ..क्योंकि कल की ताज़ा चुदी चूत में एक बार फिर से खुजली होनी शुरू हो चुकी थी...और वो ये सोच रही थी की जब केशव के अकेले लंड ने उसे इतने मज़े दिए हैं तो इन तीनो के लंड मिलकर उसे कितना मज़ा देंगे..
इसलिए उसने अपनी योजना को अंजाम तक ले जाने के लिए अपने जलवे बिखेरने शुरू कर दिए..
और उसने हज़ार के 2 नोट लेकर एक बार फिर से अपनी टॉप के अंदर डाला और अच्छी तरह से घुमा कर उन्हे नीचे फेंक दिया..
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सारिका एक बार फिर से बेहोश होती-2 बची...
गणेश और बिल्लू भी समझ चुके थे की वो काजल का कोई टोटका है..क्योंकि ऐसे खेल के खिलाड़ी सब जानते हैं..और ये जानकार की काजल का टोटका इतना सेक्सी है , उनकी तो साँसे उपर की उपर और नीचे की नीचे रह गयी..
काजल बड़े ही कामुक तरीके से राणा को देखते हुए वो सब कर रही थी...इसलिए बिल्लू और गणेश को ये समझते भी देर नही लगी की कल उपर वाले कमरे में क्या-2 हुआ होगा...जब उनके सामने बैठकर ही काजल इतनी बेशर्मी दिखा रही है तो उपर उसने क्या नही किया होगा..
सारिका एक बार फिर से फुसफुसाई : "काजल, तू पागल हो गयी है क्या...ये क्या बेशर्मी है...कर क्या रही है तू...''
उसकी बात पास बैठे बिल्लू ने सुन ली, और बोला : "ये शायद इसका टोटका है...और ऐसे टोटके करने से बाजी जीती जाती है...क्यो राणा भाई, सही कहा ना मैने...''
और ये सुनकर तीनो बड़े ही भद्दे तरीके से ठहाका लगाकर हँसने लगे...
राणा : "हाँ बिल्लू, तूने बिल्कुल सही पकड़ा...और मैने कल उपर देखा था, काजल के ऐसे टोटकों की वजह से ही मैं पूरा नंगा हो गया था कल..''
सबने उसकी तरफ घूर कर देखा
राणा : "मेरा मतलब , मेरे सारे पैसे लूट लिए थे इसने...सच मे बड़े कमाल के टोटके होते हैं इसके...''
वो एक बार फिर से उसके मोटे-2 मुम्मों को घूरता हुआ बोला ..
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सारिका की तो कुछ समझ मे नही आ रहा था...वो सोच रही थी की जब इस बात का केशव को पता चलेगा तो वो कैसे रिएक्ट करेगा...उसकी बहन उसके दोस्तों के सामने कितनी बेशर्मी से पेश आ रही है..
और सारिका को ये बात पता नही थी की ऐसे टोटके अपनाने के लिए उसे केशव ने ही उकसाया था..
राणा की बारी आई...और वो तो था ही एक नंबर का हरामी..उसने भी 2 हज़ार रुपय उठाए और उन्हे अपने लंड से रगड़ने लगा...इतना रगड़ा की पेंट के नीचे से उसका उभार खड़ा होकर सॉफ दिखाई देने लगा...उसकी लंबाई का अंदाज़ा सॉफ लगाया जा सकता था..
बिल्लू और गणेश भी उसकी बेशर्मी पर एक दूसरे को आँख मारकर मज़े लेने लगे...
और काजल अगली चाल के लिए फिर से अपने मुम्मों पर नोट रगड़ने लगी..
पर इन सबके बीच सारिका की हालत खराब थी...उसे वैसे ही केशव की बड़ी याद आ रही थी..और अपने सामने राणा को इतनी बेशर्मी से अपने लंड को रगड़ते देखकर और फिर उसके लंड की लंबाई को देखकर उसके अंदर धुंवा सा उठने लगा था..चूत की भट्टी में कोयले सुलगने लग गये थे..वहाँ से आँच निकलनी शुरू हो गयी...और उसकी जांघों के बीच चिपचिपाहट महसूस होने लगी उसे..
अपने मुम्मों से रगड़ने के बाद काजल ने एक और डेयरिंग दिखाई और उन्ही पैसों को अपनी चूत वाले हिस्से से भी रगड़कर एक ही झटके में नीचे फेंक दिया...
उसका डबल अटैक था ये...मुम्मे और चूत की रगड़ाई एक साथ...