Posts: 224
Threads: 4
Likes Received: 131 in 90 posts
Likes Given: 8
Joined: Oct 2019
Reputation:
5
केशव मादरजात नंगा होकर सो रहा था...और उसका 8 इंच का लंड पूरा खड़ा होकर हुंकार रहा था..अब ये मॉर्निंग इरेक्शन था या फिर वो कोई सपना देखा रहा था, ये अलग बात थी.
पर सारिका की आँखो मे एक अजीब सी चमक आ गयी..वो तो वैसे भी उसके लंड की दीवानी थी और अभी भी चुदवाने के लिए ही आई थी..उसने केशव को ऐसी गहरी नींद मे सोते हुए आज तक नही देखा था..और ना ही कभी नंगा सोते हुए..वो हमेशा शॉर्ट्स और टी शर्ट पहन कर ही सोता था..
पर उसे क्या पता की कल रात को क्या-2 हुआ केशव के साथ...और अपनी बहन काजल के बारे मे सोचकर मूठ मारने के बाद उसने कपड़े पहनने की जहमत भी नही उठाई और ऐसे ही सो गया..ये भी बिना सोचे समझे की सुबह किसी ने देख लिया तो क्या सोचेगा..
सारिका के होंठ सूख गये उसके लंड को देखकर..पर नीचे के होंठ गीले हो गये..उसका एक हाथ अपनी चूत पर चला गया...और दूसरे से वो अपनी ब्रेस्ट को मसलने लगी...और धीरे-2 चलती हुई वो केशव के पलंग पर बैठ गयी..
इसी बीच काजल भी उपर आ चुकी थी...और दरवाजे के बाहर छुपकर वो उनकी रासलीला देख रही थी.
पर जब उसने अंदर देखा तो उसके होश ही उड़ गये...उसका भाई पलंग पर नंगा लेटा हुआ था..यानी सो रहा था...और उसका लंड बिल्कुल उपर की तरफ मुँह करके हुंकार रहा था...ये काजल की जिंदगी का पहला लंड था जो उसने अपनी आँखो से देखा था...और वो भी अपने खुद के भाई का...उसकी भी हालत सारिका जैसी हो गयी...उपर के होंठ सूख गये और नीचे के गीले हो गये.
Posts: 224
Threads: 4
Likes Received: 131 in 90 posts
Likes Given: 8
Joined: Oct 2019
Reputation:
5
काजल ने एकदम से हंसते हुए कहा : "इट्स ओके सारिका ..... ऐसे शरमाने की या डरने की कोई ज़रूरत नही है... मुझे केशव ने सब बता दिया है तुम दोनों के बारे में ...''
सारिका ने एकदम से अपना सिर चादर से बाहर निकाला...और केशव के चेहरे को घूरने लगी..
केशव : "अरे .... कल रात ही बात हुई थी तुम्हे लेकर...इसलिए बताना पड़ा...डोंट वरी ... दीदी से डरने की कोई बात नही है..''
काजल : "हाँ ...सारिका ....और मै किचन मे ही थी...जब तुम उपर आई...इसलिए मैने जब तक उपर आकर देखा की तुम क्या कर रही हो तो.....आधे से ज़्यादा मामला निपट चुका था....''
उसके चेहरे पर शरारत भरी मुस्कान थी..
उसकी बात सुनकर सारिका के साथ-2 केशव भी शरमा गया.
Posts: 224
Threads: 4
Likes Received: 131 in 90 posts
Likes Given: 8
Joined: Oct 2019
Reputation:
5
काजल : "अब जल्दी से बाकी का काम निपटा लो केशव ...और तैयार हो जाओ...हॉस्पिटल भी जाना है...में नीचे नाश्ता बना रही हू...''
इतना कहकर वो नीचे उतर गयी...उन दोनों को उसी हालत मे छोड़कर..
पर काजल ने नीचे उतरने के 5 मिनट बाद ही सारिका भी नीचे उतरी और काजल से बिना कुछ बोले बाहर निकल गयी.शायद उन्होंने काजल के घर पर रहते चुदाई के इरादे को त्याग दिया था
आधे घंटे बाद केशव भी तैयार होकर नीचे आ गया...और दोनो हॉस्पिटल के लिए निकल पड़े..
रास्ते मे दोनो के बीच सारिका वाले मामले को लेकर कोई बात नही हुई...बस नॉर्मल बातें होती रही..और जुए के बारे में भी बातें हुई.
शाम तक दोनो अपनी माँ को डिसचार्ज करवाकर घर ले आए...और उन्होने संभलकर उन्हे उपर वाले कमरे मे भी पहुँचा दिया..डॉक्टर्स के परामर्श के अनुसार अब उन्हे अगले 5 दीनो तक वो इंजेक्शन लगना था..आज का वो लगवा कर ही आए थे....इसलिए 8 बजते-2 काजल ने खाना भी बना दिया और उन्हे खाना खिला कर सुला भी दिया..
केशव बाहर गया हुआ था...काजल नीचे ड्रॉयिंग रूम मे बैठकर टीवी देख रही थी की बाहर की बेल बजी..
उसने दरवाजा खोला तो बाहर केशव अपने 2 दोस्तों के साथ खड़ा था.
केशव : "आ जा भाई ....अपना ही घर समझ .... ''
और काजल को उनका परिचय करवाते हुए बोला : "दीदी ...ये मेरे दोस्त है .... ये बिल्लू, इसको तो आप जानती ही हो.... और ये है गन्नू ...मतलब गणेश ...''
दोनो ने काजल को नमस्ते की और अंदर आकर बैठ गये.
दोनो भाई बहन ने पहले से डिसाईड कर लिया था की कैसे वो योजना के अनुसार खेलने के लिए मैदान में उतरेगी..
सो अंदर आते ही केशव शुरू हो गया : "दीदी ....अब आपके कहने पर ही में आज घर पर आकर खेल रहा हू...थोड़ा बहुत शोर शराबा हुआ तो आप बुरा मत मानना ..''
काजल : "अब तेरी दीवाली के दिनों मे जुआ खेलने की जिद्द है तो में क्या कर सकती हू ... जब तूने खेलना ही है तो घर पर ही खेल ना... माँ की तबीयत खराब हुई तो में अकेली कहाँ भागूँगी .तू घर पर रहेगा तो मुझे तसल्ली रहेगी..''
ये सब बातें वो अपनी बनाई योजना के अनुसार कर रहे थे..
उसके बाद वो तीनों वहीं टेबल के चारो तरफ बैठ गये...और पत्ते बाँटने लगे..
काजल भी केशव के पास जाकर बैठ गयी और बोली : "अब मैने बोर तो होना नही है....में भी तुम्हारे पास बैठकर ये खेल देखूँगी..''
केशव कुछ बोल पता, इससे पहले ही बिल्लू बोल पड़ा : "हां ...हां ..काजल ..क्यों नही ...ज़रूर बैठो ....''
उसकी आँखो की चमक बता रही थी की वो काजल को ऐसे पत्तो के खेल मे इंटरस्ट लेते देखकर कितना खुश हो रहा था...अब उसकी खुशी के पीछे मंशा क्या थी,ये तो वो ही जाने, पर उसकी बात सुनकर काजल भी हँसती हुई सी केशव के साथ बैठ गयी..
और फिर शुरू हुआ..जुआ.
Posts: 224
Threads: 4
Likes Received: 131 in 90 posts
Likes Given: 8
Joined: Oct 2019
Reputation:
5
जो आगे चलकर कितना मजेदार और कामुक होने वाला था, ये उनमें से कोई भी नही जानता था.
काजल सोफे के साइड मे हाथ रखने वाली जगह पर बैठी थी...केशव के कंधे पर हाथ रखकर...उसके उपर झुकी हुई सी..केशव को उसकी गर्म साँसे अपने कान और चेहरे पर सॉफ महसूस हो रही थी..
केशव ने पत्ते बाँटे..और सभी ने बूट के 100 रुपय बीच मे रख दिए..
और उसके बाद सभी ने 2 बार ब्लाइंड भी चली 100-100 की..
सबसे पहले गणेश ने अपने पत्ते उठा कर देखे..और देखने के साथ ही उसने 200 की चाल चल दी.
चाल देखते ही बिल्लू ने भी अपने पत्ते उठा कर देखे..पर देखने के साथ ही पैक भी कर दिया..
अब बारी थी केशव की
केशव ने मुड़कर काजल की तरफ देखा...उसने सिर हिला कर उसे इशारा किया और अगले ही पल केशव ने फिर से ब्लाइंड चल दी
Posts: 224
Threads: 4
Likes Received: 131 in 90 posts
Likes Given: 8
Joined: Oct 2019
Reputation:
5
उसकी ब्लेक ब्रा मे कसे हुए उसके दोनो मुम्मे किसी टेनिस बॉल्स की तरह अपने जाल मे फँसे हुए दिख गये उसे...उसने गहरी मुस्कान के साथ बिल्लू की तरफ देखा...वो भी शायद उस गहराई को देख चुका था...दोनों के चेहरों पर कुटिलता से भरी हँसी आ गयी..और आँखो ही आँखो मे उन्होने काजल की जवानी से भरी छातियों का गुणगान कर दिया..
अगली गेम शुरू हुई...इस बार दो ब्लाइंड चलने के बाद बिल्लू ने पत्ते देखे और पेक कर दिया..दो और ब्लाइंड चलने के बाद केशव ने पत्ते उठा लिए...वो अभी के लिए ज़्यादा रिस्क नही लेना चाहता था...पर उसके पास बड़े ही बेकार पत्ते आए...7, 3, 5.
उसने बिना शो माँगे ही पैक कर दिया...
गणेश ने फिर से हंसते हुए सारे पैसे उठा लिए.
केशव : "आज तो लगता है इसी का दिन है...दो गेम में ही डेड -दो हज़ार जीत गया...''
गणेश : "केशव भाई, ये तो वक़्त-2 की बात है...कल तुम्हारा दिन था...आज मेरा दिन है...और वैसे भी, अभी तो खेल शुरू हुआ है...शायद तुम जीत जाओ आगे चलकर...''
केशव ने मन मे सोचा 'वो तो होना ही है...एक बार काजल को आने दो बीच मे..फिर देखना, तुम्हारी जेब कैसे खाली करवाता हूँ मैं...''
अगला खेल शुरू हुआ..तभी केशव बोला : "मैं ज़रा बाथरूम होकर आता हू...तुम मेरे पत्ते काजल को बाँट दो...तब तक ये खेल लेगी...''
इसमे भला उन दोनो को क्या परेशानी हो सकती थी..उनके तो चेहरे और भी ज़्यादा चमक उठे..
केशव उठकर उपर चला गया..
काजल सोफे पर बैठी..उसका दिल अब जोरो से धड़क रहा था..गणेश ने गड्डी को काजल की तरफ बढ़ाया .ताकि वो उसे काट सके..जैसे ही काजल ने गड्डी पर हाथ रखा, गणेश ने उसके हाथ के उपर अपना हाथ रखकर उसे दबोच लिया..
गणेश : "अर्रे...अर्रे ....ऐसे नही....इतने पत्ते मत निकालो...थोड़ा आराम से...आधे से कम काटो...आराम से...''
और ये सब कहते-2 वो काजल के नर्म और मुलायम हाथ को अपने कठोर हाथों से सहला भी रहा था..
काजल भी उसके ऐसे स्पर्श के महसूस करके कसमसा उठी..उसके शरीर के रोँये खड़े हो गये...क्योंकि आज तक उसे किसी ने इस तरह से छुआ नही था..कल अपने भाई का स्पर्श और अब इस गणेश का...दो दिन मे दो मर्दों के शरीर ने उसे छुआ था..ये एक कुँवारी लड़की के लिए एक शॉक से कम नही होता..
काजल ने थोड़े से ही पत्ते उठाए और ताश को काट कर नीचे रख दिया.गणेश ने पत्ते बाँटे.
बूट के बाद सभी ने 3-3 बार ब्लाइंड चली..काजल वैसे तो निश्चिन्त ही थी, क्योंकि उसे पता था की उसके पत्ते अच्छे ही निकलेंगे..पर एक डर भी लग रहा था..की कहीं कुछ गड़बड़ ना हो जाए...
Posts: 224
Threads: 4
Likes Received: 131 in 90 posts
Likes Given: 8
Joined: Oct 2019
Reputation:
5
और काजल के पत्ते देखकर वो ज़ोर-2 से हँसने लगा..और सारे पैसे बीच मे से उठा कर अपनी तरफ कर लिए...बिल्लू भी काजल के पत्ते देखकर मुस्कुरा दिया और बोला : "अभी तुम्हे सही से खेलना आता नही है काजल...या फिर तुम ब्लफ खेल रही थी...''
तब तक उपर से केशव भी आ गया...उसने भी बीच मे पड़े काजल और गणेश के पत्ते देखे...उसे तो विश्वास ही नही हो रहा था की काजल अपनी पहली ही गेम में हार गयी...उसने तो क्या-2 सोचा हुआ था..पर ऐसे काजल को हारता हुआ देखकर उसे अपनी सारी प्लानिंग फैल सी होती दिख रही थी..
केशव : "अरे नही....ब्लूफ भला ये क्या जाने...हम दोनो बस घर बैठकर थोड़ा बहुत खेल लेते हैं, बस वही आता है इसे...चलो, एक बार और बाँटो पत्ते...देखते हैं की इसकी कैसी किस्मत है ...''
काजल के साथ एक बार और खेलने की बात सुनकर बिल्लू और गणेश मुस्कुरा दिए...पर काजल ने धीरे से केशव के कान मे कहा : "नही केशव...तुम ही खेलो...मुझे नही लगता की मैं कल की तरह जीत पाऊँगी ..वो शायद कोई इत्तेफ़ाक था...ऐसे ही बेकार मे अपने पैसे मत बर्बाद करो...''
केशव फुसफुसाया : "नही दीदी....एक और गेम खेलो...शायद इस बार अच्छे पत्ते आ जाए..प्लीज़ ...मेरे कहने पर...''
और केशव के ज़ोर देने पर काजल फिर से खेलने लगी.
उसके निप्पल का साइज़ और भी ज़्यादा बड़ चुका था...शायद परेशानी में भी लड़कियो के निप्पल खड़े हो जाते हैं, जैसे उत्तेजना के वक़्त होते हैं...
वो दोनो हरामी तो उसकी छातियों पर लगे छोटे-2 बल्ब देखकर अपने लंड सहला रहे थे...केशव का ध्यान इस बात पर नही था अभी...उसे तो चिंता सता रही थी की अगली गेम वो जीतेगा या नही..
पत्ते फिर से बाँटे गये...बूट के बाद 2-2 बार ब्लाइंड भी चली गयी...बिल्लू ने फिर से अपने पत्ते उठाए...और पहली बार वो अपने पत्ते देखकर खुश हुआ...और उसने 200 की चाल चल दी..
बिल्लू के बाद गणेश ने भी अपने पत्ते देखे और चाल चल दी..
केशव ने काजल को भी अपने पत्ते उठाने के लिए कहा..
काजल ने काँपते हाथों से एक-2 करके अपने पत्ते उठाए..
पहला 7 नंबर था..
दूसरा पत्ता 9 नंबर था...और अभी तक के दोनो पत्ते हुक्म के थे..
केशव मन ही मन खुश हो रहा था...उसे तो जैसे पूरा विश्वास था की इस बार या तो 8 आएगा, जिसकी वजह से 7,8,9 का सीक़वेंस बन जाएगा...या फिर एक और हुक्म का पत्ता आएगा जिसकी वजह से कलर बन सकेगा...अगर दोनो मे से कुछ भी नही आया तो पेयर बनाने के लिए 7 या 9 में से कुछ भी आ जाएगा..
पर जैसे ही काजल का तीसरा पत्ता देखा, उसका दिल धक से रह गया..वो ईंट का 4 था..
Posts: 224
Threads: 4
Likes Received: 131 in 90 posts
Likes Given: 8
Joined: Oct 2019
Reputation:
5
ये तो हद ही हो गयी...ऐसे बेकार पत्ते तो उसके पास भी नही आते थे...और ये अब काजल के पास आ रहे हैं...ऐसा कैसे हो सकता है...क्यों कल की तरह काजल के पास अच्छे पत्ते नही आ रहे...क्यों वो हार रही है...
उसने अपने दाँत पीस लिए और काजल को पेक करने के लिए कहा..
काजल ने पत्ते फेंक दिए..और केशव से धीरे से बोली : "मैने कहा था ना...कल शायद कोई इत्तेफ़ाक था...तुम बेकार मे मुझसे खिलवा रहे हो और हार भी रहे हो...''
और इतना कहकर वो भागती हुई सी किचन मे चली गयी...ये कहकर की चाय बना कर लाती हूँ सबके लिए..
केशव कुछ नही बोल पाया..
इसी बीच बिल्लू और गणेश चाल पर चाल चल रहे थे...दोनो ही झुकने को तैयार नही थे...केशव भी समझ गया की दोनो के पास अच्छे पत्ते आए होंगे...
बीच मे लगभग 8 हज़ार रुपय इकट्ठे हो चुके थे...आख़िर मे जाकर गणेश ने शो माँगा..बिल्लू ने अपने पत्ते दिखाए...उसके पास सीक़वेंस आया था..5,6,7
और बिल्लू के पास कलर था, ईंट का..उसने अपना माथा पीट लिया...वो जीते हुए पैसो के अलावा अपनी जेब से भी 3 हज़ार हार चुका था..
बिल्लू ने हंसते हुए सारे पैसे समेत लिए..
बिल्लू : "हा हा हा ...सो सुनार की और एक लोहार की ...''
केशव बोला : "मैं ज़रा काजल को देखकर आता हू, उसे शायद लग रहा है की उसकी वजह से मैं हार गया...''
बिल्लू : "हाँ भाई...जाओ ...मना कर लाओ उसको ...ऐसे दिल छोटा नही करते....मैं भी तो इतनी गेम हारने के बाद जीता हूँ ..वो भी जीतेगी..जाओ बुला लाओ उसको...तब तक हम इंतजार करते है...''
केशव भागकर किचन मे गया...काजल रुंआसी सी होकर चाय बना रही थी..
केशव : "क्या दीदी...आप भी ना....ऐसे अपना मूड मत खराब करो...''
काजल एक दम से रो पड़ी और केशव से लिपट गयी : "मैने कहा था ना, मुझसे नही होगा ये...तुमने बेकार मे अपने इतने पैसे बर्बाद किए मेरी वजह से...ऐसे ही चलता रहा तो कल वाले सारे पैसे हार जाओगे...माँ का इलाज कैसे करवाएँगे...''
केशव उसकी पीठ सहलाता हुआ बोला : "ऐसा मत सोचो दीदी ....चलो चुप हो जाओ...कोई ना कोई बात तो ज़रूर है...मेरा अंदाज़ा खाली नही जाता ऐसे...''
Posts: 224
Threads: 4
Likes Received: 131 in 90 posts
Likes Given: 8
Joined: Oct 2019
Reputation:
5
ये तो हद ही हो गयी...ऐसे बेकार पत्ते तो उसके पास भी नही आते थे...और ये अब काजल के पास आ रहे हैं...ऐसा कैसे हो सकता है...क्यों कल की तरह काजल के पास अच्छे पत्ते नही आ रहे...क्यों वो हार रही है...
उसने अपने दाँत पीस लिए और काजल को पेक करने के लिए कहा..
काजल ने पत्ते फेंक दिए..और केशव से धीरे से बोली : "मैने कहा था ना...कल शायद कोई इत्तेफ़ाक था...तुम बेकार मे मुझसे खिलवा रहे हो और हार भी रहे हो...''
और इतना कहकर वो भागती हुई सी किचन मे चली गयी...ये कहकर की चाय बना कर लाती हूँ सबके लिए..
केशव कुछ नही बोल पाया..
इसी बीच बिल्लू और गणेश चाल पर चाल चल रहे थे...दोनो ही झुकने को तैयार नही थे...केशव भी समझ गया की दोनो के पास अच्छे पत्ते आए होंगे...
बीच मे लगभग 8 हज़ार रुपय इकट्ठे हो चुके थे...आख़िर मे जाकर गणेश ने शो माँगा..बिल्लू ने अपने पत्ते दिखाए...उसके पास सीक़वेंस आया था..5,6,7
और बिल्लू के पास कलर था, ईंट का..उसने अपना माथा पीट लिया...वो जीते हुए पैसो के अलावा अपनी जेब से भी 3 हज़ार हार चुका था..
बिल्लू ने हंसते हुए सारे पैसे समेत लिए..
बिल्लू : "हा हा हा ...सो सुनार की और एक लोहार की ...''
केशव बोला : "मैं ज़रा काजल को देखकर आता हू, उसे शायद लग रहा है की उसकी वजह से मैं हार गया...''
Posts: 224
Threads: 4
Likes Received: 131 in 90 posts
Likes Given: 8
Joined: Oct 2019
Reputation:
5
बिल्लू : "हाँ भाई...जाओ ...मना कर लाओ उसको ...ऐसे दिल छोटा नही करते....मैं भी तो इतनी गेम हारने के बाद जीता हूँ ..वो भी जीतेगी..जाओ बुला लाओ उसको...तब तक हम इंतजार करते है...''
केशव भागकर किचन मे गया...काजल रुंआसी सी होकर चाय बना रही थी..
केशव : "क्या दीदी...आप भी ना....ऐसे अपना मूड मत खराब करो...''
काजल एक दम से रो पड़ी और केशव से लिपट गयी : "मैने कहा था ना, मुझसे नही होगा ये...तुमने बेकार मे अपने इतने पैसे बर्बाद किए मेरी वजह से...ऐसे ही चलता रहा तो कल वाले सारे पैसे हार जाओगे...माँ का इलाज कैसे करवाएँगे...''
केशव उसकी पीठ सहलाता हुआ बोला : "ऐसा मत सोचो दीदी ....चलो चुप हो जाओ...कोई ना कोई बात तो ज़रूर है...मेरा अंदाज़ा खाली नही जाता ऐसे...''
और फिर कुछ देर चुप रहकर वो बोला : "दीदी...ये टोटके बाजी वाला खेल होता है...अगर तुम जीत रहे हो तो तुमने क्या पहना था ये याद रखो..किस सीट पर बैठे थे वो याद रखो....''
काजल : "मतलब ??"
केशव : "मतलब ये की तुम शायद उन्ही चीज़ो की वजह से जीत रही थी जो उस वक़्त वहाँ मोजूद थी...जैसे तुम्हारे कपड़े...तुमने कल रात को अपना नाइट सूट पहना हुआ था..वही पहन कर आओ...शायद उसकी वजह से तुम जीत रही थी कल...''
काजल : "तू पागल हो गया है...तेरे सामने अलग बात थी..पर इन दोनो के सामने मैं नाइट सूट क्यो पहनू ....नही मैं नही पहनने वाली....मुझसे नही होगा..''
अब भला वो अपने भाई से क्या बोलती की वो नाइट सूट क्यो नही पहनना चाहती..उसका गला इतना चोडा है की उसकी क्लीवेज साफ दिखाई देती है उसमे...और उसकी कसी हुई जांघों की बनावट भी उभरकर आती है उसमे क्योंकि उसका पायज़ामा काफ़ी टाइट है...
केशव : "दीदी ...आप समझने की कोशिश करो...मैने कहा ना, इनसे घबराने की ज़रूरत नही है...इन्हे भी अपना भाई समझो...जाओ जल्दी से पहन कर आओ...मैं चाय लेकर जाता हुआ अंदर...''
Posts: 224
Threads: 4
Likes Received: 131 in 90 posts
Likes Given: 8
Joined: Oct 2019
Reputation:
5
सबने बूट के बाद 3-3 ब्लाइंड भी चल दी..
अगली ब्लाइंड की बारी काजल की थी...केशव ने 100 के बदले सीधा 500 की ब्लाइंड चल दी..
हैरान होते हुए बिल्लू ने भी 500 की ब्लाइंड चल दी..
पर गणेश इस बार डर सा गया...उसने अपने पत्ते उठा कर देखे...10 नंबर था उसका सबसे बड़ा...उसने बुरा सा मुँह बनाते हुए पॅक कर दिया.
केशव ने फिर से 500 की ब्लाइंड चली..अब तो बिल्लू ने भी अपने पत्ते उठा लिए...उसके पास सबसे बड़ा पत्ता बादशाह था...उसने रिस्क लेना सही नही समझा और पेक कर दिया..
उसके पेक करते ही केशव खुशी से चिल्ला उठा : "देखा काजल, मैने कहा था...आप जीत गयी...''
पैसे भले ही ज़्यादा नही आए थे...पर पहली जीत थी वो काजल की, दोनों मन ही मन खुश हो गए की उनका टोटका काम कर गया
अब तो काजल भी केशव की कपड़े बदलने वाली बात को सही मान रही थी, उसने कल भी यही कपड़े पहने थे और जीत रही थी...और अभी से पहले दूसरे कपड़े मे वो हार रही थी, पर कल वाले कपड़े पहनते ही वो फिर से जीत गयी...
केशव ने बीच मे रखे सारे पैसे अपनी तरफ खिसका लिए..
और साथ ही साथ सारे पत्ते भी उठा कर वापिस गड्डी में लगा दिए..अभी तक किसी ने भी काजल के पत्ते देखे नही क्योंकि सामने से शो ही नही माँगा गया था..
केशव ने काजल के पत्ते उठाए और गड्डी में डालने से पहले उन्हे देखा.
वो थे 2,5, 7
इतने छोटे पत्ते और वो भी बिना कलर के...उसने उपर वाले का शुक्र मनाया की सामने से किसी ने शो नही माँगा , वरना ये गेम भी वो हार जाते...क्योंकि उसे पूरा विश्वास था की दोनो में से किसी ना किसी के पत्ते तो उससे बड़े ही होते...
Posts: 224
Threads: 4
Likes Received: 131 in 90 posts
Likes Given: 8
Joined: Oct 2019
Reputation:
5
पर ऐसा क्यों हुआ....वो तो समझ रहा था की काजल के कपड़े बदल लेने के बाद वो जीतेगा ...पर उसका ये टोटका काम क्यो नही आया...ये उसकी समझ में नहीं आ रहा था .
उसने मन ही मन कुछ सोच लिया और अगली गेम शुरू हुई.
और पत्ते बाँटने के बाद 2-2 ब्लाइंड चली गयी , पर इस बार केशव ने तीसरी ब्लाइंड चलने से पहले ही काजल के पत्ते उठा कर देख लिए.
काजल के पास थे 9,गुलाम और बादशाह
वो भी बिना कलर के..
पर फिर भी उसने रिस्क लेते हुए 200 की चाल चल दी.
गणेश : "क्या हुआ केशव...पिछली बार तो 500 की ब्लाइंड चल रहा था...और अब जीतने के बाद 100 से आगे ही नही बड़ा...सीधा चाल चल दी...''
केशव कुछ नही बोला...वो तो अपनी केल्कुलेशन मे लगा हुआ था.
पर चाल बीच मे आ चुकी थी, इसलिए गणेश ने अपने पत्ते उठा कर देखे...और देखने के साथ ही चाल चल दी.
बिल्लू ने अपने पत्ते देखे और उसने भी मंद-2 मुस्कुराते हुए चाल चल दी.
केशव ने तो ब्लफ खेला था..उसके पास वैसे भी चाल चलने लायक पत्ते नही थे...उसने फ़ौरन पेक कर दिया..
अब खेल शुरू हुआ बिल्लू और गणेश के बीच...दोनो चाल पर चाल चल रहे थे...और आख़िर मे जब बीच मे लगभग 6 हज़ार रुपय इकट्ठे हो गये तो बिल्लू ने शो माँग लिया...
गणेश ने अपने पत्ते सामने फेंके..
वो थे 3,4,5 की सीक़वेंस..
उसे देखते ही बिल्लू ठहाका लगाकर हंस दिया...उसने अपने पत्ते सामने फेंक दिए
उसके पास थे 9,10,11 की सीक़वेंस.
Posts: 224
Threads: 4
Likes Received: 131 in 90 posts
Likes Given: 8
Joined: Oct 2019
Reputation:
5
वो जैसे ही सारे पैसे अपनी तरफ करने लगा, गणेश ने रोक दिया और बोला : "मेरे पत्ते दोबारा देख भाई...इतना खुश मत हो अभी...''
बिल्लू और केशव ने फिर से गणेश के पत्तो की तरफ देखा..वो थे तो 3,4,5 पर साथ ही साथ वो कलर मे भी थे...लाल पान का कलर..यानी प्योर सीक़वेंस.
बिल्लू बुदबुदाया : "साला...हरामी...आज तो इसकी किस्मत अच्छी है..''
और अब ठहाका लगाने की बारी गणेश की थी...उसने सारे पैसे बीच में से अपनी तरफ खिसका लिए.
अगली गेम शुरू होने को ही थी की केशव बोल पड़ा : "यार...अभी और रहने देते हैं...माँ को दवाई भी देनी है और उन्हे इंजेक्शन भी लगाना है...बाकी कल खेलेंगे..''
काजल बोलने ही वाली थी की दवाई और इंजेक्शन तो दे ही चुके हैं...पर केशव ने उसे इशारे से चुप करवा दिया.
अब वो दोनो भी क्या बोल सकते थे...मन मसोस कर दोनो वहाँ से चले गये.अगले दिन आने का वादा करके
उनके जाते ही काजल बोली : "तुमने ऐसा क्यो बोला...माँ को दवाई और इंजेक्शन तो दे ही चुके हो..और हम एक गेम भी तो जीत ही चुके थे..''
केशव : "दीदी...वो गेम जो हमने जीती थी, उसमे पत्ते बड़े ही बेकार आए थे...वो तो शुक्र है की उन दोनो ने भी पेक कर दिया, वरना वो गेम भी हम हार जाते...''
काजल : "पर तुमने तो कहा था की कल वाले कपड़े पहन कर आओ, तो जीत जाएँगे...मैने तो पहले ही कहा था की ये सब तुक्का था...कल और बात थी...आज खेलने में सब सामने आ गया...''
केशव उसकी बाते सुनता रहा...और कुछ देर चुप रहने के बाद बोला : "दीदी .... वो .....आपने ये कल वाले ही कपड़े पहने है ना..''